
Posted by Rajkaran Patel
Uttar Pradesh
16-01-2020 01:40 PM
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी ख.... (Read More)
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुमब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तहय उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तहय में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तहय लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है
Posted by ਬਲਵਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਮੰਡੇਰ
Punjab
16-01-2020 01:38 PM
ਬਲਵਿੰਦਰ ਜੀ ਤੁਸੀ ਯੂਰੀਆ ਦੀ ਮਾਤਰਾ 6 ਕਿਲੋ ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਰੋਕਥਾਮ ਹੋ ਜਾਏਗੀ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by shivjangra
Haryana
16-01-2020 01:37 PM
shivjangra ji kripya aap swal vistar se pooche ke aap konsi fasl ke bhav ke bare men jankari lena chhate hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake,dhanywad
Posted by shyam patel
Rajasthan
16-01-2020 01:36 PM
श्याम जी आप इसके ऊपर NPK 191919 @1 किलो को 150 लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by gurdeep dhaliwal
Punjab
16-01-2020 01:34 PM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਗੁੱਲੀ ਡੰਡੇ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਲੀਡਰ, ਟੌਪਿਕ, ਦੀ ਵਰਤੋ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਚੌੜੇ ਪੱਤਿਆਂ ਵਾਲੇ ਨਦੀਨ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ 2,4D 250 ml ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਟੌਪਿਕ 15 ਡਬਲਿਊ ਪੀ (ਕਲੋਡੀਨਾਫਾਪ) 160 ਗ੍ਰਾਮ ਬਿਜਾਈ ਦੇ 30 ਤੋਂ 35 ਦਿਨਾਂ ਅੰਦਰ 150 ਪਾਣੀ/ਏਕੜ •• ਐਕਸੀਅਲ 5 ਈ ਸੀ (ਪਿਨੌਕਸਾਡਿਨ) 400 ਮਿਲੀਲਿਟਰ 4) ਲੀਡਰ/ਮਾਰਕਸਲਫੋ 75 ਡਬਲਿਊ ਜੀ (ਸਲਫੋਸਲਫੂਰਾਨ) 13 ਗ੍ਰਾਮ •ਟੋਟਲ/ਮਾਰਕਪਾਵਰ 75 ਡਬਲਿਊ .... (Read More)
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਗੁੱਲੀ ਡੰਡੇ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਲੀਡਰ, ਟੌਪਿਕ, ਦੀ ਵਰਤੋ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਚੌੜੇ ਪੱਤਿਆਂ ਵਾਲੇ ਨਦੀਨ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ 2,4D 250 ml ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਟੌਪਿਕ 15 ਡਬਲਿਊ ਪੀ (ਕਲੋਡੀਨਾਫਾਪ) 160 ਗ੍ਰਾਮ ਬਿਜਾਈ ਦੇ 30 ਤੋਂ 35 ਦਿਨਾਂ ਅੰਦਰ 150 ਪਾਣੀ/ਏਕੜ •• ਐਕਸੀਅਲ 5 ਈ ਸੀ (ਪਿਨੌਕਸਾਡਿਨ) 400 ਮਿਲੀਲਿਟਰ 4) ਲੀਡਰ/ਮਾਰਕਸਲਫੋ 75 ਡਬਲਿਊ ਜੀ (ਸਲਫੋਸਲਫੂਰਾਨ) 13 ਗ੍ਰਾਮ •ਟੋਟਲ/ਮਾਰਕਪਾਵਰ 75 ਡਬਲਿਊ ਡੀ ਜੀ (ਸਲਫੋਸਲਫੂਰਾਨ+ਮੈਟਸਫੂਰਾਨ) 16 ਗ੍ਰਾਮ •ਐਟਲਾਂਟਿਸ 3.6 ਡਬਲਿਊ ਡੀ ਜੀ (ਮਿਜ਼ੋਸਲਫੂਰਾਨ+ਆਇਡੋਸਲਫੂਰਾਨ) 160 ਗ੍ਰਾਮ 6 ਸ਼ਗੁਨ 21-11 (ਮੈਟਰੀਬਿਊਜ਼ਿਨ+ਕਲੋਡੀਨਾਫਾਪ) 200 ਗ੍ਰਾਮ •ਏ ਸੀ ਐੱਮ-9 (ਕਲੋਡੀਨਾਫਾਪ+ਮੈਟਰੀਬਿਊਜ਼ਿਨ) 240 ਗ੍ਰਾਮ *ਨੋਟ* 1.ਸ਼ਗਨ 21-11 ਨੂੰ pbw 550 ਤੇ ਉਨਤ pbw550 ਵਿਚ ਨਾ ਛਿੜਕੋ 2. ਸਗਨ 21-11 ਦਾ ਹਲਕੀਆਂ ਜਮੀਨਾ ਵਿਚ ਛਿੜਕਾ ਨਾ ਕਰੋ 3.ਵਡਾਣਕ ਕਣਕ ਵਿਚ ਸ਼ਗਨ 21-11 ਨਾ ਵਰਤੋਂ 4.ਟੋਟਲ/ ਮਾਰਕਪਾਵਰ ਵਾਲੇ ਖੇਤਾਂ ਵਿੱਚ ਚਰ੍ਹੀ (ਜਵਾਰ) ਅਤੇ ਮੱਕੀ ਨਾ ਬੀਜੋ

