Posted by Rahul Dedha
Uttar Pradesh
29-01-2020 05:03 PM
राहुल जी आप इन दोनों इंजेक्शनों की फोटो देेख सकते है और स्टोर से ले सकते है

Posted by ਅਵਤਾਰ ਸਿੰਘ
Punjab
29-01-2020 05:00 PM
ਅਵਤਾਰ ਜੀ ਇਸ ਮਹੀਨੇ ਵਿਚ ਤੁਸੀ ਸਬਜ਼ੀਆਂ ਜਿਵੇ ਰਾਜਮਾਹ , ਸ਼ਿਮਲਾ ਮਿਰਚ , ਖੀਰਾ , ਕਰੇਲਾ , ਕੱਦੂ , ਤੋਰੀ, ਪੇਠਾ , ਖਰਬੂਜਾ , ਤਰਬੂਜ , ਪਾਲਕ , ਫੁੱਲ ਗੋਭੀ , ਬੈਂਗਨ , ਭਿੰਡੀ , ਅਰਬੀ , ਗਵਾਰਾ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by योगेन्द्र नायक
Uttar Pradesh
29-01-2020 04:53 PM
योगिन्दर जी आप खेती में सल्फर का 5 किलो प्रति एकड़ के हिसाब से छींटा दे, यह fungicide का काम भी करती हैं और जमीन में पानी सोखने की क्षमता को भी बढ़ाती है जिससे आपका धान खराब नहीं होगा।
Posted by योगेन्द्र नायक
Uttar Pradesh
29-01-2020 04:51 PM
श्री मान गेहूं में सल्फर@5किलो प्रती एकड़ छींटा दे सकते हो

Posted by ajay kumar azad
Bihar
29-01-2020 04:34 PM
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी ख.... (Read More)
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुमब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तहय उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तहय में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तहय लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है आप इसकी ट्रेनिंग नजदीकी कृषि विज्ञानं केंद्र से ले सकते है जिसका पता है Krishi Vigyan Kendra, Jehanabad
Village - Gandhar, Block - Modanganj,
Dist. : Jehanabad - 804432 (Bihar) India
Posted by ROYAL FARMING GROUP
Uttar Pradesh
29-01-2020 04:29 PM
Biofloc मछली पालन की नई तकनीक है, जिसका invention Dr.YORRAM AVNIMELECH जो कि ISRAEL के है जहाँ पानी की कमी हैै उस परस्तिथि में मछली पालन कैसे किया जाये, उस तकनीक का invention किया पर फ़िलहाल भारत के कई राज्यों में किसान इस तकनीक का इस्तेमाल करके मछली पालन कर रहे हैं इसमें हम थोड़ी जगह में जहाँ सिर्फ 4 मीटर का टैंक लगता है और 1 मीटर इसकी लम्बाई होत.... (Read More)
Biofloc मछली पालन की नई तकनीक है, जिसका invention Dr.YORRAM AVNIMELECH जो कि ISRAEL के है जहाँ पानी की कमी हैै उस परस्तिथि में मछली पालन कैसे किया जाये, उस तकनीक का invention किया पर फ़िलहाल भारत के कई राज्यों में किसान इस तकनीक का इस्तेमाल करके मछली पालन कर रहे हैं इसमें हम थोड़ी जगह में जहाँ सिर्फ 4 मीटर का टैंक लगता है और 1 मीटर इसकी लम्बाई होती है मतलब की 10,000 लीटर इसमें हम अपना मछली पालन शुरू करके 1100-1300 किलो fish बना सकते हैं इसमें ज़्यादा पानी की ज़रूरत नहीं पड़ती और ना ही ज़्यादा जगह की ज़रूरत होती है, इसमें 650 -700 रूपये बिकने वाली मछलियां हैं वह हम इसमें डालते हैं और यह मछलियां 6 से 7 महीने तक बिकने योग्य हो जाती है, shrimp farming मतलब की झींगा इसका culture period -90 दिन का होता है BFT टैंक में आपको C:N ratio की सहायता से आपको बढ़िया बैक्टीरिया maintain करना होता है, और drainage की सहायता से sludge removal किया जाता है अगर आपका मैनेजमेंट एकदम सटीक रहा तो 0 % प्रतिशत पानी अदला-बदली किये बिना culture पूरा किया जा सकता है आपको उचित blower की सहायता से DO (dissolved oxygen ) maintain करने की ज़रूरत पड़ती है C:N ratio मतलब की कार्बन: नाइट्रोजन ratio अनुपात बनाएं रखना पड़ता है कार्बन जिससे की बैक्टीरिया (हेट्रोट्रॉपिक बैक्टीरिया) ठीक से काम करके नाइट्रोजन को कम कर सके क्योंकि नाइट्रोजन का एक हिस्सा जो कि non ionised Ammonia [NH3] जो मछली के लिए जानलेवा होता हैैै अधिक जानकारी के लिए 9096843382 पर फ़ोन कीजिये.

