Posted by Rupinder pal singh
Punjab
20-12-2019 05:48 PM
ਇਹ ਸਮੱਸਿਆ ਭਾਰੀਆਂ ਜ਼ਮੀਨਾਂ ਵਿੱਚ ਆਉਂਦੀ ਹੈ ਜੇਕਰ ਘਰੇਲੂ ਬਗ਼ੀਚੀ ਵਿੱਚ ਕਾਸ਼ਤ ਹੈ ਤਾਂ ਅੱਗੇ ਤੋਂ ਜ਼ਮੀਨ ਤਿਆਰ ਕਰਦੇ ਸਮੇਂ ਕਿਆਰੀ ਵਿੱਚ ਰੇਤਲੀ ਮਿੱਟੀ ਮਿਲਾ ਲਵੋ ਅਤੇ ਜੇਕਰ ਵਪਾਰਕ ਪੱਧਰ ਤੇ ਕਰਨੀ ਹੈ ਤਾਂ ਭਾਰੀ ਜ਼ਮੀਨ ਵਿੱਚ ਕਾਸ਼ਤ ਨਾ ਕਰੋ
Posted by Sukhman Brar
Punjab
20-12-2019 05:43 PM
Brar ji 100 kadaknath lai 150-200 sq.feet jgah di jrurat hundi hai ate ohna te 2 rupees/1 bird de hisab nal khrach aa jnda hai, baki jyada jankari ate chicks lenn lai iss no. te 9781589637 sampark kr skde ho..

Posted by Niles Niles Patidar
Madhya Pradesh
20-12-2019 05:26 PM
श्री मान लहसुन के लिए आप M-45@500 gm प्रती एकड़ सप्रे कर सकते हो
Posted by lakhan sharma
Madhya Pradesh
20-12-2019 05:25 PM
कृपया आप ये बताएं कि आप कौनसे कीटनाशक को मिक्स करके स्प्रे करना चाहते है
Posted by POORAN ROZZ
Rajasthan
20-12-2019 05:25 PM
श्रीमान जी, जिमीकंद या सूरन उष्णकटिबंधीय तथा उपोष्णकटिबंधीय आर्द्र जलवायु में अच्छी तरह उगता हैं जहां वार्षिक तापमान 30 से 35 डिग्री सेल्सियस जिमीकंद या सूरन का उत्पादन अनेक प्रकार की मिटटी में हो सकता हैं, परन्तु इस फसल के उत्पादन के लिए अच्छी जीवांशयुक्त बलुई दोमट मिट्टी या बलुई चिकनी दोमट मिट्टी उपयुक्.... (Read More)
श्रीमान जी, जिमीकंद या सूरन उष्णकटिबंधीय तथा उपोष्णकटिबंधीय आर्द्र जलवायु में अच्छी तरह उगता हैं जहां वार्षिक तापमान 30 से 35 डिग्री सेल्सियस जिमीकंद या सूरन का उत्पादन अनेक प्रकार की मिटटी में हो सकता हैं, परन्तु इस फसल के उत्पादन के लिए अच्छी जीवांशयुक्त बलुई दोमट मिट्टी या बलुई चिकनी दोमट मिट्टी उपयुक्त होती है जिसका पी एच स्तर 5.5 से 7.0 के बीच होता हैं उन्नत किस्में :गजेन्द्र, श्री पद्मा (एम- 15), संतरागाछी जिमीकंद आमतौर पर 6 से 8 माह में तैयार होने वाली फसल है और सिंचाई की सुविधा रहने पर इसे मध्य मार्च में लगा देना चाहिए मार्च में लगाई फसल मध्य नवम्बर तक तैयार हो जाती है बाजार की मांग को देखते हुए 5 से 6 माह बाद से खुदाई शुरू की जा सकती है पानी की सुविधा न होने पर इसे जून के अंतिम सप्ताह में मौनसून शुरू होने पर लगाया जाता है मार्च में लगाई जाने वाली फसल की पैदावार स्वाभाविक रूप से जून में लगाई फसल से अधिक होती है यदि नर्सरी की सुविधा उपलब्ध हो तो मौनसून शुरू होने के एक माह पूर्व, आंशिक छाया वाली जगह में, जमीन की सतह से 4 इंच ऊँची क्यारी बना कर कंदों को लगभग सटाकर 20 सेंटीमीटर दूर कतार में लगाया जा सकता है क्यारियों में गोबर की सड़ी हुई खाद, महीन बालू और मिट्टी 1:1:1 के अनुपात में मिलाकर तैयार रखना चाहिए कंदों के टुकड़ों को क्यारियों में लगाने के बाद धान के पुवाल से ढंक कर हल्का पानी देते रहना चाहिए तीन सप्ताह में अंकुर और जड़े विकसित होना शुरू हो जाती है मानसून शुरू होते ही क्यारियों में अंकुरित हो रहे कंदों के टुकड़ों को मुख्य खेत में रोपित कर देना चाहिए जिमीकंद की अच्छी पैदावार के लिए उसे हल्के गहरे गड्डों में (40 X 40 X 40 सेंटीमीटर) गोबर की सड़ी हुई खाद, महीन बालू तथा अच्छी मिट्टी (1:1:1) भरकर रोपित करना चाहिए रोपण में प्रयुक्त होने वाले कंदों के आकार के अनुसार पौधों की दूरी सुनिश्चित की जाती है यदि 500 ग्राम से 1 किलोग्राम तक के कंदों को रोपा जा रहा है, तो पौधों और कतार के बीच की दूरी 90 सेंटीमीटर रखनी चाहिए यदि कंदों के टुकड़ों का आकार छोटा है तो 60 X 60 सेंटीमीटर की दूरी रखनी चाहिए आम तौर पर व्यावसायिक उत्पादन के लिए 500 ग्राम से 1 किलोग्राम वजन के कंदों को तथा बीज उत्पादन के लिए 50 से 150 ग्राम वजन के कंदों को रोपा जाता है रोपते समय कंदों को मिट्टी की सतह से 4 से 6 सेंटीमीटर की गहराई में लगाते हैं रोपण के बाद धान के पुवाल या पत्तों आदि से गड्डों को ढंक देना चाहिए जिमीकंद अत्यधिक उर्वरकग्राही फसल है गोबर की पूरी तरह सड़ी हुई खाद 25 से 30 टन प्रति हेक्टेयर की दर से अंतिम जुताई के समय खेत में मिला देनी चाहिए यदि गड्डों में रोपाई की जानी है, तो गोबर की खाद को मिट्टी में मिलाकर गङ्कों में भर देना चाहिए रासायनिक खादों में नत्रजन, फॉस्फोरस और पोटाश की मात्रा 150:100:150 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से देना चाहिए मृदा परिक्षण के आधार पर मात्रा कम या ज्यादा हो सकती है, इसलिए इसकी खेती से अच्छे उत्पादन के लिए मृदा परिक्षण आवश्यक है आखरी जुताई या रोपण के समय फॉस्फोरस की पूरी मात्रा तथा नत्रजन और पोटाश की आधी मात्रा देनी चाहिए नत्रजन और पोटाश की बची हुई मात्रा दो बार में रोपाई के 30 एवं 60 दिन बाद खरपतवार निकाल कर पौधों पर मिट्टी चढ़ाते समय दे देनी चाहिए अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में नत्रजन और पोटाश की मात्रा बराबर 3 से 5 बार में देना ठीक रहता है लेकिन फॉस्फोरस की पूरी मात्रा रोपाई के समय ही दे देनी चाहिए यदि मार्च में जिमीकंद की फसल की रोपाई की गयी है तो रोपाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई कर देनी चाहिए और उसके बाद समय-समय पर आवश्यकतानुसार हल्की सिंचाई करते रहना चाहिए इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि फसल-वद्धि की किसी भी अवस्था में खेत में पानी का जमाव नहीं रहना चाहिए कंदों की खुदाई से पूर्व भी हल्की सिंचाई कर देने से सुविधा रहती है धन्यवाद

