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Posted by hituraj
Rajasthan
20-12-2019 12:03 AM
Punjab
12-20-2019 09:49 AM
मुर्गी पालन का काम करने के लिए आप इस काम की ट्रेनिंग जरूर लें जिसमें आपको इस काम की जानकारी और इसमें कितना खर्चा आएगा और कितने पंक्षियों से शुरूआत कर सकते है इसके बारे सही जानकारी दी जाएगी ट्रेनिंग लेने के लिए आप अपने नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें आप वहां जाकर अपना ट्रेनिंग का फार्म भर आएं जब भ.... (Read More)
मुर्गी पालन का काम करने के लिए आप इस काम की ट्रेनिंग जरूर लें जिसमें आपको इस काम की जानकारी और इसमें कितना खर्चा आएगा और कितने पंक्षियों से शुरूआत कर सकते है इसके बारे सही जानकारी दी जाएगी ट्रेनिंग लेने के लिए आप अपने नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें आप वहां जाकर अपना ट्रेनिंग का फार्म भर आएं जब भी ट्रेनिंग होगी तो वो आपको फोन करके उसके बारे में बता देंगे और ट्रेनिंग में आपको लोन और सब्सिड़ी के बारे में जानकारी प्राप्त हो जाएगी, ग्रामप्रिया प्रजाति की मुर्गियां भी दोहरी उपयोगिता वाली प्रजाति की मुर्गी है इसका अर्थ यह है के यह अंडा और मांस दोनों के लिए उपयोगी है , 18 महीने में यह 240 से 250 अंडे तक दे सकती है और इसका वजन 1.5 kg से 2 kg तक होता है श्रीनिधि प्रजाति की मुर्गी – यह प्रजाति ग्रामीण प्रजाति की मुर्गी के अपेक्षा में 230-250 अंडे तक देती है , श्रीनिधि मुर्गियों का वजन 2.5kg से लेकर 5 kg तक का होता है जो की ग्रामीण प्रजाति के मुर्गियों से बहुत ज्यादा है इसीलिए यह दोहरी उपयोगिता प्रजाति में गिनी जाती है इसके मांस और अंडे दोनों से ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता है ,इन प्रजातियों की मुर्गियां तेजी से बढ़ती हैं वनराजा – वनराजा प्रजाति की मुर्गियां भी ग्रामीण प्रवेश के लिए काफी अच्छी मानी जाती है यह मुर्गी 120 – 130 अंडे 3 महीने में देती है देसी मुर्गी पालन के लिए यह 3 विकसित प्रजातियां बहुत ही लाभदायक साबित हुई है.
Posted by lalit dhakad
Madhya Pradesh
20-12-2019 12:02 AM
Maharashtra
12-20-2019 09:11 AM
ललित जी एक बीघा में लगभग 4 -5 किलो बीज की जरूरत होती है धन्यवाद
Posted by Kuldeep Singh
Punjab
19-12-2019 11:49 PM
Punjab
12-20-2019 05:39 PM
जी हां साइलेज भैंसों और गायों के लिए अच्छा होता है
Posted by NS
Rajasthan
19-12-2019 10:52 PM

..?

Maharashtra
12-20-2019 09:19 AM
NS ji kripya aap apna swal vistar se pooche taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by mantosh masram
Madhya Pradesh
19-12-2019 10:21 PM
Punjab
12-20-2019 07:23 AM
Shri maan g apna questions visthar se puchein toh aapko poori jankari di ja ske.....
Posted by Rajinderpalsingh
Punjab
19-12-2019 10:17 PM
Punjab
12-20-2019 09:20 AM
rajinderpal ji mausam vibhag de anusar meeh di sambhavna nahi hai par sheetlehr chal rahi hai.dhanwad
Posted by Shivshankar Sahu
Bihar
19-12-2019 10:12 PM
Maharashtra
12-20-2019 09:35 AM
मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की तीन से चार बार जोताई करें गाय का गला हुआ गोबर 42 क्विंटल प्रति एकड़ में डालें और मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें Pusa Purple Long: यह जल्दी पकने वाली किस्म है सर्दियों में यह 70-80 दिनों में और गर्मियों में यह 100-110 दिनों में पक जाती है इस किस्म के बूटे दरमियाने कद के और फल लंबे और जामुनी रंग के होत.... (Read More)
मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की तीन से चार बार जोताई करें गाय का गला हुआ गोबर 42 क्विंटल प्रति एकड़ में डालें और मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें Pusa Purple Long: यह जल्दी पकने वाली किस्म है सर्दियों में यह 70-80 दिनों में और गर्मियों में यह 100-110 दिनों में पक जाती है इस किस्म के बूटे दरमियाने कद के और फल लंबे और जामुनी रंग के होते हैं इसकी औसतन पैदावार 120 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa Purple Cluster: यह किस्म आई. सी. ए. आर. नई दिल्ली द्वारा बनाई गई है यह दरमियाने समय की किस्म है इसके फल गहरे जामुनी रंग और गुच्छे में होते हैं यह बैक्टीरिया सूखे के कुछ हद तक प्रतिरोधक है Pusa Kranti: यह किस्म IARI, नई दिल्ली द्वारा विकसित की गई है यह किस्म बसंत और पतझड़ के मौसम में उगाने के लिए अनुकूल है यह किसम 130-150 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती हे इसके फल आकर्षित गहरे जामुनी रंग के होते हैं इसकी औसतन पैदावार 56-64 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Punjab Sadabahar: इसकी औसतन पैदावार 120-160 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Punjab Basarati: इसकी औसतन पैदावार 120-140 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pant Samrat: इसके फल रोपाई के 70 दिनों के बाद तुड़ाई के लिए तैयार हो जाते हैं
Posted by पटेल आशुतोष कैराती
Uttar Pradesh
19-12-2019 10:12 PM
Maharashtra
12-20-2019 09:40 AM
बिजाई के लिए मध्य जनवरी से मार्च और अक्तूबर से नवंबर का महीना (संरक्षण में) उपयुक्त होता है प्रत्येक जगह में दो बीज बोयें और 45 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीज को 2.5-3.5 सें.मी. की गहराई पर बोना चाहिए गड्ढा खोदकर विधि का प्रयोग किया जाता है चप्पन कद्दू के लिए 2 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बिजाई से पहले, बीज को .... (Read More)
बिजाई के लिए मध्य जनवरी से मार्च और अक्तूबर से नवंबर का महीना (संरक्षण में) उपयुक्त होता है प्रत्येक जगह में दो बीज बोयें और 45 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीज को 2.5-3.5 सें.मी. की गहराई पर बोना चाहिए गड्ढा खोदकर विधि का प्रयोग किया जाता है चप्पन कद्दू के लिए 2 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बिजाई से पहले, बीज को 12-24 घंटे के लिए पानी में भिगोयें इससे इनकी अंकुरण प्रतिशतता में वृद्धि होती है मिट्टी से पैदा होने वाली फंगस से बचाने के लिए बिजाई से पहले, कार्बेनडाज़िम 2 ग्राम या थीरम 2.5 ग्राम से प्रति किलो बीज का उपचार करें रासायनिक उपचार के बाद ट्राइकोडरमा विराइड 4 ग्राम या स्यिूडोमोनास फ्लूरोसेंस 10 ग्राम से प्रति किलो बीज का उपचार करें
Posted by sunny
Uttar Pradesh
19-12-2019 09:55 PM
Punjab
12-20-2019 05:41 PM
Sunny ji desi chicks lene ke liye aap Sumit Kumar 8006000291, 7906547529 Sumit Kumar Poultry Farm se sampark kr skte hai.
Posted by Khushi
Punjab
19-12-2019 09:45 PM

Maharashtra
12-20-2019 11:57 AM
khushi ji tuc kanak diyan kisman jive PBW590,PBW509,PBW658 di bijai kar sakde ho.kanak da beej 40-45 kilo prati acre de hisab nal painda hai.dhanwad
Posted by Khushpreet Singh
Rajasthan
19-12-2019 09:40 PM
Maharashtra
12-20-2019 09:58 AM
khushpreet ji kripya btaye ke sarso men abhi konse keet ka hamla hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by Abhinaw Kumar
Bihar
19-12-2019 09:35 PM
Punjab
12-20-2019 10:01 AM
Abhinaw Kumar ji Bihar me aap BEETAL, SIROHI, BLACK BENGAL, BARBARI, JAMUNAPARI pal sakte hai, Thankyou.
Posted by Md. Akbar
Bihar
19-12-2019 09:33 PM
Punjab
12-20-2019 05:44 PM
Akbar ji thand ke karan bakri ko fever ho skta hai usko jukam ho jata hai, iske ilawa woh khana pena kam kr deti hai, yadi bakri ka badan phool raha hai to usko aap nazdiki doctor se janch krwayen, jise uski sahi janch krke ilag kiya ja ske..
