
Posted by manoj
Maharashtra
06-12-2019 05:39 PM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद

Posted by BHAWANI SINGH
Rajasthan
06-12-2019 05:16 PM
श्रीमान जी, आप वेस्ट डिकम्पोज़र को किसी भी फसल में इस्तेमाल कर सकते है और आप इसकी स्प्रे कभी भी कर सकते है यह एक जैविक पदार्थ है जिस से फसल की ग्रोथ होती है Waste decomposer एक अच्छा प्रोडक्ट हैं जिसकी 20 रूप्ये की शीशी आ जाती हैं जो किसी कीटनाशी की दुकान से मिल सकती हैंं Waste decomposer एक जैविक प्रोडक्ट है इसमें बैक्टीरियां हैं ज.... (Read More)
श्रीमान जी, आप वेस्ट डिकम्पोज़र को किसी भी फसल में इस्तेमाल कर सकते है और आप इसकी स्प्रे कभी भी कर सकते है यह एक जैविक पदार्थ है जिस से फसल की ग्रोथ होती है Waste decomposer एक अच्छा प्रोडक्ट हैं जिसकी 20 रूप्ये की शीशी आ जाती हैं जो किसी कीटनाशी की दुकान से मिल सकती हैंं Waste decomposer एक जैविक प्रोडक्ट है इसमें बैक्टीरियां हैं जोकि मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को बढाता हैं और फालतू चीजों जैसे पत्ते, पराली को गालता हैं और उसे खाद के रूप में बदल देता हैं इसको तैयार करने केे लिए 200 लीटर पानी में 2 किलो गुड और एक शीशी Waste decomposer की डालें यह फंगीनाशी का काम करता हैं इससे जल्दी जल्दी बीमारियां नजदीक नहीं आती यह लगभग 7 दिनो में तैयार हो जाता हैं यह एक एकड की मात्रा होती है धन्यवाद
Posted by बृज बिहारी सिंह चौधरी
Uttar Pradesh
06-12-2019 05:16 PM
श्रीमान जी, कृपया आप कारी मकोई के बारे में विस्तार से बताये या फिर इसकी इक फोटो भेजें, ताकि आपको इसके बारे में सही जानकारी दी जा सके, धन्यवाद
Posted by Anand kumar Sahu
Uttar Pradesh
06-12-2019 05:15 PM
Shrimaan ji, isme ap crabendazim @4gm prati liter pani ke hisaab se spray karein or isme vermicompost @ 4-5 kg prati podhe ke hisaab se dalein, dhanywad

Posted by alok maurya
Uttar Pradesh
06-12-2019 05:04 PM
श्रीमान जी,सभी केले की प्रजाति के पौधे लगभग एक जैसे ही होते हैं, ऐसे पेड़ को देख कर नहीं बताया जा सकता है के यह कोनसी किस्म का केला है, धन्यवाद

Posted by kuldeep Patel
Rajasthan
06-12-2019 05:04 PM
Shrimaan ji, Napier hybrid ki cutting mil jayegi iski cutting ke liye aap Bharat Bhushan 9412568747 se samparak kar sakte hai. Thank you.

Posted by Arjun Singh
Madhya Pradesh
06-12-2019 04:56 PM
अर्जुन जी यदि आप दूध और मीट के लिए बकरी रखना चाहते है तो आप बीटल नसल रख सकते है इसके इलावा यदि आप मीट के लिए रखना चाहते है तो बारबरी, सिरोही नसलों को रख सकते है
Posted by Harvinder singh
Punjab
06-12-2019 04:39 PM
हरविंदर जी कोधरे की खेती के लिए आप सरदार गुरमुख सिंह रंगीलपुर साहिब से संपर्क 98765-24292 करें उन्होंने इस साल कोधरे की काशत की है वो जैविक खेती करते है मोटे आनाज में कंगनी, कोधरा, ग्वार आदि
Posted by आर्य सुरेन्द्र पँवार
Uttar Pradesh
06-12-2019 04:38 PM
श्रीमान जी, आप औषधीय फसल जैसे के शतावर की खेती अभी कर सकते हैं, एलोवेरा तथा अश्वगंधा को लगाने का सही समय जून से जुलाई का होता है, शतावर की खेती के लिए यह मिट्टी की कई किस्मों जैसे अच्छे जल निकास वाली लाल दोमट से चिकनी मिट्टी, काली मिट्टी से लैटेराइट मिट्टी में उगाई जाती है यह चट्टानी मिट्टी और हल्की मिट्टी .... (Read More)
श्रीमान जी, आप औषधीय फसल जैसे के शतावर की खेती अभी कर सकते हैं, एलोवेरा तथा अश्वगंधा को लगाने का सही समय जून से जुलाई का होता है, शतावर की खेती के लिए यह मिट्टी की कई किस्मों जैसे अच्छे जल निकास वाली लाल दोमट से चिकनी मिट्टी, काली मिट्टी से लैटेराइट मिट्टी में उगाई जाती है यह चट्टानी मिट्टी और हल्की मिट्टी में भी उगाई जा सकती है मिट्टी की गहराई 20-30 सैं.मी. से ज्यादा नहीं होनी चाहिए यह रेतली दोमट से दरमियानी काली मिट्टी जो अच्छे जल निकास वाली हो, में अच्छे परिणाम देती है पौधे की वृद्धि के लिए मिट्टी pH 6-8 होना चाहिए फसल को मिट्टी से होने वाले कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए, बिजाई से पहले बीजों को गाय के मूत्र में 24 घंटे के लिए डाल कर उपचार करें उपचार के बाद बीज नर्सरी बैड में बोये जाते हैं धन्यवाद
Posted by satnam singh
Punjab
06-12-2019 04:35 PM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਪਾਣੀ ਲਾਉਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਗੁੱਲੀ ਡੰਡੇ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਲੀਡਰ, ਟੌਪਿਕ, ਦੀ ਵਰਤੋ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਚੌੜੇ ਪੱਤਿਆਂ ਵਾਲੇ ਨਦੀਨ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ 2,4D 250 ml ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਟੌਪਿਕ 15 ਡਬਲਿਊ ਪੀ (ਕਲੋਡੀਨਾਫਾਪ) 160 ਗ੍ਰਾਮ ਬਿਜਾਈ ਦੇ 30 ਤੋਂ 35 ਦਿਨਾਂ ਅੰਦਰ 150 ਪਾਣੀ/ਏਕੜ •• ਐਕਸੀਅਲ 5 ਈ ਸੀ (ਪਿਨੌਕਸਾਡਿਨ) 400 ਮਿਲੀਲਿਟਰ 4) ਲੀਡਰ/ਮਾਰਕਸਲਫੋ 75 ਡਬਲਿਊ ਜੀ (ਸਲਫੋਸਲਫੂਰਾਨ) 13 ਗ੍ਰਾਮ •ਟੋਟ.... (Read More)
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਪਾਣੀ ਲਾਉਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਗੁੱਲੀ ਡੰਡੇ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਲੀਡਰ, ਟੌਪਿਕ, ਦੀ ਵਰਤੋ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਚੌੜੇ ਪੱਤਿਆਂ ਵਾਲੇ ਨਦੀਨ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ 2,4D 250 ml ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਟੌਪਿਕ 15 ਡਬਲਿਊ ਪੀ (ਕਲੋਡੀਨਾਫਾਪ) 160 ਗ੍ਰਾਮ ਬਿਜਾਈ ਦੇ 30 ਤੋਂ 35 ਦਿਨਾਂ ਅੰਦਰ 150 ਪਾਣੀ/ਏਕੜ •• ਐਕਸੀਅਲ 5 ਈ ਸੀ (ਪਿਨੌਕਸਾਡਿਨ) 400 ਮਿਲੀਲਿਟਰ 4) ਲੀਡਰ/ਮਾਰਕਸਲਫੋ 75 ਡਬਲਿਊ ਜੀ (ਸਲਫੋਸਲਫੂਰਾਨ) 13 ਗ੍ਰਾਮ •ਟੋਟਲ/ਮਾਰਕਪਾਵਰ 75 ਡਬਲਿਊ ਡੀ ਜੀ (ਸਲਫੋਸਲਫੂਰਾਨ+ਮੈਟਸਫੂਰਾਨ) 16 ਗ੍ਰਾਮ •ਐਟਲਾਂਟਿਸ 3.6 ਡਬਲਿਊ ਡੀ ਜੀ (ਮਿਜ਼ੋਸਲਫੂਰਾਨ+ਆਇਡੋਸਲਫੂਰਾਨ) 160 ਗ੍ਰਾਮ 6 ਸ਼ਗੁਨ 21-11 (ਮੈਟਰੀਬਿਊਜ਼ਿਨ+ਕਲੋਡੀਨਾਫਾਪ) 200 ਗ੍ਰਾਮ •ਏ ਸੀ ਐੱਮ-9 (ਕਲੋਡੀਨਾਫਾਪ+ਮੈਟਰੀਬਿਊਜ਼ਿਨ) 240 ਗ੍ਰਾਮ

