
Posted by Albela Abhay
Bihar
30-11-2019 01:47 AM
abhay ji kripya aap apna swal vistar se pooche aapki awaaj saaf sunayi nahi de rahi hai.dhanywad

Posted by VISHAL
Uttar Pradesh
30-11-2019 12:17 AM
vishal ji aap kisme jaise DL 803-3, AKW 1071, GW 190, WH 147, LOK-1, HI 1077, GW 496,HD 2932, HI 1544, MP 1203, GW 366, GW 322, GW 273, HI 1454 ki bijai kar sakte hai.dhanywad

Posted by Aman Sharma
Punjab
29-11-2019 11:36 PM
ਜੇਕਰ ਉਹ ਤਾਰਾ ਸਾਫ ਕਰ ਰਹੀ ਹੈ ਅਤੇ ਹੀਟ ਦੇ ਲੱਛਣ ਦਿਖਾ ਰਹੀ ਹੈ ਤਾ ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ ਟੀਕਾ ਭਰਵਾਂ ਕੇ Pregstay gold ਪਾਊਡਰ 30 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ 20 ਦਿਨ ਤਕ ਦਿੰਦੇ ਰਹੋ, ਇਸ ਨਾਲ ਗੱਭਣ ਰਹਿਣ ਦੀ ਆਸ ਵੱਧ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਬਾਕੀ ਖੁਰਾਕ ਦੇਣ ਨਾਲ ਪਸ਼ੂ ਦੇ ਰਪੀਟ ਹੋਣ ਦਾ ਕੋਈ ਸੰਬੰਧ ਨਹੀਂ ਹੈ , ਇਸਦੇ ਹੋਰ ਬਹੁਤ ਕਾਰਨ ਹੁੰਦੇ ਹੈ, ਜਿਸ ਨਾਲ ਪਸ਼ੂ ਗੱਭਣ ਨਹੀਂ ਰਹਿੰਦਾ

Posted by dadu yadav
Gujarat
29-11-2019 11:30 PM
यादव जी आप जीरे की किस्मे जैसे Gujarat Jeera 2: यह किस्म गुजरात कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित की गई है इसकी औसतन पैदावार 2.8 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह किस्म 100 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है GC 4: यह किस्म राजस्थान के सभी क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है इसके दाने स्वाह जैसे भूरे रंग के होते हैं यह किस्.... (Read More)
यादव जी आप जीरे की किस्मे जैसे Gujarat Jeera 2: यह किस्म गुजरात कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित की गई है इसकी औसतन पैदावार 2.8 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह किस्म 100 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है GC 4: यह किस्म राजस्थान के सभी क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है इसके दाने स्वाह जैसे भूरे रंग के होते हैं यह किस्म 120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 2.4-2.8 क्विंटल प्रति एकड़ होती है

Posted by Avinash daya
Andhra Pradesh
29-11-2019 11:03 PM
कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by एम. के. रज़ा
Chattisgarh
29-11-2019 10:26 PM
इसे anti allergic के तौर पर प्रयोग किया जाता है इसे आप बकरी को 2—5 मि.ली. ग्रोथ के हिसाब से लगा सकते है

Posted by rajuram
Rajasthan
29-11-2019 10:26 PM
Rajuram ji seed lene ke lai aap Shine Brand Seeds 8770896002 se samparak kar sakte hai, Thankyou.
Posted by JAFAK KHAN
Uttar Pradesh
29-11-2019 10:04 PM
jafak ji kripya aap btaye ke aapne isme kya kya khaad daali hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake,dhanywad

