
Posted by Lakhbeer hamad
Punjab
06-01-2020 08:51 PM
shrimaan g knak vich tuc bhut vdia tareeke nal nutrition ditti hai hun barish v ho rahi hai jekar knak di growth sahi chal rahi hai tn koi spray na kro g..barish to baad situation according hi spray dobara puch ke kro g..
Posted by jitendra singh Chaudhary
Rajasthan
06-01-2020 08:51 PM
जितेंद्र जी आप किस्मे जैसे Allahbad Sufeda ,Sardar ,Lalit की बिजाई कर सकते है धन्यवाद

Posted by Ashish chandrakar
Chattisgarh
06-01-2020 08:48 PM
इस फसल को मिट्टी की अलग अलग किस्मों, जिनमें पानी सोखने की क्षमता कम होती है और जिनकी पी एच 5.0 से 9.5 के बीच में होती है, में भी उगाया जा सकता है धान की पैदावार के लिए रेतली से लेकर गारी मिट्टी तक, और गारी से चिकनी मिट्टी जिसमें पानी को सोखने की क्षमता कम होती है इस फसल के लिए अच्छी मानी जाती है शुष्क खेतों को अच्छा बन.... (Read More)
इस फसल को मिट्टी की अलग अलग किस्मों, जिनमें पानी सोखने की क्षमता कम होती है और जिनकी पी एच 5.0 से 9.5 के बीच में होती है, में भी उगाया जा सकता है धान की पैदावार के लिए रेतली से लेकर गारी मिट्टी तक, और गारी से चिकनी मिट्टी जिसमें पानी को सोखने की क्षमता कम होती है इस फसल के लिए अच्छी मानी जाती है शुष्क खेतों को अच्छा बनाने, नदीन रहित और सेहतमंद वृद्धि के लिए ग्लाफोसेट डालनी चाहिए गेहूं की कटाई के बाद ज़मीन पर हरी खाद के तौर पर मई के पहले सप्ताह ढैंचा (बीज दर 20 किलोग्राम प्रति एकड़), या सन (बीज दर 20 किलोग्राम प्रति एकड़) या लोबीया (बीज दर 12 किलोग्राम प्रति एकड़) की बिजाई करनी चाहिए जब फसल 6 से 8 सप्ताह की हो जाए तो इसे खेत में कद्दू करने से एक दिन खेत में ही जोत देना चाहिए इस तरह प्रति एकड़ 25 किलो नाइट्रोजन खाद की बचत होती है भूमि को समतल करने के लिए लेज़र लेवलर का प्रयोग किया जाता है इसके बाद खेत में पानी खड़ा कर दें ताकि भूमि के अंदर ऊंचे नीचे स्थानों की पहचान हो सके इस तरह पानी के रसाव के कारण पानी की होने वाले बर्बादी को कम किया जा सके बिजाई का समय यू पी के सिंचित और निम्न बारानी क्षेत्रों में मध्य जून से शुरूआती जुलाई तक का समय उपयुक्त होता है बीज की गहराई:-पौधे की गहराई 2-3 सैं.मी. होनी चाहिए फासला बनाकर लगाने से पौधे ज्यादा पैदावार देते हैं एक एकड़ खेत में 6-8 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बिजाई से पहले 10 लीटर पानी में 20 ग्राम कार्बेनडाज़िम $ 1 ग्राम स्ट्रैप्टोसाईक्लिन घोल लें और इस घोल में बीजो को 8-10 घंटे तक भिगोयें उसके बाद बीजों को छांव में सुखाएं और फिर बिजाई के लिए प्रयोग करें फसल को जड़ गलन रोग से बचाने के लिए नीचे दिए गए फंगसनाशी का प्रयोग किया जा सकता है पहले रासायनिक फंगीनाशी का प्रयोग करें फिर बीजों का टराईकोडरमा के साथ उपचार करें वैट बैड नर्सरी : यह तकनीक उन क्षेत्रों में अपनाई जाती है जहां पर पानी ज्यादा मात्रा में पाया जाता है नर्सरी का 1/10 हिस्सा दूसरे खेत में लगाया जाता है इसकी बिजाई छींटे द्वारा की जाती है यहां पर खेत की जोताई और खेत को समतल किया जाता है बैडों पर कईं दिन तक नमी बनाए रखनी चाहिए पानी से खेत को ज्यादा ना भरें जब नर्सरी 2 सैं.मी. से वृद्धि कर जाए तब पानी को खेत में लगाते रहना चाहिए बिजाई के 15 दिन बाद 26 किलो यूरिया डालना चाहिए जब नर्सरी 25-30 सैं.मी. तक लंबी हो जाए तब उसे 15-21 दिन बाद दूसरे खेत में लगा देना चाहिए और खेत को लगातार पानी लगाते रहना चाहिए सूखे बैड वाली नर्सरी : यह तकनीक शुष्क क्षेत्रों में अपनाई जाती है जो बैड बनाया जाता है वो बिजाई वाले खेत का 1/10 हिस्से में बीज बोया जाता है बैड का आकार सीमित होना चाहिए और उसकी ऊंचाई 6-10 से.मी होनी चाहिए धान का आधा जला हुआ छिलका बैड पर बिखेर देना चाहिए इससे जड़ें मजबूत होती हैं सही समय पर सिंचाई करते रहना चाहिए और नमी बनाए रखना चाहिए ताकि नए पौधे नष्ट ना हों तत्वों की पूर्ति के लिए खाद डालना जरूरी है मॉडीफाईड मैट नर्सरी : यह नर्सरी लगाने का एक ऐसा तरीका है जिसमें कम जगह और कम बीजों की जरूरत होती है यह नर्सरी किसी भी जगह पर बनाई जा सकती हैं जहां पर समतल जगह हो और पानी की सुविधा हो इसकी पनीरी लगाने के लिए 1% खेत की जरूरत होती है 4 से.मी की सतह पर नए पौधे लगाए जाते हैं इसे बनाने के लिए 1 मीटर चौड़े और 20-30 मीटर लंबे जमीन के टुकड़े की जरूरत होती है इसके ऊपर बिछाने के लिए पॉलीथीन और केले के पत्तों की जरूरत होती है इसके इलावा एक लकड़ी का बकसा जो कि 4 से.