
Posted by sohan dass
Punjab
09-01-2020 10:05 AM
tuci uss nu pett de kiria lai Bandykind plus bolus deo ate Cargill di heifer dry feed deni suru kro ate uss nu Ovumin gold powder 100gm rojana deo, ehna nal growth vdia howegi ate jldi heat vich aa jawegi. tuci dwaia di photoa dekh skde ho.
Posted by Kuldeep Yadav
Madhya Pradesh
09-01-2020 09:53 AM
डेयरी फार्मिंग के लिए लोन अलग अलग कामों के लिए मिलता है जैसे शैड के लिए, पशुओं के लिए, डेयरी मशीनरी के लिए सबसे पहले आपने जिसके लिए लोन लेना है उस संबंधी आवेदन नज़दीक के डिप्टी डायरेक्टर को मिलकर दें, इसके लिए आपके पास डेयरी ट्रेनिंग होनी जरूरी है उसके सर्टीफिकेट के हिसाब से आपको लोन मिलेगा यह ट्रेनिंग आप अप.... (Read More)
डेयरी फार्मिंग के लिए लोन अलग अलग कामों के लिए मिलता है जैसे शैड के लिए, पशुओं के लिए, डेयरी मशीनरी के लिए सबसे पहले आपने जिसके लिए लोन लेना है उस संबंधी आवेदन नज़दीक के डिप्टी डायरेक्टर को मिलकर दें, इसके लिए आपके पास डेयरी ट्रेनिंग होनी जरूरी है उसके सर्टीफिकेट के हिसाब से आपको लोन मिलेगा यह ट्रेनिंग आप अपने नज़दीकी केवीके से प्राप्त कर सकते है वहां समय समय पर ट्रेनिंग दी जाती है आप वहां जाकर अपना फार्म भर आए जब भी वहां ट्रेनिंग होगी तो आपको फोन करके बता दिया जाएगा, इस ट्रेनिंग में आपको डेयरी लोन और सब्सिड़ी के बारे में सारी जानकारी प्राप्त हो जाएगी.

Posted by संजय मिश्र
Uttar Pradesh
09-01-2020 09:51 AM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by मोहन लाल
Rajasthan
09-01-2020 09:51 AM
Mohan lal ji Vermicompost lene ke lia aap Abhishek 8875141504 se samprak kar sakte hai, Thankyou.

Posted by Nirvair Singh
Punjab
09-01-2020 09:33 AM
ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ Lactomood ਹੋਮਿਓਪੈਥਿਕ ਦਵਾਈ ਦੀਆ 10-10 ਬੂੰਦਾਂ ਦਿਨ ਵਿਚ 3 ਵਾਰ ਦਿਓ ਅਤੇ leptaden tablet 10-10 ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ ਅਤੇ Milkout ਪਾਊਡਰ 2-2 ਚਮਚ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ..
Posted by jagbir singh
Haryana
09-01-2020 09:32 AM
aap ke area me pani kitna gehraiee me he wo bataye

Posted by rohit
Haryana
09-01-2020 09:30 AM
रोहित जी, आप बरसीम में फुटारे के लिए hoshi @ 400 ml को 150 लीटर पानी में मिला कर प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें, धन्यवाद
Posted by beerendra Pradhan
Uttar Pradesh
09-01-2020 09:13 AM
इस नसल का पिछला जिला मोंटगोमेरी (पाकिस्तान) है इस नसल के पशुओं के शरीर का रंग लाल-भूरा, आकार मध्यम, छोटी टांगे, सिर चौड़ा होता है छोटे और भारी सींग, गर्दन के नीचे लटकती हुई भारी चमड़ी और भारी लेवा होता है यह सबसे ज्यादा दूध देने वाली भारतीय नसल है यह नसल पंजाब के फिरोजपुर और अमृतसर जिलों में और राजस्थान के श्री ग.... (Read More)
इस नसल का पिछला जिला मोंटगोमेरी (पाकिस्तान) है इस नसल के पशुओं के शरीर का रंग लाल-भूरा, आकार मध्यम, छोटी टांगे, सिर चौड़ा होता है छोटे और भारी सींग, गर्दन के नीचे लटकती हुई भारी चमड़ी और भारी लेवा होता है यह सबसे ज्यादा दूध देने वाली भारतीय नसल है यह नसल पंजाब के फिरोजपुर और अमृतसर जिलों में और राजस्थान के श्री गंगानगर जिले में पायी जाती है पंजाब में फिरोजपुर जिले के फाज़िलका और अबोहर कस्बों में शुद्ध साहीवाल गायों के झुंड उपलब्ध रहते हैं इस नसल के बैल सुस्त और काम में धीमे होते हैं इस नसल को लंबी बार, लोला, मोंटगोमेरी, मुल्तानी और तेली के नाम से जाना जाता है इस नसल के प्रौढ़ बैल का औसतन भार 5.5 क्विंटल और गाय का औसतन भार 4 क्विंटल होता है

Posted by akash kumar
Haryana
09-01-2020 09:10 AM
Iske liye pehle aapko fssai ki official website pr jana hoga www.fssai.gov.in. Iske baad aap apni eligibility check krein. eligibility criteria pr jakr aapko pta chlega k aap central licence, state licence ya registration, kis k liye eligible hai. Ye aapko aapke turnover k hisab se pta chl jayega. Register krne k liye aap right side pr bne sign up pr jaakr pehle ek form bhar k sign up kre aur fir register kr lein. Fir app apni state select krein aur fir apne business type select krein. Uske baad aapke business ki turnover select krein. Fir kuch business related basic details fill krein. Aur uske baad kuch supporting documents attach kr dein. Uske baad fees pay kr dein. Aur aapka fssai k licence k liye apply ho jayega. Supporting documents aur fee structure aapko main website k left side i.... (Read More)
Iske liye pehle aapko fssai ki official website pr jana hoga www.fssai.gov.in. Iske baad aap apni eligibility check krein. eligibility criteria pr jakr aapko pta chlega k aap central licence, state licence ya registration, kis k liye eligible hai. Ye aapko aapke turnover k hisab se pta chl jayega. Register krne k liye aap right side pr bne sign up pr jaakr pehle ek form bhar k sign up kre aur fir register kr lein. Fir app apni state select krein aur fir apne business type select krein. Uske baad aapke business ki turnover select krein. Fir kuch business related basic details fill krein. Aur uske baad kuch supporting documents attach kr dein. Uske baad fees pay kr dein. Aur aapka fssai k licence k liye apply ho jayega. Supporting documents aur fee structure aapko main website k left side icons mai pta chl jayegi. Adhik jankari ke lia aap 8264611997 par samparak kar sakte hai, Thankyou. Dhanyawad
Posted by Aman verma
Uttar Pradesh
09-01-2020 09:10 AM
अमन जी, यह आयरन तत्व की कमी कारण हो रहा है आप इसकी कमी को पूरा करने के लिए इसमें ferrous sulphate @ 10 gm प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें, इससे यह हरा हो जायेगा, धन्यवाद

Posted by sarpanch
Punjab
09-01-2020 08:48 AM
ਸਰਪੰਚ ਜੀ, ਅਫਰੀਕਨ ਟਾਲ ਦੀ ਪੈਦਾਵਾਰ 160 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਹੁੰਦੀ ਹੈ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by kuldeep singh
Punjab
09-01-2020 08:43 AM
ਕੁਲਦੀਪ ਜੀ ਤੁਸੀ ਇਸ ਨੂੰ ਗੁਰੂ ਅੰਗਦ ਦੇਵ ਵੈਟਨਰੀ ਯੂਨਿਵਰਸਿਟੀ ਲੁਧਿਆਣਾ ਲੈ ਜਾਓ ਉਥੇ ਇਸਦੀ ਸਹੀ ਜਾਂਚ ਹੋਵੇਗੀ ਅਤੇ ਵਧਿਆ ਇਲਾਜ ਹੋ ਜਾਵੇਗਾ

