Posted by amit pandey
Uttar Pradesh
29-11-2019 02:54 PM
अमित जी उसे आप खुराक थोड़ी थोड़ी दिन में तीन बार दें और उसे Livoferol liquid 50-50ml सुबह शाम दें और RSYC tablet एक एक गोली सुबह शाम दें इससे फर्क पड़ जाएगा
Posted by sony
Punjab
29-11-2019 02:42 PM
ਤੁਸੀ ਇਹ ਆਡੀਓ ਸੁਣੋ ਜੀ ਤੁਹਾਨੂੰ ਪੂਰੀ ਡਿਟੇਲ ਨਾਲ ਦੱਸਿਆ ਗਿਆ ਹੈ ਜੀ
Posted by Ramkumar
Rajasthan
29-11-2019 02:35 PM
ramkumar ji yeh fungus ke karn ho raha hai iske liye aap carbendazim@4 gram ko prtai litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad

Posted by ਪਰਵਿੰਦਰ ਸਿੰਘ
Punjab
29-11-2019 02:35 PM
tuci uss nu Enrocin @1ml per liter pani vich milla ke 24 hours tak deo, baki uss nu Stressvel@5ml per 100 birds din vich 1 varr deo ate 7 din dinde rho.

Posted by bala ji
Uttar Pradesh
29-11-2019 02:20 PM
अभी पशु मेले की अगली तारीख के बारे में कोई जानकारी नहीं है यदि इसके बारे में कोई जानकारी मिलेगी तो आपको बता दिया जाएगा

Posted by Suresh
Punjab
29-11-2019 02:20 PM
ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ Liquid LDM 1 ਲੀਟਰ 100ml ਸਵੇਰੇ 100ml ਸ਼ਾਮ ਨੂੰ ਦਿਓ ਤੇ milkout 900gm ਪਾਊਡਰ 2 ਚਮਚ ਸਵੇਰੇ ਤੇ 2 ਚਮਚ ਸ਼ਾਮ ਨੂੰ ਦਿਓ ਅਤੇ Lactomood ਹੋਮਿਓਪੈਥਿਕ ਦਵਾਈ ਦੀਆ 10-10 ਬੂੰਦਾਂ ਦਿਨ ਵਿਚ 3 ਵਾਰ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ.

Posted by Yash Pal Hakla
Punjab
29-11-2019 02:17 PM
tuci dairy farming di training lain lai dairy vikas afsar, pollyclinic hospital mahlo, distt sbs nagar 01823-225050 nal sampark kr skde ho ate agge hon walia trainings vare jankari laa skde ho.
Posted by Devender Gudha
Haryana
29-11-2019 02:10 PM
सर मैंने एप्पल बेर की झाड़ी लगाई हुई है, डेढ़ एकड़ में और उनके बेर पीले हो रहे हैं, कोई इलाज बताएं ?
देवेंद्र जी यह फंगस के कारण हो रहा है इसके लिए आप copper oxyxhloride @3 ग्राम को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद

Posted by tarun
Haryana
29-11-2019 02:05 PM
tarun ji aap guava , nimbu ya kinnow ka bagh lga sakte hai.dhanywad

Posted by prabhjot singh
Punjab
29-11-2019 02:05 PM
Isde kai karan ho skde hai usdi bachedani di sahi growth na hona, mineral di kami, sahi sme te deworming na hona, Ai sahi sme na hona, ja hor v kayi karan ho skde hai, tuci uss nu pett de kiria lai Bendykind plus bolus deo ate Bovimin-B powder 100gm rojana ate Keeper plus powder 25gm rojana 20 din tak deo fir agli varr heat vich aaun te tika bhrwa deo ji.
Posted by Fudan Soren
Jharkhand
29-11-2019 02:04 PM
बैंगन की फसल सख्त होने के कारण इसे अलग अलग तरह की मिट्टी में उगाया जा सकता है यह एक लंबे समय की फसल है, इसलिए अच्छे जल निकास वाली उपजाऊ रेतली दोमट मिट्टी उचित होती है और अच्छी पैदावार देती है अगेती फसल के लिए हल्की मिट्टी और अधिक पैदावार के लिए चिकनी और नमी या गारे वाली मिट्टी उचित होती है फसल की वृद्धि के लिए 5..... (Read More)
बैंगन की फसल सख्त होने के कारण इसे अलग अलग तरह की मिट्टी में उगाया जा सकता है यह एक लंबे समय की फसल है, इसलिए अच्छे जल निकास वाली उपजाऊ रेतली दोमट मिट्टी उचित होती है और अच्छी पैदावार देती है अगेती फसल के लिए हल्की मिट्टी और अधिक पैदावार के लिए चिकनी और नमी या गारे वाली मिट्टी उचित होती है फसल की वृद्धि के लिए 5.5-6.6 पी एच होनी चाहिए लंबी किस्में Pusa Purple Long: यह जल्दी पकने वाली किस्म है सर्दियों में यह 70-80 दिनों में और गर्मियों में यह 100-110 दिनों में पक जाती है इस किस्म के बूटे दरमियाने कद के और फल लंबे और जामुनी रंग के होते हैं इसकी औसतन पैदावार 120 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa Purple Cluster: यह किस्म आई. सी. ए. आर. नई दिल्ली द्वारा बनाई गई है यह दरमियाने समय की किस्म है इसके फल गहरे जामुनी रंग और गुच्छे में होते हैं यह बैक्टीरिया सूखे के कुछ हद तक प्रतिरोधक है Pusa Kranti: यह किस्म IARI, नई दिल्ली द्वारा विकसित की गई है यह किस्म बसंत और पतझड़ के मौसम में उगाने के लिए अनुकूल है यह किसम 130-150 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती हे इसके फल आकर्षित गहरे जामुनी रंग के होते हैं इसकी औसतन पैदावार 56-64 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Punjab Sadabahar: इसकी औसतन पैदावार 120-160 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Punjab Basarati: इसकी औसतन पैदावार 120-140 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pant Samrat: इसके फल रोपाई के 70 दिनों के बाद तुड़ाई के लिए तैयार हो जाते हैं गोल किस्में Pusa Purple Round: यह किस्म छोटे पत्ते, शाख और फल के छेदक की रोधक किस्म है Pant Rituraj: इस किस्म के फल गोल और आकर्षित जामुनी रंग के होते हैं और इनमें बीज की मात्रा भी कम होती है इसकी औसतन पैदावार 160 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Banaras Giant: यह वाराणसी और उसके नजदीक के क्षेत्रों में प्रसिद्ध किस्म है इसके फल हरे और सफेद रंग के होते हैं इसकी औसतन पैदावार 400 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Swarna Mani: यह किस्म बैक्टीरियल सूखे के प्रतिरोधक किस्म है इसकी औसतन पैदावार 24-26 टन प्रति एकड़ होती है Swarna Ajay: इसकी औसतन पैदावार 28-30 टन प्रति एकड़ होती है बैंगन की खेती पूरे वर्ष की जाती है खरीफ मौसम के लिए, नर्सरी फरवरी - मार्च के महीने में तैयार करें और मार्च - अप्रैल के महीने में रोपाई करें सर्दियों के मौसम में, नर्सरी की तैयारी के लिए जून जुलाई का समय उपयुक्त होता है और रोपाई के लिए जुलाई अगस्त का महीना उपयुक्त होता है बसंत के मौसम में, सितंबर के महीने में नर्सरी तैयार करें और अक्तूबर - नवंबर के महीने में रोपाई पूरी कर लें लंबी किस्मों के लिए, कतार से कतार में 60-75 सैं.