
Posted by Mahipal singh Chouhan
Madhya Pradesh
03-01-2020 06:35 PM
महिपाल जी प्याज में ज्यादातर NPK 191919 का ही स्प्रे किया जाता है zinc और sulphate का इस्तेमाल बहुत कम किया जाता है धन्यवाद
Posted by Rajesh Bishnoi
Haryana
03-01-2020 06:32 PM
राजेश जी अभी आप गेंहू को यूरिया की बची हुई मात्रा डाल दे इससे गेंहू का पीलापन दूर हो जायेगा धन्यवाद

Posted by shivashankar Pandey
Uttar Pradesh
03-01-2020 06:25 PM
प्याज़ एक प्रसिद्ध व्यापक सब्जी वाली प्रजाति है इसकी खेती अलग-अलग किस्म की मिट्टी जैसे की रेतली दोमट, चिकनी, गार और भारी मिट्टी में की जा सकती है यह गहरी दोमट और जलोढ़ मिट्टी, जिसका निकास प्रबंध बढ़िया, नमी को बरकरार रखने की समर्थता, जैविक तत्वों वाली मिट्टी में बढ़िया परिणाम देती है विरली और रेतली मिट्टी इसकी ख.... (Read More)
प्याज़ एक प्रसिद्ध व्यापक सब्जी वाली प्रजाति है इसकी खेती अलग-अलग किस्म की मिट्टी जैसे की रेतली दोमट, चिकनी, गार और भारी मिट्टी में की जा सकती है यह गहरी दोमट और जलोढ़ मिट्टी, जिसका निकास प्रबंध बढ़िया, नमी को बरकरार रखने की समर्थता, जैविक तत्वों वाली मिट्टी में बढ़िया परिणाम देती है विरली और रेतली मिट्टी इसकी खेती के लिए बढ़िया नहीं मानी जाती है, क्योंकि मिट्टी के घटिया जमाव के कारण इसमें गांठों का उत्पादन सही नहीं होता है इसकी खेती के लिए मिट्टी का pH 6-7 होना चाहिए प्रसिद्ध किस्में:-alyanpur Red Round: यह उत्तर प्रदेश की प्रसद्धि किस्म है इसकी गांठे भूरे रंग की और गोलाकार आकार की होती हैं इसके पौधे 150-160 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं इसकी औसतन पैदावार 8-10 टन प्रति एकड़ होती है Bhima Shakti: यह खरीफ के साथ साथ रबी के मौसम में उगाने के लिए उपयुक्त है यह किस्म रोपाई के 130 दिन बाद कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावारा 170 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Arka Kalyan: इसकी गांठे गहरे गुलाबी रंग की होती हैं इसकी औसतन पैदावार 135 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa White Round: इसकी गांठे सफेद, गोल और समतल होती हैं इसकी औसतन पैदावार 120 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa white flat: इसकी गांठे सफेद, चपटी और मध्यम से बड़े आकार की होती हैं यह किस्म डीहाइड्रेशन के लिए उपयुक्त है मिट्टी को भुरभुरा बनाने के लिए तीन-चार बार गहराई से जोताई करें मिट्टी में जैविक तत्वों की मात्रा बढ़ाने के लिए रूड़ी की खाद डालें फिर खेत को छोटे-छोटे प्लाटों में बांट दे नर्सरी तैयार करने के उचित समय मध्य-अक्तूबर से मध्य-नवबंर होता है नए पौधे मध्य-दिसंबर से मध्य-जनवरी तक रोपाई के लिए तैयार हो जाते है रोपाई के लिए 10-15 सैं.मी. कद के पौधे चुनें खरीफ के मौसम में रोपाई के लिए मई से जून का महीना नर्सरी तैयार करने के लिए उपयुक्त होता है बिजाई के 6-8 सप्ताह बाद नए पौधे रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं जुलाई -अगस्त के महीने में रोपण कर दें रोपण के समय, पंक्तियों के बीच 15 सैं.मी. और पौधों के बीच 10 सैं.मी. का फासला रखें नर्सरी में बीज 1-2 सैं.मी. गहराई पर बोयें बिजाई के लिए रोपण विधि का प्रयोग करें एक एकड़ के लिए 2-3 किलो बीज का प्रयोग करें उखेड़ा रोग और कांव-गियारी से बचाव के लिए थीरम 2 ग्राम+बैनोमाइल 50 डब्लयू पी 1 ग्राम प्रति लीटर पानी से प्रति किलो बीजों का उपचार करें रासायनिक उपचार के बाद बायो एजेंट ट्राईकोडर्मा विराइड 2 ग्राम के साथ प्रति किलो बीजों का उपचार करने की सिफारिश की जाती है इस तरह करने से नए पौधे मिट्टी से पैदा होने वाली और अन्य बीमारीयों से बच जाते है बिजाई से 10 दिन पहले 20 टन रूड़ी की खाद डालें नाइट्रोजन 30 किलो(यूरिया 65 किलो), फासफोरस 16 किलो(सिंगल सुपर फासफेट 100 किलो) और पोटाश 16 किलो(मिउरेट ऑफ़ पोटाश 30 किलो) प्रति एकड़ डालें फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा रोपण के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटकर रोपाई के बाद टॉप ड्रेसिंग के तौर पर 30वें और 45वें दिन डालें मिट्टी की किसम और जलवायु के आधार पर सिंचाई की मात्रा और आवर्ती का फैसला करें आमतौर पर, इसे 5-8 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है पहली सिंचाई बिजाई के तुरंत बाद करें और दूसरी सिंचाई रोपाई के तीन दिन बाद करें बाकी की सिंचाई आवश्यकता और मिट्टी में नमी के आधार पर 7-10 दिनों के अंतराल पर करें पुटाई के 10-15 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें अत्याधिक सिंचाई ना करें शुरुआत में नए पौधे धीरे-धीरे बढ़ते है इसलिए नुकसान से बचाव के लिए गोड़ाई की जगह रासायनिक नदीन-नाशक का प्रयोग करें रोकथाम के लिए बिजाई से 72 घंटे में पेंडीमैथालीन(स्टंप) 1 लीटर को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में स्प्रे करें नदीनों के अंकुरण उपरांत बिजाई से 7 दिन बाद आक्सीफ्लोरफैन 425 मि.ली. को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में स्प्रे करें नदीनों की रोकथाम के लिए 2-3 गोड़ाईयों की सिफारिश की जाती है पहली गोड़ाई बिजाई से एक महीने बाद और दूसरी गोड़ाई, पहली से एक महीने बाद करें सही समय पर पुटाई करना बहुत जरूरी है पुटाई का समय किस्म,ऋतु,मंडी रेट आदि पर निर्भर करता है 50% पौधे की पत्तियां नीचे की तरफ गिरना दर्शाता है कि फसल पुटाई के लिए तैयार है फसल की पुटाई हाथों से प्याज़ को उखाड़ कर की जाती है पुटाई के बाद इनको 2-3 दिन के लिए अनावश्यक नमी निकालने के लिए खेत में छोड़ दे धन्यवाद

