
Posted by rajat majumdar
West Bengal
16-01-2020 10:54 AM
रजत जी यह फंगस है इसके लिए आप कार्बेन्डाजिम@4 ग्राम को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद

Posted by Santosh Kumar
Jharkhand
16-01-2020 10:52 AM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद

Posted by Santosh Kumar
Jharkhand
16-01-2020 10:47 AM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद

Posted by Sarfaraz Memon
Maharashtra
16-01-2020 10:37 AM
आप एक किलो हल्दी/प्रति टन फीड में मिलाकर दे सकते है
Posted by ਮਨਪ੍ਰੀਤ ਸਿੰਘ ਸੰਧੂ
Punjab
16-01-2020 10:32 AM
ਮਨਪ੍ਰੀਤ ਜੀ ਧਾਤਾਂ ਦੇ ਚੂਰੇ ਨੂੰ ਮਿਨਰਲ ਮਿਕਸਚਰ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਇਹ ਤੁਸੀ ਕਿਸੇ ਵੀ ਮੈਡੀਕਲ ਸਟੋਰ ਤੋਂ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਤੁਸੀ Agrimin, Bovimin-B, Minfa gold ਕੋਈ ਵੀ ਮਿਨਰਲ ਮਿਕਸਚਰ ਵਰਤ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਇਸ ਨੂੰ ਤੁਸੀ ਫੀਡ ਵਿਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਵੀ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜਾ ਵੈਸੇ ਹੀ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਵੱਡੇ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ
Posted by ਗੁਰਪ੍ਰੀਤ ਸਿੰਘ ਮੱਲ੍ਹੀ
Punjab
16-01-2020 10:23 AM
ਗੁਰਪ੍ਰੀਤ ਜੀ DAP ਦੀ ਸਪਰੇ ਨਹੀਂ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਤੁਸੀ ਜੇਕਰ ਹੁਣ ਫਾਸਫੋਰਸ ਤੱਤ ਦੀ ਕਮੀ ਦੇ ਲਈ ਸਪਰੇ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾ ਤੁਸੀ NPK 005234 @1 ਕਿਲੋ ਨੂੰ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Dilpreet singh
Punjab
16-01-2020 10:17 AM
ATLANTIS::ihh ikk herbicide hai..iss di maatra 160gm per acre hai...ihh bayer company di aundi hai. Iss di spray krde sme khet de vich nami nahi honi chaidi hai. Iss di spray krn ton baad kanak nu 15 din tak pani nahi dena hai. Jekar tuc 15 din ton pehla kanak nu pani dinde ho tan ihh kanak nu nuksaan phuncha skdi hai..
Posted by Dilpreet singh
Punjab
16-01-2020 10:15 AM
ATLANTIS::ihh ikk herbicide hai..iss di maatra 160gm per acre hai...ihh bayer company di aundi hai. Iss di spray krde sme khet de vich nami nahi honi chaidi hai. Iss di spray krn ton baad kanak nu 15 din tak pani nahi dena hai. Jekar tuc 15 din ton pehla kanak nu pani dinde ho tan ihh kanak nu nuksaan phuncha skdi hai..

Posted by Ganesh Sardan Jatt
Maharashtra
16-01-2020 10:14 AM
गणेश जी यह leaf miner का हमला है इसकी रोकथाम के लिए आप fenazaquin@2 ml को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by baljinder singh Dhillon
Punjab
16-01-2020 10:13 AM
Dhillon ji tuci uss nu her mahine thanda tika lgwande rho ate Stay progen powder ja fir pregstay gold powder 30gm rojana de skde ho.
Posted by Om Panwar Jhinjhinyali
Rajasthan
16-01-2020 10:02 AM
ओम जी यह फंगस के कारण हो रहा है इसके लिए आप carbendazim @4 ग्राम को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें डी इस से फंगस की प्रॉब्लम ठीक हो जाएगी धन्यवाद
Posted by Er. Harjinder Singh
Punjab
16-01-2020 09:56 AM
Harjinder ji kanak vich urea to ilava DAP ate potash di varto kiti jandi hai jisde nal kanak da poora vadha hunda hai jekar kanak vadhia growth kar rahi hai ta tuhanu kuch hor paun di lod nahi hai.

Posted by satnam singh
Punjab
16-01-2020 09:55 AM
ਹਾਂਜੀ ਸਤਨਾਮ ਜੀ ਤੁਸੀ ਚੁਕੰਦਰ ਦਾ ਆਚਾਰ ਗਾਵਾਂ ਨੂੰ ਵੀ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਚੁਕੰਦਰ ਦਾ ਆਚਾਰ ਲੈਣ ਲਈ ਤੁਸੀ ਅਮਨਦੀਪ ਸਿੰਘ 9914832900 ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ .
Posted by Er. Harjinder Singh
Punjab
16-01-2020 09:54 AM
Harjinder ji tuc isde uper NPK 130045@1 kilo nu 150 litre pani de hisab nal spray karo.dhanwad

Posted by somat Singh
Madhya Pradesh
16-01-2020 09:48 AM
सोमत जी यह yellow rust की निशानियां है इसके लिए आप tilt @200 ml को प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद

Posted by satnam singh
Punjab
16-01-2020 09:43 AM
ਚੁਕੰਦਰ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਦੇ ਲਈ ਸਤੰਬਰ ਦੇ ਆਖਰੀ ਹਫਤੇ ਅਤੇ ਅਕਤੂਬਰ ਦੇ ਅੱਧ ਤਕ ਬੀਜ ਸਕਦੇ ਹੋ ਖੇਤ ਦੀ ਤਿਆਰੀ ਦੇ ਲਈ ਖੇਤ ਵਾਹੋ ਬੀਜ ਦੇ ਚੰਗੇ ਉਤਪਾਦ ਦੇ ਲਈ ਜਮੀਨ ਨੂੰ ਚੰਗੀ ਤਰਾਂ ਤਿਆਰ ਕਰੋ ਅਤੇ ਉਸਮੇ ਸਹੀ ਮਾਤਰਾ ਵਿਚ ਨਮੀ ਬਣਾ ਕੇ ਰੱਖੋ ਬਿਜਾਈ ਦੇ ਲਈ ਕਤਾਰਾਂ ਵਿਚ 45-50 cm ਦਾ ਫ਼ਾਸਲਾ ਰੱਖੋ ਇਕ ਏਕੜ ਵਿਚ 1.5-2.5 ਕਿੱਲੋ ਬੀਜ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਵਰਤੋਂ ਖੇਤ ਦੀ ਤਿਆਰੀ ਦੇ ਸਮੇ 5 ਟਨ ਰੂੜੀ.... (Read More)
ਚੁਕੰਦਰ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਦੇ ਲਈ ਸਤੰਬਰ ਦੇ ਆਖਰੀ ਹਫਤੇ ਅਤੇ ਅਕਤੂਬਰ ਦੇ ਅੱਧ ਤਕ ਬੀਜ ਸਕਦੇ ਹੋ ਖੇਤ ਦੀ ਤਿਆਰੀ ਦੇ ਲਈ ਖੇਤ ਵਾਹੋ ਬੀਜ ਦੇ ਚੰਗੇ ਉਤਪਾਦ ਦੇ ਲਈ ਜਮੀਨ ਨੂੰ ਚੰਗੀ ਤਰਾਂ ਤਿਆਰ ਕਰੋ ਅਤੇ ਉਸਮੇ ਸਹੀ ਮਾਤਰਾ ਵਿਚ ਨਮੀ ਬਣਾ ਕੇ ਰੱਖੋ ਬਿਜਾਈ ਦੇ ਲਈ ਕਤਾਰਾਂ ਵਿਚ 45-50 cm ਦਾ ਫ਼ਾਸਲਾ ਰੱਖੋ ਇਕ ਏਕੜ ਵਿਚ 1.5-2.5 ਕਿੱਲੋ ਬੀਜ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਵਰਤੋਂ ਖੇਤ ਦੀ ਤਿਆਰੀ ਦੇ ਸਮੇ 5 ਟਨ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ ਦਾ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕਰੋ ਖਾਦਾਂ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਯੂਰੀਆ 25 ਕਿੱਲੋ , ਕਿੱਲੋ ਅਤੇ ਪੋਟਾਸ਼ 30 ਕਿੱਲੋ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜਦਾ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕਰੋ ਚਕੁੰਦਰ ਨੂੰ 8 ਸਿੰਚਾਈਆਂ ਦੀ ਲੋੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਪਹਿਲੀ ਸਿੰਚਾਈ ਬਿਜਾਈ ਦੇ 25 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਅਤੇ ਅਗਲੀਆਂ 4 ਸਿੰਚਾਈਆਂ 25 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਅੰਤਰਾਲ ਤੇ ਕਰੋ ਅਤੇ ਬਾਕੀ ਦੀ ਸਿੰਚਾਈ 20 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਅੰਤਰਾਲ ਤੇ ਕਰੋ ਇਸ ਫ਼ਸਲ ਦੀ ਤੁੜਾਈ ਮਾਰਚ ਦੇ ਅੰਤ ਤੋਂ ਮਈ ਦੇ ਮਹੀਨੇ ਵਿਚ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਜਦੋ ਪੱਤੇ ਦੀਆਂ ਹੇਠਲੀਆਂ ਤੇਹਾਂ ਪੀਲੇ ਰੰਗ ਦੀ ਹੋ ਜਾਏ ਤਾ ਤੁੜਾਈ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਕਟਾਈ ਦੇ ਇਕ ਤੋਂ ਤਿੰਨ ਦਿਨ ਪਹਿਲਾ ਹਲਕੀ ਸਿੰਚਾਈ ਦੀ ਲੋੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈਇਸਦਾ ਝਾੜ ਲਗਭਗ 55 -60 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਨਿਕਲਦਾ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by Rakesh verma
Uttar Pradesh
16-01-2020 09:35 AM
राकेश जी आप किस्मे जैसे Arka shital : इसके फल हल्के हरे रंग के होते हैं इसकी औसतन पैदावार 80 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Lucknow Early: इसके फल लंबे और चमकदार होते हैं यह किस्म लखनऊ और उसके नजदीक के क्षेत्रों में प्रसिद्ध है स्थानीय किस्में Nasdar, Sikkim Kakadi आदि
Pant sankar khira 1: इसके फल लंबे और बेलनाकार होते हैं इसकी औसतन पैदावार 80 क्विंट.... (Read More)
राकेश जी आप किस्मे जैसे Arka shital : इसके फल हल्के हरे रंग के होते हैं इसकी औसतन पैदावार 80 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Lucknow Early: इसके फल लंबे और चमकदार होते हैं यह किस्म लखनऊ और उसके नजदीक के क्षेत्रों में प्रसिद्ध है स्थानीय किस्में Nasdar, Sikkim Kakadi आदि
Pant sankar khira 1: इसके फल लंबे और बेलनाकार होते हैं इसकी औसतन पैदावार 80 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Pant Khira – 1: इसके फल लंबे और बेलनाकार और सफेद धारीदार होते हैं इसके फल 50-60 दिनों के बाद पहली तुड़ाई के लिए तैयार हो जाते हैं इसकी औसतन पैदावार 60 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Pant Parthnocarpic khira 2: यह किस्म पॉलीहाउस में खेती के लिए उपयुक्त किस्म है इसकी औसतन पैदावार 843 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Pant Parthenocarpic khira-3: यह किस्म पॉलीहाउस में खेती के लिए उपयुक्त किस्म है इसकी औसतन पैदावार 800 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Swarna Ageti: इसके फल लंबे और बेलनाकार होते हैं यह पत्तों के ऊपरी धब्बा रोगों को सहनेयोग्य है यह किस्म बिजाई के 45-50 दिनों के बाद पहली तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है
Swarna Sheetal: इसके फल लंबे, बेलनाकार और मध्यम आकार के होते हैं यह पत्तों के ऊपरी धब्बा रोगों को सहनेयोग्य है यह किस्म बिजाई के 60-65 दिनों के बाद पहली तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है
Posted by dev
Rajasthan
16-01-2020 09:29 AM
देव जी यह फंगस के कारण हो रहा है इसके लिए आप mancozeb @4 ग्राम को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद

Posted by gurdeep singh
Punjab
16-01-2020 09:08 AM
Gurdeep ji tuci ohna nu vdia khurak deni suru kro, kyuki desi murgia kujj time egg den ton badd fir thode dina de frak nal egg dene suru kr dindia hai, tuci ehna nu Egg formula powder nazdiki medical store ton leya ke feed vich dena suru kro.
Posted by Arun Bishnoi
Punjab
16-01-2020 09:03 AM
अरूण जी जब आपको पत्तों में इसकी कमी के लक्ष्ण नज़र आए तो आप इसकी स्प्रे कर सकते है इसके लिए आप 3 ग्राम जिंक सल्फेट को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे कर सकते है

Posted by ranjit Singh
Punjab
16-01-2020 09:01 AM
जब भी आप साइलेज तैयार करते है तो आप इस बात कर ध्यान रखें कि उस खड्डे में हवा नहीं होनी चाहिए साइलेज बिल्कुल हवा रहित तैयार करना चाहिए जोकि अच्छी तरह से तैयार हो जाता है आचार तैयार करने के गड्ढा - गड्ढे का आकार, पशुओं की गिणती, हरे चारे की मिकदार और उसे जितने समय के लिए चारना है पर निर्भर करता है आमतौर पर एक घन मी.... (Read More)
जब भी आप साइलेज तैयार करते है तो आप इस बात कर ध्यान रखें कि उस खड्डे में हवा नहीं होनी चाहिए साइलेज बिल्कुल हवा रहित तैयार करना चाहिए जोकि अच्छी तरह से तैयार हो जाता है आचार तैयार करने के गड्ढा - गड्ढे का आकार, पशुओं की गिणती, हरे चारे की मिकदार और उसे जितने समय के लिए चारना है पर निर्भर करता है आमतौर पर एक घन मीटर स्थान पर 5-6 क्विंटल कटा हुआ हरा चारा संभाला जा सकता है 10 मीटर लंबा, 3 मीटर चौड़ा और 1.5 मीटर गहरा गड्ढा 350-400 क्विंटल हरा चारा संभालने की क्षमता रखता है गड्ढे की लंबाई, चौड़ाई पशुओं की गिणती और उनकी जरूरतों के अनुसार कम ज्यादा हो सकती है परंतु गहराई हमेशा 1.5 से 2 मीटर होनी चाहिए गड्ढा पशुओं के ढारे के नज़दीक ऊंचे स्थान पर बनाना चाहिए यह पक्का और सीमेंट से पलस्तर किया होना चाहिए आचार बनाने के ढंग • काटी हुई फसल का 5 से 8 सैं.मी. के हिसाब से कुतरा कर ले और इसे गड्ढे में भर दें • गड्ढे में कुतर कर डाले गए चारे को ट्रैक्टर या बैलों की सहायता से अच्छी तरह दबा दें और इसे ज़मीन की सतह से एक मीटर ऊंचा रखें बढ़िया आचार तैयार करने के लिए ज़रूरी है कि आधे मीटर की चारे की तह को अच्छी तरह दबाया जाये • इसे ऊपर से कड़ब या तूड़ी की 10-15 सैं.मी. मोटी तह से ढक दें फिर इसके ऊपर मिट्टी डालकर लीप दें यह ध्यान रखें कि गड्ढा पूरी तरह से बंद हो • इस काम के लिए दबे हुए चारे के ऊपर प्लास्टिक की चादन बिछाकर इसके किनारे गोबर वाल मिट्टी से भी बंद किए जा सकते हैं • इसकी पूरी निगरानी रखें कि चारे के लेप के ऊपर कोई छेद या दरार ना आये यदि ऐसा हो जाये तो इसे जल्दी बंद कर दें आचार 45 दिनों तक तैयार हो जायेगा • प्रयोग करते समय आचार के गड्ढे को एक ओर से खोलें हर रोज़ के प्रयोग अनुसार चारा निकालकर बाकी रहता चारा अच्छी तरह बंद कर दें इस तरह चारा ज्यादा देर तक ठीक रहेगा पशुओं को आचार खिलाना - हो सकता है पशु पहले कुछ दिन आचार पसंद ना करें इसलिए पहले 5-6 दिन 5-10 किलो आचार हरे चारे में मिलाकर उन्हें डालें बाद में हर पशु को 20-30 किलो आचार रोजाना दूसरे चारों के साथ मिला दिया जा सकता है
Posted by monukumarmonu
Uttar Pradesh
16-01-2020 08:58 AM
मोनू जी आप सब्जियां जैसे राजमा, शिमला मिर्च, मूली, पालक, बैंगन, चप्पन कद्दू की बिजाई कर सकते है धन्यवाद
Posted by mahesh vishawakarma
Madhya Pradesh
16-01-2020 08:55 AM
mahesh ji aap jab genhu futare par ho to aap NPK 130045@1 kilo ko 150 litre pani ke hisab se spray karen,dhanywad
Posted by mahesh vishawakarma
Madhya Pradesh
16-01-2020 08:53 AM
अच्छे जल निकास वाली हल्की या भारी, रेतली और चिकनी मिट्टी ज़मीनें इसके लिए अच्छी मानी जाती हैं खेत में पानी खड़ा ना होने दें, क्योंकि यह फसल खड़े पानी को सहने योग्य नहीं है खेत को 2-3 बार जोत कर और सुहागे से समतल करके तैयार करें हल्दी की बिजाई के लिए बैड 15 सैं.मी. ऊंचे, 1 मीटर चौड़े और आवश्यकनुसार लंबे होने चाहिए दो बैडो.... (Read More)
