
Posted by Satwinder Sidhu
Punjab
05-12-2019 07:46 PM
ਬੱਕਰੀ ਪਾਲਣ ਸ਼ੁਰੂਆਤ ਕਰਨ ਲਈ ਤੁਸੀ 10 ਬੱਕਰੀਆਂ ਅਤੇ 2 ਬੱਕਰਿਆਂ ਨਾਲ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਹਨਾਂ ਦੀ ਖੁਰਾਕ ਅਵਸਥਾ ਘਟ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਲਈ ਅਸੀਂ ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਅਸਾਨੀ ਨਾਲ ਪਾਲ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ਇਹ ਹਰ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦੇ ਵਾਤਾਵਰਨ ਵਿੱਚ ਪਾਲੀਆਂ ਜਾ ਸਕਦੀਆਂ ਹਨ ਬਕਰੀਆਂ 12-14 ਮਹੀਨਿਆਂ ਵਿੱਚ ਬੱਚੇ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦੇਂਦੀਆਂ ਹਨ ਬਕਰੀ ਦਾ ਗਰਬ ਸਮਾਂ 150 ਦਿਨ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਸਾਲ ਵਿੱਚ 1-5 ਬੱਚੇ ਦਿੰਦਿਆਂ ਹਨ .... (Read More)
ਬੱਕਰੀ ਪਾਲਣ ਸ਼ੁਰੂਆਤ ਕਰਨ ਲਈ ਤੁਸੀ 10 ਬੱਕਰੀਆਂ ਅਤੇ 2 ਬੱਕਰਿਆਂ ਨਾਲ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਹਨਾਂ ਦੀ ਖੁਰਾਕ ਅਵਸਥਾ ਘਟ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਲਈ ਅਸੀਂ ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਅਸਾਨੀ ਨਾਲ ਪਾਲ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ਇਹ ਹਰ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦੇ ਵਾਤਾਵਰਨ ਵਿੱਚ ਪਾਲੀਆਂ ਜਾ ਸਕਦੀਆਂ ਹਨ ਬਕਰੀਆਂ 12-14 ਮਹੀਨਿਆਂ ਵਿੱਚ ਬੱਚੇ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦੇਂਦੀਆਂ ਹਨ ਬਕਰੀ ਦਾ ਗਰਬ ਸਮਾਂ 150 ਦਿਨ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਸਾਲ ਵਿੱਚ 1-5 ਬੱਚੇ ਦਿੰਦਿਆਂ ਹਨ ਸਾਲ ਵਿੱਚ 2 ਬੱਚੇ ਦੇਨਾ ਆਮ ਗੱਲ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਬਕਰੀਆਂ 8-10 ਸਾਲ ਤਕ ਬੱਚੇ ਦਿੰਦਿਆਂ ਹਨ ਅਤੇ ਆਪਣੀ ਗਿਣਤੀ ਵਿੱਚ ਤੇਜੀ ਨਾਲ ਵਾਧਾ ਕਰ ਲੈਂਦਿਆਂ ਹਨ ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਤੁਸੀ ਬਰਬਰੀ, ਬਲੈਕ ਬੰਗਾਲ, ਸਿਰੋਹੀ ਆਦਿ ਨਸਲ ਪਾਲ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਹ ਤੁਹਾਨੂੰ ਨੇੜੇ ਦੇ ਕਿਸੇ ਸਫਲ ਬੱਕਰੀ ਪਾਲਕ ਜਾਂ ਵੈਟਨਰੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਬਾਕੀ ਤੁਸੀਂ ਉਸ ਕਿਸਾਨ ਨੂੰ ਮਿਲ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੋ ਪਹਿਲਾਂ ਕਈ ਸਾਲਾਂ ਤੋਂ ਬੱਕਰੀ ਫਾਰਮ ਚਲਾ ਰਿਹਾ ਹੋਵੇ, ਉਸ ਤੋਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਬੱਕਰੀ ਫਾਰਮ ਬਾਰੇ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਮਿਲ ਜਾਵੇਗੀ..
Posted by Kirandeep Singh
Punjab
05-12-2019 07:39 PM
kirandeep ji tuc jekar kanak jhone to ilava hor kise fasl di bijai karna chahunde ho ta tuc sabjiyan ja fullan di kheti kar sakde ho isto ilava tuc bagh la sakde ho jive kinnu , nimbu , thai apple ber j adragon fruit di bijai kar sakde ho.dhanwad

Posted by satnam singh
Punjab
05-12-2019 07:37 PM
satnam ji kirpa karke swal vistar nal pucho ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake.dhanwad