Posted by Sanjit Sardar
West Bengal
20-12-2019 05:14 PM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद

Posted by Kuldeep Singh
Rajasthan
20-12-2019 05:13 PM
श्री मान सिंचाई की संख्या, पानी की उपलब्धता मिट्टी की किस्म पर पर निर्भर करती है जड़ें बनने के समय और बालियां बनने के समय नमी का होना जरूरी है छोटे कद वाली किस्मों और अच्छी पैदावार के लिए बिजाई से पहले सिंचाई करें गेहूं की फसल के लिए चार से छः सिंचाईयां बहुत होती हैं बिजाई के 20-25 दिनों के बाद पहली सिंचाई देनी चा.... (Read More)
श्री मान सिंचाई की संख्या, पानी की उपलब्धता मिट्टी की किस्म पर पर निर्भर करती है जड़ें बनने के समय और बालियां बनने के समय नमी का होना जरूरी है छोटे कद वाली किस्मों और अच्छी पैदावार के लिए बिजाई से पहले सिंचाई करें गेहूं की फसल के लिए चार से छः सिंचाईयां बहुत होती हैं बिजाई के 20-25 दिनों के बाद पहली सिंचाई देनी चाहिए जड़ें बनने के समय पर नमी का होना पैदावार को कम होने से बचाता है ठंडे क्षेत्रों में जैसे पहाड़ी क्षेत्रों और जहां पर गेहूं की पिछेती बिजाई की जाती है वहां पर बिजाई के लगभग 25-30 दिनों के बाद पहली सिंचाई करें बिजाई के 40-45 दिनों के बाद पौधा बनने के समय दूसरी सिंचाई करें तीसरी सिंचाई 70-75 दिनों के बाद नोड्स बनने के समय करें फूल निकलने के समय चौथी सिंचाई 90-95 दिनों में करें पांचवी सिंचाई बिजाई के 110-115 दिनों के बाद करें जब दाने अपरिपक्व होते हैं कम पानी की स्थितियों में गंभीर अवस्था में सिंचाई करें जब पानी एक ही सिंचाई के लिए उपलब्ध हो तो जड़ें बनने के समय पानी लगाएं जब दो सिंचाईयों के लिए पानी उपलब्ध हो तो जड़ें बनने के समय और बालियां निकलने के समय पानी लगाएं यदि तीन सिंचाइ्रयों के लिए पानी उपलब्ध हो तो पहला पानी जड़ें बनने के समय दूसरा बलियां बनने के समय और तीसरा पानी दानों में दूध बनने के समय लगाएं जड़ें बनने की अवस्था सिंचाई के लिए बहुत महत्तवपूर्ण अवस्था होती है यह सिद्ध हुआ है कि पहली सिंचाई के हर सप्ताह के बाद देरी करने से 80-120 किलोग्राम प्रति एकड़ पैदावार में कमी आती है
Posted by Baljeet choudhary
Punjab
20-12-2019 05:13 PM
बलजीत जी कृपया गेहूं की जड़ों और पौधों की फोटो भेंजे
Posted by sandeep Rathod
Madhya Pradesh
20-12-2019 05:11 PM
संदीप जी कृपया गेहूं के पौधों और उसकी जड़ की फोटो भेजें ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by gurdeep singh 5
Punjab
20-12-2019 05:04 PM
श्रीमान जी गेहूं में मैगनीज एक किलो प्रति एकड़ और सल्फर 1 किलो प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे कर सकते है