Posted by कमलेश
Madhya Pradesh
29-01-2020 04:24 PM
श्री मान विभिन्न प्रकार की मिट्टी में विकसित हो सकता है जिसमें सैंडी दोमट से लेकर मिट्टी, काली मिट्टी और लाल मिट्टी होती है जिसमें उचित जल निकासी होती है उच्च कार्बनिक सामग्री के साथ अच्छी तरह से सूखा रेतीली मिट्टी के नीचे उगाए जाने पर यह सबसे अच्छा परिणाम देता है अच्छी वृद्धि के लिए मिट्टी का पीएच 7-8.5 होना .... (Read More)
श्री मान विभिन्न प्रकार की मिट्टी में विकसित हो सकता है जिसमें सैंडी दोमट से लेकर मिट्टी, काली मिट्टी और लाल मिट्टी होती है जिसमें उचित जल निकासी होती है उच्च कार्बनिक सामग्री के साथ अच्छी तरह से सूखा रेतीली मिट्टी के नीचे उगाए जाने पर यह सबसे अच्छा परिणाम देता है अच्छी वृद्धि के लिए मिट्टी का पीएच 7-8.5 होना चाहिए यह मध्यम अम्लीय और लवणीय मिट्टी को सहन कर सकता है उच्च अम्लीय मिट्टी में खेती से बचें शुरुआती फसलों के लिए हल्की मिट्टी फायदेमंद होती है जहां भारी पैदावार के लिए मिट्टी दोमट और गाद दोमट मिट्टी उपयोगी होती है इसकी किस्मे जैसे के Pusa 120, Pusa Rubi, Pusa Sheetal, Pusa Hybrid 4, Arka Anyanya, Arka Vikas, Arka Abha, Kashi Hemant, Hisar Lalit, Arka Saurabh, HS 101, HS 102, Hisar Arun (Selection 7)की बिजाई कर सकते है टमाटर के बीजों को पहले नर्सरी में बोया जाता है फिर मुख्य क्षेत्र में रोपाई की जाती है मुख्य क्षेत्र की तैयारी के लिए, इसे अच्छी तरह से चूर्णित और समतल मिट्टी की आवश्यकता होती है 4-5 बार के लिए भूमि की जुताई ki जाती है अंतिम जुताई के समय मिट्टी में अच्छी तरह से विघटित गोबर @ 60 किग्रा / एकड़ मिलाएँ रोपाई के उद्देश्य के लिए 80-90 cm चौड़ाई का तैयार bed खरीफ की फसल के लिए जून से सितंबर महीने में नर्सरी में बीज बोते हैं ग्रीष्म ऋतु के लिए, नवंबर-दिसंबर में नर्सरी तैयार की जाती है जबकि सर्दियों के मौसम के लिए, सितंबर महीने में नर्सरी में बीज बोते हैं खरीफ की फसल, 60cmx60cm की spacing का उपयोग करें जबकि गर्मी और सर्दियों के मौसम के लिए, 60cmx45cm के spacing का उपयोग करें नर्सरी में 0.5 cm की गहराई पर बीज बोएं और फिर मिट्टी से ढक दें मुख्य खेत में रोपाई की रोपाई पंक्तियों में 5-7 cm की दूरी पर 1 मीटर की चौड़ाई और 5 मीटर की लंबाई वाले टमाटर पर बीज बोना एक एकड़ भूमि के लिए अंकुर प्राप्त करने के लिए, लगभग 25 उठाए हुए की आवश्यकता होती है बीजों की बुवाई से पहले कार्बोफ्यूरान 3 जी @ 10 ग्राम / वर्ग मीटर को नर्सरी मिट्टी में मिलाएं अंकुर को कीट और बीमारी के हमले से बचाने के लिए, मैनकोजेब @ 2 ग्राम / लीटर पानी का छिड़काव करें रोपाई के उद्देश्य के लिए चार से पांच सप्ताह का अंकुर यानी 10-15 cm ऊंचाई उपयुक्त है एक एकड़ भूमि में बुवाई के लिए अंकुर तैयार करने के लिए 140-160 ग्राम बीज दर का प्रयोग करें संकर किस्मों के लिए, बीज दर 80-100 ग्राम / एकड़ का प्रयोग करें सामान्य तौर पर, नाइट्रोजन @ 40 किग्रा -60 किग्रा, फास्फोरस @ 20 किग्रा और पोटाश @ 24-32 किग्रा यूरिया @ 90-130 किग्रा, एसएसपी @ 125 किग्रा और एमओपी @ 40-55 किग्रा / एकड़ के रूप में लागू करें रोपाई के प्रत्यारोपण से तीन से चार सप्ताह पहले, फास्फोरस और पोटाश की पूरी खुराक और नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा लागू करें रोपाई के 30 और 50 दिनों के बाद दो बराबर छींटों में नाइट्रोजन की शेष मात्रा लागू करें रोपाई के बाद दो-तीन दिनों तक हल्की सिंचाई करें सर्दियों में, 12 से 15 दिनों के अंतराल पर और गर्मियों के महीने में सिंचाई करें, मिट्टी की नमी के आधार पर 6-7 दिनों के अंतराल के साथ आवेदन करें फूलों की अवस्था सिंचाई के लिए महत्वपूर्ण है, इस चरण के दौरान पानी के तनाव से फूल गिर सकता है और फलने और उत्पादकता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है विभिन्न शोधों के अनुसार, यह पाया गया है कि, हर पखवाड़े में आधा इंच सिंचाई जड़ों की अधिकतम पैठ का कारण बनती है और इस प्रकार उच्च उपज देती है इसके अलावा, अतिरिक्त सिंचाई से बचें धन्यवाद
Posted by Balwant Singh
Haryana
29-01-2020 04:24 PM
बलवंत जी कृपया आप गेहूं की फोटो भेजें और यह भी बताएं आपने इसमें कौन कौन सी खाद का प्रयोग किया है ताकि आपको जानकारी दी सके।
Posted by Balwant Singh
Haryana
29-01-2020 04:23 PM
बलवंत जी कृपया आप गेहूं की फोटो भेजें और यह भी बताएं आपने इसमें कौन कौन सी खाद का प्रयोग किया है ताकि आपको जानकारी दी सके।
Posted by bikaram
Rajasthan
29-01-2020 04:20 PM
Shri maan g kripa aap apna swal visthar se puchein toh aapko poori jankari di ja ske......

Posted by davinder sandhu
Punjab
29-01-2020 04:13 PM
ਦਵਿੰਦਰ ਜੀ ਡੇਅਰੀ ਫਾਰਮਿੰਗ ਲਈ ਲੋਨ ਲੈਣ ਲਈ ਤੁਹਾਡੇ ਕੋਲ ਡੇਅਰੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈਣ ਲਈ ਘਟੋ ਘੱਟ 5 ਪਸ਼ੂ ਹੋਣੇ ਚਾਹੀਦੇ ਹੈ, ਫਿਰ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਸਰਟੀਫਿਕੇਟ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਤੁਸੀ ਲੋਨ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਹ ਤੁਹਾਡੇ ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦਾ ਹੈ ਤੁਸੀ ਕਿੰਨੇ ਪਸ਼ੂਆਂ ਲਈ ਲੋਨ ਲੈਣਾ ਹੈ ਪਰ ਪਹਿਲਾ ਟ੍ਰੇਨਿਗ ਸਰਟੀਫਿਕੇਟ ਹੋਣਾ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਫਿਰ ਉਸ ਤੇ ਤੁਹਾਨੂੰ ਸਬਸਿਡ.... (Read More)
ਦਵਿੰਦਰ ਜੀ ਡੇਅਰੀ ਫਾਰਮਿੰਗ ਲਈ ਲੋਨ ਲੈਣ ਲਈ ਤੁਹਾਡੇ ਕੋਲ ਡੇਅਰੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈਣ ਲਈ ਘਟੋ ਘੱਟ 5 ਪਸ਼ੂ ਹੋਣੇ ਚਾਹੀਦੇ ਹੈ, ਫਿਰ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਸਰਟੀਫਿਕੇਟ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਤੁਸੀ ਲੋਨ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਹ ਤੁਹਾਡੇ ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦਾ ਹੈ ਤੁਸੀ ਕਿੰਨੇ ਪਸ਼ੂਆਂ ਲਈ ਲੋਨ ਲੈਣਾ ਹੈ ਪਰ ਪਹਿਲਾ ਟ੍ਰੇਨਿਗ ਸਰਟੀਫਿਕੇਟ ਹੋਣਾ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਫਿਰ ਉਸ ਤੇ ਤੁਹਾਨੂੰ ਸਬਸਿਡੀ ਵੀ ਮਿਲ ਜਾਂਦੀ ਹੈ

