Posted by Karanveer
Punjab
10-01-2020 04:20 AM
ਕਰਨਵੀਰ ਜੀ ਤੁਸੀ ਪੱਤਿਆਂ ਹੇਠਾਂ ਮੱਛਰ ਡਾ ਹਮਲਾ ਚੈੱਕ ਕਰੋ ਜੇਕਰ ਮੌਜੂਦ ਹੈ ਤਾ ਤੁਸੀ imidacloprid @1.5 ml ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Kavale panduRang
Maharashtra
10-01-2020 04:09 AM
Shri maan Dragon fruit ki kheti ke liye Dragon fruit ki kalmei lgayi jati hai ye ped gujrat mei hota hai eik acre mei takriban iski 1600 kalmei lagti hai aur in kalmo ko pehle gamle mei tyar kiya jata hai aur fir april se September tak kabhi bhi field mei lga skte hai aur eik kalam lagbhagg 70 rs ki ati hai. Adhik jaankari ke liye aap niche diye number par baat kr skte hain: vijay kumar -7065414241

Posted by shivam maurya
Uttar Pradesh
10-01-2020 03:43 AM
आलू:- अधिक पैदावार के लिए बिजाई सही समय पर करनी जरूरी है बिजाई के लिए सही तापमान अधिक से अधिक 30-32° सैल्सियस और कम से कम 18-20° सैल्सियस होता है अगेती बिजाई 25 सितंबर से 10 अक्तूबर तक, दरमियाने समय वाली बिजाई अक्तूबर के पहले से तीसरे सप्ताह तक और पिछेती बिजाई अक्तूबर के तीसरे सप्ताह से नवंबर के पहले सप्ताह तक करें बस.... (Read More)
आलू:- अधिक पैदावार के लिए बिजाई सही समय पर करनी जरूरी है बिजाई के लिए सही तापमान अधिक से अधिक 30-32° सैल्सियस और कम से कम 18-20° सैल्सियस होता है अगेती बिजाई 25 सितंबर से 10 अक्तूबर तक, दरमियाने समय वाली बिजाई अक्तूबर के पहले से तीसरे सप्ताह तक और पिछेती बिजाई अक्तूबर के तीसरे सप्ताह से नवंबर के पहले सप्ताह तक करें बसंत ऋतु के लिए जनवरी के दूसरे पखवाड़े बिजाई का सही समय है बिजाई के लिए आलुओं के बीच में 20 सैं.मी. और मेड़ में 60 सैं.मी. का फासला हाथों से या मकैनीकल तरीके से रखें फासला आलुओं के आकार के अनुसार बदलता रहता है यदि आलू का व्यास 2.5-3.0 सैं.मी. हो तो फासला 60x15 सैं.मी. और यदि आलू का व्यास 5-6 सैं.मी. हो तो फासला 60x40 सैं.मी. होना चाहिए 6-8 इंच गहरी खालियां बनाएं फिर इनमें आलू रखें और थोड़ा सा ज़मीन से बाहर रहने दें बिजाई के ट्रैक्टर से चलने वाली या ऑटोमैटिक बिजाई के लिए मशीन का प्रयोग करें
प्याज़:- नर्सरी तैयार करने के उचित समय मध्य-अक्तूबर से मध्य-नवबंर होता है नए पौधे मध्य-दिसंबर से मध्य-जनवरी तक रोपाई के लिए तैयार हो जाते है रोपाई के लिए 10-15 सैं.मी. कद के पौधे चुनें ज्यादा पैदावार लेने के लिए, रोपाई के समय पंक्तियों के बीच फासला 15 सैं.मी. और पौधों के बीच का फासला 7.5 सैं.मी.रखें नर्सरी में बीज 1-2 सैं.मी. गहराई पर बोयें बिजाई के लिए रोपाई विधि का प्रयोग करें

Posted by abhay pratap maurya
Uttar Pradesh
10-01-2020 03:41 AM
abhay ji ek to yeh is se multicropping men aa jata hai doosra is se tamtar ki fasl par keet ke hamla kam hota hai.dhanywad

Posted by ajay singh Parihar
Madhya Pradesh
10-01-2020 12:06 AM
https://youtu.be/g4wqW8anr1g EARN 4-5 LAKH BY HOME ROOF COURT YARD OPEN LAND BALCONY बमोरिया मोती सम्बर्धन केंद्र ( भारत का एक मात्र प्रशिक्षण केंद्र जहां देश विदेश से आते है लोग ) सुक्ष्म लघु मध्यम उद्यम भारत सरकार द्वारा पंजीकृत कृषि मंत्री जी एवं मुख्या मंत्री जी द्वारा पुरुष्कृत दैनिक भास्कर , राजिस्थान पत्रिका , सहारा समय ,बंसल NEWS आदि न्यूज़ चैनल द्वारा .... (Read More)
https://youtu.be/g4wqW8anr1g EARN 4-5 LAKH BY HOME ROOF COURT YARD OPEN LAND BALCONY बमोरिया मोती सम्बर्धन केंद्र ( भारत का एक मात्र प्रशिक्षण केंद्र जहां देश विदेश से आते है लोग ) सुक्ष्म लघु मध्यम उद्यम भारत सरकार द्वारा पंजीकृत कृषि मंत्री जी एवं मुख्या मंत्री जी द्वारा पुरुष्कृत दैनिक भास्कर , राजिस्थान पत्रिका , सहारा समय ,बंसल NEWS आदि न्यूज़ चैनल द्वारा सत्यापित 12 Jan 2020 TRAINING FEE 4600/- ( Advance 1100 online Pay krna hai ) और यदि आप हमारे साथ लाखों रुपया महीना कमाना चाहते हैं कुछ ऐसे व्यवसाय हैं जिनके अंतर्गत आप खेती भी करेंगे इंटीग्रेटेड फार्मिंग भी कर सकते हैं और साथ में आप अच्छा खासा पैसा कमा सकते हैं इसके लिए आपको हमारी वेबसाइट जिसकी डिटेल हम आपको सेंड कर रहे हैं उस पर 1100/- मै रजिस्ट्रेशन करना होगा बाकी का 3500/- के दौरान देना होगा या वह भी एडवांस जमा कर सकते हैं जिसका फायदा आपको जिंदगी भर होने वाला है लाइफटाइम पैसा कमाने का अवसर नीचे दी गई लिंक पर क्लिक करके अपना रजिस्ट्रेशन कराएं 11 सो रुपए आपकी फीस लगेगी रजिस्ट्रेशन की लाइफ टाइम रजिस्ट्रेशन है यह और अधिक जानकारी के लिए फिर आप हमसे संपर्क करें http://aseedo.com/register.php sponser_id=Aseedo350