Posted by jagroop sandhu
Punjab
16-01-2020 01:24 PM
ਉਸ ਨੂੰ Gynarich 5ml ਇੰਜੇਕਸ਼ਨ ਲਗਾਓ ਅਤੇ 7ਵੇ ਦਿਨ Pragma 2ml ਇੰਜੇਕਸ਼ਨ ਲਗਾਓ ਅਤੇ ਫਿਰ 9ਵੇ ਦਿਨ Gynarich 2.5ml ਇੰਜੇਕਸ਼ਨ ਲਗਾਓ ਅਤੇ 10ਵੇ, 11ਵੇ ਦਿਨ ਉਸ ਨੂੰ ਟੀਕਾ ਭਰਵਾਂ ਦਿਓ ਅਤੇ pregstay gold powder 30gm ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ..
Posted by Neeraj Rathi
Uttar Pradesh
16-01-2020 01:23 PM
Neeraj ji sujhav dene ke liye dhanywad aap isi trah apni kheti se jude rahe aur feedback dete rahe.dhanywad
Posted by ਇਕਬਾਲ ਸਿੰਘ ਢਿੱਲੋਂ
Punjab
16-01-2020 01:23 PM
ਇਕਬਾਲ ਜੀ ਤੁਸੀ ਸੁੰਡੀ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਦੇ ਲਈ quinalphos @800ml ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by yOgesh
Maharashtra
16-01-2020 01:22 PM
योगेश जी यदि आप 10 पशुओं के लिए शेड तैयार करना चाहते है तो उसकी लंबाई 80 फीट और चौड़ाई 50 फीट जिसके लिए टोटल 4000 वर्ग फीट जगह की जरूरत होती है इसमें से ढकी हुई जगह की लंबाई 63 फीट और चौड़ाई 15 फीट चाहिए जिसमें टोटल ढकी हुई जगह 945 वर्ग फीट चाहिए
Posted by Fefar
Gujarat
16-01-2020 01:11 PM
Fefar ji aap krele ki kisam PUSA hybrid 2 ki bijai kar sakte hai.dhanywad

Posted by RISHI KUMAR
Uttar Pradesh
16-01-2020 01:10 PM
Rishi ji yeh fungus hai kripya btaye ke aap ise khaad ke taur par kya kya daalte hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake,dhanywad

Posted by Anil Singh
Uttar Pradesh
16-01-2020 01:05 PM
एक एकड़ में बिजाई के लिए 2-2.5 किलो बीज पर्याप्त होते हैं बीज को मिट्टी में पैदा होने वाली फंगस से बचाने के लिए कार्बेन्डाजिम 2 ग्राम के साथ प्रति किलो बीज का उपचार करें रसायनिक उपचार के बाद ट्राइकोडर्मा विराइड 4 ग्राम या सिओडोमोनस फ्लूरोसेंस 10 ग्राम के साथ प्रति किलो बीज का उपचार करें

Posted by Shoaib Khan
Bihar
16-01-2020 01:01 PM
उत्तर में यह वर्षा और बसंत के मौसम में उगाई जाती है खरीफ के मौसम में, इसकी बिजाई जून-जुलाई के महीने और बसंत ऋतु में फरवरी-मार्च के महीने में की जाती है
Posted by Madhuvan singh
Rajasthan
16-01-2020 12:56 PM
मधुवन जी आप अप्रैल में सब्जियां जैसे चौलाई, मूली की बिजाई कर सकते है धन्यवाद

Posted by Gurdeep Singh
Punjab
16-01-2020 12:50 PM
ਗੁਰਦੀਪ ਜੀ ਤੁਸੀ ਪੋਲਟਰੀ ਫਾਰਮਿੰਗ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈਣ ਲਈ ਨਜ਼ਦੀਕੀ ਕੇਵੀਕੇ ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਤੁਸੀ ਉੱਥੇ ਆਪਣਾ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਵਾਲਾ ਫਾਰਮ ਭਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਫਿਰ ਜਦੋ ਵੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਹੋਵੇਗੀ ਉਹ ਤੁਹਾਨੂੰ ਫੋਨ ਕਰਕੇ ਦੱਸ ਦੇਣਗੇ, ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈਣ ਲਈ ਤੁਸੀ KRISHI VIGYAN KENDRA LUDHIANA
Near Police Station, Ludhiana Chandigarh Road Samrala (District Ludhiana) Pincode: 141114, Phone:- 01628-261597 ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ
Posted by SANA NURSERY
Uttar Pradesh
16-01-2020 12:43 PM
सना जी कृपया बताएं कि टमाटर की फसल की बिजाई के बारे में जानकारी लेना चाहते है या इसमें कोई बीमारी का हमला है ताकि आपको उसके हिसाब से जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by lovely
Punjab
16-01-2020 12:40 PM
ਲਵਲੀ ਜੀ ਤੁਸੀ ਜਨਵਰੀ ਵਿਚ ਸਬਜ਼ੀਆਂ ਜਿਵੇ ਰਾਜਮਾਹ , ਸ਼ਿਮਲਾ ਮਿਰਚ , ਮੂਲੀ , ਪਾਲਕ , ਬੈਂਗਨ , ਚੱਪਣ ਕੱਦੂ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ

Posted by Amit Kumar Mishra
Uttar Pradesh
16-01-2020 12:39 PM
अच्छे जल निकास वाली गहरी, दोमट मिट्टी जिसमें भूमिगत-जल का स्तर ज़मीन से 1.5-2 मी. के नीचे हो और अच्छी जल धारण क्षमता वाली ज़मीन गन्ने की खेती के लिए लाभदायक है यह फसल काफी अम्लीय और खारेपन को सहन कर सकती है इसलिए इसे मिट्टी जिसका pH 5 से 8.5 हो, में उगाई जा सकती है यदि मिट्टी का pH 5 से कम हो तो इसमें चूना (कली) डालें और यदि मिट.... (Read More)
अच्छे जल निकास वाली गहरी, दोमट मिट्टी जिसमें भूमिगत-जल का स्तर ज़मीन से 1.5-2 मी. के नीचे हो और अच्छी जल धारण क्षमता वाली ज़मीन गन्ने की खेती के लिए लाभदायक है यह फसल काफी अम्लीय और खारेपन को सहन कर सकती है इसलिए इसे मिट्टी जिसका pH 5 से 8.5 हो, में उगाई जा सकती है यदि मिट्टी का pH 5 से कम हो तो इसमें चूना (कली) डालें और यदि मिट्टी का pH 9.5 से ज्यादा हो तो इसमें जिप्सम डालें आप इसकी किस्मे जैसे Co 8014 (Mahalakshami) ,Vasant 1,Co 86032 ,Co 92005 की बिजाई कर सकते है पतझड़ के मौसम में 15 अक्तूबर से २० नवंबर तक बिजाई की जाती है, बसंत के मौसम में बिजाई 15 फरवरी तक और गर्मियों के मौसम में 15 जुलाई से 15 सितंबर तक बिजाई की जाती है बिजाई के लिए सुधरे ढंग जैसे कि (गहरी खालियां, मेंड़ बनाकर,पंक्तियों में जोड़े बनाकर और गड्ढा खोदकर बिजाई ) प्रयोग किये जाते हैं 1) खालियां और मेंड़ बनाकर सूखी बिजाई: ट्रैक्टर द्वारा मेंड़ बनाने वाली मशीन की मदद से मेंड़ और खालियां बनाएं और इन मेड़ और खालियों में बिजाई करें मेड़ और खालियों में 90 सैं.मी. का फासला होना चाहिए गन्ने की गुलियों को मिट्टी में दबाएं और उसके बाद हल्की सिंचाई करें 2) पंक्तियों के जोड़े बनाकर बिजाई: खालियां बनाने वाले यंत्र के प्रयोग से खेत में 150 सैं.मी. के फासले पर खालियां बनाएं और उनमें 30:30-90-30:30 सैं.मी. के फासले पर गन्ने की रोपाई करें इस तरीके से मेड़ वाली बिजाई से अधिक पैदावार मिलती है 3) गड्ढा खोदकर बिजाई: गड्ढे खोदने वाली मशीन से 60 सैं.मी. व्यास के 30 सैं.मी. गहरे गड्ढे खोदें जिनमें 60 सैं.मी. का फासला हो इससे गन्ना 2-3 बार उगाया जा सकता है और मेड़ वाली बिजाई से 25-50 % अधिक पैदावार आती है B) एक आंख वाले गन्नों की बिजाई: रोपाई के लिए सेहतमंद गुलियां चुनें और 75-90 सैं.मी. के अंतर पर खालियों में बिजाई करें गुलियां एक आंख वाली होनी चाहिए यदि गन्ने के ऊपरी भाग में छोटी डलियां चुनी गई हों तो बिजाई 6 -9 सैं.मी. के अंतर पर करें फसल के अच्छे उगने के लिए आंखों को ऊपर की ओर रखें और हल्की सिंचाई करें पतझड़ के मौसम में 14500-16500 तीन आंख वाले बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें और बसंत के मौसम में 16500-25000 तीन आंख वाले बीज और 21600-25000 दो आंख वाले बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें गन्ने में नदीनों के कारण 12-72 % पैदावार का नुकसान होता है शुरूआती 60-120 दिनों तक नदीनों की रोकथाम बहुत जरूरी है इसलिए रोपाई के बाद 3-4 महीने बाद फसल की नदीनों की रोकथाम करें नीचे लिखे तरीकों से नदीनों को रोका जा सकता है 1) हाथों से गोडाई करके: गन्ना एक व्यापक जगह लेने वाली फसल है इसलिए नदीनों को गोडाई करके रोका जा सकता है इसके इलावा प्रत्येक सिंचाई के बाद 3-4 गोडाई जरूरी है 2) काश्तकारी ढंग: इस प्रक्रिया में खेती के तरीके, अंतरफसली और मलचिंग तरीके शामिल हैं बहुफसली के कारण नदीनों का हमला ज्यादा होता है इसकी रोकथाम के लिए चारे वाली फसलें और हरी खाद वाली फसलों के आधार वाला फसली चक्र गन्ने में नदीनों की रोकथाम करता है गन्ना एक व्यापक जगह लेने वाली भी फसल है जिससे नदीनों के हमले का खतरा भी ज्यादा होता है यदि गन्ने को कम समय वाली फसलों के साथ अंतरफसली किया जाए तो इससे नदीनों को कम किया जा सकता है और ज्यादा लाभ भी मिल सकता है गन्ने के अंकुरन के बाद गन्ने की कतारों में 10-12 सैं.मी. मोटी तह बिछा दी जाती है यह सूर्य की रोशनी को सोखता है जिससे नदीन कम होते हैं यह मिट्टी में नमी को भी बचाता है 3) रासायनिक तरीके: नदीनों की रोकथाम के लिए, सिमाज़ीन या एट्राज़ीन 600-800 ग्राम या मैट्रीब्यूज़िन 800 ग्राम या ड्यूरॉन 1-1.2 किलोग्राम प्रति एकड़ में बिजाई के तुरंत बाद प्रयोग करना चाहिए इसके इलावा चौड़े पत्ते वाले नदीनों की रोकथाम के लिए 2, 4-डी@ 300-400 ग्राम का प्रयोग प्रति एकड़ के हिसाब से करें नाइट्रोजन 62 किलो, फासफोरस 32 किलो और पोटाश 42 किलो प्रति एकड़ में डालें बिजाई से पहले नाइट्रोजन की 1/3 मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा डालें बाकी बची नाइट्रोजन की दो मात्रा को टॉप ड्रेसिंग के तौर पर डालें नाइट्रोजन की पहली मात्रा को बीज वाली आंख के अंकुरण के समय और दूसरी मात्रा को बीज अंकुरण के 45 दिन बाद डालें 3 वर्षों के बाद गन्ने की गुलियों में 40-50 क्विंटल गाय का गोबर प्रति एकड़ में डालें पतझड़ के मौसम में 90-100 दिनों में नाइट्रोजन को टॉप ड्रेसिंग के तौर पर डालें और बसंत के मौसम में 150-160 दिन बाद डालनी चाहिए सिंचाई की संख्या मिट्टी की किस्म और पानी की उपलब्धता पर निर्भर करती है गर्मी के महीने में गर्म हवाओं और सूखे में वृद्धि होने के कारण फसल को पानी की जरूरत पड़ती है पहली सिंचाई फसल के 20-25 % अंकुरित होने पर करें मानसून में गन्ने को पानी और बारिश के आधार पर लगाएं कम वर्षा में सिंचाई 10 दिनों के अंतराल पर करें इसके बाद सिंचाई के अंतराल को बढ़ाकर 20-25 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें जमीन में नमी संभालने के लिए गन्ने की पंक्तियों में मलचिंग का प्रयोग करें अप्रैल जून के महीने में पानी की कमी ना होने दें इससे पैदावार कम होगी इसके इलावा बारिश के दिनों में पानी ना खड़ा होने दें जोताई का समय, वृद्धि का समय और अधिक विकास का समय सिंचाई के लिए बहुत नाज़ुक होता है मिट्टी को मेंड़ पर चढ़ाना: कसी की मदद से खालियों में और पौधे के किनारों पर मिट्टी चढ़ाई जाती है यह मिट्टी में अच्छी तरह से तैयार की गई खाद को अच्छी तरह से मिश्रित होने में मदद करती है पौधे को सहारा देने और उसे गिरने से बचाने में भी मदद करती है ज्यादा पैदावार और चीनी प्राप्त करने के लिए गन्ने की सही समय पर कटाई जरूरी है समय से पहले या बाद में कटाई करने से पैदावार पर प्रभाव पड़ता है किसान शूगर रीफरैक्टोमीटर का प्रयोग करके कटाई का समय पता लगा सकते हैं गन्ने की कटाई द्राती की सहायता से की जाती है गन्ना धरती से ऊपर थोड़ा हिस्सा छोड़कर काटा जाता है क्योंकि गन्ने में चीनी की मात्रा ज्यादा होती है कटाई के बाद गन्ना फैक्टरी में लेकर जाना जरूरी होता है धन्यवाद
Posted by Gurjant
Punjab
16-01-2020 12:34 PM
ਗੁਰਜੰਟ ਜੀ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਇਸਦੀ ਫੋਟੋ ਭੇਜੋ ਤਾ ਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸ ਬਾਰੇ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Sandeep singh
Uttar Pradesh
16-01-2020 12:32 PM
Sandeep ji kripya aap apna swal vistar se pooche taki aapko iske bare mein poori jankari di ja sake,dhanywad