Posted by suryabhan Sen
Madhya Pradesh
29-11-2019 10:00 PM
यदि आप देसी मुर्गी पालन करना चाहते है तो देसी मुर्गी पालन को हम कम पूँजी थोड़ी जमीन और थोड़ी सी मेहनत से आसानी से किया जा सकता है , मुर्गी पालन का चलन भारत में तेज़ी से बढ़ रहा है चीन और अमेरिका के बाद भारत अंडा उत्पादन में तीसरे स्थान पर और मांस उत्पादन में 5 स्थान पर है यह 3 देसी मुर्गी की प्रजातियां ज्यादा प्रचलित.... (Read More)
यदि आप देसी मुर्गी पालन करना चाहते है तो देसी मुर्गी पालन को हम कम पूँजी थोड़ी जमीन और थोड़ी सी मेहनत से आसानी से किया जा सकता है , मुर्गी पालन का चलन भारत में तेज़ी से बढ़ रहा है चीन और अमेरिका के बाद भारत अंडा उत्पादन में तीसरे स्थान पर और मांस उत्पादन में 5 स्थान पर है यह 3 देसी मुर्गी की प्रजातियां ज्यादा प्रचलित हैं ग्रामप्रिया श्रीनिधि वनराजा कुक्कुट पालन परियोजना हैदराबाद के द्वारा यह तीनो प्रजातियां विकसित की गयीं हैं यह मुर्गियां अण्डों और मांस दोनों के लिए बहुत लाभदायक हैं देखा जाता है के जो हमारे किसान भाई ग्रामीण प्रजाति के मुर्गी पालन करते हैं उसके अपेक्षा में यह संकर नस्ल की प्रजाति अंडे और मांस में ज्यादा मुनाफा देता हैं आइये हम विस्तार से इन तीन प्रजाति के बारे में बात करें ग्रामप्रिया – ग्रामप्रिया प्रजाति की मुर्गियां भी दोहरी उपयोगिता वाली प्रजाति की मुर्गी है इसका अर्थ यह है के यह अंडा और मांस दोनों के लिए उपयोगी है , 18 महीने में यह 240 से 250 अंडे तक दे सकती है और इसका वजन 1.5 kg से 2 kg तक होता है श्रीनिधि प्रजाति की मुर्गी – यह प्रजाति ग्रामीण प्रजाति की मुर्गी के अपेक्षा में 230-250 अंडे तक देती है , श्रीनिधि मुर्गियों का वजन 2.5kg से लेकर 5 kg तक का होता है जो की ग्रामीण प्रजाति के मुर्गियों से बहुत ज्यादा है इसीलिए यह दोहरी उपयोगिता प्रजाति में गिनी जाती है इसके मांस और अंडे दोनों से ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता है ,इन प्रजातियों की मुर्गियां तेजी से बढ़ती हैं वनराजा – वनराजा प्रजाति की मुर्गियां भी ग्रामीण प्रवेश के लिए काफी अच्छी मानी जाती है यह मुर्गी 120 – 130 अंडे 3 महीने में देती है देसी मुर्गी पालन के लिए यह 3 विकसित प्रजातियां बहुत ही लाभदायक साबित हुई है. चूज़े लेने के लिए आप Dr Shashikant Patle 9098572227 से संपर्क कर सकते है
Posted by Rajju
Madhya Pradesh
29-11-2019 09:54 PM
Rajju ji agar aap New tractar lena chahte hai to aap Pardhan Mantri Tractor yojna ka labh utha sakte hai, Is yojna ke bare me puri jankari ke lia aap apne nazdiki SBI Bank se samparak kare, Thankyou.

Posted by malkeet
Punjab
29-11-2019 09:47 PM
मलकीत जी उसे दो महीने तक मां का दूध पिलाएं जितना वो आसानी से हज़म कर सके उस हिसाब से दे सकते है

Posted by malkeet
Punjab
29-11-2019 09:42 PM
Malkeet ji tuci uss nu picosulfate liquid 1 chamch kosse pani garam krke deo, iss nal frak paa jawega..
Posted by Kanisk
Chattisgarh
29-11-2019 09:35 PM
Kanisk ji kripya btaye ke aap konsi kisam ki bijai karna chahte hai taki aapko uske hisab se jankari di ja sake.dhanywad
Posted by Amit Tiwari
Madhya Pradesh
29-11-2019 09:27 PM
बीज को जुलाई के दूसरे सप्ताह से सितंबर के तीसरे सप्ताह में बोया जाता है और सितंबर के पहले सप्ताह से मध्य अक्तूबर तक रोपाई की जाती है पौधे से पौधे में 1.5x1.5 मीटर फासले का प्रयोग करें बीज को 1 सैं.मी. की गहराई पर बोयें
Posted by Mandeep Singh
Haryana
29-11-2019 09:26 PM
Mandeep ji iss nasal ka aap commercial level per v rakh skte hai, iska dudh aur dudh mai fatt achi hoti hai, lekin yaddi aap jyada dudh ke liye farm khol rehe hai too aap HF nasal ki cow rakh skte hai, Jersey cow shooti hight wali nasal hai, isko bimaria v kam lgdi hai, isda dudh v acha hota hai, aap suruat kam pashuo se kr skte hai jaise jaise apko iss kam ki jankari milti hoti rehegi fir aap iss kam ko vdha skte hai..
Posted by Kanisk
Chattisgarh
29-11-2019 09:18 PM
Kanisk ji aap kisme jaise kashi satdhari,kashi vibhuti , Kashi mangali jaisi kismo ki bijai kar sakte hai.dhanywad

Posted by Harpreet Singh
Punjab
29-11-2019 08:59 PM
श्रीमान जी गेहूं में सल्फर 8 किलो प्रति एकड़ के हिसाब से छिड़काव करें और यदि गेहूं 20—22 दिन की हो जाए तब आप 35 किलो यूरिया प्रति एकड़ के हिसाब से छींटा दे सकते है

Posted by Gurri Saspali
Punjab
29-11-2019 08:56 PM
Gurri ji tuci pehla ohna de bhukar di janch krwao, jekar bhukar bilkul sahi hai tan tuci ohna nu Livoferol liquid 100ml rojana, Aptifast bolus 1-1 goli swere sham deo ate pett de kiria lai Flukarid-Ds bolus deo, baki tuci Calcium lai calcimust gold liquid di varto kr skde ho, ehh tuci 50ml rojana deo, iss nal frak paa jawega, tuci feed ohhi varto jo tuci pehla ton dinde c kyuki ek dum feed change krnn nal duudh ghht jnda hai ate pashu uss nu khana v shhd dinda hai.

