Posted by vishal
Himachal Pradesh
26-01-2020 07:40 AM
Vishal ji unki achi growth ke liye aap unki feed ka pura dian rakhen kyuki sahi khurak hone se achi growth hoti hai, iske sath sath aap Groviplex powder 15g ko 1.5 litre pani mai milakr de skte hai, isse achi growth ho skti hai..
Posted by anil pratap singh
Uttar Pradesh
26-01-2020 07:18 AM
अनिल जी, खीरे के लिए एक एकड़ खेत के लिए 0.8-1.2 किलोग्राम बीज की मात्रा काफी हैं बिजाई से पहले, कार्बेनडाज़िम 2 ग्राम से प्रति किलो बीज का उपचार करें रासायनिक उपचार के बाद, ट्राईकोडरमा विराइड 4 ग्राम से प्रति किलो बीज का उपचार करें बीज को छांव में सुखाएं और उसके बाद तुरंत बो दें खेत की तैयारी के समय, 8-10 टन गाय का गला ह.... (Read More)
अनिल जी, खीरे के लिए एक एकड़ खेत के लिए 0.8-1.2 किलोग्राम बीज की मात्रा काफी हैं बिजाई से पहले, कार्बेनडाज़िम 2 ग्राम से प्रति किलो बीज का उपचार करें रासायनिक उपचार के बाद, ट्राईकोडरमा विराइड 4 ग्राम से प्रति किलो बीज का उपचार करें बीज को छांव में सुखाएं और उसके बाद तुरंत बो दें खेत की तैयारी के समय, 8-10 टन गाय का गला हुआ गोबर नाइट्रोजन 32 किलो (यूरिया 70 किलो), फासफोरस 24 किलो (सिंगल फास्फेट 150 किलो) और पोटाशियम 24 किलो (म्यूरेट ऑफ़ पोटाश 40 किलो) शुरुआत में खाद के रूप में डालें बिजाई के 32-3सप्ताह पहले गाय का गोबर, पोटाश और फासफोरस की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा डालें नाइट्रोजन की मात्रा को दो भागों में बांटकर पहली बिजाई के 25-30 दिनों के बाद और दूसरी बिजाई के 45-50 दिनों के बाद डालें लौकी के लिए एक एकड़ में बिजाई के लिए 1.5 से 2 किलो बीजों का प्रयोग करें मिट्टी से पैदा होने वाली फंगस से बचाने के लिए बाविस्टिन 0.2 प्रतिशत 3 ग्राम से प्रति किलो बीज का उपचार करें बैड की तैयारी से पहले अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर 8-10 टन प्रति एकड़ में डालें पहली तुड़ाई के समय नाइट्रोजन 32 किलो (यूरिया 70 किलो), फासफोरस 24 किलो (एस एस पी 150 किलो) और पोटाश 24 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 40 किलो) प्रति एकड़ में डालें गाय का गला हुआ गोबर, पोटाश और फासफोरस की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा बिजाई के तीन से चार सप्ताह पहले डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटे पहले भाग को बिजाई के 25-30 दिन बाद और दूसरे भाग को बिजाई के 40-50 दिन बाद डालें धन्यवाद

Posted by Birpal kaur
Punjab
26-01-2020 07:05 AM
ਤੁਸੀ ਉਸਦੇ ਗੱਭਣ ਹੋਣ ਦਾ ਸਹੀ ਪਤਾ ਕਰਨ ਲਈ ਉਸ ਨੂੰ ਨਜ਼ਦੀਕੀ ਡਾਕਟਰ ਤੋਂ ਗੱਭਣ ਚੈੱਕ ਕਰਵਾ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਜਿਸ ਨਾਲ ਉਸਦੇ ਗੱਭਣ ਹੋਣ ਦਾ ਸਹੀ ਪਤਾ ਲਗ ਜਾਵੇਗਾ

Posted by Gulab Toor
Punjab
26-01-2020 07:04 AM
Shri maan g Godrej double kanak te recommend nhi hai g....

Posted by anish singh
Uttar Pradesh
26-01-2020 07:00 AM
anish singh ji Pahle 25 kg chuna uske 1 week ke baad m 25 kg uriya 25 kg single super fast and 800 kg gobber and uske 1 week k baad m aap usme seed daal sakte hain.

Posted by MANPREET SIDHU
Punjab
26-01-2020 06:58 AM
ਮਨਪ੍ਰੀਤ ਜੀ ਤੁਸੀ ਓਹਨਾ ਨੂੰ ਪੇਟ ਦੇ ਕੀੜਿਆਂ ਲਈ Flukarid-DS ਗੋਲੀ ਦਿਓ ਅਤੇ ਹਰ 3 ਮਹੀਨੇ ਬਾਦ ਸਾਲਟ ਬਦਲ ਕੇ ਗੋਲੀ ਜਰੂਰ ਦਿਓ ਅਤੇ ਵਧਿਆ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਹਰਾ ਚਾਰਾ ਅਤੇ ਫੀਡ ਦੇਣੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ ਖੁਰਾਕ ਦੇ ਨਾਲ ਨਾਲ Enerboost ਪਾਊਡਰ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਅਤੇ Agrimin ਮਿਨਰਲ ਮਿਕਸਚਰ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ..
Posted by baljinder Singh
Haryana
26-01-2020 06:48 AM
बलजिंदर जी, कृपया आप बताये कि अपने अपनी फसल में कौन सी खाद का इस्तेमाल किया है, ताकि आपको इसके बारे में विस्तार से जानकारी दी जा सके, और कृपया आप अपनी मिटटी की जाँच भी करवाए जिससे आपको आपकी मिटटी में किस चीज की कमी है यह पता चल जाये गा, मिटटी की जाँच आप अपने नजदीकी KVK, Fatehabad, Dhani bikaneri, Majra road, Fatehabad, State: Haryana, District: Fatehabadसे करवा सकते .... (Read More)
बलजिंदर जी, कृपया आप बताये कि अपने अपनी फसल में कौन सी खाद का इस्तेमाल किया है, ताकि आपको इसके बारे में विस्तार से जानकारी दी जा सके, और कृपया आप अपनी मिटटी की जाँच भी करवाए जिससे आपको आपकी मिटटी में किस चीज की कमी है यह पता चल जाये गा, मिटटी की जाँच आप अपने नजदीकी KVK, Fatehabad, Dhani bikaneri, Majra road, Fatehabad, State: Haryana, District: Fatehabadसे करवा सकते हैं, मिटटी का नमूना लें लेने के लिए एक एकड़ क्षेत्र में लगभग 8-10 स्थानों से ‘V’ आकार के 6 इंच गहरे गहरे गढ्ढे बनायें एक खेत के सभी स्थानों से प्राप्त मिट्टी को एक साथ मिलाकर ½ किलोग्राम का एक सन्युक्त नमूना बनायें नमूने की मिट्टी से कंकड़, घास इत्यादि अलग करें सूखे हुए नमूने को कपड़े की थैली में भरकर कृषक का नाम, पता, खसरा संख्या, मोबाइल नम्बर, आधार संख्या, उगाई जाने वाली फसलों आदि का ब्यौरा दें नमूना प्रयोगशाला को प्रेषित करें अथवा’ ‘परख’ मृदा परीक्षण किट द्वारा स्वयं परीक्षण करें , धन्यवाद