Posted by gaurav rana
Haryana
05-12-2019 07:34 PM
उसे आप सुबह के समय पुदीना 50 ग्राम खिलाएं और शाम के समय जोंखार 50 ग्राम दें जो आपको पंसारी की दुकान से मिल जाएगा ये आप कुछ दिन तक देते रहें और आप उसे मिर्नल मिक्सर्च 50 ग्राम रोजाना देना शुरू करें, इससे फर्क पड़ जाएगा
Posted by SANTOSH BHAIJAAN
Bihar
05-12-2019 07:23 PM
संतोष जी जब पशुओं के लिए चारा बोया जाता है जैसे बरसीम, मक्खन घास, गिन्नी घास आदि की बिजाई की जाती है तब आप अपनी बकरियों के लिए भी चारे की बिजाई कर सकते है

Posted by satnam singh
Punjab
05-12-2019 07:23 PM
Shrimaan ji, tuc har katai de baad 65 kg urea pao, is nal isdi growth honi shuru ho jae gi, dhanwad

Posted by A.Ahmad
Bihar
05-12-2019 07:22 PM
Ahmad ji goat farm ki training lene ke liye aap apne nazdiki kvk se sampark kr skte hai, waha kisano ki mangg ke anusar sme sme per training lgwai jatti hai, training lene ke liye aap Krishi Vigyan Kendra (Bihar Agricultural University Sabour, Bhagalpur)
Post Office : Shankarpur,
Dist. : Munger 811 201 (Bihar) : +91 9472000828
Phone : 06344 - 222420 India se sampark kr skte hai..
Posted by Rupesh Birla
Madhya Pradesh
05-12-2019 07:21 PM
Rupesh ji cow lene ke liye aap Kamlesh Kushwaha 9229881876 Bhumika ANIMAL Breeder farm se sampark kr skte hai..

Posted by Harwinder Maan
Punjab
05-12-2019 07:21 PM
Harwinder ji tuci uss nu guru angad dev veterinary university ludhiana la jao uthe isdi janch krke sahi ilagg ho skda hai..

Posted by sunil
Madhya Pradesh
05-12-2019 07:20 PM
सुनील जी आप इसके पत्तों के नीचे मछर का हमला चेक करें अगर मौजूद है तो आप इमिडाक्लोप्रिड@1.5 ml को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by Ram Singh Meena
Rajasthan
05-12-2019 07:18 PM
राम जी कृपया आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप तुलसी के बारे में क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by buta Singh
Punjab
05-12-2019 07:15 PM
Buta ji tuci ehna da rate pta krnn ate chicks lenn lai Hardeep Singh 9781589637 Mahal Farm nal sampark kr skde ho.

