Posted by akleshmeena
Madhya Pradesh
29-01-2020 11:45 AM
सबसे पहले यदि हम मछली पालन की बात करें तो इसके लिए ट्रेनिंग बहुत जरूरी है यह ट्रेनिंग FFDA(fish farmer development aggency) हर जिले में बनी है जहां हमारा खेतीबाड़ी विभाग है वहां इसके अफसर बैठते हैं वहां जाकर एप्लीकेशन भरवायें वहां आपको 5 दिन की ट्रेनिंग दी जायेगी ट्रेनिंग के लिए दसवीं पास होना ज़रूरी है इस ट्रेनिंग में आपको लोन और स.... (Read More)
सबसे पहले यदि हम मछली पालन की बात करें तो इसके लिए ट्रेनिंग बहुत जरूरी है यह ट्रेनिंग FFDA(fish farmer development aggency) हर जिले में बनी है जहां हमारा खेतीबाड़ी विभाग है वहां इसके अफसर बैठते हैं वहां जाकर एप्लीकेशन भरवायें वहां आपको 5 दिन की ट्रेनिंग दी जायेगी ट्रेनिंग के लिए दसवीं पास होना ज़रूरी है इस ट्रेनिंग में आपको लोन और सब्सिड़ी के बारे में सारी जानकारी प्राप्त हो जाएगी इसकी पुंग छोड़ने के लिए अप्रैल से अक्तूबर का समय बढ़िया होता है, बाकि यदि अपने शुरू करना है तो यूनिवर्सिटी की तरफ से एक एकड़ में शुरू कर सकते हैं. एक एकड़ में 5000 पूंग डाल सकते हैं यह 2 से 3 इंच का होता है यदि 5000 डालना है तो 3000 रोहू, 1000 कतला, 500 कॉमन कॉर्प और 500 मरीगल नस्ल डाली जाए यह पूंग आप मछली पालन विभाग से खरीद सकते हैं यह एक इंच का बच्चा 10 पैसा प्रति बच्चा मिलेगा यदि बढ़िया खुराक डाली जाए तो 8 महीनों में यह लगभग 800—900 ग्राम का हो जाता है बाकी मछली पालन के लिए नहरी पानी बढ़िया होता है और आप गांव का छप्पड़ ठेके से लेकर भी यह काम शुरू कर सकते हैं तालाब में मछली के बीज डालने से पहले इस बात की जांच कर लेनी चाहिए कि उस तालाब में काफी मात्रा में मछली की कुदरती खुराक उपलब्ध है.

Posted by vindhya Prsad
Uttar Pradesh
29-01-2020 11:40 AM
कालमेघ समशीतोष्ण जलवायुवीय व खरीफ की फसल है इसके लिए औसत वर्षा 75 से 90 सेंटीमीटर होनी चाहिए परन्तु यह 125 से 160 सेंटीमीटर वर्षा वाले स्थानों पर भी सफलतापूर्वक उगता है यह सभी प्रकार की भूमि में अनुकूलन की क्षमता रखता है यह फसल अच्छे जल निकास वाली किसी भी प्रकार की भूमि में हो सकती है, लेकिन अधिक पैदावार के लिए बल.... (Read More)
कालमेघ समशीतोष्ण जलवायुवीय व खरीफ की फसल है इसके लिए औसत वर्षा 75 से 90 सेंटीमीटर होनी चाहिए परन्तु यह 125 से 160 सेंटीमीटर वर्षा वाले स्थानों पर भी सफलतापूर्वक उगता है यह सभी प्रकार की भूमि में अनुकूलन की क्षमता रखता है यह फसल अच्छे जल निकास वाली किसी भी प्रकार की भूमि में हो सकती है, लेकिन अधिक पैदावार के लिए बलुई दोमट भूमि अधिक उपयुक्त रहती है कालमेघ की खेती के लिए मई से जून में खेत को जोतना चाहिये जुताई करने से पहले 15 से 20 टन गोबर की खाद खेत में डाल दे जुताई के बाद पाटा चलाकर मिट्टी को भुरभुरा बना लेना चाहिए कालमेघ की खेती के लिए 5 से 6 किलोग्राम एक हैक्टेयर बीज की आवश्यकता होती है कालमेघ की नर्सरी तैयार करने के लिए 15 जून के लगभग 1 एकड क्षेत्र की रोपाई हेतु 1 किलोग्राम बीज को 200 वर्गमीटर क्षेत्र में 1 मीटर चौडाई की क्यारीयों में छिड़काव विधि से बुवाई कर मिट्टी की हल्की परत से बीज को ढककर सिंचाई करें जब पौधे लगभग 30 से 35 दिन के हो जावें तो खेत की क्यारीयों में रोपाई करते है इसकी सीधे भी बुवाई की जा सकती है इसके लिए अधिक बीज की आवश्यकता होगी जुलाई माह में 30 x 30 सेंटीमीटर की दूरी पर पौधा रोपण करें और रोपाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करें प्रति एकड 44,400 पौधों की आवश्यकता होती है कालमेघ की उत्तम उपज लेने के लिए सिंचित फसल में 20 किलोग्राम नाइट्रोजन, 30 किलोग्राम फास्फोरस एवं 20 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर बुआई के समय देना चाहियें 15 किलोग्राम नाइट्रोजन प्रथम सिंचाई के समय देना चाहिये कालमेघ के फसल में खरपतवार अधिक होते हैं, जिससे पौधे की वृद्धि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है अतः निंयत्रण हेतु रोपाई के 30 दिन बाद से आवश्यकतानुसार निराई-गुडाई करते रहना चाहिए

