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Posted by Mohsin Hasan
Madhya Pradesh
05-01-2020 11:35 PM
Punjab
01-06-2020 03:53 PM
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकत हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्च.... (Read More)
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकत हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्चे देना आम बात है बकरियां 8-10 वर्ष तक बच्चे देती हैं और अपन गिनती को तेजी से बढ़ा लेती हैं आप बारबरी, ब्लैक बंगाल, जैसी नसल पाल सकते हैं इसकी ट्रेनिेंग के लिए आप अपने कुषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करे उस ट्रेनिंग सटीर्फिकेट से आपको लोन और सब्सिड़ी मिलेगी पर यदि आप बकरी पालन का काम अपने स्तर पर शुरू करें तो ज्यादा अच्छा है क्योंकि लोन की किशत आपको महीने के बाद देनी होगी पर बकरी पालन में महीने महीने के आमदन नहीं होती इसलिए आप इसे छोटे स्तर पर शुरू करें फिर आप काम को बढ़ा सकते है या फिर जो बकरी पालन का व्यवसाय कर रहा कोई किसान उसका फार्म स्वंय जाकर देखकर आयें तो और भी बा​रीकियों का पता चल जायेगा, आप ब्लैक बंगाल, बीटल, सिरोही, जमुनापरी, बरबरी नस्ल रख सकते हैं.
Posted by Mehul Singh
Uttar Pradesh
05-01-2020 11:30 PM
Punjab
01-06-2020 10:15 AM
फसल को जानवरों से बचाने के लिए आप खेत में फेंसिंग कर सकते है, इसके इलावा आप prem raj saini 9719432296 जी से संम्पर्क कर सकते है, इन्होने एक खाद त्यार की है जिसकी बदबू से जानवर खेत में नहीं आते.
Posted by karmeer YADAV
Bihar
05-01-2020 11:16 PM
Punjab
04-06-2020 04:19 PM
karmeer YADAV ji aap apna issue thoda detail se btaye ke loan ke liye aapne sare docoments or conditions puri kari thi ya nahi ? iske baad hi kuch jaankari di ja sakti hai ji.
Posted by Mandeep Singh
Punjab
05-01-2020 11:12 PM
Punjab
01-06-2020 11:10 AM
Pesticide di shop kholan de lyi B.SC AGRICULTURE di degree kiti hoyi honi chaidi hai ate degree ton baad iss da dwaayian bechan da license bnda hai. iss da license bnaun de lyi tuhanu file kacheria de vicho mil jandi hai ate iss file nu tyaar kr ke chief of agriculture de sign krwa ke jmaa krwauni paindi hai ate ohh baad de vich location check krde hnn ate inquiry krde hnn ate 1 mahine de vich tuhada license bn janda hai. ihh jo chief of agriculture hunda hai ohh KVK de vich hunda hai. jile de vich iss officer di duty hundi hai.
Posted by Arbind kumar
Bihar
05-01-2020 11:02 PM
Rajasthan
01-06-2020 11:11 AM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by jageshwar kurmi
Madhya Pradesh
05-01-2020 10:46 PM
Punjab
01-06-2020 11:45 AM
पपीते की खेती को मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए प्रसिद्ध किस्में :-Pusa Dwarf: इसके फल मध्यम आकार के और अंडाकार होते हैं यह सूखे को सहनेयोग्.... (Read More)
पपीते की खेती को मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए प्रसिद्ध किस्में :-Pusa Dwarf: इसके फल मध्यम आकार के और अंडाकार होते हैं यह सूखे को सहनेयोग्य किस्म है यह उच्च घनत्व में रोपाई के लिए लाभदायक है Pusa Giant: इस किस्म के पौधे तेज हवा को सहनेयोग्य है यह बड़े फलों का उत्पादन करती है यह पैकिंग के लिए उपयुक्त किस्म है CO 3: इसके फल बड़े आकार के और अंडाकार होते हैं इसे ज्यादा देर तक रखने की गुणवत्ता अच्छी होती है CO 1: यह छोटे कद की किस्म है जिसके फल मध्यम आकार के होते हैं फल गोलाकार, नर्म हरा-पीला छिल्का और संतरी पीले रंग का गुद्दा होता है फल रसदार होता है और इसे ज्यादा देर तक रखने की गुणवत्ता अच्छी होती है Coorg Honey Dew: इसे सीधे तौर पर खाने के लिए और प्रक्रिया के लिए प्रयोग किया जाता है इसके फल आयताकार और गुद्दा मोटा संतरी रंग का होता है Pusa Majesty: इसके फल मध्यम आकार के, गोल होते हैं इन्हें रखने की गुणवत्ता बहुत अच्छी होती है यह किस्म 146 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह किस्म जड़ गलन निमाटोड के प्रतिरोधक किस्म है Pusa Delicious: यह मध्यम लंबी किस्म है इसके फल मध्यम आकार के होते हैं, गुद्दा गहरे संतरी रंग का होता है इस किस्म को कतारों में लगाने के लिए प्रयोग किया जाता है पपीते की खेती के लिए नदीन रहित भूमि का प्रयोग करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें आखिरी जोताई के समय अच्छी तरह से गली हुई रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर मिट्टी में अच्छी तरह मिलाकर डालें सिफारिश किए गए फासलों पर 1 मीटर x 1 मीटर x 1 मीटर आकार के गड्ढे खोदें गड्ढों को मिट्टी और रूड़ी की खाद या गाय के गले हुए गोबर से भरें प्रयोग की गई किस्म के आधार पर प्रत्येक गड्ढे पर 2-4 नए पौधों की रोपाई करें रोपाई के बाद हल्की सिंचाई करें हवा से बचाव के लिए खूंटा लगाएं बीजों को 150 गेज़ की मोटाई वाले, 25 x 10 सैं.