
Posted by ramavatar meena
Rajasthan
07-12-2019 10:01 AM
श्रीमान जी, कृपया आप फसल की फोटो भेजें ताकि आपको इसकी सही जानकारी दी जा सके, धन्यवाद
Posted by रामस्वरुप बैरवा
Rajasthan
07-12-2019 09:57 AM
श्रीमान जी, कृपया आप फसल की फोटो भेजें ताकि आपको इसकी सही जानकारी दी जा सके, धन्यवाद
Posted by ਸੁਖਦੀਪ ਸਿੰਘ ਸੰਘਾ
Punjab
07-12-2019 09:56 AM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਇਹ ਗੁਲਾਬੀ ਸੁੰਡੀ ਦਾ ਹਮਲਾ ਹੈ, ਇਸਕਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਤੁਸੀ quinalphos @400 ml ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਜਾ ਇਸ ਵਿਚ chlorpyriphos @1 ਲਿਟਰ ਨੂੰ 60 kg ਮਿੱਟੀ ਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿश्रीमान जी यह गुलाबी सूंडी का हमला है इसकी रोकथाम के लिए आप quinalphos @400 ml प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें या इसमें chlorpyriphos @1 लीटर को 60 किलो मिट्टी में मिलाकर प.... (Read More)
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਇਹ ਗੁਲਾਬੀ ਸੁੰਡੀ ਦਾ ਹਮਲਾ ਹੈ, ਇਸਕਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਤੁਸੀ quinalphos @400 ml ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਜਾ ਇਸ ਵਿਚ chlorpyriphos @1 ਲਿਟਰ ਨੂੰ 60 kg ਮਿੱਟੀ ਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿश्रीमान जी यह गुलाबी सूंडी का हमला है इसकी रोकथाम के लिए आप quinalphos @400 ml प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें या इसमें chlorpyriphos @1 लीटर को 60 किलो मिट्टी में मिलाकर प्रति एकड़ के हिसाब से डालें धन्यवाद ਸਾਬ ਨਾਲ ਪਾਓ, ਧੰਨਵਾਦ

Posted by khushwinder singh
Punjab
07-12-2019 09:55 AM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਇਹ ਫੰਗਸ ਦਾ ਹਮਲਾ ਹੋਇਆ ਹੈ, ਇਸਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਤੁਸੀ carbendazim @ 4 gm ਜਾ mancozeb @ 4 gm ਪ੍ਰਤੀ ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Mohit Chobdar
Rajasthan
07-12-2019 09:53 AM
श्रीमान जी, अब आप औषधीय फसलें जैसे के कलिहारी, लस्सान घास , अमला, पुदीना, मुलेठी, शंखपुष्पी, शतावरी, सदाबहार, सफ़ेद मूसली या स्वीट फ्लैग की खेती कर सकते हैं, धन्यवाद

Posted by Ajay
Haryana
07-12-2019 09:45 AM
Shrimaan ji, kripya variety ki company ka nam bataye tajo apko iske bare mein uccit jankari di ja sake, dhnaywad

Posted by Raj Nandini
Madhya Pradesh
07-12-2019 09:42 AM
Sir, on the basis of photograph sent by you it seems to be seedling of neem plant , thank you

Posted by Ramesh
Rajasthan
07-12-2019 09:39 AM
श्रीमान जी, बेर में कीट की रोकथाम के लिए आप Fenvalerate @ 2gm प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें, धन्यवाद
Posted by Narendra Meena
Rajasthan
07-12-2019 09:37 AM
Shrimaan ji, isme fungus ka hamla hua hai, iski roktham ke liye ap carbendazim @ 400 ml ya mancozeb @ 400 ml prati acre ke hisaab se spray karein, dhanywad

Posted by jugraj Singh
Punjab
07-12-2019 09:35 AM
Shrimaan ji, is upar tuc mancozeb @ 4gm prati liter pani de hisaab nal spray karo, dhanwad

Posted by Vikram Singh
Haryana
07-12-2019 09:20 AM
Shrimaan ji, is vich zinc di kami hai, isde lai tuc zinc sulphate @ 3g prati liter pani ke hisaab se spray karein, dhanywad

Posted by Kuldeep Singh
Punjab
07-12-2019 09:19 AM
आप उसे मिठा सोडा 25 ग्राम रोजाना दें और काली मिर्च 20ग्राम दें और 5 दिन तक दें इससे फर्क पड़ जाएगा
Posted by Narender
Haryana
07-12-2019 09:09 AM
shrimaan ji, kripya ap bataye ke apne gehun mein kya dikat a rahi hai taki apko uske hisaab se iski jankari di ja sake, dhany wad

Posted by khushbu
Chattisgarh
07-12-2019 09:07 AM
Shrimaan ji, podhe ki sahi photo bejein ese dekh kar iska anumaan nahi lagaya ja raha hai, dhanywad
Posted by satinderbir singh
Punjab
07-12-2019 09:05 AM
Shriman ji, is lai tuc vermicompost @ 4-5 kg prati podhe de hisaab nal pao, dhanwad

