
Posted by ABHISHEK CHAUHAN
Assam
20-01-2020 10:26 AM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by Deepak
Haryana
20-01-2020 10:09 AM
Deepak ji kripya aap btaye ke aapne isme kya kya spray ki hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad

Posted by Sanjeet kumar
Haryana
20-01-2020 09:53 AM
sanjeet ji aap khaadon ki poori matra daalne ke bad bhi agar growth na ho to aap NPK 191919 @1 kilo ko 150 Litre pani ke hisab se spray karen,dhanywad
Posted by Mukesh kumar Jatiya
Rajasthan
20-01-2020 09:49 AM
मुकेश जी आप इसके पत्तों के नीचे मच्छर का हमला चैक करें अगर मौजूद है तो आप इसके ऊपर imidacloprid @1.5 ml को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद

Posted by Amritpal singh
Punjab
20-01-2020 09:46 AM
ਉਸ ਨੂੰ ਪੇਟ ਦੇ ਕੀੜਿਆਂ ਲਈ Bendykind plus ਗੋਲੀ ਦਿਓ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ Minfa gold ਪਾਊਡਰ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ Ovumin advance ਰੋਜਾਨਾ ਇਕ ਗੋਲੀ ਦਿਓ ਅਤੇ 21 ਦਿਨ ਤਕ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆ ਜਾਵੇਗੀ.
Posted by Barkat Ali
Rajasthan
20-01-2020 09:43 AM
बरकत जी यह फास्फोरस तत्व की कमी के कारण हो रहा है कृपया आप अपने पिछले सवालों के अनुसार यह बताये कि आपने इसमें अभी तक क्या क्या खाद डाली है ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद

Posted by nandkisor
Uttar Pradesh
20-01-2020 09:37 AM
Nandkisor ji agar aap pehli bar gende ki kheti kar rahe hai to aap french marigold ki bijai kar sakte hai. iski bijai aap saal men kabhi bhi kar sakte hai.dhanywad

Posted by sunny Tyagi
Uttar Pradesh
20-01-2020 09:32 AM
बढ़िया निकास वाली रेतली दोमट या हल्की लाल मिट्टी, जिसका 7.5-8.0 pH हो, में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है नमी बरकरार रखने वाली और जल सोखने वाली मिट्टी में अश्वगंधा की खेती नहीं की जा सकती है इसके लिए मिट्टी हल्की, गहरी और अच्छे जल निकास वाली होनी चाहिए अच्छे निकास वाली काली और भारी मिट्टी इसकी खेती के लिए अनुकूल होती.... (Read More)
बढ़िया निकास वाली रेतली दोमट या हल्की लाल मिट्टी, जिसका 7.5-8.0 pH हो, में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है नमी बरकरार रखने वाली और जल सोखने वाली मिट्टी में अश्वगंधा की खेती नहीं की जा सकती है इसके लिए मिट्टी हल्की, गहरी और अच्छे जल निकास वाली होनी चाहिए अच्छे निकास वाली काली और भारी मिट्टी इसकी खेती के लिए अनुकूल होती हैं Jawahar Asgand-20 and Jawahar Asgand-134: यह उच्च क्षारी किस्म है यह जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, मध्य प्रदेश द्वारा विकसित की गई है इस किस्म के पौधेका कद छोटा होता है और यह अपना घनत्व ज्यादा होने के कारण जनि जाती है यह किस्म की पैदावार 180 दिनों में सूखी जड़ों में कुल 0.30% एनोलाइड की मात्रा है Raj Vijay Ashwagandha-100: यह किस्म भी जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, मध्य प्रदेश द्वारा तैयार की गई है Rakshita and Poshita: अधिक उपज देने वाली यह किस्म CSIR-CIMAP लखनऊ द्वारा विकसित की गई है WSR : यह किस्म सी एस आई आर खेतरी रिसर्च लैबोर्टरी, जम्मू द्वारा विकसित की गई है अश्वगंधा की खेती के लिए भुरभुरी और समतल ज़मीन की आवश्यकता होती है मिट्टी को भुरभुरा करने के लिए खेत की 2-3 बार जोताई करें और बारिश से पहले खेत की डिस्क या तवियों से जोताई करें खेत को अप्रैल-मई के महीने में तैयार करें खेत की तैयारी के समय, लगभग 4-8 टन रूड़ी की खाद प्रति एकड़ डालें और मिट्टी में अच्छी तरह मिला दें फिर सुहागे के साथ खेत को समतल करें इस में किसी भी रासायनिक खाद या कीटनाशक प्रयोग करने की जरूरत नहीं पड़ती, क्योंकि यह एक चिकित्सिक पौधा है और जैविक खेती के द्वारा उगता है कुछ जैविक खादें जैसे कि रूड़ी की खाद, वर्मी कम्पोस्ट, हरी खाद आदि जरूरत अनुसार प्रयोग की जा सकती है कुछ बायो-कीटनाशक, जोकि नीम, चित्रकमूल, धतूरा, गौ-मूत्र आदि से तैयार होते है, इनको मिट्टी और बीजों से पैदा होने वाली बीमारीयों को रोकने के लिए प्रयोग किया जा सकता है मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ाने के लिए नाइट्रोजन(यूरिया 14 किलो) और फासफोरस 6 किलो(सिंगल सुपर फासफेट 38 किलो) प्रति एकड़ की आवश्यकता होती है खेत को नदीन मुक्त करने के लिए आमतौर पर दो बार गोडाई की आवश्यकता होती है पहली बिजाई के 20-25 दिनों और दूसरी गोडाई पहली गोडाई के 20-25 दिनों के बाद करें नदीनों को रोकने के लिए बिजाई से पहले इसोप्रोटूरान 200 ग्राम और ग्लाइफोसेट 600 ग्राम प्रति एकड़ में डालें अनावश्यक पानी और बारिश के साथ फसल को नुकसान होता है यदि बारिश वाले दिन हो तो सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती, 1-2 बार जीवन रक्षक सिंचाइयां करें सिंचित हालातों में फसल को, 10-15 दिनों में एक बार सिंचाई करें पहली सिंचाई अंकुरन से 30-35 दिनों के बाद और दूसरी सिंचाई पहली सिंचाई के 60-70 दिनों के बाद करनी चाहिए पौधा 160-180 दिनों में पैदावार देना है कटाई सूखे मौसम में करें, जब पत्ते सूख रहे हो और फल लाल संतरी रंग के हो जायें कटाई हाथों से जड़ों को उखाड़कर या मशीन द्वारा बिना जड़ों को नुकसान पहुंचाए की जाती है,जैसे कि पावर टिल्लर या कंट्री पलोअ आदि के साथ कटाई के बाद पौधे से जड़ों को अलग करें और इन्हें छोटे-छोटे टुकड़ों में जैसे 8-10 सैं.मी. काट दें और फिर हवा में सुखाएं कटाई के बाद छंटाई की जाती है जड़ों के टुकड़ों को बेचने के लिए टीन के बक्सों में स्टोर कर लिया जाता है जड़ें जितनी लंबी होंगी उसका मुल्य उतना ही ज्यादा होगा फल को अलग से तोड़ें और हवा में सुखा के पीस लिया जाता है ताकि बीज आसानी से बाहर निकल सकें
सफ़ेद मूसली की खेती के लिए 15-35°C तापमान की जरुरत होती है इसकी खेती कई तरह की मिट्टी जैसे कि दोमट से रेतली और बढ़िया निकास वाली में की जा सकती है यह पहाड़ी ढलानों वाली या गीली मिट्टी को भी सहर सकती है यह जैविक तत्वों से भरपूर लाल मिट्टी में बढ़िया पैदावार देती है जल-जमाव वाली स्थिति में इसकी खेती ना करें इस लिए मिट्टी का pH 6.5-8.5 होना चाहिए आप इसकी किस्मे जैसे RC-2, RC-16, RC-36, RC-20, RC-23, RC-37 and CT-1,MDB-13 and MDB-14 की बिजाई कर सकते है सफेद मूसली के लिए अच्छी तरह से तैयार बैडों की जरूरत होती है बिजाई से पहले ज़मीन की तैयारी के लिए एक बार 2-3 गहरी जोताई करें ज़मीन की तैयारी आम-तौर पर अप्रैल-मई के महीने में की जाती है सफेद मूसली की बिजाई के लिए उचित समय जून से अगस्त तक का होता है पौधे के विकास के अनुसार पौधों के बीच 10x12 इंच का फासला रखें इसकी बिजाई नए पौधे मुख्य खेत में रोपाई करके की जाती है इसकी बिजाइसके प्रजनन के लिए आम-तौर पर गांठों या बीजों का प्रयोग करें इसके उचित विकास के लिए 450 किलो बीजों का प्रयोग करें ई नए पौधे मुख्य खेत में रोपाई करके की जाती है सफेद मूसली की बिजाई 1.2 मीटर चौड़े और आवश्यकता अनुसार लम्बे बैडों पर करें नए पौधे तैयार करने वाले बैड अच्छी तरह से तैयार करें इसकी बिजाई छिड़काव के द्वारा की जाती है बिजाई के बाद बैडों को हल्की मिट्टी से ढक दें बढ़िया विकास के लिए मलचिंग भी की जा सकती है बीज 5-6 दिनों में अंकुरण होना शुरू होना कर देते है और पौधे बिजाई के लिए तैयार हो जाते है रोपाई से 24 घंटे पहले बैडों को पानी दें, ताकि नए पौधों को आसानी के साथ उखाड़ा जा सके खेत की तैयारी समय, रूड़ी की खाद 80-100 क्विंटल प्रति एकड़ गोबर डालें और मिट्टी में मिलाये जैविक खादें जैसे कि रूड़ी की खाद 8-10 टन प्रति एकड़ डालर मिट्टी में मिलाये सिंगल सुपर फासफेट 100 किलो, मिउरेट ऑफ़ पोटाश 50 किलो और हड्डियों का चूरा 100 किलो प्रति एकड़ डालें 3 महीने तक कसी की सहायता के साथ गोड़ाई करें और मेंड़ के साथ मिट्टी लगाएं अंकुरण के बाद 2-3 बार करें अगर पौधे के विकास में कोई कमी दिखाई दें, तो तुरंत आवश्यक स्प्रे करें बढ़िया विकास के लिए 20-22 दिनों के फासले पर सिंचाई करें बारिश की ऋतु में, सिंचाई की जरूरत नहीं होती, पर बारिश ना होने पर सिंचाई सही फासले पर करें सिंचाई जलवायु और मिट्टी पर भी निर्भर करती है इस फसल के पौधे बिजाई से लगभग 90 दिन के बाद फल देना शुरू कर देती है इसकी कटाई सितम्बर-अक्तूबर महीने में की जाती है कटाई पत्ते पीले पड़ने और सूखने पर की जाती है इसका बीज आपको लोकल मार्किट में मिल जायेगा, पर यदि आप किसी कंपनी से कॉन्ट्रैक्ट करते हो तो इसका रेट उस कंपनी की जरूरत और शर्तों के मुताबिक उस कंपनी के द्वारा तय होता है, कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के के लिए आप Aushadhiya kheti vikas sansthan 6268536795 से सम्पर्क कर सकते है धन्यवाद

