
Posted by LUCKY SONKAR
Uttar Pradesh
29-11-2019 12:10 PM
lucky ji yeh kisam par nirbhar karta hai kripya aap btaye ke aapne konsi kisam ki bijai ki hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad

Posted by असरफ बेग
Chattisgarh
29-11-2019 12:07 PM
असरफ बेग जी इसके लिए आप कार्बेन्डाजिम@4 ग्राम को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद

Posted by कृष्णा कुमार
Bihar
29-11-2019 12:00 PM
कृष्णा जी एक बीघा में यूरिया 81.25 किलो,एस एस पी 93 किलो,म्यूरेट ऑफ पोटाश 12.5 किलो,की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी नाइट्रोजन को पहली सिंचाई के समय डालें
Posted by Harpreet batth
Punjab
29-11-2019 11:59 AM
harpreet ji growth de layi tuc hoshi@400ml nu prati acre de hisab nal spray karo.dhanwad
Posted by Shyam Lal Bishnoi
Rajasthan
29-11-2019 11:55 AM
कृपया आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by Shyam Lal Bishnoi
Rajasthan
29-11-2019 11:53 AM
कृपया आप प्रेग्नेंट दवाई के साल्ट का नाम बताये या इसके लेबल की फोटो भेजे ताकि आपको उसके हिसाब से जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by Shyam Lal Bishnoi
Rajasthan
29-11-2019 11:50 AM
श्याम जी कृपया आप पैनलिन दवा का साल्ट बताये या इसके लेबल की फोटो भेजे ताकि आपको उसके हिसाब से आपको जानकारी दी जा सके धन्यवाद

Posted by Harpreet Sandhu
Punjab
29-11-2019 11:45 AM
ਤੁਸੀ ਉਸਦੇ ਥਨਾ ਨੂੰ ਚੰਗੀ ਤ੍ਰਾਹ ਖਾਲੀ ਕਰ ਦਿਓ ਅਤੇ ਓਹਨਾ ਵਿਚ Mammitel tube ਟਿਊਬ ਚੜਾ ਦਿਓ, ਬਾਕੀ ਉਸ ਥਨ ਦੇ ਚੱਲਣ ਦਾ ਸਹੀ ਪਤਾ ਸੂਣ ਤੋਂ ਬਾਦ ਲਗ ਜਾਵੇਗਾ
Posted by Munna kumar Mehta
Jharkhand
29-11-2019 11:43 AM
श्याम जी कृपया आप पैनलिन दवा का साल्ट बताये या इसके लेबल की फोटो भेजे ताकि आपको उसके हिसाब से आपको जानकारी दी जा सके धन्यवाद

Posted by parvinder singh
Punjab
29-11-2019 11:41 AM
parvinder ji kirpa karke isdi photo bhejo ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake,dhanwad

Posted by parvinder singh
Punjab
29-11-2019 11:36 AM
parvinder ji kanak nu total 110 kilo khaad paindi hai jisnu tuc 2-3 hisseya vich vand ke khet vich pa sakde ho. isto ilava DAP @50-55 kilo prati acre de hisab nal varti jandi hai.
Posted by Harvinder singh
Uttar Pradesh
29-11-2019 11:33 AM
सिंचित क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 60 किलो (यूरिया 130 किलो), फासफोरस 24 किलो (एस एस पी 150 किलो), पोटाश 12 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 20 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी नाइट्रोजन को पहली सिंचाई के समय डालें
बारानी क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 24 क.... (Read More)
सिंचित क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 60 किलो (यूरिया 130 किलो), फासफोरस 24 किलो (एस एस पी 150 किलो), पोटाश 12 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 20 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी नाइट्रोजन को पहली सिंचाई के समय डालें
बारानी क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 24 किलो (यूरिया 52 किलो), फासफोरस 12 किलो (एस एस पी 75 किलो), पोटाश 8 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 15 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोज, फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें
सिंचित क्षेत्रों में पिछेती बिजाई के लिए, नाइट्रोजन 50 किलो (यूरिया 110 किलो), फासफोरस 12 किलो (एस एस पी 75 किलो), पोटाश 16 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 27 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन की दो तिहाई मात्रा बिजाई के 35-40 दिनों के बाद डालें
यह पाया गया है कि जिंक सल्फेट 10 किलो प्रति एकड़ में डालने से उपज में वृद्धि होती है जिंक की कमी को पूरा करने के लिए जिंक सल्फेट 0.5 प्रतिशत की फोलियर स्प्रे करें 15 दिनों के अंतराल पर दो से तीन स्प्रे करें
अच्छी शाखाएं और उपज के लिए 19:19:19 घुलनशील खादें 5 ग्राम + स्टिकर 0.5 मि.ली. को प्रति लीटर पानी में मिलाकर बिजाई के 30 दिनों के बाद स्प्रे करें

Posted by Vinay Singh
Uttar Pradesh
29-11-2019 11:31 AM
Vinay ji aap layer farming ki training lene ke liye apne nazdiki Krishi vigyan kehdar se sampark kr skte hai, aap waha jakar apna Traning wala farm bhar aaye jab waha training hogi too woh apko phone krke bta denge, traning lene ke liye aap Krishi Vigyan Kendra, Deendayal Research Institute, Lal Bahadur Shastri KVK,
Gopalgram, P.O. - Durgonwa
Distt.- Gonda - (U.P.)
INDIA, PIN - 271 125
Tel. No.: +91 9451735814 se sampark kr skte hai.

Posted by मूलाराम
Rajasthan
29-11-2019 11:27 AM
मूलाराम जी आप इसके ऊपर quinalphos @4ml को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें और अच्छी वृद्धि के लिए आप इसके ऊपर NPK 130045 @1 किलो को 150 लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद

Posted by Vinay Singh
Uttar Pradesh
29-11-2019 11:26 AM
Vinay ji kripya aap apna swal vistar se pushen ki aap kya jankari lena chahte hai tan jo apko sahi jankari di jaa skee.
Posted by Krishna Kushwaha
Uttar Pradesh
29-11-2019 11:25 AM
usko aap turant nazdiki doctor se janch krwayen jisse uski janch krke sahi ilagg kiya ja skee.

Posted by gagandeep singh
Punjab
29-11-2019 11:23 AM
tuci uss nu pett de kiria lai Flukarid-Ds bolus deo ate Agrimin powder 50-50gm swere sham deo, baki usdi akhan nu fatkadi de pani nal saff kr deya kro ji, iss nal frak paa jawega.
Posted by Jalbhart patel
Chattisgarh
29-11-2019 11:22 AM
Jalbhart ji, ap is keet ki roktham ke liye isme quinalphos @ 4 ml prati litre pani ke hisaab se spray kar sakte hain, dhanywad
Posted by Shamsher Sharma
Himachal Pradesh
29-11-2019 11:14 AM
शमशेर शर्मा जी आप भारत भूषण जी के साथ इस नंबर 9412568747 पर संम्पर्क कर सकते हैं। धन्यवाद
Posted by ਹਰਵਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਬਰਾੜ
Punjab
29-11-2019 11:12 AM
ehh cross nasal di cow hai, isda dudh isde parents de milk record te nirbhar krda hai, kyuki iss vich ehh v nirbhar krda hai ki ehh kine milk record wali nasal nal cross hoi hai ..

