
Posted by Shweta Gupta
Uttar Pradesh
02-01-2020 11:16 AM
shweta ji genhu ka rate 1925 rupaye prati quintal chal raha hai.dhanywad

Posted by Hitesh
Rajasthan
02-01-2020 11:14 AM
hitesh ji swal vistar se pooche ke aap konsi fasl ke yello hone ke bare men jankari lena chahte hai taki aapko uske hisab se jankari di ja sake,dhanywad

Posted by rahul
Uttar Pradesh
02-01-2020 11:08 AM
rahul ji kripya aap iski photo bheje taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake,dhanywad

Posted by ashwin
Maharashtra
02-01-2020 10:55 AM
भार पड़ने के इलाज के लिए आप यह तरीका प्रयोग कर सकते हैं, आप 1 किलो सत्यानाशी बीज लें, आधा किलो कमरकस, आधा किलो जोखार लें, यह सब पंसारी से मिल जायेगा, यह सब कुछ आप मिला लें और इसका पाउडर बना सकते हैं और रोज़ाना रात को यह मिश्रण आधा किलो लें और आधा किलो शकर लें और इन्हे भिगोकर रख दें और अगले दिन पशु को दें, इस तरह आप 4 दिन .... (Read More)
भार पड़ने के इलाज के लिए आप यह तरीका प्रयोग कर सकते हैं, आप 1 किलो सत्यानाशी बीज लें, आधा किलो कमरकस, आधा किलो जोखार लें, यह सब पंसारी से मिल जायेगा, यह सब कुछ आप मिला लें और इसका पाउडर बना सकते हैं और रोज़ाना रात को यह मिश्रण आधा किलो लें और आधा किलो शकर लें और इन्हे भिगोकर रख दें और अगले दिन पशु को दें, इस तरह आप 4 दिन लगातार दें, बाकि उसे Lapnil-p पाउडर की 1 पुड़िया को आधा किलो बेसन में मिलाकर देना शुरू करें और Calcimust gel 300ml, तीन दिन लगातार दें उसे रस्सी डालकर रखें और तूड़ी कम डालें, इससे फर्क पड़ जायेगा
Posted by saroj Ranjan Radhey
Bihar
02-01-2020 10:48 AM
saroj ji aap iske p[atton ke neeche machar check karen agar maujood hai to aap iske uper imidacloprid@1.5ml ko prtai litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad

Posted by ashwin
Maharashtra
02-01-2020 10:47 AM
भार पड़ने के इलाज के लिए आप यह तरीका प्रयोग कर सकते हैं, आप 1 किलो सत्यानाशी बीज लें, आधा किलो कमरकस, आधा किलो जोखार लें, यह सब पंसारी से मिल जायेगा, यह सब कुछ आप मिला लें और इसका पाउडर बना सकते हैं और रोज़ाना रात को यह मिश्रण आधा किलो लें और आधा किलो शकर लें और इन्हे भिगोकर रख दें और अगले दिन पशु को दें, इस तरह आप 4 दिन .... (Read More)
भार पड़ने के इलाज के लिए आप यह तरीका प्रयोग कर सकते हैं, आप 1 किलो सत्यानाशी बीज लें, आधा किलो कमरकस, आधा किलो जोखार लें, यह सब पंसारी से मिल जायेगा, यह सब कुछ आप मिला लें और इसका पाउडर बना सकते हैं और रोज़ाना रात को यह मिश्रण आधा किलो लें और आधा किलो शकर लें और इन्हे भिगोकर रख दें और अगले दिन पशु को दें, इस तरह आप 4 दिन लगातार दें, बाकि उसे Lapnil-p पाउडर की 1 पुड़िया को आधा किलो बेसन में मिलाकर देना शुरू करें और Calcimust gel 300ml, तीन दिन लगातार दें उसे रस्सी डालकर रखें और तूड़ी कम डालें, इससे फर्क पड़ जायेगा
Posted by satish
Uttar Pradesh
02-01-2020 10:46 AM
satish ji aap khaare pani ke liye khet men gypsum daal sakte hai.doosra aap khet men hari khaad ki bijai karen jis se mitti ki gunvatta bad jati hai.dhanywad
Posted by RAHUL PAL
Madhya Pradesh
02-01-2020 10:42 AM
Rahul ji kripya aap yeh btayen ki bakri ko kya smasia aa rehi hai tan jo apko sahi jankari di ja skee.
Posted by Nikhil Bhandge
Chattisgarh
02-01-2020 10:42 AM
nikhil ji kripya aap swal vistar se pooche ke aap nimbuke bare men kya jankari lena chahte hai aur konsi kisam ki paidavar ke bare men jankari lena chahte hai.dhanywad
Posted by Nikhil Bhandge
Chattisgarh
02-01-2020 10:37 AM
टमाटर के पौधे लगाने के लिए अच्छी जोताई और समतल मिट्टी की जरूरत होती है मिट्टी को भुरभुरा बनाने के लिए 4-5 बार जोताई करें फिर मिट्टी को समतल करने के लिए सुहागा लगाएं आखिरी बार हल से जोताई करते समय इसमें अच्छी किस्म की रूड़ी की खाद और कार्बोफिउरॉन 4 किलो प्रति एकड़ या नीम केक 8 किलो प्रति एकड़ डालें टमाटर की फसल को .... (Read More)
टमाटर के पौधे लगाने के लिए अच्छी जोताई और समतल मिट्टी की जरूरत होती है मिट्टी को भुरभुरा बनाने के लिए 4-5 बार जोताई करें फिर मिट्टी को समतल करने के लिए सुहागा लगाएं आखिरी बार हल से जोताई करते समय इसमें अच्छी किस्म की रूड़ी की खाद और कार्बोफिउरॉन 4 किलो प्रति एकड़ या नीम केक 8 किलो प्रति एकड़ डालें टमाटर की फसल को बैड बनाकर लगाया जाता है, जिसकी चौड़ाई 80-90 सैं.मी. होती है मिट्टी के अंदरूनी रोगाणुओं, कीड़ों और जीवों को नष्ट करने के लिए मिट्टी को सूरज की किरणों में खुला छोड़ दें पारदर्शी पॉलीथीन की परत भी इस काम के लिए प्रयोग की जा सकती है यह परत सूर्य की किरणों को सोखती है, जिससे मिट्टी का तापमान बढ़ जाता है और यह मिट्टी के अंदरूनी रोगाणुओं को मारने में सहायक होती है टमाटर की पनीरी नवंबर के आखिर में बोयी जाती है और जनवरी के दूसरे पखवाड़े में खेत में लगाई जाती है पतझड़ के समय पनीरी की बिजाई जुलाई-अगस्त में की जाती है और अगस्त-सितंबर में यह खेत में लगा दी जाती है पहाड़ी इलाकों में इसकी बिजाई मार्च-अप्रैल में की जाती है और अप्रैल-मई में यह खेत में लगा दी जाती है किस्म और विकास के ढंग मुताबिक 60x30 सैं.मी. या 75x60 सैं.मी. या 75x75 सैं.मी. का फासला रखें पंजाब में छोटे कद वाली किस्म के लिए 75x30 सैं.मी. का फासला रखें और वर्षा वाले मौसम के लिए 120-150x30 सैं.मी. का फासला रखें

Posted by Rajesh Radadiya
Gujarat
02-01-2020 10:21 AM
Shri maan Dragon fruit ki kheti ke liye Dragon fruit ki kalmei lgayi jati hai ye ped gujrat mei hota hai ek acre mei takriban iski 1600 kalmei lagti hai aur in kalmo ko pehle gamle mei tyar kiya jata hai aur fir april se September tak kabhi bhi field mei lga skte hai aur eik kalam lagbhagg 70 rs ki ati hai. Adhik jaankari ke liye aap niche diye number par baat kr skte hain: vijay kumar -7065414241

Posted by jashandeep sroye
Haryana
02-01-2020 10:12 AM
jashandeep ji kirpa karke daso ke isdi bijai tuc kalm nal kiti hai ja beej nal ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake.dhanwad
Posted by Dhanraj Khakre
Madhya Pradesh
02-01-2020 10:10 AM
Dhanraj ji aap iske uper NPK 191919 @10 gram ko prtai litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by Balwinder Singh
Punjab
02-01-2020 10:09 AM
balwinder ji tuc 2,4 d di matra 250ml nu prati acre de hisab nal vart sakde ho.dhanwad
Posted by Sumant Kumar
Bihar
02-01-2020 10:00 AM
इस खुम्ब को उगाने का उपयुक्त समय अक्तूबर से मार्च तक का है यह 20-30 डिगरी सेल्सियस तापमान के साथ 80-85 प्रतिशत आर्द्रता को सहने योग्य है

