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Posted by Harsh Deep Singh
Punjab
15-12-2019 07:46 AM
Punjab
12-16-2019 09:18 PM
Shrimaan ji, khas khas di biaji di sifarish Punjab vich Sarkar vaslo nahi kiti jandi hai,is di bijai Punjab vich legal nahi hai, dhanwad
Posted by ravi
Madhya Pradesh
15-12-2019 07:42 AM
Punjab
12-15-2019 08:14 AM
श्रीमान जी लसहुन में एम45 को 500 ग्राम प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे कर सकते है
Posted by ਵਿਪਨ ਕੁਮਾਰ
Punjab
15-12-2019 07:41 AM
Punjab
12-16-2019 09:43 PM
Punjab Baramasi: ਇਸ ਦੀਆਂ ਟਹਿਣੀਆਂ ਲਮਕਵੀਆਂ ਅਤੇ ਜ਼ਮੀਨ ਨੂੰ ਛੂੰਹਦੀਆਂ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਇਸਦੇ ਫਲ ਪੀਲੇ ਰੰਗ ਦੇ, ਗੋਲ ਅਤੇ ਸਮਤਲ ਆਕਾਰ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸਦੇ ਫਲ ਬੀਜ ਤੋਂ ਬਿਨਾਂ ਅਤੇ ਰਸੀਲੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸ ਕਿਸਮ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 84 ਕਿਲੋ ਪ੍ਰਤੀ ਰੁੱਖ ਹੁੰਦਾ ਹੈ Eureka: ਇਸ ਕਿਸਮ ਦਾ ਰੁੱਖ ਦਰਮਿਆਨਾ ਮਜ਼ਬੂਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸਦੇ ਫਲ ਦਾ ਛਿਲਕਾ ਪੀਲੇ ਰੰਗ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਰਸ ਜ਼ਿਆਦਾ ਖੱਟਾ ਅਤੇ ਸੁਆਦ ਹ.... (Read More)
Punjab Baramasi: ਇਸ ਦੀਆਂ ਟਹਿਣੀਆਂ ਲਮਕਵੀਆਂ ਅਤੇ ਜ਼ਮੀਨ ਨੂੰ ਛੂੰਹਦੀਆਂ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਇਸਦੇ ਫਲ ਪੀਲੇ ਰੰਗ ਦੇ, ਗੋਲ ਅਤੇ ਸਮਤਲ ਆਕਾਰ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸਦੇ ਫਲ ਬੀਜ ਤੋਂ ਬਿਨਾਂ ਅਤੇ ਰਸੀਲੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸ ਕਿਸਮ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 84 ਕਿਲੋ ਪ੍ਰਤੀ ਰੁੱਖ ਹੁੰਦਾ ਹੈ Eureka: ਇਸ ਕਿਸਮ ਦਾ ਰੁੱਖ ਦਰਮਿਆਨਾ ਮਜ਼ਬੂਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸਦੇ ਫਲ ਦਾ ਛਿਲਕਾ ਪੀਲੇ ਰੰਗ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਰਸ ਜ਼ਿਆਦਾ ਖੱਟਾ ਅਤੇ ਸੁਆਦ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸਦੇ ਫਲ ਅਗਸਤ ਮਹੀਨੇ ਵਿੱਚ ਪੱਕਦੇ ਹਨ Punjab Galgal: ਇਸ ਕਿਸਮ ਦਾ ਪੌਦਾ ਮਜ਼ਬੂਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਜਿਸਦੇ ਪੱਤੇ ਹਰੇ ਰੰਗ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸਦੇ ਫਲ ਦਰਮਿਆਨੇ ਆਕਾਰ ਦੇ ਅਤੇ ਅੰਡਾਕਾਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸਦਾ ਰਸ ਜ਼ਿਆਦਾ ਖੱਟਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਹਰ ਫਲ ਦੇ ਵਿੱਚ 8-10 ਬੀਜ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸਦੇ ਫਲ ਨਵੰਬਰ-ਦਸੰਬਰ ਮਹੀਨੇ ਵਿੱਚ ਪੱਕਦੇ ਹਨ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 80-100 ਕਿਲੋ ਪ੍ਰਤੀ ਰੁੱਖ ਹੁੰਦੀ ਹੈ PAU Baramasi: ਇਸ ਕਿਸਮ ਦੇ ਫਲਾਂ ਦੇ ਪੱਕਣ ਦਾ ਸਹੀ ਸਮਾਂ ਜੁਲਾਈ ਦਾ ਪਹਿਲਾ ਹਫਤਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਵਿੱਚ ਬਹੁਤ ਘੱਟ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਬੀਜ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸਦੀ ਔਸਤਨ ਪੈਦਾਵਾਰ 84 ਕਿਲੋ ਪ੍ਰਤੀ ਰੁੱਖ ਹੁੰਦੀ ਹੈ PAU Baramasi-1: ਇਸ ਕਿਸਮ ਦੇ ਫਲਾਂ ਦੇ ਪੱਕਣ ਦਾ ਸਹੀ ਸਮਾਂ ਨਵੰਬਰ ਦਾ ਆਖਰੀ ਹਫਤਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸਦੇ ਫਲ ਬੀਜ ਰਹਿਤ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸਦੀ ਔਸਤਨ ਪੈਦਾਵਾਰ 80 ਕਿਲੋ ਪ੍ਰਤੀ ਪੌਦਾ ਹੁੰਦੀ ਹੈ
Posted by जोगीराम पटेल
Chattisgarh
15-12-2019 07:41 AM
Punjab
12-16-2019 03:34 PM
श्रीमान जी, यह फंगस का हमला हुआ है, आप इसकी रोकथाम के लिए इसमें carbendazim @ 400 gm या mancozeb @ 400 gm को 150 लीटर पानी में मिला कर प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें, धन्यवद
Posted by akash singh
Punjab
15-12-2019 07:24 AM
Punjab
12-17-2019 09:44 AM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਵਾਧੂ ਪਾਣੀ ਨੂੰ ਖੇਤੀ ਵਿੱਚੋ ਕੱਢ ਦਿਓ ਅਤੇ ਤੁਸੀ sulphur 80% @ 3kg ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਛਿੱਟਾ ਦਿਓ, ਧਨੀਵਾਦ
Posted by देवराजधाकड
Madhya Pradesh
15-12-2019 07:10 AM

?

Punjab
12-16-2019 03:32 PM
श्रीमान जी, कृपया आप बताये के आप इसके बारे में क्या जानकारी लेना चाहते हैं, ताकि आपको इसके बारे में उच्चित जानकारी दी जा सके, धन्यवाद
Posted by Chetan Singh
Uttar Pradesh
15-12-2019 06:51 AM
Punjab
12-15-2019 08:23 AM
श्री मान मोटे आलुओं की पैदावार के लिए 13:0:45 की 2 किलो और मैगनीश्यिम ई डी टी ए 100 ग्राम प्रति एकड़ की स्प्रे करें बीमारियों के हमले को रोकने के लिए फंगसनाशी प्रॉपीनेब 3 ग्राम प्रति लीटर पानी डालें आलुओं का आकार और गिणती बढ़ाने के लिए हयूमिक एसिड (12 प्रतिशत) 3 ग्राम + एम ए पी 12:61:0 की 8 ग्राम या डी ए पी 15 ग्राम प्रति लीटर की स्.... (Read More)
श्री मान मोटे आलुओं की पैदावार के लिए 13:0:45 की 2 किलो और मैगनीश्यिम ई डी टी ए 100 ग्राम प्रति एकड़ की स्प्रे करें बीमारियों के हमले को रोकने के लिए फंगसनाशी प्रॉपीनेब 3 ग्राम प्रति लीटर पानी डालें आलुओं का आकार और गिणती बढ़ाने के लिए हयूमिक एसिड (12 प्रतिशत) 3 ग्राम + एम ए पी 12:61:0 की 8 ग्राम या डी ए पी 15 ग्राम प्रति लीटर की स्प्रे पौधे की वृद्धि के समय करें
Posted by शिव कुमार
Uttar Pradesh
15-12-2019 06:41 AM
Punjab
12-15-2019 08:16 AM
श्री मान आलू में झुलसा रोग की रोकथाम के लिए M-45@500 gmप्रती एकड़ सप्रे कर सकते हो
Posted by himanshu
Haryana
15-12-2019 06:30 AM
Maharashtra
01-29-2020 09:24 AM
Himanshu ji, ap apne phool ko local shops par bech sakte hain, yan fir ap ise kisi dhaarmik sthan ke bhar bech sakte hain, iske ilawa ap sajawti dukaan par bhi iski bikri lar sakte hain, dhanywad
Posted by prabhjot singh
Punjab
15-12-2019 06:10 AM
Punjab
12-15-2019 08:42 AM
Hanji tuci uss nu Flukarid-DS bolus de skde ho, ehh goli gaban lai safe hundi hai.
Posted by prabhjot singh
Punjab
15-12-2019 06:08 AM
Punjab
12-15-2019 08:43 AM
Hanji Prabhjot ji tuci uss nu Bendykind plus bolus de skde ho, iss nal vdia deworming howegi.
Posted by prabhjot singh
Punjab
15-12-2019 06:05 AM
Punjab
12-15-2019 08:45 AM
ਤੁਸੀ 250 ਗ੍ਰਾਮ ਗੁੜ, 250 ਗ੍ਰਾਮ ਗੁਲਕੰਦ, 100 ਗ੍ਰਾਮ ਸੌੰਫ, 100 ਗ੍ਰਾਮ ਸੁਕੇ ਆਵਲੇ ਤੇ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਅਜਵਾਇਨ ਉਬਾਲ ਕੇ ਠਾਰ ਕੇ 5 ਦਿਨ ਦੇਣੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ Enerdyna liquid 100-100ml ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ, Lactomax tablet 10-10 ਗੋਲੀਆਂ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ, ਬਾਕੀ ਉਸ ਨੂੰ ਰੋਜਾਨਾ 35-40 ਕਿਲੋ ਹਰਾ ਚਾਰਾ ਦਿਓ, ਫਿਰ ਤੁਸੀ 6-7 ਦਿਨ ਬਾਦ ਫੀਡ, ਖਲ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ ..