Posted by inderpal
Punjab
20-01-2020 09:31 AM
Inderpal ji tuci iss nu Vitum-H liquid 10ml rojana dena suru kro ate Agrimin-i golia rojana 1 goli deo ate 21 din tak dinde rho, iss nal bachedani da vdia vikas howega, baki tuci isdi khurak da purra dian rkho jiss nal isdi vdia growth ho jawegi.

Posted by khuspal
Punjab
20-01-2020 09:30 AM
Hello sir asi vermi compost kharidni kitho milu te 1 acre ch kini paugi eh, main Patiala dist to a ?
khuspal ji tuc vermicompost lain layi Gurpreet Shergill 9872624253 nal sampark kar sakde ho.dhanwad

Posted by Sonu Dagar
Haryana
20-01-2020 09:27 AM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by Dhanraj Khakre
Madhya Pradesh
20-01-2020 09:27 AM
dhanraj ji aap iske uper npk 130045@10 gram ko prati litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad

Posted by Gurmukh singh
Punjab
20-01-2020 09:24 AM
ਗੁਰਮੁਖ ਜੀ ਹੁਣ ਜਨਵਰੀ ਦੇ ਮਹੀਨੇ ਵਿਚ ਤਾਪਮਾਨ ਘੱਟ ਹੋਣ ਦੇ ਕਾਰਨ ਕੋਈ ਵੀ ਚਾਰੇ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਨਹੀਂ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਚਾਰੇ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਫਰਵਰੀ ਮਹੀਨੇ ਵਿਚ ਕੀਤੀ ਜਾਏਗੀ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by khuspal
Punjab
20-01-2020 09:22 AM
ਸਟੋਬਰੀ ਦੀ ਖੇਤੀ ਪੋਲੀਹਾਊਸ ਦੇ ਅੰਦਰ ਜਾਂ ਖੁੱਲੇ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਕਰ ਸਕਦੇਂ ਹੋ ਚੀਕਣੀ , ਬਾਲੂ ਅਤੇ ਚੰਗੇ ਪਾਣੀ ਦੀ ਨਿਕਾਸੀ ਵਾਲੀ ਜ਼ਮੀਨ ਸਟਰਾਬੇਰੀ ਲਈ ਚੰਗੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਏਸਿਡਿਕ ਵਿੱਚ PH level 5.0 to 6.5 ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਨਾਜੁਕਤਾ ਤੀਹ ਤੋਂ ਚਾਲ੍ਹੀ ਸੇਂਟੀਮੀਟਰ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਸਟਰਾਬੇਰੀ ਦੇ ਸਹੀ ਵਾਧੇ ਲਈ ਦਿਨ ਵੇਲੇ ਤਾਪਮਾਨ 20-25° ਡਿਗਰੀ ਅਤੇ ਰਾਤ ਵੇਲੇ 7-12° ਡਿਗਰੀ ਹੋਣਾ .... (Read More)
ਸਟੋਬਰੀ ਦੀ ਖੇਤੀ ਪੋਲੀਹਾਊਸ ਦੇ ਅੰਦਰ ਜਾਂ ਖੁੱਲੇ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਕਰ ਸਕਦੇਂ ਹੋ ਚੀਕਣੀ , ਬਾਲੂ ਅਤੇ ਚੰਗੇ ਪਾਣੀ ਦੀ ਨਿਕਾਸੀ ਵਾਲੀ ਜ਼ਮੀਨ ਸਟਰਾਬੇਰੀ ਲਈ ਚੰਗੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਏਸਿਡਿਕ ਵਿੱਚ PH level 5.0 to 6.5 ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਨਾਜੁਕਤਾ ਤੀਹ ਤੋਂ ਚਾਲ੍ਹੀ ਸੇਂਟੀਮੀਟਰ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਸਟਰਾਬੇਰੀ ਦੇ ਸਹੀ ਵਾਧੇ ਲਈ ਦਿਨ ਵੇਲੇ ਤਾਪਮਾਨ 20-25° ਡਿਗਰੀ ਅਤੇ ਰਾਤ ਵੇਲੇ 7-12° ਡਿਗਰੀ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਇਸ ਲਈ ਇਸਦੀ ਪਨੀਰੀ ਲਾਉਣ ਦਾ ਕੰਮ ਅੱਧ ਅਕਤੂਬਰ ਤੋਂ ਨਵੰਬਰ ਤਕ ਕਰ ਦੇਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਇਹਨਾਂ ਮਹੀਨਿਆਂ ਤੇ ਇਸਤੋਂ ਬਾਅਦ ਪੰਜਾਬ ਵਿਚ ਲਗਭਗ ਇਹੀ ਤਾਪਮਾਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਸਟਰਾਬੇਰੀ ਦੀ ਖੇਤੀ ਮਲਚਿੰਗ ਵਿਧੀ ਰਾਹੀਂ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਖੇਤ ਨੂੰ ਤਿਆਰ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਬਾਅਦ ਟਰੈਕਟਰ ਦੀ ਸਹਾਇਤਾ ਨਾਲ ਮਲਚਿੰਗ ਮਸ਼ੀਨ ਨੂੰ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਉਤਾਰਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਚਾਰ ਫੁੱਟ ਕਿਆਰੀ ਤਿਆਰ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਵਿੱਚ ਡਰਿੱਪ ਲਾਈਨ ਫਿੱਟ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਬਾਅਦ ਮਸ਼ੀਨ ਦੀ ਸਹਾਇਤਾ ਨਾਲ ਕਿਆਰੀਆਂ ਉੱਤੇ ਪਲਾਸਟਿਕ ਸ਼ੀਟ ਵਿਛਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਮਲਚਿੰਗ ਲਈ ਹਲਕਾ ਅਤੇ ਲਚਕੀਲਾ ਪਦਾਰਥ ਲਵੋ ਤਾਂ ਜੋ ਸਟਰਾਬੇਰੀ ਦੇ ਬੂਟੇ ਦੀ ਰਫ਼ਤਾਰ ਉੱਤੇ ਅਸਰ ਨਾ ਪਵੇ ਜਿਸਨੂੰ ਬਾਅਦ ਵਿਚ ਦੋਨਾਂ ਪਾਸਿਆਂ ਤੋਂ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਦਬਾ ਦਿਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਹੁਣ ਇਸ ਸ਼ੀਟ ਵਿਚ ਮੋਰੀਆਂ ਕੱਢ ਕੇ ਉਸ ਵਿਚ ਸਟਰਾਬੇਰੀ ਦੀ ਪਨੀਰੀ ਲਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਪਨੀਰੀ ਲਾਉਣ ਵੇਲੇ ਜੜ ਨੂੰ ਪੂਰੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਸੇਟ ਕਰ ਦਿਓ ਜੜ ਬਹਾਰ ਰਹਿਣ ਨਾਲ ਪੌਦੇ ਦੇ ਸੁੱਕਣ ਦਾ ਖ਼ਤਰਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਪੌਦੇ ਨੂੰ ਜਿਆਦਾ ਤਾਪਮਾਨ ਅਤੇ ਠੰਡ ਤੋਂ ਬਚਨ ਲਈ ਇਸਦੇ ਊਪਰ ਛਾਂ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਜੋ ਤੁਸੀਂ ਲੋ ਟਨਲ ਵਿਧੀ ਨਾਲ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਮੌਸਮ ਦਾ ਬਹੁਤ ਖਿਆਲ ਰੱਖਣਾ ਪੈਂਦਾ ਹੈ ਥੋੜੀ ਜਿਹੀ ਲਾਪਰਵਾਹੀ ਨਾਲ ਸਾਰੀ ਫ਼ਸਲ ਖ਼ਰਾਬ ਹੋ ਸਕਦੀ ਹੈ ਪਹਿਲੇ ਸਾਲ ਆਪਣੇ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਸਟ੍ਰਾਬੇਰੀ ਦੀ ਖੇਤੀ ਕਰਨ ਦਾ ਕੁੱਲ ਖਰਚਾ ਢਾਈ ਤੋ ਤਿੰਨ ਲੱਖ ਰੁਪਏ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਆ ਜਾਦਾ ਹੈ ਕਿਉਕਿ ਕਿਸਾਨ ਨੂੰ ਪਹਿਲੇ ਸਾਲ ਡਰਿੱਪ ਸਿਸਟਮ ਅਤੇ ਫੁਆਰਿਆਂ ਆਦਿ ਤੇ ਵੀ ਖਰਚ ਕਰਨਾ ਪੈਦਾ ਹੈ ਪਰ ਅਗਲੇ ਸਾਲਾ ਵਿੱਚ ਕਿਸਾਨ ਦਾ ਇਹ ਖਰਚ ਬਚ ਜਾਦਾ ਹੈ ਇਸਦੇ ਲਈ ਇੱਕ ਏਕੜ ਵਿੱਚ 40 ਬੈਡ ਬਣਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਇੱਕ ਬੈਡ ਤੇ 1000 ਸਟ੍ਰਾਬੇਰੀ ਦੇ ਪੌਦੇ ਲੱਗਦੇ ਹਨ ਇਸ ਤਰਾਂ ਇੱਕ ਏਕੜ ਵਿੱਚ ਚਾਲੀ ਹਜ਼ਾਰ ਪੌਦੇ ਲਾਏ ਜਾਦੇ ਹਨ, ਇੱਕ ਪੌਦਾ 3 ਤੋ 4 ਰੁਪਏ ਤੱਕ ਮਿਲ ਜਾਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਦਾ ਝਾੜ 50 ਤੋ 60 ਕੁਇੰਟਲ ਤੱਕ ਨਿਕਲ ਆਉਦਾ ਹੈ 25-30 ਕੁਇੰਟਲ ਗੋਬਰ ਦੀ ਖਾਦ ਇੱਕ ਏਕੜ ਵਿੱਚ ਪਾਓ ਇਹ ਖਾਦ ਇੱਕ ਸਾਲ ਵਿੱਚ ਪਾਉਣੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਫਿਰ 20 : 40 : 40 NPK KG / ਹੇਕਟਏਰ ਪਾਉਣੀ ਹੈ ਚੰਗੀ ਫਸਲ ਲਈ ਯੂਰਿਆ ਦੋ ਫ਼ੀਸਦੀ ਜ਼ਿੰਕ ਸਲਫੇਟ , ਅੱਧਾ ਪ੍ਰਤੀਸ਼ਤ ਕੈਲਸ਼ਿਅਮ ਸਲਫੇਟ ਅੱਧਾ ਫ਼ੀਸਦੀ ਅਤੇ ਬੋਰਿਕ ਏਸਿਡ 0 . 2 ਫ਼ੀਸਦੀ ਚੰਗੀ ਫਸਲ ਲਈ ਠੀਕ ਹੈ ਸਿੰਚਾਈ ਛੇਤੀ ਛੇਤੀ ਪਰ ਹਲਕੀ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਜਿਆਦਾ ਪਾਣੀ ਠੀਕ ਨਹੀਂ ਹੈ ਪੱਤੇ ਗਿੱਲੇ ਨਾ ਕਰੋ ਤੁਪਕਾ ਸਿੰਚਾਈ ਨਾਲ ਘੱਟ ਪਾਣੀ ਲੱਗ ਸਕਦਾ ਹੈ ਜੇਕਰ ਤੁਪਕਾ ਸਚਾਈ ਨਹੀਂ ਕਰ ਰਹੇ ਤਾਂ ਕਿਆਰੀਆਂ ਦੇ ਵਿਚਾਲੇ ਪਾਣੀ ਖਾਲ ਵਿੱਚ ਹੀ ਲਗਾਓ ਨਦੀਨ ਹੱਥ ਨਾਲ ਹਟਾਓ ਜਾਂ ਕੀੜੇ ਮਕੋੜੇ ਅਤੇ ਦੂਜੀਆ ਬਿਮਾਰਿਆ ਵੱਲ ਧਿਆਨ ਰੱਖਣਾ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਜੇਕਰ ਕੋਈ ਪੋਦਾ ਜਿਆਦਾ ਖਰਾਬ ਹੈ ਉਹਨੂੰ ਹਟਾ ਦਿਓ ਜਦੋਂ ਫਲ ਦਾ ਰੰਗ 70% ਲਾਲ ਹੋ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਤੋੜ ਲੈਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਜੇਕਰ ਮਾਰਕਿਟ ਦੂਰੀ ਉੱਤੇ ਹੈ ਤਾਂ ਥੋੜ੍ਹਾ ਸਖ਼ਤ ਹੀ ਤੋੜਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਤੁੜਵਾਈ ਵੱਖ ਵੱਖ ਦਿਨਾਂ ਵਿਚ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਸਟਰਾਬੇਰੀ ਦੀ ਪੈਕਿੰਗ ਪਲਾਸਟਿਕ ਦੀਆਂ ਪਲੇਟਾਂ ਵਿੱਚ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਇਸਨ੍ਹੂੰ ਹਵਾਦਾਰ ਜਗ੍ਹਾ ਉੱਤੇ ਰੱਖਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਜਿੱਥੇ ਤਾਪਮਾਨ ਪੰਜ ਡਿਗਰੀ ਹੋ ਇੱਕ ਦਿਨ ਦੇ ਬਾਅਦ ਸਟਰਾਬੇਰੀ ਦੀ ਪੈਕਿੰਗ ਦਾ ਤਾਪਮਾਨ ਜ਼ੀਰੋ ਡਿਗਰੀ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਮਾਰਕੀਟ ਵਿੱਚ ਸਟ੍ਰਾਬੇਰੀ ਔਸਤ 200 ਰੁਪਏ ਪ੍ਰਤੀ ਤੱਕ ਵਿਕਦੀ ਹੈ ਇਸ ਤਰਾਂ ਪੰਜ ਲੱਖ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਤੋ ਇਸ ਦੀ ਆਮਦਨ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਕੇ ਅੱਗੇ ਆਪਣੀ ਮਿਹਨਤ ਨਾਲ ਕਿਸਾਨ ਆਮਦਨ ਵਿੱਚ ਭਰਪੂਰ ਵਾਧਾ ਕਰ ਸਕਦਾ ਹੈ ਸਟ੍ਰਾਬੇਰੀ ਦੇ ਪੌਦੇ ਸਤੰਬਰ ਤੋ ਅਕਤੂਬਰ ਤੱਕ ਲਾਏ ਜਾਦੇ ਹਨ ਅਤੇ 3 ਮਹੀਨੇ ਬਾਦ ਇਹ ਫਲ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿੰਦੇ ਹਨ ਇਸ ਦੀ ਫਸਲ ਅਪ੍ਰੈਲ ਤੱਕ ਚਲਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਮਾਰਕੀਟਿੰਗ ਵਿੱਚ ਕਿਸੇ ਤਰਾਂ ਦੀ ਪਰੇਸ਼ਾਨੀ ਨਹੀ ਹੈ ਉਹ ਏਲਨਾਬਾਦ,ਸਿਰਸਾ,ਹਨੂੰਮਾਨਗੜ,ਗੰਗਾਨਗਰ ਤੋ ਇਲਾਵਾ ਬਠਿੰਡਾ,ਮੋਗਾ ਜਲੰਧਰ,ਲੁਧਿਆਣਾ ਵਿੱਚ ਇਸ ਦੀ ਮਾਰਕੀਟਿੰਗ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ਜੇਕਰ ਜ਼ਿਆਦਾ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਸਟ੍ਰਾਬੇਰੀ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਦਿੱਲੀ ਇਸ ਦੀ ਮੁੱਖ ਮਾਰਕੀਟ ਹੈ
ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਇਸਦਾ ਫਾਰਮ visit ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾ ਤੁਸੀ
Contact- 98725 95194,70093 39914 NS berry orchard(Strawberry), patiala,punjab.ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by jagtar singh
Punjab
20-01-2020 09:21 AM
jagtar ji hun gulli danda bhut purana ho gey ahai isde uper hun koi dwayi ne asar nahi karna hai.dhanwad
Posted by Piara singh Ghuman
Punjab
20-01-2020 09:14 AM
ਬਿਜਾਈ ਦੇ ਲਈ ਮੱਧ ਜਨਵਰੀ ਤੋਂ ਮਾਰਚ ਅਤੇ ਅਕਤੂਬਰ ਤੋਂ ਨਵੰਬਰ ਦਾ ਮਹੀਨਾ ਸਹੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ Punjab Chappan Kadoo-1: ਇਹ ਕਿਸਮ 1982 ਵਿੱਚ ਤਿਆਰ ਕੀਤੀ ਗਈ ਸੀ ਇਹ ਜਲਦੀ ਪੱਕਣ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਜੋ ਕਿ ਬਿਜਾਈ ਦੇ 60 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਬਾਅਦ ਤੁੜਾਈ ਦੇ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਕਿਸਮ ਦੇ ਪੱਤੇ ਸੰਘਣੇ ਅਤੇ ਹਰੇ ਰੰਗ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ, ਫਲ ਹਰੇ ਰੰਗ ਦੇ ਡਿਸਕ ਅਕਾਰ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੱਤਿਆਂ ਦੇ ਥੱਲੇ ਧੱਬਿਆਂ ਦ.... (Read More)
ਬਿਜਾਈ ਦੇ ਲਈ ਮੱਧ ਜਨਵਰੀ ਤੋਂ ਮਾਰਚ ਅਤੇ ਅਕਤੂਬਰ ਤੋਂ ਨਵੰਬਰ ਦਾ ਮਹੀਨਾ ਸਹੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ Punjab Chappan Kadoo-1: ਇਹ ਕਿਸਮ 1982 ਵਿੱਚ ਤਿਆਰ ਕੀਤੀ ਗਈ ਸੀ ਇਹ ਜਲਦੀ ਪੱਕਣ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਜੋ ਕਿ ਬਿਜਾਈ ਦੇ 60 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਬਾਅਦ ਤੁੜਾਈ ਦੇ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਕਿਸਮ ਦੇ ਪੱਤੇ ਸੰਘਣੇ ਅਤੇ ਹਰੇ ਰੰਗ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ, ਫਲ ਹਰੇ ਰੰਗ ਦੇ ਡਿਸਕ ਅਕਾਰ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੱਤਿਆਂ ਦੇ ਥੱਲੇ ਧੱਬਿਆਂ ਦੀ ਪ੍ਰਤੀਰੋਧਕ ਅਤੇ ਵਿਸ਼ਾਣੂ ਰੋਗ, ਲਾਲ ਭੂੰਡੀ ਅਤੇ ਪੱਤਿਆਂ ਤੇ ਸਫੈਦ ਧੱਬਿਆਂ ਨੂੰ ਸਹਿਣਯੋਗ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਫਲਾਂ ਦੀ ਔਸਤਨ ਪੈਦਾਵਾਰ 95 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ
Posted by Sukhdevgill
Punjab
20-01-2020 08:51 AM
ਮੋਟੇ ਆਲੂਆਂ ਦੀ ਪੈਦਾਵਾਰ ਲਈ, 13:0:45 ਦੀ 2 ਕਿਲੋ ਅਤੇ ਮੈਗਨੀਸ਼ੀਅਮ ਈ ਡੀ ਟੀ ਏ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਦੇ ਹਮਲੇ ਨੂੰ ਰੋਕਣ ਲਈ ਉੱਲੀਨਾਸ਼ਕ ਪ੍ਰੋਪਿਨੇਬ 3 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਪਾਓ ਆਲੂਆਂ ਦਾ ਆਕਾਰ ਅਤੇ ਗਿਣਤੀ ਵਧਾਉਣ ਲਈ ਹਿਊਮਿਕ ਐਸਿਡ (12%) 3 ਗ੍ਰਾਮ+ਐੱਮ ਏ ਪੀ 12:61:0 ਦੀ 8 ਗ੍ਰਾਮ ਜਾਂ ਡੀ ਏ ਪੀ 15 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਲੀਟਰ ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਪੌਦੇ ਦੇ ਵਾਧੇ ਸਮੇਂ ਕਰੋ

