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Posted by Gopal Mali
Madhya Pradesh
16-01-2020 06:43 AM
Punjab
01-16-2020 10:54 AM
गोपाल जी कृपया दवाई के लेबल की फोटो भेजे या इसके साल्ट का नाम बताये ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by Hardeep Singh
Punjab
16-01-2020 06:19 AM
Punjab
01-17-2020 07:31 PM
पशु का दूध उसकी अच्छी नसल और उसकी मां के दूध के रिकॉर्ड पर निर्भर करता है यदि इसकी मां का दूध अच्छा है तो इसका दूध भी अच्छा होगा बाकि आप इसे अभी गेहूं का दलिया 1 किलो उसमें 250 ग्राम गुड मिक्स करके अच्छी तरह उबालकर तैयार करके दें, और थोडा ठंडा करके उसमें 100 मि.ली. सरसों का तेल मिक्स करके 5—7 दिन खाने के लिए दें इससे पश.... (Read More)
पशु का दूध उसकी अच्छी नसल और उसकी मां के दूध के रिकॉर्ड पर निर्भर करता है यदि इसकी मां का दूध अच्छा है तो इसका दूध भी अच्छा होगा बाकि आप इसे अभी गेहूं का दलिया 1 किलो उसमें 250 ग्राम गुड मिक्स करके अच्छी तरह उबालकर तैयार करके दें, और थोडा ठंडा करके उसमें 100 मि.ली. सरसों का तेल मिक्स करके 5—7 दिन खाने के लिए दें इससे पशुओं का दूध बढ़ जाता है और यह आसानी से हज़म भी हो जाता है और खुराक के साथ साथ आप Milkout पाउडर 2—2 चम्मच सुबह शाम और Agrimin पाउडर 50—50 ग्राम सुबह शाम दें इससे शरीर की अच्छी ग्रोथ हो जाएगी
Posted by Dharmandra Panday
Uttar Pradesh
16-01-2020 06:17 AM
Punjab
01-17-2020 07:35 PM
मछलियों के अच्छे विकास के लिए आप अच्छी खुराक का प्रयोग करें और तालाब में ज्यादा संख्या में मछलियां ना रखें, ज्यादा खुराक और खाद का प्रयोग ना करें, तालाब में गार जमा ना होने दें, तालाब में ताजा पानी छोड़े बाकि यदि आप इस काम को पहली बार कर रहे है तो आप इसकी ट्रेनिंग लेकर इसे शुरू कर सकते है
Posted by SURENDRA Rawat
Rajasthan
16-01-2020 05:41 AM
Punjab
01-16-2020 05:50 AM
श्रीमान जी कृपया आप अपना सवाल विस्तार से पूछें ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके, धन्यवाद
Posted by SURENDRA Rawat
Rajasthan
16-01-2020 05:40 AM
Punjab
01-16-2020 05:51 AM
श्रीमान जी कृपया आप अपना सवाल विस्तार से पूछें ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके, धन्यवाद
Posted by UMATIYA SAMIR
Gujarat
16-01-2020 05:37 AM
Punjab
01-17-2020 07:38 PM
उसे आप पेट के कीड़ों के लिए Fasnil गोली दें और Agrimin powder 50-50gm सुबह शाम और Sharkoferrol liquid 50-50ml सुबह शाम दें इससे फर्क पड़ जाएगा
Posted by Yash Sharma
Uttar Pradesh
16-01-2020 04:55 AM
Punjab
01-16-2020 10:23 AM
आलू की खेती के लिए तापमान 14-25* C होना चाहिए यह फसल बहुत तरह की मिट्टी जैसे कि रेतली, नमक वाली, दोमट और चिकनी मिट्टी में उगाई जा सकती है अच्छे जल निकास वाली, जैविक तत्व भरपूर, रेतली से दरमियानी ज़मीन में फसल अच्छी पैदावार देती है यह फसल नमक वाली तेजाबी ज़मीनों में भी उगाई जा सकती है पर बहुत ज्यादा जल जमाव और खारी या न.... (Read More)
आलू की खेती के लिए तापमान 14-25* C होना चाहिए यह फसल बहुत तरह की मिट्टी जैसे कि रेतली, नमक वाली, दोमट और चिकनी मिट्टी में उगाई जा सकती है अच्छे जल निकास वाली, जैविक तत्व भरपूर, रेतली से दरमियानी ज़मीन में फसल अच्छी पैदावार देती है यह फसल नमक वाली तेजाबी ज़मीनों में भी उगाई जा सकती है पर बहुत ज्यादा जल जमाव और खारी या नमक वाली ज़मीन इस फसल की खेती के लिए उचित नहीं होती इसकी किस्मे जैसे के Kufri Bahar, Kufri Badshah, Kufri Sutlaj, Kufri Anand, Kufri Pukhraj, Kufri Chipsona 2, Kufri Chipsona 1, Kufri Chandramukhi, Kufri Jyoti, Kufri Ashoka, Kufri Lalima की बुवाई कर सकते है खेत को एक बार 30 सैं.मी. गहरा जोतकर अच्छे ढंग से बैड बनाएं जोताई के बाद 2-3 बार तवियां फेरें और फिर 2-3 बार सुहागा फेरें बिजाई से पहले खेत में नमी की मात्रा बनाकर रखें बिजाई के लिए दो ढंग मुख्य तौर पर प्रयोग किए जाते हैं 1. मेंड़ और खालियों वाला ढंग 2. समतल बैडों वाला ढंग अगेती बिजाई के लिए, सितंबर के आखिरी सप्ताह से अक्तूबर का पहला सप्ताह खेती के लिए उपयुक्त होता है मुख्य फसल के लिए अक्तूबर का दूसरे से चौथा सप्ताह बिजाई के लिए उपयुक्त समय होता है गांठों के आकार के अनुसार रोपाई का फासला विभिन्न होता है बिजाई के लिए कतार से कतार में 60 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 20 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीज बोने के बाद बीजों को 8-10 सैं.