Posted by Gurwinder singh sandhu
Punjab
16-01-2020 12:31 PM
ji nahi tuhanu hor urea paun di lod nahi hai ene nal hi kanak di vadia growth ho jandi hai,dhanwad

Posted by sidhu
Punjab
16-01-2020 12:25 PM
Bicky ji boote nuu dekh ke usdi parjati de bare nahi dasya ja sakda isde fal nu dekh ke hi isdi parjati de bare dasya ja sakda hai.dhanwad

Posted by sidhu
Punjab
16-01-2020 12:21 PM
bicky ji eh bio fertilizer ho isdi varto kar sakde ho isdi varto magnese ate urea de nal rla ke spray na karo. jekar tuc isdi varto karde ho ta tuhanu urea di spray karn di lod nahi hai.dhanwad

Posted by शीतल सिंह
Uttar Pradesh
16-01-2020 12:20 PM
अच्छे जल निकास वाली गहरी, दोमट मिट्टी जिसमें भूमिगत-जल का स्तर ज़मीन से 1.5-2 मी. के नीचे हो और अच्छी जल धारण क्षमता वाली ज़मीन गन्ने की खेती के लिए लाभदायक है यह फसल काफी अम्लीय और खारेपन को सहन कर सकती है इसलिए इसे मिट्टी जिसका pH 5 से 8.5 हो, में उगाई जा सकती है यदि मिट्टी का pH 5 से कम हो तो इसमें चूना (कली) डालें और यदि मिट.... (Read More)
अच्छे जल निकास वाली गहरी, दोमट मिट्टी जिसमें भूमिगत-जल का स्तर ज़मीन से 1.5-2 मी. के नीचे हो और अच्छी जल धारण क्षमता वाली ज़मीन गन्ने की खेती के लिए लाभदायक है यह फसल काफी अम्लीय और खारेपन को सहन कर सकती है इसलिए इसे मिट्टी जिसका pH 5 से 8.5 हो, में उगाई जा सकती है यदि मिट्टी का pH 5 से कम हो तो इसमें चूना (कली) डालें और यदि मिट्टी का pH 9.5 से ज्यादा हो तो इसमें जिप्सम डालें आप इसकी किस्मे जैसे Co 8014 (Mahalakshami) ,Vasant 1,Co 86032 ,Co 92005 की बिजाई कर सकते है पतझड़ के मौसम में 15 अक्तूबर से २० नवंबर तक बिजाई की जाती है, बसंत के मौसम में बिजाई 15 फरवरी तक और गर्मियों के मौसम में 15 जुलाई से 15 सितंबर तक बिजाई की जाती है बिजाई के लिए सुधरे ढंग जैसे कि (गहरी खालियां, मेंड़ बनाकर,पंक्तियों में जोड़े बनाकर और गड्ढा खोदकर बिजाई ) प्रयोग किये जाते हैं 1) खालियां और मेंड़ बनाकर सूखी बिजाई: ट्रैक्टर द्वारा मेंड़ बनाने वाली मशीन की मदद से मेंड़ और खालियां बनाएं और इन मेड़ और खालियों में बिजाई करें मेड़ और खालियों में 90 सैं.मी. का फासला होना चाहिए गन्ने की गुलियों को मिट्टी में दबाएं और उसके बाद हल्की सिंचाई करें 2) पंक्तियों के जोड़े बनाकर बिजाई: खालियां बनाने वाले यंत्र के प्रयोग से खेत में 150 सैं.मी. के फासले पर खालियां बनाएं और उनमें 30:30-90-30:30 सैं.मी. के फासले पर गन्ने की रोपाई करें इस तरीके से मेड़ वाली बिजाई से अधिक पैदावार मिलती है 3) गड्ढा खोदकर बिजाई: गड्ढे खोदने वाली मशीन से 60 सैं.मी. व्यास के 30 सैं.मी. गहरे गड्ढे खोदें जिनमें 60 सैं.मी. का फासला हो इससे गन्ना 2-3 बार उगाया जा सकता है और मेड़ वाली बिजाई से 25-50 % अधिक पैदावार आती है B) एक आंख वाले गन्नों की बिजाई: रोपाई के लिए सेहतमंद गुलियां चुनें और 75-90 सैं.मी. के अंतर पर खालियों में बिजाई करें गुलियां एक आंख वाली होनी चाहिए यदि गन्ने के ऊपरी भाग में छोटी डलियां चुनी गई हों तो बिजाई 6 -9 सैं.मी. के अंतर पर करें फसल के अच्छे उगने के लिए आंखों को ऊपर की ओर रखें और हल्की सिंचाई करें पतझड़ के मौसम में 14500-16500 तीन आंख वाले बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें और बसंत के मौसम में 16500-25000 तीन आंख वाले बीज और 21600-25000 दो आंख वाले बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें गन्ने में नदीनों के कारण 12-72 % पैदावार का नुकसान होता है शुरूआती 60-120 दिनों तक नदीनों की रोकथाम बहुत जरूरी है इसलिए रोपाई के बाद 3-4 महीने बाद फसल की नदीनों की रोकथाम करें नीचे लिखे तरीकों