Posted by Rudra sharma
Chattisgarh
07-12-2019 08:59 AM
कृपया आप ओडियो दोबारा अपलोड करें ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके क्योंकि आपके द्धारा भेंजी गई ओडियो में आवाज समझ नहीं आ रही धन्यवाद

Posted by Amarji Sirvi
Rajasthan
07-12-2019 08:51 AM
Shrimaan ji, kripya ap nimbu ki photo bejein taki apko iske bare mein sahi jankari di ja sake,dhanywad

Posted by prashant
Uttar Pradesh
07-12-2019 08:50 AM
श्रीमान जी इसे मिट्टी की कई किस्मों जैसे चिकनी से रेतली, जलोढ़ मिट्टी और अच्छे जल निकास वाली दोमट मिट्टी में उगाया जाता है यदि इसे रेतली दोमट मिट्टी जो जैविक तत्वों से भरपूर हो, में उगाया जाये तो अच्छे परिणाम देती है इसे हल्की मिट्टी में भी उगाया जा सकता है घटिया जल निकास वाली और अधिक जल जमाव वाली मिट्टी में इ.... (Read More)
श्रीमान जी इसे मिट्टी की कई किस्मों जैसे चिकनी से रेतली, जलोढ़ मिट्टी और अच्छे जल निकास वाली दोमट मिट्टी में उगाया जाता है यदि इसे रेतली दोमट मिट्टी जो जैविक तत्वों से भरपूर हो, में उगाया जाये तो अच्छे परिणाम देती है इसे हल्की मिट्टी में भी उगाया जा सकता है घटिया जल निकास वाली और अधिक जल जमाव वाली मिट्टी में इसकी खेती करने से परहेज़ करें इस फसल की वृद्धि के लिए पी एच 5.0 - 8.5 होनी चाहिए प्रसिद्ध किस्में: OD-19 (Sugandhi),Pragathi,Nima,Cauvery लैमन घास की रोपाई के लिए उपजाऊ और सिंचित ज़मीन की आवश्यकता होती है बार बार जोताई और हैरो की मदद से जोताई करें खेत की तैयारी के दौरान दीमक के हमले से फसल को बचाने के लिए लिनडेन पाउडर 10 किलोग्राम प्रति एकड़ में मिलायें लैमन घास की रोपाई बैडों पर की जानी चाहिए मार्च-अप्रैल के महीने में नर्सरी बैड तैयार करें फासला नए पौधों की वृद्धि के अनुसार 60.X 60 सैं.मी. रखें और ढाल बनाने के लिए फासला 90X60 सैं.मी. रखें 2-3 सैं.मी. की गहराई में बोयें खेत में रोपाई के लिए दो महीने पुराने पौधों का प्रयोग किए जाते हैं बीज 1.6-2 किलोग्राम प्रति एकड़ में प्रयोग करें फसल को कांगियारी से बचाने के लिए बिजाई से पहले बीजों को सीरेसन 0.2 % या एमीसान 1 ग्राम से प्रति किलो बीजों का उपचार करें रासायनिक उपचार के बाद बिजाई के लिए बीजों का प्रयोग करें लैमन घास के बीजों को आवश्यक लंबाई और 1 -1.5 मीटर की चौड़ाई वाले तैयार बैडों पर बोयें बीजने के बाद बैडों को कट घास सामग्री से ढक दें फिर इसे मिट्टी की पतली परत के साथ ढक दें नए पौधे रोपाई के लिए 2 महीने में तैयार हो जाते हैं, जब पौधा 12-15 सैं.मी. ऊंचाई पर पहुंच जाता है रोपाई से पहले खेत अच्छी तरह से तैयार होना चाहिए रोपाई 15x19 सैं.मी. के फासले पर की जानी चाहिए नए पौधों को मिट्टी में ज्यादा गहरा ना बोयें इससे बारिश के दिनों में जड़ गलन का खतरा बढ़ जाता है उत्तर पूर्वी क्षेत्रों में नाइट्रोजन 24 किलो (यूरिया 52 किलो), फासफोरस 20 किलो (एस एस पी 125 किलो), पोटाश्यिम 14 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 23 किलो) प्रति एकड़ में डालें अन्य हालातों में नाइट्रोजन 40 किलो प्रति एकड़ में डालें यह एरोमैटिक प्लांट रिसर्च स्टेशन, ओडाकली (केरला) द्वारा जारी की गई है खेत को नदीनों से मुक्त करने के लिए हाथों से गोडाई करें मिट्टी के तापमान को कम करने और नदीनों की रोकथाम के लिए मलचिंग भी एक अच्छा तरीका है जैविक मलच 1200 किलोग्राम प्रति एकड़ में डालें एक वर्ष में 2-3 निराई आवश्य करें जैविक रोकथाम के लिए अल्ट्रा वाइल्ट रेडीएशन या फ्लेम विडिंग का भी प्रयोग किया जा सकता है गर्मियों के मौसम में फरवरी से जून के महीने तक 5-7 अंतराल पर सिंचाइयां करें जब वर्षा नियमित रूप से नहीं होती तो पहले महीने में 3 दिनों के अंतराल पर सिंचाई दें और फिर 7-10 दिनों के अंतराल पर दें गर्मियों के मौसम के दौरान 4-6 सिंचाइयां देनी आवश्यक होती हैं रोपाई के 4-6 महीने बाद पौधा उपज देना शुरू कर देता है कटाई 60-70 दिनों के अंतराल पर करें कटाई के लिए दराती का प्रयोग करें कटाई मई के शुरू में और जनवरी के आखिर में करें कटाई के लिए दराती की सहायता से ज़मीन की सतह से 10-15 सैं.मी. घास की कटाई करें कटाई के बाद तेल निकालने की प्रक्रिया की जाती है तेल निकालने से पहले लैमन घास को सोडियम क्लोराइड के घोल में 24 घंटे के लिए रखें इससे फसल में खट्टेपन की मात्रा बढ़ती है उसके बाद घास को छांव में रखे और बैग में पैक करके स्थानीय बाजारों में भेज दें पकी हुई लैमन घास से कई तरह के उत्पाद जैसे लैमन घास तेल और लैमन घास लोशन बनाए जाते हैं धन्यवाद