Posted by mr patel shaab
Madhya Pradesh
19-12-2019 09:31 PM
Maharashtra
12-20-2019 10:55 AM
सिंचित क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 60 किलो (यूरिया 130 किलो), फासफोरस 24 किलो (एस एस पी 150 किलो), पोटाश 12 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 20 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी नाइट्रोजन को पहली सिंचाई के समय डालें बारानी क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 24 क.... (Read More)
सिंचित क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 60 किलो (यूरिया 130 किलो), फासफोरस 24 किलो (एस एस पी 150 किलो), पोटाश 12 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 20 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी नाइट्रोजन को पहली सिंचाई के समय डालें बारानी क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 24 किलो (यूरिया 52 किलो), फासफोरस 12 किलो (एस एस पी 75 किलो), पोटाश 8 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 15 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोज, फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें सिंचित क्षेत्रों में पिछेती बिजाई के लिए, नाइट्रोजन 50 किलो (यूरिया 110 किलो), फासफोरस 12 किलो (एस एस पी 75 किलो), पोटाश 16 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 27 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन की दो तिहाई मात्रा बिजाई के 35-40 दिनों के बाद डालें यह पाया गया है कि जिंक सल्फेट 10 किलो प्रति एकड़ में डालने से उपज में वृद्धि होती है जिंक की कमी को पूरा करने के लिए जिंक सल्फेट 0.5 प्रतिशत की फोलियर स्प्रे करें 15 दिनों के अंतराल पर दो से तीन स्प्रे करें
Posted by पटेल आशुतोष कैराती
Uttar Pradesh
19-12-2019 09:24 PM
Maharashtra
12-20-2019 11:56 AM
बिजाई के लिए मध्य जनवरी से मार्च और अक्तूबर से नवंबर का महीना (संरक्षण में) उपयुक्त होता है प्रत्येक जगह में दो बीज बोयें और 45 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीज को 2.5-3.5 सें.मी. की गहराई पर बोना चाहिए गड्ढा खोदकर विधि का प्रयोग किया जाता है चप्पन कद्दू के लिए 2 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बिजाई से पहले, बीज को 1.... (Read More)
बिजाई के लिए मध्य जनवरी से मार्च और अक्तूबर से नवंबर का महीना (संरक्षण में) उपयुक्त होता है प्रत्येक जगह में दो बीज बोयें और 45 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीज को 2.5-3.5 सें.मी. की गहराई पर बोना चाहिए गड्ढा खोदकर विधि का प्रयोग किया जाता है चप्पन कद्दू के लिए 2 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बिजाई से पहले, बीज को 12-24 घंटे के लिए पानी में भिगोयें इससे इनकी अंकुरण प्रतिशतता में वृद्धि होती है मिट्टी से पैदा होने वाली फंगस से बचाने के लिए बिजाई से पहले, कार्बेनडाज़िम 2 ग्राम या थीरम 2.5 ग्राम से प्रति किलो बीज का उपचार करें रासायनिक उपचार के बाद ट्राइकोडरमा विराइड 4 ग्राम या स्यिूडोमोनास फ्लूरोसेंस 10 ग्राम से प्रति किलो बीज का उपचार करें
Posted by anuj kumar
Uttar Pradesh
19-12-2019 09:20 PM
Maharashtra
12-20-2019 12:18 PM
Anuj ji aap iske uper mancozeb@4 gram ko prati litre pani ke hisab se spray karen,dhanywad
Posted by rishi
Uttar Pradesh
19-12-2019 09:05 PM
Maharashtra
12-20-2019 12:28 PM
rishi ji ek acre men urea ki matra 110 kilo prati acre ke hisab se daale. agar aapne 45 kilo abhi daal di hai baki ki matra aap doosre aur teesre pani ke sath de.dhanywad
Posted by chandan singh raikwar
Madhya Pradesh
19-12-2019 09:03 PM
Rajasthan
12-21-2019 12:13 PM
डेयरी फार्मिंग के लिए लोन अलग अलग कामों के लिए मिलता है जैसे शैड के लिए, पशुओं के लिए, डेयरी मशीनरी के लिए सबसे पहले आपने जिसके लिए लोन लेना है उस संबंधी आवेदन नज़दीक के डिप्टी डायरेक्टर को मिलकर दें, इसके लिए आपके पास डेयरी ट्रेनिंग होनी जरूरी है उसके सर्टीफिकेट के हिसाब से आपको लोन मिलेगा यह ट्रेनिंग आप अप.... (Read More)
डेयरी फार्मिंग के लिए लोन अलग अलग कामों के लिए मिलता है जैसे शैड के लिए, पशुओं के लिए, डेयरी मशीनरी के लिए सबसे पहले आपने जिसके लिए लोन लेना है उस संबंधी आवेदन नज़दीक के डिप्टी डायरेक्टर को मिलकर दें, इसके लिए आपके पास डेयरी ट्रेनिंग होनी जरूरी है उसके सर्टीफिकेट के हिसाब से आपको लोन मिलेगा यह ट्रेनिंग आप अपने नज़दीकी केवीके से प्राप्त कर सकते है वहां समय समय पर ट्रेनिंग दी जाती है आप वहां जाकर अपना फार्म भर आए जब भी वहां ट्रेनिंग होगी तो आपको फोन करके बता दिया जाएगा, इस ट्रेनिंग में आपको डेयरी लोन और सब्सिड़ी के बारे में सारी जानकारी प्राप्त हो जाएगी.
