Posted by ashok kumar painkra
Chattisgarh
30-11-2019 09:15 AM
Ashok kumar painkra ji grass seed lene ke lia aap Shine Brand Seeds 8770896002 se samparak kar sakte hai, Thankyou.
Posted by Harpreet batth
Punjab
30-11-2019 09:14 AM
ਗੁਲੀ ਡੰਡੇ ਦੀ ਸਪਰੇ ਕਰਨ ਤੋ ਇੱਕ ਹਫਤੇ ਬਾਅਦ ਯੂਰੀਆ ਪਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੀ

Posted by md tahir
Bihar
30-11-2019 09:07 AM
tahir ji kripya aap apna swal vistar se pooche taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by Harpreet batth
Punjab
30-11-2019 09:05 AM
ਹਰਪ੍ਰੀਤ ਜੀ ਇਹ 3 -5 ਪੱਤਿਆਂ ਤਕ ਦੇ ਨਦੀਨਾਂ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਕਰਦਾ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by Poonam
Haryana
30-11-2019 09:02 AM
बसंत की ऋतु में राजमांह की बिजाई फरवरी से मार्च और खरीफ की ऋतु में इसकी बिजाई मई से जून के महीने की जाती है पंजाब में कुछ किसान राजमांह की बिजाई जनवरी के आखिरी सप्ताह करते हैं

Posted by suryakant
Uttar Pradesh
30-11-2019 09:01 AM
मोटे आलुओं की पैदावार के लिए 13:00:45, 2 किलो और मैगनीश्यिम ई डी टी ए 100 ग्राम प्रति एकड़ की स्प्रे करें बीमारियों के हमले को रोकने के लिए फंगसनाशी प्रॉपीनेब 3 ग्राम प्रति लीटर पानी डालें आलुओं का आकार और गिणती बढ़ाने के लिए हयूमिक एसिड (12 प्रतिशत) 3 ग्राम + एम ए पी 12:61:00 की 8 ग्राम या डी ए पी 15 ग्राम प्रति लीटर की स्प्रे पौधे .... (Read More)
मोटे आलुओं की पैदावार के लिए 13:00:45, 2 किलो और मैगनीश्यिम ई डी टी ए 100 ग्राम प्रति एकड़ की स्प्रे करें बीमारियों के हमले को रोकने के लिए फंगसनाशी प्रॉपीनेब 3 ग्राम प्रति लीटर पानी डालें आलुओं का आकार और गिणती बढ़ाने के लिए हयूमिक एसिड (12 प्रतिशत) 3 ग्राम + एम ए पी 12:61:00 की 8 ग्राम या डी ए पी 15 ग्राम प्रति लीटर की स्प्रे पौधे की वृद्धि के समय करें

Posted by bablu
Maharashtra
30-11-2019 08:56 AM
Bablu ji yeh murgia 20 hafto ke badd egg dena suru kr deti hai.
Posted by ਹਰਪ੍ਰੀਤ ਸਿੰਧੂ
Punjab
30-11-2019 08:54 AM
harpreet ji kanak nu kul 110 kilo urea payi jandi hai jisnu pehle dooje ate teeje pani nal payi jandi hai. dhanwad
Posted by deepak puri
Madhya Pradesh
30-11-2019 08:52 AM
Deepak ji eh tat di kami hai kirpa karke daso ki hale tak kehdi-kehdi khad tuc khet vich payi hai ta jo tuhanu osde hisab nal jankari diti ja sake,dhanwad

Posted by lovepreet Singh
Punjab
30-11-2019 08:50 AM
ਬੱਚਿਆਂ ਦੀ ਵਧਿਆ ਗਰੋਥ ਲਈ ਤੁਸੀ ਓਹਨਾ ਨੂੰ ਇਕ ਮਹੀਨੇ ਤਕ ਮਾਂ ਦਾ ਰੱਜਵਾਂ ਦੁੱਧ ਪਿਲਾਓ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਆਸਾਨੀ ਨਾਲ ਹਜ਼ਮ ਕਰ ਸਕੇ, ਉਸ ਨੂੰ ਖੁਲਾ ਰੱਖੋ ਜਿਸ ਨਾਲ ਉਹ ਭੱਜ ਭੱਜ ਕੇ ਕਸਰਤ ਕਰਦੀ ਰਹੇ, ਇਕ ਮਹੀਨੇ ਦਾ ਹੋਣ ਤੋਂ ਬਾਦ ਤੁਸੀ ਕਾਰਗਿਲ ਦਾ Calf starter ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਇਸ ਨੂੰ ਦੁੱਧ ਵਿਚ ਮਿਕਸ ਕਰਕੇ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ, 3 ਮਹੀਨਿਆਂ ਦਾ ਹੋਣ ਤੋਂ ਬਾਦ Calf grower ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, 8 ਮਹੀਨਿਆਂ ਦੀ ਉਮਰ ਤ.... (Read More)
ਬੱਚਿਆਂ ਦੀ ਵਧਿਆ ਗਰੋਥ ਲਈ ਤੁਸੀ ਓਹਨਾ ਨੂੰ ਇਕ ਮਹੀਨੇ ਤਕ ਮਾਂ ਦਾ ਰੱਜਵਾਂ ਦੁੱਧ ਪਿਲਾਓ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਆਸਾਨੀ ਨਾਲ ਹਜ਼ਮ ਕਰ ਸਕੇ, ਉਸ ਨੂੰ ਖੁਲਾ ਰੱਖੋ ਜਿਸ ਨਾਲ ਉਹ ਭੱਜ ਭੱਜ ਕੇ ਕਸਰਤ ਕਰਦੀ ਰਹੇ, ਇਕ ਮਹੀਨੇ ਦਾ ਹੋਣ ਤੋਂ ਬਾਦ ਤੁਸੀ ਕਾਰਗਿਲ ਦਾ Calf starter ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਇਸ ਨੂੰ ਦੁੱਧ ਵਿਚ ਮਿਕਸ ਕਰਕੇ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ, 3 ਮਹੀਨਿਆਂ ਦਾ ਹੋਣ ਤੋਂ ਬਾਦ Calf grower ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, 8 ਮਹੀਨਿਆਂ ਦੀ ਉਮਰ ਤੋਂ ਬਾਦ Heifer dry ਫੀਡ ਦੇਣੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਇਹ ਸਾਰਾ ਕੁਜ ਉੱਨੀ ਮਾਤਰਾ ਵਿਚ ਦਿਓ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਉਹ ਆਸਾਨੀ ਨਾਲ ਹਜ਼ਮ ਕਰ ਸਕੇ ਇਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਨਾਲ ਨਾਲ ਤੁਸੀ ਗਰੋਥ ਦੇ ਲਈ Growth Mantra ਪਾਊਡਰ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਜਾਂ ਤੁਸੀ puberaid ਪਾਊਡਰ ਵੀ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਇਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ 2 ਮਹੀਨਿਆਂ ਦੀ ਉਮਰ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ, ਜੇਕਰ ਉਮਰ 2 ਮਹੀਨੇ ਤੋਂ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹੈ ਤਾਂ 20 ਗ੍ਰਾਮ ਪਾਊਡਰ ਦੇਣਾ ਹੈ, 4 ਮਹੀਨਿਆਂ ਤੋਂ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹੋਣ ਤੇ 25 ਗ੍ਰਾਮ ਦਿਓ, ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਉਮਰ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ 5-5 ਗ੍ਰਾਮ ਵਧਾ ਦਿਓ. ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ ਉਸਦੀ ਡੇਵਰਮਿੰਗ ਦਾ ਵੀ ਪੂਰਾ ਧਿਆਨ ਰੱਖੋ ਜੀ