Posted by shubhash chhillar
Uttar Pradesh
26-01-2020 06:31 AM
श्रीमान जी, समय समय पर किसानो की मांग के हिसाब से परीक्षण चलती रहती है, इसके लिए आप अपने नजदीकी Krishi Vigyan Kendra, Baghpat Khekra,, Distt.- Baghpat - (U.P.), INDIA, PIN - 250 101, Tel. No.: 0121 2969011 से सम्पर्क कर के अपना ट्रेनिंग का फॉर्म भर दें, और जब भी इसकी ट्रेनिंग राखी जाये गी आपको इसके बारे में कॉल कर के बता दिया जाये गा, धन्यवाद
Posted by Sachin Gangwar
Uttar Pradesh
26-01-2020 04:10 AM
Following are the varieties of wheat which are grown in Uttarakhand: Irrigated timely sown varieties:
UP 2785: The variety is sown in November month. It gives an average yield of 22qtl/acre.
UP 2382: The variety matures in 125-135 days and gives an average yield of 23qtl/acre. The variety is susceptible to brown rust.
UP 2785: The variety matures in 140 days. The plant attains the height of 90-100cm.
UP 2628: The variety matures in 138 days. The plant attains the height of 90-100cm.
UP 2554: The variety matures in 135 days. The plant attains the height of 90-100cm.
DBW 17: The variety matures in 130-135 days and gives an average yield of 21-23qtl/acre. The variety is resistant to brown rust and karnal bunt.
PBW 502: The plant possesses the height of 86cm. Suitable .... (Read More)
Following are the varieties of wheat which are grown in Uttarakhand: Irrigated timely sown varieties:
UP 2785: The variety is sown in November month. It gives an average yield of 22qtl/acre.
UP 2382: The variety matures in 125-135 days and gives an average yield of 23qtl/acre. The variety is susceptible to brown rust.
UP 2785: The variety matures in 140 days. The plant attains the height of 90-100cm.
UP 2628: The variety matures in 138 days. The plant attains the height of 90-100cm.
UP 2554: The variety matures in 135 days. The plant attains the height of 90-100cm.
DBW 17: The variety matures in 130-135 days and gives an average yield of 21-23qtl/acre. The variety is resistant to brown rust and karnal bunt.
PBW 502: The plant possesses the height of 86cm. Suitable for timely sown irrigated conditions. It is resistant to leaf rust and stripe rust.
PBW 343: Suitable for irrigated and late sown areas. The variety is ready to harvest in 130-135days. It is resistant to lodging, water logging conditions. It is also resistant to karnal bunt and tolerant to blight. It gives average yield of 19-20qtl/acre.
PBW 550: The variety matures in 135 days. The plant attains the height of 90-100cm. The variety is resistant to red rot.
WH 542: The variety matures in 130-135 days and gives an average yield of 19-20qtl/acre. The variety is resistant to yellow rust.
UP 2554: The variety matures in 130-135 days and gives an average yield of 19-20qtl/acre. The variety is resistant to brown rust and karnal bunt and is tolerant to blight.
PDW 291 (Durum), PDW 251 (Durum), WH 896 (Durum) and PDW 233 (Durum) are timely sown irrigated varieties.
Irrigated late sown varieties:
UP 2748: Suitable for late sowing i.e. it is mainly sown in December month. It gives an average yield of 18qtl/acre. The variety is good for making chapatis and bread.
DBW 16: Recommended for late sown area under irrigated conditions.
PBW 373: The variety matures in 120-125 days and gives an average yield of 17-18qtl/acre. The variety is resistant to many diseases and is moderately resistant to karnal bunt.
RAJ 3765: The variety matures in 120-125 days and gives an average yield of 15-16qtl/acre. The variety is moderately susceptible to karnal bunt.
UP 2565: The variety matures in 125 days. The plant attains the height of 100-110cm.
UP 2526: The variety matures in 125 days. The plant attains the height of 100-110cm.
UP 2425: Recommended for late sown area under irrigated conditions.
PBW 226: Recommended for late sown area under irrigated conditions.
Rainfed timely sown varieties:
PBW 396: The variety matures in 136-140 days and it gives an average yield of 15-16qtl/acre. The plant attains the height of 80-90cm.
PBW 299: The plant of this variety attains the height of 100cm. It is a double dwarf variety. The variety is resistant to yellow rust, brown rust and karnal bunt. It gives an average yield of 12-14qtl/acre and it matures in 165 days.
WH 533: Recommended for timely sown under rainfed conditions.

Posted by sumesh Diwakar
Uttar Pradesh
26-01-2020 12:46 AM
Namaskar ji! Kripya apna svaal vistaar se puchein taki apko shi jankari di jaa ske.

