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Posted by pawan maheshwari
Madhya Pradesh
04-12-2019 10:33 AM
Maharashtra
12-04-2019 01:45 PM
पवन जी आप सब्जियां जैसे टमाटर, काली सरसों के बीज, मूली, पालक, पत्ता गोभी, सलाद, बैंगन, प्याज की बिजाई कर सकते है धन्यवाद
Posted by ਅਮਨਦੀਪ ਸਿੰਘ
Punjab
04-12-2019 10:30 AM
Punjab
12-04-2019 11:17 AM
shrimaan g knak bhut vdia growth kr rhi hai.tuc khet vich termite da dhyn rkho g.
Posted by Dhirendra pal
Uttar Pradesh
04-12-2019 10:27 AM
Punjab
12-04-2019 10:49 AM
यह मिट्टी की कई किस्मों जैसे अच्छे जल निकास वाली लाल दोमट से चिकनी मिट्टी, काली मिट्टी से लैटेराइट मिट्टी में उगाई जाती है यह चट्टानी मिट्टी और हल्की मिट्टी में भी उगाई जा सकती है मिट्टी की गहराई 20-30 सैं.मी. से ज्यादा नहीं होनी चाहिए यह रेतली दोमट से दरमियानी काली मिट्टी जो अच्छे जल निकास वाली हो, में अच्छे पर.... (Read More)
यह मिट्टी की कई किस्मों जैसे अच्छे जल निकास वाली लाल दोमट से चिकनी मिट्टी, काली मिट्टी से लैटेराइट मिट्टी में उगाई जाती है यह चट्टानी मिट्टी और हल्की मिट्टी में भी उगाई जा सकती है मिट्टी की गहराई 20-30 सैं.मी. से ज्यादा नहीं होनी चाहिए यह रेतली दोमट से दरमियानी काली मिट्टी जो अच्छे जल निकास वाली हो, में अच्छे परिणाम देती है पौधे की वृद्धि के लिए मिट्टी pH 6-8 होना चाहिए प्रसिद्ध किस्में:- Satavari (Asparagus racemosus),Satavari (Asparagus sarmentosa Linn.)शतावरी की खेती के लिए, अच्छे जल निकास वाली रेतली दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है मिट्टी को भुरभुरा बनाने के लिए, ज़मीन की अच्छे से जोताई करें, और 15 सैं.मी. की गहराई में गड्ढा खोदें रोपाई तैयार बैडों पर की जाती है पौधों की रोपाई जून-जुलाई के महीने में की जाती है इसके विकास के अनुसार 4.5x 1.2 मीटर फासले का प्रयोग करें और 20 सैं.मी. गहराई में गड्ढा खोदें जब पौधा 45 सैं.मी. का हो जाए, तब खेत में रोपाई की जाती है अधिक पैदावार के लिए, 400-600 ग्राम बीजों का प्रति एकड़ में प्रयोग करें फसल को मिट्टी से होने वाले कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए, बिजाई से पहले बीजों को गाय के मूत्र में 24 घंटे के लिए डाल कर उपचार करें उपचार के बाद बीज नर्सरी बैड में बोये जाते हैं अधिक पैदावार के लिए, 400-600 ग्राम बीजों का प्रति एकड़ में प्रयोग करें फसल को मिट्टी से होने वाले कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए, बिजाई से पहले बीजों को गाय के मूत्र में 24 घंटे के लिए डाल कर उपचार करें उपचार के बाद बीज नर्सरी बैड में बोये जाते हैं बिजाई से पहले मिट्टी का रासायनिक उपचार किया जाता है अप्रैल के महीने में बीज बोये जाते हैं शतावरी के बीजों को 30-40 सैं.मी. की चौड़ाई वाले और आवश्यक लंबाई वाले बैडों पर बोया जाता है बिजाई के बाद बैडों को नमी के लिए पतले कपड़े से ढक दिया जाता है 8-10 दिनों में पौधों का अंकुरण शुरू हो जाता है 45 सैं.मी. ऊंचाई के होने पर पौधे रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं पौधों की रोपाई 60 x 60 सैं.मी. की मेड़ों पर की जाती है खेत की तैयारी के समय, 80 क्विंटल प्रति एकड़ गली हुई रूड़ी की खाद को मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें नाइट्रोजन 24 किलो (यूरिया 52 किलो), फासफोरस 32 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 52 किलो), और पोटाश 40 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 66 किलो) प्रति एकड़ में डालें मिट्टी से पैदा होने वाली बीमारियों से पौधे को बचाने के लिए जैविक कीट नाशी जैसे धतूरा, चित्रकमूल और गाय के मूत्र का प्रयोग करें फसल के विकास के समय लगातार गोडाई की आवश्यकता होती है खेत को नदीन मुक्त बनाने के लिए 6-8 हाथ से गोडाई की आवश्यकता होती है पौधों को खेत में रोपण करने के बाद पहली सिंचाई तुरंत कर देनी चाहिए इस फसल को ज्यादा सिंचाई की जरूरत नहीं होती इसलिए शुरूआत में 4-6 दिनों के फासले पर सिंचाई कर दें और फिर कुछ समय के बाद सप्ताह के फासले पर सिंचाई करें पुटाई से पहले सिंचाई जरूर करनी चाहिए ताकि गड्ढों मे से जड़ों को आसानी से निकाला जा सके रोपाई के बाद 20-30 महीनों में पौधे की जड़ें परिपक्व हो जाती हैं मिट्टी और जलवायु के आधार पर जड़ें 12-14 महीनों में पक जाती हैं मार्च-मई के महीने में जब बीज पक जाये, तब पुटाई की जाती है पुटाई कसी की सहायता से की जाती है प्रक्रिया और दवाइयां बनाने के लिए अच्छे से पके बीजों की आवश्यकता होती है आप इसके पौधे नजदीकी नर्सरी से ले सकते है अगर आपको पौधे वह न मिले तो आप दुबारा सवाल दाल कर हमें बता सकते है आप इसके बीज लेने के लिए वासिफ मालिक 9548535104 जी से संपर्क कर सकते है धन्यवाद
Posted by Tarun Kumar
Chattisgarh
04-12-2019 10:26 AM
Maharashtra
01-29-2020 09:17 AM
Posted by Santosh Ahirwar
Madhya Pradesh
04-12-2019 10:25 AM
Maharashtra