Posted by gurpreet
Punjab
20-01-2020 08:50 AM
gurpreet ji kirpa karke daso ke jehdi tuc 2 var spray kiti hai usde nal fasl di growth te koi fark peya hai ja nahi ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake ke tuc hun isdi spray kar sakde ho ja nahi.dhanwad

Posted by Hardev singh
Haryana
20-01-2020 08:50 AM
hardev ji kripya btaye ke aapne abhi tak isme kya kya khaad ka istemal kiya hai ya koi spray ka istemal kiya hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake,dhanywad
Posted by dineshkumar
Uttar Pradesh
20-01-2020 08:49 AM
Dinesh ji kripya swal vistar se pooche ke aap genhu ke bare men kya jankari lena chahte hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake,dhanywad

Posted by palwinder singh
Punjab
20-01-2020 08:46 AM
Palwinder ji paniri lain layi tuc Zimidara SEED STORE 9872845036 nal sampark kar sakde ho.dhanwad

Posted by Mohan ram
Bihar
20-01-2020 08:44 AM
Mohan ji kripya aap apna swal vistar se pooche ke yeh number ke bare men kya jankari lena chahte hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake,dhanywad

Posted by Aashish Kumar
Bihar
20-01-2020 08:44 AM
Aashish ji kripya btaye ke aapne abhi tak pyaj men kya kya khaad daali hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake,dhanywad
Posted by Deepak mehar
Madhya Pradesh
20-01-2020 08:40 AM
आप उसे Fatplus पाउडर 50 ग्राम या Fatmax पाउडर 50 ग्राम और Enerboost पाउडर 50—50 ग्राम सुबह शाम दें, आप उसे अच्छी फीड के साथ एक किलो सरसों की खल, 1 किलो बिनौला खल सुबह शाम दें , 20 ग्राम मीठा सोडा रोजाना एक बार दें इससे फर्क पड़ जाएगा..

Posted by vikram singh
Punjab
20-01-2020 08:35 AM
ਉਸ ਨੂੰ ਕਾਲੀਆ ਮਿਰਚਾਂ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਲਿਆ ਕੇ 20 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦੇਣੀਆਂ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ ਸਬਜ਼ੀ ਵਾਲਾ ਪੇਠਾ 1 ਕਿਲੋ ਰੋਜਾਨਾ ਖਿਲਾਓ, 5 ਦਿਨ ਦੇਣ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ, ਇਸਨੂੰ carpade injection 10ml ਲਗਵਾਓ, ਇਹ carries company ਦਾ ਪ੍ਰੋਡਕਟ ਹੈ ਜਾਂ ਤੁਸੀਂ cortalife injection ਲਗਵਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ,ਇਨ੍ਹਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਕੋਈ ਵੀ ਇੱਕ ਲਗਵਾਓ..