Posted by Ajit Singh
Punjab
05-12-2019 07:12 PM
ਪਹਿਲੀ ਸਿੰਚਾਈ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 20-25 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ ਕਰੋ ਇਹ ਸਮਾਂ ਸਹਾਇਕ ਜੜ੍ਹਾਂ ਬਣਨ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਸਮੇਂ ਨਮੀ ਦੀ ਕਮੀ ਹੋਣ ਨਾਲ ਝਾੜ ਵਿੱਚ ਕਮੀ ਬਹੁਤ ਆਉਂਦੀ ਹੈ ਸ਼ਾਖਾਂ ਬਣਨ ਸਮੇਂ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 40-45 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਦੂਜੀ ਸਿੰਚਾਈ ਕਰੋ ਤੀਜੀ ਸਿੰਚਾਈ ਜੋੜ(ਪੋਟੇ) ਬਣਨ ਸਮੇਂ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 60-65 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਕਰੋ ਫੁੱਲ ਬਣਨ ਸਮੇਂ (ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 80-85 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ) ਸਿੰਚਾਈ ਕਰੋ ਪੰਜਵੀਂ ਸਿੰਚਾ.... (Read More)
ਪਹਿਲੀ ਸਿੰਚਾਈ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 20-25 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ ਕਰੋ ਇਹ ਸਮਾਂ ਸਹਾਇਕ ਜੜ੍ਹਾਂ ਬਣਨ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਸਮੇਂ ਨਮੀ ਦੀ ਕਮੀ ਹੋਣ ਨਾਲ ਝਾੜ ਵਿੱਚ ਕਮੀ ਬਹੁਤ ਆਉਂਦੀ ਹੈ ਸ਼ਾਖਾਂ ਬਣਨ ਸਮੇਂ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 40-45 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਦੂਜੀ ਸਿੰਚਾਈ ਕਰੋ ਤੀਜੀ ਸਿੰਚਾਈ ਜੋੜ(ਪੋਟੇ) ਬਣਨ ਸਮੇਂ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 60-65 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਕਰੋ ਫੁੱਲ ਬਣਨ ਸਮੇਂ (ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 80-85 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ) ਸਿੰਚਾਈ ਕਰੋ ਪੰਜਵੀਂ ਸਿੰਚਾਈ ਦਾਣੇ ਪੱਕਣ ਸਮੇਂ (ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 100-105 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ) ਕਰੋ
Posted by Gurbhej Bhullar
Punjab
05-12-2019 07:06 PM
Bhullar ji tuci uss nu nazdiki doctor ton check krwao ji kyuki usdi janch krke he usda sahi ilagg kita ja skda hai..
Posted by Harpreet Sándhu
Punjab
05-12-2019 07:03 PM
harpreet ji mitti test krao jisnu tuc nede de KVK vich karva sakde ho jo ke rauni vikhe maujood hai.tuc mitti parkh de adhar te khaadan di varto kar sakde ho.dhanwad
Posted by Angrej Singh
Punjab
05-12-2019 06:52 PM
Angrej Singh ji agriculture sbandi bohat saria schemes chal rahia han jive ke KCC, DAIRY LOAN, PIG LOAN , POULTRY LOAN, FISHERY LOAN, kirpa karke tusi eh daso kis bare jankari lena chode ho ta jo tuhanu sahi ate visthar nal jankari diti ja sake, Thankyou.
Posted by Avinash Chauhan
Uttarakhand
05-12-2019 06:51 PM
यह एक सख्तजान (भ्ंतकल) फसल है तथा विभिन्न प्रकार की भूमियों पर होती है जिस भूमि में नमी अधिक होती है उस भूमि पर यह भली प्रकार उगता है लाल दोमट मिठ्ठी जिसमें कार्बनिक पदार्थ काफी हों वह मिठ्ठी इसकी कृषि के लिये सर्वोत्तम है यह सभी प्रकार की जलवायु में पनपती है फिर भी गर्म जलवायु जिसमें तापक्रम 25 डिग्री सेल्स.... (Read More)