Posted by maninder
Punjab
29-01-2020 04:12 PM
ਮਨਿੰਦਰ ਜੀ ਇਸਦੀ ਵਰਤੋਂ ਪਸ਼ੂਆਂ ਵਿਚ ਮੋਕ ਦੀ ਸਮੱਸਿਆ ਰੋਕਣ ਲਈ, ਕੀੜੇ ਖਤਮ ਕਰਨ ਲਈ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ
Posted by dheeraj Kumar
Uttar Pradesh
29-01-2020 04:12 PM
तिल की खेती के लिए अच्छे निकास वाली हल्की से दरमियानी मिट्टी जिसमें पानी को बांधने की अच्छी क्षमता हो, उपयुक्त होती है मिट्टी की पी एच 5 से 8 होनी चाहिए क्षारीय और तेजाबी मिट्टी में तिल की खेती ना करें प्रसिद्ध किस्में :- SVPR-1, TMV 4, TMV 5, TMV 3, CO-1, TMV 6, VRI (SV)-1, VRI (SV)-2 खेत की देसी हल की सहायता से एक बार जोताई करें उसके बाद 1-2 तिरछी जोत.... (Read More)
तिल की खेती के लिए अच्छे निकास वाली हल्की से दरमियानी मिट्टी जिसमें पानी को बांधने की अच्छी क्षमता हो, उपयुक्त होती है मिट्टी की पी एच 5 से 8 होनी चाहिए क्षारीय और तेजाबी मिट्टी में तिल की खेती ना करें प्रसिद्ध किस्में :- SVPR-1, TMV 4, TMV 5, TMV 3, CO-1, TMV 6, VRI (SV)-1, VRI (SV)-2 खेत की देसी हल की सहायता से एक बार जोताई करें उसके बाद 1-2 तिरछी जोताई करें मिट्टी को समतल करें ताकि खेत में पानी खड़ा ना हो सके तिल की खेती के लिए आखिरी जून से शुरूआती जुलाई का समय उपयुक्त होता है दो कतारों में 35 सैं.मी. और दो पौधों में 15 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें तिल के बीजों को गहराई में ना बोयें बीजों को 2-3 सैं.मी. की गहराई में बोयें तिल की बिजाई के लिए बुरकाव या कतारों में बीज बो कर, ढंग प्रयोग किए जाते हैं बुरकाव विधि में 2-2.5 किलो बीजों की प्रति एकड़ में और कतारों में बिजाई के लिए 1-1.2 किलो बीजों की प्रति एकड़ में आवश्यकता होती है खेत की तैयारी के समय अच्छी तरह से गला हुआ, गाय का गोबर 4-8 टन प्रति एकड़ में डालें तिल की पूरी फसल को भारी मिट्टी में नाइट्रोजन 8 किलो (यूरिया 20 किलो) और फासफोरस 8 किलो (एस एस पी 50 किलो) की आवश्यकता होती है हल्की मिट्टी के लिए नाइट्रोजन 16 किलो (यूरिया 40 किलो) और फासफोरस 10 किलो (एस एस पी 65 किलो) की आवश्यकता होती है खरीफ के मौसम में वृद्धि के लिए कम सिंचाई की आवश्यकता होती है बारिश की तीव्रता और नियमितता के आधार पर जीवन बचाव सिंचाई दें फूल निकलने और फल बनने के समय पानी की कमी ना होने दें खेत को नदीन मुक्त करने के लिए बिजाई के 20-25 दिन बाद पहली गोडाई करें दूसरी गोडाई बिजाई के 40-45 दिन बाद करें नदीनों की रासायनिक रोकथाम के लिए उनके अंकुरण से पहले फलूक्लोरालिन 800 मि.ली. या एलाक्लोर 600 मि.ली. प्रति एकड़ में डालें जब पत्ते और फल रंग बदल कर पीले रंग के हो जायें और पत्ते गिरना शुरू हो जायें, तब फसल कटाई के लिए तैयार हो जाती है कटाई करने में देरी ना करें, इससे फल नष्ट हो जाते हैं कटाई के बद फसल को बंडलों में इक्ट्ठा करें और अच्छे से सुखाने के लिए कई दिनों तक फर्श पर ढेर लगा दें लाठियां मारकर बीजों को फसल से अलग कर लें सफाई के बाद बीजों को तीन दिनों के लिए धूप में सुखाएं उसके बाद बोरियों में स्टोर करके रख दें धन्यवाद

Posted by Tarachand
Haryana
29-01-2020 04:11 PM
Tarachand ji kripya btaye ke aapne sulphur daale hue kitne din ho gaye hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake,dhanywad