Posted by Amrit chahal
Punjab
29-01-2020 11:37 AM
ਸੂਣ ਤੋਂ ਬਾਦ 250 ਗ੍ਰਾਮ ਗੁੜ, 250 ਗ੍ਰਾਮ ਗੁਲਕੰਦ, 100 ਗ੍ਰਾਮ ਸੌੰਫ, 100 ਗ੍ਰਾਮ ਸੁਕੇ ਆਵਲੇ ਤੇ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਅਜਵਾਇਨ 2 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਉਬਾਲ ਕੇ ਜਦੋ ਅੱਧਾ ਰਹਿ ਜਾਵੇ ਫਿਰ ਠੰਡਾ ਕਰਕੇ ਦਿਓ, ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ 5 ਦਿਨ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਬੱਚੇਦਾਨੀ ਦੀ ਸਫਾਈ ਹੋਵੇਗੀ ਅਤੇ ਦੁੱਧ ਵੱਧ ਜਾਵੇਗਾ
Posted by sukhpinder singh bhullar
Punjab
29-01-2020 11:26 AM
ਸੁਖਪਿੰਦਰ ਜੀ ਜੇਕਰ ਮਿੱਟੀ ਵਿਚ ਸ਼ੋਰਾ ਹੈ ਤਾ ਤੁਸੀ ਜਿਪਸਮ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਸਦੀ ਮਾਤਰਾ ਇਕ ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਵਰਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by Bhupinder Singh
Punjab
29-01-2020 11:24 AM
ਭੁਪਿੰਦਰ ਜੀ ਤੁਸੀ ਕਿਸਮਾਂ ਜਿਵੇ Co238 ਜਾ CoJ64 ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਹਨਾਂ ਦਾ ਗੁੜ ਚੰਗਾ ਬਣਦਾ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by Birendra Kumar Yadav
Uttar Pradesh
29-01-2020 11:04 AM
Birendra Kumar Yadav ji ABS da semen lene ke lai aap Genus Breeding India Private Limited (ABS India), Phone number: 090201 31111, 91-20-2729-3445 se samparak kar sakde ho, Thankyou.

Posted by ਰਾਕੇਸ਼ ਕੁਮਾਰ
Punjab
29-01-2020 11:03 AM
ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਤੁਹਾਡੇ ਲਈ ਇਹ ਜਾਨਣਾ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਕਿ ਮੁਰਗੀ ਪਾਲਣ ਦਾ ਧੰਦਾ ਦੋ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਕਿ ਤੁਸੀ ਆਂਡਿਆਂ ਦਾ ਧੰਦਾ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਜਾਂ ਮੀਟ ਦਾ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਆਂਡਿਆਂ ਦਾ ਧੰਦਾ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਲੇਇਰ ਮੁਰਗੀਆਂ ਪਾਲਣੀਆਂ ਪੈਣਗੀਆਂ ਅਤੇ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਮੀਟ ਦਾ ਧੰਦਾ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਬਰਾਇਲਰ ਮੁਰਗੀਆਂ ਪਾਲਣੀਆਂ ਪੈਣਗੀਆਂ ਜੇਕ.... (Read More)
ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਤੁਹਾਡੇ ਲਈ ਇਹ ਜਾਨਣਾ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਕਿ ਮੁਰਗੀ ਪਾਲਣ ਦਾ ਧੰਦਾ ਦੋ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਕਿ ਤੁਸੀ ਆਂਡਿਆਂ ਦਾ ਧੰਦਾ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਜਾਂ ਮੀਟ ਦਾ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਆਂਡਿਆਂ ਦਾ ਧੰਦਾ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਲੇਇਰ ਮੁਰਗੀਆਂ ਪਾਲਣੀਆਂ ਪੈਣਗੀਆਂ ਅਤੇ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਮੀਟ ਦਾ ਧੰਦਾ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਬਰਾਇਲਰ ਮੁਰਗੀਆਂ ਪਾਲਣੀਆਂ ਪੈਣਗੀਆਂ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਬਰਾਇਲਰ ਮੁਰਗੀ ਫਾਰਮਿੰਗ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਅਤੇ ਘੱਟ ਤੋਂ ਘੱਟ 10 ਹਜਾਰ ਮੁਰਗੀਆਂ ਦਾ ਧੰਦਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ 4 ਤੋਂ 5 ਲੱਖ ਦਾ ਇੰਤਜਾਮ ਕਰਨਾ ਪਵੇਗਾ, ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਪੋਲਟਰੀ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈ ਕੇ ਨਾਬਾਰਡ ਤੋਂ ਲੋਨ ਲੈਂਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ 25 ਤੋਂ 35 % ਤੱਕ ਸਬਸਿਡੀ ਮਿਲ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਲੋਨ ਅਪਲਾਈ ਕਰਨ ਦੀ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਤੁਹਾਨੂੰ ਵਿੱਭਾਗ ਵੱਲੋਂ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਦਿਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈਣ ਲਈ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਨਜ਼ਦੀਕੀ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਕੇਦਰ ਤੋਂ ਜਾਂ ਗੁਰੂ ਅੰਗਦ ਦੇਵ ਵੈਟਨਰੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋਂ ਜਾਂ ਫਿਰ ਤੁਸੀ ਕਿਸੇ ਵੀ ਦਿਨ ਆਪਣੇ ਨਜ਼ਦੀਕੀ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਕੇਦਰ ਤੇ ਪਹੁੰਚ ਕੇ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈਣ ਲਈ ਫਾਰਮ ਭਰ ਆਊ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਜਦੋਂ ਵੀ ਪੋਲਟਰੀ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਆਵੇਗੀ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਕੇਦਰ ਵੱਲੋਂ ਕਾਲ ਕਰਕੇ ਦੱਸ ਦਿੱਤਾ ਜਾਦਾ ਹੈ ਬਹੁਤ ਵਧੀਆ ਕੰਮ ਹੈ ਜੀ ਪੋਲਟਰੀ ਦਾ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਬ੍ਰਾਇਲਰ ਰੱਖਦੇ ਹੋਂ ਤਾਂ 5 ਤੋਂ 6 ਹਫਤਿਆਂ ਦੇ ਅੰਦਰ ਅੰਦਰ ਮੰਡੀਕਰਣ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਤਕਰੀਬਨ ਪੰਜ ਮਹੀਨਿਆਂ ਵਿੱਚ ਅੰੰਡਿਆ ਦੀ ਉਪਜ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਸਾਰਾ ਸਾਲ ਦੀ ਆਮਦਨ ਵਾਲਾ ਕੰਮ ਹੈ ਜੀ ਜਿਆਦਾ ਮਿਹਨਤ ਵੀ ਨਹੀ ਲੱਗਦੀ ਇਹ ਨਾਜੁਕ ਕਿਸਮ ਦੇ ਜਾਨਵਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਕੁੱਝ ਕੁ ਖਤਰਨਾਕ ਬਿਮਾਰੀਆ ਵੀ ਹਨ ਜਿੰਨਾਂ ਤੋੰ ਬਚਣ ਲਈ ਖਾਸ ਧਿਆਨ ਰੱਖਣ ਦੀ ਜਰੂਰਤ ਹੂੰਦੀ ਹੈ.