Posted by gurdeep singh
Punjab
29-11-2019 08:48 PM
gurdeep ji tuc kanak diyan kisman jive PBW590,PBW509,PBW658 di bijai kar sakde ho.dhanwad
Posted by R.Bala ji soni
Uttar Pradesh
29-11-2019 08:41 PM
अच्छे उत्पादन के लिये कुसुम फसल के लिये मध्यम काली भूमि से लेकर भारी काली भूमि उपयुक्त मानी जाती है कुसुम की उत्पादन क्षमता का सही लाभ लेने के लिये इसे गहरी काली जमीन मेें ही बोना चाहिये इस फसल की जड़ें जमीन में गहरी जाती है कुसुम फसल के बीजों को बोनी करने के पूर्व बीजोपचार करना आवश्यक है, जिससे कि फफूंद से ल.... (Read More)
अच्छे उत्पादन के लिये कुसुम फसल के लिये मध्यम काली भूमि से लेकर भारी काली भूमि उपयुक्त मानी जाती है कुसुम की उत्पादन क्षमता का सही लाभ लेने के लिये इसे गहरी काली जमीन मेें ही बोना चाहिये इस फसल की जड़ें जमीन में गहरी जाती है कुसुम फसल के बीजों को बोनी करने के पूर्व बीजोपचार करना आवश्यक है, जिससे कि फफूंद से लगने वाली बीमारियों न हो बीजों का उपचार करने हेतु 3 ग्राम थायरम या ब्रासीकाल फफूंदनाशक दवा प्रति एक किलोग्राम स्वस्थ्य बीज के लिये पर्याप्त है मूँग या उड़द यदि खरीफ मौसम में बोई गई हो तो कुसुम फसल बोने का उपयुक्त समय सितम्बर माह के अंतिम से अक्टूबर माह के प्रथम सप्ताह तक है यदि खरीफ फसल के रुप में सोयबीन बोई है तो कुसुम फसल बोने का उपयुक्त समय अक्टूबर माह के अंत तक है बारानी खेती है और खरीफ में कोई भी फसल नहीं लगाई हो तो सितम्बर माह के अंत से अक्टूबर माह के प्रथम सप्ताह तक कुसुम फसल सफलतापूर्वक बो सकते हैं 8 किलोग्राम कुसुम का बीज प्रति एकड़ के हिसाब से दुफन या फड़क से बोना चाहिये बोते समय कतार से कतार की दूरी 45 से.मी. या डेढ़ फुट रखना आवश्यक है पौधे से पौधे की दूरी 20 से.मी. या 9 इंच रखना चाहिये असिंचित अवस्था में नत्रजन 16 किलोग्राम, स्फुर 16 किलोग्राम एवं 8 किलोग्राम पोटाश प्रति एकड़ की दर से देना चाहिये सिंचित स्थिति में 24:16:8 किलोग्राम नत्रजन, स्फुर एवं पोटाश प्रति एकड़ पर्याप्त है
हर तीसरे वर्ष में एक बार 8-10 गाड़ी गोबर की पकी हुई खाद प्रति एकड़ भूमि में मिलाना फायदेमंद रहता है तिलहनी फसल होने की वजह से गंधक की मात्रा 8 -10 किलोग्राम प्रति एकड़ देना उचित रहेगा
उर्वरक की सम्पूर्ण मात्रा असिंचित अवस्था में बोनी के समय ही भूमि में दें सिंचित स्थिति में नत्रजन की आधी मात्रा, स्फुर एवं पोटाश की पूरी मात्रा बोनी के समय दें और, शेष नत्रजन की आधी मात्रा प्रथम सिंचाई के समय दें
Posted by ਨਰਿੰਦਰ ਪਾਲ ਸਿੰਘ
Punjab
29-11-2019 08:35 PM
ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ Fatmax powder 50gm ਰੋਜਾਨਾ ਅਤੇ Mammidium ਪਾਊਡਰ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ ਬਾਕੀ ਉਸਦੀ ਖੁਰਾਕ ਦਾ ਪੂਰਾ ਧਿਆਨ ਰੱਖੋ ਜੀ
Posted by pardeep Yadav
Haryana
29-11-2019 08:27 PM
श्री मान गेहूं की पछेती किस्में PBW-658 ,PBW-752 और HD-2851 ki beejayi kr skte ho..

Posted by Shameem Ahsan
Uttar Pradesh
29-11-2019 08:26 PM
यदि आप लेयर मुर्गी पालन करना चाहते है तो लेयर फार्मिंग के लिए आपको 50 फीट लंबाई वाली जगह और 20 फीट चौड़ाई वाली जगह की जरूरत होती है यह आपका 1000 वर्ग फुट जगह बन जाती है यहां आप 1000 बच्चों को रख सकते हैं इस प्रकार आप अपने बजट के हिसाब से बच्चों को रख सकते है और यदि आप लेयर का बच्चा अपने फार्म पर तैयार करते है तो आपको बच्च.... (Read More)
यदि आप लेयर मुर्गी पालन करना चाहते है तो लेयर फार्मिंग के लिए आपको 50 फीट लंबाई वाली जगह और 20 फीट चौड़ाई वाली जगह की जरूरत होती है यह आपका 1000 वर्ग फुट जगह बन जाती है यहां आप 1000 बच्चों को रख सकते हैं इस प्रकार आप अपने बजट के हिसाब से बच्चों को रख सकते है और यदि आप लेयर का बच्चा अपने फार्म पर तैयार करते है तो आपको बच्चा अंडे देने तक 160—170 रूप्ये प्रति बच्चे के हिसाब से खर्चा आएगा यदि आप तैयार बच्चा लेकर आते है तो वो आपको 205—210 रूप्ये प्रति बच्चे के हिसाब से पड़ेगा फिर आप उस हिसाब से इनको खरीद सकते है.