12-04-2019 01:40 PM
गेंहूं की बिजाई सही समय पर करनी जरूरी है बारानी क्षेत्रों के लिए बिजाई नवंबर के पहले से तीसरे सप्ताह में पूरी कर लें, जबकि सिंचित क्षेत्रों में बिजाई अक्तूबर से 15 नवंबर तक पूरी कर लें सामान्य बिजाई के लिए कतारों में 20 सैं.मी. के फासले की सलाह दी जाती है यदि बिजाई देरी से करनी हो तो 18 सैं.मी. का फासला होना चाहिए 4-5 .... (Read More)
गेंहूं की बिजाई सही समय पर करनी जरूरी है बारानी क्षेत्रों के लिए बिजाई नवंबर के पहले से तीसरे सप्ताह में पूरी कर लें, जबकि सिंचित क्षेत्रों में बिजाई अक्तूबर से 15 नवंबर तक पूरी कर लें सामान्य बिजाई के लिए कतारों में 20 सैं.मी. के फासले की सलाह दी जाती है यदि बिजाई देरी से करनी हो तो 18 सैं.मी. का फासला होना चाहिए 4-5 सैं.मी. की गहराई में बिजाई करनी चाहिए बीज ड्रिल,बुरकाव विधि ,जीरो टिलेज़ ड्रिल,रोटावेटर से गेंहू की बिजाई कर सकते हो अच्छी पैदावार के लिए:-मिट्टी की जांच के आधार पर खादें डालें मिट्टी की जांच के अनुसार ही हम मिट्टी में आवश्यक खादों की मात्रा दे सकते हैं सिंचित क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 60 किलो (यूरिया 130 किलो), फासफोरस 24 किलो (एस एस पी 150 किलो), पोटाश 12 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 20 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी नाइट्रोजन को पहली सिंचाई के समय डालें बारानी क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 24 किलो (यूरिया 52 किलो), फासफोरस 12 किलो (एस एस पी 75 किलो), पोटाश 8 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 15 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोज, फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें सिंचित क्षेत्रों में पिछेती बिजाई के लिए, नाइट्रोजन 50 किलो (यूरिया 110 किलो), फासफोरस 12 किलो (एस एस पी 75 किलो), पोटाश 16 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 27 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन की दो तिहाई मात्रा बिजाई के 35-40 दिनों के बाद डालें यह पाया गया है कि जिंक सल्फेट 10 किलो प्रति एकड़ में डालने से उपज में वृद्धि होती है जिंक की कमी को पूरा करने के लिए जिंक सल्फेट 0.5 प्रतिशत की फोलियर स्प्रे करें 15 दिनों के अंतराल पर दो से तीन स्प्रे करें अच्छी शाखाएं और उपज के लिए 19:19:19 घुलनशील खादें 5 ग्राम + स्टिकर 0.5 मि.ली. को प्रति लीटर पानी में मिलाकर बिजाई के 30 दिनों के बाद स्प्रे करें
Posted by Lakhbir sohi Golu
Punjab
04-12-2019 10:19 AM
Punjab
12-04-2019 11:19 AM
shrimaan g barseem vich M-45 @500 gm per acre da spray kr skde ho g..
Posted by ਬਲਜੀਤ
Punjab
04-12-2019 10:14 AM
Punjab
12-04-2019 04:09 PM
ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ ਪੇਟ ਦੇ ਕੀੜਿਆਂ ਲਈ Bendykind plus ਗੋਲੀ ਦਿਓ ਅਤੇ Anabolite liquid 100ml ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ , ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ Glactogog ਪਾਊਡਰ ਵੀ 30 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ , ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ 250 ਗ੍ਰਾਮ ਗੁੜ ਅਤੇ 2 ਕਿਲੋ ਦਲੀਆ ਚੰਗੀ ਤ੍ਰਾਹ ਰਿਨ ਕੇ ਫਿਰ ਉਸ ਵਿਚ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਸਰੋਂ ਦਾ ਤੇਲ ਮਿਕਸ ਕਰੋ , ਇਸ ਨੂੰ ਤੁਸੀ ਅੱਧਾ ਅੱਧਾ ਕਰਕੇ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ , ਇਸ ਤ੍ਰਾਹ ਤੁਸੀ 5-7 ਦਿਨ ਦਿਓ.
Posted by Kamal Hassan
Rajasthan
04-12-2019 10:11 AM
Punjab
12-04-2019 04:10 PM
आप मुर्गियों की फीड के लिए फीड तैयार करने के लिए 25kg मक्की, 20kg गेहू, 5-6 kg सोयाबीन खल और 50gm मिनरल मिश्रण मिलाकर सुबह और शाम को फीड मुर्गियों को डालें, जितनी वो आसानी से खा जाए उस हिसाब से डालें..
Posted by hanuman
Rajasthan
04-12-2019 10:03 AM
Maharashtra
12-04-2019 10:10 AM
hanuman ji kripya aap btaye ke konsi fasl me kharpatvar hai taki aapko uske hisab se jankari di ja sake.dhanywad
Posted by ਕਰਨਦੀਪ ਸਿੰਘ
Punjab
04-12-2019 09:59 AM
Punjab
12-04-2019 04:13 PM
ਤੁਸੀ ਕਣਕ ਦਾ ਦਲੀਆ ਚੰਗੀ ਤ੍ਰਾਹ ਰਿਨ ਕੇ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਪਸ਼ੂ ਆਸਾਨੀ ਨਾਲ ਹਜ਼ਮ ਕਰੇ ਉਸ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਦਿਓ, ਜ਼ਿਆਦਾ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਵਰਤੋਂ ਨਾ ਕਰੋ ਕਿਉਕਿ ਜਰੂਰਤ ਤੋਂ ਜ਼ਿਆਦਾ ਚੀਜ ਦੇਣ ਨਾਲ ਨੁਕਸਾਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਬਾਕੀ ਹਰ 3 ਮਹੀਨਿਆਂ ਦੇ ਫਰਕ ਨਾਲ ਡਿਵਰਮਿੰਗ ਜਰੂਰ ਕਰੋ ਜੀ
Posted by Mander Brar
Punjab
04-12-2019 09:57 AM
Punjab
12-04-2019 10:02 AM
ਮੰਦਰ ਜੀ ਤੁਸੀ ਪਹਿਲੇ ਪਾਣੀ ਤੋਂ 2 -3 ਦਿਨ ਪਹਿਲਾਂ ਇਸਦੀ ਸਪਰੇ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by jaswinder singh
Punjab
04-12-2019 09:54 AM
Punjab
12-04-2019 12:29 PM
jaswinder ji isdi bijai hun nahi kiti ja sakdi hai.
