Posted by SIMARJIT SINGH
Punjab
18-01-2020 10:07 AM
Simarjit ji tuci iss vaccine di puri jankari ate iss nu lgaun de sahi trike vare jankari lai ehh video dekh skde ho..
https://www.youtube.com/watch v=oQ0ClCT6XQ0
Posted by ਪਰਮਜੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
18-01-2020 10:04 AM
ਪਰਮਜੀਤ ਜੀ, ਇਸ ਬਿਮਾਰੀ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ, ਕੁੰਗੀ ਦੀਆਂ ਰੋਧਕ ਕਿਸਮਾਂ ਵਰਤੋ ਫਸਲੀ ਚੱਕਰ ਅਤੇ ਮਿਸ਼ਰਤ ਫਸਲਾਂ ਦੀ ਵਿਧੀ ਅਪਨਾਓ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ਦੀ ਜ਼ਿਆਦਾ ਵਰਤੋਂ ਤੋਂ ਨਾ ਕਰੋ ਜਦੋਂ ਇਸ ਬਿਮਾਰੀ ਦੇ ਲੱਛਣ ਵਿਖਾਈ ਦੇਣ ਤਾਂ 5-10 ਕਿਲੋਗ੍ਰਾਮ ਸਲਫਰ ਦਾ ਛਿੱਟਾ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਜਾਂ 400 ਗ੍ਰਾਮ ਮੈਨਕੋਜ਼ਿਬ ਨੂੰ 150 ਲੀਟਰ ਜਾਂ 200 ਮਿ.ਲੀ. ਪ੍ਰੋਪੀਕੋਨਾਜ਼ੋਲ (ਟਿਲਟ) 25 ਈ ਸੀ ਨੂੰ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਮਿਲਾ .... (Read More)
ਪਰਮਜੀਤ ਜੀ, ਇਸ ਬਿਮਾਰੀ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ, ਕੁੰਗੀ ਦੀਆਂ ਰੋਧਕ ਕਿਸਮਾਂ ਵਰਤੋ ਫਸਲੀ ਚੱਕਰ ਅਤੇ ਮਿਸ਼ਰਤ ਫਸਲਾਂ ਦੀ ਵਿਧੀ ਅਪਨਾਓ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ਦੀ ਜ਼ਿਆਦਾ ਵਰਤੋਂ ਤੋਂ ਨਾ ਕਰੋ ਜਦੋਂ ਇਸ ਬਿਮਾਰੀ ਦੇ ਲੱਛਣ ਵਿਖਾਈ ਦੇਣ ਤਾਂ 5-10 ਕਿਲੋਗ੍ਰਾਮ ਸਲਫਰ ਦਾ ਛਿੱਟਾ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਜਾਂ 400 ਗ੍ਰਾਮ ਮੈਨਕੋਜ਼ਿਬ ਨੂੰ 150 ਲੀਟਰ ਜਾਂ 200 ਮਿ.ਲੀ. ਪ੍ਰੋਪੀਕੋਨਾਜ਼ੋਲ (ਟਿਲਟ) 25 ਈ ਸੀ ਨੂੰ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਤੇ ਸਪਰੇ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by Ajay Netam
Chattisgarh
18-01-2020 10:02 AM
इसके लिए आप Respiron @25ml per 100 birds दिन में एक बार पीने वाले पानी में दें