Posted by Amarji Sirvi
Rajasthan
07-12-2019 08:48 AM
Shrimaan ji, nimbu ke upar daag padne ke boht se karan hश्रीमान जी नींबू पर धब्बे होने के बहुत से कारण हो सकते हाँ, जैसे कि कीट का हमला हो सकता है या फंगस का हमला भी हो सकता हैं, कृपया आप नींबू कि फोटो भेजें ताकि फोटो देख कर आपको सही जानकारी दी जा सके धन्यवाद o sakte hai, jaise ke kisi keet ka hamla ho sakta hai ya isme fungus ka hamla bhi ho sakta hai, kripya ap nimbu ki photo bejeun tajo apko dekh kar iski puri jankari di ja sake, dhanywad

Posted by ओमपाल सिंह चंदेल
Uttar Pradesh
07-12-2019 08:42 AM
एलोवेरा का प्रयोग आयुर्वेदिक दवाईयों में बड़े स्तर पर होता है आजकल कई नेशनल और इंटर नेशनल कंपनियां इसका प्रयोग चिकित्सा के साथ साथ सुंदरता उत्पाद जैसे क्रीम, शैंपू, दंत पेस्ट और कई सारे उत्पाद में इसका प्रयोग होता है मिट्टी - एलोवेरा के पौधों को किसी भी प्रकार की उपजाऊ/अनउपजाऊ मिट्टी में उगाया जा सकता है ब.... (Read More)
एलोवेरा का प्रयोग आयुर्वेदिक दवाईयों में बड़े स्तर पर होता है आजकल कई नेशनल और इंटर नेशनल कंपनियां इसका प्रयोग चिकित्सा के साथ साथ सुंदरता उत्पाद जैसे क्रीम, शैंपू, दंत पेस्ट और कई सारे उत्पाद में इसका प्रयोग होता है मिट्टी - एलोवेरा के पौधों को किसी भी प्रकार की उपजाऊ/अनउपजाऊ मिट्टी में उगाया जा सकता है बस आपको इस बात का ध्यान रखना है कि पौधा ज्यादा पानी वाली और ज्यादा ठंड पड़ने वाली जगह पर नहीं लगाना है कम पानी और रेतली भूमि में लगाने के लिए यह सबसे अच्छी फसल है खेत की तैयारी - खेत की तैयारी के लिए सबसे पहले खेत की 2 बार अच्छी तरह जोताई करके उसमें प्रति हेक्टेयर 10 से 20 टन में पुरानी रूड़ी की खाद डालें साथ ही 120 किलोग्राम यूरिया + 150 किलोग्राम फास्फोरस + 30 किलोग्राम पोटाश इन्हें खेत में समान रूप से बिखेर दें फिर एक बार हल्की जोताई और कराहे से भूमि को समतल कर लें फिर खेत में 50x50 सैं.मी. की दूरी पर मेंड़ें बना लें पौधे की रोपाई और देख रेख - पौधे की रोपाई किसी भी समय की जा सकती है पर अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए जून- जुलाई या फरवरी- मार्च में कर सकते हैं एलोवेरा की रोपाई मेंड़ों पर होती है यह पौधे किसी पुरानी एलोवेरा फार्म या नर्सरी से प्राप्त किए जा सकते हैं यही पौधे बाद में पनीरी के रूप में प्रयोग किए जाते हैं इस विधि को रूट सक्कर कहा जाता है अच्छी उपज के लिए किस्में - सिम सितल, L 1 , 2 , 5 और 49 लगाएं जिसमें जैल की मात्रा ज्यादा पायी जाती है इसके अलावा नेशनल बोटनीकल और प्लांट जैनेटिक रिसोर्स, आई. सी. ए. आर द्वारा रिलीज़ की गई किस्में IC111271, IC111269, IC111280 आदि हैं मेंड़ों पर 50 x 50 सैं.मी. की दूरी पर पौधों को लगाएं पौधे से पौधे की दूरी 50 सैं.मी. रखने पर प्रति एकड़ में 15000 पौधों की रोपाई की जरूरत पड़ेगी सिंचाई - सिंचाई साल भर में इसे सिर्फ 4 से 5 बार सिंचाई की जरूरत होती है सिंचाई के लिए ड्रिप प्रणाली अच्छी रहती है इससे इसकी उपज में वृद्धि होती है गर्मी क दिनों में 25 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करनी चाहिए कीट और बीमारियां - वैसे इस फसल पर कोई विशेष कीट और रोगों का प्रभाव नहीं होता है पर कहीं कहीं तने के सड़ने और पत्तियों पर दाग वाली बीमारियों का असर देखा गया है जो एक फंगस रोग होता है उसके उपचार के लिए मैनकोजेब 3 ग्राम प्रति लीटर के हिसाब से छिड़काव करना चाहिए कटाई - यह फसल एक साल बाद काटने के लायक हो जाती है कटाई के दौरान पौधों की सबसे पहले निचली ठोस 3 या 4 पत्तों की कटाई करें उसके बाद लगभग 1 महीने के बाद उससे ऊपर वाली पत्तियों की कटाई करनी चाहिए कभी भी ऊपर वाली नई नाज़ुक पत्तियों की कटाई ना करें कटी हुई पत्तियों में फिर नई पत्तियां बननी शुरू हो जाती हैं प्रति हेक्टेयर में 50 से 60 टन ताजी पत्तियां प्रति वर्ष मिल जाती हैं दूसरे वर्ष में 15 से 20 फीसदी वृद्धि होती है बाजार में इसकी पत्तियों की अनुमानित कीमत 3 से 6 रूपये किलो होती है एक तंदरूस्त पौधे से एक साल में लगभग 3-4 किलो पत्तियां ली जा सकती हैं इस तरह एक वर्ष में एक एकड़ में से 1.5 से 3 लाख की फसल हो जाती है एलोवेरा का प्रयोग तंदरूस्त पत्तियों की कटाई के बाद साफ पानी से धोकर पत्तियों के निचली ओर ब्लेड या चाकू से कट लगाकर थोड़े समय के लिए छोड़ देते हैं जिसमें पीले रंग का गाढ़ा चिपचिपा रस (जेल) निकलता है उसे एक टैंक में इकट्ठा करके इस रस को सुखा लिया जाता है इस सूखे हुए रस को अलग अलग ढंग से तैयार करने के बाद अलग अलग नामों से जाना जाता है जैसे कि सकोतरा केप जब फसल पूरी तरह तैयार हो जाये और उसकी कटाई कर ली जाये तो उसे आप सब्जी मंडी में सीधे तौर पर बेच सकते हैं यदि आप खुद मंडी में बेचते हैं तो आपको अंदाजन 5 से 10 रूपये प्रति किलो तक मुल्य मिल सकता है पर यदि आप किसी कंपनी से कॉन्ट्रैक्ट करते हो तो इसका रेट उस कंपनी की जरूरत और शर्तों के मुताबिक उस कंपनी के द्वारा तय होता है, कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के के लिए आप Aushadhiya kheti vikas sansthan 6268536795 से सम्पर्क कर सकते है धन्यवाद
Posted by Ajay Kumar Yadav
Jharkhand
07-12-2019 08:41 AM
श्रीमान जी, यह किस्म पर निर्भर करता है के यह कितने दिन में हो जाए गी, कृपया आप बताये के अपने कोनसी किस्म की बिजाई की है, ताकि आपको इसके बारे में उच्चित जानकारी दी जा सके, धन्यवाद

