
Posted by gurman
Punjab
09-12-2019 05:26 AM
ਮੌਸਮ ਵਿਭਾਗ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਵੀਰਵਾਰ ਸ਼ੁਕਰਵਾਰ ਅਤੇ ਸ਼ਨੀਵਾਰ ਮੀਹ ਪੈਣ ਦੀ ਸੰਭਾਵਨਾ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by gurpreet
Punjab
09-12-2019 05:22 AM
gurpreet ji tuc baingan diyan kisman jive Punjab Bahar,Punjab No 8,Jamuni GOI (S 16,Punjab Barsati,Punjab Neelam di bijai kar sakde ho.dhanwad
Posted by arvind Kumar mourya
Chattisgarh
09-12-2019 04:52 AM
मुर्गी पालन का काम करने के लिए आप इस काम की ट्रेनिंग जरूर लें जिसमें आपको इस काम की जानकारी और इसमें कितना खर्चा आएगा और कितने पंक्षियों से शुरूआत कर सकते है इसके बारे सही जानकारी दी जाएगी ट्रेनिंग लेने के लिए आप अपने नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें आप वहां जाकर अपना ट्रेनिंग का फार्म भर आएं जब भ.... (Read More)
मुर्गी पालन का काम करने के लिए आप इस काम की ट्रेनिंग जरूर लें जिसमें आपको इस काम की जानकारी और इसमें कितना खर्चा आएगा और कितने पंक्षियों से शुरूआत कर सकते है इसके बारे सही जानकारी दी जाएगी ट्रेनिंग लेने के लिए आप अपने नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें आप वहां जाकर अपना ट्रेनिंग का फार्म भर आएं जब भी ट्रेनिंग होगी तो वो आपको फोन करके उसके बारे में बता देंगे और ट्रेनिंग में आपको लोन और सब्सिड़ी के बारे में जानकारी प्राप्त हो जाएगी, ग्रामप्रिया प्रजाति की मुर्गियां भी दोहरी उपयोगिता वाली प्रजाति की मुर्गी है इसका अर्थ यह है के यह अंडा और मांस दोनों के लिए उपयोगी है , 18 महीने में यह 240 से 250 अंडे तक दे सकती है और इसका वजन 1.5 kg से 2 kg तक होता है श्रीनिधि प्रजाति की मुर्गी – यह प्रजाति ग्रामीण प्रजाति की मुर्गी के अपेक्षा में 230-250 अंडे तक देती है , श्रीनिधि मुर्गियों का वजन 2.5kg से लेकर 5 kg तक का होता है जो की ग्रामीण प्रजाति के मुर्गियों से बहुत ज्यादा है इसीलिए यह दोहरी उपयोगिता प्रजाति में गिनी जाती है इसके मांस और अंडे दोनों से ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता है ,इन प्रजातियों की मुर्गियां तेजी से बढ़ती हैं वनराजा – वनराजा प्रजाति की मुर्गियां भी ग्रामीण प्रवेश के लिए काफी अच्छी मानी जाती है यह मुर्गी 120 – 130 अंडे 3 महीने में देती है देसी मुर्गी पालन के लिए यह 3 विकसित प्रजातियां बहुत ही लाभदायक साबित हुई है.
Posted by wajid shaikh
Maharashtra
09-12-2019 01:19 AM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by Rajkumar C
Rajasthan
09-12-2019 12:59 AM
Rajkumar ji kirpya aap apna swal vistar se pooche taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad

Posted by Sacchu Saini
Uttarakhand
09-12-2019 12:56 AM
कृपया आप ये बताएं कि उसे थनैला रोग में क्या क्या समस्या आ रही है उसके थन से खून आता है, थन से बिल्कुल दूध नहीं आता, कोई गांठ है, सोजिश है या कोई ओर समस्या है ताकि आपको उसके बारे में सही जानकारी दी जा सके