Posted by Rajeev Awasthi
Haryana
18-01-2020 09:59 AM
राजीव जी, पपीते की खेती को मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए पपीते की खेती के लिए नदीन रहित भूमि का प्रयोग करें मिट्टी के भुरभुरा होने त.... (Read More)
राजीव जी, पपीते की खेती को मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए पपीते की खेती के लिए नदीन रहित भूमि का प्रयोग करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें आखिरी जोताई के समय अच्छी तरह से गली हुई रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर मिट्टी में अच्छी तरह मिलाकर डालें सिफारिश किए गए फासलों पर 1 मीटर x 1 मीटर x 1 मीटर आकार के गड्ढे खोदें गड्ढों को मिट्टी और रूड़ी की खाद या गाय के गले हुए गोबर से भरें प्रयोग की गई किस्म के आधार पर प्रत्येक गड्ढे पर 2-4 नए पौधों की रोपाई करें रोपाई के बाद हल्की सिंचाई करें हवा से बचाव के लिए खूंटा लगाएं बीजों को 150 गेज़ की मोटाई वाले, 25 x 10 सैं.मी. के पॉलीथीन बैग में बोयें पानी के उचित निकास के लिए पॉलीथीन बैग के निचले हिस्से में 1 मि.मी. अर्द्धव्यास का छेद करें उसके बाद पॉलीथीन बैग में समान अनुपात में रूड़ी की खाद, मिट्टी और रेत डालें बिजाई से पहले बीजों का उपचार करें रोपाई के लिए 6-7 सप्ताह के पौधों का प्रयोग करें यूरिया 150 ग्राम, फासफोरस 80 ग्राम, पोटाश 100 ग्राम प्रति वृक्ष में प्रति वर्ष डालें खादों को 4 भागों में बांटकर रोपाई के बाद पहले, तीसरे, पांचवे और सातवें महीने में डालें बसंत के मौसम में फरवरी मार्च के महीने में बिजाई करें जबकि मॉनसून के मौसम में बिजाई के लिए जून जुलाई का महीना उपयुक्त होता है और पतझड़ के मौसम में बिजाई अक्तूबर से नवंबर महीने में की जाती है आमतौर पर 1.8 मीटर x 1.8 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है उच्च घनता की रोपाई के लिए 1.5 मीटर x 1.5 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है नर्सरी में बीज को 1 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बीजो की खेत में सीधे बिजाई या मुख्य खेत में नए पौधों की रोपाई की जाती है 100-120 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें मिट्टी की किस्म, जलवायु के हालातों आदि के आधार पर सिंचाई करें सर्दियों में 15 दिनों के अंतराल पर और गर्मियों में 7 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें तने को पानी के संपर्क में ना आने दें और खेत में पानी भी खड़ा ना होने दें पौधे की प्रौढ़ अवस्था के दौरान नदीनों की रोकथाम जरूरी होती है नदीनों की तीव्रता के आधार पर, नियमित और हल्की गोडाई करें फ्लूक्लोरालिन या बूटाक्लोर 800 मि.ली. प्रति एकड़ में डालें नदीनों की रोकथाम के लिए मलचिंग भी एक प्रभावी तरीका है पौधों की रोपाई के कुछ दिनों बाद प्लास्टिक शीट या धान की पराली या गन्ने के बचे कुचे को मलच के रूप में डालें मुख्यत: फल के पूरा आकार लेने और हरे से हल्का पीला रंग होने पर तुड़ाई की जाती है पहली तुड़ाई रोपाई के 14-15 महीनों के बाद की जा सकती है 4-5 तुड़ाइयां प्रति मौसम की जा सकती हैं धन्यवाद
Posted by ramnivas
Uttar Pradesh
18-01-2020 09:59 AM
Ramnivas ji aap iske liye copper oxychloride@4 gram ko prati litre pani ke hisab se spray karen.dhanwyad
Posted by Shishpal Singh
Rajasthan
18-01-2020 09:57 AM
श्री मान जी गेहूं में metsulfuron methyl 20% wp सॉल्ट की स्प्रे 2,4 पत्ते बाथू पर कर सकते हैं इसकी मात्रा 10 ग्राम प्रति एकड़ है
Posted by ਸਰਬਜੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
18-01-2020 09:54 AM
Sarabjit ji tuci 5 month di hen v laa skde ho kyuki usdi grwth lai ghat kharch awega ate ohh jldi egg v denge, baki tuci chiks v rakh skde ho jihna nu tyar krnnn lai vdia khurak di jrurat hundi hai, baki isde rate vare tuhanu nazdiki market vich ptaa lgg skda hai kyuki usdi growth ate weight de hisab nal usde rate howega.
Posted by Samn Badesha
Punjab
18-01-2020 09:53 AM
tuci bache nu Royal Canin da puppy milk dena suru kro ate female dog nu Multistar pet liquid 5ml rojana ate Aptiquik liquid 10ml rojana dena suru kro..
Posted by mithilesh kumar
Bihar
18-01-2020 09:50 AM
mithilesh ji kripya btaye ke aapne isme kya kya khaad daali hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake,dhanywad

Posted by ravi
Madhya Pradesh
18-01-2020 09:47 AM
Ravi ji, ap jad ke keede ki roktham ke liye isme chlorpyriphos @ 4 ml prati liter pani ke hisaab se spray karein, isse keet ki roktham ho jati hai, dhanywad