Posted by DHARAMCHAND BIRLA
Madhya Pradesh
20-12-2019 05:03 PM
श्रीमान जी, अरवी की खेती कई प्रकार की मिट्टी जैसे कि रेतली से दोमट मिट्टी में की जाती है, पर यह रेतली दोमट या जैविक तत्वों की भरपूर मात्रा वाली मिट्टी में उगाने पर बढ़िया परिणाम देती है घटिया निकास वाली मिट्टी में इसकी खेती ना करें कम ऊपजाऊ और नमी वाली मिट्टी इसकी पैदावार को कम कर देती है अरवी की खेती के लिए, ज़म.... (Read More)
श्रीमान जी, अरवी की खेती कई प्रकार की मिट्टी जैसे कि रेतली से दोमट मिट्टी में की जाती है, पर यह रेतली दोमट या जैविक तत्वों की भरपूर मात्रा वाली मिट्टी में उगाने पर बढ़िया परिणाम देती है घटिया निकास वाली मिट्टी में इसकी खेती ना करें कम ऊपजाऊ और नमी वाली मिट्टी इसकी पैदावार को कम कर देती है अरवी की खेती के लिए, ज़मीन को अच्छी तरह से तैयार करें खेत को भुरभुरा करने के लिए, बिजाई से पहले खेत की 2-3 बार जोताई करें और उसके बाद सुहागा फेरें खेत को नदीन-मुक्त रखें फरवरी महीने के पहले पखवाड़े में गांठों को नर्सरी बैडों पर बोयें पंक्ति से पंक्ति में 60x15 या 45 x 20 सैं.मी. का फासला रखें गांठों को 6-7.5 सैं.मी. की गहराई पर बोयें गांठो की हाथों से बिजाई की जाती है बीजों को मिट्टी में गहराई से बोया जाता है गांठों की बिजाई गड्डे खोद कर की जाती है इसके इलावा इसकी बिजाई आलुओं की तरह मशीन से भी की जा सकती है प्रति एकड़ खेत में 300-400 किलो गांठों का प्रयोग करें बीज के उपचार के लिए बविस्टीन के 2% घोल में 30 मिनट के लिए गांठों को भिगोएं यह गांठों को मिट्टी में पैदा होने वाली बीमारीयों से बचाता है बिजाई से पहले, गली हुई रूड़ी की खाद 40-62.5 क्विंटल प्रति एकड़ में डालें शुरुआती खाद के तौर पर यूरिया 90 किलो, सिंगल सुपर फासफेट 125 किलो और मिउरेट ऑफ़ पोटाश 35 किलो प्रति एकड़ डालें खेत को नदीन मुक्त करने के लिए, 1-2 कसी से गोड़ाई करें और हर एक गोड़ाई के बाद जड़ों पर मिट्टी चढ़ाएं जरूरत से पहले सिंचाई फसल की बढ़िया पैदावार के लिए बहुत लाभदायक होती है गर्मीयों में, सिंचाई 3-4 दिनों के फासले पर करें और बारिश के मौसम में, सिंचाई की जरूरत नहीं होती, पर कई बार आवश्यकता अनुसार जीवन रक्षक के लिए सिंचाई जरूरी होती है इस फसल को नियमित अंकुरण के लिए स्थिर सिंचाई की आवश्यकता होती है इसलिए बिजाई के तुरंत बाद सिंचाई करें बीजों के अंकुरण तक खेत में नमी बनाये रखें धन्यवाद