Posted by Sat Raj
Odisha
09-01-2020 08:37 AM
Sat Raj ji, this is due to attack of fungus on your banana plant, for its control please give application of carbendazim @ 4gm or mancozeb @ 4gm per liter of water, and for its growth please use vermicompost @ 4-5 kg for this plant, this will lead to good growth of this plant, thank you
Posted by रवी कुमार
Uttar Pradesh
09-01-2020 08:37 AM
रवी कुमार जी, मोटे आलुओं की पैदावार के लिए 13:00:45, 2 किलो और मैगनीश्यिम ई डी टी ए 100 ग्राम प्रति एकड़ की स्प्रे करें बीमारियों के हमले को रोकने के लिए फंगसनाशी प्रॉपीनेब 3 ग्राम प्रति लीटर पानी डालें आलुओं का आकार और गिनती बढ़ाने के लिए हयूमिक एसिड (12 प्रतिशत) 3 ग्राम + एम ए पी 12:61:00 की 8 ग्राम या डी ए पी 15 ग्राम प्रति लीटर क.... (Read More)
रवी कुमार जी, मोटे आलुओं की पैदावार के लिए 13:00:45, 2 किलो और मैगनीश्यिम ई डी टी ए 100 ग्राम प्रति एकड़ की स्प्रे करें बीमारियों के हमले को रोकने के लिए फंगसनाशी प्रॉपीनेब 3 ग्राम प्रति लीटर पानी डालें आलुओं का आकार और गिनती बढ़ाने के लिए हयूमिक एसिड (12 प्रतिशत) 3 ग्राम + एम ए पी 12:61:00 की 8 ग्राम या डी ए पी 15 ग्राम प्रति लीटर की स्प्रे पौधे की वृद्धि के समय करें धन्यवाद

Posted by Subhash Chodhary
Rajasthan
09-01-2020 08:22 AM
सुभाष चौधरी जी, अच्छे जल निकास वाली रेतली दोमट मिट्टी, जिसमें जैविक तत्व उच्च मात्रा में होते हैं करेले की खेती के लिए उपयुक्त है मिट्टी की पी एच 6.5-7.5 करेले की खेती के लिए सबसे अच्छी रहती है करेले की खेती के लिए अच्छे तरह से तैयार ज़मीन की आवश्यकता होती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक 2-3 जोताई करें बिजाई का समय: बीज .... (Read More)
सुभाष चौधरी जी, अच्छे जल निकास वाली रेतली दोमट मिट्टी, जिसमें जैविक तत्व उच्च मात्रा में होते हैं करेले की खेती के लिए उपयुक्त है मिट्टी की पी एच 6.5-7.5 करेले की खेती के लिए सबसे अच्छी रहती है करेले की खेती के लिए अच्छे तरह से तैयार ज़मीन की आवश्यकता होती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक 2-3 जोताई करें बिजाई का समय: बीज बोने के लिए फरवरी से मार्च या जून से जुलाई का समय उपयुक्त होता है फासला: 1.5 मीटर चौड़े बैड के दोनों ओर बीजों को बोयें और पौधे से पौधे में 45 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीज की गहराई: गड्ढे में 2.5-3 सैं.मी. की गहराई पर बीजों को बोयें बिजाई का ढंग: गड्ढा खोदकर बिजाई की जाती है 2.0 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बीज का उपचार: बिजाई से पहले बीज को 25-50 पी पी एम जिबरैलिक एसिड और 25 पी पी एम बोरोन में 24 घंटे के लिए भिगायें करेले की फसल को अच्छी तरह से गली हुई रूड़ी की खाद 10-15 टन, नाइट्रोजन 13 किलो (यूरिया 30 किलो), फासफोरस 20 किलो (एस एस पी 125 किलो) और पोटाशियम 20 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 35 किलो) प्रति एकड़ में डालें फासफोरस और पोटाशियम की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा बीज की बिजाई से पहले डालें बाकी बची नाइट्रोजन को बिजाई के एक महीने बाद डालें बिजाई के बाद पहली सिंचाई करें गर्मियों के मौसम में प्रत्येक 6-7 दिनों के बाद सिंचाई करें और बारिश के मौसम में जरूरत पड़ने पर सिंचाई करें इस फसल को कुल 8-9 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है नदीनों की रोकथाम के लिए हाथों से गोडाई करें 2-3 गोडाई पौधे की शुरूआती वृद्धि के समय करनी चाहिए खादों की मात्रा डालने के समय मिट्टी में गोडाई की प्रक्रिया करें और मुख्यत: बारिश के मौसम में मिट्टी चढ़ाएं धन्यवाद

Posted by satnam singh
Punjab
09-01-2020 08:21 AM
satnam singh ji kisana nu ohna di smasya de hisab nal hi dwai suggest kiti jandi hai kirpa karke daso ke tuhade khet vich kehdi smasya hai ta jo tuhanu osde hisab nal jankari diti ja sake,dhanwad

Posted by Ramesh
Madhya Pradesh
09-01-2020 08:21 AM
Ramesh ji Vanraja Chicks lene ke lia aap Kamlesh Kushwaha 9229881876 (Bhumika ANIMAL Breeder farm) se samparak karsakte hai, Thankyou.

Posted by Ramesh
Madhya Pradesh
09-01-2020 08:19 AM
Ramesh ji Vanraja Chicks lene ke lia aap Kamlesh Kushwaha 9229881876 (Bhumika ANIMAL Breeder farm) se samparak karsakte hai, Thankyou.

Posted by Hk Rajput
Uttar Pradesh
09-01-2020 08:15 AM
Rajput ji murrah bhains ka rate uske dudh aur achi nasal per nirbhar krta hai, yeh nasal dudh ke hisab se 70000-90000 tak v mill skti hai.
Posted by Sumit Singh
Uttar Pradesh
09-01-2020 08:11 AM
Sumit Singh ji, sarson ki acchi paidawaar ke liye ap isme NPK 191919 @ 10 gm prati liter pani ke hisaab se istemal kar sakte hian, isse sarson ki growth bhi acchi hoti hai, or hari bhi rehti hai, dhanywad