Posted by prabhjot singh
Punjab
15-12-2019 06:02 AM
Punjab
12-15-2019 08:45 AM
ਤੁਸੀ 250 ਗ੍ਰਾਮ ਗੁੜ, 250 ਗ੍ਰਾਮ ਗੁਲਕੰਦ, 100 ਗ੍ਰਾਮ ਸੌੰਫ, 100 ਗ੍ਰਾਮ ਸੁਕੇ ਆਵਲੇ ਤੇ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਅਜਵਾਇਨ ਉਬਾਲ ਕੇ ਠਾਰ ਕੇ 5 ਦਿਨ ਦੇਣੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ Enerdyna liquid 100-100ml ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ, Lactomax tablet 10-10 ਗੋਲੀਆਂ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ, ਬਾਕੀ ਉਸ ਨੂੰ ਰੋਜਾਨਾ 35-40 ਕਿਲੋ ਹਰਾ ਚਾਰਾ ਦਿਓ, ਫਿਰ ਤੁਸੀ 6-7 ਦਿਨ ਬਾਦ ਫੀਡ, ਖਲ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ ..
Posted by RAVINDRA Aharwa
Madhya Pradesh
15-12-2019 06:00 AM
Punjab
12-16-2019 09:15 PM
तिलहनी फसलों के लिए हल्की से भारी ज़मीनें अच्छी होती हैं राया हर तरह की ज़मीन में उगाया जा सकता है पर तोरिये के लिए भारी ज़मीनें चाहिए तारामीरा के लिए आमतौर पर रेतली से मैरा रेतली ज़मीनें अच्छी होती हैं सीड बैड पर बोयी फसल अच्छी अंकुरित होती है ज़मीन को देसी हल से दो या तीन बार जोताई करें और प्रत्येक जोताई के बाद .... (Read More)
तिलहनी फसलों के लिए हल्की से भारी ज़मीनें अच्छी होती हैं राया हर तरह की ज़मीन में उगाया जा सकता है पर तोरिये के लिए भारी ज़मीनें चाहिए तारामीरा के लिए आमतौर पर रेतली से मैरा रेतली ज़मीनें अच्छी होती हैं सीड बैड पर बोयी फसल अच्छी अंकुरित होती है ज़मीन को देसी हल से दो या तीन बार जोताई करें और प्रत्येक जोताई के बाद सुहागा फेरें बीजों के एकसार अंकुरित होने के लिए बैड नर्म, गीले और समतल होने चाहिए बुंदेलखंड और आगरा क्षेत्रों के लिए, बिजाई के लिए सितंबर का आखिरी सप्ताह उचित समय होता है जबकि बाकी के क्षेत्रों के लिए 15 अक्तूबर तक बिजाई पूरी कर लें असिंचित क्षेत्रों के लिए बिजाई का उपयुक्त समय सितंबर के दूसरे पखवाड़ा होता है तारामीरा-सरसों की बिजाई के लिए पंक्ति से पंक्ति का फासला 30 सैं.मी. और पौधे से पौधे का फासला 10 से 15 सैं.मी. रखें गोभी सरसों की बिजाई के लिए पंक्तियों का फासला 45 सैं.मी. और पौधे से पौधे का फासला 10 सैं.मी. रखें बीजों को 4-5 सैं.मी. की गहराई में बोयें बिजाई के लिए सीड ड्रिल विधि का प्रयोग करें सिंचित और असिंचित क्षेत्रों के लिए 2-2.5 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बिजाई के 3-4 सप्ताह पहले 8-10 किलो गली हुई रूड़ी की खाद या अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर मिट्टी में मिलायें खादों की उचित मात्रा के लिए मिट्टी की जांच करना जरूरी है सिंचित हालातों में नाइट्रोजन 50 किलो (यूरिया 110 किलो), फासफोरस 24 किलो (सुपर फास्फेट 150 किलो) और पोटाश 24 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 40 किलो) प्रति एकड़ में डालें बिजाई के समय नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस की पूरी मात्रा डालें और बाकी बची नाइट्रोजन पहली सिंचाई के समय डालें फासफोरस के लिए, यदि एस एस पी का प्रयोग ना किया गया हो तो बिजाई के समय सल्फर 16 किलो प्रति एकड़ में डालें यदि डी ए पी का प्रयोग ना किया गया हो तो जिप्सम 80 किलो प्रति एकड़ में डालें थायोरिया 0.05 प्रतिशत की स्प्रे करने से अनाज की उपज में 10-15 प्रतिशत की वृद्धि होती है
Posted by Kulveer Pundeer
Uttar Pradesh
15-12-2019 05:03 AM
Punjab
12-15-2019 08:19 AM
श्री मान गेंहूं की बिजाई सही समय पर करनी जरूरी है बारानी क्षेत्रों के लिए बिजाई नवंबर के पहले से तीसरे सप्ताह में पूरी कर लें, जबकि सिंचित क्षेत्रों में बिजाई अक्तूबर से 15 नवंबर तक पूरी कर लें सामान्य बिजाई के लिए कतारों में 20 सैं.मी. के फासले की सलाह दी जाती है यदि बिजाई देरी से करनी हो तो 18 सैं.मी. का फासला होन.... (Read More)
श्री मान गेंहूं की बिजाई सही समय पर करनी जरूरी है बारानी क्षेत्रों के लिए बिजाई नवंबर के पहले से तीसरे सप्ताह में पूरी कर लें, जबकि सिंचित क्षेत्रों में बिजाई अक्तूबर से 15 नवंबर तक पूरी कर लें सामान्य बिजाई के लिए कतारों में 20 सैं.मी. के फासले की सलाह दी जाती है यदि बिजाई देरी से करनी हो तो 18 सैं.मी. का फासला होना चाहिए 4-5 सैं.मी. की गहराई में बिजाई करनी चाहिए बीज ड्रिल,बुरकाव विधि ,जीरो टिलेज़ ड्रिल,रोटावेटर से गेंहू की बिजाई कर सकते है मिट्टी की जांच के आधार पर खादें डालें मिट्टी की जांच के अनुसार ही हम मिट्टी में आवश्यक खादों की मात्रा दे सकते हैं सिंचित क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 60 किलो (यूरिया 130 किलो), फासफोरस 24 किलो (एस एस पी 150 किलो), पोटाश 12 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 20 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी नाइट्रोजन को पहली सिंचाई के समय डालें बारानी क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 24 किलो (यूरिया 52 किलो), फासफोरस 12 किलो (एस एस पी 75 किलो), पोटाश 8 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 15 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोज, फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें सिंचित क्षेत्रों में पिछेती बिजाई के लिए, नाइट्रोजन 50 किलो (यूरिया 110 किलो), फासफोरस 12 किलो (एस एस पी 75 किलो), पोटाश 16 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 27 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन की दो तिहाई मात्रा बिजाई के 35-40 दिनों के बाद डालें यह पाया गया है कि जिंक सल्फेट 10 किलो प्रति एकड़ में डालने से उपज में वृद्धि होती है जिंक की कमी को पूरा करने के लिए जिंक सल्फेट 0.5 प्रतिशत की फोलियर स्प्रे करें 15 दिनों के अंतराल पर दो से तीन स्प्रे करें अच्छी शाखाएं और उपज के लिए 19:19:19 घुलनशील खादें 5 ग्राम + स्टिकर 0.5 मि.ली. को प्रति लीटर पानी में मिलाकर बिजाई के 30 दिनों के बाद स्प्रे करें
Posted by जसवन्त सिंह चौहान
Rajasthan
15-12-2019 02:19 AM
Punjab
12-16-2019 03:39 PM
श्रीमान जी, सरसों के अच्छे विकास के लिए आप इसमें सिफारशी खादों का इस्तेमाल करें, सिंचित हालातों में 20 किलो नाइट्रोजन (40 किलो यूरिया) और 12-16 किलो फासफोरस (सुपर फासफेट 75 किलो) का प्रयोग करें पोटाश्यिम का प्रयोग केवल मिट्टी में इसकी कमी होने पर ही करें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस की पूरी मात्रा बिजाई के स.... (Read More)
श्रीमान जी, सरसों के अच्छे विकास के लिए आप इसमें सिफारशी खादों का इस्तेमाल करें, सिंचित हालातों में 20 किलो नाइट्रोजन (40 किलो यूरिया) और 12-16 किलो फासफोरस (सुपर फासफेट 75 किलो) का प्रयोग करें पोटाश्यिम का प्रयोग केवल मिट्टी में इसकी कमी होने पर ही करें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें और नाइट्रोजन की बाकी बची मात्रा पहली सिंचाई के समय डालें दानों की उपज बढ़ाने के लिए 10-15 प्रतिशत के साथ थियोरिया 0.05 प्रतिशत की स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by harman
Punjab
15-12-2019 12:39 AM
Punjab
01-14-2020 02:36 PM
Harman ji isda rate 300-350 rupaye prati quintal de hisab nal chal reha hai,dhanwad
Posted by harman
Punjab
15-12-2019 12:36 AM

?

Punjab
12-15-2019 08:17 AM
कृपया आप अपना सवाल विस्तार से पूछें ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by harman
Punjab
15-12-2019 12:17 AM

?

Punjab
12-15-2019 08:46 AM
Harman ji kirpa krke apna swal vistar nal pusho ji tuci ki jankari lena chahunde ho tan jo tuhanu sahi jankari diti ja ske.