Posted by Gangadhar Yadav
Uttar Pradesh
10-01-2020 12:00 AM
महोगनी के पेड़ के लगभग सभी भागों का इस्तेमाल किया जाता है. इसकी लकड़ी का इस्तेमाल जहाज़, फर्नीचर, प्लाईवुड, सजावट की चीजें और मूर्तियों को बनाने में किया जाता हैं. जबकि इसके बीज और फूलों का इस्तेमाल शक्तिवर्धक दवाइयों को बनाने में किया जाता है. महोगनी का वृक्ष जल भराव वाली भूमि को छोड़कर अन्य किसी भी प्रकार की उप.... (Read More)
महोगनी के पेड़ के लगभग सभी भागों का इस्तेमाल किया जाता है. इसकी लकड़ी का इस्तेमाल जहाज़, फर्नीचर, प्लाईवुड, सजावट की चीजें और मूर्तियों को बनाने में किया जाता हैं. जबकि इसके बीज और फूलों का इस्तेमाल शक्तिवर्धक दवाइयों को बनाने में किया जाता है. महोगनी का वृक्ष जल भराव वाली भूमि को छोड़कर अन्य किसी भी प्रकार की उपजाऊ भूमि में लगाया जा सकता है. इसके वृक्ष को पथरीली मिट्टी में नही लगाया जा सकता. इसकी खेती के लिए मिट्टी का पी.एच. मान सामान्य होना चाहिए. महोगनी की खेती के लिए उष्णकटिबंधीय जलवायु सबसे उपयुक्त होती है. इसके वृक्ष को ज्यादा बारिश की भी जरूरत नही होती. सामान्य मौसम में इसके पेड़ अच्छे से विकास करते हैं. शुरुआत में इसके पौधों को तेज़ गर्मी और सर्दी से बचाने की जरूरत होती है. सर्दियों में पड़ने वाला पाला इसके लिए उपयुक्त नही होता है. इनके अलावा तेज़ हवाओं के चलने से इसके वृक्ष को नुक्सान पहुँचता है. क्योंकि इनकी जड़ें जमीन में ज्यादा गहराई में नही जाती है. इसके पौधे को अंकुरित होने और विकास करने के लिए सामान्य तापमान की जरूरत होती है. इसका पूर्ण विकसित वृक्ष सर्दियों में 15 और गर्मियों में 35 डिग्री तापमान पर भी अच्छे से विकास कर सकता है. क्यूबन, मैक्सिकन, अफ्रीकन, न्यूज़ीलैंड, और होन्डूरन किस्में लगाने के लिए उपयुक्त हैं महोगनी के वृक्ष की खेती के लिए शुरुआत में खेत की गहरी जुताई कर उसे खुला छोड़ दें. उसके बाद खेत की दो से तीन तिरछी जुताई कर दे. जुताई करने के बाद खेत में पाटा चलाकर खेत को समतल बना लें. समतल खेत में जल भराव की समस्या का सामना नही करना पड़ता. खेत के समतल होने के बाद उसमें 5 से 7 फिट की दूरी रखते हुए तीन फिट चौड़ाई और दो फिट गहराई के गड्डे तैयार कर लें. इन गड्डों को तैयार करते वक्त ध्यान रखे कि इन गड्डों को पंक्तियों में तैयार करें. और प्रत्येक पंक्तियों के बीच तीन से चार मीटर की दूरी होनी चाहिए. गड्डों को तैयार कर उनमें जैविक और रासायनिक खादों को मिट्टी में मिलाकर गड्डों में भर दें. उसके बाद गड्डों की गहरी सिंचाई कर उन्हें ढक दें. इन गड्डों को पौध रोपाई से एक महीने पहले तैयार किया जाता है. महोगनी के पौधे किसान भाई किसी भी सरकारी रजिस्टर्ड कंपनी से खरीद सकते हैं. इसके अलावा किसान भाई इसकी पौध नर्सरी में भी तैयार कर सकते हैं. लेकिन इसमें बहुत ज्यादा टाइम और मेहनत लगती है. जिस कारण किसान भाइयों के लिए इसकी पौध खरीदकर लगाना सबसे उचित होता है. नर्सरी से हमेशा दो से तीन साल पुराने और अच्छे से विकास कर रहे पौधे को ही खरीदें. इसके पौधों को खेत में तैयार किये गए गड्डों में लगाया जाता है. इसके पौधों को गड्डों में लगाने से पहले खेत में तैयार किये गए गड्डों के बीचोंबीच एक और छोटा गड्डा तैयार कर लेना चाहिए. इस छोटे गड्डे में इसके पौधे को लगाकर उसे चारों तरफ से मिट्टी से दबा दें. इसके पौधों को खेत में लगाने का सबसे उपयुक्त टाइम जून और जुलाई का महीना होता है. क्योंकि इस दौरान भारत में मानसून का दौर होता है. जिससे पौधों को विकास करने के लिए उपयुक्त वातावरण मिलता है. और इस दौरान बारिश के होने से पौधों को सिंचाई की भी जरूरत नही होती. महोगनी के पौधों को खेत में लगाने के बाद उन्हें शुरुआत में सिंचाई की ज्यादा जरूरत होती है. इस दौरान पौधों को गर्मियों में 5 से 7 दिन के अंतराल में पानी देना चाहिए. और सर्दियों में 10 से 15 दिन के अंतराल में पानी देना उचित होता है. जबकि बारिश के वक्त इसके पेड़ों को पानी की जरूरत नही होती है. जैसे जैसे पौधे का विकास होता जाता है. वैसे वैसे ही पानी देने की दर घट जाती है. एक पूर्ण विकसित वृक्ष की साल में 5 से 6 सिंचाई काफी होती है. इसके वृक्ष को भी बाकी पेड़ों की तरह उर्वरक की जरूरत होती है. इसके लिए शुरुआत में गड्डों की भराई के वक्त 20 किलो गोबर की खाद और 80 ग्राम एन.पी.के. की मात्रा मिट्टी में मिलाकर दें. पौधों को उर्वरक की ये मात्रा लगभग चार साल तक देनी चाहिए. उसके बाद पौधों के विकास के साथ साथ उर्वरक की भी मात्रा को बढ़ा देना चाहिए. पूर्ण विकसित पौधे को 50 किलो जैविक और एक किलो रासायनिक खाद की मात्रा साल में तीन बार सिंचाई से पहले देनी चाहिए. महोगनी के वृक्ष की कटाई लगभग 12 साल बाद की जाती है. जब इसका पेड़ पूरी तरह से तैयार हो जाता है. इसके अलावा अधिक देरी से काटने पर भी इसकी खेती से अधिक उपज मिलती है. इसके वृक्षों की कटाई जड़ के पास से की जाती है.
Posted by monu meena Naroli
Rajasthan
09-01-2020 10:52 PM
मोनू जी सरसो में कीट की रोकथाम के लिए आप imidacloprid @1.5 ml को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद

Posted by Afzal Ahmad
Uttar Pradesh
09-01-2020 10:42 PM
इसे मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए प्रसिद्ध किस्में :-Pusa Dwarf: इसके फल मध्यम आकार के और अंडाकार होते हैं यह सूखे को सहनेयोग्य किस्म है यह .... (Read More)
इसे मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए प्रसिद्ध किस्में :-Pusa Dwarf: इसके फल मध्यम आकार के और अंडाकार होते हैं यह सूखे को सहनेयोग्य किस्म है यह उच्च घनत्व में रोपाई के लिए लाभदायक है Pusa Giant: इस किस्म के पौधे तेज हवा को सहनेयोग्य है यह बड़े फलों का उत्पादन करती है यह पैकिंग के लिए उपयुक्त किस्म है CO 3: इसके फल बड़े आकार के और अंडाकार होते हैं इसे ज्यादा देर तक रखने की गुणवत्ता अच्छी होती है CO 1: यह छोटे कद की किस्म है जिसके फल मध्यम आकार के होते हैं फल गोलाकार, नर्म हरा-पीला छिल्का और संतरी पीले रंग का गुद्दा होता है फल रसदार होता है और इसे ज्यादा देर तक रखने की गुणवत्ता अच्छी होती है Coorg Honey Dew: इसे सीधे तौर पर खाने के लिए और प्रक्रिया के लिए प्रयोग किया जाता है इसके फल आयताकार और गुद्दा मोटा संतरी रंग का होता है Pusa Majesty: इसके फल मध्यम आकार के, गोल होते हैं इन्हें रखने की गुणवत्ता बहुत अच्छी होती है यह किस्म 146 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह किस्म जड़ गलन निमाटोड के प्रतिरोधक किस्म है Pusa Delicious: यह मध्यम लंबी किस्म है इसके फल मध्यम आकार के होते हैं, गुद्दा गहरे संतरी रंग का होता है इस किस्म को कतारों में लगाने के लिए प्रयोग किया जाता है पपीते की खेती के लिए नदीन रहित भूमि का प्रयोग करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें आखिरी जोताई के समय अच्छी तरह से गली हुई रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर मिट्टी में अच्छी तरह मिलाकर डालें सिफारिश किए गए फासलों पर 1 मीटर x 1 मीटर x 1 मीटर आकार के गड्ढे खोदें गड्ढों को मिट्टी और रूड़ी की खाद या गाय के गले हुए गोबर से भरें प्रयोग की गई किस्म के आधार पर प्रत्येक गड्ढे पर 2-4 नए पौधों की रोपाई करें रोपाई के बाद हल्की सिंचाई करें हवा से बचाव के लिए खूंटा लगाएं बीजों को 150 गेज़ की मोटाई वाले, 25 x 10 सैं.मी. के पॉलीथीन बैग में बोयें पानी के उचित निकास के लिए पॉलीथीन बैग के निचले हिस्से में 1 मि.मी. अर्द्धव्यास का छेद करें उसके बाद पॉलीथीन बैग में समान अनुपात में रूड़ी की खाद, मिट्टी और रेत डालें बिजाई से पहले बीजों का उपचार करें रोपाई के लिए 6-7 सप्ताह के पौधों का प्रयोग करें यूरिया 150 ग्राम, फासफोरस 80 ग्राम, पोटाश 100 ग्राम प्रति वृक्ष में प्रति वर्ष डालें खादों को 4 भागों में बांटकर रोपाई के बाद पहले, तीसरे, पांचवे और सातवें महीने में डालें बसंत के मौसम में फरवरी मार्च के महीने में बिजाई करें जबकि मॉनसून के मौसम में बिजाई के लिए जून जुलाई का महीना उपयुक्त होता है और पतझड़ के मौसम में बिजाई अक्तूबर से नवंबर महीने में की जाती है आमतौर पर 1.8 मीटर x 1.8 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है उच्च घनता की रोपाई के लिए 1.5 मीटर x 1.5 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है नर्सरी में बीज को 1 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बीजो की खेत में सीधे बिजाई या मुख्य खेत में नए पौधों की रोपाई की जाती है 100-120 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें मिट्टी की किस्म, जलवायु के हालातों आदि के आधार पर सिंचाई करें सर्दियों में 15 दिनों के अंतराल पर और गर्मियों में 7 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें तने को पानी के संपर्क में ना आने दें और खेत में पानी भी खड़ा ना होने दें पौधे की प्रौढ़ अवस्था के दौरान नदीनों की रोकथाम जरूरी होती है नदीनों की तीव्रता के आधार पर, नियमित और हल्की गोडाई करें फ्लूक्लोरालिन या बूटाक्लोर 800 मि.ली. प्रति एकड़ में डालें नदीनों की रोकथाम के लिए मलचिंग भी एक प्रभावी तरीका है पौधों की रोपाई के कुछ दिनों बाद प्लास्टिक शीट या धान की पराली या गन्ने के बचे कुचे को मलच के रूप में डालें मुख्यत: फल के पूरा आकार लेने और हरे से हल्का पीला रंग होने पर तुड़ाई की जाती है पहली तुड़ाई रोपाई के 14-15 महीनों के बाद की जा सकती है 4-5 तुड़ाइयां प्रति मौसम की जा सकती हैं धन्यवाद

Posted by RAJU SHARMA
Uttar Pradesh
09-01-2020 10:27 PM
श्री मान खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते ह.... (Read More)
श्री मान खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुमब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तहय उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तहय में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तहय लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है

Posted by MD HASAN
Bihar
09-01-2020 10:26 PM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by Manish Bishnoi Sarpanch
Haryana
09-01-2020 10:24 PM
Manish ji kripya swal vistar se pooche ke aap cheeku ke bare men kya jankari lena chahte hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad

Posted by अमरेश कुमार
Uttar Pradesh
09-01-2020 10:03 PM
अच्छे जल निकास वाली गहरी, दोमट मिट्टी जिसमें भूमिगत-जल का स्तर ज़मीन से 1.5-2 मी. के नीचे हो और अच्छी जल धारण क्षमता वाली ज़मीन गन्ने की खेती के लिए लाभदायक है यह फसल काफी अम्लीय और खारेपन को सहन कर सकती है इसलिए इसे मिट्टी जिसका pH 5 से 8.5 हो, में उगाई जा सकती है यदि मिट्टी का pH 5 से कम हो तो इसमें चूना (कली) डालें और यदि मिट.... (Read More)
अच्छे जल निकास वाली गहरी, दोमट मिट्टी जिसमें भूमिगत-जल का स्तर ज़मीन से 1.5-2 मी. के नीचे हो और अच्छी जल धारण क्षमता वाली ज़मीन गन्ने की खेती के लिए लाभदायक है यह फसल काफी अम्लीय और खारेपन को सहन कर सकती है इसलिए इसे मिट्टी जिसका pH 5 से 8.5 हो, में उगाई जा सकती है यदि मिट्टी का pH 5 से कम हो तो इसमें चूना (कली) डालें और यदि मिट्टी का pH 9.5 से ज्यादा हो तो इसमें जिप्सम डालें आप इसकी किस्मे जैसे Co 8014 (Mahalakshami) ,Vasant 1,Co 86032 ,Co 92005 की बिजाई कर सकते है पतझड़ के मौसम में 15 अक्तूबर से २० नवंबर तक बिजाई की जाती है, बसंत के मौसम में बिजाई 15 फरवरी तक और गर्मियों के मौसम में 15 जुलाई से 15 सितंबर तक बिजाई की जाती है बिजाई के लिए सुधरे ढंग जैसे कि (गहरी खालियां, मेंड़ बनाकर,पंक्तियों में जोड़े बनाकर और गड्ढा खोदकर बिजाई ) प्रयोग किये जाते हैं 1) खालियां और मेंड़ बनाकर सूखी बिजाई: ट्रैक्टर द्वारा मेंड़ बनाने वाली मशीन की मदद से मेंड़ और खालियां बनाएं और इन मेड़ और खालियों में बिजाई करें मेड़ और खालियों में 90 सैं.मी. का फासला होना चाहिए गन्ने की गुलियों को मिट्टी में दबाएं और उसके बाद हल्की सिंचाई करें 2) पंक्तियों के जोड़े बनाकर बिजाई: खालियां बनाने वाले यंत्र के प्रयोग से खेत में 150 सैं.मी. के फासले पर खालियां बनाएं और उनमें 30:30-90-30:30 सैं.मी. के फासले पर गन्ने की रोपाई करें इस तरीके से मेड़ वाली बिजाई से अधिक पैदावार मिलती है 3) गड्ढा खोदकर बिजाई: गड्ढे खोदने वाली मशीन से 60 सैं.मी. व्यास के 30 सैं.मी. गहरे गड्ढे खोदें जिनमें 60 सैं.मी. का फासला हो इससे गन्ना 2-3 बार उगाया जा सकता है और मेड़ वाली बिजाई से 25-50 % अधिक पैदावार आती है B) एक आंख वाले गन्नों की बिजाई: रोपाई के लिए सेहतमंद गुलियां चुनें और 75-90 सैं.मी. के अंतर पर खालियों में बिजाई करें गुलियां एक आंख वाली होनी चाहिए यदि गन्ने के ऊपरी भाग में छोटी डलियां चुनी गई हों तो बिजाई 6 -9 सैं.मी. के अंतर पर करें फसल के अच्छे उगने के लिए आंखों को ऊपर की ओर रखें और हल्की सिंचाई करें पतझड़ के मौसम में 14500-16500 तीन आंख वाले बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें और बसंत के मौसम में 16500-25000 तीन आंख वाले बीज और 21600-25000 दो आंख वाले बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें गन्ने में नदीनों के कारण 12-72 % पैदावार का नुकसान होता है शुरूआती 60-120 दिनों तक नदीनों की रोकथाम बहुत जरूरी है इसलिए रोपाई के बाद 3-4 महीने बाद फसल की नदीनों की रोकथाम करें नीचे लिखे तरीकों से नदीनों को रोका जा सकता है 1) हाथों से गोडाई करके: गन्ना एक व्यापक जगह लेने वाली फसल है इसलिए नदीनों को गोडाई करके रोका जा सकता है इसके इलावा प्रत्येक सिंचाई के बाद 3-4 गोडाई जरूरी है 2) काश्तकारी ढंग: इस प्रक्रिया में खेती के तरीके, अंतरफसली और मलचिंग तरीके शामिल हैं बहुफसली के कारण नदीनों का हमला ज्यादा होता है इसकी रोकथाम के लिए चारे वाली फसलें और हरी खाद वाली फसलों के आधार वाला फसली चक्र गन्ने में नदीनों की रोकथाम करता है गन्ना एक व्यापक जगह लेने वाली भी फसल है जिससे नदीनों के हमले का खतरा भी ज्यादा होता है यदि गन्ने को कम समय वाली फसलों के साथ अंतरफसली किया जाए तो इससे नदीनों को कम किया जा सकता है और ज्यादा लाभ भी मिल सकता है गन्ने के अंकुरन के बाद गन्ने की कतारों में 10-12 सैं.मी. मोटी तह बिछा दी जाती है यह सूर्य की रोशनी को सोखता है जिससे नदीन कम होते हैं यह मिट्टी में नमी को भी बचाता है 3) रासायनिक तरीके: नदीनों की रोकथाम के लिए, सिमाज़ीन या एट्राज़ीन 600-800 ग्राम या मैट्रीब्यूज़िन 800 ग्राम या ड्यूरॉन 1-1.2 किलोग्राम प्रति एकड़ में बिजाई के तुरंत बाद प्रयोग करना चाहिए इसके इलावा चौड़े पत्ते वाले नदीनों की रोकथाम के लिए 2, 4-डी@ 300-400 ग्राम का प्रयोग प्रति एकड़ के हिसाब से करें नाइट्रोजन 62 किलो, फासफोरस 32 किलो और पोटाश 42 किलो प्रति एकड़ में डालें बिजाई से पहले नाइट्रोजन की 1/3 मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा डालें बाकी बची नाइट्रोजन की दो मात्रा को टॉप ड्रेसिंग के तौर पर डालें नाइट्रोजन की पहली मात्रा को बीज वाली आंख के अंकुरण के समय और दूसरी मात्रा को बीज अंकुरण के 45 दिन बाद डालें 3 वर्षों के बाद गन्ने की गुलियों में 40-50 क्विंटल गाय का गोबर प्रति एकड़ में डालें पतझड़ के मौसम में 90-100 दिनों में नाइट्रोजन को टॉप ड्रेसिंग के तौर पर डालें और बसंत के मौसम में 150-160 दिन बाद डालनी चाहिए सिंचाई की संख्या मिट्टी की किस्म और पानी की उपलब्धता पर निर्भर करती है गर्मी के महीने में गर्म हवाओं और सूखे में वृद्धि होने के कारण फसल को पानी की जरूरत पड़ती है पहली सिंचाई फसल के 20-25 % अंकुरित होने पर करें मानसून में गन्ने को पानी और बारिश के आधार पर लगाएं कम वर्षा में सिंचाई 10 दिनों के अंतराल पर करें इसके बाद सिंचाई के अंतराल को बढ़ाकर 20-25 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें जमीन में नमी संभालने के लिए गन्ने की पंक्तियों में मलचिंग का प्रयोग करें अप्रैल जून के महीने में पानी की कमी ना होने दें इससे पैदावार कम होगी इसके इलावा बारिश के दिनों में पानी ना खड़ा होने दें जोताई का समय, वृद्धि का समय और अधिक विकास का समय सिंचाई के लिए बहुत नाज़ुक होता है मिट्टी को मेंड़ पर चढ़ाना: कसी की मदद से खालियों में और पौधे के किनारों पर मिट्टी चढ़ाई जाती है यह मिट्टी में अच्छी तरह से तैयार की गई खाद को अच्छी तरह से मिश्रित होने में मदद करती है पौधे को सहारा देने और उसे गिरने से बचाने में भी मदद करती है ज्यादा पैदावार और चीनी प्राप्त करने के लिए गन्ने की सही समय पर कटाई जरूरी है समय से पहले या बाद में कटाई करने से पैदावार पर प्रभाव पड़ता है किसान शूगर रीफरैक्टोमीटर का प्रयोग करके कटाई का समय पता लगा सकते हैं गन्ने की कटाई द्राती की सहायता से की जाती है गन्ना धरती से ऊपर थोड़ा हिस्सा छोड़कर काटा जाता है क्योंकि गन्ने में चीनी की मात्रा ज्यादा होती है कटाई के बाद गन्ना फैक्टरी में लेकर जाना जरूरी होता है धन्यवाद