Posted by RAVINDRA SINGH
Rajasthan
18-01-2020 09:47 AM
सबसे पहले यदि हम मछली पालन की बात करें तो इसके लिए ट्रेनिंग बहुत जरूरी है यह ट्रेनिंग FFDA(fish farmer development aggency) हर जिले में बनी है जहां हमारा खेतीबाड़ी विभाग है वहां इसके अफसर बैठते हैं वहां जाकर एप्लीकेशन भरवायें वहां आपको 5 दिन की ट्रेनिंग दी जायेगी ट्रेनिंग के लिए दसवीं पास होना ज़रूरी है इस ट्रेनिंग में आपको लोन और स.... (Read More)
सबसे पहले यदि हम मछली पालन की बात करें तो इसके लिए ट्रेनिंग बहुत जरूरी है यह ट्रेनिंग FFDA(fish farmer development aggency) हर जिले में बनी है जहां हमारा खेतीबाड़ी विभाग है वहां इसके अफसर बैठते हैं वहां जाकर एप्लीकेशन भरवायें वहां आपको 5 दिन की ट्रेनिंग दी जायेगी ट्रेनिंग के लिए दसवीं पास होना ज़रूरी है इस ट्रेनिंग में आपको लोन और सब्सिड़ी के बारे में सारी जानकारी प्राप्त हो जाएगी इसकी पुंग छोड़ने के लिए अप्रैल से अक्तूबर का समय बढ़िया होता है, बाकि यदि अपने शुरू करना है तो यूनिवर्सिटी की तरफ से एक एकड़ में शुरू कर सकते हैं. एक एकड़ में 5000 पूंग डाल सकते हैं यह 2 से 3 इंच का होता है यदि 5000 डालना है तो 3000 रोहू, 1000 कतला, 500 कॉमन कॉर्प और 500 मरीगल नस्ल डाली जाए यह पूंग आप मछली पालन विभाग से खरीद सकते हैं यह एक इंच का बच्चा 10 पैसा प्रति बच्चा मिलेगा यदि बढ़िया खुराक डाली जाए तो 8 महीनों में यह लगभग 800—900 ग्राम का हो जाता है बाकी मछली पालन के लिए नहरी पानी बढ़िया होता है और आप गांव का छप्पड़ ठेके से लेकर भी यह काम शुरू कर सकते हैं तालाब में मछली के बीज डालने से पहले इस बात की जांच कर लेनी चाहिए कि उस तालाब में काफी मात्रा में मछली की कुदरती खुराक उपलब्ध है..

Posted by nav shah
Punjab
18-01-2020 09:41 AM
navpreet ji kirpa karke daso ke kanak kine dina di hai taki tuhanu is bare poori jankari di ja sake,dhanwad

Posted by gurinder
Punjab
18-01-2020 09:34 AM
ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ ਕਾਰਗਿਲ ਦੀ Transition mix ਫੀਡ ਦੇਣੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਅਤੇ ਦਲੀਆ ਉਸ ਨੂੰ ਸੂਣ ਤੋਂ 15 ਦਿਨ ਪਹਿਲਾ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਬਾਕੀ ਉਸ ਨੂੰ Vitum-H liquid 10-10ml ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਸ ਨਾਲ ਲੇਵਾ ਵਧਿਆ ਹੋ ਜਾਵੇਗਾ..

Posted by Manish Kumar
Bihar
18-01-2020 09:29 AM
Manish kumar ji, you are asking of fig fruit or fig as any other technical term, so that we can provide you information accordingly, thank you

Posted by Vishal yadav
Bihar
18-01-2020 09:28 AM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद

Posted by om prakash
Uttar Pradesh
18-01-2020 09:22 AM
मुर्गी पालन का काम करने के लिए आप इस काम की ट्रेनिंग जरूर लें जिसमें आपको इस काम की जानकारी और इसमें कितना खर्चा आएगा और कितने पंक्षियों से शुरूआत कर सकते है इसके बारे सही जानकारी दी जाएगी ट्रेनिंग लेने के लिए आप अपने नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें आप वहां जाकर अपना ट्रेनिंग का फार्म भर आएं जब भ.... (Read More)
मुर्गी पालन का काम करने के लिए आप इस काम की ट्रेनिंग जरूर लें जिसमें आपको इस काम की जानकारी और इसमें कितना खर्चा आएगा और कितने पंक्षियों से शुरूआत कर सकते है इसके बारे सही जानकारी दी जाएगी ट्रेनिंग लेने के लिए आप अपने नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें आप वहां जाकर अपना ट्रेनिंग का फार्म भर आएं जब भी ट्रेनिंग होगी तो वो आपको फोन करके उसके बारे में बता देंगे और ट्रेनिंग में आपको लोन और सब्सिड़ी के बारे में जानकारी प्राप्त हो जाएगी ट्रेनिंग लेने के लिए आप अपने नज़दीकी Krishi Vigyan Kendra, Pilkhi, P.O. : Haldharpur, Distt.- Mau (U.P.) INDIA, PIN - 221 705, Tel. No.: 09839420165, Phone No.: 0547 2536240 से संपर्क कर सकते है