Posted by Mahendra Singh Patel
Uttar Pradesh
02-01-2020 09:33 AM
महेंद्र जी कृपया आप इसकी फोटो भेजे ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद

Posted by sandeep sidhu
Haryana
02-01-2020 09:30 AM
sandeep ji tuc kanak nu sulphur pao isdi matra 5 kilo prati acre de hisab nal varto.dhanwad

Posted by naru rathore
Rajasthan
02-01-2020 09:25 AM
इसकी खेती किसी भी प्रकार की मिट्टी में की जा सकती है, लेकिन अच्छी पैदावार और अच्छी उपज के लिए अच्छे निकास वाली, गहरी रेतली दोमट मिट्टी जिसकी पी एच 7-8 हो , उचित रहती है जिस मिट्टी की 2 मीटर नीचे तक सतह सख्त हो, उन मिट्टी में उगाने से परहेज़ करें क्षारीय और नमक वाली मिट्टी भी इसकी खेती के लिए उपयुक्त होती है लेकिन इन.... (Read More)
इसकी खेती किसी भी प्रकार की मिट्टी में की जा सकती है, लेकिन अच्छी पैदावार और अच्छी उपज के लिए अच्छे निकास वाली, गहरी रेतली दोमट मिट्टी जिसकी पी एच 7-8 हो , उचित रहती है जिस मिट्टी की 2 मीटर नीचे तक सतह सख्त हो, उन मिट्टी में उगाने से परहेज़ करें क्षारीय और नमक वाली मिट्टी भी इसकी खेती के लिए उपयुक्त होती है लेकिन इनमें खजूर की कम पैदावार होती है प्रसिद्ध किस्में :-Halawy,Medjool,Khunezi मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की दो से तीन बार जोताई करें मिट्टी के समतल होने के बाद, गर्मियों में 1 मीटर x 1 मीटर x 1 मीटर आकार के खड्ढे खोदें इन खड्ढों को दो सप्ताह के लिए खुला रखें उसके बाद अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर और उपजाऊ मिट्टी से खड्ढों को भरें क्लोरपाइरीफॉस@20 मि.ली. प्रत्येक खड्ढे में डालें मॉनसून में खजूर की खेती के लिए जुलाई-अगस्त का समय उपयुक्त होता है जबकि बसंत के मौसम में फरवरी-मार्च के महीने में रोपाई पूरी कर लें रोपाई के लिए 6मीटर या 8 मीटर के फासले पर 1 मीटर x 1 मीटर x 1 मीटर आकार के खड्ढे खोदें रोपाई के लिए 1 मीटर x 1 मीटर x 1 मीटर आकार के खड्ढे खोदें मुख्य खेत में वानस्पतिक भाग की रोपाई की जाती है जब कतार से कतार और पौधे से पौधे में 6 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है, तब एक एकड़ में 112 नए पौधों का प्रयोग करें, जबकि 8 मीटर x 8 मीटर के फासले पर 63 नए पौधों का प्रयोग प्रति एकड़ में करें खड्ढों में जड़ के भाग की रोपाई से पहले जड़ के आधार को IBA 1000 पी पी एम और क्लोरपाइरीफॉस 5 मि.ली. को प्रति लीटर पानी में दो से पांच मिनट के लिए डुबोकर रखें खजूर का प्रजणन जड़ के भाग की सहायता से किया जाता है मुख्य पौधे से जड़ के भाग या टहनी को लें रोपाई के 4 या 5 साल बाद पौधे के वनस्पतिक भाग प्राप्त होते हैं वनस्पतिक भाग का उचित भार 15-20 किलोग्राम होना चाहिए जड़ के भाग को मुख्य पौधे से अलग करने से छ: महीने या साल पहले अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर, रेत और लकड़ी का बुरादा जड़ के आस-पास डालें अलग करने के समय पुराने पत्तों को निकाल दें और एक अकेला कट लें बीज प्रजनन की तरह ही जड़ के साथ प्रजनन की कुछ सीमाएं होती हैं राजस्थान में प्रजनन उद्देश्य के लिए टिशु