Posted by ਹਰਜੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
09-01-2020 10:03 PM
ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਪੋਲਟਰੀ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈ ਕੇ ਨਾਬਾਰਡ ਤੋਂ ਲੋਨ ਲੈਂਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ 25 ਤੋਂ 35 % ਤੱਕ ਸਬਸਿਡੀ ਮਿਲ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਲੋਨ ਅਪਲਾਈ ਕਰਨ ਦੀ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਤੁਹਾਨੂੰ ਵਿੱਭਾਗ ਵੱਲੋਂ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਦਿਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈਣ ਲਈ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਨਜ਼ਦੀਕੀ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਕੇਦਰ ਤੋਂ ਜਾਂ ਗੁਰੂ ਅੰਗਦ ਦੇਵ ਵੈਟਨਰੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋਂ ਜਾਂ ਫ.... (Read More)
ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਪੋਲਟਰੀ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈ ਕੇ ਨਾਬਾਰਡ ਤੋਂ ਲੋਨ ਲੈਂਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ 25 ਤੋਂ 35 % ਤੱਕ ਸਬਸਿਡੀ ਮਿਲ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਲੋਨ ਅਪਲਾਈ ਕਰਨ ਦੀ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਤੁਹਾਨੂੰ ਵਿੱਭਾਗ ਵੱਲੋਂ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਦਿਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈਣ ਲਈ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਨਜ਼ਦੀਕੀ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਕੇਦਰ ਤੋਂ ਜਾਂ ਗੁਰੂ ਅੰਗਦ ਦੇਵ ਵੈਟਨਰੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋਂ ਜਾਂ ਫਿਰ ਤੁਸੀ ਕਿਸੇ ਵੀ ਦਿਨ ਆਪਣੇ ਨਜ਼ਦੀਕੀ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਕੇਦਰ ਤੇ ਪਹੁੰਚ ਕੇ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈਣ ਲਈ ਫਾਰਮ ਭਰ ਆਊ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਜਦੋਂ ਵੀ ਪੋਲਟਰੀ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਆਵੇਗੀ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਕੇਦਰ ਵੱਲੋਂ ਕਾਲ ਕਰਕੇ ਦੱਸ ਦਿੱਤਾ ਜਾਦਾ ਹੈ ਬਹੁਤ ਵਧੀਆ ਕੰਮ ਹੈ ਜੀ ਪੋਲਟਰੀ ਦਾ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਬ੍ਰਾਇਲਰ ਰੱਖਦੇ ਹੋਂ ਤਾਂ 5 ਤੋਂ 6 ਹਫਤਿਆਂ ਦੇ ਅੰਦਰ ਅੰਦਰ ਮੰਡੀਕਰਣ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਤਕਰੀਬਨ ਪੰਜ ਮਹੀਨਿਆਂ ਵਿੱਚ ਅੰੰਡਿਆ ਦੀ ਉਪਜ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਸਾਰਾ ਸਾਲ ਦੀ ਆਮਦਨ ਵਾਲਾ ਕੰਮ ਹੈ ਜੀ ਜਿਆਦਾ ਮਿਹਨਤ ਵੀ ਨਹੀ ਲੱਗਦੀ ਇਹ ਨਾਜੁਕ ਕਿਸਮ ਦੇ ਜਾਨਵਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਕੁੱਝ ਕੁ ਖਤਰਨਾਕ ਬਿਮਾਰੀਆ ਵੀ ਹਨ ਜਿੰਨਾਂ ਤੋੰ ਬਚਣ ਲਈ ਖਾਸ ਧਿਆਨ ਰੱਖਣ ਦੀ ਜਰੂਰਤ ਹੂੰਦੀ ਹੈ.
Posted by Ravi
Haryana
09-01-2020 09:57 PM
Ravi ji kripya aap unki photo bhejen jise dekhkr apko sahi jankari di jaa skee.