Posted by davinder sandhu
Punjab
29-01-2020 04:10 PM
ਦਵਿੰਦਰ ਜੀ ਡੇਅਰੀ ਫਾਰਮਿੰਗ ਲਈ ਲੋਨ ਲੈਣ ਲਈ ਤੁਹਾਡੇ ਕੋਲ ਡੇਅਰੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈਣ ਲਈ ਘਟੋ ਘੱਟ 5 ਪਸ਼ੂ ਹੋਣੇ ਚਾਹੀਦੇ ਹੈ, ਫਿਰ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਸਰਟੀਫਿਕੇਟ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਤੁਸੀ ਲੋਨ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਹ ਤੁਹਾਡੇ ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦਾ ਹੈ ਤੁਸੀ ਕਿੰਨੇ ਪਸ਼ੂਆਂ ਲਈ ਲੋਨ ਲੈਣਾ ਹੈ ਪਰ ਪਹਿਲਾ ਟ੍ਰੇਨਿਗ ਸਰਟੀਫਿਕੇਟ ਹੋਣਾ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਫਿਰ ਉਸ ਤੇ ਤੁਹਾਨੂੰ ਸਬਸਿਡ.... (Read More)
ਦਵਿੰਦਰ ਜੀ ਡੇਅਰੀ ਫਾਰਮਿੰਗ ਲਈ ਲੋਨ ਲੈਣ ਲਈ ਤੁਹਾਡੇ ਕੋਲ ਡੇਅਰੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈਣ ਲਈ ਘਟੋ ਘੱਟ 5 ਪਸ਼ੂ ਹੋਣੇ ਚਾਹੀਦੇ ਹੈ, ਫਿਰ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਸਰਟੀਫਿਕੇਟ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਤੁਸੀ ਲੋਨ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਹ ਤੁਹਾਡੇ ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦਾ ਹੈ ਤੁਸੀ ਕਿੰਨੇ ਪਸ਼ੂਆਂ ਲਈ ਲੋਨ ਲੈਣਾ ਹੈ ਪਰ ਪਹਿਲਾ ਟ੍ਰੇਨਿਗ ਸਰਟੀਫਿਕੇਟ ਹੋਣਾ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਫਿਰ ਉਸ ਤੇ ਤੁਹਾਨੂੰ ਸਬਸਿਡੀ ਵੀ ਮਿਲ ਜਾਂਦੀ ਹੈ
Posted by Devesh Rawat
Madhya Pradesh
29-01-2020 04:00 PM
देवेश जी आप इसके ऊपर manganese sulphate @1 किलो को 150 लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by Ravinder Batth
Punjab
29-01-2020 03:19 PM
Ravinder ji punjab vich kisan mela 20-21 tareek nu Punjab khetibadi university Ludhiana vikhe ho reha hai.dhanwad

Posted by अमबरीश कुमार शर्मा शीयावरजी कामनिदर बाणगंगा मैड जयपुर राजस्थान पिन कोड 303003
Rajasthan
29-01-2020 03:18 PM
फसल के 1-3 वर्ष की हो जाने पर, अच्छी तरह से गला हुए गाय का गोबर 5-20 किलो और युरिया 100-300 ग्राम प्रति वृक्ष में डालें 4-6 वर्ष की फसल में, अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर 25-50 किलो और युरिया 100-300 ग्राम प्रति वृक्ष में डालें 7-9 वर्ष की फसल में यूरिया 60-800 ग्राम और गाय का गला हुआ गोबर 60-90 किलो प्रति वृक्ष में डालें जब फसल 10 वर्ष की य.... (Read More)
फसल के 1-3 वर्ष की हो जाने पर, अच्छी तरह से गला हुए गाय का गोबर 5-20 किलो और युरिया 100-300 ग्राम प्रति वृक्ष में डालें 4-6 वर्ष की फसल में, अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर 25-50 किलो और युरिया 100-300 ग्राम प्रति वृक्ष में डालें 7-9 वर्ष की फसल में यूरिया 60-800 ग्राम और गाय का गला हुआ गोबर 60-90 किलो प्रति वृक्ष में डालें जब फसल 10 वर्ष की या इससे ज्यादा की हो जाए तो गाय का गला हुआ गोबर 100 किलो या यूरिया 800-1600 ग्राम प्रति वृक्ष में डालें
Posted by bikaram
Rajasthan
29-01-2020 03:13 PM
Bikram ji yeh nematode ke karn hpota hai iske liye aap furadon ka istemal karen.dhanywad

