
Posted by ਹਰਮਨਜੀਤ ਸਿੰਘ ਢਿੱਲੋਂ
Punjab
12-12-2019 11:45 AM
harman ji kirpa karke swal vistar nal pucho ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake.dhanwad

Posted by Harmander Singh Brar
Punjab
12-12-2019 11:44 AM
uss nu Ifer-H injection 5ml lgwao ate 3-3 dina de frak nal 3 injection lgwao baki uss nu FMC powder 50gm rojana deo ate milkout powder 2-2 chamch swere sham deo..

Posted by Rajesh Meel
Rajasthan
12-12-2019 11:44 AM
राजेश जी यह तत्व की कमी के कारण होता है इसके लिए आप NPK 191919 एक किलो को 150 लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by Sandeep kumar
Rajasthan
12-12-2019 11:30 AM
sandeep ji deemak ki roktham ke liye aap chlorpyriphos@1 litre ko 60 kilo ret me mila kar prati acre ke hisab se chita de.dhanywad
Posted by MANAN HUSSAIN
Bihar
12-12-2019 11:25 AM
चूहों से बचाव के लिए आप नीचे लिखे तरीके प्रयोग कर सकते हैं, पिंजरो का प्रयोग करना - चूहो को पकड़ने के लिए अलग अलग पिजंरो का प्रयोग किया जाता है इन पिजंरो का प्रयोग करने से पहले पिजंरे को अच्छी तरह धोकर प्रयोग करे ताकि किसी भी प्रकार की गंध ना आये साफ पिंजरो को खेत में चूहो के आने जाने वाले रास्ते और नुक्सान करन.... (Read More)
चूहों से बचाव के लिए आप नीचे लिखे तरीके प्रयोग कर सकते हैं, पिंजरो का प्रयोग करना - चूहो को पकड़ने के लिए अलग अलग पिजंरो का प्रयोग किया जाता है इन पिजंरो का प्रयोग करने से पहले पिजंरे को अच्छी तरह धोकर प्रयोग करे ताकि किसी भी प्रकार की गंध ना आये साफ पिंजरो को खेत में चूहो के आने जाने वाले रास्ते और नुक्सान करने वाली जगह पर रखे बडी संखिया में चूहो को पकडने के लिए पिंजरे में 10-15 ग्राम अनाज को तेल लगाकर दो से तीन दिनो तक मुंह खोलकर रखे चुहो को मगर लगाने के बाद पिंजरे के अंदर कागज के टूकडो पर 10-15 ग्राम दाने और नालीदार दाखले पर चुटकी भर दाने रखकर मुंह को बंद कर दे ऐसा करके तीन दिन तक चूहे और पकडे हुए चूहो को पानी में डूबो कर मारे पिंजरो का दौबारा प्रयोग करने के लिए कम से कम 20 दिनो का फासला रखें कीडेमार जहरो के प्रयोग से रोकथाम - चूहो की कीडेमार और जहर के प्रयोग से रोकथाम करने के लिए जहरीला चोगा प्रयोग करने में ध्यान और सही तरीका प्रयोग करने की जरूरत है चुहो को इस जहरीले चोगे को खाना प्रयोग किये दानो का मियारपन , स्वाद, और तेल की गंध पर निर्भर करता है जहरीला चोगा बनाना जिंक फॉसफाइड का प्रयोग - एक किलो बाजरा गेहूं ज्वार का दलिया या इनका मिश्रण लेकर इसमे 20 ग्राम तेल हो सके तो मुंगफली का तेल और 25 ग्राम जिंकफॉसफाइड डाल कर अच्छी तरह मिलाये इस प्रकार तैया किये जहरीले चोगे को कागज की पुडीया बनाकर खेत में गेज वाली जगह पर रखे बरोमोडाइओलोन का प्रयोग - 20 ग्राम बरोमोडाइओलोन 0 005 फीसदी पाऊडर, 20 ग्राम बूरा खंड, और 20 ग्राम तेल को एक किलो किसी भी अनाज के दलिये में मिलाये और पूरे खेत में 40 जगह पर रख दें रैकुमिन का प्रयोग- 50 ग्राम रैकुमिन 0 0375 फीसदी पाऊडर , 20 ग्राम मुंगफली या सूरजमुखी का तेल और 20 ग्राम बूरा खंड को किसी भी अनाज के दलीये में मिलाये यह भी चूहो को मारने में बहुत फायदेमंद है

Posted by A man deep Singh
Punjab
12-12-2019 11:23 AM
Aman ji tuci uss nu Vitum-H liquid 10-10ml swere sham, Milkout powder 2-2 chamch swere sham deo, iss nal frak paa jawega.

Posted by Sunil Kumar Rana
Uttar Pradesh
12-12-2019 11:21 AM
बतखों के लिए प्रोटीन वाले दाने की जरूरत पड़ती है. चूजों को 22 फीसदी तक पाच्य प्रोटीन देना जरूरी होता है. जब बतखें अंडे देने की हालत में पहुंच जाएं, तो उन का प्रोटीन घटा कर 18-20 फीसदी कर देना चाहिए. बतखों के आहार पर मुरगियों के मुकाबले 1-2 फीसदी तक कम खर्च होता है. उन्हें नालोंपोखरों में ले जा कर चराया जाता है, जिस से क.... (Read More)
बतखों के लिए प्रोटीन वाले दाने की जरूरत पड़ती है. चूजों को 22 फीसदी तक पाच्य प्रोटीन देना जरूरी होता है. जब बतखें अंडे देने की हालत में पहुंच जाएं, तो उन का प्रोटीन घटा कर 18-20 फीसदी कर देना चाहिए. बतखों के आहार पर मुरगियों के मुकाबले 1-2 फीसदी तक कम खर्च होता है. उन्हें नालोंपोखरों में ले जा कर चराया जाता है, जिस से कुदरती रूप से वे घोंघे जैसे जलीय जंतुओं को खा कर अपनी खुराक पूरी करती हैं. बतखों से अच्छा उत्पादन प्राप्त करने के लिए उन्हें अलग से आहार देना जरूरी होता है. वे रेशेदार आहार भी आसानी से पचा सकती हैं. बतखों को 20 फीसदी अनाज वाले दाने, 40 फीसदी प्रोटीन युक्त दाने (जैसे सोयाकेक या सरसों की खली), 15 फीसदी चावल का कना, 10 फीसदी मछली का चूरा, 1 फीसदी, नमक व 1 फीसदी खनिजलवण के साथ 13 फीसदी चोकर दिया जाना मुनासिब होता है. हर बतख के फीडर में 100-150 ग्राम दाना डाल देना चाहिए. इनमें महज डक फ्लू का प्रकोप ही देखा गया है, जिस से इन को बुखार हो जाता है और ये मरने लगती हैं. बचाव के लिए जब चूजे 1 महीने के हो जाएं, तो डक फ्लू वैक्सीन लगवाना जरूरी होता है. इस के अलावा इन के शेड की नियमित सफाई करते रहना चाहिए और 2-2 महीने के अंतराल पर शेड में कीटनाशक दवाआें का छिड़काव करते रहना चाहिए.
Posted by Chandra prakash
Uttar Pradesh
12-12-2019 11:04 AM
चंद्र जी कृपया आप विस्तार से बताये कि आपने कितनी मात्रा में इसका इस्तेमाल किया है ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद

Posted by Avinash Maurya
Uttar Pradesh
12-12-2019 11:01 AM
इसे मिट्टी की कई किस्मों, रेतली दोमट से चिकनी मिट्टी में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली मिट्टी जिसकी पी एच 6 से 7.5 हो, में उगाने पर यह अच्छे परिणाम देती है यह फसल जलजमाव वाले हालातों में खड़ी नहीं रह सकती अम्लीय मिट्टी के लिए, चूना डालें Arkal: यह छोटे कद की और जल्दी पकने वाली किस्म है इसकी फलियां लंबी और गहरे हरे .... (Read More)
इसे मिट्टी की कई किस्मों, रेतली दोमट से चिकनी मिट्टी में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली मिट्टी जिसकी पी एच 6 से 7.5 हो, में उगाने पर यह अच्छे परिणाम देती है यह फसल जलजमाव वाले हालातों में खड़ी नहीं रह सकती अम्लीय मिट्टी के लिए, चूना डालें Arkal: यह छोटे कद की और जल्दी पकने वाली किस्म है इसकी फलियां लंबी और गहरे हरे रंग की होती हैं इसकी औसतन पैदावार 16-18 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Bonneville: यह मध्यम समय की किस्म है इसके फलियां मीठे दानों वाली होती हैं इसकी औसतन पैदावार 36 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Multi Freezer: यह देरी से पकने वाली किस्म है इसकी फलियां मीठी और नर्म होती हैं यह ठंड को सहनेयोग्य किस्म हैं इसकी औसतन पैदावार 25 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Azad P-I: यह छोटे कद की किस्म है इसके दाने झुर्रीदार होते हैं इसकी औतसन पैदावार 16 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Early E-6: यह किस्म पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित की गई है इसकी औसतन पैदावार 40 क्विंटल प्रति एकड़ होती है खरीफ ऋतु की फसल की कटाई के बाद, सीड बैड तैयार करने के लिए हल से 1 या 2 बार जोताई करें हल से जोतने के बाद 2 या 3 बार तवियों से जोताई करें जल जमाव से रोकने के लिए खेत को अच्छी तरह समतल कर लेना चाहिए बिजाई से पहले, खेत की एक बार सिंचाई करें जो कि फसल के अच्छे अंकुरन में सहायक होती है फसल को मिट्टी से पैदा होने वाले कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए ट्राइकोडरमा विराइड 10 किलो को अच्छी तरह से गले हुए गाय के गोबर 25-30 किलो को आखिरी जोताई के समय प्रति एकड़ में डालें अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए बिजाई अक्तूबर से नवंबर के मध्य में पूरी कर लें बिजाई में देरी होने से उपज में काफी नुकसान होता है कतारों में 30-40 सैं.मी. और पौधें में 3-5 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें लंबी किस्मों के लिए 32-40 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें और छोटे कद की किस्मों के लिए 50 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बिजाई के समय नाइट्रोजन 13 किलो (30 किलो यूरिया), फासफोरस 24 किलो (150 किलो सिंगल सुपर फासफेट) और पोटाश 18 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 30 किलो) की मात्रा प्रति एकड़ में प्रयोग करें फासफोरस, पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन को बिजाई के एक महीने बाद डालें छोटे कद की किस्मों के लिए नाइट्रोजन की 8 किलो मात्रा बिजाई के समय डालें एक या दो गोडाई करना यह किस्म पर निर्भर करता है पहली गोडाई, फसल की बिजाई के 3-4 सप्ताह बाद या जब फसल 2 या 3 पत्ते निकाल लेती है और दूसरी गोडाई, फूल निकलने से पहले करें मटरों की खेती के लिए नदीन नाशकों का प्रयोग बहुत प्रभावशाली होता है फ्लूक्लोरालिन 45 ई सी 800 मि.ली. को 100-150 लीटर पानी में मिलाकर बीज बोने से पहले खेत में डालें नदीनों की रोकथाम के लिए पैंडीमैथालीन 1 लीटर प्रति एकड़ या बसालिन 1 लीटर प्रति एकड़ का प्रयोग फसल बीजने से 48 घंटों के अंदर करें धन्यवाद
Posted by Devesh Rawat
Madhya Pradesh
12-12-2019 10:56 AM
रबी के मौसम में खेती के लिए बिजाई 15 अक्तूबर से 10 नवंबर तक पूरी कर लें मेंड़ों पर बिजाई करना ज्यादा लाभदायक रहता है क्योंकि इससे फसल को जल्दी अंकुरित होने में मदद मिलती है और फसल ठंड से भी बची रहती है
Posted by rahul rana
Haryana
12-12-2019 10:55 AM
Rahul ji aap NPK 191919 ko khaadon ke poore istemal ke bad spray karen. iski dose ek kilo ko 150 litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by Ashutoshshukla4280@gmail c
Uttar Pradesh
12-12-2019 10:26 AM
आशुतोषशुक्ला जी आप पौधे के ऊपर खट्टी लस्सी जो 15 दिन पुरानी हो इसकी मात्रा 3 ml को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by Duke Ramratan Siddh
Rajasthan
12-12-2019 10:21 AM
आप इसमें सूंडी का हमला चेक करें अगर मौजूद है तो आप quinalphos 4ml को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें
Posted by Duke Ramratan Siddh
Rajasthan
12-12-2019 10:18 AM
Duke ji aap iske uper quinalphos@400ml ko prati acre ke hisab se spray karen.dhanywad

Posted by gagandeep singh
Punjab
12-12-2019 10:18 AM
Shrimaan i tuc is vich mancozeb @ 400 gm nu 150 liter pani vich mila ke prati acre de hisaab nal spray karo, dhanwad

Posted by brar
Punjab
12-12-2019 10:17 AM
brar ji kirpa karke swal vistar nal.pucho ke tuc kanak bare ki jankari laina chahunde ho ta jo tuhanu osde hisab nal jankari diti ja sake.dhanwad

Posted by gurveer khangura
Punjab
12-12-2019 10:12 AM
gurveer ji according to weather forecast there are chances of rain today.thank you
Posted by Gurminder singh
Punjab
12-12-2019 09:52 AM
gurminder ji sundi di roktham de layi chlorpyriphos 1.5 lt or ekalux 800 ml prati acre de hisab nal spray karo.dhanwad