Posted by Ganpat Singh Thakur
Madhya Pradesh
09-01-2020 09:54 PM
गणपत सिंह ठाकुर जी धान बेचने के लिए आप अपनी लोकल मंडी में संम्पर्क कर सकते हैं, इस साल धान का रेट 1815 से 1835 क्विंटल है। धन्यवाद
Posted by Omprakash,Lodhi S/oGyaprasad Lodhi
Madhya Pradesh
09-01-2020 09:51 PM
Omprakash ji kripya aap apna swal vistar se pooche taki aapko iske bare men jankari di ja sake.dhanywad

Posted by ratanveer singh
Punjab
09-01-2020 09:49 PM
Ratanveer G, Tusi University cho Gur jaa shkr bnaun di Training lao. Marketing lyi Sardar Bhupinder Singh Bargari 9463400098 & Dr Ramandeep Sherrie Sahb 9814019470 naal contact kro.
Posted by Jitendra Singh Rajput
Madhya Pradesh
09-01-2020 09:47 PM
Jitendra ji kripya audio dubara bheje aapke dwara bheji gayi audio upload nahi hui hai,dhanywad
Posted by roop singh sidhu
Punjab
09-01-2020 09:46 PM
roop ji isdi bijai adh march mahine vich kiti jandi hai ate isda beej 2 kilo prati acre de hisab nal vartya janda hai.isda beej lain layi tuc mere nal sampark kar sakde ho 9417619444
Posted by Chandra shekhar Lavaniya
Uttar Pradesh
09-01-2020 09:43 PM
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकत हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है एक बकरी के लिए लगभग 12—15 वर्ग फीट जगह छती हुई और 25—30 वर्ग फीट जगह खुली चाहिए .... (Read More)
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकत हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है एक बकरी के लिए लगभग 12—15 वर्ग फीट जगह छती हुई और 25—30 वर्ग फीट जगह खुली चाहिए बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्चे देना आम बात है बकरियां 8-10 वर्ष तक बच्चे देती हैं और अपन गिनती को तेजी से बढ़ा लेती हैं आप बारबरी, ब्लैक बंगाल, जैसी नसल पाल सकते हैं इसकी ट्रेनिेंग के लिए आप अपने कुषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करे या फिर जो बकरी पालन का व्यवसाय कर रहा कोई किसान उसका फार्म स्वंय जाकर देखकर आयें तो और भी बारीकियों का पता चल जायेगा, आप ब्लैक बंगाल, बीटल, सिरोही, जमुनापरी, बरबरी नस्ल रख सकते हैं.

Posted by Abhishek
Karnataka
09-01-2020 09:43 PM
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकत हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है एक बकरी के लिए लगभग 12—15 वर्ग फीट जगह छती हुई और 25—30 वर्ग फीट जगह खुली चाहिए .... (Read More)
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकत हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है एक बकरी के लिए लगभग 12—15 वर्ग फीट जगह छती हुई और 25—30 वर्ग फीट जगह खुली चाहिए बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्चे देना आम बात है बकरियां 8-10 वर्ष तक बच्चे देती हैं और अपन गिनती को तेजी से बढ़ा लेती हैं आप बारबरी, ब्लैक बंगाल, जैसी नसल पाल सकते हैं इसकी ट्रेनिेंग के लिए आप अपने कुषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करे या फिर जो बकरी पालन का व्यवसाय कर रहा कोई किसान उसका फार्म स्वंय जाकर देखकर आयें तो और भी बारीकियों का पता चल जायेगा, आप ब्लैक बंगाल, बीटल, सिरोही, जमुनापरी, बरबरी नस्ल रख सकते हैं.

Posted by RAJIV RANJAN
Bihar
09-01-2020 09:33 PM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नंबर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद

Posted by lali Bachhal
Haryana
09-01-2020 09:30 PM
Lali ji tuc Ridomil gold di varto kar sakde ho isdi matra 1 kilo nu prati acre de hisab nal varto isde nal bimari di roktham ho jayegi.dhanwad
Posted by M Intezarul haque
Bihar
09-01-2020 09:29 PM
shrimaan g gehu mein magnease @1 kg per acre ko 100 liter pani mein mila ke spray kr skte ho g..

Posted by Gurpreet Singh
Punjab
09-01-2020 09:29 PM
gurpreet ji eh sundi ona khetan vich hi dikhai de rahi hai jithe kanak di ageti bijai kiti gayi hai jithe same sir bijai kiti hai othe is sundi da hamla ghat hunda hai.dhanwad

Posted by RAJIV RANJAN
Bihar
09-01-2020 09:29 PM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद

Posted by BINAY KUMAR JHA
Bihar
09-01-2020 09:21 PM
कृपया आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके

Posted by Balgovind kurrey
Chattisgarh
09-01-2020 09:16 PM
सबसे पहले आपके लिए यह जानना जरूरी है कि मुर्गी पालन दो तरह का होता है कि आप अंडों का व्यवसाय करना चाहते हैं या मीट का यदि आप अंडों का धंधा करना चाहते हैं तो आपको लेयर मुर्गियां पालनी पड़ेंगी और यदि आप मीट का धंधा करना चाहते हैं तो आपको ब्रॉयलर मुर्गियां पालनी पड़ेंगी यदि आप ब्रायलर मुर्गी पालन करना चाहते हैं त.... (Read More)
सबसे पहले आपके लिए यह जानना जरूरी है कि मुर्गी पालन दो तरह का होता है कि आप अंडों का व्यवसाय करना चाहते हैं या मीट का यदि आप अंडों का धंधा करना चाहते हैं तो आपको लेयर मुर्गियां पालनी पड़ेंगी और यदि आप मीट का धंधा करना चाहते हैं तो आपको ब्रॉयलर मुर्गियां पालनी पड़ेंगी यदि आप ब्रायलर मुर्गी पालन करना चाहते हैं तो कम से कम 10 हजार मुर्गियों का धंधा शुरू करना चाहते हैं तो आपको 4 से 5 लाख का इतज़ाम करना पड़ेगा, ये आप अपने बजट के हिसाब से कम पंक्षियों से भी शुरू कर सकते हैं बाकि आप इस काम को ट्रेनिंग लेकर शुरू करें जिसमें आपको इस काम के बारे में पूरी जानकारी दी जाएगी ट्रेनिंग लेने के लिए आप अपने नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें आप वहां जाकर अपना ट्रेनिंग का फार्म भर आएं जब भी ट्रेनिंग होगी तो वो आपको फोन करके उसके बारे में बता देंगे.

Posted by heeralal Rathod
Madhya Pradesh
09-01-2020 09:08 PM
हीरालाल जी इसकी बिजाई का समय फरवरी महीना होता है कतार से कतार में 2.0-2.5 मीटर और पौधे से पौधे में 40-50 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बैड के दोनों ओर बीज को बोयें प्रत्येक गड्ढे में दो से तीन बीज बोयें 3-5 सैं.मी. की गहराई पर बीज बोयें बिजाई के लिए डिबलिंग विधि का प्रयोग करें

Posted by dileep verma
Uttar Pradesh
09-01-2020 09:02 PM
दिलीप जी आप इसका इस्तेमाल ना करें यह फसल को नुक्सान कर सकता है धन्यवाद

Posted by Raju Malik
Uttar Pradesh
09-01-2020 08:58 PM
UP 2425: यह सिंचित स्थितियों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है Halna (K-7903): यह सिंचित क्षेत्रों में पिछेती और बहुत देर से उगाने के लिए उपयुक्त किस्म है यह किस्म नमक वाली मिट्टी के साथ साथ क्षारीय मिट्टी में उगाने के लिए उपयुक्त है इसके दाने सुनहरी और अर्द्ध सख्त होते हैं यह किस्म सभी प्रकार की कुंगियों के प्र.... (Read More)
UP 2425: यह सिंचित स्थितियों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है Halna (K-7903): यह सिंचित क्षेत्रों में पिछेती और बहुत देर से उगाने के लिए उपयुक्त किस्म है यह किस्म नमक वाली मिट्टी के साथ साथ क्षारीय मिट्टी में उगाने के लिए उपयुक्त है इसके दाने सुनहरी और अर्द्ध सख्त होते हैं यह किस्म सभी प्रकार की कुंगियों के प्रतिरोधक किस्म है यह पत्ता झुलस रोग और करनाल बंट को भी सहनेयोग्य किस्म है
Posted by Jagandeep singh
Punjab
09-01-2020 08:51 PM
Jagandeep ji tuc Agromin max (Aries ) di varto kar sakde ho.isde nal jhaad vadhia niklda hai.dhanwad