Posted by mukh ram
Punjab
14-12-2019 11:16 PM
Punjab
12-15-2019 08:54 AM
Mukhram ji Gir cow lene ke liye aap Shubham Sharma 7589086279 Shagun Dairy Farm se sampark kr skte hai..
Posted by Meena Vikash
Madhya Pradesh
14-12-2019 11:05 PM
Punjab
12-15-2019 08:18 AM
श्रीमान जी कृपया आप इसकी फोटो भेंजे ताकि आपको पूरी जानकारी दी जा सके
Posted by TAJINDER singh
Punjab
14-12-2019 10:51 PM
Punjab
12-16-2019 09:43 AM
Shrimaan ji, tuc shagun @ 200 gm nu 150 liter pani vich mila ke spray barish rukan de baad kar sakde ho, dhanwad
Posted by Malaram Bhinchar
Rajasthan
14-12-2019 10:47 PM
Punjab
12-16-2019 09:42 AM
श्रीमान जी, कृपया आप यह बताये के अपने इसकी बिजाई कब की थी और इस कितनी खाद व् सिंचाई दी है, ताकि आपको इसके बारे में उच्चित जानकारी दी जा सके, धन्यवाद
Posted by ravi yadav
Uttar Pradesh
14-12-2019 10:17 PM
Maharashtra
12-15-2019 08:55 AM
Biofloc मछली पालन की नई तकनीक है, जिसका invention Dr.YORRAM AVNIMELECH जो कि ISRAEL के है जहाँ पानी की कमी हैै उस परस्तिथि में मछली पालन कैसे किया जाये, उस तकनीक का invention किया पर फ़िलहाल भारत के कई राज्यों में किसान इस तकनीक का इस्तेमाल करके मछली पालन कर रहे हैं इसमें हम थोड़ी जगह में जहाँ सिर्फ 4 मीटर का टैंक लगता है और 1 मीटर इसकी लम्बाई होत.... (Read More)
Biofloc मछली पालन की नई तकनीक है, जिसका invention Dr.YORRAM AVNIMELECH जो कि ISRAEL के है जहाँ पानी की कमी हैै उस परस्तिथि में मछली पालन कैसे किया जाये, उस तकनीक का invention किया पर फ़िलहाल भारत के कई राज्यों में किसान इस तकनीक का इस्तेमाल करके मछली पालन कर रहे हैं इसमें हम थोड़ी जगह में जहाँ सिर्फ 4 मीटर का टैंक लगता है और 1 मीटर इसकी लम्बाई होती है मतलब की 10,000 लीटर इसमें हम अपना मछली पालन शुरू करके 1100-1300 किलो fish बना सकते हैं इसमें ज़्यादा पानी की ज़रूरत नहीं पड़ती और ना ही ज़्यादा जगह की ज़रूरत होती है, इसमें 650 -700 रूपये बिकने वाली मछलियां हैं वह हम इसमें डालते हैं और यह मछलियां 6 से 7 महीने तक बिकने योग्य हो जाती है, shrimp farming मतलब की झींगा इसका culture period -90 दिन का होता है BFT टैंक में आपको C:N ratio की सहायता से आपको बढ़िया बैक्टीरिया maintain करना होता है, और drainage की सहायता से sludge removal किया जाता है अगर आपका मैनेजमेंट एकदम सटीक रहा तो 0 % प्रतिशत पानी अदला-बदली किये बिना culture पूरा किया जा सकता है आपको उचित blower की सहायता से DO (dissolved oxygen ) maintain करने की ज़रूरत पड़ती है C:N ratio मतलब की कार्बन: नाइट्रोजन ratio अनुपात बनाएं रखना पड़ता है कार्बन जिससे की बैक्टीरिया (हेट्रोट्रॉपिक बैक्टीरिया) ठीक से काम करके नाइट्रोजन को कम कर सके क्योंकि नाइट्रोजन का एक हिस्सा जो कि non ionised Ammonia [NH3] जो मछली के लिए जानलेवा होता हैैै अधिक जानकारी के लिए 9096843382 पर फ़ोन कीजिये.
Posted by Harjinder singh
Punjab
14-12-2019 10:08 PM
Punjab
12-16-2019 09:30 AM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਤੁਸੀ NPK 005234 @ 1kg ਨੂੰ 150 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਰਾਤੀ ਐਕਟ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਵਰਤ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਮੋਟੇ ਆਲੂਆਂ ਦੀ ਪੈਦਾਵਾਰ ਲਈ, 13:0:45 ਦੀ 2 ਕਿਲੋ ਅਤੇ ਮੈਗਨੀਸ਼ੀਅਮ ਈ ਡੀ ਟੀ ਏ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੀ ਸਪਰੇ ਕਰਨ ਦੀ ਸਿਫਾਰਿਸ਼ ਨਹੀਂ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by sachin chaudhary
Bihar
14-12-2019 10:04 PM
Punjab
12-16-2019 09:34 AM
Shrimaan ji, kripya ap apna sawal victhar se pcuehin ke ap dhaan ki fasal ugana chaht hain, ya dhaan ki fasal ek baad koi fasal lagane ki baat kar rahe hain, taki apko iske bare mein ucchit jankari di ja sake, dhanywad
Posted by sachin chaudhary
Bihar
14-12-2019 10:03 PM
Punjab
12-16-2019 09:35 AM
श्रीमान जी, इस फसल को मिट्टी की अलग अलग किस्मों, जिनमें पानी सोखने की क्षमता कम होती है और जिनकी पी एच 5.0 से 9.5 के बीच में होती है, में भी उगाया जा सकता है धान की पैदावार के लिए रेतली से लेकर गारी मिट्टी तक, और गारी से चिकनी मिट्टी जिसमें पानी को सोखने की क्षमता कम होती है इस फसल के लिए अच्छी मानी जाती है Jaya: यह छोटे क.... (Read More)
श्रीमान जी, इस फसल को मिट्टी की अलग अलग किस्मों, जिनमें पानी सोखने की क्षमता कम होती है और जिनकी पी एच 5.0 से 9.5 के बीच में होती है, में भी उगाया जा सकता है धान की पैदावार के लिए रेतली से लेकर गारी मिट्टी तक, और गारी से चिकनी मिट्टी जिसमें पानी को सोखने की क्षमता कम होती है इस फसल के लिए अच्छी मानी जाती है Jaya: यह छोटे कद की और अधिक उपज देने वाली किस्म गर्दन तोड़ के प्रतिरोधक है यह किस्म 142 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दाने बड़े और लंबे होते हैं इसकी औसतन पैदावार 26 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Chakia 59: यह किस्म कम जल जमाव वाले हालातों में उगाने के लिए उपयुक्त है Govind: यह किस्म पंतनगर द्वारा विकसित की गई है यह किस्म 105 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है Indrasan: यह तराई क्षेत्रों की प्रसिद्ध किस्म है Mahsud: यह किस्म निचले क्षेत्रों में बारानी स्थितियों में उगाने के लिए उपयुक्त है Majhera 3: यह लंबी किस्म सूखे को सहनेयोग्य है और ऊंचे क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है Nagina 22: यह ऊंचे क्षेत्रों में बारानी हालातों में उगाने के लिए उपयुक्त है इसके दाने छोटे और मोटे होते हैं Narendra-1 and Narendra-2: यह किस्म 105 और 115 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है Pant Dhan 6: यह किस्म निम्न और मध्यम ऊंचाई वाले पहाड़ी क्षेत्रों में रोपाई के लिए उपयुक्त है Saket 4: यह अगेते समय की किस्म है और 115 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह यू पी की सबसे प्रसिद्ध किस्म है T9: यह देरी से बोयी जाने वाली सुगंधित किस्म है इसके दाने बेलनाकार होते हैं VL Dhan 16: यह निम्न और मध्यम क्षेत्रों में रोपाई के लिए उपयुक्त किस्म है VL 206: यह लंबी किस्म निम्न और मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है Usar 1: यह किस्म कानपुर में विकसित की गई यह क्षारीय और लवणीय मिट्टी में खेती करने के लिए उपयुक्त है बासमती किस्में Taraori Basmati: यह सिंचित क्षेत्रों में अगेती बिजाई के लिए उपयुक्त है यह किस्म 145-155 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Haryana Basmati no 1: यह अर्द्ध छोटे कद की किस्म है और सिंचित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है यह किस्म 140 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 16 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa Basmati 1121, Pusa Basmati 1, CSR 30, Shabnam.शुष्क खेतों को अच्छा बनाने, नदीन रहित और सेहतमंद वृद्धि के लिए ग्लाफोसेट डालनी चाहिए गेहूं की कटाई के बाद ज़मीन पर हरी खाद के तौर पर मई के पहले सप्ताह ढैंचा (बीज दर 20 किलोग्राम प्रति एकड़), या सन (बीज दर 20 किलोग्राम प्रति एकड़) या लोबीया (बीज दर 12 किलोग्राम प्रति एकड़) की बिजाई करनी चाहिए जब फसल 6 से 8 सप्ताह की हो जाए तो इसे खेत में कद्दू करने से एक दिन खेत में ही जोत देना चाहिए इस तरह प्रति एकड़ 25 किलो नाइट्रोजन खाद की बचत होती है भूमि को समतल करने के लिए लेज़र लेवलर का प्रयोग किया जाता है इसके बाद खेत में पानी खड़ा कर दें ताकि भूमि के अंदर ऊंचे नीचे स्थानों की पहचान हो सके इस तरह पानी के रसाव के कारण पानी की होने वाले बर्बादी को कम किया जा सके यू पी के सिंचित और निम्न बारानी क्षेत्रों में मध्य जून से शुरूआती जुलाई तक का समय उपयुक्त होता है पौधे की गहराई 2-3 सैं.मी. होनी चाहिए फासला बनाकर लगाने से पौधे ज्यादा पैदावार देते हैं उपजाऊ मिट्टी में 20 सैं.मी. x 15 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें जबकि हल्की मिट्टी में रोपाई के लिए 15 सैं.