Posted by Mahendra Singh Patel
Uttar Pradesh
12-12-2019 09:51 AM
महेंद्र जी आप इसकी मात्रा 300 -400 ml को प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by baldev singh
Punjab
12-12-2019 09:24 AM
Baldev ji isde lai tuhanu subsidy nhi milegi kyuki isde lai puri training hundi hai fir usda certificate milda hai ate fir Department walo project te subsidy diti jndi hai.
Posted by RAJURAMGODARA
Rajasthan
12-12-2019 09:22 AM
bhai sahib dwaee se kuj ni hoga aap rajwa hara chaara te har 4kg dudh lai 1kg wadhya feed pao har 3 mahine baad pet ke kirhe nikalne ki dwaee deo baaki dudh to nasal pe v nirbhar hota hai
Posted by rohit kumar
Uttar Pradesh
12-12-2019 08:58 AM
rohit kumar ji iske liye hame aapko apne disst ke animal husbandry department ki help se puri project report bnani padegi. uske baad aap apne bank manager se baat kare jis bank me aapko account chal raha hai. uske baad aapko bank manager hi aapke account ke base par jankari dega ke aapka kitna loan pas hoga ji. is pure project ke liye aapko animal husbandry department or bank hi jankari dega ji.
Posted by rohit kumar
Uttar Pradesh
12-12-2019 08:56 AM
rohit kumar ji iske liye hame aapko apne disst ke animal husbandry department ki help se puri project report bnani padegi. uske baad aap apne bank manager se baat kare jis bank me aapko account chal raha hai. uske baad aapko bank manager hi aapke account ke base par jankari dega ke aapka kitna loan pas hoga ji. is pure project ke liye aapko animal husbandry department or bank hi jankari dega ji.
Posted by ashok tiwari
Madhya Pradesh
12-12-2019 08:55 AM
ashok ji abhi aapko isme kuch aur daalne ki jrurat nahi hai isi se hi shatavri ki growth ho jayegi.dhanywad
Posted by ਸਵਰਨ ਸਿੰਘ ਬਰਾੜ
Punjab
12-12-2019 08:55 AM
ਸਵਰਨ ਜੀ epsom salt flowering ਵਧਾਉਣ ਵਿਚ ਮਦਦ ਕਰਦਾ ਹੈ ਜਿਸਦੇ ਨਾਲ ਫ਼ਸਲ ਦਾ ਝਾੜ ਵਧੀਆ ਨਿਕਲਦਾ ਹੈ ਇਸਦੇ ਵਿਚ magnesium sulphate ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸਦੀ ਮਾਤਰਾ 1 ਕਿਲੋ ਦੀ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by Gurjant singh
Punjab
12-12-2019 08:52 AM
Gurjant ji hun uss vich hisa nhi laa skde ho kyuki ussde 10 trikk tak farm bharr honne c jo ki date nikll chuki hai.

Posted by pannalal Molat
Rajasthan
12-12-2019 08:32 AM
रासायनिक नदीन रोकथाम : इसमें कम मेहनत और हाथों से नदीनों को उखाड़ने से होने वाली हानि न होने कारण ज्यादातर यह तरीका ही अपनाया जाता है नुकसान से बचने के लिए पैंडीमैथालीन स्टांप (30 ई.सी.) 1 लीटर को 500 लीटर पानी के घोल में मिलाकर बिजाई के 0-3 दिनों के अंदर अंदर छिड़काव करना चाहिए चौड़े पत्तों वाले नदीनों की रोकथाम के लि.... (Read More)
रासायनिक नदीन रोकथाम : इसमें कम मेहनत और हाथों से नदीनों को उखाड़ने से होने वाली हानि न होने कारण ज्यादातर यह तरीका ही अपनाया जाता है नुकसान से बचने के लिए पैंडीमैथालीन स्टांप (30 ई.सी.) 1 लीटर को 500 लीटर पानी के घोल में मिलाकर बिजाई के 0-3 दिनों के अंदर अंदर छिड़काव करना चाहिए चौड़े पत्तों वाले नदीनों की रोकथाम के लिए 2,4-डी 250 मि.ली. को 150 लीटर पानी में घोलकर प्रयोग करें

Posted by hardeep singh
Punjab
12-12-2019 08:26 AM
Hardeep g, ਐਜੋਲਾ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਪੈਦਾ ਹੋਣ ਵਾਲੀ ਨੀਲੇ-ਹਰੇ ਰੰਗ ਦੀ ਐਲਗੀ ਜਾਂ ਫਰਨ ਵਿੱਚੋਂ ਇੱਕ ਹੈ,
ਅਜੋਲਾ ਵਿੱਚ ਸਧਾਰਨ ਚਾਰੇ ਜਾਂ ਘਾਹ ਦੀ ਤੁਲਨਾ ਵਿੱਚ 25% ਤੋਂ 35% ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਅਤੇ ਨਾਲ ਹੀ ਲੋਹੇ, ਕਾੱਪਰ, ਮੈਗਨੀਸ਼ੀਅਮ ਦਾ ਅਨੁਪਾਤ ਵੀ ਵਧੀਆ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜੇਕਰ ਅਸੀਂ ਅਜੋਲਾ ਨੂੰ ਦੁਧਾਰੂ ਪਸ਼ੂਆਂ ਦੇ ਭੋਜਨ ਲਈ ਵਰਤਦੇ ਹਾਂ, ਤਾਂ ਦੁੱਧ ਉਤਪਾਦਨ ਸਪੱਸ਼ਟ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਵਧੇਗਾ ਇਸ ਦਾ ਸੀਡ ਤਹਾਨੂੰ .... (Read More)
Hardeep g, ਐਜੋਲਾ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਪੈਦਾ ਹੋਣ ਵਾਲੀ ਨੀਲੇ-ਹਰੇ ਰੰਗ ਦੀ ਐਲਗੀ ਜਾਂ ਫਰਨ ਵਿੱਚੋਂ ਇੱਕ ਹੈ,
ਅਜੋਲਾ ਵਿੱਚ ਸਧਾਰਨ ਚਾਰੇ ਜਾਂ ਘਾਹ ਦੀ ਤੁਲਨਾ ਵਿੱਚ 25% ਤੋਂ 35% ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਅਤੇ ਨਾਲ ਹੀ ਲੋਹੇ, ਕਾੱਪਰ, ਮੈਗਨੀਸ਼ੀਅਮ ਦਾ ਅਨੁਪਾਤ ਵੀ ਵਧੀਆ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜੇਕਰ ਅਸੀਂ ਅਜੋਲਾ ਨੂੰ ਦੁਧਾਰੂ ਪਸ਼ੂਆਂ ਦੇ ਭੋਜਨ ਲਈ ਵਰਤਦੇ ਹਾਂ, ਤਾਂ ਦੁੱਧ ਉਤਪਾਦਨ ਸਪੱਸ਼ਟ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਵਧੇਗਾ ਇਸ ਦਾ ਸੀਡ ਤਹਾਨੂੰ ਤੁਹਾਡੇ ਕੇ.ਵੀ.ਕੇ ਚੋ ਮਿਲ ਸਕਦਾ ਕਿਉਂਕਿ ਤਕਰੀਬਨ ਹਰੇਕ ਕੇ.ਵੀ.ਕੇ ਚ ਅਜੋਲਾ ਦੇ ਪ੍ਰਦਰਸ਼ਨੀ ਪਲਾਂਟ ਲੱਗੇ ਹੋਏ ਨੇ ਉੱਥੋਂ ਈ ਇਸ ਦੀ ਪੈਦਾਵਾਰ ਸੰਬੰਧੀ ਟਰੇਨਿੰਗ ਮਿਲ ਸਕਦੀ ਜੇਕਰ ਤਹਾਨੂੰ ਜ਼ਰੂਰਤ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਸਾਡੇ ਜਿਲੇ ਤਰਨਤਾਰਨ ਕੇ.ਵੀ.ਕੇ ਬੂਹ ਬਠਿੰਡਾ ਅੰਮ੍ਰਿਤਸਰ ਹਾਈਵੇ ਤੇ ਬੂਹ ਬਾਈਪਾਸ ਕੋਲ ਸਥਿਤ ਹੈ ਉੱਥੋਂ ਮਿਲ ਸਕਦਾ