Posted by vikas kumar
Haryana
29-11-2019 11:09 AM
विकास जी अभी आप गेंहू और सब्जियां जैसे चुकन्दर, शलगम, फूलगोभी, टमाटर, काली सरसों के बीज, मूली, पालक, पत्ता गोभी, शिमला मिर्च, लहसुन, प्याज, मटर, धनिया की बिजाई कर सकते है धन्यवाद

Posted by sukhjinder Brar
Punjab
29-11-2019 11:06 AM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਕਣਕ ਵਿਚ ਸਿਫਾਰਿਸ਼ ਮਾਤਰਾ ਵਿਚ ਖਾਦਾਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰੋ ਕਣਕ ਵਿੱਚ ਕੁੱਲ 110kg ਕਿਲੋ ਯੂਰੀਆ ਪਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਇਸ ਨੂੰ ਤੁਸੀਂ 2-3 ਹਿੱਸਿਆਂ ਵਿੱਚ ਵੰਡ ਕੇ ਪਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਕਣਕ ਵਿੱਚ DAP@55kg ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਪਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਤੁਸੀਂ ਇੱਕ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਡੀ ਏ ਪੀ ਦਾ ਇੱਕ ਗੱਟਾ ਪਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੇਕਰ SSP ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰ ਰਹੇ ਹੋ ਤਾਂ SSP@150kg ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਵਰਤ ਸਕਦੇ ਹ.... (Read More)
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਕਣਕ ਵਿਚ ਸਿਫਾਰਿਸ਼ ਮਾਤਰਾ ਵਿਚ ਖਾਦਾਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰੋ ਕਣਕ ਵਿੱਚ ਕੁੱਲ 110kg ਕਿਲੋ ਯੂਰੀਆ ਪਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਇਸ ਨੂੰ ਤੁਸੀਂ 2-3 ਹਿੱਸਿਆਂ ਵਿੱਚ ਵੰਡ ਕੇ ਪਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਕਣਕ ਵਿੱਚ DAP@55kg ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਪਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਤੁਸੀਂ ਇੱਕ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਡੀ ਏ ਪੀ ਦਾ ਇੱਕ ਗੱਟਾ ਪਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੇਕਰ SSP ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰ ਰਹੇ ਹੋ ਤਾਂ SSP@150kg ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਵਰਤ ਸਕਦੇ ਹੋ ਡੀ ਏ ਪੀ ਨੂੰ ਕਣਕ ਦੇ ਬੀਜ ਨਾਲ ਮਿਲਾ ਕੇ ਬੀਜ ਦਿਓ ਇਸ ਢੰਗ ਨਾਲ ਬੀਜ ਦੇ ਨਾਲ SSP ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਨਹੀਂ ਤਾਂ ਕਣਕ ਦੇ ਲਈ ਜ਼ਮੀਨ ਤਿਆਰ ਕਰਦੇ ਸਮੇਂ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਛਿੱਟਾ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ ਡੀ ਏ ਪੀ ਅਤੇ ਐੱਸ ਐੱਸ ਪੀ ਦੇ ਵਿੱਚੋਂ ਕਿਸੇ ਇੱਕ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰਨੀ ਹੈ, ਜੇਕਰ ਜ਼ਮੀਨ ਵਿੱਚ ਪੋਟਾਸ਼ ਦੀ ਕਮੀ ਹੈ ਤਾਂ ਪੋਟਾਸ਼@20kg ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਵਰਤ ਸਕਦੇ ਹੋ

Posted by sukhjinder Brar
Punjab
29-11-2019 11:03 AM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਕਣਕ ਵਿਚ ਸਿਫਾਰਿਸ਼ ਮਾਤਰਾ ਵਿਚ ਖਾਦਾਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰੋ ਕਣਕ ਵਿੱਚ ਕੁੱਲ 110kg ਕਿਲੋ ਯੂਰੀਆ ਪਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਇਸ ਨੂੰ ਤੁਸੀਂ 2-3 ਹਿੱਸਿਆਂ ਵਿੱਚ ਵੰਡ ਕੇ ਪਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਕਣਕ ਵਿੱਚ DAP@55kg ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਪਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਤੁਸੀਂ ਇੱਕ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਡੀ ਏ ਪੀ ਦਾ ਇੱਕ ਗੱਟਾ ਪਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੇਕਰ SSP ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰ ਰਹੇ ਹੋ ਤਾਂ SSP@150kg ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਵਰਤ ਸਕਦੇ ਹ.... (Read More)
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਕਣਕ ਵਿਚ ਸਿਫਾਰਿਸ਼ ਮਾਤਰਾ ਵਿਚ ਖਾਦਾਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰੋ ਕਣਕ ਵਿੱਚ ਕੁੱਲ 110kg ਕਿਲੋ ਯੂਰੀਆ ਪਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਇਸ ਨੂੰ ਤੁਸੀਂ 2-3 ਹਿੱਸਿਆਂ ਵਿੱਚ ਵੰਡ ਕੇ ਪਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਕਣਕ ਵਿੱਚ DAP@55kg ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਪਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਤੁਸੀਂ ਇੱਕ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਡੀ ਏ ਪੀ ਦਾ ਇੱਕ ਗੱਟਾ ਪਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੇਕਰ SSP ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰ ਰਹੇ ਹੋ ਤਾਂ SSP@150kg ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਵਰਤ ਸਕਦੇ ਹੋ ਡੀ ਏ ਪੀ ਨੂੰ ਕਣਕ ਦੇ ਬੀਜ ਨਾਲ ਮਿਲਾ ਕੇ ਬੀਜ ਦਿਓ ਇਸ ਢੰਗ ਨਾਲ ਬੀਜ ਦੇ ਨਾਲ SSP ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਨਹੀਂ ਤਾਂ ਕਣਕ ਦੇ ਲਈ ਜ਼ਮੀਨ ਤਿਆਰ ਕਰਦੇ ਸਮੇਂ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਛਿੱਟਾ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ ਡੀ ਏ ਪੀ ਅਤੇ ਐੱਸ ਐੱਸ ਪੀ ਦੇ ਵਿੱਚੋਂ ਕਿਸੇ ਇੱਕ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰਨੀ ਹੈ, ਜੇਕਰ ਜ਼ਮੀਨ ਵਿੱਚ ਪੋਟਾਸ਼ ਦੀ ਕਮੀ ਹੈ ਤਾਂ ਪੋਟਾਸ਼@20kg ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਵਰਤ ਸਕਦੇ ਹੋ

Posted by sukhjinder singh
Punjab
29-11-2019 10:54 AM
sukhjinder ji vermicompost da rate 5 killo 50 Rupee ate 50 Killo 400 Rupee hai ate isnu lain layi tuc Gurpreet Shergill 9872624253 ji nal sampark kar sakde ho.dhanwad

Posted by Rameshwar Patel
Madhya Pradesh
29-11-2019 10:54 AM
rameshwar ji kranti-1, 6444 kisam ki bijai ki ja sakti hai.dhanywad