मी. तक मिट्टी की परत से ढक दें बिजाई के लिए ट्रैक्टर से चलने वाली सेमी ऑटोमेटिक या ऑटोमैटिक प्लांटर का प्रयोग करें रोपाई के लिए बड़ी आकार की गांठों का प्रयोग किया जाता है बिजाई के लिए 13-15 क्विंटल बीज प्रयोग किए जाते हैं बिजाई के लिए सेहतमंद आलू ही चुने बिजाई से पहले आलुओं को कोल्ड स्टोर से निकालकर 1-2 सप्ताह के लिए छांव वाले स्थान पर रखें ताकि वे अंकुरित हो जायें आलुओं के सही अंकुरन के लिए उन्हें जिबरैलिक एसिड 1 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी में मिलाकर एक घंटे के लिए उपचार करें फिर छांव में सुखाएं और 10 दिनों के लिए हवादार कमरे में रखें फिर काटकर आलुओं को मैनकोजेब 0.5 प्रतिशत घोल (5 ग्राम प्रति लीटर पानी) में 10 मिनट के लिए भिगो दें इससे आलुओं को शुरूआती समय में गलने से बचाया जा सकता है आलुओं को गलने और जड़ों में कालापन रोग से बचाने के लिए साबुत और काटे हुए आलुओं को 6 प्रतिशत मरकरी के घोल (टैफासन) 0.25 प्रतिशत (2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी) में डालें यदि संभव हो, तो आलू की रोपाई से पहले, हरी खाद वाली फसलें जैसे सनई, जंतर आदि फसलें उगायें और उन्हें मिट्टी में अच्छी तरह दबायें यदि हरी खाद उपलब्ध ना हो तो गली सड़ी रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर 60-80 क्विंटल प्रति एकड़ में खेत की तैयारी के समय रोपाई से दो सप्ताह पहले डालें फसल की उचित वृद्धि के लिए नाइट्रोजन 40-50 किलो (90-110 किलो यूरिया), फासफोरस 24-32 किलो (150-200 किलो सिंगल सुपर फासफेट) और पोटाश 40-50 किलो (66-85 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश) की मात्रा प्रति एकड़ में डालें बिजाई से पहले सिंचाई करें बिजाई के बाद 10-12 दिनों के अंदर अंदर पहली सिंचाई करें दूसरी सिंचाई पहली सिंचाई के 7 दिनों के बाद करें बाकी की सिंचाइयां जलवायु की परिस्थितियों और जरूरत के अनुसार करें गांठे बनने की अवस्था सिंचाई के लिए बहुत महत्तवपूर्ण होती है इस अवस्था में पानी की कमी ना होने दें ज्यादा सिंचाई ना करें इससे गलने की बीमारी का खतरा बढ़ता है पुटाई से 10-12 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें धन्यवाद
Posted by Ritesh Singh
Uttar Pradesh
16-01-2020 03:19 AM
Punjab
01-17-2020 08:05 PM
आप अच्छी नस्ल की बकरी लेने के लिए फिरोज़ आलम 9616009911 से संपर्क कर सकते है
Posted by yashir
Gujarat
16-01-2020 02:36 AM
Rajasthan
01-16-2020 09:30 AM
Posted by Ram Prasad
Himachal Pradesh
16-01-2020 02:30 AM
Punjab
01-16-2020 09:55 AM
Ram prasad ji please ask your question in detail whether you want to know about green grass that is grown in lawn or for fodder so that we can provide you proper information.thank you
Posted by sandy ahir
Gujarat
16-01-2020 02:24 AM
Punjab
01-16-2020 09:52 AM
sandy ji M-45 ek fungicide hai jiska istemal fasl par fungus ke hamle ko rokne ke liye kiyta jata hai. aur NPK 191919 ko aap spray pump se bhi istemal kar sakte hai. iski folicur spray ki jati hai.dhanywad
Posted by gurmail singh
Punjab
15-01-2020 11:41 PM
Punjab
01-16-2020 09:32 AM
gurmel ji eh tat di kami de karn hunda hai kirpa karke daso ke tuc isde vich kehdi kehdi khaad di varto kiti hai ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake.dhanwad
Posted by kundan
Bihar
15-01-2020 11:13 PM
Rajasthan
01-16-2020 09:31 AM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by Surya Pratap Singh
Uttar Pradesh
15-01-2020 10:54 PM
Punjab
01-16-2020 09:34 AM
surya ji january men tapman bhut kam hone ke karn is mahien kisi bhi ghas ki bijai nahi ki ja sakti february men aap makka ki bijai kar sakte hai.dhanywad
Posted by gurpreet Sandhu
Punjab
15-01-2020 10:43 PM
Punjab
01-16-2020 05:52 AM
Posted by santosh Kushwaha
Uttar Pradesh
15-01-2020 10:38 PM
Punjab
01-16-2020 04:41 PM
सबसे पहले आपके लिए यह जानना जरूरी है कि मुर्गी पालन दो तरह का होता है कि आप अंडों का व्यवसाय करना चाहते हैं या मीट का यदि आप अंडों का धंधा करना चाहते हैं तो आपको लेयर मुर्गियां पालनी पड़ेंगी और यदि आप मीट का धंधा करना चाहते हैं तो आपको ब्रॉयलर मुर्गियां पालनी पड़ेंगी यदि आप ब्रायलर मुर्गी पालन करना चाहते हैं त.... (Read More)
सबसे पहले आपके लिए यह जानना जरूरी है कि मुर्गी पालन दो तरह का होता है कि आप अंडों का व्यवसाय करना चाहते हैं या मीट का यदि आप अंडों का धंधा करना चाहते हैं तो आपको लेयर मुर्गियां पालनी पड़ेंगी और यदि आप मीट का धंधा करना चाहते हैं तो आपको ब्रॉयलर मुर्गियां पालनी पड़ेंगी यदि आप ब्रायलर मुर्गी पालन करना चाहते हैं तो कम से कम 10 हजार मुर्गियों का धंधा शुरू करना चाहते हैं तो आपको 4 से 5 लाख का इतज़ाम करना पड़ेगा, ये आप अपने बजट के हिसाब से कम पंक्षियों से भी शुरू कर सकते हैं बाकि आप इस काम को ट्रेनिंग लेकर शुरू करें जिसमें आपको इस काम के बारे में पूरी जानकारी दी जाएगी ट्रेनिंग लेने के लिए आप अपने नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें आप वहां जाकर अपना ट्रेनिंग का फार्म भर आएं जब भी ट्रेनिंग होगी तो वो आपको फोन करके उसके बारे में बता देंगे.