Posted by Randhir Kumar Payal
Haryana
12-12-2019 08:24 AM
आप किस्मे जैसे Kagzi: यह बड़े क्षेत्र में उगाई जाने वाली नींबू की सामान्य किस्म है इसके वृक्ष ज्यादा घनता वाले, छोटे पत्ते और फैलने वाले होते हैं फल छोटे गोल और पतली त्वचा वाले होते हैं इसका रस स्वाद में बहुत तेजाबी होता है इसके पौधे लेने के लिए आप रवि चौधरी 9530002191 से संपर्क कर सकते है धन्यवाद
Posted by Gurwinder Singh sidhu
Punjab
12-12-2019 08:22 AM
ਕਣਕ ਦੀਆਂ ਪਿਛੇਤੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਜਿਵੇ PBW590 , PBW509 ਅਤੇ PBW658 ਕਿਸਮਾਂ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by lakhbeer singh
Punjab
12-12-2019 08:03 AM
lakhbeer ji 2,4 D ik naden nashak hai isdi varto tuc NPK 191919 jo ik ghulansheel khaad hai vich mila ke nahi kar sakde ehna dona di alag to varto karo.dhanwad

Posted by Harsh Deep Singh
Punjab
12-12-2019 08:02 AM
harshdeep ji eh fasl vich tat di kami nu poora kardi hai ate is vich tino tat iko matra vich maujood hunde han. jisde nal fasl di paidavar vadh jandi hai.dhanwad