Posted by आवधूत नागोराव कल्याणकर
Maharashtra
29-11-2019 08:25 PM
फोटो देखने पर लगता है के इसको कुछ नहीं हुआ है , इसका पकने का टाइम आ गया है इसलिए ऐसा है

Posted by Manoj Dhaker
Rajasthan
29-11-2019 08:24 PM
मनोज जी आप शिमला मिर्च की किस्मे जैसे Bomby (red color),Orobelle (yellow color),Indra (green),Indra की बिजाई कर सकते है शिमला मिर्च की खेती के लिए, ज़मीन को अच्छी तरह से तैयार करें ज़मीन को भुरभुरा बनाने के लिए, 5-6 बार सुहागे से जोताई करें खेत की तैयारी के समय खेत में रूड़ी की खाद डालें और मिट्टी में मिलाएं बीजों को मुख्य तौर पर अक्तूबर के अंत में बोय.... (Read More)
मनोज जी आप शिमला मिर्च की किस्मे जैसे Bomby (red color),Orobelle (yellow color),Indra (green),Indra की बिजाई कर सकते है शिमला मिर्च की खेती के लिए, ज़मीन को अच्छी तरह से तैयार करें ज़मीन को भुरभुरा बनाने के लिए, 5-6 बार सुहागे से जोताई करें खेत की तैयारी के समय खेत में रूड़ी की खाद डालें और मिट्टी में मिलाएं बीजों को मुख्य तौर पर अक्तूबर के अंत में बोयें और रोपण के लिए मध्य-फरवरी का समय उचित होता है जल्दी पैदावार के लिए, बीजों को मध्य-अक्तूबर में बोयें और रोपण के लिए नवंबर के अंत का समय उचित होता है बिजाई के लिए पंक्ति से पंक्ति में 50 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 40 सैं.मी. का फासला रखें बीज को 2-4 सैं.मी. गहरा बोयें

Posted by Chetan
Madhya Pradesh
29-11-2019 08:19 PM
गेंदे की खेती करना चाहते है से मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है पर यह अच्छे जल निकास वाली उपजाऊ मिट्टी में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है मिट्टी अच्छे निकास वाली होनी चाहिए क्योंकि यह फसल जल जमाव वाली मिट्टी में स्थिर नहीं रह सकती मिट्टी की pH 6.5 से 7.5 होनी चाहिए तेजाबी और खारी मिट्टी इसकी खेती के ल.... (Read More)
गेंदे की खेती करना चाहते है से मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है पर यह अच्छे जल निकास वाली उपजाऊ मिट्टी में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है मिट्टी अच्छे निकास वाली होनी चाहिए क्योंकि यह फसल जल जमाव वाली मिट्टी में स्थिर नहीं रह सकती मिट्टी की pH 6.5 से 7.5 होनी चाहिए तेजाबी और खारी मिट्टी इसकी खेती के लिए अनुकूल नहीं है फ्रैंच गेंदे की किस्म हल्की मिट्टी में अच्छी वृद्धि करती है जबकि अफ्रीकी गेंदे की किस्म उच्च जैविक खाद वाली मिट्टी में अच्छी वृद्धि करती है प्रसिद्ध किस्में :- African Marigold: इस किस्म की फसल 90 सैं.मी. तक लम्बी होती है इसके फूल बड़े आकार के और लैमन, पीले, सुनहरे, संतरी और गहरे पीले रंग के होते हैं यह लम्बे समय की किस्म है इसकी अन्य किस्में जैसे Giant Double African Orange, Crown of Gold, Giant Double African Yellow, Chrysanthemum Charm, Golden Age, Cracker Jack आदि हैं French Marigold: यह छोटे कद की जल्दी पकने वाली किस्में हैं इसके फूल छोटे आकार के और पीले, संतरी, सुनहरे पीले, लाल जंग और महोगनी रंग के होते हैं इसकी अन्य किस्में जैसे Rusty Red, Butter Scotch, Red Borcade, Star of India, Lemon drop आदि हैं Pusa Basanti Gainda: यह लम्बे समय की किस्म है इसका पौधा 58.80 सैं.मी. लम्बा और गहरे हरे रंग के पत्ते होते हैं इसके फूल सल्फर पीले, दोहरे और कारनेशन किस्म के होते हैं Pusa Narangi Gainda: फूल निकलने के लिए 125-136 दिनों की आवश्यकता होती है इसका पौधा लम्बा और कद में 73.30 सैं.मी. का होता है और पत्ते गहरे हरे रंग के होते हैं इसके फूल संतरी रंग के और कारनेशन किस्म के होते हैं फूल घने और दोहरी परत वाले होते हैं इसके ताजे फूलों की पैदावार 140 क्विंटल प्रति एकड़ होती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ाने के लिए आखिरी जोताई के समय 250 क्विंटल रूड़ी की खाद और अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर मिट्टी में मिलायें गेंदे की बिजाई एक वर्ष में कभी भी की जा सकती है बारिश के मौसम में इसकी बिजाई मध्य जून से मध्य जुलाई में करें सर्दियों में इसकी बिजाई मध्य सितंबर से मध्य अक्तूबर में पूरी कर लें नर्सरी बैड 3x1 मीटर आकार के तैयार करें गाय का गला हुआ गोबर मिलायें बैडों में नमी बनाए रखने के लिए पानी दें सूखे फूलों का चूरा करें और उनका कतार या बैड पर छिड़काव करें जब पौधों का कद 10-15 सैं.मी. हो जाये, तब वे रोपाई के लिए तैयार होते हैं फैंच किस्म को 35x35 सैं.मी. और अफ्रीकी किस्म को 45x45 सैं.मी. के फासले पर रोपाई करें नर्सरी बैड पर बीजों का छिड़काव करें बिजाई के लिए पनीरी ढंग का प्रयोग किया जाता है एक एकड़ खेत के लिए 600 से 800 ग्राम बीजों की आवश्यकता होती है जब फसल 30-45 दिन की हो जाए, तब पौधे के सिरे से उसे काट दें इससे पौधे को झाड़ीदार और घना होने में मदद मिलती है, इससे फूलों की गुणवत्ता और अच्छा आकार भी प्राप्त होता है बिजाई से पहले बीजों को एजोसपीरियम 200 ग्राम को 50 मि.ली. धान के चूरे में मिलाकर उपचार करें शुरूआती खुराक के तौर पर अच्छी वृद्धि के लिए नाइट्रोजन 32 किलो (यूरिया 70 किलो), फासफोरस 16 किलो (एस एस पी 100 किलो), पोटाश 32 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 53 किलो) प्रति एकड़ में डालें मिट्टी की किस्म के अनुसार खाद की खुराक बदल दें सही खुराक देने के लिए मिट्टी की जांच करवायें और उसके आधार पर खुराक दें नदीनों की संख्या के आधार पर गोडाई करें खेत में रोपाई के बाद तुरंत सिंचाई करें कली बनने से लेकर कटाई तक की अवस्था सिंचाई के लिए बहुत महत्तवपूर्ण होती है अप्रैल से जून के महीने में 4-5 दिनों के अंतराल पर लगातार सिंचाई करना आवश्यक होता है किस्म के आधार पर गेंदा 2 से 2.5 महीने में कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं फ्रैंच गेंदे की किस्म 1.5 महीने में कटाई के लिए तैयार हो जाती है जबकि अफ्रीकी गेंदे की किस्म दो महीने में तैयार हो जाती है जब गेंदे का पूरा आकार विकसित हो जाये तब उसे तोड़ लें कटाई सुबह के समय और शाम के समय करें फूलों की तुड़ाई से पहले खेत को सिंचित करना चाहिए इससे फूलों की गुणवत्ता लंबे समय तक बनी रहती है इसे आप अपनी नजदीकी फूल मंडी में बेच कर इसे अपनी आय का साधन बना सकते है इसका बीज आप कृषि यूनिवर्सिटी से ले सकते है या नजदीकी नर्सरी से ले सकते है जा फिर गेंदे और गुलाब के बीज लेने के लिए आप प्रेम राज सैनी 9719432296 से सम्पर्क करे धन्यवाद