मी. के पॉलीथीन बैग में बोयें पानी के उचित निकास के लिए पॉलीथीन बैग के निचले हिस्से में 1 मि.मी. अर्द्धव्यास का छेद करें उसके बाद पॉलीथीन बैग में समान अनुपात में रूड़ी की खाद, मिट्टी और रेत डालें बिजाई से पहले बीजों का उपचार करें रोपाई के लिए 6-7 सप्ताह के पौधों का प्रयोग करें यूरिया 150 ग्राम, फासफोरस 80 ग्राम, पोटाश 100 ग्राम प्रति वृक्ष में प्रति वर्ष डालें खादों को 4 भागों में बांटकर रोपाई के बाद पहले, तीसरे, पांचवे और सातवें महीने में डालें बसंत के मौसम में फरवरी मार्च के महीने में बिजाई करें जबकि मॉनसून के मौसम में बिजाई के लिए जून जुलाई का महीना उपयुक्त होता है और पतझड़ के मौसम में बिजाई अक्तूबर से नवंबर महीने में की जाती है आमतौर पर 1.8 मीटर x 1.8 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है उच्च घनता की रोपाई के लिए 1.5 मीटर x 1.5 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है नर्सरी में बीज को 1 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बीजो की खेत में सीधे बिजाई या मुख्य खेत में नए पौधों की रोपाई की जाती है 100-120 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें मिट्टी की किस्म, जलवायु के हालातों आदि के आधार पर सिंचाई करें सर्दियों में 15 दिनों के अंतराल पर और गर्मियों में 7 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें तने को पानी के संपर्क में ना आने दें और खेत में पानी भी खड़ा ना होने दें पौधे की प्रौढ़ अवस्था के दौरान नदीनों की रोकथाम जरूरी होती है नदीनों की तीव्रता के आधार पर, नियमित और हल्की गोडाई करें फ्लूक्लोरालिन या बूटाक्लोर 800 मि.ली. प्रति एकड़ में डालें नदीनों की रोकथाम के लिए मलचिंग भी एक प्रभावी तरीका है पौधों की रोपाई के कुछ दिनों बाद प्लास्टिक शीट या धान की पराली या गन्ने के बचे कुचे को मलच के रूप में डालें मुख्यत: फल के पूरा आकार लेने और हरे से हल्का पीला रंग होने पर तुड़ाई की जाती है पहली तुड़ाई रोपाई के 14-15 महीनों के बाद की जा सकती है 4-5 तुड़ाइयां प्रति मौसम की जा सकती हैं धन्यवाद
Posted by Saurabh Kumar
Uttar Pradesh
05-01-2020 10:44 PM
Punjab
01-06-2020 11:48 AM
प्याज़ एक प्रसिद्ध व्यापक सब्जी वाली प्रजाति है इसकी खेती अलग-अलग किस्म की मिट्टी जैसे कि रेतली दोमट, चिकनी, गार और भारी मिट्टी में की जा सकती है यह गहरी दोमट और जलोढ़ मिट्टी, जिसका निकास प्रबंध बढ़िया, नमी को बरकरार रखने की समर्थता, जैविक तत्वों वाली मिट्टी में बढ़िया परिणाम देती है विरली और रेतली मिट्टी इसकी ख.... (Read More)
प्याज़ एक प्रसिद्ध व्यापक सब्जी वाली प्रजाति है इसकी खेती अलग-अलग किस्म की मिट्टी जैसे कि रेतली दोमट, चिकनी, गार और भारी मिट्टी में की जा सकती है यह गहरी दोमट और जलोढ़ मिट्टी, जिसका निकास प्रबंध बढ़िया, नमी को बरकरार रखने की समर्थता, जैविक तत्वों वाली मिट्टी में बढ़िया परिणाम देती है विरली और रेतली मिट्टी इसकी खेती के लिए बढ़िया नहीं मानी जाती है, क्योंकि मिट्टी के घटिया जमाव के कारण इसमें गांठों का उत्पादन सही नहीं होता है इसकी खेती के लिए मिट्टी का pH 6-7 होना चाहिए प्रसिद्ध किस्में:-alyanpur Red Round: यह उत्तर प्रदेश की प्रसद्धि किस्म है इसकी गांठे भूरे रंग की और गोलाकार आकार की होती हैं इसके पौधे 150-160 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं इसकी औसतन पैदावार 8-10 टन प्रति एकड़ होती है Bhima Shakti: यह खरीफ के साथ साथ रबी के मौसम में उगाने के लिए उपयुक्त है यह किस्म रोपाई के 130 दिन बाद कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावारा 170 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Arka Kalyan: इसकी गांठे गहरे गुलाबी रंग की होती हैं इसकी औसतन पैदावार 135 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa White Round: इसकी गांठे सफेद, गोल और समतल होती हैं इसकी औसतन पैदावार 120 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa white flat: इसकी गांठे सफेद, चपटी और मध्यम से बड़े आकार की होती हैं यह किस्म डीहाइड्रेशन के लिए उपयुक्त है मिट्टी को भुरभुरा बनाने के लिए तीन-चार बार गहराई से जोताई करें मिट्टी में जैविक तत्वों की मात्रा बढ़ाने के लिए रूड़ी की खाद डालें फिर खेत को छोटे-छोटे प्लाटों में बांट दे नर्सरी तैयार करने के उचित समय मध्य-अक्तूबर से मध्य-नवबंर होता है नए पौधे मध्य-दिसंबर से मध्य-जनवरी तक रोपाई के लिए तैयार हो जाते है रोपाई के लिए 10-15 सैं.