Posted by ਇਕਬਾਲ ਸਿੰਘ
Punjab
12-12-2019 07:54 AM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਹਲਦੀ ਦੀ ਸਫਲ ਕਾਸ਼ਤ ਲਈ ਕੁਝ ਜ਼ਰੂਰੀ ਨੁਕਤੇ ਪੰਜਾਬ ਦਾ ਖੇਤੀ ਅਰਥਚਾਰਾ ਮੁੱਖ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਝੋਨੇ ਅਤੇ ਕਣਕ ਦੀ ਫ਼ਸਲ ‘ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦਾ ਹੈ ਪ੍ਰੰਤੂ ਝੋਨੇ ਅਤੇ ਕਣਕ ਦੇ ਫ਼ਸਲੀ ਚੱਕਰ ਨੂੰ ਲਗਾਤਾਰ ਅਪਣਾਉਣ ਕਰਕੇ ਬਹੁਤ ਸਾਰੀਆਂ ਸਮੱਸਿਆਵਾਂ ਆ ਰਹੀਆਂ ਹਨ ਅਤੇ ਝੋਨੇ ਅਤੇ ਕਣਕ ਤੋਂ ਮੁਨਾਫ਼ਾ ਵੀ ਘਟ ਰਿਹਾ ਹੈ ਇਸ ਲਈ ਲੋੜ ਹੈ ਫ਼ਸਲੀ ਵਿਭਿੰਨਤਾ ਨੂੰ ਅਪਣਾੳਂੁਦੇ ਹੋਏ ਹੋਰ ਫ਼ਸਲਾਂ ਵੱਲ.... (Read More)
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਹਲਦੀ ਦੀ ਸਫਲ ਕਾਸ਼ਤ ਲਈ ਕੁਝ ਜ਼ਰੂਰੀ ਨੁਕਤੇ ਪੰਜਾਬ ਦਾ ਖੇਤੀ ਅਰਥਚਾਰਾ ਮੁੱਖ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਝੋਨੇ ਅਤੇ ਕਣਕ ਦੀ ਫ਼ਸਲ ‘ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦਾ ਹੈ ਪ੍ਰੰਤੂ ਝੋਨੇ ਅਤੇ ਕਣਕ ਦੇ ਫ਼ਸਲੀ ਚੱਕਰ ਨੂੰ ਲਗਾਤਾਰ ਅਪਣਾਉਣ ਕਰਕੇ ਬਹੁਤ ਸਾਰੀਆਂ ਸਮੱਸਿਆਵਾਂ ਆ ਰਹੀਆਂ ਹਨ ਅਤੇ ਝੋਨੇ ਅਤੇ ਕਣਕ ਤੋਂ ਮੁਨਾਫ਼ਾ ਵੀ ਘਟ ਰਿਹਾ ਹੈ ਇਸ ਲਈ ਲੋੜ ਹੈ ਫ਼ਸਲੀ ਵਿਭਿੰਨਤਾ ਨੂੰ ਅਪਣਾੳਂੁਦੇ ਹੋਏ ਹੋਰ ਫ਼ਸਲਾਂ ਵੱਲ ਵੀ ਧਿਆਨ ਦਿੱਤਾ ਜਾਵੇ ਹਲਦੀ ਫ਼ਸਲੀ ਵਿਭਿੰਨਤਾ ਵਿਚ ਚੰਗਾ ਯੋਗਦਾਨ ਪਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਹਲਦੀ ਦੀ ਖੇਤੀ ਨਾਲ ਨਾ ਕੇਵਲ ਸਾਡੀ ਆਪਣੀ ਲੋੜ ਪੂਰੀ ਹੋਵੇਗੀ ਸਗੋਂ ਸਾਡੇ ਪ੍ਰਾਂਤ ਅਤੇ ਦੇਸ਼ ਦੇ ਵਪਾਰ ਵਿਚ ਵੀ ਵਾਧਾ ਹੋਵੇਗਾ ਹਲਦੀ ਦੀ ਕਾਸ਼ਤ ਇਸ ਦੀਆਂ ਗੰਢੀਆਂ ਕਰਕੇ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੀਆਂ ਗੰਢੀਆਂ ਦਾ ਪੀਲਾ ਰੰਗ ਇਸ ਵਿਚਲੇ ਖਾਸ ਤੱਤ ਕਰਕਿਊਮਿਨ (1.8 ਤੋਂ 5.4 ਪ੍ਰਤੀਸ਼ਤ) ਕਰਕੇ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਹਲਦੀ ਦੀਆਂ ਗੰਢੀਆਂ ਵਿਚ ਖ਼ਾਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦਾ ਤੇਲ (2.5 ਤੋਂ 7.2 ਪ੍ਰਤੀਸ਼ਤ) ਵੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਨੂੰ ਟਰਮੇਰੋਲ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਹਲਦੀ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਮੁੱਖ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਰਸੋਈ ਵਿਚ ਮਸਾਲੇ ਦੇ ਤੌਰ ‘ਤੇ, ਭੋਜਨ ਪਦਾਰਥਾਂ ਨੂੰ ਸੁਗੰਧੀ ਅਤੇ ਰੰਗ ਦੇਣ ਵਾਸਤੇ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਇਸ ਦੇ ਖ਼ਾਸ ਗੁਣਾਂ ਕਰਕੇ ਇਸ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਦਵਾਈਆਂ ਅਤੇ ਹਾਰ-ਸ਼ਿੰਗਾਰ ਦੇ ਸਮਾਨ ਵਿਚ ਵੀ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ . ਇਸ ਦੇ ਸਹੀ ਵਾਧੇ ਵਿਕਾਸ ਲਈ ਇਸ ਨੂੰ ਗਰਮ ਅਤੇ ਸਿੱਲ੍ਹੇ ਵਾਤਾਵਰਨ ਦੀ ਜ਼ਰੂਰਤ ਪੈਂਦੀ ਹੈ ਪੰਜਾਬ ਵਿਚ ਇਸ ਦੀ ਕਾਸ਼ਤ ਸਾਰੇ ਸੇੇਂਜੂ ਇਲਾਕੇ ਵਿਚ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਜ਼ਿਆਦਾ ਜੈਵਿਕ ਮਾਦੇ ਵਾਲੀਆਂ ਦਰਮਿਆਨੀਆਂ ਤੋਂ ਭਾਰੀਆਂ ਜ਼ਮੀਨਾਂ ਇਸ ਦੀ ਕਾਸ਼ਤ ਲਈ ਜ਼ਿਆਦਾ ਢੁਕਵੀਆਂ ਹਨ ਹਲਦੀ ਦੀ ਫ਼ਸਲ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਪਛੇਤੀ ਕਣਕ ਜਾਂ ਪਿਆਜ਼ ਲਗਾਏ ਜਾ ਸਕਦੇ ਹਨ ਹੇਠ ਲਿਖੀਆਂ ਤਕਨੀਕੀ ਗੱਲਾਂ ਵੱਲ ਧਿਆਨ ਦੇ ਕੇ ਹਲਦੀ ਤੋਂ ਵਧੇਰੇ ਝਾੜ ਲਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਉੱਨਤ ਕਿਸਮਾਂ : ਫ਼ਸਲ ਦੇ ਵਧੇਰੇ ਝਾੜ ਲਈ ਕੇਵਲ ਸਿਫ਼ਾਰਸ਼ ਕੀਤੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਦੀ ਹੀ ਕਾਸ਼ਤ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਪੰਜਾਬ ਵਿਚ ਹਲਦੀ ਦੀ ਕਾਸ਼ਤ ਲਈ ਦੋ ਕਿਸਮਾਂ ਦੀ ਸਿਫ਼ਾਰਸ਼ ਕੀਤੀ ਗਈ ਹੈ ਜਿਨਾਂ ਦਾ ਵੇਰਵਾ ਹੇਠ ਲਿਖੇ ਅਨੁਸਾਰ ਹੈ : ਪੰਜਾਬ ਹਲਦੀ 1: ਹਲਦੀ ਦੀ ਇਸ ਕਿਸਮ ਦੇ ਬੂਟੇ ਦਰਮਿਆਨੀ ਉਚਾਈ ਦੇ ਅਤੇ ਸਿੱਧੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸ ਕਿਸਮ ਦੇ ਬੂਟਿਆਂ ਦੇ ਪੱਤੇ ਹਰੇ, ਦਰਮਿਆਨੇ ਚੌੜੇ ਅਤੇ ਥੋੜ੍ਹੇ ਲੰਬੇ ਆਕਾਰ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸ ਦੀਆਂ ਗੰਢੀਆਂ ਦੇ ਉੱਪਰਲੇ ਛਿਲਕੇ ਦਾ ਰੰਗ ਭੂਰਾ ਜਦੋਂਕਿ ਅੰਦਰਲੇ ਗੁੱਦੇ ਦਾ ਰੰਗ ਗੂੜ੍ਹਾ ਪੀਲਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੱਕਣ ਲਈ ਲੱਗਪਗ 215 ਦਿਨ ਲੈਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤ ਝਾੜ 108 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਪੰਜਾਬ ਹਲਦੀ 2: ਹਲਦੀ ਦੀ ਇਸ ਕਿਸਮ ਦੇ ਬੂਟੇ ਲੰਬੇ ਅਤੇ ਸਿੱਧੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸ ਕਿਸਮ ਦੇ ਬੂਟਿਆਂ ਦੇ ਪੱਤੇ ਹਲਕੇ ਹਰੇ ਅਤੇ ਜ਼ਿਆਦਾ ਚੌੜੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸ ਦੀਆਂ ਗੰਢੀਆਂ ਮੋਟੀਆਂ ਅਤੇ ਲੰਬੀਆਂ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਗੰਢੀਆਂ ਦੇ ਉੱਪਰਲੇ ਛਿਲਕੇ ਦਾ ਰੰਗ ਭੂਰਾ ਅਤੇ ਅੰਦਰਲੇ ਗੁੱਦੇ ਦਾ ਰੰਗ ਪੀਲਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੱਕਣ ਲਈ ਲੱਗਪਗ 240 ਦਿਨ ਲੈਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤ ਝਾੜ 122 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਖੇਤ ਦੀ ਤਿਆਰੀ: ਹਲਦੀ ਇਸ ਦੀਆਂ ਗੰਢੀਆਂ (ਜ਼ਮੀਨੀ ਤਣੇ) ਲਈ ਉਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਗੰਢੀਆਂ ਦੇ ਸਹੀ ਵਾਧੇ- ਵਿਕਾਸ ਲਈ ਜ਼ਮੀਨ ਦਾ ਨਰਮ ਹੋਣਾ ਬਹੁਤ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ ਇਸ ਲਈ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਖੇਤ ਨੂੰ ਦੋ-ਤਿੰਨ ਵਾਰ ਵਾਹ ਕੇ ਅਤੇ ਸੁਹਾਗਾ ਮਾਰ ਕੇ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਤਿਆਰ ਕਰ ਲੈਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਖੇਤ ਦੀ ਤਿਆਰੀ ਸਮੇਂ ਜੇਕਰ ਪਿਛਲੀ ਫ਼ਸਲ ਦੇ ਮੁੱਢ ਅਤੇ ਹੋਰ ਘਾਹ-ਫੂਸ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਖੇਤ ਦੀ ਤਿਆਰੀ ਸਮੇਂ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਕੱਢ ਦੇਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਬੀਜ ਦੀ ਮਾਤਰਾ: ਹਲਦੀ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਗੰਢੀਆਂ ਰਾਹੀ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਵਰਤੀਆਂ ਜਾਣ ਵਾਲੀਆਂ ਗੰਢੀਆਂ ਤਾਜ਼ੀਆਂ ਅਤੇ ਰੋਗ ਰਹਿਤ ਹੋਣੀਆਂ ਚਾਹੀਦੀਆਂ ਹਨ ਇਕ ਏਕੜ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਵਾਸਤੇ 6 ਤੋਂ 8 ਕੁਇੰਟਲ ਤਾਜ਼ੀਆਂ ਗੰਢੀਆਂ ਦੀ ਜ਼ਰੂਰਤ ਪੈਂਦੀ ਹੈ ਜੇਕਰ ਘਰੇਲੂ ਪੱਧਰ ‘ਤੇ ਛੋਟੇ ਪੈਮਾਨੇ ‘ਤੇ ਹਲਦੀ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰਨੀ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਇਕ ਮਰਲਾ (25 ਵਰਗ ਮੀਟਰ) ਰਕਬੇ ਲਈ 4-5 ਕਿਲੋਗ੍ਰਾਮ ਗੰਢੀਆਂ ਕਾਫ਼ੀ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਬਿਜਾਈ ਦਾ ਢੰਗ : ਹਲਦੀ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਤਾਜ਼ੀਆਂ ਅਤੇ ਨਿਰੋਗ ਗੰਢੀਆਂ ਦੀ ਚੋਣ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਹਲਦੀ ਦੀ ਬਿਜਾਈ 1 ਫੁੱਟ (30 ਸੈਂਟੀਮੀਟਰ) ਦੀ ਵਿੱਥ ‘ਤੇ ਲਾਈਨਾਂ ਵਿਚ ਗੰਢੀ ਤੋਂ ਗੰਢੀ ਦਾ ਫ਼ਾਸਲਾ 8 ਇੰਚ (20 ਸੈਂਟੀਮੀਟਰ) ਰੱਖ ਕੇ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਖੇਤ ਵਿਚ 25-36 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਝੋਨੇ ਦੀ ਪਰਾਲੀ ਪਾ ਦੇਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਪਰਾਲੀ ਪਾਉਣ ਨਾਲ ਗੰਢੀਆਂ ਜਲਦੀ ਹਰੀਆਂ ਹੋ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ ਗੰਢੀਆਂ ਦੇ ਹਰੇ ਹੋਣ ਤੱਕ ਖੇਤ ਨੂੰ ਗਿੱਲੀ ਵੱਤਰ ਵਿਚ ਰੱਖਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਬੀਜ ਦੀ ਕੀਮਤ 3000ਤੋਂ 3500 ਰੁਪਏ ਪ੍ਰਤੀ ਕੁਇੰਟਲ ਹੈ ਕੁੱਲ ਖਰਚਾ 35 ਤੋ 40 ਹਜਾਰਾਂ ਆਉਂਦਾ ਹੈ ਜਿਆਦਾ ਖਰਚਾ ਬੀਜ ਅਤੇ ਲੇਵਰ ਤੇ ਆਉਂਦਾ ਹੈ।
Posted by jagjit Singh
Punjab
12-12-2019 07:40 AM
ਕੋਧਰੇ ਦਾ ਬੀਜ ਲੈਣ ਲਈ ਤੁਸੀ 97810 41978 ਨੰਬਰ ਤੇ ਪਰਮਜੀਤ ਜੀ ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰੋ ਜੀ
Posted by Iqbal singh
Punjab
12-12-2019 07:31 AM
ਮੋਤੀਆਂ ਦੀ ਖੇਤੀ ਉਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਹੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜਿਵੇ ਅਸਲ ਰੂਪ ਵਿਚ ਮੋਤੀ ਤਿਆਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸਦੀ ਖੇਤੀ ਤੁਸੀ ਕਿਸੇ ਤਲਾਬ ਵਿਚ ਜਾ ਫਿਰ 100 ਵਰਗ ਫੁੱਟ ਦਾ ਤਲਾਬ ਬਣਾ ਕੇ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਤਲਾਬ ਬਣਾਉਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਦਿੱਲੀ ਤੋਂ ਸਿੱਪੀ ਨੂੰ ਖਰੀਦਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਕਵਾਲਿਟੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਇਕ ਸਿਪੀ ਕਰੀਬ 1.5 ਤੋਂ 5 ਰੁਪਏ ਦੇ ਵਿਚ ਮਿਲਦੀ ਹੈ ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਬੰਦ ਸੀਪੀਆਈ ਵਿਚ ਖਿੱਚ ਲਾ ਕੇ ਉਹਨਾਂ ਵਿੱ.... (Read More)
ਮੋਤੀਆਂ ਦੀ ਖੇਤੀ ਉਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਹੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜਿਵੇ ਅਸਲ ਰੂਪ ਵਿਚ ਮੋਤੀ ਤਿਆਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸਦੀ ਖੇਤੀ ਤੁਸੀ ਕਿਸੇ ਤਲਾਬ ਵਿਚ ਜਾ ਫਿਰ 100 ਵਰਗ ਫੁੱਟ ਦਾ ਤਲਾਬ ਬਣਾ ਕੇ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਤਲਾਬ ਬਣਾਉਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਦਿੱਲੀ ਤੋਂ ਸਿੱਪੀ ਨੂੰ ਖਰੀਦਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਕਵਾਲਿਟੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਇਕ ਸਿਪੀ ਕਰੀਬ 1.5 ਤੋਂ 5 ਰੁਪਏ ਦੇ ਵਿਚ ਮਿਲਦੀ ਹੈ ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਬੰਦ ਸੀਪੀਆਈ ਵਿਚ ਖਿੱਚ ਲਾ ਕੇ ਉਹਨਾਂ ਵਿੱਚ ਮੋਤੀਆਂ ਦਾ ਬੀਜ ਪਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਫਿਰ ਇਹਨਾਂ ਸਿਪੀਆ ਨੂੰ ਬੰਦ ਕਰ ਕੇ ਜਾਲੀ ਦੇ ਸਹਾਰੇ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਸੁੱਟ ਦਿੱਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਫਿਰ ਕੁੱਜ ਮਹੀਨਿਆਂ ਬਾਅਦ ਇਸ ਵਿਚੋਂ ਮੋਤੀ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਮੋਤੀ ਬਣਨ ਵਿਚ 18 ਮਹੀਨਿਆਂ ਦਾ ਸਮਾਂ ਲਗਦਾ ਹੈ ਡਿਜ਼ਾਈਨਰ ਮੋਤੀ ਤਿਆਰ ਕਰਨ ਲਈ ਉਹਨਾਂ ਲਈ ਖਾਸ ਤੌਰ ਤੇ ਸਾਂਚੇ ਬਣਾਏ ਹੁੰਦੇ ਹਨ, ਜਿਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਗਨਪਤੀ,ਬੁੱਧ,ਹੋਲੀ ਕਰਾਸ ਸਾਈਨ ਵਰਗੇ ਡਿਜ਼ਾਈਨਰ ਮੋਤੀ ਤਿਆਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਬਜਾਰ ਵਿਚ ਇਹ ਮੋਤੀ 300 ਰੁਪਏ ਪ੍ਰਤੀ ਨਗ ਦੇ ਰੇਟ ਤੇ ਵਿਕਦੇ ਹਨ ਮੋਤੀਆਂ ਦੀ ਖੇਤੀ ਲਈ ਤੁਸੀ ਟਰੇਨਿਗ ਵੀ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇੰਡਿਅਨ ਕਾਉਂਸਿਲ ਫ਼ਾਰ ਐਗਰੀਕਲਚਰ ਰਿਸਰਚ(ICAR) ਦੀ CIAF ਵਿਗ (ਸੇਂਟਰਲ ਇੰਸਟੀਟਿਊਟ ਆਫ ਫਰੈਸ਼ ਵਾਟਰ ਏਕਵਾਕਲਚਰ) ਮੋਤੀਆਂ ਦੀ ਖੇਤੀ ਲਈ ਫਰੀ ਟਰੇਨਿਗ ਦਿੰਦੀ ਹੈ ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ Manish Vasudev 9417652857 ਜੀ ਮੋਤੀਆ ਦੀ ਖੇਤੀ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਕਰਵਾਉਦੇ ਹਨ ਜੀ

