Posted by Cm Hooda
Haryana
23-12-2019 06:16 PM
Cm Hooda ji winter me growth nahi hoji ji. nov se feb tak growth ruk jaati hai ji.

Posted by Kulwinder Singh
Punjab
23-12-2019 06:15 PM
Shrimaan ji, gende de phol vich sifrshi khaadan da istemal karo, is to ilawa is vich kisi keet ya bimari de hamle to bachav rakho, samay samay te is vich pani lagao ate nadeen di roktham rakho, dhanwad
Posted by Cm Hooda
Haryana
23-12-2019 06:07 PM
Cm Hooda ji winter me growth nahi hoji ji. nov se feb tak growth ruk jaati hai ji.

Posted by shivraj Patel
Madhya Pradesh
23-12-2019 06:06 PM
Shrimaan ji, kripya ap apna sawal visthar se puchein ke ap kis fasal ke mandi bhav ke bare mein jnakri lena chhate hain, taki apko iske bare mein bataya ja sake, dhanywad

Posted by सोनू कुमार
Bihar
23-12-2019 06:06 PM
सोनू कुमार जी, कार्बन और सल्फर मिटटी के तत्व हैं, कार्बन की कमी के कारण पौधे में पिले और सफ़ेद धब्बे पड़ जात्ते हैं, और पौधे का विकास रुक जाता है, सल्फर मिटटी में पानी सोखने की क्षमता को बड़ा देता है, धन्यवाद