मी. कद के पौधे चुनें खरीफ के मौसम में रोपाई के लिए मई से जून का महीना नर्सरी तैयार करने के लिए उपयुक्त होता है बिजाई के 6-8 सप्ताह बाद नए पौधे रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं जुलाई -अगस्त के महीने में रोपण कर दें रोपण के समय, पंक्तियों के बीच 15 सैं.मी. और पौधों के बीच 10 सैं.मी. का फासला रखें नर्सरी में बीज 1-2 सैं.मी. गहराई पर बोयें बिजाई के लिए रोपण विधि का प्रयोग करें एक एकड़ के लिए 2-3 किलो बीज का प्रयोग करें उखेड़ा रोग और कांव-गियारी से बचाव के लिए थीरम 2 ग्राम+बैनोमाइल 50 डब्लयू पी 1 ग्राम प्रति लीटर पानी से प्रति किलो बीजों का उपचार करें रासायनिक उपचार के बाद बायो एजेंट ट्राईकोडर्मा विराइड 2 ग्राम के साथ प्रति किलो बीजों का उपचार करने की सिफारिश की जाती है इस तरह करने से नए पौधे मिट्टी से पैदा होने वाली और अन्य बीमारीयों से बच जाते है बिजाई से 10 दिन पहले 20 टन रूड़ी की खाद डालें नाइट्रोजन 30 किलो(यूरिया 65 किलो), फासफोरस 16 किलो(सिंगल सुपर फासफेट 100 किलो) और पोटाश 16 किलो(मिउरेट ऑफ़ पोटाश 30 किलो) प्रति एकड़ डालें फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा रोपण के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटकर रोपाई के बाद टॉप ड्रेसिंग के तौर पर 30वें और 45वें दिन डालें मिट्टी की किसम और जलवायु के आधार पर सिंचाई की मात्रा और आवर्ती का फैसला करें आमतौर पर, इसे 5-8 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है पहली सिंचाई बिजाई के तुरंत बाद करें और दूसरी सिंचाई रोपाई के तीन दिन बाद करें बाकी की सिंचाई आवश्यकता और मिट्टी में नमी के आधार पर 7-10 दिनों के अंतराल पर करें पुटाई के 10-15 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें अत्याधिक सिंचाई ना करें शुरुआत में नए पौधे धीरे-धीरे बढ़ते है इसलिए नुकसान से बचाव के लिए गोड़ाई की जगह रासायनिक नदीन-नाशक का प्रयोग करें रोकथाम के लिए बिजाई से 72 घंटे में पेंडीमैथालीन(स्टंप) 1 लीटर को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में स्प्रे करें नदीनों के अंकुरण उपरांत बिजाई से 7 दिन बाद आक्सीफ्लोरफैन 425 मि.ली. को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में स्प्रे करें नदीनों की रोकथाम के लिए 2-3 गोड़ाईयों की सिफारिश की जाती है पहली गोड़ाई बिजाई से एक महीने बाद और दूसरी गोड़ाई, पहली से एक महीने बाद करें सही समय पर पुटाई करना बहुत जरूरी है पुटाई का समय किस्म,ऋतु,मंडी रेट आदि पर निर्भर करता है 50% पौधे की पत्तियां नीचे की तरफ गिरना दर्शाता है कि फसल पुटाई के लिए तैयार है फसल की पुटाई हाथों से प्याज़ को उखाड़ कर की जाती है पुटाई के बाद इनको 2-3 दिन के लिए अनावश्यक नमी निकालने के लिए खेत में छोड़ दे धन्यवाद
Posted by Pawan yadav
Delhi
05-01-2020 10:31 PM
Rajasthan
01-06-2020 11:50 AM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by Pawan yadav
Delhi
05-01-2020 10:30 PM
Rajasthan
01-06-2020 10:02 AM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by Pawan yadav
Delhi
05-01-2020 10:27 PM
Rajasthan
01-06-2020 10:01 AM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्यकर्म आयोजित.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्यकर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्यकर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by amarat mali
Gujarat
05-01-2020 10:11 PM
Punjab
01-06-2020 11:54 AM
अमरत जी आप इसके पत्तों के नीचे मच्छर का हमला चैक करें अगर मौजूद है तो आप इसके ऊपर imidacloprid @15 ml को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें
Posted by Mohd Liyaqath Ali Khan
Telangana
05-01-2020 10:10 PM
Rajasthan
01-06-2020 11:56 AM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by Subhajyoti Pal
West Bengal
05-01-2020 10:05 PM
Punjab
01-06-2020 03:55 PM