Posted by KULDEEP SINGH
Uttar Pradesh
29-01-2020 11:03 AM
कुलदीप जी आप इसके वृक्ष लेने के लिए Sulender 8736801125 से संपर्क कर सकते है धन्यवाद
Posted by Gurvinder Singh
Uttarakhand
29-01-2020 11:02 AM
Gurvinder ji aap Phosphorus ki kami ko durr krne ke liye Tonophos injection 20ml rojana lgana suru kren..

Posted by KULDEEP SINGH
Uttar Pradesh
29-01-2020 11:02 AM
कुलदीप जी आप इसके वृक्ष लेने के लिए Sulender 8736801125 से संपर्क कर सकते है धन्यवाद
Posted by Nitesh Kumawat
Madhya Pradesh
29-01-2020 10:51 AM
Nitesh ji aap iske uper carbendazim@4 gram ko prati litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by Lakhan dhakad
Madhya Pradesh
29-01-2020 10:49 AM
लखन जी आप इसका इस्तेमाल कर सकते है इसकी मात्रा 1.5 ml को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें यह फसल की वृद्धि कराने में मदद करती है धन्यवाद
Posted by Gautam Bairwa
Rajasthan
29-01-2020 10:48 AM
गौतम जी आप किस्मे जैसे Pusa Rubi: यह किस्म IARI, नई दिल्ली द्वारा विकसित की गई है यह किस्म बसंत और सर्दियों में उगाने के लिए उपयुक्त है इसकी औसतन पैदावार 133 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa Early Dwarf: यह किस्म IARI, नई दिल्ली द्वारा विकसित की गई है इसके फल मध्यम छोटे और तना पीला होता है यह किस्म रोपाई के बाद 75-80 दिनों में कटाई के लिए त.... (Read More)
गौतम जी आप किस्मे जैसे Pusa Rubi: यह किस्म IARI, नई दिल्ली द्वारा विकसित की गई है यह किस्म बसंत और सर्दियों में उगाने के लिए उपयुक्त है इसकी औसतन पैदावार 133 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa Early Dwarf: यह किस्म IARI, नई दिल्ली द्वारा विकसित की गई है इसके फल मध्यम छोटे और तना पीला होता है यह किस्म रोपाई के बाद 75-80 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 140 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Punjab Chhuhara: इसके फल बीज रहित, नाशपाति के आकार के, लाल और बाहरी मोटी परत के होते हैं इसकी गुणवत्ता कटाई के बाद 7 दिनों तक मंडी लायक होती है इसलिए इस किस्म को लंबी दूरी वाले स्थानों और नए उत्पाद बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है Pusa 120: यह किस्म IARI, नई दिल्ली द्वारा विकसित की गई है इसके फल मध्यम छोटे, नर्म, आकर्षित और तना पीले रंग का होता है यह किस्म नेमाटोड के प्रतिरोधी किस्म है