Posted by vijay prakash
West Bengal
29-11-2019 10:53 AM
पान की अच्छी खेती के लिये जमीन की गहरी जुताई कर भूमि को खुला छोड देते हैं उसके बाद उसकी दो उथली जुताई करते हैं, फिर बरेजा का निर्माण किया जाता है यह प्रक्रिया 15-20 फरवरी तक पूर्ण कर ली जाती है तैयार बरेजों में फरवरी के अन्तिम सप्ताह से लेकर 20 मार्च तक पान बेलों की रोपाई पंक्ति विधि से दोहरे पान बेल के रूप में की ज.... (Read More)
पान की अच्छी खेती के लिये जमीन की गहरी जुताई कर भूमि को खुला छोड देते हैं उसके बाद उसकी दो उथली जुताई करते हैं, फिर बरेजा का निर्माण किया जाता है यह प्रक्रिया 15-20 फरवरी तक पूर्ण कर ली जाती है तैयार बरेजों में फरवरी के अन्तिम सप्ताह से लेकर 20 मार्च तक पान बेलों की रोपाई पंक्ति विधि से दोहरे पान बेल के रूप में की जाती है उल्लेखनीय है कि पान बेल के प्रत्येक नोड़ पर जडें होती है, जो उपयुक्त समय पाकर मृदा में अपना संचार करती है व बेलों में प्रबर्द्वन प्रारम्भ हो जाता है बीज के रोपण के रूप में पान बेल से मध्य भाग की कलमें ली जाती है, जो रोपण के लिये आदर्श कलम होती है पान की बेल में अंकुरण व प्रबर्द्वन अच्छा हो इसके लिये पान के कलमों को घास से अच्छी प्रकार मल्चिंग करते हुये ढकते हैं व तीन समय पानी का छिडकाव करते हैं चूंकि मार्च से तापमान काफी तीव्र गति से बढता है अतः पौधों के संरक्षण हेतु पानी देकर नमी बनायी जाती है, जिससे कि बरेजों में आर्द्रता बनी रहे पान बेल के अच्छे प्रवर्द्वन हेतु बेलों के साथ-साथ सन की खेती भी करते हैं, जो पान बेलों को आवश्यकतानुसार छाया व सुरक्षा प्रदान करता है उल्लेखनीय है कि पान के बेलों को यदि संरक्षित नही किया जाता है, तो बेलों में ताप का शीघ्र असर होता है व बेले में सिकुडन आती है व पत्तियां किनारे से झुलस जाती है, जिससे उत्पादन प्रभावित होता है अतः पान की अच्छी खेती के लिये सावधानी और अच्छी देखभाल की अत्यन्त आवश्यकता होती है अच्छी खेती के लिये आवश्यक है कि पान के कलम का उपचार फफूदनाशक से करने के साथ उन्हें वृद्धि नियमक से भी उपचारित करें, जिससे कि जड़ों का उचित विकास हो सके जैसे-एन0ए0ए0,आई0बी0ए0 आदि अच्छी खेती के लिये पंक्ति से पंक्ति की उचित दूरी रखना आवश्यक है इसके लिये आवश्यकतानुसार पंक्ति से पंक्ति की दूरी 30×30 सेमी0 या 45×45 सेमी0 रखी जाती है पान की फसल को प्रभावित करने वाले जीवाणु व फंफूद को नष्ट करने के लिये पान कलम को रोपण के पूर्व भूमि शोधन करना आवश्यक है इसके लिये बोर्डो मिश्रण के 1 प्रतिशत सांद्रण घोल का छिड़काव करते हैं कलमों का उपचार पान के कलमों को रोपाई के समय के साथ-साथ प्रबर्द्वन के समय भी उपचार की आवश्यकता होती है इसके लिये बुवाई के पूर्व भी मृदा उपचारित करने हेतु 50 प्रतिशत बोर्डा मिश्रण के साथ 500 पी0पी0एम0 स्ट्रेप्टोसाईक्लिन का प्रयोग करते हैं उसके बाद बुवाई के पूर्व भी उक्त मिश्रण का प्रयोग बेलों को फफूंद व जीवाणुओं से बचाने के लिये किया जाता है पान की खेती के लिये यह एक महत्तवपूर्ण कार्य है पान की कलमें जब 6 सप्ताह की हो जाती है तब उन्हें बांस की फन्टी,सनई या जूट की डंडी का प्रयोग कर बेलों को ऊपर चढाते हैं 7-8 सप्ताह के उपरान्त बेलों से कलम के पत्तों को अलग किया जाता है, जिसे ”पेडी का पान“ कहते है बाजार में इसकी विशेष मांग होती है तथा इसकी कीमत भी सामान्य पान पत्तों से अधिक होती है इस प्रकार 10-12 सप्ताह बाद जब पान बेलें 1.5-2 फीट की होती है, तो पान के पत्तों की तुडाई प्रारम्भ कर दी जाती है जब बेजें 2.5-3 मी0 या 8-10 फीट की हो जाती है, तो बेलों में पुनः उत्पादन क्षमता विकसित करने हेतु उन्हें पुनर्जीवित किया जाता है इसके लिये 8-10 माह पुरानी बेलों को ऊपर से 0.5-7.5 सेमी0 छोडकर 15-20 सेमी0 व्यास के छल्लों के रूप में लपेट कर सहारे के जड के पास रख देते हैं व मिटटी से आंशिक रूप से दबा देते है व हल्की सिंचाई कर देते हैं उल्लेखनीय है कि बेलों को लिटाने से उनकी बढबार सीमित हो जाती है और पान तोडने का कार्य सरल हो जाता है साथ ही कुंडलित बेलों से अधिक मात्रा में किल्ले फूटते हैं व जडें निकलती है, जिससे नई बेलों को अधिक भोजन मिलता है व उत्पादन अच्छा मिलता है उत्तर भारत में प्रति दिन तीरन से चार बार (गर्मियों में) जाडों में दो से तीनबार सिंचाई की आवश्यकता होती है जल निकास की उत्त व्यवस्था भी पान की खेती के लिये आवश्यक है अधिक नमी से पान की जडें सड जाती है, जिससे उत्पादन प्रभावित होता है अतः पान की खेती के लिये ढालू नुमा स्थान सर्वोत्तम है पान की खेती काफी लागत की खेती होती है अतः अच्छे लाभ के लिये पान की खेती में अन्तः शस्य की फसलों का उत्पादन किया जाना आवश्यक है इसके लिये उत्तर भारत में पान की खेती के साथ-साथ परवल,कुन्दरू, तरोई, लौकी,खीरा, मिर्च, अदरक, पोय,रतालू,पीपर आदि की खेती सफलतापूर्वक की जाती है पान के बेलों को अच्छा पोषक तत्व प्राप्त हो इसके लिये प्रायः पान की खेती में उर्वरकों का प्रयोग किया जाता है पान की खेती में प्रायः कार्बनिक तत्वों का प्रयोग करते हैं उत्तर भारत में सरसों ,तिल,नीम या अण्डी की खली का प्रयोग किया जाता है, जो जुलाई-अक्टूबर में 15दिन के अन्तराल पर दिया जाता है वर्षाकाल के दिनों में खली के साथ थोडी मात्रा में यूरिया का प्रयोग भी किया जाता है खली को चूर्ण करके मिटटी के पात्र में भिगो दिया जाता है तथा 10 दिन तक अपघटित होने दिया जाता है उसके बाद उसे घोल बनाकर बेल की जडों पर दिया जाता है इसे और पौष्टिक बनाने के लिये उस घोल में गेहूं चावल और चने के आटे का प्रयोग भी करते हैं पान की खेती में अच्छे उत्पादन के लिये समय-समय पर उसमें निराई-गुड़ाई की आवश्यकता होती है बरेजों से अनावश्यक खरपतवार को समय-समय पर निकालते रहना चाहिये इसी प्रकार सितम्बर, अक्टूबर में पारियों के बीच मिटटी की कुदाल से गुड़ाई करके 40-50 सेमी0 की दूरी पर मेड़ बनाते हैं व आवश्यकतानुसार मिट्टी चढ़ाते हैं

Posted by sukhjinder singh
Punjab
29-11-2019 10:52 AM
ehna nal pashu de sarir di vdia growth hundi hai usda mastitis di smasia ton bacha hunda hai ate thnaa vich koi gannd howe ohh v khtm hundi hai ate mineral di kami purri hundi hai kiss nal pashu duudh vdia trike nal dinda rehnda hai ate thnna dia bimaria ton bacha rehnda hai..