Posted by Aulkh
Punjab
18-01-2020 09:16 AM
ਔਲਖ ਜੀ ਕਿ ਤੁਸੀ ਅਫਰੀਕਨ ਬੱਕਰੀ ਦੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਲੈਣਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਇਹ ਨਸਲ ਚੰਗੇ ਮੀਟ ਲਈ ਜਾਣੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਮੁੱਖ ਤੌਰ ਤੇ ਦੱਖਣੀ ਭਾਰਤ, ਮਹਾਂਰਾਸ਼ਟਰ, ਕਰਨਾਟਕ, ਤਾਮਿਲਨਾਡੂ, ਆਂਧਰਾ ਪ੍ਰਦੇਸ਼ ਅਤੇ ਤੇਲੰਗਾਨਾ ਆਦਿ ਵਿੱਚ ਪਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਨਸਲ ਦੀ ਚਮੜੀ ਸਫੇਦ ਰੰਗ ਦੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ, ਸਿਰ ਅਤੇ ਗਰਦਨ ਦਾ ਰੰਗ ਲਾਲ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਨਸਲ ਦੇ ਕੰਨ ਲੰਬੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ, ਜੋ ਕਿ ਹੇਠਾਂ ਵੱਲ ਲਟਕੇ .... (Read More)
ਔਲਖ ਜੀ ਕਿ ਤੁਸੀ ਅਫਰੀਕਨ ਬੱਕਰੀ ਦੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਲੈਣਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਇਹ ਨਸਲ ਚੰਗੇ ਮੀਟ ਲਈ ਜਾਣੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਮੁੱਖ ਤੌਰ ਤੇ ਦੱਖਣੀ ਭਾਰਤ, ਮਹਾਂਰਾਸ਼ਟਰ, ਕਰਨਾਟਕ, ਤਾਮਿਲਨਾਡੂ, ਆਂਧਰਾ ਪ੍ਰਦੇਸ਼ ਅਤੇ ਤੇਲੰਗਾਨਾ ਆਦਿ ਵਿੱਚ ਪਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਨਸਲ ਦੀ ਚਮੜੀ ਸਫੇਦ ਰੰਗ ਦੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ, ਸਿਰ ਅਤੇ ਗਰਦਨ ਦਾ ਰੰਗ ਲਾਲ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਨਸਲ ਦੇ ਕੰਨ ਲੰਬੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ, ਜੋ ਕਿ ਹੇਠਾਂ ਵੱਲ ਲਟਕੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸਦਾ ਵਿਕਾਸ ਤੇਜ਼ੀ ਨਾਲ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਸ਼ਾਂਤ ਸੁਭਾਅ ਵਾਲੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਨਸਲ ਦੇ ਪ੍ਰੋੜ ਨਰ ਦਾ ਭਾਰ ਲਗਭਗ 110-135 ਕਿਲੋ ਅਤੇ ਮਾਦਾ ਦਾ ਔਸਤਨ ਭਾਰ 90-100 ਕਿਲੋ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਨਰ ਦੀ ਲੰਬਾਈ ਲਗਭਗ 70 ਸੈ.ਮੀ. ਅਤੇ ਮਾਦਾ ਦੀ ਲੰਬਾਈ ਔਸਤਨ 50 ਸੈ.ਮੀ. ਹੁੰਦੀ ਹੈ
..
Posted by harmeet singh
Punjab
18-01-2020 09:06 AM
Harmeet ji tuci uss nu pett de kiria lai Bandykind plus deo ate her 3 mahine de frak nal pett de kiria di goli salt change krke jrur deo, baki uss nu Bovimin-B, Agrimin, Minfa gold powder v mineral mixture 50gm rojana de skd ho.