मी. x 10 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें जल जमाव वाले क्षेत्रों में 20 x 20 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें सिंचित और कम बारानी क्षेत्रों में रोपाई ढंग प्रयोग किया जाता है रोपाई के लिए 25-30 दिनों के पौधों का प्रयोग करें जल जमाव वाले क्षेत्रों में 30-35 दिनों के पौधे रोपाई के लिए प्रयोग करें ऊंचे क्षेत्रों में, शुष्क और गीली मिट्टी में रोपाई ढंग का प्रयोग करें एक एकड़ खेत में 6-8 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बिजाई से पहले 10 लीटर पानी में 20 ग्राम कार्बेनडाज़िम $ 1 ग्राम स्ट्रैप्टोसाईक्लिन घोल लें और इस घोल में बीजो को 8-10 घंटे तक भिगोयें उसके बाद बीजों को छांव में सुखाएं और फिर बिजाई के लिए प्रयोग करें फसल को जड़ गलन रोग से बचाने के लिए नीचे दिए गए फंगसनाशी का प्रयोग किया जा सकता है पहले रासायनिक फंगीनाशी का प्रयोग करें फिर बीजों का टराईकोडरमा के साथ उपचार करें वैट बैड नर्सरी : यह तकनीक उन क्षेत्रों में अपनाई जाती है जहां पर पानी ज्यादा मात्रा में पाया जाता है नर्सरी का 1/10 हिस्सा दूसरे खेत में लगाया जाता है इसकी बिजाई छींटे द्वारा की जाती है यहां पर खेत की जोताई और खेत को समतल किया जाता है बैडों पर कईं दिन तक नमी बनाए रखनी चाहिए पानी से खेत को ज्यादा ना भरें जब नर्सरी 2 सैं.मी. से वृद्धि कर जाए तब पानी को खेत में लगाते रहना चाहिए बिजाई के 15 दिन बाद 26 किलो यूरिया डालना चाहिए जब नर्सरी 25-30 सैं.मी. तक लंबी हो जाए तब उसे 15-21 दिन बाद दूसरे खेत में लगा देना चाहिए और खेत को लगातार पानी लगाते रहना चाहिए सूखे बैड वाली नर्सरी : यह तकनीक शुष्क क्षेत्रों में अपनाई जाती है जो बैड बनाया जाता है वो बिजाई वाले खेत का 1/10 हिस्से में बीज बोया जाता है बैड का आकार सीमित होना चाहिए और उसकी ऊंचाई 6-10 से.मी होनी चाहिए धान का आधा जला हुआ छिलका बैड पर बिखेर देना चाहिए इससे जड़ें मजबूत होती हैं सही समय पर सिंचाई करते रहना चाहिए और नमी बनाए रखना चाहिए ताकि नए पौधे नष्ट ना हों तत्वों की पूर्ति के लिए खाद डालना जरूरी है मॉडीफाईड मैट नर्सरी : यह नर्सरी लगाने का एक ऐसा तरीका है जिसमें कम जगह और कम बीजों की जरूरत होती है यह नर्सरी किसी भी जगह पर बनाई जा सकती हैं जहां पर समतल जगह हो और पानी की सुविधा हो इसकी पनीरी लगाने के लिए 1% खेत की जरूरत होती है 4 से.मी की सतह पर नए पौधे लगाए जाते हैं इसे बनाने के लिए 1 मीटर चौड़े और 20-30 मीटर लंबे जमीन के टुकड़े की जरूरत होती है इसके ऊपर बिछाने के लिए पॉलीथीन और केले के पत्तों की जरूरत होती है इसके इलावा एक लकड़ी का बकसा जो कि 4 से.मी गहरा होता हैं मिट्टी के मिश्रण से भरा होता है बीजों को इसके अंदर रख देना चाहिए और फिर बीजों को सूखी मिट्टी के साथ ढक देना चाहिए इसके बाद पानी का छिड़काव कर देना चाहिए लकड़ी के बक्से को नमी देते रहना चाहिए बिजाई से 11-14 दिनों के बाद पौध तैयार हो जाती है जब पौध तैयार हो जाती है तब मैट से पौध को दूसरे खेत में रोपण कर दिया जाता है फासला: पौधों का फासला 20x20 सैं.मी. या 25x25 सैं.मी. होना चाहिए पनीरी लगाने का ढंग 1. कद्दू करके लगाई जाने वाली पनीरी : आमतौर पर पंक्ति में लगाए जाने वाले पौधे 20x15 सैं.मी. दूरी पर लगाए जाते हैं और देरी से लगाई जाने वाली पनीरी 15x15 सैं.मी. पर लगाई जाती है नए पौधों की गहराई 2-3 सैं.मी. होनी चाहिए 2. बैड बनाकर लगाई जाने वाली पनीरी : यह बैड भारी ज़मीनों के लिए बनाए जाते हैं पनीरी लगाने से पहले खालियों में पानी लगाना चाहिए और फिर पनीरी को खेत में लगाना चाहिए पौधे से पौधे का फासला 9 सैं.मी. होना चाहिए 3. मशीनी ढंग से लगाई जाने वाली पनीरी : मैट पनीरी के लिए मशीनों का प्रयोग किया जाता है यह मशीन 30x12 सैं.मी. के फासले पर पनीरी लगानी चाहिए सिंचित और कम बारानी वाले क्षेत्रों के लिए लगभग 41-50 किलो नाइट्रोजन (यूरिया 90-110 किलो), 30 किलो फासफोरस (एस एस पी 190 किलो) और 27 किलो पोटाश (म्यूरेट ऑफ पोटाश 45 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा रोपाई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटकर, नाइट्रोजन का 1/4 हिस्सा शाखाएं निकलने के समय और 1/4 हिस्सा बालियां निकलने के समय डालें जल जमाव वाले क्षेत्रों में नाइट्रोजन 30-41 किलो (यूरिया 65-90 किलो) प्रति एकड़ में शुरूआती खुराक के तौर पर डालें कम बारानी क्षेत्रों के लिए नाइट्रोजन 23-32 किलो (यूरिया 52-70 किलो) और फासफोरस 16 किलो (एस एस पी 100 किलो) प्रति एकड़ में प्रयोग करें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस की पूरी मात्रा रोपाई से पहले और बाकी बची नाइट्रोजन बालियां निकलने के समय डालें ऊंचे क्षेत्रों के लिए नाइट्रोजन 23 किलो (यूरिया 52 किलो), फासफोरस 12 किलो (एस एस पी 75 किलो) और पोटाश 12 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 20 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के तीन सप्ताह बाद डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटे पहले भाग को बिजाई के 6 सप्ताह बाद और दूसरे भाग को बालियां निकलने के समय डालें पनीरी लगाने के बाद खेत में दो सप्ताह तक अच्छी तरह पानी खड़ा रहने देना चाहिए जब सारा पानी सूख जाए तो उसके दो दिन बाद फिर से पानी को लगाना चाहिए खड़े पानी की गहराई 10 सै.मी. से ज्यादा नहीं होनी चाहिए खेत में से बूटी और नदीनों को निकालने से पहले खेत में से सारा पानी निकाल देना चाहिए ओर इस प्रक्रिया के पूरे होने के बाद खेत की फिर से सिंचाई करनी चाहिए पकने से 15 दिन पहले सिंचाई करनी बंद करनी चाहिए ताकि फसल को आसानी से काटा जा सके ऊंची भूमि पर सिंचाई पूरी तरह से बारिश पर निर्भर करती है बारिश की तीव्रता और नियमितता के आधार पर और पानी की उपलब्धता के आधार पर गंभीर अवस्थाओं में सिंचाई करें धन्यवाद
Posted by sachin chaudhary
Bihar
14-12-2019 10:00 PM
Punjab
12-16-2019 09:36 AM
श्रीमान जी, इस फसल को मिट्टी की अलग अलग किस्मों, जिनमें पानी सोखने की क्षमता कम होती है और जिनकी पी एच 5.0 से 9.5 के बीच में होती है, में भी उगाया जा सकता है धान की पैदावार के लिए रेतली से लेकर गारी मिट्टी तक, और गारी से चिकनी मिट्टी जिसमें पानी को सोखने की क्षमता कम होती है इस फसल के लिए अच्छी मानी जाती है Jaya: यह छोटे क.... (Read More)
श्रीमान जी, इस फसल को मिट्टी की अलग अलग किस्मों, जिनमें पानी सोखने की क्षमता कम होती है और जिनकी पी एच 5.0 से 9.5 के बीच में होती है, में भी उगाया जा सकता है धान की पैदावार के लिए रेतली से लेकर गारी मिट्टी तक, और गारी से चिकनी मिट्टी जिसमें पानी को सोखने की क्षमता कम होती है इस फसल के लिए अच्छी मानी जाती है Jaya: यह छोटे कद की और अधिक उपज देने वाली किस्म गर्दन तोड़ के प्रतिरोधक है यह किस्म 142 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दाने बड़े और लंबे होते हैं इसकी औसतन पैदावार 26 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Chakia 59: यह किस्म कम जल जमाव वाले हालातों में उगाने के लिए उपयुक्त है Govind: यह किस्म पंतनगर द्वारा विकसित की गई है यह किस्म 105 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है Indrasan: यह तराई क्षेत्रों की प्रसिद्ध किस्म है Mahsud: यह किस्म निचले क्षेत्रों में बारानी स्थितियों में उगाने के लिए उपयुक्त है Majhera 3: यह लंबी किस्म सूखे को सहनेयोग्य है और ऊंचे क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है Nagina 22: यह ऊंचे क्षेत्रों में बारानी हालातों में उगाने के लिए उपयुक्त है इसके दाने छोटे और मोटे होते हैं Narendra-1 and Narendra-2: यह किस्म 105 और 115 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है Pant Dhan 6: यह किस्म निम्न और मध्यम ऊंचाई वाले पहाड़ी क्षेत्रों में रोपाई के लिए उपयुक्त है Saket 4: यह अगेते समय की किस्म है और 115 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह यू पी की सबसे प्रसिद्ध किस्म है T9: यह देरी से बोयी जाने वाली सुगंधित किस्म है इसके दाने बेलनाकार होते हैं VL Dhan 16: यह निम्न और मध्यम क्षेत्रों में रोपाई के लिए उपयुक्त किस्म है VL 206: यह लंबी किस्म निम्न और मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है Usar 1: यह किस्म कानपुर में विकसित की गई यह क्षारीय और लवणीय मिट्टी में खेती करने के लिए उपयुक्त है बासमती किस्में Taraori Basmati: यह सिंचित क्षेत्रों में अगेती बिजाई के लिए उपयुक्त है यह किस्म 145-155 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Haryana Basmati no 1: यह अर्द्ध छोटे कद की किस्म है और सिंचित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है यह किस्म 140 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 16 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa Basmati 1121, Pusa Basmati 1, CSR 30, Shabnam.