Posted by Jaskaran singh
Punjab
20-12-2019 04:58 PM
Shrimaan ji, is upar tuc macchar de hamle di janch karo, jekar macchar da hamla mojood hove tan tuc is vich imidacloprid @ 1.5 ml prati liter pani de hisaab nal spray karo, dhanwad
Posted by Ravi Shankar Chaudhary
Bihar
20-12-2019 04:58 PM
श्री मान सिंचाई की संख्या, पानी की उपलब्धता मिट्टी की किस्म पर पर निर्भर करती है जड़ें बनने के समय और बालियां बनने के समय नमी का होना जरूरी है छोटे कद वाली किस्मों और अच्छी पैदावार के लिए बिजाई से पहले सिंचाई करें गेहूं की फसल के लिए चार से छः सिंचाईयां बहुत होती हैं बिजाई के 20-25 दिनों के बाद पहली सिंचाई देनी चा.... (Read More)
श्री मान सिंचाई की संख्या, पानी की उपलब्धता मिट्टी की किस्म पर पर निर्भर करती है जड़ें बनने के समय और बालियां बनने के समय नमी का होना जरूरी है छोटे कद वाली किस्मों और अच्छी पैदावार के लिए बिजाई से पहले सिंचाई करें गेहूं की फसल के लिए चार से छः सिंचाईयां बहुत होती हैं बिजाई के 20-25 दिनों के बाद पहली सिंचाई देनी चाहिए जड़ें बनने के समय पर नमी का होना पैदावार को कम होने से बचाता है ठंडे क्षेत्रों में जैसे पहाड़ी क्षेत्रों और जहां पर गेहूं की पिछेती बिजाई की जाती है वहां पर बिजाई के लगभग 25-30 दिनों के बाद पहली सिंचाई करें बिजाई के 40-45 दिनों के बाद पौधा बनने के समय दूसरी सिंचाई करें तीसरी सिंचाई 70-75 दिनों के बाद नोड्स बनने के समय करें फूल निकलने के समय चौथी सिंचाई 90-95 दिनों में करें पांचवी सिंचाई बिजाई के 110-115 दिनों के बाद करें जब दाने अपरिपक्व होते हैं कम पानी की स्थितियों में गंभीर अवस्था में सिंचाई करें जब पानी एक ही सिंचाई के लिए उपलब्ध हो तो जड़ें बनने के समय पानी लगाएं जब दो सिंचाईयों के लिए पानी उपलब्ध हो तो जड़ें बनने के समय और बालियां निकलने के समय पानी लगाएं यदि तीन सिंचाइ्रयों के लिए पानी उपलब्ध हो तो पहला पानी जड़ें बनने के समय दूसरा बलियां बनने के समय और तीसरा पानी दानों में दूध बनने के समय लगाएं जड़ें बनने की अवस्था सिंचाई के लिए बहुत महत्तवपूर्ण अवस्था होती है यह सिद्ध हुआ है कि पहली सिंचाई के हर सप्ताह के बाद देरी करने से 80-120 किलोग्राम प्रति एकड़ पैदावार में कमी आती है

Posted by Kanhaiya Dhaker
Rajasthan
20-12-2019 04:50 PM
Kanhaiya ji, kripya ap apna sawal visthar se puchien ke ap afeem ki kheti ke bare mein kya jankari elan chate hain taki apko iske bare mein bataya ja sake, dhanywad

Posted by b s
Punjab
20-12-2019 04:50 PM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਪੰਜਾਬ ਵਿਚ ਛੋਟੀ ਇਲਾਚੀ ਅਤੇ ਬਦਾਮ ਦੀ ਖੇਤੀ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ,ਇਸ ਦੇ ਬਾਰੇ ਜਾਣਕਾਰੀ ਲੈਣ ਲਈ ਤੁਸੀ surinder Nagra 9814305864 Rehsam Ayurvedic Nursery ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰੋ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by sachveer singh
Punjab
20-12-2019 04:49 PM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਇਸ ਦੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਹਨ--PNB 83, PNB 233, CO 3, Pusa Giant Napier, Gajraj, NB-5, NB-6, NB 37 and NB-35..I ਇਸਦੀ ਬਿਜਾਈ ਗੰਨੇ ਵਾਂਗ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦੀ ਬਿਜਾਈ ਦਾ ਸਮਾਂ ਫ਼ਰਵਰੀ ਤੋਂ ਲੈ ਕੇ ਅਪ੍ਰੈਲ ਤੱਕ ਹੁੰਦਾ ਹੈ I ਇੱਕ ਏਕੜ ਵਿੱਚ 11000 ਕਲਮਾਂ ਲਗਦੀਆਂ ਹਨ I ਇਸਦਾ ਬੀਜ ਤੁਹਾਨੂੰਪੰਜਾਬ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਲੁਧਿਆਣਾ ਤੋਂ ਮਿਲ ਸਕਦਾ ਹੈ

