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Posted by देवशीभाई चेतरीया
Gujarat
18-12-2019 08:17 AM
Maharashtra
12-18-2019 12:13 PM
खरबूजे के खेत में ज्यादा पानी ना लगाएं सिंचाई करते समय, बेलों या वानस्पति भागों विशेष कर फूलों और फलों पर पानी ला लगाएं भारी मिट्टी में लगातार सिंचाई ना करें, इससे वानस्पति भागों की अत्याधिक वृद्धि होगी अच्छे स्वाद के लिए कटाई से 3-6 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें या कम कर दें
Posted by manish bagaria
Rajasthan
18-12-2019 08:14 AM
Maharashtra
12-18-2019 12:11 PM
सभ्याचारक पद्धति: सभ्याचारक पद्धति से नदीनों की रोकथाम के लिए फसल बोने के समय, फसल बोने की पद्धति, फसल की किस्म, खाद की मात्रा, सिंचाई की पद्धति ये सभी तत्व महत्तवपूर्ण भूमिका निभाते हैं बिजाई के लिए हमेशा गेहूं के साफ और नदीन मुक्त बीजों का प्रयोग करें गेहूं के बीजों का अंकुरन होने से पहले नदीनों को उखाड़क.... (Read More)
सभ्याचारक पद्धति: सभ्याचारक पद्धति से नदीनों की रोकथाम के लिए फसल बोने के समय, फसल बोने की पद्धति, फसल की किस्म, खाद की मात्रा, सिंचाई की पद्धति ये सभी तत्व महत्तवपूर्ण भूमिका निभाते हैं बिजाई के लिए हमेशा गेहूं के साफ और नदीन मुक्त बीजों का प्रयोग करें गेहूं के बीजों का अंकुरन होने से पहले नदीनों को उखाड़कर नाश कर दें खालियों को नदीन रहित रखें रासायनिक नदीन रोकथाम: इसमें कम मेहनत और हाथों से नदीनों को उखाड़ने से होने वाली हानि ना होने कारण ज्यादातर यह तरीका ही अपनाया जाता है नुकसान से बचने के लिए पैंडीमैथालीन स्टांप (30 ई.सी.) 1320 मि.ली. को 200 लीटर पानी के घोल में मिलाके बीजने के 0-3 दिनों के अंदर अंदर छिड़काव करना चाहिए चौड़े पत्तों वाले नदीनों की रोकथाम: चौड़े पत्तों वाले नदीनों की रोकथाम के लिए बिजाई के 25-30 दिनों के बाद 2,4-डी 0.2-0.4 किलो को प्रति एकड़ में डालें जब फसल को पहला पानी लग जाए तो जड़ें बनने के समय चौड़े पत्तों वाले नदीनों को रोकने के लिए फलूरोक्सीपर 0.08-0.24 किलो प्रति एकड़ में डालना 2,4-डी के स्थान पर अच्छा विकल्प है जब मिट्टी में पर्याप्त नमी मौजूद हो तो नदीननाश्क, पहले और बाद में की जाने वाली दोनों स्प्रे का प्रयोग करें स्प्रे साफ और धूप वाले दिनों में करें नदीनों का फसल में मिलना एक बहुत बड़ी समस्या है इसके लिए 30-35 दिनों में 160 ग्राम क्लोडिनाफॉप- प्रॉपरज़िल + मैटसलफिउरॉन - मिथाइल बना बनाया + 500 मि.ली. सरफकटैंट 200 लीटर पानी में डालकर प्रति एकड़ में स्प्रे करें
Posted by manish bagaria
Rajasthan
18-12-2019 08:09 AM
Maharashtra
12-18-2019 11:57 AM
सभ्याचारक पद्धति: सभ्याचारक पद्धति से नदीनों की रोकथाम के लिए फसल बोने के समय, फसल बोने की पद्धति, फसल की किस्म, खाद की मात्रा, सिंचाई की पद्धति ये सभी तत्व महत्तवपूर्ण भूमिका निभाते हैं बिजाई के लिए हमेशा गेहूं के साफ और नदीन मुक्त बीजों का प्रयोग करें गेहूं के बीजों का अंकुरन होने से पहले नदीनों को उखाड़क.... (Read More)
सभ्याचारक पद्धति: सभ्याचारक पद्धति से नदीनों की रोकथाम के लिए फसल बोने के समय, फसल बोने की पद्धति, फसल की किस्म, खाद की मात्रा, सिंचाई की पद्धति ये सभी तत्व महत्तवपूर्ण भूमिका निभाते हैं बिजाई के लिए हमेशा गेहूं के साफ और नदीन मुक्त बीजों का प्रयोग करें गेहूं के बीजों का अंकुरन होने से पहले नदीनों को उखाड़कर नाश कर दें खालियों को नदीन रहित रखें रासायनिक नदीन रोकथाम: इसमें कम मेहनत और हाथों से नदीनों को उखाड़ने से होने वाली हानि ना होने कारण ज्यादातर यह तरीका ही अपनाया जाता है नुकसान से बचने के लिए पैंडीमैथालीन स्टांप (30 ई.सी.) 1320 मि.ली. को 200 लीटर पानी के घोल में मिलाके बीजने के 0-3 दिनों के अंदर अंदर छिड़काव करना चाहिए चौड़े पत्तों वाले नदीनों की रोकथाम: चौड़े पत्तों वाले नदीनों की रोकथाम के लिए बिजाई के 25-30 दिनों के बाद 2,4-डी 0.2-0.4 किलो को प्रति एकड़ में डालें जब फसल को पहला पानी लग जाए तो जड़ें बनने के समय चौड़े पत्तों वाले नदीनों को रोकने के लिए फलूरोक्सीपर 0.08-0.24 किलो प्रति एकड़ में डालना 2,4-डी के स्थान पर अच्छा विकल्प है जब मिट्टी में पर्याप्त नमी मौजूद हो तो नदीननाश्क, पहले और बाद में की जाने वाली दोनों स्प्रे का प्रयोग करें स्प्रे साफ और धूप वाले दिनों में करें नदीनों का फसल में मिलना एक बहुत बड़ी समस्या है इसके लिए 30-35 दिनों में 160 ग्राम क्लोडिनाफॉप- प्रॉपरज़िल + मैटसलफिउरॉन - मिथाइल बना बनाया + 500 मि.ली. सरफकटैंट 200 लीटर पानी में डालकर प्रति एकड़ में स्प्रे करें
Posted by sikandar prajapati
Uttar Pradesh
18-12-2019 08:07 AM
Punjab
12-18-2019 11:51 AM
sikandar ji kripya swal vistar se pooche ke aap ek gender kise keh rahe hai taki aapko uske hisab se jankari di ja sake ke aapko beej kaha se milege.dhanywad