Posted by saini
Punjab
09-12-2019 12:40 AM
ਤੁਸੀ 250 ਗ੍ਰਾਮ ਜੋੰ-ਖਾਰ, 250 ਗ੍ਰਾਮ ਕਲਮੀਸ਼ੋਰਾ, 250 ਗ੍ਰਾਮ ਮਿਠਾਸੋਡਾ ਤੇ 250 ਗ੍ਰਾਮ ਫੜਕੜੀ ਲਉ ਤੇ ਖਿਲ ਕਰੋ ਫਿਰ ਸਾਰਾ ਸਾਮਾਨ ਰਗੜ ਕੇ ਪੋਡਰ ਬਣਾਉ ਤੇ ਮਿਕਸ ਕਰਕੇ 50gm ਰੋਜਾਨਾ ਖਾਲੀ ਪੇਟ ਦਿਉ ਜੀ ਇਸ ਨਾਲ ਜਲਦੀ ਠੀਕ ਹੋ ਜਾਵੇਗੀ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ Pregstay gold ਪਾਊਡਰ 25-25 ਗ੍ਰਾਮ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ ਇਹ ਤੁਸੀ 20 ਦਿਨ ਤਕ ਦਿੰਦੇ ਰਹੋ ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ .
Posted by Narendra Singh
Uttar Pradesh
08-12-2019 11:24 PM
Narendra Singh ji Boar goat lene ke lia aap Subash Kumar/Raj Kumar 9504617933, 9504097570 RS Goat Farm se samparak kar sakte hai, Thankyou.

Posted by yaadbir singh
Punjab
08-12-2019 11:13 PM
tuci uss nu dubara cross krwao ji, blood sutan ton badd dubara cross krwa skde ho.

Posted by yaadbir singh
Punjab
08-12-2019 10:48 PM
yaadbir ji kirpa karke daso ke tuc matr nu kehdi kehdi khaad payi hai ta jo tuhanu osde hisab nal jankari diti ja sake.dhanwad

Posted by Akhilesh pathak
Madhya Pradesh
08-12-2019 10:27 PM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद

Posted by Akhilesh pathak
Madhya Pradesh
08-12-2019 10:24 PM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by rahul suryavanshi
Madhya Pradesh
08-12-2019 10:02 PM
उसे हीट में आने पर उसकी बच्चेदानी में Lixin-iu तीन दिन भरवायें और उसे Agrimin पाउडर 100 ग्राम रोजाना दें और Concimax bolus रोजाना एक गोली दें और 14 दिन तक देते रहें फिर अगली बार हीट में आने पर उसे टीका भरवायें इस तरह वो गाभिन हो जाएगी और जो भी अंदर इंफेक्शन होगा वो खत्म हो जाएगा, यदि आप कोई ओर जानकारी लेना चाहते है तो आप दोबारा सवाल प.... (Read More)
उसे हीट में आने पर उसकी बच्चेदानी में Lixin-iu तीन दिन भरवायें और उसे Agrimin पाउडर 100 ग्राम रोजाना दें और Concimax bolus रोजाना एक गोली दें और 14 दिन तक देते रहें फिर अगली बार हीट में आने पर उसे टीका भरवायें इस तरह वो गाभिन हो जाएगी और जो भी अंदर इंफेक्शन होगा वो खत्म हो जाएगा, यदि आप कोई ओर जानकारी लेना चाहते है तो आप दोबारा सवाल पूछ सकते हैं..
Posted by ਹਰਪਾਲ ਸਿੰਘ
Punjab
08-12-2019 09:52 PM
tuci ohna nu pett de kiria lai Flukarid-Ds bolus deo ate Anabolite liquid 100ml rojana, Milkout powder 2-2 chamch swere sham deo ate kanak da dalia riin ke guur mix krke deo, iss nal frak paa jawega.
Posted by Lalchand Rangotha
Madhya Pradesh
08-12-2019 09:47 PM
Lalchand Rangotha ji aap aap KCC yojana ka labh utha sakte hai, adhik jankari ke lia aap apne najdiki SBI Bank se samparak kar sakte hai, Thankyou.
Posted by Lalchand Rangotha
Madhya Pradesh
08-12-2019 09:41 PM
Lalchand Rangotha ji MP me aap Malwa, Sirohi, Beetal, Barbari, Boar Goat Rakh sakte hai.Thankyou.