Posted by Chamak Sroye
Punjab
06-12-2019 04:22 PM
ਚਮਕ ਜੀ ਜਿਹੜੀ ਕਣਕ ਝੋਨੇ ਦੀ ਪਰਾਲੀ ਵਿਚ ਉਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਓਥੇ ਜਦੋ ਜ਼ਿਆਦਾ ਨਮੀ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਤਾ ਸੁੰਡੀ ਪੈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਦੇ ਲਈ chlorpyriphos 1.5 lt ਜਾ ekalux 800 ml ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by Shravan dixit
Uttar Pradesh
06-12-2019 04:22 PM
Sir, please ask your question in detail so that we can provide you full information regarding that, thank you
Posted by Hitesh Kumar
Uttar Pradesh
06-12-2019 04:22 PM
Yes you can make cement tank , but didn t put stone inside it

Posted by Nirbhay singh
Punjab
06-12-2019 04:19 PM
Hello sir main ghar lyi gobi lai a par is de patte hi vad rahe ne gobi ban nahi rahi, ki kita jave ?
Shrimaan ji , is vich tuc NPK 130045 @10 gm prati liter pani de hisaab nal spary karo, dhanwad

Posted by Rakesh Ranjan
Bihar
06-12-2019 03:47 PM
गुलाब की खेती के लिए जैविक तत्वों से भरपूर और अच्छे जल निकास वाली रेतली दोमट मिट्टी अनुकूल होती है बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 6 से 7.5 होना चाहिए यह जल जमाव को सहनयोग्य नहीं है, इसलिए उचित जल निकास का प्रबंध होना चाहिए और अनावश्यक पानी को निकाल देना चाहिए किस्मों के लिए आप देसी गुलाब और इंग्लिश गुलाब किस्मे .... (Read More)
गुलाब की खेती के लिए जैविक तत्वों से भरपूर और अच्छे जल निकास वाली रेतली दोमट मिट्टी अनुकूल होती है बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 6 से 7.5 होना चाहिए यह जल जमाव को सहनयोग्य नहीं है, इसलिए उचित जल निकास का प्रबंध होना चाहिए और अनावश्यक पानी को निकाल देना चाहिए किस्मों के लिए आप देसी गुलाब और इंग्लिश गुलाब किस्मे लगा सकते हैं. मिट्टी को नरम करने के लिए जोताई और गोड़ाई करें बिजाई से 4-6 सप्ताह पहले खेती के लिए बैड तैयार करें बैड बनाने कि लिए 2 टन रूड़ी की खाद और 2 किलो सुपर फासफेट डालें बैडों को एक समान बनाने के लिए उनको समतल करें और बैडों के ऊपर बोयें होये गुलाब गड्डों में बोयें हुए गुलाबों से ज्यादा मुनाफे वाले होते है उत्तरी भारत में बिजाई का सही समय मध्य अक्तूबर है रोपाई के बाद पौधे को छांव में रखें और अगर बहुत ज्यादा धुप हो, तो पौधे पर पानी का छिड़काव करें दोपहर के अंत वाले समय बोया गया गुलाब बढ़िया उगता हैबैड पर 30 सैं.मी. व्यास और 30 सैं.मी. गहरे गड्ढे खोद कर 75 सैं.मी. के फासले पर पौधों की बिजाई करें दो पौधों के बीच में फासला गुलाब की किस्म पर निर्भर करता है बीजों को 2-3 सैं.मी. गहराई में बोयें इसकी बिजाई सीधी या पनीरी लगा कर की जाती है गुलाब की फसल का का प्रजनन काटी गई जड़ों और बडिंग द्वारा किया जाता है उत्तरी भारत में दिसंबर-फरवरी महीने का समय टी-बडिंग के लिए उचित होता है पौधे की कांट-छांट दूसरे और उसके बाद के वर्षों में की जाती है उत्तरी भारत में गुलाब की झाड़ियों की कांट-छांट अक्तूबर के दूसरे या तीसरे हफ्ते में की जाती है जो शाखाएं झाड़ियों को घना बनाएं, उन्हें निकाल दें लटके हुए गुलाबों को छंटाई की जरूरत नहीं होती छंटाई के बाद, अच्छे से गले हुए 7-8 किलो गाय के गोबर को प्रति पौधे को डालें और मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें ग्रीन हाउस में, गुलाबों को पंक्तियों में बोया जाता है और पौधों का घनत्व 7-14 पौधे प्रति वर्ग मीटर होनी चाहिए बैड की तैयारी के समय 2 टन रूड़ी की खाद और 2 किलो सुपर फास्फेट को मिट्टी में डालें तीन महीने के फासले पर 10 किलो रूड़ी की खाद और 8 किलो नाइट्रोजन, 8 किलो फासफोरस और 16 किलो पोटाश प्रति पौधे में डालें छंटाई के बाद ही सारी खादों को डालें ज्यादा पैदावार लेने के लिए छंटाई से एक महीने बाद, जी ए 3@ 200 पी पी एम(2 ग्राम प्रति लीटर) की स्प्रे करें पौधे की तनाव सहन शक्ति को बढ़ाने के लिए घुलनशील जड़ उत्तेजक(रैली गोल्ड/रिजोम) 100 ग्राम+ टिपोल 60 मि.ली. को 100 लीटर पानी में डालकर प्रति एकड़ में शाम के समय सिंचाई करें पौधों को खेत में लगाएं ताकि बढ़िया ढंग से विकास कर सके सिंचाई मिट्टी की किस्म और जलवायु के अनुसार करें आधुनिक सिंचाई तकनीक जैसे ड्रिप सिंचाई गुलाब की खेती के लिए लाभदायक होती है फव्वारा सिंचाई से परहेज करें क्योंकि इससे पत्तों को लगने वाली बीमारियां बढ़ती हैं