Posted by yashpal yadav
Chattisgarh
18-12-2019 08:06 AM
Maharashtra
12-18-2019 11:49 AM
बैंगन की फसल सख्त होने के कारण इसे अलग अलग तरह की मिट्टी में उगाया जा सकता है यह एक लंबे समय की फसल है, इसलिए अच्छे जल निकास वाली उपजाऊ रेतली दोमट मिट्टी उचित होती है और अच्छी पैदावार देती है अगेती फसल के लिए हल्की मिट्टी और अधिक पैदावार के लिए चिकनी और नमी या गारे वाली मिट्टी उचित होती है फसल की वृद्धि के लिए 5..... (Read More)
बैंगन की फसल सख्त होने के कारण इसे अलग अलग तरह की मिट्टी में उगाया जा सकता है यह एक लंबे समय की फसल है, इसलिए अच्छे जल निकास वाली उपजाऊ रेतली दोमट मिट्टी उचित होती है और अच्छी पैदावार देती है अगेती फसल के लिए हल्की मिट्टी और अधिक पैदावार के लिए चिकनी और नमी या गारे वाली मिट्टी उचित होती है फसल की वृद्धि के लिए 5.5-6.6 पी एच होनी चाहिए लंबी किस्में Pusa Purple Long: यह जल्दी पकने वाली किस्म है सर्दियों में यह 70-80 दिनों में और गर्मियों में यह 100-110 दिनों में पक जाती है इस किस्म के बूटे दरमियाने कद के और फल लंबे और जामुनी रंग के होते हैं इसकी औसतन पैदावार 120 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa Purple Cluster: यह किस्म आई. सी. ए. आर. नई दिल्ली द्वारा बनाई गई है यह दरमियाने समय की किस्म है इसके फल गहरे जामुनी रंग और गुच्छे में होते हैं यह बैक्टीरिया सूखे के कुछ हद तक प्रतिरोधक है Pusa Kranti: यह किस्म IARI, नई दिल्ली द्वारा विकसित की गई है यह किस्म बसंत और पतझड़ के मौसम में उगाने के लिए अनुकूल है यह किसम 130-150 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती हे इसके फल आकर्षित गहरे जामुनी रंग के होते हैं इसकी औसतन पैदावार 56-64 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Punjab Sadabahar: इसकी औसतन पैदावार 120-160 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Punjab Basarati: इसकी औसतन पैदावार 120-140 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pant Samrat: इसके फल रोपाई के 70 दिनों के बाद तुड़ाई के लिए तैयार हो जाते हैं गोल किस्में Pusa Purple Round: यह किस्म छोटे पत्ते, शाख और फल के छेदक की रोधक किस्म है Pant Rituraj: इस किस्म के फल गोल और आकर्षित जामुनी रंग के होते हैं और इनमें बीज की मात्रा भी कम होती है इसकी औसतन पैदावार 160 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Banaras Giant: यह वाराणसी और उसके नजदीक के क्षेत्रों में प्रसिद्ध किस्म है इसके फल हरे और सफेद रंग के होते हैं इसकी औसतन पैदावार 400 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Swarna Mani: यह किस्म बैक्टीरियल सूखे के प्रतिरोधक किस्म है इसकी औसतन पैदावार 24-26 टन प्रति एकड़ होती है Swarna Ajay: इसकी औसतन पैदावार 28-30 टन प्रति एकड़ होती है बैंगन की खेती पूरे वर्ष की जाती है खरीफ मौसम के लिए, नर्सरी फरवरी - मार्च के महीने में तैयार करें और मार्च - अप्रैल के महीने में रोपाई करें सर्दियों के मौसम में, नर्सरी की तैयारी के लिए जून जुलाई का समय उपयुक्त होता है और रोपाई के लिए जुलाई अगस्त का महीना उपयुक्त होता है बसंत के मौसम में, सितंबर के महीने में नर्सरी तैयार करें और अक्तूबर - नवंबर के महीने में रोपाई पूरी कर लें लंबी किस्मों के लिए, कतार से कतार में 60-75 सैं.मी. जबकि गोल किस्मों के लिए कतारों में 80-90 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 60-70 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें नर्सरी में, बीज को 1.5 सैं.मी. गहराई में बोयें और मिट्टी से ढक दें खेत में पनीरी लगाकर इसकी बिजाई की जाती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की तीन से चार बार जोताई करें गाय का गला हुआ गोबर 42 क्विंटल प्रति एकड़ में डालें और मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें बैंगन के बीज 3 मीटर लंबे, 1 मीटर चौड़े और 15 सैं.मी. ऊंचे बैडों पर बोये जाते हैं पहले बैडों में बढ़िया रूड़ी की खाद डालें फिर बिजाई से दो दिन पहले कप्तान का घोल डालें ताकि जो नर्सरी बैडों में पौधों को नष्ट होने से बचाया जा सके उसके बाद बीजों को कतारों में 2.5 सैं.मी. के फासले पर और 1.5 सैं.मी. की गहराई पर बोयें हल्की सिंचाई करें पौधों के अंकुरन तक बैडों को काले रंग की पॉलीथीन शीट या पराली से ढक दें तंदरूस्त पौधे जिनके 3-4 पत्ते निकलें हों और कद 12-15 सैं.