Posted by दिनेश शर्मा
Madhya Pradesh
08-12-2019 09:32 PM
दिनेश शर्मा जी कृपया सवाल विस्तार से पूछे कि आप कौन सी फसल के बारे में जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद

Posted by vikas
Jammu & Kashmir
08-12-2019 09:30 PM
vikas ji kripya aap mushroom ugane ki poori vidhi ke bare men btaye taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by Surya Pratap Singh
Uttar Pradesh
08-12-2019 09:25 PM
Surya Pratap ji aap iske uper NPK 191919 ek kilo ko 150 litre pani men mila kar spray karen.dhanywad
Posted by Vinay Verma
Uttar Pradesh
08-12-2019 09:24 PM
उसे हीट में आने पर उसकी बच्चेदानी में Lixin-iu तीन दिन भरवायें और उसे Agrimin पाउडर 100 ग्राम रोजाना दें और Concimax bolus रोजाना एक गोली दें और 14 दिन तक देते रहें फिर अगली बार हीट में आने पर उसे टीका भरवायें इस तरह वो गाभिन हो जाएगी और जो भी अंदर इंफेक्शन होगा वो खत्म हो जाएगा, यदि आप कोई ओर जानकारी लेना चाहते है तो आप दोबारा सवाल प.... (Read More)
उसे हीट में आने पर उसकी बच्चेदानी में Lixin-iu तीन दिन भरवायें और उसे Agrimin पाउडर 100 ग्राम रोजाना दें और Concimax bolus रोजाना एक गोली दें और 14 दिन तक देते रहें फिर अगली बार हीट में आने पर उसे टीका भरवायें इस तरह वो गाभिन हो जाएगी और जो भी अंदर इंफेक्शन होगा वो खत्म हो जाएगा, यदि आप कोई ओर जानकारी लेना चाहते है तो आप दोबारा सवाल पूछ सकते हैं..

Posted by Hardeep singh
Punjab
08-12-2019 08:56 PM
hardeep ji kirpa karke isdi photo bheji ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake.dhanwad
Posted by SHRAVAN PRAJAPATI
Chattisgarh
08-12-2019 08:49 PM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद

Posted by Hardeep singh
Punjab
08-12-2019 08:41 PM
hardeep ji kanak nu spray keet ja bimari da hamla hon te hi karni chaidi hai kirpa karke daso ke isde uper koi keet da hamla hai ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake.dhanwad

Posted by Hardeep singh
Punjab
08-12-2019 08:39 PM
ਪਹਿਲੀ ਸਿੰਚਾਈ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 20-25 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ ਕਰੋ ਇਹ ਸਮਾਂ ਸਹਾਇਕ ਜੜ੍ਹਾਂ ਬਣਨ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਸਮੇਂ ਨਮੀ ਦੀ ਕਮੀ ਹੋਣ ਨਾਲ ਝਾੜ ਵਿੱਚ ਕਮੀ ਬਹੁਤ ਆਉਂਦੀ ਹੈ ਸ਼ਾਖਾਂ ਬਣਨ ਸਮੇਂ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 40-45 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਦੂਜੀ ਸਿੰਚਾਈ ਕਰੋ ਤੀਜੀ ਸਿੰਚਾਈ ਜੋੜ(ਪੋਟੇ) ਬਣਨ ਸਮੇਂ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 60-65 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਕਰੋ ਫੁੱਲ ਬਣਨ ਸਮੇਂ (ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 80-85 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ) ਸਿੰਚਾਈ ਕਰੋ ਪੰਜਵੀਂ ਸਿੰਚਾ.... (Read More)
ਪਹਿਲੀ ਸਿੰਚਾਈ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 20-25 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ ਕਰੋ ਇਹ ਸਮਾਂ ਸਹਾਇਕ ਜੜ੍ਹਾਂ ਬਣਨ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਸਮੇਂ ਨਮੀ ਦੀ ਕਮੀ ਹੋਣ ਨਾਲ ਝਾੜ ਵਿੱਚ ਕਮੀ ਬਹੁਤ ਆਉਂਦੀ ਹੈ ਸ਼ਾਖਾਂ ਬਣਨ ਸਮੇਂ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 40-45 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਦੂਜੀ ਸਿੰਚਾਈ ਕਰੋ ਤੀਜੀ ਸਿੰਚਾਈ ਜੋੜ(ਪੋਟੇ) ਬਣਨ ਸਮੇਂ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 60-65 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਕਰੋ ਫੁੱਲ ਬਣਨ ਸਮੇਂ (ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 80-85 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ) ਸਿੰਚਾਈ ਕਰੋ ਪੰਜਵੀਂ ਸਿੰਚਾਈ ਦਾਣੇ ਪੱਕਣ ਸਮੇਂ (ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 100-105 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ) ਕਰੋ