Posted by Vivek Pandey
Uttar Pradesh
23-12-2019 06:06 PM
यह एक महत्वपूर्ण सब्जी की फसल है जिसको ग्रीन हाउस या शेड नेट हाउस में उगाया जाता है इसकी खेती के लिए 18-35° सै. मिट्टी का तापमान होना आवश्यक है इसके अच्छे विकास के लिए विभिन्न प्रकार की चिकनी से दोमट मिट्टी में इसकी खेती करें यह कुछ हद तक तेज़ाबी मिट्टी में उगाई जा सकती है यह रेतली दोमट मिट्टी और पानी के अच्छे निक.... (Read More)
यह एक महत्वपूर्ण सब्जी की फसल है जिसको ग्रीन हाउस या शेड नेट हाउस में उगाया जाता है इसकी खेती के लिए 18-35° सै. मिट्टी का तापमान होना आवश्यक है इसके अच्छे विकास के लिए विभिन्न प्रकार की चिकनी से दोमट मिट्टी में इसकी खेती करें यह कुछ हद तक तेज़ाबी मिट्टी में उगाई जा सकती है यह रेतली दोमट मिट्टी और पानी के अच्छे निकास में बढ़िया परिणाम देती है शिमला मिर्च की खेती के लिए मिट्टी का pH 6-7 होना चाहिए प्रसिद्ध किस्में:-Bomby (red color),Orobelle (yellow color),Indra (green).शिमला मिर्च की खेती के लिए, ज़मीन को अच्छी तरह से तैयार करें ज़मीन को भुरभुरा बनाने के लिए, 5-6 बार सुहागे से जोताई करें खेत की तैयारी के समय खेत में रूड़ी की खाद डालें और मिट्टी में मिलाएं बीजों को मुख्य तौर पर अक्तूबर के अंत में बोयें और रोपण के लिए मध्य-फरवरी का समय उचित होता है जल्दी पैदावार के लिए, बीजों को मध्य-अक्तूबर में बोयें और रोपण के लिए नवंबर के अंत का समय उचित होता है बिजाई के लिए पंक्ति से पंक्ति में 50 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 40 सैं.मी. का फासला रखें बीज को 2-4 सैं.मी. गहरा बोयें .प्लास्टिक शीट की मदद से सुरंगी खेती: शिमला मिर्च की अगेती पैदावार के लिए गर्मियों के शुरू में इस विधि का प्रयोग किया जाता है यह दिसंबर से मध्य-फरवरी महीने के ठंडे मौसम में फसल की सुरक्षा करने में सहायता करती है बिजाई के समय कतार से कतार में 130 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 30 सैं.मी. का फासला रखें बिजाई से पहले 45-60 सैं.मी. लम्बे डंडों को मिट्टी में स्थापित करें खेत को प्लास्टिक शीट से (100 गेज मोटाई) डंडों की सहायता से लगाएं फरवरी के महीने में सही तापमान होने पर प्लास्टिक शीट को हटा दें 2. गड्डे खोद कर बीज लगाकर भी इसकी खेती की जाती है बीज की मात्रा:-एक एकड़ खेत के लिए 200-300 बीजों का प्रयोग करें बीज का उपचार मिट्टी से होने वाली बीमारीयों से बचाने के लिए बिजाई से पहले थीरम या कप्तान, सिरेसन आदि 2 ग्राम में प्रति किलो बीजों को भिगोएं शिमला मिर्च की खेती के लिए, सबसे पहले नर्सरी बैडों को तैयार करें नए पौधे लगाने के लिए 300 x 60 x 15 सैं.मी. आकार के सीड बैड तैयार करें बीजों को तैयार किये गए बैडों पर बोयें और बिजाई के बाद नर्सरी बैडों को मिट्टी की पतली परत से ढक दें बीजों के उचित अंकुरण के लिए बिजाई के बाद तैयार बैडों पर हल्की सिंचाई करें जब पौधे के 4-5 पत्ते निकलने शुरू हो जाये तो आरोपण करें मुख्य खेत में आरोपण किया जाता है आरोपण आमतौर पर बरसात के मौसम में किया जाता है आरोपण के लिए मुख्यतः 50-60 दिनों की पौध का प्रयोग किया जाता है आरोपण से पहले नर्सरी बैडों को पानी लगाएं ताकि पौधे को आसानी से उखाड़ा जा सके खेत की तैयारी के समय, 20-25 टन प्रति एकड़ रूड़ी की खाद मिट्टी में मिलाएं रूड़ी की खाद के साथ, नाइट्रोजन 50 किलो( यूरिया 110 किलो), फासफोरस 25 किलो(सिंगल सुपर फासफेट 175 किलो) और पोटाशियम 12 किलो(मिउरेट ऑफ़ पोटाश 20 किलो) प्रति एकड़ में डालें पोटाशियम, फासफोरस की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन 1/3 हिस्सा रोपण से पहले कतारों में खाद के रूप में मिलाएंऔर बाकी बची हुई नाइट्रोजन को दो बराबर हिस्सों में डालें पहली खुराक रोपण के एक महीने बाद और दूसरी रोपण के दो महीने के बाद डालें फसल की बढ़िया पैदावार के लिए, उचित समय के अंतराल पर गोड़ाई करें नए पौधों के रोपण के 2-3 हफ्ते बाद मेंड़ पर मिट्टी चढ़ाएं यह खेत को नदीन मुक्त करने में मदद करती है रोपण के 30 दिनों के बाद पहली गोड़ाई और 60 दिनों के बाद दूसरी गोड़ाई करें बिजाई के बाद तुरंत हल्की सिंचाई करें अगली सिंचाई रोपण के तुरंत बाद करें और फिर आवश्यकता के अनुसार सिंचाई करें शुष्क और अर्ध शुष्क क्षेत्रों में सिंचाई उचित अंतराल पर आवश्यक होती है अपरिपक्व हरे फल कटाई के लिए तैयार होते है अपरिपक्व फल नर्म और कुरकुरे कटाई के लिए बढ़िया होते है शिमला मिर्च की औसतन पैदावार मुख्य तौर 40-50 क्विंटल प्रति एकड़ होती है