मी. जबकि गोल किस्मों के लिए कतारों में 80-90 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 60-70 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें नर्सरी में, बीज को 1.5 सैं.मी. गहराई में बोयें और मिट्टी से ढक दें खेत में पनीरी लगाकर इसकी बिजाई की जाती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की तीन से चार बार जोताई करें गाय का गला हुआ गोबर 42 क्विंटल प्रति एकड़ में डालें और मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें बैंगन के बीज 3 मीटर लंबे, 1 मीटर चौड़े और 15 सैं.मी. ऊंचे बैडों पर बोये जाते हैं पहले बैडों में बढ़िया रूड़ी की खाद डालें फिर बिजाई से दो दिन पहले कप्तान का घोल डालें ताकि जो नर्सरी बैडों में पौधों को नष्ट होने से बचाया जा सके उसके बाद बीजों को कतारों में 2.5 सैं.मी. के फासले पर और 1.5 सैं.मी. की गहराई पर बोयें हल्की सिंचाई करें पौधों के अंकुरन तक बैडों को काले रंग की पॉलीथीन शीट या पराली से ढक दें तंदरूस्त पौधे जिनके 3-4 पत्ते निकलें हों और कद 12-15 सैं.मी. (30-40 days crop) हो, खेत में पनीरी लगाने के लिए तैयार होते हैं बैंगन की खेती पूरे वर्ष की जाती है खरीफ मौसम के लिए, नर्सरी फरवरी - मार्च के महीने में तैयार करें और मार्च - अप्रैल के महीने में रोपाई करें सर्दियों के मौसम में, नर्सरी की तैयारी के लिए जून जुलाई का समय उपयुक्त होता है और रोपाई के लिए जुलाई अगस्त का महीना उपयुक्त होता है बसंत के मौसम में, सितंबर के महीने में नर्सरी तैयार करें और अक्तूबर - नवंबर के महीने में रोपाई पूरी कर लें लंबी किस्मों के लिए, कतार से कतार में 60-75 सैं.मी. जबकि गोल किस्मों के लिए कतारों में 80-90 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 60-70 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें नर्सरी में, बीज को 1.5 सैं.मी. गहराई में बोयें और मिट्टी से ढक दें खेत में पनीरी लगाकर इसकी बिजाई की जाती है एक एकड़ खेत में बिजाई के लिए 300-400 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें नाइट्रोजन 60 किलो (130 किलो यूरिया), फासफोरस 20 किलो (125 किलो सिंगल सुपर फासफेट) और पोटाश 20 किलो (35 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश) की मात्रा प्रति एकड़ में प्रयोग करें नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा आखिरी जोताई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन को रोपाई के बाद 30 वें और 45वें दिन डालें नदीनों को रोकने, अच्छे विकास और उचित हवा के लिए दो - चार गोडाई करें काले रंग की पॉलिथीन शीट से पौधों को ढक दें जिससे नदीनों का विकास कम हो जाता है और ज़मीन का तापमान भी बना रहता हैं नदीनों को रोकने के लिए पौधे लगाने से पहले मिट्टी में फलूकलोरालिन 600-800 मि.ली. प्रति एकड़ या ऑक्साडायाज़ोन 400 ग्राम प्रति एकड़ डालें अच्छे परिणाम के लिए पौधे लगाने से पहले एलाकलोर 2 लीटर प्रति एकड़ की मिट्टी के तल पर स्प्रे