Posted by shyamji Gupta
Uttar Pradesh
29-11-2019 10:49 AM
घीकवार की फसल पकने के लिए 18-24 महीनों का समय लेती है इस फसल को साल में 4 बार लिया जा सकता है और 3-4 बार पौधों के पत्तों को काटें कटाई सुबह और शाम के समय करें यह फसल दोबारा उग पड़ती है इस लिए इसे 5 वर्षों तक लिया जा सकता है यह 5 -10 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक जाता है धन्यवाद
Posted by AvtarSingh
Punjab
29-11-2019 10:48 AM
अवतार जी आप चूज़े लेने के लिए गुरू अंगद देव वैटनरी यूनिर्वसिटी लुधियाना की हैचरी में Dr Dubey 9888802905 से संपर्क कर सकते है आपको इनसे रेट के बारे में भी जानकारी प्राप्त हो जाएगी

Posted by vijay prakash
West Bengal
29-11-2019 10:42 AM
परवल कद्दू कुल की एक पौष्टिक सब्जी है परवल की खेती के लिए गर्म एवं अधिक आर्द्रता वाली जलवायु उपयुक्त होती है ऐसे क्षेत्र जहां औसत वार्षिक वर्षा 100 से 120 सेंमी. हो तथा तापक्रम 5 डिग्री सेल्सियस से कम नहीं जाता हो, वह क्षेत्र परवल की खेती के लिए सर्वोत्तम होता है लेकिन जहां सिंचाई की सुविधा न हो, वहाँ भी परवल की खे.... (Read More)
परवल कद्दू कुल की एक पौष्टिक सब्जी है परवल की खेती के लिए गर्म एवं अधिक आर्द्रता वाली जलवायु उपयुक्त होती है ऐसे क्षेत्र जहां औसत वार्षिक वर्षा 100 से 120 सेंमी. हो तथा तापक्रम 5 डिग्री सेल्सियस से कम नहीं जाता हो, वह क्षेत्र परवल की खेती के लिए सर्वोत्तम होता है लेकिन जहां सिंचाई की सुविधा न हो, वहाँ भी परवल की खेती सफलतापूर्वक होती है बिहार की गंगा, सोन एवं गंडक दियारा क्षेत्रों में परवल की असिंचित फसल ही उगाई जाती है, फिर भी उपज अधिक प्राप्त होती है परवल भारी मिट्टी को छोड़कर सभी प्रकार की मिट्टियों में उगाया जा सकता है, परन्तु परवल की अच्छी पैदावार के लिए जल निकासयुक्त दोमट, बलुई दोमट मिट्टी जिसमें पर्याप्त मात्रा में जीवांश हो, अधिक उपयुक्त होती है यही कारण है कि परवल की खेती उत्तरप्रदेश, बिहार एवं पश्चिम बंगाल की नदियों के किनारों के दियारा क्षेत्रों में सफलतापूर्वक की जाती है परवल को हमेशा ऊँचे स्थान पर लगाना चाहिए, जहां पानी का जमाव नहीं होता हो उत्तरप्रदेश, बिहार तथा बंगाल में परवल की खेती पान के बरेजों में अंतरावर्ती फसल के रूप में करने की प्रथा अत्यंत पुरानी है, जहां के परवल के फल उच्च कोटि के गुणवत्ता वाले होते हैं मई-जून के महीनों में मिट्टी पलटने वाले हल से खेत को एकबार जुताई कर खुला छोड़ देना चाहिए ताकि हानिकारक कीड़े-मकोड़े मर जायें तथा खरपतवार सुख जायें लत्तर की रोपाई के लगभग एक महीना पहले मिट्टी में गोबर की सड़ी खाद अथवा कम्पोस्ट 200-250 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की दर से अच्छी तरह मिला देना चाहिए लत्तर रोपाई के समय खेत को 3-4 बार देशी हल से जुताई करके पाटा चलाकर मिट्टी को भुरभुरा तथा समतल बना लेना आवश्यक है डंडाली, राजेन्द्र परवल-1, राजेन्द्र परवल-2, स्वर्ण रेखा, स्वर्ण अलौकिक, निमियां, सफेदा, सोनपुरा, संतोखबा, तिरकोलबा, गुथलिया की बिजाई कर सकते है परवल उगाने की निम्नलिखित विधियां हैं:-1. बीज द्वारा 2. जड़ों की कलम द्वारा. लत्ताओं की लच्छी द्वारा रोपाई का समय भिन्न-भिन्न स्थानों पर अलग-अलग होता है मैदानी भागों में परवल की रोपनी का उचित समय मध्य जुलाई से अक्टूबर तक और दियारा क्षेत्रों में सितम्बर से अक्टूबर तक होता है परवल में अलग-अलग पौधों पर नर और मादा फूल उत्पन्न होते हैं नर पुष्पों से फल नहीं बनते हैं बल्कि वे मादा पुष्पों में परागण का कार्य करते हैं जिसमें मादा पुष्पों से फल बनना सम्भव होता है नर पुष्प बड़े और सफेद होते हैं, जबकि मादा पुष्प थोड़ा छोटा और सफेद होता है, उसके नीचे गर्भाश्य जुड़ा रहता है जो कुछ दिनों में परागण के बाद बढ़कर फल बन जाता है इसका विस्तार लताओं या बेलों द्वारा किया जाता है परवल लगाने के समय नर और मादा पौधों का अनुपात 1:19 होना अनिवार्य है उपरोक्त अनुपात नहीं रहने पर उत्पादन में काफी कमी हो जाती है खेत में कतार से कतार की दूरी 2.5 मीटर तथा पौधे से पौधे की दूरी 1.5 मीटर रखना चाहिए साथ ही थल्ले, भूमि की सतह से 6-8 सेंमी. ऊँचाई पर बनाने चाहिए एक वर्ष पुरानी लताओं से 120-150 सेंमी. लम्बे टुकड़े काटकर इस प्रकार मोड़ना चाहिए कि लच्छी की लम्बाई 30 सेंमी. हो जाये तथा 10 सेंमी. गहरे थालों में इस प्रकार लगाया जाय कि दोनों सिरे ऊपर खुले रहें रोपनी के बाद और फल लगने के समय तक 4-5 बार निकाई-गुड़ाई करनी चाहिए ताकि लताओं की शाकीय वृद्धि तेजी से हो लताओं के बढ़ जाने पर इसकी अनावश्यक वृद्धि को रोकने के लिए बार-बार लताओं को हाथ से उलटते-पलटते रहना चाहिए ऐसा करने से गांठों से जड़ें निकलकर जमीन में प्रवेश नहीं कर पाती है और फलन अधिक होता है मार्च माह के मध्य से पौधों पर फल लगना शुरू हो जाता है प्रारम्भ में फल लगने के 10-12 दिनों के बाद फल तोड़ने लायक हो जाते हैं इस प्रकार मार्च एवं अप्रैल माह में फलों की तोडनी प्रति सप्ताह एक बार तथा मई में प्रति सप्ताह दो बार अवश्य करनी चाहिए फलों की तोड़ाई मुलायम एवं हरी अवस्था में सूर्योदय से पहले करनी चाहिए इससे फल अधिक समय तक ताजे बने रहते हैं धन्यवाद