से नदीनों को रोका जा सकता है 1) हाथों से गोडाई करके: गन्ना एक व्यापक जगह लेने वाली फसल है इसलिए नदीनों को गोडाई करके रोका जा सकता है इसके इलावा प्रत्येक सिंचाई के बाद 3-4 गोडाई जरूरी है 2) काश्तकारी ढंग: इस प्रक्रिया में खेती के तरीके, अंतरफसली और मलचिंग तरीके शामिल हैं बहुफसली के कारण नदीनों का हमला ज्यादा होता है इसकी रोकथाम के लिए चारे वाली फसलें और हरी खाद वाली फसलों के आधार वाला फसली चक्र गन्ने में नदीनों की रोकथाम करता है गन्ना एक व्यापक जगह लेने वाली भी फसल है जिससे नदीनों के हमले का खतरा भी ज्यादा होता है यदि गन्ने को कम समय वाली फसलों के साथ अंतरफसली किया जाए तो इससे नदीनों को कम किया जा सकता है और ज्यादा लाभ भी मिल सकता है गन्ने के अंकुरन के बाद गन्ने की कतारों में 10-12 सैं.मी. मोटी तह बिछा दी जाती है यह सूर्य की रोशनी को सोखता है जिससे नदीन कम होते हैं यह मिट्टी में नमी को भी बचाता है 3) रासायनिक तरीके: नदीनों की रोकथाम के लिए, सिमाज़ीन या एट्राज़ीन 600-800 ग्राम या मैट्रीब्यूज़िन 800 ग्राम या ड्यूरॉन 1-1.2 किलोग्राम प्रति एकड़ में बिजाई के तुरंत बाद प्रयोग करना चाहिए इसके इलावा चौड़े पत्ते वाले नदीनों की रोकथाम के लिए 2, 4-डी@ 300-400 ग्राम का प्रयोग प्रति एकड़ के हिसाब से करें नाइट्रोजन 62 किलो, फासफोरस 32 किलो और पोटाश 42 किलो प्रति एकड़ में डालें बिजाई से पहले नाइट्रोजन की 1/3 मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा डालें बाकी बची नाइट्रोजन की दो मात्रा को टॉप ड्रेसिंग के तौर पर डालें नाइट्रोजन की पहली मात्रा को बीज वाली आंख के अंकुरण के समय और दूसरी मात्रा को बीज अंकुरण के 45 दिन बाद डालें 3 वर्षों के बाद गन्ने की गुलियों में 40-50 क्विंटल गाय का गोबर प्रति एकड़ में डालें पतझड़ के मौसम में 90-100 दिनों में नाइट्रोजन को टॉप ड्रेसिंग के तौर पर डालें और बसंत के मौसम में 150-160 दिन बाद डालनी चाहिए सिंचाई की संख्या मिट्टी की किस्म और पानी की उपलब्धता पर निर्भर करती है गर्मी के महीने में गर्म हवाओं और सूखे में वृद्धि होने के कारण फसल को पानी की जरूरत पड़ती है पहली सिंचाई फसल के 20-25 % अंकुरित होने पर करें मानसून में गन्ने को पानी और बारिश के आधार पर लगाएं कम वर्षा में सिंचाई 10 दिनों के अंतराल पर करें इसके बाद सिंचाई के अंतराल को बढ़ाकर 20-25 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें जमीन में नमी संभालने के लिए गन्ने की पंक्तियों में मलचिंग का प्रयोग करें अप्रैल जून के महीने में पानी की कमी ना होने दें इससे पैदावार कम होगी इसके इलावा बारिश के दिनों में पानी ना खड़ा होने दें जोताई का समय, वृद्धि का समय और अधिक विकास का समय सिंचाई के लिए बहुत नाज़ुक होता है मिट्टी को मेंड़ पर चढ़ाना: कसी की मदद से खालियों में और पौधे के किनारों पर मिट्टी चढ़ाई जाती है यह मिट्टी में अच्छी तरह से तैयार की गई खाद को अच्छी तरह से मिश्रित होने में मदद करती है पौधे को सहारा देने और उसे गिरने से बचाने में भी मदद करती है ज्यादा पैदावार और चीनी प्राप्त करने के लिए गन्ने की सही समय पर कटाई जरूरी है समय से पहले या बाद में कटाई करने से पैदावार पर प्रभाव पड़ता है किसान शूगर रीफरैक्टोमीटर का प्रयोग करके कटाई का समय पता लगा सकते हैं गन्ने की कटाई द्राती की सहायता से की जाती है गन्ना धरती से ऊपर थोड़ा हिस्सा छोड़कर काटा जाता है क्योंकि गन्ने में चीनी की मात्रा ज्यादा होती है कटाई के बाद गन्ना फैक्टरी में लेकर जाना जरूरी होता है धन्यवाद
Posted by Satnam singh gill
Punjab
16-01-2020 12:08 PM
Satnam ji eh fungus de karn hunda hai isde layi tuc copper oxychloride@3 gram nu prati litre pani de hisab nal spray karo.dhanwad

