
Posted by Navakumar Baidya
Maharashtra
18-01-2020 01:15 PM
कृपया बताये के आप कोनसे कीट की रोकथाम के बारे में जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by ਨਵਪਰੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
18-01-2020 01:12 PM
ਉਸਦੀ ਧਾਰ ਪੋਲੀ ਕਰਨ ਲਈ ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ 250 ਗ੍ਰਾਮ ਰਾਵ ਖੰਡ, 100 ਗ੍ਰਾਮ ਬੱਗਾ ਜੀਰਾ ਉਬਾਲ ਕੇ , 250 ਗ੍ਰਾਮ ਡਾਲਡਾ ਘਿਓ ਤੇ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਨਿੰਬੂ ਪਾ ਕੇ ਠਾਰ ਕੇ 7-10 ਦਿਨ ਦਿਉ.

Posted by chinu
Punjab
18-01-2020 01:06 PM
Usko aap Betnesol tablet 1-1 goli subah sham, cefixime tablet 200mg adhi adhi goli subah sham aur Dexona tablet 1-1 goli subah sham deni suru kren, isse frak paddne lgg jayega.

Posted by Vishal yadav
Bihar
18-01-2020 01:04 PM
vishal ji agar aap genhu ki ktayi ke bare men jankari lena chahte hai to abhi iski ktayi na karen iske ilava agar aap koi aur jankari lena chahte hai to kripya btaye kyuki aapki audio men kuch saaf sunayi diya tha.dhanywad
Posted by Kp Bana
Madhya Pradesh
18-01-2020 01:04 PM
Bana ji aap murgi palan ki training lene ke liye aap apne nazdiki kvk se sampark kr skte hai waha sme sme per alag alag kam ke liye training di jatti hai, aap training lene ke liye aap krishi vigyan kendra Address: Ganj, Sehore, Madhya Pradesh 466001, Phone: 078945 61423 se sampark kr skte hai..

Posted by Vishal Gangwar
Uttar Pradesh
18-01-2020 12:53 PM
विशाल जी, खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते ह.... (Read More)
विशाल जी, खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुमब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तहय उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तहय में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे, केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तहय लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है धन्यवाद

Posted by Nishant Panwar
Uttar Pradesh
18-01-2020 12:50 PM
निशांत जी, पोक्का बोइंग फंगस के हमले की वजह से होता है, आप इसकी रोकथाम के लिए इसमें M 45 @ 400 ग्राम को 150 लीटर पानी में मिला कर प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें, इससे फंगस की रोकथाम हो जाती है, धन्यवाद
Posted by ਹਰਜੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
18-01-2020 12:50 PM
ਉਸ ਨੂੰ Albomar liquid 30ml ਨੂੰ 15-15ml ਕਰਕੇ 2 ਦਿਨ ਦਿਓ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ Sharkoferol liquid 10-10ml ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ..
Posted by Sharry Ahluwalia
Punjab
18-01-2020 12:49 PM
ਸ਼ੈਰੀ ਜੀ, ਸਰੋਂ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਦਾ ਸਹੀ ਸਮਾਂ ਸਤੰਬਰ ਤੋਂ ਅਕਤੂਬਰ ਹੈ ਤੋਰੀਆ ਫਸਲ ਲਈ ਬਿਜਾਈ ਸਤੰਬਰ ਦੇ ਪਹਿਲੇ ਪੰਦਰਵਾੜੇ ਤੋਂ ਅੱਧ ਅਕਤੂਬਰ ਤੱਕ ਕਰ ਲੈਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਅਫਰੀਕਨ ਸਰੋਂ ਅਤੇ ਤਾਰਾਮੀਰਾ ਦੀ ਫਸਲ ਅਕਤੂਬਰ ਦੇ ਅਖੀਰ ਤੱਕ ਬੀਜੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਰਾਇਆ ਫਸਲ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਅੱਧ ਅਕਤੂਬਰ ਤੋਂ ਨਵੰਬਰ ਦੇ ਅਖੀਰ ਤੱਕ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਜਦੋਂ ਤਾਰਾਮੀਰਾ ਨੂੰ ਮੁੱਖ ਫਸਲ ਦੇ ਵਿੱਚ ਉਗਾਇਆ.... (Read More)
ਸ਼ੈਰੀ ਜੀ, ਸਰੋਂ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਦਾ ਸਹੀ ਸਮਾਂ ਸਤੰਬਰ ਤੋਂ ਅਕਤੂਬਰ ਹੈ ਤੋਰੀਆ ਫਸਲ ਲਈ ਬਿਜਾਈ ਸਤੰਬਰ ਦੇ ਪਹਿਲੇ ਪੰਦਰਵਾੜੇ ਤੋਂ ਅੱਧ ਅਕਤੂਬਰ ਤੱਕ ਕਰ ਲੈਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਅਫਰੀਕਨ ਸਰੋਂ ਅਤੇ ਤਾਰਾਮੀਰਾ ਦੀ ਫਸਲ ਅਕਤੂਬਰ ਦੇ ਅਖੀਰ ਤੱਕ ਬੀਜੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਰਾਇਆ ਫਸਲ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਅੱਧ ਅਕਤੂਬਰ ਤੋਂ ਨਵੰਬਰ ਦੇ ਅਖੀਰ ਤੱਕ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਜਦੋਂ ਤਾਰਾਮੀਰਾ ਨੂੰ ਮੁੱਖ ਫਸਲ ਦੇ ਵਿੱਚ ਉਗਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਇਸ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਮੁੱਖ ਫਸਲ ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਸਮੇਂ ਇਸ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਨਹੀਂ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by K S Dwivedi
Bihar
18-01-2020 12:41 PM
द्विवेदी जी, आप यूरिया पानी के साथ भी दे सकते हैं और पानी देने से एक दिन पहल भी दे सकते हैं, धन्यवाद