Posted by kavita mapari
Maharashtra
03-01-2020 06:22 PM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद

Posted by kavita mapari
Maharashtra
03-01-2020 06:20 PM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद

Posted by kavita mapari
Maharashtra
03-01-2020 06:19 PM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by SUNIL KUMAR Yadav Ji Arniya
Rajasthan
03-01-2020 06:11 PM
सुनील जी गेंहू का रेट 2020 में 1925 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से चल रही है धन्यवाद
Posted by Kamal Hassan
Rajasthan
03-01-2020 05:48 PM
कमल जी आप उनके शेड की खिड़कियों पर बोरियों को लगाएं जिससे ठंडी हवा अंदर ना आ सके और मुर्गियों के नीचे हमेशा सूखा रखें और उनके शेड में सुबह लाइट जल्दी जगा दें और रात को देर तक लाइट जगाकर रखें इससे तरह शेड में सही तापमान रहेगा और मुर्गियों का बचाव होगा
Posted by डिलेश्वर चंद्राकर
Chattisgarh
03-01-2020 05:48 PM
डिलेश्वर जी आप सब्जियां जैसे राजमा, शिमला मिर्च, मूली, पालक, बैंगन, चप्पन कद्दू की बिजाई कर सकते है धन्यवाद
Posted by amrit pandher
Punjab
03-01-2020 05:48 PM
ਅੰਮ੍ਰਿਤ ਜੀ ਇਸਦੇ ਉਪਰ ਤੁਹਾਨੂੰ ਕੋਈ ਸਪਰੇ ਕਰਨ ਦੀ ਲੋੜ ਨਹੀਂ ਹੈ ਇਹ ਦਵਾਈ ਅਤੇ ਕੋਰੇ ਦੇ ਅਸਰ ਨਾਲ ਇਸ ਤਰਾਂ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by Hariram Lovewanshi Lovewanshi
Madhya Pradesh
03-01-2020 05:46 PM
Hariram ji, agar apka lehsun pila pad raha hai to aap iske uper NPK 191919 @1 kilo ko 150 litre pani men mila kar spray karen.dhanywad
Posted by vikky kumar
Bihar
03-01-2020 05:44 PM
इसकी पुंग छोड़ने के लिए अप्रैल से अक्तूबर का समय बढ़िया होता है आप उस समय पुंग डाल सकते है
Posted by sachin
Uttar Pradesh
03-01-2020 05:41 PM
पपीते की खेती को मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए प्रसिद्ध किस्में :-Pusa Dwarf: इसके फल मध्यम आकार के और अंडाकार होते हैं यह सूखे को सहनेयोग्.... (Read More)
पपीते की खेती को मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए प्रसिद्ध किस्में :-Pusa Dwarf: इसके फल मध्यम आकार के और अंडाकार होते हैं यह सूखे को सहनेयोग्य किस्म है यह उच्च घनत्व में रोपाई के लिए लाभदायक है Pusa Giant: इस किस्म के पौधे तेज हवा को सहनेयोग्य है यह बड़े फलों का उत्पादन करती है यह पैकिंग के लिए उपयुक्त किस्म है CO 3: इसके फल बड़े आकार के और अंडाकार होते हैं इसे ज्यादा देर तक रखने की गुणवत्ता अच्छी होती है CO 1: यह छोटे कद की किस्म है जिसके फल मध्यम आकार के होते हैं फल गोलाकार, नर्म हरा-पीला छिल्का और संतरी पीले रंग का गुद्दा होता है फल रसदार होता है और इसे ज्यादा देर तक रखने की गुणवत्ता अच्छी होती है Coorg Honey Dew: इसे सीधे तौर पर खाने के लिए और प्रक्रिया के लिए प्रयोग किया जाता है इसके फल आयताकार और गुद्दा मोटा संतरी रंग का होता है Pusa Majesty: इसके फल मध्यम आकार के, गोल होते हैं इन्हें रखने की गुणवत्ता बहुत अच्छी होती है यह किस्म 146 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह किस्म जड़ गलन निमाटोड के प्रतिरोधक किस्म है Pusa Delicious: यह मध्यम लंबी किस्म है इसके फल मध्यम आकार के होते हैं, गुद्दा गहरे संतरी रंग का होता है इस किस्म को कतारों में लगाने के लिए प्रयोग किया जाता है पपीते की खेती के लिए नदीन रहित भूमि का प्रयोग करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें आखिरी जोताई के समय अच्छी तरह से गली हुई रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर मिट्टी में अच्छी तरह मिलाकर डालें सिफारिश किए गए फासलों पर 1 मीटर x 1 मीटर x 1 मीटर आकार के गड्ढे खोदें गड्ढों को मिट्टी और रूड़ी की खाद या गाय के गले हुए गोबर से भरें प्रयोग की गई किस्म के आधार पर प्रत्येक गड्ढे पर 2-4 नए पौधों की रोपाई करें रोपाई के बाद हल्की सिंचाई करें हवा से बचाव के लिए खूंटा लगाएं बीजों को 150 गेज़ की मोटाई वाले, 25 x 10 सैं.मी. के पॉलीथीन बैग में बोयें पानी के उचित निकास के लिए पॉलीथीन बैग के निचले हिस्से में 1 मि.मी. अर्द्धव्यास का छेद करें उसके बाद पॉलीथीन बैग में समान अनुपात में रूड़ी की खाद, मिट्टी और रेत डालें बिजाई से पहले बीजों का उपचार करें रोपाई के लिए 6-7 सप्ताह के पौधों का प्रयोग करें यूरिया 150 ग्राम, फासफोरस 80 ग्राम, पोटाश 100 ग्राम प्रति वृक्ष में प्रति वर्ष डालें खादों को 4 भागों में बांटकर रोपाई के बाद पहले, तीसरे, पांचवे और सातवें महीने में डालें बसंत के मौसम में फरवरी मार्च के महीने में बिजाई करें जबकि मॉनसून के मौसम में बिजाई के लिए जून जुलाई का महीना उपयुक्त होता है और पतझड़ के मौसम में बिजाई अक्तूबर से नवंबर महीने में की जाती है आमतौर पर 1.8 मीटर x 1.8 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है उच्च घनता की रोपाई के लिए 1.5 मीटर x 1.5 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है नर्सरी में बीज को 1 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बीजो की खेत में सीधे बिजाई या मुख्य खेत में नए पौधों की रोपाई की जाती है 100-120 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें मिट्टी की किस्म, जलवायु के हालातों आदि के आधार पर सिंचाई करें सर्दियों में 15 दिनों के अंतराल पर और गर्मियों में 7 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें तने को पानी के संपर्क में ना आने दें और खेत में पानी भी खड़ा ना होने दें पौधे की प्रौढ़ अवस्था के दौरान नदीनों की रोकथाम जरूरी होती है नदीनों की तीव्रता के आधार पर, नियमित और हल्की गोडाई करें फ्लूक्लोरालिन या बूटाक्लोर 800 मि.ली. प्रति एकड़ में डालें नदीनों की रोकथाम के लिए मलचिंग भी एक प्रभावी तरीका है पौधों की रोपाई के कुछ दिनों बाद प्लास्टिक शीट या धान की पराली या गन्ने के बचे कुचे को मलच के रूप में डालें मुख्यत: फल के पूरा आकार लेने और हरे से हल्का पीला रंग होने पर तुड़ाई की जाती है पहली तुड़ाई रोपाई के 14-15 महीनों के बाद की जा सकती है 4-5 तुड़ाइयां प्रति मौसम की जा सकती हैं धन्यवाद

Posted by Vishal Sitole
Madhya Pradesh
03-01-2020 05:33 PM
vishal ji aap iske liye beej upchar krke fasl ki bijai karen iske ilava aap carbendazim@3 gram ki prati litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad

Posted by kamaljit singh
Punjab
03-01-2020 05:28 PM
kamaljit ji tuc kanak diyan kisman jive PBW509,PBW590 di bijai kar sakde ho.dhanwad
Posted by Rahul Dedha
Uttar Pradesh
03-01-2020 05:15 PM
आपके सभी सवालो का जवाब दिया जा चुका है आप अपने सवालों के जवाब एप में मेरे सवाल पर क्लिक करके देख सकते हैं या फिर मेरी प्रोफाईल के नीचे अपने सवालों के जवाब देख सकते हैं हैं यदि आपकी कोई ओर समस्या है तो आप हैल्प लाईन नंबर : 97799-77641 पर संपर्क कर सकते हैं

