Experts Q&A Search

Posted by robin singh
Rajasthan
08-01-2020 11:11 PM
Punjab
01-09-2020 03:03 PM
Robin ji dudh ka rate lagbhag 67-68rs tak chl raha hai yeh 10.0 fatt ke hisab se aur snf ke hisab se lgta hai baki isko nikalne ka sahi trika dairy wale se pta lgg skta hai ..
Posted by Dhiru
Madhya Pradesh
08-01-2020 11:10 PM
Punjab
01-09-2020 09:41 AM
धीरू जी, पॉलीहाउस के लिए एक एकड़ में लगभग 40 लाख रूपये खर्चा आ सकता है बाकि इसकी सब्सिड़ी लेने का तरीका समझना जरूरी है इसकी पूरी जानकारी लेने के लिए आप ये वीडियो देख सकते है इसके इलावा भी यदि ओर कोई जानकारी चाहिए तो आप दोबारा सवाल पूछ सकते है https://www.youtube.com/watch v=TPuSMpWqzCc&t=21s धन्यवाद
Posted by Lovepreet Chabhal
Punjab
08-01-2020 10:58 PM
Punjab
01-09-2020 03:10 PM
Lovepreet ji usko aap pett ke kirro ke liye Bandykind plus bolus den aur Bovimin-B powder 100gm rojana aur Ovumin advance bolus rojana 1 goli den aur 21 din tak dete rehen, aap dwaio ki photo dekh skte hai.
Posted by Dhiru
Madhya Pradesh
08-01-2020 10:50 PM
Maharashtra
01-09-2020 09:42 AM
धीरू जी, कृपया आप बताये कि आपकी सोयाबीन की फसल में क्या दिकत आ रही है, ताकि आपको उसके हिसाब से इसकी दवाई के बारे में बताया जा सके, धन्यवाद
Posted by Rajnesh Meena
Rajasthan
08-01-2020 10:48 PM
Maharashtra
01-09-2020 09:45 AM
Rajnesh Meena ji, ap apne sawal visthar se puchien ke apke lehsun ki paidawaar kam ho rahi hai ya fir podhe kam hai, agar apke lehsun ki growth kam ho rahi hai to ap isme NPK 191919 @ 10 gm prati liter pani ke hisaab se spray karein, isse iski growth bhi achi hoti hai, or acchi paidawaar bhi hoti hai, dhanywad
Posted by santosh rajput
Madhya Pradesh
08-01-2020 10:33 PM
Maharashtra
01-09-2020 10:34 AM
संतोष जी, श्रीराम की कंपनी की 444 किस्म नहीं आती है, अगर आप किसान 444 की बात कर रहे हैं, किसान 444 किस्म महाराष्ट्र की प्राइवेट कंपनी Kisan Agri Technology India Pvt Ltd की है, इसके बीज लेने और अधिक जानकारी के लिए आप Dr T. Y. Mirja 8999542709 से सम्पर्क कर सकते है, अगर आप किसी और किस्म के बारे में जानकारी लेना चाहते है तो कृपया आप उसके लेबल की फोटो भेजें, ध.... (Read More)
संतोष जी, श्रीराम की कंपनी की 444 किस्म नहीं आती है, अगर आप किसान 444 की बात कर रहे हैं, किसान 444 किस्म महाराष्ट्र की प्राइवेट कंपनी Kisan Agri Technology India Pvt Ltd की है, इसके बीज लेने और अधिक जानकारी के लिए आप Dr T. Y. Mirja 8999542709 से सम्पर्क कर सकते है, अगर आप किसी और किस्म के बारे में जानकारी लेना चाहते है तो कृपया आप उसके लेबल की फोटो भेजें, धन्यवाद
Posted by yatendra kumar
Uttar Pradesh
08-01-2020 10:32 PM
Maharashtra
01-09-2020 09:57 AM
Yatendra kumar ji, jad galan fungus ke hamle ke kaaran hota hai, ap fungus ki roktham ke liye alu mein carbendazim @ 4 gm ya mancozeb @ 4 gm prati acre ke hisaab se spray karein, ise jad theek ho jati hai, dhanywad
Posted by प्रदीप अरविंद गौर
Madhya Pradesh
08-01-2020 10:27 PM
Maharashtra
01-09-2020 10:51 AM
प्रदीप अरविंद गौर जी, आप इसमें NPK 130045 @ 1 किलो को 150 लीटर पानी में मिला कर प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे कर सकते हैं, इससे गेहूं की फसल में पोटाश की कमी भी पूरी हो जाती है और गेहूं का अच्छा विकास भी होता है, धन्यवाद
Posted by Amar dhaliwal
Punjab
08-01-2020 10:26 PM
Punjab
01-09-2020 03:11 PM
Amar ji tuci Agrimin, Bovimin-b, Minfa gold ehna vicho koi v mineral mixture vart skde ho.
Posted by yatendra kumar
Uttar Pradesh
08-01-2020 10:24 PM
Maharashtra
01-09-2020 10:00 AM
Yatendra kumar ji, isme ap macchar ke hamle ki jaanch karein, agar macchar mojood ho to ap isme imidacloprid @ 1.5 ml prati liter pani ke hisaab se spray karein, isse yeh patte theek ho jate hian, dhanywad
Posted by Amar dhaliwal
Punjab
08-01-2020 10:23 PM
Punjab
01-09-2020 03:12 PM
Amar ji murrah majh ate nili ravi dono majha vdia hai, per murrah nasal di majh da dudh ate usdi fatt jyada hundi hai..
Posted by Bikramjit Singh
Punjab
08-01-2020 10:15 PM
Punjab
01-09-2020 10:01 AM
ਬਿਕਰਮਜੀਤ ਜੀ, ਇਸਦੀ ਬਿਜਾਈ ਦਾ ਉਚਿੱਤ ਸਮਾਂ ਜੁਲਾਈ-ਅਗਸਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by nazar mohammed khan
Rajasthan
08-01-2020 10:14 PM
Punjab
04-13-2020 12:17 PM
Nazar mohammed khan ji contract farming ke lia aap Ishu Rana / Vinod Rana 9910001588, 9958943020 se samparak kar sakte hai, Thankyou.