Posted by jitendra Patidar
Madhya Pradesh
09-01-2020 08:47 PM
जीतेन्द्र जी आप इसके लिए mancozeb @4 ग्राम को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करे इस से बीमारी की रोकथाम हो जाएगी धन्यवाद

Posted by Bhanu pratap singh
Uttar Pradesh
09-01-2020 08:40 PM
Bhanu pratap singh ji, yeh fungus ka hamla hua hai, ap iski roktham ke liye isme carbendazim @ 4gm or mancozeb @ 4 gm prati liter pani ke hisaab se spray karein, isse yeh theek ho jata hai, dhanywad
Posted by sunil kumar
Uttar Pradesh
09-01-2020 08:37 PM
Sunil kumar ji up me ABS ka semen lene ke lia aap indians pharmacare pvt. ltd. (Address: 246, punjabi pura,, Transport Nagar, Raghukul Vihar, Gupta Colony, Meerut, Uttar Pradesh 250002 Phone: 081910 01038), ProGen A.I.Solutions (Address: 349, Sikendra, Sector 7, Sector 6, Avas Vikas Colony, Lohamandi, Agra, Uttar Pradesh 282007 Phone: 075201 99802) se samparak kar sakte hai, Thankyou.

Posted by Sandeep Sarraf
Bihar
09-01-2020 08:30 PM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद

Posted by baljinder singh
Punjab
09-01-2020 08:30 PM
ਇਸ ਨੂੰ ਮਿੱਟੀ ਦੀਆਂ ਵਿਆਪਕ ਕਿਸਮਾਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਵਧੀਆ ਨਿਕਾਸ ਵਾਲੀ ਪਹਾੜੀ ਮਿੱਟੀ ਪਪੀਤੇ ਦੀ ਖੇਤੀ ਦੇ ਲਈ ਅਨੁਕੂਲ ਹੈ ਰੇਤਲੀ ਅਤੇ ਭਾਰੀ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਇਸ ਦੀ ਖੇਤੀ ਨਾ ਕਰੋ ਪਪੀਤੇ ਦੀ ਖੇਤੀ ਲਈ ਮਿੱਟੀ ਦਾ pH 6.5-7.0 ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਪ੍ਰਸਿੱਧ ਕਿਸਮਾਂ ਅਤੇ ਝਾੜ :- Red Lady,Punjab Sweet,Pusa Delicious,Pusa Dwarf ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਪਪੀਤੇ ਦੀ ਖੇਤੀ ਦੇ ਲਈ, ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਤਿਆਰ ਜ਼ਮੀਨ ਦੀ ਲੋੜ .... (Read More)
ਇਸ ਨੂੰ ਮਿੱਟੀ ਦੀਆਂ ਵਿਆਪਕ ਕਿਸਮਾਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਵਧੀਆ ਨਿਕਾਸ ਵਾਲੀ ਪਹਾੜੀ ਮਿੱਟੀ ਪਪੀਤੇ ਦੀ ਖੇਤੀ ਦੇ ਲਈ ਅਨੁਕੂਲ ਹੈ ਰੇਤਲੀ ਅਤੇ ਭਾਰੀ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਇਸ ਦੀ ਖੇਤੀ ਨਾ ਕਰੋ ਪਪੀਤੇ ਦੀ ਖੇਤੀ ਲਈ ਮਿੱਟੀ ਦਾ pH 6.5-7.0 ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਪ੍ਰਸਿੱਧ ਕਿਸਮਾਂ ਅਤੇ ਝਾੜ :- Red Lady,Punjab Sweet,Pusa Delicious,Pusa Dwarf ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਪਪੀਤੇ ਦੀ ਖੇਤੀ ਦੇ ਲਈ, ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਤਿਆਰ ਜ਼ਮੀਨ ਦੀ ਲੋੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜ਼ਮੀਨ ਨੂੰ ਸਮਤਲ ਕਰਨਾ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ ਆਖਰੀ ਵਾਰ ਵਾਹੀ ਸਮੇਂ, ਗਲੀ-ਸੜੀ ਰੂੜ੍ਹੀ ਦੀ ਖਾਦ ਪਾਓ 150-200 ਗ੍ਰਾਮ ਬੀਜ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਵਿੱਚ ਵਰਤੋ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ, ਮਿੱਟੀ ਤੋਂ ਪੈਦਾ ਹੋਣ ਵਾਲੀਆਂ ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਤੋਂ ਬਚਾਅ ਲਈ ਕਪਤਾਨ 3 ਗ੍ਰਾਮ ਨਾਲ ਪ੍ਰਤੀ ਕਿਲੋ ਬੀਜਾਂ ਨੂੰ ਸੋਧੋ ਜੁਲਾਈ ਦੇ ਦੂਜੇ ਹਫਤੇ ਤੋਂ ਸਤੰਬਰ ਦੇ ਤੀਜੇ ਹਫਤੇ ਤੱਕ ਬੀਜਾਂ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਸਤੰਬਰ ਦੇ ਪਹਿਲੇ ਹਫਤੇ ਤੋਂ ਅੱਧ ਅਕਤੂਬਰ ਤੱਕ ਰੋਪਣ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਪੌਦਿਆਂ ਵਿੱਚਲਾ ਫਾਸਲਾ 1.5x1.5 ਮੀਟਰ ਰੱਖੋ ਬੀਜ ਨੂੰ 1 ਸੈ.ਮੀ. ਦੀ ਡੂੰਘਾਈ ਤੇ ਬੀਜੋ ਇਸ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਪ੍ਰਜਣਨ ਵਿਧੀ ਦੁਆਰਾ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਨਵੇਂ ਪੌਦਿਆਂ ਨੂੰ 25x10 ਸੈ.ਮੀ. ਦੇ ਪੋਲੀਥੀਨ ਬੈਗਾਂ ਵਿੱਚ ਤਿਆਰ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਪੋਲੀਥੀਨ ਬੈਗ ਵਿੱਚ ਪਾਣੀ ਦੇ ਉਚਿੱਤ ਨਿਕਾਸ ਲਈ ਹੇਠਲੇ ਹਿੱਸੇ ਵਿੱਚ 1 ਮਿ.ਮੀ. ਵਿਆਸ ਵਿੱਚ 8-10 ਸੁਰਾਖ ਕਰੋ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ, ਮਿੱਟੀ ਅਤੇ ਰੇਤ ਦੇ ਸਮਾਨ ਅਨੁਪਾਤ ਨਾਲ ਪੋਲੀਥੀਨ ਬੈਗਾਂ ਨੂੰ ਭਰੋ ਮੁੱਖ ਤੌਰ ਤੇ ਬੈਗਾਂ ਵਿੱਚ ਜੁਲਾਈ ਦੇ ਦੂਜੇ ਹਫਤੇ ਤੋਂ ਸਤੰਬਰ ਦੇ ਤੀਜੇ ਹਫ਼ਤੇ ਤੱਕ ਬੀਜ ਬੀਜੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਕਪਤਾਨ 3 ਗ੍ਰਾਮ ਨਾਲ ਪ੍ਰਤੀ ਕਿਲੋ ਬੀਜਾਂ ਨੂੰ ਸੋਧੋ ਨਵੇਂ ਨਿਕਲੇ ਪੌਦਿਆਂ ਨੂੰ ਉਖੇੜਾ ਰੋਗ ਤੋਂ ਬਚਾਉਣ ਲਈ ਕਪਤਾਨ 0.2% ਦਾ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਛਿੜਕਾਅ ਕਰੋ ਨਵੇਂ ਪੌਦਿਆਂ ਦਾ ਰੋਪਣ ਸਤੰਬਰ-ਅਕਤੂਬਰ ਮਹੀਨੇ ਵਿੱਚ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਰੋਪਣ ਸਮੇਂ ਕੋਈ ਵੀ ਖਾਦ ਨਾ ਪਾਓ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਫਰਵਰੀ ਮਹੀਨੇ ਵਿੱਚ N:P:K(19:19:19) @1 ਕਿਲੋ ਦੋ ਵਾਰ ਪਾਓ ਨਦੀਨਾਂ ਨੂੰ ਹੱਥ ਨਾਲ ਗੋਡਾਈ ਕਰਕੇ ਜਾਂ ਰਸਾਇਣਾ ਦੁਆਰਾ ਰੋਕਿਆਂ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਗਲਾਈਫੋਸੇਟ 1.6 ਲੀਟਰ ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਗਲਾਈਫੋਸੇਟ ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਸਿਰਫ ਨਦੀਨਾਂ ਤੇ ਹੀ ਕਰੋ , ਮੁੱਖ ਫਸਲ ਤੇ ਨਾ ਕਰੋ ਮੌਸਮ, ਫਸਲ ਦੇ ਵਾਧੇ ਅਤੇ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਕਿਸਮ ਦੇ ਆਧਾਰ ਤੇ ਸਿੰਚਾਈ ਕਰੋ ਮੁੱਖ ਤੌਰ ਤੇ ਫਲ਼ ਨੂੰ ਪੂਰਾ ਆਕਾਰ ਲੈਣ ਅਤੇ ਹਰੇ ਤੋਂ ਹਲਕਾ ਪੀਲੇ ਰੰਗ ਦਾ ਹੋਣ ਤੇ ਤੁੜਾਈ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਪਹਿਲੀ ਤੁੜਾਈ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 14-15 ਮਹੀਨੇ ਬਾਅਦ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਹਰ ਮੌਸਮ ਵਿੱਚ 4-5 ਵਾਰ ਤੁੜਾਈ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਨਿੰਬੂ ਜਾਤੀ ਦੇ ਫਲਾਂ ਦੀ ਫਸਲ ਇੱਕ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਖੇਤੀ ਕਈ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੀ ਮਿੱਟੀ, ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਰੇਤਲੀ-ਦੋਮਟ ਤੋਂ ਚੀਕਣੀ-ਦੋਮਟ ਜਾਂ ਗਾੜ੍ਹੀ ਚੀਕਣੀ-ਦੋਮਟ ਜਾਂ ਤੇਜ਼ਾਬੀ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਨਿਕਾਸ ਚੰਗਾ ਹੋਵੇ ਇਹ ਫਸਲ ਲੂਣੀ ਅਤੇ ਖਾਰੀ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਵਿਕਾਸ ਕਰ ਸਕਦੀ ਹੈ ਇਹ ਪਾਣੀ ਦੀ ਖੜੋਤ ਵਾਲੀ ਮਿੱਟੀ ਨੂੰ ਵੀ ਨਹੀਂ ਸਹਾਰ ਸਕਦੀ ਫਸਲ ਦੇ ਉਚਿੱਤ ਵਿਕਾਸ ਲਈ ਮਿੱਟੀ ਦਾ pH 5.5-7.5 ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਲੈਮਨ ਦੀ ਖੇਤੀ ਲਈ ਚੰਗੇ ਨਿਕਾਸ ਵਾਲੀ ਹਲਕੀ ਦੋਮਟ ਮਿੱਟੀ ਉਚਿੱਤ ਮੰਨੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਪ੍ਰਸਿੱਧ ਕਿਸਮਾਂ:-Punjab Baramasi,Eureka,Punjab Galgal ਖੇਤ ਨੂੰ ਪਹਿਲਾਂ ਸਿੱਧਾ ਅਤੇ ਫਿਰ ਤਿਰਛਾ ਵਾਹੋ ਅਤੇ ਫਿਰ ਖੇਤ ਨੂੰ ਸਮਤਲ ਕਰੋ ਪਹਾੜੀ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਢਲਾਨ ਦੀ ਬਜਾਏ ਉੱਚਾਈ ਵਾਲੇ ਸਥਾਨਾਂ ਤੇ ਇਸਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਤਰ੍ਹਾ ਦੇ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਜ਼ਿਆਦਾ ਘਣਤਾ ਵਿੱਚ ਵੀ ਬਿਜਾਈ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਇਸਦੀ ਬਿਜਾਈ ਦਾ ਉਚਿੱਤ ਸਮਾਂ ਜੁਲਾਈ-ਅਗਸਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅੰਤਰ-ਫਸਲੀ: ਸ਼ੁਰੂਆਤੀ ਦੋ-ਤਿੰਨ ਸਾਲਾਂ ਵਿੱਚ ਰਵਾਂਹ, ਸਬਜ਼ੀਆਂ, ਫਰਾਂਸਬੀਨ ਆਦਿ ਫਸਲਾਂ ਨੂੰ ਅਪਨਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਪੌਦਿਆਂ ਵਿੱਚਲਾ ਫਾਸਲਾ 4.5×4.5 ਮੀਟਰ ਰੱਖੋ ਨਵੇਂ ਪੌਦੇ ਬੀਜਣ ਲਈ 60×60×60 ਸੈ.ਮੀ. ਦੇ ਟੋਏ ਪੁੱਟੋ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ 10 ਕਿਲੋ ਅਤੇ ਸਿੰਗਲ ਸੁਪਰ ਫਾਸਫੇਟ 500 ਗ੍ਰਾਮ ਬਿਜਾਈ ਸਮੇਂ ਟੋਇਆਂ ਵਿੱਚ ਪਾਓ ਨਵੇਂ ਪੌਦੇ ਬੀਜਣ ਲਈ 60×60×60 ਸੈ.ਮੀ. ਦੇ ਟੋਏ ਪੁੱਟੋ ਪੌਦਿਆਂ ਦਾ ਪ੍ਰਜਣਨ ਪਿਉਂਦ ਜਾਂ ਏਅਰ ਲੇਅਰਿੰਗ ਦੁਆਰਾ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਇੱਕ ਏਕੜ ਵਿੱਚ ਪੌਦਿਆਂ ਦੀ ਘਣਤਾ ਘੱਟ ਤੋਂ ਘੱਟ 208 ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਪੌਦੇ ਦੇ ਤਣੇ ਦੇ ਵਧੀਆ ਵਿਕਾਸ ਲਈ, ਜ਼ਮੀਨ ਤੋਂ 50-60 ਸੈ.ਮੀ. ਤੱਕ ਦੀਆਂ ਟਹਿਣੀਆਂ ਕੱਟ ਦਿਓ ਪੌਦੇ ਨੂੰ ਵਿਚਕਾਰ ਤੋਂ ਖੁੱਲਾ ਛੱਡ ਦਿਓ ਪਾਣੀ ਚੂਸਣ ਵਾਲੀਆਂ ਟਹਿਣੀਆਂ ਨੂੰ ਸ਼ੁਰੂਆਤੀ ਸਮੇਂ ਤੇ ਕੱਟ ਦਿਓ 1-3 ਸਾਲ ਦੀ ਫਸਲ ਨੂੰ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ 5-20 ਕਿਲੋ ਅਤੇ ਯੂਰੀਆ 100-300 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਰੁੱਖ ਪਾਓ 4-6 ਸਾਲ ਦੀ ਫਸਲ ਨੂੰ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ 25-50 ਕਿਲੋ ਅਤੇ ਯੂਰੀਆ 100-300 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਰੁੱਖ ਪਾਓ 7-9 ਸਾਲ ਦੀ ਫਸਲ ਨੂੰ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ 60-90 ਕਿਲੋ ਅਤੇ ਯੂਰੀਆ 600-800 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਰੁੱਖ ਪਾਓ ਜਦੋਂ ਫਸਲ 10 ਸਾਲ ਦੀ ਜਾਂ ਉਸ ਤੋਂ ਵੱਧ ਹੋ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ 100 ਕਿਲੋ ਅਤੇ ਯੂਰੀਆ 800-1600 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਰੁੱਖ ਪਾਓ ਜੇਕਰ ਫਲ ਝੜਦੇ ਹੋਣ ਤਾਂ ਇਸਨੂੰ ਵੱਧਣ ਤੋਂ ਰੋਕਣ ਲਈ 2,4-ਡੀ 10 ਗ੍ਰਾਮ ਨੂੰ 500 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਪਹਿਲੀ ਸਪਰੇਅ ਮਾਰਚ ਦੇ ਅੰਤ ਵਿੱਚ ਅਤੇ ਫਿਰ ਅਪ੍ਰੈਲ ਦੇ ਅੰਤ ਵਿੱਚ ਕਰੋ ਅਗਸਤ ਅਤੇ ਸਤੰਬਰ ਦੇ ਅੰਤ ਵਿੱਚ ਦੋਬਾਰਾ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਜੇਕਰ ਖੇਤ ਨੇੜੇ ਨਰਮਾ ਬੀਜਿਆ ਹੋਵੇ ਤਾਂ, 2,4-ਡੀ ਦੀ ਬਜਾਏ ਜੀ ਏ 3 ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਨਦੀਨਾਂ ਨੂੰ ਹੱਥ ਨਾਲ ਗੋਡਾਈ ਕਰਕੇ ਜਾਂ ਰਸਾਇਣਾ ਦੁਆਰਾ ਰੋਕਿਆਂ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਗਲਾਈਫੋਸੇਟ 1.6 ਲੀਟਰ ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਗਲਾਈਫੋਸੇਟ ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਸਿਰਫ ਨਦੀਨਾਂ ਤੇ ਹੀ ਕਰੋ , ਮੁੱਖ ਫਸਲ ਤੇ ਨਾਂ ਕਰੋ ਲੈਮਨ ਦੀ ਫਸਲ ਲਈ ਥੋੜੇ-ਥੋੜੇ ਫਾਸਲੇ ਤੇ ਲਗਾਤਾਰ ਸਿੰਚਾਈ ਦੀ ਲੋੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਸਰਦੀਆਂ ਅਤੇ ਗਰਮੀਆਂ ਵਿੱਚ ਜੀਵਨ-ਬਚਾਓ ਸਿੰਚਾਈ ਕਰੋ ਪੌਦੇ ਦੇ ਉਚਿੱਤ ਵਿਕਾਸ, ਫੁੱਲ ਨਿਕਲਣ ਅਤੇ ਫਲ ਬਣਨ ਲਈ ਸਿੰਚਾਈ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਪਰ ਬੇਲੋੜੀ ਸਿੰਚਾਈ ਵੀ ਜੜ੍ਹ ਗਲਣ ਅਤੇ ਤਣਾ ਗਲਣ ਰੋਗ ਦਾ ਕਾਰਨ ਬਣਦੀ ਹੈ ਸਹੀ ਫਾਸਲੇ ਤੇ ਜ਼ਿਆਦਾ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਕੀਤੀ ਗਈ ਸਿੰਚਾਈ ਲਾਭਦਾਇਕ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਨਮਕੀਨ ਪਾਣੀ ਫਸਲ ਲਈ ਨੁਕਸਾਨਦਾਇਕ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਬਸੰਤ ਰੁੱਤ ਵਿੱਚ ਥੋੜੀ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਖੁਸ਼ਕ ਮਿੱਟੀ ਪੌਦੇ ਨੂੰ ਪ੍ਰਭਾਵਿਤ ਨਹੀਂ ਕਰਦੀ ਉਚਿੱਤ ਆਕਾਰ ਅਤੇ ਆਕਰਸ਼ਿਕ ਰੰਗ ਲੈਣ ਤੇ ਜਦੋਂ ਫਲ ਵਿੱਚ ਟੀ ਐੱਸ ਐੱਸ ਤੋਂ ਤੇਜ਼ਾਬ ਦੀ ਮਾਤਰਾ 12:1 ਅਨੁਪਾਤ ਹੋ ਜਾਵੇ ਤੇ ਲੈਮਨ ਤੁੜਾਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਕਿਸਮ ਅਨੁਸਾਰ ਫਲ ਆਮ ਤੌਰ ਤੇ ਅੱਧ ਜਨਵਰੀ ਤੋਂ ਅੱਧ ਫਰਵਰੀ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਸਹੀ ਸਮੇਂ ਤੇ ਤੁੜਾਈ ਕਰਨਾ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ, ਕਿਉਂਕਿ ਸਮੇਂ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਜਾਂ ਦੇਰੀ ਨਾਲ ਤੁੜਾਈ ਕਰਨ ਨਾਲ ਫਲਾਂ ਦੀ ਕੁਆਲਿਟੀ ਤੇ ਬੁਰਾ ਅਸਰ ਪੈਂਦਾ ਹੈ