Posted by singh dhaliwal
Punjab
23-12-2019 06:03 PM
श्री मान चूहों से बचाव के लिए आप नीचे लिखे तरीके प्रयोग कर सकते हैं, पिंजरो का प्रयोग करना - चूहो को पडने के अलग अलग पिजंरो का प्रयोग किया जाता है इन पिजंरो का प्रयोग करने से पहले पिजंरे को अच्छी तरह धोकर प्रयोग करे ताकि किसी भी प्रकार की गंध ना आये साफ पिंजरो को खेत में चूहो के आने जाने वाले रास्ते और नुक्सान .... (Read More)
श्री मान चूहों से बचाव के लिए आप नीचे लिखे तरीके प्रयोग कर सकते हैं, पिंजरो का प्रयोग करना - चूहो को पडने के अलग अलग पिजंरो का प्रयोग किया जाता है इन पिजंरो का प्रयोग करने से पहले पिजंरे को अच्छी तरह धोकर प्रयोग करे ताकि किसी भी प्रकार की गंध ना आये साफ पिंजरो को खेत में चूहो के आने जाने वाले रास्ते और नुक्सान करने वाली जगह पर रखे बडी संखिया में चूहो को पकडने के लिए पिंजरे में 10-15 ग्राम अनाज को तेल लगाकर दो से तीन दिनो तक मुंह खोलकर रखे चुहो को मगर लगाने के बाद पिंजरे के अंदर कागज के टूकडो पर 10-15 ग्राम दाने और नालीदार दाखले पर चुटकी भर दाने रखकर मुंह को बंद कर दे ऐसा करके तीन दिन तक चूहे और पकडे हुए चूहो को पानी में डूबो कर मारे पिंजरो का दौबारा प्रयोग करने के लिए कम से कम 20 दिनो का फासला रखें कीडेमार जहरो के प्रयोग से रोकथाम - चूहो की कीडेमार और जहर के प्रयोग से रोकथाम करने के लिए जहरीला चोगा प्रयोग करने में ध्यान और सही तरीका प्रयोग करने की जरूरत है चुहो को इस जहरीले चोगे को खाना प्रयोग किये दानो का मियारपन , स्वाद, और तेल की गंध पर निर्भर करता है जहरीला चोगा बनाना जिंक फॉसफाइड का प्रयोग - एक किलो बाजरा गेहूं ज्वार का दलिया या इनका मिश्रण लेकर इसमे 20 ग्राम तेल हो सके तो मुंगफली का तेल और 25 ग्राम जिंकफॉसफाइड डाल कर अच्छी तरह मिलाये इस प्रकार तैया किये जहरीले चोगे को कागज की पुडीया बनाकर खेत में गेज वाली जगह पर रखे बरोमोडाइओलोन का प्रयोग - 20 ग्राम बरोमोडाइओलोन 0 005 फीसदी पाऊडर, 20 ग्राम बूरा खंड, और 20 ग्राम तेल को एक किलो किसी भी अनाज के दलिये में मिलाये और पूरे खेत में 40 जगह पर रख दें रैकुमिन का प्रयोग- 50 ग्राम रैकुमिन 0 0375 फीसदी पाऊडर , 20 ग्राम मुंगफली या सूरजमुखी का तेल और 20 ग्राम बूरा खंड को किसी भी अनाज के दलीये में मिलाये यह भी चूहो को मारने में बहुत फायदेमंद है
Posted by Jagar Singh
Punjab
23-12-2019 06:01 PM
uss nu tuci Diethylstilbestrol tablet denia suru kro, ehh usde weight de hisab nal deo, iss nal jldi heat vich aa jawegi.

Posted by Ambika Singh
Bihar
23-12-2019 06:00 PM
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकत हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्च.... (Read More)
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकत हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्चे देना आम बात है बकरियां 8-10 वर्ष तक बच्चे देती हैं और अपन गिनती को तेजी से बढ़ा लेती हैं आप बारबरी, ब्लैक बंगाल, जैसी नसल पाल सकते हैं इसकी ट्रेनिेंग के लिए आप अपने कुषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करे या फिर जो बकरी पालन का व्यवसाय कर रहा कोई किसान उसका फार्म स्वंय जाकर देखकर आयें तो और भी बारीकियों का पता चल जायेगा, आप ब्लैक बंगाल, बीटल, सिरोही, जमुनापरी, बरबरी नस्ल रख सकते हैं.
Posted by Govind Nayak
Rajasthan
23-12-2019 05:54 PM
गोविंद जी इसका दूध इसके माता—पिता के दूध के रिकॉर्ड पर निर्भर करता है यदि इसकी मां का दूध अच्छा है तो इसका दूध भी अच्छा होगा बाकि आपकी खुराक और देखभाल पर निर्भर करता है

Posted by dilbag
Punjab
23-12-2019 05:52 PM
Dilbag ji isdi varto infection vich kiti jndi hai, ehh mastitis di samsia vich v use kita jnda hai..
Posted by Govind Nayak
Rajasthan
23-12-2019 05:51 PM
गोविंद जी ये क्रॉस नसल की गाय है इसका दूध इसकी अच्छी खुराक और किस नसल के साथ क्रॉस है उसके ऊपर निर्भर करता है