Posted by Nishant Panwar
Uttar Pradesh
18-01-2020 12:39 PM
Nishant ji, Pokha boeing fungus ke hamle ki vajah se hota hai, ap iski roktham ke liye carbendazim @ 400 gram ya mancozeb @ 400 gram ko 150 liter pani mein mila kar prati acre ke hisaab se spray karein, dhanywad
Posted by Rohit Kumar
Uttar Pradesh
18-01-2020 12:33 PM
रोहित जी, कृपया आप बताये कि अपने इसमें कौन सी खाद का इस्तेमाल किया है, ताकि आपको इसका समाधान बताया जा सके, धन्यवाद

Posted by Ajaykumar
Himachal Pradesh
18-01-2020 12:33 PM
Ajay ji kripya aap apna swal vistar se pooche taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake,dhanywad
Posted by Rohit Kumar
Uttar Pradesh
18-01-2020 12:30 PM
Rohit ji, kripya ap ape gehun ki photo bhejein taki apko dekh kar iska samadhan bataya ja sake, dhanywad

Posted by Jitender Kumar
Haryana
18-01-2020 12:30 PM
निमाटोड एक बहुत बारीक धागे जैसा कीड़ा होता है जो मिट्टी में रहता है निमाटोड कई तरह के होते हैं और इनकी हर तरह की किस्म फसल को नुकसान पहुंचाने के लिए प्रसिद्ध है

Posted by Devaram leelawat
Rajasthan
18-01-2020 12:29 PM
देवाराम जी कृपया सवाल विस्तार से पूछे ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by harwinder singh
Punjab
18-01-2020 12:28 PM
Harwinder ji tuc isde uper carbendazim@400 gram nu prati acre de hisab nal spray karo.dhanwad

Posted by Vinod Singh
Bihar
18-01-2020 12:24 PM
विनोद जी कृपया आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके

Posted by kamal singh tomar
Madhya Pradesh
18-01-2020 12:16 PM
कमल जी कृपया बताये के आपने इसमें अभी तक क्या क्या खाद डाली है ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद

Posted by gurjitsinghgill
Punjab
18-01-2020 12:14 PM
ਗੁਰਜੀਤ ਜੀ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਸਵਾਲ ਵਿਸਤਾਰ ਨਾਲ ਪੁਛੋ ਤਾ ਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸ ਬਾਰੇ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by mahiii
Karnataka
18-01-2020 12:12 PM
Mahi ji kripya btaye ke aapne abhi tak konsi spray ka istemal kiya hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake,dhanywad