Posted by sukhjinder Brar
Punjab
12-12-2019 07:28 AM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਕਣਕ ਵਿਚ ਸਿਫਾਰਿਸ਼ ਮਾਤਰਾ ਵਿਚ ਖਾਦਾਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰੋ ਕਣਕ ਵਿੱਚ ਕੁੱਲ 110kg ਕਿਲੋ ਯੂਰੀਆ ਪਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਇਸ ਨੂੰ ਤੁਸੀਂ 2-3 ਹਿੱਸਿਆਂ ਵਿੱਚ ਵੰਡ ਕੇ ਪਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਕਣਕ ਵਿੱਚ DAP@55kg ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਪਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਤੁਸੀਂ ਇੱਕ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਡੀ ਏ ਪੀ ਦਾ ਇੱਕ ਗੱਟਾ ਪਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੇਕਰ SSP ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰ ਰਹੇ ਹੋ ਤਾਂ SSP@150kg ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਵਰਤ ਸਕਦੇ ਹ.... (Read More)
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਕਣਕ ਵਿਚ ਸਿਫਾਰਿਸ਼ ਮਾਤਰਾ ਵਿਚ ਖਾਦਾਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰੋ ਕਣਕ ਵਿੱਚ ਕੁੱਲ 110kg ਕਿਲੋ ਯੂਰੀਆ ਪਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਇਸ ਨੂੰ ਤੁਸੀਂ 2-3 ਹਿੱਸਿਆਂ ਵਿੱਚ ਵੰਡ ਕੇ ਪਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਕਣਕ ਵਿੱਚ DAP@55kg ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਪਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਤੁਸੀਂ ਇੱਕ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਡੀ ਏ ਪੀ ਦਾ ਇੱਕ ਗੱਟਾ ਪਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੇਕਰ SSP ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰ ਰਹੇ ਹੋ ਤਾਂ SSP@150kg ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਵਰਤ ਸਕਦੇ ਹੋ ਡੀ ਏ ਪੀ ਨੂੰ ਕਣਕ ਦੇ ਬੀਜ ਨਾਲ ਮਿਲਾ ਕੇ ਬੀਜ ਦਿਓ ਇਸ ਢੰਗ ਨਾਲ ਬੀਜ ਦੇ ਨਾਲ SSP ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਨਹੀਂ ਤਾਂ ਕਣਕ ਦੇ ਲਈ ਜ਼ਮੀਨ ਤਿਆਰ ਕਰਦੇ ਸਮੇਂ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਛਿੱਟਾ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ ਡੀ ਏ ਪੀ ਅਤੇ ਐੱਸ ਐੱਸ ਪੀ ਦੇ ਵਿੱਚੋਂ ਕਿਸੇ ਇੱਕ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰਨੀ ਹੈ, ਜੇਕਰ ਜ਼ਮੀਨ ਵਿੱਚ ਪੋਟਾਸ਼ ਦੀ ਕਮੀ ਹੈ ਤਾਂ ਪੋਟਾਸ਼@20kg ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਵਰਤ ਸਕਦੇ ਹੋ