Posted by Rahul Bhaiyye
Maharashtra
25-01-2020 11:04 PM
Rahul Bhaiyye ji ABS ka semen lene ke lia aap Genus Breeding India Private Limited (ABS India) Phone number: 090201 31111, 91-20-2729-3445 se samparak kar sakte hai, Thankyou.

Posted by Rahul Bhaiyye
Maharashtra
25-01-2020 11:02 PM
Rahul Bhaiyye ji ABS ka semen lene ke lia aap Genus Breeding India Private Limited (ABS India) Phone number: 090201 31111, 91-20-2729-3445 se samparak kar sakte hai, Thankyou.
Posted by bajarag
Rajasthan
25-01-2020 10:58 PM
यह कई तरह की मिट्टी में उगाई जाती है इसकी पैदावार के लिए नमकीन, क्षारीय और पानी खड़ा होने वाली मिट्टी से बचाव करें यह बढ़िया निकास वाली मिट्टी जिसमे बढ़िया जैविक तत्व मौजूद हों, में बढ़िया परिणाम देती है इसके बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 5.5-7 होना चाहिए Drudriha Tulsi: यह मुख्य रूप से बंगाल, नेपाल, चटगांव और महाराष्ट्र क्ष.... (Read More)
यह कई तरह की मिट्टी में उगाई जाती है इसकी पैदावार के लिए नमकीन, क्षारीय और पानी खड़ा होने वाली मिट्टी से बचाव करें यह बढ़िया निकास वाली मिट्टी जिसमे बढ़िया जैविक तत्व मौजूद हों, में बढ़िया परिणाम देती है इसके बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 5.5-7 होना चाहिए Drudriha Tulsi: यह मुख्य रूप से बंगाल, नेपाल, चटगांव और महाराष्ट्र क्षेत्रों में पाई जाती है यह गले को सूखेपन से राहत देता है यह हाथों, पैरों और गठिया की सूजन से आराम देता है Ram/Kali Tulsi (Ocimum canum): यह चीन, ब्राज़ील, पूर्व नेपाल और साथ ही बंगाल, बिहार, चटगांव और भारत के दक्षिणी क्षेत्रों में पाई जाती है इसका तना जामुनी और पत्ते हरे रंग के और बहुत ज्यादा सुगंधित होते है इसमें उचित मात्रा में औषधीय गुण जैसे ऐज़ाडिरैकटिन, ऐंटीफंगल , ऐंटीबैक्टीरियल, और पाचन तंत्र को ठीक रखती है यह गर्म क्षेत्रों में बढ़िया उगता है Babi Tulsi: यह पंजाब से त्रिवेंद्रम, बंगाल और बिहार में भी पाई जाती है इसका पौधा 1-2 फीट लम्बा होता है पत्ते 1-2 इंच लम्बे, अंडाकार और नुकीले होते है इसके पत्तों का स्वाद लौंग की तरह और सब्जियों में स्वाद के लिए प्रयोग किया जाता है तुलसी की खेती के लिए, अच्छी तरह से शुष्क मिट्टी की मांग की जाती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक हैरो के साथ खेत की जोताई करें, फिर रूड़ी की खाद मिट्टी में मिलाएं तुलसी की रोपाई सीड बैड पर करें फरवरी के तीसरे महीने में नर्सरी बैड तैयार करें पौधे के विकास के अनुसार, 4.5 x 1.0 x 0.2 मीटर के सीड बैड तैयार करें बीजों को 60x60 सैं.मी. के फैसले पर बोयें बीजों को 2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई के 6-7 हफ्ते बाद, फसल की रोपाई खेत में करें तुलसी की खेती के लिए 120 ग्राम बीजों का प्रयोग प्रति एकड़ में करें फसल को मिट्टी से पैदा होने वाली बीमारीयों से रोकथाम के लिए, बिजाई से पहले मैनकोजेब 5 ग्राम प्रति किलोग्राम से बीजों का उपचार करें फसल की बढ़िया पैदावार के लिए बिजाई से पहले 15 टन रूड़ी की खाद मिट्टी में डालें तुलसी के बीजों को तैयार बैडों के साथ उचित अंतराल पर बोयें मानसून आने के 8 हफ्ते पहले बीजों को बैड पर बोयें बीजों को 2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई के बाद, रूड़ी की खाद और मिट्टी की पतली परत बीजों पर बना दें इसकी सिंचाई फुवारा विधि द्वारा की जाती है रोपाई के 15-20 दिनों के बाद, नए पौधों को तंदरुस्त बनाने के लिए 2% यूरिया का घोल डालें 6 हफ्ते पुराने और 4-5 पत्तों के अंकुरण होने पर अप्रैल के महीने में नए पौधे तैयार होते है तैयार बैडों को रोपाई 24 घंटे पहले पानी लगाएं ताकि पौधों को आसानी से उखाड़ा जा सकें और रोपाई के समय जड़ें मुलायम और सूजी हुई हो खेत की तैयारी के समय, रूड़ी की खाद को मिट्टी में मिलाएं खाद के तौर पर नाइट्रोजन 48 किलो(यूरिया 104 किलो), फासफोरस 24 किलो(सिंगल सुपर फासफेट 150 किलो) और पोटाश 24 किलो(मिउरेट 40 किलो) प्रति एकड़ में डालें नए पौधे लगाने के समय नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफेट पेंटोऑक्साइड की पूरी मात्रा शुरुआती समय में डालें Mn 50 पी पी एम कंसंट्रेशन और Co@100 पी पी एम कंसंट्रेशन सूक्ष्म-तत्व डालें बाकी की बची हुई नाइट्रोजन को 2 हिस्सों में पहली और दूसरी कटाई के बाद डालें खेत को नदीनों से मुक्त करने के लिए कसी की मदद से गोड़ाई करें नदीनों की रोकथाम कम न होने पर यह फसल को नुकसान पहुंचाते है रोपण के एक महीने बाद पहली गोड़ाई और पहली गोड़ाई के चार हफ्ते बाद दूसरी गोड़ाई करें रोपण के दो महीने बाद कसी से अनुकूल गोड़ाई करें गर्मियों में, एक महीने में 3 सिंचाइयां करें और बरसात के मौसम में, सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती एक साल में 12-15 सिंचाइयां करनी चाहिए पहली सिंचाई रोपण के बाद करें और दूसरी सिंचाई नए पौधों के स्थिर होने पर करें 2 सिंचाइयां करनी आवश्यक है और बाकी की सिंचाई मौसम के आधार पर करें इसके मंडीकरण के लिए आप Vivesh Sharma 9826556880 (Grow Further) से संपर्क कर सकते हैं धन्यवाद
Posted by Balkaran singh
Punjab
25-01-2020 10:34 PM
Balkaran g, ਮੌਸਮ ਦੇਖ ਕੇ ਮੱਕੀ J1006 ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ

Posted by shivanya gurjar
Madhya Pradesh
25-01-2020 10:15 PM
आप घर में फीड तैयार करके देना चाहते है तो 25 किलो अनाज (ज्वार, बाजरी (सर्दियां), गेहूं, जौं (गर्मियां)इनमें से कोई एक), दाल चूरी 20 किलो (मूंग चूरी, मांह चूरी, मोठ चूरी (केवल सर्दियों के लिए), मसूर चूरी, अरहर (इनमें से एक), डी ओ सी 25 किलो (धान का चूरा), फाइबर छिल्का 15 किलो (गेहूं, चौकर, चना छिल्का, मटर छिल्का, इनमें से एक), खल 15 कि.... (Read More)
आप घर में फीड तैयार करके देना चाहते है तो 25 किलो अनाज (ज्वार, बाजरी (सर्दियां), गेहूं, जौं (गर्मियां)इनमें से कोई एक), दाल चूरी 20 किलो (मूंग चूरी, मांह चूरी, मोठ चूरी (केवल सर्दियों के लिए), मसूर चूरी, अरहर (इनमें से एक), डी ओ सी 25 किलो (धान का चूरा), फाइबर छिल्का 15 किलो (गेहूं, चौकर, चना छिल्का, मटर छिल्का, इनमें से एक), खल 15 किला (सरसों, बिनौला या सोया (इनमें से कोई एक), मीठा सोडा 250 ग्राम, 1 किलो नमक, गुड़ 1 किलो , 1 किलो हल्दी इन्हें मिला लें यह फीड पशु के लिए बहुत लाभदायक होती है, यह आप तीन किलो दूध के मगर एक किलो फीड दे सकते है इसके साथ साथ पशुओं को रोजाना 35—40 किलो हरा चारा दें और उन्हें हर तीन महीने बाद पेट के कीड़ों की दवा जरूर दें.

Posted by Ajay. Singh
Uttar Pradesh
25-01-2020 10:10 PM
अजय जी कृपया आप पशु या खेती कि सम्बंधित सवाल ही पूछे धन्यवाद

Posted by pradeep pal
Uttar Pradesh
25-01-2020 09:51 PM
प्रदीप जी कृपया आप गन्ने की फोटो भेजे ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद

Posted by mandeep singh
Punjab
25-01-2020 09:36 PM
Mandeep ji tuci uss nu vdia khurak deni suru kro ate vdia feed deo jiss nu oh asani nal khaa ske ate hajam kre, baki tuci khurak de nal nal Glactogog powder 1-1 pouch swere sham, Calpond powder 50gm rojana dena suru kro, iss nal frak paa jawega.
Posted by लोकेश
Madhya Pradesh
25-01-2020 09:28 PM
यह पानी की सतह पर तैरने वाला फर्ण है,जिसमें शाखाएं,तने और जड़ें होती हैं यह पौधा पानी में नीचे की तरफ को लटकता है यह हरे चारे की एक किस्म है,जो पशुओं के लिए फीड के तौर पर प्रयोग की जाती है,क्योंकि यह पशुओं के द्वारा आसानी से पचा लिया जाता है बाकी हरे चारे वाली फसलों के मुकाबले अज़ोला में अधिक पोषक तत्व होते हैं .... (Read More)
यह पानी की सतह पर तैरने वाला फर्ण है,जिसमें शाखाएं,तने और जड़ें होती हैं यह पौधा पानी में नीचे की तरफ को लटकता है यह हरे चारे की एक किस्म है,जो पशुओं के लिए फीड के तौर पर प्रयोग की जाती है,क्योंकि यह पशुओं के द्वारा आसानी से पचा लिया जाता है बाकी हरे चारे वाली फसलों के मुकाबले अज़ोला में अधिक पोषक तत्व होते हैं इसके अलावा धान की फसल में नाइट्रोजन की मात्रा को ठीक बनाए रखने के लिए भी इसका प्रयोग किया जाता है इसलिए अज़ोला को धान की फसल में बायो खाद या हरी खाद के तौर पर प्रयोग किया जाता है यह प्रोटीन,विटामिन,अमीनो एसिड और खनिजों जैसे कि (कैलशियम,पोटाशियम,फासफोरस और मैगनीशियम) का अच्छा स्त्रोत है यह फीड के तौर पर बकरियों,सुअरों,भेड़ों और खरगोशों को भी दिया जा सकता है अज़ोला की खेती • अज़ोला की खेती के लिए पानी इक्ट्ठा करने के लिए जगह की जरूरत होती है • पानी इक्ट्ठा करने के लिए 2 मीटर x 1 मीटर x 20 सैं.मी. (लंबाई x चौड़ाई x ऊंचाई) के हिसाब से गड्ढे खोदें • पानी रिसने,मिट्टी के तापमान और आसपास से पौधों की जड़ों के विकास से बचाव के लिए गड्ढों को प्लास्टिक शीट से ढक दें • प्लास्टिक शीट से बराबर मात्रा में 10—15 किलो छानी हुई मिट्टी बिना किसी मिलावट के डालें • गारा तैयार करने के लिए गोबर 5 किलो, एज़ोफोस 40 ग्राम और एज़ाफर्ट या एस एस पी 20 ग्राम को 10 लीटर पानी में मिलायें इसेअच्छी तरह मिलाने केबाद इसे छान लें और फिर 8 सैं.मी.तक ऊंचा स्तर उठानेके लिए और पानीमिलायें • बिजाई के लिए रोग और कीटों से मुक्त अज़ोला का प्रयोग करें • गड्ढे में अज़ोला 7—10 दिनों के अंदर तैयार हो जाता है और लगभग 1—1.5 किलो पैदावार प्राप्त होती है • अज़ोला की तेजी से पैदावार के लिए 2 किलो गोबर, 25 ग्राम एज़ोफोस और 20 ग्राम एज़ोफर्ट को 2 लीटर पानी में मिलाकर तैयार किया गारा 7 दिनके अंतराल पर डालते रहें पानी में से अज़ोला बाहर निकालने का तरीका पानी में से अज़ोला बाहर निकालने के लिए प्लास्टिक से बनी ट्रे का प्रयोग करें जिसमें 1 वर्ग सैं.मी. वाली जाली के सुराख बने हों सावधानियां • नाइट्रोजन के अलावा जल्दी ही थोड़े अंतराल पर गोबर वाला गारा, सुपर फासफेट और अन्य मैकरो और सूक्ष्मतत्व आदि ना मिलायें, इससे यह समय से पहले ही पक जाता है • अज़ोला के अच्छे विकास के लिए तापमान 30 डिगरी सेल्सियस से कम रहना चाहिए यदि तापमान इससे अधिक है तो छांव के लिए नैट लगाकर तापमान ठीक करें • अनावश्यक घनता को रोकने के लिए हर रोज़ या थोड़े दिन बाद अज़ोला पानी में से निकालते रहें • हर रोज चैक करते रहें और 5.5—7 तक बनाकर रखें • पानी में से अज़ोला निकालने के बाद अच्छी तरह धोकर पशुओं को खाने के लिए दें, Azola seed lene ke lia aap Sandeep 7014864529 se samparak kar sakte hai, Thankyou.