कल्चर तकनीकों का प्रयोग किया जाता है टिशू कल्चर से प्राप्त पौधे बहुत महंगे होते हैं लेकिन राजस्थान सरकार ड्रिप किसानों को 75 प्रतिशत सब्सिडी उपलब्ध करवाती है प्रत्येक वर्ष के अगस्त-सितंबर महीने में 40-50 किलो गाय का गला हुआ गोबर प्रति पौधे में डालें खजूर को नाइट्रोजन खाद 500-1500 ग्राम प्रति पौधा बिजाई से पहले और फूल निकलने के समय आवश्यक होती है प्रत्येक वर्ष फासफोरस 500-1000 ग्राम और पोटाश 250-500 ग्राम भी प्रति पौधे में डालें 10 वर्ष के पौधे के लिए अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर 25 किलो, नाइट्रोजन 750 ग्राम, फासफोरस 125 ग्राम और पोटाश 125 ग्राम और सल्फर 50 ग्राम प्रति पौधे में अगस्त-सितंबर के महीने में डालें खेत को साफ और नदीन मुक्त रखें नदीनों की तीव्रता के आधार पर निराई और गोडाई करें नदीनों की रोकथाम के लिए मल्च का प्रयोग करें नई बोयी फसल के लिए तीन महीने तक नियमित सिंचाई की आवश्यकता होती है गर्मियों में सात दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें जबकि सर्दियों में 15 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें फूल निकलने, फल बनने और पकने की अवस्थाओं पर सिंचाई की कमी ना होने दें मिट्टी में पर्याप्त नमी बनाए रखें कम से कम पानी प्रयोग करने के साथ साथ खरपतवार नियंत्रण के लिए मलचिंग एक प्रभावी तरीका है पौधे के आधार पर काली पॉलीथीन की शीट चढ़ाएं रोपाई के चार से पांच साल बाद खजूर का वृक्ष पहली तुड़ाई के लिए तैयार हो जाता है फल की तुड़ाई की तीन अवस्थाएं होती हैं पहली जब फल पकने की अवस्था में होते हैं दूसरी, जब फल ताजे होते हैं तीसरी जब फल नर्म और पके हुए होते हैं और सूखी अवस्था जब फल सूख जाते हैं राजस्थान में चूहड़ा या पिंड खजूर के लिए फलों की तुड़ाई फल पकने की अवस्था में की जाती है मॉनसून का मौसम शुरू होने से पहले तुड़ाई पूरी कर लें
Posted by amit
Uttar Pradesh
02-01-2020 09:18 AM
amit ji kripya aap swal vistar se pooche ke aap kya jankari lena chahte hai kyuki aapke dwara bheji gayi audio upload nahi hui hai.dhanywad
Posted by amit
Uttar Pradesh
02-01-2020 09:17 AM
अमित जी बैंगन की खेती साल में 4 बार होती है, पहली फसल के लिए अक्तूबर में पनीरी बोयें ताकि जो नवंबर तक पनीरी खेत में लगाने के लिए तैयार हो जाये, दूसरी फसल के लिए नवंबर में पनीरी बोयें ताकि जो फरवरी के पहले पखवाड़े तक पनीरी खेत में लगाने के लिए तैयार हो जाये, तीसरी फसल के लिए फरवरी मार्च में पनीरी बोयें ताकि जो अप्.... (Read More)
अमित जी बैंगन की खेती साल में 4 बार होती है, पहली फसल के लिए अक्तूबर में पनीरी बोयें ताकि जो नवंबर तक पनीरी खेत में लगाने के लिए तैयार हो जाये, दूसरी फसल के लिए नवंबर में पनीरी बोयें ताकि जो फरवरी के पहले पखवाड़े तक पनीरी खेत में लगाने के लिए तैयार हो जाये, तीसरी फसल के लिए फरवरी मार्च में पनीरी बोयें ताकि जो अप्रैल के आखिर से पहले ही पनीरी खेत में लगाने के लिए तैयार हो जाये, चौथी फसल के लिए जुलाई में पनीरी बोयें ताकि जो अगस्त तक पनीरी खेत में लगाने के लिए तैयार हो जाये