Posted by lakhwinder singh
Punjab
29-01-2020 02:57 PM
ਬੱਕਰੀ ਪਾਲਣ ਸ਼ੁਰੂਆਤ ਕਰਨ ਲਈ ਤੁਸੀ 10 ਬੱਕਰੀਆਂ ਅਤੇ 2 ਬੱਕਰਿਆਂ ਨਾਲ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਹਨਾਂ ਦੀ ਖੁਰਾਕ ਅਵਸਥਾ ਘਟ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਲਈ ਅਸੀਂ ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਅਸਾਨੀ ਨਾਲ ਪਾਲ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ਇਹ ਹਰ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦੇ ਵਾਤਾਵਰਨ ਵਿੱਚ ਪਾਲੀਆਂ ਜਾ ਸਕਦੀਆਂ ਹਨ ਬਕਰੀਆਂ 12-14 ਮਹੀਨਿਆਂ ਵਿੱਚ ਬੱਚੇ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦੇਂਦੀਆਂ ਹਨ ਬਕਰੀ ਦਾ ਗਰਬ ਸਮਾਂ 150 ਦਿਨ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਸਾਲ ਵਿੱਚ 1-5 ਬੱਚੇ ਦਿੰਦਿਆਂ ਹਨ .... (Read More)
ਬੱਕਰੀ ਪਾਲਣ ਸ਼ੁਰੂਆਤ ਕਰਨ ਲਈ ਤੁਸੀ 10 ਬੱਕਰੀਆਂ ਅਤੇ 2 ਬੱਕਰਿਆਂ ਨਾਲ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਹਨਾਂ ਦੀ ਖੁਰਾਕ ਅਵਸਥਾ ਘਟ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਲਈ ਅਸੀਂ ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਅਸਾਨੀ ਨਾਲ ਪਾਲ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ਇਹ ਹਰ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦੇ ਵਾਤਾਵਰਨ ਵਿੱਚ ਪਾਲੀਆਂ ਜਾ ਸਕਦੀਆਂ ਹਨ ਬਕਰੀਆਂ 12-14 ਮਹੀਨਿਆਂ ਵਿੱਚ ਬੱਚੇ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦੇਂਦੀਆਂ ਹਨ ਬਕਰੀ ਦਾ ਗਰਬ ਸਮਾਂ 150 ਦਿਨ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਸਾਲ ਵਿੱਚ 1-5 ਬੱਚੇ ਦਿੰਦਿਆਂ ਹਨ ਸਾਲ ਵਿੱਚ 2 ਬੱਚੇ ਦੇਨਾ ਆਮ ਗੱਲ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਬਕਰੀਆਂ 8-10 ਸਾਲ ਤਕ ਬੱਚੇ ਦਿੰਦਿਆਂ ਹਨ ਅਤੇ ਆਪਣੀ ਗਿਣਤੀ ਵਿੱਚ ਤੇਜੀ ਨਾਲ ਵਾਧਾ ਕਰ ਲੈਂਦਿਆਂ ਹਨ ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਤੁਸੀ ਬਰਬਰੀ, ਬਲੈਕ ਬੰਗਾਲ, ਸਿਰੋਹੀ ਆਦਿ ਨਸਲ ਪਾਲ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਹ ਤੁਹਾਨੂੰ ਨੇੜੇ ਦੇ ਕਿਸੇ ਸਫਲ ਬੱਕਰੀ ਪਾਲਕ ਜਾਂ ਵੈਟਨਰੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਬਾਕੀ ਤੁਸੀਂ ਉਸ ਕਿਸਾਨ ਨੂੰ ਮਿਲ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੋ ਪਹਿਲਾਂ ਕਈ ਸਾਲਾਂ ਤੋਂ ਬੱਕਰੀ ਫਾਰਮ ਚਲਾ ਰਿਹਾ ਹੋਵੇ, ਉਸ ਤੋਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਬੱਕਰੀ ਫਾਰਮ ਬਾਰੇ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਮਿਲ ਜਾਵੇਗੀ ਇਸ ਕਿੱਤੇ ਤੇ ਲੋਨ ਲੈਣ ਲਈ 25% ਸਬਸਿਡੀ ਮਿਲਦੀ ਹੈ ਜੋ ਕਿ ਲੋਨ ਕਲੀਅਰ ਹੋਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਮਿਲਦੀ ਹੈ ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਜ਼ਿਲੇ ਦੇ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਕੇਂਦਰ ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰੋ ਤੇ ਬੱਕਰੀ ਪਾਲਣ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਹਾਸਿਲ ਕਰੋ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਕਰਨ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਤੁਹਾਨੂੰ ਸਰਟੀਫਿਕੇਟ ਹਾਸਿਲ ਹੋਵੇਗਾ ਇਸ ਸਰਟੀਫਿਕੇਟ ਦੇ ਦੁਆਰਾ ਤੁਸੀ ਲੋਨ ਅਪਲਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਲੋਨ ਅਪਲਾਈ ਲਈ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਜ਼ਿਲੇ ਦੇ ਵੈਟਨਰੀ ਅਫਸਰ ਨੂੰ ਮਿਲੋ ਉਹ ਤੁਹਾਡੀ ਫਾਈਲ ਦੀ ਕਾਰਵਾਈ ਅੱਗੇ ਤੋਰਨ ਬਾਰੇ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦੇਣਗੇ.

Posted by NUKESH VERMA
Chattisgarh
29-01-2020 02:48 PM
Nukesh ji aap iska beej lene ke liye Shine Brand Seeds 8770896002 se sampark kar sakte hai.dhanywad

Posted by ठाकुरदास राठौर
Uttar Pradesh
29-01-2020 02:40 PM
ठाकुरदास जी आप किस्मे जैसे Kanchan: यह कंपोज़िट किस्म 75-80 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह पूरे उत्तर प्रदेश में उगाने के लिए उपयुक्त है इसकी औसतन पैदावार 14-16 क्विंटल प्रति एकड़ होती है D-765: यह कंपोज़िट किस्म 75 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह पूरे उत्तर प्रदेश में उगाने के लिए उपयुक्त है इसकी औसतन पैदा.... (Read More)
ठाकुरदास जी आप किस्मे जैसे Kanchan: यह कंपोज़िट किस्म 75-80 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह पूरे उत्तर प्रदेश में उगाने के लिए उपयुक्त है इसकी औसतन पैदावार 14-16 क्विंटल प्रति एकड़ होती है D-765: यह कंपोज़िट किस्म 75 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह पूरे उत्तर प्रदेश में उगाने के लिए उपयुक्त है इसकी औसतन पैदावार 12-14 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Surya: यह कंपोज़िट किस्म 75 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह पूरे उत्तर प्रदेश में उगाने के लिए उपयुक्त है इसकी औसतन पैदावार 12-14 क्विंटल प्रति एकड़ होती है

Posted by Anshu Upadhyay
Uttar Pradesh
29-01-2020 02:37 PM
अंशु जी कृपया खेत की फोटो भेजे और यह बताये कि आपने खेत में क्या क्या खाद डाली है ताकि आपको उसके हिसाब से जानकारी दी जा सके धन्यवाद

Posted by Harsh Deep Singh
Punjab
29-01-2020 02:20 PM
Deep ji tuhade sare swala de jwab ditte gye hai tuci App vich apne sare swala de jwab dekh skde ho.

Posted by kewal Sharma
Himachal Pradesh
29-01-2020 02:14 PM
अभी तापमान में कमी के कारण इस महीने में किसी भी चारे की बिजाई नहीं की जा सकती फरवरी महीने में आप मक्का की बिजाई कर सकते है धन्यवाद