मी. (30-40 days crop) हो, खेत में पनीरी लगाने के लिए तैयार होते हैं बैंगन की खेती पूरे वर्ष की जाती है खरीफ मौसम के लिए, नर्सरी फरवरी - मार्च के महीने में तैयार करें और मार्च - अप्रैल के महीने में रोपाई करें सर्दियों के मौसम में, नर्सरी की तैयारी के लिए जून जुलाई का समय उपयुक्त होता है और रोपाई के लिए जुलाई अगस्त का महीना उपयुक्त होता है बसंत के मौसम में, सितंबर के महीने में नर्सरी तैयार करें और अक्तूबर - नवंबर के महीने में रोपाई पूरी कर लें लंबी किस्मों के लिए, कतार से कतार में 60-75 सैं.मी. जबकि गोल किस्मों के लिए कतारों में 80-90 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 60-70 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें नर्सरी में, बीज को 1.5 सैं.मी. गहराई में बोयें और मिट्टी से ढक दें खेत में पनीरी लगाकर इसकी बिजाई की जाती है एक एकड़ खेत में बिजाई के लिए 300-400 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें नाइट्रोजन 60 किलो (130 किलो यूरिया), फासफोरस 20 किलो (125 किलो सिंगल सुपर फासफेट) और पोटाश 20 किलो (35 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश) की मात्रा प्रति एकड़ में प्रयोग करें नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा आखिरी जोताई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन को रोपाई के बाद 30 वें और 45वें दिन डालें नदीनों को रोकने, अच्छे विकास और उचित हवा के लिए दो - चार गोडाई करें काले रंग की पॉलिथीन शीट से पौधों को ढक दें जिससे नदीनों का विकास कम हो जाता है और ज़मीन का तापमान भी बना रहता हैं नदीनों को रोकने के लिए पौधे लगाने से पहले मिट्टी में फलूकलोरालिन 600-800 मि.ली. प्रति एकड़ या ऑक्साडायाज़ोन 400 ग्राम प्रति एकड़ डालें अच्छे परिणाम के लिए पौधे लगाने से पहले एलाकलोर 2 लीटर प्रति एकड़ की मिट्टी के तल पर स्प्रे
Posted by manish bagaria
Rajasthan
18-12-2019 08:06 AM
Punjab
12-18-2019 11:41 AM
मनीष जी आप इसके ऊपर cypermethrin @2- 2.5 ml को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by manish bagaria
Rajasthan
18-12-2019 08:03 AM
Maharashtra
12-18-2019 11:39 AM
manish ji aap iske uper cypermethrin@2ml ko prati litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by dharmender
Himachal Pradesh
18-12-2019 07:48 AM
Maharashtra
12-18-2019 11:25 AM
यह कई तरह की मिट्टी में उगाई जाती है इसकी पैदावार के लिए नमकीन, क्षारीय और पानी खड़ा होने वाली मिट्टी से बचाव करें यह बढ़िया निकास वाली मिट्टी जिसमे बढ़िया जैविक तत्व मौजूद हों, में बढ़िया परिणाम देती है इसके बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 5.5-7 होना चाहिए Drudriha Tulsi: यह मुख्य रूप से बंगाल, नेपाल, चटगांव और महाराष्ट्र क्ष.... (Read More)
यह कई तरह की मिट्टी में उगाई जाती है इसकी पैदावार के लिए नमकीन, क्षारीय और पानी खड़ा होने वाली मिट्टी से बचाव करें यह बढ़िया निकास वाली मिट्टी जिसमे बढ़िया जैविक तत्व मौजूद हों, में बढ़िया परिणाम देती है इसके बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 5.5-7 होना चाहिए Drudriha Tulsi: यह मुख्य रूप से बंगाल, नेपाल, चटगांव और महाराष्ट्र क्षेत्रों में पाई जाती है यह गले को सूखेपन से राहत देता है यह हाथों, पैरों और गठिया की सूजन से आराम देता है Ram/Kali Tulsi (Ocimum canum): यह चीन, ब्राज़ील, पूर्व नेपाल और साथ ही बंगाल, बिहार, चटगांव और भारत के दक्षिणी क्षेत्रों में पाई जाती है इसका तना जामुनी और पत्ते हरे रंग के और बहुत ज्यादा सुगंधित होते है इसमें उचित मात्रा में औषधीय गुण जैसे ऐज़ाडिरैकटिन, ऐंटीफंगल , ऐंटीबैक्टीरियल, और पाचन तंत्र को ठीक रखती है यह गर्म क्षेत्रों में बढ़िया उगता है Babi Tulsi: यह पंजाब से त्रिवेंद्रम, बंगाल और बिहार में भी पाई जाती है इसका पौधा 1-2 फीट लम्बा होता है पत्ते 1-2 इंच लम्बे, अंडाकार और नुकीले होते है इसके पत्तों का स्वाद लौंग की तरह और सब्जियों में स्वाद के लिए प्रयोग किया जाता है तुलसी की खेती के लिए, अच्छी तरह से शुष्क मिट्टी की मांग की जाती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक हैरो के साथ खेत की जोताई करें, फिर रूड़ी की खाद मिट्टी में मिलाएं तुलसी की रोपाई सीड बैड पर करें फरवरी के तीसरे महीने में नर्सरी बैड तैयार करें पौधे के विकास के अनुसार, 4.5 x 1.0 x 0.2 मीटर के सीड बैड तैयार करें बीजों को 60x60 सैं.