Posted by gurdeep singh
Punjab
30-11-2019 08:44 AM
श्रीमान जी आप इसमें 15 किलो बीज दोबारा डालकर ऊपरी पर्त तोड़ सकते है इससे सारी गेहूं निकल जाएगी दोबारा बिजाई करने का कोई फायदा नहीं है क्योंकि इससे खेत खुश्क हो जाता है और मौसम भी खराब है दोबारा वैसी हो सकती है और नरमे वाले खेत के लिए आप RAKSHA 999 या HD 2851 बोय सकते है।
Posted by op
Uttar Pradesh
30-11-2019 08:37 AM
उत्तर में यह वर्षा और बसंत के मौसम में उगाई जाती है खरीफ के मौसम में, इसकी बिजाई जून-जुलाई के महीने और बसंत ऋतु में फरवरी-मार्च के महीने में की जाती है

Posted by kailash singh
Rajasthan
30-11-2019 08:31 AM
आप उसके बुखार की जांच करवायें यदि उसे बुखार नहीं है तो आप उसे पेट के कीड़ों के लिए Nilzan liquid 1ml/3 किलो शरीर के भार के हिसाब से दें और Broton liquid 20मि.ली. रोजाना दें इससे फर्क पड़ जाएगा

Posted by Alok Tripathi
Uttar Pradesh
30-11-2019 08:21 AM
श्री मान WH 896: इस किस्म की सिंचित क्षेत्रों में समय पर बोने के लिए सिफारिश की गई है PBW 373: यह अधिक उपज वाली किस्म है इसकी सिंचित क्षेत्रों में पिछेती बिजाई के लिए सिफारिश की गई है यह किस्म विभिन्न बीमारियों के प्रतिरोधक है PBW 343: यह किस्म सिंचित और पिछेती बिजाई के क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है यह किस्म 130-135 दिनों में कट.... (Read More)
श्री मान WH 896: इस किस्म की सिंचित क्षेत्रों में समय पर बोने के लिए सिफारिश की गई है PBW 373: यह अधिक उपज वाली किस्म है इसकी सिंचित क्षेत्रों में पिछेती बिजाई के लिए सिफारिश की गई है यह किस्म विभिन्न बीमारियों के प्रतिरोधक है PBW 343: यह किस्म सिंचित और पिछेती बिजाई के क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है यह किस्म 130-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह गर्दन तोड़, जल जमाव की स्थितियों के प्रतिरोधक किस्म है यह करनाल बंट के भी प्रतिरोधक और झुलस रोग को सहनेयोग्य किस्म है इसकी औसतन पैदावार 19 क्विंटल प्रति एकड़ होती है HD 2643: यह किस्म सिंचित और पिछेती बिजाई के क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है इस किस्म से अच्छी गुणवत्ता वाली रोटी बनती है यह पत्ता और धारीदार कुंगी के प्रतिरोधक और करनाल बंट को सहनेयोग्य किस्म है UP 2425: यह सिंचित स्थितियों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है PBW-443: यह किस्म सिंचित हालातों में समय पर बोने के लिए उपयुक्त किस्म है DBW-14: यह किस्म सिंचित हालातों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त है यह जल्दी पकने वाली किस्म है इसके दाने सख्त होते हैं NW-2036: यह सिंचित हालातों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है यह जल्दी पकने वाली किस्म है दूसरे शब्दों में, यह किस्म 108 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दाने छोटे, सुनहरी और अर्द्ध सख्त होते हैं MACS-6145: यह किस्म बारानी क्षेत्रों में समय पर बोने के लिए उपयुक्त है HD-2824: यह किस्म सिंचित क्षेत्रों में समय पर बिजाई के लिए उपयुक्त है PBW-502: यह किस्म पंजाब एग्रीकल्चर युनिवर्सिटी द्वारा विकसित की गई है यह किस्म सिंचित हालातों में समय पर बिजाई के लिए उपयुक्त है यह किस्म पत्ते और धारीदार कुंगी के प्रतिरोधक किस्म है PDW-291: यह किस्म सिंचित हालातों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है यह किस्म कुंगी, करनाल बंट और कांगियारी के प्रतिरोधक किस्म है PBW-524: यह सिंचित हालातों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है यह किस्म कुंगी, करनाल बंट और कांगियारी के प्रतिरोधक किस्म है HD-2864: यह सिंचित हालातों में समय पर बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है यह किस्म पत्ते और धारीदार कुंगी के प्रतिरोधी और ताप को सहनेयोग्य किस्म है HI-8627: यह किस्म बारानी क्षेत्रों में समय पर बिजाई के लिए उपयुक्त है यह धारीदार कुंगी और पैर गलन के प्रतिरोधक किस्म है Ujiar(K-9006): यह किस्म सिंचित हालातों में समय