Posted by inderjit
Punjab
15-01-2020 10:30 PM
Punjab
01-16-2020 09:16 PM
Hanji inderjit ji tilla di khal hundi hai..
Posted by BHerusingh Sisodiya
Madhya Pradesh
15-01-2020 10:20 PM
Punjab
01-16-2020 05:54 AM
Shri maan g yeh batayein ki aapki fasal mein kon si problem aa rhi hai....
Posted by ਗੁਰਦੇਵ ਸਿੰਘ ਸੰਧੂ
Punjab
15-01-2020 10:16 PM
Punjab
01-16-2020 04:46 PM
ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ vitum-H 10-10ml ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ ਅਤੇ Enerboost ਪਾਊਡਰ 50-50gm ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ ਅਤੇ ਕਾਰਗਿਲ ਦੀ Transition mix ਫੀਡ ਦੇਣੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਇਸ ਨਾਲ ਲੇਵਾ ਅਤੇ ਦੁੱਧ ਵਧਿਆ ਹੋ ਜਾਵੇਗਾ.
Posted by tarachand patidar
Madhya Pradesh
15-01-2020 10:08 PM
Punjab
01-16-2020 09:37 AM
ताराचंद जी किसी भी फसल का रेट सरकार की तरफ से निश्चित किया जाता है इसके बारे में कुछ भी कहा नहीं जा सकता धन्यवाद
Posted by veer dhananjay singh rajput
Uttar Pradesh
15-01-2020 10:04 PM
Punjab
01-16-2020 09:49 AM
बांस की खेती के लिए आप Bambusa polymorpha, bambusa pallida, bambusa striata किस्में लगा सकते है इस खेती के लिए आपको ज्यादा उपजाऊ तत्तों वाली, जल निकास वाली मिट्टी की जरूरत होती हैं इसकी बिजाई बीजों और कलमों से की जाती हैं बीजों को 3-4 सैमी दूरी पर पक्तियों में और 3mX3m या 4.5 X 4.5m की दूरी पर सीधा बोया जाना चाहियें एक एकड में 250 पौधों की जरूरत होती हैं
Posted by Aashish Kumar
Bihar
15-01-2020 09:43 PM
Punjab
01-16-2020 04:48 PM
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकत हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है एक बकरी के लिए लगभग 12—15 वर्ग फीट जगह छती हुई और 25—30 वर्ग फीट जगह खुली चाहिए .... (Read More)
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकत हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है एक बकरी के लिए लगभग 12—15 वर्ग फीट जगह छती हुई और 25—30 वर्ग फीट जगह खुली चाहिए बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्चे देना आम बात है बकरियां 8-10 वर्ष तक बच्चे देती हैं और अपन गिनती को तेजी से बढ़ा लेती हैं आप बारबरी, ब्लैक बंगाल, जैसी नसल पाल सकते हैं
Posted by mandeep mann
Punjab
15-01-2020 09:34 PM
Punjab
01-16-2020 09:50 AM
ਮਨਦੀਪ ਜੀ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਦੱਸੋ ਕੇ ਤੁਸੀ ਇਸਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਿਹੜੀ ਫ਼ਸਲ ਤੇ ਕਰਨੀ ਹੈ ਤਾਂਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸ ਬਾਰੇ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Sanjay mukati
Madhya Pradesh
15-01-2020 09:32 PM
Punjab
01-16-2020 05:56 AM
Shri maan g kripa aap apna swal visthar se puchein toh aapko poori jankari di ja ske......
Posted by Gurvinder Singh
Punjab
15-01-2020 09:25 PM
Punjab
01-16-2020 08:08 AM
ਹੁਣ ਗੇਂਦਾ ਲਾਉਣ ਦਾ ਟਾਈਮ ਚਲ ਰਿਹਾ ਹੈ ਹੁਣ ਤੁਸੀਂ ਲੱਡੂ ਗੇਂਦਾ ਲਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੀ
Posted by pankaj mewara
Rajasthan
15-01-2020 09:21 PM
Punjab
01-16-2020 09:59 AM
पंकज जी कृपया पौधे की शाखा की फोटो साफ़ भेजे आपके द्वारा भेजी गयी फोटो में शाखा blur है जिसकी वजह से अनुमान लगाना मुश्किल हो रहा है के यह बीमारी है या कीट का हमला धन्यवाद
Posted by Anand Tiwari
Uttar Pradesh
15-01-2020 09:13 PM
Punjab
01-16-2020 09:57 AM
आनंद जी आप चन्दन और मोरिंगा की खेती कर सकते है और इसके बारे में अधिक जानकारी लेने के लिए आप Arun Khurmi 9878123123 से संपर्क कर सकते है इसके इलावा आप fish फार्म भी बना सकते है क्युकी सेम वाले इलाके में सब्सिडी भी मिलती है धन्यवाद
Posted by Aahil Ali
Madhya Pradesh
15-01-2020 09:01 PM
Punjab
01-16-2020 05:57 AM
Shri maan g iski roktham ke liye aap M-45@500 gm per acre spray kr skte ho....