Posted by Mandeep singh
Punjab
06-12-2019 03:15 PM
ਮਨਦੀਪ ਜੀ ਇਸਦੀ ਬਿਜਾਈ ਬੀਜ ਨਾਲ ਕੀਤੀ ਹੈ ਜਾ ਕਲਮ ਨਾਲ ਤਾ ਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸ ਬਾਰੇ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by Sunil Kumar Rana
Uttar Pradesh
06-12-2019 03:06 PM
बत्तख पालन करने से पहले उसके नस्लों(breeds) का selection कर लेना चाहिए Business के purpose से बत्तख पालन करने के लिए बत्तख की दो नस्ले प्रमुख हैं एक अधिक अंडा देने वाली और दूसरी अधिक मांस देने वाली, जो की इस प्रकार हैअंडा देने वाली नस्ले (लेयर / Egg) • इंडियन रनर– ये medium आकार के होते है और इनकी गर्दन (neck) पतली होती है ये 6 month में अंडा देने लग.... (Read More)
बत्तख पालन करने से पहले उसके नस्लों(breeds) का selection कर लेना चाहिए Business के purpose से बत्तख पालन करने के लिए बत्तख की दो नस्ले प्रमुख हैं एक अधिक अंडा देने वाली और दूसरी अधिक मांस देने वाली, जो की इस प्रकार हैअंडा देने वाली नस्ले (लेयर / Egg) • इंडियन रनर– ये medium आकार के होते है और इनकी गर्दन (neck) पतली होती है ये 6 month में अंडा देने लगते है ये white, black, light yellow, और brown color में पाए जाते है यह yearly 250 से 300 अंडा देती है • कैम्पबेल – इस नस्ल के बत्तखो का body चौड़ा होता है यह खाकी, सफेद व काले रंग में पाए जाते है यह yearly 300 से ज्यादा अंडा देती है मासं वाली जाति (ब्रोयलर) • सफ़ेद पेकिन – इनका body चौड़ा होता है, यह ज्यादा शोर करने वाले और जल्दी डर जाने वाले बत्तख होते है • एलिसबरी – इसमें हड्डी कम और मांस ज्यादा होती है • मस्कोवी (6 उपजाति) – इन्हें “म्यूल बत्तख” भी कहा जाता हैं • आरफीगंटन (5 उपजाति) • राउन बत्तख पालन में बत्तखो के लिए घर बनाना बहुत आसान होता है आप इन्हें छोटा, बड़ा, गीला, शुष्क या किसी भी अन्य स्थानों पर रख सकते हैं बत्तख पानी वाले और गीला जगहो पर रहना ज्यादा पसंद करते है आप एक बड़े फलों की टोकरी, लकड़ी या तेल के ड्रम का उपयोग करके अपने बतख के रहने के लिए एक उपयुक्त जगह बना सकते हैं बस इनके रहने के घरो में हमेशा एक प्रवेश और बाहर निकलने के लिए एक दरवाजा रहना चाहिए दरवाजे थोड़े उचे होने चाहिए आमतौर पर प्रत्येक बतख 2 से 3 square feet flooring space लेते है बत्तख को विशेष रूप से बिल्ली, लोमड़ी और कुत्ते जैसे जानवरों या शिकारियों से बचा कर रखने की अव्यश्कता होती है बत्तख का आहार मुर्गियों की तुलना में बतख रोजाना बहुत अधिक खाना खाते है यदि आप बत्तख से उचित अंडे और मांस की उत्पादन करना चाहते हैं तो आपको उन्हें अच्छी तरह से संतुलित भोजन खिलाना होगा वैसे तो बतख मुर्गियों की तरह सभी प्रकार के भोजन खाते है, लेकिन इसके अतिरिक आप बत्तख के आहार में कुछ और भी जोड़ सकते है कुछ बत्तख मुर्गियों की तुलना में अधिक अंडे देते हैं, तो आपको ऐसे बत्तखो को खिलाने में बहुत सावधान रहना होगा आपको इनके आहार में आवश्यक पोषक तत्व जोड़ने होंगे बत्तख को आहार उनके नस्ल और उनके विकास के अनुसार दिया जाता है यदि आप small scale पर batakh palan कर रहे है तो आप अपने बत्तख को खिलाने के लिए रसोई का कचरा, चोकर व घोंघे का इस्तेमाल कर सकते है चूँकि बत्तख पानी में रहता है इसलिए उन्हें सुखा आहार निगलने में काफी तकलीफ होती है सुखे हुए आहार को वे अपने चोंच में दबा कर वापस उसे पानी में हीं उगल देते है जिससे सारा आहार बरबाद हो जाता है बत्तख के अंडे के दाम / Price of Duck’s Eggs in India Local market में आपको 9 से 11 रूपए का एक बत्तख का अंडा मिलेगा और दर्जन (Dozens) के हिसाब से Rs 108 से ले कर 130 तक मिलेगा इसका मतलब है की, अगर उच्च नस्ल के बत्तखों के अंडे को बेचा जाये (एक average cost में) तो आपको केवल एक बत्तख से Rs 2,800 से Rs 3,000 आसानी से मिल जायेंगे
Posted by Sonu Singh
Punjab
06-12-2019 03:03 PM
ਹਲਦੀ ਦੀ ਸਫਲ ਕਾਸ਼ਤ ਲਈ ਕੁਝ ਜ਼ਰੂਰੀ ਨੁਕਤੇ ਪੰਜਾਬ ਦਾ ਖੇਤੀ ਅਰਥਚਾਰਾ ਮੁੱਖ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਝੋਨੇ ਅਤੇ ਕਣਕ ਦੀ ਫ਼ਸਲ ‘ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦਾ ਹੈ ਪ੍ਰੰਤੂ ਝੋਨੇ ਅਤੇ ਕਣਕ ਦੇ ਫ਼ਸਲੀ ਚੱਕਰ ਨੂੰ ਲਗਾਤਾਰ ਅਪਣਾਉਣ ਕਰਕੇ ਬਹੁਤ ਸਾਰੀਆਂ ਸਮੱਸਿਆਵਾਂ ਆ ਰਹੀਆਂ ਹਨ ਅਤੇ ਝੋਨੇ ਅਤੇ ਕਣਕ ਤੋਂ ਮੁਨਾਫ਼ਾ ਵੀ ਘਟ ਰਿਹਾ ਹੈ ਇਸ ਲਈ ਲੋੜ ਹੈ ਫ਼ਸਲੀ ਵਿਭਿੰਨਤਾ ਨੂੰ ਅਪਣਾੳਂੁਦੇ ਹੋਏ ਹੋਰ ਫ਼ਸਲਾਂ ਵੱਲ ਵੀ ਧਿਆਨ ਦਿ.... (Read More)
ਹਲਦੀ ਦੀ ਸਫਲ ਕਾਸ਼ਤ ਲਈ ਕੁਝ ਜ਼ਰੂਰੀ ਨੁਕਤੇ ਪੰਜਾਬ ਦਾ ਖੇਤੀ ਅਰਥਚਾਰਾ ਮੁੱਖ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਝੋਨੇ ਅਤੇ ਕਣਕ ਦੀ ਫ਼ਸਲ ‘ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦਾ ਹੈ ਪ੍ਰੰਤੂ ਝੋਨੇ ਅਤੇ ਕਣਕ ਦੇ ਫ਼ਸਲੀ ਚੱਕਰ ਨੂੰ ਲਗਾਤਾਰ ਅਪਣਾਉਣ ਕਰਕੇ ਬਹੁਤ ਸਾਰੀਆਂ ਸਮੱਸਿਆਵਾਂ ਆ ਰਹੀਆਂ ਹਨ ਅਤੇ ਝੋਨੇ ਅਤੇ ਕਣਕ ਤੋਂ ਮੁਨਾਫ਼ਾ ਵੀ ਘਟ ਰਿਹਾ ਹੈ ਇਸ ਲਈ ਲੋੜ ਹੈ ਫ਼ਸਲੀ ਵਿਭਿੰਨਤਾ ਨੂੰ ਅਪਣਾੳਂੁਦੇ ਹੋਏ ਹੋਰ ਫ਼ਸਲਾਂ ਵੱਲ ਵੀ ਧਿਆਨ ਦਿੱਤਾ ਜਾਵੇ ਹਲਦੀ ਫ਼ਸਲੀ ਵਿਭਿੰਨਤਾ ਵਿਚ ਚੰਗਾ ਯੋਗਦਾਨ ਪਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਹਲਦੀ ਦੀ ਖੇਤੀ ਨਾਲ ਨਾ ਕੇਵਲ ਸਾਡੀ ਆਪਣੀ ਲੋੜ ਪੂਰੀ ਹੋਵੇਗੀ ਸਗੋਂ ਸਾਡੇ ਪ੍ਰਾਂਤ ਅਤੇ ਦੇਸ਼ ਦੇ ਵਪਾਰ ਵਿਚ ਵੀ ਵਾਧਾ ਹੋਵੇਗਾ ਹਲਦੀ ਦੀ ਕਾਸ਼ਤ ਇਸ ਦੀਆਂ ਗੰਢੀਆਂ ਕਰਕੇ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੀਆਂ ਗੰਢੀਆਂ ਦਾ ਪੀਲਾ ਰੰਗ ਇਸ ਵਿਚਲੇ ਖਾਸ ਤੱਤ ਕਰਕਿਊਮਿਨ (1.8 ਤੋਂ 5.4 