
Posted by Roop Lal
Punjab
25-12-2019 02:47 PM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद

Posted by Parminder Singh
Punjab
25-12-2019 02:43 PM
ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ Duraprogen injection 750mg ਲਗਵਾਓ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ Uterogen ਹੋਮਿਓਪੈਥਿਕ ਦਵਾਈ 5 ਮਿਲੀ ਦਿਨ ਵਿੱਚ 3 ਵਾਰ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ.
Posted by vakil singh
Punjab
25-12-2019 02:42 PM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਕਣਕ ਵਿੱਚ ਸੁੰਡੀ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਦੇ ਲਈ QUINALPHOS@800 ml ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਸਪਰੇਅ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ
Posted by kalwinder sekhon
Punjab
25-12-2019 02:41 PM
ਕੁਲਵਿੰਦਰ ਜੀ ਤੁਸੀ ਬੱਕਰੀਆਂ ਵਿਚ ਡੇਵਰਮਿੰਗ ਪੂਰੇ ਟਾਇਮ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਕਰੋ ਜਿਵੇਂ ਜਨਮ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਪਹਿਲੀ ਵਾਰ ਦਵਾਈ 7-10 ਦਿਨ ਬਾਦ ਦਿਓ ਫਿਰ 21 ਦਿਨ ਬਾਦ ਦੁਬਾਰਾ ਸਾਲਟ ਬਦਲ ਕੇ ਡੇਵਰਮਿੰਗ ਕਰੋ ਅਤੇ ਫਿਰ 1 ਮਹੀਨੇ ਬਾਦ ਸਾਲਟ ਬਦਲ ਕੇ ਡੇਵਰਮਿੰਗ ਕਰੋ ਅਤੇ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਦ ਫਿਰ 1 ਮਹੀਨੇ ਦੇ ਫਰਕ ਨਾਲ ਕਰੋ ਅਤੇ ਫਿਰ ਹਰ 3-3 ਮਹੀਨਿਆਂ ਦੇ ਫਰਕ ਨਾਲ ਡੇਵਰਮਿੰਗ ਕਰੋ ਅਤੇ ਹਰ ਵਾਰੇ ਸਾਲਟ ਬਦਲ ਤ.... (Read More)
ਕੁਲਵਿੰਦਰ ਜੀ ਤੁਸੀ ਬੱਕਰੀਆਂ ਵਿਚ ਡੇਵਰਮਿੰਗ ਪੂਰੇ ਟਾਇਮ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਕਰੋ ਜਿਵੇਂ ਜਨਮ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਪਹਿਲੀ ਵਾਰ ਦਵਾਈ 7-10 ਦਿਨ ਬਾਦ ਦਿਓ ਫਿਰ 21 ਦਿਨ ਬਾਦ ਦੁਬਾਰਾ ਸਾਲਟ ਬਦਲ ਕੇ ਡੇਵਰਮਿੰਗ ਕਰੋ ਅਤੇ ਫਿਰ 1 ਮਹੀਨੇ ਬਾਦ ਸਾਲਟ ਬਦਲ ਕੇ ਡੇਵਰਮਿੰਗ ਕਰੋ ਅਤੇ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਦ ਫਿਰ 1 ਮਹੀਨੇ ਦੇ ਫਰਕ ਨਾਲ ਕਰੋ ਅਤੇ ਫਿਰ ਹਰ 3-3 ਮਹੀਨਿਆਂ ਦੇ ਫਰਕ ਨਾਲ ਡੇਵਰਮਿੰਗ ਕਰੋ ਅਤੇ ਹਰ ਵਾਰੇ ਸਾਲਟ ਬਦਲ ਤੇ ਦਿਓ ਜਿਵੇਂ ਪਹਿਲੀ ਵਾਰ Albomar(albendazole)ਦਿਓ ਫਿਰ ਅਗਲੀ ਵਾਰ Fenbendazole ਦਿਓ ਇਸ ਤ੍ਰਾਹ ਹਰ ਵਾਰ ਸਾਲਟ ਬਦਲ ਕੇ ਦਵਾਈ ਦਿਓ ਜੀ ਉਸ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਤੁਸੀ ਇਸਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ .

Posted by Gopal Saw
Jharkhand
25-12-2019 02:38 PM
श्रीमान जी, आलू को कुहासा से बचने के लिए आप पौधे की हलकी सिंचाई कर दें, ऐसा करने से कुहासा से बचाव हो जाता है, धन्यवाद

Posted by Gopal Saw
Jharkhand
25-12-2019 02:35 PM
Shrimaan ji, alu mein kahusa se bachav ke liye iski halki sinchai kar dein, dhanywad

Posted by vipinverma
Uttar Pradesh
25-12-2019 02:30 PM
श्रीमान जी, कृपया आप बताये कि अपने इसमें कौन सी खाद का इस्तेमाल किया है, ताकि आपको इसके बारे में सही जानकारी दी जा सके, धन्यवाद
Posted by ਲਖਵੀਰ ਸਿੰਘ
Punjab
25-12-2019 02:28 PM
मशरुम की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन मशरुम , डीगरी, शटाकी मशरुम , पराली मशरुम , और मिलकी मशरुम. इनमे से कुछ मशरुम सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर मशरुम को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन मशरुम का समय सितंबर से मार्च तक होता है, इससे हम 2 फसले ले सकते है, शटाकी मशरु.... (Read More)
मशरुम की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन मशरुम , डीगरी, शटाकी मशरुम , पराली मशरुम , और मिलकी मशरुम. इनमे से कुछ मशरुम सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर मशरुम को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन मशरुम का समय सितंबर से मार्च तक होता है, इससे हम 2 फसले ले सकते है, शटाकी मशरुम का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं, इससे हम 1 फसल ही ले सकते है, पराली मशरुम का समय अप्रैल से अगस्त तक है, इससे हम 4 फसले ले सकते है, मिलकी मशरुम का समय अप्रैल से सितंबर तक है, आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली मशरुम लगा सकते है, पराली मशरुम के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है, पराली के पूले: धान की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे के साथ बांध कर तैयार किये जाते है. पूले के सिरे काट कर बराबर कर लिए जाते हैं. पूलो की क्यिारी लगाना : पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए भिगो दें, गिले पूलो को ढलान पर रख कर अधिक पानी को निकलने दे, कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये, इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये, जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले. इसके ऊपर की सतह उलट होती है. इस प्रकार 5-5 पूलो की 4 सेट में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार की जाती है. सबसे ऊपर 2 पूलो को खोलकर रख दिए जाते हैं. मशरुम का फुटाव करना : बिजाई से 7-9 दिनो के बाद का फुटाव होने लगता है. पानी और हवा का संचार : बिजाई के 2 दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका किया जाता है. मशरुम के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है. मशरुम की तूडाई : मशरुम का फुटाव के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है. मिलकी मशरुम : मिलकी मशरुम के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे (12×16), सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि चाहिए. तूडी की तैयारी : सूखी तुड़ी को पक्के फर्श पर खिलार कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे, गीली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे. इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें, तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर खिलार कर ठंडा करे. यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है. बिजाई : ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें. एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज डाला जाता है. लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे. केसिंग : बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 के सेट बना दें, केसिंग में रूडी और रेतली मिट्टी (4:1) होती है. 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित की जाती है. मशरुम का फुटाव: केसिंग मिट्टी डालने के लगभग 2 हफतो में मशरुम के छोटे-छोटे कण निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है. मशरुम की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है

Posted by Lakhbeer hamad
Punjab
25-12-2019 02:07 PM
Shrimaan ji, jekar barish nal kanak de pani di poorti ho gai hai, tuc kanak nu pani na lagao, dhanwad
Posted by ਨਰਿੰਦਰਪਾਲ ਸਿੰਘ
Punjab
25-12-2019 02:03 PM
ਨਰਿੰਦਰਪਾਲ ਜੀ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਘਰ ਵਿੱਚ ਰੱਖਣ ਲਈ ਗਾਂ ਲੈਣੀ ਹੈ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਸਾਹੀਵਾਲ ਨਸਲ ਦੀ ਗਾਂ ਰੱਖ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਸ ਨਾਲ ਦਾ ਦੁੱਧ ਵੀ ਵਧਿਆ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸਦੇ ਦੁੱਧ ਵਿੱਚ ਫੈਟ ਵੀ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਨਸਲ ਨੂੰ ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਵੀ ਘੱਟ ਲਗਦੀਆਂ ਹੈ.
Posted by mahipal singh jaat
Rajasthan
25-12-2019 01:54 PM
Mahipal singh jaat ji aveesan sheep lene ke lia aap Dr P Mina 7597104404 (ICAR-Central Sheep and Wool Research Institute) se samparak kar sakte hai, Thankyou.
Posted by mahipal singh jaat
Rajasthan
25-12-2019 01:48 PM
Mahipal singh jaat ji Aveeshan sheep lene ke lia aap Dr P Mina 7597104404 ICAR-Central Sheep and Wool Research Institute se samparak kar sakte hai, Thankyou.