Posted by SANDEEP KUMAWAT
Madhya Pradesh
04-12-2019 09:51 AM
Rajasthan
12-04-2019 09:57 AM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by sanjiv kumar
Uttar Pradesh
04-12-2019 09:45 AM
Punjab
12-04-2019 09:53 AM
sanjiv ji aap iske patton ke neeche machar ka hamla check karen agar maujood hai to aap iske uper imidacloprid@1.5ml ko prati litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by vimal kumar
Uttar Pradesh
04-12-2019 09:31 AM
Punjab
12-04-2019 12:04 PM
श्रीमान गेहूं की किस्में गंगा (HD-2643), मालवीय व्हिट -468 (HUW-468), PBW-443, HD-2733 (VSM,   कौशाम्बी (HW-2045),  HD-2307, HP-1493, HDR-77, सोनाली (HP-1633), शताब्दी (K-0307), HD 2733 (VSM), पूसा व्हिट-107 (HD-2888), DBW 14, नरेन्द्र व्हिट – 2036, MACS-6145, पूर्वा (HD 2824), RAJ-4120, DBW 39, पूसा प्राची (HI-1563),  पूसा बसंत (HD 2985,  KRL-210 वो सकते हो
Posted by Omprakash Sen
Madhya Pradesh
04-12-2019 09:28 AM
Maharashtra
12-04-2019 12:19 PM
Omprakash Sen ji urea ka chidkav nahi kiya jata iska chinta diya jata hai.dhanywad
Posted by Pankaj Yadav
Uttar Pradesh
04-12-2019 09:25 AM
Maharashtra
12-04-2019 09:51 AM
पंकज जी आपने इसमें कोई स्प्रे या खाद का इस्तेमाल किया है कृपया बताये ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by Aakashawasthi Awasthi
Madhya Pradesh
04-12-2019 09:20 AM
Punjab
12-04-2019 12:07 PM
श्रीमान पहले पानी के साथ यूरिया 50 किलो और जिंक सलफेट 10 किलोग्राम प्रति एकड़ में डालें जिंक की कमी को जिंक सलफेट 0.5 प्रतिशत स्प्रे द्वारा पूरा किया जा सकता है 15 दिनों के अंतराल पर 2-3 स्प्रे करें ज़मीन की अच्छी जोताई और अच्छी पैदावार के लिए 19:19:19 की स्प्रे, पानी में घुलनशील खादें+स्टिकर 0.5 मि.ली. को प्रति लीटर पानी में .... (Read More)
श्रीमान पहले पानी के साथ यूरिया 50 किलो और जिंक सलफेट 10 किलोग्राम प्रति एकड़ में डालें जिंक की कमी को जिंक सलफेट 0.5 प्रतिशत स्प्रे द्वारा पूरा किया जा सकता है 15 दिनों के अंतराल पर 2-3 स्प्रे करें ज़मीन की अच्छी जोताई और अच्छी पैदावार के लिए 19:19:19 की स्प्रे, पानी में घुलनशील खादें+स्टिकर 0.5 मि.ली. को प्रति लीटर पानी में मिलाकर बिजाई के 30 दिनों के बाद डालें
Posted by Anuj kumar
Uttar Pradesh
04-12-2019 09:17 AM
Punjab
12-12-2019 01:28 PM
Anuj KUmar ji Lahsun ka bhav 7600 - 9500/q ke pas chal raha hai, Thankyou.
Posted by Naveen Bhardwaj
Haryana
04-12-2019 08:51 AM
Maharashtra
12-04-2019 09:26 AM
नवीन जी कृपया आप सवाल विस्तार से पूछे कि आप कौन सी फसल की बाग़बानी करना चाहते है ताकि आपको उसके हिसाब से जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by Kuldeep Kamboj
Punjab
04-12-2019 08:50 AM
Punjab
12-04-2019 09:06 AM
Shri maan yeh keet ke hamle ki vajah se hua hai ,kripya app isme imidacloprid @1.5 prati liter pani ke hisaab se spray karein.....
Posted by shravan lal jat
Rajasthan
04-12-2019 08:46 AM
Punjab
12-04-2019 10:10 AM
असली केसर सिर्फ जम्मू कश्मीर, ईरान और अफगानिस्तान में ही हो सकता है, यह कुसुम है, इसकी भी कई दवाई बनती है, यदि कोई और छक है तो जम्मू कश्मीर के इस किसान से बात करें, जिसके दादे, पड़दादे भी केसर की खेती करते थे और यह भी केसर की खेती करते है Javid Ahmed- 95964 93260 बाकि आप यह वीडियो देखें https://www.youtube.com/watchv=vl7c6L3ETnQ&t=8s बाकि यदि फिर भी यकीन नहीं .... (Read More)
असली केसर सिर्फ जम्मू कश्मीर, ईरान और अफगानिस्तान में ही हो सकता है, यह कुसुम है, इसकी भी कई दवाई बनती है, यदि कोई और छक है तो जम्मू कश्मीर के इस किसान से बात करें, जिसके दादे, पड़दादे भी केसर की खेती करते थे और यह भी केसर की खेती करते है Javid Ahmed- 95964 93260 बाकि आप यह वीडियो देखें https://www.youtube.com/watchv=vl7c6L3ETnQ&t=8s बाकि यदि फिर भी यकीन नहीं है तो तो आप अमृतपाल सिंह बराड़ प्रोफेसर, पीएयू लुधियाना इस वीडियो संबंधी विचार पड़ सकते हैं, यह फसल केसर की नहीं है, यह फसल कसुंबडे की है, इसे अंग्रेजी में Safflower कहते है, और विज्ञानं में इसे Carthamus tinctorius कहते है