Posted by Gurmeet Singh
Punjab
09-01-2020 07:57 AM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਕਣਕ ਵਿੱਚ ਯੂਰੀਆ ਖਾਦ @110 ਕਿਲੋ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ 55-60 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਅੰਦਰ ਪੂਰੀ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ
Posted by Manoj Mandal
Bihar
09-01-2020 07:55 AM
Shri maan g makke mein coragen@40 ml per acre spray kr skte ho....
Posted by Uchchhab Gujjar
Rajasthan
09-01-2020 07:53 AM
Uchchhab ji, kripya ap bataye ke apke anar ke podhe ki umar kitni hai, or apne isse kis vidhi ke sath lagaya hai, taki apko iske bare mein sahi jankari di ja sake , dhanywad
Posted by ਕੁਲਵੀਰ ਸਿੰਘ
Punjab
09-01-2020 07:52 AM
ਕੁਲਵੀਰ ਸਿੰਘ ਜੀ, ਫਰਵਰੀ-ਮਾਰਚ ਜਾਂ ਅਗਸਤ-ਸਤੰਬਰ ਦਾ ਮਹੀਨਾਂ ਅਮਰੂਦ ਦੇ ਪੌਦੇ ਲਗਾਉੇਣ ਲਈ ਸਹੀ ਮੰਨਿਆਂ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਪੌਦੇ ਲਗਾਉਣ ਲਈ 6x5 ਮੀਟਰ ਫਾਸਲਾ ਰੱਖੋ ਜੇਕਰ ਪੌਦੇ ਵਰਗਾਕਾਰ ਢੰਗ ਨਾਲ ਲਗਾਏ ਹਨ ਤਾਂ ਪੌਦਿਆਂ ਦਾ ਫਾਸਲਾ 7 ਮੀਟਰ ਰੱਖੋ 132 ਪੌਦੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਲਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਬੀਜ ਦੀ ਡੂੰਘਾਈ: ਜੜਾਂ ਨੂੰ 25 ਸੈ:ਮੀ ਦੀ ਡੂੰਘਾਈ ਤੇ ਬੀਜਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਬਿਜਾਈ ਦਾ ਢੰਗ: ਸਿੱਧੇ ਤੌਰ ਤ.... (Read More)
ਕੁਲਵੀਰ ਸਿੰਘ ਜੀ, ਫਰਵਰੀ-ਮਾਰਚ ਜਾਂ ਅਗਸਤ-ਸਤੰਬਰ ਦਾ ਮਹੀਨਾਂ ਅਮਰੂਦ ਦੇ ਪੌਦੇ ਲਗਾਉੇਣ ਲਈ ਸਹੀ ਮੰਨਿਆਂ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਪੌਦੇ ਲਗਾਉਣ ਲਈ 6x5 ਮੀਟਰ ਫਾਸਲਾ ਰੱਖੋ ਜੇਕਰ ਪੌਦੇ ਵਰਗਾਕਾਰ ਢੰਗ ਨਾਲ ਲਗਾਏ ਹਨ ਤਾਂ ਪੌਦਿਆਂ ਦਾ ਫਾਸਲਾ 7 ਮੀਟਰ ਰੱਖੋ 132 ਪੌਦੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਲਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਬੀਜ ਦੀ ਡੂੰਘਾਈ: ਜੜਾਂ ਨੂੰ 25 ਸੈ:ਮੀ ਦੀ ਡੂੰਘਾਈ ਤੇ ਬੀਜਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਬਿਜਾਈ ਦਾ ਢੰਗ: ਸਿੱਧੇ ਤੌਰ ਤੇ ਛਿੱਟਾ ਦੇ ਕੇ , ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਰੋਪਣ ਕਰਕੇ, ਕਲਮਾਂ ਲਗਾ ਕੇ, ਪਨੀਰੀ ਲਗਾ ਕੇ ਇਸ ਦਾ ਬੀਜ ਲੈਣ ਲਈ ਤੁਸੀ Amardeep Singh 8146500544 PAU Fruit Nursery ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰੋ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Manoj Mandal
Bihar
09-01-2020 07:51 AM
मनोज मंडल जी, अगर आप इल्ली ( सुंडी) की बात कर रहे हैं, तो इसकी रोकथाम के लिए आप इसमें quinalphos @ 4ml प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें, इससे इल्ली की रोकथाम हो जाती है, धन्यवाद

Posted by Dhiraj Mandal
Maharashtra
09-01-2020 07:46 AM
iske liye aap achi khurak deni suru kren aur inko aap HYBLEND Powder dena suru kren aur yeh 10g powder per 100kg feed ke hisab se den yeh virbac company ka product hai, isse achi growth ho jayegi.
Posted by satbir Sharma
Haryana
09-01-2020 07:45 AM
सतबीर जी, पपीता को मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए पपीते की खेती के लिए नदीन रहित भूमि का प्रयोग करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत क.... (Read More)
सतबीर जी, पपीता को मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए पपीते की खेती के लिए नदीन रहित भूमि का प्रयोग करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें आखिरी जोताई के समय अच्छी तरह से गली हुई रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर मिट्टी में अच्छी तरह मिलाकर डालें सिफारिश किए गए फासलों पर 1 मीटर x 1 मीटर x 1 मीटर आकार के गड्ढे खोदें गड्ढों को मिट्टी और रूड़ी की खाद या गाय के गले हुए गोबर से भरें प्रयोग की गई किस्म के आधार पर प्रत्येक गड्ढे पर 2-4 नए पौधों की रोपाई करें रोपाई के बाद हल्की सिंचाई करें हवा से बचाव के लिए खूंटा लगाएं एक एकड़ में 104 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें कम बारिश वाले क्षेत्रों में जून - जुलाई के महीने में बिजाई की जानी चाहिए और तराई और अधिक बारिश वाले क्षेत्रों में सितंबर महीने में बिजाई की जानी चाहिए और क्षेत्र जहां सिंचाई की सुविधाएं उपलब्ध हो वहां पर फरवरी - मार्च के महीने में बिजाई की जानी चाहिए आमतौर पर 1.8 मीटर x 1.8 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है उच्च घनता की रोपाई के लिए 1.5 मीटर x 1.5 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है नर्सरी में बीज को 10 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बीजो की खेत में सीधे बिजाई या मुख्य खेत में नए पौधों की रोपाई की जाती है बीजों को 150 गेज़ की मोटाई वाले, 25 x 10 सैं.मी. के पॉलीथीन बैग में बोयें पानी के उचित निकास के लिए पॉलीथीन बैग के निचले हिस्से में 1 मि.मी. अर्द्धव्यास का छेद करें उसके बाद पॉलीथीन बैग में समान अनुपात में रूड़ी की खाद, मिट्टी और रेत डालें बिजाई से पहले बीजों का उपचार करें रोपाई के लिए 6-7 सप्ताह के पौधों का प्रयोग करें पौधे की प्रौढ़ अवस्था के दौरान नदीनों की रोकथाम जरूरी होती है नदीनों की तीव्रता के आधार पर, नियमित और हल्की गोडाई करें फ्लूक्लोरालिन या बूटाक्लोर 0.8 किलो प्रति एकड़ में डालें नदीनों की रोकथाम के लिए मलचिंग भी एक प्रभावी तरीका है पौधों की रोपाई के कुछ दिनों बाद प्लास्टिक शीट या धान की पराली या गन्ने के बचे कुचे को मलच के रूप में डालें मुख्यत: फल के पूरा आकार लेने और हरे से हल्का पीला रंग होने पर तुड़ाई की जाती है पहली तुड़ाई रोपाई के 14-15 महीनों के बाद की जा सकती है 4-5 तुड़ाइयां प्रति मौसम की जा सकती हैं तुड़ाई एक एक फल को हाथों से तोड़कर की जाती है फलों को सुबह के समय तोड़ें धन्यवाद
Posted by satbir Sharma
Haryana
09-01-2020 07:43 AM
सतबीर जी, पपीता को मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए पपीते की खेती के लिए नदीन रहित भूमि का प्रयोग करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत क.... (Read More)
सतबीर जी, पपीता को मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए पपीते की खेती के लिए नदीन रहित भूमि का प्रयोग करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें आखिरी जोताई के समय अच्छी तरह से गली हुई रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर मिट्टी में अच्छी तरह मिलाकर डालें सिफारिश किए गए फासलों पर 1 मीटर x 1 मीटर x 1 मीटर आकार के गड्ढे खोदें गड्ढों को मिट्टी और रूड़ी की खाद या गाय के गले हुए गोबर से भरें प्रयोग की गई किस्म के आधार पर प्रत्येक गड्ढे पर 2-4 नए पौधों की रोपाई करें रोपाई के बाद हल्की सिंचाई करें हवा से बचाव के लिए खूंटा लगाएं एक एकड़ में 104 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें कम बारिश वाले क्षेत्रों में जून - जुलाई के महीने में बिजाई की जानी चाहिए और तराई और अधिक बारिश वाले क्षेत्रों में सितंबर महीने में बिजाई की जानी चाहिए और क्षेत्र जहां सिंचाई की सुविधाएं उपलब्ध हो वहां पर फरवरी - मार्च के महीने में बिजाई की जानी चाहिए आमतौर पर 1.8 मीटर x 1.8 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है उच्च घनता की रोपाई के लिए 1.5 मीटर x 1.5 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है नर्सरी में बीज को 10 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बीजो की खेत में सीधे बिजाई या मुख्य खेत में नए पौधों की रोपाई की जाती है बीजों को 150 गेज़ की मोटाई वाले, 25 x 10 सैं.मी. के पॉलीथीन बैग में बोयें पानी के उचित निकास के लिए पॉलीथीन बैग के निचले हिस्से में 1 मि.मी. अर्द्धव्यास का छेद करें उसके बाद पॉलीथीन बैग में समान अनुपात में रूड़ी की खाद, मिट्टी और रेत डालें बिजाई से पहले बीजों का उपचार करें रोपाई के लिए 6-7 सप्ताह के पौधों का प्रयोग करें पौधे की प्रौढ़ अवस्था के दौरान नदीनों की रोकथाम जरूरी होती है नदीनों की तीव्रता के आधार पर, नियमित और हल्की गोडाई करें फ्लूक्लोरालिन या बूटाक्लोर 0.8 किलो प्रति एकड़ में डालें नदीनों की रोकथाम के लिए मलचिंग भी एक प्रभावी तरीका है पौधों की रोपाई के कुछ दिनों बाद प्लास्टिक शीट या धान की पराली या गन्ने के बचे कुचे को मलच के रूप में डालें मुख्यत: फल के पूरा आकार लेने और हरे से हल्का पीला रंग होने पर तुड़ाई की जाती है पहली तुड़ाई रोपाई के 14-15 महीनों के बाद की जा सकती है 4-5 तुड़ाइयां प्रति मौसम की जा सकती हैं तुड़ाई एक एक फल को हाथों से तोड़कर की जाती है फलों को सुबह के समय तोड़ें धन्यवाद