Posted by jass
Punjab
08-01-2020 10:11 PM
Punjab
01-09-2020 10:45 AM
ਜੱਸ ਜੀ, ਅਦਰਕ ਦੀ ਖੇਤੀ ਦੀ ਸਿਫਾਰਿਸ਼ ਪੰਜਾਬ ਵਿਚ ਨਹੀਂ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਪਰ ਕੁੱਛ ਕਿਸਾਨ ਆਪਣੇ ਤਜ਼ੁਰਬੇ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਇਸ ਨੂੰ ਲਗਾ ਲੈਂਦੇ ਹਨ, ਤੁਸੀਂ ਇਸ ਬਾਰੇ ਜਾਣਕਰੀ ਅਤੇ ਇਸ ਦਾ ਬੀਜ ਲੈਣ ਲਈ Nishan Singh Kachoora 9927994011 Kachoora Farm ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by bhasin
Punjab
08-01-2020 10:02 PM
Punjab
01-09-2020 10:48 AM
Bhasin ji, kanka jam ave gi ate baki kanak nal vadan tak brabar vi ho jave gi, panshi to bachav layi tusi kheti vich khadka kar sakde ho, is de nal panshi keht vicho beej nahi chugan ge, dhanwad
Posted by Vijay pal Yadav
Rajasthan
08-01-2020 10:01 PM
Punjab
01-09-2020 03:13 PM
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकत हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है एक बकरी के लिए लगभग 12—15 वर्ग फीट जगह छती हुई और 25—30 वर्ग फीट जगह खुली चाहिए .... (Read More)
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकत हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है एक बकरी के लिए लगभग 12—15 वर्ग फीट जगह छती हुई और 25—30 वर्ग फीट जगह खुली चाहिए बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्चे देना आम बात है बकरियां 8-10 वर्ष तक बच्चे देती हैं और अपन गिनती को तेजी से बढ़ा लेती हैं आप बारबरी, ब्लैक बंगाल, जैसी नसल पाल सकते हैं इसकी ट्रेनिेंग के लिए आप अपने कुषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करे या फिर जो बकरी पालन का व्यवसाय कर रहा कोई किसान उसका फार्म स्वंय जाकर देखकर आयें तो और भी बा​रीकियों का पता चल जायेगा, आप ब्लैक बंगाल, बीटल, सिरोही, जमुनापरी, बरबरी नस्ल रख सकते हैं. बकरी पालन में लोन लेने के लिए सबसे जरूरी है ट्रेनिंग सर्टीफिकेट अपने नज़दीक के कृषि विज्ञान केंद्र से ट्रेनिंग करने के बाद ट्रेनिंग के सर्टीफिकेट पर लोन एप्लाई होता है पर लोन मिलेगा या नहीं यह बैंक मेनेजर पर निर्भर करता है क्योंकि पहली बात यह है कि बैंक देखता है कि आपके अकाउंट में कितने पैसों का लेन देन हो रहा है और आपके पास ज़मीन गारंटी के तौर पर देने के लिए है या नहीं और अन्य भी कई बातें चैक करके लोन के लिए सहमत होता है बाकी कोशिश करें कि लोन के बिना अपने स्तर पर ही काम शुरू करें क्योंकि लोन की किश्त हर महीने भरनी पड़ेगी पर बकरियों से कमाई हर महीने नहीं होने होगी बाकी यदि कोशिश करके देखनी है तो अपने ट्रेनिंग सर्टीफिकेट से आप अपने जिले के पशु पालन विभाग अफसर को मिलें और उस पर प्रवानगी लेकर फिर बैंक से बात करके देखें.
Posted by DALJINDER singh
Punjab
08-01-2020 10:00 PM
Punjab
01-09-2020 01:53 PM
Daljinder ji, Pearl farming is a business of great benefit. its farming is done in same manner as that of the natural process of formation of pearls in the pond of 100 feet , after making pond seeps are purchased which you can easily get from Delhi , depending on quality its cost is around 1.5 to 5 rupees per seep, initially the seed of pearl is inserted in the closed seeps by pushing it and then they are thrown in the water using a net and after some months the pearls are formed in it, for making one designer pearl it takes around18 months , for this the different designs such as ganpati, budh, holy cross are made on the pearls, its marketing is done on your own basis , in Punjab Manish ji guides people for the pearl farming. for training regarding pearl farming in Punjab please contact M.... (Read More)
Daljinder ji, Pearl farming is a business of great benefit. its farming is done in same manner as that of the natural process of formation of pearls in the pond of 100 feet , after making pond seeps are purchased which you can easily get from Delhi , depending on quality its cost is around 1.5 to 5 rupees per seep, initially the seed of pearl is inserted in the closed seeps by pushing it and then they are thrown in the water using a net and after some months the pearls are formed in it, for making one designer pearl it takes around18 months , for this the different designs such as ganpati, budh, holy cross are made on the pearls, its marketing is done on your own basis , in Punjab Manish ji guides people for the pearl farming. for training regarding pearl farming in Punjab please contact Mr. Manish Vasudev 9417652857 , they will guide you in a good manner. thank you
