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Posted by jagjinder
Punjab
11-01-2020 03:18 PM
Punjab
01-11-2020 04:34 PM
Jagjit ji mausam vibhag de anusar monday nu meeh pain di sambhavna hai.dhanwad
Posted by भारत सिंह
Madhya Pradesh
11-01-2020 03:18 PM
Punjab
01-11-2020 04:32 PM
भारत जी कृपया बताये कि आपने इसमें पहले क्या क्या खाद डाली है ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by Umesh Patel
Madhya Pradesh
11-01-2020 03:11 PM
Punjab
01-11-2020 04:31 PM
मिट्टी की जांच के आधार पर खादें डालें मिट्टी की जांच के अनुसार ही हम मिट्टी में आवश्यक खादों की मात्रा दे सकते हैं सिंचित क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 60 किलो (यूरिया 130 किलो), फासफोरस 24 किलो (एस एस पी 150 किलो), पोटाश 12 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 20 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस और पोटाश क.... (Read More)
मिट्टी की जांच के आधार पर खादें डालें मिट्टी की जांच के अनुसार ही हम मिट्टी में आवश्यक खादों की मात्रा दे सकते हैं सिंचित क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 60 किलो (यूरिया 130 किलो), फासफोरस 24 किलो (एस एस पी 150 किलो), पोटाश 12 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 20 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी नाइट्रोजन को पहली सिंचाई के समय डालें बारानी क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 24 किलो (यूरिया 52 किलो), फासफोरस 12 किलो (एस एस पी 75 किलो), पोटाश 8 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 15 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोज, फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें सिंचित क्षेत्रों में पिछेती बिजाई के लिए, नाइट्रोजन 50 किलो (यूरिया 110 किलो), फासफोरस 12 किलो (एस एस पी 75 किलो), पोटाश 16 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 27 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन की दो तिहाई मात्रा बिजाई के 35-40 दिनों के बाद डालें यह पाया गया है कि जिंक सल्फेट 10 किलो प्रति एकड़ में डालने से उपज में वृद्धि होती है जिंक की कमी को पूरा करने के लिए जिंक सल्फेट 0.5 प्रतिशत की फोलियर स्प्रे करें 15 दिनों के अंतराल पर दो से तीन स्प्रे करें
Posted by k singh
Uttar Pradesh
11-01-2020 03:06 PM
Punjab
01-17-2020 03:29 PM
K singh ji agar aap New tractor lena chahte hai to aap Pardhan Mantri Tractor yojna ka labh utha sakte hai, Is yojna ke bare me puri jankari ke lia aap apne nazdiki SBI Bank se samparak kare, Thankyou.
Posted by Arun Kumar Yadav
Uttar Pradesh
11-01-2020 03:02 PM
Punjab
04-09-2020 04:05 PM
Arun Kumar Yadav ji is ke bare me visthar me jankari ke lia aap Mr dhananjay Kumar 9416400207 se samparak kar sakte hai, Thankyou.
Posted by Mahesh Kumar
Gujarat
11-01-2020 02:58 PM
Punjab
01-11-2020 05:15 PM
फालसा की खेती लगाने (रोपने) का समय:- नर्सरी में लगे हुए पौधे,जिमें सुप्तावस्था में आने से फ्ल्ले काफी वृद्धि हो चुकी हो,फरवरी के महीने में खेत में रोप देने चाहिए इसका मुख्य लाभ है जड़ों के साथ मिटटी की जरूरत का न होना वर्षा के मौसम में रोपते समय गाछी का होना जरुरी है मिटटी:- शुष्क क्षेत्रों में जहाँ पर मिटट.... (Read More)
फालसा की खेती लगाने (रोपने) का समय:- नर्सरी में लगे हुए पौधे,जिमें सुप्तावस्था में आने से फ्ल्ले काफी वृद्धि हो चुकी हो,फरवरी के महीने में खेत में रोप देने चाहिए इसका मुख्य लाभ है जड़ों के साथ मिटटी की जरूरत का न होना वर्षा के मौसम में रोपते समय गाछी का होना जरुरी है मिटटी:- शुष्क क्षेत्रों में जहाँ पर मिटटी उपजाऊ नहीं है तथा जिसमें अन्य फलदार पौधे नहीं उगाए जा सकते हों,वहां उपयुक्त है प्रवर्धन:- इसके पौधे बीज द्वारा तैयार करते हैं अंकुरित पौधे शुद्ध किस्म के होते है नर्सरी में उगाने के लिए ताजा बीजों का चुनाव करना चाहिए यदि हम बीज का खुले में भण्डारण करते हैं तो उसके उगने की क्षमता 90-100 दिन तक रहती है और यदि शीतगृह में रहते है तो उसके उगने की क्षमता 6 महीने तक रहती है बीज को उगने के लिए 15-20 दिन और रोपित करने के लिए 3-4 महीने की आवश्यकता होती है फालसा ;- पौधों को रोपते समय कतार से कतार एवं पौधे से पौधे का 1.5 से 2.0 मीटर का फासला उचित माना गया है कटाई-छंटाई:- फालसा की खेती में कटाई-छंटाई का विशेष महत्व है लम्बी किस्म के लिए कटाई-छंटाई जमीन से 0.9-1.2 मीटर ऊंचाई पर एवं बौनी किस्म के लिए जमीन से 40-60 सेटीमीटर की ऊंचाई पर उचित है दिसम्बर-जनवरी के महीनों के जब पौधा सुशुप्त अवस्था में होता है सिंचाई:- फालसा में प्रथम सिंचाई,खाद डालने के बाद,फरवरी के दूसरे-तीसरे सप्ताह में की जाती है मार्च-अप्रैल में सिंचाई 20-25 दिन के अन्तर पर करनी चाहिए और मई के महीने में इस अन्तर को घटाकर 15-20 दिन का देना चाहिए खाद :- प्रारंभ में गोबर खाद 5-6 किग्रा., 100 ग्रा. यूरिया, 125 ग्रा. सिं.सु.फा. एवं 100 ग्रा. म्यूरिएट ऑफ़ पोटाश दें इस मात्रा को पौधे की आयु के साथ बढ़ाते जाएँ
Posted by Arun Kumar Yadav
Uttar Pradesh
11-01-2020 02:57 PM
Punjab
04-11-2020 03:44 PM
Arun Kumar Yadav ji is ke lai aap Mr dhananjay Kumar 9416400207 se samparak kar sakte hai, Thankyou.
Posted by Vipan Kumar
Himachal Pradesh
11-01-2020 02:45 PM
Punjab
01-12-2020 10:45 AM
सबसे पहले यदि हम मछली पालन की बात करें तो इसके लिए ट्रेनिंग बहुत जरूरी है यह ट्रेनिंग FFDA(fish farmer development aggency) हर जिले में बनी है जहां हमारा खेतीबाड़ी विभाग है वहां इसके अफसर बैठते हैं वहां जाकर एप्लीकेशन भरवायें वहां आपको 5 दिन की ट्रेनिंग दी जायेगी ट्रेनिंग के लिए दसवीं पास होना ज़रूरी है इस ट्रेनिंग में आपको लोन और स.... (Read More)
सबसे पहले यदि हम मछली पालन की बात करें तो इसके लिए ट्रेनिंग बहुत जरूरी है यह ट्रेनिंग FFDA(fish farmer development aggency) हर जिले में बनी है जहां हमारा खेतीबाड़ी विभाग है वहां इसके अफसर बैठते हैं वहां जाकर एप्लीकेशन भरवायें वहां आपको 5 दिन की ट्रेनिंग दी जायेगी ट्रेनिंग के लिए दसवीं पास होना ज़रूरी है इस ट्रेनिंग में आपको लोन और सब्सिड़ी के बारे में सारी जानकारी प्राप्त हो जाएगी इसकी पुंग छोड़ने के लिए अप्रैल से अक्तूबर का समय बढ़िया होता है, बाकि यदि अपने शुरू करना है तो यूनिवर्सिटी की तरफ से एक एकड़ में शुरू कर सकते हैं. एक एकड़ में 5000 पूंग डाल सकते हैं यह 2 से 3 इंच का होता है यदि 5000 डालना है तो 3000 रोहू, 1000 कतला, 500 कॉमन कॉर्प और 500 मरीगल नस्ल डाली जाए यह पूंग आप मछली पालन विभाग से खरीद सकते हैं यह एक इंच का बच्चा 10 पैसा प्रति बच्चा मिलेगा यदि बढ़िया खुराक डाली जाए तो 8 महीनों में यह लगभग 800—900 ग्राम का हो जाता है बाकी मछली पालन के लिए नहरी पानी बढ़िया होता है और आप गांव का छप्पड़ ठेके से लेकर भी यह काम शुरू कर सकते हैं तालाब में मछली के बीज डालने से पहले इस बात की जांच कर लेनी चाहिए कि उस तालाब में काफी मात्रा में मछली की कुदरती खुराक उपलब्ध है..