Posted by soniya yadav
Chattisgarh
09-01-2020 07:41 AM
soniya ji agar aap phoolon ki kheti karne ke bare men soch rahe hai to aap sabse pehle iski market dhoonde jaise najdiki phoolon ki dukar aur mandir ke bahr jo dukane hoti hai unse sampark karen.jaise jaise aapka link badta jayega aapko iski aur marketing ki knowledge aa jayegi.dhanywad
Posted by ਲਵਦੀਪ ਸਿੰਘ
Punjab
09-01-2020 07:36 AM
ਲਵਦੀਪ ਸਿੰਘ ਜੀ, ਤੁਸੀਂ ਖੇਤ ਵਿਚ 20 ਕਿਲੋ ਯੂਰੀਆ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਛਿੱਟਾ ਦੋ , ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਜਾਵੀਂ ਦੁਬਾਰਾ ਨਿੱਕਲ ਆਵੇ ਗੀ, ਧੰਨਵਾਦ

Posted by Kuldipsinh Rana
Gujarat
09-01-2020 07:34 AM
तिलहनी फसलों के लिए हल्की से भारी ज़मीनें अच्छी होती हैं राया हर तरह की ज़मीन में उगाया जा सकता है पर तोरिये के लिए भारी ज़मीनें चाहिए तारामीरा के लिए आमतौर पर रेतली से मैरा रेतली ज़मीनें अच्छी होती हैं सीड बैड पर बोयी फसल अच्छी अंकुरित होती है ज़मीन को देसी हल से दो या तीन बार जोताई करें और प्रत्येक जोताई के बाद .... (Read More)
तिलहनी फसलों के लिए हल्की से भारी ज़मीनें अच्छी होती हैं राया हर तरह की ज़मीन में उगाया जा सकता है पर तोरिये के लिए भारी ज़मीनें चाहिए तारामीरा के लिए आमतौर पर रेतली से मैरा रेतली ज़मीनें अच्छी होती हैं सीड बैड पर बोयी फसल अच्छी अंकुरित होती है ज़मीन को देसी हल से दो या तीन बार जोताई करें और प्रत्येक जोताई के बाद सुहागा फेरें बीजों के एकसार अंकुरित होने के लिए बैड नर्म, गीले और समतल होने चाहिए बुंदेलखंड और आगरा क्षेत्रों के लिए, बिजाई के लिए सितंबर का आखिरी सप्ताह उचित समय होता है जबकि बाकी के क्षेत्रों के लिए 15 अक्तूबर तक बिजाई पूरी कर लें असिंचित क्षेत्रों के लिए बिजाई का उपयुक्त समय सितंबर के दूसरे पखवाड़ा होता है तारामीरा-सरसों की बिजाई के लिए पंक्ति से पंक्ति का फासला 30 सैं.मी. और पौधे से पौधे का फासला 10 से 15 सैं.मी. रखें गोभी सरसों की बिजाई के लिए पंक्तियों का फासला 45 सैं.मी. और पौधे से पौधे का फासला 10 सैं.मी. रखें बीजों को 4-5 सैं.मी. की गहराई में बोयें बिजाई के लिए सीड ड्रिल विधि का प्रयोग करें सिंचित और असिंचित क्षेत्रों के लिए 2-2.5 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बिजाई के 3-4 सप्ताह पहले 8-10 किलो गली हुई रूड़ी की खाद या अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर मिट्टी में मिलायें खादों की उचित मात्रा के लिए मिट्टी की जांच करना जरूरी है सिंचित हालातों में नाइट्रोजन 50 किलो (यूरिया 110 किलो), फासफोरस 24 किलो (सुपर फास्फेट 150 किलो) और पोटाश 24 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 40 किलो) प्रति एकड़ में डालें बिजाई के समय नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस की पूरी मात्रा डालें और बाकी बची नाइट्रोजन पहली सिंचाई के समय डालें फासफोरस के लिए, यदि एस एस पी का प्रयोग ना किया गया हो तो बिजाई के समय सल्फर 16 किलो प्रति एकड़ में डालें यदि डी ए पी का प्रयोग ना किया गया हो तो जिप्सम 80 किलो प्रति एकड़ में डालें थायोरिया 0.05 प्रतिशत की स्प्रे करने से अनाज की उपज में 10-15 प्रतिशत की वृद्धि होती है
Posted by Chetan Singh
Uttar Pradesh
09-01-2020 07:29 AM
चेतन जी , यह फंगस के हमले की वजह से हुआ है, आप इसकी रोकथाम के लिए carbendazim @ 4 gm यां mancozeb @ 4 gm प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें, इससे यह ठीक हो जायेगा, धन्यवाद

Posted by Jassdial Rai
Punjab
09-01-2020 07:28 AM
Jassdial ji, kirpa kar ke tusi apna sawal visthar nal pucho ke tusi gobar gas bare ki jankri lena chaundey ho, taki tuhnu is bare puri jankari ja sake, dhanwad

Posted by sukhchain singh
Punjab
09-01-2020 07:24 AM
Sukhchain ji yaddi aap dairy ke loan lena chahte hai too apko training leni jruri hai kyuki uss training certificate ke hisab se apko loan mill skta hai, aap training apne nazdiki Krishi vigyan kendar se lee skte hai..

Posted by sukhchain singh
Punjab
09-01-2020 07:20 AM
ਪਸ਼ੂਆਂ ਨੂੰ ਘਰ ਵਿਚ ਫੀਡ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਦੇਣੀ ਹੈ ਤਾਂ ਸੰਤੁਲਿਤ ਖੁਰਾਕ 100 ਕਿਲੋ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਲੋੜੀਂਦੀ ਸਮੱਗਰੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਜਿਵੇਂ 25 ਕਿਲੋ ਅਨਾਜ ( ਜਵਾਰ, ਬਾਜਰੀ (ਸਰਦੀਆਂ) , ਕਣਕ, ਜੌਂ ( ਗਰਮੀਆ) ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਕੋਈ ਇੱਕ ) , ਦਾਲ ਚੂਰੀ 20 ਕਿਲੋ( ਮੂੰਗੀ ਚੂਰੀ, ਮਾਂਹ ਚੂਰੀ, ਮੋਠ ਚੂਰੀ ( ਕੇਵਲ ਸਰਦੀਆਂ ਲਈ) , ਮਸੁਰ ਚੂਰੀ ,ਅਰਹਰ, (ਇਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਇੱਕ ) , DOC 25 ਕਿਲੋ ( ਚੌਲਾਂ ਦਾ ਚੂਰਾ ) , ਫਾਈਬਰ ਛਿਲਕਾ 15 ਕ.... (Read More)
ਪਸ਼ੂਆਂ ਨੂੰ ਘਰ ਵਿਚ ਫੀਡ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਦੇਣੀ ਹੈ ਤਾਂ ਸੰਤੁਲਿਤ ਖੁਰਾਕ 100 ਕਿਲੋ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਲੋੜੀਂਦੀ ਸਮੱਗਰੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਜਿਵੇਂ 25 ਕਿਲੋ ਅਨਾਜ ( ਜਵਾਰ, ਬਾਜਰੀ (ਸਰਦੀਆਂ) , ਕਣਕ, ਜੌਂ ( ਗਰਮੀਆ) ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਕੋਈ ਇੱਕ ) , ਦਾਲ ਚੂਰੀ 20 ਕਿਲੋ( ਮੂੰਗੀ ਚੂਰੀ, ਮਾਂਹ ਚੂਰੀ, ਮੋਠ ਚੂਰੀ ( ਕੇਵਲ ਸਰਦੀਆਂ ਲਈ) , ਮਸੁਰ ਚੂਰੀ ,ਅਰਹਰ, (ਇਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਇੱਕ ) , DOC 25 ਕਿਲੋ ( ਚੌਲਾਂ ਦਾ ਚੂਰਾ ) , ਫਾਈਬਰ ਛਿਲਕਾ 15 ਕਿਲੋ (ਕਣਕ, ਚੌਕਰ, ਚਨਾ ਛਿਲਕਾ, ਮਟਰ ਛਿਲਕਾ, ਇਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਇੱਕ) , ਖਲ਼ 15 ਕਿਲੋ(ਸਰੋਂ, ਬਿਨੌਲਾ ਜਾਂ ਸੋਇਆ (ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਕੋਈ ਇੱਕ) , ਮਿੱਠਾ ਸੋਡਾ 250 ਗ੍ਰਾਮ, 1 ਕਿਲੋ ਨਮਕ, ਗੁੜ 1 ਕਿਲੋ, 1 ਕਿੱਲੋ ਹਲਦੀ (ਸਰਦੀਆ ਵਿੱਚ ) ਇਹ ਨੂੰ ਰਲਾ ਲਵੋ ਇਹ ਫੀਡ ਪਸ਼ੂ ਲਈ ਬਹੁਤ ਲਾਹੇਵੰਦ ਹੁੰਦੀ ਹੈ