Posted by JPS Chauhan
Uttar Pradesh
15-01-2020 08:40 PM
Punjab
01-16-2020 10:49 AM
V.R.O 6: यह चितकबरे रोग और पत्ता मरोड़ रोग के प्रतिरोधक है बसंत के मौसम में, इसकी औसतन उपज 54 क्विंटल और खरीफ के मौसम में, इसकी औसतन उपज 72 क्विंटल प्रति एकड़ होती है V.R.O 5: यह छोटे कद की और अधिक उपज वाली किस्म है यह चितकबरे रोग और पत्ता मरोड़ रोग के प्रतिरोधक है खरीफ के मौसम में, इसकी औसतन उपज 60 क्विंटल और बसंत के मौसम में, .... (Read More)
V.R.O 6: यह चितकबरे रोग और पत्ता मरोड़ रोग के प्रतिरोधक है बसंत के मौसम में, इसकी औसतन उपज 54 क्विंटल और खरीफ के मौसम में, इसकी औसतन उपज 72 क्विंटल प्रति एकड़ होती है V.R.O 5: यह छोटे कद की और अधिक उपज वाली किस्म है यह चितकबरे रोग और पत्ता मरोड़ रोग के प्रतिरोधक है खरीफ के मौसम में, इसकी औसतन उपज 60 क्विंटल और बसंत के मौसम में, इसकी औसतन उपज 48 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Parbhani Kranti : यह MKV, परभानी द्वारा जारी की गई है इसके फल मध्यम लंबे और नर्म होते हैं इन्हें ज्यादा देर तक रखने की गुणवत्ता अच्छी होती है यह किस्म पीले चितकबरे रोग को सहनेयोग्य है इसकी औसतन पैदावार 35-45 क्विंटल प्रति एकड़ होती है I.I.V.R 10 : यह किस्म पीले चितकबरे रोग की प्रतिरोधक किस्म है इसकी औसतन पैदावार 60 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Kashi Vibhuti: यह किस्म बिजाई के बाद 38-40 दिनों में पहली तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 68-72 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Kashi Bhairav: यह किस्म रोपाई के 43-45 दिनों के बाद पहली तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 76 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह पीले चितकबरे रोग की प्रतिरोधक किस्म है Kashi Mahima: यह किस्म रोपाई के 45 दिनों के बाद पहली तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है यह खरीफ के साथ साथ गर्मियों में भी बोने के लिए उपयुक्त किस्म है इसकी औसतन पैदावार 80 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Kashi Mohini: इस किस्म की औसतन पैदावार 56 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह पीले चितकबरे रोग की प्रतिरोधक किस्म है Kashi Mangali : यह किस्म रोपाई के 45-50 दिनों के बाद पहली तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है इस किस्म की औसतन पैदावार 56 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Kashi Pragati: यह किस्म रोपाई के 45-46 दिनों के बाद पहली तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है इस किस्म की औसतन पैदावार 64 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Kashi Satdhari: यह किस्म रोपाई के 50 दिनों के बाद पहली तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है इस किस्म की औसतन पैदावार 50 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Posted by jasvinder singh
Punjab
15-01-2020 08:40 PM
Punjab
04-09-2020 06:22 PM
jasvinder singh ji tusi social media te ad v post karo. es tarike nal tohanu direct arketing karni pavegi ji.
Posted by RAJ KAMAL
Punjab
15-01-2020 08:37 PM
Punjab
01-15-2020 08:43 PM
श्री मान पपीते की खेती को मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए प्रसिद्ध किस्में :-Pusa Dwarf: इसके फल मध्यम आकार के और अंडाकार होते हैं यह सूखे को .... (Read More)
श्री मान पपीते की खेती को मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए प्रसिद्ध किस्में :-Pusa Dwarf: इसके फल मध्यम आकार के और अंडाकार होते हैं यह सूखे को सहनेयोग्य किस्म है यह उच्च घनत्व में रोपाई के लिए लाभदायक है Pusa Giant: इस किस्म के पौधे तेज हवा को सहनेयोग्य है यह बड़े फलों का उत्पादन करती है यह पैकिंग के लिए उपयुक्त किस्म है CO 3: इसके फल बड़े आकार के और अंडाकार होते हैं इसे ज्यादा देर तक रखने की गुणवत्ता अच्छी होती है CO 1: यह छोटे कद की किस्म है जिसके फल मध्यम आकार के होते हैं फल गोलाकार, नर्म हरा-पीला छिल्का और संतरी पीले रंग का गुद्दा होता है फल रसदार होता है और इसे ज्यादा देर तक रखने की गुणवत्ता अच्छी होती है Coorg Honey Dew: इसे सीधे तौर पर खाने के लिए और प्रक्रिया के लिए प्रयोग किया जाता है इसके फल आयताकार और गुद्दा मोटा संतरी रंग का होता है Pusa Majesty: इसके फल मध्यम आकार के, गोल होते हैं इन्हें रखने की गुणवत्ता बहुत अच्छी होती है यह किस्म 146 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह किस्म जड़ गलन निमाटोड के प्रतिरोधक किस्म है Pusa Delicious: यह मध्यम लंबी किस्म है इसके फल मध्यम आकार के होते हैं, गुद्दा गहरे संतरी रंग का होता है इस किस्म को कतारों में लगाने के लिए प्रयोग किया जाता है पपीते की खेती के लिए नदीन रहित भूमि का प्रयोग करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें आखिरी जोताई के समय अच्छी तरह से गली हुई रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर मिट्टी में अच्छी तरह मिलाकर डालें सिफारिश किए गए फासलों पर 1 मीटर x 1 मीटर x 1 मीटर आकार के गड्ढे खोदें गड्ढों को मिट्टी और रूड़ी की खाद या गाय के गले हुए गोबर से भरें प्रयोग की गई किस्म के आधार पर प्रत्येक गड्ढे पर 2-4 नए पौधों की रोपाई करें रोपाई के बाद हल्की सिंचाई करें हवा से बचाव के लिए खूंटा लगाएं बीजों को 150 गेज़ की मोटाई वाले, 25 x 10 सैं.