शुष्क खेतों को अच्छा बनाने, नदीन रहित और सेहतमंद वृद्धि के लिए ग्लाफोसेट डालनी चाहिए गेहूं की कटाई के बाद ज़मीन पर हरी खाद के तौर पर मई के पहले सप्ताह ढैंचा (बीज दर 20 किलोग्राम प्रति एकड़), या सन (बीज दर 20 किलोग्राम प्रति एकड़) या लोबीया (बीज दर 12 किलोग्राम प्रति एकड़) की बिजाई करनी चाहिए जब फसल 6 से 8 सप्ताह की हो जाए तो इसे खेत में कद्दू करने से एक दिन खेत में ही जोत देना चाहिए इस तरह प्रति एकड़ 25 किलो नाइट्रोजन खाद की बचत होती है भूमि को समतल करने के लिए लेज़र लेवलर का प्रयोग किया जाता है इसके बाद खेत में पानी खड़ा कर दें ताकि भूमि के अंदर ऊंचे नीचे स्थानों की पहचान हो सके इस तरह पानी के रसाव के कारण पानी की होने वाले बर्बादी को कम किया जा सके यू पी के सिंचित और निम्न बारानी क्षेत्रों में मध्य जून से शुरूआती जुलाई तक का समय उपयुक्त होता है पौधे की गहराई 2-3 सैं.मी. होनी चाहिए फासला बनाकर लगाने से पौधे ज्यादा पैदावार देते हैं उपजाऊ मिट्टी में 20 सैं.मी. x 15 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें जबकि हल्की मिट्टी में रोपाई के लिए 15 सैं.मी. x 10 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें जल जमाव वाले क्षेत्रों में 20 x 20 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें सिंचित और कम बारानी क्षेत्रों में रोपाई ढंग प्रयोग किया जाता है रोपाई के लिए 25-30 दिनों के पौधों का प्रयोग करें जल जमाव वाले क्षेत्रों में 30-35 दिनों के पौधे रोपाई के लिए प्रयोग करें ऊंचे क्षेत्रों में, शुष्क और गीली मिट्टी में रोपाई ढंग का प्रयोग करें एक एकड़ खेत में 6-8 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बिजाई से पहले 10 लीटर पानी में 20 ग्राम कार्बेनडाज़िम $ 1 ग्राम स्ट्रैप्टोसाईक्लिन घोल लें और इस घोल में बीजो को 8-10 घंटे तक भिगोयें उसके बाद बीजों को छांव में सुखाएं और फिर बिजाई के लिए प्रयोग करें फसल को जड़ गलन रोग से बचाने के लिए नीचे दिए गए फंगसनाशी का प्रयोग किया जा सकता है पहले रासायनिक फंगीनाशी का प्रयोग करें फिर बीजों का टराईकोडरमा के साथ उपचार करें वैट बैड नर्सरी : यह तकनीक उन क्षेत्रों में अपनाई जाती है जहां पर पानी ज्यादा मात्रा में पाया जाता है नर्सरी का 1/10 हिस्सा दूसरे खेत में लगाया जाता है इसकी बिजाई छींटे द्वारा की जाती है यहां पर खेत की जोताई और खेत को समतल किया जाता है बैडों पर कईं दिन तक नमी बनाए रखनी चाहिए पानी से खेत को ज्यादा ना भरें जब नर्सरी 2 सैं.मी. से वृद्धि कर जाए तब पानी को खेत में लगाते रहना चाहिए बिजाई के 15 दिन बाद 26 किलो यूरिया डालना चाहिए जब नर्सरी 25-30 सैं.मी. तक लंबी हो जाए तब उसे 15-21 दिन बाद दूसरे खेत में लगा देना चाहिए और खेत को लगातार पानी लगाते रहना चाहिए सूखे बैड वाली नर्सरी : यह तकनीक शुष्क क्षेत्रों में अपनाई जाती है जो बैड बनाया जाता है वो बिजाई वाले खेत का 1/10 हिस्से में बीज बोया जाता है बैड का आकार सीमित होना चाहिए और उसकी ऊंचाई 6-10 से.मी होनी चाहिए धान का आधा जला हुआ छिलका बैड पर बिखेर देना चाहिए इससे जड़ें मजबूत होती हैं सही समय पर सिंचाई करते रहना चाहिए और नमी बनाए रखना चाहिए ताकि नए पौधे नष्ट ना हों तत्वों की पूर्ति के लिए खाद डालना जरूरी है मॉडीफाईड मैट नर्सरी : यह नर्सरी लगाने का एक ऐसा तरीका है जिसमें कम जगह और कम बीजों की जरूरत होती है यह नर्सरी किसी भी जगह पर बनाई जा सकती हैं जहां पर समतल जगह हो और पानी की सुविधा हो इसकी पनीरी लगाने के लिए 1% खेत की जरूरत होती है 4 से.मी की सतह पर नए पौधे लगाए जाते हैं इसे बनाने के लिए 1 मीटर चौड़े और 20-30 मीटर लंबे जमीन के टुकड़े की जरूरत होती है इसके ऊपर बिछाने के लिए पॉलीथीन और केले के पत्तों की जरूरत होती है इसके इलावा एक लकड़ी का बकसा जो कि 4 से.मी गहरा होता हैं मिट्टी के मिश्रण से भरा होता है बीजों को इसके अंदर रख देना चाहिए और फिर बीजों को सूखी मिट्टी के साथ ढक देना चाहिए इसके बाद पानी का छिड़काव कर देना चाहिए लकड़ी के बक्से को नमी देते रहना चाहिए बिजाई से 11-14 दिनों के बाद पौध तैयार हो जाती है जब पौध तैयार हो जाती है तब मैट से पौध को दूसरे खेत में रोपण कर दिया जाता है फासला: पौधों का फासला 20x20 सैं.मी. या 25x25 सैं.मी. होना चाहिए पनीरी लगाने का ढंग 1. कद्दू करके लगाई जाने वाली पनीरी : आमतौर पर पंक्ति में लगाए जाने वाले पौधे 20x15 सैं.मी. दूरी पर लगाए जाते हैं और देरी से लगाई जाने वाली पनीरी 15x15 सैं.मी. पर लगाई जाती है नए पौधों की गहराई 2-3 सैं.मी. होनी चाहिए 2. बैड बनाकर लगाई जाने वाली पनीरी : यह बैड भारी ज़मीनों के लिए बनाए जाते हैं पनीरी लगाने से पहले खालियों में पानी लगाना चाहिए और फिर पनीरी को खेत में लगाना चाहिए पौधे से पौधे का फासला 9 सैं.मी. होना चाहिए 3. मशीनी ढंग से लगाई जाने वाली पनीरी : मैट पनीरी के लिए मशीनों का प्रयोग किया जाता है यह मशीन 30x12 सैं.मी. के फासले पर पनीरी लगानी चाहिए सिंचित और कम बारानी वाले क्षेत्रों के लिए लगभग 41-50 किलो नाइट्रोजन (यूरिया 90-110 किलो), 30 किलो फासफोरस (एस एस पी 190 किलो) और 27 किलो पोटाश (म्यूरेट ऑफ पोटाश 45 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा रोपाई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटकर, नाइट्रोजन का 1/4 हिस्सा शाखाएं निकलने के समय और 1/4 हिस्सा बालियां निकलने के समय डालें जल जमाव वाले क्षेत्रों में नाइट्रोजन 30-41 किलो (यूरिया 65-90 किलो) प्रति एकड़ में शुरूआती खुराक के तौर पर डालें कम बारानी क्षेत्रों के लिए नाइट्रोजन 23-32 किलो (यूरिया 52-70 किलो) और फासफोरस 16 किलो (एस एस पी 100 किलो) प्रति एकड़ में प्रयोग करें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस की पूरी मात्रा रोपाई से पहले और बाकी बची नाइट्रोजन बालियां निकलने के समय डालें ऊंचे क्षेत्रों के लिए नाइट्रोजन 23 किलो (यूरिया 52 किलो), फासफोरस 12 किलो (एस एस पी 75 किलो) और पोटाश 12 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 20 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के तीन सप्ताह बाद डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटे पहले भाग को बिजाई के 6 सप्ताह बाद और दूसरे भाग को बालियां निकलने के समय डालें पनीरी लगाने के बाद खेत में दो सप्ताह तक अच्छी तरह पानी खड़ा रहने देना चाहिए जब सारा पानी सूख जाए तो उसके दो दिन बाद फिर से पानी को लगाना चाहिए खड़े पानी की गहराई 10 सै.मी. से ज्यादा नहीं होनी चाहिए खेत में से बूटी और नदीनों को निकालने से पहले खेत में से सारा पानी निकाल देना चाहिए ओर इस प्रक्रिया के पूरे होने के बाद खेत की फिर से सिंचाई करनी चाहिए पकने से 15 दिन पहले सिंचाई करनी बंद करनी चाहिए ताकि फसल को आसानी से काटा जा सके ऊंची भूमि पर सिंचाई पूरी तरह से बारिश पर निर्भर करती है बारिश की तीव्रता और नियमितता के आधार पर और पानी की उपलब्धता के आधार पर गंभीर अवस्थाओं में सिंचाई करें धन्यवाद
Posted by kewal Sharma
Himachal Pradesh
14-12-2019 09:55 PM
Punjab
12-15-2019 08:59 AM
केवल जी इसे आप किसी भी अच्छी कंपनी की फीड दे सकते हैं जिसे गाय आसानी से खाती है और अच्छा दूध देती है इसके इलावा आप घर में फीड तैयार करके भी दे सकते है आप घर में फीड तैयार करके देना चाहते है तो 25 किलो अनाज (ज्वार, बाजरी (सर्दियां), गेहूं, जौं (गर्मियां)इनमें से कोई एक), दाल चूरी 20 किलो (मूंग चूरी, मांह चूरी, मोठ चूरी (के.... (Read More)
केवल जी इसे आप किसी भी अच्छी कंपनी की फीड दे सकते हैं जिसे गाय आसानी से खाती है और अच्छा दूध देती है इसके इलावा आप घर में फीड तैयार करके भी दे सकते है आप घर में फीड तैयार करके देना चाहते है तो 25 किलो अनाज (ज्वार, बाजरी (सर्दियां), गेहूं, जौं (गर्मियां)इनमें से कोई एक), दाल चूरी 20 किलो (मूंग चूरी, मांह चूरी, मोठ चूरी (केवल सर्दियों के लिए), मसूर चूरी, अरहर (इनमें से एक), डी ओ सी 25 किलो (धान का चूरा), फाइबर छिल्का 15 किलो (गेहूं, चौकर, चना छिल्का, मटर छिल्का, इनमें से एक), खल 15 किला (सरसों, बिनौला या सोया (इनमें से कोई एक), मीठा सोडा 250 ग्राम, 1 किलो नमक, गुड़ 1 किलो , 1 किलो हल्दी इन्हें मिला लें यह फीड पशु के लिए बहुत लाभदायक होती है, इसके साथ साथ पशुओं को रोजाना 35—40 किलो हरा चारा दें और उन्हें हर तीन महीने बाद पेट के कीड़ों की दवा जरूर दें.