Posted by vijay prakash
West Bengal
29-11-2019 10:40 AM
परवल कद्दू कुल की एक पौष्टिक सब्जी है परवल की खेती के लिए गर्म एवं अधिक आर्द्रता वाली जलवायु उपयुक्त होती है ऐसे क्षेत्र जहां औसत वार्षिक वर्षा 100 से 120 सेंमी. हो तथा तापक्रम 5 डिग्री सेल्सियस से कम नहीं जाता हो, वह क्षेत्र परवल की खेती के लिए सर्वोत्तम होता है लेकिन जहां सिंचाई की सुविधा न हो, वहाँ भी परवल की खे.... (Read More)
परवल कद्दू कुल की एक पौष्टिक सब्जी है परवल की खेती के लिए गर्म एवं अधिक आर्द्रता वाली जलवायु उपयुक्त होती है ऐसे क्षेत्र जहां औसत वार्षिक वर्षा 100 से 120 सेंमी. हो तथा तापक्रम 5 डिग्री सेल्सियस से कम नहीं जाता हो, वह क्षेत्र परवल की खेती के लिए सर्वोत्तम होता है लेकिन जहां सिंचाई की सुविधा न हो, वहाँ भी परवल की खेती सफलतापूर्वक होती है बिहार की गंगा, सोन एवं गंडक दियारा क्षेत्रों में परवल की असिंचित फसल ही उगाई जाती है, फिर भी उपज अधिक प्राप्त होती है परवल भारी मिट्टी को छोड़कर सभी प्रकार की मिट्टियों में उगाया जा सकता है, परन्तु परवल की अच्छी पैदावार के लिए जल निकासयुक्त दोमट, बलुई दोमट मिट्टी जिसमें पर्याप्त मात्रा में जीवांश हो, अधिक उपयुक्त होती है यही कारण है कि परवल की खेती उत्तरप्रदेश, बिहार एवं पश्चिम बंगाल की नदियों के किनारों के दियारा क्षेत्रों में सफलतापूर्वक की जाती है परवल को हमेशा ऊँचे स्थान पर लगाना चाहिए, जहां पानी का जमाव नहीं होता हो उत्तरप्रदेश, बिहार तथा बंगाल में परवल की खेती पान के बरेजों में अंतरावर्ती फसल के रूप में करने की प्रथा अत्यंत पुरानी है, जहां के परवल के फल उच्च कोटि के गुणवत्ता वाले होते हैं मई-जून के महीनों में मिट्टी पलटने वाले हल से खेत को एकबार जुताई कर खुला छोड़ देना चाहिए ताकि हानिकारक कीड़े-मकोड़े मर जायें तथा खरपतवार सुख जायें लत्तर की रोपाई के लगभग एक महीना पहले मिट्टी में गोबर की सड़ी खाद अथवा कम्पोस्ट 200-250 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की दर से अच्छी तरह मिला देना चाहिए लत्तर रोपाई के समय खेत को 3-4 बार देशी हल से जुताई करके पाटा चलाकर मिट्टी को भुरभुरा तथा समतल बना लेना आवश्यक है डंडाली, राजेन्द्र परवल-1, राजेन्द्र परवल-2, स्वर्ण रेखा, स्वर्ण अलौकिक, निमियां, सफेदा, सोनपुरा, संतोखबा, तिरकोलबा, गुथलिया की बिजाई कर सकते है परवल उगाने की निम्नलिखित विधियां हैं:-1. बीज द्वारा 2. जड़ों की कलम द्वारा. लत्ताओं की लच्छी द्वारा रोपाई का समय भिन्न-भिन्न स्थानों पर अलग-अलग होता है मैदानी भागों में परवल की रोपनी का उचित समय मध्य जुलाई से अक्टूबर तक और दियारा क्षेत्रों में सितम्बर से अक्टूबर तक होता है परवल में अलग-अलग पौधों पर नर और मादा फूल उत्पन्न होते हैं नर पुष्पों से फल नहीं बनते हैं बल्कि वे मादा पुष्पों में परागण का कार्य करते हैं जिसमें मादा पुष्पों से फल बनना सम्भव होता है नर पुष्प बड़े और सफेद होते हैं, जबकि मादा पुष्प थोड़ा छोटा और सफेद होता है, उसके नीचे गर्भाश्य जुड़ा रहता है जो कुछ दिनों में परागण के बाद बढ़कर फल बन जाता है इसका विस्तार लताओं या बेलों द्वारा किया जाता है परवल लगाने के समय नर और मादा पौधों का अनुपात 1:19 होना अनिवार्य है उपरोक्त अनुपात नहीं रहने पर उत्पादन में काफी कमी हो जाती है खेत में कतार से कतार की दूरी 2.5 मीटर तथा पौधे से पौधे की दूरी 1.5 मीटर रखना चाहिए साथ ही थल्ले, भूमि की सतह से 6-8 सेंमी. ऊँचाई पर बनाने चाहिए एक वर्ष पुरानी लताओं से 120-150 सेंमी. लम्बे टुकड़े काटकर इस प्रकार मोड़ना चाहिए कि लच्छी की लम्बाई 30 सेंमी. हो जाये तथा 10 सेंमी. गहरे थालों में इस प्रकार लगाया जाय कि दोनों सिरे ऊपर खुले रहें रोपनी के बाद और फल लगने के समय तक 4-5 बार निकाई-गुड़ाई करनी चाहिए ताकि लताओं की शाकीय वृद्धि तेजी से हो लताओं के बढ़ जाने पर इसकी अनावश्यक वृद्धि को रोकने के लिए बार-बार लताओं को हाथ से उलटते-पलटते रहना चाहिए ऐसा करने से गांठों से जड़ें निकलकर जमीन में प्रवेश नहीं कर पाती है और फलन अधिक होता है मार्च माह के मध्य से पौधों पर फल लगना शुरू हो जाता है प्रारम्भ में फल लगने के 10-12 दिनों के बाद फल तोड़ने लायक हो जाते हैं इस प्रकार मार्च एवं अप्रैल माह में फलों की तोडनी प्रति सप्ताह एक बार तथा मई में प्रति सप्ताह दो बार अवश्य करनी चाहिए फलों की तोड़ाई मुलायम एवं हरी अवस्था में सूर्योदय से पहले करनी चाहिए इससे फल अधिक समय तक ताजे बने रहते हैं धन्यवाद