Posted by om rajput
Chattisgarh
25-01-2020 09:24 PM
ओम जी कृपया बताये कि किचन गार्डन के लिए आपके पास जगह कितनी है ताकि आपको उसके हिसाब से जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by Anil Kumar
Himachal Pradesh
25-01-2020 09:18 PM
श्री मान मटर में NPK 13:00:45@1 किलो प्रती एकड़ सप्रे कर सकते हो

Posted by Suraj Kumar
Uttar Pradesh
25-01-2020 09:17 PM
Suraj ji kripya btaye ke aap konsi sabji ki kheti ke bare men jankari lena chahte hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad

Posted by prabhjot singh
Punjab
25-01-2020 09:14 PM
Prabhjot ji tuci 100kg feed vich 25kg tak doc paa skde ho.
Posted by satgur Sidhu
Punjab
25-01-2020 09:11 PM
Satgur Sidhu JI pashu vechan lai tusi sadi Apnikheti Buy/Sell aap te apni free Ads post kar ke koi vi vastu khreed ja vech sakde ho, Thankyou.
Posted by BAHAL
Punjab
25-01-2020 08:38 PM
ਅਦਰਕ ਦੀ ਖੇਤੀ ਦੀ ਸਿਫਾਰਿਸ਼ ਪੰਜਾਬ ਵਿਚ ਨਹੀਂ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਪਰ ਕੁੱਛ ਕਿਸਾਨ ਆਪਣੇ ਤਜ਼ੁਰਬੇ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਇਸ ਨੂੰ ਲਗਾ ਲੈਂਦੇ ਹਨ, ਤੁਸੀਂ ਇਸ ਬਾਰੇ ਜਾਣਕਰੀ ਅਤੇ ਇਸ ਦਾ ਬੀਜ ਲੈਣ ਲਈ Nishan Singh Kachoora 9927994011 Kachoora Farm ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਧੰਨਵਾਦ

Posted by Rajkumar Assari
Maharashtra
25-01-2020 08:31 PM
Rajkumar Assari ji plants lene ke lia aap Rajindra 9822534678 Plants Paradise Nursery se samparak kar sakte hai, Thankyou.

Posted by prabhjot singh
Punjab
25-01-2020 08:28 PM
Tuci 100kg feed vich 10kg tak seera paa skde ho.

Posted by Arun Rathore
Uttar Pradesh
25-01-2020 08:25 PM
Arun ji batak machlio ko khaa jatti hai iss liye aap alag alag rakh skte hai..

Posted by Rahul Kumar
Uttar Pradesh
25-01-2020 08:15 PM
श्री मान मोटे आलुओं की पैदावार के लिए 13:0:45 की 2 किलो और मैगनीश्यिम ई डी टी ए 100 ग्राम प्रति एकड़ की स्प्रे करें बीमारियों के हमले को रोकने के लिए फंगसनाशी प्रॉपीनेब 3 ग्राम प्रति लीटर पानी डालें आलुओं का आकार और गिणती बढ़ाने के लिए हयूमिक एसिड (12 प्रतिशत) 3 ग्राम + एम ए पी 12:61:0 की 8 ग्राम या डी ए पी 15 ग्राम प्रति लीटर की स्.... (Read More)
श्री मान मोटे आलुओं की पैदावार के लिए 13:0:45 की 2 किलो और मैगनीश्यिम ई डी टी ए 100 ग्राम प्रति एकड़ की स्प्रे करें बीमारियों के हमले को रोकने के लिए फंगसनाशी प्रॉपीनेब 3 ग्राम प्रति लीटर पानी डालें आलुओं का आकार और गिणती बढ़ाने के लिए हयूमिक एसिड (12 प्रतिशत) 3 ग्राम + एम ए पी 12:61:0 की 8 ग्राम या डी ए पी 15 ग्राम प्रति लीटर की स्प्रे पौधे की वृद्धि के समय करें।

Posted by Murli Pandit
Rajasthan
25-01-2020 08:06 PM
Murli ji aap alag alag rakh skte hai kyuki batak machlio ko khaa jatti hai..