Posted by kapil
Haryana
29-01-2020 10:42 AM
स्ट्रॉबेरी की खेती पॉलीहाउस के अंदर या खुले खेत में कर सकते हैं चीकनी, बालुई और अच्छे निकास वाली ज़मीन स्ट्रॉबेरी के लिए अच्छी होती है तेजाबी में पी एच 5.0 से 6.5 होनी चाहिए मिट्टी की नाज़ुकता तीस से चालीस सैं.मी. होनी चाहिए स्ट्रॉबेरी की सही वृद्धि के लिए दिन में तापमान 20-25 डिगरी और रात के समय 7-12 डिगरी होना चाहिए इस.... (Read More)
स्ट्रॉबेरी की खेती पॉलीहाउस के अंदर या खुले खेत में कर सकते हैं चीकनी, बालुई और अच्छे निकास वाली ज़मीन स्ट्रॉबेरी के लिए अच्छी होती है तेजाबी में पी एच 5.0 से 6.5 होनी चाहिए मिट्टी की नाज़ुकता तीस से चालीस सैं.मी. होनी चाहिए स्ट्रॉबेरी की सही वृद्धि के लिए दिन में तापमान 20-25 डिगरी और रात के समय 7-12 डिगरी होना चाहिए इसलिए इसकी पनीरी लगाने का काम मध्य अक्तूबर से मध्य नवंबर तक कर देना चाहिए इन महीनों और इसके बाद पंजाब में लगभग यही तापमान होता है स्ट्रॉबेरी की खेती मलचिंग विधि द्वारा की जाती है सबसे पहले खेत को तैयार किया जाता है इसके बाद ही ट्रैक्टर की सहायता से मलचिंग मशीन को खेत में उतारा जाता है चार फुट क्यारी तैयार की जाती है इसमें ड्रिप लाइन फिट की जाती है इसके बाद मशीन की सहायता से क्यारियों पर प्लास्टिक शीट बिछाई जाती है मलचिंग के लिए हल्का और लचकीला पदार्थ लें ताकि स्ट्रॉबेरी के पौधे की रफ्तार पर असर ना पड़े जिसे बाद में दोनों ओर से मिट्टी में दबा दिया जाता है अब इस शीट में छेद करके उसमें स्ट्रॉबेरी की पनीरी लगायी जाती है पनीरी लगाने के समय जड़ को पूरी तरह मिट्टी में व्यवस्थित कर दें जड़ बाहर रहने से पौधे के सूखने का खतरा होता है पौधे को ज्यादा तापमान और ठंड से बचाने के लिए इसके ऊपर छांव करनी चाहिए जो आप लो टन्नल विधि से कर सके हैं मौसम का बहुत ख्याल रखना पड़ता है थोड़ी सी लापरवाही से सारी फसल खराब हो सकती है पहले साल अपने खेत में स्ट्रॉबेरी की खेती करने का कुल खर्चा ढाई से तीन लाख रूप्ये प्रति एकड़ के हिसाब से आ जाता है क्योंकि किसान को पहले साल ड्रिप सिस्टम और फव्वारों आदि पर खर्च करना पड़ता है पर अगले वर्षों में किसानों का यह खर्चा बच जाता है इसके लिए एक एकड़ में 40 बैड बनते हैं और एक बैड पर 1000 स्ट्रॉबेरी के पौधे लगते हैं इस तरह एक एकड़ में चालीस हजार पौधे लगाए जाते हैं एक पौधा 3 से 4 रूप्ये तक मिल जाता है और इसकी उपज 50 से 60 क्विंटल तक निकल आता है 25-30क्विंटल गोबर की खाद एक एकड़ में डालें यह खाद एक साल में डालनी होती है फिर 20 : 40 : 40 NPK KG / हेक्टेयर डालनी है अच्छी फसल के लिए यूरिया दो फीसदी जिंक सल्फेट, आधा प्रतिशत कैलशियम सल्फेट और बोरिक एसिड 0.2 फीसदी अच्छी फसल के लिए ठीक है सिंचाई जल्दी जल्दी पर हल्की करनी चाहिए ज्यादा पानी ठीक नहीं है पत्ते गीले ना करें तुपका सिंचाई से पानी कम लग सकता है यदि तुपका सिंचाई नहीं कर रहे तो क्यारियों में पानी खाली में ही लगाएं नदीन हाथ से हटाएं या कीड़े मकौड़े और अन्य बीमारियों की तरफ ध्यान रखना जरूरी है यदि कोई पौधा ज्यादा खराब है उसे हटा दें जब फल का रंग 70 प्रतिशत लाल हो जाये तो तोड़ लेना चाहिए यदि मार्किट दूरी पर है तो थोड़ा सख्त ही तोड़ना चाहिए तुड़ाई अलग अलग दिनों में करनी चाहिए स्ट्रॅाबेरी की पैकिंग प्लास्टिक की प्लेटों में करनी चाहिए इसे हवादार जगह पर रखना चाहिए जहां तापमान पांच डिगरी हो एक दिन के बाद स्ट्रॉबेरी की पैकिंग का तापमान ज़ीरो डिग्री होना चाहिए मार्किट में स्ट्रॉबेरी औसतन 200 रूपये प्रति तक बिकती है इस तरह पांच लाख प्रति एकड़ से इसकी आमदन शुरू होकर आगे अपनी मेहनत से किसान आमदन में भरपूर वृद्धि कर सकता है स्ट्रॉबेरी के पौधे सितंबर से अक्तूबर तक लगाए जाते हैं और 3 महीने के बाद यह फल देना शुरू कर देते हैं इसकी फसल अप्रैल तक चलती है इसकी मार्केटिंग में किसी भी तरह की मुश्किल नहीं है, यह ऐलनाबाद, सिरसा, हनुमानगढ़, गंगानगर के इलावा बठिंडा, मोगा, जलंधर. लुधियाना में इसकी मार्केटिंग कर सकते है, यदि ज़्यादा मात्रा में स्ट्रॉबेरी है तो दिल्ली इसकी मुख्य मार्किट है

Posted by soory lal
Uttar Pradesh
29-01-2020 10:35 AM
सूर्य जी अभी आप सब्जियां जैसे राजमा, शिमला मिर्च, खीरा-ककड़ी, लोबिया, करेला, लौकी, तुरई, पेठा, खरबूजा, तरबूज, पालक, फूलगोभी, बैंगन, भिण्डी, अरबी, एस्पेरेगस, ग्वार की बिजाई कर सकते है धन्यवाद
Posted by Jaspal Singh Cheema
Punjab
29-01-2020 10:33 AM
ਤੁਸੀ ਇਸ ਮਹੀਨੇ ਜੋਂ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਨਹੀਂ ਕਰ ਸਕਦੇ ਵਧੀਆ ਝਾੜ ਲਈ ਬਿਜਾਈ 15 ਅਕਤੂਬਰ ਤੋਂ 15 ਨਵੰਬਰ ਤੱਕ ਕਰ ਦੇਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਜੇਕਰ ਬਿਜਾਈ ਦੇਰੀ ਨਾਲ ਕੀਤੀ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਪੈਦਾਵਾਰ ਘੱਟ ਸਕਦੀ ਹੈ ਤੁਸੀ ਇਸਦੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਜਿਵੇ PL 891,DWRB 123,PL 419,PL 807 ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਸਮੇ ਸਿਰ

Posted by varinder singh
Punjab
29-01-2020 10:26 AM
ਮੱਖੀਆਂ ਦੇ ਇਲਾਜ ਲਈ ਤੁਸੀ 1ml Butox ਨੂੰ 1 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਮਿਕਸ ਕਰਕੇ ਚਮੜੀ ਤੇ ਲਾਓ ਜੀ, ਇਸ ਨਾਲ ਮੱਖੀਆਂ ਤੋਂ ਆਰਾਮ ਮਿਲੇਗਾ ਜਿਥੇ ਛੋਟੇ ਛੋਟੇ ਜਖ਼ਮ ਹੈ ਉਥੇ ਤੁਸੀ ਸਰੋਂ ਦਾ ਤੇਲ ਲਗਾ ਕੇ ਦਵਾਈ ਵਰਤ ਸਕਦੇ ਹੋ
Posted by kaushal singh
Uttar Pradesh
29-01-2020 10:18 AM
kausahl ji aap iske uper NPK 130045@1 kilo ko 150 litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by sunil
Uttar Pradesh
29-01-2020 10:14 AM
सुनील जी यह फंगस है इसकी रोकथाम के लिए आप कार्बेन्डाजिम@ 4 ग्राम को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद

Posted by Suresh Mali
Rajasthan
29-01-2020 10:08 AM
suresh ji feb men aap gende ki kheti kar sakte hai.dhanywad
Posted by ਨਿਸ਼ਾਨ ਸਿੰਘ ਸੰਧੂ
Punjab
29-01-2020 10:08 AM
ਉਸ ਨੂੰ ਕਾਲੀਆ ਮਿਰਚਾਂ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਲਿਆ ਕੇ 20 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦੇਣੀਆਂ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ ਸਬਜ਼ੀ ਵਾਲਾ ਪੇਠਾ 1 ਕਿਲੋ ਰੋਜਾਨਾ ਖਿਲਾਓ, 5 ਦਿਨ ਦੇਣ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ, ਇਸਨੂੰ carpade injection 10ml ਲਗਵਾਓ, ਇਹ carries company ਦਾ ਪ੍ਰੋਡਕਟ ਹੈ ਜਾਂ ਤੁਸੀਂ cortalife injection ਲਗਵਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ,ਇਨ੍ਹਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਕੋਈ ਵੀ ਇੱਕ ਲਗਵਾਓ..