Posted by xyz
Jharkhand
09-01-2020 07:10 AM
श्रीमान जी, एयरोपॉनिक्स तकनीक में बिना मिट्टी के पौधे को उगाया जाता है इसमें बड़े-बड़े बॉक्स में पौधों को लटका दिया जाता है सभी बॉक्स में समय-समय पर पोषक तत्व और पानी डाला जाता है इस तकनीक में पौधों की जड़ों में नमी बरकरार रहती है जिसके कारण थोड़े ही समय में पौधे में बढ़वार होनी शुरू हो जाती है धन्यवाद

Posted by jeetendra chouhan
Madhya Pradesh
09-01-2020 06:59 AM
Jeetendra Chouhan ji, kripya ap bataye ke ap kis fasal mein pani ke bare mein jankari lena chahte hain, taki apko uske bare mein visthar se bataya ja sake, dhanywad
Posted by ਨਵਪਰੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
09-01-2020 06:31 AM
ਤੁਸੀਂ 4 ਕਿਲੋ ਯੂਰੀਆ ਲਓ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ 50 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਚੰਗੀੌ ਤਰ੍ਹਾ ਘੋਲ ਲਓ ਇਸ ਨੂੰ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਤੁਸੀਂ 1 ਕੁਇੰਟਲ ਤੂੜੀ ਲਓ ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਤੂੜੀ ਦੀ 6 ਇੰਚ ਮੋਟੀ ਢੇਰੀ ਅਤੇ 3-4 ਮੀਟਰ ਗੋਲਾਈ ਵਿੱਚ ਢੇਰੀ ਬਣਾਓ ਫਿਰ ਇਸ ਢੇਰੀ ਉੱਪਰ ਯੂਰੀਆ ਨਾਲ ਮਿਲਾਇਆ ਹੋਇਆ ਪਾਣੀ ਥੋੜਾ-ਥੋੜਾ ਛਿੜਕੋ ਅਤੇ ਇਸ ਢੇਰੀ ਨੂੰ ਪੈਰਾ ਨਾਲ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੱਬੋ ਅਤੇ ਫਿਰ ਇਹ ਪਾਣੀ ਦੁਬਾਰਾ ਢੇਰੀ ਤੇ ਹਲ.... (Read More)
ਤੁਸੀਂ 4 ਕਿਲੋ ਯੂਰੀਆ ਲਓ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ 50 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਚੰਗੀੌ ਤਰ੍ਹਾ ਘੋਲ ਲਓ ਇਸ ਨੂੰ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਤੁਸੀਂ 1 ਕੁਇੰਟਲ ਤੂੜੀ ਲਓ ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਤੂੜੀ ਦੀ 6 ਇੰਚ ਮੋਟੀ ਢੇਰੀ ਅਤੇ 3-4 ਮੀਟਰ ਗੋਲਾਈ ਵਿੱਚ ਢੇਰੀ ਬਣਾਓ ਫਿਰ ਇਸ ਢੇਰੀ ਉੱਪਰ ਯੂਰੀਆ ਨਾਲ ਮਿਲਾਇਆ ਹੋਇਆ ਪਾਣੀ ਥੋੜਾ-ਥੋੜਾ ਛਿੜਕੋ ਅਤੇ ਇਸ ਢੇਰੀ ਨੂੰ ਪੈਰਾ ਨਾਲ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੱਬੋ ਅਤੇ ਫਿਰ ਇਹ ਪਾਣੀ ਦੁਬਾਰਾ ਢੇਰੀ ਤੇ ਹਲਕਾ-ਹਲਕਾ ਛਿੜਕੋ ਇਸ ਤਰ੍ਹਾ ਤੁਸੀਂ ਢੇਰੀ ਨੂੰ ਪੈਰਾ ਨਾਲ ਦੱਬੋ ਅਤੇ ਪਾਣੀ ਦਾ ਇਸ ਵਿੱਚ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾ ਛਿੜਕਾਅ ਕਰੋ ਫਿਰ ਤੁਸੀ ਇਸ ਤਰ੍ਹਾ ਹੀ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਦੁਬਾਰਾ ਯੂਰੀਆ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਘੋਲ ਲਓ ਅਤੇ ਫਿਰ 1 ਕੁਇੰਟਲ ਤੂੜੀ ਨੂੰ ਪੁਰਾਣੀ ਢੇਰੀ ਉੱਪਰ ਉਸ ਹੀ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਢੇਰ ਬਣਾ ਦਿਓ ਅਤੇ ਫਿਰ ਤੋਂ ਯੂਰੀਆਂ ਵਾਲਾ ਪਾਣੀ ਛਿੜਕੋ ਅਤੇ ਪੈਰਾਂ ਨਾਲ ਦੱਬੋ ਇਸ ਤਰ੍ਹਾ ਤੁਸੀਂ 25 ਕੁਇੰਟਲ ਤੱਕ ਤੂੜੀ ਦਾ ਵੱਡਾ ਢੇਰ ਬਣਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਅਤੇ ਦੱਸੀ ਹੋਈ ਮਾਤਰਾ ਅਨੁਸਾਰ ਹੀ ਪਾਣੀ ਅਤੇ ਯੂਰੀਆ ਪਾਓ ਫਿਰ ਇਸ ਢੇਰ ਨੂੰ ਘੱਟ ਤੋਂ ਘੱਟ 21 ਦਿਨਾਂ ਲਈ ਪਲਾਸਟਿਕ ਲਿਫਾਫੇ ਨਾਲ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾ ਢੱਕ ਕੇ ਰੱਖੋ ਜਦੋਂ ਤੁਸੀ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਇਹ ਖਾਣ ਲਈ ਦਿਓਗੇ ਤਾਂ ਦੇਣ ਤੋਂ 1 ਘੰਟਾ ਪਹਿਲਾਂ ਹਵਾ ਜ਼ਰੂਰ ਲਗਵਾਓ ਅਤੇ ਤੁਸੀਂ 1-2 ਕਿਲੋ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਸ਼ੂਰੂ ਵਿੱਚ ਖਾਣ ਲਈ ਦਿਓ ਅਤੇ ਵੱਧ ਤੋਂ ਵੱਧ 5-6 ਕਿਲੋ ਤੱਕ ਰੋਜ਼ਾਨਾ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ

Posted by ravi baghel
Madhya Pradesh
09-01-2020 06:23 AM
Ravi ji isme lagbhag ek egg ke liye 25-30 paise bachte hai, baki market aur rate ke hisab per nirbhar krta hai.
Posted by Sharry Ahluwalia
Punjab
09-01-2020 05:52 AM
ਇਸਦੀ ਕਾਸ਼ਤ ਰੇਤ਼਼ਲੀਆਂ ਅਤੇ ਕਾਲੀ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਉਪਜਾਊ ਅਤੇ ਚੰਗੇ ਜਲ ਨਿਕਾਸ ਵਾਲੀ ਮਿੱਟੀ ਇਸ ਦੀ ਪੈਦਾਵਾਰ ਲਈ ਸਭ ਤੋ ਢੁੱਕਵੀ ਹੈ ਕਲਰ ਵਾਲੀਆਂ ਜ਼ਮੀਨਾ ਇਸ ਦੀ ਕਾਂਸਤ ਦੇ ਯੋਗ ਨਹੀ ਉੱਤਮ ph 6.5-8 ਹੈ Jwalamukhi : ਇਹ ਦਰਮਿਆਨੇ ਕੱਦ ਦੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਪੌਦੇ ਦਾ ਕੱਦ 170 ਸੈ:ਮੀ: ਹੈ ਫਸਲ 120 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਔਸਤ ਝਾੜ 7.3 ਕੁੰਇਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਤੇਲ ਦੀ ਮਾਤਰਾ 42 ਪ੍ਰਤੀਸ਼ਤ ਹੈ .... (Read More)
ਇਸਦੀ ਕਾਸ਼ਤ ਰੇਤ਼਼ਲੀਆਂ ਅਤੇ ਕਾਲੀ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਉਪਜਾਊ ਅਤੇ ਚੰਗੇ ਜਲ ਨਿਕਾਸ ਵਾਲੀ ਮਿੱਟੀ ਇਸ ਦੀ ਪੈਦਾਵਾਰ ਲਈ ਸਭ ਤੋ ਢੁੱਕਵੀ ਹੈ ਕਲਰ ਵਾਲੀਆਂ ਜ਼ਮੀਨਾ ਇਸ ਦੀ ਕਾਂਸਤ ਦੇ ਯੋਗ ਨਹੀ ਉੱਤਮ ph 6.5-8 ਹੈ Jwalamukhi : ਇਹ ਦਰਮਿਆਨੇ ਕੱਦ ਦੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਪੌਦੇ ਦਾ ਕੱਦ 170 ਸੈ:ਮੀ: ਹੈ ਫਸਲ 120 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਔਸਤ ਝਾੜ 7.3 ਕੁੰਇਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਤੇਲ ਦੀ ਮਾਤਰਾ 42 ਪ੍ਰਤੀਸ਼ਤ ਹੈ GKSFH 2002: ਇਹ ਦਰਮਿਆਨੇ ਕੱਦ ਦੀ ਦੋਗਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਫਸਲ 115 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਔਸਤ ਝਾੜ 7.5 ਕੁੰਇਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਤੇਲ ਦੀ ਮਾਤਰਾ 42.5 ਪ੍ਰਤੀਸ਼ਤ ਹੈ PSH 569: ਪੌਦੇ ਦਾ ਕੱਦ 162 ਸੈ:ਮੀ: ਹੈ ਫਸਲ 98 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ ਪਿਛੇਤੀ ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਵੀ ਢੁੱਕਵੀ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤ ਝਾੜ 7.44 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਅਤੇ 36.3 ਪ੍ਰਤੀਸ਼ਤ ਤੇਲ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਨਰਮ ਬੈਡ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਖੇਤ ਨੂੰ ਦੋ- ਤਿੰਨ ਵਾਰ ਵਾਹ ਕੇ ਪੱਧਰਾ ਕਰੋ ਵੱਧ ਝਾੜ ਲੈਣ ਲਈ ਫਸਲ ਨੂੰ ਜਨਵਰੀ ਦੇ ਅਖੀਰ ਤੱਕ ਲਗਾ ਦਿਉ ਜੇਕਰ ਬਿਜਾਈ ਫਰਵਰੀ ਮਹੀਨੇ ਵਿੱਚ ਕਰਨੀ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਪਨੀਰੀ ਨਾਲ ਕਰੋ ਕਿਉਕਿ ਇਸ ਸਮੇ ਸਿੱਧੀ ਬਿਜਾਈ ਵਾਲੀ ਫਸਲ ਨੂੰ ਕੀੜੇ ਅਤੇ ਬੀਮਾਰੀਆ ਵੱਧ ਲੱਗਦੀਆ ਹਨ ਬਿਜਾਈ ਲਈ 2-3 ਕਿਲੋਗ੍ਰਾਮ ਬੀਜ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਵਰਤੋ ਹਾਈਬ੍ਰਿਡ ਬੀਜਾ ਲਈ ਬੀਜ ਦੀ ਮਾਤਰਾ 2-2.5 ਕਿਲੋਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਵਰਤੋ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਦੋ ਜਾਂ ਤਿੰਨ ਹਫਤੇ ਪਹਿਲਾਂ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ 4-5 ਟਨ ਰੂੜੀ ਦੀ ਗਲੀ ਸੜੀ ਖਾਦ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਵਿੱਚ ਪਾਉ ਨਾਇਟ੍ਰੋਜਨ 24 ਕਿਲੋ (50 ਕਿਲੋ ਯੂਰੀਆ), ਫਾਸਫੋਰਸ 12 ਕਿਲੋ (75 ਕਿਲੋ ਐੱਸ.ਐੱਸ.ਪੀ) ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਵਿੱਚ ਵਰਤੋ ਸਹੀ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਖਾਦ ਪਾਉਣ ਲਈ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਜਾਂਚ ਕਰਵਾਉ ਅੱਧੀ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ਅਤੇ ਪੂਰੀ ਫਾਸਫੋਰਸ ਤੇ ਪੋਟਾਸ਼ ਬਿਜਾਈ ਦੇ ਸਮੇ ਤੇ ਬਾਕੀ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ਬਿਜਾਈ ਤੌ 30 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ ਪਾਉ ਸੇਜੂ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਬਾਕੀ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ਨੂੰ ਦੋ ਭਾਗਾ ਵਿੱਚ ਬਿਜਾਈ ਤੌ 30 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ ਪਾਉ ਸੂਰਜਮੁਖੀ ਦੇ ਪੱਤੇ ਨੂੰ ਪਹਿਲੇ 45 ਦਿਨ ਨਦੀਨ ਮੁਕਤ ਰੱਖੋ ਅਤੇ ਲੋੜੀਦੇ ਪੌਦਿਆ ਤੇ ਸਿੰਚਾਈ ਕਰੋ ਬਿਜਾਈ ਦੇ 3 ਹਫਤੇ ਬਾਅਦ ਪਹਿਲੀ ਗੋਡੀ ਅਤੇ 6 ਹਫਤੇ ਬਾਅਦ ਦੂਜੀ ਗੋਡੀ ਕਰੋ ਨਦੀਨਾ ਨੂੰ ਰੋਕਣ ਲਈ ਪੈਂਡੀਮੈਥਾਲਿਨ ਇੱਕ ਲੀਟਰ ਨੂੰ 150-200 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਫਸਲ ਦੇ ਉੱਗਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 2-3 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਫਸਲ ਨੂੰ ਡਿੱਗਣ ਤੋ ਬਚਾਉਣ ਲਈ 60-70 ਸੈ:ਮੀ:ਲੰਬੇ ਬੂਟਿਆ ਦੀਆਂ ਜੜਾਂ ਨੂੰ ਫੁੱਲ ਨਿੱਕਲਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾ ਮਿੱਟੀ ਲਗਾਉ ਜਦੌ ਫਸਲ 60-70 ਸੈ:ਮੀ: ਲੰਬੀ ਹੋ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਫਸਲ ਨੂੰ ਤਣੇ ਟੁੱਟਣ ਦੀ ਬਿਮਾਰੀ ਤੋਂ ਬਚਾਉਣ ਲਈ ਫੁੱਲ ਬਨਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਜੜਾਂ ਨਾਲ ਮਿੱਟੀ ਲਾ ਦਿਉ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਕਿਸਮ ਤੇ ਮੌਸਮ ਅਨੁਸਾਰ 9-10 ਸਿੰਚਾਈਆ ਕਰੋ ਪਹਿਲੀ ਸਿੰਚਾਈ ਬਿਜਾਈ ਤੋ 3 ਮਹੀਨਾ ਬਾਅਦ ਕਰੋ ਫਸਲ ਨੂੰ 50% ਫੁੱਲ ਪੈਣ ਤੇ, ਦਾਣਿਆਂ ਦੇ ਨਰਮ ਅਤੇ ਸਖਤ ਸਮੇ ਤੇ ਸਿੰਚਾਈ ਅਤੀ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਇਸ ਸਮੇ ਪਾਣੀ ਦੀ ਘਾਟ ਨਾਲ ਝਾੜ ਘੱਟ ਸਕਦਾ ਹੈ ਬਹੁਤ ਜਿਆਦਾ ਅਤੇ ਲਗਾਤਾਰ ਸਿੰਚਾਈ ਕਰਨ ਨਾਲ ਉਖੇੜਾ ਅਤੇ ਜੜਾਂ ਦਾ ਗਲਣਾ ਵਰਗੀਆ ਬਿਮਾਰੀਆ ਲੱਗ ਸਕਦੀਆ ਹਨ ਭਾਰੀਆ ਜ਼ਮੀਨਾ ਵਿੱਚ ਸਿੰਚਾਈ 20-25 ਦਿਨ ਅਤੇ ਹਲਕੀਆ ਵਿੱਚ 8-10 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਫਾਸਲੇ ਤੇ ਕਰੋ ਮਧੂ ਮੱਖੀ ਬੀਜ਼ ਬਣਨ ਵਿੱਚ ਮਦਦ ਕਰਦੀ ਹੈ ਜੇਕਰ ਮਧੂ ਮੱਖੀਆ ਘੱਟ ਹੋਣ ਤਾਂ ਸਵੇਰੇ 8-11 ਸਮੇ 7-10 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਫਰਕ ਤੇ ਹੱਥਾ ਨਾਲ ਪਹਿਚਾਣ ਕਰੋ ਇਸ ਲਈ ਹੱਥਾਂ ਨੂੰ ਮਲਮਲ ਦੇ ਕੱਪੜੇ ਨਾਲ ਢੱਕ ਲਵੋ ਪੱਤਿਆ ਦੇ ਸੁੱਕਣ ਅਤੇ ਫੁੱਲਾਂ ਦੇ ਪੀਲੇ ਰੰਗ ਦੇ ਹੋਣ ਤੇ ਕਟਾਈ ਕਰੋ ਕਟਾਈ ਵਿੱਚ ਦੇਰੀ ਨਾ ਕਰੋ, ਕਿਉਕਿ ਇਸ ਨਾਲ ਪੱਤੇ ਡਿੱਗ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਸਿਉਂਕ ਦਾ ਖਤਰਾ ਵੀ ਵੱਧ ਜਾਂਦਾ ਹੈ