Posted by Kulwinder Singh
Punjab
08-01-2020 09:58 PM
Punjab
01-09-2020 02:00 PM
ਕੁਲਵਿੰਦਰ ਜੀ, ਪੰਜਾਬ ਵਿਚ ਗੰਨੇ ਨੂੰ ਬੀਜਣ ਦਾ ਸਮਾਂ ਸਤੰਬਰ ਤੋਂ ਅਕਤੂਬਰ ਅਤੇ ਫਰਵਰੀ ਤੋਂ ਮਾਰਚ ਮਹੀਨਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਗੰਨਾ ਆਮ ਤੌਰ ਤੇ ਪੱਕਣ ਲਈ ਇੱਕ ਸਾਲ ਦਾ ਸਮਾਂ ਲੈਂਦਾ ਹੈ ਉੱਪ-ਊਸ਼ਣ ਕਟਬੰਦੀ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਕਤਾਰਾਂ ਦਾ ਫਾਸਲਾ 60-120 ਸੈ.ਮੀ. ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਗੰਨੇ ਨੂੰ 3-4 ਸੈ.ਮੀ. ਦੀ ਡੂੰਘਾਈ ਤੇ ਬੀਜੋ ਅਤੇ ਇਸ ਨੂੰ ਮਿੱਟੀ ਨਾਲ ਢੱਕ ਦਿਓ ਬਿਜਾਈ ਦਾ ਤਰੀਕਾ: A) ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਉਚਿੱਤ ਢੰਗ ਜ.... (Read More)
ਕੁਲਵਿੰਦਰ ਜੀ, ਪੰਜਾਬ ਵਿਚ ਗੰਨੇ ਨੂੰ ਬੀਜਣ ਦਾ ਸਮਾਂ ਸਤੰਬਰ ਤੋਂ ਅਕਤੂਬਰ ਅਤੇ ਫਰਵਰੀ ਤੋਂ ਮਾਰਚ ਮਹੀਨਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਗੰਨਾ ਆਮ ਤੌਰ ਤੇ ਪੱਕਣ ਲਈ ਇੱਕ ਸਾਲ ਦਾ ਸਮਾਂ ਲੈਂਦਾ ਹੈ ਉੱਪ-ਊਸ਼ਣ ਕਟਬੰਦੀ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਕਤਾਰਾਂ ਦਾ ਫਾਸਲਾ 60-120 ਸੈ.ਮੀ. ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਗੰਨੇ ਨੂੰ 3-4 ਸੈ.ਮੀ. ਦੀ ਡੂੰਘਾਈ ਤੇ ਬੀਜੋ ਅਤੇ ਇਸ ਨੂੰ ਮਿੱਟੀ ਨਾਲ ਢੱਕ ਦਿਓ ਬਿਜਾਈ ਦਾ ਤਰੀਕਾ: A) ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਉਚਿੱਤ ਢੰਗ ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਡੂੰਘੀਆਂ ਖਾਲੀਆਂ, ਵੱਟਾਂ ਬਣਾ ਕੇ, ਕਤਾਰਾਂ ਦੇ ਜੋੜੇ ਬਣਾ ਕੇ ਅਤੇ ਟੋਆ ਪੁੱਟ ਕੇ ਬਿਜਾਈ ਕਰੋ 1) ਖਾਲੀਆਂ ਅਤੇ ਵੱਟਾਂ ਬਣਾ ਕੇ ਸੁੱਕੀ ਬਿਜਾਈ: ਟਰੈਕਟਰ ਵਾਲੀ ਵੱਟਾਂ ਪਾਉਣ ਵਾਲੀ ਮਸ਼ੀਨ ਦੀ ਮਦਦ ਨਾਲ ਵੱਟਾਂ ਅਤੇ ਖਾਲੀਆਂ ਬਣਾਓ ਅਤੇ ਇਨ੍ਹਾਂ ਵੱਟਾਂ ਅਤੇ ਖਾਲੀਆਂ ਵਿੱਚ ਬਿਜਾਈ ਕਰੋ ਵੱਟਾਂ ਵਿੱਚ 90 ਸੈਂਟੀਮੀਟਰ ਦਾ ਫਾਸਲਾ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਗੰਨੇ ਦੀਆਂ ਗੁੱਲੀਆਂ ਨੂੰ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਦੱਬੋ ਅਤੇ ਹਲਕੀ ਸਿੰਚਾਈ ਕਰੋ 2) ਕਤਾਰਾਂ ਦੇ ਜੋੜੇ ਬਣਾ ਕੇ ਬਿਜਾਈ: ਖੇਤ ਵਿੱਚ 150 ਸੈ.ਮੀ. ਦੇ ਫਾਸਲੇ ਤੇ ਖਾਲੀਆਂ ਬਣਾਓ ਅਤੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਵਿੱਚ 30-60-90 ਸੈ.ਮੀ. ਦੇ ਫਾਸਲੇ ਤੇ ਬਿਜਾਈ ਕਰੋ ਇਸ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਵੱਟਾਂ ਵਾਲੀ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਵੱਧ ਝਾੜ ਮਿਲਦਾ ਹੈ 3) ਟੋਆ ਪੁੱਟ ਕੇ ਬਿਜਾਈ: ਟੋਏ ਪੁੱਟਣ ਵਾਲੀ ਮਸ਼ੀਨ ਨਾਲ 60 ਸੈ.ਮੀ. ਵਿਆਸ ਦੇ 30 ਸੈ.ਮੀ. ਡੂੰਘੇ ਟੋਏ ਪੁੱਟੋ, ਜਿਨਾਂ ਵਿੱਚ 60 ਸੈ.ਮੀ. ਦਾ ਫਾਸਲਾ ਹੋਵੇ ਇਸ ਨਾਲ ਗੰਨਾ 2-3 ਵਾਰ ਉਗਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਆਮ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 20-25% ਵੱਧ ਝਾੜ ਆਉਂਦਾ ਹੈ B) ਇੱਕ ਅੱਖ ਵਾਲੇ ਗੰਨਿਆਂ ਦੀ ਬਿਜਾਈ: ਸਿਹਤਮੰਦ ਗੁੱਲੀਆਂ ਚੁਣੋ ਅਤੇ 75-90 ਸੈ.ਮੀ. ਦੇ ਫਰਕ ਅਤੇ ਖਾਲ਼ੀਆਂ ਵਿੱਚ ਬਿਜਾਈ ਕਰੋ ਗੁੱਲੀਆਂ ਇੱਕ ਅੱਖ ਵਾਲੀਆਂ ਹੋਣੀਆਂ ਚਾਹੀਦੀਆਂ ਹਨ ਜੇਕਰ ਗੰਨੇ ਦੇ ਉੱਪਰਲੇ ਹਿੱਸੇ ਵਿੱਚੋਂ ਛੋਟੀਆਂ ਗੁੱਲੀਆਂ ਚੁਣੀਆਂ ਗਈਆਂ ਹੋਣ ਤਾਂ ਬਿਜਾਈ 6-9 ਇੰਚ ਦੇ ਫਰਕ ਤੇ ਕਰੋ ਵਧੀਆ ਸਿੰਚਾਈ ਲਈ ਅੱਖਾਂ ਨੂੰ ਉਪਰ ਵੱਲ ਨੂੰ ਕਰਕੇ ਰੱਖੋ ਮਿੱਟੀ ਨਾਲ ਅੱਖਾਂ ਨੂੰ ਢੱਕ ਦਿਓ ਅਤੇ ਹਲਕੀ ਸਿੰਚਾਈ ਕਰੋ ਜੈਵਿਕ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਲਗਾਉਣ ਲਈ ਤੁਸੀ ਫ਼ਸਲ ਵਿੱਚ ਤੱਤਾਂ ਦੀ ਕਮੀ ਪੂਰੀ ਕਾਰਨ ਲਈ ਇਸ ਵਿੱਚ ਗੋਬਰ ਦੀ ਖਾਦ, vermicompost ਜਾਂ ਫਿਰ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰੋ, ਜੇ ਕਰ ਕਿਸੇ ਕੀਤਾ ਦਾ ਹਮਲਾ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਤਾ ਇਸ ਵਿੱਚ ਨੀਮ ਦੇ ਤੇਲ ਦੀ ਸਪਰੇ ਕਰੋ, ਜੇਕਰ ਇਸ ਵਿੱਚ ਕਿਸੇ ਬਿਮਾਰੀ ਦਾ ਹਮਲਾ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤਾ ਇਸ ਵਿੱਚ ਤੁਸੀਂ ਖੱਟੀ ਲੱਸੀ ਦੀ ਸਪਰੇ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Dsvirk Shab
Punjab
08-01-2020 09:53 PM
Punjab
01-09-2020 03:15 PM
ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ ਪੇਟ ਦੇ ਕੀੜਿਆਂ ਲਈ Flukarid-DS ਗੋਲੀ ਦਿਓ ਉਸ ਨੂੰ Fatmax ਪਾਊਡਰ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ, Gouge powder 50 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ, ਬਾਕੀ ਉਸਦੀ ਖੁਰਾਕ ਦਾ ਧਿਆਨ ਰੱਖੋ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ ਵਡੇਮਿਆ ਦੀ ਖਲ ਦਿੰਦੇ ਰਹੋ..