पर बोने के लिए उपयुक्त है इसके दाने अर्द्ध सख्त और सुनहरी होते हैं यह किस्म करनाल बंट के प्रतिरोधक किस्म है Gangotri(K-9162): यह जल्दी पकने वाली और सिंचित हालातों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है Prasad (K-8434): यह किस्म सिंचित हालातों में समय पर और नमक वाली और क्षारीय मिट्टी में बोने के लिए उपयुक्त है यह जल्दी पकने वाली किस्म है यह 115 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दाने अर्द्ध सख्त, सुनहरी होते हैं यह किस्म पत्ता झुलस रोग, करनाल बंट और झूठी कांगियारी को सहनेयोग्य किस्म है Halna (K-7903): यह सिंचित क्षेत्रों में पिछेती और बहुत देर से उगाने के लिए उपयुक्त किस्म है यह किस्म नमक वाली मिट्टी के साथ साथ क्षारीय मिट्टी में उगाने के लिए उपयुक्त है इसके दाने सुनहरी और अर्द्ध सख्त होते हैं यह किस्म सभी प्रकार की कुंगियों के प्रतिरोधक किस्म है यह पत्ता झुलस रोग और करनाल बंट को भी सहनेयोग्य किस्म है Naina (K-9533): यह सिंचित क्षेत्रों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है इसके दाने सुनहरी रंग के और अर्द्ध सख्त होते हैं यह सभी प्रकार की कुंगियों के प्रतिरोधक किस्म है यह पत्ता झुलस रोग और करनाल बंट को सहनेयोग्य किस्म है UP 2338: यह पिछेती बिजाई और समय पर बोने के लिए उपयुक्त किस्म है इसके दाने मोटे और सख्त होते हैं इसकी औसतन पैदावार 23 क्विंटल प्रति एकड़ होती है दूसरे राज्यों की किस्में PDW314: यह सिंचित हालातों में समय पर बोने के लिए उपयुक्त किस्म है WHD943(Durum): यह सिंचित हालातों में समय पर बोने के लिए उपयुक्त किस्म है HI 1563(Pusa Prachi): यह सिंचित हालातों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है MPO-1225: यह सिंचित हालातों में समय पर बोने के लिए उपयुक्त किस्म है सभी किस्मों का बीज 45-50 किलो प्रति एकड़ डाल सकते हो

Posted by kailash singh
Rajasthan
30-11-2019 08:16 AM
कृपया आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आपकी बकरी को क्या समस्या आ रही है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by paplesh
Uttar Pradesh
30-11-2019 08:12 AM
papalesh ji kripya swal vistar se pooche ke aap genhu ki fasl ke bare men kya jankari lena chahte hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by Nirmal singh
Punjab
30-11-2019 08:11 AM
Nirmal ji chuje lenn lai tuci Hardeep Singh 9781589637 Mahal Farm se sampark kr skde ho.
Posted by Amandeep singh
Punjab
30-11-2019 08:07 AM
ਅਮਨਦੀਪ ਜੀ 1121 ਦਾ ਰੇਟ 2570 -2650 ਰੁਪਏ ਪ੍ਰਤੀ ਕੁਇੰਟਲ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਚਲ ਰਿਹਾ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Nirmal singh
Punjab
30-11-2019 08:07 AM
Nirmal ji chuje lenn lai tuci Hardeep Singh 9781589637 Mahal Farm se sampark kr skde ho.
Posted by Ramesh Dhakar
Rajasthan
30-11-2019 07:59 AM
ramesh ji kharpatvar ugne ka karan iske beej jo pichli fasl men gir jate hai aur agli fasl men ug jate hai uske liye kharpatvar ug jate hai.dhanywad

Posted by ਗੁਰਪ੍ਰੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
30-11-2019 07:58 AM
Hanji tuci uss nu ek varr fir ton tika lgwa deo ji..
Posted by Ramesh Dhakar
Rajasthan
30-11-2019 07:57 AM
ramesh ji kripya aap btaye ke aapne chane men abhi tak konsi spray ka istemal kiya hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad

Posted by Rajesh kumar
Uttar Pradesh
30-11-2019 07:51 AM
श्री मान फसल की बिजाई सिंचाई के बाद करें अच्छी फसल लेने के लिए बिजाई के बाद तीन हफ्तों के फासले पर तीन सिंचाइयों की जरूरत होती है ज़मीन में नमी को बचाने के लिए जैविक खादों का अधिक प्रयोग करें
Posted by ਵਿਪਨ ਕੁਮਾਰ
Punjab
30-11-2019 07:49 AM
ਵਿਪਿਨ ਜੀ ਇਸਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ ਗੁਰਬਖਸ਼ੀਸ਼ ਸਿੰਘ 95925 00111 ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ

Posted by satwant singh
Punjab
30-11-2019 07:48 AM
ਤੁਸੀ ਗਾਂ ਨੂੰ vitum-H 10-10ml ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ ਅਤੇ Metabolite ਪਾਊਡਰ ਦੀ ਰੋਜਾਨਾ 1 ਪੁੜੀ ਦੇਣੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਅਤੇ ਕਾਰਗਿਲ ਦੀ Transition mix ਫੀਡ ਦੇਣੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਇਸ ਨਾਲ ਲੇਵਾ ਅਤੇ ਦੁੱਧ ਵਧਿਆ ਹੋ ਜਾਵੇਗਾ..
Posted by Hasmat ali
Jharkhand
30-11-2019 07:47 AM
यह वर्षा और बसंत के मौसम में उगाई जाती है खरीफ के मौसम में, इसकी बिजाई जून-जुलाई के महीने और बसंत ऋतु में फरवरी-मार्च के महीने में की जाती है

Posted by कन्चन देवी दुदनी
Rajasthan
30-11-2019 07:42 AM
कन्चन देवी दुदनी जी अपनी जमीन का रिकॉर्ड देखने के लिए आप http://apnakhata.raj.nic.in वेबसाइट पर लॉगिन करे और वह पर अपनी जानकारी भरके जमीन का रिकॉर्ड देख सकते है जी
Posted by Tarlochan
Punjab
30-11-2019 07:42 AM
Tuci ohna nu 1 litre pani vich 1-2 chamch namak paa ke pilao ate ohna nu Ostovet calcium 30ml/100birds de hisab nal ate B-complex liquid 20ml/100birds de hisab nal deo, iss nal frak paa jawega..
Posted by Lakhwinder Singh Lucky
Punjab
30-11-2019 07:32 AM
lakhwinder ji isda koi nuksaan nahi hai.

Posted by Amarnath Shukla
Madhya Pradesh
30-11-2019 07:14 AM
अमरनाथ जी आप लौकी की किस्मे जैसे Pusa Summer Prolific round की बिजाई कर सकते है इसके पौधे आपको नजदीकी मार्किट में मिल जाएगी इसकी बिजाई के लिए फरवरी से मार्च, जून से जुलाई और नवंबर से दिसंबर का समय उपयुक्त होता है
Posted by Akash Singh
Uttar Pradesh
30-11-2019 07:14 AM
इसे मिट्टी की विभिन्न किस्मों हल्की से उच्च पोषक तत्वों वाली मिट्टी में उगाया जा सकता है जैसे कि गहरी गाद चिकनी, दोमट और उच्च दोमट मिट्टी केले की खेती के लिए उपयुक्त होती है केले की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6 से 7.5 होनी चाहिए केला उगाने के लिए, अच्छे निकास वाली, पर्याप्त उपजाऊ और नमी की क्षमता वाली मिट्टी का .... (Read More)
इसे मिट्टी की विभिन्न किस्मों हल्की से उच्च पोषक तत्वों वाली मिट्टी में उगाया जा सकता है जैसे कि गहरी गाद चिकनी, दोमट और उच्च दोमट मिट्टी केले की खेती के लिए उपयुक्त होती है केले की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6 से 7.5 होनी चाहिए केला उगाने के लिए, अच्छे निकास वाली, पर्याप्त उपजाऊ और नमी की क्षमता वाली मिट्टी का चयन करें उच्च नाइट्रोजन युक्त मिट्टी,पर्याप्त फासफोरस और उच्च स्तर की पोटाश वाली मिट्टी में केले की खेती अच्छी होती है जल जमाव, कम हवादार और कम पौष्टिक तत्वों वाली मिट्टी में इसकी खेती ना करें रेतली, नमक वाली, कैल्शियम युक्त और अत्याधिक चिकनी मिट्टी में भी इसकी खेती ना करें गर्मियों में, कम से कम 3 से 4 बार जोताई करें आखिरी जोताई के समय, 10 टन अच्छी तरह से गली हुई रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें ज़मीन को समतल करने के लिए ब्लेड हैरो या लेज़र लेवलर का प्रयोग करें वे क्षेत्र जहां निमाटोड की समस्या होती है वहां पर रोपाई से पहले निमाटीसाइड और धूमन, गड्ढों में डालें Grand Naine, Red Banana, Safed Velachi, Basarai, Rasthali, Dwarf Cavendish, Robusta, Poovan, Nendran, Ardhapuri, Nyali .केले की रोपाई के लिए मई-जून या सितंबर-अक्तूबर का समय उपयुक्त होता है टिशू कल्चर से तैयार पौधों को पूरे साल में लगाया जा सकता है, जब तक कि तापमान के बहुत कम या बहुत अधिक होने पर पौधों की रोपाई नहीं की जा सकती केले की जड़ों को 45x 45x45 सैं.मी. या 60x60x60 सैं.मी. आकार के गड्ढों में रोपित करें गड्ढों को धूप में खुला छोड़ें, इससे हानिकारक कीट मर जायेंगे गड्ढों को 10 किलो रूड़ी की खाद या गला हुआ गोबर, नीम केक 250 ग्राम और कार्बोफ्युरॉन 20 ग्राम से भरें जड़ों को गड्ढें के मध्य में रोपित करे और मिट्टी के आसपास अच्छी तरह से दबायें गहरी रोपाई ना करें बिजाई के लिए, रोपाई ढंग या सीधी बिजाई ढंग का प्रयोग किया जाता है यदि फासला 1.8x1.5 मीटर लिया जाये तो प्रति एकड़ में 1452 पौधे लगाएं यदि फासला 2 मीटर x 2.5 मीटर लिया जाये, तो एक एकड़ में 800 पौधे लगाने की सिफारिश की जाती है रोपाई के लिए, सेहतमंद और संक्रमण रहित जड़ों या राइज़ोम का प्रयोग करें रोपाई से पहले, जड़ों को धोयें और क्लोरपाइरीफॉस 20 ई सी 2.5 मि.ली. प्रति लीटर पानी में डुबोयें फसल को राइज़ोम की भुंडी से बचाने के लिए रोपाई से पहले कार्बोफ्युरॉन 3 प्रतिशत सी जी 33 ग्राम में प्रति जड़ों को डुबोयें और उसके बाद 72 घंटों के लिए छांव में सुखाएं गांठों को निमाटोड के हमले से बचाने के लिए कार्बोफ्युरॉन 3 प्रतिशत सी जी 50 ग्राम से प्रति जड़ का उपचार करें फुज़ारियम सूखे की रोकथाम के लिए, जड़ों को कार्बेनडाज़िम 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में 15-20 मिनट के लिए डुबोयें पौधा लेने के लिए आप A.k Mani 9431232333 Hecure Agro Plants Prt Lmt जी से संपर्क कर सकते है धन्यवाद
Posted by Satish Shukla
Uttar Pradesh
30-11-2019 07:07 AM
कृपया आप इसके पौधे की उम्र बताये ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by Satish Shukla
Uttar Pradesh
30-11-2019 07:07 AM
सतीश जी नीम के पौधे की उम्र क्या है कृपया बताये ताकि आपको उसके हिसाब से जानकारी दी जा सके धन्यवाद