Posted by shyam
Madhya Pradesh
08-12-2019 08:37 PM
shyam ji kripya swal vistar se pooche ke aap iski bijai kab ki hai aur isme kya kya khaad daali hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by ravi solanki
Madhya Pradesh
08-12-2019 08:37 PM
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकत हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्च.... (Read More)
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकत हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्चे देना आम बात है बकरियां 8-10 वर्ष तक बच्चे देती हैं और अपन गिनती को तेजी से बढ़ा लेती हैं आप बारबरी, ब्लैक बंगाल, जैसी नसल पाल सकते हैं इसकी ट्रेनिेंग के लिए आप अपने कुषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करे या फिर जो बकरी पालन का व्यवसाय कर रहा कोई किसान उसका फार्म स्वंय जाकर देखकर आयें तो और भी बारीकियों का पता चल जायेगा, आप ब्लैक बंगाल, बीटल, सिरोही, जमुनापरी, बरबरी नस्ल रख सकते हैं.
Posted by Jagjit Hundal
Punjab
08-12-2019 08:26 PM
ਤੁਸੀ ਪਸ਼ੂ ਦੇ ਸੂਣ ਤੋਂ 7-8 ਦਿਨ ਬਾਦ ਕੈਲਸ਼ੀਅਮ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਇਹ ਤੁਸੀ ਦੁੱਧ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ 50-100ml ਰੋਜਾਨਾ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ ਅਤੇ ਜਦੋ ਤਕ ਪਸ਼ੂ ਦੁੱਧ ਦਿੰਦਾ ਹੈ ਉਦੋਂ ਤਕ ਕੈਲਸ਼ੀਅਮ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ ..

Posted by Gurwinder Aulakh
Punjab
08-12-2019 08:26 PM
gurwinder ji sundi di roktham de layi tuc chlorpyriphos@1.2 ltr or ekalux 800 ml nu prtai acre de hisab nal spray karo.dhanwad

Posted by maroti khandate
Madhya Pradesh
08-12-2019 08:23 PM
मारोती जी जो फल काले होकर नीचे गिर रहे है वो फंगस के कारण हो रहे है इसके लिए आप carbendazim @4 ग्राम को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें इसके इलावा जो पक्षी खाते है उनके लिए आप लिफाफे चढ़ा सकते है फलों के ऊपर जिस से पक्षी खेत को नुक्सान नहीं करते धन्यवाद
Posted by Sonu Sahu
Madhya Pradesh
08-12-2019 08:17 PM
हरे चारे को हवा की अनुपस्थिति में गड्ढे के अन्दर रसदार परिरक्षित अवस्था में रखनें से चारे में लैक्टिक अम्ल बनता है जो हरे चारे का पीएच कम कर देता है तथा हरे चारे को सुरक्षित रखता है इस सुरक्षित हरे चारे को साईलेज (Silage) कहते हैं अधिकतर किसान भूसा या पुआल का उपयोग करते हैं जो साईलेज की तुलना में बहुत घटिया होते .... (Read More)
हरे चारे को हवा की अनुपस्थिति में गड्ढे के अन्दर रसदार परिरक्षित अवस्था में रखनें से चारे में लैक्टिक अम्ल बनता है जो हरे चारे का पीएच कम कर देता है तथा हरे चारे को सुरक्षित रखता है इस सुरक्षित हरे चारे को साईलेज (Silage) कहते हैं अधिकतर किसान भूसा या पुआल का उपयोग करते हैं जो साईलेज की तुलना में बहुत घटिया होते हैं क्योंकि भूसा या पुआल मे से प्रोटीन, खनिज तत्व एवं उर्जा की उपलब्धता कम होती है

Posted by Vishnu Dangi
Madhya Pradesh
08-12-2019 08:16 PM
विष्णु जी कृपया आप इसकी फोटो भेजे ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद

Posted by kamta Prasad Sonwani
Chattisgarh
08-12-2019 08:11 PM
kamta ji aap kisme jaise Swarna,Bamleshwari,Swarna Sub-1,PKV,Khamang:,BPT-3291,BIO-RP 226,NDR-8002 ki bijai kar sakte hai.dhanywad
Posted by sukh
Punjab
08-12-2019 08:05 PM
sukh ji tuc sirf khaadan di varto hi karo jive DAP ja potashjekar ehna sariyan khaadan di varto to bad v kank growth nahi kardi ta tuc NPK 191919 di spray kar sakde ho.dhanwad
Posted by kuldeep
Punjab
08-12-2019 08:04 PM
ਕੁਲਦੀਪ ਜੀ ਤੁਸੀ ਕਣਕ ਨੂੰ ਹਲਕਾ ਪਾਣੀ ਲਾ ਕੇ ਬੀਜ ਦਾ ਦੁਬਾਰਾ ਛਿੱਟਾ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by Malkeet Singh Dhaliwal
Punjab
08-12-2019 07:58 PM
Malkeet ji please tell us in detail about which purpose you want to spray whether it is for fungus or for weeds so that we can provide you information accordingly.thank you

Posted by davinder Singh
Punjab
08-12-2019 07:51 PM
Davinder g, Waste decomposer bnaun lyi Tusi Plastic da drum use kro g

Posted by inderpal
Punjab
08-12-2019 07:49 PM
Inderpal ji pashu de repeat hoon de kai karan ho skde hai, jiwe bachedani di sahi growth na hona, infection hona, sahi time te deworming na hona, sahi Ai na hona ja hor v kai karan ho skde hai, baki tuci pashu nu tika bhrwa ke Gestaprogen powder 25 gm rojana 20 din tak deo, iss nal pashu de gaban rehn di ass vddh jndi hai.
Posted by दरबारा सिंह गिल
Haryana
08-12-2019 07:48 PM
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी ख.... (Read More)
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुमब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तहय उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तहय में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तहय लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है

Posted by arsh
Punjab
08-12-2019 07:42 PM
ਆਮ ਤੌਰ ਤੇ ਕਣਕ ਦੇ ਵਿੱਚ ਗੁੱਲੀ ਡੰਡਾ 35-40 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਹੀ ਬਾਹਰ ਨਿਕਲਦਾ ਹੈ ਜਦੋਂ ਤੁਸੀਂ ਪਹਿਲਾਂ ਪਾਣੀ ਲਗਾ ਦਿੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਇਹ ਗੁੱਲੀ ਡੰਡਾ ਕਣਕ ਦੇ ਨਾਲ ਵਧਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਸਮੇਂ ਕਣਕ 40 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਆਸ-ਪਾਸ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਸਮੇਂ ਤੁਸੀਂ TOPIK@160GM ਜਾਂ AXIAL@400ML ਜਾਂ PUMA POWER@400ML ਜਾਂ LEADER@13GM ਜਾਂ SAFAL@13GM ਜਾਂ UPL ਦੀ SHAGUN 21-11@200gm ਨੂੰ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਤੇ ਸਪਰੇਅ .... (Read More)