Posted by Rahul Kumar
Uttar Pradesh
25-01-2020 08:06 PM
इस फसल को मिट्टी की अलग अलग किस्मों, जिनमें पानी सोखने की क्षमता कम होती है और जिनकी पी एच 5.0 से 9.5 के बीच में होती है, में भी उगाया जा सकता है धान की पैदावार के लिए रेतली से लेकर गारी मिट्टी तक, और गारी से चिकनी मिट्टी जिसमें पानी को सोखने की क्षमता कम होती है इस फसल के लिए अच्छी मानी जाती है शुष्क खेतों को अच्छा बन.... (Read More)
इस फसल को मिट्टी की अलग अलग किस्मों, जिनमें पानी सोखने की क्षमता कम होती है और जिनकी पी एच 5.0 से 9.5 के बीच में होती है, में भी उगाया जा सकता है धान की पैदावार के लिए रेतली से लेकर गारी मिट्टी तक, और गारी से चिकनी मिट्टी जिसमें पानी को सोखने की क्षमता कम होती है इस फसल के लिए अच्छी मानी जाती है शुष्क खेतों को अच्छा बनाने, नदीन रहित और सेहतमंद वृद्धि के लिए ग्लाफोसेट डालनी चाहिए गेहूं की कटाई के बाद ज़मीन पर हरी खाद के तौर पर मई के पहले सप्ताह ढैंचा (बीज दर 20 किलोग्राम प्रति एकड़), या सन (बीज दर 20 किलोग्राम प्रति एकड़) या लोबीया (बीज दर 12 किलोग्राम प्रति एकड़) की बिजाई करनी चाहिए जब फसल 6 से 8 सप्ताह की हो जाए तो इसे खेत में कद्दू करने से एक दिन खेत में ही जोत देना चाहिए इस तरह प्रति एकड़ 25 किलो नाइट्रोजन खाद की बचत होती है भूमि को समतल करने के लिए लेज़र लेवलर का प्रयोग किया जाता है इसके बाद खेत में पानी खड़ा कर दें ताकि भूमि के अंदर ऊंचे नीचे स्थानों की पहचान हो सके इस तरह पानी के रसाव के कारण पानी की होने वाले बर्बादी को कम किया जा सके बिजाई का समय यू पी के सिंचित और निम्न बारानी क्षेत्रों में मध्य जून से शुरूआती जुलाई तक का समय उपयुक्त होता है बीज की गहराई:-पौधे की गहराई 2-3 सैं.मी. होनी चाहिए फासला बनाकर लगाने से पौधे ज्यादा पैदावार देते हैं एक एकड़ खेत में 6-8 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बिजाई से पहले 10 लीटर पानी में 20 ग्राम कार्बेनडाज़िम $ 1 ग्राम स्ट्रैप्टोसाईक्लिन घोल लें और इस घोल में बीजो को 8-10 घंटे तक भिगोयें उसके बाद बीजों को छांव में सुखाएं और फिर बिजाई के लिए प्रयोग करें फसल को जड़ गलन रोग से बचाने के लिए नीचे दिए गए फंगसनाशी का प्रयोग किया जा सकता है पहले रासायनिक फंगीनाशी का प्रयोग करें फिर बीजों का टराईकोडरमा के साथ उपचार करें वैट बैड नर्सरी : यह तकनीक उन क्षेत्रों में अपनाई जाती है जहां पर पानी ज्यादा मात्रा में पाया जाता है नर्सरी का 1/10 हिस्सा दूसरे खेत में लगाया जाता है इसकी बिजाई छींटे द्वारा की जाती है यहां पर खेत की जोताई और खेत को समतल किया जाता है बैडों पर कईं दिन तक नमी बनाए रखनी चाहिए पानी से खेत को ज्यादा ना भरें जब नर्सरी 2 सैं.मी. से वृद्धि कर जाए तब पानी को खेत में लगाते रहना चाहिए बिजाई के 15 दिन बाद 26 किलो यूरिया डालना चाहिए जब नर्सरी 25-30 सैं.मी. तक लंबी हो जाए तब उसे 15-21 दिन बाद दूसरे खेत में लगा देना चाहिए और खेत को लगातार पानी लगाते रहना चाहिए सूखे बैड वाली नर्सरी : यह तकनीक शुष्क क्षेत्रों में अपनाई जाती है जो बैड बनाया जाता है वो बिजाई वाले खेत का 1/10 हिस्से में बीज बोया जाता है बैड का आकार सीमित होना चाहिए और उसकी ऊंचाई 6-10 से.मी होनी चाहिए धान का आधा जला हुआ छिलका बैड पर बिखेर देना चाहिए इससे जड़ें मजबूत होती हैं सही समय पर सिंचाई करते रहना चाहिए और नमी बनाए रखना चाहिए ताकि नए पौधे नष्ट ना हों तत्वों की पूर्ति के लिए खाद डालना जरूरी है मॉडीफाईड मैट नर्सरी : यह नर्सरी लगाने का एक ऐसा तरीका है जिसमें कम जगह और कम बीजों की जरूरत होती है यह नर्सरी किसी भी जगह पर बनाई जा सकती हैं जहां पर समतल जगह हो और पानी की सुविधा हो इसकी पनीरी लगाने के लिए 1% खेत की जरूरत होती है 4 से.मी की सतह पर नए पौधे लगाए जाते हैं इसे बनाने के लिए 1 मीटर चौड़े और 20-30 मीटर लंबे जमीन के टुकड़े की जरूरत होती है इसके ऊपर बिछाने के लिए पॉलीथीन और केले के पत्तों की जरूरत होती है इसके इलावा एक लकड़ी का बकसा जो कि 4 से.मी गहरा होता हैं मिट्टी के मिश्रण से भरा होता है बीजों को इसके अंदर रख देना चाहिए और फिर बीजों को सूखी मिट्टी के साथ ढक देना चाहिए इसके बाद पानी का छिड़काव कर देना चाहिए लकड़ी के बक्से को नमी देते रहना चाहिए बिजाई से 11-14 दिनों के बाद पौध तैयार हो जाती है जब पौध तैयार हो जाती है तब मैट से पौध को दूसरे खेत में रोपण कर दिया जाता है फासला: पौधों का फासला 20x20 सैं.मी. या 25x25 सैं.