Posted by khuspal
Punjab
03-01-2020 05:15 PM
khuspal ji ehna nu mix karke spray na karo tuc pathiyan de pani ja NPK 191919 vicho kise ik di varto karo dona di varto karn di lod nahi hai. ate DAP di spray tuc directly ikale khet te nahi kar sakde tuc Dr.Dlal ghol tyar karke spray kar sakde ho.dhanwad

Posted by Raj k
Uttar Pradesh
03-01-2020 05:10 PM
उत्तर में यह वर्षा और बसंत के मौसम में उगाई जाती है खरीफ के मौसम में इसकी बिजाई जून-जुलाई के महीने और बसंत ऋतु में फरवरी-मार्च के महीने में की जाती है, इसकी किस्मे जैसे V.R.O 6: यह चितकबरे रोग और पत्ता मरोड़ रोग के प्रतिरोधक है , बसंत के मौसम में इसकी औसतन उपज 54 क्विंटल और खरीफ के मौसम में इसकी औसतन उपज 72 क्विंटल प्रति.... (Read More)
उत्तर में यह वर्षा और बसंत के मौसम में उगाई जाती है खरीफ के मौसम में इसकी बिजाई जून-जुलाई के महीने और बसंत ऋतु में फरवरी-मार्च के महीने में की जाती है, इसकी किस्मे जैसे V.R.O 6: यह चितकबरे रोग और पत्ता मरोड़ रोग के प्रतिरोधक है , बसंत के मौसम में इसकी औसतन उपज 54 क्विंटल और खरीफ के मौसम में इसकी औसतन उपज 72 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
V.R.O 5: यह छोटे कद की और अधिक उपज वाली किस्म है यह चितकबरे रोग और पत्ता मरोड़ रोग के प्रतिरोधक है खरीफ के मौसम में, इसकी औसतन उपज 60 क्विंटल और बसंत के मौसम में, इसकी औसतन उपज 48 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Parbhani Kranti : यह MKV, परभानी द्वारा जारी की गई है इसके फल मध्यम लंबे और नर्म होते हैं इन्हें ज्यादा देर तक रखने की गुणवत्ता अच्छी होती है यह किस्म पीले चितकबरे रोग को सहनेयोग्य है इसकी औसतन पैदावार 35-45 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
I.I.V.R 10 : यह किस्म पीले चितकबरे रोग की प्रतिरोधक किस्म है इसकी औसतन पैदावार 60 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Kashi Vibhuti: यह किस्म बिजाई के बाद 38-40 दिनों में पहली तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 68-72 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Kashi Bhairav: यह किस्म रोपाई के 43-45 दिनों के बाद पहली तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 76 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह पीले चितकबरे रोग की प्रतिरोधक किस्म है Kashi Mahima: यह किस्म रोपाई के 45 दिनों के बाद पहली तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है यह खरीफ के साथ साथ गर्मियों में भी बोने के लिए उपयुक्त किस्म है इसकी औसतन पैदावार 80 क्विंटल प्रति एकड़ होती है

Posted by Rishank Tyagi
Madhya Pradesh
03-01-2020 05:07 PM
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी ख.... (Read More)
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुमब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तहय उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तहय में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तहय लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है

Posted by Raj k
Uttar Pradesh
03-01-2020 05:00 PM
राज जी कृपया आप इसकी फोटो भेजे ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद

Posted by khuspal
Punjab
03-01-2020 04:57 PM
khuspal ji kirpa karke melsa de label di photo bhejo ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake,dhanwad

Posted by Pankaj Yadav
Madhya Pradesh
03-01-2020 04:55 PM
उसे आप रोजाना 35—40 किलो हरा चारा दें और हर तीन महीने के बाद पेट के कीड़ों के लिए गोली जरूर दें और उसे आप गेहूं का दलिया बनाकर दे सकते है इसके साथ आप Milkout पाउडर 2—2 चम्मच सुबह शाम और Glactogog पाउडर देना शुरू करें इसका रोजाना एक पाउच देना शुरू करें इससे दूध में फायदा होगा.
Posted by Satender mourya Satender mourya
Uttar Pradesh
03-01-2020 04:53 PM
Satender ji aap kripya aap iske paudhe ke patton ke neeche machar ka hamla check karen agar maujood hai to aap iske uper imidacloprid @1.5ml ko prati litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad

Posted by Gurpreet Singh
Punjab
03-01-2020 04:51 PM
ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਤੁਹਾਡੇ ਲਈ ਇਹ ਜਾਨਣਾ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਕਿ ਮੁਰਗੀ ਪਾਲਣ ਦਾ ਧੰਦਾ ਦੋ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਕਿ ਤੁਸੀ ਆਂਡਿਆਂ ਦਾ ਧੰਦਾ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਜਾਂ ਮੀਟ ਦਾ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਆਂਡਿਆਂ ਦਾ ਧੰਦਾ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਲੇਇਰ ਮੁਰਗੀਆਂ ਪਾਲਣੀਆਂ ਪੈਣਗੀਆਂ ਅਤੇ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਮੀਟ ਦਾ ਧੰਦਾ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਬਰਾਇਲਰ ਮੁਰਗੀਆਂ ਪਾਲਣੀਆਂ ਪੈਣਗੀਆਂ ਜੇਕ.... (Read More)
ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਤੁਹਾਡੇ ਲਈ ਇਹ ਜਾਨਣਾ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਕਿ ਮੁਰਗੀ ਪਾਲਣ ਦਾ ਧੰਦਾ ਦੋ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਕਿ ਤੁਸੀ ਆਂਡਿਆਂ ਦਾ ਧੰਦਾ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਜਾਂ ਮੀਟ ਦਾ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਆਂਡਿਆਂ ਦਾ ਧੰਦਾ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਲੇਇਰ ਮੁਰਗੀਆਂ ਪਾਲਣੀਆਂ ਪੈਣਗੀਆਂ ਅਤੇ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਮੀਟ ਦਾ ਧੰਦਾ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਬਰਾਇਲਰ ਮੁਰਗੀਆਂ ਪਾਲਣੀਆਂ ਪੈਣਗੀਆਂ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਬਰਾਇਲਰ ਮੁਰਗੀ ਫਾਰਮਿੰਗ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਅਤੇ ਘੱਟ ਤੋਂ ਘੱਟ 10 ਹਜਾਰ ਮੁਰਗੀਆਂ ਦਾ ਧੰਦਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ 4 ਤੋਂ 5 ਲੱਖ ਦਾ ਇੰਤਜਾਮ ਕਰਨਾ ਪਵੇਗਾ , ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਆਡਿਆਂ ਲਈ 500 ਮੁਰਗੀਆਂ ਨਾਲ ਲੇਇਰ ਫਾਰਮਿੰਗ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਇੱਕ ਮੁਰਗੀ ਦੇ ਇੱਕ ਬੱਚੇ ਤੇ ਤੇ ਜਨਮ ਤੋਂ ਲੈ ਕੇ ਅੰਡੇ ਦੇਣ ਤੱਕ 250-300 ਤੱਕ ਖਰਚਾ ਆ ਜਾਵੇਗਾ ਤੇ ਇਸ ਲਈ 1250 ਸਕੇਅਰ ਫੁੱਟ ਦੇ ਸ਼ੈੱਡ ਜਗਾਂ ਦੀ ਜਰੂਰਤ ਪਵੇਗੀ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਪੋਲਟਰੀ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈ ਕੇ ਨਾਬਾਰਡ ਤੋਂ ਲੋਨ ਲੈਂਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ 25 ਤੋਂ 35 % ਤੱਕ ਸਬਸਿਡੀ ਮਿਲ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਲੋਨ ਅਪਲਾਈ ਕਰਨ ਦੀ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਤੁਹਾਨੂੰ ਵਿੱਭਾਗ ਵੱਲੋਂ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਦਿਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈਣ ਲਈ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਨਜ਼ਦੀਕੀ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਕੇਦਰ ਤੋਂ ਜਾਂ ਗੁਰੂ ਅੰਗਦ ਦੇਵ ਵੈਟਨਰੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋਂ ਜਾਂ ਫਿਰ ਤੁਸੀ ਕਿਸੇ ਵੀ ਦਿਨ ਆਪਣੇ ਨਜ਼ਦੀਕੀ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਕੇਦਰ ਤੇ ਪਹੁੰਚ ਕੇ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈਣ ਲਈ ਫਾਰਮ ਭਰ ਆਊ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਜਦੋਂ ਵੀ ਪੋਲਟਰੀ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਆਵੇਗੀ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਕੇਦਰ ਵੱਲੋਂ ਕਾਲ ਕਰਕੇ ਦੱਸ ਦਿੱਤਾ ਜਾਦਾ ਹੈ ਬਹੁਤ ਵਧੀਆ ਕੰਮ ਹੈ ਜੀ ਪੋਲਟਰੀ ਦਾ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਬ੍ਰਾਇਲਰ ਰੱਖਦੇ ਹੋਂ ਤਾਂ 5 ਤੋਂ 6 ਹਫਤਿਆਂ ਦੇ ਅੰਦਰ ਅੰਦਰ ਮੰਡੀਕਰਣ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਤਕਰੀਬਨ ਪੰਜ ਮਹੀਨਿਆਂ ਵਿੱਚ ਅੰੰਡਿਆ ਦੀ ਉਪਜ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਸਾਰਾ ਸਾਲ ਦੀ ਆਮਦਨ ਵਾਲਾ ਕੰਮ ਹੈ ਜੀ ਜਿਆਦਾ ਮਿਹਨਤ ਵੀ ਨਹੀ ਲੱਗਦੀ ਇਹ ਨਾਜੁਕ ਕਿਸਮ ਦੇ ਜਾਨਵਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਕੁੱਝ ਕੁ ਖਤਰਨਾਕ ਬਿਮਾਰੀਆ ਵੀ ਹਨ ਜਿੰਨਾਂ ਤੋੰ ਬਚਣ ਲਈ ਖਾਸ ਧਿਆਨ ਰੱਖਣ ਦੀ ਜਰੂਰਤ ਹੂੰਦੀ ਹੈ, ਚੂਚੇ ਲੈਣ ਲਈ ਮੇਰੇ ਨਾਲ 9781589637 ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ
Posted by mayaram dhiwar
Chattisgarh
03-01-2020 04:50 PM
मायाराम जी इस किसम की पैदावार 20 -25 टन प्रति एकड़ होती है धन्यवाद
Posted by Satender mourya Satender mourya
Uttar Pradesh
03-01-2020 04:49 PM
Satender ji aap iske patton ke neeche machar ka hamla check karen agar maujood hai to aap iske uper imidacloprid @1.5ml ko prati litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by Satender mourya Satender mourya
Uttar Pradesh
03-01-2020 04:48 PM
Satender ji aap iske patton ke neeche machar ka hamla check karen agar maujood ha to aap iske uper imidacloprid @1.5ml ko prtai acre ke hisab se spray karen.dhanywad