Posted by Rajaram Varma
Uttar Pradesh
07-12-2019 08:37 AM
Shrimaan ji, kripya basmati dhaan ki kism bataye taki apko uske hisaab se jankari dija sake ,dhanywad
Posted by Angrej Singh
Punjab
07-12-2019 08:36 AM
ਡੇਅਰੀ ਫਾਰਮਿੰਗ ਲਈ ਲੋਨ ਅਲੱਗ ਅਲੱਗ ਕੰਮਾਂ ਲਈ ਮਿਲਦਾ ਹੈ ਜਿਵੇਂ ਸ਼ੈੱਡ ਲਈ ,ਪਸ਼ੂਆਂ ਲਈ, ਡੇਅਰੀ ਮਸ਼ੀਨਰੀ ਲਈ ਲੋਨ ਲੈਣ ਦੇ ਲਈ ਤੁਹਾਡੇ ਕੋਲ ਡੇਅਰੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਦਾ ਸਰਟੀਫਿਕੇਟ ਹੋਣਾ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਲੋਨ ਲੈਣ ਸਬੰਧੀ ਅਰਜੀ ਨੇੜੇ ਦੇ ਡਿਪਟੀ ਡਾਇਰੈਕਟਰ ਡੇਅਰੀ ਨੂੰ ਮਿਲ ਕੇ ਦੇਵੋ ਇਸ ਦੇ ਲੋਨ ਤੇ 25% ਸਬਸਿਡੀ ਜਨਰਲ ਕੈਟਾਗਰੀ ਲਈ ਹੈ ਤੇ 33% ਅਨੂਸੂਚਿਤ ਜਾਤੀਆ ਲਈ ਹੈ ਬਾਕੀ ਵਿਆਜ ਜੋ ਅਲੱਗ ਅਲੱਗ .... (Read More)
ਡੇਅਰੀ ਫਾਰਮਿੰਗ ਲਈ ਲੋਨ ਅਲੱਗ ਅਲੱਗ ਕੰਮਾਂ ਲਈ ਮਿਲਦਾ ਹੈ ਜਿਵੇਂ ਸ਼ੈੱਡ ਲਈ ,ਪਸ਼ੂਆਂ ਲਈ, ਡੇਅਰੀ ਮਸ਼ੀਨਰੀ ਲਈ ਲੋਨ ਲੈਣ ਦੇ ਲਈ ਤੁਹਾਡੇ ਕੋਲ ਡੇਅਰੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਦਾ ਸਰਟੀਫਿਕੇਟ ਹੋਣਾ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਲੋਨ ਲੈਣ ਸਬੰਧੀ ਅਰਜੀ ਨੇੜੇ ਦੇ ਡਿਪਟੀ ਡਾਇਰੈਕਟਰ ਡੇਅਰੀ ਨੂੰ ਮਿਲ ਕੇ ਦੇਵੋ ਇਸ ਦੇ ਲੋਨ ਤੇ 25% ਸਬਸਿਡੀ ਜਨਰਲ ਕੈਟਾਗਰੀ ਲਈ ਹੈ ਤੇ 33% ਅਨੂਸੂਚਿਤ ਜਾਤੀਆ ਲਈ ਹੈ ਬਾਕੀ ਵਿਆਜ ਜੋ ਅਲੱਗ ਅਲੱਗ ਬੈੱਕ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਉਸ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਹੀ ਲੱਗਦਾ ਹੈ ਸਭ ਤੋਂ ਵਧੀਆ ਤਰੀਕਾ ਇਹੀ ਹੈ ਕਿ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਨੇੜੈ ਦੇ ਡੇਅਰੀ ਡਿਵੈਲਪੈਟ ਆਫਿਸਰ ਨੂੰ ਮਿਲੋ ਉਹ ਤੁਹਾਨੂੰ ਫਾਈਲ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਦੇਣਗੇ ਹਰ ਜ਼ਿਲੇ ਵਿੱਚ ਡਿਪਟੀ ਡਾਇਰੈਕਟਰ ਡੇਅਰੀ (PDDB) ਦਾ ਦਫਤਰ ਬਣਿਆ ਹੋਇਆ ਹੈ. ਇਸ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਦਾ ਪਤਾ ਕਰਨ ਲਈ ਤੁਸੀ ਡੇਅਰੀ ਵਿਕਾਸ ਅਫਸਰ, ਡੇਅਰੀ ਸਿਖਲਾਈ ਅਤੇ ਵਿਸਥਾਰ ਕੇਂਦਰ, ਮੋਗਾ - ਕੋਟਕਪੂਰਾ ਰੋਡ, ਪਿੰਡ ਗਿੱਲ, ਜਿਲਾ ਮੋਗਾ 01636-242480 ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰਕੇ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਦਾ ਪਤਾ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ..