Posted by Bala Patil
Maharashtra
16-01-2020 12:05 PM
Bala ji kripya btaye ke chane ki fasl par kis bimari ya keet ka hamla hai taki aapko uske hisab se jankari di ja sake.dhanywad
Posted by Kaliash Gujar
Rajasthan
16-01-2020 12:03 PM
अगर यह पौधा सरसो में उग जाता है तो आप इसे गुड़ाई करके खेत से बाहर निकाल दे धन्यवाद

Posted by khuspal
Punjab
16-01-2020 12:02 PM
khuspal ji bhumi sehat card de nal kisana kol ik record hunda hai ke mitit vich kehde kehde tat di kami hai ate hun mitti nu ki pa sakde a .dhanwad

Posted by iqbal singh
Punjab
16-01-2020 12:01 PM
ਇਸ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਵਾਰੇ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਲਈ ਤੁਸੀ ਡਿਪਟੀ ਡਾਇਰੈਕਟਰ ਡੇਅਰੀ, ਕਮਰਾ ਨੰ. 302 -ਈ ਦੂਜੀ ਮੰਜਿਲ, ਮਿੰਨੀ ਸਕੱਤਰੇਤ ਨਵੀਂ ਬਿਲਡਿੰਗ, ਬਠਿੰਡਾ 0164-2240645 ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਇਹਨਾਂ ਤੋਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਦੀ ਤਾਰੀਖ ਅਤੇ ਜਿਥੇ ਹੋਵੇਗੀ ਉਸ ਵਾਰੇ ਸਹੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਮਿਲ ਜਾਵੇਗੀ

Posted by khuspal
Punjab
16-01-2020 11:59 AM
khuspal ji jekar dhariyan pai rahiyan han ate patteya nu hath laun te haldi varga powder tuhade hath nu lagda hai ta tuc tilt@200ml nu prati acre de hisab nal spray karo.dhanwad

Posted by Satish anjana Anajna
Madhya Pradesh
16-01-2020 11:58 AM
Satish ji kripya btaye ke yeh dikkat poore khet men aa rahi hai ek adhe paudhe par take aapko iske bare men poori jankari di ja sake,dhanywad