Posted by shivam dubey
Madhya Pradesh
18-01-2020 12:09 PM
Shivam ji iski jad men dheemakl check karen agar maujood hai to aap iske uper chlorpyriphos@4ml ko prati litre pani ke hisab se spray karen,dhanywad

Posted by pawan.sumam
Madhya Pradesh
18-01-2020 12:02 PM
pawan ji kripya aap matr ki fasl ki photo bheje taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake,dhanywad

Posted by jarnail singh
Punjab
18-01-2020 11:54 AM
राजमांह को इसके लाल रंग की वजह से और किडनी के आकार जैसा होने पर किडनी बीन्स भी कहा जाता है यह प्रोटीन का मुख्य स्त्रोत है और मोलीबडेनम तत्व भी देता है इसमें कोलैस्ट्रोल को कम करने वाले तत्व भी हैं उत्तरी भारत में इसकी दाल भी बनाई जाती है भारत में, महाराष्ट्र, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, बंगाल, ताम.... (Read More)
राजमांह को इसके लाल रंग की वजह से और किडनी के आकार जैसा होने पर किडनी बीन्स भी कहा जाता है यह प्रोटीन का मुख्य स्त्रोत है और मोलीबडेनम तत्व भी देता है इसमें कोलैस्ट्रोल को कम करने वाले तत्व भी हैं उत्तरी भारत में इसकी दाल भी बनाई जाती है भारत में, महाराष्ट्र, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, बंगाल, तामिलनाडू, केरल, कर्नाटक मुख्य राजमांह उत्पादक राज्य हैं मिट्टी इसे मिट्टी की व्यापक किस्मों जैसे हल्की रेतली से भारी चिकनी मिट्टी में उगाया जा सकता है जल निकास वाली दोमट ज़मीनों में इसकी पैदावार बहुत अच्छी होती है यह नमक वाली मिट्टी के प्रति बहुत संवेदनशील है लगभग 5.5-6 पी एच वाली ज़मीनों में इसकी पैदावार अधिक होती है VL Rajma 125: यह किस्म उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में समय से बोयी जाती है इसकी फली में 4-5 बीज होते हैं और 100 बीज का भार लगभग 41.38 ग्राम होता है RBL 6: यह किस्म पंजाब में बोयी जाती है इसके बीज हल्के हरे रंग के होते हैं और फली में 6-8 बीज होते हैं दूसरे राज्यों की किस्में इसके इलावा भारत में उगाई जाने वाली प्रसिद्ध किस्में: HUR 15, HUR-137, Amber, Arun, Arka Komal, Arka Suvidha, Pusa Parvathi, Pusa Himalatha, VL Boni 1, Ooty 1आदि ज़मीन की तैयारी मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की 2-3 बार जोताई करें, खेत को समतल रखें ताकि उसमें पानी ना खड़ा रहे यह फसल जल जमाव के प्रति काफी संवेदनशील होती है आखिरी जोताई के समय, 60-80 क्विंटल प्रति एकड़ रूड़ी की खाद डालें ताकि अच्छी पैदावार मिल सके बिजाई का समय बसंत की ऋतु में राजमांह की बिजाई फरवरी से मार्च और खरीफ की ऋतु में इसकी बिजाई मई से जून के महीने की जाती है पंजाब में कुछ किसान राजमांह की बिजाई जनवरी के आखिरी सप्ताह करते हैं फासला अगेती किस्मों के लिए कतारों में 45-60 सैं.मी. और पौधों में फासला 10-15 सैं.मी. रखें पॉल जैसी किस्मों के लिए पहाड़ी क्षेत्रों में पौधे का फासला 3-4 मीटर प्रति पहाड़ी होना चाहिए बीज की गहराई बीज को 6-7 सैं.मी. गहरा बोयें बिजाई की विधि इसकी बिजाई गड्ढा खोदकर की जाती है समतल क्षेत्रों में बीज पंक्तियों में बोयें जाते हैं और पहाड़ी क्षेत्रों में इसकी खेती बैड बनाकर की जाती है अगेती किस्मों के लिए 30-35 किलोग्राम बीज प्रति एकड़ का प्रयोग करें पॉल किस्मों की बिजाई पहाड़ी क्षेत्रों में 1 मीटर के फासले पर 3-4 पौधे प्रति पहाड़ी पर लगाए जाते हैं बीज की मात्रा 10-12 किलोग्राम प्रति एकड़ प्रयोग की जाती है बीज का उपचार बिजाई से पहले थीरम 4 ग्राम से प्रति किलो बीज का उपचार करें बीजों का छांव में सुखाएं और तुरंत बो दें खरपतवार नियंत्रण फसल के शुरू में नदीनों की रोकथाम जरूरी है इस अवस्था में नदीनों का हमला ना होने दें खादें डालने और सिंचाई करने के साथ ही गोडाई कर दें नदीनों के अंकुरन से पहले फ्लूक्लोरालिन 800 मि.ली. प्रति एकड़ या पैंडीमैथालीन 1 लीटर प्रति एकड़ का प्रयोग करें सिंचाई बीजों के अच्छे अंकुरण के लिए बिजाई से पहले सिंचाई करें फसल की वृद्धि के दौरान 6-7 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है बिजाई के बाद 25वें दिन सिंचाई करें और अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए 25 दिनों के अंतराल पर 3 सिंचाइयां जरूरी होती हैं फसल के खिलने, फूल निकलने के दौरान और फलियां विकसित होने की अवस्था में सिंचाई करें इन अवस्थाओं पर पानी की कमी ना होने दें फसल की कटाई जब इसकी फलियां पूरी तरह पक जायें और रंग पीला हो जाये तो इसकी तुड़ाई की जा सकती है इसके पत्ते पीले पड़ने के बाद गिरने शुरू हो जाते हैं किस्म के आधार पर इसकी फलियां 7-12 दिनों में पककर तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती हैं पूरी फसल 120-130 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती हैं कटाई समय से करें काटी हुई फसल 3-4 दिनों के लिए धूप में रखें अच्छी तरह सूखने के बाद बैलों या छड़ों की मदद से छंटाई की जा सकती हैं कटाई के बाद राजमांह को कटाई के बाद कईं कामों के लिए प्रयोग किया जाता है सांभ संभाल के समय इसकी देखभाल जरूरी है राजमांह को स्टोर करने से पहले आकार और क्वालिटी के आधार पर बांटा जाता है गले हुए राजमांह धूप में हल्की गर्मी में रख दिए जाते हैं ताकि उनमें से नमी की मात्रा कम हो जाये इसके लिए हमेशा ठंडी, अंधेरे और सूखी जगह पर रख दिया जाता है