Posted by ਹਰਤੇਜ ਸਿੰਘ
Punjab
29-11-2019 02:03 PM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਨਵੰਬਰ ਦੇ ਚੌਥੇ ਹਫਤੇ ਤੋਂ ਬਾਅਦ PBW-658 ਅਤੇ PBW-752 ਕਿਸਮਾਂ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੀ

Posted by abhisheksinh
Gujarat
29-11-2019 01:57 PM
इलायची की बिजाई के लिए जून - जुलाई का महीना उपयुक्त होता है इलायची के रोपण करते समय भूमि में जल संरक्षण करना बहुत आवश्यक है कम बारिश वाले भाग में और ढलान वाली भूमि में जल संरक्षण करना जरूरी है इसकी फसल में नीम की खली एक किलोग्राम मुर्गी की खाद , FARMYARD खाद , कम्पोस्ट खाद या वर्मी कम्पोस्ट खाद की २ किलोग्राम की मात्.... (Read More)
इलायची की बिजाई के लिए जून - जुलाई का महीना उपयुक्त होता है इलायची के रोपण करते समय भूमि में जल संरक्षण करना बहुत आवश्यक है कम बारिश वाले भाग में और ढलान वाली भूमि में जल संरक्षण करना जरूरी है इसकी फसल में नीम की खली एक किलोग्राम मुर्गी की खाद , FARMYARD खाद , कम्पोस्ट खाद या वर्मी कम्पोस्ट खाद की २ किलोग्राम की मात्रा को जैविक खाद के रूप में प्रयोग करना चाहिए इस खाद का प्रयोग एक साल में एक बार किया जा सकता है यदि इस खाद को हम मई या जून के महीने में प्रयोग करते है तो बहुत फायदेमंद होता है इलायची की फसल में लगने वाले रोग की रोकथाम करने के लिए :-इलायची की फसल में मुख्य रूप से फंगल रोग और पेड़ों की झुरमुट सड़ांध है इस रोग से इलायची का पौधा बिलकुल बेकार हो जाता है जिससे हमे उन्नत किस्म की उपज नही मिलती इसकी रोकथाम करने के लिए हमे बीजों को ट्राईकोडरमा कीटनाशक दवा से उपचरित करके बोना चाहिए इसके आलावा इलायची की बुआई उचित समय पर करनी चाहिए इलायची का जो पौधा वायरस के प्रभाव में आ जाता है उसके वायरस को और ना बढ़ने दें रोगग्रस्त पौधे को उखाड़कर जलाकर नष्ट कर दें इलायची की खेती करने के लिए 10 डिग्री से 30 डिग्री का तापमान सबसे उत्तम माना जाता है तापमान के साथ – साथ इलायची की अधिक उपज लेने के लिए नमी युक्त स्थान और छायादार स्थान का होना बहुत जरूरी है

Posted by RISHI KUMAR
Uttar Pradesh
29-11-2019 01:56 PM
rishi ji yeh tatv ki kami hai iske liye aap vermicompost@4 kilo ko prati paudhe ke hisab se istemal karen.dhanywad

Posted by Ronak Tomar
Uttar Pradesh
29-11-2019 01:52 PM
ronak ji mausam vibhag ke anusar aaj mausam lagbhag saaf hai.dhanywad

Posted by sunil
Madhya Pradesh
29-11-2019 01:51 PM
sunil ji kripya aap apna swal vistar se pooche taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by Rajat kumar
Punjab
29-11-2019 01:48 PM
shrimaan g jekar pani jyada ruk gya hai tn knak di germination ghat skdi hai eh khet di condition te depend krda hai g..
Posted by ਤਨਵੀਰ ਸਿੰਘ
Punjab
29-11-2019 01:47 PM
tanveer ji kripa karke daso ke kehdi fasl di bijai kiti hai kyuki fasl de hisab nal hi nadeenashak di spray di sifarish kiti jandi hai.dhanwad
Posted by Dhiraj mishra
Uttar Pradesh
29-11-2019 01:47 PM
shrimaan g kirpa krke apna swaal visthaar se pucho ta jo aapko proper jaankari mil ske g..

Posted by Kanhaiya Singh
Uttar Pradesh
29-11-2019 01:26 PM
उत्तर में यह वर्षा और बसंत के मौसम में उगाई जाती है खरीफ के मौसम में, इसकी बिजाई जून-जुलाई के महीने और बसंत ऋतु में फरवरी-मार्च के महीने में की जाती है
Posted by akash singh
Punjab
29-11-2019 01:20 PM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ Buprofenzin 25% ਝੋਨੇ ਵਿੱਚ ਹੌਪਰ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਵਰਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਦੀ ਮਾਤਰਾ @300 ਮਿਲੀਲਿਟਰ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇਅ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੀ ਨਰਮੇ ਵਿੱਚ ਇਸ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਮਿਲੀਬਗ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਸਪਰੇਅ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਦੀ ਮਾਤਰਾ @500 ਮਿਲੀਲਿਟਰ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ
Posted by akash singh
Punjab
29-11-2019 01:18 PM
ਅਮਰੀਕ ਜੀ ਇਹ ਤੇਲੇ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਦੇ ਲਈ ਵਰਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਕਣਕ ਅਤੇ ਝੋਨੇ ਦੋਨਾਂ ਵਿਚ ਇਸਦੀ ਮਾਤਰਾ 250 -300 ml ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by akash singh
Punjab
29-11-2019 01:18 PM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਥਾਇਆਮੈਥੋਕਸਮ 25% ਨਰਮੇ ਝੋਨੇ ਅਤੇ ਕਣਕ ਵਿੱਚ ਤੇਲੇ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਸਪਰੇਅ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਵਲੋਂ @40 ਗਰਾਮ ਦੱਸੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਪਰੰਤੂ ਕਿਸਾਨ @100 ਗਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇਅ ਕਰਦੇ ਹਨ
Posted by akash singh
Punjab
29-11-2019 01:17 PM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ Propiconazole 25% ਸਾਲਟ ਝੋਨੇ ਅਤੇ ਕਣਕ ਵਿੱਚ ਫੰਗਸ ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਨੂੰ ਰੋਕਣ ਲਈ ਸਪਰੇਅ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਦੀ ਮਾਤਰਾ @200-250 ਮਿਲੀਲਿਟਰ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਨਰਮੇ ਵਿੱਚ ਇਸ ਦੀ ਲੋੜ ਨਹੀਂ ਪੈਂਦੀ ਹੈ