Posted by Sharry Ahluwalia
Punjab
11-01-2020 02:41 PM
Punjab
01-11-2020 04:29 PM
sharry ji tuc kisman jive 752 ja 658 kisam di bijai kar sakde ho.dhanwad
Posted by rupendra ajgalle
Chattisgarh
11-01-2020 02:40 PM
Punjab
04-09-2020 07:47 PM
अनुज महेचा झारखण्ड से है जी
Posted by hitesh
Gujarat
11-01-2020 02:40 PM
Rajasthan
01-12-2020 10:47 AM
जब भी आप साइलेज तैयार करते है तो आप इस बात कर ध्यान रखें कि उस खड्डे में हवा नहीं होनी चाहिए साइलेज बिल्कुल हवा रहित तैयार करना चाहिए जोकि अच्छी तरह से तैयार हो जाता है आचार तैयार करने के गड्ढा - गड्ढे का आकार, पशुओं की गिणती, हरे चारे की मिकदार और उसे जितने समय के लिए चारना है पर निर्भर करता है आमतौर पर एक घन मी.... (Read More)
जब भी आप साइलेज तैयार करते है तो आप इस बात कर ध्यान रखें कि उस खड्डे में हवा नहीं होनी चाहिए साइलेज बिल्कुल हवा रहित तैयार करना चाहिए जोकि अच्छी तरह से तैयार हो जाता है आचार तैयार करने के गड्ढा - गड्ढे का आकार, पशुओं की गिणती, हरे चारे की मिकदार और उसे जितने समय के लिए चारना है पर निर्भर करता है आमतौर पर एक घन मीटर स्थान पर 5-6 क्विंटल कटा हुआ हरा चारा संभाला जा सकता है 10 मीटर लंबा, 3 मीटर चौड़ा और 1.5 मीटर गहरा गड्ढा 350-400 क्विंटल हरा चारा संभालने की क्षमता रखता है गड्ढे की लंबाई, चौड़ाई पशुओं की गिणती और उनकी जरूरतों के अनुसार कम ज्यादा हो सकती है परंतु गहराई हमेशा 1.5 से 2 मीटर होनी चाहिए गड्ढा पशुओं के ढारे के नज़दीक ऊंचे स्थान पर बनाना चाहिए यह पक्का और सीमेंट से पलस्तर किया होना चाहिए आचार बनाने के ढंग • काटी हुई फसल का 5 से 8 सैं.मी. के हिसाब से कुतरा कर ले और इसे गड्ढे में भर दें • गड्ढे में कुतर कर डाले गए चारे को ट्रैक्टर या बैलों की सहायता से अच्छी तरह दबा दें और इसे ज़मीन की सतह से एक मीटर ऊंचा रखें बढ़िया आचार तैयार करने के लिए ज़रूरी है कि आधे मीटर की चारे की तह को अच्छी तरह दबाया जाये • इसे ऊपर से कड़ब या तूड़ी की 10-15 सैं.मी. मोटी तह से ढक दें फिर इसके ऊपर मिट्टी डालकर लीप दें यह ध्यान रखें कि गड्ढा पूरी तरह से बंद हो • इस काम के लिए दबे हुए चारे के ऊपर प्लास्टिक की चादन बिछाकर इसके किनारे गोबर वाल मिट्टी से भी बंद किए जा सकते हैं • इसकी पूरी निगरानी रखें कि चारे के लेप के ऊपर कोई छेद या दरार ना आये यदि ऐसा हो जाये तो इसे जल्दी बंद कर दें आचार 45 दिनों तक तैयार हो जायेगा • प्रयोग करते समय आचार के गड्ढे को एक ओर से खोलें हर रोज़ के प्रयोग अनुसार चारा निकालकर बाकी रहता चारा अच्छी तरह बंद कर दें इस तरह चारा ज्यादा देर तक ठीक रहेगा पशुओं को आचार खिलाना - हो सकता है पशु पहले कुछ दिन आचार पसंद ना करें इसलिए पहले 5-6 दिन 5-10 किलो आचार हरे चारे में मिलाकर उन्हें डालें बाद में हर पशु को 20-30 किलो आचार रोजाना दूसरे चारों के साथ मिला दिया जा सकता है
Posted by Manoj kumar
Bihar
11-01-2020 02:39 PM

?

Punjab
01-11-2020 05:00 PM
Mnaoj ji kripya kheti ya pashu palan sambhandhi swal hi puchen taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by Amandeep singh
Punjab
11-01-2020 02:37 PM
Punjab
01-11-2020 04:03 PM
amandeep ji jado spray di varto kiti jandi hai ta isda asar kuch k fasl te v hunda hai tuhanu ghabraun di lod nahi hai eh aapne aap thik ho jayegi. tuc urea di bachi hoyi matra khet vich pao.dhanwad
Posted by ਮਨਪ੍ੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
11-01-2020 02:32 PM
Punjab
01-14-2020 02:32 PM
ਅਬੁਲਖੁਰਾਣਾ ਵਿੱਚ ਜੋ ਸੈਂਟਰ ਹੈ ਉਹ ਪੰਜਾਬ ਡੇਅਰੀ ਵਿਕਾਸ ਬੋਰਡ ਦਾ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਸੈਂਟਰ ਹੈ ਜੀ ਉੱਥੇ ਸਿਰਫ ਡੇਅਰੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਹੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ , ਮੱਛੀ ਪਾਲਣ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲਈ ਤੁਸੀ ਮੁਕਤਸਰ ਦੇ ਡੀਸੀ ਆਫਿਸ ਵਿੱਚ ਮੱਛੀ ਪਾਲਣ ਵਿਭਾਗ ਵਿੱਚ ਜਾ ਕੇ ਮਿਲੋ ਉੱਥੇ ਡਾ. RK KTARIA ਹਨ ਉਹ ਤੁਹਾਨੂੰ ਅਗਲੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਬਾਰੇ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦੇਣਗੇ ਜੋ ਕਿ 20 ਜਨਵਰੀ ਤੋਂ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਰਹੀ ਹੈ , ਇਹਨਾਂ ਦਾ ਮੋਬ.... (Read More)
ਅਬੁਲਖੁਰਾਣਾ ਵਿੱਚ ਜੋ ਸੈਂਟਰ ਹੈ ਉਹ ਪੰਜਾਬ ਡੇਅਰੀ ਵਿਕਾਸ ਬੋਰਡ ਦਾ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਸੈਂਟਰ ਹੈ ਜੀ ਉੱਥੇ ਸਿਰਫ ਡੇਅਰੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਹੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ , ਮੱਛੀ ਪਾਲਣ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲਈ ਤੁਸੀ ਮੁਕਤਸਰ ਦੇ ਡੀਸੀ ਆਫਿਸ ਵਿੱਚ ਮੱਛੀ ਪਾਲਣ ਵਿਭਾਗ ਵਿੱਚ ਜਾ ਕੇ ਮਿਲੋ ਉੱਥੇ ਡਾ. RK KTARIA ਹਨ ਉਹ ਤੁਹਾਨੂੰ ਅਗਲੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਬਾਰੇ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦੇਣਗੇ ਜੋ ਕਿ 20 ਜਨਵਰੀ ਤੋਂ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਰਹੀ ਹੈ , ਇਹਨਾਂ ਦਾ ਮੋਬਾਈਲ ਨੰਬਰ 9417622400 ਹੈ ਜੀ , ਜੇਕਰ ਫਿਰ ਵੀ ਕੋਈ ਸਮੱਸਿਆ ਆਈ ਤਾਂ ਦੁਬਾਰਾ ਸਵਾਲ ਪੋਸਟ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ
Posted by yatendra kumar
Uttar Pradesh
11-01-2020 02:30 PM
Punjab
01-12-2020 11:05 AM
Yatendra ji kripya aap shaka ki photo bheje taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake,dhanywad
Posted by रामजीबन उपाध्या पहाडगॉव
Uttar Pradesh
11-01-2020 02:30 PM
Punjab
01-11-2020 03:56 PM
इसे भारत की मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जा सकता है गेहूं की खेती के लिए चिकनी दोमट या दोमट बनतर, अच्छे ढांचे और पानी सोखने की सामान्य क्षमता वाली मिट्टी उचित होती है छिद्रित और पानी कम सोखने वाली मिट्टी गेहूं की खेती के लिए उपयुक्त नहीं होती सूखे हालातों, अच्छे जल निकास वाली भारी मिट्टी इसकी खेती के लिए अ.... (Read More)