Posted by Sahib Sarao
Punjab
19-12-2019 08:56 PM
Punjab
12-20-2019 03:13 PM
Spray karan di bajae jaldi katai kar laini chahdi hai ta jo sundi nu birds kha lainge ata aaon vale dina vich dhup lagan nsl barseam di next kataì aa javegi
Posted by Shivshankar Sahu
Bihar
19-12-2019 08:56 PM
Maharashtra
12-20-2019 01:23 PM
शिवशंकर जी कृपया बताये कि आपने कोनसी किसम की बिजाई की है ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by Bajranglal
Rajasthan
19-12-2019 08:53 PM
Maharashtra
12-20-2019 01:21 PM
बजरंगलाल जी आप इसके ऊपर NPK 130045 @1 किलो को 150 लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by Salim Khan
Rajasthan
19-12-2019 08:44 PM
Punjab
12-19-2019 08:56 PM
श्री मान गेहूं की जड़ गलने से रोकने के लिए आप M-45@500 gm प्रती एकड़ यूरिया के साथ छींटा दे सकते हो
Posted by Sanjay mukati
Madhya Pradesh
19-12-2019 08:43 PM
Maharashtra
12-20-2019 01:50 PM
Sanjay ji aap iske patton ke neeche machar ka hamla check karen agar maujood hai to aap iske uper imidacloprid@1.5ml ko prati litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by SANJEEV
Uttar Pradesh
19-12-2019 08:42 PM
Maharashtra
12-20-2019 01:42 PM
अच्छे जल निकास वाली हल्की या भारी, रेतली और चिकनी मिट्टी ज़मीनें इसके लिए अच्छी मानी जाती हैं खेत में पानी खड़ा ना होने दें, क्योंकि यह फसल खड़े पानी को सहने योग्य नहीं है खेत को 2-3 बार जोत कर और सुहागे से समतल करके तैयार करें हल्दी की बिजाई के लिए बैड 15 सैं.मी. ऊंचे, 1 मीटर चौड़े और आवश्यकनुसार लंबे होने चाहिए दो बैड.... (Read More)
अच्छे जल निकास वाली हल्की या भारी, रेतली और चिकनी मिट्टी ज़मीनें इसके लिए अच्छी मानी जाती हैं खेत में पानी खड़ा ना होने दें, क्योंकि यह फसल खड़े पानी को सहने योग्य नहीं है खेत को 2-3 बार जोत कर और सुहागे से समतल करके तैयार करें हल्दी की बिजाई के लिए बैड 15 सैं.मी. ऊंचे, 1 मीटर चौड़े और आवश्यकनुसार लंबे होने चाहिए दो बैडों के बीच 50 सैं.मी. का फासला होना चाहिए अधिक पैदावार लेने के लिए बिजाई अप्रैल के अंत में करें इसे पनीरी के साथ भी उगाया जा सकता है इसके लिए जून के पहले पखवाड़े तक पनीरी खेत में लगा दें पनीरी के लिए 35-45 दिनों के पौधों को खेत में लगा दें राईज़ोमस को पंक्तियों में बीजें और पंक्ति से पंक्ति का फासला 30 सैं.मी. और पौधों में 20 सैं.मी. का फासला रखें बिजाई के बाद खेत में 2.5 टन प्रति एकड़ स्ट्रा मलच डालें बीज की गहराई 3 सैं.मी. से ज्यादा नहीं होनी चाहिए इसकी बिजाई सीधे खेत में लगाकर या पनीरी लगाकर की जाती है
Posted by RUBAN SINGH
Punjab
19-12-2019 08:41 PM
Punjab
12-19-2019 08:59 PM
डॉ.दलाल घोल की स्प्रे तैयार करने का तरीका: यूरिया 2.5 किलो, डीएपी 2.5किलो जिंक 0.5 किलो को घोल तैयार करके इसकी स्प्रे करें। डीएपी को एक रात पहले भिगोकर रखें और यूरिया, जिंक का अलग अलग घोल बनाएं और बाद में इन तीनों को 100—150 लीटर में मिक्स करके प्र​ति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें इससे ग्रोथ होती है और फसल में जो कमी होती .... (Read More)
डॉ.दलाल घोल की स्प्रे तैयार करने का तरीका: यूरिया 2.5 किलो, डीएपी 2.5किलो जिंक 0.5 किलो को घोल तैयार करके इसकी स्प्रे करें। डीएपी को एक रात पहले भिगोकर रखें और यूरिया, जिंक का अलग अलग घोल बनाएं और बाद में इन तीनों को 100—150 लीटर में मिक्स करके प्र​ति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें इससे ग्रोथ होती है और फसल में जो कमी होती है वो पूरी हो जाती है।
Posted by Salim Khan
Rajasthan
19-12-2019 08:39 PM
Maharashtra
12-20-2019 01:48 PM
सलीम जी कृपया आप इसकी फोटो भेजे ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके कि यह कोई बीमारी है या किसी तत्व की कमी
Posted by Megharaj Lohara
Rajasthan
19-12-2019 08:38 PM
Punjab
12-20-2019 05:45 PM
उसे पेट के कीड़ों के लिए Flukarid-Ds गोली भी दें और Enerdyna liquid 100ml रोजाना, Simlage bolus 1-1 सुबह शाम और Gouge पाउडर 50gm रोजाना दें इससे फर्क पड़ जाएगा, बाकि आप उसे रोजाना 35—40 किलो हरा चारा डालें और हर 3 महीने के बाद डीवॉर्मिंग जरूर करें.
Posted by avinash verma
Chattisgarh
19-12-2019 08:35 PM
Maharashtra
12-20-2019 01:55 PM
अविनाश जी कृपया आप अपना सवाल विस्तार से पूछे कि आप इनके बारे में क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by Megharaj Lohara
Rajasthan
19-12-2019 08:35 PM

..?