अच्छे जल निकास वाली हल्की या भारी, रेतली और चिकनी मिट्टी ज़मीनें इसके लिए अच्छी मानी जाती हैं खेत में पानी खड़ा ना होने दें, क्योंकि यह फसल खड़े पानी को सहने योग्य नहीं है खेत को 2-3 बार जोत कर और सुहागे से समतल करके तैयार करें हल्दी की बिजाई के लिए बैड 15 सैं.मी. ऊंचे, 1 मीटर चौड़े और आवश्यकनुसार लंबे होने चाहिए दो बैडों के बीच 50 सैं.मी. का फासला होना चाहिए अधिक पैदावार लेने के लिए बिजाई अप्रैल के अंत में करें इसे पनीरी के साथ भी उगाया जा सकता है इसके लिए जून के पहले पखवाड़े तक पनीरी खेत में लगा दें पनीरी के लिए 35-45 दिनों के पौधों को खेत में लगा दें राईज़ोमस को पंक्तियों में बीजें और पंक्ति से पंक्ति का फासला 30 सैं.मी. और पौधों में 20 सैं.मी. का फासला रखें बिजाई के बाद खेत में 2.5 टन प्रति एकड़ स्ट्रा मलच डालें बीज की गहराई 3 सैं.मी. से ज्यादा नहीं होनी चाहिए इसकी बिजाई सीधे खेत में लगाकर या पनीरी लगाकर की जाती है बिजाई के लिए साफ-सुथरे ताजे और बीमारी रहित राईज़ोमस का प्रयोग करें बीज की मात्रा 6-8 क्विंटल प्रति एकड़ बहुत होती है बिजाई से पहले क्विनलफोस 25 ई.सी. को 20 मि.ली. + कार्बेनडाज़िम 10 ग्राम प्रति लीटर पानी में डालकर बीज का उपचार करें बाद में गांठों को 20 मिनट के लिए इस घोल में भिगोदें ताकि इन्हें फफूंद से बचाया जा सके नाइट्रोजन 10 किलो (25 किलो यूरिया), फासफोरस 10 किलो (60 किलो एस एस पी) और पोटाश 10 किलो (16 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश) की मात्रा प्रति एकड़ में प्रयोग करें सारी पोटाश और आधी फासफोरस बिजाई के समय डालें नाइट्रोजन दो हिस्सों में डालें, आधी बिजाई से 75 दिन बाद और बाकी नाइट्रोजन और आधी फासफोरस बिजाई के 3 महीने बाद डालें बिजाई के 2-3 दिनों के बाद पैंडीमैथालीन 30 ई.सी. 800 मि.ली. या मैटरीब्यूज़िन 70 डब्लयू पी 400 ग्राम को 200 लीटर पानी में डालकर स्प्रे करें नदीन नाशक के प्रयोग के बाद खेत को हरे पत्तों या धान की तूड़ी से ढक दें जड़ों के विकास के लिए बिजाई से 50-60 दिनों के बाद और फिर 40 दिनों के बाद जड़ों को मिट्टी लगाएं यह कम वर्षा वाली फसल है, इसलिए वर्षा के अनुसार सिंचाई करें हल्की ज़मीन में फसल को कुल 35-40 सिंचाइयों की जरूरत पड़ती है बिजाई के बाद फसल को 40-60 क्विंटल प्रति एकड़ हरे पत्तों से ढक दें हर बार खाद डालने के बाद 30 क्विंटल प्रति एकड़ मलच डालें किस्म के अनुसार 6-9 महीनों में कटाई करें पत्ते सूखने और पीले होने पर कटाई का अनुकूल समय होता है गांठों को उखाड़ कर बाहर निकालें और साफ करें गांठों को 2-3 दिनों के लिए छांव में सुखाएं इससे छिल्का सख्त हो जाता है और आसानी से उबलता है साफ करने के बाद गांठों को पानी में सोडियम बाइकार्बोनेट डालकर 1 घंटे के लिए उबालें गांठों को उबालने के लिए कड़ाही जैसे बर्तनों का प्रयोग करें अच्छी किस्म की हल्दी लेने के लिए झाग बनने, भाफ निकलने और महक आने तक उबालें उबालने के बाद इसे 10-15 दिनों तक सुखाएं सुखाने के बाद जाली, बोरियों या मशीन से चमकायें और आकार, बनतर और रंग के अनुसार बांटे

Posted by Baljinder Singh
Punjab
16-01-2020 08:51 AM
गेहूं को खाद की मात्रा 3 भागो में बांटकर 55 दिनों में पूरी करें
Posted by ਗੁਰਭੇਜ ਸਿੰਘ
Punjab
16-01-2020 08:49 AM
ਗੁਰਭੇਜ ਜੀ ਮੱਕੀ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਬਾਅਦ 2 ਮਹੀਨਿਆਂ ਤਕ ਕਟਾਈ ਦੇ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by Ganesh Sardan Jatt
Maharashtra
16-01-2020 08:43 AM
गणेश जी यह leaf miner का हमला है इसकी रोकथाम के लिए आप fenazaquin@2 ml को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद

Posted by Rajkaran Patel
Uttar Pradesh
16-01-2020 08:40 AM
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी ख.... (Read More)
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुमब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तहय उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तहय में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तहय लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है
Posted by Nirmal Singh
Punjab
16-01-2020 08:35 AM
ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ Vitum-H 5ml ਇੰਜੇਕਸ਼ਨ ਲਗਵਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਹ ਤੁਸੀ 2-2 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਫਰਕ ਨਾਲ 5 ਇੰਜੇਕਸ਼ਨ ਲਗਵਾਓ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ Lactomax tablet 10 ਗੋਲੀਆਂ ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ..
Posted by Neeraj Rathi
Uttar Pradesh
16-01-2020 08:28 AM
Neeraj ji M_45 ek fungicide hai jo fasl men fungus ki roktham ke liye istemal kiya jata hai.iski matra 400 gram ko prtai acre ke hisab se spray ki jati hai.dhanywad

Posted by Mohanpreet singh
Punjab
16-01-2020 08:23 AM
मोहनप्रीत जी उसे आप Vitol liquid 10-10ml सुबह शाम दें और Milkout पाउडर 15—15 ग्राम सुबह शाम दें इससे फर्क पड़ जाएगा
Posted by Neeraj Rathi
Uttar Pradesh
16-01-2020 08:18 AM
नीरज जी मौसम विभाग के अनुसार आज आपके इलाके में बारिश होने की सम्भावना है और अगले 3 -4 दिन बादलवाई रहने की सम्भावना है धन्यवाद

Posted by संजीव
Karnataka
16-01-2020 08:18 AM
संजीव जी आप इसके पत्तों के नीचे मच्छर का हमला चेक करें अगर मौजूद है तो आप imidacloprid @1.5 ml को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद

Posted by Aman Sharma
Punjab
16-01-2020 08:13 AM
ਹਾਂਜੀ ਤੁਸੀ ਗੱਭਣ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ LACTIN ਗੋਲੀਆਂ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਇਸਦਾ ਕੋਈ ਨੁਕਸਾਨ ਨਹੀਂ ਹੈ
Posted by Neeraj Rathi
Uttar Pradesh
16-01-2020 08:02 AM
बिजाई से 10 दिन पहले 20 टन रूड़ी की खाद डालें नाइट्रोजन 40 किलो(यूरिया 90 किलो), फासफोरस 20 किलो(सिंगल सुपर फासफेट 125 किलो) और पोटाश 20 किलो(मिउरेट ऑफ़ पोटाश 35 किलो) प्रति एकड़ डालें फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा रोपण के समय डालें बाकि बची हीउ नाइट्रोजन टॉप ड्रेसिंग (मिट्टी में मिलाना) के तौर प.... (Read More)
बिजाई से 10 दिन पहले 20 टन रूड़ी की खाद डालें नाइट्रोजन 40 किलो(यूरिया 90 किलो), फासफोरस 20 किलो(सिंगल सुपर फासफेट 125 किलो) और पोटाश 20 किलो(मिउरेट ऑफ़ पोटाश 35 किलो) प्रति एकड़ डालें फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा रोपण के समय डालें बाकि बची हीउ नाइट्रोजन टॉप ड्रेसिंग (मिट्टी में मिलाना) के तौर पर रोपण के चार हफ्ते बाद डालें
पानी में घुलनशील खादें: रोपण से 10-15 दिन बाद सूक्ष्म-तत्व 2.5-3 ग्राम प्रति लीटर पानी के साथ 19:19:19 की स्प्रे करें
Posted by Neeraj Rathi
Uttar Pradesh
16-01-2020 08:01 AM
प्याज़ एक प्रसिद्ध व्यापक सब्जी वाली प्रजाति है इसकी खेती अलग-अलग किस्म की मिट्टी जैसे की रेतली दोमट, चिकनी, गार और भारी मिट्टी में की जा सकती है यह गहरी दोमट और जलोढ़ मिट्टी, जिसका निकास प्रबंध बढ़िया, नमी को बरकरार रखने की समर्थता, जैविक तत्वों वाली मिट्टी में बढ़िया परिणाम देती है विरली और रेतली मिट्टी इसकी ख.... (Read More)
प्याज़ एक प्रसिद्ध व्यापक सब्जी वाली प्रजाति है इसकी खेती अलग-अलग किस्म की मिट्टी जैसे की रेतली दोमट, चिकनी, गार और भारी मिट्टी में की जा सकती है यह गहरी दोमट और जलोढ़ मिट्टी, जिसका निकास प्रबंध बढ़िया, नमी को बरकरार रखने की समर्थता, जैविक तत्वों वाली मिट्टी में बढ़िया परिणाम देती है विरली और रेतली मिट्टी इसकी खेती के लिए बढ़िया नहीं मानी जाती है, क्योंकि मिट्टी के घटिया जमाव के कारण इसमें गांठों का उत्पादन सही नहीं होता है इसकी खेती के लिए मिट्टी का pH 6-7 होना चाहिए प्रसिद्ध किस्में:-alyanpur Red Round: यह उत्तर प्रदेश की प्रसद्धि किस्म है इसकी गांठे भूरे रंग की और गोलाकार आकार की होती हैं इसके पौधे 150-160 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं इसकी औसतन पैदावार 8-10 टन प्रति एकड़ होती है Bhima Shakti: यह खरीफ के साथ साथ रबी के मौसम में उगाने के लिए उपयुक्त है यह किस्म रोपाई के 130 दिन बाद कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावारा 170 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Arka Kalyan: इसकी गांठे गहरे गुलाबी रंग की होती हैं इसकी औसतन पैदावार 135 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa White Round: इसकी गांठे सफेद, गोल और समतल होती हैं इसकी औसतन पैदावार 120 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa white flat: इसकी गांठे सफेद, चपटी और मध्यम से बड़े आकार की होती हैं यह किस्म डीहाइड्रेशन के लिए उपयुक्त है मिट्टी को भुरभुरा बनाने के लिए तीन-चार बार गहराई से जोताई करें मिट्टी में जैविक तत्वों की मात्रा बढ़ाने के लिए रूड़ी की खाद डालें फिर खेत को छोटे-छोटे प्लाटों में बांट दे नर्सरी तैयार करने के उचित समय मध्य-अक्तूबर से मध्य-नवबंर होता है नए पौधे मध्य-दिसंबर से मध्य-जनवरी तक रोपाई के लिए तैयार हो जाते है रोपाई के लिए 10-15 सैं.मी. कद के पौधे चुनें खरीफ के मौसम में रोपाई के लिए मई से जून का महीना नर्सरी तैयार करने के लिए उपयुक्त होता है बिजाई के 6-8 सप्ताह बाद नए पौधे रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं जुलाई -अगस्त के महीने में रोपण कर दें रोपण के समय, पंक्तियों के बीच 15 सैं.मी. और पौधों के बीच 10 सैं.मी. का फासला रखें नर्सरी में बीज 1-2 सैं.मी. गहराई पर बोयें बिजाई के लिए रोपण विधि का प्रयोग करें एक एकड़ के लिए 2-3 किलो बीज का प्रयोग करें उखेड़ा रोग और कांव-गियारी से बचाव के लिए थीरम 2 ग्राम+बैनोमाइल 50 डब्लयू पी 1 ग्राम प्रति लीटर पानी से प्रति किलो बीजों का उपचार करें रासायनिक उपचार के बाद बायो एजेंट ट्राईकोडर्मा विराइड 2 ग्राम के साथ प्रति किलो बीजों का उपचार करने की सिफारिश की जाती है इस तरह करने से नए पौधे मिट्टी से पैदा होने वाली और अन्य बीमारीयों से बच जाते है बिजाई से 10 दिन पहले 20 टन रूड़ी की खाद डालें नाइट्रोजन 30 किलो(यूरिया 65 किलो), फासफोरस 16 किलो(सिंगल सुपर फासफेट 100 किलो) और पोटाश 16 किलो(मिउरेट ऑफ़ पोटाश 30 किलो) प्रति एकड़ डालें फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा रोपण के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटकर रोपाई के बाद टॉप ड्रेसिंग के तौर पर 30वें और 45वें दिन डालें मिट्टी की किसम और जलवायु के आधार पर सिंचाई की मात्रा और आवर्ती का फैसला करें आमतौर पर, इसे 5-8 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है पहली सिंचाई बिजाई के तुरंत बाद करें और दूसरी सिंचाई रोपाई के तीन दिन बाद करें बाकी की सिंचाई आवश्यकता और मिट्टी में नमी के आधार पर 7-10 दिनों के अंतराल पर करें पुटाई के 10-15 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें अत्याधिक सिंचाई ना करें शुरुआत में नए पौधे धीरे-धीरे बढ़ते है इसलिए नुकसान से बचाव के लिए गोड़ाई की जगह रासायनिक नदीन-नाशक का प्रयोग करें रोकथाम के लिए बिजाई से 72 घंटे में पेंडीमैथालीन(स्टंप) 1 लीटर को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में स्प्रे करें नदीनों के अंकुरण उपरांत बिजाई से 7 दिन बाद आक्सीफ्लोरफैन 425 मि.ली. को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में स्प्रे करें नदीनों की रोकथाम के लिए 2-3 गोड़ाईयों की सिफारिश की जाती है पहली गोड़ाई बिजाई से एक महीने बाद और दूसरी गोड़ाई, पहली से एक महीने बाद करें सही समय पर पुटाई करना बहुत जरूरी है पुटाई का समय किस्म,ऋतु,मंडी रेट आदि पर निर्भर करता है 50% पौधे की पत्तियां नीचे की तरफ गिरना दर्शाता है कि फसल पुटाई के लिए तैयार है फसल की पुटाई हाथों से प्याज़ को उखाड़ कर की जाती है पुटाई के बाद इनको 2-3 दिन के लिए अनावश्यक नमी निकालने के लिए खेत में छोड़ दे धन्यवाद
Posted by Deepak Dhiman
Haryana
16-01-2020 08:01 AM
उसे आप Dettol 100 मि.ली दो दिन दें इसके साथ आप Mamidium पाउडर 50 ग्राम रोजाना दें और 250ग्राम चीनी और 250 ग्राम डालडा घी अच्छी तरह मिक्स करके 3 दिन दें और मिठा सोडा दो चम्मच रोजाना दें इससे फर्क पड़ जाएगा