इसे भारत की मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जा सकता है गेहूं की खेती के लिए चिकनी दोमट या दोमट बनतर, अच्छे ढांचे और पानी सोखने की सामान्य क्षमता वाली मिट्टी उचित होती है छिद्रित और पानी कम सोखने वाली मिट्टी गेहूं की खेती के लिए उपयुक्त नहीं होती सूखे हालातों, अच्छे जल निकास वाली भारी मिट्टी इसकी खेती के लिए अनुकूल होती है भारी मिट्टी जिसका घटिया ढांचा और घटिया जल निकास हो इसकी खेती के लिए उपयुक्त नहीं होती क्योंकि गेहूं की फसल जल जमाव के प्रति संवेदनशील होती है गेहूं की फसल को अच्छे अंकुरन के लिए अच्छी तरह से तैयार, पर ठोस बीज बैड की आवश्यकता होती है पिछली फसल की कटाई के बाद खेत की अच्छे तरीके से ट्रैक्टर की मदद से जोताई की जानी चाहिए खेत को आमतौर पर ट्रैक्टर के साथ तवियां जोड़कर जोता जाता है और उसके बाद दो या तीन बार हल या सुहागे से जोता जाता है बारानी क्षेत्रों में खेत इस तरह से तैयार करना चाहिए कि वह नमी को सोख सके खेत की एक बार आयरन के हल से गहरी जोताई या सामान्य हल से दो या तीन बार जोताई करें और सुहागा फेरें खेत की जोताई शाम के समय की जानी चाहिए और रोपाई की गई ज़मीन को पूरी रात खुला छोड़ देना चाहिए ताकि वह ओस की बूंदों से नमी सोख सके प्रत्येक जोताई के बाद सुहागा फेरना चाहिए आखिरी जोताई के समय यूरिया 35-40 किलो प्रति एकड़ में डालें इससे गेहूं की अंकुरन प्रतिशतता में वृद्धि होती है अज़ोटोबैक्टर 2.5 किलो + फास्फेटिक 2.5 किलो + ट्राइकोडरमा 2.5 किलो को 100 किलो-125 किलो रूड़ी की खाद या गाय के गले हुए गोबर में मिलाकर आखिरी जोताई के समय खिलार दें गेंहूं की बिजाई सही समय पर करनी जरूरी है बारानी क्षेत्रों के लिए बिजाई नवंबर के पहले से तीसरे सप्ताह में पूरी कर लें, जबकि सिंचित क्षेत्रों में बिजाई अक्तूबर से 15 नवंबर तक पूरी कर लें सामान्य बिजाई के लिए कतारों में 20 सैं.मी. के फासले की सलाह दी जाती है यदि बिजाई देरी से करनी हो तो 18 सैं.मी. का फासला होना चाहिए 4-5 सैं.मी. की गहराई में बिजाई करनी चाहिए बिजाई का ढंग: बीज ड्रिल, बुरकाव विधि , जीरो टिलेज़ ड्रिल, रोटावेटर बिजाई के लिए 40 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें धन्यवाद
Posted by Satwant Singh
Punjab
11-01-2020 02:23 PM
Punjab
01-12-2020 10:50 AM
ਉਸ ਨੂੰ ਤੁਸੀ Dozliv 50ml ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ ਅਤੇ Halotas bolus 1-1 ਗੋਲੀ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦੇਣੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈਣ ਲਗ ਜਾਵੇਗਾ. ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ ਲੀਵਰ ਟੋਨਿਕ ਲੰਬੇ ਸਮੇ ਤਕ ਦਿੰਦੇ ਰਹੋ ਅਤੇ ਪੇਟ ਦੇ ਕੀੜਿਆਂ ਲਈ ਗੋਲੀ ਜਰੂਰ ਦਿਓ .
Posted by Sudhir Phogat
Haryana
11-01-2020 02:18 PM
Punjab
01-11-2020 02:21 PM
बकरी पालन में लोन लेने के लिए सबसे जरूरी है ट्रेनिंग सर्टीफिकेट अपने नज़दीक के कृषि विज्ञान केंद्र से ट्रेनिंग करने के बाद ट्रेनिंग के सर्टीफिकेट पर लोन एप्लाई होता है पर लोन मिलेगा या नहीं यह बैंक मेनेजर पर निर्भर करता है क्योंकि पहली बात यह है कि बैंक देखता है कि आपके अकाउंट में कितने पैसों का लेन देन हो .... (Read More)
बकरी पालन में लोन लेने के लिए सबसे जरूरी है ट्रेनिंग सर्टीफिकेट अपने नज़दीक के कृषि विज्ञान केंद्र से ट्रेनिंग करने के बाद ट्रेनिंग के सर्टीफिकेट पर लोन एप्लाई होता है पर लोन मिलेगा या नहीं यह बैंक मेनेजर पर निर्भर करता है क्योंकि पहली बात यह है कि बैंक देखता है कि आपके अकाउंट में कितने पैसों का लेन देन हो रहा है और आपके पास ज़मीन गारंटी के तौर पर देने के लिए है या नहीं और अन्य भी कई बातें चैक करके लोन के लिए सहमत होता है बाकी कोशिश करें कि लोन के बिना अपने स्तर पर ही काम शुरू करें क्योंकि लोन की किश्त हर महीने भरनी पड़ेगी पर बकरियों से कमाई हर महीने नहीं होने होगी बाकी यदि कोशिश करके देखनी है तो अपने ट्रेनिंग सर्टीफिकेट से आप अपने जिले के पशु पालन विभाग अफसर को मिलें और उस पर प्रवानगी लेकर फिर बैंक से बात करके देखें.
Posted by Sudhir Phogat
Haryana
11-01-2020 02:16 PM
Punjab
01-11-2020 02:21 PM
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकत हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है एक बकरी के लिए लगभग 12—15 वर्ग फीट जगह छती हुई और 25—30 वर्ग फीट जगह खुली चाहिए .... (Read More)
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकत हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है एक बकरी के लिए लगभग 12—15 वर्ग फीट जगह छती हुई और 25—30 वर्ग फीट जगह खुली चाहिए बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्चे देना आम बात है बकरियां 8-10 वर्ष तक बच्चे देती हैं और अपन गिनती को तेजी से बढ़ा लेती हैं आप बारबरी, ब्लैक बंगाल, जैसी नसल पाल सकते हैं इसकी ट्रेनिेंग के लिए आप अपने कुषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करे या फिर जो बकरी पालन का व्यवसाय कर रहा कोई किसान उसका फार्म स्वंय जाकर देखकर आयें तो और भी बा​रीकियों का पता चल जायेगा, आप ब्लैक बंगाल, बीटल, सिरोही, जमुनापरी, बरबरी नस्ल रख सकते हैं. बकरी पालन में लोन लेने के लिए सबसे जरूरी है ट्रेनिंग सर्टीफिकेट अपने नज़दीक के कृषि विज्ञान केंद्र से ट्रेनिंग करने के बाद ट्रेनिंग के सर्टीफिकेट पर लोन एप्लाई होता है पर लोन मिलेगा या नहीं यह बैंक मेनेजर पर निर्भर करता है क्योंकि पहली बात यह है कि बैंक देखता है कि आपके अकाउंट में कितने पैसों का लेन देन हो रहा है और आपके पास ज़मीन गारंटी के तौर पर देने के लिए है या नहीं और अन्य भी कई बातें चैक करके लोन के लिए सहमत होता है बाकी कोशिश करें कि लोन के बिना अपने स्तर पर ही काम शुरू करें क्योंकि लोन की किश्त हर महीने भरनी पड़ेगी पर बकरियों से कमाई हर महीने नहीं होने होगी बाकी यदि कोशिश करके देखनी है तो अपने ट्रेनिंग सर्टीफिकेट से आप अपने जिले के पशु पालन विभाग अफसर को मिलें और उस पर प्रवानगी लेकर फिर बैंक से बात करके देखें.
Posted by Gurdeep Sidhu
Punjab
11-01-2020 02:16 PM
Punjab
01-11-2020 02:22 PM
Hanji Gurdeep ji tuci iss goli di varto kr skde ho, ehh tuci gaban pashu nu v de skde ho.
Posted by rupendra ajgalle
Chattisgarh
11-01-2020 02:15 PM
Punjab
01-11-2020 02:26 PM
Rupendra ji aap chicks lene ke liye Anuj Kumar Mehta 9534422915 se sampark kr skte hai.
Posted by Inderjit singh
Punjab
11-01-2020 02:08 PM
Punjab
01-11-2020 02:31 PM
inderjit ji tuci poultry farming di training lenn lai tuci apne nazdiki kvk se sampark kr skde ho, tuci uthe apna training wala farm bhar aao jddo v training howegi tan tuhanu phone krke dass dita jawe. tuci training lenn lai apne nazdiki KRISHI VIGYAN KENDRA, VILLAGE BOOH, POST OFFICE HARIKE PATTAN, TEHSIL PATTI, DISTRICT TARN TARAN (PUNJAB) – 143412, Contact: +91 9872974326 nal sampark kr skde ho.