यदि आप लेयर मुर्गी पालन करना चाहते है तो लेयर फार्मिंग के लिए आपको 50 फीट लंबाई वाली जगह और 20 फीट चौड़ाई वाली जगह की जरूरत होती है यह आपका 1000 वर्ग फुट जगह बन जाती है यहां आप 1000 बच्चों को रख सकते हैं इस प्रकार आप अपने बजट के हिसाब से बच्चों को रख सकते है और यदि आप लेयर का बच्चा अपने फार्म पर तैयार करते है तो आपको बच्च.... (Read More)
यदि आप लेयर मुर्गी पालन करना चाहते है तो लेयर फार्मिंग के लिए आपको 50 फीट लंबाई वाली जगह और 20 फीट चौड़ाई वाली जगह की जरूरत होती है यह आपका 1000 वर्ग फुट जगह बन जाती है यहां आप 1000 बच्चों को रख सकते हैं इस प्रकार आप अपने बजट के हिसाब से बच्चों को रख सकते है और यदि आप लेयर का बच्चा अपने फार्म पर तैयार करते है तो आपको बच्चा अंडे देने तक 160—170 रूप्ये प्रति बच्चे के हिसाब से खर्चा आएगा यदि आप तैयार बच्चा लेकर आते है तो वो आपको 205—210 रूप्ये प्रति बच्चे के हिसाब से पड़ेगा फिर आप उस हिसाब से इनको खरीद सकते है. पहले आप अपने बजट के हिसाब लेयर फार्मिंग करें फिर जैसे जैसे आपको काम की जानकारी होती रहेगी और आप काम बढ़ाते रहेगे फिर आप कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग कर सकते है
Posted by parshotam
Bihar
05-01-2020 09:53 PM
Punjab
01-06-2020 12:03 PM
एक ऐसी प्रणाली जहां पौधों को प्राकृतिक मिट्टी के अलावा विकास मीडिया में उगाया जाता है. सभी पोषक तत्व सिंचाई के पानी में मिला दिया जाता है और पौधों को नियमित आधार पर आपूर्ति की जाती है हाइड्रोपोनिक रूप से निर्मित सब्जियां उच्च गुणवत्ता की हो सकती हैं और थोड़ा धुलाई/सफाई की आवश्यकता होती है छोटे क्षेत्र में .... (Read More)
एक ऐसी प्रणाली जहां पौधों को प्राकृतिक मिट्टी के अलावा विकास मीडिया में उगाया जाता है. सभी पोषक तत्व सिंचाई के पानी में मिला दिया जाता है और पौधों को नियमित आधार पर आपूर्ति की जाती है हाइड्रोपोनिक रूप से निर्मित सब्जियां उच्च गुणवत्ता की हो सकती हैं और थोड़ा धुलाई/सफाई की आवश्यकता होती है छोटे क्षेत्र में सब्जियों की बहुत अधिक पैदावार पैदा करना संभव है क्योंकि पौधे की वृद्धि के लिए अनुकूल माहौल बनाया जाता है. पौधों की जरूरत वाले सभी पोषक तत्व और पानी, हर समय उपलब्ध होते हैं सब्जियों को बढ़ने के लिए किसी को अच्छी मिट्टी की जरूरत नहीं हैपानी कुशलता से उपयोग किया जाता है अप्रयुक्त पोषक तत्वों के साथ मिट्टी का प्रदूषण बहुत कम है
Posted by Er Sarang Patel
Madhya Pradesh
05-01-2020 09:52 PM
Punjab
01-06-2020 12:05 PM
Patel ji kripya btaye ke abhi aapne isme kya kya khaad daali hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake,dhanywad
Posted by arjun
Uttar Pradesh
05-01-2020 09:50 PM
Punjab
01-06-2020 12:06 PM
मोटे आलुओं की पैदावार के लिए 13:0:45 की 2 किलो और magnesium EDTA 100 ग्राम प्रति एकड़ की स्प्रे करें बीमारियों के हमले को रोकने के लिए फंगसनाशी propineb 3 ग्राम प्रति लीटर पानी डालें, आलुओं का आकार और गिणती बढ़ाने के लिए humic acid (12 प्रतिशत) 3 ग्राम +MAP 12:61:0 की 8 ग्राम या DAP 15 ग्राम प्रति लीटर की स्प्रे पौधे की वृद्धि के समय करें..
Posted by Jaswinder Singh
Punjab
05-01-2020 09:45 PM
Punjab
01-07-2020 06:36 PM
Jaswinder ji kirpa krke apna swal vistar nal pusho ji tuci 5 piglet rakhen hai ja 5 gaban female pigs ja male pigs rakhen hai iss vare sahi jankari deo tan jo tuhanu sahi jankari diti ja skee.
Posted by कैलाश वाघैला
Rajasthan
05-01-2020 09:40 PM
Punjab
01-06-2020 12:08 PM
कैलाश जी आप इसके लिए carbendazim @4 ग्राम को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by कैलाश वाघैला
Rajasthan
05-01-2020 09:36 PM
Punjab
01-06-2020 12:09 PM
कैलाश जी आप इसके लिए carbendazim @4 ग्राम को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by ROHIT RANA
Uttar Pradesh
05-01-2020 09:35 PM
Punjab
01-06-2020 12:12 PM
rohit ji aap iske uper NPK 191919 @1 kilo ko 150 litre pani ke hisab se spray karen,dhanywad
Posted by ROHIT RANA
Uttar Pradesh
05-01-2020 09:34 PM
Punjab
01-06-2020 12:14 PM
Rohit ji aap iske uper NPK 191919 @1 kilo ko 150 litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by Abdhesh Kumar
Uttar Pradesh
05-01-2020 09:19 PM
Punjab
01-06-2020 12:18 PM
अबधेश जी अपनी खेती की सारी टीम की तरफ से आपको नव वर्ष की बहुत बहुत शुभकामनाये
Posted by kamlendra singh
Madhya Pradesh
05-01-2020 08:57 PM
Punjab
05-06-2020 08:54 AM
Kamlendra singh ji Powertrac euro 45 da RATE 605000/- hai, Thankyou.