Posted by sarpanch
Punjab
18-01-2020 11:53 AM
ਸਰਪੰਚ ਜੀ ਇਸ ਕਿਸਮ ਵਿਚ ਜ਼ਿਆਦਾਤਰ ਪਾਣੀ ਖੜਾ ਨਹੀਂ ਰਹਿਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Tauhid Khan
Uttar Pradesh
18-01-2020 11:51 AM
Tauhid ji abhi aapko koi aur spray karne ki jrurat nahi hai kripya aap khaad ka sahi istemal karen.dhanywad

Posted by Kiran kumar
Punjab
18-01-2020 11:35 AM
kiram ji eh fungus de karn hunde han isde uper carbendazim@400 gram nu prati acre de hisab nal spray karo.dhanwad

Posted by pankaj
Rajasthan
18-01-2020 11:28 AM
पंकज जी कृपया बताये के आपने इसमें अभी तक की क्या खाद डाली है ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by Navjot Singh
Punjab
18-01-2020 11:15 AM
Navjot ji please tell us in detail which fertilizers you have provided to the crop so taht we can guide you accordingly.thank you
Posted by गवर्नर सिंह खुटे
Chattisgarh
18-01-2020 11:15 AM
Mr. singh ji desi chicks lene ke lia aap Kamlesh Kushwaha 9229881876 se samparak kar sakte hai, Thankyou.

Posted by Harsh Deep Singh
Punjab
18-01-2020 11:10 AM
Harshdeep ji ehna dona da result vdia hai jo cafplan powder hai ohh calf di jldi growth vich help krda hai..