Posted by Keshav Pathak
Chattisgarh
11-01-2020 02:08 PM
Punjab
01-11-2020 02:21 PM
केशव जी आप गेंहू में sulphur @3 -5 किलो को प्रति एकड़ के हिसाब से डाले इस से गेंहू में पीलापन ठीक हो जाएगी धन्यवाद
Posted by Amar Singh Baghel
Madhya Pradesh
11-01-2020 02:07 PM
Punjab
01-11-2020 06:35 PM
श्री मान इसे भारत की मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जा सकता है गेहूं की खेती के लिए चिकनी दोमट या दोमट बनतर, अच्छे ढांचे और पानी सोखने की सामान्य क्षमता वाली मिट्टी उचित होती है छिद्रित और पानी कम सोखने वाली मिट्टी गेहूं की खेती के लिए उपयुक्त नहीं होती सूखे हालातों, अच्छे जल निकास वाली भारी मिट्टी इसकी खेत.... (Read More)
श्री मान इसे भारत की मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जा सकता है गेहूं की खेती के लिए चिकनी दोमट या दोमट बनतर, अच्छे ढांचे और पानी सोखने की सामान्य क्षमता वाली मिट्टी उचित होती है छिद्रित और पानी कम सोखने वाली मिट्टी गेहूं की खेती के लिए उपयुक्त नहीं होती सूखे हालातों, अच्छे जल निकास वाली भारी मिट्टी इसकी खेती के लिए अनुकूल होती है भारी मिट्टी जिसका घटिया ढांचा और घटिया जल निकास हो इसकी खेती के लिए उपयुक्त नहीं होती क्योंकि गेहूं की फसल जल जमाव के प्रति संवेदनशील होती है गेहूं की फसल को अच्छे अंकुरन के लिए अच्छी तरह से तैयार, पर ठोस बीज बैड की आवश्यकता होती है पिछली फसल की कटाई के बाद खेत की अच्छे तरीके से ट्रैक्टर की मदद से जोताई की जानी चाहिए खेत को आमतौर पर ट्रैक्टर के साथ तवियां जोड़कर जोता जाता है और उसके बाद दो या तीन बार हल या सुहागे से जोता जाता है बारानी क्षेत्रों में खेत इस तरह से तैयार करना चाहिए कि वह नमी को सोख सके खेत की एक बार आयरन के हल से गहरी जोताई या सामान्य हल से दो या तीन बार जोताई करें और सुहागा फेरें खेत की जोताई शाम के समय की जानी चाहिए और रोपाई की गई ज़मीन को पूरी रात खुला छोड़ देना चाहिए ताकि वह ओस की बूंदों से नमी सोख सके प्रत्येक जोताई के बाद सुहागा फेरना चाहिए आखिरी जोताई के समय यूरिया 35-40 किलो प्रति एकड़ में डालें इससे गेहूं की अंकुरन प्रतिशतता में वृद्धि होती है अज़ोटोबैक्टर 2.5 किलो + फास्फेटिक 2.5 किलो + ट्राइकोडरमा 2.5 किलो को 100 किलो-125 किलो रूड़ी की खाद या गाय के गले हुए गोबर में मिलाकर आखिरी जोताई के समय खिलार दें गेंहूं की बिजाई सही समय पर करनी जरूरी है बारानी क्षेत्रों के लिए बिजाई नवंबर के पहले से तीसरे सप्ताह में पूरी कर लें, जबकि सिंचित क्षेत्रों में बिजाई अक्तूबर से 15 नवंबर तक पूरी कर लें सामान्य बिजाई के लिए कतारों में 20 सैं.मी. के फासले की सलाह दी जाती है यदि बिजाई देरी से करनी हो तो 18 सैं.मी. का फासला होना चाहिए 4-5 सैं.मी. की गहराई में बिजाई करनी चाहिए बिजाई का ढंग: बीज ड्रिल, बुरकाव विधि , जीरो टिलेज़ ड्रिल, रोटावेटर बिजाई के लिए 40 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें
Posted by Sudhir Phogat
Haryana
11-01-2020 02:06 PM
Punjab
01-11-2020 02:32 PM
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकत हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है एक बकरी के लिए लगभग 12—15 वर्ग फीट जगह छती हुई और 25—30 वर्ग फीट जगह खुली चाहिए .... (Read More)
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकत हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है एक बकरी के लिए लगभग 12—15 वर्ग फीट जगह छती हुई और 25—30 वर्ग फीट जगह खुली चाहिए बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्चे देना आम बात है बकरियां 8-10 वर्ष तक बच्चे देती हैं और अपन गिनती को तेजी से बढ़ा लेती हैं आप बारबरी, ब्लैक बंगाल, जैसी नसल पाल सकते हैं इसकी ट्रेनिेंग के लिए आप अपने कुषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करे या फिर जो बकरी पालन का व्यवसाय कर रहा कोई किसान उसका फार्म स्वंय जाकर देखकर आयें तो और भी बा​रीकियों का पता चल जायेगा, आप ब्लैक बंगाल, बीटल, सिरोही, जमुनापरी, बरबरी नस्ल रख सकते हैं.
Posted by Amar Singh Baghel
Madhya Pradesh
11-01-2020 02:04 PM
Punjab
01-11-2020 03:59 PM
इसे भारत की मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जा सकता है गेहूं की खेती के लिए चिकनी दोमट या दोमट बनतर, अच्छे ढांचे और पानी सोखने की सामान्य क्षमता वाली मिट्टी उचित होती है छिद्रित और पानी कम सोखने वाली मिट्टी गेहूं की खेती के लिए उपयुक्त नहीं होती सूखे हालातों, अच्छे जल निकास वाली भारी मिट्टी इसकी खेती के लिए अ.... (Read More)
इसे भारत की मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जा सकता है गेहूं की खेती के लिए चिकनी दोमट या दोमट बनतर, अच्छे ढांचे और पानी सोखने की सामान्य क्षमता वाली मिट्टी उचित होती है छिद्रित और पानी कम सोखने वाली मिट्टी गेहूं की खेती के लिए उपयुक्त नहीं होती सूखे हालातों, अच्छे जल निकास वाली भारी मिट्टी इसकी खेती के लिए अनुकूल होती है भारी मिट्टी जिसका घटिया ढांचा और घटिया जल निकास हो इसकी खेती के लिए उपयुक्त नहीं होती क्योंकि गेहूं की फसल जल जमाव के प्रति संवेदनशील होती है गेहूं की फसल को अच्छे अंकुरन के लिए अच्छी तरह से तैयार, पर ठोस बीज बैड की आवश्यकता होती है पिछली फसल की कटाई के बाद खेत की अच्छे तरीके से ट्रैक्टर की मदद से जोताई की जानी चाहिए खेत को आमतौर पर ट्रैक्टर के साथ तवियां जोड़कर जोता जाता है और उसके बाद दो या तीन बार हल या सुहागे से जोता जाता है बारानी क्षेत्रों में खेत इस तरह से तैयार करना चाहिए कि वह नमी को सोख सके खेत की एक बार आयरन के हल से गहरी जोताई या सामान्य हल से दो या तीन बार जोताई करें और सुहागा फेरें खेत की जोताई शाम के समय की जानी चाहिए और रोपाई की गई ज़मीन को पूरी रात खुला छोड़ देना चाहिए ताकि वह ओस की बूंदों से नमी सोख सके प्रत्येक जोताई के बाद सुहागा फेरना चाहिए आखिरी जोताई के समय यूरिया 35-40 किलो प्रति एकड़ में डालें इससे गेहूं की अंकुरन प्रतिशतता में वृद्धि होती है अज़ोटोबैक्टर 2.5 किलो + फास्फेटिक 2.5 किलो + ट्राइकोडरमा 2.5 किलो को 100 किलो-125 किलो रूड़ी की खाद या गाय के गले हुए गोबर में मिलाकर आखिरी जोताई के समय खिलार दें गेंहूं की बिजाई सही समय पर करनी जरूरी है बारानी क्षेत्रों के लिए बिजाई नवंबर के पहले से तीसरे सप्ताह में पूरी कर लें, जबकि सिंचित क्षेत्रों में बिजाई अक्तूबर से 15 नवंबर तक पूरी कर लें सामान्य बिजाई के लिए कतारों में 20 सैं.मी. के फासले की सलाह दी जाती है यदि बिजाई देरी से करनी हो तो 18 सैं.मी. का फासला होना चाहिए 4-5 सैं.मी. की गहराई में बिजाई करनी चाहिए बिजाई का ढंग: बीज ड्रिल, बुरकाव विधि , जीरो टिलेज़ ड्रिल, रोटावेटर बिजाई के लिए 40 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें धन्यवाद