मी गहरा होता हैं मिट्टी के मिश्रण से भरा होता है बीजों को इसके अंदर रख देना चाहिए और फिर बीजों को सूखी मिट्टी के साथ ढक देना चाहिए इसके बाद पानी का छिड़काव कर देना चाहिए लकड़ी के बक्से को नमी देते रहना चाहिए बिजाई से 11-14 दिनों के बाद पौध तैयार हो जाती है जब पौध तैयार हो जाती है तब मैट से पौध को दूसरे खेत में रोपण कर दिया जाता है फासला: पौधों का फासला 20x20 सैं.मी. या 25x25 सैं.मी. होना चाहिए पनीरी लगाने का ढंग 1. कद्दू करके लगाई जाने वाली पनीरी : आमतौर पर पंक्ति में लगाए जाने वाले पौधे 20x15 सैं.मी. दूरी पर लगाए जाते हैं और देरी से लगाई जाने वाली पनीरी 15x15 सैं.मी. पर लगाई जाती है नए पौधों की गहराई 2-3 सैं.मी. होनी चाहिए 2. बैड बनाकर लगाई जाने वाली पनीरी : यह बैड भारी ज़मीनों के लिए बनाए जाते हैं पनीरी लगाने से पहले खालियों में पानी लगाना चाहिए और फिर पनीरी को खेत में लगाना चाहिए पौधे से पौधे का फासला 9 सैं.मी. होना चाहिए 3. मशीनी ढंग से लगाई जाने वाली पनीरी : मैट पनीरी के लिए मशीनों का प्रयोग किया जाता है यह मशीन 30x12 सैं.मी. के फासले पर पनीरी लगानी चाहिए सिंचित और कम बारानी वाले क्षेत्रों के लिए लगभग 41-50 किलो नाइट्रोजन (यूरिया 90-110 किलो), 30 किलो फासफोरस (एस एस पी 190 किलो) और 27 किलो पोटाश (म्यूरेट ऑफ पोटाश 45 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा रोपाई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटकर, नाइट्रोजन का 1/4 हिस्सा शाखाएं निकलने के समय और 1/4 हिस्सा बालियां निकलने के समय डालें जल जमाव वाले क्षेत्रों में नाइट्रोजन 30-41 किलो (यूरिया 65-90 किलो) प्रति एकड़ में शुरूआती खुराक के तौर पर डालें कम बारानी क्षेत्रों के लिए नाइट्रोजन 23-32 किलो (यूरिया 52-70 किलो) और फासफोरस 16 किलो (एस एस पी 100 किलो) प्रति एकड़ में प्रयोग करें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस की पूरी मात्रा रोपाई से पहले और बाकी बची नाइट्रोजन बालियां निकलने के समय डालें ऊंचे क्षेत्रों के लिए नाइट्रोजन 23 किलो (यूरिया 52 किलो), फासफोरस 12 किलो (एस एस पी 75 किलो) और पोटाश 12 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 20 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के तीन सप्ताह बाद डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटे पहले भाग को बिजाई के 6 सप्ताह बाद और दूसरे भाग को बालियां निकलने के समय डालें रोपाई के 2 से 3 दिन बाद नदीनों के अंकुरण से पहले बूटाक्लोर 50 ई सी 1200 मि.ली. या थायोबेनकार्ब 50 ई सी 1200 मि.ली. या पैंडीमैथालीन 30 ई सी या प्रैटीलाक्लोर 50 ई सी 600 मि.ली. प्रति एकड़ में डालें इनमें से किसी एक नदीननाशक को 60 किलो रेत में मिलाकर 4-5 सैं.मी. गहरे खड़े पानी में बुरकाव करें चौड़े पत्ते वाले नदीनों की रोकथाम के लिए मेटसलफुरॉन 20 डब्लयु पी 30 ग्राम को 150 लीटर पानी में मिलाकर नदीनों के अंकुरण के बाद रोपाई के 20-25 दिन बाद डालें स्प्रे से पहले खेत में खड़े पानी का निकास कर दें और स्प्रे के एक दिन बाद सिंचाई करें नदीनों के अंकुरण से पहले बूटाक्लोर 1 लीटर को बिजाई के 6 से 7 दिनों के बाद प्रति एकड़ में स्प्रे करें पनीरी लगाने के बाद खेत में दो सप्ताह तक अच्छी तरह पानी खड़ा रहने देना चाहिए जब सारा पानी सूख जाए तो उसके दो दिन बाद फिर से पानी को लगाना चाहिए खड़े पानी की गहराई 10 सै.मी. से ज्यादा नहीं होनी चाहिए खेत में से बूटी और नदीनों को निकालने से पहले खेत में से सारा पानी निकाल देना चाहिए ओर इस प्रक्रिया के पूरे होने के बाद खेत की फिर से सिंचाई करनी चाहिए पकने से 15 दिन पहले सिंचाई करनी बंद करनी चाहिए ताकि फसल को आसानी से काटा जा सके ऊंची भूमि पर सिंचाई पूरी तरह से बारिश पर निर्भर करती है बारिश की तीव्रता और नियमितता के आधार पर और पानी की उपलब्धता के आधार पर गंभीर अवस्थाओं में सिंचाई करें जब दाने पूरी तरह पक जायें और फसल का रंग सुनहरी हो जाये तो खड़ी फसल की कटाई कर लेनी चाहिए ज्यादातर फसल की कटाई हाथों से द्राती से या कंबाइन से की जाती है काटी गई फसल के बंडल बनाके उनको छांटा जाता है दानों को बालियों से अलग कर लिया जाता है दानों को बालियों से अलग करने के बाद उसकी छंटाई की जाती है धान की कटाई करने के बाद पैदावार को काटने से लेकर प्रयोग तक नीचे लिखी प्रक्रिया अपनाई जाती है 1.कटाई 2. छंटाई 3. सफाई 4. सुखाना 5. गोदाम में रखना 6.पॉलिश करना और इसके बाद इसे बेचने के लिए भेजना दानों को स्टोर करने से पहले इन्हें कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए 10 किलोग्राम दानों के लिए 500 ग्राम नीम के पाउडर को मिलाना चाहिए स्टोर किए गए दानों को कीटों के हमले से बचाने के लिए 30 मि.ली. मैलाथियोन 50 ई.सी. को 3 लीटर पानी में घोल तैयार करके इसका छिड़काव करना चाहिए इस घोल का छिड़काव 100 वर्ग मीटर के क्षेत्र में हर 15 दिनों के बाद करना चाहिए, धन्यवाद