Posted by GANESH PRASAD YADAV
Madhya Pradesh
09-01-2020 05:40 AM
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकत हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है एक बकरी के लिए लगभग 12—15 वर्ग फीट जगह छती हुई और 25—30 वर्ग फीट जगह खुली चाहिए .... (Read More)
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकत हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है एक बकरी के लिए लगभग 12—15 वर्ग फीट जगह छती हुई और 25—30 वर्ग फीट जगह खुली चाहिए बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्चे देना आम बात है बकरियां 8-10 वर्ष तक बच्चे देती हैं और अपन गिनती को तेजी से बढ़ा लेती हैं आप बारबरी, ब्लैक बंगाल, जैसी नसल पाल सकते हैं इसकी ट्रेनिेंग के लिए आप अपने कुषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करे या फिर जो बकरी पालन का व्यवसाय कर रहा कोई किसान उसका फार्म स्वंय जाकर देखकर आयें तो और भी बारीकियों का पता चल जायेगा, आप ब्लैक बंगाल, बीटल, सिरोही, जमुनापरी, बरबरी नस्ल रख सकते हैं. बकरी पालन में लोन लेने के लिए सबसे जरूरी है ट्रेनिंग सर्टीफिकेट अपने नज़दीक के कृषि विज्ञान केंद्र से ट्रेनिंग करने के बाद ट्रेनिंग के सर्टीफिकेट पर लोन एप्लाई होता है पर लोन मिलेगा या नहीं यह बैंक मेनेजर पर निर्भर करता है क्योंकि पहली बात यह है कि बैंक देखता है कि आपके अकाउंट में कितने पैसों का लेन देन हो रहा है और आपके पास ज़मीन गारंटी के तौर पर देने के लिए है या नहीं और अन्य भी कई बातें चैक करके लोन के लिए सहमत होता है बाकी कोशिश करें कि लोन के बिना अपने स्तर पर ही काम शुरू करें क्योंकि लोन की किश्त हर महीने भरनी पड़ेगी पर बकरियों से कमाई हर महीने नहीं होने होगी बाकी यदि कोशिश करके देखनी है तो अपने ट्रेनिंग सर्टीफिकेट से आप अपने जिले के पशु पालन विभाग अफसर को मिलें और उस पर प्रवानगी लेकर फिर बैंक से बात करके देखें.

Posted by Jhinkulal Ashu
Uttar Pradesh
09-01-2020 02:07 AM
झिनकूलाल जी, कार्बेन्डाजिम के घोल मिलाने के बाद बिजाई, दो चार दिन लेट हो गयी है तो इससे बीज में कोई कमी नहीं आयेगी, आप बीज की बुवाई कर सकते हैं, धन्यवाद

Posted by Neeraj Kumar
Uttar Pradesh
09-01-2020 01:44 AM
नीरज जी, इसकी बिजाई फरवरी-मार्च के महीने में की जाती है फासला: 2.5 मीटर चौड़े बैड पर हर जगह दो बीज बोयें और बीजों के बीच 60 सैं.मी. का फासला होना चाहिए बीज की गहराई: बीज को 2-3 सैं.मी. गहराई पर बोयें बिजाई का ढंग: छोटी सुरंगी विधि: इस विधि का प्रयोग खीरे की जल्दी पैदावार लेने के लिए किया जाता है यह विधि फसल को दिसंबर और ज.... (Read More)
नीरज जी, इसकी बिजाई फरवरी-मार्च के महीने में की जाती है फासला: 2.5 मीटर चौड़े बैड पर हर जगह दो बीज बोयें और बीजों के बीच 60 सैं.मी. का फासला होना चाहिए बीज की गहराई: बीज को 2-3 सैं.मी. गहराई पर बोयें बिजाई का ढंग: छोटी सुरंगी विधि: इस विधि का प्रयोग खीरे की जल्दी पैदावार लेने के लिए किया जाता है यह विधि फसल को दिसंबर और जनवरी की ठंड से बचाती है दिसंबर के महीने में 2.5 मीटर चौड़े बैडों पर बिजाई की जाती है बीजों को बैड के दोनों तरफ 45 सैं.मी. के फासले पर बोयें बिजाई से पहले, 45-60 सैं.मी. लम्बे और सहायक डंडों को मिट्टी में गाढ़े खेत को प्लास्टिक की शीट (100 गेज़ मोटाई वाली) को डंडों की सहायता से ढक दें फरवरी महीने में तापमान सही होने पर प्लास्टिक शीट को हटा दें गड्ढे खोद कर बिजाई करना, खालियां बनाकर बिजाई करना, गोलाकार गड्ढे खोद कर बिजाई करना, धन्यवाद
Posted by pankaj singh rudra
Uttar Pradesh
09-01-2020 01:01 AM
श्री मान खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते ह.... (Read More)
श्री मान खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुमब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तहय उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तहय में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तहय लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है