Posted by AKSHIT CHAUDHARY
Uttar Pradesh
04-12-2019 08:45 AM
Punjab
12-04-2019 09:00 AM
श्री मान पहली सिंचाई बिजाई के 20-25 दिनों के बाद सिंचाई करनी चाहिए यह सहायक जड़ें बनने की अवस्था होती है और यदि अवस्था में नमी की कमी हो तो उपज में काफी कमी आती है बिजाई के बाद 40-45 दिनों में शाखाएं बनने की अवस्था में सिंचाई करें तीसरी सिंचाई बिजाई के बाद 60-65 दिनों में जोड़ बनने के समय करें चौथी सिंचाई 80-85 दिनों में फूल .... (Read More)
श्री मान पहली सिंचाई बिजाई के 20-25 दिनों के बाद सिंचाई करनी चाहिए यह सहायक जड़ें बनने की अवस्था होती है और यदि अवस्था में नमी की कमी हो तो उपज में काफी कमी आती है बिजाई के बाद 40-45 दिनों में शाखाएं बनने की अवस्था में सिंचाई करें तीसरी सिंचाई बिजाई के बाद 60-65 दिनों में जोड़ बनने के समय करें चौथी सिंचाई 80-85 दिनों में फूल बनने की अवस्था में करें पांचवी सिंचाई बिजाई के बाद 100-105 दिनों में गेहूं पकने की अवस्था में करें
Posted by Amrinder Dandiwal
Punjab
04-12-2019 08:44 AM
Punjab
12-04-2019 09:00 AM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਪਾਣੀ ਲਾਉਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਗੁੱਲੀ ਡੰਡੇ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਲੀਡਰ, ਟੌਪਿਕ, ਦੀ ਵਰਤੋ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਚੌੜੇ ਪੱਤਿਆਂ ਵਾਲੇ ਨਦੀਨ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ 2,4D 250 ml ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਟੌਪਿਕ 15 ਡਬਲਿਊ ਪੀ (ਕਲੋਡੀਨਾਫਾਪ) 160 ਗ੍ਰਾਮ ਬਿਜਾਈ ਦੇ 30 ਤੋਂ 35 ਦਿਨਾਂ ਅੰਦਰ 150 ਪਾਣੀ/ਏਕੜ •• ਐਕਸੀਅਲ 5 ਈ ਸੀ (ਪਿਨੌਕਸਾਡਿਨ) 400 ਮਿਲੀਲਿਟਰ 4) ਲੀਡਰ/ਮਾਰਕਸਲਫੋ 75 ਡਬਲਿਊ ਜੀ (ਸਲਫੋਸਲਫੂਰਾਨ) 13 ਗ੍ਰਾਮ •ਟੋਟ.... (Read More)
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਪਾਣੀ ਲਾਉਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਗੁੱਲੀ ਡੰਡੇ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਲੀਡਰ, ਟੌਪਿਕ, ਦੀ ਵਰਤੋ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਚੌੜੇ ਪੱਤਿਆਂ ਵਾਲੇ ਨਦੀਨ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ 2,4D 250 ml ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਟੌਪਿਕ 15 ਡਬਲਿਊ ਪੀ (ਕਲੋਡੀਨਾਫਾਪ) 160 ਗ੍ਰਾਮ ਬਿਜਾਈ ਦੇ 30 ਤੋਂ 35 ਦਿਨਾਂ ਅੰਦਰ 150 ਪਾਣੀ/ਏਕੜ •• ਐਕਸੀਅਲ 5 ਈ ਸੀ (ਪਿਨੌਕਸਾਡਿਨ) 400 ਮਿਲੀਲਿਟਰ 4) ਲੀਡਰ/ਮਾਰਕਸਲਫੋ 75 ਡਬਲਿਊ ਜੀ (ਸਲਫੋਸਲਫੂਰਾਨ) 13 ਗ੍ਰਾਮ •ਟੋਟਲ/ਮਾਰਕਪਾਵਰ 75 ਡਬਲਿਊ ਡੀ ਜੀ (ਸਲਫੋਸਲਫੂਰਾਨ+ਮੈਟਸਫੂਰਾਨ) 16 ਗ੍ਰਾਮ •ਐਟਲਾਂਟਿਸ 3.6 ਡਬਲਿਊ ਡੀ ਜੀ (ਮਿਜ਼ੋਸਲਫੂਰਾਨ+ਆਇਡੋਸਲਫੂਰਾਨ) 160 ਗ੍ਰਾਮ 6 ਸ਼ਗੁਨ 21-11 (ਮੈਟਰੀਬਿਊਜ਼ਿਨ+ਕਲੋਡੀਨਾਫਾਪ) 200 ਗ੍ਰਾਮ •ਏ ਸੀ ਐੱਮ-9 (ਕਲੋਡੀਨਾਫਾਪ+ਮੈਟਰੀਬਿਊਜ਼ਿਨ) 240 ਗ੍ਰਾਮ
Posted by krishan
Haryana
04-12-2019 08:18 AM
Punjab
12-04-2019 04:15 PM
ये क्रॉस नसल की गाय है इसे आप Vitum-H liquid 10-10ml सुबह शाम और Metabolite पाउडर रोजाना एक पुड़िया देनी शुरू करें और हरा चारा जितना आसानी से हज़म कर सके उस हिसाब से दें बाकि आप गेहूं का दलिया अच्छी तरह गर्म करके उसमें गुड मिक्स करके दे सकते है इससे दूध बढ़ता है और आसानी से हज़म हो जाता है
Posted by gurpal singh
Punjab
04-12-2019 08:16 AM
Punjab
12-04-2019 04:16 PM
ਇਸ ਸਿਸਟਮ ਵਿੱਚ ਘੱਟ ਜਗਾਂ ਤੇ ਘੱਟ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਮੱਛੀ ਪਾਲੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਜੀ ਤੇ ਇਸ ਵਿੱਚ ਚਾਰ ਮੀਟਰ ਦਾ ਟੈਕ ਵਿੱਚ ਮੱਛੀ ਪਾਲੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਬਾਕੀ ਅਜੇ ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਗੁਰੂ ਅੰਗਦ ਦੇਵ ਵੇਟਨਰੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਇਸ ਤੇ ਕੰਮ ਕਰ ਰਹੀ ਹੈ ਤੇ ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਅਜੇ ਕਿਸੇ ਕਿਸਾਨ ਨੇ ਸ਼ੁਰੂ ਨਹੀ ਕੀਤੀ ਕਿਉਕੀ ਇਸ ਦੀ ਅਜੇ ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਕਿਤੇ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਵੀ ਸ਼ੁਰੂ ਨਹੀ ਹੋਈ, ਹਰਿਆਣਾ ਵਿੱਚ ਕੁੱਝ ਕਿਸਾ.... (Read More)