Posted by sunny
Uttar Pradesh
16-01-2020 11:55 AM
Sunny ji aap iska beej najdiki KVK se le sakte hai Kallipur,P.O. - Mirzamurad,Distt.- Varanasi - (U.P.)INDIA PIN - 221 307Tel. No.: 9415450175
Posted by Deepak Kumar Yadav
Uttar Pradesh
16-01-2020 11:54 AM
Deepak Kumar Yadav ji plant lene ke lia aap Prem raj Saini 9719432296 se samparak kar sakte hai, Thankyou.
Posted by om kumar
Punjab
16-01-2020 11:51 AM
Om kumar ji is ke bare me puri jankari ke lia aap Punjab Forest Department Phone: 01722298000 se samparak kar sakte hai, Thankyou.
Posted by Inkpreet Deol
Punjab
16-01-2020 11:44 AM
उन्हें आप पेट के कीड़ों के लिए Bandykind plus गोली दें और हर तीन महीने के बाद साल्ट बदलकर गोली जरूर दें बाकि इसे आप अच्छी मात्रा में हरा चारा दें और कारगिल की Heifer dry फीड देनी शुरू करें और अच्छी कंपनी का मिर्नल मिक्सर्च 50—50 ग्राम रोजाना देना शुरू करें

Posted by Harsh Deep Singh
Punjab
16-01-2020 11:41 AM
Harshdeep ji cow nu AI krwaun ton badd suun vich 9 month 9 din da sme lendi hai.

Posted by Arvind Kumar Kushwaha
Uttar Pradesh
16-01-2020 11:38 AM
mere khet me alu lagaye 70 din ho gaye hai kand vridi ke liya kya M-45 me Inko Mila ke spry kar du ?
ji nahi aap inki alag se spray karen inko M-45 ke sath spray na karen.dhanywad

Posted by prabhjot singh
Punjab
16-01-2020 11:37 AM
ਸੰਤੁਲਿਤ ਖੁਰਾਕ 100 ਕਿਲੋ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਲੋੜੀਂਦੀ ਸਮੱਗਰੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਜਿਵੇਂ 25 ਕਿਲੋ ਅਨਾਜ ( ਜਵਾਰ, ਬਾਜਰੀ (ਸਰਦੀਆਂ) , ਕਣਕ, ਜੌਂ ( ਗਰਮੀਆ) ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਕੋਈ ਇੱਕ ) , ਦਾਲ ਚੂਰੀ 20 ਕਿਲੋ( ਮੂੰਗੀ ਚੂਰੀ, ਮਾਂਹ ਚੂਰੀ, ਮੋਠ ਚੂਰੀ ( ਕੇਵਲ ਸਰਦੀਆਂ ਲਈ) , ਮਸੁਰ ਚੂਰੀ ,ਅਰਹਰ, (ਇਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਇੱਕ ) , DOC 25 ਕਿਲੋ ( ਚੌਲਾਂ ਦਾ ਚੂਰਾ ) , ਫਾਈਬਰ ਛਿਲਕਾ 15 ਕਿਲੋ (ਕਣਕ, ਚੌਕਰ, ਚਨਾ ਛਿਲਕਾ, ਮਟਰ ਛਿਲਕਾ, ਇਨਾਂ ਵਿ.... (Read More)
ਸੰਤੁਲਿਤ ਖੁਰਾਕ 100 ਕਿਲੋ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਲੋੜੀਂਦੀ ਸਮੱਗਰੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਜਿਵੇਂ 25 ਕਿਲੋ ਅਨਾਜ ( ਜਵਾਰ, ਬਾਜਰੀ (ਸਰਦੀਆਂ) , ਕਣਕ, ਜੌਂ ( ਗਰਮੀਆ) ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਕੋਈ ਇੱਕ ) , ਦਾਲ ਚੂਰੀ 20 ਕਿਲੋ( ਮੂੰਗੀ ਚੂਰੀ, ਮਾਂਹ ਚੂਰੀ, ਮੋਠ ਚੂਰੀ ( ਕੇਵਲ ਸਰਦੀਆਂ ਲਈ) , ਮਸੁਰ ਚੂਰੀ ,ਅਰਹਰ, (ਇਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਇੱਕ ) , DOC 25 ਕਿਲੋ ( ਚੌਲਾਂ ਦਾ ਚੂਰਾ ) , ਫਾਈਬਰ ਛਿਲਕਾ 15 ਕਿਲੋ (ਕਣਕ, ਚੌਕਰ, ਚਨਾ ਛਿਲਕਾ, ਮਟਰ ਛਿਲਕਾ, ਇਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਇੱਕ) , ਖਲ਼ 15 ਕਿਲੋ(ਸਰੋਂ, ਬਿਨੌਲਾ ਜਾਂ ਸੋਇਆ (ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਕੋਈ ਇੱਕ) , ਮਿੱਠਾ ਸੋਡਾ 250 ਗ੍ਰਾਮ, 1 ਕਿਲੋ ਨਮਕ, ਗੁੜ 1 ਕਿਲੋ, 1 ਕਿੱਲੋ ਹਲਦੀ (ਸਰਦੀਆ ਵਿੱਚ ) ਇਹ ਨੂੰ ਰਲਾ ਲਵੋ ਇਹ ਫੀਡ ਪਸ਼ੂ ਲਈ ਬਹੁਤ ਲਾਹੇਵੰਦ ਹੁੰਦੀ ਹੈ, ਇਹ ਫੀਡ ਤੁਸੀ 3 ਕਿਲੋ ਦੁੱਧ ਮਗਰ 1 ਕਿਲੋ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ.