Posted by jagroop sandhu
Punjab
12-12-2019 06:54 AM
BhaaG isnu rajwa hara chaara te har 3kg dudh lai 1kg wadhya feed pao har 3 mahine baad malap rehat karo
Posted by jagjeet singh
Punjab
12-12-2019 06:41 AM
Jagjeet singh ji jankari lai bohat - bohat dhanwad ji jald hi sadi team valo tuhade nal samparak kita javega, Thankyou.
Posted by mohd kaleem
Uttar Pradesh
12-12-2019 06:39 AM
पुदीना मैंथा के नाम से जानी जाने वाली एक क्रियाशील जड़ी बूटी है पुदीने को मिट्टी की कई किस्मों जैसे दरमियाने से गहरी उपजाऊ मिट्टी, जिसमें पानी को सोखने की क्षमता ज्यादा हो, में उगाया जाता है इसको जल-जमाव वाली मिट्टी में भी उगाया जा सकता है उच्च नमी वाली मिट्टी में यह अच्छे परिणाम देती है इस फसल के लिए मिट्टी .... (Read More)
पुदीना मैंथा के नाम से जानी जाने वाली एक क्रियाशील जड़ी बूटी है पुदीने को मिट्टी की कई किस्मों जैसे दरमियाने से गहरी उपजाऊ मिट्टी, जिसमें पानी को सोखने की क्षमता ज्यादा हो, में उगाया जाता है इसको जल-जमाव वाली मिट्टी में भी उगाया जा सकता है उच्च नमी वाली मिट्टी में यह अच्छे परिणाम देती है इस फसल के लिए मिट्टी का pH 6-7.5 होना चाहिए प्रसिद्ध किस्में:- MAS-1: यह छोटे कद की किस्म है जिसकी ऊंचाई 30-45 सैं.मी. होती है यह बीमारीयों की रोधक और जल्दी पकने वाली किस्म है इसमें मैन्थोल की मात्रा 70-80% होती है इसकी औसतन पैदावार 80 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 50-60 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है Hybrid-77: इसकी ऊंचाई 50-60 सैं.मी. होती है यह किस्म पत्तों के धब्बा रोग और कुंगी के रोधक होती है, और यह जल्दी पकने वाली किस्म है इसमें मैन्थोल की मात्रा 80-85% होती है इसकी औसतन पैदावार 80 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 50-60 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है यह रेतली दोमट मिट्टी में बढ़िया पैदावार देती है औरऐसी शुष्क मौसम में की आवश्यकता होती है Shivalik: यह चीन की खेती से चुनी गई किस्म है यह किस्म उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्रों और उत्तरांचल में अच्छी वृद्धि करती है इसमें मैन्थोल की मात्रा 65-70% होती है इसकी औसतन पैदावार 120 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 72 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है यह किस्म फंगस रोगों से जल्दी प्रभावित होती है EC-41911: यह किस्म रूसी जर्मप्लाज्म से ली गई है यह किस्म पानी की रोधक और आकार में सीधी होती है इसमें मैन्थोल की मात्रा 70%पायी जाती है इसकी औसतन पैदावार 120 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 72 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है इस किस्म से तैयार तेल का प्रयोग विभिन्न व्यंजनों में स्वाद के लिए किया जाता है Gomti: यह किस्म रंग में हल्के लाल रंग की होती है इसकी पैदावार बाकी किस्मों की पैदावार से कम होती है इसमें मैन्थोल की मात्रा 78-80% होती है Himalaya: इसके पत्तों का आकार बाकी किस्मों से बड़ा होता है यह किस्म कुंगी, झुलस, सफेद धब्बे और पत्तों पर धब्बे रोग की रोधक है इसमें मैन्थोल की मात्रा 78-80% होती है इसकी औसतन पैदावार 160 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 80-100 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है Kosi: यह किस्म 90 दिनों में पक जाती है यह किस्म कुंगी, झुलस, सफेद धब्बे और पत्तों के धब्बे रोग की प्रतिरोधक है इसमें मैन्थोल की मात्रा 75-80 प्रतिशत होती है और तेल की पैदावार 80-100 किलोग्राम प्रति एकड़ होती है Saksham: यह किस्म सी वी हिमालय की तरफ से टिशू कल्चर द्वारा तैयार की गई है इसमें मैन्थोल की मात्रा 80% होती है और तेल की पैदावार 90-100 किलोग्राम प्राप्त होती है पुदीने की बिजाई के लिए सुविधाजनक आकार के बैड तैयार करें खेत की तैयारी के समय खेत की अच्छी तरह जोताई करें जैविक खाद जैसे रूड़ी की खाद 100-120 क्विंटल प्रति एकड़ रूड़ी की खाद डालें रूड़ी की खाद के बाद हरी खाद डालें इसकी बिजाई के लिए दिसंबर-जनवरी का समय अनुकूल होता है पौधे के भागों की बिजाई 40 सैं.मी. के फासले पर और पंक्तियों के बीच का फासला 60 सैं.मी होना चाहिए बीज को 2-3 सैं.मी. की गहराई में बोयें पौधे के जड़ वाले भाग को मुख्य खेत में बोया जाता है खेत की तैयारी के समय रूड़ी की खाद 80-120 क्विंटल प्रति एकड़ में डालें और अच्छी तरह मिलायें नाइट्रोजन 58 किलो (यूरिया 130 किलो), फासफोरस 32-40 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 80-100 किलो), पोटाशियम 20 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 33 किलो) प्रति एकड़ में डालें गर्मियों में मॉनसून से पहले जलवायु और मिट्टी के आधार पर 6-9 सिंचाइयां जरूर की जानी चाहिए मॉनसून के बाद 3 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है पहली सिंचाई सितंबर महीने में, दूसरी अक्तूबर में और तीसरी नवंबर महीने में की जानी चाहिए सर्दियों में ज्यादा सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन यदि सर्दियों में बारिश ना पड़े तो एक सिंचाई जरूर देनी चाहिए पौधे 100-120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं जब निचले पत्ते पीले रंग के होने शुरू हो जायें, तब कटाई करें कटाई दराती से और बूटियों को मिट्टी की सतह के 2-3 सैं.मी. ऊपर से निकालें अगली कटाई पहली कटाई के बाद 80 दिनों के अंतराल पर करें ताजी पत्तियों को उत्पाद बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है, धन्यवाद
Posted by mohd kaleem
Uttar Pradesh
12-12-2019 06:28 AM
अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए बिजाई अक्तूबर से नवंबर के मध्य में पूरी कर लें बिजाई में देरी होने से उपज में काफी नुकसान होता है
Posted by ਬਲਜਿੰਦਰ ਸ਼ਿੰਘ
Punjab
12-12-2019 06:27 AM
BhaaG je pashu swere bole teeka shaam nu luwao je shaam nu tan teeka swer nu luwao jine din taarran disan une din teeka lagwao