Posted by aasif
Rajasthan
29-11-2019 10:39 AM
aasif ji kripya swal vistar se pooche ke aap konsi fasl men kharpatwar dwai ke bare men jankari lena chahte hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by pardeep kumar
Punjab
29-11-2019 10:34 AM
पंजाब डेयरी विकास बोर्ड की तरफ से लगभग हर जिले में डेयरी ट्रेनिंग करवायी जाती है इसके बारे में जिस किसान से पिछले दिनों चितामली में ट्रेनिंग ली है आप उसकी ओडियो सून सकते है

Posted by shyamji Gupta
Uttar Pradesh
29-11-2019 10:32 AM
इस पौधे को मिट्टी की कई किस्मों जैसे रेतली तटवर्ती से मैदानों की दोमट मिट्टी में उगाया जा सकता है यह पौधा जल जमाव हालातों मे खड़ा नहीं रह सकता जब इसे अच्छे जल निकास वाली दोमट से रेतली दोमट और 8.5 पी एच वाली ज़मीन में उगाया जाये तो यह अच्छे परिणाम देती है एलोए जो कि लिलीकाए परिवार से संबंधित है उसकी लगभग 150 प्रजाति.... (Read More)
इस पौधे को मिट्टी की कई किस्मों जैसे रेतली तटवर्ती से मैदानों की दोमट मिट्टी में उगाया जा सकता है यह पौधा जल जमाव हालातों मे खड़ा नहीं रह सकता जब इसे अच्छे जल निकास वाली दोमट से रेतली दोमट और 8.5 पी एच वाली ज़मीन में उगाया जाये तो यह अच्छे परिणाम देती है एलोए जो कि लिलीकाए परिवार से संबंधित है उसकी लगभग 150 प्रजातियां पायी जाती हैं जिनमें से barbedensis, A. chinensis, A. perfoliata, A. vulgaris, A indica, A. littoralis और A abyssinica हैं ये आमतौर पर उगायी जाती हैं और इनका औषधीय मूल्य होता है. नैशनल बौटैनीकल और प्लांट जैनेटिक रिसोर्स आई. सी. ए. आर, दिल्ली द्वारा रिलीज़ की गई किस्में IC111271, IC111269, IC111280, IC111273, IC111279 और IC111267 आदि इस किस्म में उच्च मात्रा में एलोइन तत्व पाया जाता है नैशनल बौटैनीकल और प्लांट जैनेटिक रिसोर्स, आई. सी. ए. आर, दिल्ली द्वारा जारी की गई किस्में IC111267, IC1112666, IC111280, IC111280, IC111272 और IC111277 आदि इस किस्म में उच्च मात्रा में जैल तत्व पाया जाता है AL-1:- यह किस्म सैंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ मैडीकल एंड एरोमैटिक प्लांट्स, लखनऊ द्वारा जारी की गई है घीकवार की जड़ें 20-30 सैं.मी. तक ही जाती हैं इसके लिए खेत को जोत कर नर्म करें आखिरी जोताई के बाद 6 टन प्रति एकड़ रूड़ी की खाद डालें मेंड़ और खालियां बना कर 45-60 सैं.मी. के फासले पर बिजाई करें और अगर जरूरत पड़े तो सिंचाई करें गांठों को 40 या 30 सैं.मी. के फासले पर लगाएं गांठों के विकास के लिए इसकी बिजाई जुलाई-अगस्त महीने में करनी चाहिए सिंचाई वाले क्षेत्रों में इसकी बिजाई सर्दियों के महीने में भी की जाती है आमतौर पर फासला 45 सैं.मी.x40 सैं.मी. या 60 सैं.मी.x30 सैं.मी. रखा जाता है ये गांठें चार से पांच महीने पुरानी और 15 सैं.मी. की गहराई पर गड्ढों में लगानी चाहिए पौधे के प्रयोग किए जाने वाले भाग जब इसका निचला भाग पीला हो जाता है तो इसके पत्तों को काटकर एलोवीरा का जूस प्राप्त कर लिया जाता है इसका पानी या रस गर्मी के कारण वाष्पीकरण हो जाता है और फलस्वरूप् इसका रंग हल्के से गहरा भूरा हो जाता है बिजाई के लिए आम तौर पर एक एकड़ के लिए 22000 गांठों की जरूरत होती है बिजाई के लिए सेहतमंद गांठों का ही प्रयोग करें बिजाई के लिए 3-4 महीने पुरानी गांठो का प्रयोग करें, जिसके चार से पांच पत्ते हों ज़मीन की तैयारी के समय 60-80 क्विंटल प्रति एकड़ रूड़ी की खाद डालें नाइट्रोजन 20 किलो (44 किलो यूरिया), फासफोरस 20 किलो (125 किलो एस.एस. पी.) और पोटाश 20 किलो (34 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश) की मात्रा प्रति एकड़ में प्रयोग करें खेत को साफ सुथरा और नदीन रहित रखें उचित अंतराल पर गोडाई करें एक वर्ष में मुख्यत: दो बार गोडाई करें.गर्मियों और शुष्क हालातों में 2 सप्ताह के अंतराल पर सिंचाई करें बारिश के मौसम में सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती और सर्दियों के मौसम में पौधा ज्यादा पानी नहीं लेता इसलिए कम सिंचाई करनी चाहिए पौधे के गांठे बनने के बाद तुरंत पहली सिंचाई करें खेत में ज्यादा पानी ना लगाएं इससे फसल को नुकसान होता है याद रखें कि फसल को दोबारा पानी लगाने से पहले, खेत को सूखने दें सिंचाई खेत में अच्छी तरह दे देनी चाहिए ताकि अतिरिक्त पानी निकल जाये

Posted by Rahman Raeen
Uttar Pradesh
29-11-2019 10:29 AM
rahman ji aap iske uper NPK 191919 ek kilo ko 150 litre ko prati acre ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by Ramesh yadav
Madhya Pradesh
29-11-2019 10:17 AM
सिंचित क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 60 किलो (यूरिया 130 किलो), फासफोरस 24 किलो (एस एस पी 150 किलो), पोटाश 12 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 20 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी नाइट्रोजन को पहली सिंचाई के समय डालें
बारानी क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 24 क.... (Read More)
सिंचित क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 60 किलो (यूरिया 130 किलो), फासफोरस 24 किलो (एस एस पी 150 किलो), पोटाश 12 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 20 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी नाइट्रोजन को पहली सिंचाई के समय डालें
बारानी क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 24 किलो (यूरिया 52 किलो), फासफोरस 12 किलो (एस एस पी 75 किलो), पोटाश 8 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 15 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोज, फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें
सिंचित क्षेत्रों में पिछेती बिजाई के लिए, नाइट्रोजन 50 किलो (यूरिया 110 किलो), फासफोरस 12 किलो (एस एस पी 75 किलो), पोटाश 16 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 27 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन की दो तिहाई मात्रा बिजाई के 35-40 दिनों के बाद डालें
यह पाया गया है कि जिंक सल्फेट 10 किलो प्रति एकड़ में डालने से उपज में वृद्धि होती है जिंक की कमी को पूरा करने के लिए जिंक सल्फेट 0.5 प्रतिशत की फोलियर स्प्रे करें 15 दिनों के अंतराल पर दो से तीन स्प्रे करें
अच्छी शाखाएं और उपज के लिए 19:19:19 घुलनशील खादें 5 ग्राम + स्टिकर 0.5 मि.ली. को प्रति लीटर पानी में मिलाकर बिजाई के 30 दिनों के बाद स्प्रे करें

Posted by Dilip Gupta
Maharashtra
29-11-2019 10:14 AM
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकत हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्च.... (Read More)
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकत हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्चे देना आम बात है बकरियां 8-10 वर्ष तक बच्चे देती हैं और अपन गिनती को तेजी से बढ़ा लेती हैं आप बारबरी, ब्लैक बंगाल, जैसी नसल पाल सकते हैं इसकी ट्रेनिेंग के लिए आप अपने कुषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करे या फिर जो बकरी पालन का व्यवसाय कर रहा कोई किसान उसका फार्म स्वंय जाकर देखकर आयें तो और भी बारीकियों का पता चल जायेगा, आप ब्लैक बंगाल, बीटल, सिरोही, जमुनापरी, बरबरी नस्ल रख सकते हैं.