Posted by Rameshwar
Rajasthan
06-01-2020 08:43 PM
Red sandalwood, white sandalwood चंदन की किस्में हैं. इसकी खेती के लिए जमीन को अप्रैल-मई महीने में तैयार किया जाता है इसकी बिजाई मई-अक्टूबर महीने में की जाती है पर इसको बीजने का सबसे सही समय जुलाई-अगस्त महीना है पौधे से पौधे की दूरी 3 मीटर होनी चाहिए..यूरिया@50ग्राम/पेड़/साल , एसएसपी@100 ग्राम/पेड़/साल और मयूरिएट आफ पोटाश@40 ग्राम/पेड़/साल.... (Read More)
Red sandalwood, white sandalwood चंदन की किस्में हैं. इसकी खेती के लिए जमीन को अप्रैल-मई महीने में तैयार किया जाता है इसकी बिजाई मई-अक्टूबर महीने में की जाती है पर इसको बीजने का सबसे सही समय जुलाई-अगस्त महीना है पौधे से पौधे की दूरी 3 मीटर होनी चाहिए..यूरिया@50ग्राम/पेड़/साल , एसएसपी@100 ग्राम/पेड़/साल और मयूरिएट आफ पोटाश@40 ग्राम/पेड़/सालको दो हिस्सों में डालना चाहिए पहली डोज़ मार्च-अप्रैल महीने में और दूसरी डोज़ सितम्बर-अक्टूबर में दी जानी चाहिए इसके बारे में और जानकारी लेने के लिए आप अरुण खुरमी 9878123123 जी से संपर्क कर सकते है

Posted by Rameshwar
Rajasthan
06-01-2020 08:37 PM
Red sandalwood, white sandalwood चंदन की किस्में हैं. इसकी खेती के लिए जमीन को अप्रैल-मई महीने में तैयार किया जाता है इसकी बिजाई मई-अक्टूबर महीने में की जाती है पर इसको बीजने का सबसे सही समय जुलाई-अगस्त महीना है पौधे से पौधे की दूरी 3 मीटर होनी चाहिए..यूरिया@50ग्राम/पेड़/साल , एसएसपी@100 ग्राम/पेड़/साल और मयूरिएट आफ पोटाश@40 ग्राम/पेड़/साल.... (Read More)
Red sandalwood, white sandalwood चंदन की किस्में हैं. इसकी खेती के लिए जमीन को अप्रैल-मई महीने में तैयार किया जाता है इसकी बिजाई मई-अक्टूबर महीने में की जाती है पर इसको बीजने का सबसे सही समय जुलाई-अगस्त महीना है पौधे से पौधे की दूरी 3 मीटर होनी चाहिए..यूरिया@50ग्राम/पेड़/साल , एसएसपी@100 ग्राम/पेड़/साल और मयूरिएट आफ पोटाश@40 ग्राम/पेड़/सालको दो हिस्सों में डालना चाहिए पहली डोज़ मार्च-अप्रैल महीने में और दूसरी डोज़ सितम्बर-अक्टूबर में दी जानी चाहिए इसके बारे में और जानकारी लेने के लिए आप अरुण खुरमी 9878123123 जी से संपर्क कर सकते है

Posted by dayaram
Madhya Pradesh
06-01-2020 08:33 PM
दयाराम जी गेहूं काटने वाली मशीन लेने के लिए आप gurbaksish सिंह 9888831443 Bakhsish Combine के साथ संम्पर्क कर सकते हैं। धन्यवाद

Posted by Dumesh kumar dewangan
Chattisgarh
06-01-2020 08:29 PM
How to Earning with the Help of Balcony , Court yard ,Roof top and open land
Pearl ( सीपों में मोती पालन) Farming and
Oyster Mushroom Farming
Training program At Bhopal
( By integrated farmer Amit K. Bamoriya )
Training date 12th January
Process
1) Registration fee 1100/-
( all aseedo benefits & tea+ lunch, Book , Certificate and life time support etc )
2) Mushroom training
Rs 1000/-
( 5 begs material free )
3) Pearl farming training
2500/- )
साथ में पाएं अनेकों उपहार
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Multyplax
3star hotel
Top class colleges and coaching classes
Hospital ,medical and blood test lab
आदि में 20 से 50 परसेंट तक की छूट पाएं ज.... (Read More)
How to Earning with the Help of Balcony , Court yard ,Roof top and open land
Pearl ( सीपों में मोती पालन) Farming and
Oyster Mushroom Farming
Training program At Bhopal
( By integrated farmer Amit K. Bamoriya )
Training date 12th January
Process
1) Registration fee 1100/-
( all aseedo benefits & tea+ lunch, Book , Certificate and life time support etc )
2) Mushroom training
Rs 1000/-
( 5 begs material free )
3) Pearl farming training
2500/- )
साथ में पाएं अनेकों उपहार
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आदि में 20 से 50 परसेंट तक की छूट पाएं जिंदगी भर
Book your seat Before
10th January
Note - only Pre registered
Person Allowed for training No spot Registration
Amit Bamoriya
Aseedo Solution Pvt Ltd
Near Quality Sweets
HIG- 9B, 2nd floor, Leela Tower, near Piplani Petrol Pump, Bhopal
9770085381 or 9883232938
नोट _