यह एक सख्तजान (भ्ंतकल) फसल है तथा विभिन्न प्रकार की भूमियों पर होती है जिस भूमि में नमी अधिक होती है उस भूमि पर यह भली प्रकार उगता है लाल दोमट मिठ्ठी जिसमें कार्बनिक पदार्थ काफी हों वह मिठ्ठी इसकी कृषि के लिये सर्वोत्तम है यह सभी प्रकार की जलवायु में पनपती है फिर भी गर्म जलवायु जिसमें तापक्रम 25 डिग्री सेल्सियस से 35 डिग्राी सेल्सियस तक रहता हो वहॉ इसकी वृद्वि व उपज अधिक होती है इस फसल को बीज एवम् कटिंग दोनों तरीके से लगाया जाता है सके बीजों को 1X3X0.15 मीटर ऊॅचाई के उठे हुए (त्ंपेमक) नर्सरी बेड़ में पौध तैयारी हेतु प्रयुक्त किया जाता है पहले बेड़ के स्थान की मिठ्ठी 1 फुट तक खोदते है फिर उसमें गाोबर खाद 2 कि.ग्रा. प्रति स्कवायरमीटर के हिसाब से इसमें देते हैं तथा कुछ बालू मिठ्ठी भी मिलाते है 15 से.मी. ऊॅचा बेड़ तैयार किया जाता है भृंगराज के बीजों को से.मी. कतार में बोया जाता है तथा इसके ऊपर बहुत पतली मिठ्ठी/खाद की परत बिछाई जाती है स्प्रिंकलर अथवा झारे से इसमें पानी दिया जाता है बीजों की बुआई के डेढ़-दो माह पश्चात् इन पौधों की प्रिकिंग खेत में लगाई जाती है इस पौधे के सिरे वाली कटिंग ली जाती है जिसमें 5-6 नोड्स हों तथा 10-15 से.मी लम्बाई हो इन कटिंग्स को अच्छी तरह तैयार नर्सरी बेड्स अथवा पॉलीथीन बेग्स में लगाया जाता है एक से डेढ़ माह की अवधि के मध्य इसकी जड़ें निकलने का कार्य पूरा हो जाता है तथा मुख्य खेत में इसे तब लगा दिया जाता है खेत जुताई कर उसमें सुहागा चला दिया जाता है व खेत को तैयार किया जाता है रोपण से पूर्व खेतं में एक बार पानी दिया जाता है जिससे नमी बनी रहें नर्सरी में तैयार पौध को 15X20 से.मी. पर खेत में रोप दिया जाता है रोपण के पश्चात् एक माह तक सप्ताह में दो बार सिंचाई की जाती है बाद मेें वर्षा तथा मृदा में नमी की स्थिति को देखते हुए इसमें साप्ताहिक सिंचाई की व्यवस्था कर दी जाती है पहली निराई पौध रोपण के 30-35 दिन पश्चात् की जाती है तथा दूसरी खरपतवार की वृद्वि को देखकर की जानी चाहिये प्रत्येक कटाई/तुड़ाई के बाद निराई करनी चाहिये ताकि पौधों के बीच में खरपतवार नहीं पनप सके फसल लेने के लिये पौधे को जड़ से उखाड़ लिया जाता है पौधे की जड़ को काटकर अलग कर देते है ताजा हरी पत्तियों को कभी भी एक जगह इकठ्ठा नहीं करना चाहिये ना ही उन्हें बोरे में भरना चाहिये पौधों को उचित साईज के टुकड़ो में काटकर उनको अच्छी तरह दूर-दूर फैलाकर सुखाना चाहिये, अच्छी तरह सुखाने की क्रिया सबसे महम्वपूर्ण है जिससे इसमें कीटाणु नहीं लगते तथा फसल सड़ती नहीं है फसल कटाई का सबसे उत्तम समय तब है जब इसके बीज काले होने लगें बीजों को एकत्रकर उन्हें बीनकर साफ कर सुखा लेते हैं
Posted by jitendrasingh chavda
Madhya Pradesh
05-12-2019 06:51 PM
Jitendrasingh chavda ji is sall Soyabean ka MSP rate 3710/q hai, Thankyou.
Posted by Angrej Singh
Punjab
05-12-2019 06:50 PM
Angrej Singh ji agriculture sbandi bohat saria schemes chal rahia han jive ke KCC, DAIRY LOAN, PIG LOAN , POULTRY LOAN, FISHERY LOAN, kirpa karke tusi eh daso kis bare jankari lena chode ho ta jo tuhanu sahi ate visthar nal jankari diti ja sake, Thankyou.
Posted by rajiram mahala
Rajasthan
05-12-2019 06:40 PM
रजीराम जी कृपया बताये के आपने इसमें क्या क्या खाद डाली है ताकि आपको उसके हिसाब से जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by Manpreet singh
Punjab
05-12-2019 06:37 PM
श्रीमान जी आप सुंडी की रोकथाम के लिए quinalphos@4ml को प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे कर सकते है