ਪ੍ਰਤੀਸ਼ਤ) ਕਰਕੇ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਹਲਦੀ ਦੀਆਂ ਗੰਢੀਆਂ ਵਿਚ ਖ਼ਾਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦਾ ਤੇਲ (2.5 ਤੋਂ 7.2 ਪ੍ਰਤੀਸ਼ਤ) ਵੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਨੂੰ ਟਰਮੇਰੋਲ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਹਲਦੀ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਮੁੱਖ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਰਸੋਈ ਵਿਚ ਮਸਾਲੇ ਦੇ ਤੌਰ ‘ਤੇ, ਭੋਜਨ ਪਦਾਰਥਾਂ ਨੂੰ ਸੁਗੰਧੀ ਅਤੇ ਰੰਗ ਦੇਣ ਵਾਸਤੇ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਇਸ ਦੇ ਖ਼ਾਸ ਗੁਣਾਂ ਕਰਕੇ ਇਸ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਦਵਾਈਆਂ ਅਤੇ ਹਾਰ-ਸ਼ਿੰਗਾਰ ਦੇ ਸਮਾਨ ਵਿਚ ਵੀ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ .ਇਸ ਦੇ ਸਹੀ ਵਾਧੇ ਵਿਕਾਸ ਲਈ ਇਸ ਨੂੰ ਗਰਮ ਅਤੇ ਸਿੱਲ੍ਹੇ ਵਾਤਾਵਰਨ ਦੀ ਜ਼ਰੂਰਤ ਪੈਂਦੀ ਹੈ ਪੰਜਾਬ ਵਿਚ ਇਸ ਦੀ ਕਾਸ਼ਤ ਸਾਰੇ ਸੇੇਂਜੂ ਇਲਾਕੇ ਵਿਚ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਜ਼ਿਆਦਾ ਜੈਵਿਕ ਮਾਦੇ ਵਾਲੀਆਂ ਦਰਮਿਆਨੀਆਂ ਤੋਂ ਭਾਰੀਆਂ ਜ਼ਮੀਨਾਂ ਇਸ ਦੀ ਕਾਸ਼ਤ ਲਈ ਜ਼ਿਆਦਾ ਢੁਕਵੀਆਂ ਹਨ ਹਲਦੀ ਦੀ ਫ਼ਸਲ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਪਛੇਤੀ ਕਣਕ ਜਾਂ ਪਿਆਜ਼ ਲਗਾਏ ਜਾ ਸਕਦੇ ਹਨ ਹੇਠ ਲਿਖੀਆਂ ਤਕਨੀਕੀ ਗੱਲਾਂ ਵੱਲ ਧਿਆਨ ਦੇ ਕੇ ਹਲਦੀ ਤੋਂ ਵਧੇਰੇ ਝਾੜ ਲਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਉੱਨਤ ਕਿਸਮਾਂ : ਫ਼ਸਲ ਦੇ ਵਧੇਰੇ ਝਾੜ ਲਈ ਕੇਵਲ ਸਿਫ਼ਾਰਸ਼ ਕੀਤੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਦੀ ਹੀ ਕਾਸ਼ਤ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਪੰਜਾਬ ਵਿਚ ਹਲਦੀ ਦੀ ਕਾਸ਼ਤ ਲਈ ਦੋ ਕਿਸਮਾਂ ਦੀ ਸਿਫ਼ਾਰਸ਼ ਕੀਤੀ ਗਈ ਹੈ ਜਿਨਾਂ ਦਾ ਵੇਰਵਾ ਹੇਠ ਲਿਖੇ ਅਨੁਸਾਰ ਹੈ : ਪੰਜਾਬ ਹਲਦੀ 1: ਹਲਦੀ ਦੀ ਇਸ ਕਿਸਮ ਦੇ ਬੂਟੇ ਦਰਮਿਆਨੀ ਉਚਾਈ ਦੇ ਅਤੇ ਸਿੱਧੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸ ਕਿਸਮ ਦੇ ਬੂਟਿਆਂ ਦੇ ਪੱਤੇ ਹਰੇ, ਦਰਮਿਆਨੇ ਚੌੜੇ ਅਤੇ ਥੋੜ੍ਹੇ ਲੰਬੇ ਆਕਾਰ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸ ਦੀਆਂ ਗੰਢੀਆਂ ਦੇ ਉੱਪਰਲੇ ਛਿਲਕੇ ਦਾ ਰੰਗ ਭੂਰਾ ਜਦੋਂਕਿ ਅੰਦਰਲੇ ਗੁੱਦੇ ਦਾ ਰੰਗ ਗੂੜ੍ਹਾ ਪੀਲਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੱਕਣ ਲਈ ਲੱਗਪਗ 215 ਦਿਨ ਲੈਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤ ਝਾੜ 108 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਪੰਜਾਬ ਹਲਦੀ 2: ਹਲਦੀ ਦੀ ਇਸ ਕਿਸਮ ਦੇ ਬੂਟੇ ਲੰਬੇ ਅਤੇ ਸਿੱਧੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸ ਕਿਸਮ ਦੇ ਬੂਟਿਆਂ ਦੇ ਪੱਤੇ ਹਲਕੇ ਹਰੇ ਅਤੇ ਜ਼ਿਆਦਾ ਚੌੜੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸ ਦੀਆਂ ਗੰਢੀਆਂ ਮੋਟੀਆਂ ਅਤੇ ਲੰਬੀਆਂ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਗੰਢੀਆਂ ਦੇ ਉੱਪਰਲੇ ਛਿਲਕੇ ਦਾ ਰੰਗ ਭੂਰਾ ਅਤੇ ਅੰਦਰਲੇ ਗੁੱਦੇ ਦਾ ਰੰਗ ਪੀਲਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੱਕਣ ਲਈ ਲੱਗਪਗ 240 ਦਿਨ ਲੈਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤ ਝਾੜ 122 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਖੇਤ ਦੀ ਤਿਆਰੀ: ਹਲਦੀ ਇਸ ਦੀਆਂ ਗੰਢੀਆਂ (ਜ਼ਮੀਨੀ ਤਣੇ) ਲਈ ਉਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਗੰਢੀਆਂ ਦੇ ਸਹੀ ਵਾਧੇ- ਵਿਕਾਸ ਲਈ ਜ਼ਮੀਨ ਦਾ ਨਰਮ ਹੋਣਾ ਬਹੁਤ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ ਇਸ ਲਈ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਖੇਤ ਨੂੰ ਦੋ-ਤਿੰਨ ਵਾਰ ਵਾਹ ਕੇ ਅਤੇ ਸੁਹਾਗਾ ਮਾਰ ਕੇ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਤਿਆਰ ਕਰ ਲੈਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਖੇਤ ਦੀ ਤਿਆਰੀ ਸਮੇਂ ਜੇਕਰ ਪਿਛਲੀ ਫ਼ਸਲ ਦੇ ਮੁੱਢ ਅਤੇ ਹੋਰ ਘਾਹ-ਫੂਸ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਖੇਤ ਦੀ ਤਿਆਰੀ ਸਮੇਂ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਕੱਢ ਦੇਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਬੀਜ ਦੀ ਮਾਤਰਾ: ਹਲਦੀ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਗੰਢੀਆਂ ਰਾਹੀ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਵਰਤੀਆਂ ਜਾਣ ਵਾਲੀਆਂ ਗੰਢੀਆਂ ਤਾਜ਼ੀਆਂ ਅਤੇ ਰੋਗ ਰਹਿਤ ਹੋਣੀਆਂ ਚਾਹੀਦੀਆਂ ਹਨ ਇਕ ਏਕੜ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਵਾਸਤੇ 6 ਤੋਂ 8 ਕੁਇੰਟਲ ਤਾਜ਼ੀਆਂ ਗੰਢੀਆਂ ਦੀ ਜ਼ਰੂਰਤ ਪੈਂਦੀ ਹੈ ਜੇਕਰ ਘਰੇਲੂ ਪੱਧਰ ‘ਤੇ ਛੋਟੇ ਪੈਮਾਨੇ ‘ਤੇ ਹਲਦੀ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰਨੀ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਇਕ ਮਰਲਾ (25 ਵਰਗ ਮੀਟਰ) ਰਕਬੇ ਲਈ 4-5 ਕਿਲੋਗ੍ਰਾਮ ਗੰਢੀਆਂ ਕਾਫ਼ੀ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਬਿਜਾਈ ਦਾ ਢੰਗ : ਹਲਦੀ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਤਾਜ਼ੀਆਂ ਅਤੇ ਨਿਰੋਗ ਗੰਢੀਆਂ ਦੀ ਚੋਣ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਹਲਦੀ ਦੀ ਬਿਜਾਈ 1 ਫੁੱਟ (30 ਸੈਂਟੀਮੀਟਰ) ਦੀ ਵਿੱਥ ‘ਤੇ ਲਾਈਨਾਂ ਵਿਚ ਗੰਢੀ ਤੋਂ ਗੰਢੀ ਦਾ ਫ਼ਾਸਲਾ 8 ਇੰਚ (20 ਸੈਂਟੀਮੀਟਰ) ਰੱਖ ਕੇ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਖੇਤ ਵਿਚ 25-36 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਝੋਨੇ ਦੀ ਪਰਾਲੀ ਪਾ ਦੇਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਪਰਾਲੀ ਪਾਉਣ ਨਾਲ ਗੰਢੀਆਂ ਜਲਦੀ ਹਰੀਆਂ ਹੋ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ ਗੰਢੀਆਂ ਦੇ ਹਰੇ ਹੋਣ ਤੱਕ ਖੇਤ ਨੂੰ ਗਿੱਲੀ ਵੱਤਰ ਵਿਚ ਰੱਖਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਬੀਜ ਦੀ ਕੀਮਤ 3000ਤੋਂ 3500 ਰੁਪਏ ਪ੍ਰਤੀ ਕੁਇੰਟਲ ਹੈ ਕੁੱਲ ਖਰਚਾ 35 ਤੋ 40 ਹਜਾਰਾਂ ਆਉਂਦਾ ਹੈ ਜਿਆਦਾ ਖਰਚਾ ਬੀਜ ਅਤੇ ਲੇਵਰ ਤੇ ਆਉਂਦਾ ਹੈ।