Posted by Rahul Dedha
Uttar Pradesh
14-12-2019 09:45 PM
Punjab
12-15-2019 09:00 AM
उसे आप Brotone liquid 50ml रोजाना देना शुरू करें और उसे 200 मि.ली. सरसों का तेल और 50 ग्राम हल्दी मिलाकर 4—5 दिन दें इससे फर्क पड़ जाएगा
Posted by kewal Sharma
Himachal Pradesh
14-12-2019 09:33 PM
Punjab
12-15-2019 09:01 AM
केवल जी इसे आप किसी भी अच्छी कंपनी की फीड दे सकते हैं जिसे गाय आसानी से खाती है और अच्छा दूध देती है इसके इलावा आप घर में फीड तैयार करके भी दे सकते है आप घर में फीड तैयार करके देना चाहते है तो 25 किलो अनाज (ज्वार, बाजरी (सर्दियां), गेहूं, जौं (गर्मियां)इनमें से कोई एक), दाल चूरी 20 किलो (मूंग चूरी, मांह चूरी, मोठ चूरी (केव.... (Read More)
केवल जी इसे आप किसी भी अच्छी कंपनी की फीड दे सकते हैं जिसे गाय आसानी से खाती है और अच्छा दूध देती है इसके इलावा आप घर में फीड तैयार करके भी दे सकते है आप घर में फीड तैयार करके देना चाहते है तो 25 किलो अनाज (ज्वार, बाजरी (सर्दियां), गेहूं, जौं (गर्मियां)इनमें से कोई एक), दाल चूरी 20 किलो (मूंग चूरी, मांह चूरी, मोठ चूरी (केवल सर्दियों के लिए), मसूर चूरी, अरहर (इनमें से एक), डी ओ सी 25 किलो (धान का चूरा), फाइबर छिल्का 15 किलो (गेहूं, चौकर, चना छिल्का, मटर छिल्का, इनमें से एक), खल 15 किला (सरसों, बिनौला या सोया (इनमें से कोई एक), मीठा सोडा 250 ग्राम, 1 किलो नमक, गुड़ 1 किलो , 1 किलो हल्दी इन्हें मिला लें यह फीड पशु के लिए बहुत लाभदायक होती है, इसके साथ साथ पशुओं को रोजाना 35—40 किलो हरा चारा दें और उन्हें हर तीन महीने बाद पेट के कीड़ों की दवा जरूर दें.
Posted by Nepal Singh Nepal Singh
Rajasthan
14-12-2019 09:09 PM
Punjab
12-16-2019 09:36 AM
श्रीमान जी, खादों की सही मात्रा के लिए और अतिरिक्त प्रयोग ना करने के लिए मिट्टी की जांच सबसे महत्तवपूर्ण कदम है फसल की अच्छी वृद्धि और अच्छी उपज के लिए नाइट्रोजन 15 किलो (यूरिया 32 किलो) फासफोरस 11 किलो (एस एस पी 66 किलो) और पोटाश 7 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 12 किलो) को गाय के गले हुए गोबर 2 टन के साथ प्रति एकड़ में डालें नाइट.... (Read More)
श्रीमान जी, खादों की सही मात्रा के लिए और अतिरिक्त प्रयोग ना करने के लिए मिट्टी की जांच सबसे महत्तवपूर्ण कदम है फसल की अच्छी वृद्धि और अच्छी उपज के लिए नाइट्रोजन 15 किलो (यूरिया 32 किलो) फासफोरस 11 किलो (एस एस पी 66 किलो) और पोटाश 7 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 12 किलो) को गाय के गले हुए गोबर 2 टन के साथ प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन की आधी मात्रा बिजाई के 35 दिनों के बाद डालें धन्यवाद
Posted by Sourab
Punjab
14-12-2019 09:07 PM
Punjab
12-15-2019 09:03 AM
उसे आप हीट में आने पर डॉक्टर से टीका भरवा सकते है यदि वो बुल से नहीं लगवाती तो डॉक्टर से टीका भरवा सकते है
Posted by Mohmmad Emran
Rajasthan
14-12-2019 09:03 PM
Punjab
12-15-2019 09:33 AM
agar aapki +2 non medical se hai to aap nazdiki kisi collage me admission lekar iska diploma kar sakte hai. waise aap kisi doctor ke sath as a helper kam kar sakte ho. iske ilava koi option nahi hai ji.
Posted by dadu yadav
Gujarat
14-12-2019 08:57 PM
Punjab
12-16-2019 09:39 AM
श्रीमान जी, आप तिल की किस्मे जैसे के Guj. Til-1, 2, 3, Guj. Til-10 की बिजाई कर सकते हैं, धन्यवाद
Posted by Naresh redhu
Haryana
14-12-2019 08:55 PM
Punjab
12-16-2019 09:50 AM
श्रीमान जी, शतावरी के साथ लहसुन की बिजाई करने की सिफारिश नहीं की जाती है, आप इनकी बिजाई इक ही खेत में नहीं कर सकते हैं, धन्यवाद
Posted by sher singh
Uttar Pradesh
14-12-2019 08:52 PM
Punjab
12-17-2019 09:38 AM
Shrimaan ji, ap apne khet ki fencing kar sakte hain, iske ilawa ap prem raj saini ji se samparak kar sakte hian,Prem raj Saini 9719432296 Saini farm inho ne ik khaad tiyar ki hai, jiki badboo se janvar khet mein nahi ata hai, dhanywad
Posted by Nirmal singh
Punjab
14-12-2019 08:48 PM
Punjab
12-17-2019 09:34 AM
Shrimaan ji, kirpy karke farm track or charman de label di photo bhejo ate progibb ik growth regulator hai, jis vich Gibberellic acid paya janda hai, dhanwad
Posted by Yogendra Kumar
Uttar Pradesh
14-12-2019 08:46 PM
Rajasthan
12-14-2019 08:51 PM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by Gurpreet
Punjab
14-12-2019 08:35 PM
Punjab
12-14-2019 08:49 PM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਪੁਦੀਨੇ ਨੂੰ ਕਈ ਕਿਸਮ ਦੀ ਮਿੱਟੀ ਜਿਵੇਂ ਦਰਮਿਆਨੀ ਤੋਂ ਡੂੰਘੀ ਉਪਜਾਊ ਮਿੱਟੀ, ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਪਾਣੀ ਨੂੰ ਸੋਖਣ ਦੀ ਸ਼ਕਤੀ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹੋਵੇ, ਵਿੱਚ ਉਗਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਇਸ ਨੂੰ ਪਾਣੀ ਦੀ ਖੜੋਤ ਵਾਲੀ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਵੀ ਲਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਇਹ ਵਧੀਆ ਨਮੀ ਵਾਲੀ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਚੰਗੇ ਨਤੀਜੇ ਦਿੰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਫਸਲ ਲਈ ਮਿੱਟੀ ਦਾ pH 6-7.5 ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਤੁਸੀ ਪੁਦੀਨੇ ਦੀਆ ਕਿਸਮਾਂ ਜਿਵੇ .... (Read More)