मी. होना चाहिए पनीरी लगाने का ढंग 1. कद्दू करके लगाई जाने वाली पनीरी : आमतौर पर पंक्ति में लगाए जाने वाले पौधे 20x15 सैं.मी. दूरी पर लगाए जाते हैं और देरी से लगाई जाने वाली पनीरी 15x15 सैं.मी. पर लगाई जाती है नए पौधों की गहराई 2-3 सैं.मी. होनी चाहिए 2. बैड बनाकर लगाई जाने वाली पनीरी : यह बैड भारी ज़मीनों के लिए बनाए जाते हैं पनीरी लगाने से पहले खालियों में पानी लगाना चाहिए और फिर पनीरी को खेत में लगाना चाहिए पौधे से पौधे का फासला 9 सैं.मी. होना चाहिए 3. मशीनी ढंग से लगाई जाने वाली पनीरी : मैट पनीरी के लिए मशीनों का प्रयोग किया जाता है यह मशीन 30x12 सैं.मी. के फासले पर पनीरी लगानी चाहिए सिंचित और कम बारानी वाले क्षेत्रों के लिए लगभग 41-50 किलो नाइट्रोजन (यूरिया 90-110 किलो), 30 किलो फासफोरस (एस एस पी 190 किलो) और 27 किलो पोटाश (म्यूरेट ऑफ पोटाश 45 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा रोपाई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटकर, नाइट्रोजन का 1/4 हिस्सा शाखाएं निकलने के समय और 1/4 हिस्सा बालियां निकलने के समय डालें जल जमाव वाले क्षेत्रों में नाइट्रोजन 30-41 किलो (यूरिया 65-90 किलो) प्रति एकड़ में शुरूआती खुराक के तौर पर डालें कम बारानी क्षेत्रों के लिए नाइट्रोजन 23-32 किलो (यूरिया 52-70 किलो) और फासफोरस 16 किलो (एस एस पी 100 किलो) प्रति एकड़ में प्रयोग करें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस की पूरी मात्रा रोपाई से पहले और बाकी बची नाइट्रोजन बालियां निकलने के समय डालें ऊंचे क्षेत्रों के लिए नाइट्रोजन 23 किलो (यूरिया 52 किलो), फासफोरस 12 किलो (एस एस पी 75 किलो) और पोटाश 12 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 20 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के तीन सप्ताह बाद डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटे पहले भाग को बिजाई के 6 सप्ताह बाद और दूसरे भाग को बालियां निकलने के समय डालें रोपाई के 2 से 3 दिन बाद नदीनों के अंकुरण से पहले बूटाक्लोर 50 ई सी 1200 मि.ली. या थायोबेनकार्ब 50 ई सी 1200 मि.ली. या पैंडीमैथालीन 30 ई सी या प्रैटीलाक्लोर 50 ई सी 600 मि.ली. प्रति एकड़ में डालें इनमें से किसी एक नदीननाशक को 60 किलो रेत में मिलाकर 4-5 सैं.मी. गहरे खड़े पानी में बुरकाव करें चौड़े पत्ते वाले नदीनों की रोकथाम के लिए मेटसलफुरॉन 20 डब्लयु पी 30 ग्राम को 150 लीटर पानी में मिलाकर नदीनों के अंकुरण के बाद रोपाई के 20-25 दिन बाद डालें स्प्रे से पहले खेत में खड़े पानी का निकास कर दें और स्प्रे के एक दिन बाद सिंचाई करें नदीनों के अंकुरण से पहले बूटाक्लोर 1 लीटर को बिजाई के 6 से 7 दिनों के बाद प्रति एकड़ में स्प्रे करें पनीरी लगाने के बाद खेत में दो सप्ताह तक अच्छी तरह पानी खड़ा रहने देना चाहिए जब सारा पानी सूख जाए तो उसके दो दिन बाद फिर से पानी को लगाना चाहिए खड़े पानी की गहराई 10 सै.मी. से ज्यादा नहीं होनी चाहिए खेत में से बूटी और नदीनों को निकालने से पहले खेत में से सारा पानी निकाल देना चाहिए ओर इस प्रक्रिया के पूरे होने के बाद खेत की फिर से सिंचाई करनी चाहिए पकने से 15 दिन पहले सिंचाई करनी बंद करनी चाहिए ताकि फसल को आसानी से काटा जा सके ऊंची भूमि पर सिंचाई पूरी तरह से बारिश पर निर्भर करती है बारिश की तीव्रता और नियमितता के आधार पर और पानी की उपलब्धता के आधार पर गंभीर अवस्थाओं में सिंचाई करें जब दाने पूरी तरह पक जायें और फसल का रंग सुनहरी हो जाये तो खड़ी फसल की कटाई कर लेनी चाहिए ज्यादातर फसल की कटाई हाथों से द्राती से या कंबाइन से की जाती है काटी गई फसल के बंडल बनाके उनको छांटा जाता है दानों को बालियों से अलग कर लिया जाता है दानों को बालियों से अलग करने के बाद उसकी छंटाई की जाती है धान की कटाई करने के बाद पैदावार को काटने से लेकर प्रयोग तक नीचे लिखी प्रक्रिया अपनाई जाती है 1.कटाई 2. छंटाई 3. सफाई 4. सुखाना 5. गोदाम में रखना 6.पॉलिश करना और इसके बाद इसे बेचने के लिए भेजना दानों को स्टोर करने से पहले इन्हें कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए 10 किलोग्राम दानों के लिए 500 ग्राम नीम के पाउडर को मिलाना चाहिए स्टोर किए गए दानों को कीटों के हमले से बचाने के लिए 30 मि.ली. मैलाथियोन 50 ई.सी. को 3 लीटर पानी में घोल तैयार करके इसका छिड़काव करना चाहिए इस घोल का छिड़काव 100 वर्ग मीटर के क्षेत्र में हर 15 दिनों के बाद करना चाहिए, धन्यवाद