Maharashtra
12-20-2019 03:04 PM
Megharaj ji kripya aap apna swal vistar se pooche taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake . aapke dwara bheji gayi audio upload nahi hui hai.dhanywad
Posted by santosh tudu
Jharkhand
19-12-2019 08:33 PM
Maharashtra
12-20-2019 02:13 PM
आप यह देसी उपाय का प्रयोग कर सकते हैं जिससे तेले की दवाई और होने वाला खर्चा बचेगा, 5 नीम के पत्ते 5 किलो नीम के फल लें, फिर इन्हे अच्छी तरह पीस लें और फिर इन्हे 100 लीटर पानी में डालें, किसी भी देसी गाय का पेशाब और 1 किलो गोबर दाल लें, फिर इन्हे लकड़ी के डंडे के साथ अच्छी तरह मिक्स कर लें, और 24 घंटे रखें फिर इसे छान कर फसल .... (Read More)
आप यह देसी उपाय का प्रयोग कर सकते हैं जिससे तेले की दवाई और होने वाला खर्चा बचेगा, 5 नीम के पत्ते 5 किलो नीम के फल लें, फिर इन्हे अच्छी तरह पीस लें और फिर इन्हे 100 लीटर पानी में डालें, किसी भी देसी गाय का पेशाब और 1 किलो गोबर दाल लें, फिर इन्हे लकड़ी के डंडे के साथ अच्छी तरह मिक्स कर लें, और 24 घंटे रखें फिर इसे छान कर फसल पर स्प्रे कर सकते हैं
Posted by avinash verma
Chattisgarh
19-12-2019 08:30 PM
Maharashtra
12-20-2019 02:40 PM
avinash ji vegetable jaise broccoli, Brussels sprouts, cabbage, cauliflower aur kale aati hai.dhanywad
Posted by santosh tudu
Jharkhand
19-12-2019 08:24 PM
Maharashtra
12-20-2019 03:06 PM
जैविक खेती में फसलों पर किसी प्रकार के रासायनिक खादों या कीटनाशकों का प्रयोग नहीं करते हैं आप इसमें गोबर की खाद, मुर्गियों की खाद, हरी खाद, वर्मी कंपोस्ट और जीव अमृत जैसे देसी खाद तैयार करके डाल सकते हैं आप नीम के तेल का भी प्रयोग कर सकते हैं जैविक खाद भी आप प्रयोग कर सकते हैं
Posted by jagdeep
Punjab
19-12-2019 08:24 PM
Punjab
12-20-2019 05:55 PM
Jagdeep ji tuci uss nu Fatmax powder 50gm rojana deo ate Gouge powder 50gm rojana dena suru kro, iss nal frak paa jawega.
Posted by Shivshankar Sahu
Bihar
19-12-2019 08:09 PM
Punjab
12-19-2019 09:02 PM
श्री मान खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते ह.... (Read More)
श्री मान खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुमब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तहय उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तहय में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तहय लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है
Posted by shivinder
Punjab
19-12-2019 08:07 PM
Punjab
12-20-2019 05:56 PM
आप उसे कारगिल की Heifer dry फीड देनी शुरू करें और Cafplan पाउडर 70 ग्राम रोजाना दें इससे अच्छी ग्रोथ हो जाएगी
Posted by ombir
Haryana
19-12-2019 08:00 PM
Punjab
01-31-2020 04:05 PM
Ombir ji fancy chicks lene ke lia aap Balwinder Singh 9041009671 Papu Hachery Farm se samparak kar sakte hai, Thankyou.
Posted by rakesh
Madhya Pradesh
19-12-2019 07:51 PM
Maharashtra
12-20-2019 03:07 PM
rakesh ji kripya aap iski photo bheje taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake,dhanywad
Posted by gurjit singh sidhu
Haryana
19-12-2019 07:47 PM
Punjab
02-25-2020 02:59 PM
gurjit ji ik paudhe vicho labhag 45 kilo fal nikal aunda hai.ate paudha lagbhag 3-4 saal tak fal dena shuru kar dinda hai.
Posted by सुनील भगत
Chattisgarh
19-12-2019 07:47 PM
Punjab
12-19-2019 09:03 PM
श्री मान खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते ह.... (Read More)
श्री मान खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुमब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तहय उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तहय में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तहय लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है
Posted by chandan yadav
Bihar
19-12-2019 07:38 PM
Punjab
12-19-2019 09:06 PM
Shri maan g brinjal mein fruit le liye aap 13:00:45@1kg per acre 150 litre paani mein spray kr skte ho....
Posted by SANJEEV KUMAR
Punjab
19-12-2019 07:37 PM
Punjab
12-21-2019 08:49 AM
Hanji Sanjeev ji tuci vashi nu lassi pilla skde ho, ehh tuci 1.5-2 litre tak rojana de skde ho, jina ohh asani nal pee skee ate lassi frizz vich thandi krke naa pillao..