Posted by akash kumar
Haryana
23-12-2019 05:47 PM
Akaksh ji DCP(DICALCIUM PHOSPHATE) hota hai jisse Phosphorus and Calcium ki kami puri hoti hai aur DORB (Rice Bran) jo tel reht jo hun feed mai milla kr dete hai..
Posted by Kuldeep Shekhawat
Rajasthan
23-12-2019 05:46 PM
बढ़िया वर्मी कंपोस्ट निम्नलिखित तरीके अनुसार बनायी जा सकती है इसलिए ऐसा स्थान लें जहां धूप ना आये और हवादार हो
इस स्थान पर ईंटों या पत्थर के टुकड़े और मिट्टी की 2—3 इंच मोटी परत बिछायें
मिट्टी पर थोड़ा सा पानी छिड़ककर गीला करें मिट्टी में 25 प्रतिशत से अधिक नमी नहीं होनी चाहिए
इसके ऊपर गंडोए (40 गंडोए प्रति वर.... (Read More)
बढ़िया वर्मी कंपोस्ट निम्नलिखित तरीके अनुसार बनायी जा सकती है इसलिए ऐसा स्थान लें जहां धूप ना आये और हवादार हो
इस स्थान पर ईंटों या पत्थर के टुकड़े और मिट्टी की 2—3 इंच मोटी परत बिछायें
मिट्टी पर थोड़ा सा पानी छिड़ककर गीला करें मिट्टी में 25 प्रतिशत से अधिक नमी नहीं होनी चाहिए
इसके ऊपर गंडोए (40 गंडोए प्रति वर्ग फीट जगह) में मिलायें
इसके बाद वेस्ट जैसे कि बची कुची सब्जियां, फल, कच्चा गोबर, गोबर की सलरी की 8—10 इंच मोटी परत डालें दूसरी परत के बाद इसके ऊपर सूखे पत्ते या पराली से ढक दें हर परत के बाद पानी छिड़कें ताकि नमी बनी रहे
वर्मीकंपोस्ट के बैड को 3—4 इंच मोटी गोबर की परत से ढक दें और इसके ऊपर बोरा या तिरपाल रखें ताकि नमी बनी रहे
रसोई, फसलों या डेयरी के बचे कुचे की परत को रैक से पलटते रहें और आवश्यकतानुसार थोड़ा थोड़ा करके और वेस्ट भी डाल सकते हैं इसके ऊपर कच्चा गोबर भी डाल सकते हैं पर ध्यान रखें कि यह परत पहले जितनी ही मोटी रहें
वर्मी कंपोस्ट की खाद मौसम के हिसाब से 45—60 दिनों में तैयार हो जाती है सबसे ऊपर वाली परत को हटाकर गंडोए छलनी से अलग कर लें और निचली छोड़ दें इसके ऊपर दोबारा रसोई या एग्रो वेस्ट की 6 इंच मोटी परत बिछाकर दोबारा खाद तैयार की जा सकती हैं 45 दिनों के बाद पानी छिड़कना बंद करने से भी गंडोए निचली परत में चले जाते हैं और छलनी से अलग करने में समय कम लगता है तैयार वर्मी कंपोस्ट काले भूरे रंग की गंध रहित और चाय पत्ती जैसी होती है इसे छांव में हवा में सुखकर आवश्यकतानुसार थैले या बोरियों में डालकर रखा जा सकता है एक टन वर्मी कंपोस्ट में 1.0—1.5 किलोग्राम नाइट्रोजन, 5—10 किलोग्राम पोटाश और 3.5—5.0 किलो फासफोरस होता है इसके अलावा इसमें कई तरह के एन्ज़ाइम और सूक्ष्म तत्व कॉपर, आयरन, जिंक, सल्फर, कैलशियम और मैगनीशियम आदि होते हैं
Posted by sandeep singh brar
Punjab
23-12-2019 05:46 PM
ਬਰਾੜ ਸਾਹਬ, ਪੋਲਟਰੀ ਫਾਰਮਿੰਗ ਦੀ ਟਰੇਨਿੰਗ ਤੁਸੀਂ ਗਡਵਾਸੂ ਲੁਧਿਆਣਾ ਤੋਂ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜਾਂ ਆਪਣੇ ਨੇੜਲੇ ਕੇ.ਵੀ.ਕੇ ਚੋ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਹਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀਂ ਸਕਿੱਲ ਸੈਂਟਰ ਪੀ.ਏ.ਯੂ ਲੁਧਿਆਣਾ ਚ ਫ਼ਾਰਮ ਭਰ ਕੇ ਜਮਾਂ ਕਰਵਾਓ ਜਦੋਂ ਵੀ ਟਰੇਨਿੰਗ ਲੱਗੇਗੀ ਉਹ ਤੁਹਾਡੇ ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰਨਗੇ ਲੋਨ ਬਾਰੇ ਜ਼ਿਆਦਾ ਜਾਣਕਾਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਵੀ ਤਹਾਨੂੰ ਉੱਥੋਂ ਈ ਮਿਲੇਗੀ

Posted by Jagdeep
Punjab
23-12-2019 05:45 PM
Shrimaan ji, sulphur kanak nu pani laon toh pehla pao isdi matra @ 3kg prati acre de hisaab nal shitta de sakde ho, dhanwad

Posted by rajendra singh
Uttar Pradesh
23-12-2019 05:44 PM
Shrimaan ji, yeh fungus ka hamla hua hai, iske iye fasal ki bijai se pehel beej ki sodh karni jaruri hoti hai, yeh fungud 3 saal tak khet ko khraab karti hai, iski roktham ke liye ap seed treatment kar sakte hain,iske liye thiram @ 2 gm prati kilo beej ke hisaab se karaien, dhanywad

Posted by Jagdeep
Punjab
23-12-2019 05:43 PM
jagdeep ji isde rate di jankari tuhanu local market vich hi mielgi.dhanwad

Posted by govardhan
Madhya Pradesh
23-12-2019 05:32 PM
Shrimaan ji, ap lahsun ka pila pan door karne ke liye NPK 191919 @ 10 gm prati liter pani ke hisaab se spray karein, dhanywad
Posted by Dilkush Nagar
Rajasthan
23-12-2019 05:29 PM
श्रीमान जी, यह फंगस का हमला हुआ है, इसकी रोकथाम के लिए आप m-45 @ 4 gm प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें, धन्यवाद
Posted by Dilkush Nagar
Rajasthan
23-12-2019 05:27 PM
श्रीमान जी, लहसुन का पीलापन दूर करने के लिए आप इसमें NPK 191919 @ 10 gm प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें, धन्यवाद
Posted by balwinder sidhu
Punjab
23-12-2019 05:19 PM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਇਹ ਫੰਗਸ ਦਾ ਹਮਲਾ ਹੋਇਆ ਹੈ, ਇਸਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਤੁਸੀ ਸੁਕਿਆਂ ਟਾਹਣੀਆਂ ਨੂੰ ਤੋੜ ਕੇ ਉਪਰ Bordeaux paste ਲਗਾ ਦਿਓ, ਧੰਨਵਾਦ

Posted by amit kulria
Haryana
23-12-2019 05:15 PM
श्री मान गेहूं में पीलापन की रोकथाम के लिए आप यूरिया के साथ सल्फर@5 किलो प्रती एकड़ छींटा दे सकते हो

Posted by lali Bachhal
Haryana
23-12-2019 05:13 PM
Shrimaan ji, university kisi vi 2 chemicals nu mix kar ke spray karn di sifarish nahi kardi hai, tuc kirpa kar ke ehna di spray mix kar ke na karo, atlantis @ 160 gram ate topic @ 160 gm di varto gulli dande di roktham de layi varti jandi hai ehna dona vicho ik da hi istemal karo ate 2,4-D @250 gm prati acre bathu di roktham lai vartea janda hai, dhanwad

Posted by gaurav rana
Haryana
23-12-2019 04:44 PM
Rana ji usko aap Vitum-H liquid 10ml rojana dena suru kren aur Bovimin-B powder 50gm rojana aur Stimvet 21 bolus rojana 1 goli den aur 21 din tak dete rehen, isse frak padd jayega.
Posted by अभिराम मिश्र
Bihar
23-12-2019 04:38 PM
श्रीमान जी, फसल जब 3 से 4 इंच हो जाती है, तब इसकी कटाई की जाती है, धन्यवाद
Posted by Parmod Bishnoi
Haryana
23-12-2019 04:27 PM
Shri maan g jameen mein yeh dekh le ki kahin sundi ka attack toh nhi agar hai toh QUINALPHOS@800 ml per acre spray kr skte ho...

Posted by yadwinder singh
Punjab
23-12-2019 03:59 PM
Shri maan g eh dwsi insecticide hai growth lyi tuc NPK 19:19:19@1kg per acre 150ltr pani ch mila ke spray kr skde ho...

Posted by amitkumar dhakar
Madhya Pradesh
23-12-2019 03:56 PM
श्री मान खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते ह.... (Read More)
श्री मान खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुमब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तहय उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तहय में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तहय लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है

Posted by sukhwinder singh
Punjab
23-12-2019 03:56 PM
Shri maan g kanak vich urea@50kg and Sulphur@5kg per acre shitta de skde ho......

Posted by Shubham sukhija
Uttarakhand
23-12-2019 03:54 PM
Shri maan g Gehu ki kism HD-2967 mein total urea@110 kg per acre 55-60 din mein poora kr skte ho......
Posted by BAHAL
Punjab
23-12-2019 03:54 PM
Shrimaan ji, hybrid seed to agey beej nahi tiyar kita janda hai, dhanwad

Posted by Sandeep
Haryana
23-12-2019 03:45 PM
Shrimaan ji,apke dawara beji gai audio mein kuch saaf sunai nahi de raha hai, kripya ap ise dubara upload karein, taki sunke apko iske bare mein bataya ja sake, dhanywad

Posted by ramswaroop meena
Madhya Pradesh
23-12-2019 03:44 PM
श्री मान गेहूं में सुंडी की रोकथाम के लिए आप QUINALPHOS@800 ml प्रति एकड़ सप्रे कर सकते हो

Posted by Sandeep
Haryana
23-12-2019 03:43 PM
श्रीमान जी, कृपया आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप गेहूं के बारे में क्या जानकरी लेना चाहते हैं ताकि आपको इसके बारे में बताया जा सके, धन्यवाद
Posted by Bharat Lal Dhaker
Rajasthan
23-12-2019 03:33 PM
श्री मान लहसुन में इसकी रोकथाम के लिए आप M-45@500 gmप्रती एकड़ सप्रे कर सकते हो
Posted by Abhay Pratap Singh
Uttar Pradesh
23-12-2019 03:29 PM
श्रीमान जी, यह पिछेती झुलस रोग है, इसकी रोकथाम के लिए आप इसमें copper oxychloride @ 500 gm को 150 लीटर पानी में मिला कर प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें, धन्यवाद
Posted by udayraj tiwari
Uttar Pradesh
23-12-2019 03:29 PM
आप उसे Fatplus पाउडर 50 ग्राम या Fatmax पाउडर 50 ग्राम और Enerboost पाउडर 50—50 ग्राम सुबह शाम दें, आप उसे अच्छी फीड के साथ एक किलो सरसों की खल, 1 किलो बड़ेवो की खल सुबह शाम दें , 20 ग्राम मीठा सोडा रोजाना एक बार दें इससे फर्क पड़ जाएगा

Posted by inderjeet singh
Punjab
23-12-2019 03:27 PM
Inderjeet ji, eh kanka di kisam te nirbhar karda hai ke eh kinney dina vich tiyar hundi hai, eh lagbhag 100-120 din pakan layi le jandi hai, dhanwad
Posted by udayraj tiwari
Uttar Pradesh
23-12-2019 03:18 PM
तिवारी जी आप भैंसों में मुर्रा नस्ल की भैंस रख सकते है क्योंकि इसका दूध भी ज्यादा होता है और फैट भी ज्यादा होती है और गायों में आप ज्यादा दूध लेने के लिए एचएफ नस्ल की गाय रख सकते है इसे ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है इसके इलावा आप साहीवाल, जर्सी गायों को रख सकते है साहीवाल देसी गाय है जिसके दूध में फैट सबसे ज्.... (Read More)
तिवारी जी आप भैंसों में मुर्रा नस्ल की भैंस रख सकते है क्योंकि इसका दूध भी ज्यादा होता है और फैट भी ज्यादा होती है और गायों में आप ज्यादा दूध लेने के लिए एचएफ नस्ल की गाय रख सकते है इसे ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है इसके इलावा आप साहीवाल, जर्सी गायों को रख सकते है साहीवाल देसी गाय है जिसके दूध में फैट सबसे ज्यादा होती है

Posted by sunil
Haryana
23-12-2019 03:15 PM
Shrimaan ji, sarson mein NPK 191919 @ 10 gm prati liter pani ke hisaab se spray karein, danywad
Posted by udayraj tiwari
Uttar Pradesh
23-12-2019 03:13 PM
साहीवाल नसल की गाय देसी गाय होती है जिसका दूध भी अच्छा होता है और उसके दूध में फैट भी ज्यादा होती है इसके इलावा उसे बीमारियां भी कम लगती हैं आप इस एप में पशुपालन वाले सेक्शन में जाकर साहीवाल गाय के बारे में पढ़ सकते है

Posted by omkar
Maharashtra
23-12-2019 03:01 PM
कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप ट्रैक्टर के बारे में क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके।

Posted by harpeet
Punjab
23-12-2019 03:00 PM
Shri maan g kanak lyi hun tuc NPK19:19:19@1kg ate magnese@1kg mila ke spray kr skde ho.....
Posted by Ravinder Kumar
Punjab
23-12-2019 02:55 PM
ਰਵਿੰਦਰ ਕੁਮਾਰ ਜੀ ਤੁਸੀ ਇਸ ਨੂੰ ਨਜ਼ਦੀਕੀ ਡਾਕਟਰ ਤੋਂ ਚੈੱਕ ਕਰਵਾਓ ਜੀ ਕਿਉਕਿ ਇਸਦੀ ਜਾਂਚ ਕਰਕੇ ਹੀ ਇਸਦਾ ਸਹੀ ਇਲਾਜ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਸਹੀ ਬਿਮਾਰੀ ਦਾ ਪਤਾ ਲਗਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ
Posted by ਸੁਖਚੈਨ िਸੰਘ
Punjab
23-12-2019 02:49 PM
ਸੁਖਚੈਨ ਜੀ, ਜੇਕਰ ਬਾਰਿਸ਼ ਹੋ ਗਈ ਹੈ ਤਾਂ ਕਣਕ ਨੂੰ ਪਹਿਲਾ ਪਾਣੀ ਲਾਉਣ ਦੀ ਲੋੜ ਨਹੀਂ ਹੈ ਤੁਸੀਂ ਇਸ ਨੂੰ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 40 ਤੋਂ 45 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਹੀ ਪਾਣੀ ਲਗਾਓ, ਜੋ ਕੇ ਦੂਸਰੀ ਸਿੰਚਾਈ ਦਾ ਸਮਾਂ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਧੰਨਵਾਦ

Posted by Gurvinder Singh
Punjab
23-12-2019 02:46 PM
Gurvinder ji tuci ohna nu 1 mahine tak puri trah rajj ke maa da dudh pilao fir uss nu holi holi pani pilana suru kr skde ho..

Posted by vijay gujjar
Rajasthan
23-12-2019 02:40 PM
विजय जी अब आप पशुओं के लिए ज्वी की बिजाई कर सकते है