Posted by Rajaram Varma
Uttar Pradesh
07-12-2019 08:34 AM
shrimaan ji, dhaan ka rate is samay 1815 se 1835 rupay prari quintal ke hisaab se chal raha hai,dhanywad
Posted by Anii kumar
Haryana
07-12-2019 08:33 AM
श्रीमान जी, कृपया आप बताये के अपने मशरूम की बिजाई कर दी है या अभी करनी है, ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके, धन्यवाद
Posted by Harpreet Singh
Punjab
07-12-2019 08:28 AM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਕਿਸੀ ਦੋ ਦਵਾਈਆਂ ਨੂੰ ਮਿਲਾ ਕੇ ਸਪਰੇ ਕਾਰਨ ਦੀ ਸਿਫਾਰਿਸ਼ ਨਹੀਂ ਕਰਦੀ ਹੈ, ਟੌਪਿਕ @160 gm ਗੁਲੀ ਡੰਡੇ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਵਰਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਅਤੇ 2,4-D@ 250 ml ਚੋੜੇ ਪੱਤੇ ਵਾਲੇ ਨਦੀਨ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਵਰਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਤੁਸੀ ਇਹਨਾਂ ਦੀ ਸਪਰੇ ਨਦੀਨ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਹੀ ਕਰੋ, ਧੰਨਵਾਦ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by govind.singh
Madhya Pradesh
07-12-2019 08:23 AM
श्रीमान जी, गेहूं में पहला पानी बिजाई से 25 से 30 दिन में दिया जाता है, धन्यवाद

Posted by sem
Punjab
07-12-2019 08:23 AM
tuci ehna vicho koi v kam kr skde ho ehna dona vich he fyada hunda hai baki tuci bakri farm ja pig farm vicho ohhi kam suru kro jiss kam nu karnn vich tuhanu interest hai tuci uss kam vare jankari lyo tuci usdi training kro fir uss kam nu suru kro ate iss nu suru krnn ton pehla tuci kisi goat farm ja pig farm te jaa ke iss kam nu smjho jiss nal tuhanu iss kam vare hor v jankari millegi fir tuci iss kam nu suru kr skde ho..