Posted by Gopal jat
Rajasthan
16-01-2020 07:58 AM
Gopal ji aap iske patton ke neeche machar ka hamla check karen agar maujood hai to aap iske uper imidacloprid@15 ml ko prtai litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by Sharry Ahluwalia
Punjab
16-01-2020 07:57 AM
अच्छे जल निकास वाली गहरी, दोमट मिट्टी जिसमें भूमिगत-जल का स्तर ज़मीन से 1.5-2 मी. के नीचे हो और अच्छी जल धारण क्षमता वाली ज़मीन गन्ने की खेती के लिए लाभदायक है यह फसल काफी अम्लीय और खारेपन को सहन कर सकती है इसलिए इसे मिट्टी जिसका pH 5 से 8.5 हो, में उगाई जा सकती है यदि मिट्टी का pH 5 से कम हो तो इसमें चूना (कली) डालें और यदि मिट.... (Read More)
अच्छे जल निकास वाली गहरी, दोमट मिट्टी जिसमें भूमिगत-जल का स्तर ज़मीन से 1.5-2 मी. के नीचे हो और अच्छी जल धारण क्षमता वाली ज़मीन गन्ने की खेती के लिए लाभदायक है यह फसल काफी अम्लीय और खारेपन को सहन कर सकती है इसलिए इसे मिट्टी जिसका pH 5 से 8.5 हो, में उगाई जा सकती है यदि मिट्टी का pH 5 से कम हो तो इसमें चूना (कली) डालें और यदि मिट्टी का pH 9.5 से ज्यादा हो तो इसमें जिप्सम डालें आप इसकी किस्मे जैसे Co 8014 (Mahalakshami) ,Vasant 1,Co 86032 ,Co 92005 की बिजाई कर सकते है पतझड़ के मौसम में 15 अक्तूबर से २० नवंबर तक बिजाई की जाती है, बसंत के मौसम में बिजाई 15 फरवरी तक और गर्मियों के मौसम में 15 जुलाई से 15 सितंबर तक बिजाई की जाती है बिजाई के लिए सुधरे ढंग जैसे कि (गहरी खालियां, मेंड़ बनाकर,पंक्तियों में जोड़े बनाकर और गड्ढा खोदकर बिजाई ) प्रयोग किये जाते हैं 1) खालियां और मेंड़ बनाकर सूखी बिजाई: ट्रैक्टर द्वारा मेंड़ बनाने वाली मशीन की मदद से मेंड़ और खालियां बनाएं और इन मेड़ और खालियों में बिजाई करें मेड़ और खालियों में 90 सैं.मी. का फासला होना चाहिए गन्ने की गुलियों को मिट्टी में दबाएं और उसके बाद हल्की सिंचाई करें 2) पंक्तियों के जोड़े बनाकर बिजाई: खालियां बनाने वाले यंत्र के प्रयोग से खेत में 150 सैं.मी. के फासले पर खालियां बनाएं और उनमें 30:30-90-30:30 सैं.मी. के फासले पर गन्ने की रोपाई करें इस तरीके से मेड़ वाली बिजाई से अधिक पैदावार मिलती है 3) गड्ढा खोदकर बिजाई: गड्ढे खोदने वाली मशीन से 60 सैं.मी. व्यास के 30 सैं.मी. गहरे गड्ढे खोदें जिनमें 60 सैं.मी. का फासला हो इससे गन्ना 2-3 बार उगाया जा सकता है और मेड़ वाली बिजाई से 25-50 % अधिक पैदावार आती है B) एक आंख वाले गन्नों की बिजाई: रोपाई के लिए सेहतमंद गुलियां चुनें और 75-90 सैं.मी. के अंतर पर खालियों में बिजाई करें गुलियां एक आंख वाली होनी चाहिए यदि गन्ने के ऊपरी भाग में छोटी डलियां चुनी गई हों तो बिजाई 6 -9 सैं.मी. के अंतर पर करें फसल के अच्छे उगने के लिए आंखों को ऊपर की ओर रखें और हल्की सिंचाई करें पतझड़ के मौसम में 14500-16500 तीन आंख वाले बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें और बसंत के मौसम में 16500-25000 तीन आंख वाले बीज और 21600-25000 दो आंख वाले बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें गन्ने में नदीनों के कारण 12-72 % पैदावार का नुकसान होता है शुरूआती 60-120 दिनों तक नदीनों की रोकथाम बहुत जरूरी है इसलिए रोपाई के बाद 3-4 महीने बाद फसल की नदीनों की रोकथाम करें नीचे लिखे तरीकों से नदीनों को रोका जा सकता है 1) हाथों से गोडाई करके: गन्ना एक व्यापक जगह लेने वाली फसल है इसलिए नदीनों को गोडाई करके रोका जा सकता है इसके इलावा प्रत्येक सिंचाई के बाद 3-4 गोडाई जरूरी है 2) काश्तकारी ढंग: इस प्रक्रिया में खेती के तरीके, अंतरफसली और मलचिंग तरीके शामिल हैं बहुफसली के कारण नदीनों का हमला ज्यादा होता है इसकी रोकथाम के लिए चारे वाली फसलें और हरी खाद वाली फसलों के आधार वाला फसली चक्र गन्ने में नदीनों की रोकथाम करता है गन्ना एक व्यापक जगह लेने वाली भी फसल है जिससे नदीनों के हमले का खतरा भी ज्यादा होता है यदि गन्ने को कम समय वाली फसलों के साथ अंतरफसली किया जाए तो इससे नदीनों को कम किया जा सकता है और ज्यादा लाभ भी मिल सकता है गन्ने के अंकुरन के बाद गन्ने की कतारों में 10-12 सैं.मी. मोटी तह बिछा दी जाती है यह सूर्य की रोशनी को सोखता है जिससे नदीन कम होते हैं यह मिट्टी में नमी को भी बचाता है 3) रासायनिक तरीके: नदीनों की रोकथाम के लिए, सिमाज़ीन या एट्राज़ीन 600-800 ग्राम या मैट्रीब्यूज़िन 800 ग्राम या ड्यूरॉन 1-1.2 किलोग्राम प्रति एकड़ में बिजाई के तुरंत बाद प्रयोग करना चाहिए इसके इलावा चौड़े पत्ते वाले नदीनों की रोकथाम के लिए 2, 4-डी@ 300-400 ग्राम का प्रयोग प्रति एकड़ के हिसाब से करें नाइट्रोजन 62 किलो, फासफोरस 32 किलो और पोटाश 42 किलो प्रति एकड़ में डालें बिजाई से पहले नाइट्रोजन की 1/3 मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा डालें बाकी बची नाइट्रोजन की दो मात्रा को टॉप ड्रेसिंग के तौर पर डालें नाइट्रोजन की पहली मात्रा को बीज वाली आंख के अंकुरण के समय और दूसरी मात्रा को बीज अंकुरण के 45 दिन बाद डालें 3 वर्षों के बाद गन्ने की गुलियों में 40-50 क्विंटल गाय का गोबर प्रति एकड़ में डालें पतझड़ के मौसम में 90-100 दिनों में नाइट्रोजन को टॉप ड्रेसिंग के तौर पर डालें और बसंत के मौसम में 150-160 दिन बाद डालनी चाहिए सिंचाई की संख्या मिट्टी की किस्म और पानी की उपलब्धता पर निर्भर करती है गर्मी के महीने में गर्म हवाओं और सूखे में वृद्धि होने के कारण फसल को पानी की जरूरत पड़ती है पहली सिंचाई फसल के 20-25 % अंकुरित होने पर करें मानसून में गन्ने को पानी और बारिश के आधार पर लगाएं कम वर्षा में सिंचाई 10 दिनों के अंतराल पर करें इसके बाद सिंचाई के अंतराल को बढ़ाकर 20-25 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें जमीन में नमी संभालने के लिए गन्ने की पंक्तियों में मलचिंग का प्रयोग करें अप्रैल जून के महीने में पानी की कमी ना होने दें इससे पैदावार कम होगी इसके इलावा बारिश के दिनों में पानी ना खड़ा होने दें जोताई का समय, वृद्धि का समय और अधिक विकास का समय सिंचाई के लिए बहुत नाज़ुक होता है मिट्टी को मेंड़ पर चढ़ाना: कसी की मदद से खालियों में और पौधे के किनारों पर मिट्टी चढ़ाई जाती है यह मिट्टी में अच्छी तरह से तैयार की गई खाद को अच्छी तरह से मिश्रित होने में मदद करती है पौधे को सहारा देने और उसे गिरने से बचाने में भी मदद करती है ज्यादा पैदावार और चीनी प्राप्त करने के लिए गन्ने की सही समय पर कटाई जरूरी है समय से पहले या बाद में कटाई करने से पैदावार पर प्रभाव पड़ता है किसान शूगर रीफरैक्टोमीटर का प्रयोग करके कटाई का समय पता लगा सकते हैं गन्ने की कटाई द्राती की सहायता से की जाती है गन्ना धरती से ऊपर थोड़ा हिस्सा छोड़कर काटा जाता है क्योंकि गन्ने में चीनी की मात्रा ज्यादा होती है कटाई के बाद गन्ना फैक्टरी में लेकर जाना जरूरी होता है धन्यवाद