Posted by rupam deep
Punjab
02-01-2020 09:10 AM
ਉਸ ਨੂੰ ਵਧਿਆ ਫੀਡ ਦੇ ਨਾਲ ਨਾਲ ਵਡੇਮਿਆ ਦੀ ਖਲ 1kg ਅਤੇ ਸਰੋਂ ਦੀ ਖਲ 1kg ਦਿਓ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ Fatmax ਪਾਊਡਰ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ, Gouge powder 50 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ..

Posted by vicku
Himachal Pradesh
02-01-2020 09:07 AM
आप बीटल, सिरोही, बारबरी इनमें से कोई भी नस्ल रख सकते है यदि आप दूध और मीट दोनों कामों के लिए रखना चाहते है तो आप बीटल नस्ल रख सकते है

Posted by Rohit gujjar
Haryana
02-01-2020 08:59 AM
rohit ji aap iske patton ke neeche machar check karen agar maujood hai to aap iske uper imidacloprid @1.5ml ko prati litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by dineshbhusare
Madhya Pradesh
02-01-2020 08:50 AM
dineshbhusare ji kripya aap apna swal vistar se pooche taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake,dhanywad

Posted by Rajaram yadav
Bihar
02-01-2020 08:44 AM
Yadav ji iske liye aap +2 medical ke badd 2 saal ka veterinary ka course kr skte hai yaddi aap kise chij mai speacial bnnna chahte hai tab aap 5 saal ki degree kr skte hai fir aap govt job mai apply kr skte hai.

Posted by Rajaram yadav
Bihar
02-01-2020 08:42 AM
aap apna swal thoda detail puche ji jese ke aapne pashu palan ka konsa couras kiya hai ?
Posted by simmu
Punjab
02-01-2020 08:33 AM
पशुओं पर डालडा घी की मालिश करें और पशुओं के आस पास साफ सफाई रखें और आस-पास चूना कली डालें, पशुओं को 100 ग्राम तारामीरा का तेल रोज़ाना 20 दिन दें और पशुओं के ऊपर TicTac 2ml को 1 लीटर स्प्रे का प्रयोग करें, यह स्प्रे पशुओं के ऊपर और आस पास भी करें
Posted by Hemparkash Meena
Rajasthan
02-01-2020 08:30 AM
hemparkash ji genhu agar peela ho raha hai to aap sulphur@5 kilo prati acre ke hisab se chinta de.dhanywad
Posted by BAHAL
Punjab
02-01-2020 08:28 AM
bahal ji aap organic sabjiyon ko local market me sell kar sakte hai.dhanywad