ਆਮ ਤੌਰ ਤੇ ਕਣਕ ਦੇ ਵਿੱਚ ਗੁੱਲੀ ਡੰਡਾ 35-40 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਹੀ ਬਾਹਰ ਨਿਕਲਦਾ ਹੈ ਜਦੋਂ ਤੁਸੀਂ ਪਹਿਲਾਂ ਪਾਣੀ ਲਗਾ ਦਿੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਇਹ ਗੁੱਲੀ ਡੰਡਾ ਕਣਕ ਦੇ ਨਾਲ ਵਧਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਸਮੇਂ ਕਣਕ 40 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਆਸ-ਪਾਸ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਸਮੇਂ ਤੁਸੀਂ TOPIK@160GM ਜਾਂ AXIAL@400ML ਜਾਂ PUMA POWER@400ML ਜਾਂ LEADER@13GM ਜਾਂ SAFAL@13GM ਜਾਂ UPL ਦੀ SHAGUN 21-11@200gm ਨੂੰ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਤੇ ਸਪਰੇਅ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਹਨਾਂ ਦੇ ਵਿੱਚੋਂ ਕੋਈ ਇੱਕ ਸਪਰੇਅ ਵਰਤ ਸਕਦੋ ਹੋ Topik ਦੀ ਥਾਂ ਇਹ ਸਪਰੇਆਂ ਵਰਤ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੇਕਰ ਬਾਥੂ ਹੈ ਤਾਂ ਉਸ ਦੇ ਲਈ algrip@10gm ਜਾਂ total@16gm ਨੂੰ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਤੇ ਸਪਰੇਅ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ
Posted by Sonu Sahu
Madhya Pradesh
08-12-2019 07:39 PM
हरे चारे को हवा की अनुपस्थिति में गड्ढे के अन्दर रसदार परिरक्षित अवस्था में रखनें से चारे में लैक्टिक अम्ल बनता है जो हरे चारे का पीएच कम कर देता है तथा हरे चारे को सुरक्षित रखता है इस सुरक्षित हरे चारे को साईलेज (Silage) कहते हैं अधिकतर किसान भूसा या पुआल का उपयोग करते हैं जो साईलेज की तुलना में बहुत घटिया होते .... (Read More)
हरे चारे को हवा की अनुपस्थिति में गड्ढे के अन्दर रसदार परिरक्षित अवस्था में रखनें से चारे में लैक्टिक अम्ल बनता है जो हरे चारे का पीएच कम कर देता है तथा हरे चारे को सुरक्षित रखता है इस सुरक्षित हरे चारे को साईलेज (Silage) कहते हैं अधिकतर किसान भूसा या पुआल का उपयोग करते हैं जो साईलेज की तुलना में बहुत घटिया होते हैं क्योंकि भूसा या पुआल मे से प्रोटीन, खनिज तत्व एवं उर्जा की उपलब्धता कम होती है
Posted by Sonu Sahu
Madhya Pradesh
08-12-2019 07:38 PM
हरे चारे को हवा की अनुपस्थिति में गड्ढे के अन्दर रसदार परिरक्षित अवस्था में रखनें से चारे में लैक्टिक अम्ल बनता है जो हरे चारे का पीएच कम कर देता है तथा हरे चारे को सुरक्षित रखता है इस सुरक्षित हरे चारे को साईलेज (Silage) कहते हैं अधिकतर किसान भूसा या पुआल का उपयोग करते हैं जो साईलेज की तुलना में बहुत घटिया होते .... (Read More)
हरे चारे को हवा की अनुपस्थिति में गड्ढे के अन्दर रसदार परिरक्षित अवस्था में रखनें से चारे में लैक्टिक अम्ल बनता है जो हरे चारे का पीएच कम कर देता है तथा हरे चारे को सुरक्षित रखता है इस सुरक्षित हरे चारे को साईलेज (Silage) कहते हैं अधिकतर किसान भूसा या पुआल का उपयोग करते हैं जो साईलेज की तुलना में बहुत घटिया होते हैं क्योंकि भूसा या पुआल मे से प्रोटीन, खनिज तत्व एवं उर्जा की उपलब्धता कम होती है