Posted by dinesh
Rajasthan
29-11-2019 01:17 PM
shrimaan g matar ki fasal mein UPL Saaf @500 gm per acre ka chitta de skte ho g..
Posted by akash singh
Punjab
29-11-2019 01:16 PM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ Emamectin Benzoate 5% ਕੈਮੀਕਲ ਦਾ ਸਪਰੇਅ ਝੋਨੇ ਅਤੇ ਕਣਕ ਵਿੱਚ ਸੁੰਡੀ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਸਪਰੇਅ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਦੀ ਮਾਤਰਾ @80 ਗਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਨਰਮੇ ਵਿੱਚ ਇਸ ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਕਰਨ ਦੀ ਲੋੜ ਨਹੀਂ ਪੈਂਦੀ ਹੈ
Posted by Omenndra Shakya
Uttar Pradesh
29-11-2019 01:16 PM
Omenndra ji kripya aap swal vistar se pooche ke aap phool aur kiran kise keh rahe hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by akash singh
Punjab
29-11-2019 01:15 PM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ Azoxystrobin 11%+tebuconazole 18% ਸਾਲਟ ਝੋਨੇ ਨਰਮੇ ਅਤੇ ਕਣਕ ਵਿੱਚ ਫੰਗਸ ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਨੂੰ ਰੋਕਣ ਲਈ ਅਤੇ ਹਰਾ ਭਰਾ ਰਖਣ ਲਈ ਸਪਰੇਅ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਦੀ ਮਾਤਰਾ @200 ਮਿਲੀਲਿਟਰ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ
Posted by akash singh
Punjab
29-11-2019 01:14 PM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ Azoxystrobin 18.2% + Difoconazole 11.4% ਸਾਲਟ ਝੋਨੇ ਨਰਮੇ ਅਤੇ ਕਣਕ ਵਿੱਚ ਫੰਗਸ ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਨੂੰ ਰੋਕਣ ਲਈ ਸਪਰੇਅ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਦੀ ਮਾਤਰਾ 200 ਮਿਲੀਲਿਟਰ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ
Posted by akash singh
Punjab
29-11-2019 01:11 PM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ clodinafop 15% ਛੋਟੇ ਗੁੱਲੀ ਡੰਡੇ ਨੂੰ ਬਹੁਤ ਵਧੀਆ ਮਾਰਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਦੀ ਮਾਤਰਾ @160 ਗਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ
Posted by akash singh
Punjab
29-11-2019 01:09 PM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ Sulfosulfuron 75% ਸਾਲਟ ਦਾ ਸਪਰੇਅ ਕਣਕ ਨੂੰ ਪਹਿਲਾ ਪਾਣੀ ਲਗਾਉਣ ਸਮੇਂ ਕਰੋ ਜੀ ਇਸ ਦੀ ਮਾਤਰਾ @13 ਗਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ
Posted by akash singh
Punjab
29-11-2019 01:08 PM
ਅਮਰੀਕ ਜੀ ਇਹ 2 -3 ਪੱਤਿਆਂ ਤਕ ਦੇ ਨਦੀਨਾਂ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਕਰਦੀ ਹੈ
Posted by akash singh
Punjab
29-11-2019 01:08 PM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ metsulfuron methyl 20% wp ਸਾਲਟ ਦਾ ਸਪਰੇਅ 2-4 ਪਤੇ ਬਾਥੂ ਤੇ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੀ ਇਸ ਦੀ ਮਾਤਰਾ 10 ਗਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ
Posted by akash singh
Punjab
29-11-2019 01:07 PM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ 2-4 D sodium salt 80% ਦਾ ਸਪਰੇਅ 40-55 ਦਿਨ ਦੀ ਕਣਕ ਵਿੱਚ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੀ ਇਸ ਦੀ ਮਾਤਰਾ 250 ਗਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ
Posted by akash singh
Punjab
29-11-2019 01:06 PM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ 2-4D ethyl ester 38% ਸਾਲਟ ਦਾ ਸਪਰੇਅ ਸਮੇਂ ਸਿਰ ਬੀਜੀ ਕਣਕ ਵਿੱਚ 35-45 ਅਤੇ ਪਿਛੇਤੀ ਬੀਜੀ ਕਣਕ ਵਿੱਚ 45-55 ਦਿਨਾਂ ਤੇ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੀ ਇਸ ਦੀ ਮਾਤਰਾ 250 ਮਿਲੀਲਿਟਰ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ

Posted by Gurjinder Singh
Punjab
29-11-2019 01:06 PM
shrimaan g knak vich total 110 kg urea 50 kg DAP and potash deficiency wali jameen vich 25 kg potash per acre di sifarish hai g..
Posted by akash singh
Punjab
29-11-2019 01:05 PM
ਅਮਰੀਕ ਜੀ ਇਹ ਵੀ ਨਦੀਨ 3 -4 ਪੱਤਿਆਂ ਦੇ ਨਦੀਨਾਂ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਕਰਦਾ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by shyam lal
Rajasthan
29-11-2019 01:02 PM
मिट्टी की जांच के आधार पर खादों का प्रयोग करें मिट्टी की जांच की मदद से हम खादों को मिट्टी की आवश्यकता के आधार पर दे सकते हैं गेहूं की समय पर बिजाई के लिए नाइट्रोजन 37-50 किलो (यूरिया 80-100 किलो), फासफोरस 8-15 किलो (एस एस पी 50-90 किलो) और पोटाश 12.5 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 20 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा, पोट.... (Read More)
मिट्टी की जांच के आधार पर खादों का प्रयोग करें मिट्टी की जांच की मदद से हम खादों को मिट्टी की आवश्यकता के आधार पर दे सकते हैं गेहूं की समय पर बिजाई के लिए नाइट्रोजन 37-50 किलो (यूरिया 80-100 किलो), फासफोरस 8-15 किलो (एस एस पी 50-90 किलो) और पोटाश 12.5 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 20 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा, पोटाश और फासफोरस की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें पहली सिंचाई के बाद नाइट्रोजन की बाकी बची आधी मात्रा डाल दें
उपज को बढ़ाने के लिए जिंक सलफेट 10 किलोग्राम प्रति एकड़ में डालें जिंक की कमी को जिंक सल्फेट 0.5 प्रतिशत की फोलियर स्प्रे करके पूरा किया जा सकता है 15 दिनों के अंतराल पर दो से तीन स्प्रे करें मजबूत तने और उपज के लिए, बिजाई के 30 दिनों के बाद 19:19:19 पानी में घुलनशील खाद 5 ग्राम + स्टिकर 0.5 मि.ली. को प्रति लीटर पानी में डालकर स्प्रे करें

Posted by Harpreet singh
Punjab
29-11-2019 12:58 PM
shrimaan g knak vich pehla pani beejayi to 21-25 din baad lgao g and pani lgoun to 1 din pehla urea da chitta de skde ho g..
Posted by kishan ray
Bihar
29-11-2019 12:45 PM
कृष्ण जी कृपया आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके

Posted by Alok Kumar
Uttar Pradesh
29-11-2019 12:45 PM
मेंथा तेल बेचने के लिए या इसके मौजूदा रेट की पूरी जानकारी के लिए आप पवन चौधरी 9719976268 से संपर्क कर सकते है।

Posted by Rahul Patel
Madhya Pradesh
29-11-2019 12:34 PM
राहुल जी आप इसके ऊपर mancozeb @400 ग्राम को प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें इसके इलावा आप इसकी जड़ों में कीट का हमला चेक करें धन्यवाद

Posted by Gurpreet Nafri
Punjab
29-11-2019 12:20 PM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ HD-2967 ਕਿਸਮ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਨਵੰਬਰ ਦੇ ਚੌਥੇ ਹਫਤੇ ਤਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੀ ਜਿਆਦਾ ਲੇਟ ਬਿਜਾਈ ਹੋਣ ਕਰਕੇ ਝਾੜ ਵਿੱਚ ਫਰਕ ਪੈ ਸਕਦਾ ਹੈ ਜੀ
Posted by Rahul Dedha
Uttar Pradesh
29-11-2019 12:19 PM
राहुल जी इसके साथ पशुओं के दूध में फायदा होता है उनकी कमज़ोरी दूर रहती है और तनाव मुक्त होते है और गाभिन पशुओं का शरीर तंदरुस्त रहता है

Posted by gurjinder singh
Punjab
29-11-2019 12:16 PM
ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 30 ਤੋਂ 35 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ 16 ਗ੍ਰਾਮ ਟੋਟਲ/ ਮਾਰਕਪਾਵਰ 75 ਡਬਲਯੂ ਜੀ (ਸਲਫੋਸਲਫੂਰਾਨ+ਮੈਟਸਲਫੂਰਾਨ) ਜਾਂ 160 ਗ੍ਰਾਮ ਐਟਲਾਂਟਿਸ 3.6 ਡਬਲਯੂ ਡੀ ਜੀ (ਮਿਜ਼ੋਸਲਫੂਰਾਨ+ਆਇਡੋਸਲਫੂਰਾਨ) ਜਾਂ 200 ਗ੍ਰਾਮ ਸ਼ਗਨ 21-11 (ਕਲੋਡੀਨਾਫੌਪ +ਮੈਟਰੀਬਿਊਜ਼ਿਨ)ਾਂ 240 ਗ੍ਰਾਮ ਏ ਸੀ ਐਮ 9 (ਕਲੋਡੀਨਾਫੋਪ+ਮੈਟਰੀਬਿਊਜ਼ਿਨ)ਨੂੰ 150 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਘੋਲ ਕੇ ਛਿੜਕਾਅ ਕਰੋ

Posted by कृष्णा कुमार
Bihar
29-11-2019 12:16 PM
कृष्णा जी एक बीघा में यूरिया 81.25 किलो,एस एस पी 93 किलो,म्यूरेट ऑफ पोटाश 12.5 किलो,की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी नाइट्रोजन को पहली सिंचाई के समय डालें
Posted by Mahadeb Mohanta
Odisha
29-11-2019 12:15 PM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद

Posted by LUCKY SONKAR
Uttar Pradesh
29-11-2019 12:13 PM
जलवायु सुपारी की खेती समुद्र तल से 1,000 मीटर की ऊंचाई पर भूमध्य रेखा के 28 डिग्री उत्तर और 28 डिग्री दक्षिण क्षेत्रों के बीच की जाती है, जहां तापमान 15 से 38 डिग्री सेंटीग्रेड रहता है सुपारी की खेती सफलतापूर्वक की जाती है भूमि सुपारी को कई प्रकार की भूमि में उगाया जा सकता है, लेकिन समुद्र के किनारे की भूमि जिसमें सि.... (Read More)
जलवायु सुपारी की खेती समुद्र तल से 1,000 मीटर की ऊंचाई पर भूमध्य रेखा के 28 डिग्री उत्तर और 28 डिग्री दक्षिण क्षेत्रों के बीच की जाती है, जहां तापमान 15 से 38 डिग्री सेंटीग्रेड रहता है सुपारी की खेती सफलतापूर्वक की जाती है भूमि सुपारी को कई प्रकार की भूमि में उगाया जा सकता है, लेकिन समुद्र के किनारे की भूमि जिसमें सिंचाई की सुविधा और जल निकासी की व्यवस्था अच्छी है सुपारी प्रजाति उनमें कई नई किस्मों का चयन किया गया है, जिनमें मंगला, सुमंगला, श्री मंगला और मोहित नगर आदि शामिल हैं काली -17, एक स्थानीय किस्म अंडमान द्वीप समूह में स्थित होने के लिए बहुत उपयुक्त पाई गई है पौध रोपण पौधे लगाने के लिए पहले खेत की जुताई करके सिंचाई तथा जल निकास की नालियां बना ली जाती है खेत का रेखांकन वर्गाकार विधि से जिसमें 2.7 मी० पंक्ति से पंक्ति तथा 2.7 मीटर पौधों से पौधे की दूरी पर पौध लगाने के लिए किया जाता है रेखांकन के बाद 90 घन सेमी० के गड्ढे खोदे जाते हैं और उनमें 15 किलोग्राम सङी कम्पोस्ट या गोबर की खाद और ऊपरी सतह की गड्ढे की खुदी मिट्टी को मिलाकर भर दिया जाता है पौधों का रोपण जून-जुलाई में करना चाहिए नर्सरी में तैयार 12 से 18 महीने पुराने पौधे जिनमें पत्तियां अधिक हो तथा ऊंचाई कम हो, लगाने के लिए अच्छे माने जाते हैं सुपारी के पौधों को मिश्रित फसल के रुप में केला, अनन्नास, कोको आदि फसलों के साथ भी लगाया जाता है पौध प्रसारण सुपारी के पौधे बीज से प्रसारित किये जाते है अच्छी किस्म के रोग रहित तथा फलत वाले पौधों से बीज नट जो पुर्णतय परिपक्व हो, छाँटे जाते है बीज नट बालू की क्यारियों में 5 से 6 से.मी. की दूरी पर बोया जाता है बीज नट को बोने के बाद बालू से ढक दिया जाता है सामान्यत: बीज बोने के बाद 40 दिन में उग आते है तीन महीने तक उगे हुए पौधों को नर्सरी में ही रहने दिया जाता है, इसके बाद उन्हें दूसरी नर्सरी तैयार करके 30 X 30 से.मी. की दूरी पर बरसात में लगा दिया जाता है नर्सरी में पौधे 12 से 18 महीने में अंतिम खेत में लगाने के लिये तैयार हो जातें है

Posted by teekamsingh
Uttar Pradesh
29-11-2019 12:12 PM
टीकम जी आप गेंहू की किसम जैसे PBW 343: यह किस्म सिंचित और पिछेती बिजाई के क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है यह किस्म 130-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह गर्दन तोड़, जल जमाव की स्थितियों के प्रतिरोधक किस्म है यह करनाल बंट के भी प्रतिरोधक और झुलस रोग को सहनेयोग्य किस्म है इसकी औसतन पैदावार 19 क्विंटल प्रति एकड़ ह.... (Read More)
टीकम जी आप गेंहू की किसम जैसे PBW 343: यह किस्म सिंचित और पिछेती बिजाई के क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है यह किस्म 130-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह गर्दन तोड़, जल जमाव की स्थितियों के प्रतिरोधक किस्म है यह करनाल बंट के भी प्रतिरोधक और झुलस रोग को सहनेयोग्य किस्म है इसकी औसतन पैदावार 19 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
HD 2643: यह किस्म सिंचित और पिछेती बिजाई के क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है इस किस्म से अच्छी गुणवत्ता वाली रोटी बनती है यह पत्ता और धारीदार कुंगी के प्रतिरोधक और करनाल बंट को सहनेयोग्य किस्म है UP 2425: यह सिंचित स्थितियों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है DBW-14: यह किस्म सिंचित हालातों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त है यह जल्दी पकने वाली किस्म है इसके दाने सख्त होते हैं
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