Posted by Lakhwant Singh Mann
Punjab
02-01-2020 08:20 AM
ਪੰਜਾਬ ਵਿਚ ਗੰਨੇ ਨੂੰ ਬੀਜਣ ਦਾ ਸਮਾਂ ਸਤੰਬਰ ਤੋਂ ਅਕਤੂਬਰ ਅਤੇ ਫਰਵਰੀ ਤੋਂ ਮਾਰਚ ਮਹੀਨਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਗੰਨਾ ਆਮ ਤੌਰ ਤੇ ਪੱਕਣ ਲਈ ਇੱਕ ਸਾਲ ਦਾ ਸਮਾਂ ਲੈਂਦਾ ਹੈ ਉੱਪ-ਊਸ਼ਣ ਕਟਬੰਦੀ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਕਤਾਰਾਂ ਦਾ ਫਾਸਲਾ 60-120 ਸੈ.ਮੀ. ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਗੰਨੇ ਨੂੰ 3-4 ਸੈ.ਮੀ. ਦੀ ਡੂੰਘਾਈ ਤੇ ਬੀਜੋ ਅਤੇ ਇਸ ਨੂੰ ਮਿੱਟੀ ਨਾਲ ਢੱਕ ਦਿਓ ਫ਼ਸਲ ਬੀਜਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚਲੇ ਤੱਤਾਂ ਦੀ ਜਾਂਚ ਕ.... (Read More)
ਪੰਜਾਬ ਵਿਚ ਗੰਨੇ ਨੂੰ ਬੀਜਣ ਦਾ ਸਮਾਂ ਸਤੰਬਰ ਤੋਂ ਅਕਤੂਬਰ ਅਤੇ ਫਰਵਰੀ ਤੋਂ ਮਾਰਚ ਮਹੀਨਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਗੰਨਾ ਆਮ ਤੌਰ ਤੇ ਪੱਕਣ ਲਈ ਇੱਕ ਸਾਲ ਦਾ ਸਮਾਂ ਲੈਂਦਾ ਹੈ ਉੱਪ-ਊਸ਼ਣ ਕਟਬੰਦੀ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਕਤਾਰਾਂ ਦਾ ਫਾਸਲਾ 60-120 ਸੈ.ਮੀ. ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਗੰਨੇ ਨੂੰ 3-4 ਸੈ.ਮੀ. ਦੀ ਡੂੰਘਾਈ ਤੇ ਬੀਜੋ ਅਤੇ ਇਸ ਨੂੰ ਮਿੱਟੀ ਨਾਲ ਢੱਕ ਦਿਓ ਫ਼ਸਲ ਬੀਜਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚਲੇ ਤੱਤਾਂ ਦੀ ਜਾਂਚ ਕਰਵਾਉਣੀ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ, ਤਾਂ ਕਿ ਖਾਦਾਂ ਦੀ ਸਹੀ ਲੋੜ ਨੂੰ ਸਮਝਿਆਂ ਜਾ ਸਕੇ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ 8 ਟਨ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ ਮਿਲਾਓ ਜਾਂ ਵਰਮੀਕੰਪੋਸਟ+ਰੈਲੀਗੋਲਡ 8-10 ਕਿਲੋ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਜਾਂ ਜੀਵਾਣੂ ਖਾਦ(PSB) 5-10 ਕਿਲੋ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰੋ
ਬਿਜਾਈ ਦੇ ਸਮੇਂ 66 ਕਿਲੋ ਯੂਰੀਆ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਕਰੋ ਯੂਰੀਆ ਦਾ ਦੂਜਾ ਹਿੱਸਾ 66 ਕਿਲੋ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੂਜੇ ਪਾਣੀ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਪਾਓ ਅਤੇ ਯੂਰੀਆ ਦਾ ਤੀਸਰਾ ਹਿੱਸਾ 66 ਕਿਲੋ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਚੌਥੇ ਪਾਣੀ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਪਾਓ
ਸਰਦੀਆਂ ਦੇ ਮੌਸਮ ਵਿੱਚ ਤਾਪਮਾਨ ਘੱਟ ਹੋਣ ਕਾਰਨ ਫਸਲ ਤੱਤ ਜਿਆਦਾ ਲੈਂਦੀ ਹੈ, ਜਿਸ ਕਾਰਨ ਪੌਦਾ ਪੀਲਾ ਪੈ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ N:P:K 19:19:19 ਦੀ ਸਪਰੇਅ 250 ਗ੍ਰਾਮ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਲਈ ਵਰਤੋ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਪਾਣੀ ਦੀ ਕਮੀ ਹੈ, ਉੱਥੇ ਯੂਰੀਆ+ਪੋਟਾਸ਼ ਦੀ ਵਰਤੋਂ 2.5 ਕਿਲੋ ਨੂੰ 100 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਕਰੋ
Posted by Charanjit Singh Jhajj
Punjab
02-01-2020 08:08 AM
ਚਰਨਜੀਤ ਜੀ, ਤੁਸੀਂ ਦੇਸੀ ਗੁੜ ਤਿਆਰ ਕਰਨ ਲਈ ਨਾਲ ਭੇਜੀ ਵੀਡੀਓ ਦੇ link ਨੂੰ ਦੇਖੋ, https://youtu.be/nSohjn1lyfQ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by R.K. Lodhi
Madhya Pradesh
02-01-2020 08:00 AM
lodhi ji jyada khaad daalne se bhi genhu peela ho jata hai to kosish kare ke khaad sahi matra men hi daale. jyda pani se agar genhu peela ho gya hai to aap usme sulphur@3-5 kilo prati acre chita de.dhanywad