Posted by Dsvirk Shab
Punjab
08-01-2020 09:49 PM
Punjab
01-09-2020 03:17 PM
Virk ji tuci uss nu Hitek injection 1ml/50kg sarir de bhar de hisab nal chamdi vich lgwao, iss nal frak paa jawega.
Posted by Amraitpal Singh
Punjab
08-01-2020 09:44 PM
Punjab
01-09-2020 10:03 AM
ਇਸ ਦੀਆ ਕਲਮਾਂ ਇੱਕ ਵਾਰ ਲਗਾਉਣ ਤੇ ਇਹ 15 ਸਾਲ ਤੱਕ ਫਲ ਦਿੰਦੀਆਂ ਹਨ , ਇਸ ਨੂੰ ਸੇਮ ਵਾਲੀ ਜ਼ਮੀਨ ਦੇ ਇਲਾਵਾ ਕਿਸੇ ਵੀ ਕਿੱਸਮ ਦੀ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਲਗਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਡਰੈਗਨ ਫਰੂਟ ਦੀ ਖੇਤੀ ਵਿੱਚ ਪਾਣੀ ਦੀ ਵੀ ਘੱਟ ਜ਼ਰੂਰਤਰ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਨੂੰ ਗਰਮੀ ਦੇ ਸੀਜਨ ਵਿੱਚ 10 ਦਿਨ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਵਾਰ ਅਤੇ ਸਰਦੀਆਂ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਮਹੀਨੇ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਵਾਰ ਪਾਣੀ ਦੀ ਲੋੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇੱਕ ਏਕੜ ਜ਼ਮੀਨ ਵਿੱਚ ਇਸ.... (Read More)
ਇਸ ਦੀਆ ਕਲਮਾਂ ਇੱਕ ਵਾਰ ਲਗਾਉਣ ਤੇ ਇਹ 15 ਸਾਲ ਤੱਕ ਫਲ ਦਿੰਦੀਆਂ ਹਨ , ਇਸ ਨੂੰ ਸੇਮ ਵਾਲੀ ਜ਼ਮੀਨ ਦੇ ਇਲਾਵਾ ਕਿਸੇ ਵੀ ਕਿੱਸਮ ਦੀ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਲਗਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਡਰੈਗਨ ਫਰੂਟ ਦੀ ਖੇਤੀ ਵਿੱਚ ਪਾਣੀ ਦੀ ਵੀ ਘੱਟ ਜ਼ਰੂਰਤਰ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਨੂੰ ਗਰਮੀ ਦੇ ਸੀਜਨ ਵਿੱਚ 10 ਦਿਨ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਵਾਰ ਅਤੇ ਸਰਦੀਆਂ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਮਹੀਨੇ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਵਾਰ ਪਾਣੀ ਦੀ ਲੋੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇੱਕ ਏਕੜ ਜ਼ਮੀਨ ਵਿੱਚ ਇਸ ਦੀਆਂ 1600 ਕਲਮਾਂ ਲੱਗਦੀਆਂ ਹਨ 15 ਸਾਲ ਤੱਕ ਇਸ ਵਿੱਚ ਫਰੂਟ ਲੱਗੇਗਾ ਜੋ ਤੀਜੇ ਸਾਲ ਤੋਂ ਭਰਪੂਰ ਉਤਪਾਦਨ ਦੇਣ ਲੱਗੇਗਾ ਮਿਹਨਤ ਦੇ ਜੋਰ ਤੇ ਇੱਕ ਏਕੜ ਵਿੱਚੋ 50 ਕੁਇੰਟਲ ਫਲ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ ਡਰੈਗਨ ਫਰੂਟ ਦੀ ਕਲਮ ਨੂੰ ਦੋ ਮਹੀਨੇ ਤੱਕ ਗਮਲੇ ਵਿੱਚ ਤਿਆਰ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਅਪ੍ਰੈਲ ਤੋਂ ਲੈ ਕੇ ਸਤੰਬਰ ਤੱਕ ਇਸ ਨੂੰ ਕਿਸੇ ਵੀ ਸਮੇ ਲਗਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਗਰਮੀਆਂ ਇਸ ਦੇ ਲਈ ਅਨੁਕੂਲ ਸਮਾਂ ਹੈ ਇਸਦੇ ਪੌਦੇ ਲੈਣ ਲਈ ਤੁਸੀ Satnam Singh Aulakh :-9592806807 ਜੀ ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਤੇ ਇਹਨਾਂ ਤੋਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸ ਬਾਰੇ ਹੋਰ ਵੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਮਿਲ ਜਾਏਗੀ ਜੀ
Posted by Kulwinder Singh
Punjab
08-01-2020 09:43 PM
Punjab
01-16-2020 11:30 AM
Kulwinder Singh ji tusi gobar gas plant da use kar sakde ho vdhere jankari lai tusi mere nal Amrik Singh 9814221784 te samparak kar sakde ho, Thankyou.