Posted by rajat majumdar
West Bengal
06-01-2020 08:28 PM
रजत जी आप इसके पत्तों के नीचे मछर का हमला चेक करें अगर मौजूद है तो आप इसके ऊपर imidacloprid @1.5 ml को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद

Posted by sunilmeena
Madhya Pradesh
06-01-2020 08:27 PM
Sunilmeena ji, Pusa 1 ka rate abhi is samay 2300- 2800 rupay prati quintal ke hisaab se chal raha hai, rate sarkar ki taraf se niyukt kiye jate hain, iske bare mein abhi kuch nahi kaha ja sakta, dhanywad
Posted by Om Panwar Jhinjhinyali
Rajasthan
06-01-2020 08:26 PM
ओम जी आप zinc को online मंगवा सकते है जिसका link है
https://www.indiamart.com/proddetail/zinc-sulphate-33-14262384812.html

Posted by sohan lal
Punjab
06-01-2020 08:18 PM
ਅਗੇਤੀ ਰੁੱਤ ਦੀ ਕਿਸਮ ਲਈ ਇਸ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਜੂਨ-ਜੁਲਾਈ ਮਹੀਨੇ ਵਿੱਚ ਕਰੋ ਮੁੱਢਲੀ ਰੁੱਤ ਦੀ ਕਿਸਮ ਲਈ ਬਿਜਾਈ ਅਗਸਤ ਤੋਂ ਅੱਧ ਸਤੰਬਰ ਅਤੇ ਅਕਤੂਬਰ ਤੋਂ ਨਵੰਬਰ ਦੇ ਪਹਿਲੇ ਹਫਤੇ ਪਿਛੇਤੀ ਕਿਸਮ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰੋ

Posted by Ram Verma
Uttar Pradesh
06-01-2020 08:14 PM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद

Posted by Arbind kumar
Bihar
06-01-2020 08:10 PM
आप सिरोही नसल की बकरियों को खरीदने के लिए Subash Kumar/Raj Kumar 9504617933, 9504097570 RS Goat Farm से संपर्क कर सकते है

Posted by rampravesh patel
Uttar Pradesh
06-01-2020 08:07 PM
बीज बोने के लिए फरवरी से मार्च या जून से जुलाई का समय उपयुक्त होता है 1.5 मीटर चौड़े बैड के दोनों ओर बीजों को बोयें और पौधे से पौधे में 45 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें गड्ढे में 2.5-3 सैं.मी. की गहराई पर बीजों को बोयें गड्ढा खोदकर बिजाई की जाती है करेले की फसल को अच्छी तरह से गली हुई रूड़ी की खाद 10-15 टन, नाइट्रोजन 13 किलो (यूर.... (Read More)
बीज बोने के लिए फरवरी से मार्च या जून से जुलाई का समय उपयुक्त होता है 1.5 मीटर चौड़े बैड के दोनों ओर बीजों को बोयें और पौधे से पौधे में 45 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें गड्ढे में 2.5-3 सैं.मी. की गहराई पर बीजों को बोयें गड्ढा खोदकर बिजाई की जाती है करेले की फसल को अच्छी तरह से गली हुई रूड़ी की खाद 10-15 टन, नाइट्रोजन 13 किलो (यूरिया 30 किलो), फासफोरस 20 किलो (एस एस पी 125 किलो) और पोटाशियम 20 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 35 किलो) प्रति एकड़ में डालें फासफोरस और पोटाशियम की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा बीज की बिजाई से पहले डालें बाकी बची नाइट्रोजन को बिजाई के एक महीने बाद डालें
Posted by Hardeep Singh
Punjab
06-01-2020 08:07 PM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਜੇਕਰ ਕਣਕ ਵਿੱਚ ਗੁੱਲੀ ਡੰਡਾ ਨਹੀਂ ਹੈ ਤਾਂ ਸਪਰੇਅ ਨਾ ਕਰੋ ਜੀ