Posted by amit Kumar
Bihar
29-11-2019 08:14 PM
amit ji alag alag phoolon ki kheti par alag kharcha aata hai kripya aap btaye ke aap konse flower ki kheti ke kharche ke bare men jankari lena chahte hai.dhanywad
Posted by vishram kumar gurjar
Rajasthan
29-11-2019 08:10 PM
आप उसे Fatplus पाउडर 50 ग्राम या Fatmax पाउडर 50 ग्राम और Enerboost पाउडर 50—50 ग्राम सुबह शाम दें, आप उसे अच्छी फीड के साथ एक किलो सरसों की खल, 1 किलो बड़ेवो की खल सुबह शाम दें , 20 ग्राम मीठा सोडा रोजाना एक बार दें इससे फर्क पड़ जाएगा
Posted by Bhoopendra Tomar
Uttar Pradesh
29-11-2019 08:06 PM
matar men sookha rog, kungii rog,patton men safed dhabbe rog lag jate hai.

Posted by Kuldeep Singh
Punjab
29-11-2019 08:04 PM
tuci ohna nu pett de kiria lai Flukarid-DS bolus deo ate ohna nu Bovimin-B powder 100gm rojana ate Gestaprogen powder 25gm rojana 20 din tak dinde rho fir agli varr heat vich auun te Tika bhrwa ke ehh powder 20 din tak hor dinde ho, iss nal gaban rehh jawegi..

Posted by Deepak
Uttarakhand
29-11-2019 08:01 PM

Posted by raman
Punjab
29-11-2019 07:50 PM
Raman ji sangrur me fish training ke lia aap Govt. fish seed Farm, Patiala gate Sangrur, ADF Rakesh Kumar 9417477865 nal samparak karsakde ho, Thankyou.
Posted by Mandeep Singh
Haryana
29-11-2019 07:47 PM
Mandeep ji yaddi aap Jersey nasal ke sath Farm krna chahte hai too aap Jersey cow se v farm suru kr skte hai, iska dudh v acha hota hai aur iss nasal ki bimaria v kam lggdi hai, yaddi aap iss kam ki Training lekar suru kren too apko iss kam ki aur v jankari milegi aur isme munafa kmane ka sahi trika pta lgg jayega, Training lene ke liye aap apne nazdiki Krishi vigyan kendar se sampark kr skte hai..