Posted by Mina devi
Haryana
29-01-2020 10:04 AM
पुदीना मैंथा के नाम से जानी जाने वाली एक क्रियाशील जड़ी बूटी है पुदीने को मिट्टी की कई किस्मों जैसे दरमियाने से गहरी उपजाऊ मिट्टी, जिसमें पानी को सोखने की क्षमता ज्यादा हो, में उगाया जाता है इसको जल-जमाव वाली मिट्टी में भी उगाया जा सकता है उच्च नमी वाली मिट्टी में यह अच्छे परिणाम देती है इस फसल के लिए मिट्टी .... (Read More)
पुदीना मैंथा के नाम से जानी जाने वाली एक क्रियाशील जड़ी बूटी है पुदीने को मिट्टी की कई किस्मों जैसे दरमियाने से गहरी उपजाऊ मिट्टी, जिसमें पानी को सोखने की क्षमता ज्यादा हो, में उगाया जाता है इसको जल-जमाव वाली मिट्टी में भी उगाया जा सकता है उच्च नमी वाली मिट्टी में यह अच्छे परिणाम देती है इस फसल के लिए मिट्टी का pH 6-7.5 होना चाहिए प्रसिद्ध किस्में:- MAS-1: यह छोटे कद की किस्म है जिसकी ऊंचाई 30-45 सैं.मी. होती है यह बीमारीयों की रोधक और जल्दी पकने वाली किस्म है इसमें मैन्थोल की मात्रा 70-80% होती है इसकी औसतन पैदावार 80 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 50-60 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है Hybrid-77: इसकी ऊंचाई 50-60 सैं.मी. होती है यह किस्म पत्तों के धब्बा रोग और कुंगी के रोधक होती है, और यह जल्दी पकने वाली किस्म है इसमें मैन्थोल की मात्रा 80-85% होती है इसकी औसतन पैदावार 80 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 50-60 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है यह रेतली दोमट मिट्टी में बढ़िया पैदावार देती है औरऐसी शुष्क मौसम में की आवश्यकता होती है Shivalik: यह चीन की खेती से चुनी गई किस्म है यह किस्म उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्रों और उत्तरांचल में अच्छी वृद्धि करती है इसमें मैन्थोल की मात्रा 65-70% होती है इसकी औसतन पैदावार 120 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 72 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है यह किस्म फंगस रोगों से जल्दी प्रभावित होती है EC-41911: यह किस्म रूसी जर्मप्लाज्म से ली गई है यह किस्म पानी की रोधक और आकार में सीधी होती है इसमें मैन्थोल की मात्रा 70%पायी जाती है इसकी औसतन पैदावार 120 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 72 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है इस किस्म से तैयार तेल का प्रयोग विभिन्न व्यंजनों में स्वाद के लिए किया जाता है Gomti: यह किस्म रंग में हल्के लाल रंग की होती है इसकी पैदावार बाकी किस्मों की पैदावार से कम होती है इसमें मैन्थोल की मात्रा 78-80% होती है Himalaya: इसके पत्तों का आकार बाकी किस्मों से बड़ा होता है यह किस्म कुंगी, झुलस, सफेद धब्बे और पत्तों पर धब्बे रोग की रोधक है इसमें मैन्थोल की मात्रा 78-80% होती है इसकी औसतन पैदावार 160 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 80-100 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है Kosi: यह किस्म 90 दिनों में पक जाती है यह किस्म कुंगी, झुलस, सफेद धब्बे और पत्तों के धब्बे रोग की प्रतिरोधक है इसमें मैन्थोल की मात्रा 75-80 प्रतिशत होती है और तेल की पैदावार 80-100 किलोग्राम प्रति एकड़ होती है Saksham: यह किस्म सी वी हिमालय की तरफ से टिशू कल्चर द्वारा तैयार की गई है इसमें मैन्थोल की मात्रा 80% होती है और तेल की पैदावार 90-100 किलोग्राम प्राप्त होती है पुदीने की बिजाई के लिए सुविधाजनक आकार के बैड तैयार करें खेत की तैयारी के समय खेत की अच्छी तरह जोताई करें जैविक खाद जैसे रूड़ी की खाद 100-120 क्विंटल प्रति एकड़ रूड़ी की खाद डालें रूड़ी की खाद के बाद हरी खाद डालें इसकी बिजाई के लिए दिसंबर-जनवरी का समय अनुकूल होता है पौधे के भागों की बिजाई 40 सैं.मी. के फासले पर और पंक्तियों के बीच का फासला 60 सैं.मी होना चाहिए बीज को 2-3 सैं.