मी. के फैसले पर बोयें बीजों को 2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई के 6-7 हफ्ते बाद, फसल की रोपाई खेत में करें तुलसी की खेती के लिए 120 ग्राम बीजों का प्रयोग प्रति एकड़ में करें फसल को मिट्टी से पैदा होने वाली बीमारीयों से रोकथाम के लिए, बिजाई से पहले मैनकोजेब 5 ग्राम प्रति किलोग्राम से बीजों का उपचार करें फसल की बढ़िया पैदावार के लिए बिजाई से पहले 15 टन रूड़ी की खाद मिट्टी में डालें तुलसी के बीजों को तैयार बैडों के साथ उचित अंतराल पर बोयें मानसून आने के 8 हफ्ते पहले बीजों को बैड पर बोयें बीजों को 2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई के बाद, रूड़ी की खाद और मिट्टी की पतली परत बीजों पर बना दें इसकी सिंचाई फुवारा विधि द्वारा की जाती है रोपाई के 15-20 दिनों के बाद, नए पौधों को तंदरुस्त बनाने के लिए 2% यूरिया का घोल डालें 6 हफ्ते पुराने और 4-5 पत्तों के अंकुरण होने पर अप्रैल के महीने में नए पौधे तैयार होते है तैयार बैडों को रोपाई 24 घंटे पहले पानी लगाएं ताकि पौधों को आसानी से उखाड़ा जा सकें और रोपाई के समय जड़ें मुलायम और सूजी हुई हो खेत की तैयारी के समय, रूड़ी की खाद को मिट्टी में मिलाएं खाद के तौर पर नाइट्रोजन 48 किलो(यूरिया 104 किलो), फासफोरस 24 किलो(सिंगल सुपर फासफेट 150 किलो) और पोटाश 24 किलो(मिउरेट 40 किलो) प्रति एकड़ में डालें नए पौधे लगाने के समय नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफेट पेंटोऑक्साइड की पूरी मात्रा शुरुआती समय में डालें Mn 50 पी पी एम कंसंट्रेशन और Co@100 पी पी एम कंसंट्रेशन सूक्ष्म-तत्व डालें बाकी की बची हुई नाइट्रोजन को 2 हिस्सों में पहली और दूसरी कटाई के बाद डालें खेत को नदीनों से मुक्त करने के लिए कसी की मदद से गोड़ाई करें नदीनों की रोकथाम कम न होने पर यह फसल को नुकसान पहुंचाते है रोपण के एक महीने बाद पहली गोड़ाई और पहली गोड़ाई के चार हफ्ते बाद दूसरी गोड़ाई करें रोपण के दो महीने बाद कसी से अनुकूल गोड़ाई करें गर्मियों में, एक महीने में 3 सिंचाइयां करें और बरसात के मौसम में, सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती एक साल में 12-15 सिंचाइयां करनी चाहिए पहली सिंचाई रोपण के बाद करें और दूसरी सिंचाई नए पौधों के स्थिर होने पर करें 2 सिंचाइयां करनी आवश्यक है और बाकी की सिंचाई मौसम के आधार पर करें इसके मंडीकरण के लिए आप Aushadhiya kheti vikas sansthan 6268536795 से संपर्क कर सकते हैं धन्यवाद
Posted by sonu singh
Uttar Pradesh
18-12-2019 07:39 AM
Maharashtra
12-18-2019 11:37 AM
sonu ji kripya aap iski photo bheje taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake,dhanywad
Posted by digvijay sahu
Chattisgarh
18-12-2019 07:35 AM
Maharashtra
12-18-2019 11:32 AM
सिंचित और कम बारानी वाले क्षेत्रों के लिए लगभग 41-50 किलो नाइट्रोजन (यूरिया 90-110 किलो), 30 किलो फासफोरस (एस एस पी 190 किलो) और 27 किलो पोटाश (म्यूरेट ऑफ पोटाश 45 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा रोपाई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटकर, नाइट्रोजन का 1/4 .... (Read More)
सिंचित और कम बारानी वाले क्षेत्रों के लिए लगभग 41-50 किलो नाइट्रोजन (यूरिया 90-110 किलो), 30 किलो फासफोरस (एस एस पी 190 किलो) और 27 किलो पोटाश (म्यूरेट ऑफ पोटाश 45 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा रोपाई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटकर, नाइट्रोजन का 1/4 हिस्सा शाखाएं निकलने के समय और 1/4 हिस्सा बालियां निकलने के समय डालें जल जमाव वाले क्षेत्रों में नाइट्रोजन 30-41 किलो (यूरिया 65-90 किलो) प्रति एकड़ में शुरूआती खुराक के तौर पर डालें कम बारानी क्षेत्रों के लिए नाइट्रोजन 23-32 किलो (यूरिया 52-70 किलो) और फासफोरस 16 किलो (एस एस पी 100 किलो) प्रति एकड़ में प्रयोग करें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस की पूरी मात्रा रोपाई से पहले और बाकी बची नाइट्रोजन बालियां निकलने के समय डालें ऊंचे क्षेत्रों के लिए नाइट्रोजन 23 किलो (यूरिया 52 किलो), फासफोरस 12 किलो (एस एस पी 75 किलो) और पोटाश 12 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 20 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के तीन सप्ताह बाद डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटे पहले भाग को बिजाई के 6 सप्ताह बाद और दूसरे भाग को बालियां निकलने के समय डालें
Posted by Gurveer sidhu
Punjab
18-12-2019 07:33 AM
Punjab
12-18-2019 11:22 AM
gurveer ji leader nu tuc urea nal mila ke nahi pa sakde.dhanwad
Posted by Manohar sharma
Rajasthan
18-12-2019 07:32 AM
Maharashtra
12-18-2019 11:26 AM
Dbw173 गेहू की किस्म की उपज 28 क्विंटल प्रति एकड़ है, इसके पकने का समय 140 -150 दिन का है
Posted by Manpreet Bhullar
Punjab
18-12-2019 07:28 AM
Punjab
12-18-2019 11:19 AM
manpreet ji kanak di bijai de dono tareeke vadia hunde han purane same vich jado machina ghat hundiyan c ta os same lok chita deke kanak beejde c par hun machina nal bijai karni shuru kar diti hai. machina nal bijai karn da eh fayda hunda hai ke beej iksar iko jehe faasle te khet vich bijayi kiti jandi hai.