Posted by ਮਨਜੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
19-12-2019 07:32 PM
Rajasthan
01-28-2020 06:31 PM
ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਡੇਅਰੀ ਲੋਨ ਲੈਣਾ ਹੈ ਤਾਂ ਡੇਅਰੀ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲਵੋ ਉਹ ਸਹੀ ਰਹੇਗਾ ਜੀ, ਉਸ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਵਿਚ ਤੁਹਾਨੂੰ ਲੋਨ ਵਾਰੇ ਸਾਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਡੇਅਰੀ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲਈ ਪੰਜਾਬ ਡੇਅਰੀ ਵਿਕਾਸ ਬੋਰਡ ਵੱਲੋਂ ਬਹੁਤ ਸਾਰੇ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਸੈਂਟਰ ਬਣਾਏ ਗਏ ਹਨ, ਤੁਸੀ ਸਾਡੇ ਪੰਜਾਬ ਡੇਅਰੀ ਡਿਵੈਲਪਮੈਂਟ ਬੋਰਡ ਦੇ ਮੁੱਖ ਦਫਤਰ ਦੇ 0172-5027285 ਨੰਬਰ ਤੇ ਕਾਲ ਕਰਕੇ ਆਪਣਾ ਏਰੀਆ ਦੱਸ .... (Read More)
ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਡੇਅਰੀ ਲੋਨ ਲੈਣਾ ਹੈ ਤਾਂ ਡੇਅਰੀ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲਵੋ ਉਹ ਸਹੀ ਰਹੇਗਾ ਜੀ, ਉਸ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਵਿਚ ਤੁਹਾਨੂੰ ਲੋਨ ਵਾਰੇ ਸਾਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਡੇਅਰੀ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲਈ ਪੰਜਾਬ ਡੇਅਰੀ ਵਿਕਾਸ ਬੋਰਡ ਵੱਲੋਂ ਬਹੁਤ ਸਾਰੇ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਸੈਂਟਰ ਬਣਾਏ ਗਏ ਹਨ, ਤੁਸੀ ਸਾਡੇ ਪੰਜਾਬ ਡੇਅਰੀ ਡਿਵੈਲਪਮੈਂਟ ਬੋਰਡ ਦੇ ਮੁੱਖ ਦਫਤਰ ਦੇ 0172-5027285 ਨੰਬਰ ਤੇ ਕਾਲ ਕਰਕੇ ਆਪਣਾ ਏਰੀਆ ਦੱਸ ਕੇ ਆਪਣੇ ਨਜ਼ਦੀਕੀ ਟ੍ਰੈਨਿੰਗ ਸੈਂਟਰ ਦਾ ਪਤਾ ਪੁੱਛ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜਦੋਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਸਰਟੀਫਿਕੇਟ ਮਿਲ ਗਿਆ ਫਿਰ ਤੁਸੀ ਪਸ਼ੂ ਪਾਲਣ ਵਿਭਾਗ ਨਾਲ ਗੱਲ ਕਰੋ ਤੇ ਲੋਨ ਲਈ ਫਾਈਲ ਤਿਆਰ ਕਰਵਾਓ, ਬਾਕੀ ਇਸ ਵੀਡੀਓ ਵਿੱਚ ਪਸ਼ੂਆਂ ਤੇ ਲੋਨ ਲੈਣ ਦਾ ਤਰੀਕਾ ਬਾਰੇ ਡਿਟੇਲ ਨਾਲ ਦੱਸਿਆ ਗਿਆ ਹੈ ਜੀ, ਤੁਸੀ ਇਹ ਵੀਡੀਓ ਦੇਖੋ ਤੇ ਜੇਕਰ ਕਿਸੇ ਗੱਲ ਦੀ ਸਮਝ ਨਹੀ ਲੱਗੀ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਦੁਬਾਰਾ ਸਵਾਲ ਪੋਸਟ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੀ https://youtu.be/L9dsW7iAdgw
Posted by indrapal Singh Rajpoot
Madhya Pradesh
19-12-2019 07:24 PM
Punjab
12-21-2019 08:47 AM
उसे आप Hitek इंजेक्शन 1 मि.ली. को 50 किलो शरीर के भार के हिसाब से चमड़ी में लगवायें और उसके पैद पर Oflagard-NM tube की मालिश करें इससे फर्क पड़ जाएगा
Posted by manoj singh
Bihar
19-12-2019 07:20 PM
Punjab
12-20-2019 10:16 AM
अरंडी मुख्य रूप से इसके बीजों के लिए उगाया जाने वाला वार्षिक पौधा है इसके बीजों से निकाला गया तेल खाने के लिए प्रयोग नहीं होता है, पर इसका उद्योगिक स्तर पर काफी प्रयोग होता है इसके अलावा औषधीय और प्रकाश उद्देश्य से भी इसका उपयोग किया जाता है तेल निकालने के बाद बाकी बचे तेल केक को जैविक खाद के रूप में प्रयोग क.... (Read More)
अरंडी मुख्य रूप से इसके बीजों के लिए उगाया जाने वाला वार्षिक पौधा है इसके बीजों से निकाला गया तेल खाने के लिए प्रयोग नहीं होता है, पर इसका उद्योगिक स्तर पर काफी प्रयोग होता है इसके अलावा औषधीय और प्रकाश उद्देश्य से भी इसका उपयोग किया जाता है तेल निकालने के बाद बाकी बचे तेल केक को जैविक खाद के रूप में प्रयोग किया जाता है भारत अरंडी का मुख्य उत्पादक देश है और भारत में गुजरात, आंध्र प्रदेश और राजस्थान मुख्य अरंडी उत्पादक राज्य हैं व्यापारिक खेती के लिए कम उपजाऊ भूमि का प्रयोग अरंडी की खेती के लिए किया जाता है पर यह गहरी, अच्छे निकास वाली, उपजाऊ, हल्की तेजाबी रेतली दोमट मिट्टी में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है मिट्टी की पी एच 5 से 8.5 होनी चाहिए गर्मियों में खेत की तीन से चार बार गहरी जोताई करें इससे नदीनों को खत्म करने और मिट्टी में नमी रखने में मदद मिलेगी डलियों को तोड़ने के लिए जोताई के बाद तवियों से जोताई करें फिर मिट्टी के स्तर को समतल करें ताकि खेत में पानी ना खड़ा रह सके अरंडी को पूरे वर्ष उगाया जा सकता है, जहां सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हो अरंडी की खेती के लिए जुलाई के दूसरे सप्ताह से लेकर अगस्त का पहला सप्ताह उपयुक्त होता है फासला किस्म और बिजाई के समय पर आधारित होता है सिंचित हालातों में 90सैं.