ਇਸ ਸਿਸਟਮ ਵਿੱਚ ਘੱਟ ਜਗਾਂ ਤੇ ਘੱਟ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਮੱਛੀ ਪਾਲੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਜੀ ਤੇ ਇਸ ਵਿੱਚ ਚਾਰ ਮੀਟਰ ਦਾ ਟੈਕ ਵਿੱਚ ਮੱਛੀ ਪਾਲੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਬਾਕੀ ਅਜੇ ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਗੁਰੂ ਅੰਗਦ ਦੇਵ ਵੇਟਨਰੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਇਸ ਤੇ ਕੰਮ ਕਰ ਰਹੀ ਹੈ ਤੇ ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਅਜੇ ਕਿਸੇ ਕਿਸਾਨ ਨੇ ਸ਼ੁਰੂ ਨਹੀ ਕੀਤੀ ਕਿਉਕੀ ਇਸ ਦੀ ਅਜੇ ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਕਿਤੇ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਵੀ ਸ਼ੁਰੂ ਨਹੀ ਹੋਈ, ਹਰਿਆਣਾ ਵਿੱਚ ਕੁੱਝ ਕਿਸਾਨ ਇਸ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਮੱਛੀ ਪਾਲ ਰਹੇ ਹਨ ਜੀ ਬਾਕੀ ਮੈ ਇਸ ਤੇ ਜਲਦੀ ਕੰਮ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਰਿਹਾ ਹਾਂ ਤੇ ਮੱਛੀ ਪਾਲਣ ਵਿਭਾਗ ਨਾਲ ਇਸ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਬਾਰੇ ਵੀ ਗੱਲ ਕਰ ਰਿਹਾਂ ਹਾਂ ਜੀ , ਜਦੋਂ ਇਸ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਸ਼ੁਰੂ ਕੀਤੀ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਦੱਸ ਦਿੱਤਾ ਜਾਵੇਗਾ ਜੀ.
Posted by manpreet
Punjab
04-12-2019 08:12 AM
Punjab
12-04-2019 12:25 PM
manpreet ji kirpa karke daso ke isdi bilkul v growth nahi hoyi hai ja eh ugge hi nahi han ta jo osde hisab nal tuhanu jankari diti ja sake.dhanwad
Posted by Baljeet Singh chahal (amna)
Punjab
04-12-2019 07:58 AM
Punjab
12-04-2019 04:34 PM
ਬਲਜੀਤ ਸਿੰਘ ਜੀ ਤੁਹਾਡੀ ਦਿਲਚਸਪੀ ਕਿਹੜੇ ਕੰਮ ਵਿੱਚ ਹੈ,ਜਾਂ ਕਿਸੇ ਖੇਤਰ ਚ ਤੁਹਾਨੂੰ ਮੁਹਾਰਤ ਹਾਸਿਲ ਹੈ ਤਾ ਓ ਕੰਮ ਬਾਰੇ ਸੋਚੋ ਤੁਹਾਡੇ ਨੇੜੇ ਸ਼ਹਿਰ ਕਿਹੜਾ ਹੈ,ਜਮੀਨ ਕਿੰਨੀ ਹੈ ਆਪਣੇ ਕੋਲ,ਪਰਿਵਾਰ ਚ ਕਿੰਨੇ ਮੈਂਬਰ ਨੇ ਇਹ ਦੱਸੋ
Posted by somnath patil
Maharashtra
04-12-2019 07:51 AM
Maharashtra
12-04-2019 12:17 PM
खीरा को जून जुलाई महीने में बिजाई की जा सकती है इसके अलावा इसकी जनवरी में बिजाई की जाती है अभी इसकी बिजाई का समय नहीं है धन्यवाद
Posted by kamlesh jaat
Rajasthan
04-12-2019 07:50 AM
Maharashtra
12-04-2019 12:04 PM
रासायनिक नदीन रोकथाम: इसमें कम मेहनत और हाथों से नदीनों को उखाड़ने से होने वाली हानि ना होने कारण ज्यादातर यह तरीका ही अपनाया जाता है नुकसान से बचने के लिए पैंडीमैथालीन स्टांप (30 ई.सी.) 1 लीटर को 500 लीटर पानी के घोल में मिलाके बीजने के 0-3 दिनों के अंदर अंदर छिड़काव करना चाहिए चौड़े पत्तों वाले नदीनों की रोकथाम के ल.... (Read More)
रासायनिक नदीन रोकथाम: इसमें कम मेहनत और हाथों से नदीनों को उखाड़ने से होने वाली हानि ना होने कारण ज्यादातर यह तरीका ही अपनाया जाता है नुकसान से बचने के लिए पैंडीमैथालीन स्टांप (30 ई.सी.) 1 लीटर को 500 लीटर पानी के घोल में मिलाके बीजने के 0-3 दिनों के अंदर अंदर छिड़काव करना चाहिए चौड़े पत्तों वाले नदीनों की रोकथाम के लिए 2,4-डी 250 मि.ली. को 150 लीटर पानी में घोलकर प्रयोग करें
Posted by inderpal
Punjab
04-12-2019 07:49 AM
Punjab
12-04-2019 04:18 PM
Inderpal ji tuci iss nu Gestaprogen powder 25gm rojana 20din tak dinde rho, iss nal pashu de gaban rehn di ass vddh jndi hai, jekar ohh gaban naa hoii tan dubara puuri heat vich aa jawegi..
Posted by kamlesh jaat
Rajasthan
04-12-2019 07:48 AM
Maharashtra
12-04-2019 11:58 AM
कमलेश जी कृपया आप इसकी फोटो भेजे ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by prabhjot singh
Punjab
04-12-2019 07:39 AM
Punjab
12-05-2019 05:46 PM
tuci 3 kg dudh magar 1.5 kg feed deo, iss vich tuci kanak da dana ate saro khal mix krke 1kg tak de skde ho, iss hisab nal tuci feed de skde ho.