Posted by Mandeep singh
Punjab
18-01-2020 11:03 AM
Mnadeep ji eh yellow rust de lashan han isde layi tuc tilt@200ml nu prati acre de hisab nal spray karo.dhanwad
Posted by राम गोपाल यादव
Rajasthan
18-01-2020 11:01 AM
डेयरी फार्मिंग के लिए लोन अलग अलग कामों के लिए मिलता है जैसे शैड के लिए, पशुओं के लिए, डेयरी मशीनरी के लिए सबसे पहले आपने जिसके लिए लोन लेना है उस संबंधी आवेदन नज़दीक के डिप्टी डायरेक्टर को मिलकर दें, इसके लिए आपके पास डेयरी ट्रेनिंग होनी जरूरी है उसके सर्टीफिकेट के हिसाब से आपको लोन मिलेगा यह ट्रेनिंग आप अप.... (Read More)
डेयरी फार्मिंग के लिए लोन अलग अलग कामों के लिए मिलता है जैसे शैड के लिए, पशुओं के लिए, डेयरी मशीनरी के लिए सबसे पहले आपने जिसके लिए लोन लेना है उस संबंधी आवेदन नज़दीक के डिप्टी डायरेक्टर को मिलकर दें, इसके लिए आपके पास डेयरी ट्रेनिंग होनी जरूरी है उसके सर्टीफिकेट के हिसाब से आपको लोन मिलेगा यह ट्रेनिंग आप अपने नज़दीकी केवीके से प्राप्त कर सकते है वहां समय समय पर ट्रेनिंग दी जाती है आप वहां जाकर अपना फार्म भर आए जब भी वहां ट्रेनिंग होगी तो आपको फोन करके बता दिया जाएगा, इस ट्रेनिंग में आपको डेयरी लोन और सब्सिड़ी के बारे में सारी जानकारी प्राप्त हो जाएगी.

Posted by Gurmeet singh
Punjab
18-01-2020 11:00 AM
gurmeet ji isnu february de akhirle hafte tak beej sakde ho.dhanwad