मी. की गहराई में बोयें पौधे के जड़ वाले भाग को मुख्य खेत में बोया जाता है खेत की तैयारी के समय रूड़ी की खाद 80-120 क्विंटल प्रति एकड़ में डालें और अच्छी तरह मिलायें नाइट्रोजन 58 किलो (यूरिया 130 किलो), फासफोरस 32-40 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 80-100 किलो), पोटाशियम 20 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 33 किलो) प्रति एकड़ में डालें गर्मियों में मॉनसून से पहले जलवायु और मिट्टी के आधार पर 6-9 सिंचाइयां जरूर की जानी चाहिए मॉनसून के बाद 3 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है पहली सिंचाई सितंबर महीने में, दूसरी अक्तूबर में और तीसरी नवंबर महीने में की जानी चाहिए सर्दियों में ज्यादा सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन यदि सर्दियों में बारिश ना पड़े तो एक सिंचाई जरूर देनी चाहिए पौधे 100-120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं जब निचले पत्ते पीले रंग के होने शुरू हो जायें, तब कटाई करें कटाई दराती से और बूटियों को मिट्टी की सतह के 2-3 सैं.मी. ऊपर से निकालें अगली कटाई पहली कटाई के बाद 80 दिनों के अंतराल पर करें ताजी पत्तियों को उत्पाद बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है, इसकी marketing के लिए आप Pawan Choudhary 9719976268 से संपर्क कर सकते है धन्यवाद
Posted by ganesh soni
Rajasthan
29-01-2020 09:56 AM
ganesh ji kripya aap btaye ke aapne isme kya kya khaad daali hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by ਗੁਰਲਾਲ ਸਿੰਘ
Punjab
29-01-2020 09:54 AM
ਗੁਰਲਾਲ ਜੀ ਇਸਦੇ ਵਿਚ ਕੁਝ ਹੋਰ ਨਾ ਮਿਲਾਓ ਤੁਸੀ ਇਕੱਲੇ magnese ਦੀ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Rahul Dedha
Uttar Pradesh
29-01-2020 09:47 AM
आप Mifex 450ml बोलत में Avil injection 10ml, Tonophos injection 20ml मिलाकर (IV slow)लगायें इसके साथ Trineurosol-h 5—5 मि.ली. इंजेक्शन पीछे की तरफ दोंनो पुड़ों पर लगाएं बाकि उसे Macbolit 400mg इंजेक्शन लगायें इनके साथ फर्क पड़ेगा बाकि आप उसे सहारा देकर कुछ समय खड़ी करना शुरू करें
Posted by sunil
Haryana
29-01-2020 09:45 AM
अजवाइन एक रबी की मसाला फसल हैं इसकी खेती के लिए अच्छे जल निकास वाली दोमट मिटटी सर्वोत्तम होती हैं सामान्यतः बलुई दोमट मिटटी जिसका पि.एच. मान 6.5 से 8.2 तक है, में अजवाइन सफलतापूर्वक उगाई जा सकती हैं जहां भूमि में नमी कम हो वहां सिंचाई की व्यवस्था आवश्यक हैं खेत तैयार करने के लिए मिटटी पलटने वाले हल से जुताई करें .... (Read More)
अजवाइन एक रबी की मसाला फसल हैं इसकी खेती के लिए अच्छे जल निकास वाली दोमट मिटटी सर्वोत्तम होती हैं सामान्यतः बलुई दोमट मिटटी जिसका पि.एच. मान 6.5 से 8.2 तक है, में अजवाइन सफलतापूर्वक उगाई जा सकती हैं जहां भूमि में नमी कम हो वहां सिंचाई की व्यवस्था आवश्यक हैं खेत तैयार करने के लिए मिटटी पलटने वाले हल से जुताई करें तथा इसके बाद 2 जुताई देशी हल से कर खेत को भली-भांति तैयार करें अजवाइन का बीज बारीक़ होता हैं अतः खेत की मिट्टी को अच्छी तरह भरभूरा होने तक जुताई करें अजवाइन की भरपूर पैदावार लेने के लिए 15-20 दिन पूर्व 20-25 टन सड़ी हुई गोबर की खाद या कम्पोस्ट प्रति हेक्टेयर की दर से अच्छी तरह मिलाए उर्वरक के रूप में इस फसल को 20 किग्रा. नत्रजन, 30 किग्रा फास्फोरस एवं 20 किग्रा. पोटाश प्रति हेक्टेयर की दर से देवें फास्फोरस एवं पोटाश की पूरी मात्रा एवं नत्रजन की आधी मात्रा बुवाई से पूर्व खेत में डाल देवें नत्रजन की शेष आधी मात्रा बुवाई के लगभग 25-30 दिन बाद खड़ी फसल में देवें अजवाइन की बुवाई का उचित समय सितम्बर से नवम्बर होता है इसे छिड़काव या क़तर विधि से बोया जाता है एक हेक्टेयर के लिए 4-5 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है छिड़काव विधि के लिए बीजों को इसकी बीज दर से आठ से दस गुना बारीक छनि हुई मिट्टी के साथ मिलाकर बुवाई करे इससे बीज दर सही रखने में मदद मिलती है कतारों में बुवाई करना ज्यादा उपयुक्त है इस विधि में कतार से कतार की दुरी 30-40 से.मी. तथा पौधे से पौधे की दुरी 15-25 से.मी. रखें इसमें बीजों का अंकुरण 10-15 दिनों में पूर्ण होता है अजवाइन की फसल काफी हद तक सूखा सहन कर सकती है इसका सिंचित और असिंचित दोनों ही परीस्थितियों में उत्पादन किया जा सकता है सामान्यतया अजवाइन के लिए 2-5 सिंचाई की आवश्यकता होती है जब पौधे 15-20 से.मी. तक बड़े हो जाये तब पौधों की छंटाई करके पौधे से पौधे की दुरी में पर्याप्त अंतर रखें फसल में जल निकासी की भी उचित व्यवस्था करे ताकि पौधों को उचित बढ़वार के लिए पर्याप्त स्थान एवं वातावरण मिल सके कटाई की उपयुक्त अवस्था में फसल पीली पड़ जाती है तथा दाने सुखकर भूरे रंग के हो जाते है अजवाइन की फसल लगभग 140-150 दिन में पककर तैयार हो जाती है कटाई पश्चात फसल को खलिहान में सुखावें तथा बाद में गहाई और औसाई की जाय साफ बीजों को 5-6 दिन सूखा कर बोरों में भर कर भंडारण करे