Posted by Ritesh Giri
Bihar
30-11-2019 07:04 AM
नर्सरी तैयार करने के उचित समय मध्य-अक्तूबर से मध्य-नवबंर होता है नए पौधे मध्य-दिसंबर से मध्य-जनवरी तक रोपाई के लिए तैयार हो जाते है रोपाई के लिए 10-15 सैं.मी. कद के पौधे चुनें ज्यादा पैदावार लेने के लिए, रोपाई के समय पंक्तियों के बीच फासला 15 सैं.मी. और पौधों के बीच का फासला 7.5 सैं.मी.रखें नर्सरी में बीज 1-2 सैं.मी. गहरा.... (Read More)
नर्सरी तैयार करने के उचित समय मध्य-अक्तूबर से मध्य-नवबंर होता है नए पौधे मध्य-दिसंबर से मध्य-जनवरी तक रोपाई के लिए तैयार हो जाते है रोपाई के लिए 10-15 सैं.मी. कद के पौधे चुनें ज्यादा पैदावार लेने के लिए, रोपाई के समय पंक्तियों के बीच फासला 15 सैं.मी. और पौधों के बीच का फासला 7.5 सैं.मी.रखें नर्सरी में बीज 1-2 सैं.मी. गहराई पर बोयें बिजाई के लिए रोपाई विधि का प्रयोग करें एक एकड़ खेत की पनीरी तारे करने के लिए 4-5 किलो बीजों की जरूरत होती है

Posted by Chandandeep singh
Punjab
30-11-2019 07:01 AM
kanak da HD 3086 beej di bijai da sahi smaa dso ki asi 1 ja 2 december nu isdi bijai kar skde haan ?
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ HD 3086 (PusaGautam) : ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 23 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਪੱਤਿਆਂ ਦੇ ਪੀਲੇਪਣ ਅਤੇ ਭੂਰੇਪਣ ਦੀ ਬਿਮਾਰੀ ਤੋਂ ਰਹਿਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਵਧੀਆ ਕਿਮਸ ਦੇ ਬਰੈੱਡ ਬਣਾਉਣ ਦੇ ਸਾਰੇ ਗੁਣ/ਤੱਤ ਇਸ ਵਿਚ ਮੌਜੂਦ ਹਨ,ਇਸਦੀ ਬਿਜਾਈ ਅਕਤੂਬਰ ਤੋਂ ਲੈ ਕੇ ਨਵੰਬਰ ਮਹੀਨੇ ਤੱਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਹ ਪੱਕਣ ਲਈ 156 ਦਿਨ ਅਤੇ ਕੱਦ 96 ਸੈਂਟੀਮੀਟਰ ਹੈ

Posted by anuj kumar
Uttar Pradesh
30-11-2019 06:48 AM
anuj ji kripya swal vistar se pooche taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad

Posted by sanjay singh
Uttar Pradesh
30-11-2019 06:37 AM
एलोवेरा का प्रयोग आयुर्वेदिक दवाईयों में बड़े स्तर पर होता है आजकल कई नेशनल और इंटर नेशनल कंपनियां इसका प्रयोग चिकित्सा के साथ साथ सुंदरता उत्पाद जैसे क्रीम, शैंपू, दंत पेस्ट और कई सारे उत्पाद में इसका प्रयोग होता है मिट्टी - एलोवेरा के पौधों को किसी भी प्रकार की उपजाऊ/अनउपजाऊ मिट्टी में उगाया जा सकता है ब.... (Read More)
एलोवेरा का प्रयोग आयुर्वेदिक दवाईयों में बड़े स्तर पर होता है आजकल कई नेशनल और इंटर नेशनल कंपनियां इसका प्रयोग चिकित्सा के साथ साथ सुंदरता उत्पाद जैसे क्रीम, शैंपू, दंत पेस्ट और कई सारे उत्पाद में इसका प्रयोग होता है मिट्टी - एलोवेरा के पौधों को किसी भी प्रकार की उपजाऊ/अनउपजाऊ मिट्टी में उगाया जा सकता है बस आपको इस बात का ध्यान रखना है कि पौधा ज्यादा पानी वाली और ज्यादा ठंड पड़ने वाली जगह पर नहीं लगाना है कम पानी और रेतली भूमि में लगाने के लिए यह सबसे अच्छी फसल है खेत की तैयारी - खेत की तैयारी के लिए सबसे पहले खेत की 2 बार अच्छी तरह जोताई करके उसमें प्रति हेक्टेयर 10 से 20 टन में पुरानी रूड़ी की खाद डालें साथ ही 120 किलोग्राम यूरिया + 150 किलोग्राम फास्फोरस + 30 किलोग्राम पोटाश इन्हें खेत में समान रूप से बिखेर दें फिर एक बार हल्की जोताई और कराहे से भूमि को समतल कर लें फिर खेत में 50x50 सैं.मी. की दूरी पर मेंड़ें बना लें पौधे की रोपाई और देख रेख - पौधे की रोपाई किसी भी समय की जा सकती है पर अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए जून- जुलाई या फरवरी- मार्च में कर सकते हैं एलोवेरा की रोपाई मेंड़ों पर होती है यह पौधे किसी पुरानी एलोवेरा फार्म या नर्सरी से प्राप्त किए जा सकते हैं यही पौधे बाद में पनीरी के रूप में प्रयोग किए जाते हैं इस विधि को रूट सक्कर कहा जाता है अच्छी उपज के लिए किस्में - सिम सितल, L 1 , 2 , 5 और 49 लगाएं जिसमें जैल की मात्रा ज्यादा पायी जाती है इसके अलावा नेशनल बोटनीकल और प्लांट जैनेटिक रिसोर्स, आई. सी. ए. आर द्वारा रिलीज़ की गई किस्में IC111271, IC111269, IC111280 आदि हैं मेंड़ों पर 50 x 50 सैं.मी. की दूरी पर पौधों को लगाएं पौधे से पौधे की दूरी 50 सैं.मी. रखने पर प्रति एकड़ में 15000 पौधों की रोपाई की जरूरत पड़ेगी सिंचाई - सिंचाई साल भर में इसे सिर्फ 4 से 5 बार सिंचाई की जरूरत होती है सिंचाई के लिए ड्रिप प्रणाली अच्छी रहती है इससे इसकी उपज में वृद्धि होती है गर्मी क दिनों में 25 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करनी चाहिए कीट और बीमारियां - वैसे इस फसल पर कोई विशेष कीट और रोगों का प्रभाव नहीं होता है पर कहीं कहीं तने के सड़ने और पत्तियों पर दाग वाली बीमारियों का असर देखा गया है जो एक फंगस रोग होता है उसके उपचार के लिए मैनकोजेब 3 ग्राम प्रति लीटर के हिसाब से छिड़काव करना चाहिए कटाई - यह फसल एक साल बाद काटने के लायक हो जाती है कटाई के दौरान पौधों की सबसे पहले निचली ठोस 3 या 4 पत्तों की कटाई करें उसके बाद लगभग 1 महीने के बाद उससे ऊपर वाली पत्तियों की कटाई करनी चाहिए कभी भी ऊपर वाली नई नाज़ुक पत्तियों की कटाई ना करें कटी हुई पत्तियों में फिर नई पत्तियां बननी शुरू हो जाती हैं प्रति हेक्टेयर में 50 से 60 टन ताजी पत्तियां प्रति वर्ष मिल जाती हैं दूसरे वर्ष में 15 से 20 फीसदी वृद्धि होती है बाजार में इसकी पत्तियों की अनुमानित कीमत 3 से 6 रूपये किलो होती है एक तंदरूस्त पौधे से एक साल में लगभग 3-4 किलो पत्तियां ली जा सकती हैं इस तरह एक वर्ष में एक एकड़ में से 1.5 से 3 लाख की फसल हो जाती है एलोवेरा का प्रयोग तंदरूस्त पत्तियों की कटाई के बाद साफ पानी से धोकर पत्तियों के निचली ओर ब्लेड या चाकू से कट लगाकर थोड़े समय के लिए छोड़ देते हैं जिसमें पीले रंग का गाढ़ा चिपचिपा रस (जेल) निकलता है उसे एक टैंक में इकट्ठा करके इस रस को सुखा लिया जाता है इस सूखे हुए रस को अलग अलग ढंग से तैयार करने के बाद अलग अलग नामों से जाना जाता है जैसे कि सकोतरा केप जब फसल पूरी तरह तैयार हो जाये और उसकी कटाई कर ली जाये तो उसे आप सब्जी मंडी में सीधे तौर पर बेच सकते हैं यदि आप खुद मंडी में बेचते हैं तो आपको अंदाजन 5 से 10 रूपये प्रति किलो तक मुल्य मिल सकता है पर यदि आप किसी कंपनी से कॉन्ट्रैक्ट करते हो तो इसका रेट उस कंपनी की जरूरत और शर्तों के मुताबिक उस कंपनी के द्वारा तय होता है यह मुल्य आपकी उनके साथ डीलिंग पर निर्भर करता है

Posted by rohit
Haryana
30-11-2019 06:31 AM
Rohit ji kripya aap apna swal vistar se pooche ke aap kya jankari lena chahte taki aapko iske bare me poori jankari di ja sake.dhanywad

Posted by गोपाल राम
Rajasthan
30-11-2019 06:29 AM
Gopal Ram ji fasal bima yojana ke bare mein puri jankari ke liye aap sath me diye gye link par click kar video dekhe https://www.youtube.com/watch v=v-_NSX9GTzE

Posted by Bhupinder Pawar
Punjab
30-11-2019 06:27 AM
Bhupinder Pawar ji yeh legal nai hoga ji. government isle liye aapko alow nai karegi ji. aapko koe or arrangment karna padega ji.

Posted by baldev
Punjab
30-11-2019 06:12 AM
tuci uss nu Potasium iodied powder 7gm rojana, Mammidium powder 50gm rojana ate Milkout powder 2-2 chamch swere sham deo, iss nal frak paa jawega.