Posted by Amrinder Rangi
Punjab
25-01-2020 08:03 PM
Amrinder ji kirpa krke ehh daso tuhade pashu nu mastitis vich ki ki smasia aa rehi hai, usde thna vicho dudh ghht aunda hai, sojish hai, dudh nhi aunda hai, shidia aundia hai ja koi hor smasia hai kirpa krke vistar nal apna swal pusho ji tan jo tuhanu sahi jankari diti ja skee.
Posted by Lovepreet mahli
Punjab
25-01-2020 07:56 PM
lovepreet ji makki di bijai adh february to bad karo.dhanwad

Posted by Jitendra Kushwah
Madhya Pradesh
25-01-2020 07:56 PM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद

Posted by mahendra kumar saw
Jharkhand
25-01-2020 07:54 PM
Mahendra g, Azolla k seedlings aap ko apne nzdeek Krishi Vigyan Kendr ja Khetibaari Vibaagh k office sey mil jaaega . Is liye aap un sey contact kro g

Posted by Jitendra Kushwah
Madhya Pradesh
25-01-2020 07:54 PM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद

Posted by SHUBHAM KUMAR
Bihar
25-01-2020 07:34 PM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद

Posted by Gurtej Khaira
Haryana
25-01-2020 07:27 PM
Gurtej ji iske liye aap apne nazdiki market mai egg shop se sampark kr skte hai aur jo market mai rate chalta hai uss hisab se sale kr skte hai.
Posted by Anil Kumar
Himachal Pradesh
25-01-2020 07:22 PM
अनिल जी आप इसकी खेती इस महीने में कर सकते हैं लेकिन इसकी पनीरी आपके पास होनी चाहिए।
Posted by Anmol Bali
Punjab
25-01-2020 07:20 PM
श्रीमान जी बरसीम में यूरिया डालने के 1 से 2 दिन के बाद आप भैंस को डाल सकते हैं.
Posted by Samir Kewat
Uttar Pradesh
25-01-2020 07:08 PM
समीर जी पहले सप्ताह में 1 वर्ग फीट जगह में 4 बच्चे रख सकते है, दूसरे सप्ताह में 1 वर्ग फीट जगह में 3 बच्चे, तीसरे सप्ताह में 1 वर्ग फीट जगह में 2 बच्चे, चौथे सप्ताह में 1 वर्ग फीट जगह में 1 बच्चा, पांचवे सप्ताह 1.25 वर्ग फीट जगह में 1 बच्चा रख सकते है फिर आप 1.75 वर्ग फीट जगह में 1 बच्चा आसानी से रख सकते है

Posted by sandesh sharma
Delhi
25-01-2020 07:04 PM
Sandesh sharma ji makka lene ke lia aap Jatinder Singh 8557000019 Boparai Trading Co. se samparak kar sakte hai, Thankyou.

Posted by Palwinder Singh
Punjab
25-01-2020 07:03 PM
Palwinder Singh ji gud nu tusi gatte de dabe vich store karke rakh sakde ho ji.

Posted by Arun Rathore
Uttar Pradesh
25-01-2020 06:59 PM
सबसे पहले यदि हम मछली पालन की बात करें तो इसके लिए ट्रेनिंग बहुत जरूरी है यह ट्रेनिंग FFDA(fish farmer development aggency) हर जिले में बनी है जहां हमारा खेतीबाड़ी विभाग है वहां इसके अफसर बैठते हैं वहां जाकर एप्लीकेशन भरवायें वहां आपको 5 दिन की ट्रेनिंग दी जायेगी ट्रेनिंग के लिए दसवीं पास होना ज़रूरी है इस ट्रेनिंग में आपको लोन और स.... (Read More)
सबसे पहले यदि हम मछली पालन की बात करें तो इसके लिए ट्रेनिंग बहुत जरूरी है यह ट्रेनिंग FFDA(fish farmer development aggency) हर जिले में बनी है जहां हमारा खेतीबाड़ी विभाग है वहां इसके अफसर बैठते हैं वहां जाकर एप्लीकेशन भरवायें वहां आपको 5 दिन की ट्रेनिंग दी जायेगी ट्रेनिंग के लिए दसवीं पास होना ज़रूरी है इस ट्रेनिंग में आपको लोन और सब्सिड़ी के बारे में सारी जानकारी प्राप्त हो जाएगी इसकी पुंग छोड़ने के लिए अप्रैल से अक्तूबर का समय बढ़िया होता है, बाकि यदि अपने शुरू करना है तो यूनिवर्सिटी की तरफ से एक एकड़ में शुरू कर सकते हैं. एक एकड़ में 5000 पूंग डाल सकते हैं यह 2 से 3 इंच का होता है यदि 5000 डालना है तो 3000 रोहू, 1000 कतला, 500 कॉमन कॉर्प और 500 मरीगल नस्ल डाली जाए यह पूंग आप मछली पालन विभाग से खरीद सकते हैं यह एक इंच का बच्चा 10 पैसा प्रति बच्चा मिलेगा यदि बढ़िया खुराक डाली जाए तो 8 महीनों में यह लगभग 800—900 ग्राम का हो जाता है बाकी मछली पालन के लिए नहरी पानी बढ़िया होता है और आप गांव का छप्पड़ ठेके से लेकर भी यह काम शुरू कर सकते हैं तालाब में मछली के बीज डालने से पहले इस बात की जांच कर लेनी चाहिए कि उस तालाब में काफी मात्रा में मछली की कुदरती खुराक उपलब्ध है.
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