Posted by ਸਰਦਾਰ ਜੀ
Punjab
04-12-2019 07:38 AM
Punjab
12-04-2019 11:49 AM
ਪੰਜਾਬ ਵਿਚ ਗੰਨੇ ਨੂੰ ਬੀਜਣ ਦਾ ਸਮਾਂ ਸਤੰਬਰ ਤੋਂ ਅਕਤੂਬਰ ਅਤੇ ਫਰਵਰੀ ਤੋਂ ਮਾਰਚ ਮਹੀਨਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਗੰਨਾ ਆਮ ਤੌਰ ਤੇ ਪੱਕਣ ਲਈ ਇੱਕ ਸਾਲ ਦਾ ਸਮਾਂ ਲੈਂਦਾ ਹੈ
Posted by lakhbeer singh
Punjab
04-12-2019 07:36 AM
Punjab
12-04-2019 11:41 AM
lakhbeer ji tuc ehna dona nu mix karke vart sakde ho.dhanwad
Posted by malkit singh
Punjab
04-12-2019 07:35 AM
Punjab
12-04-2019 07:54 AM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਪਾਣੀ ਲਾਉਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਗੁੱਲੀ ਡੰਡੇ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਲੀਡਰ, ਟੌਪਿਕ, ਦੀ ਵਰਤੋ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਚੌੜੇ ਪੱਤਿਆਂ ਵਾਲੇ ਨਦੀਨ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ 2,4D 250 ml ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਟੌਪਿਕ 15 ਡਬਲਿਊ ਪੀ (ਕਲੋਡੀਨਾਫਾਪ) 160 ਗ੍ਰਾਮ ਬਿਜਾਈ ਦੇ 30 ਤੋਂ 35 ਦਿਨਾਂ ਅੰਦਰ 150 ਪਾਣੀ/ਏਕੜ •• ਐਕਸੀਅਲ 5 ਈ ਸੀ (ਪਿਨੌਕਸਾਡਿਨ) 400 ਮਿਲੀਲਿਟਰ 4) ਲੀਡਰ/ਮਾਰਕਸਲਫੋ 75 ਡਬਲਿਊ ਜੀ (ਸਲਫੋਸਲਫੂਰਾਨ) 13 ਗ੍ਰਾਮ •ਟੋਟ.... (Read More)
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਪਾਣੀ ਲਾਉਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਗੁੱਲੀ ਡੰਡੇ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਲੀਡਰ, ਟੌਪਿਕ, ਦੀ ਵਰਤੋ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਚੌੜੇ ਪੱਤਿਆਂ ਵਾਲੇ ਨਦੀਨ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ 2,4D 250 ml ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਟੌਪਿਕ 15 ਡਬਲਿਊ ਪੀ (ਕਲੋਡੀਨਾਫਾਪ) 160 ਗ੍ਰਾਮ ਬਿਜਾਈ ਦੇ 30 ਤੋਂ 35 ਦਿਨਾਂ ਅੰਦਰ 150 ਪਾਣੀ/ਏਕੜ •• ਐਕਸੀਅਲ 5 ਈ ਸੀ (ਪਿਨੌਕਸਾਡਿਨ) 400 ਮਿਲੀਲਿਟਰ 4) ਲੀਡਰ/ਮਾਰਕਸਲਫੋ 75 ਡਬਲਿਊ ਜੀ (ਸਲਫੋਸਲਫੂਰਾਨ) 13 ਗ੍ਰਾਮ •ਟੋਟਲ/ਮਾਰਕਪਾਵਰ 75 ਡਬਲਿਊ ਡੀ ਜੀ (ਸਲਫੋਸਲਫੂਰਾਨ+ਮੈਟਸਫੂਰਾਨ) 16 ਗ੍ਰਾਮ •ਐਟਲਾਂਟਿਸ 3.6 ਡਬਲਿਊ ਡੀ ਜੀ (ਮਿਜ਼ੋਸਲਫੂਰਾਨ+ਆਇਡੋਸਲਫੂਰਾਨ) 160 ਗ੍ਰਾਮ 6 ਸ਼ਗੁਨ 21-11 (ਮੈਟਰੀਬਿਊਜ਼ਿਨ+ਕਲੋਡੀਨਾਫਾਪ) 200 ਗ੍ਰਾਮ •ਏ ਸੀ ਐੱਮ-9 (ਕਲੋਡੀਨਾਫਾਪ+ਮੈਟਰੀਬਿਊਜ਼ਿਨ) 240 ਗ੍ਰਾਮ
Posted by Prabhjot Randhawa
Punjab
04-12-2019 07:27 AM
Punjab
12-04-2019 04:20 PM
ਤੁਸੀ 250 ਗ੍ਰਾਮ ਗੁੜ, 250 ਗ੍ਰਾਮ ਗੁਲਕੰਦ, 100 ਗ੍ਰਾਮ ਸੌੰਫ, 100 ਗ੍ਰਾਮ ਸੁਕੇ ਆਵਲੇ ਤੇ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਅਜਵਾਇਨ ਉਬਾਲ ਕੇ ਠਾਰ ਕੇ 5 ਦਿਨ ਦੇਣੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ Enerdyna liquid 100-100ml ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ, Lactomax tablet 10-10 ਗੋਲੀਆਂ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਅਤੇ Lactomood ਹੋਮਿਓਪੈਥਿਕ ਦਵਾਈ ਦੀਆਂ 10-10 ਬੂੰਦਾਂ ਦਿਨ ਵਿੱਚ 3 ਵਾਰ ਦਿਓ, ਬਾਕੀ ਉਸ ਨੂੰ ਰੋਜਾਨਾ 35-40 ਕਿਲੋ ਹਰਾ ਚਾਰਾ ਦਿਓ..