Posted by ravinder singh
Haryana
09-01-2020 08:28 PM
कृपया आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके

Posted by Mohan GHORELA
Punjab
09-01-2020 08:22 PM
Mohan ji tuci murgi palan di training apne nazdiki kvk ton laa skde ho, uthe sme sme te kisana di manng de anusar trainings ditia jandia hai tuci uthe apna training form bharr aao fir jddo uthe training howegi tan ohh tuhanu phone krke dass denge, training lain lai tuci krishi vigyan kendar Address: Model Town, Abohar, Punjab 152117 nal sampark kr skde ho.
Posted by विनोद कुमार
Bihar
09-01-2020 08:18 PM
shrimaan g kirpa krke fasal ki photo bhejo ta jo aapko proper jaankari mil ske g..

Posted by Manoj Kumar
Uttar Pradesh
09-01-2020 08:17 PM
shrimaan g gehu mein urea ka spray pehle pani ke baad kr skte ho g..

Posted by Ravinder
Uttar Pradesh
09-01-2020 08:12 PM
Ravinder ji shtavar ke plant lene or is ke bare me puran jankari ke lia aap Wasif Malik 9548535104 se samparak kar sakte hai, Thankyou.

Posted by MUKESH KUMAR SINGH
Bihar
09-01-2020 08:01 PM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद

Posted by Sachin sweety sharma
Madhya Pradesh
09-01-2020 07:59 PM
Sachin ji kripya aap btaye ke aapne konse harvester ki keemat ke bare men jankari leni hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake,dhanywad

Posted by ramsajiwn
Uttar Pradesh
09-01-2020 07:47 PM
Sachin ji kripya aap btaye ke aapne konse harvester ki keemat ke bare men jankari leni hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake,dhanywad
Posted by ROHATAS SINGH
Uttar Pradesh
09-01-2020 07:42 PM
श्री मान मोटे आलुओं की पैदावार के लिए 13:0:45 की 2 किलो और मैगनीश्यिम ई डी टी ए 100 ग्राम प्रति एकड़ की स्प्रे करें बीमारियों के हमले को रोकने के लिए फंगसनाशी प्रॉपीनेब 3 ग्राम प्रति लीटर पानी डालें आलुओं का आकार और गिणती बढ़ाने के लिए हयूमिक एसिड (12 प्रतिशत) 3 ग्राम + एम ए पी 12:61:0 की 8 ग्राम या डी ए पी 15 ग्राम प्रति लीटर की स्.... (Read More)
श्री मान मोटे आलुओं की पैदावार के लिए 13:0:45 की 2 किलो और मैगनीश्यिम ई डी टी ए 100 ग्राम प्रति एकड़ की स्प्रे करें बीमारियों के हमले को रोकने के लिए फंगसनाशी प्रॉपीनेब 3 ग्राम प्रति लीटर पानी डालें आलुओं का आकार और गिणती बढ़ाने के लिए हयूमिक एसिड (12 प्रतिशत) 3 ग्राम + एम ए पी 12:61:0 की 8 ग्राम या डी ए पी 15 ग्राम प्रति लीटर की स्प्रे पौधे की वृद्धि के समय करें
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