Posted by Brij Bihari
Uttar Pradesh
20-12-2019 04:46 PM
श्रीमान जी भिंडी की बिजाई फरवरी में कर सकते है

Posted by amit kulria
Haryana
20-12-2019 04:43 PM
अमित जी आप इसकी जड़ की फोटो भेजें ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके

Posted by gurpreet singh
Punjab
20-12-2019 04:42 PM
Sir, Malabar neem can be successfully cultivated in Punjab, for getting more detail please contact Radhe Sham 7727065370 Avishkar Agrotech , thank you

Posted by bahadur Singh chawfa
Madhya Pradesh
20-12-2019 04:41 PM
इसे मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है दरमियानी हल्की दोमट मिट्टी जिसकी पी एच 6.0-8.0 हो, में उगाने पर इसकी वृद्धि अच्छी होती है पौधे के अंकुरण के लिए खेत को अच्छी तरह से तैयार करें खेत की जोताई करें, क्रॉस जोताई और समतल करें सीढ़ीदार खेतों में भी रोपण किया जाता है पहाड़ी क्षेत्रों में ज्यादा घनत्व में र.... (Read More)
इसे मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है दरमियानी हल्की दोमट मिट्टी जिसकी पी एच 6.0-8.0 हो, में उगाने पर इसकी वृद्धि अच्छी होती है पौधे के अंकुरण के लिए खेत को अच्छी तरह से तैयार करें खेत की जोताई करें, क्रॉस जोताई और समतल करें सीढ़ीदार खेतों में भी रोपण किया जाता है पहाड़ी क्षेत्रों में ज्यादा घनत्व में रोपण करना सम्भव है बिजाई के लिए मध्य जून से लेकर अंत सितंबर उपयुक्त होता है शुरूआती विकास के दौरान तेज हवा को कम करने के लिए आम, अमरूद, जामुन, अनोला, शीशम या शहतूत खेत के चारों तरफ लगाएं नींबू वर्गीय बीजों को नर्सरी बैडों 2x1 मीटर पर और कतार के बीच में 15 सैं.मी. के फासले पर बोयें जब नए पौधों की ऊंचाई 10-12 सैं.मी. हो, तो रोपाई करनी चाहिए रोपण के लिए, तंदरुस्त और बराबर आकार के पौधों का प्रयोग करें छोटे और कमज़ोर पौधों को निकाल दें यदि आवश्यक हो, रोपण से पहले जड़ों की हल्की कटाई करें नर्सरी में, जब पौधा पेंसिल की तरह मोटा हो तो बडिंग करें इसके लिए शील्ड बडिंग या टी आकार की बडिंग की जाती है ज़मीनी स्तर से 15-20 सैं.मी. के फासले पर वृक्ष की छाल में टी आकार का छेद बनाया जाता है लेटवें आकार में 1.5-2 सैं.मी. का लंबा कट लगाया जाता है और वर्टीकल में लेटवें आकार के मध्य में से 2.5 सैं.मी. लंबा कट लगाएं बड स्टिक में से बड निकाल लें और टी आकार के छेद में उसे लगा दें उसके बाद उसे प्लास्टिक के पेपर से लपेट दें टी बडिंग फरवरी मार्च के दौरान और अगस्त-सितंबर में भी की जाती है मीठे संतरे, किन्नू, अंगूर फलों में प्रजनन टी बडिंग द्वारा किया जाता है जबकि कागज़ी नींबू और नींबू में प्रजनन एयर लेयरिंग विधि द्वारा किया जाता है पौधे के तने की अच्छी वृद्धि के लिए, ज़मीनी स्तर के नज़दीक से 50-60 सैं.मी. में शाखाओं को निकाल देना चाहिए पौधे का केंद्र खुला होना चाहिए विकास की शुरूआती अवस्था में आस-पास की टहनियों को निकाल देना चाहिए

Posted by amit kulria
Haryana
20-12-2019 04:39 PM
अमित जी आपके द्वारा भेजी गयी फोटो उपलोड नहीं हुई है कृपया आप फोटो भेजे ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद

Posted by Arshdeep
Punjab
20-12-2019 04:36 PM
ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਪਸ਼ੂਆਂ ਨੂੰ ਘਰ ਵਿਚ ਫੀਡ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਦੇਣੀ ਹੈ ਤਾਂ ਸੰਤੁਲਿਤ ਖੁਰਾਕ 100 ਕਿਲੋ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਲੋੜੀਂਦੀ ਸਮੱਗਰੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਜਿਵੇਂ 25 ਕਿਲੋ ਅਨਾਜ ( ਜਵਾਰ, ਬਾਜਰੀ (ਸਰਦੀਆਂ) , ਕਣਕ, ਜੌਂ ( ਗਰਮੀਆ) ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਕੋਈ ਇੱਕ ) , ਦਾਲ ਚੂਰੀ 20 ਕਿਲੋ( ਮੂੰਗੀ ਚੂਰੀ, ਮਾਂਹ ਚੂਰੀ, ਮੋਠ ਚੂਰੀ ( ਕੇਵਲ ਸਰਦੀਆਂ ਲਈ) , ਮਸੁਰ ਚੂਰੀ ,ਅਰਹਰ, (ਇਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਇੱਕ ) , DOC 25 ਕਿਲੋ ( ਚੌਲਾਂ ਦਾ ਚੂਰਾ ) , ਫਾਈਬ.... (Read More)
ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਪਸ਼ੂਆਂ ਨੂੰ ਘਰ ਵਿਚ ਫੀਡ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਦੇਣੀ ਹੈ ਤਾਂ ਸੰਤੁਲਿਤ ਖੁਰਾਕ 100 ਕਿਲੋ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਲੋੜੀਂਦੀ ਸਮੱਗਰੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਜਿਵੇਂ 25 ਕਿਲੋ ਅਨਾਜ ( ਜਵਾਰ, ਬਾਜਰੀ (ਸਰਦੀਆਂ) , ਕਣਕ, ਜੌਂ ( ਗਰਮੀਆ) ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਕੋਈ ਇੱਕ ) , ਦਾਲ ਚੂਰੀ 20 ਕਿਲੋ( ਮੂੰਗੀ ਚੂਰੀ, ਮਾਂਹ ਚੂਰੀ, ਮੋਠ ਚੂਰੀ ( ਕੇਵਲ ਸਰਦੀਆਂ ਲਈ) , ਮਸੁਰ ਚੂਰੀ ,ਅਰਹਰ, (ਇਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਇੱਕ ) , DOC 25 ਕਿਲੋ ( ਚੌਲਾਂ ਦਾ ਚੂਰਾ ) , ਫਾਈਬਰ ਛਿਲਕਾ 15 ਕਿਲੋ (ਕਣਕ, ਚੌਕਰ, ਚਨਾ ਛਿਲਕਾ, ਮਟਰ ਛਿਲਕਾ, ਇਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਇੱਕ) , ਖਲ਼ 15 ਕਿਲੋ(ਸਰੋਂ, ਬਿਨੌਲਾ ਜਾਂ ਸੋਇਆ (ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਕੋਈ ਇੱਕ) , ਮਿੱਠਾ ਸੋਡਾ 250 ਗ੍ਰਾਮ, 1 ਕਿਲੋ ਨਮਕ, ਗੁੜ 1 ਕਿਲੋ, 1 ਕਿੱਲੋ ਹਲਦੀ (ਸਰਦੀਆ ਵਿੱਚ ) ਇਹ ਨੂੰ ਰਲਾ ਲਵੋ ਇਹ ਫੀਡ ਪਸ਼ੂ ਲਈ ਬਹੁਤ ਲਾਹੇਵੰਦ ਹੁੰਦੀ ਹੈ, ਤੁਸੀ ਓਹਨਾ ਨੂੰ ਰੋਜਾਨਾ 35-40 ਕਿਲੋ ਹਰਾ ਚਾਰਾ ਦਿਓ..
Posted by कौशल किशोर
Uttar Pradesh
20-12-2019 04:33 PM
कौशल जी आप इसके ऊपर mancozeb @400 ग्राम को प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें ज्यादा फल के लिए आप इसके ऊपर NPK 130045 @1 किलो को 150 लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद

Posted by ਹਰਵਿੰਦਰ ਸਿੰਘ
Punjab
20-12-2019 04:32 PM
हरविंदर जी आलू में झुलसा रोग की रोकथाम के लिए आप मैनकोजेब 30 ग्राम या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 30 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी में मिलाकर बिजाई के 45 दिनों के बाद 10 दिनों के फासले पर 2-3 बार स्प्रे करें और ग्रोथ के लिए आप NPK 19:19:19@1kg प्रति एकड़ सप्रे करें
Posted by Vikash Kumar
Bihar
20-12-2019 04:28 PM
उसे आप Enerdyna liquid 100-100ml सुबह शाम, Lactomax tablet 10—10 गोलियां रोजाना सुबह शाम दें और Lactomood होमियोपेथिक दवा की 10—10 बूंदें दिन में तीन बार दें और रोजाना 35—40 किलो हरा चारा दें इससे फर्क पड़ जाएगा

Posted by Daljeet Singh
Chandigarh
20-12-2019 04:13 PM
Give the buffalo balanced diet, along with this, give him anabolite liquid 100 ml daily, milkout powder 2-2 spoons in the morning and evening and tablet of Calcimust bolus 1-1 in morning and evening, it will help in milk yield..
Posted by Gurmeet Singh
Punjab
20-12-2019 03:59 PM
ਕਣਕ ਿੲਸ ਤਰਾ ਪੀਲੀ ਹੋ ਿਕ ਸੁੱਕ ਰਹੀ ਹੈ ਖਾਦ ਵੀ ਪਾਈ ਯੂਰੀਆ ਿੲੱਕ ਬੋਰੀ +ਡਾਈ ਿੲੱਕ ਬੋਰੀ + ਸ਼ਪਰੇ ਮੈਗਜੀਨ ਕੀਤੀ ਆ ?
गुरमीत जी कृपया आप 2—4 पौधों की पुटाई करके जड़ों की फोटो भेंजे ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by Gurmeet Singh
Punjab
20-12-2019 03:52 PM
gurmeet ji isdi jad vich sundi da hamla check karo jekar maujood hai ta tuc isde uper chlorpyriphos@1.2 litre nu 60 kilo ret vich mila ke prati acre de hisab nal chita deo.dhanwad