मी. के पॉलीथीन बैग में बोयें पानी के उचित निकास के लिए पॉलीथीन बैग के निचले हिस्से में 1 मि.मी. अर्द्धव्यास का छेद करें उसके बाद पॉलीथीन बैग में समान अनुपात में रूड़ी की खाद, मिट्टी और रेत डालें बिजाई से पहले बीजों का उपचार करें रोपाई के लिए 6-7 सप्ताह के पौधों का प्रयोग करें यूरिया 150 ग्राम, फासफोरस 80 ग्राम, पोटाश 100 ग्राम प्रति वृक्ष में प्रति वर्ष डालें खादों को 4 भागों में बांटकर रोपाई के बाद पहले, तीसरे, पांचवे और सातवें महीने में डालें बसंत के मौसम में फरवरी मार्च के महीने में बिजाई करें जबकि मॉनसून के मौसम में बिजाई के लिए जून जुलाई का महीना उपयुक्त होता है और पतझड़ के मौसम में बिजाई अक्तूबर से नवंबर महीने में की जाती है आमतौर पर 1.8 मीटर x 1.8 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है उच्च घनता की रोपाई के लिए 1.5 मीटर x 1.5 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है नर्सरी में बीज को 1 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बीजो की खेत में सीधे बिजाई या मुख्य खेत में नए पौधों की रोपाई की जाती है 100-120 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें मिट्टी की किस्म, जलवायु के हालातों आदि के आधार पर सिंचाई करें सर्दियों में 15 दिनों के अंतराल पर और गर्मियों में 7 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें तने को पानी के संपर्क में ना आने दें और खेत में पानी भी खड़ा ना होने दें पौधे की प्रौढ़ अवस्था के दौरान नदीनों की रोकथाम जरूरी होती है नदीनों की तीव्रता के आधार पर, नियमित और हल्की गोडाई करें फ्लूक्लोरालिन या बूटाक्लोर 800 मि.ली. प्रति एकड़ में डालें नदीनों की रोकथाम के लिए मलचिंग भी एक प्रभावी तरीका है पौधों की रोपाई के कुछ दिनों बाद प्लास्टिक शीट या धान की पराली या गन्ने के बचे कुचे को मलच के रूप में डालें मुख्यत: फल के पूरा आकार लेने और हरे से हल्का पीला रंग होने पर तुड़ाई की जाती है पहली तुड़ाई रोपाई के 14-15 महीनों के बाद की जा सकती है 4-5 तुड़ाइयां प्रति मौसम की जा सकती हैं धन्यवाद
Posted by rajendra singh
Uttar Pradesh
15-01-2020 08:34 PM
Punjab
01-15-2020 08:41 PM
Shri maan g lihocin BASF compaby ka hai iske use wheat ki actual growth hoti hai aur is se wheat ke plant ka stemor nadd motta ho jata hai jis se fasal girti nhi hai....
Posted by Jitu Yadav
Rajasthan
15-01-2020 08:32 PM
Punjab
01-16-2020 10:29 AM
जीतू जी आप जिप्सम @1 क्विंटल प्रति एकड़ के हिसाब से डाल कर इसकी बिजाई कर सकते है धन्यवाद
Posted by Balkishan Yadav
Rajasthan
15-01-2020 08:30 PM
Punjab
01-16-2020 10:04 AM
इलायची की खेती के लिए मुख्य रूप से लाल दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है. इसके अलावा उचित देखरेख कर और भी कई तरह की मिट्टी में इसकी खेती की जा सकती है. इलायची की खेती के लिए जमीन का पी.एच. मान 5 से 7.5 के बीच होना चाहिए.इलायची की खेती के लिए मुख्य रूप से उष्णकटिबंधीय जलवायु उपयुक्त होती है. लेकिन वर्तमान में भारत के .... (Read More)
इलायची की खेती के लिए मुख्य रूप से लाल दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है. इसके अलावा उचित देखरेख कर और भी कई तरह की मिट्टी में इसकी खेती की जा सकती है. इलायची की खेती के लिए जमीन का पी.एच. मान 5 से 7.5 के बीच होना चाहिए.इलायची की खेती के लिए मुख्य रूप से उष्णकटिबंधीय जलवायु उपयुक्त होती है. लेकिन वर्तमान में भारत के कई हिस्सों में इसको उगाया जा रहा है. इलायची की खेती समुद्र ताल से 600 से 1500 मीटर की ऊंचाई वाली जगहों पर भी की जा सकती है. इसकी खेती के लिए 1500 मिलीमीटर बारिश का होना जरूरी है. इलायची की खेती के लिए हवा में नमी और छायादार जगह का होना जरूरी होता है. इलायची की खेती के लिए सामान्य तापमान की जरूरत होती है. लेकिन सर्दियों में न्यूनतम 10 डिग्री और गर्मियों में अधिकतम 35 डिग्री तापमान पर भी पौधा अच्छे से विकास करता है. इलायची की कई तरह की किस्में हैं जिन्हें अलग अलग नामों से जाना जाता है. लेकिन इलायची की मुख्य रूप से दो प्रजाति ही पाई जाती है. जिन्हें छोटी और बड़ी या हरी और काली इलायची के नाम से जाना जाता है.