Posted by omesh
Maharashtra
03-01-2020 04:45 PM
omesh ji bakri ko konsi bimari hai ji. apna sawal detail me btaye ji fir hi aapko sahi answer diya ja sakta hai ji.
Posted by ajav singh
Uttar Pradesh
03-01-2020 04:43 PM
खरबूजे की खेती के लिए फरवरी का पहला सप्ताह अनुकूल समय होता है
Posted by Ak
Uttar Pradesh
03-01-2020 04:39 PM
इसे आप carpade injection 10ml लगवायें यह carries कंपनी का आता है या फिर आप cortalife injection भी लगवा सकते है इनमें से कोई भी लगवा सकते है बाकि उसे काली मिर्च 20 ग्राम रोजाना 5 दिन तक इसके साथ सब्ज़ी वाला पेठा 1 किलो रोजाना खिलायें इससे फर्क पड़ने लग जाएगा
Posted by Ankit kumar
Bihar
03-01-2020 04:26 PM
प्याज़ एक प्रसिद्ध व्यापक सब्जी वाली प्रजाति है इसकी खेती अलग-अलग किस्म की मिट्टी जैसे की रेतली दोमट, चिकनी, गार और भारी मिट्टी में की जा सकती है यह गहरी दोमट और जलोढ़ मिट्टी, जिसका निकास प्रबंध बढ़िया, नमी को बरकरार रखने की समर्थता, जैविक तत्वों वाली मिट्टी में बढ़िया परिणाम देती है विरली और रेतली मिट्टी इसकी ख.... (Read More)
प्याज़ एक प्रसिद्ध व्यापक सब्जी वाली प्रजाति है इसकी खेती अलग-अलग किस्म की मिट्टी जैसे की रेतली दोमट, चिकनी, गार और भारी मिट्टी में की जा सकती है यह गहरी दोमट और जलोढ़ मिट्टी, जिसका निकास प्रबंध बढ़िया, नमी को बरकरार रखने की समर्थता, जैविक तत्वों वाली मिट्टी में बढ़िया परिणाम देती है विरली और रेतली मिट्टी इसकी खेती के लिए बढ़िया नहीं मानी जाती है, क्योंकि मिट्टी के घटिया जमाव के कारण इसमें गांठों का उत्पादन सही नहीं होता है इसकी खेती के लिए मिट्टी का pH 6-7 होना चाहिए प्रसिद्ध किस्में:-alyanpur Red Round: यह उत्तर प्रदेश की प्रसद्धि किस्म है इसकी गांठे भूरे रंग की और गोलाकार आकार की होती हैं इसके पौधे 150-160 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं इसकी औसतन पैदावार 8-10 टन प्रति एकड़ होती है Bhima Shakti: यह खरीफ के साथ साथ रबी के मौसम में उगाने के लिए उपयुक्त है यह किस्म रोपाई के 130 दिन बाद कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावारा 170 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Arka Kalyan: इसकी गांठे गहरे गुलाबी रंग की होती हैं इसकी औसतन पैदावार 135 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa White Round: इसकी गांठे सफेद, गोल और समतल होती हैं इसकी औसतन पैदावार 120 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa white flat: इसकी गांठे सफेद, चपटी और मध्यम से बड़े आकार की होती हैं यह किस्म डीहाइड्रेशन के लिए उपयुक्त है मिट्टी को भुरभुरा बनाने के लिए तीन-चार बार गहराई से जोताई करें मिट्टी में जैविक तत्वों की मात्रा बढ़ाने के लिए रूड़ी की खाद डालें फिर खेत को छोटे-छोटे प्लाटों में बांट दे नर्सरी तैयार करने के उचित समय मध्य-अक्तूबर से मध्य-नवबंर होता है नए पौधे मध्य-दिसंबर से मध्य-जनवरी तक रोपाई के लिए तैयार हो जाते है रोपाई के लिए 10-15 सैं.मी. कद के पौधे चुनें खरीफ के मौसम में रोपाई के लिए मई से जून का महीना नर्सरी तैयार करने के लिए उपयुक्त होता है बिजाई के 6-8 सप्ताह बाद नए पौधे रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं जुलाई -अगस्त के महीने में रोपण कर दें रोपण के समय, पंक्तियों के बीच 15 सैं.मी. और पौधों के बीच 10 सैं.मी. का फासला रखें नर्सरी में बीज 1-2 सैं.मी. गहराई पर बोयें बिजाई के लिए रोपण विधि का प्रयोग करें एक एकड़ के लिए 2-3 किलो बीज का प्रयोग करें उखेड़ा रोग और कांव-गियारी से बचाव के लिए थीरम 2 ग्राम+बैनोमाइल 50 डब्लयू पी 1 ग्राम प्रति लीटर पानी से प्रति किलो बीजों का उपचार करें रासायनिक उपचार के बाद बायो एजेंट ट्राईकोडर्मा विराइड 2 ग्राम के साथ प्रति किलो बीजों का उपचार करने की सिफारिश की जाती है इस तरह करने से नए पौधे मिट्टी से पैदा होने वाली और अन्य बीमारीयों से बच जाते है बिजाई से 10 दिन पहले 20 टन रूड़ी की खाद डालें नाइट्रोजन 30 किलो(यूरिया 65 किलो), फासफोरस 16 किलो(सिंगल सुपर फासफेट 100 किलो) और पोटाश 16 किलो(मिउरेट ऑफ़ पोटाश 30 किलो) प्रति एकड़ डालें फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा रोपण के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटकर रोपाई के बाद टॉप ड्रेसिंग के तौर पर 30वें और 45वें दिन डालें मिट्टी की किसम और जलवायु के आधार पर सिंचाई की मात्रा और आवर्ती का फैसला करें आमतौर पर, इसे 5-8 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है पहली सिंचाई बिजाई के तुरंत बाद करें और दूसरी सिंचाई रोपाई के तीन दिन बाद करें बाकी की सिंचाई आवश्यकता और मिट्टी में नमी के आधार पर 7-10 दिनों के अंतराल पर करें पुटाई के 10-15 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें अत्याधिक सिंचाई ना करें शुरुआत में नए पौधे धीरे-धीरे बढ़ते है इसलिए नुकसान से बचाव के लिए गोड़ाई की जगह रासायनिक नदीन-नाशक का प्रयोग करें रोकथाम के लिए बिजाई से 72 घंटे में पेंडीमैथालीन(स्टंप) 1 लीटर को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में स्प्रे करें नदीनों के अंकुरण उपरांत बिजाई से 7 दिन बाद आक्सीफ्लोरफैन 425 मि.ली. को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में स्प्रे करें नदीनों की रोकथाम के लिए 2-3 गोड़ाईयों की सिफारिश की जाती है पहली गोड़ाई बिजाई से एक महीने बाद और दूसरी गोड़ाई, पहली से एक महीने बाद करें सही समय पर पुटाई करना बहुत जरूरी है पुटाई का समय किस्म,ऋतु,मंडी रेट आदि पर निर्भर करता है 50% पौधे की पत्तियां नीचे की तरफ गिरना दर्शाता है कि फसल पुटाई के लिए तैयार है फसल की पुटाई हाथों से प्याज़ को उखाड़ कर की जाती है पुटाई के बाद इनको 2-3 दिन के लिए अनावश्यक नमी निकालने के लिए खेत में छोड़ दे धन्यवाद