Posted by Mithun
Uttarakhand
18-12-2019 07:19 AM
Maharashtra
12-18-2019 10:35 AM
Mithun ji aap kripya btaye ke paudhe ki umar kitni hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by भीमसिंह सुराणा
Rajasthan
18-12-2019 07:17 AM
Punjab
12-18-2019 02:19 PM
बड़ेवे डालने से फैट बढ़ती है पर आप रोजाना 260 ग्राम सेज्यादा ना डालें नहीं तो चर्बी भी बढ़ने लग जाती है और बड़ेवे सूखे हो तो ज्यादा फायदा होता है यदि कपास के बड़ेवे हो तो अच्छा है इसके इलावा आप 100 ग्राम कैल्शियम और 100 ग्राम सरसों का तेल और एक चम्मच काला नमक डालकर लगातार 7 दिनों तक खिलायें इससे फैट बढ़ जाएगी
Posted by भीमसिंह सुराणा
Rajasthan
18-12-2019 06:54 AM
Punjab
12-18-2019 01:24 PM
भीम सिंह जी जैविक खेती में आपको रस्यानिक खादों को छोड़ कर गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट का इस्तेमाल करना होता है अगर पौधे पर फंगस का हमला है तो आप खट्टी लस्सी की स्प्रे करें और अगर कीट का हमला है तो आप नीम के तेल की स्प्रे कर सकते है धन्यवाद
Posted by Gurbaj Singh
Punjab
18-12-2019 06:53 AM
Punjab
12-19-2019 07:39 PM
Gurbhej ji ehh infection krke kr rehi hai tuci uss nu Gestaprogen powder 25gm rojana 20 din tak deo jekar ohh agli varr heat vich aawe tan tuci usdi bachedani di safai krwa ke uss to agli heat te tika bhrwao ji..
Posted by Jhinkulal Ashu
Uttar Pradesh
18-12-2019 06:47 AM
Punjab
12-18-2019 10:33 AM
झिनकूलाल जी आप इसके ऊपर carbendazim @4 ग्राम को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by karanjeet Kumar
Bihar
18-12-2019 06:43 AM
Maharashtra
12-18-2019 09:55 AM
मोटे आलुओं की पैदावार के लिए 13:0:45 की 2 किलो और मैगनीश्यिम ई डी टी ए 100 ग्राम प्रति एकड़ की स्प्रे करें बीमारियों के हमले को रोकने के लिए फंगसनाशी प्रॉपीनेब 3 ग्राम प्रति लीटर पानी डालें आलुओं का आकार और गिणती बढ़ाने के लिए हयूमिक एसिड (12 प्रतिशत) 3 ग्राम + एम ए पी 12:61:0 की 8 ग्राम या डी ए पी 15 ग्राम प्रति लीटर की स्प्रे पौध.... (Read More)
मोटे आलुओं की पैदावार के लिए 13:0:45 की 2 किलो और मैगनीश्यिम ई डी टी ए 100 ग्राम प्रति एकड़ की स्प्रे करें बीमारियों के हमले को रोकने के लिए फंगसनाशी प्रॉपीनेब 3 ग्राम प्रति लीटर पानी डालें आलुओं का आकार और गिणती बढ़ाने के लिए हयूमिक एसिड (12 प्रतिशत) 3 ग्राम + एम ए पी 12:61:0 की 8 ग्राम या डी ए पी 15 ग्राम प्रति लीटर की स्प्रे पौधे की वृद्धि के समय करें
Posted by Narinder pal Singh
Punjab
18-12-2019 06:23 AM
Punjab
12-18-2019 09:39 AM
Narinder pal ji kirpa karke dso ke tuc shagun di spray kdo kiti hai hai barish kine dina bad hoyi hai ta jo tuhanu is bare poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by Ankit Dhakad
Madhya Pradesh
18-12-2019 01:53 AM
Punjab
12-18-2019 06:12 AM
bhai sahib nazdik ke pashu palan adhikari or krishi vigyan kendar se sampark karein or training lein
Posted by poorna
Karnataka
18-12-2019 12:16 AM
Punjab
12-19-2019 07:39 PM
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकत हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्च.... (Read More)
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकत हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्चे देना आम बात है बकरियां 8-10 वर्ष तक बच्चे देती हैं और अपन गिनती को तेजी से बढ़ा लेती हैं आप बारबरी, ब्लैक बंगाल, जैसी नसल पाल सकते हैं इसकी ट्रेनिेंग के लिए आप अपने कुषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करे या फिर जो बकरी पालन का व्यवसाय कर रहा कोई किसान उसका फार्म स्वंय जाकर देखकर आयें तो और भी बा​रीकियों का पता चल जायेगा, आप ब्लैक बंगाल, बीटल, सिरोही, जमुनापरी, बरबरी नस्ल रख सकते हैं.
Posted by GAGAN MANSHAHIA
Punjab
18-12-2019 12:10 AM
Punjab
12-18-2019 09:44 AM
ਗਗਨ ਜੀ ਆੜੂ ਦੇ ਪੌਧੇ ਦੀ cutting ਕਰਨ ਦਾ ਸਹੀ ਸਮਾਂ ਬਸੰਤ ਰੁੱਤ ਦੀ ਸ਼ੁਰੂਆਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by GAGAN MANSHAHIA
Punjab
17-12-2019 11:33 PM
Punjab
12-18-2019 09:37 AM
gagan ji kinnow di cutting di training de layi tuc KVK Bathinda Address:-Associate Director ( Training) Krishi Vigyan Kendra, Punjab Agricultural University, Bathinda to lai sakde ho.dhanwad
Posted by GAGAN MANSHAHIA
Punjab
17-12-2019 11:28 PM
Punjab
12-23-2019 10:25 AM
gagan ji kinnow di cutting di training de layi tuc KVK Bathinda Address:-Associate Director ( Training) Krishi Vigyan Kendra, Punjab Agricultural University, Bathinda to lai sakde ho.dhanwad
Posted by Mandeep Singh
Haryana
17-12-2019 11:11 PM
Punjab
12-18-2019 12:32 PM
Mandeep Singh ji pure and ashe rate me RIR chicks lene ke lia aap Central Poultry Development Organization (Northern Region) Industrial Area, Phase-I, Chandigarh – 160 002 Tel.No: 0172-2655391 se samparak kar sakte hai, Thankyou.