Posted by Manpreet singh
Punjab
30-11-2019 05:59 AM
ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ 2 ਮਹੀਨੇ ਤਕ ਵਧਿਆ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਮਾਂ ਦਾ ਦੁੱਧ ਪਿਲਾਓ, ਜਿਸ ਨਾਲ ਉਸਦੀ ਵਧਿਆ ਗਰੋਥ ਹੋਵੇਗੀ ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ ਥੋੜੀ ਥੋੜੀ ਫੀਡ ਦੁੱਧ ਵਿਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਜਿਵੇਂ ਜਿਵੇਂ ਉਹ ਖਾਣ ਲਗੇ ਫਿਰ ਉਸਦੇ ਖਾਣ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਦਿਓ ਅਤੇ ਹੋਲੀ ਹੋਲੀ ਹਰਾ ਚਾਰਾ ਵੀ ਵਧਿਆ ਮਾਤਰਾ ਵਿਚ ਦਿਓ

Posted by Atul Singh
Uttar Pradesh
30-11-2019 05:58 AM
नदीनों की रोकथाम के लिए पहली गोडाई हाथों से या घास निकालने वाली चरखड़ी से बिजाई के 25-30 दिन बाद करें और जरूरत पड़ने पर दूसरी गोडाई बिजाई के 60 दिनों के बाद करें नदीनों की प्रभावशाली रोकथाम के लिए बिजाई से पहले पैंडीमैथालीन 1 लीटर प्रति 200 लीटर पानी में घोलकर बिजाई के 3 दिन बाद एक एकड़ में स्प्रे करें कम नुकसान होने प.... (Read More)
नदीनों की रोकथाम के लिए पहली गोडाई हाथों से या घास निकालने वाली चरखड़ी से बिजाई के 25-30 दिन बाद करें और जरूरत पड़ने पर दूसरी गोडाई बिजाई के 60 दिनों के बाद करें नदीनों की प्रभावशाली रोकथाम के लिए बिजाई से पहले पैंडीमैथालीन 1 लीटर प्रति 200 लीटर पानी में घोलकर बिजाई के 3 दिन बाद एक एकड़ में स्प्रे करें कम नुकसान होने पर नदीन नाशक की बजाय हाथों से गोडाई करें या कही से घास निकालें इस से मिट्टी हवादार बनी रहती है

Posted by sukhwinder singh
Punjab
30-11-2019 05:37 AM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਕਣਕ ਵਿੱਚ ਕੁੱਲ 110kg ਕਿਲੋ ਯੂਰੀਆ ਪਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਇਸ ਨੂੰ ਤੁਸੀਂ 2-3 ਹਿੱਸਿਆਂ ਵਿੱਚ ਵੰਡ ਕੇ ਪਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਕਣਕ ਵਿੱਚ DAP@55kg ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਪਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਤੁਸੀਂ ਇੱਕ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਡੀ ਏ ਪੀ ਦਾ ਇੱਕ ਗੱਟਾ ਪਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੇਕਰ SSP ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰ ਰਹੇ ਹੋ ਤਾਂ SSP@150kg ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਵਰਤ ਸਕਦੇ ਹੋ ਡੀ ਏ ਪੀ ਨੂੰ ਕਣਕ ਦੇ ਬੀਜ ਨਾਲ ਮਿਲਾ ਕੇ ਬੀਜ ਦਿਓ ਇਸ ਢ.... (Read More)
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਕਣਕ ਵਿੱਚ ਕੁੱਲ 110kg ਕਿਲੋ ਯੂਰੀਆ ਪਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਇਸ ਨੂੰ ਤੁਸੀਂ 2-3 ਹਿੱਸਿਆਂ ਵਿੱਚ ਵੰਡ ਕੇ ਪਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਕਣਕ ਵਿੱਚ DAP@55kg ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਪਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਤੁਸੀਂ ਇੱਕ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਡੀ ਏ ਪੀ ਦਾ ਇੱਕ ਗੱਟਾ ਪਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੇਕਰ SSP ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰ ਰਹੇ ਹੋ ਤਾਂ SSP@150kg ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਵਰਤ ਸਕਦੇ ਹੋ ਡੀ ਏ ਪੀ ਨੂੰ ਕਣਕ ਦੇ ਬੀਜ ਨਾਲ ਮਿਲਾ ਕੇ ਬੀਜ ਦਿਓ ਇਸ ਢੰਗ ਨਾਲ ਬੀਜ ਦੇ ਨਾਲ SSP ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਨਹੀਂ ਤਾਂ ਕਣਕ ਦੇ ਲਈ ਜ਼ਮੀਨ ਤਿਆਰ ਕਰਦੇ ਸਮੇਂ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਛਿੱਟਾ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ ਡੀ ਏ ਪੀ ਅਤੇ ਐੱਸ ਐੱਸ ਪੀ ਦੇ ਵਿੱਚੋਂ ਕਿਸੇ ਇੱਕ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰਨੀ ਹੈ, ਜੇਕਰ ਜ਼ਮੀਨ ਵਿੱਚ ਪੋਟਾਸ਼ ਦੀ ਕਮੀ ਹੈ ਤਾਂ ਪੋਟਾਸ਼@20kg ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਵਰਤ ਸਕਦੇ ਹੋ