Posted by ठाकुर बृजेश सिंह सोलंकी
Uttar Pradesh
29-01-2020 02:09 PM
ठाकुर जी गेंहू काट कर उसमे मक्का की फसल ली जा सकती है आप मक्का की बिजाई करके बाद में बासमती की बिजाई कर सकते है धन्यवाद
Posted by Devesh Rawat
Madhya Pradesh
29-01-2020 01:45 PM
रावत जी कृपया बताये कि आपने इसमें क्या क्या खाद डाली है ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by Devesh Rawat
Madhya Pradesh
29-01-2020 01:42 PM
श्री मान चूहों से बचाव के लिए आप नीचे लिखे तरीके प्रयोग कर सकते हैं, पिंजरो का प्रयोग करना - चूहो को पडने के अलग अलग पिजंरो का प्रयोग किया जाता है इन पिजंरो का प्रयोग करने से पहले पिजंरे को अच्छी तरह धोकर प्रयोग करे ताकि किसी भी प्रकार की गंध ना आये साफ पिंजरो को खेत में चूहो के आने जाने वाले रास्ते और नुक्सान .... (Read More)
श्री मान चूहों से बचाव के लिए आप नीचे लिखे तरीके प्रयोग कर सकते हैं, पिंजरो का प्रयोग करना - चूहो को पडने के अलग अलग पिजंरो का प्रयोग किया जाता है इन पिजंरो का प्रयोग करने से पहले पिजंरे को अच्छी तरह धोकर प्रयोग करे ताकि किसी भी प्रकार की गंध ना आये साफ पिंजरो को खेत में चूहो के आने जाने वाले रास्ते और नुक्सान करने वाली जगह पर रखे बडी संखिया में चूहो को पकडने के लिए पिंजरे में 10-15 ग्राम अनाज को तेल लगाकर दो से तीन दिनो तक मुंह खोलकर रखे चुहो को मगर लगाने के बाद पिंजरे के अंदर कागज के टूकडो पर 10-15 ग्राम दाने और नालीदार दाखले पर चुटकी भर दाने रखकर मुंह को बंद कर दे ऐसा करके तीन दिन तक चूहे और पकडे हुए चूहो को पानी में डूबो कर मारे पिंजरो का दौबारा प्रयोग करने के लिए कम से कम 20 दिनो का फासला रखें कीडेमार जहरो के प्रयोग से रोकथाम - चूहो की कीडेमार और जहर के प्रयोग से रोकथाम करने के लिए जहरीला चोगा प्रयोग करने में ध्यान और सही तरीका प्रयोग करने की जरूरत है चुहो को इस जहरीले चोगे को खाना प्रयोग किये दानो का मियारपन , स्वाद, और तेल की गंध पर निर्भर करता है जहरीला चोगा बनाना जिंक फॉसफाइड का प्रयोग - एक किलो बाजरा गेहूं ज्वार का दलिया या इनका मिश्रण लेकर इसमे 20 ग्राम तेल हो सके तो मुंगफली का तेल और 25 ग्राम जिंकफॉसफाइड डाल कर अच्छी तरह मिलाये इस प्रकार तैया किये जहरीले चोगे को कागज की पुडीया बनाकर खेत में गेज वाली जगह पर रखे बरोमोडाइओलोन का प्रयोग - 20 ग्राम बरोमोडाइओलोन 0 005 फीसदी पाऊडर, 20 ग्राम बूरा खंड, और 20 ग्राम तेल को एक किलो किसी भी अनाज के दलिये में मिलाये और पूरे खेत में 40 जगह पर रख दें रैकुमिन का प्रयोग- 50 ग्राम रैकुमिन 0 0375 फीसदी पाऊडर , 20 ग्राम मुंगफली या सूरजमुखी का तेल और 20 ग्राम बूरा खंड को किसी भी अनाज के दलीये में मिलाये यह भी चूहो को मारने में बहुत फायदेमंद है
Posted by Rajneesh Tiwari
Uttar Pradesh
29-01-2020 01:40 PM
Rajneesh ji aap febrauary men makka ki bijai kar sakte hai jo june tak tyar ho jati hai.dhanywad
Posted by Ashish Kashyap
Chattisgarh
29-01-2020 01:30 PM
श्री मान फसलों के लिए मिट्टी का नमूना लेने के लिए ज़मीन की ऊपरी सहत से घास फूस एक आर करके खुरपे से 6 इंच गहरा गड्ढा खोदकर एक ओर एक इंच की मिट्टी की सतह ऊपर से नीचे तक एकसमान करें इस मिट्टी को साफ कपड़े या बर्तन में डालेंं इस तरह 7—8 अन्य स्थानों से मिट्टी लें इस मिट्टी को आपस में अच्छी तरह से मिलाकर उसमें से आधा क.... (Read More)
श्री मान फसलों के लिए मिट्टी का नमूना लेने के लिए ज़मीन की ऊपरी सहत से घास फूस एक आर करके खुरपे से 6 इंच गहरा गड्ढा खोदकर एक ओर एक इंच की मिट्टी की सतह ऊपर से नीचे तक एकसमान करें इस मिट्टी को साफ कपड़े या बर्तन में डालेंं इस तरह 7—8 अन्य स्थानों से मिट्टी लें इस मिट्टी को आपस में अच्छी तरह से मिलाकर उसमें से आधा किलो मिट्टी लें यदि मिट्टी गीली हो तो छांव में सुखाएं इस नमूने को कपड़े की थैली में डालकर किसान का नाम, पता और खेत नंबर लिखकर एक पर्ची उस पर रख दें इस तरीके से खेत में मिला हुआ नमूना लेना चाहिए यदि किसी खेत के कुछ हिस्से में ज़मीन की किस्म और उपजाऊ शक्ति अलग हो उस हिस्से की मिट्टी का अलग नमूना लें कल्लर वाली ज़मीन मेंसे मिट्टी का नमूना लेने के लिए ज़मीन में 3 फुट गहरा गड्ढा खोदकर सीधी ओर ऊपर से शुरू करके नीचे 6 इंच तक 1 फुट और 2 फुट की गहराई पर निशानलगाएं हर गहराई से खुरपे की मदद से तकरीबन 1 इंच मोटी सतह उतारकर आधा ग्राम मिट्टी लें इस तरह कुल 4 नमूने लें हर गहराई से नमूने लेकर विधि 1 तरह संभालें पर्ची पर नमूने की गहराई भी लिखें बाग लगाने के लिए मिट्टी की जांच के लिए नमूना लेने के लिए खेत में 6 फुट गहरा गड्ढा खोदकर सीधी ओर से ऊपर से नीचे की तरफ निशान लाकर निशान 6 इंच से 2 निशान 1 फुट पर लाकर हर फुट पर निशान लगाए खुरपे से 6 इंच के निशान तक 1 इंच मोटी तह एक समान लगाएं जिसका भार लगभग आधा किलोग्राम हो इस तरह 6 नमूने 1—1 फुट दूरी पर लें और अलग अलग थैलियों में डालें जिसकी गिनती 7 हो जायेगी थैली के किसान और खेतों की पूरी जानकारी लिखकर डाली जाये यदि किसी गहराई पर कोई रोड़ियों की तह हो उसका नमूना अलग लेकर अलग थैली में डालना चाहिए जिसमें एक पर्ची पर तह की गहराई लिखी जाये कल्लर वाली ज़मीन और बागों के लिए मिट्टी का नमूना बरमे की मदद से भी लिया जा सकता है और इसकी जांच आप मिट्टी जांच केंद्र से या के वी के से

Posted by चन्द्रप्रकाश सिन्हा
Chattisgarh
29-01-2020 01:18 PM
चन्द्रप्रकाश जी कृपया सवाल विस्तार से पूछे कि आप कौन सी फसल के बारे में जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके
धन्यवाद
Posted by hardeep singh
Punjab
29-01-2020 01:12 PM
Hardeep ji desi cow de milk vich fatt di matra jyada hundi hai, jiss krke iss nu dujia nasalo nalo vdia mande hai, jekar tuci ghar vich dudh peen lai cow rakhni hai fir tuci Sahiwal cow rakh skde ho.
Posted by Amit Kumar rao
Uttar Pradesh
29-01-2020 12:59 PM
Shri maan g kripa aap apna swal visthar se puchein toh aapko poori jankari di ja ske....