Posted by ravi
Madhya Pradesh
17-12-2019 10:54 PM
Punjab
12-18-2019 07:19 AM
श्री मान जी, मोटे अकार के आलुओं की पैदावार के लिए 13:00:45 की 2 किलो और मैगनीश्यिम ई डी टी ए 100 ग्राम प्रति एकड़ की स्प्रे करें, बीमारियों के हमले को रोकने के लिए फंगसनाशी प्रॉपीनेब 3 ग्राम प्रति लीटर पानी डालें, आलुओं का आकार और संख्या बढ़ाने के लिए हयूमिक एसिड (12 प्रतिशत) 3 ग्राम + एम ए पी 12:61:00 की 8 ग्राम या डी ए पी 15 ग्राम प.... (Read More)
श्री मान जी, मोटे अकार के आलुओं की पैदावार के लिए 13:00:45 की 2 किलो और मैगनीश्यिम ई डी टी ए 100 ग्राम प्रति एकड़ की स्प्रे करें, बीमारियों के हमले को रोकने के लिए फंगसनाशी प्रॉपीनेब 3 ग्राम प्रति लीटर पानी डालें, आलुओं का आकार और संख्या बढ़ाने के लिए हयूमिक एसिड (12 प्रतिशत) 3 ग्राम + एम ए पी 12:61:00 की 8 ग्राम या डी ए पी 15 ग्राम प्रति लीटर की स्प्रे पौधे की वृद्धि के समय करें
Posted by राहुलसिंह
Madhya Pradesh
17-12-2019 10:46 PM
Punjab
12-18-2019 07:20 AM
श्री मान लहसुन के लिए आप M-45@500 gm प्रती एकड़ सप्रे कर सकते हो
Posted by सत्येन्द्र सिंह
Uttar Pradesh
17-12-2019 10:44 PM
Maharashtra
12-18-2019 03:58 PM
सत्येन्द्र जी अभी भिंडी की बिजाई नहीं की जा सकती उत्तर में यह वर्षा और बसंत के मौसम में उगाई जाती है खरीफ के मौसम में, इसकी बिजाई जून-जुलाई के महीने और बसंत ऋतु में फरवरी-मार्च के महीने में की जाती है आप इनको अलग अलग मेड पर लगा सकते है
Posted by Gurjot Singh
Punjab
17-12-2019 10:23 PM
Punjab
12-18-2019 02:18 PM
ਮੋਟੇ ਆਲੂਆਂ ਦੀ ਪੈਦਾਵਾਰ ਲਈ, 13:0:45 ਦੀ 2 ਕਿਲੋ ਅਤੇ ਮੈਗਨੀਸ਼ੀਅਮ ਈ ਡੀ ਟੀ ਏ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਦੇ ਹਮਲੇ ਨੂੰ ਰੋਕਣ ਲਈ ਉੱਲੀਨਾਸ਼ਕ ਪ੍ਰੋਪਿਨੇਬ 3 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਪਾਓ ਆਲੂਆਂ ਦਾ ਆਕਾਰ ਅਤੇ ਗਿਣਤੀ ਵਧਾਉਣ ਲਈ ਹਿਊਮਿਕ ਐਸਿਡ (12%) 3 ਗ੍ਰਾਮ+ਐੱਮ ਏ ਪੀ 12:61:0 ਦੀ 8 ਗ੍ਰਾਮ ਜਾਂ ਡੀ ਏ ਪੀ 15 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਲੀਟਰ ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਪੌਦੇ ਦੇ ਵਾਧੇ ਸਮੇਂ ਕਰੋ
Posted by Gurpartap singh
Punjab
17-12-2019 10:16 PM
Punjab
12-24-2019 10:36 AM
Gurpartap singh ji engine wala spray pump len ate is di subsidy bare puri jankari lai tusi Rajiv garg (Raja) 9815940212, 9317793673 Raja Enterprises mal samparak kar sakde ho, Thankyou.
Posted by Ashraf Nabiso Pendhari
Maharashtra
17-12-2019 10:10 PM
Maharashtra
12-18-2019 02:40 PM
गेहूं में कीटनाशक या फंगीनाशी की स्प्रे बीमारी या कीट का हमला होने पर ही किया जाता है आप खेत की लगातार जांच करते रहें और अगर आपको बीमारी या हीट का हमला दिखाई देता है तो उसके हिसाब से स्प्रे कर सकते है।
Posted by Rakesh Kumar
Punjab
17-12-2019 10:04 PM
Punjab
12-17-2019 10:07 PM
Rakesh Kumar g, Tuhanu PAU Ludhiana cho Quail (Jpaani Bter) mil jaan gey. Quail lain lyi Tusi Sekhon Sahb naal contact kro. 81461-00461
Posted by Vinod chauhan
Gujarat
17-12-2019 10:03 PM
Punjab
12-18-2019 05:59 PM
Vinod chauhan ji cow ka price us ki purity, Age, Milk capacity, lactation, par nirbhar karta hai, Thankyou.
Posted by ashwani
Uttar Pradesh
17-12-2019 10:03 PM
Punjab
12-18-2019 02:29 PM
अश्वनी जी मौसम विभाग के अनुसार मौसम लगभग साफ़ है धन्यवाद
Posted by mintu
Punjab
17-12-2019 09:55 PM
Punjab
12-18-2019 06:06 PM
Goat farming milk aur meat k liye bht hi labhdayak karye hai , yeh karya hum 2-10 goat k sath start kar skte hain ,achhi breed aur healthy goat 15000-20000 tak mil jati hai jo ek din mein 3.50 kg tak milk deti hai,jiske sath ek saal mein 35,000-40,000 tak ki kamai ho jati hai, healthy goat ek saal mein 3-4 bchee de deti hai ,jis se karobar ko bht hi teji se bdha skte hai, inke khane ki jrurat bht kam Hai, aur hum ise proper feed de skte hai, meat k liye bhi yeh karobar bht achha hai, hum buck ( Bakra) ko meat purpose k liye use kar skte hain Shuru karne k liye app barbury , black bengal, sirohi, etc breed rakh skte ho.