Posted by adesh petkar
Maharashtra
30-11-2019 04:42 AM
सबसे पहले आपके लिए यह जानना जरूरी है कि मुर्गी पालन दो तरह का होता है कि आप अंडों का व्यवसाय करना चाहते हैं या मीट का यदि आप अंडों का धंधा करना चाहते हैं तो आपको लेयर मुर्गियां पालनी पड़ेंगी और यदि आप मीट का धंधा करना चाहते हैं तो आपको ब्रॉयलर मुर्गियां पालनी पड़ेंगी यदि आप ब्रायलर मुर्गी पालन करना चाहते हैं त.... (Read More)
सबसे पहले आपके लिए यह जानना जरूरी है कि मुर्गी पालन दो तरह का होता है कि आप अंडों का व्यवसाय करना चाहते हैं या मीट का यदि आप अंडों का धंधा करना चाहते हैं तो आपको लेयर मुर्गियां पालनी पड़ेंगी और यदि आप मीट का धंधा करना चाहते हैं तो आपको ब्रॉयलर मुर्गियां पालनी पड़ेंगी यदि आप ब्रायलर मुर्गी पालन करना चाहते हैं तो कम से कम 10 हजार मुर्गियों का धंधा शुरू करना चाहते हैं तो आपको 4 से 5 लाख का इतज़ाम करना पड़ेगा, ये आप अपने बजट के हिसाब से कम पंक्षियों से भी शुरू कर सकते हैं बाकि आप इस काम को ट्रेनिंग लेकर शुरू करें जिसमें आपको इस काम के बारे में पूरी जानकारी दी जाएगी ट्रेनिंग लेने के लिए आप अपने नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें आप वहां जाकर अपना ट्रेनिंग का फार्म भर आएं जब भी ट्रेनिंग होगी तो वो आपको फोन करके उसके बारे में बता देंगे..

Posted by Mridul Srivastava
Uttar Pradesh
30-11-2019 03:44 AM
कृपया आप बताएं कि आप कौनसी सब्ज़ी की बिजाई करने के बारे में जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको उसके बारे में सही जानकारी दी जा सके

Posted by Kamlesh Patel
Gujarat
30-11-2019 03:35 AM
यह उष्णकटिबंधीय फल है काली मिर्च की बेल अधिक ठण्ड सहन नही कर सकता इसके लिए हल्की ठण्ड वाली जलवायु उत्तम होती है यदि मौसम का तापमान 10 से 12 डिग्री सेल्सियस नीचे चला जाता है तो ऐसे मौसम में इसका पौधा वृद्धि नहीं कर सकता काली मिर्च की फसल में 2000 mm की वार्षिक वर्षा का होना जरूरी होता है दक्षिण अफ्रीका में काली मिर्.... (Read More)
यह उष्णकटिबंधीय फल है काली मिर्च की बेल अधिक ठण्ड सहन नही कर सकता इसके लिए हल्की ठण्ड वाली जलवायु उत्तम होती है यदि मौसम का तापमान 10 से 12 डिग्री सेल्सियस नीचे चला जाता है तो ऐसे मौसम में इसका पौधा वृद्धि नहीं कर सकता काली मिर्च की फसल में 2000 mm की वार्षिक वर्षा का होना जरूरी होता है दक्षिण अफ्रीका में काली मिर्च की फसल में समय – समय पर हल्की सिंचाई करनी चाहिए काली मिर्च की खेती के लिए लाल लेटेराइट मिटटी और लाल मिटटी उत्तम मानी जाती है जिस भूमि में काली मिर्च की खेती की जाती है उस खेत की मिटटी में जल धारण करने की क्षमता होनी चाहिए इस भूमि में रूट सड़ांध जैसी बीमारी को रोकने की क्षमता होनी चाहिए यदि भूमि का पी. एच. मान 5 से 6 के बीच का हो तो अच्छा होता है काली मिर्च के पौधे के विस्तार करने के लिए कलमों का उपयोग किया जाता है इसकी एक या दो कलमों को काटकर सितम्बर के मध्य में रोपित किया जाता है काली मिर्च के कलमों को एक कतार में लगाना चाहिए कलमों को लगाते समय इनके बीच की दुरी का ध्यान रखे एक हेक्टेयर भूमि पर 1666 पौधे होने चाहिए काली मिर्च की बेल चढ़ाई जाती है ऊँचे पेड़ पर ये 30 से 45 मीटर तक की ऊंचाई पर चढ़ जाते है लेकिन इसके फलों को आसानी से लेने के लिए इसकी बेल को केवल 8 से 9 मीटर की ऊंचाई तक ही बढ़ने दिया जाता है काली मिर्च का एक पौधा कम से कम 25 से 30 साल तक फलता – फूलता है इसकी फसल को कोई छाया की जरूरत नही होती
Posted by Ranvir singh n ninh
Uttar Pradesh
30-11-2019 02:27 AM
मोटे आलुओं की पैदावार के लिए 13:0:45 की 2 किलो और मैगनीश्यिम ई डी टी ए 100 ग्राम प्रति एकड़ की स्प्रे करें बीमारियों के हमले को रोकने के लिए फंगसनाशी प्रॉपीनेब 3 ग्राम प्रति लीटर पानी डालें आलुओं का आकार और गिणती बढ़ाने के लिए हयूमिक एसिड (12 प्रतिशत) 3 ग्राम + एम ए पी 12:61:0 की 8 ग्राम या डी ए पी 15 ग्राम प्रति लीटर की स्प्रे पौध.... (Read More)
मोटे आलुओं की पैदावार के लिए 13:0:45 की 2 किलो और मैगनीश्यिम ई डी टी ए 100 ग्राम प्रति एकड़ की स्प्रे करें बीमारियों के हमले को रोकने के लिए फंगसनाशी प्रॉपीनेब 3 ग्राम प्रति लीटर पानी डालें आलुओं का आकार और गिणती बढ़ाने के लिए हयूमिक एसिड (12 प्रतिशत) 3 ग्राम + एम ए पी 12:61:0 की 8 ग्राम या डी ए पी 15 ग्राम प्रति लीटर की स्प्रे पौधे की वृद्धि के समय करें
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