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਪੁਦੀਨੇ ਨੂੰ ਕਈ ਕਿਸਮ ਦੀ ਮਿੱਟੀ ਜਿਵੇਂ ਦਰਮਿਆਨੀ ਤੋਂ ਡੂੰਘੀ ਉਪਜਾਊ ਮਿੱਟੀ, ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਪਾਣੀ ਨੂੰ ਸੋਖਣ ਦੀ ਸ਼ਕਤੀ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹੋਵੇ, ਵਿੱਚ ਉਗਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਇਸ ਨੂੰ ਪਾਣੀ ਦੀ ਖੜੋਤ ਵਾਲੀ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਵੀ ਲਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਇਹ ਵਧੀਆ ਨਮੀ ਵਾਲੀ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਚੰਗੇ ਨਤੀਜੇ ਦਿੰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਫਸਲ ਲਈ ਮਿੱਟੀ ਦਾ pH 6-7.5 ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਤੁਸੀ ਪੁਦੀਨੇ ਦੀਆ ਕਿਸਮਾਂ ਜਿਵੇ ਕੇ,MAS-1, Hybrid-77, Shivalik, EC-41911, Gomti, Himalaya, Kosi, Saksham, Kusha, Punjab Spraymint 1 ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਪੁਦੀਨੇ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਲੋੜੀਂਦੇ ਆਕਾਰ ਦੇ ਬੈੱਡ ਤਿਆਰ ਕਰੋ ਖੇਤ ਦੀ ਤਿਆਰੀ ਸਮੇਂ ਖੇਤ ਨੂੰ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਵਾਹੋ 100-120 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ ਪਾਓ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਹਰੀ ਖਾਦ ਪਾਓ ਇਸਦੀ ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਅਨੁਕੂਲ ਸਮਾਂ ਦਸੰਬਰ-ਜਨਵਰੀ ਮਹੀਨਾ ਹੈ ਪੌਦੇ ਦੇ ਭਾਗਾਂ ਦੀ ਬਿਜਾਈ 40 ਸੈ.ਮੀ. ਦੇ ਫਾਸਲੇ ਤੇ ਕਰੋ ਅਤੇ ਕਤਾਰਾਂ ਵਿੱਚਲਾ ਫਾਸਲਾ 60 ਸੈ.ਮੀ. ਦਾ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਬੀਜ ਨੂੰ 2-3 ਸੈ.ਮੀ. ਡੂੰਘਾਈ ਤੇ ਬੀਜੋ ਪੌਦੇ ਦੇ ਜੜ੍ਹ ਵਾਲੇ ਭਾਗ ਨੂੰ ਮੁੱਖ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਬੀਜਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਪ੍ਰਜਣਨ ਕਿਰਿਆ ਜੜ੍ਹ ਦੇ ਭਾਗ ਜਾਂ ਟਾਹਣੀਆਂ ਦੁਆਰਾ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਵਧੀਆ ਪੈਦਾਵਾਰ ਲਈ 160 ਕਿਲੋ ਭਾਗਾਂ ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਲਈ ਵਰਤੋ ਜੜ੍ਹਾਂ ਪਿਛਲੇ ਪੌਦਿਆਂ ਤੋਂ ਦਸੰਬਰ ਅਤੇ ਜਨਵਰੀ ਮਹੀਨੇ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕੀਤੀਆਂ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ ਫਸਲ ਨੂੰ ਜੜ੍ਹ ਗਲਣ ਤੋਂ ਬਚਾਉਣ ਲਈ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਬੀਜੇ ਜਾਣ ਵਾਲੇ ਭਾਗਾਂ ਨੂੰ ਕਪਤਾਨ 0.25% ਜਾਂ ਆਗਾਲੋਲ ਘੋਲ 0.3% ਜਾਂ ਬੈਨਲੇਟ 0.1% ਨਾਲ 2-3 ਮਿੰਟ ਲਈ ਸੋਧੋ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾ ਪੌਦੇ ਦੇ ਭਾਗ ਨੂੰ 10-14 ਸੈ.ਮੀ. ਦੀ ਲੰਬਾਈ ਤੇ ਕੱਟ ਲਓ ਪੁਦੀਨੇ ਦੀ ਜੜ੍ਹ ਨੂੰ ਲੋੜੀਂਦੇ ਆਕਾਰ ਅਤੇ ਚੌੜਾਈ ਦੀਆਂ ਵੱਟਾਂ ਤੇ ਬੀਜੋ ਪੌਦੇ ਦੇ ਭਾਗਾਂ ਦੀ ਬਿਜਾਈ 40 ਸੈ.ਮੀ. ਦੇ ਫਾਸਲੇ ਤੇ ਕਰੋ ਅਤੇ ਕਤਾਰਾਂ ਵਿੱਚਲਾ ਫਾਸਲਾ 60 ਸੈ.ਮੀ. ਦਾ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਮਿੱਟੀ ਨੂੰ ਨਮੀ ਦੇਣ ਲਈ ਸਿੰਚਾਈ ਕਰੋ ਖੇਤ ਦੀ ਤਿਆਰੀ ਸਮੇਂ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ 80-120 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਵਿੱਚ ਪਾਓ ਅਤੇ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਮਿਲਾਓ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ 58 ਕਿਲੋ(ਯੂਰੀਆ 130 ਕਿਲੋ), ਫਾਸਫੋਰਸ 32-40 ਕਿਲੋ(ਸਿੰਗਲ ਸੁਪਰ ਫਾਸਫੇਟ 80-100 ਕਿਲੋ), ਪੋਟਾਸ਼ 20 ਕਿਲੋ (ਮਿਊਰੇਟ ਆਫ ਪੋਟਾਸ਼ 33 ਕਿਲੋ) ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਵਿੱਚ ਪਾਓ ਖੇਤ ਨੂੰ ਨਦੀਨ-ਮੁਕਤ ਰੱਖਣ ਲਈ ਥੋੜੇ-ਥੋੜੇ ਸਮੇਂ ਬਾਅਦ ਹੱਥੀਂ ਗੋਡੀ ਕਰੋ ਅਤੇ ਪਹਿਲੀ ਕਟਾਈ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਕਹੀ ਦੀ ਮਦਦ ਨਾਲ ਗੋਡੀ ਕਰੋ ਨਦੀਨਾਂ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਸਿਨਬਾਰ 400 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਪਾਓ ਨਦੀਨਾਂ ਨੂੰ ਕਾਬੂ ਕਰਨ ਲਈ ਜੈਵਿਕ ਮਲਚ ਦੇ ਨਾਲ ਨਦੀਨਾਸ਼ਕ ਆਕਸੀਫਲੋਰਫੇਨ 200 ਗ੍ਰਾਮ ਜਾਂ ਪੈਂਡੀਮੈਥਾਲਿਨ 800 ਮਿ.ਮੀ. ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰੋ ਜੇਕਰ ਨਦੀਨਾਂ ਦੀ ਤੀਬਰਤਾ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਡੈਲਾਪੋਨ 1.6 ਕਿਲੋ ਜਾਂ ਗਰੈਮੋਕਸੋਨ 1 ਲੀਟਰ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਅਤੇ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਡਿਊਰੋਨ 800 ਗ੍ਰਾਮ ਜਾਂ ਟੇਰਬੇਸਿਲ 800 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਗਰਮੀਆਂ ਵਿੱਚ ਮਾਨਸੂਨ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਜਲਵਾਯੂ ਅਤੇ ਮਿੱਟੀ ਅਨੁਸਾਰ 6-9 ਸਿੰਚਾਈਆਂ ਜ਼ਰੂਰ ਕਰੋ ਮਾਨਸੂਨ ਤੋਂ ਬਾਅਦ 3 ਸਿੰਚਾਈਆਂ ਦੀ ਲੋੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ, ਪਹਿਲੀ ਸਤੰਬਰ, ਦੂਜੀ ਅਕਤੂਬਰ ਅਤੇ ਤੀਜੀ ਨਵੰਬਰ ਮਹੀਨੇ ਵਿੱਚ ਸਰਦੀਆਂ ਵਿੱਚ ਜ਼ਿਆਦਾ ਸਿੰਚਾਈ ਦੀ ਲੋੜ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀ, ਪਰ ਜੇਕਰ ਵਰਖਾ ਨਾ ਹੋਵੇ, ਤਾਂ ਇੱਕ ਸਿੰਚਾਈ ਜ਼ਰੂਰ ਕਰੋ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by आर्य सुरेन्द्र पँवार
Uttar Pradesh
14-12-2019 08:35 PM
Punjab
12-16-2019 09:54 AM
श्रीमान जी, पाषाण भेद उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों की फसल है, तथा उन क्षेत्रों में सफलतापूर्वक उपजाई जा सकती है, जो गर्म तथा आर्द्र हो इस प्रकार यह दक्षिणी भारत के विभिन्न राज्यों जैसे कर्नाटक, आंध्रप्रदेश, केरल एवं तमिलनाडु के साथ-साथ मध्यभारत के विभिन्न राज्यों जैसे मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश तथा .... (Read More)
श्रीमान जी, पाषाण भेद उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों की फसल है, तथा उन क्षेत्रों में सफलतापूर्वक उपजाई जा सकती है, जो गर्म तथा आर्द्र हो इस प्रकार यह दक्षिणी भारत के विभिन्न राज्यों जैसे कर्नाटक, आंध्रप्रदेश, केरल एवं तमिलनाडु के साथ-साथ मध्यभारत के विभिन्न राज्यों जैसे मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश तथा बिहार आदि राज्यों में सफलतापूर्वक उपजाई जा सकती है सिंचाई की सुविधा वाले क्षेत्रों के साथ-साथ यह उन क्षेत्रों में भी उपजाई जा सकती है जहां जून से सितम्बर माह के बीच पर्याप्त वर्षा होती हो तथा जहां वर्ष भर 100 से 160 सेंटीमीटर तक सुनिश्चित वर्षा होती है पाषाण भेद की खेती उन मृदाओं में सफलतापूर्वक की जा सकती है, जो नर्म तथा पोली हो 5.5 से 7 पी एच मान वाली ऐसी भूमी जिनमें जल निकास की पर्याप्त व्यवस्था हो, इसकी खेती के लिए उपयुक्त पाई जाती है परीक्षणों में देखा गया है कि यूं तो कोलियस लगभग सभी प्रकार की मिट्टियों में सफलतापूर्वक उपजाया जा सकता है परन्तु रेतीली दोमत, हल्की कपासिया तथा लाल मृदा जिनमें जीवाश्म की पर्याप्त मात्रा विद्यमान हो, इसकी खेती के लिए ज्यादा उपयुक्त पाई गई है पत्थरचूर की नर्सरी बनाने की प्रक्रिया में सर्वप्रथम मई माह में इसके पुराने पौधों से इसकी 4 से 6 इंट लम्बी कलमें काट ली जाती है ये कलमें ऐसी होनी चाहिए कि प्रत्येक में कम से कम 6 से 7 पत्ते तथा कम से कम 2 या 3 आंखे (नोड्स) अवश्य हों यह ध्यान रखा जाना चाहिए कि कलमों को या तो नर्सरी बेड्स में तैयार किया जाता है अथवा पौलीथीन की थैलियों में रोपित करके भी तैयार किया जा सकता है नर्सरी में यदि इन्हे लगाना हो तो पौध से पौध के बीच की दूरी कम से कम (3 से 3 इंच) रखी