Posted by sonu
Uttar Pradesh
05-12-2019 06:33 PM
आप डेयरी फार्मिंग करना चाहते है तो सबसे पहले आप इनकी ट्रेनिंग जरूर लें, ट्रेनिंग आप अपने नज़दीकी कृषि विज्ञान केन्द्र से प्राप्त कर सकते है जिससे आपको इस काम के बारे में जानकारी प्राप्त होगी और इन्हें शुरू करने और इनमें लाभ कमाने का सही तरीका पता लग सकता है और आप शुरूआत कम जानवरों से करें जैसे जैसे आपको जान.... (Read More)
आप डेयरी फार्मिंग करना चाहते है तो सबसे पहले आप इनकी ट्रेनिंग जरूर लें, ट्रेनिंग आप अपने नज़दीकी कृषि विज्ञान केन्द्र से प्राप्त कर सकते है जिससे आपको इस काम के बारे में जानकारी प्राप्त होगी और इन्हें शुरू करने और इनमें लाभ कमाने का सही तरीका पता लग सकता है और आप शुरूआत कम जानवरों से करें जैसे जैसे आपको जानकारी होती रहेगी फिर आप इस काम को बढ़ा सकते है, आप एक बार में इक्ट्ठी गाय/भैंसे ना खरीदें, गायों/भैंसो को 2-2 महीनों के फासले पर खरीदें या फिर 3 पहले खरीदें ओर 3 महीने बाद फिर 1-2 खरीद लें इससे दूध की कमी नहीं आयेगी पशु की नसल सबसे ज्यादा जरूरी है पशु खरीदने के समय कोशिश करें कि दिन में तीन बार दूध निकालकर ही पशु खरीदें भैंसो का एक दिन का दूध 12 लीटर और गायों को दूध 16-17 लीटर से कम ना हो गाभिनों को खरीदने का सही समय रखड़ियों से लेकर वैशाखी तक का होता है क्योंकि इस समय मौसम अच्छा होने के कारण हरा चारा भी खुला होता है गाभिनों के लिए शैड आवाजाई वाली सड़क पर ना बनायें और शैड सड़क से कम से कम 100 गज दूर हो शैड को धूप और हवा का ध्यान रखकर ही बनायें शैड हमेशा खेत या आस पास से 2 फुट ऊंचा बनायें क्योंकि निचले स्थान पर पानी खड़ा हो जाता है जिस कारण गंदगी पैदा हो जाती है और बाकी पशुओं का मल मूत्र का निकास भी आसानी से हो जाता है पशुओं के लिए बनायी जाने वाली खुरली ढाई तीन फुट चौड़ी होनी चाहिए खुरली पर खड़ने के लिए एक पशु को तकरीबन चार फुट जगह चाहिए मतलब 10 पशुओं के लिए 40 फुट लंबी खुरली बनेगी डेयरी फार्म से संबंधित सामान रखने के लिए स्टोर बनायें पशुओं का वितरण/दाना स्टोर करने के लिए कमरा सैलाब से रहित होना चाहिए शैड का फर्श पक्क, फिसलन रहित और जल्दी साफ होने वाला हो शैड में जितना हो सके पशुओं को खुला छोंड़े और पानी और दाना पूरा डालें पशु को खुला छोड़ने से पशुओं में अफारे की समस्या कम आती है बाकी अपनी आवश्यकता और क्षमता के मुताबिक ही सामान खरीदें और आर्थिक नुकसान से बचने के लिए प्रत्येक गाभिन का बीमा जरूर करवायें.