हरी इलायची को छोटी इलायची के नाम से जाना जाता है. इसका इस्तेमाल कई तरह से खाने में किया जाता है. इसका इस्तेमाल मुखशुद्धि, औषधि, मिठाई और पूजा पाठ में किया जाता है. इसके पौधे 10 से 12 साल तक पैदावार देते हैं. लायची की खेती के लिए पहले से की हुई फसल के अवशेष हटाकर और पलाऊ लगाकर गहरी जुताई करें. जुताई करने के बाद खेत में जल संरक्षण के लिए खेत में मेड बना दें. ताकि बारिश के पानी के कारण पौधों की सिंचाई की जरूरत कम हो. जल संरक्षण की जरूरत ढाल वाली भूमि और कम वर्षा वाले भागों में ज्यादा होती है. उसके बाद खेत में फिर से गहरी जुताई कर रोटावेटर चला दें. इससे खेत की मिट्टी समतल हो जायेगी. मिट्टी के समतल हो जाने के बाद उसमें अगर पौधे मेड पर लगाना चाहते हैं तो लगभग डेढ़ से दो फिट की दूरी पर मेड बना दे. और समतल में लगाने के लिए खेत में दो से ढाई फिट की दूरी रखते हुए गड्डे तैयार कर लें. इन गड्डों और मेड पर गोबर की खाद और रासायनिक खाद डालकर मिट्टी में मिला दें. खेत की तैयारी पौधे के लगाने के लगभग एक 15 दिन पहले की जाती है. इलायची की खेती के लिए शुरुआत में नर्सरी में पौधे तैयार किये जाते हैं. पौधों को तैयार करने के लिए नर्सरी में 10 सेंटीमीटर की दूरी पर बीजों को लगाना चाहिए. बीजों को खेत में लगाने से पहले गोमूत्र या ट्राइकोडर्मा की उचित मात्रा से उपचारित कर लगाना चाहिए. एक हेक्टेयर के लिए एक से सवा किलो बीज काफी होता है. बीज लगाने के लिए क्यारियों तैयार करते वक्त प्रत्येक क्यारियों में 20 से 25 किलो खाद डालकर उसे अच्छे से मिट्टी में मिला दें. क्यारियों में बीज लगाने के बाद उनकी सिंचाई हजारे के माध्यम से कर दें. और सिंचाई करने के बाद क्यारियों को बीज अंकुरित होने तक पुलाव या सुखी घास से ढक दें. जब पौधा पूरी तरह तैयार हो जाता है तब उन्हें खेत में लगाया जाता है. इलायची का पौधा जब लगभग एक फिट की लम्बाई का बनकर तैयार हो जाता है तब इसे खेत में लगा देना चाहिए. इलायची की खेती के लिए पौध रोपण का काम एक से दो महीने पहले किया जाता है. उसके बाद इन पौधों को बारिश के मौसम में जुलाई माह के दौरान खेतों में उगाना चाहिए, जिससे पौधों को सिंचाई की भी जरूरत नही होती. और पौधा अच्छे से विकास भी करता है. इलायची के पौधे को छायादार जगह की ज्यादा आवश्यकता होती है. इसके लिए पौधे को छायादार जगह पर ही लगाना चाहिए. इलायची के पौधे को खेत में लगाते वक्त उन्हें तैयार किये गए गड्डों या मेड पर लगभग 60 सेंटीमीटर की दूरी पर लगाना चाहिए. मेड पर जिगजैग तरीके से पौधे की रोपाई करनी चाहिए. इलायची के पौधे को खेत में लगाने के बाद उनकी पहली सिंचाई तुरंत कर देनी चाहिए. बारिश के मौसम में इसके पौधे को पानी की आवश्यकता नही होती. लेकिन गर्मी के मौसम में इसके पौधे को ज्यादा पानी की जरूरत होती है. इस दौरान नमी बनाए रखने के लिए पौधों में उचित टाइम पर पानी देना चाहिए. और सर्दियों के मौसम में इसके पौधों को 10 से 15 दिन के अन्तराल में पानी देना चाहिए. इलायची के पौधों को खेत में लगाने से पहले गड्डों में या मेड पर प्रत्येक पौधों को 10 किलो के हिसाब से पुरानी गोबर की खाद और एक किली वर्मी कम्पोस्ट देना चाहिए. इसके अलावा इसके पौधों को नीम की खली और मुर्गी की खाद दो से तीन साल तक देनी चाहिए. जिससे पौधा अच्छे से विकास करता है. इलायची के पौधों में खरपतवार नियंत्रण नीलाई गुड़ाई में माध्यम से करनी चाहिए. खरपतवार नियंत्रण करने से पौधे को जमीन से पोषक तत्व भी उचित मात्रा में मिलते हैं. जिससे पौधा अच्छे से विकास करता है. नीलाई गुड़ाई करने से पौधे की जड़ों को हवा की उचित मात्रा भी मिलती रहेगी. और जड़ों की मिट्टी नर्म होने की वजह से पौधा अच्छे से विकास भी करेगा. धन्यवाद
Posted by Gautam Roy
Bihar
15-01-2020 08:28 PM
Punjab
01-16-2020 10:52 AM
गौतम जी यह सुंडी के हमले के कारण ऐसे हो रहे है इसकी रोकथाम के लिए आप quinalphos @800ml को प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by Balkishan Yadav
Rajasthan
15-01-2020 08:28 PM
Punjab
01-16-2020 10:04 AM
इलायची की खेती के लिए मुख्य रूप से लाल दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है. इसके अलावा उचित देखरेख कर और भी कई तरह की मिट्टी में इसकी खेती की जा सकती है. इलायची की खेती के लिए जमीन का पी.एच. मान 5 से 7.5 के बीच होना चाहिए.इलायची की खेती के लिए मुख्य रूप से उष्णकटिबंधीय जलवायु उपयुक्त होती है. लेकिन वर्तमान में भारत के .... (Read More)
इलायची की खेती के लिए मुख्य रूप से लाल दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है. इसके अलावा उचित देखरेख कर और भी कई तरह की मिट्टी में इसकी खेती की जा सकती है. इलायची की खेती के लिए जमीन का पी.एच. मान 5 से 7.5 के बीच होना चाहिए.इलायची की खेती के लिए मुख्य रूप से उष्णकटिबंधीय जलवायु उपयुक्त होती है. लेकिन वर्तमान में भारत के कई हिस्सों में इसको उगाया जा रहा है. इलायची की खेती समुद्र ताल से 600 से 1500 मीटर की ऊंचाई वाली जगहों पर भी की जा सकती है. इसकी खेती के लिए 1500 मिलीमीटर बारिश का होना जरूरी है. इलायची की खेती के लिए हवा में नमी और छायादार जगह का होना जरूरी होता है. इलायची की खेती के लिए सामान्य तापमान की जरूरत होती है. लेकिन सर्दियों में न्यूनतम 10 डिग्री और गर्मियों में अधिकतम 35 डिग्री तापमान पर भी पौधा अच्छे से विकास करता है. इलायची की कई तरह की किस्में हैं जिन्हें अलग अलग नामों से जाना जाता है. लेकिन इलायची की मुख्य रूप से दो प्रजाति ही पाई जाती है. जिन्हें छोटी और बड़ी या हरी और काली इलायची के नाम से जाना जाता है.