Posted by प्रभात
Uttar Pradesh
20-01-2020 08:34 AM
Asahi Yamato - यह किस्म आई ए आर आई नई दिल्ली की है इस किस्म के दरमियाने आकार के फल होते हैं जिनका भार 6-8 किलो होता है यह फसल 95 दिनों में पक जाती है इसका गुद्दा गुलाबी रंग का होता है और मिठास 11-13 प्रतिशत होती है
Sugar Baby - यह किस्म आई ए आर आई नई दिल्ली की है इस किस्म के तरबूज छोटे, गोल और दरमियाने आकार के होते हैं इनका आम भार 3-5 कि.... (Read More)
Asahi Yamato - यह किस्म आई ए आर आई नई दिल्ली की है इस किस्म के दरमियाने आकार के फल होते हैं जिनका भार 6-8 किलो होता है यह फसल 95 दिनों में पक जाती है इसका गुद्दा गुलाबी रंग का होता है और मिठास 11-13 प्रतिशत होती है
Sugar Baby - यह किस्म आई ए आर आई नई दिल्ली की है इस किस्म के तरबूज छोटे, गोल और दरमियाने आकार के होते हैं इनका आम भार 3-5 किलो होता है इनका छिलका नीला काला और गुद्दा गहरा गुलाबी होता है बीज छोटे आकार के होते हैं इसमें मिठास 11-13 प्रतिशत होती है इसकी औसतन पैदावार 72 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Posted by shivam moral
Uttar Pradesh
20-01-2020 08:31 AM
प्याज़ एक प्रसिद्ध व्यापक सब्जी वाली प्रजाति है इसकी खेती अलग-अलग किस्म की मिट्टी जैसे कि रेतली दोमट, चिकनी, गार और भारी मिट्टी में की जा सकती है यह गहरी दोमट और जलोढ़ मिट्टी, जिसका निकास प्रबंध बढ़िया, नमी को बरकरार रखने की समर्थता, जैविक तत्वों वाली मिट्टी में बढ़िया परिणाम देती है विरली और रेतली मिट्टी इसकी ख.... (Read More)
प्याज़ एक प्रसिद्ध व्यापक सब्जी वाली प्रजाति है इसकी खेती अलग-अलग किस्म की मिट्टी जैसे कि रेतली दोमट, चिकनी, गार और भारी मिट्टी में की जा सकती है यह गहरी दोमट और जलोढ़ मिट्टी, जिसका निकास प्रबंध बढ़िया, नमी को बरकरार रखने की समर्थता, जैविक तत्वों वाली मिट्टी में बढ़िया परिणाम देती है विरली और रेतली मिट्टी इसकी खेती के लिए बढ़िया नहीं मानी जाती है, क्योंकि मिट्टी के घटिया जमाव के कारण इसमें गांठों का उत्पादन सही नहीं होता है इसकी खेती के लिए मिट्टी का pH 6-7 होना चाहिए प्रसिद्ध किस्में:-alyanpur Red Round: यह उत्तर प्रदेश की प्रसद्धि किस्म है इसकी गांठे भूरे रंग की और गोलाकार आकार की होती हैं इसके पौधे 150-160 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं इसकी औसतन पैदावार 8-10 टन प्रति एकड़ होती है Bhima Shakti: यह खरीफ के साथ साथ रबी के मौसम में उगाने के लिए उपयुक्त है यह किस्म रोपाई के 130 दिन बाद कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावारा 170 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Arka Kalyan: इसकी गांठे गहरे गुलाबी रंग की होती हैं इसकी औसतन पैदावार 135 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa White Round: इसकी गांठे सफेद, गोल और समतल होती हैं इसकी औसतन पैदावार 120 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa white flat: इसकी गांठे सफेद, चपटी और मध्यम से बड़े आकार की होती हैं यह किस्म डीहाइड्रेशन के लिए उपयुक्त है मिट्टी को भुरभुरा बनाने के लिए तीन-चार बार गहराई से जोताई करें मिट्टी में जैविक तत्वों की मात्रा बढ़ाने के लिए रूड़ी की खाद डालें फिर खेत को छोटे-छोटे प्लाटों में बांट दे नर्सरी तैयार करने के उचित समय मध्य-अक्तूबर से मध्य-नवबंर होता है नए पौधे मध्य-दिसंबर से मध्य-जनवरी तक रोपाई के लिए तैयार हो जाते है रोपाई के लिए 10-15 सैं.मी. कद के पौधे चुनें खरीफ के मौसम में रोपाई के लिए मई से जून का महीना नर्सरी तैयार करने के लिए उपयुक्त होता है बिजाई के 6-8 सप्ताह बाद नए पौधे रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं जुलाई -अगस्त के महीने में रोपण कर दें रोपण के समय, पंक्तियों के बीच 15 सैं.मी. और पौधों के बीच 10 सैं.मी. का फासला रखें नर्सरी में बीज 1-2 सैं.मी. गहराई पर बोयें बिजाई के लिए रोपण विधि का प्रयोग करें एक एकड़ के लिए 2-3 किलो बीज का प्रयोग करें उखेड़ा रोग और कांव-गियारी से बचाव के लिए थीरम 2 ग्राम+बैनोमाइल 50 डब्लयू पी 1 ग्राम प्रति लीटर पानी से प्रति किलो बीजों का उपचार करें रासायनिक उपचार के बाद बायो एजेंट ट्राईकोडर्मा विराइड 2 ग्राम के साथ प्रति किलो बीजों का उपचार करने की सिफारिश की जाती है इस तरह करने से नए पौधे मिट्टी से पैदा होने वाली और अन्य बीमारीयों से बच जाते है बिजाई से 10 दिन पहले 20 टन रूड़ी की खाद डालें नाइट्रोजन 30 किलो(यूरिया 65 किलो), फासफोरस 16 किलो(सिंगल सुपर फासफेट 100 किलो) और पोटाश 16 किलो(मिउरेट ऑफ़ पोटाश 30 किलो) प्रति एकड़ डालें फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा रोपण के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटकर रोपाई के बाद टॉप ड्रेसिंग के तौर पर 30वें और 45वें दिन डालें मिट्टी की किसम और जलवायु के आधार पर सिंचाई की मात्रा और आवर्ती का फैसला करें आमतौर पर, इसे 5-8 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है पहली सिंचाई बिजाई के तुरंत बाद करें और दूसरी सिंचाई रोपाई के तीन दिन बाद करें बाकी की सिंचाई आवश्यकता और मिट्टी में नमी के आधार पर 7-10 दिनों के अंतराल पर करें पुटाई के 10-15 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें अत्याधिक सिंचाई ना करें शुरुआत में नए पौधे धीरे-धीरे बढ़ते है इसलिए नुकसान से बचाव के लिए गोड़ाई की जगह रासायनिक नदीन-नाशक का प्रयोग करें रोकथाम के लिए बिजाई से 72 घंटे में पेंडीमैथालीन(स्टंप) 1 लीटर को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में स्प्रे करें नदीनों के अंकुरण उपरांत बिजाई से 7 दिन बाद आक्सीफ्लोरफैन 425 मि.ली. को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में स्प्रे करें नदीनों की रोकथाम के लिए 2-3 गोड़ाईयों की सिफारिश की जाती है पहली गोड़ाई बिजाई से एक महीने बाद और दूसरी गोड़ाई, पहली से एक महीने बाद करें सही समय पर पुटाई करना बहुत जरूरी है पुटाई का समय किस्म,ऋतु,मंडी रेट आदि पर निर्भर करता है 50% पौधे की पत्तियां नीचे की तरफ गिरना दर्शाता है कि फसल पुटाई के लिए तैयार है फसल की पुटाई हाथों से प्याज़ को उखाड़ कर की जाती है पुटाई के बाद इनको 2-3 दिन के लिए अनावश्यक नमी निकालने के लिए खेत में छोड़ दे धन्यवाद
Posted by ਨੀਟੂ ਗਰੇਵਾਲ
Punjab
20-01-2020 08:28 AM
ਨੀਟੂ ਜੀ ਤੁਸੀ ਕਣਕ ਦੇ ਉਪਰ NPK 191919 @1 ਕਿਲੋ ਨੂੰ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਝਾੜ ਵਧੀਆ ਨਿਕਲਦਾ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by raju
Uttar Pradesh
20-01-2020 08:27 AM
raju ji kripya btaye ke aap baburam kise keh rahe hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake,dhanywad
Posted by Randhir singh
Punjab
20-01-2020 08:21 AM
Randhir ji tuci majhh nu heat vich auun ton 10-12 hours badd AI krwa skde ho, jekar ohh sham di rabdi hai ta swere uss nu tika bhrwana chahida hai.

Posted by अय्याज शेख
Maharashtra
20-01-2020 08:21 AM
अभिशान भेड लेने के लिए आप Central Sheep and Wool Research Institute, Avikanagar से संपर्क कर सकते है यहां आप डॉ. मीना 75971 04404 जी से संपर्क कर सकते है
Posted by sukhdeep nehal
Punjab
20-01-2020 08:05 AM
ਇਸਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ Antimtart 200@ 10 per 100 birds ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਦਿਨ ਵਿਚ ਇਕ ਵਾਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਦਿਓ ਅਤੇ 5 ਦਿਨ ਤੱਕ ਦਿਓ.

Posted by Arjun Shakya
Uttar Pradesh
20-01-2020 08:04 AM
Arjun ji yeh fungus hai . isk eliye aap copper oxychloride@300 gram ko prati acre ke hisab se spray karen,dhanywad

Posted by Arjun Shakya
Uttar Pradesh
20-01-2020 07:59 AM
Arjun ji kripya aap apna swal vistar se pooche taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad

Posted by Rahul kumar singh
Bihar
20-01-2020 07:59 AM
आप जर्सी गाय को पेट के कीड़ों Fasnil गोली दें और उसे रोजाना 35—40 किलो हरा चारा डालें और हर तीन महीने के बाद साल्ट बदलकर गोली दें इसके साथ आप Enerboost powder 50gm रोजाना और Agrimin powder 50gm रोजाना दें इससे अच्छी ग्रोथ हो जाएगी
Posted by राम निहाल यादव
Uttar Pradesh
20-01-2020 07:58 AM
अच्छे जल निकास वाली गहरी, दोमट मिट्टी जिसमें भूमिगत-जल का स्तर ज़मीन से 1.5-2 मी. के नीचे हो और अच्छी जल धारण क्षमता वाली ज़मीन गन्ने की खेती के लिए लाभदायक है यह फसल काफी अम्लीय और खारेपन को सहन कर सकती है इसलिए इसे मिट्टी जिसका pH 5 से 8.5 हो, में उगाई जा सकती है यदि मिट्टी का pH 5 से कम हो तो इसमें चूना (कली) डालें और यदि मिट.... (Read More)
अच्छे जल निकास वाली गहरी, दोमट मिट्टी जिसमें भूमिगत-जल का स्तर ज़मीन से 1.5-2 मी. के नीचे हो और अच्छी जल धारण क्षमता वाली ज़मीन गन्ने की खेती के लिए लाभदायक है यह फसल काफी अम्लीय और खारेपन को सहन कर सकती है इसलिए इसे मिट्टी जिसका pH 5 से 8.5 हो, में उगाई जा सकती है यदि मिट्टी का pH 5 से कम हो तो इसमें चूना (कली) डालें और यदि मिट्टी का pH 9.5 से ज्यादा हो तो इसमें जिप्सम डालें आप इसकी किस्मे जैसे Co 8014 (Mahalakshami) ,Vasant 1,Co 86032 ,Co 92005 की बिजाई कर सकते है पतझड़ के मौसम में 15 अक्तूबर से २० नवंबर तक बिजाई की जाती है, बसंत के मौसम में बिजाई 15 फरवरी तक और गर्मियों के मौसम में 15 जुलाई से 15 सितंबर तक बिजाई की जाती है बिजाई के लिए सुधरे ढंग जैसे कि (गहरी खालियां, मेंड़ बनाकर,पंक्तियों में जोड़े बनाकर और गड्ढा खोदकर बिजाई ) प्रयोग किये जाते हैं 1) खालियां और मेंड़ बनाकर सूखी बिजाई: ट्रैक्टर द्वारा मेंड़ बनाने वाली मशीन की मदद से मेंड़ और खालियां बनाएं और इन मेड़ और खालियों में बिजाई करें मेड़ और खालियों में 90 सैं.मी. का फासला होना चाहिए गन्ने की गुलियों को मिट्टी में दबाएं और उसके बाद हल्की सिंचाई करें 2) पंक्तियों के जोड़े बनाकर बिजाई: खालियां बनाने वाले यंत्र के प्रयोग से खेत में 150 सैं.मी. के फासले पर खालियां बनाएं और उनमें 30:30-90-30:30 सैं.मी. के फासले पर गन्ने की रोपाई करें इस तरीके से मेड़ वाली बिजाई से अधिक पैदावार मिलती है 3) गड्ढा खोदकर बिजाई: गड्ढे खोदने वाली मशीन से 60 सैं.मी. व्यास के 30 सैं.मी. गहरे गड्ढे खोदें जिनमें 60 सैं.मी. का फासला हो इससे गन्ना 2-3 बार उगाया जा सकता है और मेड़ वाली बिजाई से 25-50 % अधिक पैदावार आती है B) एक आंख वाले गन्नों की बिजाई: रोपाई के लिए सेहतमंद गुलियां चुनें और 75-90 सैं.मी. के अंतर पर खालियों में बिजाई करें गुलियां एक आंख वाली होनी चाहिए यदि गन्ने के ऊपरी भाग में छोटी डलियां चुनी गई हों तो बिजाई 6 -9 सैं.मी. के अंतर पर करें फसल के अच्छे उगने के लिए आंखों को ऊपर की ओर रखें और हल्की सिंचाई करें पतझड़ के मौसम में 14500-16500 तीन आंख वाले बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें और बसंत के मौसम में 16500-25000 तीन आंख वाले बीज और 21600-25000 दो आंख वाले बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें गन्ने में नदीनों के कारण 12-72 % पैदावार का नुकसान होता है शुरूआती 60-120 दिनों तक नदीनों की रोकथाम बहुत जरूरी है इसलिए रोपाई के बाद 3-4 महीने बाद फसल की नदीनों की रोकथाम करें नीचे लिखे तरीकों से नदीनों को रोका जा सकता है 1) हाथों से गोडाई करके: गन्ना एक व्यापक जगह लेने वाली फसल है इसलिए नदीनों को गोडाई करके रोका जा सकता है इसके इलावा प्रत्येक सिंचाई के बाद 3-4 गोडाई जरूरी है 2) काश्तकारी ढंग: इस प्रक्रिया में खेती के तरीके, अंतरफसली और मलचिंग तरीके शामिल हैं बहुफसली के कारण नदीनों का हमला ज्यादा होता है इसकी रोकथाम के लिए चारे वाली फसलें और हरी खाद वाली फसलों के आधार वाला फसली चक्र गन्ने में नदीनों की रोकथाम करता है गन्ना एक व्यापक जगह लेने वाली भी फसल है जिससे नदीनों के हमले का खतरा भी ज्यादा होता है यदि गन्ने को कम समय वाली फसलों के साथ अंतरफसली किया जाए तो इससे नदीनों को कम किया जा सकता है और ज्यादा लाभ भी मिल सकता है गन्ने के अंकुरन के बाद गन्ने की कतारों में 10-12 सैं.मी. मोटी तह बिछा दी जाती है यह सूर्य की रोशनी को सोखता है जिससे नदीन कम होते हैं यह मिट्टी में नमी को भी बचाता है 3) रासायनिक तरीके: नदीनों की रोकथाम के लिए, सिमाज़ीन या एट्राज़ीन 600-800 ग्राम या मैट्रीब्यूज़िन 800 ग्राम या ड्यूरॉन 1-1.2 किलोग्राम प्रति एकड़ में बिजाई के तुरंत बाद प्रयोग करना चाहिए इसके इलावा चौड़े पत्ते वाले नदीनों की रोकथाम के लिए 2, 4-डी@ 300-400 ग्राम का प्रयोग प्रति एकड़ के हिसाब से करें नाइट्रोजन 62 किलो, फासफोरस 32 किलो और पोटाश 42 किलो प्रति एकड़ में डालें बिजाई से पहले नाइट्रोजन की 1/3 मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा डालें बाकी बची नाइट्रोजन की दो मात्रा को टॉप ड्रेसिंग के तौर पर डालें नाइट्रोजन की पहली मात्रा को बीज वाली आंख के अंकुरण के समय और दूसरी मात्रा को बीज अंकुरण के 45 दिन बाद डालें 3 वर्षों के बाद गन्ने की गुलियों में 40-50 क्विंटल गाय का गोबर प्रति एकड़ में डालें पतझड़ के मौसम में 90-100 दिनों में नाइट्रोजन को टॉप ड्रेसिंग के तौर पर डालें और बसंत के मौसम में 150-160 दिन बाद डालनी चाहिए सिंचाई की संख्या मिट्टी की किस्म और पानी की उपलब्धता पर निर्भर करती है गर्मी के महीने में गर्म हवाओं और सूखे में वृद्धि होने के कारण फसल को पानी की जरूरत पड़ती है पहली सिंचाई फसल के 20-25 % अंकुरित होने पर करें मानसून में गन्ने को पानी और बारिश के आधार पर लगाएं कम वर्षा में सिंचाई 10 दिनों के अंतराल पर करें इसके बाद सिंचाई के अंतराल को बढ़ाकर 20-25 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें जमीन में नमी संभालने के लिए गन्ने की पंक्तियों में मलचिंग का प्रयोग करें अप्रैल जून के महीने में पानी की कमी ना होने दें इससे पैदावार कम होगी इसके इलावा बारिश के दिनों में पानी ना खड़ा होने दें जोताई का समय, वृद्धि का समय और अधिक विकास का समय सिंचाई के लिए बहुत नाज़ुक होता है मिट्टी को मेंड़ पर चढ़ाना: कसी की मदद से खालियों में और पौधे के किनारों पर मिट्टी चढ़ाई जाती है यह मिट्टी में अच्छी तरह से तैयार की गई खाद को अच्छी तरह से मिश्रित होने में मदद करती है पौधे को सहारा देने और उसे गिरने से बचाने में भी मदद करती है ज्यादा पैदावार और चीनी प्राप्त करने के लिए गन्ने की सही समय पर कटाई जरूरी है समय से पहले या बाद में कटाई करने से पैदावार पर प्रभाव पड़ता है किसान शूगर रीफरैक्टोमीटर का प्रयोग करके कटाई का समय पता लगा सकते हैं गन्ने की कटाई द्राती की सहायता से की जाती है गन्ना धरती से ऊपर थोड़ा हिस्सा छोड़कर काटा जाता है क्योंकि गन्ने में चीनी की मात्रा ज्यादा होती है कटाई के बाद गन्ना फैक्टरी में लेकर जाना जरूरी होता है धन्यवाद

Posted by vikas Singh
Chattisgarh
20-01-2020 07:56 AM
vikas ji genhu men aapen kya kya khaad daali hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake,dhanywad

Posted by Harpreet singh
Punjab
20-01-2020 07:35 AM
harpreet ji jekar meeh ght c ta isda asar ho jayega par ght hoyega jekar meeh bhut jyada hai ta isda asar nahi hoyega ho sakda hai kanak peeli v ho jayegi ta ghbraun di lod nahi hai.