Posted by guddu kumar
Bihar
05-12-2019 06:31 PM
Guddu kumar ji shaat par bagwani ke lia aap Vikas Mishra 9807528308 se samparak kar sakte hai, Thankyou.
Posted by Nitesh Bamaniya
Madhya Pradesh
05-12-2019 06:31 PM
श्रीमान जी, कृपया आप बताये के अपने कोनसी खादों का इस्तेमाल किया है , ताकि आपको इसके बारे में उच्चित जानकारी दी जा सके, धन्यवाद

Posted by pritam singh rajput
Madhya Pradesh
05-12-2019 06:22 PM
प्रीतम जी आप प्याज लहसुन गाजर और मूली की बिजाई कर सकते है धन्यवाद
Posted by janak
Punjab
05-12-2019 06:19 PM
तैयार की गई जड की कटिंग की रोपाई दिसंबर से जनवरी महीने में की जाती है

Posted by vipin
Uttar Pradesh
05-12-2019 06:17 PM
आप गेहूं का दलिया 1 किलो और 250 ग्राम गुड अच्छी तरह गर्म करके दे सकते है ये आप ब्याने के बाद भी दे सकते है और साथ में Anabolite liquid 100ml रोजाना दें इससे कमज़ोरी दूर रहेगी और दूध बढ़ जाएगा
Posted by Sandeep singh
Punjab
05-12-2019 06:10 PM
ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ Lactomood ਹੋਮਿਓਪੈਥਿਕ ਦਵਾਈ ਦੀਆ 10-10 ਬੂੰਦਾਂ ਦਿਨ ਵਿਚ 3 ਵਾਰ ਦਿਓ ਅਤੇ leptaden tablet 10-10 ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ ਅਤੇ Milkout ਪਾਊਡਰ 2-2 ਚਮਚ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ..
Posted by Surjeet Singh
Punjab
05-12-2019 06:01 PM
ਖਰਬੂਜੇ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਅੱਧ ਫਰਵਰੀ ਦਾ ਸਮਾਂ ਸਹੀ ਮੰਨਿਆਂ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤੁਸੀ ਇਸਦੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਜਿਵੇ Hara Madhu ,Punjab Sunehri ,Punjab Hybrid ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by lokinder singh
Haryana
05-12-2019 05:58 PM
इसकी खेती अलग-अलग तरह की मिट्टी जैसे कि रेतली दोमट, चिकनी, गार और भरी मिट्टी में की जा सकती है यह फसल गहरी दोमट और जलोढ़ मिट्टी, जिसका निकास प्रबंध बढ़िया, नमी को बरकरार रखने की समर्थता,जैविक तत्वों वाली मिट्टी में बढ़िया परिणाम देती है विरली और रेतली मिट्टी इसकी खेती के लिए बढ़िया नहीं मानी जाती है, क्योंकि मिट्.... (Read More)
इसकी खेती अलग-अलग तरह की मिट्टी जैसे कि रेतली दोमट, चिकनी, गार और भरी मिट्टी में की जा सकती है यह फसल गहरी दोमट और जलोढ़ मिट्टी, जिसका निकास प्रबंध बढ़िया, नमी को बरकरार रखने की समर्थता,जैविक तत्वों वाली मिट्टी में बढ़िया परिणाम देती है विरली और रेतली मिट्टी इसकी खेती के लिए बढ़िया नहीं मानी जाती है, क्योंकि मिट्टी के घटिया जमाव और कम उपजाऊ-पन के कारण इस में गांठों का उत्पादन सही नहीं होता है इसकी खेती के लिए मिट्टी का pH 6-7 होना चाहिए Bhima Kiran,Bhima Shakti,Bhima Shweta किसम की बिजाई कर सकते है