Posted by farjan khan
Rajasthan
29-01-2020 12:59 PM
लेयर फार्मिंग के लिए 50 फीट लंबाई वाली जगह और 20 फीट चौड़ाई वाली जगह की जरूरत होती है यह आपका 1000 वर्ग फुट जगह बन जाती है यहां आप 1000 बच्चों को रख सकते हैं आपको 4000 बच्चे के लिए 100 फीट लंबाई और 40 फीट चौड़ाई की जगह की जरूरत होगी यदि आप 5000 रखना चाहते है तो इससे थोड़ी ज्यादा भाग रख सकते है

Posted by Arvind Yadav
Uttar Pradesh
29-01-2020 12:58 PM
महोगनी का वृक्ष जल भराव वाली भूमि को छोड़कर अन्य किसी भी प्रकार की उपजाऊ भूमि में लगाया जा सकता है. इसके वृक्ष को पथरीली मिट्टी में नही लगाया जा सकता. इसकी खेती के लिए मिट्टी का पी.एच. मान सामान्य होना चाहिए. महोगनी की खेती के लिए उष्णकटिबंधीय जलवायु सबसे उपयुक्त होती है. इसके वृक्ष को ज्यादा बारिश की भी जरूरत .... (Read More)
महोगनी का वृक्ष जल भराव वाली भूमि को छोड़कर अन्य किसी भी प्रकार की उपजाऊ भूमि में लगाया जा सकता है. इसके वृक्ष को पथरीली मिट्टी में नही लगाया जा सकता. इसकी खेती के लिए मिट्टी का पी.एच. मान सामान्य होना चाहिए. महोगनी की खेती के लिए उष्णकटिबंधीय जलवायु सबसे उपयुक्त होती है. इसके वृक्ष को ज्यादा बारिश की भी जरूरत नही होती. सामान्य मौसम में इसके पेड़ अच्छे से विकास करते हैं. शुरुआत में इसके पौधों को तेज़ गर्मी और सर्दी से बचाने की जरूरत होती है. सर्दियों में पड़ने वाला पाला इसके लिए उपयुक्त नही होता है. इनके अलावा तेज़ हवाओं के चलने से इसके वृक्ष को नुक्सान पहुँचता है. क्योंकि इनकी जड़ें जमीन में ज्यादा गहराई में नही जाती है.
इसके पौधे को अंकुरित होने और विकास करने के लिए सामान्य तापमान की जरूरत होती है. इसका पूर्ण विकसित वृक्ष सर्दियों में 15 और गर्मियों में 35 डिग्री तापमान पर भी अच्छे से विकास कर सकता है. महोगनी की अभी तक भारत में कोई संकर या खास प्रजाति तैयार नही की गई है. अभी तक इसकी 5 विदेशी कलमी किस्मों को ही उगाया जाता है. जिनमें क्यूबन, मैक्सिकन, अफ्रीकन, न्यूज़ीलैंड, और होन्डूरन किस्में शामिल हैं. ये सभी किस्में विदेशी हैं. इन सभी किस्मों के पौधों को उनकी उपज और बीजों की गुणवत्ता के आधार पर तैयार किया गया है. जिनकी लम्बाई 50 फिट से 200 फिट तक पाई जाती है. महोगनी के वृक्ष की कटाई लगभग 12 साल बाद की जाती है. जब इसका पेड़ पूरी तरह से तैयार हो जाता है. इसके अलावा अधिक देरी से काटने पर भी इसकी खेती से अधिक उपज मिलती है. इसके वृक्षों की कटाई जड़ के पास से की जाती है.
Posted by योगेन्द्र नायक
Uttar Pradesh
29-01-2020 12:57 PM
योगेन्द्र जी अभी आप गेंहू में सल्फर डाले जिसकी मात्रा 3 -5 किलो प्रति किलो एकड़ के हिसाब से डाली जाती है इस से पानी मिटटी में समाना शुरू हो जाता है

Posted by Suresh Kumar
Haryana
29-01-2020 12:57 PM
हल्दी और अदरक जैसी फसलें या चिकित्सिक पौधे अंतर-फसलों के रूप में लगाए जा सकते हैं

Posted by ranbir
Haryana
29-01-2020 12:41 PM
जब धनिया की खेती पत्तों के उद्देश्य से की जाती है तब बिजाई मध्य सितंबर से मध्य दिसंबर में की जानी चाहिए बीजों के उद्देश्य से इसकी खेती नवंबर के पहले पखवाड़े में की जाती है कोशिश करें की बिजाई समय पर ही करें, इससे बिमारी और कीट के हमले का खतरा कम होता है

Posted by Gopal Vishvakarma
Uttar Pradesh
29-01-2020 12:40 PM
खरीफ मौसम में, जून के आखरी सप्ताह से जुलाई का पहला सप्ताह बिजाई के लिए उपयुक्त होता है
Posted by jaswindersidhu6047@gmail.com
Chandigarh
29-01-2020 12:37 PM
Jaswinder ji isda rate lagbhag rs. 200 tak hai..