Posted by Prabhjot Randhawa
Punjab
18-01-2020 09:05 AM
Randhawa ji kirpa krke tuci uss semen di photo bhejo jo tuci jersey cow nu bhrwana chahunde ho tan jo uss de record nu dekh ke tuhanu sahi jankari diti ja skee.

Posted by Shiv Mohan Mohan
Uttar Pradesh
18-01-2020 09:05 AM
मोहन जी कृपया आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको इसके बारे में सही जानकारी दी जा सके
Posted by gurveer bhullar
Punjab
18-01-2020 08:53 AM
ਗੁਰਵੀਰ ਜੀ, ਕਰੇਲੇ ਲਈ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਬੀਜ ਨੂੰ 25-50 ਪੀ ਪੀ ਐੱਮ ਜਿਬਰੈਲਿਕ ਐਸਿਡ ਅਤੇ 25 ਪੀ ਪੀ ਐੱਮ ਬੋਰੋਨ ਵਿੱਚ 24 ਘੰਟੇ ਲਈ ਭਿਓਂ ਦਿਓ ਬੀਜ ਨੂੰ ਬੀਜਣ ਲਈ ਫਰਵਰੀ ਤੋਂ ਮਾਰਚ ਜਾਂ ਜੂਨ ਤੋਂ ਜੁਲਾਈ ਦਾ ਸਮਾਂ ਅਨੁਕੂਲ ਹੁੰਦਾ ਹੈ 1.5 ਮੀਟਰ ਚੌੜੇ ਬੈੱਡ ਦੇ ਦੋਨੋਂ ਪਾਸੇ ਬੀਜ ਬੀਜੋ ਅਤੇ ਪੌਦਿਆਂ ਵਿੱਚਲਾ ਫਾਸਲਾ 45 ਸੈ.ਮੀ. ਰੱਖੋ ਟੋਏ ਵਿੱਚ 2.5-3 ਸੈ.ਮੀ. ਦੀ ਡੂੰਘਾਈ ਤੇ ਬੀਜ ਬੀਜੋ ਇਸ ਦੀ ਬਿ.... (Read More)
ਗੁਰਵੀਰ ਜੀ, ਕਰੇਲੇ ਲਈ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਬੀਜ ਨੂੰ 25-50 ਪੀ ਪੀ ਐੱਮ ਜਿਬਰੈਲਿਕ ਐਸਿਡ ਅਤੇ 25 ਪੀ ਪੀ ਐੱਮ ਬੋਰੋਨ ਵਿੱਚ 24 ਘੰਟੇ ਲਈ ਭਿਓਂ ਦਿਓ ਬੀਜ ਨੂੰ ਬੀਜਣ ਲਈ ਫਰਵਰੀ ਤੋਂ ਮਾਰਚ ਜਾਂ ਜੂਨ ਤੋਂ ਜੁਲਾਈ ਦਾ ਸਮਾਂ ਅਨੁਕੂਲ ਹੁੰਦਾ ਹੈ 1.5 ਮੀਟਰ ਚੌੜੇ ਬੈੱਡ ਦੇ ਦੋਨੋਂ ਪਾਸੇ ਬੀਜ ਬੀਜੋ ਅਤੇ ਪੌਦਿਆਂ ਵਿੱਚਲਾ ਫਾਸਲਾ 45 ਸੈ.ਮੀ. ਰੱਖੋ ਟੋਏ ਵਿੱਚ 2.5-3 ਸੈ.ਮੀ. ਦੀ ਡੂੰਘਾਈ ਤੇ ਬੀਜ ਬੀਜੋ ਇਸ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਟੋਆ ਪੁੱਟ ਕੇ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਖੀਰੇ ਲਈ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ, ਇਸਨੂੰ ਕੀੜੇ ਅਤੇ ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਤੋਂ ਬਚਾਉਣ ਲਈ ਅਤੇ ਜੀਵਨਕਾਲ ਵਧਾਉਣ ਲਈ, ਅਨੁਕੂਲ ਰਸਾਇਣ ਨਾਲ ਸੋਧੋ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਬੀਜਾਂ ਨੂੰ ਕਪਤਾਨ 2 ਗ੍ਰਾਮ ਨਾਲ ਸੋਧੋ ਇਸਦੀ ਬਿਜਾਈ ਫਰਵਰੀ-ਮਾਰਚ ਦੇ ਮਹੀਨੇ ਵਿੱਚ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਇਸਦੀ ਬਿਜਾਈ ਜੂਨ-ਜੁਲਾਈ ਵਿੱਚ ਵੀ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ 2.5 ਮੀਟਰ ਬਣੇ ਚੌੜੇ ਬੈੱਡ ਤੇ ਹਰ ਜਗ੍ਹਾ ਦੋ ਬੀਜ ਬੀਜੋ ਅਤੇ ਬੀਜਾਂ ਦੇ ਵਿਚਕਾਰ 60 ਸੈ.ਮੀ. ਦਾ ਫਾਸਲਾ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਬੀਜ ਨੂੰ 2-3 ਸੈ.ਮੀ. ਡੂੰਘਾਈ ਤੇ ਬੀਜੋ ਛੋਟੀ ਸੁਰੰਗੀ ਤਕਨੀਕ: ਇਸ ਤਕਨੀਕ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਗਰਮੀਆਂ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਅਗੇਤਾ ਝਾੜ ਲੈਣ ਲਈ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਫਸਲ ਨੂੰ ਦਸੰਬਰ ਅਤੇ ਜਨਵਰੀ ਦੇ ਠੰਡੇ ਮੌਸਮ ਤੋਂ ਬਚਾਉਂਦਾ ਹੈ ਦਸੰਬਰ ਦੇ ਮਹੀਨੇ ਵਿੱਚ 2.5 ਮੀਟਰ ਚੌੜੇ ਬੈੱਡਾਂ ਤੇ ਬਿਜਾਈ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਬੀਜਾਂ ਨੂੰ ਬੈੱਡ ਦੇ ਦੋਵੇਂ ਪਾਸੇ 45 ਸੈ.ਮੀ. ਦੇ ਫਾਸਲੇ ਤੇ ਬੀਜੋ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ, 45-60 ਸੈ.ਮੀ. ਲੰਬੇ ਅਤੇ ਸਹਾਇਕ ਡੰਡੇ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਗੱਡੋ ਖੇਤ ਨੂੰ ਪਲਾਸਟਿਕ ਸ਼ੀਟ (100 ਗੇਜ ਦੀ ਮੋਟਾਈ ਵਾਲੀ) ਨਾਲ ਡੰਡੀਆਂ ਦੀ ਮਦਦ ਨਾਲ ਢੱਕ ਦਿਓ ਫਰਵਰੀ ਮਹੀਨੇ ਵਿੱਚ ਤਾਪਮਾਨ ਸਹੀ ਹੋਣ ਤੇ ਪਲਾਸਟਿਕ ਸ਼ੀਟ ਨੂੰ ਹਟਾ ਦਿਓ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by manmandar singh
Punjab
18-01-2020 08:48 AM
ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਇਸਦੀ ਫੋਟੋ ਭੇਜੋ ਤਾ ਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸ ਬਾਰੇ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ|