Posted by kuber
Madhya Pradesh
11-01-2020 02:04 PM
Punjab
01-11-2020 02:26 PM
यह वर्षा और बसंत के मौसम में उगाई जाती है खरीफ के मौसम में, इसकी बिजाई जून-जुलाई के महीने और बसंत ऋतु में फरवरी-मार्च के महीने में की जाती है
Posted by Avinash kumar
Uttar Pradesh
11-01-2020 01:53 PM
Punjab
01-11-2020 02:18 PM
Avinash ji aap genhu men gulli dande ki roktham ke liye TOPIK@160GM ya AXIAL@400ML ya PUMA POWER@400ML ya LEADER@13GM ya SAFAL@13GM ya UPL SHAGUN 21-11@200gm ko prati acre ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by ਹਰਦੀਪ ਸਿੰਘ ਸੰਘਾ
Punjab
11-01-2020 01:49 PM
Punjab
01-12-2020 07:53 AM
ਮੋਤੀਆਂ ਦੀ ਖੇਤੀ ਇਕ ਲਾਭਦਾਇਕ ਕਿੱਤਾ ਹੈ ਮੋਤੀਆਂ ਦੀ ਖੇਤੀ ਉਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਹੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜਿਵੇ ਅਸਲ ਰੂਪ ਵਿਚ ਮੋਤੀ ਤਿਆਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸਦੀ ਖੇਤੀ ਤੁਸੀ ਕਿਸੇ ਤਲਾਬ ਵਿਚ ਜਾ ਫਿਰ 100 ਵਰਗ ਫੁੱਟ ਦਾ ਤਲਾਬ ਬਣਾ ਕੇ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਤਲਾਬ ਬਣਾਉਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਸਿਪੀ ਨੂੰ ਖਰੀਦਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜੋ ਦਿੱਲੀ ਤੋ ਮਿਲ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਕਵਾਲਿਟੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਇਕ ਸਿਪੀ ਕਰੀਬ 1.5 ਤੋਂ 5 ਰੁਪਏ ਦੇ ਵਿਚ ਮਿਲਦੀ ਹੈ .... (Read More)
ਮੋਤੀਆਂ ਦੀ ਖੇਤੀ ਇਕ ਲਾਭਦਾਇਕ ਕਿੱਤਾ ਹੈ ਮੋਤੀਆਂ ਦੀ ਖੇਤੀ ਉਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਹੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜਿਵੇ ਅਸਲ ਰੂਪ ਵਿਚ ਮੋਤੀ ਤਿਆਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸਦੀ ਖੇਤੀ ਤੁਸੀ ਕਿਸੇ ਤਲਾਬ ਵਿਚ ਜਾ ਫਿਰ 100 ਵਰਗ ਫੁੱਟ ਦਾ ਤਲਾਬ ਬਣਾ ਕੇ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਤਲਾਬ ਬਣਾਉਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਸਿਪੀ ਨੂੰ ਖਰੀਦਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜੋ ਦਿੱਲੀ ਤੋ ਮਿਲ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਕਵਾਲਿਟੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਇਕ ਸਿਪੀ ਕਰੀਬ 1.5 ਤੋਂ 5 ਰੁਪਏ ਦੇ ਵਿਚ ਮਿਲਦੀ ਹੈ ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਬੰਦ ਸੀਪੀਆਈ ਵਿਚ ਖਿੱਚ ਲਾ ਕੇ ਉਹਨਾਂ ਵਿੱਚ ਮੋਤੀਆਂ ਦਾ ਬੀਜ ਪਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਫਿਰ ਇਹਨਾਂ ਸਿਪੀਆ ਨੂੰ ਬੰਦ ਕਰ ਕੇ ਜਾਲੀ ਦੇ ਸਹਾਰੇ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਸੁੱਟ ਦਿੱਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਫਿਰ ਕੁੱਜ ਮਹੀਨਿਆਂ ਬਾਅਦ ਇਸ ਵਿਚੋਂ ਮੋਤੀ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਮੋਤੀ ਬਣਨ ਵਿਚ 18 ਮਹੀਨਿਆਂ ਦਾ ਸਮਾਂ ਲਗਦਾ ਹੈ ਡਿਜ਼ਾਈਨਰ ਮੋਤੀ ਤਿਆਰ ਕਰਨ ਲਈ ਉਹਨਾਂ ਲਈ ਖਾਸ ਤੌਰ ਤੇ ਸਾਂਚੇ ਬਣਾਏ ਹੁੰਦੇ ਹਨ, ਜਿਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਗਨਪਤੀ,ਬੁੱਧ,ਹੋਲੀ ਕਰਾਸ ਸਾਈਨ ਵਰਗੇ ਡਿਜ਼ਾਈਨਰ ਮੋਤੀ ਤਿਆਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਪਰ ਮੋਤੀਆ ਦੀ ਮਾਰਕੀਟਿੰਗ ਆਪਣੇ ਪੱਧਰ ਤੇ ਹੀ ਕਰਨੀ ਪੈਂਦੀ ਹੈ ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਮਨੀਸ਼ ਜੀ ਮੋਤੀਆ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਕਰਵਾਉਦੇ ਹਨ ਉਹਨਾਂ ਨਾਲ ਇਸ ਨੰਬਰ ਤੇ ਗੱਲ ਕਰੋ ਉਹ ਤੁਹਾਨੂੰ ਪੂਰਾ ਗਾਈਡ ਕਰ ਦੇਣਗੇ ਪੰਜਾਬ ਵਿਚ ਮੋਤੀਆਂ ਦੀ ਖੇਤੀ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈਣ ਲਈ ਤੁਸੀਂ Manish Vasudev 9417652857 ਜੀ ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੀ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by ਜਗਜੀਵਨ ਸਿੰਘ
Punjab
11-01-2020 01:48 PM
Punjab
01-11-2020 03:57 PM
ਆਮ ਤੌਰ ਤੇ ਕਣਕ ਦੇ ਵਿੱਚ ਗੁੱਲੀ ਡੰਡਾ 35-40 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਹੀ ਬਾਹਰ ਨਿਕਲਦਾ ਹੈ ਜਦੋਂ ਤੁਸੀਂ ਪਹਿਲਾਂ ਪਾਣੀ ਲਗਾ ਦਿੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਇਹ ਗੁੱਲੀ ਡੰਡਾ ਕਣਕ ਦੇ ਨਾਲ ਵਧਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਸਮੇਂ ਕਣਕ 40 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਆਸ-ਪਾਸ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਸਮੇਂ ਤੁਸੀਂ TOPIK@160GM ਜਾਂ AXIAL@400ML ਜਾਂ PUMA POWER@400ML ਜਾਂ LEADER@13GM ਜਾਂ SAFAL@13GM ਜਾਂ UPL ਦੀ SHAGUN 21-11@200gm ਨੂੰ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਤੇ ਸਪਰੇਅ .... (Read More)
ਆਮ ਤੌਰ ਤੇ ਕਣਕ ਦੇ ਵਿੱਚ ਗੁੱਲੀ ਡੰਡਾ 35-40 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਹੀ ਬਾਹਰ ਨਿਕਲਦਾ ਹੈ ਜਦੋਂ ਤੁਸੀਂ ਪਹਿਲਾਂ ਪਾਣੀ ਲਗਾ ਦਿੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਇਹ ਗੁੱਲੀ ਡੰਡਾ ਕਣਕ ਦੇ ਨਾਲ ਵਧਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਸਮੇਂ ਕਣਕ 40 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਆਸ-ਪਾਸ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਸਮੇਂ ਤੁਸੀਂ TOPIK@160GM ਜਾਂ AXIAL@400ML ਜਾਂ PUMA POWER@400ML ਜਾਂ LEADER@13GM ਜਾਂ SAFAL@13GM ਜਾਂ UPL ਦੀ SHAGUN 21-11@200gm ਨੂੰ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਤੇ ਸਪਰੇਅ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਹਨਾਂ ਦੇ ਵਿੱਚੋਂ ਕੋਈ ਇੱਕ ਸਪਰੇਅ ਵਰਤ ਸਕਦੋ ਹੋ Topik ਦੀ ਥਾਂ ਇਹ ਸਪਰੇਆਂ ਵਰਤ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੇਕਰ ਬਾਥੂ ਹੈ ਤਾਂ ਉਸ ਦੇ ਲਈ algrip@10gm ਜਾਂ total@16gm ਨੂੰ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਤੇ ਸਪਰੇਅ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ
Posted by inderpal
Punjab
11-01-2020 01:46 PM
Punjab
01-11-2020 02:34 PM
Inderpal ji tuci iss nu nazdiki doctor ton gaban check krwao ji jekar gaban hai tan tuci iss nu Duraprogen injection lgwaa deo..