Posted by ठाकुरदास राठौर
Uttar Pradesh
29-01-2020 09:36 AM
कृपया करके अपने सवाल पूछने के बाद 24 घंटो तक इंतज़ार करें जी यदि 24 घंटो में आपके सवाल का जवाब नहीं मिलता तो आप हमारे helpline number 97799-77641 पर सम्पर्क करें.

Posted by singh dhaliwal
Punjab
29-01-2020 09:05 AM
ਇਸ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਫਰਵਰੀ-ਮਾਰਚ, ਜੂਨ-ਜੁਲਾਈ ਅਤੇ ਨਵੰਬਰ-ਦਸੰਬਰ ਮਹੀਨੇ ਦਾ ਸਮਾਂ ਉਚਿੱਤ ਹੈ

Posted by rajendra kuma verma farrukhabad
Uttar Pradesh
29-01-2020 09:04 AM
rajendra kumar ji genhu men kripya btaye ke aapne kon kon si khaad ka istemal kiya hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad

Posted by rajendra kuma verma farrukhabad
Uttar Pradesh
29-01-2020 08:51 AM
verma ji kripya aap genhu ki photo bheje aur kripya btaye ke aapne isme khaad kya kya daali hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad

Posted by rajendra kuma verma farrukhabad
Uttar Pradesh
29-01-2020 08:47 AM
verma ji kripya aap btaye ke aapne genhu men kya kya khaad daali hai aur kripya ho sake to iski photo bhi bheje taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake,dhanywad
Posted by Balvir Singh
Punjab
29-01-2020 08:43 AM
Tori, Krela, Gheeya, Kharbuje and Kaddu di paneeri chahidi hoye ta call karyo 6284725817 (Mohali)

Posted by Anit kumar
Uttar Pradesh
29-01-2020 08:30 AM
सबसे पहले आपके लिए यह जानना जरूरी है कि मुर्गी पालन दो तरह का होता है कि आप अंडों का व्यवसाय करना चाहते हैं या मीट का यदि आप अंडों का धंधा करना चाहते हैं तो आपको लेयर मुर्गियां पालनी पड़ेंगी और यदि आप मीट का धंधा करना चाहते हैं तो आपको ब्रॉयलर मुर्गियां पालनी पड़ेंगी यदि आप ब्रायलर मुर्गी पालन करना चाहते हैं त.... (Read More)
सबसे पहले आपके लिए यह जानना जरूरी है कि मुर्गी पालन दो तरह का होता है कि आप अंडों का व्यवसाय करना चाहते हैं या मीट का यदि आप अंडों का धंधा करना चाहते हैं तो आपको लेयर मुर्गियां पालनी पड़ेंगी और यदि आप मीट का धंधा करना चाहते हैं तो आपको ब्रॉयलर मुर्गियां पालनी पड़ेंगी यदि आप ब्रायलर मुर्गी पालन करना चाहते हैं तो कम से कम 10 हजार मुर्गियों का धंधा शुरू करना चाहते हैं तो आपको 4 से 5 लाख का इतज़ाम करना पड़ेगा, ये आप अपने बजट के हिसाब से कम पंक्षियों से भी शुरू कर सकते हैं बाकि आप इस काम को ट्रेनिंग लेकर शुरू करें जिसमें आपको इस काम के बारे में पूरी जानकारी दी जाएगी ट्रेनिंग लेने के लिए आप अपने नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें आप वहां जाकर अपना ट्रेनिंग का फार्म भर आएं जब भी ट्रेनिंग होगी तो वो आपको फोन करके उसके बारे में बता देंगे..

Posted by Balwinder Singh
Punjab
29-01-2020 08:26 AM
Balwinder Singh ji is sbandi puri jankari lai tusi apne jile de Dairy Dev. Officer,IFTC,Tapa Khera Road,Vill.Abul Khurana, Shri Mukatsar Sahib. Sh. Randeep Kumar 78272-60001 nal samparak kar sakde ho, Thankyou.

Posted by baldev
Punjab
29-01-2020 08:25 AM
Baldev ji kanak de vich jekar NPK 282828 di varto karna chahunde ho ta urea ate DAP di varto karn di lod nahi hai 282828 vich already urea ate DAP de tat maujood hunda hai.dhanwad

Posted by Anit kumar
Uttar Pradesh
29-01-2020 08:21 AM
Anit ji yaddi aap murgi palan ki training lena chahte hai to aap apne nazdiki kvk se sampark kr skte hai, waha sme sme kisano ko alag alag kam krne ki training di jatti hai aap waha jakar apna training ka farm bhar aaye fir jabb v yeh training hogi to apko phone krke btaa dia jayega, training lene ke liye aap Krishi Vigyan Kendra, Sitapur Katia, Manpur, Biswan, District - Sitapur (Uttar Pradesh), INDIA, PIN - 261 145, Tel. No.: 05863 - 211035 se sampark kr skte hai.

Posted by Anit kumar
Uttar Pradesh
29-01-2020 08:19 AM
सबसे पहले आपके लिए यह जानना जरूरी है कि मुर्गी पालन दो तरह का होता है कि आप अंडों का व्यवसाय करना चाहते हैं या मीट का यदि आप अंडों का धंधा करना चाहते हैं तो आपको लेयर मुर्गियां पालनी पड़ेंगी और यदि आप मीट का धंधा करना चाहते हैं तो आपको ब्रॉयलर मुर्गियां पालनी पड़ेंगी यदि आप ब्रायलर मुर्गी पालन करना चाहते हैं त.... (Read More)
सबसे पहले आपके लिए यह जानना जरूरी है कि मुर्गी पालन दो तरह का होता है कि आप अंडों का व्यवसाय करना चाहते हैं या मीट का यदि आप अंडों का धंधा करना चाहते हैं तो आपको लेयर मुर्गियां पालनी पड़ेंगी और यदि आप मीट का धंधा करना चाहते हैं तो आपको ब्रॉयलर मुर्गियां पालनी पड़ेंगी यदि आप ब्रायलर मुर्गी पालन करना चाहते हैं तो कम से कम 10 हजार मुर्गियों का धंधा शुरू करना चाहते हैं तो आपको 4 से 5 लाख का इतज़ाम करना पड़ेगा, ये आप अपने बजट के हिसाब से कम पंक्षियों से भी शुरू कर सकते हैं बाकि आप इस काम को ट्रेनिंग लेकर शुरू करें जिसमें आपको इस काम के बारे में पूरी जानकारी दी जाएगी ट्रेनिंग लेने के लिए आप अपने नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें आप वहां जाकर अपना ट्रेनिंग का फार्म भर आएं जब भी ट्रेनिंग होगी तो वो आपको फोन करके उसके बारे में बता देंगे