Posted by Dsvirk Shab
Punjab
08-01-2020 09:41 PM
Punjab
01-09-2020 03:20 PM
ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ ਪੇਟ ਦੇ ਕੀੜਿਆਂ ਲਈ Flukarid-DS ਗੋਲੀ ਦਿਓ ਉਸ ਨੂੰ Fatmax ਪਾਊਡਰ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ, Gouge powder 50 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ, ਬਾਕੀ ਉਸਦੀ ਖੁਰਾਕ ਦਾ ਧਿਆਨ ਰੱਖੋ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ ਵਡੇਮਿਆ ਦੀ ਖਲ ਦਿੰਦੇ ਰਹੋ..
Posted by Shyam Sunder
Bihar
08-01-2020 09:36 PM
Maharashtra
01-09-2020 11:01 AM
श्याम जी, भिंडी काफी तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है भिंडी की फसल के लिए रेतली से चिकनी मिट्टी उचित होती है, जिसमें जैविक तत्व भरपूर मात्रा में हों और जिसकी निकास प्रणाली भी अच्छी ढंग की हो यदि निकास अच्छे ढंग का हो तो यह भारी ज़मीनों में भी अच्छी उगती है मिट्टी का पी एच 6.0 से 6.5 होना चाहिए खारी, नमक वाली या घटि.... (Read More)
श्याम जी, भिंडी काफी तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है भिंडी की फसल के लिए रेतली से चिकनी मिट्टी उचित होती है, जिसमें जैविक तत्व भरपूर मात्रा में हों और जिसकी निकास प्रणाली भी अच्छी ढंग की हो यदि निकास अच्छे ढंग का हो तो यह भारी ज़मीनों में भी अच्छी उगती है मिट्टी का पी एच 6.0 से 6.5 होना चाहिए खारी, नमक वाली या घटिया निकास वाली मिट्टी में इसकी खेती ना करें भिंडी की किस्मे जैसे के की बिजाई V.R.O 6, V.R.O 5, Parbhani Kranti , I.I.V.R 10, Kashi Vibhuti, Kashi Bhairav, Kashi Mahima, Kashi Mohini, Kashi Mangali, Kashi Pragati, Kashi Satdhari, Kashi Kranti, Pusa Sawani कर सकते हैं मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें जोताई के बाद मिट्टी को समतल करने के लिए सुहागा फेरें आखिरी जोताई के समय गाय का गला हुआ गोबर 40 क्विंटल प्रति एकड़ में डालें उत्तर में यह वर्षा और बसंत के मौसम में उगाई जाती है खरीफ के मौसम में, इसकी बिजाई जून-जुलाई के महीने और बसंत ऋतु में फरवरी-मार्च के महीने में की जाती है गर्मियों में समय पर बिजाई के लिए कतार से कतार में 45 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 30 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें गर्मियों में अगेती बिजाई के लिए 30 सैं.मी. x 20 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बारिश के मौसम में कतार से कतार में 60 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 20-30 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीज 2.5 सैं.मी. की गहराई में बोयें इसकी बिजाई गड्ढा खोदकर की जाती है खरीफ के मौसम में 4-6 किलो बीज और गर्मियों के मौसम में 8-10 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग किए जाते हैं बिजाई से पहले बीज को 24 घंटे के लिए पानी में भिगोकर रखने से बीज की अंकुरन शक्ति बढ़ जाती है ज़मीन से पैदा होने वाली फफूंदी से बचाने के लिए बीज को कार्बेनडाज़िम से उपचार करें उपचार करने के लिए बीज को 2 ग्राम कार्बेनडाज़िम घोल प्रति लीटर पानी में मिलाकर 6 घंटे के लिए डुबो दें और फिर छांव में सुखाएं फिर तुरंत बिजाई कर दें बीज के अच्छे अंकुरन के लिए और मिट्टी में पैदा होने वाली बीमारियों से बचाने के लिए बीज को इमीडाक्लोप्रिड 5 ग्राम से प्रति किलो बीज का उपचार करें और बाद में ट्राइकोडरमा विराइड 4 ग्राम से प्रति किलो बीज का उपचार करें खेत की तैयारी के समय 8-10 टन गाय का गला हुआ गोबर डालें भिंडी की फसल के लिए नाइट्रोजन 40 किलो (90 किलो यूरिया) फासफोरस 16 किलो (एस एस पी 100 किलो) और पोटाश 20 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 35 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा, फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा खेत की तैयारी के समय डालें नाइट्रोजन की बाकी बची मात्रा बिजाई के बाद 30वें और 50 वें दिन टॉप ड्रेसिंग के तौर पर डालें बिजाई से पहले बसालीन 1 लीटर को प्रति एकड़ में डालें और बिजाई के तुरंत बाद लासो 1.6 मि.ली. को प्रति एकड़ में प्रयोग करें नदीनों के विकास को रोकने के लिए गोडाई करनी चाहिए बारिश के मौसम में मेंड़ों पर मिट्टी ज़रूर चढ़ानी चाहिए पहली गोडाई 20-25 दिन बाद और दूसरी गोडाई बिजाई के 40-45 दिन बाद करें नदीनों के अंकुरन से पहले नदीन नाशक डालने से नदीनों को आसानी से रोका जा सकता है इसके लिए फलूक्लोरालिन (48 प्रतिशत) 1 लीटर या पैंडीमैथालीन 1 लीटर या एलाक्लोर 1.6 लीटर प्रति एकड़ डालें यदि मिट्टी में पर्याप्त मात्रा में नमी मौजूद ना हो तो गर्मियों में फसल के अच्छे अंकुरण के लिए बिजाई से पहले सिंचाई जरूर करनी चाहिए बीज अंकुरण के बाद अगली सिंचाई करें उसके बाद गर्मियों में 4-5 दिन के बाद खेतों को सिंचित करें और बारिश के मौसम में 10 से 12 बाद खेतों को सिंचित करें धन्यवाद