Posted by ਰਜਿੰਦਰ ਉੱਪਲ
Punjab
25-12-2019 01:43 PM
Apne Block mein pta Kar Sakte hai, Ya nearby Agriculture Department se details mil Sakti hai. Ya fir Krishi Vigyaan Kendra mein jaakar Jankaari le sakte hai.

Posted by Kulwant Singh
Punjab
25-12-2019 01:43 PM
Kulwant ji iss semen vare sahi jankari ate isde dudh de record vare uss ton ptaa lgg skda hai jis ton ehh semen bhrwaya gya hai, ohna kol ehna de purri detail hundi hai.

Posted by Ramswroop Suthar
Rajasthan
25-12-2019 01:37 PM
श्री मान अपना सवाल विस्तार से पूछें तो आपको पूरी जानकारी दी जा सके

Posted by PRITPAL SINGH
Punjab
25-12-2019 01:33 PM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਖੁੰਬਾਂ ਦੀ ਖੇਤੀ ਦੀ ਟਰੇਨਿੰਗ ਲੈਣ ਲਈ ਆਪਣੇ ਨੇੜੇ ਦੇ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਕੇਂਦਰ ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ
Posted by navkiran singh
Punjab
25-12-2019 01:20 PM
ਤੁਸੀ ਓਹਨਾ ਦੇ ਸ਼ੈੱਡ ਨੂੰ ਪੂਰੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਕਵਰ ਕਰਕੇ ਰੱਖੋ ਜਿਸ ਨਾਲ ਠੰਡੀ ਹਵਾ ਸ਼ੈੱਡ ਵਿਚ ਨਾ ਆ ਸਕੇ ਅਤੇ ਓਹਨਾ ਦੇ ਸ਼ੈੱਡ ਵਿਚ ਲਾਈਟ ਸਵੇਰੇ ਜਲਦੀ ਜਗਾਓ ਅਤੇ ਰਾਤ ਨੂੰ ਵੀ ਦੇਰ ਨਾਲ ਬੰਦ ਕਰੋ, ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ ਨੇੜੇ ਦੇ ਪਸ਼ੂਆਂ ਵਾਲੇ ਮੈਡੀਕਲ ਸਟੋਰ ਤੋਂ EGG FORMULA ਨਾਮ ਦਾ ਪਾਊਡਰ ਲਿਆ ਕੇ ਫੀਡ ਦੇ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਦਿਓ, ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ B-complex liquid ਦਿਓ , ਇਸ ਨੂੰ 20ml ਪ੍ਰਤੀ 100 ਮੁਰਗੀਆਂ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ .... (Read More)
ਤੁਸੀ ਓਹਨਾ ਦੇ ਸ਼ੈੱਡ ਨੂੰ ਪੂਰੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਕਵਰ ਕਰਕੇ ਰੱਖੋ ਜਿਸ ਨਾਲ ਠੰਡੀ ਹਵਾ ਸ਼ੈੱਡ ਵਿਚ ਨਾ ਆ ਸਕੇ ਅਤੇ ਓਹਨਾ ਦੇ ਸ਼ੈੱਡ ਵਿਚ ਲਾਈਟ ਸਵੇਰੇ ਜਲਦੀ ਜਗਾਓ ਅਤੇ ਰਾਤ ਨੂੰ ਵੀ ਦੇਰ ਨਾਲ ਬੰਦ ਕਰੋ, ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ ਨੇੜੇ ਦੇ ਪਸ਼ੂਆਂ ਵਾਲੇ ਮੈਡੀਕਲ ਸਟੋਰ ਤੋਂ EGG FORMULA ਨਾਮ ਦਾ ਪਾਊਡਰ ਲਿਆ ਕੇ ਫੀਡ ਦੇ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਦਿਓ, ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ B-complex liquid ਦਿਓ , ਇਸ ਨੂੰ 20ml ਪ੍ਰਤੀ 100 ਮੁਰਗੀਆਂ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਦਿਓ..

Posted by RAM NARESH
Bihar
25-12-2019 01:18 PM
श्रीमान जी, इसकी खेती बिहार में की जा सकती है, इसे को कई किस्म के मिट्टी उगाया जा सकता हैं मृदा की प्रतिक्रिया, मिट्टी की उर्वरता, जल निकासी,मुफ्त चूने और नमक सांद्रता जैसे मृदा गुण आदि कुछ महत्वपूर्ण कारक हैं जो कि नींबू वृक्षारोपण की सफलता का निर्धारण करते हैं अच्छी जल निकासी के साथ हल्की मिट्टी पर नींबू .... (Read More)
श्रीमान जी, इसकी खेती बिहार में की जा सकती है, इसे को कई किस्म के मिट्टी उगाया जा सकता हैं मृदा की प्रतिक्रिया, मिट्टी की उर्वरता, जल निकासी,मुफ्त चूने और नमक सांद्रता जैसे मृदा गुण आदि कुछ महत्वपूर्ण कारक हैं जो कि नींबू वृक्षारोपण की सफलता का निर्धारण करते हैं अच्छी जल निकासी के साथ हल्की मिट्टी पर नींबू फल अच्छी तरह से फूलते हैं पीएच श्रेणी 5.5 से 7.5 के बीच मिट्टी को नींबू के फसल के लिए अच्छा माना जाता है हालांकि, नींबू की पैदावार 4 से 9 की पीएच श्रेणी में भी अच्छी हो सकती हैं भूमि को व्यापक रूप से जोता जाना आवश्यक है गहन जुताई के बाद खेतों को समतल किया जाना चाहिए. पहाड़ी क्षेत्रों में ढलानों के साथ की जगहों में नींबू का रोपण किया जाता है ऐसी भूमि में उच्च घनत्व रोपण संभव है क्योंकि समतल जगह की तुलना में पहाड़ी ढलान पर ज्यादा कृषि उपयोग हेतु जगह उपलब्ध रहती है lरोपण का सबसे अच्छा मौसम जून से अगस्त तक है रोपाई के लिए 60 सेमी x 60 सेमी x 60 सेमी के आकार के गड्ढे खोदे जा सकते हैं 10 किलोग्राम एफवायएम और 500 ग्राम सुपरफॉस्फेट को प्रति गड्ढे पर लगाया जा सकता है अच्छी सिंचाई प्रणाली के साथ रोपण अन्य महीनों में भी किया जा सकता है नींबू की सर्दियों और गर्मियों के दौरान पहले साल में की गयी सिचाई नींबू के पौधों के लिए जीवन रक्षक साबित होती है और पौधों को बचाने में आवश्यक भूमिका अदा करती है सिंचाई से पौधों में वृद्धि के साथ ही फलों के आकार पर भी सकारात्मक असर होता है. सिंचाई कम होने की सूरत में नींबू के फसल पर नकारात्मक असर पड़ता है और कई बीमारियाँ भी पौधों को लग सकती है. धन्यवाद

Posted by kamal kag
Madhya Pradesh
25-12-2019 01:01 PM
श्रीमान जी, यह फंगस का हमला हुआ है , इसकी रोकथाम के लिए आप carbendazim @ 4 gm या mancozeb @ 4 gm प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें, धन्यवाद
Posted by PRADEEP
Rajasthan
25-12-2019 01:00 PM
श्रीमान जी, कृपया आप इसमें कीट के हमले की जांच करें यदि हमला मौजूद हो तो आप उसकी फोटो भेजें, ताकि देख कर आपको इसका हल बताया जा सके, धन्यवाद
Posted by रामलाल कुर्मी
Madhya Pradesh
25-12-2019 12:41 PM
श्रीमान जी, तस्वीर को देख कर यह अनुमान लगाया जा सकता है कि इसमें कोई रोग नहीं है, धन्यवाद

Posted by vicky
Haryana
25-12-2019 12:34 PM
ਹਲਦੀ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਅਪ੍ਰੈਲ ਤੋਂ ਮਈ ਤੱਕ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈहल्दी की बिजाई अप्रैल से मई तक की जा सकती है
Posted by Devendra Singh
Uttar Pradesh
25-12-2019 12:26 PM
श्रीमान जी, मिटटी की जाँच आप अपने नजदीकी Krishi Vigyan Kendra, Virendra Nagar, Dhaura, Distt.- Unnao (U.P.) INDIA, PIN - 229 881, Tel. No.: +91 9452239313, 9452239314 से करवा सकते हैं, मिटटी का नमूना लें लेने के लिए एक एकड़ क्षेत्र में लगभग 8-10 स्थानों से ‘V’ आकार के 6 इंच गहरे गहरे गढ्ढे बनायें एक खेत के सभी स्थानों से प्राप्त मिट्टी को एक साथ मिलाकर ½ किलोग्राम का एक सन्युक्त नमूना बनाय.... (Read More)
श्रीमान जी, मिटटी की जाँच आप अपने नजदीकी Krishi Vigyan Kendra, Virendra Nagar, Dhaura, Distt.- Unnao (U.P.) INDIA, PIN - 229 881, Tel. No.: +91 9452239313, 9452239314 से करवा सकते हैं, मिटटी का नमूना लें लेने के लिए एक एकड़ क्षेत्र में लगभग 8-10 स्थानों से ‘V’ आकार के 6 इंच गहरे गहरे गढ्ढे बनायें एक खेत के सभी स्थानों से प्राप्त मिट्टी को एक साथ मिलाकर ½ किलोग्राम का एक सन्युक्त नमूना बनायें नमूने की मिट्टी से कंकड़, घास इत्यादि अलग करें सूखे हुए नमूने को कपड़े की थैली में भरकर कृषक का नाम, पता, खसरा संख्या, मोबाइल नम्बर, आधार संख्या, उगाई जाने वाली फसलों आदि का ब्यौरा दें नमूना प्रयोगशाला को प्रेषित करें अथवा’ ‘परख’ मृदा परीक्षण किट द्वारा स्वयं परीक्षण करें , धन्यवाद

Posted by Ankit Bhandari
Gujarat
25-12-2019 12:24 PM
Shrimaan ji, kripya ap bataye ke apne isko kis vidhi ke saath lagay hai, apne iski beej ke sath bijai ki hai ya kalam se lagaya hai, taki apko iske bare mein jankari di ja sake, dhanywad

Posted by Dhillon Saab
Punjab
25-12-2019 12:22 PM
ਦੁਧਾਰੂ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਰੋਜਾਨਾ ਕੈਲਸ਼ੀਅਮ ਦੇਣ ਦੀ ਜਰੂਰਤ ਨਹੀ, ਤੁਸੀ 100- 150 ਮਿਨਰਲ ਮਿਕਸਚਰ ਰੋਜ਼ ਦਿਓ ਜੀ ਇਸ ਦੇ ਵਿੱਚ ਹੀ ਸਭ ਪੂਰਤੀ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ

Posted by gurtej Brar
Rajasthan
25-12-2019 12:22 PM
Shri maan g kripa aap iski photo bhejen toh aapko sahi jankari di ja ske....
Posted by Yash gupta
Uttar Pradesh
25-12-2019 12:20 PM
yash ji kripya swal vistar se pooche ke aap tapbarking kise keh rahe hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad

Posted by SANJEEV KUMAR
Punjab
25-12-2019 12:19 PM
tuci uss nu ajje mineral mixture dena bnnd kr deo ate uss nu pett de kiria lai Fendykind plus bolus deo ate Dozliv liquid 50ml rojana dena suru kro fir 7-8 din badd tuci mineral mixture 20gm rojana dena suru kro ate jiwe jiwe ohh hajam krrn lgee ate mokk naa kre tan tuci holi holi isdi matra vdha ke 50-70gm rojana tak de skde ho..