Posted by mo akhter
Uttar Pradesh
17-12-2019 09:45 PM
Punjab
12-18-2019 07:21 AM
श्रीमान जी, सिंचित क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 60 किलो (यूरिया 130 किलो), फासफोरस 24 किलो (एस एस पी 150 किलो), पोटाश 12 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 20 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी नाइट्रोजन को पहली सिंचाई के समय डालें बारानी क्षेत्रों के लिए, नाइट.... (Read More)
श्रीमान जी, सिंचित क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 60 किलो (यूरिया 130 किलो), फासफोरस 24 किलो (एस एस पी 150 किलो), पोटाश 12 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 20 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी नाइट्रोजन को पहली सिंचाई के समय डालें बारानी क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 24 किलो (यूरिया 52 किलो), फासफोरस 12 किलो (एस एस पी 75 किलो), पोटाश 8 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 15 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोज, फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें सिंचित क्षेत्रों में पिछेती बिजाई के लिए, नाइट्रोजन 50 किलो (यूरिया 110 किलो), फासफोरस 12 किलो (एस एस पी 75 किलो), पोटाश 16 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 27 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन की दो तिहाई मात्रा बिजाई के 35-40 दिनों के बाद डालें
Posted by rahul sahu
Madhya Pradesh
17-12-2019 09:31 PM
Punjab
12-17-2019 09:35 PM
Rahul g, Apna question poori detail mey btaao g taa k aapko sahi information btaa ske. Thanks
Posted by sandeep rawat
Uttar Pradesh
17-12-2019 09:30 PM
Maharashtra
12-18-2019 02:25 PM
ग्वार को हर तरह की मिट्टी में उगाया जा सकता है अधिक पैदावार लेने के लिए इसकी बिजाई रेतली, चिकनी और सही निकास वाली जमीन में करनी लाभदायक होती है उपयुक्त पैदावार के लिए मिट्टी की पी एच 7 से 8 की आवश्यकता होती है ग्वार की पैदावार के लिए समतल ज़मीन की जरूरत होती है बिजाई से पहले मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की 2-3 बार .... (Read More)
ग्वार को हर तरह की मिट्टी में उगाया जा सकता है अधिक पैदावार लेने के लिए इसकी बिजाई रेतली, चिकनी और सही निकास वाली जमीन में करनी लाभदायक होती है उपयुक्त पैदावार के लिए मिट्टी की पी एच 7 से 8 की आवश्यकता होती है ग्वार की पैदावार के लिए समतल ज़मीन की जरूरत होती है बिजाई से पहले मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की 2-3 बार हल से जोताई करें इसके बाद तवियों से जोतने के बाद सुहागे से अच्छी तरह समतल कर लेना चाहिए और ग्वार की खेती के लिए मेंड़ और खालियां बनाएं खारी और जल जमाव वाली मिट्टी में बिजाई ना करें राजस्थान में ग्वार की बिजाई के लिए जून के पहले सप्ताह से जुलाई के पहले पखवाड़े का समय उपयुक्त होता है पौधों में 45-60 सैं.मी. x 20-30 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीजों को खालियों पर 2-3 सैं.मी. की गहराई में बोयें कुछ क्षेत्रों में बिजाई छींटा देकर की जाती है और कुछ क्षेत्रों में ड्रिल विधि का प्रयोग किया जाता है एक एकड़ खेत में बिजाई के लिए 6-8 किलो बीज प्रति एकड़ प्रयोग करें जब इसे दानों और फलियों के उद्देश्य से उगाया जाये तो बीजों की मात्रा 8 किलो उपयुक्त होती है जबकि चारे के लिए अधिक बीज मात्रा की आवश्यकता होती है बिजाई से पहले, मिट्टी से पैदा होने वाले कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए बीजों का उपचार करना जरूरी होता है बीजों को गर्म पानी में 56 डिगरी सैल्सियस पर 10 मिनट के लिए भिगो दें और फिर सामान्य तापमान पर बीजों को सुखाएं फंगस से बीजों को बचाने के लिए थीरम 3 ग्राम से प्रति किलो बीज का उपचार करें फिर बीजों को छांव में सुखाएं रासायनिक उपचार के बाद जीवाणु टीके से उपचार करें उसके लिए 10 प्रतिशत चीनी या गुड़ को उबले हुए पानी में डालकर घोल तैयार करें इस घोल के ठंडा होने के बाद जीवाणु कल्चर के 2 पैकेट मिलाएं और पतला पेस्ट बनाएं और इससे बीजों का उपचार करें उसके बाद बीजों को छांव में सुखाएं और तुरंत बिजाई के लिए प्रयोग करें आखिरी जोताई के समय, मिट्टी में अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर 4-4.8 टन प्रति एकड़ में डाले बिजाई के समय, नाइट्रोजन 8 किलो (यूरिया 18 किलो) के साथ फासफोरस 24 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 150 किलो) और पोटाश 8 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 14 किलो) प्रति एकड़ में डालें अच्छी उपज के साथ अच्छी वृद्धि के लिए, बिजाई के 30 दिन बाद सोडियम मोलीबडेट 15 ग्राम को 10 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें फसल के शुरूआती विकास के दौरान गोडाई और निराई से खेत को नदीन मुक्त रखें इन प्रक्रिया से नदीनों के नियंत्रण के साथ साथ मिट्टी को हवादार बनाने में भी मदद मिलती है नदीनों के नियंत्रण के लिए रोपाई से पहले बसालिन 800 मि.