Posted by चन्द्रप्रकाश सिन्हा
Chattisgarh
29-01-2020 12:32 PM
इसे मिट्टी की विभिन्न किस्मों हल्की से उच्च पोषक तत्वों वाली मिट्टी में उगाया जा सकता है जैसे कि गहरी गाद चिकनी, दोमट और उच्च दोमट मिट्टी केले की खेती के लिए उपयुक्त होती है केले की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6 से 7.5 होनी चाहिए केला उगाने के लिए, अच्छे निकास वाली, पर्याप्त उपजाऊ और नमी की क्षमता वाली मिट्टी का .... (Read More)
इसे मिट्टी की विभिन्न किस्मों हल्की से उच्च पोषक तत्वों वाली मिट्टी में उगाया जा सकता है जैसे कि गहरी गाद चिकनी, दोमट और उच्च दोमट मिट्टी केले की खेती के लिए उपयुक्त होती है केले की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6 से 7.5 होनी चाहिए केला उगाने के लिए, अच्छे निकास वाली, पर्याप्त उपजाऊ और नमी की क्षमता वाली मिट्टी का चयन करें उच्च नाइट्रोजन युक्त मिट्टी,पर्याप्त फासफोरस और उच्च स्तर की पोटाश वाली मिट्टी में केले की खेती अच्छी होती है जल जमाव, कम हवादार और कम पौष्टिक तत्वों वाली मिट्टी में इसकी खेती ना करें रेतली, नमक वाली, कैल्शियम युक्त और अत्याधिक चिकनी मिट्टी में भी इसकी खेती ना करें गर्मियों में, कम से कम 3 से 4 बार जोताई करें आखिरी जोताई के समय, 10 टन अच्छी तरह से गली हुई रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें ज़मीन को समतल करने के लिए ब्लेड हैरो या लेज़र लेवलर का प्रयोग करें वे क्षेत्र जहां निमाटोड की समस्या होती है वहां पर रोपाई से पहले निमाटीसाइड और धूमन, गड्ढों में डालें Grand Naine, Red Banana, Safed Velachi, Basarai, Rasthali, Dwarf Cavendish, Robusta, Poovan, Nendran, Ardhapuri, Nyali.केले की रोपाई के लिए मई-जून या सितंबर-अक्तूबर का समय उपयुक्त होता है टिशू कल्चर से तैयार पौधों को पूरे साल में लगाया जा सकता है, जब तक कि तापमान के बहुत कम या बहुत अधिक होने पर पौधों की रोपाई नहीं की जा सकती उत्तरी भारत में, तटीय क्षेत्रों में, जहां उच्च नमी और तापमान जैसे 5-7 डिगरी सेल्सियस से कम तापमान हो, वहां पर रोपाई के लिए 2.1 मीटरx 2.1 मीटर से कम फासला नहीं होना चाहिए केले की जड़ों को 45x 45x45 सैं.मी. या 60x60x60 सैं.मी. आकार के गड्ढों में रोपित करें गड्ढों को धूप में खुला छोड़ें, इससे हानिकारक कीट मर जायेंगे गड्ढों को 10 किलो रूड़ी की खाद या गला हुआ गोबर, नीम केक 250 ग्राम और कार्बोफ्युरॉन 20 ग्राम से भरें जड़ों को गड्ढें के मध्य में रोपित करे और मिट्टी के आसपास अच्छी तरह से दबायें गहरी रोपाई ना करें केले की एक एकड़ में 132916 रुपये की आमदनी हो जाती है धन्यवाद

Posted by Parminder singh
Punjab
29-01-2020 12:22 PM
Parminder ji kirpa karke daso ke isnu tuc kehdi kehdi khaad payi hai ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake,dhanwad

Posted by karanvir singh
Punjab
29-01-2020 12:20 PM
ਜਿਹੜੇ ਪਸ਼ੂ ਵਾਰ ਵਾਰ ਰਪੀਟ ਹੁੰਦੇ ਹੈ ਓਹਨਾ ਨੂੰ ਤੁਸੀ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆਉਣ ਤੇ ਬੱਚੇਦਾਨੀ ਵਿਚ Utrawin-oz ਦਵਾਈ 30 ਮਿਲੀ ਅਤੇ ਉਸ ਵਿਚ Metro IV drip 50ml ਮਿਕਸ ਕਰੋ ਅਤੇ ਇਸ ਤ੍ਰਾਹ ਕਰਕੇ 3 ਦਿਨ ਭਰਵਾਓ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ Minfa gold ਪਾਊਡਰ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਅਤੇ PG care ਗੋਲੀਆਂ ਰੋਜਾਨਾ 1 ਗੋਲੀ ਦਿਓ ਅਤੇ 21 ਦਿਨ ਤਕ ਦਿੰਦੇ ਰਹੋ, ਫਿਰ ਅਗਲੀ ਵਾਰ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆਉਣ ਤੇ ਉਸ ਨੂੰ ਟੀਕਾ ਭਰਵਾਂ ਕੇ Pregstay gold ਪਾਊਡਰ 30 ਗ.... (Read More)
ਜਿਹੜੇ ਪਸ਼ੂ ਵਾਰ ਵਾਰ ਰਪੀਟ ਹੁੰਦੇ ਹੈ ਓਹਨਾ ਨੂੰ ਤੁਸੀ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆਉਣ ਤੇ ਬੱਚੇਦਾਨੀ ਵਿਚ Utrawin-oz ਦਵਾਈ 30 ਮਿਲੀ ਅਤੇ ਉਸ ਵਿਚ Metro IV drip 50ml ਮਿਕਸ ਕਰੋ ਅਤੇ ਇਸ ਤ੍ਰਾਹ ਕਰਕੇ 3 ਦਿਨ ਭਰਵਾਓ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ Minfa gold ਪਾਊਡਰ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਅਤੇ PG care ਗੋਲੀਆਂ ਰੋਜਾਨਾ 1 ਗੋਲੀ ਦਿਓ ਅਤੇ 21 ਦਿਨ ਤਕ ਦਿੰਦੇ ਰਹੋ, ਫਿਰ ਅਗਲੀ ਵਾਰ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆਉਣ ਤੇ ਉਸ ਨੂੰ ਟੀਕਾ ਭਰਵਾਂ ਕੇ Pregstay gold ਪਾਊਡਰ 30 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ ਅਤੇ 20 ਦਿਨ ਤੱਕ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ, ਅਤੇ ਜਿਸਦਾ ਦੁੱਧ ਪਤਲਾ ਹੈ ਉਸ ਨੂੰ Fatmax ਪਾਊਡਰ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਅਤੇ Buffzon ਪਾਊਡਰ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ..

Posted by Basvaraj
Karnataka
29-01-2020 12:17 PM
Basvaraj ji kripya aap apna swal vistar se pooche taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake,dhanywad
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