Posted by Gurmit Singh
Punjab
20-01-2020 07:31 AM
ਬਸੰਤ ਰੁੱਤ ਦੀ ਫਸਲ ਫਰਵਰੀ ਦੇ ਅੰਤ ਤੋਂ ਅੰਤ ਮਾਰਚ ਤੱਕ ਬੀਜੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ PMH 1:-ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਸੇਂਜੂ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਸਾਉਣੀ,ਬਸੰਤ ਅਤੇ ਗਰਮੀ ਦੇ ਮੌਸਮ ਵੇਲੇ ਬੀਜੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਇਹ ਲੰਮੇ ਸਮੇਂ ਵਾਲੀ ਫਸਲ ਹੈ ਜੋ 95 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕਦੀ ਹੈ ਇਸਦਾ ਤਣਾ ਮਜ਼ਬੂਤ ਅਤੇ ਜਾਮਣੀ ਰੰਗ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 21 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ
Prabhat:-ਇਹ ਲੰਬੇ ਸਮੇਂ ਦੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਜੋ .... (Read More)
ਬਸੰਤ ਰੁੱਤ ਦੀ ਫਸਲ ਫਰਵਰੀ ਦੇ ਅੰਤ ਤੋਂ ਅੰਤ ਮਾਰਚ ਤੱਕ ਬੀਜੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ PMH 1:-ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਸੇਂਜੂ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਸਾਉਣੀ,ਬਸੰਤ ਅਤੇ ਗਰਮੀ ਦੇ ਮੌਸਮ ਵੇਲੇ ਬੀਜੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਇਹ ਲੰਮੇ ਸਮੇਂ ਵਾਲੀ ਫਸਲ ਹੈ ਜੋ 95 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕਦੀ ਹੈ ਇਸਦਾ ਤਣਾ ਮਜ਼ਬੂਤ ਅਤੇ ਜਾਮਣੀ ਰੰਗ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 21 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ
Prabhat:-ਇਹ ਲੰਬੇ ਸਮੇਂ ਦੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਜੋ ਕਿ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਸੇਂਜੂ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਸਾਉਣੀ,ਬਸੰਤ ਅਤੇ ਗਰਮੀ ਦੇ ਮੌਸਮ ਵੇਲੇ ਬੀਜੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਇਹ ਦਰਮਿਆਨੇ ਲੰਬੇ ਕੱਦ, ਮੋਟੇ ਤਣੇ ਅਤੇ ਘੱਟ ਡਿੱਗਣ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਹ ਪੱਕਣ ਲਈ 95 ਦਿਨ ਦਾ ਸਮਾਂ ਲੈਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤ ਝਾੜ 17.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ
Kesri:- ਇਹ ਦਰਮਿਆਨੇ ਸਮੇਂ ਦੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਜੋ ਕਿ ਪੱਕਣ ਲਈ 85 ਦਿਨ ਦਾ ਸਮਾਂ ਲੈਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦੇ ਦਾਣੇ ਸੰਤਰੀ ਰੰਗ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਇਸਦਾ ਔਸਤ ਝਾੜ 16 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ
PMH-2:-ਇਹ ਘੱਟ ਸਮੇਂ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਅਤੇ ਪੱਕਣ ਲਈ 83 ਦਿਨ ਦਾ ਸਮਾਂ ਲੈਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਸੇਂਜੂ ਅਤੇ ਘੱਟ ਵਰਖਾ ਵਾਲੇ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਇਹ ਹਾਈਬ੍ਰਿਡ ਕਿਸਮ ਸੋਕੇ ਨੂੰ ਸਹਿਣਯੋਗ ਹੈ ਇਸਦੇ ਬਾਬੂ ਝੰਡੇ ਦਰਮਿਆਨੇ ਆਕਾਰ ਦੇ ਅਤੇ ਦਾਣੇ ਸੰਤਰੀ ਰੰਗ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸਦਾ ਔਸਤ ਝਾੜ 16.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ
Posted by Durga lal meghwanshi heengtara
Rajasthan
20-01-2020 07:28 AM
aur ek jamun ka ped hai jo teen foot gadhe ke andar niche hai uski jaldi badwar ke liye dwai btaye ?
durga ji aap paudhe ki badhwar ke liye aap vermicompost@4 kilo prati apudha daale.dhanywad
Posted by Durga lal meghwanshi heengtara
Rajasthan
20-01-2020 07:27 AM
durga lala ji agar ped nok se shuknna shuru hua hai to yeh die back nam ki bimari hai iske liye aap sukhi hui shakha ko kaat kar uske uper bordo paste lgaye.dhanywad
Posted by Durga lal meghwanshi heengtara
Rajasthan
20-01-2020 07:26 AM
Durga lal ji paudhe ko aap vermicompost 5 kilo prati paudhe ke hisab se daale.dhanywad
Posted by Monu
Uttar Pradesh
20-01-2020 07:25 AM
shrimaan g gehu mein magnease ki deficiency se peelapan aw jata hai aap magnease @1 kg per acre ka spray kr skte ho g..
Posted by आर्य सुरेन्द्र पँवार
Uttar Pradesh
20-01-2020 07:25 AM
Jhatka machine lene ke lia aap Moh. Imran 9812786229 Hindustan Seedlings se samparak kar sakte hai, Thankyou.

Posted by Shivraj Singh
Madhya Pradesh
20-01-2020 07:21 AM
shrimaan g gehu mein magnease ki deficiency se peelapan aw jata hai aap magnease @1 kg per acre ka spray kr skte ho..
Posted by Charanpreet Singh
Punjab
20-01-2020 06:42 AM
ਚਰਨਪ੍ਰੀਤ ਜੀ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਤੁਸੀ ਓਹਨਾ ਧੱਬਿਆਂ ਦੀ ਫੋਟੋ ਭੇਜੋ ਤਾਂ ਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਓਹਨਾ ਵਾਰੇ ਸਹੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ.
Posted by ਯਸ਼ਕੀਰਤ ਬਰਾੜ
Rajasthan
20-01-2020 06:39 AM
Yashkirat ji soon wale pashu nu vdia matra vich hara chara dena chahida hai ate uss nu her 3 mahine badd salt change krke goli deni chahidi hai ate suun ton 2 mahine pehla vitum-H liquid 10-10ml swere sham dena chahida hai ate enerboost powder 50gm-50gm swere sham dena chahida hai baki uss nu vdia feed deo jiss nu pashu asani nal hajam krda hai..
Posted by Gurjant
Punjab
20-01-2020 06:10 AM
ਗੁਰਜੰਟ ਜੀ ਇਸਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ ਜੇਕਰ 3 ਕਿਲੋ ਕੋਕੋਪੀਟ ਲੈਂਦੇ ਹੋ ਤਾ ਤੁਸੀ 1 ਕਿਲੋ ਵਰਮੀਕੰਪੋਸਟ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰੋ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by kaleem
Uttar Pradesh
20-01-2020 03:15 AM
Pearl farming is a very good business, Training is must to start this business, because there are some specific things which we can learn from practical training, If you want to take the training you can contact to Achal Singh-9711858258, founder of Glitterati pearl farming training centre.
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