Posted by Amar Sen Sahu
Uttar Pradesh
29-11-2019 10:10 AM
Isko aap Udder pox homeopathic dwai ki 10-10 drops din mein 3 barr dein aur Avil injection 10ml, anthiomaline injection 10ml lgwayen , isse frak padne lgega.
Posted by Rakesh
Jharkhand
29-11-2019 10:10 AM
rakesh ji aap organic kheti ke liye aap apne ilake ke jo kisan organic kheti kar rahe hai unse mile aur unka anubhav jane uske bad aap thodi jgah men jaivik kheti shuru kar sakte hai.dhanywad
Posted by Suniltetarwal
Rajasthan
29-11-2019 10:00 AM
Usko aap pett ke kirro ke liye Bendykind plus bolus dein aur usko Bovimin-B powder 100gm rojana aur Ovumin advance bolus rojana 1 goli den aur 21 din tak dete rehen, isse heat mai aa jayegi.

Posted by vicky
Haryana
29-11-2019 09:59 AM
Vicky g, Agr gehu ki fsl peeli ho rahi hai toh isme Urea k saath Sulphur 90% 3-3.5 kg per acre mix krke use kro,
Vaise aap ney paani kb lgaya thaa
Posted by Amien
Madhya Pradesh
29-11-2019 09:59 AM
Amien ji yeh fungus ke karn ho raha hai iske liye aap mancozeb@4 gram ko prati litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad

Posted by Gagan Deep
Haryana
29-11-2019 09:53 AM
Gagandeep g, Mai aap kehna chaahunga k Pls aap Eucalyptus (sfedey) ki jgah Apni jmeen mey koi aaur Trees lgaao, Kiuki eucalyptus ki paani ki demand Bahut jyada hai. Dhrti ka paani pehle hi bahut neeche jaa raha hai. Is ki jgah aap SAAGVAAN, ja Fruit (Baag) lgaao. Jo aapko ashi aamdan ho gi
Posted by deepak puri
Madhya Pradesh
29-11-2019 09:50 AM
deepak ji abhi aap isme khaadon ki poori matra daale kyuki khaadonb ki poori matra se hi iski achi paidavar hogi.dhanywad

Posted by Sandeep Kumar
Uttar Pradesh
29-11-2019 09:48 AM
sandeep ji dheemak ki roktham ke liye aap chlorpyriphos@4ml ko prati litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by Brajesh
Uttar Pradesh
29-11-2019 09:45 AM
पश्चिमी यू पी में, सिंचित और सामान्य बिजाई स्थितियों में 1 नवंबर से 15 नवंबर तक बिजाई पूरी कर लें और पिछेती बिजाई की स्थितियों में 1 से 25 दिसंबर तक बिजाई पूरी कर लें
पूर्वी यू पी के लिए, सिंचित और सामान्य बिजाई का उचित समय 1 नवंबर से 15 नवंबर तक है, जबकि पिछेती बिजाई के लिए 1 से 20 दिसंबर का समय उचित है
ऊंचे पहाड़ी क्.... (Read More)
पश्चिमी यू पी में, सिंचित और सामान्य बिजाई स्थितियों में 1 नवंबर से 15 नवंबर तक बिजाई पूरी कर लें और पिछेती बिजाई की स्थितियों में 1 से 25 दिसंबर तक बिजाई पूरी कर लें
पूर्वी यू पी के लिए, सिंचित और सामान्य बिजाई का उचित समय 1 नवंबर से 15 नवंबर तक है, जबकि पिछेती बिजाई के लिए 1 से 20 दिसंबर का समय उचित है
ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों के लिए, सिंचित और सामान्य बिजाई का उचित समय अक्तूबर के दूसरे पखवाड़े से लेकर नवंबर का पहला पखवाड़ा है जबकि पिछेती बिजाई के लिए 1 दिसंबर से 20 दिसंबर का समय उचित है
निचले पहाड़ी क्षेत्रों के लिए, सिंचित और सामान्य बिजाई का उचित समय अक्तूबर के आखिरी सप्ताह से लेकर मध्य नवंबर तक का है जबकि पिछेती बिजाई के लिए नवंबर का दूसरा पखवाड़ा उचित समय है