मी.x60 सैं.मी. या 120 सैं.मी.x 60 सैं.मी.फासले का प्रयोग करें जब कि बारानी हालातों में 60 सैं.मी.x45 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीजों को ज्यादा गहराई में बोने से परहेज़ करें इन्हें 5 सैं.मी. की गहराई में बोयें इसकी बिजाई गड्ढा खोदकर की जाती है किस्म के आधार पर फसल 145-180 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है जब एक या दो फल सूखते या पीले होते दिखाई दें, तो अरंडी की गुच्छों में कटाई शुरू करें सभी गुच्छे समान समय पर नहीं पकते इसलिए दो-तीन तुड़ाइयां आवश्यक हैं तुड़ाई के बाद गुच्छों को धूप में चार से पांच दिन सुखाएं अच्छी तरह से सूखने के बाद बीजों को अलग कर लें फलों की जल्दी कटाई ना करें इससे तेल की प्रतिशतता कम हो जाती है यह बिजाई के ढंग पर आधारित होती है यदि बीजों को हल के पीछे डालना है तो ज्यादा बीजों की मात्रा 4.5 से 6 किलोग्राम प्रति एकड़ में आवश्यकता होती है यदि गड्ढा खोदकर बिजाई की जाए तो 2.5 से 3.3 किलोग्राम प्रति एकड़ की आवश्यकता होती है फसल को मिट्टी से होने वाली बीमारियों से बचाने के लिए बिजाई से पहले कार्बेनडाज़िम 2 ग्राम से प्रति किलो बीजों का उपचार करें अच्छी तरह से सूखे हुए फलों में से बीजों को अलग कर लें उसके बाद बीजों से अरंडी का तेल निकाल लें तेल निकालने के बाद तेल केक में 8-10 प्रतिशत अरंडी का तेल होता है तेल केक का प्रयोग खेत में जैविक खाद के रूप में प्रयोग किया जा सकता है अरंडी की पूरी फसल को 17-20 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है बारिश के मौसम में सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती शुरूआती अवस्था में नदीनों की रोकथाम बहुत महत्तवपूर्ण है बिजाई के 20वें और 50वें दिन बाद हाथों से दो बार गोडाई करें बिजाई के दूसरे और तीसरे दिन बाद पैंडीमैथालीन 1 लीटर को 250 लीटर पानी में मिलाकर डालें यह घास और चौड़े पत्तों वाले नदीनों को रोकने में सहायक होगा
Posted by Abhay Patel
Uttar Pradesh
19-12-2019 07:16 PM
Maharashtra
12-20-2019 03:10 PM
ये किस्म पर निर्भर करता है कृपया बताएं कि आपने कौनसी किस्म की बिजाई की है ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके
Posted by md danish faizi ansari
Jharkhand
19-12-2019 07:12 PM
Maharashtra
12-20-2019 03:25 PM
आलू की खेती के लिए तापमान 14-25* C होना चाहिए यह फसल बहुत तरह की मिट्टी जैसे कि रेतली, नमक वाली, दोमट और चिकनी मिट्टी में उगाई जा सकती है अच्छे जल निकास वाली, जैविक तत्व भरपूर, रेतली से दरमियानी ज़मीन में फसल अच्छी पैदावार देती है यह फसल नमक वाली तेजाबी ज़मीनों में भी उगाई जा सकती है पर बहुत ज्यादा जल जमाव और खारी या न.... (Read More)
आलू की खेती के लिए तापमान 14-25* C होना चाहिए यह फसल बहुत तरह की मिट्टी जैसे कि रेतली, नमक वाली, दोमट और चिकनी मिट्टी में उगाई जा सकती है अच्छे जल निकास वाली, जैविक तत्व भरपूर, रेतली से दरमियानी ज़मीन में फसल अच्छी पैदावार देती है यह फसल नमक वाली तेजाबी ज़मीनों में भी उगाई जा सकती है पर बहुत ज्यादा जल जमाव और खारी या नमक वाली ज़मीन इस फसल की खेती के लिए उचित नहीं होती इसकी किस्मे जैसे के Kufri Bahar, Kufri Badshah, Kufri Sutlaj, Kufri Anand, Kufri Pukhraj, Kufri Chipsona 2, Kufri Chipsona 1, Kufri Chandramukhi, Kufri Jyoti, Kufri Ashoka, Kufri Lalima की बुवाई कर सकते है खेत को एक बार 30 सैं.