Posted by Kahlon
Punjab
25-12-2019 12:07 PM
Shrimaan ji, kirpa kar ke gobhi di photo bhejo taki dekh ke tuhnu isde bare sahi jankari diti ja sake, dhanwad

Posted by Hariom Singh
Uttar Pradesh
25-12-2019 12:06 PM
Shrimaan ji, Uttar Pradesh mein ganne ki Co 0118, Co 0232, Co 0237, Co 0238, Co 0239, CoSe 01421, Co 05009, CoPK 05191, Co 89029, CoLk 94184 aur CoS 95255 kismein lgana upyukt hain. dhanywad

Posted by baljit Singh
Punjab
25-12-2019 11:54 AM
Shrimaan ji, january vich tuc hybrid makka di bijai kar sakde ho, isto ilawa tuc sabjiya jive ke chappan kadu, shimla mirch, bangan, muli, di kheti kar sakde ho, tuc rajma di kheti vi kar sakde ho ate medicinal poshe jive ke kalihari, pudhina, di kheti kar sakde ho, dhanwad

Posted by ਪਰਵਿੰਦਰ ਸਿੰਘ
Punjab
25-12-2019 11:51 AM
Parwinder ji ehna di sahi janch krke he bimari da pta lgg skda hai tuci apne nazdiki doctor ton ehna di janch krwao jiss nal sahi bimari da ptaa lgg skee fir ehna da sahi ilagg ho skda hai.

Posted by Billu Tanwar
Haryana
25-12-2019 11:38 AM
Billu Tanwar ji pigs lene ke lia aap mere se Sukhwinder Singh Grewal 9915632577 par samparak kar sakte hai, Thankyou.

Posted by Dhillon Saab
Punjab
25-12-2019 11:37 AM
Iss nal pashu nu vitamin, minerals milde hai jiss nal dudh vich fyada hunda hai ate sarir di kami purri hundi hai iss nal pashu jldi nawe dudh ho jnda hai ate sarir da sahi vikas hunda rehnda hai..
Posted by Shubham Kumar
Bihar
25-12-2019 11:29 AM
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकत हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्च.... (Read More)
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकत हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्चे देना आम बात है बकरियां 8-10 वर्ष तक बच्चे देती हैं और अपन गिनती को तेजी से बढ़ा लेती हैं आप बारबरी, ब्लैक बंगाल, जैसी नसल पाल सकते हैं इसकी ट्रेनिेंग के लिए आप अपने कुषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करे या फिर जो बकरी पालन का व्यवसाय कर रहा कोई किसान उसका फार्म स्वंय जाकर देखकर आयें तो और भी बारीकियों का पता चल जायेगा, आप ब्लैक बंगाल, बीटल, सिरोही, जमुनापरी, बरबरी नस्ल रख सकते हैं.

Posted by Ajit singh
Haryana
25-12-2019 11:27 AM
Shrimaan ji, yeh tatvo ki kami ke karan ho raha hai, kripya ap bataye ke apne isme konse khaad ka istemal kiya hai taki apko iske bare mei sahi jankari di ja sake, dhanywad
Posted by anand
Uttar Pradesh
25-12-2019 11:21 AM
श्रीमान जी, अगर यह कीटनाशक की जयादा मात्रा को डालने की वजह से हुआ है, तो इसका असर गेहूं की फसल में दिकहि दे गए, आप इसमें सिफर्श की गई खाद का इस्तेमाल करें, धन्यवाद

Posted by Harsh Deep Singh
Punjab
25-12-2019 11:21 AM
sir aa mirchi de boote lgaya nu mahina ho geya ji growth ni ho rhi dso ji ki karan aa and ki kriye ?
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਮਿਰਚ ਦੀ ਗਰੋਥ ਲਈ NPK 19:19:19@1kg 150ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਨਾਲ ਸਪਰੇਅ ਕਰ ਸਕਦੇ
Posted by Dashrath Singh
Rajasthan
25-12-2019 11:11 AM
Shrimaan ji, yeh tatvo ki kami hai, isme ap vermicompost @ 4-5 kg ke hisaab se dalein, dhanywad

Posted by Laxmi yadav
Uttar Pradesh
25-12-2019 11:10 AM
श्री मान खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते ह.... (Read More)
श्री मान खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुमब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तहय उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तहय में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तहय लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है