Posted by ਬਲਜਿੰਦਰ ਸਿੰਘ
Punjab
05-01-2020 08:54 PM
Punjab
01-06-2020 12:22 PM
ਨੀਂਬੂ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਦਾ ਉਚਿੱਤ ਸਮਾਂ ਜੁਲਾਈ-ਅਗਸਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਕਿੰਨੂੰ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਦਾ ਸਮਾਂ ਜੂਨ ਦੇ ਮੱਧ(ਮਾਨਸੂਨ ਆਉਣ ਤੇ) ਤੋਂ ਸਤੰਬਰ ਦੇ ਅੰਤ ਤੱਕ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦੇ ਪੌਧੇ ਤੁਹਾਨੂੰ PAU ਲੁਧਿਆਣੇ ਤੋਂ ਮਿਲ ਜਾਣਗੇ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by chillubadgujjar
Haryana
05-01-2020 08:50 PM
Punjab
01-06-2020 12:25 PM
चूहों से बचाव के लिए आप नीचे लिखे तरीके प्रयोग कर सकते हैं, पिंजरो का प्रयोग करना - चूहो को पकड़ने के अलग अलग पिजंरो का प्रयोग किया जाता है इन पिजंरो का प्रयोग करने से पहले पिजंरे को अच्छी तरह धोकर प्रयोग करे ताकि किसी भी प्रकार की गंध ना आये साफ पिंजरो को खेत में चूहो के आने जाने वाले रास्ते और नुक्सान करने वाल.... (Read More)
चूहों से बचाव के लिए आप नीचे लिखे तरीके प्रयोग कर सकते हैं, पिंजरो का प्रयोग करना - चूहो को पकड़ने के अलग अलग पिजंरो का प्रयोग किया जाता है इन पिजंरो का प्रयोग करने से पहले पिजंरे को अच्छी तरह धोकर प्रयोग करे ताकि किसी भी प्रकार की गंध ना आये साफ पिंजरो को खेत में चूहो के आने जाने वाले रास्ते और नुक्सान करने वाली जगह पर रखे बडी संख्या में चूहो को पकडने के लिए पिंजरे में 10-15 ग्राम अनाज को तेल लगाकर दो से तीन दिनो तक मुंह खोलकर रखे चुहो को पीछे लगाने के बाद पिंजरे के अंदर कागज के टूकडो पर 10-15 ग्राम दाने और नालीदार दाखले पर चुटकी भर दाने रखकर मुंह को बंद कर दे, ऐसा करके तीन दिन तक चूहे और पकडे हुए चूहो को पानी में डूबो कर मारे पिंजरो का फिर से प्रयोग करने के लिए कम से कम 20 दिनो का फासला रखें, कीडे मार जहरो के प्रयोग से रोकथाम - चूहो की कीडे मार और जहर के प्रयोग से रोकथाम करने के लिए जहरीला चोगा प्रयोग करने में ध्यान और सही तरीका प्रयोग करने की जरूरत है चुहो को इस जहरीले चोगे को खाना प्रयोग किये दानो का मियारपन , स्वाद, और तेल की गंध पर निर्भर करता है जहरीला चोगा बनाना जिंक फॉसफाइड का प्रयोग - एक किलो बाजरा गेहूं ज्वार का दलिया या इनका मिश्रण लेकर इसमे 20 ग्राम तेल हो सके तो मुंगफली का तेल और 25 ग्राम जिंकफॉसफाइड डाल कर अच्छी तरह मिलाये इस प्रकार तैया किये जहरीले चोगे को कागज की पुडीया बनाकर खेत में गेज वाली जगह पर रखे बरोमोडाइओलोन का प्रयोग - 20 ग्राम बरोमोडाइओलोन 0 005 फीसदी पाऊडर, 20 ग्राम बूरा खंड, और 20 ग्राम तेल को एक किलो किसी भी अनाज के दलिये में मिलाये और पूरे खेत में 40 जगह पर रख दें रैकुमिन का प्रयोग- 50 ग्राम रैकुमिन 0 0375 फीसदी पाऊडर , 20 ग्राम मुंगफली या सूरजमुखी का तेल और 20 ग्राम बूरा खंड को किसी भी अनाज के दलीये में मिलाये यह भी चूहो को मारने में बहुत फायदेमंद है
Posted by Prem
Maharashtra
05-01-2020 08:47 PM
Punjab
01-06-2020 01:14 PM
प्रेम जी जैविक खेती में पहले साल इतना मुनाफा नहीं होता पर तीसरे वर्ष से पैदावार chemical खेती के बराबर हो जाती है और फसल का मूल्य भी ज्यादा मिलता है
Posted by Harmander jeet singh . fateh singh
Punjab
05-01-2020 08:42 PM
Punjab
01-06-2020 01:22 PM
Harmander ji tuc organic kanak kharidan de layi Rajinderpal Singh 9417337602 nal sampark kar sakde ho.dhanwad
Posted by Devendra Tyagi
Uttar Pradesh
05-01-2020 08:41 PM
Punjab
01-06-2020 02:15 PM
chlormequat chloride 50%sl ek gorwth regulator hai jo plants ki growth ko bdata hai iska istemal tubers ko dip krke fir seeds ki bijai ki jati hai.dhanywad
Posted by Devendra Tyagi
Uttar Pradesh
05-01-2020 08:35 PM
Punjab
01-06-2020 02:20 PM
chlormequat chloride 50%sl ek gorwth regulator hai jo plants ki growth ko bdata hai iska istemal tubers ko dip krke fir seeds ki bijai ki jati hai.dhanywad
Posted by Gurmeet Singh
Punjab
05-01-2020 08:34 PM
Punjab
01-06-2020 03:57 PM
Gurmeet ji tuci iss nu Gestaprogen powder 25gm rojana 20 din tak deo, jekar ehh gaban hoi tan rukk jawegi jekar gaban naa hoi tan heat vich aa jawegi.