हरी इलायची को छोटी इलायची के नाम से जाना जाता है. इसका इस्तेमाल कई तरह से खाने में किया जाता है. इसका इस्तेमाल मुखशुद्धि, औषधि, मिठाई और पूजा पाठ में किया जाता है. इसके पौधे 10 से 12 साल तक पैदावार देते हैं. लायची की खेती के लिए पहले से की हुई फसल के अवशेष हटाकर और पलाऊ लगाकर गहरी जुताई करें. जुताई करने के बाद खेत में जल संरक्षण के लिए खेत में मेड बना दें. ताकि बारिश के पानी के कारण पौधों की सिंचाई की जरूरत कम हो. जल संरक्षण की जरूरत ढाल वाली भूमि और कम वर्षा वाले भागों में ज्यादा होती है. उसके बाद खेत में फिर से गहरी जुताई कर रोटावेटर चला दें. इससे खेत की मिट्टी समतल हो जायेगी. मिट्टी के समतल हो जाने के बाद उसमें अगर पौधे मेड पर लगाना चाहते हैं तो लगभग डेढ़ से दो फिट की दूरी पर मेड बना दे. और समतल में लगाने के लिए खेत में दो से ढाई फिट की दूरी रखते हुए गड्डे तैयार कर लें. इन गड्डों और मेड पर गोबर की खाद और रासायनिक खाद डालकर मिट्टी में मिला दें. खेत की तैयारी पौधे के लगाने के लगभग एक 15 दिन पहले की जाती है. इलायची की खेती के लिए शुरुआत में नर्सरी में पौधे तैयार किये जाते हैं. पौधों को तैयार करने के लिए नर्सरी में 10 सेंटीमीटर की दूरी पर बीजों को लगाना चाहिए. बीजों को खेत में लगाने से पहले गोमूत्र या ट्राइकोडर्मा की उचित मात्रा से उपचारित कर लगाना चाहिए. एक हेक्टेयर के लिए एक से सवा किलो बीज काफी होता है. बीज लगाने के लिए क्यारियों तैयार करते वक्त प्रत्येक क्यारियों में 20 से 25 किलो खाद डालकर उसे अच्छे से मिट्टी में मिला दें. क्यारियों में बीज लगाने के बाद उनकी सिंचाई हजारे के माध्यम से कर दें. और सिंचाई करने के बाद क्यारियों को बीज अंकुरित होने तक पुलाव या सुखी घास से ढक दें. जब पौधा पूरी तरह तैयार हो जाता है तब उन्हें खेत में लगाया जाता है. इलायची का पौधा जब लगभग एक फिट की लम्बाई का बनकर तैयार हो जाता है तब इसे खेत में लगा देना चाहिए. इलायची की खेती के लिए पौध रोपण का काम एक से दो महीने पहले किया जाता है. उसके बाद इन पौधों को बारिश के मौसम में जुलाई माह के दौरान खेतों में उगाना चाहिए, जिससे पौधों को सिंचाई की भी जरूरत नही होती. और पौधा अच्छे से विकास भी करता है. इलायची के पौधे को छायादार जगह की ज्यादा आवश्यकता होती है. इसके लिए पौधे को छायादार जगह पर ही लगाना चाहिए. इलायची के पौधे को खेत में लगाते वक्त उन्हें तैयार किये गए गड्डों या मेड पर लगभग 60 सेंटीमीटर की दूरी पर लगाना चाहिए. मेड पर जिगजैग तरीके से पौधे की रोपाई करनी चाहिए. इलायची के पौधे को खेत में लगाने के बाद उनकी पहली सिंचाई तुरंत कर देनी चाहिए. बारिश के मौसम में इसके पौधे को पानी की आवश्यकता नही होती. लेकिन गर्मी के मौसम में इसके पौधे को ज्यादा पानी की जरूरत होती है. इस दौरान नमी बनाए रखने के लिए पौधों में उचित टाइम पर पानी देना चाहिए. और सर्दियों के मौसम में इसके पौधों को 10 से 15 दिन के अन्तराल में पानी देना चाहिए. इलायची के पौधों को खेत में लगाने से पहले गड्डों में या मेड पर प्रत्येक पौधों को 10 किलो के हिसाब से पुरानी गोबर की खाद और एक किली वर्मी कम्पोस्ट देना चाहिए. इसके अलावा इसके पौधों को नीम की खली और मुर्गी की खाद दो से तीन साल तक देनी चाहिए. जिससे पौधा अच्छे से विकास करता है. इलायची के पौधों में खरपतवार नियंत्रण नीलाई गुड़ाई में माध्यम से करनी चाहिए. खरपतवार नियंत्रण करने से पौधे को जमीन से पोषक तत्व भी उचित मात्रा में मिलते हैं. जिससे पौधा अच्छे से विकास करता है. नीलाई गुड़ाई करने से पौधे की जड़ों को हवा की उचित मात्रा भी मिलती रहेगी. और जड़ों की मिट्टी नर्म होने की वजह से पौधा अच्छे से विकास भी करेगा. धन्यवाद
Posted by Arvind Kumar Sharma
Uttar Pradesh
15-01-2020 08:28 PM
Punjab
01-16-2020 10:53 AM
गर्मियों के मौसम में, बिजाई के लिए फरवरी से मार्च और खरीफ के मौसम के लिए, जून से जुलाई का महीना उपयुक्त होता है पहाड़ी क्षेत्रों में, मार्च से अप्रैल में बिजाई पूरी कर लें
Posted by jasvinder singh
Punjab
15-01-2020 08:26 PM
Punjab
01-16-2020 10:54 AM
jaswinder ji NPK di spray tuc repeat kar deo kyuki isdi spray 12 din bad repeat karni hoyegi.dhanwad
Posted by gaurav rana
Haryana
15-01-2020 08:23 PM
Punjab
01-16-2020 10:42 AM
gaurav ji aapko humic acid daalne ki jrurat nahi hai aap abhi isme khaadon ki poori matra daale is se hi fasl ki poori growth ho jayegi.dhanywad
Posted by Ashish
Haryana
15-01-2020 08:19 PM
Punjab
01-16-2020 04:51 PM
आप गाय को potasium-iodied दवा देनी शुरू करें इसकी 20 ग्राम की पैकिंग होती है इसे रोजाना 5 ग्राम दें आप Ifer-h 5ml के इंजेक्शन भी लगवायें इसके तीन इंजेक्शन लगवायें इसे आप 3—3 दिनों के फर्क से लगवायें..