Posted by Manjit Singh
Punjab
06-12-2019 03:00 PM
bhai sahib nazdik de pashuan de hospital or krishi vigyan kendar naal sampark karo g or GADVASU VETERINARY UNIVERSITY LUDHIANA NAAL SAMPARK KARO G TRAINING LAO phir shuroo kar lao

Posted by jaspreet singh
Punjab
06-12-2019 02:52 PM
उसे आप Mifex 450ml (IV) बोतल लगवायें ये आप तीन बोतलों को तीन दिन लगवायें और उसे Normal saline(NS)3 लीटर एक दिन में लगायें और तीन दिन तक लगवायें बाकि आप उसे Mecvolt 400mg 2-2ml
और Trineurosol h injection 5-5ml दोनों पुड़ों पर लगाएं इससे फर्क पड़ जाएगा

Posted by Vilasitha G
Andhra Pradesh
06-12-2019 02:46 PM
इसके लिए आप carbendazim@400gm प्रति लीटर पानी के हिसाब से प्रयोग कर सकते है

Posted by Vilasitha G
Andhra Pradesh
06-12-2019 02:44 PM
इसके लिए आप carbendazim@400gm प्रति लीटर पानी के हिसाब से प्रयोग कर सकते है

Posted by sf
Punjab
06-12-2019 02:27 PM
ਸਫੇਦਾ ਮਿਰਟਾਸਿਆਈ ਜਾਤੀ ਨਾਲ ਸੰਬੰਧ ਰੱਖਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸਦੀਆਂ 300 ਜਾਤੀਆਂ ਹਨ ਇਸਦੇ ਵਧੀਆ ਵਿਕਾਸ ਲਈ ਚੰਗੇ ਜਲ ਨਿਕਾਸ ਵਾਲੀ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਲੋੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਹ ਬਹੁਤ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੀਆਂ ਮਿੱਟੀਆਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਪਰ ਇਹ ਚੰਗੇ ਨਿਕਾਸ ਵਾਲੀ, ਜੈਵਿਕ ਤੱਤਾਂ ਨਾਲ ਭਰਪੂਰ ਦੋਮਟ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਵਧੀਆ ਪੈਦਾਵਾਰ ਦਿੰਦਾ ਹੈ ਪਾਣੀ ਸੋਖਣ ਵਾਲੀ, ਖਾਰੀ ਅਤੇ ਲੂਣੀ ਮਿੱਟੀ ਸਫੈਦੇ ਦੀ ਪੈਦਾਵਾਰ .... (Read More)
ਸਫੇਦਾ ਮਿਰਟਾਸਿਆਈ ਜਾਤੀ ਨਾਲ ਸੰਬੰਧ ਰੱਖਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸਦੀਆਂ 300 ਜਾਤੀਆਂ ਹਨ ਇਸਦੇ ਵਧੀਆ ਵਿਕਾਸ ਲਈ ਚੰਗੇ ਜਲ ਨਿਕਾਸ ਵਾਲੀ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਲੋੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਹ ਬਹੁਤ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੀਆਂ ਮਿੱਟੀਆਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਪਰ ਇਹ ਚੰਗੇ ਨਿਕਾਸ ਵਾਲੀ, ਜੈਵਿਕ ਤੱਤਾਂ ਨਾਲ ਭਰਪੂਰ ਦੋਮਟ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਵਧੀਆ ਪੈਦਾਵਾਰ ਦਿੰਦਾ ਹੈ ਪਾਣੀ ਸੋਖਣ ਵਾਲੀ, ਖਾਰੀ ਅਤੇ ਲੂਣੀ ਮਿੱਟੀ ਸਫੈਦੇ ਦੀ ਪੈਦਾਵਾਰ ਲਈ ਉਚਿੱਤ ਨਹੀਂ ਮੰਨੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਕਿਸਮਾਂ: Eucalyptus camaldulensis, FRI 4 and FRI 6, Eucalyptus globules, Eucalyptus citriodora.ਸਫੇਦੇ ਦੀ ਖੇਤੀ ਮੁੱਖ ਤੌਰ ਤੇ ਉਦਯੋਗਿਕ ਕੰਮਾਂ ਲਈ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਵਪਾਰਕ ਖੇਤੀ ਲਈ ਜ਼ਮੀਨ ਚੋਂ ਨਦੀਨ ਅਤੇ ਮੁੱਢ ਕੱਢ ਦਿਓ ਜ਼ਮੀਨ ਨੂੰ ਭੁਰਭੁਰਾ ਕਰਨ ਲਈ 2-3 ਵਾਰ ਵਾਹੋ ਬਿਜਾਈ ਲਈ 30x30x30 ਸੈ.ਮੀ. ਜਾਂ 45x45x45 ਸੈ.ਮੀ. ਦੇ ਟੋਏ ਪੁੱਟੋ ਇਸਦੀ ਬਿਜਾਈ ਦਾ ਉਚਿੱਤ ਸਮਾਂ ਜੂਨ ਤੋਂ ਅਕਤੂਬਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜ਼ਿਆਦਾ ਘਣਤਾ ਨਾਲ ਬਿਜਾਈ ਲਈ 1.5x1.5 ਮੀਟਰ ਦੇ ਫਾਸਲੇ ਤੇ(ਲਗਭਗ 1690 ਪੌਦੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ) ਜਾਂ 2x2 ਮੀਟਰ ਫਾਸਲ ਤੇ(ਲਗਭਗ 1200 ਪੌਦੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ) ਬਿਜਾਈ ਕਰੋ ਸ਼ੁਰੂਆਤੀ ਸਾਲਾਂ ਵਿੱਚ ਅੰਤਰ-ਫਸਲਾਂ ਵੀ ਉਗਾਈਆਂ ਜਾ ਸਕਦੀਆਂ ਹਨ ਅੰਤਰ-ਫਸਲੀ ਸਮੇਂ ਫਾਸਲਾ 4x2 ਮੀਟਰ(ਲਗਭਗ 600 ਪੌਦੇ) ਜਾਂ 6x1.5 ਜਾਂ 8x1 ਮੀਟਰ ਦਾ ਫਾਸਲਾ ਰੱਖੋ ਹਲਦੀ ਅਤੇ ਅਦਰਕ ਵਰਗੀਆਂ ਫਸਲਾਂ ਜਾਂ ਚਿਕਿਤਸਕ ਪੌਦੇ ਅੰਤਰ-ਫਸਲਾਂ ਦੇ ਤੌਰ ਤੇ ਲਈਆਂ ਜਾ ਸਕਦੀਆਂ ਹਨ 2x2 ਮੀਟਰ ਦਾ ਫਾਸਲਾ ਜ਼ਿਆਦਾਤਰ ਵਰਤਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਇਸਦੀ ਬਿਜਾਈ ਮੁੱਖ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਪਨੀਰੀ ਲਗਾ ਕੇ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ 1.5x1.5 ਮੀਟਰ ਦੇ ਫਾਸਲੇ ਤੇ ਬਿਜਾਈ ਕਰਨ ਨਾਲ ਲਗਭਗ 1690 ਪੌਦੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕੀਤੇ ਜਾ ਸਕਦੇ ਹਨ, ਜਦਕਿ 2x2 ਮੀਟਰ ਦੇ ਫਾਸਲੇ ਨਾਲ ਲਗਭਗ 1200 ਪੌਦੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕੀਤੇ ਜਾ ਸਕਦੇ ਹਨ ਇਸ ਫਸਲ ਲਈ ਬੀਜ ਸੋਧਣ ਦੀ ਜ਼ਰੂਰਤ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸਦਾ ਪ੍ਰਜਣਨ ਬੀਜਾਂ ਜਾਂ ਪੌਦੇ ਦੇ ਭਾਗਾਂ ਦੁਆਰਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਨਰਸਰੀ ਲਈ ਛਾਂ ਵਿੱਚ ਬੈੱਡ ਤਿਆਰ ਕਰੋ ਅਤੇ ਉਸ ਤੇ ਬੀਜ ਬੀਜੋ 25-35° ਸੈ. ਤਾਪਮਾਨ ਤੇ ਨਵੇਂ ਪੌਦਿਆਂ ਦਾ ਤੇਜ਼ੀ ਨਾਲ ਵਾਧਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ 6 ਹਫਤਿਆਂ ਵਿੱਚ ਪੌਦੇ, ਜਦੋਂ ਇਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਦੂਜਾ ਪੱਤਾ ਨਿਕਲਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਤਾਂ ਇਹ ਪੋਲੀਥੀਨ ਦੇ ਲਿਫਾਫੇ ਵਿੱਚ ਲਗਾਉਣ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 3-5 ਮਹੀਨੇ ਬਾਅਦ ਇਹ ਪੌਦੇ ਮੁੱਖ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਲਗਾਉਣ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਮੁੱਖ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਪਨੀਰੀ ਜ਼ਿਆਦਾਤਰ ਵਰਖਾ ਦੇ ਮੌਸਮ ਵਿੱਚ ਲਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 3-5 ਮਹੀਨੇ ਬਾਅਦ ਨਵੇਂ ਪੌਦੇ ਮੁੱਖ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਲਗਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਨਵੇਂ ਪੌਦੇ ਟੋਇਆਂ ਵਿੱਚ ਮਾਨਸੂਨ ਦੇ ਸ਼ੁਰੂ ਵਿੱਚ ਲਗਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਬਿਜਾਈ ਸਮੇਂ ਨਿੰਮ ਦੇ ਤੱਤਾਂ ਦੇ ਨਾਲ-ਨਾਲ ਫਾਸਫੇਟ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਅਤੇ ਵਰਮੀ-ਕੰਪੋਸਟ 250 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਟੋਆ ਪਾਓ ਨਿੰਮ ਵਾਲੇ ਤੱਤ ਪੌਦਿਆਂ ਨੂੰ ਸਿਉਂਕ ਤੋਂ ਬਚਾਉਂਦੇ ਹਨ ਪਹਿਲੇ ਸਾਲ NPK ਦੀ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਮਾਤਰਾ ਪਾਓ ਦੂਜੇ ਸਾਲ 17:17:17@ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਪੌਦਾ ਪਾਓ ਹੱਥੀਂ ਗੋਡੀ ਵੀ ਕਰਦੇ ਰਹੋ ਅਤੇ ਨਦੀਨਾਂ ਦੇ ਹਮਲੇ ਨੂੰ ਚੈੱਕ ਕਰਦੇ ਰਹੋ ਖੇਤ ਨੂੰ ਨਦੀਨ-ਮੁਕਤ ਰੱਖਣ ਲਈ ਸ਼ੁਰੂਆਤੀ ਸਮੇਂ ਵਿੱਚ, 2-3 ਗੋਡੀਆਂ ਕਰੋ ਮੁੱਖ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਪਨੀਰੀ ਲਗਾਉਣ ਤੋਂ ਤੁਰੰਤ ਬਾਅਦ ਸਿੰਚਾਈ ਕਰੋ ਮਾਨਸੂਨ ਵਿੱਚ ਸਿੰਚਾਈ ਦੀ ਲੋੜ ਨਹੀਂ ਹੈ, ਪਰ ਜੇਕਰ ਮਾਨਸੂਨ ਵਿੱਚ ਦੇਰੀ ਹੋਵੇ ਜਾਂ ਵਧੀਆ ਤਰ੍ਹਾਂ ਨਾਲ ਨਾ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਸੁਰੱਖਿਅਤ ਸਿੰਚਾਈ ਕਰੋ ਸਫੈਦਾ ਸੋਕੇ ਨੂੰ ਸਹਾਰਨਯੋਗ ਫਸਲ ਹੈ, ਪਰ ਉਚਿੱਤ ਪੈਦਾਵਾਰ ਲਈ ਪੂਰੇ ਵਿਕਾਸ ਵਾਲੇ ਸਮੇਂ ਵਿੱਚ ਕੁੱਲ 25 ਸਿੰਚਾਈਆਂ ਦੀ ਲੋੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਸਿੰਚਾਈ ਦੀ ਜ਼ਿਆਦਾਤਰ ਲੋੜ ਗਰਮੀਆਂ ਵਿੱਚ ਅਤੇ ਕਾਫੀ ਹੱਦ ਤੱਕ ਸਰਦੀਆਂ ਵਿੱਚ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਟਿਸ਼ੂ ਦੁਆਰਾ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਪੰਜ ਸਾਲਾਂ ਵਿੱਚ 50 ਤੋਂ 76 ਮਿਲੀ ਟਨ ਝਾੜ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਜਦਕਿ ਮੂਲ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 30 ਤੋਂ 50 ਮਿਲੀ ਟਨ ਝਾੜ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਫਸਲ ਦਾ ਝਾੜ ਖੇਤ ਪ੍ਰਬੰਧ, ਪੌਦੇ ਦੀ ਘਣਤਾ, ਜਲਵਾਯੂ ਆਦਿ ਅਨੁਸਾਰ ਘੱਟ-ਵੱਧ ਵੀ ਸਕਦਾ ਹੈ
Posted by Sandeep Saini
Punjab
06-12-2019 02:24 PM
पोपलर के नए पौधे की रोपाई के लिए जनवरी से फरवरी का समय अच्छा होता है रोपाई 15 फरवरी से 10 मार्च में की जा सकती है
Posted by Hitesh Kumar
Uttar Pradesh
06-12-2019 02:18 PM
श्रीमान जी आपके द्धारा भेंजी गई ओडियो अपलोड नहीं हुई है कृपया आप दोबारा ओडियो भेंजे ताकि आपको पूरी जानकारी दी जा सके
Posted by Ajayraj singh Chouhan
Madhya Pradesh
06-12-2019 02:12 PM
Ajayraj ji kripya aap swal vistar se pooche taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad

Posted by honey
Punjab
06-12-2019 01:52 PM
ਖਾਦਾਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਮਿੱਟੀ ਪਰਖ਼ ਆਧਾਰ ਤੇ ਕਰੋ ਜੇ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਪਰਖ਼ ਨਹੀਂ ਕਰਵਾਈ ਤਾਂ ਕਣਕ ਲਈ ਦਰਮਿਆਨੀ ਉਪਜਾਊ ਜ਼ਮੀਨ ਲਈ 55 ਕਿਲੋ ਡੀ ਏ ਪੀ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਬਿਜਾਈ ਸਮੇਂ ਪੋਰ ਦਿਓ
ਉਪਰੰਤ ਪਹਿਲੇ ਅਤੇ ਦੂਜੇ ਪਾਣੀ ਨਾਲ 45 ਕਿੱਲੋ ਯੂਰੀਆ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਪਾਓ
ਜੇ ਬਾਰਿਸ਼ਾਂ ਕਾਰਨ ਦੂਜੇ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਦੇਰੀ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਯੂਰੀਆ ਦੀ ਦੂਜੀ ਕਿਸ਼ਤ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 55 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ ਜ਼ਰੂਰ ਦੇ ਦੇਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ
ਪੋ.... (Read More)
ਖਾਦਾਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਮਿੱਟੀ ਪਰਖ਼ ਆਧਾਰ ਤੇ ਕਰੋ ਜੇ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਪਰਖ਼ ਨਹੀਂ ਕਰਵਾਈ ਤਾਂ ਕਣਕ ਲਈ ਦਰਮਿਆਨੀ ਉਪਜਾਊ ਜ਼ਮੀਨ ਲਈ 55 ਕਿਲੋ ਡੀ ਏ ਪੀ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਬਿਜਾਈ ਸਮੇਂ ਪੋਰ ਦਿਓ
ਉਪਰੰਤ ਪਹਿਲੇ ਅਤੇ ਦੂਜੇ ਪਾਣੀ ਨਾਲ 45 ਕਿੱਲੋ ਯੂਰੀਆ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਪਾਓ
ਜੇ ਬਾਰਿਸ਼ਾਂ ਕਾਰਨ ਦੂਜੇ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਦੇਰੀ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਯੂਰੀਆ ਦੀ ਦੂਜੀ ਕਿਸ਼ਤ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 55 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ ਜ਼ਰੂਰ ਦੇ ਦੇਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ
ਪੋਟਾਸ਼ ਤੱਤ ਦੀ ਘਾਟ ਵਾਲੀਆ ਜਮੀਨਾ ਵਿੱਚ 12 ਕਿਲੋ ਪੋਟਾਸ਼ (20 ਕਿਲੋ ਮਿਊਰੇਟ ਆਫ ਪੋਟਾਸ਼) ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਪਾਓ
Posted by Anil
Uttar Pradesh
06-12-2019 01:50 PM
श्रीमान जी आप गेहूं की फसल में पानी लगा सकते है और यूरिया भी डाल सकते है

Posted by Ashish Topno
Jharkhand
06-12-2019 01:50 PM
Ashish ji aap iske uper machar ka hamla check karen agar maujood hai to aap imidacloprid@1.5ml ko prati litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad

Posted by Navkirat Brar
Punjab
06-12-2019 01:45 PM
ਖਾਦਾਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਮਿੱਟੀ ਪਰਖ਼ ਆਧਾਰ ਤੇ ਕਰੋ ਜੇ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਪਰਖ਼ ਨਹੀਂ ਕਰਵਾਈ ਤਾਂ ਕਣਕ ਲਈ ਦਰਮਿਆਨੀ ਉਪਜਾਊ ਜ਼ਮੀਨ ਲਈ 55 ਕਿਲੋ ਡੀ ਏ ਪੀ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਬਿਜਾਈ ਸਮੇਂ ਪੋਰ ਦਿਓ
ਉਪਰੰਤ ਪਹਿਲੇ ਅਤੇ ਦੂਜੇ ਪਾਣੀ ਨਾਲ 45 ਕਿੱਲੋ ਯੂਰੀਆ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਪਾਓ
ਜੇ ਬਾਰਿਸ਼ਾਂ ਕਾਰਨ ਦੂਜੇ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਦੇਰੀ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਯੂਰੀਆ ਦੀ ਦੂਜੀ ਕਿਸ਼ਤ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 55 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ ਜ਼ਰੂਰ ਦੇ ਦੇਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ
ਪੋ.... (Read More)
ਖਾਦਾਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਮਿੱਟੀ ਪਰਖ਼ ਆਧਾਰ ਤੇ ਕਰੋ ਜੇ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਪਰਖ਼ ਨਹੀਂ ਕਰਵਾਈ ਤਾਂ ਕਣਕ ਲਈ ਦਰਮਿਆਨੀ ਉਪਜਾਊ ਜ਼ਮੀਨ ਲਈ 55 ਕਿਲੋ ਡੀ ਏ ਪੀ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਬਿਜਾਈ ਸਮੇਂ ਪੋਰ ਦਿਓ
ਉਪਰੰਤ ਪਹਿਲੇ ਅਤੇ ਦੂਜੇ ਪਾਣੀ ਨਾਲ 45 ਕਿੱਲੋ ਯੂਰੀਆ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਪਾਓ
ਜੇ ਬਾਰਿਸ਼ਾਂ ਕਾਰਨ ਦੂਜੇ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਦੇਰੀ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਯੂਰੀਆ ਦੀ ਦੂਜੀ ਕਿਸ਼ਤ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 55 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ ਜ਼ਰੂਰ ਦੇ ਦੇਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ
ਪੋਟਾਸ਼ ਤੱਤ ਦੀ ਘਾਟ ਵਾਲੀਆ ਜਮੀਨਾ ਵਿੱਚ 12 ਕਿਲੋ ਪੋਟਾਸ਼ (20 ਕਿਲੋ ਮਿਊਰੇਟ ਆਫ ਪੋਟਾਸ਼) ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਪਾਓ
Posted by Avinash chauhan
Uttar Pradesh
06-12-2019 01:32 PM
मिट्टी की जांच के आधार पर खादें डालें मिट्टी की जांच के अनुसार ही हम मिट्टी में आवश्यक खादों की मात्रा दे सकते हैं
सिंचित क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 60 किलो (यूरिया 130 किलो), फासफोरस 24 किलो (एस एस पी 150 किलो), पोटाश 12 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 20 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस और पोटाश की.... (Read More)
मिट्टी की जांच के आधार पर खादें डालें मिट्टी की जांच के अनुसार ही हम मिट्टी में आवश्यक खादों की मात्रा दे सकते हैं
सिंचित क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 60 किलो (यूरिया 130 किलो), फासफोरस 24 किलो (एस एस पी 150 किलो), पोटाश 12 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 20 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी नाइट्रोजन को पहली सिंचाई के समय डालें
बारानी क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 24 किलो (यूरिया 52 किलो), फासफोरस 12 किलो (एस एस पी 75 किलो), पोटाश 8 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 15 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोज, फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें
सिंचित क्षेत्रों में पिछेती बिजाई के लिए, नाइट्रोजन 50 किलो (यूरिया 110 किलो), फासफोरस 12 किलो (एस एस पी 75 किलो), पोटाश 16 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 27 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन की दो तिहाई मात्रा बिजाई के 35-40 दिनों के बाद डालें
यह पाया गया है कि जिंक सल्फेट 10 किलो प्रति एकड़ में डालने से उपज में वृद्धि होती है जिंक की कमी को पूरा करने के लिए जिंक सल्फेट 0.5 प्रतिशत की फोलियर स्प्रे करें 15 दिनों के अंतराल पर दो से तीन स्प्रे करें
Posted by Sandeep Saini
Punjab
06-12-2019 01:29 PM
Shrimaan ji, ap december mein sabjiya jaise ke tamatar , chappan kadu, muli, shimla mirch , bangan ki bijai kar sakt eho, dhanywad

Posted by Rahul sirpure
Telangana
06-12-2019 01:19 PM
Rahul ji please check the termite attack in the roots if there then do a spray of chlorpyriphos@4ml per litre.thank you

Posted by Rahul sirpure
Telangana
06-12-2019 01:09 PM
Shri maan g M-45@500 gm per acre spray kr skte ho....

Posted by anurag kumar yadav
Uttar Pradesh
06-12-2019 12:58 PM
Shri maan g aap apna swal visthar se puchein tan ki apko poori Jankari di ja ske....