Posted by manojkumar
Uttar Pradesh
05-01-2020 08:32 PM
Punjab
01-06-2020 02:22 PM
Manoj kumar ji kripya aap audio dubara bheje aapke dwara bheji gayi audio aupload nahi hui hai.dhanywad
Posted by Shyam Sunder
Bihar
05-01-2020 08:32 PM
Punjab
01-06-2020 02:23 PM
Shyam ji aap iske uper NPK 191919@1 kilo ko 150 litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by anil kr. Sharma
Bihar
05-01-2020 08:32 PM
Punjab
01-06-2020 03:01 PM
यह सख्त किस्म की फसल है और इसकी पैदावार के लिए हर तरह की मिट्टी अनुकूल होती है, जिसमें हल्की से लेकर भारी और कम निकास वाली मिट्टी भी शामिल है इसकी पैदावार 6.5 से 7.5 पी एच वाली मिट्टी में भी की जा सकती है अच्छी पैदावार के लिए इसे गहरे तल, अच्छे निकास वाली रेतली चिकनी मिट्टी से लेकर चिकनी मिट्टी में बीजना चाहिए खेत .... (Read More)
यह सख्त किस्म की फसल है और इसकी पैदावार के लिए हर तरह की मिट्टी अनुकूल होती है, जिसमें हल्की से लेकर भारी और कम निकास वाली मिट्टी भी शामिल है इसकी पैदावार 6.5 से 7.5 पी एच वाली मिट्टी में भी की जा सकती है अच्छी पैदावार के लिए इसे गहरे तल, अच्छे निकास वाली रेतली चिकनी मिट्टी से लेकर चिकनी मिट्टी में बीजना चाहिए खेत की दो बार तिरछी जोताई करें और फिर समतल करें खेत को इस तरह तैयार करें कि उसमें पानी ना खड़ा रहे फरवरी-मार्च या अगस्त-सितंबर का महीना अमरूद के पौधे लगाने के लिए सही माना जाता है पौधे लगाने के लिए 6x5 मीटर का फासला रखें यदि पौधे वर्गाकार ढंग से लगाएं हैं तो पौधों का फासला 7 मीटर रखें 132 पौधे प्रति एकड़ लगाए जाते हैं जड़ों को 25 सैं.मी. की गहराई पर बोना चाहिए
Posted by chillubadgujjar
Haryana
05-01-2020 08:26 PM
Punjab
01-06-2020 03:11 PM
चूहों से बचाव के लिए आप नीचे लिखे तरीके प्रयोग कर सकते हैं, पिंजरो का प्रयोग करना - चूहो को पडने के अलग अलग पिजंरो का प्रयोग किया जाता है इन पिजंरो का प्रयोग करने से पहले पिजंरे को अच्छी तरह धोकर प्रयोग करे ताकि किसी भी प्रकार की गंध ना आये साफ पिंजरो को खेत में चूहो के आने जाने वाले रास्ते और नुक्सान करने वाली.... (Read More)
चूहों से बचाव के लिए आप नीचे लिखे तरीके प्रयोग कर सकते हैं, पिंजरो का प्रयोग करना - चूहो को पडने के अलग अलग पिजंरो का प्रयोग किया जाता है इन पिजंरो का प्रयोग करने से पहले पिजंरे को अच्छी तरह धोकर प्रयोग करे ताकि किसी भी प्रकार की गंध ना आये साफ पिंजरो को खेत में चूहो के आने जाने वाले रास्ते और नुक्सान करने वाली जगह पर रखे बडी संखिया में चूहो को पकडने के लिए पिंजरे में 10-15 ग्राम अनाज को तेल लगाकर दो से तीन दिनो तक मुंह खोलकर रखे चुहो को मगर लगाने के बाद पिंजरे के अंदर कागज के टूकडो पर 10-15 ग्राम दाने और नालीदार दाखले पर चुटकी भर दाने रखकर मुंह को बंद कर दे ऐसा करके तीन दिन तक चूहे और पकडे हुए चूहो को पानी में डूबो कर मारे पिंजरो का दौबारा प्रयोग करने के लिए कम से कम 20 दिनो का फासला रखें कीडेमार जहरो के प्रयोग से रोकथाम - चूहो की कीडेमार और जहर के प्रयोग से रोकथाम करने के लिए जहरीला चोगा प्रयोग करने में ध्यान और सही तरीका प्रयोग करने की जरूरत है चुहो को इस जहरीले चोगे को खाना प्रयोग किये दानो का मियारपन , स्वाद, और तेल की गंध पर निर्भर करता है जहरीला चोगा बनाना जिंक फॉसफाइड का प्रयोग - एक किलो बाजरा गेहूं ज्वार का दलिया या इनका मिश्रण लेकर इसमे 20 ग्राम तेल हो सके तो मुंगफली का तेल और 25 ग्राम जिंकफॉसफाइड डाल कर अच्छी तरह मिलाये इस प्रकार तैया किये जहरीले चोगे को कागज की पुडीया बनाकर खेत में गेज वाली जगह पर रखे बरोमोडाइओलोन का प्रयोग - 20 ग्राम बरोमोडाइओलोन 0 005 फीसदी पाऊडर, 20 ग्राम बूरा खंड, और 20 ग्राम तेल को एक किलो किसी भी अनाज के दलिये में मिलाये और पूरे खेत में 40 जगह पर रख दें रैकुमिन का प्रयोग- 50 ग्राम रैकुमिन 0 0375 फीसदी पाऊडर , 20 ग्राम मुंगफली या सूरजमुखी का तेल और 20 ग्राम बूरा खंड को किसी भी अनाज के दलीये में मिलाये यह भी चूहो को मारने में बहुत फायदेमंद है.