Posted by beerendra Pradhan
Uttar Pradesh
08-01-2020 09:34 PM
Rajasthan
01-09-2020 03:21 PM
इस नसल का पिछला जिला मोंटगोमेरी (पाकिस्तान) है इस नसल के पशुओं के शरीर का रंग लाल-भूरा, आकार मध्यम, छोटी टांगे, सिर चौड़ा होता है छोटे और भारी सींग, गर्दन के नीचे लटकती हुई भारी चमड़ी और भारी लेवा होता है यह सबसे ज्यादा दूध देने वाली भारतीय नसल है यह नसल पंजाब के फिरोजपुर और अमृतसर जिलों में और राजस्थान के श्री गं.... (Read More)
इस नसल का पिछला जिला मोंटगोमेरी (पाकिस्तान) है इस नसल के पशुओं के शरीर का रंग लाल-भूरा, आकार मध्यम, छोटी टांगे, सिर चौड़ा होता है छोटे और भारी सींग, गर्दन के नीचे लटकती हुई भारी चमड़ी और भारी लेवा होता है यह सबसे ज्यादा दूध देने वाली भारतीय नसल है यह नसल पंजाब के फिरोजपुर और अमृतसर जिलों में और राजस्थान के श्री गंगानगर जिले में पायी जाती है पंजाब में फिरोजपुर जिले के फाज़िलका और अबोहर कस्बों में शुद्ध साहीवाल गायों के झुंड उपलब्ध रहते हैं इस नसल के बैल सुस्त और काम में धीमे होते हैं इस नसल को लंबी बार, लोला, मोंटगोमेरी, मुल्तानी और तेली के नाम से जाना जाता है इस नसल के प्रौढ़ बैल का औसतन भार 5.5 क्विंटल और गाय का औसतन भार 4 क्विंटल होता है
Posted by Gurpreet Gill
Punjab
08-01-2020 09:32 PM
Punjab
01-09-2020 03:22 PM
ਗੁਰਪ੍ਰੀਤ ਜੀ ਕ੍ਰਿਪਾ ਕਰਕੇ ਇਹ ਦਸੋ ਤੁਸੀ ਕਿਹੜੀ ਨਸਲ ਦੀਆ ਘੋੜੀਆਂ ਵਾਰੇ ਜਾਣਕਾਰੀ ਲੈਣਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਸਹੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ
Posted by beerendra Pradhan
Uttar Pradesh
08-01-2020 09:32 PM
Rajasthan
01-09-2020 03:23 PM
इस नसल का पिछला जिला मोंटगोमेरी (पाकिस्तान) है इस नसल के पशुओं के शरीर का रंग लाल-भूरा, आकार मध्यम, छोटी टांगे, सिर चौड़ा होता है छोटे और भारी सींग, गर्दन के नीचे लटकती हुई भारी चमड़ी और भारी लेवा होता है यह सबसे ज्यादा दूध देने वाली भारतीय नसल है यह नसल पंजाब के फिरोजपुर और अमृतसर जिलों में और राजस्थान के श्री गं.... (Read More)
इस नसल का पिछला जिला मोंटगोमेरी (पाकिस्तान) है इस नसल के पशुओं के शरीर का रंग लाल-भूरा, आकार मध्यम, छोटी टांगे, सिर चौड़ा होता है छोटे और भारी सींग, गर्दन के नीचे लटकती हुई भारी चमड़ी और भारी लेवा होता है यह सबसे ज्यादा दूध देने वाली भारतीय नसल है यह नसल पंजाब के फिरोजपुर और अमृतसर जिलों में और राजस्थान के श्री गंगानगर जिले में पायी जाती है पंजाब में फिरोजपुर जिले के फाज़िलका और अबोहर कस्बों में शुद्ध साहीवाल गायों के झुंड उपलब्ध रहते हैं इस नसल के बैल सुस्त और काम में धीमे होते हैं इस नसल को लंबी बार, लोला, मोंटगोमेरी, मुल्तानी और तेली के नाम से जाना जाता है इस नसल के प्रौढ़ बैल का औसतन भार 5.5 क्विंटल और गाय का औसतन भार 4 क्विंटल होता है
Posted by Roop
Himachal Pradesh
08-01-2020 09:24 PM
Rajasthan
01-09-2020 02:03 PM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by Roop
Himachal Pradesh
08-01-2020 09:22 PM

?

Maharashtra
01-09-2020 02:56 PM
Roop ji, apke dawara bheji gayi audio play nahi ho rahi hai, kripya ap audio duabra bhejein taki sun kar apko iske bare mein shai jankari di ja sake, dhanywad
Posted by Roop
Himachal Pradesh
08-01-2020 09:21 PM

?

Maharashtra
01-09-2020 03:01 PM
Roop ji, kripya ap apna sawal visthar se puchien ke ap krishi ke bare mein kya janakri lena chahte hian taki apko uske bare mein sahi jankari di ja sake, dhanywad
Posted by Santosh Maurya
Uttar Pradesh
08-01-2020 09:19 PM
Maharashtra
01-09-2020 02:54 PM
Santosh Maurya ji, kripya ap apna sawal visthar se puchien ke ap krishi ke sambandhi kya jankari lena chahte hian , taki apko iske bare mein sahi jankari di ja sake, dhanywad
Posted by Hemant Kushwaha
Uttar Pradesh
08-01-2020 09:10 PM
Maharashtra
01-09-2020 03:05 PM
हेमंत जी, फसल पकने का समय इसकी किस्म पर आधारित होता है, आमतौर यह फसल 120 -130 दिन में पक जाती है, धन्यवाद
Posted by sulabh
Maharashtra
08-01-2020 09:09 PM
Punjab
01-09-2020 04:02 PM
Sulabh ji dhudh aap nazdiki dairy mai sale kr skte hai ja fir aap apne nazdik ghro mai lgga skte hai waha apko dudh ka rate acha milega iske ilawa aap dudh ke sath sath dudh ke product dahi, lassi, ghee, panirr tyar krke v sale kr skte hai.
Posted by Hemant Kushwaha
Uttar Pradesh
08-01-2020 09:09 PM
Punjab
01-09-2020 04:03 PM
Hemant ji kutia ko lagbhag 1.5-2 sall badd cross krwana chahiye.