Posted by हरिनाथ बिन्द वीरपुर मिर्ज़ापुर उत्तर प्रदेश (भारत)
Uttar Pradesh
29-01-2020 08:06 AM
बिजाई के 3-4 सप्ताह बाद सिंचाई करें बाकी की सिंचाई बारिश की तीव्रता के आधार पर करें फूल निकलने के समय और फलियां बनने की अवस्थाएं सिंचाई के लिए गंभीर अवस्थाएं होती हैं, इसलिए अच्छी उपज के लिए इन अवस्थाओं में सिंचाई जरूरी है अत्याधिक सिंचाई ना करें इससे वानस्पतिक वृद्धि ज्यादा होती है और फाइटोपथोरा और ऑल्टर.... (Read More)
बिजाई के 3-4 सप्ताह बाद सिंचाई करें बाकी की सिंचाई बारिश की तीव्रता के आधार पर करें फूल निकलने के समय और फलियां बनने की अवस्थाएं सिंचाई के लिए गंभीर अवस्थाएं होती हैं, इसलिए अच्छी उपज के लिए इन अवस्थाओं में सिंचाई जरूरी है अत्याधिक सिंचाई ना करें इससे वानस्पतिक वृद्धि ज्यादा होती है और फाइटोपथोरा और ऑल्टरनेरिया झुलस रोग का खतरा बढ़ता है

Posted by Jass
Punjab
29-01-2020 08:02 AM
tuci uss nu pett de kiria lai Bandykind plus bolus deo ate Ovumin gold powder 50-50gm swere sham dena suru kro ate Cafplan powder 50-50gm swere sham deo, ehna nal heat vich v awegi ate vdia growth v ho jawegi.

Posted by subodh kumar
Bihar
29-01-2020 08:00 AM
kumar ji kripya aap swal vistar se pooche ke aap konsi kheti ke bare men jankari lena chahte hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad

Posted by Bishal Goyal
Odisha
29-01-2020 07:56 AM
गोपाल जी आप अपनी गाय की एड हमारी दूसरी एप अपनी खेती खरीदो और बेचो पर अपलोड कर सकते है वहां आपको गाय खरीदने वाले कई किसान मिल जाएगे

Posted by Pawan patel
Uttar Pradesh
29-01-2020 07:40 AM
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकत हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है एक बकरी के लिए लगभग 12—15 वर्ग फीट जगह छती हुई और 25—30 वर्ग फीट जगह खुली चाहिए, .... (Read More)
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकत हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है एक बकरी के लिए लगभग 12—15 वर्ग फीट जगह छती हुई और 25—30 वर्ग फीट जगह खुली चाहिए, इस तरह आप अपनी जगह के हिसाब से बकरियों को रख सकते है और उनके लिए फार्म तैयार कर सकते है
Posted by sunil
Haryana
29-01-2020 07:34 AM
sunil ji aap inhe ikathe mila kar spray nahi kar sakte.dhanywad
Posted by kaushal singh
Uttar Pradesh
29-01-2020 07:33 AM
सबसे पहले यदि हम मछली पालन की बात करें तो इसके लिए ट्रेनिंग बहुत जरूरी है यह ट्रेनिंग FFDA(fish farmer development aggency) हर जिले में बनी है जहां हमारा खेतीबाड़ी विभाग है वहां इसके अफसर बैठते हैं वहां जाकर एप्लीकेशन भरवायें वहां आपको 5 दिन की ट्रेनिंग दी जायेगी ट्रेनिंग के लिए दसवीं पास होना ज़रूरी है इस ट्रेनिंग में आपको लोन और स.... (Read More)
सबसे पहले यदि हम मछली पालन की बात करें तो इसके लिए ट्रेनिंग बहुत जरूरी है यह ट्रेनिंग FFDA(fish farmer development aggency) हर जिले में बनी है जहां हमारा खेतीबाड़ी विभाग है वहां इसके अफसर बैठते हैं वहां जाकर एप्लीकेशन भरवायें वहां आपको 5 दिन की ट्रेनिंग दी जायेगी ट्रेनिंग के लिए दसवीं पास होना ज़रूरी है इस ट्रेनिंग में आपको लोन और सब्सिड़ी के बारे में सारी जानकारी प्राप्त हो जाएगी इसकी पुंग छोड़ने के लिए अप्रैल से अक्तूबर का समय बढ़िया होता है, बाकि यदि अपने शुरू करना है तो यूनिवर्सिटी की तरफ से एक एकड़ में शुरू कर सकते हैं. एक एकड़ में 5000 पूंग डाल सकते हैं यह 2 से 3 इंच का होता है यदि 5000 डालना है तो 3000 रोहू, 1000 कतला, 500 कॉमन कॉर्प और 500 मरीगल नस्ल डाली जाए यह पूंग आप मछली पालन विभाग से खरीद सकते हैं यह एक इंच का बच्चा 10 पैसा प्रति बच्चा मिलेगा यदि बढ़िया खुराक डाली जाए तो 8 महीनों में यह लगभग 800—900 ग्राम का हो जाता है बाकी मछली पालन के लिए नहरी पानी बढ़िया होता है और आप गांव का छप्पड़ ठेके से लेकर भी यह काम शुरू कर सकते हैं तालाब में मछली के बीज डालने से पहले इस बात की जांच कर लेनी चाहिए कि उस तालाब में काफी मात्रा में मछली की कुदरती खुराक उपलब्ध है.

Posted by rk
Chattisgarh
29-01-2020 07:27 AM
yeh fungus ki wjah se ho jata hai iske liye aap mancozeb@4 gram ko prati litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by AMAN SINGH
Uttar Pradesh
29-01-2020 07:26 AM
अमन जी गेंहू का रेट 1925 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से है धन्यवाद

Posted by Manoj Kumar
Uttar Pradesh
29-01-2020 07:19 AM
Manoj ji inke istemal men lagbhag 10 din ka fasla hona chaihye.dhanywad
Posted by Vikash Kumar
Bihar
29-01-2020 06:49 AM
विकास जी यह ठण्ड के कारण हो जाता है इसके इलावा आप इसके ऊपर NPK 130045 @10 ग्राम को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
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