Posted by pankaj
Rajasthan
02-01-2020 07:55 AM
Pankaj ji kripya aap swal vistar se pooche ke aap konsi fasl ke bare men jankari lena chahte hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad

Posted by Navneet Navneet
Uttar Pradesh
02-01-2020 07:48 AM
बैंगन की फसल को साल में 4 बार बोया जाता है तीसरी फसल के लिए फरवरी मार्च में पनीरी बोयें ताकि जो अप्रैल के आखिर से पहले ही पनीरी खेत में लगाने के लिए तैयार हो जाये चौथी फसल के लिए जुलाई में पनीरी बोयें ताकि जो अगस्त तक पनीरी खेत में लगाने के लिए तैयार हो जाये

Posted by Balbir Singh Bhaura
Punjab
02-01-2020 07:47 AM
Balbir ji its a fungus attack to control this do a spray of mancozeb@4 gram per litre water .thank you

Posted by Puspendra Kumar
Uttar Pradesh
02-01-2020 07:46 AM
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी ख.... (Read More)
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुमब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तहय उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तहय में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तहय लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है

Posted by Puspendra Kumar
Uttar Pradesh
02-01-2020 07:45 AM
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी ख.... (Read More)
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुमब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तहय उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तहय में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तहय लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है

Posted by Pavan Kumar
Uttar Pradesh
02-01-2020 07:05 AM
pavan ji do chemical ki ikathi spray na karen.chemical spray karne ke bad iska asar thoda genhu par bhi hota hai iske liye aapko spray karne ki jrurat nahi hai aap doosre pani ke sath urea ki doosri dose daale.dhanywad

Posted by bkkhangura
Punjab
02-01-2020 06:54 AM
bkkhangura ji kirpa karke daso ke barseem te ki smasya aa rahi hai ta jo tuhanu osde hisab nal jankari diti ja sake.dhanwad

Posted by Randhir k Payal
Haryana
02-01-2020 06:17 AM
Randhir ji aapko kisi bhi expert ka contact number nahi diya ja sakta aapka jo bhi swal hai aap use aap par hi pooche aur aapko expert ke dwara hi jwab diya jayega.dhanywad

Posted by naman
Uttar Pradesh
02-01-2020 06:11 AM
Naman ji aap iske liye khaad ke taur par vermicompost ya gobar ki khaad daale iske ilava agar iske uper fungus ka hamla hota hai to aap khatti lassi ka spray karen aur agar keet ka hamla hota hai to aap neem ke tel ki spray karen.dhanywad
Posted by आर्य सुरेन्द्र पँवार
Uttar Pradesh
02-01-2020 06:10 AM
आर्य जी आप गेंहू की अच्छी पैदावार के लिए उपलों के पानी की स्प्रे करें इसके लिए आप 7-8 उपलों को 50 लीटर पानी में भिगो कर 4 से 5 दिन के लिए रखे, 5 दिन बाद जब यह पानी 30 लीटर तक रह जाये तो उसमे आप 90 लीटर पानी मिला कर प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद धन्यवाद
Posted by आर्य सुरेन्द्र पँवार
Uttar Pradesh
02-01-2020 06:03 AM
आर्य सुरेन्द्र पँवार जी इस के बारे में विस्थार में जानकारी के लिए आप Aushadhiya kheti vikas sansthan 6268536795 से सम्पर्क कर सकते है धन्यवाद
Posted by Gurbaj Singh
Punjab
02-01-2020 05:28 AM
BhaaG koi faida ni je swer nu taaran dekho te shaam nu teeka lagwao je shaam nu bole te teeka swer nu luwao jine din taarran disan une din teeka lagwao