Posted by preetam khede
Madhya Pradesh
03-01-2020 04:24 PM
preetam ji kripya aap apna swal vistar se pooche ke aap khet napne ke liye kisi app ke bare men jankari lena chahte ha ya aap iske liye kisi instrument ke bare men jankari lena chahte hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake,dhanywad
Posted by Mohmmad Emran
Rajasthan
03-01-2020 04:24 PM
Moh emran ji aap inn dono mai se koi v kam kr skte hai yeh dono he ache kam hai, inko suru krne se pehle aap training jrur lenn aur suruat kam janwaro se kren, baki apke intrest per nirbhar krta hai ki apko inme se konsa kam acha lgta hai fir uss kam ki training lekar suru kren jisme apko kam mai sahi munafa kmane ka ptaa lgg jayega.

Posted by parvat
Madhya Pradesh
03-01-2020 04:16 PM
असली केसर सिर्फ जम्मू कश्मीर, ईरान और अफगानिस्तान में ही हो सकता है, यह कुसुम है, इसकी भी कई दवाई बनती है, यदि कोई और छक है तो जम्मू कश्मीर के इस किसान से बात करें, जिसके दादे, पड़दादे भी केसर की खेती करते थे और यह भी केसर की खेती करते है Javid Ahmed- 95964 93260 बाकि आप यह वीडियो देखें https://www.youtube.com/watchv=vl7c6L3ETnQ&t=8s बाकि यदि फिर भी यकीन नहीं .... (Read More)
असली केसर सिर्फ जम्मू कश्मीर, ईरान और अफगानिस्तान में ही हो सकता है, यह कुसुम है, इसकी भी कई दवाई बनती है, यदि कोई और छक है तो जम्मू कश्मीर के इस किसान से बात करें, जिसके दादे, पड़दादे भी केसर की खेती करते थे और यह भी केसर की खेती करते है Javid Ahmed- 95964 93260 बाकि आप यह वीडियो देखें https://www.youtube.com/watchv=vl7c6L3ETnQ&t=8s बाकि यदि फिर भी यकीन नहीं है तो तो आप अमृतपाल सिंह बराड़ प्रोफेसर, पीएयू लुधियाना इस वीडियो संबंधी विचार पड़ सकते हैं, यह फसल केसर की नहीं है, यह फसल कसुंबडे की है, इसे अंग्रेजी में Safflower कहते है, और विज्ञानं में इसे Carthamus tinctorius कहते है