Posted by Bajrang Lal Dhakar
Rajasthan
06-01-2020 08:05 PM
इसको मिट्टी की अलग-अलग किस्मे जैसे की रेतली दोमट से भारी मिट्टी में उगाया जा सकता हैं खीरे की फसल के लिए दोमट मिट्टी में, जिसमे जैविक तत्वों की उच्च मात्रा हो और पानी का अच्छा निकास हो, उचित पैदावार देती है खीरे की खेती के लिए मिट्टी का pH 6-7 होना चाहिए Arka shital : इसके फल हल्के हरे रंग के होते हैं इसकी औसतन पैदावार 80 क्.... (Read More)
इसको मिट्टी की अलग-अलग किस्मे जैसे की रेतली दोमट से भारी मिट्टी में उगाया जा सकता हैं खीरे की फसल के लिए दोमट मिट्टी में, जिसमे जैविक तत्वों की उच्च मात्रा हो और पानी का अच्छा निकास हो, उचित पैदावार देती है खीरे की खेती के लिए मिट्टी का pH 6-7 होना चाहिए Arka shital : इसके फल हल्के हरे रंग के होते हैं इसकी औसतन पैदावार 80 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Lucknow Early: इसके फल लंबे और चमकदार होते हैं यह किस्म लखनऊ और उसके नजदीक के क्षेत्रों में प्रसिद्ध है स्थानीय किस्में Nasdar, Sikkim Kakadi आदि Pant sankar khira 1: इसके फल लंबे और बेलनाकार होते हैं इसकी औसतन पैदावार 80 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pant Khira – 1: इसके फल लंबे और बेलनाकार और सफेद धारीदार होते हैं इसके फल 50-60 दिनों के बाद पहली तुड़ाई के लिए तैयार हो जाते हैं इसकी औसतन पैदावार 60 क्विंटल प्रति एकड़ होती है खीरे की खेती के लिए, अच्छी तरह से तैयार और नदीन रहित खेत की जरूरत होती है मिट्टी को अच्छी तरह से भुरभुरा बनाने के लिए, बिजाई से पहले 3-4 बार खेत की जोताई करें रूड़ी की खाद, जैसे गाये के गोबर को मिट्टी में मिलाये, ताकि खेत की उपजाऊ शक्ति बढ़ जाये 30 सैं.मी. चौड़े और आवश्यक लंबाई के बैड तैयार करें दो बैडों के बीच 1.5 से 2 मीटर का फासला रखें उत्तर प्रदेश में, खीरे की खेती के लिए फरवरी से मार्च का महीना उपयुक्त होता है पहाड़ी क्षेत्रों में, बिजाई मार्च से अप्रैल में की जाती है बिजाई के ढंग के आधार पर फासला भी विभिन्न होता है बिजाई के लिए कतार से कतार में 1.5 मीटर और पौधे से पौधे में 30-45 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीज को 2-3 सैं.मी. गहराई पर बोयें एक एकड़ खेत के लिए 0.8-1.2 किलोग्राम बीज की मात्रा काफी हैं खेत की तैयारी के समय, 8-10 टन गाय का गला हुआ गोबर नाइट्रोजन 32 किलो (यूरिया 70 किलो), फासफोरस 24 किलो (सिंगल फास्फेट 150 किलो) और पोटाशियम 24 किलो (म्यूरेट ऑफ़ पोटाश 40 किलो) शुरुआत में खाद के रूप में डालें बिजाई के 32-3सप्ताह पहले गाय का गोबर, पोटाश और फासफोरस की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा डालें नाइट्रोजन की मात्रा को दो भागों में बांटकर पहली बिजाई के 25-30 दिनों के बाद और दूसरी बिजाई के 45-50 दिनों के बाद डालें बारिश के मौसम में सिंचाई की जरूरत नहीं होती है और गर्मी के मौसम में इसको बार-बार सिंचाई की जरूरत होती है 4 से 7 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें तुड़ाई के दो दिन पहले सिंचाई करें, इससे फल ताजे, चमकदार और आकर्षित रहेंगे
Posted by charanvir singh
Punjab
06-01-2020 08:05 PM
Charanvir ji iss nal pashu di harmons smasia thik hundi hai, pashu jldi nwe dudh hunda hai ate sahi sme te heat vich aunda hai ate vdia growth hundi hai..