Posted by अनिल
Uttar Pradesh
18-01-2020 08:47 AM
bhai sahib rajwa hara chaara te har 4kg dudh lai 1kg wadhya feed pao har 3 mahine baad pet ke kirhe nikalne ki dwaee deo swer shaam taaran v dekho jab taaran dekho is nu garbdaan da teeka lagwao Arhamdi arhingdi na vekho

Posted by अनिल
Uttar Pradesh
18-01-2020 08:44 AM
अनिल जी, यह बाथू घास है, आप इसकी रोकथाम के लिए 2,4-D @ 200 ग्राम को 150 लीटर पानी में मिला कर प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें, इसकी स्प्रे से यह ख़तम हो जाता है, धन्यवाद
Posted by Rahul Pratap Singh
Uttar Pradesh
18-01-2020 08:28 AM
Rahull ji kripya btaye ke aapne isme kya kya daala hai khaad ke tayur par taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake,dhanywad
Posted by Mantu munda
Jharkhand
18-01-2020 08:21 AM
आप उन चारों देसी बकरियों को हीट में आने पर किसी भी अच्छी नसल के साथ क्रॉस करवा सकते है

Posted by surajeet singh
Punjab
18-01-2020 08:16 AM
Surajeet ji tuci iss nu apne nazdiki market vich meat shop te v sale kr skde ho, uthe tuhanu isde weight de hisab nal rate mill jawega.