जानी चाहिए पौलीथीन थेलियों में कलमें रोपित करने से पूर्व इन्हें कम्पोस्ट खाद, मिट्टी तथा रेत (प्रत्येक 33 प्रतिशत) डाल कर भरा जाता है कलमों का जल्दी तथा सुनिश्चित उगाव हो इसके लिए किसी रूटिंग हार्मोन का उपयोग भी किया जा सकता है अथवा कम से कम गौमुत्र में तो इन्हें कुछ देर तक डुबोकर रखा जाना ही चाहिए इसी बीच 2 से 3 दिनों मे नर्सरी में लगाई गई इन कलमों में पानी देते रहना चाहिए नर्सरी में लगभग एक माह तक रखने पर इनमें पर्याप्त जड़े विकसित हो जाती है तथा तदुपरान्त इन्हें मुख्य खेत में स्थानान्तरित किया जा सकता है जिस मुख्य खेत में पौधो का रोपण करना होता है, उसकी अच्छी प्रकार तैयारी करनी आवश्यक होती है इसके लिए सर्वप्रथम मई से जून में खेत की गहरी जुताई कर दी जाती है तदुपरान्त खेत में प्रति एकड़ 5 टन अच्छी प्रकार पकी हुई गोबर अथवा कम्पोस्ट अथवा 2.5 टन वर्मीकम्पोस्ट के साथ-साथ 120 किलोग्राम प्रॉम जैविक खाद खेत में मिला दी जानी चाहिए मुख्य खेत में पौधों की रोपाई मानसून प्रारंभ होते ही नर्सरी में तैयार की गई पौध को खुरपी की सहायता से मुख्य खेत में प्रतिरोपित कर दिया जाता है प्रतिरोपित करते समय पौधे से पौधे की दूरी 20 सेंटीमीटर तथा कतार से कतार की दूरी 60 सेंटीमीटर रखी जाती है इस प्रकार एक एकड़ में लगभग 34000 पौधे रोपित किए जाते है मानसून की फसल के रूप में लगाए जाने के कारण यदि नियमित अंतराल पर वारिश हो रही हो तो फसल को अतिरिक्त सिंचाई की आवश्यकता नहीं पड़ती परन्तु यदि नियमित वर्षा न हो रही हो तो सिंचाई करने की आवश्यकता होती है इस दृष्टि से प्रथम सिंचाई प्रतिरोपण के तुरंत बाद कर दी जानी चाहिए तथा तदुपरान्त प्रारंभ में तीन दिन में एक बार तथा बाद में सप्ताह में एक बार सिंचाई की जानी चाहिए नियमित सिंचाई देने के कारण तथा मानसून की फसल होने के कारण खेत में खरपतवार आना स्वाभाविक है इसके लिए हाथ से निंदाई-गुड़ाई की जाना बांछित होगी हाथ से निंदाई-गुड़ाई करने से एक तरफ जहां खरपतवार साफ होंगे वही भूमि भी नर्म होती रहेगी लाईनों के बीचों-बीच कुल्पा अथवा डोरा चलाकर भी खरपतवार से निजात पाई जा सकती है यूं तो खेत तैयार करते समय 5 टन प्रति एकड़ की दर से कम्पोस्ट खाद खेत में मिलाने की संतुति की जाती है परन्तु यदि जैविक खाद का उपयोग किया जाना संभव न हो तो प्रति एकड़ 16 किलोग्राम नाइट्रोजन (8 किलोग्राम प्रतिरोपण के समय तथा शेष प्रतिरोपण के एक माह बाद) 24 किलोग्राम स्फर तथा 20 किलोग्राम पोटाश प्रति एकड़ डाले जाने की अनुशंसा की जाती है धन्यवाद
Posted by Shery
Punjab
14-12-2019 08:33 PM
Punjab
12-16-2019 09:55 AM
Shrimaan ji, agar kanak nhi ugii hai tan tuhnu is di dubara bijai karni pawe gi, dhanwad
Posted by Gora Saron
Punjab
14-12-2019 08:31 PM
Punjab
12-16-2019 09:56 AM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਕਿਰਪਾ ਕਰ ਕੇ ਆਪਣਾ ਸਵਾਲ ਵਿਸਥਾਰ ਨਾਲ ਪੁਛੋ ਤਾਂਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸ ਬਾਰੇ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Shery
Punjab
14-12-2019 08:31 PM
Punjab
12-17-2019 09:31 AM
Shrimaan ji, tuc hun javi di bijai kr sakdeo ate is to ilawa tuc sabjiya jive ke tamatar, chappan kadu, bangan di bijai kar sakd ho, dhanwda
Posted by Radheshyam Mandavi
Chattisgarh
14-12-2019 08:20 PM
Punjab
12-16-2019 09:58 AM
श्रीमान जी, कृपया आप चने की फोटो भेजें ताकि आपको इसके बारे में उच्चित जानकारी दी जा सके, धन्यवाद
Posted by Chetan Singh
Uttar Pradesh
14-12-2019 08:19 PM
Punjab
12-14-2019 08:54 PM
मोटे आलुओं की पैदावार के लिए 13:0:45 की 2 किलो और मैगनीश्यिम ई डी टी ए 100 ग्राम प्रति एकड़ की स्प्रे करें बीमारियों के हमले को रोकने के लिए फंगसनाशी प्रॉपीनेब 3 ग्राम प्रति लीटर पानी डालें आलुओं का आकार और गिणती बढ़ाने के लिए हयूमिक एसिड (12 प्रतिशत) 3 ग्राम + एम ए पी 12:61:0 की 8 ग्राम या डी ए पी 15 ग्राम प्रति लीटर की स्प्रे पौध.... (Read More)
मोटे आलुओं की पैदावार के लिए 13:0:45 की 2 किलो और मैगनीश्यिम ई डी टी ए 100 ग्राम प्रति एकड़ की स्प्रे करें बीमारियों के हमले को रोकने के लिए फंगसनाशी प्रॉपीनेब 3 ग्राम प्रति लीटर पानी डालें आलुओं का आकार और गिणती बढ़ाने के लिए हयूमिक एसिड (12 प्रतिशत) 3 ग्राम + एम ए पी 12:61:0 की 8 ग्राम या डी ए पी 15 ग्राम प्रति लीटर की स्प्रे पौधे की वृद्धि के समय करें
Posted by PARAMJEET Singh
Uttar Pradesh
14-12-2019 08:09 PM
Punjab
12-16-2019 03:23 PM
Paramjeet ji chicks ki Brooding 4 hafte tak krni chahiye, jisme pehle hafte temp. 93-95 degrees Fahrenheit , 2 hafte vich 90 degrees Fahrenheit, 3 hafte mai 85 degrees Fahrenheit aur 4 hafte mai 80 degrees Fahrenheit tak hona chahiye..
Posted by sun singh
Uttar Pradesh
14-12-2019 08:08 PM
Punjab
12-15-2019 09:06 AM
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकत हैं,बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्चे देना आम बात है बकरियां 8-10 वर्ष तक बच्चे देती हैं आप बारबरी, ब्लैक बंगाल, जैसी नसल पाल सकते हैं इसके.... (Read More)
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकत हैं,बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्चे देना आम बात है बकरियां 8-10 वर्ष तक बच्चे देती हैं आप बारबरी, ब्लैक बंगाल, जैसी नसल पाल सकते हैं इसके इलावा आप ब्लैक बंगाल, बीटल, सिरोही, जमुनापरी, बरबरी नस्ल रख सकते हैं.इसके इलावा आप इस काम की ट्रेनिंग लेकर इसे शुरू करें ट्रेनिंग आप अपने नज़दीकी Krishi Vigyan Kendra, Mirzapur I.Ag.Sc., BHU, RGSC, Barkachha, District - Mirzapur (U.P.), INDIA, PIN - 231 001, Tel. No.: 05442 - 237276 से संपर्क कर सकते है
Posted by akash singh
Punjab
14-12-2019 08:07 PM
Punjab
12-17-2019 09:29 AM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਜੇਕਰ cocopeat ਨਹੀਂ ਮਿਲ ਰਹੀ ਹੈ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਇਸ ਨੂੰ ਘਰ ਚ ਵੀ ਤਿਆਰ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਇਸਦੇ ਬਾਰੇ ਜਾਣਕਾਰੀ ਲੈਣ ਲਈ ਤੁਸੀ ਨਾਲ ਭੇਜੇ link ਦੇਖੋ, ਧੰਨਵਾਦ https://youtu.be/bh-kWzLOYDY