Posted by Biswajit
Odisha
29-11-2019 07:47 PM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by Ratanlal Panwar
Rajasthan
29-11-2019 07:45 PM
श्री मान गेहूं की बिजाई 20अक्टूबर से 30 नवम्बर तक कर सकते हो

Posted by bhasin
Punjab
29-11-2019 07:44 PM
bhasin ji kirpa karke isde salt da nam daso ate isde label di photo bhejo ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake. tuhade valo bheji gayi photo vich kuch vi dikhai nahi de reha.dhanwad

Posted by Laxman singh Sisodiya
Rajasthan
29-11-2019 07:35 PM
एक साहसी संयंत्र होने के नाते, दालचीनी जलवायु परिस्थितियों की एक विस्तृत श्रृंखला के लिए अनुकूल है इसके बारे में 1,000m की ऊंचाई पर अच्छी तरह से बढ़ता है और 200-250cm की वार्षिक वर्षा इसकी खेती के लिए आदर्श है दालचीनी व्यावसायिक रूप से एक वर्षा आधारित फसल के रूप में खेती की जाती है दालचीनी गरीब रेतीले दोमट मिट्टी क.... (Read More)
एक साहसी संयंत्र होने के नाते, दालचीनी जलवायु परिस्थितियों की एक विस्तृत श्रृंखला के लिए अनुकूल है इसके बारे में 1,000m की ऊंचाई पर अच्छी तरह से बढ़ता है और 200-250cm की वार्षिक वर्षा इसकी खेती के लिए आदर्श है दालचीनी व्यावसायिक रूप से एक वर्षा आधारित फसल के रूप में खेती की जाती है दालचीनी गरीब रेतीले दोमट मिट्टी के लिए पोषक तत्व अमीर बलुई मिट्टी से लेकर मिट्टी की एक विस्तृत श्रृंखला के लिए अनुकूल है कलमों और हवा परतों के माध्यम से बीज प्रसार और वनस्पति प्रचार आम तौर पर दालचीनी में अभ्यास कर रहे हैं पश्चिमी घाट में, दालचीनी जनवरी में फूलों और फलों जून से अगस्त के दौरान पकाना फल पेड़ से एकत्र कर रहे हैं और दालचीनी बीज बहुत कम व्यवहार्यता के रूप में तो बीज ज्यादा देरी के बिना हटा दिया है और साफ किया और बोया जाता है : 3: 1 के अनुपात बीज रेत बेड या एक 3 में रेत, मिट्टी और अच्छी तरह से पाउडर सूखे गोबर के मिश्रण युक्त पॉलिथीन की थैलियों में बोया जाता है पानी नियमित रूप से किया जाता है और बीज 10-20 दिनों के भीतर उगना वे 6 महीने पुरानी हो जाते हैं जब तक अंकुरों कृत्रिम छायांकन की आवश्यकता होती है दालचीनी के अंकुर के लिए आदर्श समय दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत में कर रहे हैं 50cm × 50cm × 50cm आकार के गड्ढे 3M × 3M की दूरी पर खोद रहे हैं और बोने से पहले खाद और ऊपर मिट्टी से भर रहे हैं आम तौर पर एक एक वर्ष के अंकुर लगाए हैं 4 -5 के अंकुर गड्ढे प्रति लगाए हैं और वे स्थापित हो जब तक पर्याप्त छाया अंकुरों के लिए प्रदान की जाती है 20 ग्राम एन, 18g P2O5 और 25 ग्राम के K2O की एक उर्वरक खुराक / अंकुर प्रथम वर्ष के लिए सिफारिश की है यह खुराक 200g एन, 180g P2O5 और 10 वर्ष और उससे अधिक की सयाना संयंत्रों के लिए 200 ग्राम K2O को धीरे-धीरे बढ़ रहा है उर्वरकों मई-जून और सितंबर-अक्टूबर में 2 बराबर विभाजित खुराकों में लागू किया जाना है दालचीनी एक वर्षा आधारित फसल है लेकिन 200-250cm की वार्षिक वर्षा आदर्श है प्रारंभिक 2-3 वर्षों में, पानी में एक सप्ताह में दो बार गर्मियों के महीनों के दौरान दिया जाता है पानी की मात्रा पौधों की मिट्टी की नमी का स्तर और विकास पर निर्भर करता है
Posted by Rahul Dedha
Uttar Pradesh
29-11-2019 07:35 PM
उसे आप Broton liquid 50-50ml सुबह शाम दें और Aptifast tablet एक एक गोली सुबह शाम दें इससे फर्क पड़ जाएगा