Posted by Arbind kumar
Bihar
06-01-2020 08:03 PM
kis liye, kheti ke liye ya kisi aur system ke liye , pani ki gehraiee v bataye apke yaha ki
Posted by डिलेश्वर चंद्राकर
Chattisgarh
06-01-2020 07:59 PM
यह एक महत्वपूर्ण सब्जी की फसल है जिसको ग्रीन हाउस या शेड नेट हाउस में उगाया जाता है इसकी खेती के लिए 18-35° सै. मिट्टी का तापमान होना आवश्यक है इसके अच्छे विकास के लिए विभिन्न प्रकार की चिकनी से दोमट मिट्टी में इसकी खेती करें यह कुछ हद तक तेज़ाबी मिट्टी में उगाई जा सकती है यह रेतली दोमट मिट्टी और पानी के अच्छे निक.... (Read More)
यह एक महत्वपूर्ण सब्जी की फसल है जिसको ग्रीन हाउस या शेड नेट हाउस में उगाया जाता है इसकी खेती के लिए 18-35° सै. मिट्टी का तापमान होना आवश्यक है इसके अच्छे विकास के लिए विभिन्न प्रकार की चिकनी से दोमट मिट्टी में इसकी खेती करें यह कुछ हद तक तेज़ाबी मिट्टी में उगाई जा सकती है यह रेतली दोमट मिट्टी और पानी के अच्छे निकास में बढ़िया परिणाम देती है शिमला मिर्च की खेती के लिए मिट्टी का pH 6-7 होना चाहिए प्रसिद्ध किस्में:-Bomby (red color),Orobelle (yellow color),Indra (green).शिमला मिर्च की खेती के लिए, ज़मीन को अच्छी तरह से तैयार करें ज़मीन को भुरभुरा बनाने के लिए, 5-6 बार सुहागे से जोताई करें खेत की तैयारी के समय खेत में रूड़ी की खाद डालें और मिट्टी में मिलाएं बीजों को मुख्य तौर पर अक्तूबर के अंत में बोयें और रोपण के लिए मध्य-फरवरी का समय उचित होता है जल्दी पैदावार के लिए, बीजों को मध्य-अक्तूबर में बोयें और रोपण के लिए नवंबर के अंत का समय उचित होता है बिजाई के लिए पंक्ति से पंक्ति में 50 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 40 सैं.मी. का फासला रखें बीज को 2-4 सैं.मी. गहरा बोयें .प्लास्टिक शीट की मदद से सुरंगी खेती: शिमला मिर्च की अगेती पैदावार के लिए गर्मियों के शुरू में इस विधि का प्रयोग किया जाता है यह दिसंबर से मध्य-फरवरी महीने के ठंडे मौसम में फसल की सुरक्षा करने में सहायता करती है बिजाई के समय कतार से कतार में 130 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 30 सैं.मी. का फासला रखें बिजाई से पहले 45-60 सैं.मी. लम्बे डंडों को मिट्टी में स्थापित करें खेत को प्लास्टिक शीट से (100 गेज मोटाई) डंडों की सहायता से लगाएं फरवरी के महीने में सही तापमान होने पर प्लास्टिक शीट को हटा दें 2. गड्डे खोद कर बीज लगाकर भी इसकी खेती की जाती है बीज की मात्रा:-एक एकड़ खेत के लिए 200-300 बीजों का प्रयोग करें बीज का उपचार मिट्टी से होने वाली बीमारीयों से बचाने के लिए बिजाई से पहले थीरम या कप्तान, सिरेसन आदि 2 ग्राम में प्रति किलो बीजों को भिगोएं शिमला मिर्च की खेती के लिए, सबसे पहले नर्सरी बैडों को तैयार करें नए पौधे लगाने के लिए 300 x 60 x 15 सैं.मी. आकार के सीड बैड तैयार करें बीजों को तैयार किये गए बैडों पर बोयें और बिजाई के बाद नर्सरी बैडों को मिट्टी की पतली परत से ढक दें बीजों के उचित अंकुरण के लिए बिजाई के बाद तैयार बैडों पर हल्की सिंचाई करें जब पौधे के 4-5 पत्ते निकलने शुरू हो जाये तो आरोपण करें मुख्य खेत में आरोपण किया जाता है आरोपण आमतौर पर बरसात के मौसम में किया जाता है आरोपण के लिए मुख्यतः 50-60 दिनों की पौध का प्रयोग किया जाता है आरोपण से पहले नर्सरी बैडों को पानी लगाएं ताकि पौधे को आसानी से उखाड़ा जा सके खेत की तैयारी के समय, 20-25 टन प्रति एकड़ रूड़ी की खाद मिट्टी में मिलाएं रूड़ी की खाद के साथ, नाइट्रोजन 50 किलो( यूरिया 110 किलो), फासफोरस 25 किलो(सिंगल सुपर फासफेट 175 किलो) और पोटाशियम 12 किलो(मिउरेट ऑफ़ पोटाश 20 किलो) प्रति एकड़ में डालें पोटाशियम, फासफोरस की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन 1/3 हिस्सा रोपण से पहले कतारों में खाद के रूप में मिलाएंऔर बाकी बची हुई नाइट्रोजन को दो बराबर हिस्सों में डालें पहली खुराक रोपण के एक महीने बाद और दूसरी रोपण के दो महीने के बाद डालें फसल की बढ़िया पैदावार के लिए, उचित समय के अंतराल पर गोड़ाई करें नए पौधों के रोपण के 2-3 हफ्ते बाद मेंड़ पर मिट्टी चढ़ाएं यह खेत को नदीन मुक्त करने में मदद करती है रोपण के 30 दिनों के बाद पहली गोड़ाई और 60 दिनों के बाद दूसरी गोड़ाई करें बिजाई के बाद तुरंत हल्की सिंचाई करें अगली सिंचाई रोपण के तुरंत बाद करें और फिर आवश्यकता के अनुसार सिंचाई करें शुष्क और अर्ध शुष्क क्षेत्रों में सिंचाई उचित अंतराल पर आवश्यक होती है अपरिपक्व हरे फल कटाई के लिए तैयार होते है अपरिपक्व फल नर्म और कुरकुरे कटाई के लिए बढ़िया होते है शिमला मिर्च की औसतन पैदावार मुख्य तौर 40-50 क्विंटल प्रति एकड़ होती है

Posted by pawan
Punjab
06-01-2020 07:58 PM
पवन जी आप दोनों में किसी का भी इस्तेमाल कर सकते है दोनों ही फायदेमंद है इसके इलावा आप जिप्सम का इस्तेमाल करें इसकी मात्रा 1 क्विंटल प्रति एकड़ के हिसाब इस्तेमाल किया जाता है धन्यवाद