ली. प्रति एकड़ में डालें बारानी फसल होने के कारण, इसे सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन यदि जरूरत पड़े तो बारिश की मात्रा के आधार पर सिंचाई दें गर्मियों के मौसम की फसल के लिए मिट्टी में नमी के आधार पर 10-15 दिनों के अंतराल पर पानी दें चारे के रूप में प्रयोग करने के लिए, बोयी गई फसल की कटाई फूल पड़ने के समय कर देनी चाहिए हरी खाद के रूप में काश्त की फसल को फलियां पड़ने के समय ही खेत में जोत दें प्रयोग की गई किस्म के आधार पर बिजाई के 60-90 दिनों के बाद हरी फलियों की कटाई शुरू की जाती है बाकी की कटाई 10-12 दिनों के अंतराल पर की जाती है दानों के लिए कटाई फलियों के पकने पर करें पक कर तैयार हुई फसल को द्राती की सहायता से काटकर कुछ दिनों के लिए धूप में सुखाने के लिए छोड़ देना चाहिए इसके बाद दानों को गुहाई या थ्रैशर की सहायता से अलग कर लेना चाहिए ग्वार के बीजों से गोंद भी प्राप्त होती है सब से पहले बीजों का छिल्का उतारा जाता है इसके बाद बीजों को पीसकर गोंद अलग कर ली जाती है खाद्य पदार्थ और उदयोगिक उद्देश्यों के लिए बीजों में गोंद को थरमो मकैनीकल विधि से अलग किया जाता है
Posted by himanshu upadhyay
Uttar Pradesh
17-12-2019 09:27 PM
Punjab
12-18-2019 06:11 PM
अगर आप सही तरीके से पशु पालन विभाग से ट्रेनिंग लेकर शुरू करे तो पशु पालन बहुत अच्छा काम है जी , बाकी अपने आप को थोड़ी बहुत जानकारी होनी बहुत ज़रूरी है, सबसे पहले किसी सफल डेयरी फार्मर की डेयरी पर कुछ दिन तक रहकर इस काम की बारीकियों को जानें क्योंकि कुछ बातों का ज्ञान सिर्फ खुद काम को देखकर ही पता चलता है बाकी कुछ .... (Read More)
अगर आप सही तरीके से पशु पालन विभाग से ट्रेनिंग लेकर शुरू करे तो पशु पालन बहुत अच्छा काम है जी , बाकी अपने आप को थोड़ी बहुत जानकारी होनी बहुत ज़रूरी है, सबसे पहले किसी सफल डेयरी फार्मर की डेयरी पर कुछ दिन तक रहकर इस काम की बारीकियों को जानें क्योंकि कुछ बातों का ज्ञान सिर्फ खुद काम को देखकर ही पता चलता है बाकी कुछ और बातें आपसे शेयर कर रहे हैं आप एक बार में पशु न ख़रीदे , पशुओ को 2-2 महीनों के फासले पर खरीदें या फिर 3 पहले खरीदें ओर 3 महीने बाद फिर खरीद लें इससे दूध की कमी नहीं आयेगी पशु की नसल सबसे ज्यादा जरूरी है पशु खरीदने के समय कोशिश करें कि दिन में तीन बार दूध निकालकर ही पशु खरीदें भैंसो का एक दिन का दूध 12 लीटर और गायों को दूध 16-17 लीटर से कम ना हो शैड हमेशा खेत या आस पास से 2 फुट ऊंचा बनायें क्योंकि निचले स्थान पर पानी खड़ा हो जाता है जिस कारण गंदगी पैदा हो जाती है और बाकी पशुओं का मल मूत्र का निकास भी आसानी से हो जाता है पशुओं के लिए बनायी जाने वाली खुरली ढाई तीन फुट चौड़ी होनी चाहिए खुरली पर खड़ने के लिए एक पशु को तकरीबन चार फुट जगह चाहिए मतलब 10 पशुओं के लिए 40 फुट लंबी खुरली बनेगी
Posted by PANKAJ WANJRI
Maharashtra
17-12-2019 09:19 PM
Maharashtra
12-18-2019 01:36 PM
PANKAJ ji please tell us taht you have applied any spray on the crop so that we can provide you information accordingly.thank you
Posted by arun kumar
Bihar
17-12-2019 09:03 PM
Punjab
12-19-2019 07:43 PM
अरूण जी आप चूज़े लेने के लिए जितेन्द्र कुमार 7250555572 से संपर्क कर सकते है
Posted by arun kumar
Bihar
17-12-2019 08:58 PM
Punjab
12-19-2019 07:43 PM
अरूण जी आप चूज़े लेने के लिए जितेन्द्र कुमार 7250555572 से संपर्क कर सकते है
Posted by सुखलाल
Chattisgarh
17-12-2019 08:51 PM

..?

Maharashtra
12-18-2019 01:34 PM
kripya aap apna swal vistar se pooche taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.aapke dwara bheji gayi audio aur video men aapke dwara kuch bhi bola nahi gya hai.dhanywad
Posted by baljit Singh
Punjab
17-12-2019 08:49 PM
Punjab
12-20-2019 01:57 PM
Hardoponic vich protein, B-carotene, trace elements and enzymes vdia hunde hai ehh tuci uss hisab nal deo jina ohna di lai sahi howe ate hajam ho skee.
Posted by parampreet Singh
Punjab
17-12-2019 08:48 PM
Punjab
12-18-2019 06:18 AM
BhaaG isnu rajwa hara chaara te har 3 kg dudh lai 1kg feed pao har 3 mahine baad malap rehat karo
Posted by gopalkrishna girwal
Madhya Pradesh
17-12-2019 08:40 PM
Maharashtra
12-18-2019 01:30 PM
गोपालकृष्ण जी आप इसके ऊपर NPK 191919 @1 किलो को 150 लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by shamsher
Haryana
17-12-2019 08:29 PM
Maharashtra
12-18-2019 03:02 PM
इसकी बिजाई के लिए फरवरी से मार्च, जून से जुलाई और नवंबर से दिसंबर का समय उपयुक्त होता है कतारों में 2.0-2.5 .- और पौधों में 45-60 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें एक एकड़ में बिजाई के लिए 2 किलो बीज पर्याप्त होते हैं आप इसकी नर्सरी ट्रे में लगा सकते है धन्यवाद