Posted by Rajwinder Sharma
Punjab
04-12-2019 07:26 AM
Punjab
12-04-2019 11:39 AM
rajwinder ji tuc isde uper carbendazim@4 gram nu prati litre pani de hisab nal spray karo. isto ilava kirpa karke daso ke tuc isnu kini matra vich khaad payi hai ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake.dhanwad
Posted by vinay Kumar
Bihar
04-12-2019 07:23 AM
Maharashtra
12-04-2019 11:37 AM
कलौंजी की खेती के लिए कार्बनिक पदार्थ से युक्त बलुई दोमट सबसे उपयुक्त होती है. कलौंजी की खेती के लिए भूमि में जल निकासी अच्छे से होनी चाहिए. इसकी खेती पथरीली भूमि में नही की जा सकती. इसकी खेती के लिए भूमि का पी.एच. मान 6 से 7 के बीच होना चाहिए.इसकी खेती के लिए उष्णकटिबंधीय जलवायु उपयुक्त होती है. इसकी खेती के लिए .... (Read More)
कलौंजी की खेती के लिए कार्बनिक पदार्थ से युक्त बलुई दोमट सबसे उपयुक्त होती है. कलौंजी की खेती के लिए भूमि में जल निकासी अच्छे से होनी चाहिए. इसकी खेती पथरीली भूमि में नही की जा सकती. इसकी खेती के लिए भूमि का पी.एच. मान 6 से 7 के बीच होना चाहिए.इसकी खेती के लिए उष्णकटिबंधीय जलवायु उपयुक्त होती है. इसकी खेती के लिए सर्दी और गर्मी दोनों की जरूरत होती है. इसके पौधे को विकास करने के लिए ठंड की जरूरत होती है. और पकने के दौरान तेज़ गर्मी की जरूरत होती है. इस कारण भारत में इसकी खेती ज्यादातर रबी की फसल के साथ की जाती है. इसके पौधों को ज्यादा बारिश की जरूरत नही होती. इसके पौधों को अलग अलग समय में अलग अलग तापमान की जरूरत होती है. अंकुरण के वक्त इसके बीजों को अंकुरित होने के लिए सामान्य तापमान की जरूरत होती है. उसके बाद विकास करने के लिए 18 डिग्री के आसपास का तापमान उपयुक्त होता है. और फसल के पकने के दौरान तापमान 30 डिग्री के आसपास अच्छा होता है.आप इसकी किस्मे जैसे एन. आर. सी. एस. एस. ए. एन. – 1 की बिजाई कर सकते है कलौंजी की खेती रबी की फसलों के साथ ही जाती है. इस दौरान इसके बीजों की रोपाई का टाइम मध्य सितम्बर से मध्य अक्टूबर तक का होता है. इस दौरान इसकी रोपाई कर देनी चाहिए. लेकिन अक्टूबर ले लास्ट तक भी इसकी बुवाई की जा सकती है.कलौंजी के पौधों को पानी की सामान्य जरूरत होती है. इसके बीजों को खेत में लगाने के तुरंत बाद उनकी सिंचाई कर देनी चाहिए. उसके बाद बीजों के अंकुरित होने तक नमी बनाये रखने के लिए खेत की हल्की सिंचाई उचित टाइम पर कर देनी चाहिए. पौधे के विकास के दौरान 15 से 20 दिन के अंतराल में सिंचाई कर देनी चाहिए.कलौंजी के पौधे को उर्वरक की जरूरत बाकी फसलों की तरह ही होती है. इसके लिए शुरुआत में खेत की जुताई के वक्त लगभग 10 से 12 गाडी प्रति हेक्टेयर के हिसाब से पुरानी गोबर की खाद को खेत में जुताई के साथ दें. इसके अलावा रासायनिक खाद के रूप में दो से तीन बोर एन.पी.के. की मात्रा को खेत में आखिरी जुताई के वक्त देनी चाहिए.कलौंजी की खेती में खरपतवार नियंत्रण नीलाई गुड़ाई के माध्यम से किया जाता है. इसके लिए शुरुआत में बीज रोपाई के लगभग 20 से 25 दिन बाद पौधों की हल्की नीलाई कर देनी चाहिए. कलौंजी के पौधों में खरपतवार नियंत्रण के लिए पौधों की दो से तीन गुड़ाई काफी होती है. पहली गुड़ाई के बाद बाकी की गुड़ाई 15 दिन के अंतराल में कर देनी चाहिए.
Posted by अमित चौधरी
Uttar Pradesh
04-12-2019 07:17 AM
Maharashtra
12-04-2019 04:22 PM
Biofloc मछली पालन की नई तकनीक है, जिसका invention Dr.YORRAM AVNIMELECH जो कि ISRAEL के है जहाँ पानी की कमी हैै उस परस्तिथि में मछली पालन कैसे किया जाये, उस तकनीक का invention किया पर फ़िलहाल भारत के कई राज्यों में किसान इस तकनीक का इस्तेमाल करके मछली पालन कर रहे हैं इसमें हम थोड़ी जगह में जहाँ सिर्फ 4 मीटर का टैंक लगता है और 1 मीटर इसकी लम्बाई होत.... (Read More)
Biofloc मछली पालन की नई तकनीक है, जिसका invention Dr.YORRAM AVNIMELECH जो कि ISRAEL के है जहाँ पानी की कमी हैै उस परस्तिथि में मछली पालन कैसे किया जाये, उस तकनीक का invention किया पर फ़िलहाल भारत के कई राज्यों में किसान इस तकनीक का इस्तेमाल करके मछली पालन कर रहे हैं इसमें हम थोड़ी जगह में जहाँ सिर्फ 4 मीटर का टैंक लगता है और 1 मीटर इसकी लम्बाई होती है मतलब की 10,000 लीटर इसमें हम अपना मछली पालन शुरू करके 1100-1300 किलो fish बना सकते हैं इसमें ज़्यादा पानी की ज़रूरत नहीं पड़ती और ना ही ज़्यादा जगह की ज़रूरत होती है, इसमें 650 -700 रूपये बिकने वाली मछलियां हैं वह हम इसमें डालते हैं और यह मछलियां 6 से 7 महीने तक बिकने योग्य हो जाती है, shrimp farming मतलब की झींगा इसका culture period -90 दिन का होता है BFT टैंक में आपको C:N ratio की सहायता से आपको बढ़िया बैक्टीरिया maintain करना होता है, और drainage की सहायता से sludge removal किया जाता है अगर आपका मैनेजमेंट एकदम सटीक रहा तो 0 % प्रतिशत पानी अदला-बदली किये बिना culture पूरा किया जा सकता है आपको उचित blower की सहायता से DO (dissolved oxygen ) maintain करने की ज़रूरत पड़ती है C:N ratio मतलब की कार्बन: नाइट्रोजन ratio अनुपात बनाएं रखना पड़ता है कार्बन जिससे की बैक्टीरिया (हेट्रोट्रॉपिक बैक्टीरिया) ठीक से काम करके नाइट्रोजन को कम कर सके क्योंकि नाइट्रोजन का एक हिस्सा जो कि non ionised Ammonia [NH3] जो मछली के लिए जानलेवा होता हैैै अधिक जानकारी के लिए 9096843382 पर फ़ोन कीजिये.