Posted by NAVAL SINGH
Madhya Pradesh
05-01-2020 08:14 PM
Punjab
01-06-2020 03:18 PM
अच्छी पैदावार के लिए, बीजों को 1.5 सैं.मी. गहरा बोयें पंक्ति से पंक्ति में फासला 45 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 7.5 सैं.मी. का फासला रखें बिजाई पंक्तियों में या बुरकाव विधि द्वारा की जा सकती है एक एकड़ खेत में 4-5 किलोग्राम बीज काफी है जड़ों के उचित विकास के लिए बिजाई मेंड़ों पर करें बिजाई के समय गली हुई रूड़ी की खाद, के साथ .... (Read More)
अच्छी पैदावार के लिए, बीजों को 1.5 सैं.मी. गहरा बोयें पंक्ति से पंक्ति में फासला 45 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 7.5 सैं.मी. का फासला रखें बिजाई पंक्तियों में या बुरकाव विधि द्वारा की जा सकती है एक एकड़ खेत में 4-5 किलोग्राम बीज काफी है जड़ों के उचित विकास के लिए बिजाई मेंड़ों पर करें बिजाई के समय गली हुई रूड़ी की खाद, के साथ नाइट्रोजन 25 किलो (यूरिया 55 किलो), फासफोरस 12 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 75 किलो) प्रति एकड़ में प्रयोग करें
Posted by Devendra Tyagi
Uttar Pradesh
05-01-2020 08:14 PM
Maharashtra
01-08-2020 05:19 PM
Shrimaan ji, lohasin b.a.s.f. ki company ka koi product nahi hai agar ap Lihocin ki baat kar rahe hain to yeh ik podge ka growth regulator hai, yeh podhe mein ache vikas ke liye dala jata hai, yeh jayada gtar phool aney ke samay par dala jata hai, yani ke bijai se 30-35 din baad. Soyabean, yeh faslein jaise ke mungfali, papita, lehsun, pyaj, gehun, bangan, bhindi, alu, cotton aur angoor mein istemal kiya jata hai, iski dose har fasal ke liye alag sifarish ki jati hai, jaise ke 150-250 ml/acre (Soyabean, mungfali, papita, lehsun, pyaj, gehun), 80-100 ml/acre (bangan), 40-50 ml/acre (bhindi), 30-50 ml/acre (alu), 20-25 ml/acre(Cotton), 0.6-1 ml/Litre of water (angoor), dhanywad
Posted by dheeraj shukla
Uttar Pradesh
05-01-2020 08:07 PM
Rajasthan
01-06-2020 03:59 PM
आप डेयरी फार्मिंग करना चाहते है तो सबसे पहले आप इनकी ट्रेनिंग जरूर लें, ट्रेनिंग आप अपने नज़दीकी कृषि विज्ञान केन्द्र से प्राप्त कर सकते है जिससे आपको इस काम के बारे में जानकारी प्राप्त होगी और इन्हें शुरू करने और इनमें लाभ कमाने का सही तरीका पता लग सकता है और आप शुरूआत कम जानवरों से करें जैसे जैसे आपको जान.... (Read More)
आप डेयरी फार्मिंग करना चाहते है तो सबसे पहले आप इनकी ट्रेनिंग जरूर लें, ट्रेनिंग आप अपने नज़दीकी कृषि विज्ञान केन्द्र से प्राप्त कर सकते है जिससे आपको इस काम के बारे में जानकारी प्राप्त होगी और इन्हें शुरू करने और इनमें लाभ कमाने का सही तरीका पता लग सकता है और आप शुरूआत कम जानवरों से करें जैसे जैसे आपको जानकारी होती रहेगी फिर आप इस काम को बढ़ा सकते है, आप एक बार में इक्ट्ठी गाय/भैंसे ना खरीदें, गायों/भैंसो को 2-2 महीनों के फासले पर खरीदें या फिर 3 पहले खरीदें ओर 3 महीने बाद फिर 1-2 खरीद लें इससे दूध की कमी नहीं आयेगी पशु की नसल सबसे ज्यादा जरूरी है पशु खरीदने के समय कोशिश करें कि दिन में तीन बार दूध निकालकर ही पशु खरीदें भैंसो का एक दिन का दूध 12 लीटर और गायों को दूध 16-17 लीटर से कम ना हो गाभिनों को खरीदने का सही समय रखड़ियों से लेकर वैशाखी तक का होता है क्योंकि इस समय मौसम अच्छा होने के कारण हरा चारा भी खुला होता है गाभिनों के लिए शैड आवाजाई वाली सड़क पर ना बनायें और शैड सड़क से कम से कम 100 गज दूर हो शैड को धूप और हवा का ध्यान रखकर ही बनायें शैड हमेशा खेत या आस पास से 2 फुट ऊंचा बनायें क्योंकि निचले स्थान पर पानी खड़ा हो जाता है जिस कारण गंदगी पैदा हो जाती है और बाकी पशुओं का मल मूत्र का निकास भी आसानी से हो जाता है पशुओं के लिए बनायी जाने वाली खुरली ढाई तीन फुट चौड़ी होनी चाहिए खुरली पर खड़ने के लिए एक पशु को तकरीबन चार फुट जगह चाहिए मतलब 10 पशुओं के लिए 40 फुट लंबी खुरली बनेगी डेयरी फार्म से संबंधित सामान रखने के लिए स्टोर बनायें पशुओं का वितरण/दाना स्टोर करने के लिए कमरा सैलाब से रहित होना चाहिए शैड का फर्श पक्क, फिसलन रहित और जल्दी साफ होने वाला हो शैड में जितना हो सके पशुओं को खुला छोंड़े और पानी और दाना पूरा डालें पशु को खुला छोड़ने से पशुओं में अफारे की समस्या कम आती है बाकी अपनी आवश्यकता और क्षमता के मुताबिक ही सामान खरीदें और आर्थिक नुकसान से बचने के लिए प्रत्येक गाभिन का बीमा जरूर करवायें.