Posted by आशुतोष
Madhya Pradesh
29-11-2019 07:35 PM
इसे हर तरह की ज़मीन पर उगाया जा सकता है पर अच्छे जल निकास वाली हल्की ज़मीन इसके लिए सबसे अच्छी हैं मिट्टी की पी एच 5.5-6.5 होनी चाहिए यह अत्याधिक अम्लीय मिट्टी में वृद्धि नहीं कर सकती Golden Acre, Pusa Mukta, Pusa Drumhead, K-1, Pride of india, Kopan hagen, Ganga, Pusa synthetic, Shriganesh gol, Hariana, Kaveri, Bajrang. इन किस्मों की औसतन पैदावार 75-80 क्विंटल प्रति एकड़ होती है मिट्टी के भुरभुरा होन.... (Read More)
इसे हर तरह की ज़मीन पर उगाया जा सकता है पर अच्छे जल निकास वाली हल्की ज़मीन इसके लिए सबसे अच्छी हैं मिट्टी की पी एच 5.5-6.5 होनी चाहिए यह अत्याधिक अम्लीय मिट्टी में वृद्धि नहीं कर सकती Golden Acre, Pusa Mukta, Pusa Drumhead, K-1, Pride of india, Kopan hagen, Ganga, Pusa synthetic, Shriganesh gol, Hariana, Kaveri, Bajrang. इन किस्मों की औसतन पैदावार 75-80 क्विंटल प्रति एकड़ होती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें मिट्टी को समतल करने के लिए 3-4 बार जोताई करें आखिरी जोताई के समय अच्छी तरह से गले हुए गाय के गोबर को मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें सितंबर से अक्तूबर महीना समतल क्षेत्रों में फसल उगाने के लिए सही समय है जल्दी बोयी फसल में फासला 45x45 सैं.मी. और देर से बोयी फसल के लिए 60x45 सैं.मी. होना चाहिए बीज 1-2 सैं.मी. गहरे बीजने चाहिए इसकी बिजाई के लिए दो ढंग प्रयोग किए जाते हैं
• गड्ढा खोदकर
• खेत में रोपाई करके
नर्सरी में सबसे पहले बिजाई करें और खादों का प्रयोग आवश्यकता के अनुसार करें बिजाई के 25-30 दिनों के बाद नए पौधे रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं खेत में पौध की रोपाई के लिए 3-4 सप्ताह पुराने पौधों का प्रयोग करें बिजाई के लिए 200-250 ग्राम प्रति एकड़ बीज की जरूरत होती है ज़मीन में पूरी तरह गली हुई रूड़ी की खाद 40 टन और नाइट्रोजन 50 किलो (यूरिया 110 किलो), (फासफोरस 25 किलो), ( एस एस पी 115 किलो) और पोटाश 25 किलो, (एम ओ पी 40 किलो) प्रति एकड़ में डालें सारी रूड़ी की खाद, एस एस पी, एम ओ पी और आधी यूरिया पनीरी खेत में लगाने से पहले और बाकी यूरिया पनीरी खेत में लगाने के 4 सप्ताह बाद डालें
अच्छे फूल खिलने और अधिक पैदावार लेने के लिए फसल और पानी के घोल वाली खाद (19:19:19) 5-7 ग्राम प्रति लीटर शुरूआती दिनों में डालें पनीरी के खेत में लगाने के 40 दिन बाद 12:61:00, 4-5 ग्राम, सूक्ष्म तत्च 2.5-3 ग्राम बोरोन 1 ग्राम प्रति लीटर पानी की स्प्रे करें सेहतमंद फूल लेने के लिए फूल बनने के समय पानी घोल वाली खाद 13:00:45, 8-10 ग्राम प्रति लीटर पानी की स्प्रे करें
मिट्टी की जांच करवाएं और मैग्नीश्यिम की कमी आने पर मैगनीश्यिम सल्फेट 5 ग्राम प्रति लीटर की फसल खेत में लगाने के 30-35 दिनों के बाद स्प्रे करो और कैल्श्यिम की कमी आने पर कैल्श्यिम नाइट्रेट 5 ग्राम प्रति लीटर की फसल खेत में लगाने के 30-35 दिनों के बाद स्प्रे करें

Posted by Beant somal
Punjab
29-11-2019 07:26 PM
श्रीमान जी, गुल्ली डंडे की रोकथाम के लिए लीडर, टॉपिक का प्रयोग कर सकते हैं चौड़े पत्तों वाले नदीन की रोकथाम के लिए 2,4D 250 ml की स्प्रे कर सकते हैं, टॉपिक 15 डब्ल्यू पी (क्लोडिनाफाप) 160 ग्राम बिजाई के 30 से 35 दिनों के अंदर 150 प्रति एकड़, एक्सियल 5 ई सी (पिनोक्साडिन 400 मिलीलीटर), लीडर/मार्कसल्फो 75 डब्ल्यू जी (सल्फोसल्फ्यूरॉन).... (Read More)
श्रीमान जी, गुल्ली डंडे की रोकथाम के लिए लीडर, टॉपिक का प्रयोग कर सकते हैं चौड़े पत्तों वाले नदीन की रोकथाम के लिए 2,4D 250 ml की स्प्रे कर सकते हैं, टॉपिक 15 डब्ल्यू पी (क्लोडिनाफाप) 160 ग्राम बिजाई के 30 से 35 दिनों के अंदर 150 प्रति एकड़, एक्सियल 5 ई सी (पिनोक्साडिन 400 मिलीलीटर), लीडर/मार्कसल्फो 75 डब्ल्यू जी (सल्फोसल्फ्यूरॉन) 13 ग्राम, टोटल/मार्कपावर 75 डब्ल्यू डी जी (सल्फोसल्फ्यूरॉन+मैट्सफ्यूरॉन) 16 ग्राम, एटलांटिस 3.6 डब्ल्यू डी जी (मिज़ोसल्फ्यूरॉन+ आइडोसल्फ्यूरॉन) 160 ग्राम 6 शगुन 21-11 (मैट्रीब्यूज़िन+क्लोडिनाफाप) 200 ग्राम, ए सी एम-9 (क्लोडिनाफाप+मैट्रीब्यूज़िन) 240 ग्राम नोट: 1. शगुन 21-11 को pbw550 और उन्नत pbw550 में ना छिड़काव करें 2. शगुन 21-11 का हल्की ज़मीनों में छिड़काव ना करें 3. बड़ी वाली गेहूं में शगुन 21-11 का प्रयोग ना करें 4. टॉट/मार्कपावर वाले खेतों में ज्वार और मक्की की बिजाई ना करें