Posted by Rajesh mishra
Uttar Pradesh
25-12-2019 11:08 AM
श्रीमान जी, आप इसमें carbendazim @ 4 gm या mancozeb @ 4 gm प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें, धन्यवाद
Posted by sunil
Uttar Pradesh
25-12-2019 11:00 AM
सुनील जी मुर्गियों के रहने की जगह उनकी आयु और ग्रोथ के हिसाब से होती है जैसे यदि पहले सप्ताह के चूज़े है तो आप 1 वर्ग फीट जगह में 4 बच्चे रख सकते है, दूसरे सप्ताह में आप 1 वर्ग फीट जगह में 3 बच्चे, तीसरे सप्ताह में 1 वर्ग फीट जगह में 2 बच्चे और चौथे सप्ताह में 1 वर्ग फीट जगह में 1 बच्चा रख सकते है फिर उसके बाद 1.25 फीट में 1 ब.... (Read More)
सुनील जी मुर्गियों के रहने की जगह उनकी आयु और ग्रोथ के हिसाब से होती है जैसे यदि पहले सप्ताह के चूज़े है तो आप 1 वर्ग फीट जगह में 4 बच्चे रख सकते है, दूसरे सप्ताह में आप 1 वर्ग फीट जगह में 3 बच्चे, तीसरे सप्ताह में 1 वर्ग फीट जगह में 2 बच्चे और चौथे सप्ताह में 1 वर्ग फीट जगह में 1 बच्चा रख सकते है फिर उसके बाद 1.25 फीट में 1 बच्चा और 1.5—2 फीट जगह में अच्छी ग्रोथ वाला बच्चा रख सकते है इस तरह आप अपनी जगह के हिसाब से और चूज़ों की ग्रोथ के हिसाब से इन्हें रख सकते है

Posted by Kirshan Siwach
Haryana
25-12-2019 10:51 AM
Krishan ji aap kadaknath chicks lene ke liye Gurwinder Cheema 9896071871, 9215700000 King Kadaknath se sampark kr skte hai, inse apko kadaknath ke chicks mill jayege.
Posted by sunil
Uttar Pradesh
25-12-2019 10:46 AM
Sunil ji yaddi aap desi chicks rakhna chahte hai to aap ASEEL, PUNJAB WHITE BATTER, KADAKNATH, SATLUJ nasal rakh skte hai.
Posted by amritpal Singh
Punjab
25-12-2019 10:45 AM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਇਹ ਕੀਟ ਦਾ ਹਮਲਾ ਹੋਇਆ ਹੈ, ਇਸਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਤੁਸੀ quinalphos @ 4 ml ਪ੍ਰਤੀ ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Amrik singh
Punjab
25-12-2019 10:37 AM
यह कई तरह की मिट्टी में उगाई जाती है इसकी पैदावार के लिए नमकीन, क्षारीय और पानी खड़ा होने वाली मिट्टी से बचाव करें यह बढ़िया निकास वाली मिट्टी जिसमे बढ़िया जैविक तत्व मौजूद हों, में बढ़िया परिणाम देती है इसके बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 5.5-7 होना चाहिए Drudriha Tulsi: यह मुख्य रूप से बंगाल, नेपाल, चटगांव और महाराष्ट्र क्ष.... (Read More)
यह कई तरह की मिट्टी में उगाई जाती है इसकी पैदावार के लिए नमकीन, क्षारीय और पानी खड़ा होने वाली मिट्टी से बचाव करें यह बढ़िया निकास वाली मिट्टी जिसमे बढ़िया जैविक तत्व मौजूद हों, में बढ़िया परिणाम देती है इसके बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 5.5-7 होना चाहिए Drudriha Tulsi: यह मुख्य रूप से बंगाल, नेपाल, चटगांव और महाराष्ट्र क्षेत्रों में पाई जाती है यह गले को सूखेपन से राहत देता है यह हाथों, पैरों और गठिया की सूजन से आराम देता है Ram/Kali Tulsi (Ocimum canum): यह चीन, ब्राज़ील, पूर्व नेपाल और साथ ही बंगाल, बिहार, चटगांव और भारत के दक्षिणी क्षेत्रों में पाई जाती है इसका तना जामुनी और पत्ते हरे रंग के और बहुत ज्यादा सुगंधित होते है इसमें उचित मात्रा में औषधीय गुण जैसे ऐज़ाडिरैकटिन, ऐंटीफंगल , ऐंटीबैक्टीरियल, और पाचन तंत्र को ठीक रखती है यह गर्म क्षेत्रों में बढ़िया उगता है Babi Tulsi: यह पंजाब से त्रिवेंद्रम, बंगाल और बिहार में भी पाई जाती है इसका पौधा 1-2 फीट लम्बा होता है पत्ते 1-2 इंच लम्बे, अंडाकार और नुकीले होते है इसके पत्तों का स्वाद लौंग की तरह और सब्जियों में स्वाद के लिए प्रयोग किया जाता है तुलसी की खेती के लिए, अच्छी तरह से शुष्क मिट्टी की मांग की जाती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक हैरो के साथ खेत की जोताई करें, फिर रूड़ी की खाद मिट्टी में मिलाएं तुलसी की रोपाई सीड बैड पर करें फरवरी के तीसरे महीने में नर्सरी बैड तैयार करें पौधे के विकास के अनुसार, 4.5 x 1.0 x 0.2 मीटर के सीड बैड तैयार करें बीजों को 60x60 सैं.मी. के फैसले पर बोयें बीजों को 2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई के 6-7 हफ्ते बाद, फसल की रोपाई खेत में करें तुलसी की खेती के लिए 120 ग्राम बीजों का प्रयोग प्रति एकड़ में करें फसल को मिट्टी से पैदा होने वाली बीमारीयों से रोकथाम के लिए, बिजाई से पहले मैनकोजेब 5 ग्राम प्रति किलोग्राम से बीजों का उपचार करें फसल की बढ़िया पैदावार के लिए बिजाई से पहले 15 टन रूड़ी की खाद मिट्टी में डालें तुलसी के बीजों को तैयार बैडों के साथ उचित अंतराल पर बोयें मानसून आने के 8 हफ्ते पहले बीजों को बैड पर बोयें बीजों को 2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई के बाद, रूड़ी की खाद और मिट्टी की पतली परत बीजों पर बना दें इसकी सिंचाई फुवारा विधि द्वारा की जाती है रोपाई के 15-20 दिनों के बाद, नए पौधों को तंदरुस्त बनाने के लिए 2% यूरिया का घोल डालें 6 हफ्ते पुराने और 4-5 पत्तों के अंकुरण होने पर अप्रैल के महीने में नए पौधे तैयार होते है तैयार बैडों को रोपाई 24 घंटे पहले पानी लगाएं ताकि पौधों को आसानी से उखाड़ा जा सकें और रोपाई के समय जड़ें मुलायम और सूजी हुई हो खेत की तैयारी के समय, रूड़ी की खाद को मिट्टी में मिलाएं खाद के तौर पर नाइट्रोजन 48 किलो(यूरिया 104 किलो), फासफोरस 24 किलो(सिंगल सुपर फासफेट 150 किलो) और पोटाश 24 किलो(मिउरेट 40 किलो) प्रति एकड़ में डालें नए पौधे लगाने के समय नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफेट पेंटोऑक्साइड की पूरी मात्रा शुरुआती समय में डालें Mn 50 पी पी एम कंसंट्रेशन और Co@100 पी पी एम कंसंट्रेशन सूक्ष्म-तत्व डालें बाकी की बची हुई नाइट्रोजन को 2 हिस्सों में पहली और दूसरी कटाई के बाद डालें खेत को नदीनों से मुक्त करने के लिए कसी की मदद से गोड़ाई करें नदीनों की रोकथाम कम न होने पर यह फसल को नुकसान पहुंचाते है रोपण के एक महीने बाद पहली गोड़ाई और पहली गोड़ाई के चार हफ्ते बाद दूसरी गोड़ाई करें रोपण के दो महीने बाद कसी से अनुकूल गोड़ाई करें गर्मियों में, एक महीने में 3 सिंचाइयां करें और बरसात के मौसम में, सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती एक साल में 12-15 सिंचाइयां करनी चाहिए पहली सिंचाई रोपण के बाद करें और दूसरी सिंचाई नए पौधों के स्थिर होने पर करें 2 सिंचाइयां करनी आवश्यक है और बाकी की सिंचाई मौसम के आधार पर करें इसके मंडीकरण के लिए आप Aushadhiya kheti vikas sansthan 6268536795 से संपर्क कर सकते हैं धन्यवाद
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