Posted by Ajit singh
Haryana
05-01-2020 07:59 PM
Chandigarh
01-06-2020 12:49 PM
lauki ki bijaai aap January -February mhine mein kr skte hain.
Posted by sohan dass
Punjab
05-01-2020 07:52 PM
Punjab
01-06-2020 04:02 PM
Tuci uss nu 21 din badd fir pett de kiria lai Flukarid-DS bolus deo ate uss nu agrimin powder de nal nal Sharkoferol liquid 50-50ml swere sham deo, iss nal frak paa jawega.
Posted by girish kumar sahu
Chattisgarh
05-01-2020 07:49 PM
Chandigarh
01-06-2020 12:51 PM
हंजी आप गेहूं की पिछेती किस्मों की बिजाई मध्य-जनवरी तक कर सकते हैं
Posted by Amit Yadav
Bihar
05-01-2020 07:44 PM
Punjab
01-06-2020 04:40 PM
मक्की में नदीन बड़ी समस्या होते हैं, जोकि खुराकी तत्व लेने में फसल से मुकाबला करते हैं और 35 प्रतिशत तक पैदावार कम कर देते हैं इसलिए अधिक पैदावार लेने के लिए नदीनों का हल करना जरूरी है मक्की की कम से कम दो गोडाई करें पहली गोडाई बिजाई से 20-25 दिन बाद और दूसरी गोडाई 40-45 दिन बाद , पर ज्यादा होने की हालत में एटराज़िन 500 ग.... (Read More)
मक्की में नदीन बड़ी समस्या होते हैं, जोकि खुराकी तत्व लेने में फसल से मुकाबला करते हैं और 35 प्रतिशत तक पैदावार कम कर देते हैं इसलिए अधिक पैदावार लेने के लिए नदीनों का हल करना जरूरी है मक्की की कम से कम दो गोडाई करें पहली गोडाई बिजाई से 20-25 दिन बाद और दूसरी गोडाई 40-45 दिन बाद , पर ज्यादा होने की हालत में एटराज़िन 500 ग्राम प्रति 200 लीटर पानी से स्प्रे करें गोडाई करने के बाद मिट्टी के ऊपर खाद की पतली परत बिछा दें और जड़ों से मिट्टी लगाएं
Posted by Mandeep dhillon
Punjab
05-01-2020 07:41 PM
Punjab
01-06-2020 04:38 PM
mandeep ji tuc pani ate urea spray to 5-6 din bad pao. dhanwad
Posted by nit
Gujarat
05-01-2020 07:37 PM
Punjab
01-06-2020 04:04 PM
कृपया आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by inderpal
Punjab
05-01-2020 07:35 PM
Punjab
01-06-2020 04:07 PM
Inderpal ji iss nal pashu de sarir vich infection di smasia ghht jndi hai, kyuki ehna chija nal sarir vich bimaria nal ladan di shakti vdhh jndi hai jis nal sarir di sahi growth hundi hai.
Posted by anandi lal sahu
Madhya Pradesh
05-01-2020 07:34 PM
Punjab
01-06-2020 04:47 PM
Anandi lal ji kripya aap btaye ke aapne iski bijai beej se ki hai ya aapne iski bijai kalm se ki hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by anandi lal sahu
Madhya Pradesh
05-01-2020 07:33 PM

Punjab
01-06-2020 04:56 PM
Anandi ji kripya btaye ke aapne iski bijai beej se ki hai ya kalm se ki hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake,dhanywad
Posted by anandi lal sahu
Madhya Pradesh
05-01-2020 07:28 PM
Punjab
01-06-2020 04:43 PM
पहली सिंचाई बिजाई के 20-25 दिनों के बाद सिंचाई करनी चाहिए यह सहायक जड़ें बनने की अवस्था होती है और यदि अवस्था में नमी की कमी हो तो उपज में काफी कमी आती है बिजाई के बाद 40-45 दिनों में शाखाएं बनने की अवस्था में सिंचाई करें तीसरी सिंचाई बिजाई के बाद 60-65 दिनों में जोड़ बनने के समय करें चौथी सिंचाई 80-85 दिनों में फूल बनने की .... (Read More)
पहली सिंचाई बिजाई के 20-25 दिनों के बाद सिंचाई करनी चाहिए यह सहायक जड़ें बनने की अवस्था होती है और यदि अवस्था में नमी की कमी हो तो उपज में काफी कमी आती है बिजाई के बाद 40-45 दिनों में शाखाएं बनने की अवस्था में सिंचाई करें तीसरी सिंचाई बिजाई के बाद 60-65 दिनों में जोड़ बनने के समय करें चौथी सिंचाई 80-85 दिनों में फूल बनने की अवस्था में करें पांचवी सिंचाई बिजाई के बाद 100-105 दिनों में गेहूं पकने की अवस्था में करें
Posted by ashish soni
Madhya Pradesh
05-01-2020 07:25 PM
Punjab
01-06-2020 04:52 PM
ashish ji aap iske uper NPK 191919@1 kilo ko 150 litre pani ke hisab se spray karen,dhanywad
Posted by gurpal singh
Punjab
05-01-2020 07:25 PM
Punjab
01-06-2020 04:08 PM
biofloc fish farm da punjab vich koe govt. project nahi hai ji. eh apne level te hi farming hundi hai. tusi jekar bioflock farm dekhna hai ta jaswinder singh ji da bioflock fish farm dekh sakde ho. ehna da contact number 98886 69632 hai ji.
Posted by aakash pathak
Chattisgarh
05-01-2020 07:24 PM
Rajasthan
01-06-2020 04:09 PM
Aakash ji yaddi aap jyada dudh lene ke liye cow rakhna chahte hai to aap HF nasal ki cow rakh skte hai..