Posted by Brij Bihari
Uttar Pradesh
02-01-2020 05:13 AM
भिंडी:- उत्तर में यह वर्षा और बसंत के मौसम में उगाई जाती है, खरीफ के मौसम में इसकी बिजाई जून-जुलाई के महीने और बसंत ऋतु में फरवरी-मार्च के महीने में की जाती है, मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें, जोताई के बाद मिट्टी को समतल करने के लिए सुहागा फेरें आखिरी जोताई के समय गाय का गला हुआ गोबर 40 क्विंटल प्रति .... (Read More)
भिंडी:- उत्तर में यह वर्षा और बसंत के मौसम में उगाई जाती है, खरीफ के मौसम में इसकी बिजाई जून-जुलाई के महीने और बसंत ऋतु में फरवरी-मार्च के महीने में की जाती है, मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें, जोताई के बाद मिट्टी को समतल करने के लिए सुहागा फेरें आखिरी जोताई के समय गाय का गला हुआ गोबर 40 क्विंटल प्रति एकड़ में डालें
प्याज :- नर्सरी तैयार करने के उचित समय मध्य-अक्तूबर से मध्य-नवबंर होता है नए पौधे मध्य-दिसंबर से मध्य-जनवरी तक रोपाई के लिए तैयार हो जाते है रोपाई के लिए 10-15 सैं.मी. कद के पौधे चुनें मिट्टी को भुरभुरा करने के लिए तीन-चार बार गहराई से जोताई करें मिट्टी में जैविक तत्वों की मात्रा बढ़ाने के लिए रूड़ी की खाद डालें फिर खेत को छोटे-छोटे प्लाटों में बांट दें

Posted by lovepreet Singh
Punjab
02-01-2020 02:54 AM
Lovepreet ji ehh hisar walia da murrah nasal da semen hai isda milk record lagbhag 12-14 litre tak hai..

Posted by vineet
Uttar Pradesh
01-01-2020 10:54 PM
विनीत जी आप सब्जियां जैसे राजमा, शिमला मिर्च, मूली, पालक, बैंगन, चप्पन कद्दू की बिजाई कर सकते है धन्यवाद
Posted by Amit Mallick
Jharkhand
01-01-2020 10:30 PM
Amit Mallick ji, azolla ko, ugane ka sahi temperature 25-35* C ka hota hai, isse jayda yan kam mein iski growth sahi nahi hoti hai, dhanywad
Posted by sukhveer singh kang
Punjab
01-01-2020 10:22 PM
Sukhveer singh kang ji is ke bare me visthar me jankari lai tusi mere nal Narpinder Singh Dhaliwal 9417423111 samparak kar sakde ho, Thankyou.

Posted by gurinder singh
Rajasthan
01-01-2020 10:22 PM
फसल के लिए प्रयोग किया जाने वाला खेत नदीनों और पिछली फसल से मुक्त होना चाहिए मिट्टी को नर्म करने के लिए 6 से 7 बार जोताई करें खेत में 4-6 टन प्रति एकड़ रूड़ी की खाद और 10 पैकेट एसपरजिलियम के डालें खेत में 45-50 सैं.मी. के फासले पर खाल और मेंड़ बनाएं इस फसल की बिजाई मध्य अक्तूबर से नवंबर महीने तक की जाती है अधिक पैदावार लेन.... (Read More)
फसल के लिए प्रयोग किया जाने वाला खेत नदीनों और पिछली फसल से मुक्त होना चाहिए मिट्टी को नर्म करने के लिए 6 से 7 बार जोताई करें खेत में 4-6 टन प्रति एकड़ रूड़ी की खाद और 10 पैकेट एसपरजिलियम के डालें खेत में 45-50 सैं.मी. के फासले पर खाल और मेंड़ बनाएं इस फसल की बिजाई मध्य अक्तूबर से नवंबर महीने तक की जाती है अधिक पैदावार लेने के लिए स्त्रोतों का सही प्रयोग और पौधों में सही फासला होना आवश्यक है
1.सर्दियों और बसंत की मक्की के लिए:- 60x20 सैं.मी.
2.स्वीट कॉर्न:- 60x20 सैं.मी.
3.बेबी कॉर्न:- 60x20 सैं.मी. या 60x15 सैं.मी.
4.पॉप कॉर्न:- 50x15 सैं.मी.
5.चारा:- 30x10 सैं.मी.
बीज 3-4 सैं.मी. गहरे बीजने चाहिए स्वीट कॉर्न के लिए बीज की गहराई 2.5 सैं.मी. होनी चाहिए
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