Posted by Mantu munda
Jharkhand
11-01-2020 01:45 PM
Punjab
01-11-2020 02:35 PM
आप देसी बकरी को बीटल नसल के बकरे के साथ क्रॉस करवा सकते है जब वो हीट में आए तब आप बीटल नसल के बकरे से क्रॉस करवा सकते है
Posted by Jitendra
Madhya Pradesh
11-01-2020 01:38 PM
Punjab
01-11-2020 03:13 PM
जीतेन्द्र जी मक्का में कीट की रोकथाम के लिए आप quinalphos @400 ml को प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by nijam
Madhya Pradesh
11-01-2020 01:25 PM
Punjab
01-12-2020 11:02 AM
गुलाब के लिए बिजाई का सही समय मध्य अक्तूबर है रोपाई के बाद पौधे को छांव में रखें और अगर बहुत ज्यादा धुप हो, तो पौधे पर पानी का छिड़काव करें दोपहर के अंत वाले समय बोया गया गुलाब बढ़िया उगता है बैड पर 30 सैं.मी. व्यास और 30 सैं.मी. गहरे गड्ढे खोद कर 75 सैं.मी. के फासले पर पौधों की बिजाई करें दो पौधों के बीच में फासला गुलाब क.... (Read More)
गुलाब के लिए बिजाई का सही समय मध्य अक्तूबर है रोपाई के बाद पौधे को छांव में रखें और अगर बहुत ज्यादा धुप हो, तो पौधे पर पानी का छिड़काव करें दोपहर के अंत वाले समय बोया गया गुलाब बढ़िया उगता है बैड पर 30 सैं.मी. व्यास और 30 सैं.मी. गहरे गड्ढे खोद कर 75 सैं.मी. के फासले पर पौधों की बिजाई करें दो पौधों के बीच में फासला गुलाब की किस्म पर निर्भर करता है गेंदे की खेती करना चाहते है से मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है पर यह अच्छे जल निकास वाली उपजाऊ मिट्टी में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है मिट्टी अच्छे निकास वाली होनी चाहिए क्योंकि यह फसल जल जमाव वाली मिट्टी में स्थिर नहीं रह सकती मिट्टी की pH 6.5 से 7.5 होनी चाहिए तेजाबी और खारी मिट्टी इसकी खेती के लिए अनुकूल नहीं है फ्रैंच गेंदे की किस्म हल्की मिट्टी में अच्छी वृद्धि करती है जबकि अफ्रीकी गेंदे की किस्म उच्च जैविक खाद वाली मिट्टी में अच्छी वृद्धि करती है प्रसिद्ध किस्में :- African Marigold: इस किस्म की फसल 90 सैं.मी. तक लम्बी होती है इसके फूल बड़े आकार के और लैमन, पीले, सुनहरे, संतरी और गहरे पीले रंग के होते हैं यह लम्बे समय की किस्म है इसकी अन्य किस्में जैसे Giant Double African Orange, Crown of Gold, Giant Double African Yellow, Chrysanthemum Charm, Golden Age, Cracker Jack आदि हैं French Marigold: यह छोटे कद की जल्दी पकने वाली किस्में हैं इसके फूल छोटे आकार के और पीले, संतरी, सुनहरे पीले, लाल जंग और महोगनी रंग के होते हैं इसकी अन्य किस्में जैसे Rusty Red, Butter Scotch, Red Borcade, Star of India, Lemon drop आदि हैं Pusa Basanti Gainda: यह लम्बे समय की किस्म है इसका पौधा 58.80 सैं.मी. लम्बा और गहरे हरे रंग के पत्ते होते हैं इसके फूल सल्फर पीले, दोहरे और कारनेशन किस्म के होते हैं Pusa Narangi Gainda: फूल निकलने के लिए 125-136 दिनों की आवश्यकता होती है इसका पौधा लम्बा और कद में 73.30 सैं.मी. का होता है और पत्ते गहरे हरे रंग के होते हैं इसके फूल संतरी रंग के और कारनेशन किस्म के होते हैं फूल घने और दोहरी परत वाले होते हैं इसके ताजे फूलों की पैदावार 140 क्विंटल प्रति एकड़ होती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ाने के लिए आखिरी जोताई के समय 250 क्विंटल रूड़ी की खाद और अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर मिट्टी में मिलायें गेंदे की बिजाई एक वर्ष में कभी भी की जा सकती है बारिश के मौसम में इसकी बिजाई मध्य जून से मध्य जुलाई में करें सर्दियों में इसकी बिजाई मध्य सितंबर से मध्य अक्तूबर में पूरी कर लें नर्सरी बैड 3x1 मीटर आकार के तैयार करें गाय का गला हुआ गोबर मिलायें बैडों में नमी बनाए रखने के लिए पानी दें सूखे फूलों का चूरा करें और उनका कतार या बैड पर छिड़काव करें जब पौधों का कद 10-15 सैं.मी. हो जाये, तब वे रोपाई के लिए तैयार होते हैं फैंच किस्म को 35x35 सैं.मी. और अफ्रीकी किस्म को 45x45 सैं.मी. के फासले पर रोपाई करें नर्सरी बैड पर बीजों का छिड़काव करें बिजाई के लिए पनीरी ढंग का प्रयोग किया जाता है एक एकड़ खेत के लिए 600 से 800 ग्राम बीजों की आवश्यकता होती है जब फसल 30-45 दिन की हो जाए, तब पौधे के सिरे से उसे काट दें इससे पौधे को झाड़ीदार और घना होने में मदद मिलती है, इससे फूलों की गुणवत्ता और अच्छा आकार भी प्राप्त होता है बिजाई से पहले बीजों को एजोसपीरियम 200 ग्राम को 50 मि.ली. धान के चूरे में मिलाकर उपचार करें शुरूआती खुराक के तौर पर अच्छी वृद्धि के लिए नाइट्रोजन 32 किलो (यूरिया 70 किलो), फासफोरस 16 किलो (एस एस पी 100 किलो), पोटाश 32 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 53 किलो) प्रति एकड़ में डालें मिट्टी की किस्म के अनुसार खाद की खुराक बदल दें सही खुराक देने के लिए मिट्टी की जांच करवायें और उसके आधार पर खुराक दें नदीनों की संख्या के आधार पर गोडाई करें खेत में रोपाई के बाद तुरंत सिंचाई करें कली बनने से लेकर कटाई तक की अवस्था सिंचाई के लिए बहुत महत्तवपूर्ण होती है अप्रैल से जून के महीने में 4-5 दिनों के अंतराल पर लगातार सिंचाई करना आवश्यक होता है किस्म के आधार पर गेंदा 2 से 2.5 महीने में कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं फ्रैंच गेंदे की किस्म 1.5 महीने में कटाई के लिए तैयार हो जाती है जबकि अफ्रीकी गेंदे की किस्म दो महीने में तैयार हो जाती है जब गेंदे का पूरा आकार विकसित हो जाये तब उसे तोड़ लें कटाई सुबह के समय और शाम के समय करें फूलों की तुड़ाई से पहले खेत को सिंचित करना चाहिए इससे फूलों की गुणवत्ता लंबे समय तक बनी रहती है इसे आप अपनी नजदीकी फूल मंडी में बेच कर इसे अपनी आय का साधन बना सकते है इसका बीज आप कृषि यूनिवर्सिटी से ले सकते है या नजदीकी नर्सरी से ले सकते है जा फिर गेंदे और गुलाब के बीज लेने के लिए आप Dr N.K Saxena 9811315738 से सम्पर्क करे धन्यवाद
Posted by kailash lodhi
Madhya Pradesh
11-01-2020 01:23 PM
Punjab
01-11-2020 03:05 PM
जीरा भारत का महत्तवपूर्ण मसाला है अच्छे निकास वाली और उच्च कार्बनिक पदार्थों वाली मिट्टी जीरे की खेती के लिए उपयुक्त होती है जीरे की खेती के लिए उस ज़मीन का चयन करें जहां 3-4 वर्ष जीरे की खेती ना की गई हो प्रसिद्ध किस्में:-RZ 19,RZ 209,Gujarat Jeera 2,RZ 223,GC 4 जीरे की खेती के लिए अच्छी तरह से जोती गई और समतल ज़मीन की आवश्यकता होती है म.... (Read More)