Posted by brajmohan singh dangi
Madhya Pradesh
23-12-2019 02:37 PM
गुलाब के लिए बिजाई का सही समय मध्य अक्तूबर है रोपाई के बाद पौधे को छांव में रखें और अगर बहुत ज्यादा धुप हो, तो पौधे पर पानी का छिड़काव करें दोपहर के अंत वाले समय बोया गया गुलाब बढ़िया उगता है बैड पर 30 सैं.मी. व्यास और 30 सैं.मी. गहरे गड्ढे खोद कर 75 सैं.मी. के फासले पर पौधों की बिजाई करें दो पौधों के बीच में फासला गुला.... (Read More)
गुलाब के लिए बिजाई का सही समय मध्य अक्तूबर है रोपाई के बाद पौधे को छांव में रखें और अगर बहुत ज्यादा धुप हो, तो पौधे पर पानी का छिड़काव करें दोपहर के अंत वाले समय बोया गया गुलाब बढ़िया उगता है बैड पर 30 सैं.मी. व्यास और 30 सैं.मी. गहरे गड्ढे खोद कर 75 सैं.मी. के फासले पर पौधों की बिजाई करें दो पौधों के बीच में फासला गुलाब की किस्म पर निर्भर करता है गेंदे की खेती करना चाहते है से मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है पर यह अच्छे जल निकास वाली उपजाऊ मिट्टी में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है मिट्टी अच्छे निकास वाली होनी चाहिए क्योंकि यह फसल जल जमाव वाली मिट्टी में स्थिर नहीं रह सकती मिट्टी की pH 6.5 से 7.5 होनी चाहिए तेजाबी और खारी मिट्टी इसकी खेती के लिए अनुकूल नहीं है फ्रैंच गेंदे की किस्म हल्की मिट्टी में अच्छी वृद्धि करती है जबकि अफ्रीकी गेंदे की किस्म उच्च जैविक खाद वाली मिट्टी में अच्छी वृद्धि करती है प्रसिद्ध किस्में :- African Marigold: इस किस्म की फसल 90 सैं.मी. तक लम्बी होती है इसके फूल बड़े आकार के और लैमन, पीले, सुनहरे, संतरी और गहरे पीले रंग के होते हैं यह लम्बे समय की किस्म है इसकी अन्य किस्में जैसे Giant Double African Orange, Crown of Gold, Giant Double African Yellow, Chrysanthemum Charm, Golden Age, Cracker Jack आदि हैं French Marigold: यह छोटे कद की जल्दी पकने वाली किस्में हैं इसके फूल छोटे आकार के और पीले, संतरी, सुनहरे पीले, लाल जंग और महोगनी रंग के होते हैं इसकी अन्य किस्में जैसे Rusty Red, Butter Scotch, Red Borcade, Star of India, Lemon drop आदि हैं Pusa Basanti Gainda: यह लम्बे समय की किस्म है इसका पौधा 58.80 सैं.मी. लम्बा और गहरे हरे रंग के पत्ते होते हैं इसके फूल सल्फर पीले, दोहरे और कारनेशन किस्म के होते हैं Pusa Narangi Gainda: फूल निकलने के लिए 125-136 दिनों की आवश्यकता होती है इसका पौधा लम्बा और कद में 73.30 सैं.मी. का होता है और पत्ते गहरे हरे रंग के होते हैं इसके फूल संतरी रंग के और कारनेशन किस्म के होते हैं फूल घने और दोहरी परत वाले होते हैं इसके ताजे फूलों की पैदावार 140 क्विंटल प्रति एकड़ होती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ाने के लिए आखिरी जोताई के समय 250 क्विंटल रूड़ी की खाद और अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर मिट्टी में मिलायें गेंदे की बिजाई एक वर्ष में कभी भी की जा सकती है बारिश के मौसम में इसकी बिजाई मध्य जून से मध्य जुलाई में करें सर्दियों में इसकी बिजाई मध्य सितंबर से मध्य अक्तूबर में पूरी कर लें नर्सरी बैड 3x1 मीटर आकार के तैयार करें गाय का गला हुआ गोबर मिलायें बैडों में नमी बनाए रखने के लिए पानी दें सूखे फूलों का चूरा करें और उनका कतार या बैड पर छिड़काव करें जब पौधों का कद 10-15 सैं.मी. हो जाये, तब वे रोपाई के लिए तैयार होते हैं फैंच किस्म को 35x35 सैं.मी. और अफ्रीकी किस्म को 45x45 सैं.मी. के फासले पर रोपाई करें नर्सरी बैड पर बीजों का छिड़काव करें बिजाई के लिए पनीरी ढंग का प्रयोग किया जाता है एक एकड़ खेत के लिए 600 से 800 ग्राम बीजों की आवश्यकता होती है जब फसल 30-45 दिन की हो जाए, तब पौधे के सिरे से उसे काट दें इससे पौधे को झाड़ीदार और घना होने में मदद मिलती है, इससे फूलों की गुणवत्ता और अच्छा आकार भी प्राप्त होता है बिजाई से पहले बीजों को एजोसपीरियम 200 ग्राम को 50 मि.ली. धान के चूरे में मिलाकर उपचार करें शुरूआती खुराक के तौर पर अच्छी वृद्धि के लिए नाइट्रोजन 32 किलो (यूरिया 70 किलो), फासफोरस 16 किलो (एस एस पी 100 किलो), पोटाश 32 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 53 किलो) प्रति एकड़ में डालें मिट्टी की किस्म के अनुसार खाद की खुराक बदल दें सही खुराक देने के लिए मिट्टी की जांच करवायें और उसके आधार पर खुराक दें नदीनों की संख्या के आधार पर गोडाई करें खेत में रोपाई के बाद तुरंत सिंचाई करें कली बनने से लेकर कटाई तक की अवस्था सिंचाई के लिए बहुत महत्तवपूर्ण होती है अप्रैल से जून के महीने में 4-5 दिनों के अंतराल पर लगातार सिंचाई करना आवश्यक होता है किस्म के आधार पर गेंदा 2 से 2.5 महीने में कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं फ्रैंच गेंदे की किस्म 1.5 महीने में कटाई के लिए तैयार हो जाती है जबकि अफ्रीकी गेंदे की किस्म दो महीने में तैयार हो जाती है जब गेंदे का पूरा आकार विकसित हो जाये तब उसे तोड़ लें कटाई सुबह के समय और शाम के समय करें फूलों की तुड़ाई से पहले खेत को सिंचित करना चाहिए इससे फूलों की गुणवत्ता लंबे समय तक बनी रहती है इसे आप अपनी नजदीकी फूल मंडी में बेच कर इसे अपनी आय का साधन बना सकते है इसका बीज आप कृषि यूनिवर्सिटी से ले सकते है या नजदीकी नर्सरी से ले सकते है जा फिर गेंदे और गुलाब के बीज लेने के लिए आप Dr N.K Saxena 9811315738 से सम्पर्क करे धन्यवाद
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