Posted by Paban Kalita
Assam
20-12-2019 03:51 PM

Posted by Yadnesh Nareshrao Gaulkar
Maharashtra
20-12-2019 03:45 PM
yadnesh ji iski jad men dheemak ka hamla check karen agar maujood hai to aap chlorpyriphos@4ml ko prati litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by giri
Uttar Pradesh
20-12-2019 03:44 PM
गिरी जी कृपया बताये कि आपने इसकी बिजाई बीज से की है या कलम से ताकि आपको उसके हिसाब से जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by Manoj Kumar
Uttar Pradesh
20-12-2019 03:32 PM
Nhi manoj ji machli ke liye koi v company insurance nhi krti hai..
Posted by Gurnishan Singh Dhillon
Punjab
20-12-2019 03:32 PM
Dhillon ji Murrah nasal di majh lenn lai tuci KD Singh 8528868999 Murrah Buffalo Dairy Farm nal sampark kr skde ho..
Posted by Gopal Moury
Madhya Pradesh
20-12-2019 03:30 PM
गोपाल जी आप इसे हलकी सिंचाई करके बीज का दुबारा से छींटा दे इस से जहाँ गेंहू काम ऊगा है दुबारा उगना शुरू हो जायेगा धन्यवाद

Posted by Amarbir singh
Punjab
20-12-2019 03:30 PM
श्रीमान जी गेहूं में मैगनीज की कमी है जिसके कारण पत्ते बीच से पीले हो रहे है इसकी रोकथाम के लिए मैगनीज एक किलो प्रति एकड़ 150 लीटर पानी के साथ स्प्रे कर सकते है
Posted by Bhaskar Narayan Thakur
Bihar
20-12-2019 03:20 PM
असली केसर सिर्फ जम्मू कश्मीर, ईरान और अफगानिस्तान में ही हो सकता है, यह कुसुम है, इसकी भी कई दवाई बनती है, यदि कोई और छक है तो जम्मू कश्मीर के इस किसान से बात करें, जिसके दादे, पड़दादे भी केसर की खेती करते थे और यह भी केसर की खेती करते है Javid Ahmed- 95964 93260 बाकि आप यह वीडियो देखें https://www.youtube.com/watchv=vl7c6L3ETnQ&t=8s बाकि यदि फिर भी यकीन नहीं .... (Read More)
असली केसर सिर्फ जम्मू कश्मीर, ईरान और अफगानिस्तान में ही हो सकता है, यह कुसुम है, इसकी भी कई दवाई बनती है, यदि कोई और छक है तो जम्मू कश्मीर के इस किसान से बात करें, जिसके दादे, पड़दादे भी केसर की खेती करते थे और यह भी केसर की खेती करते है Javid Ahmed- 95964 93260 बाकि आप यह वीडियो देखें https://www.youtube.com/watchv=vl7c6L3ETnQ&t=8s बाकि यदि फिर भी यकीन नहीं है तो तो आप अमृतपाल सिंह बराड़ प्रोफेसर, पीएयू लुधियाना इस वीडियो संबंधी विचार पड़ सकते हैं, यह फसल केसर की नहीं है, यह फसल कसुंबडे की है, इसे अंग्रेजी में Safflower कहते है, और विज्ञानं में इसे Carthamus tinctorius कहते है

Posted by mandip ghuman
Punjab
20-12-2019 02:55 PM
Mandip ji tuci majjh nu pett de kiria lai Flukarid-DS bolus deo ate Bovimin-B powder 100gm rojana ate Totavit bolus rojana 1 goli deo ate 21 din tak dinde rho, iss nal heat vich aa jawegi..
Posted by Nitesh Kumawat
Madhya Pradesh
20-12-2019 02:42 PM
Nitesh ji kripya aap apna resume info@apnikheti.com par mail kar de.