Posted by Akal Singh
Punjab
08-12-2019 07:38 PM
akal ji tuc kanak diyan kisman jive PBW509 ja PBW590 ate PBW658 di bijai kar sakde ho.dhanwad
Posted by MD janesar Akhtar
Bihar
08-12-2019 07:38 PM
यह फसल बहुत तरह की मिट्टी जैसे कि रेतली, नमक वाली, दोमट और चिकनी मिट्टी में उगाई जा सकती है अच्छे जल निकास वाली, जैविक तत्व भरपूर, रेतली से दरमियानी ज़मीन में फसल अच्छी पैदावार देती है यह फसल नमक वाली तेजाबी ज़मीनों में भी उगाई जा सकती है पर बहुत ज्यादा पानी खड़ने वाली और खारी या नमक वाली ज़मीन इस फसल की खेती के लिए .... (Read More)
यह फसल बहुत तरह की मिट्टी जैसे कि रेतली, नमक वाली, दोमट और चिकनी मिट्टी में उगाई जा सकती है अच्छे जल निकास वाली, जैविक तत्व भरपूर, रेतली से दरमियानी ज़मीन में फसल अच्छी पैदावार देती है यह फसल नमक वाली तेजाबी ज़मीनों में भी उगाई जा सकती है पर बहुत ज्यादा पानी खड़ने वाली और खारी या नमक वाली ज़मीन इस फसल की खेती के लिए उचित नहीं होती Kufri Chandramukhi : यह जल्दी पकने वाली किस्म है और मैदानी इलाकों से पर्वतीय क्षेत्रों में बिजाई के लिए उपयुक्त है यह किस्म 110-130 दिनों में तैयार हो जाती है इसके पौधे मध्यम ऊंचाई के, जल्दी पकने वाले और फूल हल्के गुलाबी रंग के होते हैं इसके बीज बड़े अंडाकार आकार के, हल्के चौड़े और गुद्दा सफेद रंग का होता है ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों में, इसकी औसतन पैदावार 37.5-41 क्विंटल प्रति एकड़ और सूखे शीतोष्ण क्षेत्रों में इसकी औसतन पैदावार 100 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Kufri Jyoti: यह दरमियाने मौसम की किस्म 130-150 दिनों में तैयार हो जाती है यह लंबी, सीधी, जल्दी उगने वाली और मध्यम आकार की किस्म है इसके फूल सफेद रंग के होते हैं यह किस्म सूखे के प्रतिरोधी और अधिक उपज देने वाली किस्म है इसकी औसतन पैदावार 62.5-72 क्विंटल प्रति एकड़ होती है खेत को एक बार 30 सैं.मी. गहरा जोतकर अच्छे ढंग से बैड बनाएं जोताई के लिए हल और तवियों का प्रयोग करें उसके बाद 1 या 2 बार देसी हल से जोताई करें मिट्टी को समतल करने के लिए प्रत्येक जोताई के बाद सुहागा फेरें मिट्टी से होने वाली बीमारियों से बचाने के लिए आखिरी जोताई के समय फोरेट 10 G 5-7 किलोग्राम को मिट्टी में मिलायें बिजाई से पहले खेत में नमी की मात्रा बनाकर रखें बिजाई के लिए दो ढंग मुख्य तौर पर प्रयोग किए जाते हैं 1. मेंड़ और खालियों वाला ढंग 2. समतल बैडों वाला ढंग कम पर्वतीय क्षेत्रों (800 मीटर ऊंचाई तक) पतझड़ी फसल के लिए : मध्य-सितंबर - मध्य-अक्तूबर बसंत की फसल के लिए : जनवरी-फरवरी मध्यम पर्वतीय क्षेत्रों के लिए (800-1600 मीटर) : मध्य-जनवरी अधिक पर्वतीय क्षेत्रों के लिए (1600-2400 मीटर) : मार्च-अप्रैल बहुत ज्यादा ऊंचाई वाले पर्वतीय क्षेत्रों के लिए (2400 मीटर से ज्यादा) : अप्रैल मई के शुरू में बिजाई के लिए, पंक्ति से पंक्ति का फासला 50- 60 सैं.मी और पौधे से पौधे का फासला 20 सैं.मी. रखें फासला आलुओं के आकार के अनुसार बदलता रहता है यदि आलू का व्यास 2.5-3.5 सैं.मी. हो तो फासला 60x15 सैं.मी. और यदि आलू का व्यास 5-6 सैं.मी. हो तो फासला 60x40 सैं.मी. होना चाहिए 6-8 इंच गहरा गड्ढा खोदें और उसमें आलू की आंख को ऊपर की तरफ कर के बोयें बिजाई के लिए, ट्रैक्टर से चलने वाली या ऑटोमैटिक बिजाई के लिए मशीन का प्रयोग करें बिजाई के लिए, बड़ी आंखों वाले आलुओं का प्रयोग करें बिजाई के लिए, 12-15 क्विंटल प्रति एकड़ किलो प्रति एकड़ बीजों का प्रयोग करें सही स्त्रोत से बीज लें बिजाई से पहले आलुओं को कोल्ड स्टोर से निकालकर 1-2 सप्ताह के लिए छांव वाले स्थान पर रखें ताकि वे अंकुरित हो जायें आलुओं के सही अंकुरन के लिए उन्हें जिबरैलिक एसिड 1 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी में मिलाकर एक घंटे के लिए उपचार करें फिर छांव में सुखाएं और 10 दिनों के लिए हवादार कमरे में रखें फिर काटकर आलुओं को मैनकोजेब 0.5 प्रतिशत घोल (5 ग्राम प्रति लीटर पानी) में 10 मिनट के लिए भिगो दें इससे आलुओं को शुरूआती समय में