Posted by Gaurav Kumar
Bihar
06-01-2020 07:55 PM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by mayaram dhiwar
Chattisgarh
06-01-2020 07:55 PM
Punjab Swarna: यह किस्म 2018 में जारी हुई है इसके पत्ते गहरे हरे रंग के होते हैं इसके फल अंडाकार, संतरी रंग के और दरमियाने होते हैं इस किस्म की पहली तुड़ाई पनीरी लगाने के 120 दिनों के बाद की जाती है मार्च के अंत तक इस किस्म की औसतन पैदावार 166 क्विंटल प्रति एकड़ और कुल उपज 1087 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह किस्म सलाद के तौर पर प्र.... (Read More)
Punjab Swarna: यह किस्म 2018 में जारी हुई है इसके पत्ते गहरे हरे रंग के होते हैं इसके फल अंडाकार, संतरी रंग के और दरमियाने होते हैं इस किस्म की पहली तुड़ाई पनीरी लगाने के 120 दिनों के बाद की जाती है मार्च के अंत तक इस किस्म की औसतन पैदावार 166 क्विंटल प्रति एकड़ और कुल उपज 1087 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह किस्म सलाद के तौर पर प्रयोग करने के लिए अनुकूल है
Posted by Vicky Romana
Punjab
06-01-2020 07:53 PM
ਵਿੱਕੀ ਜੀ ਤੁਸੀ ਸਾਇਲੇਜ ਅਤੇ ਤੂੜੀ ਲੈ ਕੇ ਵੀ ਪਸ਼ੂ ਪਾਲਣ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਪਰ ਉਸ ਨਾਲ ਖਰਚ ਵੱਧ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਕਿਉਕਿ ਘਰ ਵਿਚ ਚਾਰਾ ਹੋਣ ਨਾਲ ਖਰਚ ਵੀ ਘਟ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਪਸ਼ੂਆਂ ਦੀ ਵੀ ਵਧਿਆ ਗਰੋਥ ਹੁੰਦੀ ਹੈ, ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਮੁੱਲ ਖਰੀਦ ਕੇ ਪਸ਼ੂ ਰੱਖਣਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਵੀ ਰੱਖ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਇਹ ਤੁਸੀ ਸ਼ੁਰੂ ਵਿਚ ਆਪਣੇ ਬਜ਼ਟ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਥੋੜੇ ਪਸ਼ੂਆਂ ਤੋਂ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਜਿਵੇਂ ਜਿਵੇਂ ਤੁਹਾਨੂੰ .... (Read More)
ਵਿੱਕੀ ਜੀ ਤੁਸੀ ਸਾਇਲੇਜ ਅਤੇ ਤੂੜੀ ਲੈ ਕੇ ਵੀ ਪਸ਼ੂ ਪਾਲਣ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਪਰ ਉਸ ਨਾਲ ਖਰਚ ਵੱਧ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਕਿਉਕਿ ਘਰ ਵਿਚ ਚਾਰਾ ਹੋਣ ਨਾਲ ਖਰਚ ਵੀ ਘਟ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਪਸ਼ੂਆਂ ਦੀ ਵੀ ਵਧਿਆ ਗਰੋਥ ਹੁੰਦੀ ਹੈ, ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਮੁੱਲ ਖਰੀਦ ਕੇ ਪਸ਼ੂ ਰੱਖਣਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਵੀ ਰੱਖ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਇਹ ਤੁਸੀ ਸ਼ੁਰੂ ਵਿਚ ਆਪਣੇ ਬਜ਼ਟ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਥੋੜੇ ਪਸ਼ੂਆਂ ਤੋਂ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਜਿਵੇਂ ਜਿਵੇਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸ ਕੰਮ ਦੀ ਸਹੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਹੋਵੇਗੀ ਫਿਰ ਤੁਸੀ ਇਸ ਕੰਮ ਨੂੰ ਵਧਾਓ, ਇਕ ਵਾਰ ਇਕੱਠੇ ਪਸ਼ੂ ਨਾ ਰੱਖੋ.
Posted by Nawed
Madhya Pradesh
06-01-2020 07:50 PM
नावेद जी आप इसमें ridomil gold 25 ग्राम को 10 लीटर पानी के साथ डाले फरवरी के पहले हफ्ते में इसके इलावा आप इसकी कटाई छटाई करें और इसके बाद आप बोर्डो मिक्सचर की स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by दीपक पटेल
Madhya Pradesh
06-01-2020 07:49 PM
दीपक जी कृपया आप अपना सवाल विस्तार से पूछे ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by Kirandeep Singh
Punjab
06-01-2020 07:48 PM
किरणदीप जी आप गेहूं में एनपीके 191919 एक किलो को 150 लीटर पानी के साथ मिलाकर स्प्रे कर सकते है

Posted by Jagjeet Singh Sidhu
Punjab
06-01-2020 07:45 PM
jagjeet ji kele nu fal early summer matlab march mahine to lagne shuru ho jande han.dhanwad

Posted by Jagjeet Singh Sidhu
Punjab
06-01-2020 07:41 PM
Jagjeet ji tuci uss nu pett de kiria lai Bandykind plus bolus deo ate uss nu ek jgah bnn ke naa rkho kyuki ek jgaa pashu nu bnn ke rakhn nal pett bhar nilknn lgg jnda hai, baki uss nu cargill di heifer dry feed deni suru kro, iss nal vdia growth howegi. tuci dwai di photo dekh skde ho.

Posted by Jagjeet Singh Sidhu
Punjab
06-01-2020 07:38 PM
kele nu fal lagbhag march mahine vich lagna shuru ho janda hai.dhanwad

Posted by sachin Gayakwad
Maharashtra
06-01-2020 07:36 PM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद

Posted by sohan dass
Punjab
06-01-2020 07:34 PM
Sohan ji tuci uss nu pett de kiria lai Piperazine liquid deo ji iss nal vdia deworming ho jawegi ate 8 month di umar tak 1-1 month de frak nal salt change krke deworming kro..

Posted by चेतरामकौरव
Madhya Pradesh
06-01-2020 07:30 PM
चेतरामकौरव जी आप मूंग की किस्मे जैसे Type 1: यह अगेती किस्म है यह कटाई के लिए 60-65 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसे हरी खाद बनाने और दाने प्राप्त करने के लिए उगाया जाता है इसकी औसतन पैदावार 2.4-3.6 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Pusa Baisakhi: यह कटाई के लिए 60-70 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 3.2-4 क्.... (Read More)
चेतरामकौरव जी आप मूंग की किस्मे जैसे Type 1: यह अगेती किस्म है यह कटाई के लिए 60-65 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसे हरी खाद बनाने और दाने प्राप्त करने के लिए उगाया जाता है इसकी औसतन पैदावार 2.4-3.6 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Pusa Baisakhi: यह कटाई के लिए 60-70 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 3.2-4 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Mohini: यह कटाई के लिए 60-70 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह पीला चितकबरा रोग ओर पत्तों पर सफेद धब्बे रोग को सहनेयोग्य है इसकी औसतन पैदावार 4-4.8 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
PS 16: यह सारी देश में उगानेयोग्य किस्म है यह कटाई के लए 60-65 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 4-4.8 क्विंटल प्रति एकड़ होती है

Posted by rakesh raj
Bihar
06-01-2020 07:25 PM
rakesh ji dhan ka price 1815-1835 rupaye prati quintal ke hisab se chal raha hai.dhanywad

Posted by Mahipal singh Chouhan
Madhya Pradesh
06-01-2020 07:24 PM
shrimaan g NPK powder wala ja liquid wala koi v spray kr skte ho g..