Posted by Ramsindhu Singh
Uttar Pradesh
03-01-2020 04:12 PM
Ramsindhu ji mob se khet ko napne ki bhut sari app hai lekin vo aapko sahi information degi iske bare men kuch bhi kaha nahi ja sakta.dhanywad
Posted by शहजाद खान
Madhya Pradesh
03-01-2020 03:55 PM
शहजाद जी आप इसके ऊपर zinc sulphate @3 ग्राम को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद

Posted by himat pundlik ahire
Maharashtra
03-01-2020 03:54 PM
Himat pundlik ahire ji is ke bare me visthar me jankari ke lia aap Pawan Kumar 9878726420 se samparak kar sakte hai, Thankyou.

Posted by Muñish
Punjab
03-01-2020 03:53 PM
usko aap Udderpox homeopathic dwia ki 10-10 drops din mai 3 varr den, yeh Dr. john ka product hai, isse frak padd jayega..

Posted by S.S.Painkra IDEA
Chattisgarh
03-01-2020 03:29 PM
चिकनी मिट्टी या नहरी मिट्टी, जो कि सही मात्रा में पानी को सोख सके, अच्छी मानी जाती है भारी मिट्टी वाले सूखे क्षेत्र, जिनमें पानी के निकास का पूरा प्रबंध हो, भी इसकी खेती के लिए अच्छे माने जाते हैं पिछली फसल की कटाई के बाद खेत की अच्छे तरीके से ट्रैक्टर की मदद से जोताई की जानी चाहिए खेत को आमतौर पर ट्रैक्टर के स.... (Read More)
चिकनी मिट्टी या नहरी मिट्टी, जो कि सही मात्रा में पानी को सोख सके, अच्छी मानी जाती है भारी मिट्टी वाले सूखे क्षेत्र, जिनमें पानी के निकास का पूरा प्रबंध हो, भी इसकी खेती के लिए अच्छे माने जाते हैं पिछली फसल की कटाई के बाद खेत की अच्छे तरीके से ट्रैक्टर की मदद से जोताई की जानी चाहिए खेत को आमतौर पर ट्रैक्टर के साथ तवियां जोड़कर जोता जाता है और उसके बाद दो या तीन बार हल से जोताई की जाती है खेत की जोताई शाम के समय की जानी चाहिए और रोपाई की गई ज़मीन को पूरी रात खुला छोड़ देना चाहिए ताकि वह ओस की बूंदों से नमी सोख सके फसल की अच्छी पैदावार के लिए कतारों में 20-22.5 सै.मी. का अंतर होना जरूरी है पिछेती बीजी गई फसल में कतारों में 15-18 सै.मी. तक का अंतर होना जरूरी है बीज की गहराई 4-5 सैंमी होनी चाहिए
Posted by Vijay Bahadur
Uttar Pradesh
03-01-2020 03:24 PM
vijay ji aap pehli sinchai ke 20 din bad dubara sinchai kare aur urea ki bachi hui matra daale.dhanywad
Posted by आर्य सुरेन्द्र पँवार
Uttar Pradesh
03-01-2020 03:23 PM
आर्य सुरेन्द्र पँवार जी उपले गोबर से ही त्यार किये जाते है लेकिन यह 6 माह पुराने होने चाहिए धन्यवाद
Posted by MANAN HUSSAIN
Bihar
03-01-2020 03:22 PM
Hussain ji aap ise vermicompost@4 kilo prati paudhe ke hisab se daale.dhanywad

Posted by Sukhdeep Singh
Punjab
03-01-2020 03:20 PM
sukhdeep ji eh jhulas rog de lashan han isde layi tuc copper oxychloride @500 gram nu prati acre de hisab nal spray karo.dhanwad
Posted by Vijay Bahadur
Uttar Pradesh
03-01-2020 03:19 PM
vijay ji abhi aapko isme aur kuch bhi daalne ki jrurat nahi hai. aap iske uper NPK 191919@1 kilo ko 150 litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad

Posted by vipin
Uttar Pradesh
03-01-2020 03:15 PM
vipin ji aap topik@160 gram ko pratia acre ke hisab se spray kar sakte hai is se ghas ki roktham ho jayegi.dhanywad

Posted by Shyam Sunder
Bihar
03-01-2020 03:11 PM
Sunder ji usko aap nazdiki doctor se janch krwayen kyuki uske thnn ki janch krke uska sahi ilagg ho skta hai.

Posted by vipin
Uttar Pradesh
03-01-2020 03:09 PM
vipin ji kripya aap btaye ke aapne isme pehle koi sprya ki hai taki uske hisab se aapko jankari di ja sake.dhanywad
Posted by घासीराम पाटिल
Madhya Pradesh
03-01-2020 03:09 PM
घासीराम जी इसके कई कारण हो सकते है कृपया आप इसकी फोटो भेजे ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
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