Posted by Muhammad Shamsher
Uttar Pradesh
15-01-2020 08:18 PM
Punjab
01-16-2020 05:27 PM
Muhammad ji poultry farming ki training lene ke liye aap apne nazdiki kvk se sampark kr skte hai, Training lene ke liye aap Krishi Vigyan Kendra, Bharsar, Kallipur, P.O. - Sohna, Distt.- Siddhartnagar - (U.P.) INDIA, PIN - 272 193, Tel. No.: 9415155518 se sampark kr skte hai.
Posted by malkeet
Punjab
15-01-2020 08:18 PM
Punjab
01-16-2020 10:59 AM
Malkeet ji kripa karke swal vistar nal pucho ke colina pashua de product ya faslan te spray karn vala ta jo tuhanu osde hisab nal jankari diti ja sake.dhanwad
Posted by Manjinder Singh
Punjab
15-01-2020 08:13 PM
Punjab
01-16-2020 05:29 PM
ਮੋਤੀਆਂ ਦੀ ਖੇਤੀ ਇਕ ਲਾਭਦਾਇਕ ਕਿੱਤਾ ਹੈ ਮੋਤੀਆਂ ਦੀ ਖੇਤੀ ਉਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਹੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜਿਵੇ ਅਸਲ ਰੂਪ ਵਿਚ ਮੋਤੀ ਤਿਆਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸਦੀ ਖੇਤੀ ਤੁਸੀ ਕਿਸੇ ਤਲਾਬ ਵਿਚ ਜਾ ਫਿਰ 100 ਵਰਗ ਫੁੱਟ ਦਾ ਤਲਾਬ ਬਣਾ ਕੇ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਤਲਾਬ ਬਣਾਉਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਸਿਪੀ ਨੂੰ ਖਰੀਦਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜੋ ਦਿੱਲੀ ਤੋ ਮਿਲ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਕਵਾਲਿਟੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਇਕ ਸਿਪੀ ਕਰੀਬ 1.5 ਤੋਂ 5 ਰੁਪਏ ਦੇ ਵਿਚ ਮਿਲਦੀ ਹੈ .... (Read More)
ਮੋਤੀਆਂ ਦੀ ਖੇਤੀ ਇਕ ਲਾਭਦਾਇਕ ਕਿੱਤਾ ਹੈ ਮੋਤੀਆਂ ਦੀ ਖੇਤੀ ਉਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਹੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜਿਵੇ ਅਸਲ ਰੂਪ ਵਿਚ ਮੋਤੀ ਤਿਆਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸਦੀ ਖੇਤੀ ਤੁਸੀ ਕਿਸੇ ਤਲਾਬ ਵਿਚ ਜਾ ਫਿਰ 100 ਵਰਗ ਫੁੱਟ ਦਾ ਤਲਾਬ ਬਣਾ ਕੇ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਤਲਾਬ ਬਣਾਉਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਸਿਪੀ ਨੂੰ ਖਰੀਦਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜੋ ਦਿੱਲੀ ਤੋ ਮਿਲ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਕਵਾਲਿਟੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਇਕ ਸਿਪੀ ਕਰੀਬ 1.5 ਤੋਂ 5 ਰੁਪਏ ਦੇ ਵਿਚ ਮਿਲਦੀ ਹੈ ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਬੰਦ ਸੀਪੀਆਈ ਵਿਚ ਖਿੱਚ ਲਾ ਕੇ ਉਹਨਾਂ ਵਿੱਚ ਮੋਤੀਆਂ ਦਾ ਬੀਜ ਪਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਫਿਰ ਇਹਨਾਂ ਸਿਪੀਆ ਨੂੰ ਬੰਦ ਕਰ ਕੇ ਜਾਲੀ ਦੇ ਸਹਾਰੇ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਸੁੱਟ ਦਿੱਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਫਿਰ ਕੁੱਜ ਮਹੀਨਿਆਂ ਬਾਅਦ ਇਸ ਵਿਚੋਂ ਮੋਤੀ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਮੋਤੀ ਬਣਨ ਵਿਚ 18 ਮਹੀਨਿਆਂ ਦਾ ਸਮਾਂ ਲਗਦਾ ਹੈ ਡਿਜ਼ਾਈਨਰ ਮੋਤੀ ਤਿਆਰ ਕਰਨ ਲਈ ਉਹਨਾਂ ਲਈ ਖਾਸ ਤੌਰ ਤੇ ਸਾਂਚੇ ਬਣਾਏ ਹੁੰਦੇ ਹਨ, ਜਿਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਗਨਪਤੀ,ਬੁੱਧ,ਹੋਲੀ ਕਰਾਸ ਸਾਈਨ ਵਰਗੇ ਡਿਜ਼ਾਈਨਰ ਮੋਤੀ ਤਿਆਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਪਰ ਮੋਤੀਆ ਦੀ ਮਾਰਕੀਟਿੰਗ ਆਪਣੇ ਪੱਧਰ ਤੇ ਹੀ ਕਰਨੀ ਪੈਂਦੀ ਹੈ ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਮਨੀਸ਼ ਜੀ ਮੋਤੀਆ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਕਰਵਾਉਦੇ ਹਨ ਉਹਨਾਂ ਨਾਲ ਇਸ ਨੰਬਰ 9417652857 ਤੇ ਗੱਲ ਕਰੋ ਉਹ ਤੁਹਾਨੂੰ ਪੂਰਾ ਗਾਈਡ ਕਰ ਦੇਣਗੇ ਪੰਜਾਬ ਵਿਚ ਮੋਤੀਆਂ ਦੀ ਖੇਤੀ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈਣ ਲਈ ਤੁਸੀਂ Manish Vasudev 9417652857 ਜੀ ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੀ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by nischay singh chouhan
Madhya Pradesh
15-01-2020 08:10 PM
Punjab
01-15-2020 08:12 PM
श्री मान लहसुन की ग्रोथ के लिए आप NPK 19:19:19@1kg 150ltr पानी में मिलाकर सप्रे कर सकते हो