Posted by Hariom Kumawat
Rajasthan
08-01-2020 08:57 PM
Maharashtra
01-09-2020 03:00 PM
अफीम एक वार्षिक औषधीय बूटी है, जिसमें कई जरूरी एल्कलॉइड (वे तत्व जिनमें ड्रग्स की मात्रा होती है) जैसे मोर्फिन, कोडेन और थिबेन होते हैं अच्छी उपज और वृद्धि के लिए इसे उपजाऊ, अच्छे निकास वाली काली मिट्टी और हल्की दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है मिट्टी की पी एच 7 के लगभग होनी चाहिए प्रसिद्ध किस्में :- Chetak: यह अधिक .... (Read More)
अफीम एक वार्षिक औषधीय बूटी है, जिसमें कई जरूरी एल्कलॉइड (वे तत्व जिनमें ड्रग्स की मात्रा होती है) जैसे मोर्फिन, कोडेन और थिबेन होते हैं अच्छी उपज और वृद्धि के लिए इसे उपजाऊ, अच्छे निकास वाली काली मिट्टी और हल्की दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है मिट्टी की पी एच 7 के लगभग होनी चाहिए प्रसिद्ध किस्में :- Chetak: यह अधिक उपज वाली किस्म है इसके पौधे का औसतन कद 80-90 सैं.मी. होता है इसके फूल सफेद रंग के और फल बड़े और गोल आकार में होते हैं यह अधिक उपजाऊ मिट्टी में अच्छी पैदावार देती है इसमें मोर्फिन की मात्रा 12.5 प्रतिशत होती है यह मोर्फिन की औसतन पैदावार 2 किलोग्राम प्रति एकड़ देती है मिट्टी की किस्म के आधार पर मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की दो-तीन बार जोताई करें मिट्टी को अच्छे से समतल करें ताकि खेत में पानी ना खड़ा हो सके खेत की तैयारी के समय अच्छी तरह से गला हुआ, गाय का गोबर 4 टन प्रति एकड़ में डालें अफीम की बिजाई के लिए अक्तूबर के आखिरी सप्ताह से लेकर नवंबर के पहले सप्ताह तक का समय उपयुक्त होता है इसके बीज छोटे होते हैं इसलिए बीजों को बारीक रेत में अच्छे से मिलाया जाता है और फिर बिजाई के लिए प्रयोग किया जाता है 3 मीटर चौड़े और 5 मीटर लंबे बैड तैयार किए जाते हैं बैड पर 30 सैं.मी. के फासले पर कतार बनाई जाती है, फिर बीजों को कतारों में बोया जाता है पौधे से पौधे का फासला 30 सैं.मी. रखें बिजाई के लिए बुरकाव या कतार में बिजाई का ढंग प्रयोग किया जाता है बीज की मात्रा ज्यादा डालने से गोडाई करने में परेशानी आती है, जिससे फसल का विकास अच्छा नहीं होता, इसलिए बुरकाव विधि से ज्यादा कतारों में बिजाई करने को ज्यादा महत्तव दिया जाता है एक एकड़ खेत के लिए 2 किलो बीज की मात्रा बहुत होती है बिजाई से पहले मैनकोजेब 4 ग्राम से प्रति किलो बीजों का उपचार करें नाइट्रोजन 36 किलो (यूरिया 80 किलो), फासफोरस 16 किलो (एस एस पी 100 किलो), पोटाश 4 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 10 किलो) प्रति एकड़ में डालें फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा बिजाई के समय डालें नाइट्रोजन की बाकी बची मात्रा को दो भागों में बांटे, पहली मात्रा बिजाई के 40-50 दिन के बाद डालें और दूसरी मात्रा फूल बनने से पहले डालें अफीम की पूरी फसल को 8-10 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है बिजाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करें फिर मिट्टी की किस्म, सिंचित क्षेत्र के आधार पर 6-7 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें जलवायु हालातों और आवश्यकता के आधार पर सिंचाई के अंतराल को बढ़ाकर, सिंचित खेत में 10-12 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें चीरा लगाने से 8-10 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें नदीनों की तीव्रता के आधार पर दो से तीन गोडाई करें नदीनों की रासायनिक रोकथाम के लिए लसोप्रोटियूरॉन 500 ग्राम को 200 लीटर पानी में मिलाकर बिजाई के बाद तीसरे दिन डालें नदीननाशक क्रिया के 30 दिन बाद पहली गोडाई करें बिजाई के 95-115 दिनों बाद अफीम में फूल निकलते हैं फूल बनने के बाद, 15-20 दिनों में फल परिपक्व हो जाते हैं जब फल अपने रंग को हरे से हल्के हरे में बदल देता है और फल घना हो जाता है तब कट लगाने और दूध इक्ट्ठा करने के लिए सही अवस्था होती है दोपहर में कट लगाने के प्रक्रिया पूरी कर लें और दूध को अगले दिन की सवेर में इक्ट्ठा करें इस प्रक्रिया को हर तीन दिन बाद दोहरायें प्रत्येक फल में 3-56 बार कट लगाए जा सकते हैं आखिरी कट लगाने के बाद फसल को 20-25 दिनों के लिए फसल को सूखने के लिए छोड़ दें अच्छी तरह से सुखाने के बाद फल की तुड़ाई करें और फसल को दरांती के साथ काट दें सूखे फलों की तुड़ाई के बाद उन्हें खुली जगह में बिछा दें और उनमें से बीज निकाल लें धन्यवाद
Posted by kunal jakhar
Rajasthan
08-01-2020 08:56 PM
Punjab
01-09-2020 02:34 PM
Kunal ji you don t have need to put mychorriza in wheat just put the recommended dose of fertilizer .
Posted by kuldeep chauhan
Uttar Pradesh
08-01-2020 08:52 PM
Maharashtra
01-30-2020 04:59 PM
Kuldeep Chauhan ji, F1 LHT Alok laxmi inupts ki ek bahut hi acchi variety hai, yeh ropai ke baad 60-65 din mein pak kar tiyar ho jati hai, yeh tobacco mosaic virus ki pratirodhi hai, iske fal ka weight 90 se 100 gram tak ka hota hai, iska fruit gol akar ka hota hai, agar isse acchi conditions mein ugaya jaye to yeh 8-10 kilo prati plant ke hisaab se paidawaar a jati hai, dhanywad
Posted by ਨਿਸ਼ਾਨ ਸਿੰਘ ਸੰਧੂ
Punjab
08-01-2020 08:51 PM
Punjab
01-09-2020 04:10 PM
Tuci uss nu Injection Amoxirum Forte 4.5gm, Injection Megludyne 20ml, Injection Isoflud 5ml ate Avil injection 10ml lgwao, ehh tuci 3 din lgwao, iss nal frak paa jawega.