Posted by Harsh Deep Singh
Punjab
16-01-2020 11:36 AM
Harsh deep ji thand to bcha de layi tuc isnu halki sinchai karo.dhanwad

Posted by Nitin kumar
Uttarakhand
16-01-2020 11:33 AM
नितिन जी, पोपलर के नए पौधे की रोपाई के लिए जनवरी से फरवरी का समय अच्छा होता है रोपाई 15 फरवरी से 10 मार्च में की जा सकती है एक एकड़ में 182 पौधे लगाने के लिए 5x5 मीटर के फासले का प्रयोग करें या 396 पौधे प्रति एकड़ में लगाने के लिए 5 मीटर x 4 मीटर या 6 मीटर x 2 मीटर और 476 पौधे प्रति एकड़ में लगाने के लिए 5 मीटर x 2 मीटर फासले का प्रयोग कर.... (Read More)
नितिन जी, पोपलर के नए पौधे की रोपाई के लिए जनवरी से फरवरी का समय अच्छा होता है रोपाई 15 फरवरी से 10 मार्च में की जा सकती है एक एकड़ में 182 पौधे लगाने के लिए 5x5 मीटर के फासले का प्रयोग करें या 396 पौधे प्रति एकड़ में लगाने के लिए 5 मीटर x 4 मीटर या 6 मीटर x 2 मीटर और 476 पौधे प्रति एकड़ में लगाने के लिए 5 मीटर x 2 मीटर फासले का प्रयोग करें रोपाई के लिए 1 मीटर गड्ढा खोदें और पौधे को इसी गड्ढे में लगाएं मिट्टी में गले हुए गाय का गोबर 2 किलो, म्यूरेट ऑफ पोटाश 25 ग्राम और सिंगल सुपर फासफेट 50 ग्राम मिलायें इसकी बिजाई सीधे या पनीरी लगाकर की जाती है धन्यवाद

Posted by kishan singh
Rajasthan
16-01-2020 11:32 AM
Kishan ji aap bakri lene ke liye aur bakri farm dekhne ke liye Khushwant Singh 9783921249 Khushwant Beetal Goat se sampark kr skte hai.

Posted by Nitin kumar
Uttarakhand
16-01-2020 11:26 AM
पोपलर की खेती क्षारीय और खारी मिट्टी में ना करें यह उपजाऊ मिट्टी, जिसमें जैविक तत्वों की उच्च मात्रा हो, में उगाये जाने पर अच्छे परिणाम देती है पोपलर की खेती के लिए मिट्टी का pH 5.8-8.5 होना चाहिए मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की 2-3 बार जोताई करें यदि जिंक की कमी हो तो खेत की तैयारी के समय जिंक सलफेट 10 किलोग्राम प्र.... (Read More)
पोपलर की खेती क्षारीय और खारी मिट्टी में ना करें यह उपजाऊ मिट्टी, जिसमें जैविक तत्वों की उच्च मात्रा हो, में उगाये जाने पर अच्छे परिणाम देती है पोपलर की खेती के लिए मिट्टी का pH 5.8-8.5 होना चाहिए मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की 2-3 बार जोताई करें यदि जिंक की कमी हो तो खेत की तैयारी के समय जिंक सलफेट 10 किलोग्राम प्रति एकड़ में डालें पोपलर के नए पौधे की रोपाई के लिए जनवरी से फरवरी का समय अच्छा होता है रोपाई 15 फरवरी से 10 मार्च में की जा सकती है एक एकड़ में 182 पौधे लगाने के लिए 5x5 मीटर के फासले का प्रयोग करें या 396 पौधे प्रति एकड़ में लगाने के लिए 5 मीटर x 4 मीटर या 6 मीटर x 2 मीटर और 476 पौधे प्रति एकड़ में लगाने के लिए 5 मीटर x 2 मीटर फासले का प्रयोग करें इसकी बिजाई सीधे या पनीरी लगाकर की जाती है

Posted by alok katiyar
Uttar Pradesh
16-01-2020 11:18 AM
Alok ji kripya aap iske uper mancozeb@4 gram ko prati litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by Babbu Chahal
Punjab
16-01-2020 11:16 AM
babbu ji is same makka ki bijai nahi ki ja sakti makka ki bijai march mahien se ki jati hai.dhanywad

Posted by alok katiyar
Uttar Pradesh
16-01-2020 11:06 AM
Alok ji aap iske uper mancozeb@400 gram ko prati acre ke hisab se spray karen.dhanywad

Posted by lakhbir singh
Haryana
16-01-2020 11:06 AM
lakhbir ji chaude patte vale nadeena di roktham de layi tuc 2,4 D@250ml nu prtai acre de hisab nal spray karo.dhanwad

Posted by Sonu
Haryana
16-01-2020 11:03 AM
Sonu ji yeh fungus ke karn ho rahe hai iske liye aap mancozeb@4 gram ko prati litre pani ke hisab se spray karen,dhanywad
Posted by ramnivas
Uttar Pradesh
16-01-2020 11:03 AM
सेंचुरी वाटरमेलन की बुवाई कब करनी चाहिए इसके लिए सही बीज बताइए फरवरी में इसकी वाई कर सकते हैं क्या ?
रामनिवास जी कृपया आप अपना सवाल विस्तार से बताएं कि आप कैसे सेंचुरी वाटरमेलन की बिजाई करना चाहते है ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद

Posted by ravi
Madhya Pradesh
16-01-2020 11:01 AM
Ravi ji aap iske uper mancozeb@4 gram ko prati litre pani ke hisab se spray karen,dhanywad

Posted by Amar Sen Sahu
Uttar Pradesh
16-01-2020 10:59 AM
Amar sen ji uple jo gobar se bnaye jate hai vo 6 mah purane hone chahiye aur unhe 7-8 uplon ko 50 litre pani men mila kar 50 litre pani men mila kar dhak de jab yeh pani 35 litre tak reh jaye to aap isme 90 litre pani mila kar prati acre ke hisab se spray karen.dhanywad
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