Posted by lalit
Uttar Pradesh
16-01-2020 07:49 AM
lalit ji up me Allu ka rate 750 - 1600 chal raha hai, Thankyou.

Posted by manvir singh
Punjab
16-01-2020 07:43 AM
manvir ji tuc kisman jive G 48,W 22 di bijai kar sakde ho.dhanwad
Posted by कुलदीप सिंह
Uttar Pradesh
16-01-2020 07:40 AM
कुलदीप जी यह फंगस के कारण हो रहा है इसके लिए आप mancozeb @4 ग्राम को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद

Posted by shiv kant
Uttar Pradesh
16-01-2020 07:39 AM
रबी के मौसम में खेती के लिए बिजाई 15 अक्तूबर से 10 नवंबर तक पूरी कर लें मेंड़ों पर बिजाई करना ज्यादा लाभदायक रहता है क्योंकि इससे फसल को जल्दी अंकुरित होने में मदद मिलती है और फसल ठंड से भी बची रहती है सिंचित क्षेत्रों में बिजाई मॉनसून के शुरू होने से 10-15 दिन पहले करें इससे उपज में 10-15 प्रतिशत वृद्धि होगी बारानी क.... (Read More)
रबी के मौसम में खेती के लिए बिजाई 15 अक्तूबर से 10 नवंबर तक पूरी कर लें मेंड़ों पर बिजाई करना ज्यादा लाभदायक रहता है क्योंकि इससे फसल को जल्दी अंकुरित होने में मदद मिलती है और फसल ठंड से भी बची रहती है सिंचित क्षेत्रों में बिजाई मॉनसून के शुरू होने से 10-15 दिन पहले करें इससे उपज में 10-15 प्रतिशत वृद्धि होगी बारानी क्षेत्रों में बिजाई मॉनसून के शुरू होने पर करें ताकि मिट्टी में उचित नमी विकसित हो सके उचित अंकुरण के लिए मिट्टी में नमी होना आवश्यक है अच्छी वृद्धि और अच्छी उपज के लिए पौधों में सही मात्रा का होना जरूरी है खरीफ की फसल के लिए कतार से कतार में 70 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 22 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें आसानी से अंकुरण के लिए समतल मिट्टी पर बीजों को 3-5 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई हाथों से गड्ढा खोदकर या आधुनिक तरीके से ट्रैक्टर और सीड डरिल की सहायता से मेंड़ बनाकर की जा सकती है
Posted by sk pathak
Uttar Pradesh
16-01-2020 07:36 AM
गर्मियों के मौसम में फरवरी महीने के दूसरे पखवाड़े में बिजाई पूरी कर लें देरी से बिजाई ना करें क्योंकि फसल की कटाई की अवस्था में बारिश के आने पर उपज गंभीर रूप से प्रभावित होगी
बारानी क्षेत्रों के लिए बिजाई का उपयुक्त समय जुलाई के आखिरी सप्ताह से लेकर अगस्त का दूसरे सप्ताह तक का है

Posted by Pushpendra singh
Uttar Pradesh
16-01-2020 07:36 AM
आप देसी मुर्गी के चूज़े लेने के लिए Sumit Kumar 8006000291, 7906547529 Sumit Kumar Poultry Farm से संपर्क कर सकते है

Posted by yashpal singh
Uttar Pradesh
16-01-2020 07:10 AM
आप देसी मुर्गी के चूज़े लेने के लिए Sumit Kumar 8006000291, 7906547529 Sumit Kumar Poultry Farm से संपर्क कर सकते है
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