Posted by ishwar shingh
Madhya Pradesh
06-12-2019 12:55 PM
ईश्वर जी कृपया आप बताये के आपने इसमें क्या क्या खाद डाली है ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by हिम्मतसिंह रावत
Uttarakhand
06-12-2019 12:52 PM
हिम्मतसिंह जी इसका रेट 16500 -17500 रुपये तक चल रहा है धन्यवाद
Posted by हिम्मतसिंह रावत
Uttarakhand
06-12-2019 12:49 PM
हिम्मतसिंह जी इसका रेट 16500 -17500 रुपये तक चल रहा है धन्यवाद

Posted by फूलचंद
Jharkhand
06-12-2019 12:38 PM
फूलचंद जी आप इसके ऊपर mancozeb @4 ग्राम को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें.धन्यवाद
Posted by Jaspreet singh Jassi
Punjab
06-12-2019 12:30 PM
Jaspreet ji desi chicks lene ke liye aap Balwinder Singh 9041009671 Papu Hachery Farm se sampark kr skte hai..
Posted by Hitesh Kumar
Uttar Pradesh
06-12-2019 12:25 PM
सबसे पहले यदि हम मछली पालन की बात करें तो इसके लिए ट्रेनिंग बहुत जरूरी है यह ट्रेनिंग FFDA(fish farmer development aggency) हर जिले में बनी है जहां हमारा खेतीबाड़ी विभाग है वहां इसके अफसर बैठते हैं वहां जाकर एप्लीकेशन भरवायें वहां आपको 5 दिन की ट्रेनिंग दी जायेगी ट्रेनिंग के लिए दसवीं पास होना ज़रूरी है इस ट्रेनिंग में आपको लोन और .... (Read More)
सबसे पहले यदि हम मछली पालन की बात करें तो इसके लिए ट्रेनिंग बहुत जरूरी है यह ट्रेनिंग FFDA(fish farmer development aggency) हर जिले में बनी है जहां हमारा खेतीबाड़ी विभाग है वहां इसके अफसर बैठते हैं वहां जाकर एप्लीकेशन भरवायें वहां आपको 5 दिन की ट्रेनिंग दी जायेगी ट्रेनिंग के लिए दसवीं पास होना ज़रूरी है इस ट्रेनिंग में आपको लोन और सब्सिड़ी के बारे में सारी जानकारी प्राप्त हो जाएगी इसकी पुंग छोड़ने के लिए अप्रैल से अक्तूबर का समय बढ़िया होता है, बाकि यदि अपने शुरू करना है तो यूनिवर्सिटी की तरफ से एक एकड़ में शुरू कर सकते हैं. एक एकड़ में 5000 पूंग डाल सकते हैं यह 2 से 3 इंच का होता है यदि 5000 डालना है तो 3000 रोहू, 1000 कतला, 500 कॉमन कॉर्प और 500 मरीगल नस्ल डाली जाए यह पूंग आप मछली पालन विभाग से खरीद सकते हैं यह एक इंच का बच्चा 10 पैसा प्रति बच्चा मिलेगा यदि बढ़िया खुराक डाली जाए तो 8 महीनों में यह लगभग 800—900 ग्राम का हो जाता है बाकी मछली पालन के लिए नहरी पानी बढ़िया होता है और आप गांव का छप्पड़ ठेके से लेकर भी यह काम शुरू कर सकते हैं तालाब में मछली के बीज डालने से पहले इस बात की जांच कर लेनी चाहिए कि उस तालाब में काफी मात्रा में मछली की कुदरती खुराक उपलब्ध है, इसके इलावा यदि आप मधु मक्खी पालन के बारे में जानकारी लेना चाहते है और अगर आप नए सिरे से मक्खी पालन का व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं तो अगस्त से जनवरी तक शुरू किया जा सकता है इसमें 100 मक्खी के बक्सों से आप औसतन 25000-30000 तक का मुनाफा ले सकते हैं शुरूआत में यदि आप 100 बक्सों से काम शुरू करते हैं तो औसतन 4-5 लाख तक खर्चा आता है आप अपने बजट के हिसाब से बक्सों की गिणती कम ज्यादा कर सकते हैं बाकी यदि इसकी ट्रेनिंग लेकर शुरू करें तो बढ़िया रहेगा ट्रेनिंग में आपको पूरी जानकरी मिलेगी किस तरह से इसका रख रखाव करना होता है जी और उसके बाद जब आपने यह काम शुरू करना है तो आप बक्से नज़दीकी किसी भी मधुमखी पालन का काम करने वाले किसान से खरीद सकते है..

Posted by naresh
Punjab
06-12-2019 12:22 PM
Naresh ji tuc kitchen garden de bare jankari lain de layi Sewak 9876106137 nal sampark karo.dhanwad
Posted by Gurpartap dhillon
Punjab
06-12-2019 12:20 PM
ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ ਪਹਿਲੇ ਦਿਨ Zoctum injection 2.5gm, Isoflud injection 5ml, CRB injection 20ml, Megludyne injection 20ml, vitum-H 5ml injection ਲਗਵਾਓ ਫਿਰ ਅਗਲੇ 2 ਦਿਨ ਤੁਸੀ Intacef Tezo injection 4.5gm, Megludyne injection 20ml, CRB injection 20ml, Vitum-H injection 5ml ਲਗਵਾਓ, ਸਿਰਫ ਪਹਿਲੇ ਅਤੇ ਤੀਜੇ ਦਿਨ ਹੀ Isoflud ਇੰਜੇਕਸ਼ਨ ਲਗਵਾਓ ਜੀ ਇਹਨਾਂ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ..
Posted by Kapil Kumar
Uttar Pradesh
06-12-2019 12:14 PM
usko aap Broton liquid 50-50ml rojana den aur Biotrim tablet 1-1 goli subah sham den, isse frak padd jayega..
Posted by manshi kumar
Bihar
06-12-2019 12:06 PM
सीड बैड पर बिजाई की गई फसल अच्छी अंकुरित होती है ज़मीन को देसी हल से दो या तीन बार जोताई करें और प्रत्येक जोताई के बाद सुहागा फेरें बीजों के एकसार अंकुरित होने के लिए बैड नर्म, गीले और समतल होने चाहिए बिजाई के लिए सितंबर का आखिरी सप्ताह उचित समय होता है जबकि बाकी के क्षेत्रों के लिए 15 अक्तूबर तक बिजाई पूरी कर .... (Read More)
सीड बैड पर बिजाई की गई फसल अच्छी अंकुरित होती है ज़मीन को देसी हल से दो या तीन बार जोताई करें और प्रत्येक जोताई के बाद सुहागा फेरें बीजों के एकसार अंकुरित होने के लिए बैड नर्म, गीले और समतल होने चाहिए बिजाई के लिए सितंबर का आखिरी सप्ताह उचित समय होता है जबकि बाकी के क्षेत्रों के लिए 15 अक्तूबर तक बिजाई पूरी कर लें बिजाई का उपयुक्त समय सितंबर के दूसरे पखवाड़ा होता है तारामीरा-सरसों की बिजाई के लिए पंक्ति से पंक्ति का फासला 30 सैं.मी. और पौधे से पौधे का फासला 10 से 15 सैं.मी. रखें गोभी सरसों की बिजाई के लिए पंक्तियों का फासला 45 सैं.मी. और पौधे से पौधे का फासला 10 सैं.मी. रखें बीजों को 4-5 सैं.मी. की गहराई में बोयें बिजाई के लिए सीड ड्रिल विधि का प्रयोग करें
Posted by Ashish parihar
Madhya Pradesh
06-12-2019 11:56 AM
श्री मान चने में M-45@500 gm प्रती एकड़ 120 लीटर पानी में मिलाकर सप्रे कर सकते हो

Posted by harvinder singh
Haryana
06-12-2019 11:34 AM
Harvinder ji iski photo ke hisab se yeh thik hai yaddi isko koi smasia aa rehi hai too aap uske vare mai vistar se btayen tan jo apko sahi jankari di jaa skee..
Expert Communities
We do not share your personal details with anyone
We do not share your personal details with anyone
Sign In
Registering to this website, you accept our Terms of Use and our Privacy Policy.
Your mobile number and password is invalid
We have sent your password on your mobile number
All fields marked with an asterisk (*) are required:
Sign Up
Registering to this website, you accept our Terms of Use and our Privacy Policy.
All fields marked with an asterisk (*) are required:
Please select atleast one option
Please select text along with image
