Posted by Qamar Raza Khan
Uttar Pradesh
04-12-2019 07:11 AM
Punjab
12-04-2019 07:27 AM
श्री मान गेहूं की बिजाई का सही समय अक्टूबर से 30 नवम्बर तक कर सकते हो और पछेती किस्में PBW_590,PBW-658 और PBW-752,HD-2851 की बिजाई 15 दिसम्बर तक कर सकते हो
Posted by ਗੁਰਪ੍ਰੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
04-12-2019 07:04 AM
Punjab
12-04-2019 04:23 PM
उसे आप Potasium iodied powder 7gm रोजाना, Mammidium powder 50gm रोजाना और Milkout पाउडर 2—2 चम्मच सुबह शाम दें इससे फर्क पड़ जाएगा।
Posted by malkeet
Punjab
04-12-2019 07:02 AM
Punjab
12-04-2019 10:06 PM
मलकीत जी आप उसे picosulfate liquid एक चम्मच गर्म पानी में दें इससे फर्क पड़ जाएगा।
Posted by virendra Kumar
Uttar Pradesh
04-12-2019 06:30 AM
Maharashtra
12-04-2019 11:28 AM
जब फल अपने रंग को हरे से हल्के हरे में बदल देता है और फल घना हो जाता है तब कट लगाने और दूध इक्ट्ठा करने के लिए सही अवस्था होती है दोपहर में कट लगाने के प्रक्रिया पूरी कर लें और दूध को अगले दिन की सवेर में इक्ट्ठा करें इस प्रक्रिया को हर तीन दिन बाद दोहरायें प्रत्येक फल में 3-56 बार कट लगाए जा सकते हैं आखिरी कट ल.... (Read More)
जब फल अपने रंग को हरे से हल्के हरे में बदल देता है और फल घना हो जाता है तब कट लगाने और दूध इक्ट्ठा करने के लिए सही अवस्था होती है दोपहर में कट लगाने के प्रक्रिया पूरी कर लें और दूध को अगले दिन की सवेर में इक्ट्ठा करें इस प्रक्रिया को हर तीन दिन बाद दोहरायें प्रत्येक फल में 3-56 बार कट लगाए जा सकते हैं आखिरी कट लगाने के बाद फसल को 20-25 दिनों के लिए फसल को सूखने के लिए छोड़ दें अच्छी तरह से सुखाने के बाद फल की तुड़ाई करें और फसल को दरांती के साथ काट दें सूखे फलों की तुड़ाई के बाद उन्हें खुली जगह में बिछा दें और उनमें से बीज निकाल लें
Posted by Daljit Singh
Punjab
04-12-2019 06:19 AM
Punjab
12-04-2019 11:27 AM
दलजीत जी आप डीएपी की जगह इसका प्रयोग कर सकते है इसकी मात्रा 50 किलो प्रति एकड़ के हिसाब से प्रयोग की जाती है
Posted by ashish
Uttar Pradesh
04-12-2019 06:14 AM
Punjab
01-11-2020 02:25 PM
इसके लिए आपको डायरेक्ट मार्केटिंग करनी पड़ेगी , जी खुद होलसेलर ढूढ़ने पड़ेगे जी, सोशल मीडिया की हेल्प से मार्कटिंग करनी पड़ेगी, होटल और रेस्टोरेंट में बात कर सकते है जी
Posted by Bhupinder Pawar
Punjab
04-12-2019 06:04 AM
Punjab
12-04-2019 04:25 PM
यदि आप मछली पालन का काम शुरू करना चाहते हैं तो ट्रेनिंग बहुत जरूरी है यह ट्रेनिंग FFDA(fish farmer development aggency) हर जिले में बनी है जहां हमारा खेतीबाड़ी विभाग है वहां इसके अफसर बैठते हैं वहां जाकर एप्लीकेशन भरवायें वहां आपको 5 दिन की ट्रेनिंग दी जायेगी ट्रेनिंग के लिए दसवीं पास होना ज़रूरी है इस ट्रेनिंग में आपको लोन और सब्स.... (Read More)
यदि आप मछली पालन का काम शुरू करना चाहते हैं तो ट्रेनिंग बहुत जरूरी है यह ट्रेनिंग FFDA(fish farmer development aggency) हर जिले में बनी है जहां हमारा खेतीबाड़ी विभाग है वहां इसके अफसर बैठते हैं वहां जाकर एप्लीकेशन भरवायें वहां आपको 5 दिन की ट्रेनिंग दी जायेगी ट्रेनिंग के लिए दसवीं पास होना ज़रूरी है इस ट्रेनिंग में आपको लोन और सब्सिड़ी के बारे में सारी जानकारी प्राप्त हो जाएगी इसकी पुंग छोड़ने के लिए अप्रैल से अक्टूबर का समय बढ़िया होता है, बाकि यदि अपने शुरू करना है तो यूनिवर्सिटी की तरफ से एक एकड़ में शुरू कर सकते हैं. एक एकड़ में 5000 पूंग डाल सकते हैं यह 2 से 3 इंच का होता है यदि 5000 डालना है तो 3000 रोहू, 1000 कतला, 500 कॉमन कॉर्प और 500 मरीगल नस्ल डाली जाए यह पूंग आप मछली पालन विभाग से खरीद सकते हैं यह एक इंच का बच्चा 10 पैसा प्रति बच्चा मिलेगा यदि बढ़िया खुराक डाली जाए तो 8 महीनों में यह लगभग 800—900 ग्राम का हो जाता है बाकी मछली पालन के लिए नहरी पानी बढ़िया होता है और आप गांव का छप्पड़ ठेके से लेकर भी यह काम शुरू कर सकते हैं तालाब में मछली के बीज डालने से पहले इस बात की जांच कर लेनी चाहिए कि उस तालाब में काफी मात्रा में मछली की कुदरती खुराक उपलब्ध है.
Posted by Bhupinder Pawar
Punjab
04-12-2019 06:02 AM
Punjab
12-04-2019 04:27 PM
Bhupinder ji desi murgia kuj time egg den ton badd thode sme da farak paa ke fir dena suru kr dindia hai, tuci uss nu Egg formula powder feed vich mix krke deo ate Ostovet calcium 30ml/100birds de hisab nal deo..