Posted by prince
Himachal Pradesh
07-12-2019 08:12 AM
प्रिंस जी इसके लिए आप अपने जिले के FFDA dept से संपर्क कर सकते है और उसके ट्रेनिंग भी ले सकते है

Posted by gulab singh
Punjab
07-12-2019 08:12 AM
Gulab ji isda course krnn lai +2 medical ja non medical vich honi jruri hai fir tuci isda diploma v kr skde ho ate training laa ke kam suru kr skde ho.
Posted by lovepreet singh
Punjab
07-12-2019 08:04 AM
ਲਵਪ੍ਰੀਤ ਜੀ ਤੁਸੀ ਉਸਦੀ ਖੁਰਾਕ ਦਾ ਪੂਰਾ ਧਿਆਨ ਰੱਖੋ ਜੀ ਖੁਰਾਕ ਦੇ ਨਾਲ ਨਾਲ ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ Anabolite liquid 100-100ml ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ, Milkout ਪਾਊਡਰ 2-2 ਚਮਚ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ ਅਤੇ Simlage bolus 1-1 ਗੋਲੀ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ..
Posted by रामावतार मीणा
Rajasthan
07-12-2019 08:04 AM
श्री मान चने में M-45@500 gm प्रती एकड़ सप्रे कर सकते हो

Posted by krishan kumar
Uttar Pradesh
07-12-2019 08:02 AM
श्रीमान जी, इसे मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए प्रसिद्ध किस्में :-Pusa Dwarf: इसके फल मध्यम आकार के और अंडाकार होते हैं यह सूखे को सहनेयोग्य.... (Read More)
श्रीमान जी, इसे मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए प्रसिद्ध किस्में :-Pusa Dwarf: इसके फल मध्यम आकार के और अंडाकार होते हैं यह सूखे को सहनेयोग्य किस्म है यह उच्च घनत्व में रोपाई के लिए लाभदायक है Pusa Giant: इस किस्म के पौधे तेज हवा को सहनेयोग्य है यह बड़े फलों का उत्पादन करती है यह पैकिंग के लिए उपयुक्त किस्म है CO 3: इसके फल बड़े आकार के और अंडाकार होते हैं इसे ज्यादा देर तक रखने की गुणवत्ता अच्छी होती है CO 1: यह छोटे कद की किस्म है जिसके फल मध्यम आकार के होते हैं फल गोलाकार, नर्म हरा-पीला छिल्का और संतरी पीले रंग का गुद्दा होता है फल रसदार होता है और इसे ज्यादा देर तक रखने की गुणवत्ता अच्छी होती है Coorg Honey Dew: इसे सीधे तौर पर खाने के लिए और प्रक्रिया के लिए प्रयोग किया जाता है इसके फल आयताकार और गुद्दा मोटा संतरी रंग का होता है Pusa Majesty: इसके फल मध्यम आकार के, गोल होते हैं इन्हें रखने की गुणवत्ता बहुत अच्छी होती है यह किस्म 146 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह किस्म जड़ गलन निमाटोड के प्रतिरोधक किस्म है Pusa Delicious: यह मध्यम लंबी किस्म है इसके फल मध्यम आकार के होते हैं, गुद्दा गहरे संतरी रंग का होता है इस किस्म को कतारों में लगाने के लिए प्रयोग किया जाता है पपीते की खेती के लिए नदीन रहित भूमि का प्रयोग करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें आखिरी जोताई के समय अच्छी तरह से गली हुई रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर मिट्टी में अच्छी तरह मिलाकर डालें सिफारिश किए गए फासलों पर 1 मीटर x 1 मीटर x 1 मीटर आकार के गड्ढे खोदें गड्ढों को मिट्टी और रूड़ी की खाद या गाय के गले हुए गोबर से भरें प्रयोग की गई किस्म के आधार पर प्रत्येक गड्ढे पर 2-4 नए पौधों की रोपाई करें रोपाई के बाद हल्की सिंचाई करें हवा से बचाव के लिए खूंटा लगाएं बीजों को 150 गेज़ की मोटाई वाले, 25 x 10 सैं.मी. के पॉलीथीन बैग में बोयें पानी के उचित निकास के लिए पॉलीथीन बैग के निचले हिस्से में 1 मि.मी. अर्द्धव्यास का छेद करें उसके बाद पॉलीथीन बैग में समान अनुपात में रूड़ी की खाद, मिट्टी और रेत डालें बिजाई से पहले बीजों का उपचार करें रोपाई के लिए 6-7 सप्ताह के पौधों का प्रयोग करें यूरिया 150 ग्राम, फासफोरस 80 ग्राम, पोटाश 100 ग्राम प्रति वृक्ष में प्रति वर्ष डालें खादों को 4 भागों में बांटकर रोपाई के बाद पहले, तीसरे, पांचवे और सातवें महीने में डालें बसंत के मौसम में फरवरी मार्च के महीने में बिजाई करें जबकि मॉनसून के मौसम में बिजाई के लिए जून जुलाई का महीना उपयुक्त होता है और पतझड़ के मौसम में बिजाई अक्तूबर से नवंबर महीने में की जाती है आमतौर पर 1.8 मीटर x 1.8 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है उच्च घनता की रोपाई के लिए 1.5 मीटर x 1.5 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है नर्सरी में बीज को 1 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बीजो की खेत में सीधे बिजाई या मुख्य खेत में नए पौधों की रोपाई की जाती है 100-120 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें मिट्टी की किस्म, जलवायु के हालातों आदि के आधार पर सिंचाई करें सर्दियों में 15 दिनों के अंतराल पर और गर्मियों में 7 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें तने को पानी के संपर्क में ना आने दें और खेत में पानी भी खड़ा ना होने दें पौधे की प्रौढ़ अवस्था के दौरान नदीनों की रोकथाम जरूरी होती है नदीनों की तीव्रता के आधार पर, नियमित और हल्की गोडाई करें फ्लूक्लोरालिन या बूटाक्लोर 800 मि.ली. प्रति एकड़ में डालें नदीनों की रोकथाम के लिए मलचिंग भी एक प्रभावी तरीका है पौधों की रोपाई के कुछ दिनों बाद प्लास्टिक शीट या धान की पराली या गन्ने के बचे कुचे को मलच के रूप में डालें मुख्यत: फल के पूरा आकार लेने और हरे से हल्का पीला रंग होने पर तुड़ाई की जाती है पहली तुड़ाई रोपाई के 14-15 महीनों के बाद की जा सकती है 4-5 तुड़ाइयां प्रति मौसम की जा सकती हैं धन्यवाद
Posted by VK Patel
Madhya Pradesh
07-12-2019 08:01 AM
श्रीमान जी, गेहूं की बिजाई के लिए JW 1201 (21.2क्विंटल/एकड़), GW 322 (22-24क्विंटल/एकड़), HI 8498 (22-24क्विंटल/एकड़), HI 1544 (22-24क्विंटल/एकड़), JW 1203 (16.8-18क्विंटल/एकड़) की बिजाई कर सकते हो धन्यवाद
Posted by akash singh
Punjab
07-12-2019 07:59 AM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ clodinafop 15% ਛੋਟੇ ਗੁੱਲੀ ਡੰਡੇ ਨੂੰ ਬਹੁਤ ਵਧੀਆ ਮਾਰਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਦੀ ਮਾਤਰਾ @160 ਗਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ
Posted by Dharamraj Verma
Uttar Pradesh
07-12-2019 07:54 AM
Shrimaan ji, kripya ap apna sawal visthar se puchein taki apko iske bare mein puri jankari di ja sake,dhanywad
Posted by akash singh
Punjab
07-12-2019 07:52 AM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ 2,4-D Dimethyl amine 58% @400 ml ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ 2-4 ਪੱਤੀ ਦੇ ਬਾਥੂ ਨੂੰ ਖਤਮ ਕਰ ਦੇਵੇਗਾ
Posted by akash singh
Punjab
07-12-2019 07:49 AM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ ਇਹਨਾਂ ਵਿਚ 2 ਤੋਂ 3 ਦਿਨ ਦਾ ਫਾਸਲਾ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ, ਧੰਨਵਾਦ