Posted by Khushpreet Singh
Rajasthan
20-12-2019 02:39 PM
khushpreet ji yeh sundi ke karn ho raha hai iske liye aap quinalphos@4ml ko prati litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad

Posted by Sandeep
Punjab
20-12-2019 02:18 PM
sandeep ji eh fasl da boojha bnaun de kam aundi hai isde nal fasl di growth ho jayegi.dhanwad

Posted by Ghanshyam Moruya
Madhya Pradesh
20-12-2019 02:16 PM
गर्मी में इसकी बिजाई जून-जुलाई के महीने में की जाती है धन्यवाद

Posted by Sandeep
Punjab
20-12-2019 02:16 PM
sandeep ji isdiyan jdan de vich aphid da hamla check karo jekar maujood hai ta tuc chlorpyriphos @1.2 litre nu prati aikad de hisab nal varto.dhanwad

Posted by Deep Chaudhary
Punjab
20-12-2019 02:12 PM
deep ji jekar tuc jaivik kheti de bare gal kar rahe ho ta tuc roodi di kaad di varto kar sakde ho isto ilava tuc vermicompost di varto kar sakde ho.dhanwad

Posted by Gurwinder singh sandhu
Punjab
20-12-2019 02:11 PM
Gurwinder ji kirpa karke video dubara bhejo tuhade valo bheji gayi video upload nahi hoyi hai.dhanwad
Posted by RISHIKESH KUSHWAHA
Uttar Pradesh
20-12-2019 02:07 PM
आप डेयरी फार्मिंग करना चाहते है तो सबसे पहले आप इनकी ट्रेनिंग जरूर लें, ट्रेनिंग आप अपने नज़दीकी कृषि विज्ञान केन्द्र से प्राप्त कर सकते है जिससे आपको इस काम के बारे में जानकारी प्राप्त होगी और इन्हें शुरू करने और इनमें लाभ कमाने का सही तरीका पता लग सकता है और आप शुरूआत कम जानवरों से करें जैसे जैसे आपको जान.... (Read More)
आप डेयरी फार्मिंग करना चाहते है तो सबसे पहले आप इनकी ट्रेनिंग जरूर लें, ट्रेनिंग आप अपने नज़दीकी कृषि विज्ञान केन्द्र से प्राप्त कर सकते है जिससे आपको इस काम के बारे में जानकारी प्राप्त होगी और इन्हें शुरू करने और इनमें लाभ कमाने का सही तरीका पता लग सकता है और आप शुरूआत कम जानवरों से करें जैसे जैसे आपको जानकारी होती रहेगी फिर आप इस काम को बढ़ा सकते है, आप एक बार में इक्ट्ठी गाय/भैंसे ना खरीदें, गायों/भैंसो को 2-2 महीनों के फासले पर खरीदें या फिर 3 पहले खरीदें ओर 3 महीने बाद फिर 1-2 खरीद लें इससे दूध की कमी नहीं आयेगी पशु की नसल सबसे ज्यादा जरूरी है पशु खरीदने के समय कोशिश करें कि दिन में तीन बार दूध निकालकर ही पशु खरीदें भैंसो का एक दिन का दूध 12 लीटर और गायों को दूध 16-17 लीटर से कम ना हो गाभिनों को खरीदने का सही समय रखड़ियों से लेकर वैशाखी तक का होता है क्योंकि इस समय मौसम अच्छा होने के कारण हरा चारा भी खुला होता है गाभिनों के लिए शैड आवाजाई वाली सड़क पर ना बनायें और शैड सड़क से कम से कम 100 गज दूर हो शैड को धूप और हवा का ध्यान रखकर ही बनायें शैड हमेशा खेत या आस पास से 2 फुट ऊंचा बनायें क्योंकि निचले स्थान पर पानी खड़ा हो जाता है जिस कारण गंदगी पैदा हो जाती है और बाकी पशुओं का मल मूत्र का निकास भी आसानी से हो जाता है पशुओं के लिए बनायी जाने वाली खुरली ढाई तीन फुट चौड़ी होनी चाहिए खुरली पर खड़ने के लिए एक पशु को तकरीबन चार फुट जगह चाहिए मतलब 10 पशुओं के लिए 40 फुट लंबी खुरली बनेगी डेयरी फार्म से संबंधित सामान रखने के लिए स्टोर बनायें पशुओं का वितरण/दाना स्टोर करने के लिए कमरा सैलाब से रहित होना चाहिए शैड का फर्श पक्क, फिसलन रहित और जल्दी साफ होने वाला हो शैड में जितना हो सके पशुओं को खुला छोंड़े और पानी और दाना पूरा डालें पशु को खुला छोड़ने से पशुओं में अफारे की समस्या कम आती है बाकी अपनी आवश्यकता और क्षमता के मुताबिक ही सामान खरीदें और आर्थिक नुकसान से बचने के लिए प्रत्येक गाभिन का बीमा जरूर करवायें.

Posted by Khushpreet Singh
Rajasthan
20-12-2019 02:06 PM
Khushpreet ji kripya aap apna swal vistar se pooche taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by RISHIKESH KUSHWAHA
Uttar Pradesh
20-12-2019 01:57 PM
श्री मान फसल को जानवरों से बचाने के लिए आप खेत में फेंसिंग कर सकते है इसके इलावा आप prem raj saini 9719432296 जी से सम्पर्क कर सकते है इन्हो ने एक खाद त्यार की है जिसकी बदबू से जानवर खेत में नहीं आते
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