Posted by Arundeep Singh
Punjab
05-12-2019 05:53 PM
Arundeep ji tuci ohna di shedd vich ratt derr tk light jgaa ke rkhia kro ate thnnd ton purra bacha krke rkho, baki desi murgia kujj time egg den ton badd fir kujj time da farak paa ke egg dindia hai tuci ohna di khurak sahi rkho ate Ostovet calcium 30ml/100birds de hisab nal deo, iss nal vdia growth howegi..

Posted by Gurbeer Singh
Punjab
05-12-2019 05:53 PM
श्रीमान जी खुम्बों की ट्रेनिंग के लिए आप अपने नज़दीकी कृषि विज्ञान केन्द्र से संपर्क कर सकते है
Posted by Ramnarayan
Madhya Pradesh
05-12-2019 05:46 PM
जी हां आप इसका प्रयोग कर सकते है इससे थनों की समस्याओं से बचाव रहता है

Posted by Sachin Kumar
Uttar Pradesh
05-12-2019 05:38 PM
अगेती किस्मों के लिए जून-जुलाई रोपाई के लिए सबसे अच्छा समय है और पिछेती किस्मों के लिए अगस्त से मध्य सितंबर और अक्तूबर से नवंबर का पहला सप्ताह रोपाई के लिए अच्छा समय है
Posted by Depu Mishra
Uttar Pradesh
05-12-2019 05:37 PM
श्रीमान जी, जिमीकंद या सूरन उष्णकटिबंधीय तथा उपोष्णकटिबंधीय आर्द्र जलवायु में अच्छी तरह उगता हैं जहां वार्षिक तापमान 30 से 35 डिग्री सेल्सियस जिमीकंद या सूरन का उत्पादन अनेक प्रकार की मिटटी में हो सकता हैं, परन्तु इस फसल के उत्पादन के लिए अच्छी जीवांशयुक्त बलुई दोमट मिट्टी या बलुई चिकनी दोमट मिट्टी उपयुक्.... (Read More)
श्रीमान जी, जिमीकंद या सूरन उष्णकटिबंधीय तथा उपोष्णकटिबंधीय आर्द्र जलवायु में अच्छी तरह उगता हैं जहां वार्षिक तापमान 30 से 35 डिग्री सेल्सियस जिमीकंद या सूरन का उत्पादन अनेक प्रकार की मिटटी में हो सकता हैं, परन्तु इस फसल के उत्पादन के लिए अच्छी जीवांशयुक्त बलुई दोमट मिट्टी या बलुई चिकनी दोमट मिट्टी उपयुक्त होती है जिसका पी एच स्तर 5.5 से 7.0 के बीच होता हैं उन्नत किस्में :गजेन्द्र, श्री पद्मा (एम- 15), संतरागाछी जिमीकंद आमतौर पर 6 से 8 माह में तैयार होने वाली फसल है और सिंचाई की सुविधा रहने पर इसे मध्य मार्च में लगा देना चाहिए मार्च में लगाई फसल मध्य नवम्बर तक तैयार हो जाती है बाजार की मांग को देखते हुए 5 से 6 माह बाद से खुदाई शुरू की जा सकती है पानी की सुविधा न होने पर इसे जून के अंतिम सप्ताह में मौनसून शुरू होने पर लगाया जाता है मार्च में लगाई जाने वाली फसल की पैदावार स्वाभाविक रूप से जून में लगाई फसल से अधिक होती है यदि नर्सरी की सुविधा उपलब्ध हो तो मौनसून शुरू होने के एक माह पूर्व, आंशिक छाया वाली जगह में, जमीन की सतह से 4 इंच ऊँची क्यारी बना कर कंदों को लगभग सटाकर 20 सेंटीमीटर दूर कतार में लगाया जा सकता है क्यारियों में गोबर की सड़ी हुई खाद, महीन बालू और मिट्टी 1:1:1 के अनुपात में मिलाकर तैयार रखना चाहिए कंदों के टुकड़ों को क्यारियों में लगाने के बाद धान के पुवाल से ढंक कर हल्का पानी देते रहना चाहिए तीन सप्ताह में अंकुर और जड़े विकसित होना शुरू हो जाती है मानसून शुरू होते ही क्यारियों में अंकुरित हो रहे कंदों के टुकड़ों को मुख्य खेत में रोपित कर देना चाहिए जिमीकंद की अच्छी पैदावार के लिए उसे हल्के गहरे गड्डों में (40 X 40 X 40 सेंटीमीटर) गोबर की सड़ी हुई खाद, महीन बालू तथा अच्छी मिट्टी (1:1:1) भरकर रोपित करना चाहिए रोपण में प्रयुक्त होने वाले कंदों के आकार के अनुसार पौधों की दूरी सुनिश्चित की जाती है यदि 500 ग्राम से 1 किलोग्राम तक के कंदों को रोपा जा रहा है, तो पौधों और कतार के बीच की दूरी 90 सेंटीमीटर रखनी चाहिए यदि कंदों के टुकड़ों का आकार छोटा है तो 60 X 60 सेंटीमीटर की दूरी रखनी चाहिए आम तौर पर व्यावसायिक उत्पादन के लिए 500 ग्राम से 1 किलोग्राम वजन के कंदों को तथा बीज उत्पादन के लिए 50 से 150 ग्राम वजन के कंदों को रोपा जाता है रोपते समय कंदों को मिट्टी की सतह से 4 से 6 सेंटीमीटर की गहराई में लगाते हैं रोपण के बाद धान के पुवाल या पत्तों आदि से गड्डों को ढंक देना चाहिए जिमीकंद अत्यधिक उर्वरकग्राही फसल है गोबर की पूरी तरह सड़ी हुई खाद 25 से 30 टन प्रति हेक्टेयर की दर से अंतिम जुताई के समय खेत में मिला देनी चाहिए यदि गड्डों में रोपाई की जानी है, तो गोबर की खाद को मिट्टी में मिलाकर गङ्कों में भर देना चाहिए रासायनिक खादों में नत्रजन, फॉस्फोरस और पोटाश की मात्रा 150:100:150 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से देना चाहिए मृदा परिक्षण के आधार पर मात्रा कम या ज्यादा हो सकती है, इसलिए इसकी खेती से अच्छे उत्पादन के लिए मृदा परिक्षण आवश्यक है आखरी जुताई या रोपण के समय फॉस्फोरस की पूरी मात्रा तथा नत्रजन और पोटाश की आधी मात्रा देनी चाहिए नत्रजन और पोटाश की बची हुई मात्रा दो बार में रोपाई के 30 एवं 60 दिन बाद खरपतवार निकाल कर पौधों पर मिट्टी चढ़ाते समय दे देनी चाहिए अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में नत्रजन और पोटाश की मात्रा बराबर 3 से 5 बार में देना ठीक रहता है लेकिन फॉस्फोरस की पूरी मात्रा रोपाई के समय ही दे देनी चाहिए यदि मार्च में जिमीकंद की फसल की रोपाई की गयी है तो रोपाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई कर देनी चाहिए और उसके बाद समय-समय पर आवश्यकतानुसार हल्की सिंचाई करते रहना चाहिए इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि फसल-वद्धि की किसी भी अवस्था में खेत में पानी का जमाव नहीं रहना चाहिए कंदों की खुदाई से पूर्व भी हल्की सिंचाई कर देने से सुविधा रहती है धन्यवाद

Posted by khushbu
Chattisgarh
05-12-2019 05:35 PM
khushbu ji kripya aap fasl ka poora ya sahi nam btaye taki aapko uske hisab se jankari di ja sake.dhanywad
Posted by Depu Mishra
Uttar Pradesh
05-12-2019 05:34 PM
देपु जी इसके कई कारण है इसमें तत्व की कमी भी हो सकती है और यह तापमान के कारण भी होता है कृपया आप धान की बाली की फोटो भेजे ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by Depu Mishra
Uttar Pradesh
05-12-2019 05:32 PM
देपु जी कृपया आप धान में रोग की फोटो भेजे ताकि आपको उसके हिसाब से जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by ਨੀਟੂ ਗਰੇਵਾਲ
Punjab
05-12-2019 05:32 PM
ਨੀਟੂ ਜੀ ਇਹ ਤੱਤ ਦੀ ਕਮੀ ਦੇ ਕਾਰਣ ਹੋ ਰਿਹਾ ਹੈ ਇਸਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ NPK 191919 ਇਕ ਕਿਲੋ ਨੂੰ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by ishwar shingh
Madhya Pradesh
05-12-2019 05:21 PM
Shri maan g kripa aap isko photo bhejen toh aapko iski sahi jankari di ja ske.....
Posted by manjinder singh
Punjab
05-12-2019 05:16 PM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਸੁੰਡੀ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ quinalphos@4ml ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਸਪਰੇਅ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ

Posted by sinder pal
Punjab
05-12-2019 05:13 PM
ਸਿੰਦਰ ਜੀ ਇਹ ਕਿਸਮ ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦਾ ਹੈ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਦੱਸੋ ਕਿ ਤੁਸੀ ਕਿਹੜੀ ਕਿਸਮ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕੀਤੀ ਹੈ ਤਾ ਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸ ਬਾਰੇ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by pawan bishnoi
Rajasthan
05-12-2019 05:12 PM
pawan ji kripya btaye ke aapne isme kya kya khaad daali hai taki uske hisab se aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad

Posted by Sandeep Singh Dhillon
Punjab
05-12-2019 05:06 PM
sandeep ji tuc isde uper hoshi@400ml nu prati acre de hisab nal spray karo.dhanwad

Posted by Harwinder Singh
Punjab
05-12-2019 05:05 PM
हरविंदर जी दोनों का काम एक ही होता है और पहले आप खेत में खादों की पूरी मात्रा डालें उसके बाद भी यदि गेहूं ग्रोथ कम करती है तो फिर आप इनका प्रयोग कर सकते है और इन दोनों में से किसी एक का प्रयोग करें दोनों की जरूरत नहीं है

Posted by Gurvinder Dhillon
Punjab
05-12-2019 04:48 PM
ਪਹਿਲੀ ਸਿੰਚਾਈ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 20-25 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ ਕਰੋ ਇਹ ਸਮਾਂ ਸਹਾਇਕ ਜੜ੍ਹਾਂ ਬਣਨ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਸਮੇਂ ਨਮੀ ਦੀ ਕਮੀ ਹੋਣ ਨਾਲ ਝਾੜ ਵਿੱਚ ਕਮੀ ਬਹੁਤ ਆਉਂਦੀ ਹੈ ਸ਼ਾਖਾਂ ਬਣਨ ਸਮੇਂ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 40-45 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਦੂਜੀ ਸਿੰਚਾਈ ਕਰੋ ਤੀਜੀ ਸਿੰਚਾਈ ਜੋੜ(ਪੋਟੇ) ਬਣਨ ਸਮੇਂ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 60-65 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਕਰੋ ਫੁੱਲ ਬਣਨ ਸਮੇਂ (ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 80-85 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ) ਸਿੰਚਾਈ ਕਰੋ ਪੰਜਵੀਂ ਸਿੰਚਾ.... (Read More)
ਪਹਿਲੀ ਸਿੰਚਾਈ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 20-25 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ ਕਰੋ ਇਹ ਸਮਾਂ ਸਹਾਇਕ ਜੜ੍ਹਾਂ ਬਣਨ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਸਮੇਂ ਨਮੀ ਦੀ ਕਮੀ ਹੋਣ ਨਾਲ ਝਾੜ ਵਿੱਚ ਕਮੀ ਬਹੁਤ ਆਉਂਦੀ ਹੈ ਸ਼ਾਖਾਂ ਬਣਨ ਸਮੇਂ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 40-45 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਦੂਜੀ ਸਿੰਚਾਈ ਕਰੋ ਤੀਜੀ ਸਿੰਚਾਈ ਜੋੜ(ਪੋਟੇ) ਬਣਨ ਸਮੇਂ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 60-65 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਕਰੋ ਫੁੱਲ ਬਣਨ ਸਮੇਂ (ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 80-85 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ) ਸਿੰਚਾਈ ਕਰੋ ਪੰਜਵੀਂ ਸਿੰਚਾਈ ਦਾਣੇ ਪੱਕਣ ਸਮੇਂ (ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 100-105 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ) ਕਰੋ

Posted by Barinder singh
Punjab
05-12-2019 04:32 PM
BhaaG deputy director dairy development Ludhiana dairy di training Bija centre te hundi ae GADVASU VETERINARY UNIVERSITY LUDHIANA NAAL v sampark karo g

Posted by Gurtej Singh
Punjab
05-12-2019 04:21 PM
Gurtej ji tuci uss feed di he varto kro jiss nu tuhadi majh asani nal khndi hai ate vdia dudh de rehi hai, kyuki ek dum feed change krnn nal pashu da dudh v ghht skda hai, baki jekar tuci Cargill di feed vartni hai tan Milkogen 5000 feed di varto kr skde ho.
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