जीरा भारत का महत्तवपूर्ण मसाला है अच्छे निकास वाली और उच्च कार्बनिक पदार्थों वाली मिट्टी जीरे की खेती के लिए उपयुक्त होती है जीरे की खेती के लिए उस ज़मीन का चयन करें जहां 3-4 वर्ष जीरे की खेती ना की गई हो प्रसिद्ध किस्में:-RZ 19,RZ 209,Gujarat Jeera 2,RZ 223,GC 4 जीरे की खेती के लिए अच्छी तरह से जोती गई और समतल ज़मीन की आवश्यकता होती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें और मिट्टी को समतल करने के लिए सुहागा फेरें जीरे की बिजाई के लिए 15 से 30 नवंबर सही समय होता है कतारों में बिजाई के लिए दो पंक्तियों में 30 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीजों को 10 सैं.मी. की गहराई में बोयें बिजाई के लिए बुरकाव ढंग या कतार में बिजाई ढंग का प्रयोग करें एक एकड़ खेत में बिजाई के लिए 4-6 किलो बीज पर्याप्त होते हैं बिजाई से पहले कार्बेनडाज़िम 2 ग्राम से प्रति किलो बीजों का उपचार करें यह बीजों का फंगस संक्रमक से बचाव करेगा खादों की सही मात्रा के लिए और अतिरिक्त प्रयोग ना करने के लिए मिट्टी की जांच सबसे महत्तवपूर्ण कदम है फसल की अच्छी वृद्धि और अच्छी उपज के लिए नाइट्रोजन 15 किलो (यूरिया 32 किलो) फासफोरस 11 किलो (एस एस पी 66 किलो) और पोटाश 7 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 12 किलो) को गाय के गले हुए गोबर 2 टन के साथ प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन की आधी मात्रा बिजाई के 35 दिनों के बाद डालें बिजाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करें दूसरी सिंचाई बिजाई के 10 दिनों के बाद अंकुरण के समय करें उसके बाद तीन सिंचाइयां पर्याप्त होती हैं बाकी की सिंचाइयां बिजाई के 35वें, 60वें और 85वें दिन बाद करें एक बार फसल पक जाये तब सिंचाई ना करें बीज भरने की अवस्था में सिंचाई पत्तों के ऊपरी धब्बा रोग, चेपे और झुलस रोग के हमले को बढ़ाती है जीरे की फसल में नदीन गंभीर समस्या होते हैं नदीनों की जांच के लिए लगातार गोडाई और निराई करें पहली गोडाई बिजाई के 30-35 दिनों के बाद करें जब जीरे की फसल 5 सैं.मी. कद की हो जाये दूसरी गोडाई पहली गोडाई के 20-25 दिन बाद करें और खेत को नदीन रहित रखें रासायनिक रोकथाम के लिए बिजाई के 1-2 दिन बाद पैंडीमैथालीन 1 लीटर को 200 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें जीरे की फसल 100-115 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है कटाई दरांती की सहायता से की जाती है फसल की कटाई के बाद पौधों को फर्श पर खिलार दें और धूप में सुखाने के लिए छोड़ दें धूप में अच्छे से सुखाने के बाद पौधों से दाने अलग कर लें
Posted by nijam
Madhya Pradesh
11-01-2020 01:23 PM
Punjab
01-11-2020 03:03 PM
गुलाब के लिए बिजाई का सही समय मध्य अक्तूबर है रोपाई के बाद पौधे को छांव में रखें और अगर बहुत ज्यादा धुप हो, तो पौधे पर पानी का छिड़काव करें दोपहर के अंत वाले समय बोया गया गुलाब बढ़िया उगता है बैड पर 30 सैं.मी. व्यास और 30 सैं.मी. गहरे गड्ढे खोद कर 75 सैं.मी. के फासले पर पौधों की बिजाई करें दो पौधों के बीच में फासला गुलाब क.... (Read More)
गुलाब के लिए बिजाई का सही समय मध्य अक्तूबर है रोपाई के बाद पौधे को छांव में रखें और अगर बहुत ज्यादा धुप हो, तो पौधे पर पानी का छिड़काव करें दोपहर के अंत वाले समय बोया गया गुलाब बढ़िया उगता है बैड पर 30 सैं.मी. व्यास और 30 सैं.मी. गहरे गड्ढे खोद कर 75 सैं.मी. के फासले पर पौधों की बिजाई करें दो पौधों के बीच में फासला गुलाब की किस्म पर निर्भर करता है गेंदे की खेती करना चाहते है से मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है पर यह अच्छे जल निकास वाली उपजाऊ मिट्टी में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है मिट्टी अच्छे निकास वाली होनी चाहिए क्योंकि यह फसल जल जमाव वाली मिट्टी में स्थिर नहीं रह सकती मिट्टी की pH 6.5 से 7.5 होनी चाहिए तेजाबी और खारी मिट्टी इसकी खेती के लिए अनुकूल नहीं है फ्रैंच गेंदे की किस्म हल्की मिट्टी में अच्छी वृद्धि करती है जबकि अफ्रीकी गेंदे की किस्म उच्च जैविक खाद वाली मिट्टी में अच्छी वृद्धि करती है प्रसिद्ध किस्में :- African Marigold: इस किस्म की फसल 90 सैं.मी. तक लम्बी होती है इसके फूल बड़े आकार के और लैमन, पीले, सुनहरे, संतरी और गहरे पीले रंग के होते हैं यह लम्बे समय की किस्म है इसकी अन्य किस्में जैसे Giant Double African Orange, Crown of Gold, Giant Double African Yellow, Chrysanthemum Charm, Golden Age, Cracker Jack आदि हैं French Marigold: यह छोटे कद की जल्दी पकने वाली किस्में हैं इसके फूल छोटे आकार के और पीले, संतरी, सुनहरे पीले, लाल जंग और महोगनी रंग के होते हैं इसकी अन्य किस्में जैसे Rusty Red, Butter Scotch, Red Borcade, Star of India, Lemon drop आदि हैं Pusa Basanti Gainda: यह लम्बे समय की किस्म है इसका पौधा 58.80 सैं.मी. लम्बा और गहरे हरे रंग के पत्ते होते हैं इसके फूल सल्फर पीले, दोहरे और कारनेशन किस्म के होते हैं Pusa Narangi Gainda: फूल निकलने के लिए 125-136 दिनों की आवश्यकता होती है इसका पौधा लम्बा और कद में 73.30 सैं.मी. का होता है और पत्ते गहरे हरे रंग के होते हैं इसके फूल संतरी रंग के और कारनेशन किस्म के होते हैं फूल घने और दोहरी परत वाले होते हैं इसके ताजे फूलों की पैदावार 140 क्विंटल प्रति एकड़ होती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ाने के लिए आखिरी जोताई के समय 250 क्विंटल रूड़ी की खाद और अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर मिट्टी में मिलायें गेंदे की बिजाई एक वर्ष में कभी भी की जा सकती है बारिश के मौसम में इसकी बिजाई मध्य जून से मध्य जुलाई में करें सर्दियों में इसकी बिजाई मध्य सितंबर से मध्य अक्तूबर में पूरी कर लें नर्सरी बैड 3x1 मीटर आकार के तैयार करें गाय का गला हुआ गोबर मिलायें बैडों में नमी बनाए रखने के लिए पानी दें सूखे फूलों का चूरा करें और उनका कतार या बैड पर छिड़काव करें जब पौधों का कद 10-15 सैं.मी. हो जाये, तब वे रोपाई के लिए तैयार होते हैं फैंच किस्म को 35x35 सैं.मी. और अफ्रीकी किस्म को 45x45 सैं.मी. के फासले पर रोपाई करें नर्सरी बैड पर बीजों का छिड़काव करें बिजाई के लिए पनीरी ढंग का प्रयोग किया जाता है एक एकड़ खेत के लिए 600 से 800 ग्राम बीजों की आवश्यकता होती है जब फसल 30-45 दिन की हो जाए, तब पौधे के सिरे से उसे काट दें इससे पौधे को झाड़ीदार और घना होने में मदद मिलती है, इससे फूलों की गुणवत्ता और अच्छा आकार भी प्राप्त होता है बिजाई से पहले बीजों को एजोसपीरियम 200 ग्राम को 50 मि.ली. धान के चूरे में मिलाकर उपचार करें शुरूआती खुराक के तौर पर अच्छी वृद्धि के लिए नाइट्रोजन 32 किलो (यूरिया 70 किलो), फासफोरस 16 किलो (एस एस पी 100 किलो), पोटाश 32 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 53 किलो) प्रति एकड़ में डालें मिट्टी की किस्म के अनुसार खाद की खुराक बदल दें सही खुराक देने के लिए मिट्टी की जांच करवायें और उसके आधार पर खुराक दें नदीनों की संख्या के आधार पर गोडाई करें खेत में रोपाई के बाद तुरंत सिंचाई करें कली बनने से लेकर कटाई तक की अवस्था सिंचाई के लिए बहुत महत्तवपूर्ण होती है अप्रैल से जून के महीने में 4-5 दिनों के अंतराल पर लगातार सिंचाई करना आवश्यक होता है किस्म के आधार पर गेंदा 2 से 2.5 महीने में कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं फ्रैंच गेंदे की किस्म 1.5 महीने में कटाई के लिए तैयार हो जाती है जबकि अफ्रीकी गेंदे की किस्म दो महीने में तैयार हो जाती है जब गेंदे का पूरा आकार विकसित हो जाये तब उसे तोड़ लें कटाई सुबह के समय और शाम के समय करें फूलों की तुड़ाई से पहले खेत को सिंचित करना चाहिए इससे फूलों की गुणवत्ता लंबे समय तक बनी रहती है इसे आप अपनी नजदीकी फूल मंडी में बेच कर इसे अपनी आय का साधन बना सकते है इसका बीज आप कृषि यूनिवर्सिटी से ले सकते है या नजदीकी नर्सरी से ले सकते है जा फिर गेंदे और गुलाब के बीज लेने के लिए आप Dr N.K Saxena 9811315738 से सम्पर्क करे धन्यवाद
Posted by राजकूमार पाटीदार
Madhya Pradesh
11-01-2020 01:22 PM
Punjab
01-17-2020 05:41 PM
Raj Kumar ji Soyabean ka rate 3500 - 4120 tak chal raha hai, Thankyou.