Posted by Deepak Prajapat
Madhya Pradesh
09-01-2020 12:37 AM
दीपक जी, शुरूआती खाद के तौर पर 120-150 कि्ंवटल अच्छी रूड़ी की खाद डालें भिंडी की फसल के लिए नाइट्रोजन 36 किलो (80 किलो यूरिया) प्रति एकड़ में प्रयोग करें नाइट्रोजन की आधी मात्रा बिजाई के समय और बाकी बची मात्रा पहली तुड़ाई के बाद डालें अच्छी पैदावार की प्राप्ती के लिए बिजाई से 10-15 दिनों के बाद 19:19:19 की 4-5 ग्राम प्रति लीटर पा.... (Read More)
दीपक जी, शुरूआती खाद के तौर पर 120-150 कि्ंवटल अच्छी रूड़ी की खाद डालें भिंडी की फसल के लिए नाइट्रोजन 36 किलो (80 किलो यूरिया) प्रति एकड़ में प्रयोग करें नाइट्रोजन की आधी मात्रा बिजाई के समय और बाकी बची मात्रा पहली तुड़ाई के बाद डालें अच्छी पैदावार की प्राप्ती के लिए बिजाई से 10-15 दिनों के बाद 19:19:19 की 4-5 ग्राम प्रति लीटर पानी की स्प्रे करें अच्छे फूलों और फलों की प्राप्ती के लिए 00:52:34 की 50 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी की स्प्रे फूल निकलने से पहले और फिर फल बनने के समय दोबारा करें अच्छी पैदावार और अच्छी क्वालिटी के फलों के लिए , फूल बनने के समय 13:00:45 (पोटाश्यिम नाइट्रेट) की 100 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी की स्प्रे करें धन्यवाद

Posted by Abhishek singh
Uttar Pradesh
09-01-2020 12:07 AM
Abhishek ji, kripya ap apna sawal visthar se puchien ke ap kya jankari lena chaht ehian, taki apko sahi jankari di ja sake, dhanywad

Posted by Mandeep Aujla
Punjab
09-01-2020 12:07 AM
ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਬਟੇਰ ਪਾਲਣ ਦਾ ਕੰੰਮ ਜਿੰਨੇ ਵੀ ਕਿਸਾਨ ਕਰਦੇ ਹਨ ਉਸ ਇਸ ਦਾ ਮੰਡੀਕਰਨ ਸਿਧੇ ਤੌਰ ਤੇ ਜਾ ਸ਼ੋਸ਼ਲ ਮੀਡੀਆ ਤੇ ਲਿਂਕ ਬਣਾ ਕੇ ਕਰਦੇ ਹਨ ਜੀ ਬਾਕੀ ਜੇਕਰ ਚੰਗੇ ਲਿੰਕ ਹਨ ਤਾਂ 35-40 ਦਿਨ ਦਾ ਬਟੇਰ 60-70 ਰੁਪਏ ਦਾ ਸੇਲ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤੇ ਜਿਆਦਾਤਾਰ ਲੋਕ ਮੀਟ ਲਈ ਹੀ ਲੈ ਕੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ , ਇਸਦਾ ਅੰਡਾ 4-5 ਰੁਪਏ ਤੱਕ ਦਾ ਵਿਕ ਜਾਂਦਾ ਹੈ , ਬਾਕੀ ਮੰਡੀਕਰਨ ਲਈ ਵੱਡੇ ਹੋਟਲਾ ਵਿੱਚ ਵੀ ਵੇਚ ਸਕਦੇ ਹੋ .... (Read More)
ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਬਟੇਰ ਪਾਲਣ ਦਾ ਕੰੰਮ ਜਿੰਨੇ ਵੀ ਕਿਸਾਨ ਕਰਦੇ ਹਨ ਉਸ ਇਸ ਦਾ ਮੰਡੀਕਰਨ ਸਿਧੇ ਤੌਰ ਤੇ ਜਾ ਸ਼ੋਸ਼ਲ ਮੀਡੀਆ ਤੇ ਲਿਂਕ ਬਣਾ ਕੇ ਕਰਦੇ ਹਨ ਜੀ ਬਾਕੀ ਜੇਕਰ ਚੰਗੇ ਲਿੰਕ ਹਨ ਤਾਂ 35-40 ਦਿਨ ਦਾ ਬਟੇਰ 60-70 ਰੁਪਏ ਦਾ ਸੇਲ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤੇ ਜਿਆਦਾਤਾਰ ਲੋਕ ਮੀਟ ਲਈ ਹੀ ਲੈ ਕੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ , ਇਸਦਾ ਅੰਡਾ 4-5 ਰੁਪਏ ਤੱਕ ਦਾ ਵਿਕ ਜਾਂਦਾ ਹੈ , ਬਾਕੀ ਮੰਡੀਕਰਨ ਲਈ ਵੱਡੇ ਹੋਟਲਾ ਵਿੱਚ ਵੀ ਵੇਚ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੀ

Posted by PRASHANT SINGH
Uttar Pradesh
08-01-2020 11:48 PM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्यकर्म आयोजित.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्यकर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by ਨੀਟੂ ਗਰੇਵਾਲ
Punjab
08-01-2020 11:19 PM
ਨੀਟੂ ਗਰੇਵਾਲ ਜੀ, ਆਲੂਆਂ ਤੇ NPK 00-00-50 ਦੀ ਸਪਰੇ ਦੀ ਜਗਾਹ ਮੋਟੇ ਆਲੂਆਂ ਦੀ ਪੈਦਾਵਾਰ ਲਈ, 13:0:45 ਦੀ 2 ਕਿਲੋ ਅਤੇ ਮੈਗਨੀਸ਼ੀਅਮ ਈ ਡੀ ਟੀ ਏ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਦੇ ਹਮਲੇ ਨੂੰ ਰੋਕਣ ਲਈ ਉੱਲੀਨਾਸ਼ਕ ਪ੍ਰੋਪਿਨੇਬ 3 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਪਾਓ ਆਲੂਆਂ ਦਾ ਆਕਾਰ ਅਤੇ ਗਿਣਤੀ ਵਧਾਉਣ ਲਈ ਹਿਊਮਿਕ ਐਸਿਡ (12%) 3 ਗ੍ਰਾਮ+ਐੱਮ ਏ ਪੀ 12:61:0 ਦੀ 8 ਗ੍ਰਾਮ ਜਾਂ ਡੀ ਏ ਪੀ 15 ਗ੍ਰਾਮ ਪ.... (Read More)
ਨੀਟੂ ਗਰੇਵਾਲ ਜੀ, ਆਲੂਆਂ ਤੇ NPK 00-00-50 ਦੀ ਸਪਰੇ ਦੀ ਜਗਾਹ ਮੋਟੇ ਆਲੂਆਂ ਦੀ ਪੈਦਾਵਾਰ ਲਈ, 13:0:45 ਦੀ 2 ਕਿਲੋ ਅਤੇ ਮੈਗਨੀਸ਼ੀਅਮ ਈ ਡੀ ਟੀ ਏ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਦੇ ਹਮਲੇ ਨੂੰ ਰੋਕਣ ਲਈ ਉੱਲੀਨਾਸ਼ਕ ਪ੍ਰੋਪਿਨੇਬ 3 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਪਾਓ ਆਲੂਆਂ ਦਾ ਆਕਾਰ ਅਤੇ ਗਿਣਤੀ ਵਧਾਉਣ ਲਈ ਹਿਊਮਿਕ ਐਸਿਡ (12%) 3 ਗ੍ਰਾਮ+ਐੱਮ ਏ ਪੀ 12:61:0 ਦੀ 8 ਗ੍ਰਾਮ ਜਾਂ ਡੀ ਏ ਪੀ 15 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਲੀਟਰ ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਪੌਦੇ ਦੇ ਵਾਧੇ ਸਮੇਂ ਕਰੋ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by NARENDRA KUMAR
Uttar Pradesh
08-01-2020 11:12 PM
श्री मान खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते ह.... (Read More)
श्री मान खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुमब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तहय उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तहय में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तहय लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है
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