Posted by nihal
Haryana
07-12-2019 07:45 AM
Shrimaan ji, kripya ap bataye ke ap konsi sarkari yojna ki baat kar rahe hai, taki apko iske bare mein uccit jankari di ja sake, dhanywad
Posted by बलराम जायसवाल
Madhya Pradesh
07-12-2019 07:35 AM
श्रीमान जी, गेहूं की फसल में केरोसिन आयल को डालने की यूनिवर्सिटी सिफारिश नहीं करती है, धन्यवाद
Posted by RAHUL KUMAR
Bihar
07-12-2019 07:19 AM
usko aap achi khurak deni suru kren aur rojana 35-40kg hara chara den aur usko her 3 mahine ke badd pett ke kirro ke liye goli jrurr den, iske sath aap Milkout powder 2-2 chamch subah sham aur simalge bolus 1-1 goli subah sham den, isse frak padd jayega..
Posted by mahi manshahia
Punjab
07-12-2019 07:18 AM
ਬੱਚੇ ਬੁੱਕ ਕਰਵਾਉਣ ਲਈ ਤੁਸੀ Central Poultry Development Industrial Area, Phase-I, Chandigarh – Tel.No: 0172-2655391 ਤੇ ਸੰਪਰਕ ਕਰਕੇ ਬੱਚੇ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹੋਂ ਜਾਂ ਗੁਰੂ ਅੰਗਦ ਦੇਵ ਵੈਟਨਰੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਲੁਧਿਆਣਾ ਦੀ ਹੈਚਰੀ ਜਿਸ ਲਈ ਤੁਸੀ Dr Dubey 9888802905 ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ.

Posted by manpreet Singh
Punjab
07-12-2019 06:55 AM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਕਣਕ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਬਾਰਿਸ਼ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਹੀ ਕਰ ਲਉ

Posted by manpreet Singh
Punjab
07-12-2019 06:54 AM
Shrimaan ji, tuc barish hon de baad hi kanak di bijai karo, dhanwad

Posted by GAMETI ASHVINBHAI RAMJIBHAI
Gujarat
07-12-2019 06:15 AM
GAMETI ASHVINBHAI RAMJIBHAI ji makhan grass lene ke lia aap Dattat Ray 9766320879 se samparak kar sakte hai, Thankyou.