Posted by subhash verma
Uttar Pradesh
08-01-2020 08:50 PM
Maharashtra
01-09-2020 02:58 PM
सुभाष वर्मा जी, यू पी में गन्ने की खेती का उपयुक्त समय बसंत का मौसम है फरवरी से मार्च गन्ने की रोपाई के लिए सबसे उपयुक्त समय है धन्यवाद
Posted by Arsh deep singh
Punjab
08-01-2020 08:47 PM
Punjab
01-16-2020 07:06 PM
tuci uss nu vdia feed deni suru kro uss nu rojana holi holi feed vdauni suru kro, jekar usde anndr ton white pass aundi hai tan v dudh ghtt ho skda hai, tuci uss nu rojana 5kg tak feed de skde ho.
Posted by Sanjay
Madhya Pradesh
08-01-2020 08:43 PM
Maharashtra
01-09-2020 04:22 PM
Sanjay ji, isme phool anye ke samay par ap isme NPK 130045 @ 10 gm prati liter pani ke hisaab se spray karein, isse phool ko fal set karne mein madad milti hai, dhanwyad
Posted by himmat singh
Punjab
08-01-2020 08:41 PM
Punjab
01-09-2020 04:25 PM
To promote bulking in Potato, Spray 13:0:45@ 2 kg and 100gm Magnesium EDTA per acre. Add fungicide Propineb@3 gm/ltr of water as prophylactic. To increase number of tubers and size, spray with Humic acid (12%) @ 3 ml+ MAP 12:61:00 @ 8 gm/DAP @ 15 gm/ltr of water in vegetative stage.
Posted by sher singh
Rajasthan
08-01-2020 08:38 PM
Punjab
01-12-2020 08:05 PM
kis size ka lagvana he ghar ke liye, agriculture ke liye
Posted by Ravi
Uttarakhand
08-01-2020 08:35 PM
Rajasthan
01-09-2020 08:44 AM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by Sanjay
Madhya Pradesh
08-01-2020 08:32 PM
Maharashtra
01-10-2020 09:30 AM
Sanjay ji, sehjan ke podhe ko jayada sinchai ki jarurat nahi hoti hai, or agar ap iski sinchai kar rahe hain to halki sinchai karein, jayada pani na dalein, dhanywad
Posted by AVINASH
Rajasthan
08-01-2020 08:31 PM
Punjab
04-13-2020 03:40 PM
AVINASH ji pure goat breed lene ke lia aap DR Anil 9660669992 se samparak kar sakte hai, Thankyou.
Posted by nikhil
Madhya Pradesh
08-01-2020 08:31 PM
Maharashtra
01-09-2020 02:21 PM
निखिल जी, यह फंगस के हमले की वजह से हुआ है, इसमें झुलस रोग है, इसकी रोकथाम के लिए आप इसमें copper oxychloride @ 500 gm को 150 लीटर पानी में मिला कर प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें, इससे यह ठीक हो जाये गा, धन्यवाद
Posted by Sagar Dahiya
Madhya Pradesh
08-01-2020 08:31 PM
Punjab
01-09-2020 04:12 PM
यदि आप लेयर मुर्गी पालन करना चाहते है तो लेयर फार्मिंग के लिए आपको 50 फीट लंबाई वाली जगह और 20 फीट चौड़ाई वाली जगह की जरूरत होती है यह आपका 1000 वर्ग फुट जगह बन जाती है यहां आप 1000 बच्चों को रख सकते हैं इस प्रकार आप अपने बजट के हिसाब से बच्चों को रख सकते है और यदि आप लेयर का बच्चा अपने फार्म पर तैयार करते है तो आपको बच्च.... (Read More)
यदि आप लेयर मुर्गी पालन करना चाहते है तो लेयर फार्मिंग के लिए आपको 50 फीट लंबाई वाली जगह और 20 फीट चौड़ाई वाली जगह की जरूरत होती है यह आपका 1000 वर्ग फुट जगह बन जाती है यहां आप 1000 बच्चों को रख सकते हैं इस प्रकार आप अपने बजट के हिसाब से बच्चों को रख सकते है और यदि आप लेयर का बच्चा अपने फार्म पर तैयार करते है तो आपको बच्चा अंडे देने तक 160—170 रूप्ये प्रति बच्चे के हिसाब से खर्चा आएगा यदि आप तैयार बच्चा लेकर आते है तो वो आपको 205—210 रूप्ये प्रति बच्चे के हिसाब से पड़ेगा फिर आप उस हिसाब से इनको खरीद सकते है. पहले आप अपने बजट के हिसाब लेयर फार्मिंग करें फिर जैसे जैसे आपको काम की जानकारी होती रहेगी और आप काम बढ़ाते रहेगे फिर आप कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग कर सकते है
Posted by Himanshu Pandey
Uttar Pradesh
08-01-2020 08:30 PM
Maharashtra
01-09-2020 02:08 PM
हिमांशु जी, खाद का प्रयोग बैड तैयार करने के समय पर किया जाता है, बैड की तैयारी से पहले अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर 8-10 टन प्रति एकड़ में डालें, पहली तुड़ाई के समय Nitrogen 32 किलो (यूरिया 70 किलो), phosphorus 24 किलो (SSP 150 किलो) और potash 24 किलो (myuret of potash 40 किलो) प्रति एकड़ में डालें गाय का गला हुआ गोबर, पोटाश और phosphorus की पूरी मात्रा और Nitrogen की एक .... (Read More)
हिमांशु जी, खाद का प्रयोग बैड तैयार करने के समय पर किया जाता है, बैड की तैयारी से पहले अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर 8-10 टन प्रति एकड़ में डालें, पहली तुड़ाई के समय Nitrogen 32 किलो (यूरिया 70 किलो), phosphorus 24 किलो (SSP 150 किलो) और potash 24 किलो (myuret of potash 40 किलो) प्रति एकड़ में डालें गाय का गला हुआ गोबर, पोटाश और phosphorus की पूरी मात्रा और Nitrogen की एक तिहाई मात्रा बिजाई के तीन से चार सप्ताह पहले डालें बाकी बची Nitrogen को दो भागों में बांटे पहले भाग को बिजाई के 25-30 दिन बाद और दूसरे भाग को बिजाई के 40-50 दिन बाद डालें धन्यवाद