गलने से बचाया जा सकता है आलुओं को गलने और जड़ों में कालापन रोग से बचाने के लिए साबुत और काटे हुए आलुओं को 6 प्रतिशत मरकरी के घोल (टैफासन) 0.25 प्रतिशत(2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी) में डालें बिजाई से दो सप्ताह पहले खेत की तैयारी के समय 10 टन प्रति एकड़ रूड़ी की खाद डालें फसल की उचित वृद्धि के लिए नाइट्रोजन 50 किलो (110 किलो यूरिया), फासफोरस 34 किलो (208 किलो सिंगल सुपर फासफेट) और पोटाश 25 किलो (41 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश) की मात्रा प्रति एकड़ में डालें बिजाई के समय नाइट्रोजन का 3/4 हिस्सा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा डालें बाकी बचा हुआ नाइट्रोजन का 1/4 हिस्सा बिजाई से 25-30 दिन बाद जड़ों से मिट्टी लगाने के समय डालें जड़ों के साथ मिट्टी लगाना : मिट्टी में सही हवा, पानी और तापमान बनाए रखने के लिए यह काम बहुत जरूरी है ताकि फसल का विकास अच्छा हो सके आलुओं के अच्छे विकास के लिए पौधे की जड़ों के साथ मिट्टी लगाएं यह काम पौधों के 15-20 सैं.मी. कद होने पर करें यदि जरूरत पड़े तो पहली बार मिट्टी लगाने के दो सप्ताह बाद दूसरी बार फिर मिट्टी लगाएं यह क्रिया हाथों से या कसी की सहायता से की जा सकती है या बड़े क्षेत्रों में मोल्ड बोर्ड हल की सहायता से की जा सकती है पानी में घुलनशील खादें : आलुओं की अधिक पैदावार के लिए 13:0:45 की 2 किलो और मैगनीश्यिम ई डी टी ए 1000 ग्राम प्रति एकड़ की स्प्रे करें बीमारियों के हमले को रोकने के लिए फंगसनाशी प्रॉपीनेब 3 ग्राम प्रति लीटर पानी डालें आलुओं का आकार और गिणती बढ़ाने के लिए हयूमिक एसिड (12 प्रतिशत) 3 ग्राम + एम ए पी 12:61:00 की 8 ग्राम या डी ए पी 15 ग्राम प्रति लीटर की स्प्रे पौधे की वृद्धि के समय करें लाहौल स्पीति क्षेत्रों में अधिक उपज के लिए आलू का राजमांह, /मटर/फ्रांस बीन्स के साथ अंतर फसली किया जाता है आलू की फसल के रोपण के लिए मुख्यत: 10-15 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है बीज अंकुरण के बाद सिंचाई शुरू करें हल्की मिट्टी में 7-10 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है और भारी मिट्टी में 12-15 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है अक्तूबर-नवंबर महीने में 7-10 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें दिसंबर-जनवरी महीने में 10-15 दिनों के अंतराल पर सिंचाई का प्रयोग करें ज्यादा सिंचाई करने से परहेज़ करें इससे जड़ गलन की बीमारी का खतरा रहता है कटाई के 15 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें आलुओं के अंकुरन से पहले, पैंडीमैथालीन 1-1.5 लीटर प्रति एकड़ या मैटरीबिउज़िन 70 डब्लयु पी 200 ग्राम प्रति एकड़ बिजाई के बाद 3-5 दिनों के अंदर डालें यदि नदीनों का हमला कम हो तो बिजाई के 25 दिन बाद मैदानी इलाकों में और 40-45 दिनों के बाद पहाड़ी इलाकों में जब फसल 8-10 सैं.मी.कद की हो जाये तो नदीनों को हाथों से उखाड़ दें नदीनों के हमले को कम करने के लिए और मिट्टी की नमी को बचाने के लिए मलचिंग का तरीका भी प्रयोग किया जा सकता है, जिसमें मिट्टी पर धान की पराली और खेत के बची-कुची सामग्री बिछायी जा सकती है बिजाई के 20-25 दिन बाद मलचिंग को हटा दें धन्यवाद
Posted by Jelly Ghanaur
Punjab
08-12-2019 07:36 PM
jelly ji sundi di roktham de layi tuc chlorpyriphos@1.2ml nu prati acre de hisab nal spray karo.dhanwad

Posted by ramavatar meena
Rajasthan
08-12-2019 07:34 PM
रामावतार जी इसकी रोकथाम के लिए आप quinalphos @4ml को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद

Posted by ranvijay singh
Uttar Pradesh
08-12-2019 07:26 PM
ranvijay ji kripya aap iski photo bheje taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad

Posted by ranvijay singh
Uttar Pradesh
08-12-2019 07:18 PM
ranvijay ji kripya aap iski photo bheje taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake,dhanywad
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