Posted by rakesh raj
Bihar
06-01-2020 07:22 PM
राकेश जी धान की कीमत 1815 -1835 रुपये प्रति क्विंटल चल रही है धन्यवाद
Posted by Pawan kumar bhadu bishnoi
Rajasthan
06-01-2020 07:20 PM
सिंचित हालातों में बिजाई से पहले एक बार पानी दें इससे बीज अच्छे ढंग से अंकुरित होते हैं और फसल की वृद्धि भी अच्छी होती है दूसरी बार पानी फूल आने से पहले और तीसरा पानी फलियों के विकास के समय डालें अगेती वर्षा होने पर सिंचाई देरी से और आवश्यकतानुसार करें अनआवश्यक पानी देने से फसल का विकास और पैदावार कम हो जा.... (Read More)
सिंचित हालातों में बिजाई से पहले एक बार पानी दें इससे बीज अच्छे ढंग से अंकुरित होते हैं और फसल की वृद्धि भी अच्छी होती है दूसरी बार पानी फूल आने से पहले और तीसरा पानी फलियों के विकास के समय डालें अगेती वर्षा होने पर सिंचाई देरी से और आवश्यकतानुसार करें अनआवश्यक पानी देने से फसल का विकास और पैदावार कम हो जाती है यह फसल पानी के ज्यादा खड़े रहने को सहन नहीं कर सकती, इसके लिए अच्छे निकास का भी प्रबंध करें

Posted by varinder dhillon
Punjab
06-01-2020 07:17 PM
WH-1124 kisam late bijai de layi varti jandi hai. ate sinchit ilake vich beeji jandi hai. isda jhaad lagbhag 20-21 quintal prati acre de hisab nal hunda hai.eh lagbhag 121 din laindi ha pakkan de layi.dhanwad

Posted by Bherushankar Mali
Madhya Pradesh
06-01-2020 07:14 PM
भेरूशंकर जी आप इसके ऊपर carbendazim @400 ग्राम को प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद

Posted by sudeep
Madhya Pradesh
06-01-2020 07:14 PM
sudeep ji illi ki roktham ke liye aap quinalphos@4ml ko prati litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad

Posted by Abhishek Vishwakarma
Uttar Pradesh
06-01-2020 06:59 PM
मिर्च का बनस्पतिक नाम Capsicum annuum L है और इसका कुल Solanaceae है धन्यवाद

Posted by nav shah
Punjab
06-01-2020 06:59 PM
Navpreet ji tuci 1 kilo kanak da dalia, 250gm gurr nu changi trah rinn ke fir uss vich 100ml saro da tel mix krke khilana suru kro, ehh asani nal hajam ho jnda hai ate dudh vdhh jnda hai.
Posted by Anuj bishnoi
Rajasthan
06-01-2020 06:58 PM
कृपया आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by Vinay Verma
Uttar Pradesh
06-01-2020 06:58 PM
विनय जी कृपया सवाल विस्तार से पूछे कि आप इसकी बिजाई केबारे में जानकारी लेना चाहते है या इनके ऊपर कोई किसी बीमारी के बारे में जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद

Posted by anuj oraon
Jharkhand
06-01-2020 06:57 PM
अनुज जी आप इसके ऊपर NPK 191919 @1 किलो को 150 लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद

Posted by Ravi raaj
Uttar Pradesh
06-01-2020 06:56 PM
यह गुजरात में पालमपुर और राजस्थान के सिरोही जिले से है यह मुख्यत: राजस्थान, उत्तर प्रदेश और गुजरात में पायी जाती है यह छोटे आकार का जानवर होता है यह नसल का शरीर भूरे रंग का होता है और शरीर पर हल्के या भूरे रंग के धब्बे होते हैं इसके चपटे और लटके हुए कान, मुड़े हुए सींग और छोटे और मोटे बाल होते हैं प्रौढ़ नर बकरी .... (Read More)
यह गुजरात में पालमपुर और राजस्थान के सिरोही जिले से है यह मुख्यत: राजस्थान, उत्तर प्रदेश और गुजरात में पायी जाती है यह छोटे आकार का जानवर होता है यह नसल का शरीर भूरे रंग का होता है और शरीर पर हल्के या भूरे रंग के धब्बे होते हैं इसके चपटे और लटके हुए कान, मुड़े हुए सींग और छोटे और मोटे बाल होते हैं प्रौढ़ नर बकरी का भार 50 किलो और प्रौढ़ बकरी का भार 40 किलो होता है नर सिरोही के शरीर की लंबाई लगभग 80 सैं.मी. और मादा सिरोही की लंबाई लगभग 62 सैं.मी. होता है प्रतिदिन दूध की औसतन उपज 0.5 किलो और प्रति ब्यांत में औसतन उपज 65 किलो होती है इसकी 60 प्रतिशत संभावना होती है कि यह नसल दो बच्चों को जन्म दे

Posted by एस एल meena
Rajasthan
06-01-2020 06:53 PM
मीणा जी आप इल्ली की रोकथाम के लिए quinalphos @4ml को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by chran kumar
Uttar Pradesh
06-01-2020 06:53 PM
चरन जी कृपया आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
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