Posted by ਸੁਖ
Punjab
07-12-2019 06:10 AM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਪਾਣੀ ਲਾਉਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਗੁੱਲੀ ਡੰਡੇ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਲੀਡਰ, ਟੌਪਿਕ, ਦੀ ਵਰਤੋ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਚੌੜੇ ਪੱਤਿਆਂ ਵਾਲੇ ਨਦੀਨ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ 2,4D 250 ml ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਟੌਪਿਕ 15 ਡਬਲਿਊ ਪੀ (ਕਲੋਡੀਨਾਫਾਪ) 160 ਗ੍ਰਾਮ ਬਿਜਾਈ ਦੇ 30 ਤੋਂ 35 ਦਿਨਾਂ ਅੰਦਰ 150 ਪਾਣੀ/ਏਕੜ •• ਐਕਸੀਅਲ 5 ਈ ਸੀ (ਪਿਨੌਕਸਾਡਿਨ) 400 ਮਿਲੀਲਿਟਰ 4) ਲੀਡਰ/ਮਾਰਕਸਲਫੋ 75 ਡਬਲਿਊ ਜੀ (ਸਲਫੋਸਲਫੂਰਾਨ) 13 ਗ੍ਰਾਮ •ਟੋਟ.... (Read More)
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਪਾਣੀ ਲਾਉਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਗੁੱਲੀ ਡੰਡੇ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਲੀਡਰ, ਟੌਪਿਕ, ਦੀ ਵਰਤੋ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਚੌੜੇ ਪੱਤਿਆਂ ਵਾਲੇ ਨਦੀਨ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ 2,4D 250 ml ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਟੌਪਿਕ 15 ਡਬਲਿਊ ਪੀ (ਕਲੋਡੀਨਾਫਾਪ) 160 ਗ੍ਰਾਮ ਬਿਜਾਈ ਦੇ 30 ਤੋਂ 35 ਦਿਨਾਂ ਅੰਦਰ 150 ਪਾਣੀ/ਏਕੜ •• ਐਕਸੀਅਲ 5 ਈ ਸੀ (ਪਿਨੌਕਸਾਡਿਨ) 400 ਮਿਲੀਲਿਟਰ 4) ਲੀਡਰ/ਮਾਰਕਸਲਫੋ 75 ਡਬਲਿਊ ਜੀ (ਸਲਫੋਸਲਫੂਰਾਨ) 13 ਗ੍ਰਾਮ •ਟੋਟਲ/ਮਾਰਕਪਾਵਰ 75 ਡਬਲਿਊ ਡੀ ਜੀ (ਸਲਫੋਸਲਫੂਰਾਨ+ਮੈਟਸਫੂਰਾਨ) 16 ਗ੍ਰਾਮ •ਐਟਲਾਂਟਿਸ 3.6 ਡਬਲਿਊ ਡੀ ਜੀ (ਮਿਜ਼ੋਸਲਫੂਰਾਨ+ਆਇਡੋਸਲਫੂਰਾਨ) 160 ਗ੍ਰਾਮ 6 ਸ਼ਗੁਨ 21-11 (ਮੈਟਰੀਬਿਊਜ਼ਿਨ+ਕਲੋਡੀਨਾਫਾਪ) 200 ਗ੍ਰਾਮ •ਏ ਸੀ ਐੱਮ-9 (ਕਲੋਡੀਨਾਫਾਪ+ਮੈਟਰੀਬਿਊਜ਼ਿਨ) 240 ਗ੍ਰਾਮ *ਨੋਟ* 1.ਸ਼ਗਨ 21-11 ਨੂੰ pbw 550 ਤੇ ਉਨਤ pbw550 ਵਿਚ ਨਾ ਛਿੜਕੋ 2. ਸਗਨ 21-11 ਦਾ ਹਲਕੀਆਂ ਜਮੀਨਾ ਵਿਚ ਛਿੜਕਾ ਨਾ ਕਰੋ 3.ਵਡਾਣਕ ਕਣਕ ਵਿਚ ਸ਼ਗਨ 21-11 ਨਾ ਵਰਤੋਂ

Posted by Susheel kushwaha
Uttar Pradesh
07-12-2019 05:59 AM
Shri maan g M-45@500 gm per acre spray kr skte ho.....
Posted by msy
Uttar Pradesh
07-12-2019 05:50 AM
कृपया आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by ਨਵਪਰੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
07-12-2019 05:35 AM
Shri maan g kanak de change futaare de lyi tuc progibb nam de product di vrto kar skdo ho. ihh sumitomo company da aunda hai. ihh ikk growth promotor da kam krda hai. iss di varto hare chaare, jhone ate kanak de lyi kar skde ha .ihh jhadd de vich kaffi vaahda krda hai . iss di matra 5gm hundi hai. jdo kanak nu phla urea dena hunda hai us sme isnu ikk glass panni de nal ghol ke sukki ret de nal milaa ke fir urea de nal mila lao ate fir khet de vich shitta de deo . iss de nal ikk pudi aondi hai phla esnu gholna hai ate fir usde vich progibb pauna hai kyuki eh direct pani de vich ghulda nahi hai . iss trah is di varto karni hai.....
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