Posted by sohan dass
Punjab
29-11-2019 07:25 PM
ਵੱਧ ਝਾੜ ਲੈਣ ਲਈ ਬਿਜਾਈ ਅਪ੍ਰੈਲ ਦੇ ਅੰਤ ਵਿੱਚ ਕਰੋ ਇਸ ਨੂੰ ਪਨੀਰੀ ਦੇ ਨਾਲ ਵੀ ਉਗਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਇਸ ਲਈ ਜੂਨ ਦੇ ਪਹਿਲੇ ਪੰਦੜਵਾੜੇ ਤੱਕ ਪਨੀਰੀ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਲਾ ਦਿਓ ਪਨੀਰੀ ਲਈ 35-45 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਪੌਦਿਆਂ ਨੂੰ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਲਗਾਓ
Posted by Mr.Avtar Singh
Punjab
29-11-2019 07:18 PM
pet de keria Di medisan bandykind plus ovumin gold 100 gm,stimvit 21 boulas deo heat vich Aya u gi
Posted by Rajesh sahu
Rajasthan
29-11-2019 07:15 PM
Kripya nimbu ke paudhe ki umr btayein taaki apko shii jankaari dii jaa ske.

Posted by bablu
Maharashtra
29-11-2019 06:54 PM
बबलू जी Leghorn नस्ल है जो पोल्ट्री फार्म में मिलती है White coloured hen

Posted by Payal dangi
Rajasthan
29-11-2019 06:53 PM
बढ़िया वर्मी कंपोस्ट निम्नलिखित तरीके अनुसार बनायी जा सकती है इसलिए ऐसा स्थान लें जहां धूप ना आये और हवादार हो इस स्थान पर ईंटों या पत्थर के टुकड़े और मिट्टी की 2—3 इंच मोटी परत बिछायें मिट्टी पर थोड़ा सा पानी छिड़ककर गीला करें मिट्टी में 25 प्रतिशत से अधिक नमी नहीं होनी चाहिए इसके ऊपर गंडोए (40 गंडोए प्रति वर्.... (Read More)
बढ़िया वर्मी कंपोस्ट निम्नलिखित तरीके अनुसार बनायी जा सकती है इसलिए ऐसा स्थान लें जहां धूप ना आये और हवादार हो इस स्थान पर ईंटों या पत्थर के टुकड़े और मिट्टी की 2—3 इंच मोटी परत बिछायें मिट्टी पर थोड़ा सा पानी छिड़ककर गीला करें मिट्टी में 25 प्रतिशत से अधिक नमी नहीं होनी चाहिए इसके ऊपर गंडोए (40 गंडोए प्रति वर्ग फीट जगह) में मिलायें इसके बाद वेस्ट जैसे कि बची कुची सब्जियां, फल, कच्चा गोबर, गोबर की सलरी की 8—10 इंच मोटी परत डालें दूसरी परत के बाद इसके ऊपर सूखे पत्ते या पराली से ढक दें हर परत के बाद पानी छिड़कें ताकि नमी बनी रहे वर्मीकंपोस्ट के बैड को 3—4 इंच मोटी गोबर की परत से ढक दें और इसके ऊपर बोरा या तिरपाल रखें ताकि नमी बनी रहे रसोई, फसलों या डेयरी के बचे कुचे की परत को रैक से पलटते रहें और आवश्यकतानुसार थोड़ा थोड़ा करके और वेस्ट भी डाल सकते हैं इसके ऊपर कच्चा गोबर भी डाल सकते हैं पर ध्यान रखें कि यह परत पहले जितनी ही मोटी रहें वर्मी कंपोस्ट की खाद मौसम के हिसाब से 45—60 दिनों में तैयार हो जाती है सबसे ऊपर वाली परत को हटाकर गंडोए छलनी से अलग कर लें और निचली छोड़ दें इसके ऊपर दोबारा रसोई या एग्रो वेस्ट की 6 इंच मोटी परत बिछाकर दोबारा खाद तैयार की जा सकती हैं 45 दिनों के बाद पानी छिड़कना बंद करने से भी गंडोए निचली परत में चले जाते हैं और छलनी से अलग करने में समय कम लगता है तैयार वर्मी कंपोस्ट काले भूरे रंग की गंध रहित और चाय पत्ती जैसी होती है इसे छांव में हवा में सुखकर आवश्यकतानुसार थैले या बोरियों में डालकर रखा जा सकता है एक टन वर्मी कंपोस्ट में 1.0—1.5 किलोग्राम नाइट्रोजन, 5—10 किलोग्राम पोटाश और 3.5—5.0 किलो फासफोरस होता है इसके अलावा इसमें कई तरह के एन्ज़ाइम और सूक्ष्म तत्व कॉपर, आयरन, जिंक, सल्फर, कैलशियम और मैगनीशियम आदि होते हैं
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