Posted by Harpreet Singh
Punjab
11-01-2020 01:16 PM
Punjab
01-11-2020 02:36 PM
यदि आप पर बड़े स्तर पर काम करना चाहते है तो venkeys की BV300 नसल को रख सकते है ये सबसे ज्यादा अंडे देती है
Posted by Hariom Kumawat
Rajasthan
11-01-2020 01:14 PM
Punjab
01-11-2020 03:02 PM
Hariom ji aap iske uper carbendazim@4 gram ko prati litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by Harpreet Singh Grewal
Punjab
11-01-2020 01:14 PM
Punjab
01-11-2020 02:28 PM
ਸਤਿ ਸ੍ਰੀ ਅਕਾਲ ਜੀ, ਹਾਜੀ ਦੱਸੋ ਤੁਸੀ ਕਿਸ ਬਾਰੇ ਜਾਣਕਾਰੀ ਲੈਣਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਜੀ
Posted by Gopal Vishvakarma
Uttar Pradesh
11-01-2020 01:13 PM
Punjab
01-11-2020 02:56 PM
पुदीने को मिट्टी की कई किस्मों जैसे दरमियाने से गहरी उपजाऊ मिट्टी, जिसमें पानी को सोखने की क्षमता ज्यादा हो, में उगाया जाता है इसको जल-जमाव वाली मिट्टी में भी उगाया जा सकता है उच्च नमी वाली मिट्टी में यह अच्छे परिणाम देती है इस फसल के लिए मिट्टी का pH 6-7.5 होना चाहिए पुदीने की बिजाई के लिए सुविधाजनक आकार के बैड त.... (Read More)
पुदीने को मिट्टी की कई किस्मों जैसे दरमियाने से गहरी उपजाऊ मिट्टी, जिसमें पानी को सोखने की क्षमता ज्यादा हो, में उगाया जाता है इसको जल-जमाव वाली मिट्टी में भी उगाया जा सकता है उच्च नमी वाली मिट्टी में यह अच्छे परिणाम देती है इस फसल के लिए मिट्टी का pH 6-7.5 होना चाहिए पुदीने की बिजाई के लिए सुविधाजनक आकार के बैड तैयार करें खेत की तैयारी के समय खेत की अच्छी तरह जोताई करें जैविक खाद जैसे रूड़ी की खाद 100-120 क्विंटल प्रति एकड़ रूड़ी की खाद डालें रूड़ी की खाद के बाद हरी खाद डालें इसकी बिजाई के लिए दिसंबर-जनवरी का समय अनुकूल होता है पौधे के भागों की बिजाई 40 सैं.मी. के फासले पर और पंक्तियों के बीच का फासला 60 सैं.मी होना चाहिए बीज को 2-3 सैं.मी. की गहराई में बोयें पौधे के जड़ वाले भाग को मुख्य खेत में बोया जाता है प्रजनन क्रिया जड़ के भाग या टहनियों द्वारा की जाती है अच्छी पैदावार के लिए 160 किलो भागों को प्रति एकड़ में प्रयोग करें जड़ें पिछले पौधों से दिसंबर और जनवरी के महीने में प्राप्त की जाती है हाथों से लगातार गोडाई करें और पहली कटाई के बाद खेत को नदीन मुक्त करें नदीनों की रोकथाम के लिए सिनबार 400 ग्राम प्रति एकड़ में प्रयोग करें नदीनों को नियंत्रित करने के लिए जैविक मल्च के साथ ऑक्सीफलोरफिन 200 ग्राम या पैंडीमैथालीन बूटीनाशक 800 मि.ली को प्रति एकड़ में प्रयोग करें यदि नदीन ज्यादा हो तो डालापोन 1.6 किलोग्राम प्रति एकड़ या ग्रामाक्ज़ोन 1 लीटर और डयूरॉन 800 ग्राम या टेरबेसिल 800 ग्राम की प्रति एकड़ में स्प्रे करें गर्मियों में मॉनसून से पहले जलवायु और मिट्टी के आधार पर 6-9 सिंचाइयां जरूर की जानी चाहिए मॉनसून के बाद 3 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है पहली सिंचाई सितंबर महीने में, दूसरी अक्तूबर में और तीसरी नवंबर महीने में की जानी चाहिए सर्दियों में ज्यादा सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन यदि सर्दियों में बारिश ना पड़े तो एक सिंचाई जरूर देनी चाहिए पौधे 100-120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं जब निचले पत्ते पीले रंग के होने शुरू हो जायें, तब कटाई करें कटाई दराती से और बूटियों को मिट्टी की सतह के 2-3 सैं.मी. ऊपर से निकालें अगली कटाई पहली कटाई के बाद 80 दिनों के अंतराल पर करें ताजी पत्तियों को उत्पाद बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है
Posted by Rajeshwar Prasad
Uttar Pradesh
11-01-2020 01:12 PM
Punjab
01-11-2020 03:00 PM
The bamboo plantation grows well in hot to warm temperate climatic conditions. But it must be remembered that it doesn’t require temperature below 15 degree Celsius in the summers. Since the bamboo has thin roots as well as ample growth, you must make provisions to protect it from strong winds. Also, an area that recieve cold winds are just not apt for bamboo cultivation as the winds kills the tips of bamboo leaves.Bamboos can be grown and cultivated on a wide variety of soils except for rock-strewn soils. Bamboo plantation also requires well drained sandy soil to clay soil that should have a ph range of 4.5 to 6.0. If we talk about India, then the Barack Valley region is best suited for bamboo cultivation due to best soil and perfect climate conditions.Normally, the bamboos are propagat.... (Read More)
The bamboo plantation grows well in hot to warm temperate climatic conditions. But it must be remembered that it doesn’t require temperature below 15 degree Celsius in the summers. Since the bamboo has thin roots as well as ample growth, you must make provisions to protect it from strong winds. Also, an area that recieve cold winds are just not apt for bamboo cultivation as the winds kills the tips of bamboo leaves.Bamboos can be grown and cultivated on a wide variety of soils except for rock-strewn soils. Bamboo plantation also requires well drained sandy soil to clay soil that should have a ph range of 4.5 to 6.0. If we talk about India, then the Barack Valley region is best suited for bamboo cultivation due to best soil and perfect climate conditions.Normally, the bamboos are propagated through the culms cuttings or rhizomes. But they can also be propagated through the seeds, which are very rarely available. Bamboo seedlings are basically raised on nursery beds and for a year or so they are allowed to grow on poly pots. Later the seedling is transferred into the main field. In the rhizome planting method, a little care is needed. Here, culms of 1 year along with roots should be dug and cut into 1 meter size and be planted in the rainy season. For high quality and best yield, fertilizers are used. Manure and fertilization are important when the seedling is transplanted in the main field. As the bamboo plants are heavy feeders, even the richest soil will get washed-out after few years, if fertilizers are not applied on them. But it is always suggested to apply fertilizer after harvesting and previous to irrigating the plants. Potassium and Nitrogen are vital components of the fertilizer due to which the bamboo trees respond and grow well. Also you must apply green manures, organic compost, wood ash and chemical fertigation.Irrigation must be done regularly while the bamboos are grown on nursery beds. Immediate water should be provided at the time of transplanting seedlings from nursery to main field. It must be noted that bamboo trees are sensitive to water logging hence you must drain out the soil especially during heavy rainfall or flooding. You can also adopt drip irrigation system for better utilization of water.The harvesting can be started from the fifth year onwards. On the other hand, in case of commercial farming, harvesting must be done from the sixth year. In the first harvest – sixth year, 6 culms can be harvested followed by 7 culms in the seventh year and so on.The unit cost for one acre of bamboo plantation is around Rs 9400 spread over a period of five years. And as we mentioned above, harvesting starts from the sixth year onwards. The yield and income from bamboo plantation, increases each year starting from the sixth year. Hence we can say that Bamboo is a cash crop having low gestation period, faster growth and gives economic recurring returns, generation after generation.
Posted by Harshit Sharma
Rajasthan
11-01-2020 01:05 PM
Punjab
01-11-2020 02:52 PM
Dragon fruit ki kheti ke liye Dragon fruit ki kalmei lgayi jati hai ye ped gujrat mei hota hai eik acre mei takriban iski 1600 kalmei lagti hai aur in kalmo ko pehle gamle mei tyar kiya jata hai aur fir april se September tak kabhi bhi field mei lga skte hai aur eik kalam lagbhagg 70 rs ki ati hai. Adhik jaankari ke liye aap niche diye number par baat kr skte hain: vijay kumar -7065414241
Posted by Narendra Meena
Madhya Pradesh
11-01-2020 01:02 PM
Punjab
01-11-2020 02:49 PM
धनिये की शुरूआती अवस्था में नदीन गंभीर समस्या होते हैं खेत को नदीन मुक्त करने के लिए एक या दो गोडाई करें बिजाई के 4 सप्ताह बाद पहली गोडाई करें और बिजाई के 5-6 सप्ताह बाद दूसरी गोडाई करें
Posted by Narendra Meena
Madhya Pradesh
11-01-2020 12:59 PM
Punjab
01-11-2020 02:48 PM
नरेंद्र जी कृपया आप सवाल विस्तार से पूछे कि आप कौन सी फसल के बारे में जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by Lakhan Mandloi
Madhya Pradesh
11-01-2020 12:52 PM
Punjab
01-11-2020 02:43 PM
लखन जी आप लहसुन के ऊपर गोबर की खाद नहीं डाल सकते इसके लिए आप NPK 130045 @1 किलो को 150 लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by Inderjit singh
Punjab
11-01-2020 12:51 PM
Punjab
01-11-2020 02:38 PM
inderjit ji tuci poultry farming di training lenn lai tuci apne nazdiki kvk se sampark kr skde ho, tuci uthe apna training wala farm bhar aao jddo v training howegi tan tuhanu phone krke dass dita jawe. tuci training lenn lai apne nazdiki KRISHI VIGYAN KENDRA, VILLAGE BOOH, POST OFFICE HARIKE PATTAN, TEHSIL PATTI, DISTRICT TARN TARAN (PUNJAB) – 143412, Contact: +91 9872974326 nal sampark kr skde ho.