Posted by विवेकानन्द कोहाड़
Haryana
12-12-2019 06:14 AM
विवेकानन्द जी कृपया आप पानी का टेस्ट करवाए जिस से आपको पानी का TDS पता चल जायेगा जिस से यह अनुमान लगाया जा सकता है कि यह फसल की सिंचाई के लिए अनुकूल है या नहीं धन्यवाद

Posted by manoj prajapati
Uttar Pradesh
12-12-2019 05:57 AM
यदि आप लेयर मुर्गी पालन करना चाहते है तो लेयर फार्मिंग के लिए आपको 50 फीट लंबाई वाली जगह और 20 फीट चौड़ाई वाली जगह की जरूरत होती है यह आपका 1000 वर्ग फुट जगह बन जाती है यहां आप 1000 बच्चों को रख सकते हैं इस प्रकार आप अपने बजट के हिसाब से बच्चों को रख सकते है और यदि आप लेयर का बच्चा अपने फार्म पर तैयार करते है तो आपको बच्च.... (Read More)
यदि आप लेयर मुर्गी पालन करना चाहते है तो लेयर फार्मिंग के लिए आपको 50 फीट लंबाई वाली जगह और 20 फीट चौड़ाई वाली जगह की जरूरत होती है यह आपका 1000 वर्ग फुट जगह बन जाती है यहां आप 1000 बच्चों को रख सकते हैं इस प्रकार आप अपने बजट के हिसाब से बच्चों को रख सकते है और यदि आप लेयर का बच्चा अपने फार्म पर तैयार करते है तो आपको बच्चा अंडे देने तक 160—170 रूप्ये प्रति बच्चे के हिसाब से खर्चा आएगा यदि आप तैयार बच्चा लेकर आते है तो वो आपको 205—210 रूप्ये प्रति बच्चे के हिसाब से पड़ेगा फिर आप उस हिसाब से इनको खरीद सकते है.
Posted by Mandeep Singh
Punjab
12-12-2019 05:37 AM
Mandeep ji tuci Agrimin, Bovimin-B, Minfa gold ehna vicho koi v powder vart skde ho.

Posted by jaggi
Punjab
12-12-2019 05:31 AM
jaggi ji kirpa karke swal vistar nal pucho ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake.dhanwad
Posted by Hargbinder singh
Punjab
12-12-2019 05:15 AM
ਹਰਗਬਿੰਦਰ ਹੀ ਕਣਕ ਵਿਚ ਸਿਰਫ ਜਰੂਰੀ ਮਾਤਰਾ ਵਿਚ ਖਾਦਾਂ ਹੀ ਪਾਓ ਇਸਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਤੁਹਾਨੂੰ ਕੁਛ ਹੋਰ ਪਾਉਣ ਦੀ ਲੋੜ ਨਹੀਂ ਹੈ ਇਹ ਖਾਦਾਂ ਦੇ ਨਾਲ ਹੀ ਵਧੀਆ ਝਾੜ ਦਿੰਦੀ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ
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