Posted by यज्ञदत्त-शर्मा
Uttar Pradesh
18-01-2020 10:53 AM
शर्मा जी बारिश के बाद झुलस रोग आने की सम्भावना है जिसके लिए आप copper oxychloride @500 ग्राम को प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by Suresh
Uttar Pradesh
18-01-2020 10:33 AM
सुरेश जी, अरवी की खेती में खीरे की खेती नहीं की जा सकती है, क्यों की अरवी जड़ में बनती है और खीरे की फसल की बेल होती है, जिसकी वजह से यह आपस में मेल नहीं खाते है, धन्यवाद धन्यवाद
Posted by Rahul Solanki
Madhya Pradesh
18-01-2020 10:30 AM
राहुल जी फूलों की खेती के लिए रेतली मिटटी ही बढ़िया होती है क्युकी उसमे फूल अच्छे से ग्रोथ करते है धन्यवाद
Posted by Kamlesh Nayak
Rajasthan
18-01-2020 10:25 AM
कमलेश जी क्या आप लहसुन के बारे में पूछ रहे है , यदि लहसुन के बारे में पूछ रहे है तो आप पत्ते खिलाकर देख सकते है यदि वो खाते है तो आप उनका प्रयोग कर सकते है और लूसन को भी चारे के तौर पर दे सकते है।
Posted by Arun begana
Uttar Pradesh
18-01-2020 10:24 AM
अरुण जी आप इसके ऊपर NPK 130045 @1 किलो को 150 लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by Kamlesh Nayak
Rajasthan
18-01-2020 10:20 AM
आप उसे अच्छी मात्रा में चारा दें और अच्छी फीड डालें क्योंकि अच्छी खुराक से जानवर का अच्छा विकास होता है उसे आप Nilzan liquid 1ml/3kg शरीर के भार के हिसाब से दें और Groviplex liquid 5ml रोजाना दें इससे फर्क पड़ जाएगा.
Posted by ashish
Uttar Pradesh
18-01-2020 10:19 AM
इस बीमारी का हमला पत्तों के शिखरों और नीचे के भाग पर देखा जा सकता है प्रभावित पत्तों पर बेढंगे आकार के धब्बे दिखते हैं और धब्बों के आस पास सफेद पाउडर बन जाता है ज्यादा हमले की सूरत में प्रभावित पौधों की नज़दीक की मिट्टी में सफेद पाउडर दिखाई देता है यह बीमारी बारिश के बाद और बादलवाई वाले मौसम में अधिक फैलती ह.... (Read More)
इस बीमारी का हमला पत्तों के शिखरों और नीचे के भाग पर देखा जा सकता है प्रभावित पत्तों पर बेढंगे आकार के धब्बे दिखते हैं और धब्बों के आस पास सफेद पाउडर बन जाता है ज्यादा हमले की सूरत में प्रभावित पौधों की नज़दीक की मिट्टी में सफेद पाउडर दिखाई देता है यह बीमारी बारिश के बाद और बादलवाई वाले मौसम में अधिक फैलती है यदि इसे ना रोका जाये तो 50 प्रतिशत तक नुकसान हो सकता है
बिजाई के लिए सेहतमंद और बीमारी मुक्त बीज प्रयोग करें यदि हमला दिखे तो प्रॉपीनेब 40 ग्राम प्रति 15 लीटर पानी की स्प्रे करें
Posted by Kamlesh Nayak
Rajasthan
18-01-2020 10:17 AM
यदि आपके पास 10 ब्लैक बंगाल नस्ल की बकरियां है तो आप उसी नस्ल का बकरा रख सकते है जिससे बच्चे अच्छी नस्ल के पैदा होगे यदि आप किसी दूसरी नस्ल के क्रॉस करवाते है तो बच्चे भी क्रॉस नसल के पैदा होते है
Posted by Satnam Singh
Punjab
18-01-2020 10:11 AM
ਸਤਨਾਮ ਜੀ, ਇਸ ਬਿਮਾਰੀ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ, ਕੁੰਗੀ ਦੀਆਂ ਰੋਧਕ ਕਿਸਮਾਂ ਵਰਤੋ ਫਸਲੀ ਚੱਕਰ ਅਤੇ ਮਿਸ਼ਰਤ ਫਸਲਾਂ ਦੀ ਵਿਧੀ ਅਪਨਾਓ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ਦੀ ਜ਼ਿਆਦਾ ਵਰਤੋਂ ਤੋਂ ਨਾ ਕਰੋ ਜਦੋਂ ਇਸ ਬਿਮਾਰੀ ਦੇ ਲੱਛਣ ਵਿਖਾਈ ਦੇਣ ਤਾਂ 5-10 ਕਿਲੋਗ੍ਰਾਮ ਸਲਫਰ ਦਾ ਛਿੱਟਾ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਜਾਂ 400 ਗ੍ਰਾਮ ਮੈਨਕੋਜ਼ਿਬ ਨੂੰ 150 ਲੀਟਰ ਜਾਂ 200 ਮਿ.ਲੀ. ਪ੍ਰੋਪੀਕੋਨਾਜ਼ੋਲ (ਟਿਲਟ) 25 ਈ ਸੀ ਨੂੰ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਪ.... (Read More)
ਸਤਨਾਮ ਜੀ, ਇਸ ਬਿਮਾਰੀ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ, ਕੁੰਗੀ ਦੀਆਂ ਰੋਧਕ ਕਿਸਮਾਂ ਵਰਤੋ ਫਸਲੀ ਚੱਕਰ ਅਤੇ ਮਿਸ਼ਰਤ ਫਸਲਾਂ ਦੀ ਵਿਧੀ ਅਪਨਾਓ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ਦੀ ਜ਼ਿਆਦਾ ਵਰਤੋਂ ਤੋਂ ਨਾ ਕਰੋ ਜਦੋਂ ਇਸ ਬਿਮਾਰੀ ਦੇ ਲੱਛਣ ਵਿਖਾਈ ਦੇਣ ਤਾਂ 5-10 ਕਿਲੋਗ੍ਰਾਮ ਸਲਫਰ ਦਾ ਛਿੱਟਾ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਜਾਂ 400 ਗ੍ਰਾਮ ਮੈਨਕੋਜ਼ਿਬ ਨੂੰ 150 ਲੀਟਰ ਜਾਂ 200 ਮਿ.ਲੀ. ਪ੍ਰੋਪੀਕੋਨਾਜ਼ੋਲ (ਟਿਲਟ) 25 ਈ ਸੀ ਨੂੰ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਤੇ ਸਪਰੇ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Rakesh Gautam
Haryana
18-01-2020 10:08 AM
Rakesh Gautam Ji plant lene ke lia aap Aushadhiya kheti vikas sansthan 6268536795 se sampark kar sakte hai, Thankyou.
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