Posted by raj
Uttar Pradesh
29-11-2019 09:34 AM
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी .... (Read More)
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुमब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तहय उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तहय में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तहय लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है
Posted by prince
Punjab
29-11-2019 09:25 AM
ਫਸਲਾਂ ਵਾਸਤੇ ਮਿੱਟੀ ਦਾ ਨਮੂਨਾ ਲੈਣ ਲਈ ਜ਼ਮੀਨ ਦੀ ਉੱਪਰਲੀ ਤਹਿ ਤੋ ਘਾਹ ਫੂਸ ਪਰੇ ਕਰਕੇ ਖੁਰਪੇ ਨਾਲ 6 ਇੰਚ ਡੂੰਘਾ ਟੋਇਆ ਪੁੱਟਕੇ ਇੱਕ ਪਾਸੇ ਇਕ ਇੰਚ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਤਹਿ ਉੱਪਰੋਂ ਥੱਲੇ ਤੱਕ ਇਕਸਾਰ ਕੱਟੋ ਇਸ ਮਿੱਟੀ ਨੂੰ ਸਾਫ਼ ਕੱਪੜੇ ਜਾ ਬਰਤਨ ਵਿੱਚ ਪਾਉ ਇਸੇ ਤਰ੍ਹਾਂ 7-8 ਹੋਰ ਥਾਵਾਂ ਤੋ ਮਿੱਟੀ ਲਵੋ ਇਸ ਮਿੱਟੀ ਨੂੰ ਆਪਸ ਵਿੱਚ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਨਾਲ ਮਿਲਾਕੇ ਉਸ ਵਿੱਚੋ ਅੱਧਾ ਕਿਲੋਗ੍ਰਾਮ ਮ.... (Read More)
ਫਸਲਾਂ ਵਾਸਤੇ ਮਿੱਟੀ ਦਾ ਨਮੂਨਾ ਲੈਣ ਲਈ ਜ਼ਮੀਨ ਦੀ ਉੱਪਰਲੀ ਤਹਿ ਤੋ ਘਾਹ ਫੂਸ ਪਰੇ ਕਰਕੇ ਖੁਰਪੇ ਨਾਲ 6 ਇੰਚ ਡੂੰਘਾ ਟੋਇਆ ਪੁੱਟਕੇ ਇੱਕ ਪਾਸੇ ਇਕ ਇੰਚ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਤਹਿ ਉੱਪਰੋਂ ਥੱਲੇ ਤੱਕ ਇਕਸਾਰ ਕੱਟੋ ਇਸ ਮਿੱਟੀ ਨੂੰ ਸਾਫ਼ ਕੱਪੜੇ ਜਾ ਬਰਤਨ ਵਿੱਚ ਪਾਉ ਇਸੇ ਤਰ੍ਹਾਂ 7-8 ਹੋਰ ਥਾਵਾਂ ਤੋ ਮਿੱਟੀ ਲਵੋ ਇਸ ਮਿੱਟੀ ਨੂੰ ਆਪਸ ਵਿੱਚ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਨਾਲ ਮਿਲਾਕੇ ਉਸ ਵਿੱਚੋ ਅੱਧਾ ਕਿਲੋਗ੍ਰਾਮ ਮਿੱਟੀ ਲੈ ਲਵੋ ਜੇ ਮਿੱਟੀ ਗਿੱਲੀ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਛਾਂ ਵਿੱਚ ਸੁਕਾਓ ਇਸ ਨਮੂਨੇ ਨੂੰ ਕੱਪੜੇ ਦੀ ਥੈਲੀ ਵਿੱਚ ਪਾ ਕੇ ਕਿਸਾਨ ਦਾ ਨਾਮ, ਪਤਾ ਅਤੇ ਖੇਤ ਨੰਬਰ ਲਿਖਕੇ ਇੱਕ ਪਰਚੀ ਉਸ ਉੱਤੇ ਰੱਖ ਦੇਵੋ ਇਸ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਖੇਤ ਵਿੱਚੋ ਰਲਵਾ-ਮਿਲਵਾ ਨਮੂਨਾ ਲੈਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਜੇਕਰ ਕਿਸੇ ਖੇਤ ਦੇ ਕੁਝ ਹਿੱਸੇ ਵਿੱਚ ਜ਼ਮੀਨ ਦੀ ਕਿਸਮ ਤੇ ਉਪਜਾਊ ਸ਼ਕਤੀ ਵੱਖਰੀ ਹੋਵੇ, ਉਸ ਹਿੱਸੇ ਦੀ ਮਿੱਟੀ ਦਾ ਅਲੱਗ ਨਮੂਨਾ ਲਵੋ ਕੱਲਰ ਵਾਲੀ ਜ਼ਮੀਨ ਵਿੱਚੋ ਮਿੱਟੀ ਦਾ ਨਮੂਨਾ ਲੈਣ ਲਈ ਜ਼ਮੀਨ ਵਿੱਚ 3 ਫੁੱਟ ਡੂੰਘਾ ਟੋਇਆ ਪੁੱਟ ਕੇ ਸਿੱਧੇ ਪਾਸੇ ਉੱਪਰੋਂ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰਕੇ ਹੇਠਾਂ 6 ਇੰਚ ਤੱਕ 1 ਫੁੱਟ ਅਤੇ 2 ਫੁੱਟ ਦੀ ਡੂੰਘਾਈ ’ਤੇ ਨਿਸ਼ਾਨ ਲਗਾਉ ਹਰ ਡੂੰਘਾਈ ਤੋਂ ਖੁਰਪੇ ਦੀ ਮਦਦ ਨਾਲ ਤਕਰੀਬਨ 1 ਇੰਚ ਮੋਟੀ ਤਹਿ ਉਤਾਰ ਕੇ ਅੱਧਾ ਗ੍ਰਾਮ ਮਿੱਟੀ ਲਵੋ ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਕੁੱਲ ਚਾਰ ਨਮੂਨੇ ਲਵੋ ਹਰ ਡੂੰਘਾਈ ਤੋ ਨਮੂਨੇ ਲੈ ਕੇ ਵਿਧੀ 1 ਤਰ੍ਹਾਂ ਸੰਭਾਲੋ, ਪਰਚੀ ਉੱਪਰ ਨਮੂਨੇ ਦੀ ਡੂੰਘਾਈ ਵੀ ਲਿਖੋ ਬਾਗ ਲਗਾਉਣ ਲਈ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਪਰਖ ਵਾਸਤੇ ਨਮੂਨਾ ਲੈਣ ਲਈ ਖੇਤ ਦੇ ਵਿਚਕਾਰ 6 ਫੁੱਟ ਡੂੰਘਾ ਟੋਇਆ ਪੁੱਟ ਕੇ ਸਿੱਧੇ ਪਾਸੇ ਤੋ ਉੱਪਰ ਹੇਠਾਂ ਵੱਲ ਨਿਸ਼ਾਨ ਲਾ ਕੇ ਨਿਸ਼ਾਨ 6 ਇੰਚ ‘ਤੇ 2 ਨਿਸ਼ਾਨ 1 ਫੁੱਟ’ ਤੇ ਲਾ ਕੇ ਹਰ ਫੁੱਟ ’ਤੇ ਨਿਸ਼ਾਨ ਲਾਉ ਖੁਰਪੇ ਨਾਲ 6 ਇੰਚ ਦੇ ਨਿਸ਼ਾਨ ਤੱਕ 1 ਇੰਚ ਮੋਟੀ ਤਹਿ ਇੱਕ ਸਾਰ ਲਾਉ ਜਿਸ ਦਾ ਭਾਰ ਲਗਪਗ ਅੱਧਾ ਕਿਲੋਗ੍ਰਾਮ ਹੋਵੇ ਇਸੇ ਤਰ੍ਰਾਂ 6 ਨਮੂਨੇ 1-1 ਫੁੱਟ ਦੂਰੀ ’ਤੇ ਲਉ ਅਤੇ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਥੈਲੀਆਂ ਵਿੱਚ ਪਾਉ ਜਿਸ ਦੀ ਗਿਣਤੀ 7 ਹੋ ਜਾਵੇਗੀ ਥੈਲੀ ਦੇ ਕਿਸਾਨ ਅਤੇ ਖੇਤਾਂ ਦੀ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਲਿਖ ਕੇ ਪਾਈ ਜਾਵੇ ਜੇ ਕਿਸੇ ਡੂੰਘਾਈ ਤੇ ਕੋਈ ਰੋੜਿਆ ਦੀ ਤਹਿ ਹੋਵੇ, ਉਸਦਾ ਨਮੂਨਾ ਅਲੱਗ ਲੈ ਕੇ ਵੱਖਰੀ ਥੈਲੀ ਵਿੱਚ ਪਾਉਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ, ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਪਰਚੀ ਉੱਤੇ ਤਹਿ ਦੀ ਡੂੂੰਘਾਈ ਲਿਖੀ ਹੋਵੇ ਕੱਲਰ ਵਾਲੀ ਜ਼ਮੀਨ ਅਤੇ ਬਾਗਾਂ ਵਾਸਤੇ ਮਿੱਟੀ ਦਾ ਨਮੂਨਾ ਬਰਮੇ ਦੀ ਮਦਦ ਨਾਲ ਵੀ ਲਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸਦੀ ਜਾਂਚ ਤੁਸੀਂ ਮਿੱਟੀ ਜਾਂਚ ਕੇਂਦਰ ਕੋਲੋ ਜਾਂ KVK ਕੋਲੋ ਕਰਵਾ ਸਕਦੇ ਹੋ
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