Posted by Gopal jat
Rajasthan
18-01-2020 08:05 AM
गोपाल जी यह नाइट्रोजन की अधिक मात्रा प्रयोग करने से होता है, इसके लिए कृपया सिफारिश की गई मात्रा में ही खाद का प्रयोग करें धन्यवाद

Posted by MANISH KUMAR YADAV
Jharkhand
18-01-2020 07:36 AM
वृक्ष की छाल में गोंद निकलना इस बीमारी के लक्षण हैं प्रभावित पौधा हल्के पीले रंग में बदल जाता है तने और पत्ते की सतह पर गोंद की सख्त परत बन जाती है, कई बार छाल गलने से नष्ट हो जाती है और वृक्ष मर जाता है, पौधा फल के परिपक्व होने से पहले ही मर जाता है इस बीमारी को जड़ गलन भी कहा जाता है, जड़ गलन की प्रतिरोधक किस्मों.... (Read More)
वृक्ष की छाल में गोंद निकलना इस बीमारी के लक्षण हैं प्रभावित पौधा हल्के पीले रंग में बदल जाता है तने और पत्ते की सतह पर गोंद की सख्त परत बन जाती है, कई बार छाल गलने से नष्ट हो जाती है और वृक्ष मर जाता है, पौधा फल के परिपक्व होने से पहले ही मर जाता है इस बीमारी को जड़ गलन भी कहा जाता है, जड़ गलन की प्रतिरोधक किस्मों का प्रयोग करना, जल निकास का अच्छे से प्रबंध करने से इस बीमारी को रोका जा सकता है, पौधे को नुकसान से बचाना चाहिए मिट्टी में 0.2 प्रतिशत Metalaxyl MZ-72 + 0.5 प्रतिशत trichoderma viride डालें, इससे इस बीमारी को रोकने में सहायता मिलती है, वर्ष में एक बार ज़मीनी स्तर से 50-75 सैं.मी ऊंचाई पर बॉर्डीऑक्स को जरूर डालना चाहिए
Posted by Keshav Pathak
Chattisgarh
18-01-2020 07:35 AM
मिट्टी की जांच के आधार पर खादें डालें मिट्टी की जांच के अनुसार ही हम मिट्टी में आवश्यक खादों की मात्रा दे सकते हैं
सिंचित क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 60 किलो (यूरिया 130 किलो), फासफोरस 24 किलो (एस एस पी 150 किलो), पोटाश 12 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 20 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस और पोटाश क.... (Read More)
मिट्टी की जांच के आधार पर खादें डालें मिट्टी की जांच के अनुसार ही हम मिट्टी में आवश्यक खादों की मात्रा दे सकते हैं
सिंचित क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 60 किलो (यूरिया 130 किलो), फासफोरस 24 किलो (एस एस पी 150 किलो), पोटाश 12 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 20 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी नाइट्रोजन को पहली सिंचाई के समय डालें
बारानी क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 24 किलो (यूरिया 52 किलो), फासफोरस 12 किलो (एस एस पी 75 किलो), पोटाश 8 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 15 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोज, फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें
सिंचित क्षेत्रों में पिछेती बिजाई के लिए, नाइट्रोजन 50 किलो (यूरिया 110 किलो), फासफोरस 12 किलो (एस एस पी 75 किलो), पोटाश 16 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 27 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन की दो तिहाई मात्रा बिजाई के 35-40 दिनों के बाद डालें
यह पाया गया है कि जिंक सल्फेट 10 किलो प्रति एकड़ में डालने से उपज में वृद्धि होती है जिंक की कमी को पूरा करने के लिए जिंक सल्फेट 0.5 प्रतिशत की फोलियर स्प्रे करें 15 दिनों के अंतराल पर दो से तीन स्प्रे करें

Posted by prabhjot singh
Punjab
18-01-2020 07:28 AM
bhai sahib 1quintal feed ka formula Anaaj 40kg khal 30kg chokar or rice polish/doc 30kg min mix 2kg namak 1kg

Posted by prabhjot singh
Punjab
18-01-2020 07:26 AM
prabhjot ji jiwe tuhade pashu vdia trike nal ate asani nal feed khande hai ate vdia dudh dinde hai tuci uss hisab nal pashu nu feed tyar krke de skde ho..

Posted by prabhjot singh
Punjab
18-01-2020 07:22 AM
prabhjot ji jiwe tuhade pashu vdia trike nal ate asani nal feed khande hai ate vdia dudh dinde hai tuci uss hisab nal pashu nu feed tyar krke de skde ho..

Posted by prabhjot singh
Punjab
18-01-2020 07:21 AM
Prabhjot ji her company da feed tyar krnn da trike alag alag hunda hai, ohh pashu nu dudh de hisab nal, heifer lai , calf lai alag alag feed tyar krde hai ate ohna nu tyar krn da trika v alag alag hunda hai, iss vare sahi jankari tuhanu feed tyar krn wali company ton ptaa lgg skda hai.

Posted by उमेश भाई प्रजापत
Rajasthan
18-01-2020 07:14 AM
bhai sahib rajwa hara chaara te har 3kg dudh lai 1kg wadhya feed pao har 3 mahine baad pet ke kirhe nikalne ki dwaee deo

Posted by Himanshu Kumar Mishra
Jharkhand
18-01-2020 07:10 AM
श्री मान टमाटर को कुहासा से बचाने के लिए आप हल्की सिंचाई कर सकते हो

Posted by prabhjot singh
Punjab
18-01-2020 07:05 AM
Prabhjot ji tuci 15kg tak cholia da chilka 100kg feed vich puua skde ho.

Posted by prabhjot singh
Punjab
18-01-2020 07:01 AM
BhaaG rice polish protein da sarot ae duje eh pet ch full k pashu di bhookh door karfa ae iss wich tel v hunda ae

Posted by राजाराम सिंवर
Rajasthan
18-01-2020 06:59 AM
पॉली हाउस (प्लास्टिक के हरित गृह) ऐसे ढाँचे हैं जो परम्परागत काँच घरों के स्थान पर बेमौसमी फसलोत्पादन के लिए उपयोग में लाए जा रहे हैं ये ढाँचे बाह्य वातावरण के प्रतिकूल होने के बावजूद भीतर उगाये गये पौधों का संरक्षण करते हैं और बेमौसमी नर्सरी तथा फसलोत्पादन में सहायक होते हैं साथ ही पॉली हाउस में उत्पादि.... (Read More)
पॉली हाउस (प्लास्टिक के हरित गृह) ऐसे ढाँचे हैं जो परम्परागत काँच घरों के स्थान पर बेमौसमी फसलोत्पादन के लिए उपयोग में लाए जा रहे हैं ये ढाँचे बाह्य वातावरण के प्रतिकूल होने के बावजूद भीतर उगाये गये पौधों का संरक्षण करते हैं और बेमौसमी नर्सरी तथा फसलोत्पादन में सहायक होते हैं साथ ही पॉली हाउस में उत्पादित फसल अच्छी गुणवत्ता वाली होती है low tunnel का काम भी polyhouse के जैसे ही होता है, इसका आकार काफ़ी छोटा होता है, इसमें सब्जिया का उत्पाद किया जाता है, अगर आप भी इसे लगाना चाहते है तो आप पुनीत गुप्ता जी Puneet Gupta 9780200996 (Punjab Poly Agro) के साथ सम्पर्क कर सकते हैं, धन्यवाद

Posted by Pavan Kumar
Uttar Pradesh
18-01-2020 06:58 AM
श्री मान आलू में झुलसा रोग की रोकथाम के लिए आप मैनकोजेब 30 ग्राम या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 30 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी में मिलाकर सप्रे कर सकते हो

Posted by Manpreet singh
Punjab
18-01-2020 06:34 AM
ਮਨਪ੍ਰੀਤ ਜੀ ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ Calcimust gold liquid 15ml ਰੋਜਾਨਾ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਅਤੇ Feritas tablet ਰੋਜਾਨਾ 1 ਗੋਲੀ ਦੇਣੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ..

Posted by pankaj
Rajasthan
18-01-2020 06:24 AM
पंकज जी कृपया आप बताये के आपने इसमें क्या क्या खाद डाली है ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद

Posted by Vishal Thakur
Bihar
18-01-2020 06:22 AM
Vishal ji kripya aap apna swal vistar se pushen ki aap kya jankari lena chahte hai tan jo apko sahi jankari di jaa skee.
Posted by Rahul Gujjar
Uttar Pradesh
18-01-2020 06:04 AM
राहुल जी कृपया सवाल विस्तार से पूछे कि आप गन्ने के साथ मेथी की बिजाई करना चाहते है या गन्ने की फसल के बाद ताकि आपको इसके हिसाब से जानकारी दी जा सके|

Posted by Yadvinder
Haryana
18-01-2020 05:43 AM
Yadvinder ji, kanak vich kul 110 kilo urea prati acre de hisaab nal painda hai, jekar tusi is matra da istemal kar leya hai tan tuhanu dubara urea paun di lorh nahi hai, dhanwad
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