मी. गहरा जोतकर अच्छे ढंग से बैड बनाएं जोताई के बाद 2-3 बार तवियां फेरें और फिर 2-3 बार सुहागा फेरें बिजाई से पहले खेत में नमी की मात्रा बनाकर रखें बिजाई के लिए दो ढंग मुख्य तौर पर प्रयोग किए जाते हैं 1. मेंड़ और खालियों वाला ढंग 2. समतल बैडों वाला ढंग अगेती बिजाई के लिए, सितंबर के आखिरी सप्ताह से अक्तूबर का पहला सप्ताह खेती के लिए उपयुक्त होता है मुख्य फसल के लिए अक्तूबर का दूसरे से चौथा सप्ताह बिजाई के लिए उपयुक्त समय होता है गांठों के आकार के अनुसार रोपाई का फासला विभिन्न होता है बिजाई के लिए कतार से कतार में 60 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 20 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीज बोने के बाद बीजों को 8-10 सैं.मी. तक मिट्टी की परत से ढक दें बिजाई के लिए ट्रैक्टर से चलने वाली सेमी ऑटोमेटिक या ऑटोमैटिक प्लांटर का प्रयोग करें रोपाई के लिए बड़ी आकार की गांठों का प्रयोग किया जाता है बिजाई के लिए 13-15 क्विंटल बीज प्रयोग किए जाते हैं बिजाई के लिए सेहतमंद आलू ही चुने बिजाई से पहले आलुओं को कोल्ड स्टोर से निकालकर 1-2 सप्ताह के लिए छांव वाले स्थान पर रखें ताकि वे अंकुरित हो जायें आलुओं के सही अंकुरन के लिए उन्हें जिबरैलिक एसिड 1 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी में मिलाकर एक घंटे के लिए उपचार करें फिर छांव में सुखाएं और 10 दिनों के लिए हवादार कमरे में रखें फिर काटकर आलुओं को मैनकोजेब 0.5 प्रतिशत घोल (5 ग्राम प्रति लीटर पानी) में 10 मिनट के लिए भिगो दें इससे आलुओं को शुरूआती समय में गलने से बचाया जा सकता है आलुओं को गलने और जड़ों में कालापन रोग से बचाने के लिए साबुत और काटे हुए आलुओं को 6 प्रतिशत मरकरी के घोल (टैफासन) 0.25 प्रतिशत (2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी) में डालें यदि संभव हो, तो आलू की रोपाई से पहले, हरी खाद वाली फसलें जैसे सनई, जंतर आदि फसलें उगायें और उन्हें मिट्टी में अच्छी तरह दबायें यदि हरी खाद उपलब्ध ना हो तो गली सड़ी रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर 60-80 क्विंटल प्रति एकड़ में खेत की तैयारी के समय रोपाई से दो सप्ताह पहले डालें फसल की उचित वृद्धि के लिए नाइट्रोजन 40-50 किलो (90-110 किलो यूरिया), फासफोरस 24-32 किलो (150-200 किलो सिंगल सुपर फासफेट) और पोटाश 40-50 किलो (66-85 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश) की मात्रा प्रति एकड़ में डालें बिजाई से पहले सिंचाई करें बिजाई के बाद 10-12 दिनों के अंदर अंदर पहली सिंचाई करें दूसरी सिंचाई पहली सिंचाई के 7 दिनों के बाद करें बाकी की सिंचाइयां जलवायु की परिस्थितियों और जरूरत के अनुसार करें गांठे बनने की अवस्था सिंचाई के लिए बहुत महत्तवपूर्ण होती है इस अवस्था में पानी की कमी ना होने दें ज्यादा सिंचाई ना करें इससे गलने की बीमारी का खतरा बढ़ता है पुटाई से 10-12 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें धन्यवाद
Posted by gurshminder singh
Punjab
19-12-2019 07:03 PM
Punjab
12-21-2019 12:14 PM
biofloc fish farm da punjab vich koe govt. project nahi hai ji. eh apne level te hi farming hundi hai. tusi jekar bioflock farm dekhna hai ta jaswinder singh ji da bioflock fish farm dekh sakde ho. ehna da contact number 98886 69632 hai ji.
Posted by Gurjant
Punjab
19-12-2019 06:57 PM
Punjab
12-20-2019 03:36 PM
ਗੁਰਜੰਟ ਜੀ ਮਿੱਟੀ ਦੇ ਵਿਚ ਤੁਸੀ vermicompost ਅਤੇ cocopeat ਪਾ ਕੇ ਮਿੱਟੀ ਨੂੰ ਤਿਆਰ ਕਰੋ ਅਤੇ ਲਿਫਾਫਿਆਂ ਵਿਚ ਭਰ ਲਓ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by pinder singh
Punjab
19-12-2019 06:44 PM
Punjab
12-19-2019 07:38 PM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਕਣਕ ਵਿੱਚ ਸੁੰਡੀ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਏਕਾਲਕਸ @800 ਮਿਲੀਲਿਟਰ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇਅ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੀ