
Posted by arjun chouhan
Madhya Pradesh
30-01-2020 08:09 PM
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकत हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है एक बकरी के लिए लगभग 12—15 वर्ग फीट जगह छती हुई और 25—30 वर्ग फीट जगह खुली चाहिए .... (Read More)
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकत हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है एक बकरी के लिए लगभग 12—15 वर्ग फीट जगह छती हुई और 25—30 वर्ग फीट जगह खुली चाहिए बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्चे देना आम बात है बकरियां 8-10 वर्ष तक बच्चे देती हैं और अपन गिनती को तेजी से बढ़ा लेती हैं आप बारबरी, ब्लैक बंगाल, जैसी नसल पाल सकते हैं यदि आप बीटल नस्ल रखना चाहते है तो यह लगभग 20—25 हज़ार तक अच्छी ग्रोथ वाली बकरी मिल जाएगी फिर आप अपने बजट के हिसाब से इस काम को कर सकते है.

Posted by Kayum Khan
Rajasthan
30-01-2020 08:06 PM
कयुम खांन जी उसे आप अच्छी खुराक डालें क्योंकि खुराक अच्छी होने से अच्छी ग्रोथ होती है बाकि आप उसे Groviplex पाउडर 15ग्राम को 1.5 लीटर पानी में मिलाकर पिला सकते है इससे भी अच्छी ग्रोथ होगी

Posted by Rakesh
Punjab
30-01-2020 08:06 PM
राकेश जी आप डेयरी फार्मिंग की ट्रेनिंग लेने के लिए डिप्टी डियरेक्टर डेयरी, कमरा नंबर 508—09, बी ब्लॉक चौथी मंजिल नया डीसी कॉपलेक्स फाजिकला फोन नंबर 01632-244304 से संपर्क कर सकते है यहां से आपको टे्रनिंग की मिती और जगह का पता लग जाएगाा

Posted by Rakesh
Punjab
30-01-2020 08:05 PM
राकेश जी आप डेयरी फार्मिंग की ट्रेनिंग लेने के लिए डिप्टी डियरेक्टर डेयरी, कमरा नंबर 508—09, बी ब्लॉक चौथी मंजिल नया डीसी कॉपलेक्स फाजिकला फोन नंबर 01632-244304 से संपर्क कर सकते है यहां से आपको टे्रनिंग की मिती और जगह का पता लग जाएगाा
Posted by raju das
Chattisgarh
30-01-2020 08:01 PM
अच्छे जल निकास वाली गहरी, दोमट मिट्टी जिसमें भूमिगत-जल का स्तर ज़मीन से 1.5-2 मी. के नीचे हो और अच्छी जल धारण क्षमता वाली ज़मीन गन्ने की खेती के लिए लाभदायक है यह फसल काफी अम्लीय और खारेपन को सहन कर सकती है इसलिए इसे मिट्टी जिसका pH 5 से 8.5 हो, में उगाई जा सकती है यदि मिट्टी का pH 5 से कम हो तो इसमें चूना (कली) डालें और यदि मिट.... (Read More)
अच्छे जल निकास वाली गहरी, दोमट मिट्टी जिसमें भूमिगत-जल का स्तर ज़मीन से 1.5-2 मी. के नीचे हो और अच्छी जल धारण क्षमता वाली ज़मीन गन्ने की खेती के लिए लाभदायक है यह फसल काफी अम्लीय और खारेपन को सहन कर सकती है इसलिए इसे मिट्टी जिसका pH 5 से 8.5 हो, में उगाई जा सकती है यदि मिट्टी का pH 5 से कम हो तो इसमें चूना (कली) डालें और यदि मिट्टी का pH 9.5 से ज्यादा हो तो इसमें जिप्सम डालें आप इसकी किस्मे जैसे Co 8014 (Mahalakshami) ,Vasant 1,Co 86032 ,Co 92005 की बिजाई कर सकते है पतझड़ के मौसम में 15 अक्तूबर से २० नवंबर तक बिजाई की जाती है, बसंत के मौसम में बिजाई 15 फरवरी तक और गर्मियों के मौसम में 15 जुलाई से 15 सितंबर तक बिजाई की जाती है बिजाई के लिए सुधरे ढंग जैसे कि (गहरी खालियां, मेंड़ बनाकर,पंक्तियों में जोड़े बनाकर और गड्ढा खोदकर बिजाई ) प्रयोग किये जाते हैं 1) खालियां और मेंड़ बनाकर सूखी बिजाई: ट्रैक्टर द्वारा मेंड़ बनाने वाली मशीन की मदद से मेंड़ और खालियां बनाएं और इन मेड़ और खालियों में बिजाई करें मेड़ और खालियों में 90 सैं.मी. का फासला होना चाहिए गन्ने की गुलियों को मिट्टी में दबाएं और उसके बाद हल्की सिंचाई करें 2) पंक्तियों के जोड़े बनाकर बिजाई: खालियां बनाने वाले यंत्र के प्रयोग से खेत में 150 सैं.मी. के फासले पर खालियां बनाएं और उनमें 30:30-90-30:30 सैं.मी. के फासले पर गन्ने की रोपाई करें इस तरीके से मेड़ वाली बिजाई से अधिक पैदावार मिलती है 3) गड्ढा खोदकर बिजाई: गड्ढे खोदने वाली मशीन से 60 सैं.मी. व्यास के 30 सैं.मी. गहरे गड्ढे खोदें जिनमें 60 सैं.मी. का फासला हो इससे गन्ना 2-3 बार उगाया जा सकता है और मेड़ वाली बिजाई से 25-50 % अधिक पैदावार आती है B) एक आंख वाले गन्नों की बिजाई: रोपाई के लिए सेहतमंद गुलियां चुनें और 75-90 सैं.मी. के अंतर पर खालियों में बिजाई करें गुलियां एक आंख वाली होनी चाहिए यदि गन्ने के ऊपरी भाग में छोटी डलियां चुनी गई हों तो बिजाई 6 -9 सैं.मी. के अंतर पर करें फसल के अच्छे उगने के लिए आंखों को ऊपर की ओर रखें और हल्की सिंचाई करें पतझड़ के मौसम में 14500-16500 तीन आंख वाले बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें और बसंत के मौसम में 16500-25000 तीन आंख वाले बीज और 21600-25000 दो आंख वाले बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें गन्ने में नदीनों के कारण 12-72 % पैदावार का नुकसान होता है शुरूआती 60-120 दिनों तक नदीनों की रोकथाम बहुत जरूरी है इसलिए रोपाई के बाद 3-4 महीने बाद फसल की नदीनों की रोकथाम करें नीचे लिखे तरीकों से नदीनों को रोका जा सकता है 1) हाथों से गोडाई करके: गन्ना एक व्यापक जगह लेने वाली फसल है इसलिए नदीनों को गोडाई करके रोका जा सकता है इसके इलावा प्रत्येक सिंचाई के बाद 3-4 गोडाई जरूरी है 2) काश्तकारी ढंग: इस प्रक्रिया में खेती के तरीके, अंतरफसली और मलचिंग तरीके शामिल हैं बहुफसली के कारण नदीनों का हमला ज्यादा होता है इसकी रोकथाम के लिए चारे वाली फसलें और हरी खाद वाली फसलों के आधार वाला फसली चक्र गन्ने में नदीनों की रोकथाम करता है गन्ना एक व्यापक जगह लेने वाली भी फसल है जिससे नदीनों के हमले का खतरा भी ज्यादा होता है यदि गन्ने को कम समय वाली फसलों के साथ अंतरफसली किया जाए तो इससे नदीनों को कम किया जा सकता है और ज्यादा लाभ भी मिल सकता है गन्ने के अंकुरन के बाद गन्ने की कतारों में 10-12 सैं.मी. मोटी तह बिछा दी जाती है यह सूर्य की रोशनी को सोखता है जिससे नदीन कम होते हैं यह मिट्टी में नमी को भी बचाता है 3) रासायनिक तरीके: नदीनों की रोकथाम के लिए, सिमाज़ीन या एट्राज़ीन 600-800 ग्राम या मैट्रीब्यूज़िन 800 ग्राम या ड्यूरॉन 1-1.2 किलोग्राम प्रति एकड़ में बिजाई के तुरंत बाद प्रयोग करना चाहिए इसके इलावा चौड़े पत्ते वाले नदीनों की रोकथाम के लिए 2, 4-डी@ 300-400 ग्राम का प्रयोग प्रति एकड़ के हिसाब से करें नाइट्रोजन 62 किलो, फासफोरस 32 किलो और पोटाश 42 किलो प्रति एकड़ में डालें बिजाई से पहले नाइट्रोजन की 1/3 मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा डालें बाकी बची नाइट्रोजन की दो मात्रा को टॉप ड्रेसिंग के तौर पर डालें नाइट्रोजन की पहली मात्रा को बीज वाली आंख के अंकुरण के समय और दूसरी मात्रा को बीज अंकुरण के 45 दिन बाद डालें 3 वर्षों के बाद गन्ने की गुलियों में 40-50 क्विंटल गाय का गोबर प्रति एकड़ में डालें पतझड़ के मौसम में 90-100 दिनों में नाइट्रोजन को टॉप ड्रेसिंग के तौर पर डालें और बसंत के मौसम में 150-160 दिन बाद डालनी चाहिए सिंचाई की संख्या मिट्टी की किस्म और पानी की उपलब्धता पर निर्भर करती है गर्मी के महीने में गर्म हवाओं और सूखे में वृद्धि होने के कारण फसल को पानी की जरूरत पड़ती है पहली सिंचाई फसल के 20-25 % अंकुरित होने पर करें मानसून में गन्ने को पानी और बारिश के आधार पर लगाएं कम वर्षा में सिंचाई 10 दिनों के अंतराल पर करें इसके बाद सिंचाई के अंतराल को बढ़ाकर 20-25 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें जमीन में नमी संभालने के लिए गन्ने की पंक्तियों में मलचिंग का प्रयोग करें अप्रैल जून के महीने में पानी की कमी ना होने दें इससे पैदावार कम होगी इसके इलावा बारिश के दिनों में पानी ना खड़ा होने दें जोताई का समय, वृद्धि का समय और अधिक विकास का समय सिंचाई के लिए बहुत नाज़ुक होता है मिट्टी को मेंड़ पर चढ़ाना: कसी की मदद से खालियों में और पौधे के किनारों पर मिट्टी चढ़ाई जाती है यह मिट्टी में अच्छी तरह से तैयार की गई खाद को अच्छी तरह से मिश्रित होने में मदद करती है पौधे को सहारा देने और उसे गिरने से बचाने में भी मदद करती है ज्यादा पैदावार और चीनी प्राप्त करने के लिए गन्ने की सही समय पर कटाई जरूरी है समय से पहले या बाद में कटाई करने से पैदावार पर प्रभाव पड़ता है किसान शूगर रीफरैक्टोमीटर का प्रयोग करके कटाई का समय पता लगा सकते हैं गन्ने की कटाई द्राती की सहायता से की जाती है गन्ना धरती से ऊपर थोड़ा हिस्सा छोड़कर काटा जाता है क्योंकि गन्ने में चीनी की मात्रा ज्यादा होती है कटाई के बाद गन्ना फैक्टरी में लेकर जाना जरूरी होता है धन्यवाद

Posted by Kayum Khan
Rajasthan
30-01-2020 08:00 PM
उसे आप फीड में चने का छिलका,मक्का, जौ देना शुरू करें और उसे तूड़ी मत डालें और अच्छी मात्रा में हरा चारा दें
Posted by manpreet singh
Punjab
30-01-2020 07:59 PM
मनप्रीत जी आप बकरी लेने के लिए जगदीप सिंह 9464054125 से संपर्क कर सकते है इनसे आपको बकरियां मिल जाएगी

Posted by kapil
Haryana
30-01-2020 07:57 PM
Kapil ji babycorn ki kheti ke bare me puri jankari or is ki contract farming ke lia aap VKB 9517861157 se samparak kar sakte hai, Thankyou.
Posted by Gurdeep Kasana
Haryana
30-01-2020 07:55 PM
Gurdeep ji aap Gir cow lene ke liye Dilbag Singh 9813144108, 9050944108 Desi Cow Farm se sampark kr skte hai.

Posted by kapil
Haryana
30-01-2020 07:54 PM
Kapil ji baby corn ki kheti ke bare me puri jankari or contract farming ke lia aap VKB 9517861157 se samparak kar sakte hai, Thankyou.

Posted by shyam
Uttar Pradesh
30-01-2020 07:51 PM
Shri maan g kripa aap apna swal visthar se puchein toh aapko poori jankari di ja ske ....
Posted by Rajpal Singh
Madhya Pradesh
30-01-2020 07:49 PM
Rajpal ji yeh nasal per nirbhar krta hai yaddi apke pass barbari nasal hai too woh 1 saal mai achi khurak ke sath 35-40kg tak wieght ho jata hai.
Posted by Rajpal Singh
Madhya Pradesh
30-01-2020 07:48 PM
Rajpal ji kripya aap apne swal vistar se pushen ki aap kya jankari lena chathe hai tan jo apko sahi jankari di jaa skee yaddi aap bakri ko din mai kithni barr chara khilne ke vare mai push rehe to 3 varr khila skte hai jitna woh asani se hajam kr skee..

Posted by pradeep singh
Uttar Pradesh
30-01-2020 07:47 PM
शुरूआती खाद के तौर पर 120-150 कि्ंवटल अच्छी रूड़ी की खाद डालें भिंडी की फसल के लिए नाइट्रोजन 36 किलो (80 किलो यूरिया) प्रति एकड़ में प्रयोग करें नाइट्रोजन की आधी मात्रा बिजाई के समय और बाकी बची मात्रा पहली तुड़ाई के बाद डालें
अच्छी पैदावार की प्राप्ती के लिए बिजाई से 10-15 दिनों के बाद 19:19:19 की 4-5 ग्राम प्रति लीटर पानी की स.... (Read More)
शुरूआती खाद के तौर पर 120-150 कि्ंवटल अच्छी रूड़ी की खाद डालें भिंडी की फसल के लिए नाइट्रोजन 36 किलो (80 किलो यूरिया) प्रति एकड़ में प्रयोग करें नाइट्रोजन की आधी मात्रा बिजाई के समय और बाकी बची मात्रा पहली तुड़ाई के बाद डालें
अच्छी पैदावार की प्राप्ती के लिए बिजाई से 10-15 दिनों के बाद 19:19:19 की 4-5 ग्राम प्रति लीटर पानी की स्प्रे करें अच्छे फूलों और फलों की प्राप्ती के लिए 00:52:34 की 50 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी की स्प्रे फूल निकलने से पहले और फिर फल बनने के समय दोबारा करें अच्छी पैदावार और अच्छी क्वालिटी के फलों के लिए , फूल बनने के समय 13:00:45 (पोटाश्यिम नाइट्रेट) की 100 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी की स्प्रे करें
Posted by jitendra singh Chaudhary
Rajasthan
30-01-2020 07:35 PM
जतिदर जी यदि आप डेयरी फार्मिंग के लिए लोन लेना चाहते है तो आपके पास डेयरी की ट्रेनिंग होनी जरूरी है उस ट्रेनिंग सटीर्फिकेट के हिसाब से आपको लोन मिल सकता है फिर आप अपनी जरूरत के हिसाब से लोन ले सकते है जिसकी पूरी जानकारी आपको ट्रेनिंग में मिल जाएगी ट्रेनिंग लेने के लिए आप अपने नज़दीकी कृषि विज्ञान केन्द्.... (Read More)
जतिदर जी यदि आप डेयरी फार्मिंग के लिए लोन लेना चाहते है तो आपके पास डेयरी की ट्रेनिंग होनी जरूरी है उस ट्रेनिंग सटीर्फिकेट के हिसाब से आपको लोन मिल सकता है फिर आप अपनी जरूरत के हिसाब से लोन ले सकते है जिसकी पूरी जानकारी आपको ट्रेनिंग में मिल जाएगी ट्रेनिंग लेने के लिए आप अपने नज़दीकी कृषि विज्ञान केन्द्र से संपर्क कर सकते है

Posted by Rajiv yadav
Uttar Pradesh
30-01-2020 07:32 PM
श्री मान मोटे आलुओं की पैदावार के लिए 13:0:45 की 2 किलो और मैगनीश्यिम ई डी टी ए 100 ग्राम प्रति एकड़ की स्प्रे करें बीमारियों के हमले को रोकने के लिए फंगसनाशी प्रॉपीनेब 3 ग्राम प्रति लीटर पानी डालें आलुओं का आकार और गिणती बढ़ाने के लिए हयूमिक एसिड (12 प्रतिशत) 3 ग्राम + एम ए पी 12:61:0 की 8 ग्राम या डी ए पी 15 ग्राम प्रति लीटर की स्.... (Read More)
श्री मान मोटे आलुओं की पैदावार के लिए 13:0:45 की 2 किलो और मैगनीश्यिम ई डी टी ए 100 ग्राम प्रति एकड़ की स्प्रे करें बीमारियों के हमले को रोकने के लिए फंगसनाशी प्रॉपीनेब 3 ग्राम प्रति लीटर पानी डालें आलुओं का आकार और गिणती बढ़ाने के लिए हयूमिक एसिड (12 प्रतिशत) 3 ग्राम + एम ए पी 12:61:0 की 8 ग्राम या डी ए पी 15 ग्राम प्रति लीटर की स्प्रे पौधे की वृद्धि के समय करें

Posted by Nirbhay singh
Punjab
30-01-2020 07:30 PM
Nirbhay singh ji patheya layi makki di bijai february vich kar sakde ho.dhanwad

Posted by Sumant Maurya
Uttar Pradesh
30-01-2020 07:28 PM
सुमंत जी सरसो में महो की रोकथाम के लिए आप imidacloprid @60 ml को प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद

Posted by Nirbhay singh
Punjab
30-01-2020 07:28 PM
Nirbhay ji tuc patheya de layi makki di bijai adh febraury to bijai kar sakde ho isde layi tuc J1006 kisam di bijai kar sakde ho.dhanwad

Posted by Nirbhai singh
Punjab
30-01-2020 07:26 PM
BhaaG deputy director dairy development Bathinda naal sampark karo g

Posted by harvinder singh
Haryana
30-01-2020 07:26 PM
Harvinder ji inko aap achi khurak ke sath sath Groviplex powder 15g ko 1.5 litre pani mai mila pila skte hai aur achi feed dalen, isse achi growth ho jayegi baki aap meat aur egg ke liye rir nasal v rakh skte hai, yeh nasal dono kamo ke liye achi rehti hai.
Posted by Sandeep singh
Punjab
30-01-2020 07:23 PM
संदीप जी मिर्च की पनीरी पंजाब में नवंबर या फरवरी ट्रांसप्लांट कर सकते है नवंबर में लगायी मिर्च को ठंड और कोहरे की मार से बचाने के लिए लोय टनल करनी पड़ती

Posted by pavan
Madhya Pradesh
30-01-2020 07:23 PM
श्री मान आम की खेती कईं तरह की मिट्टी में की जा सकती है इसकी खेती के लिए घनी ज़मीन, जो 4 फुट की गहराई तक सख्त ना हो, की जरूरत होती है मिट्टी की पी एच 8.5 प्रतिशत से कम होनी चाहिए Dusheri: यह बहुत ज्यादा क्षेत्रों में उगाया जाता है इसके फल जुलाई के पहले सप्ताह में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाते हैं इस किस्म के फलों का आकार छोटे .... (Read More)
श्री मान आम की खेती कईं तरह की मिट्टी में की जा सकती है इसकी खेती के लिए घनी ज़मीन, जो 4 फुट की गहराई तक सख्त ना हो, की जरूरत होती है मिट्टी की पी एच 8.5 प्रतिशत से कम होनी चाहिए Dusheri: यह बहुत ज्यादा क्षेत्रों में उगाया जाता है इसके फल जुलाई के पहले सप्ताह में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाते हैं इस किस्म के फलों का आकार छोटे से दरमियाना, रंग पीला, चिकना और गुठली छोटी होती है यह फल ज्यादा देर तक स्टोर किए जा सकते हैं ये फल सदाबहार लगते रहते हैं इसकी औसतन पैदावार 150 क्विंटल प्रति वृक्ष होती है Langra: इस किस्म के फलों का आकार दरमियाने से बड़ा, रंग निंबू जैसा पीला और चिकना होता है यह फल रेशे रहित और स्वाद में बढ़िया होते हैं इसके फल का छिल्का दरमियाना मोटा होता है इसके फल जुलाई के दूसरे सप्ताह में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाते हैं इसकी औसतन पैदावार 100 किलो प्रति वृक्ष होती है Chausa: यह पिछेते मौसम की किस्म है इसके फल बड़े और अंडाकार आकार के और हल्के पीले रंग के होते हैं Ambika: इसके फल मध्यम आकार के, नर्म और मजबूत छिल्का होता है इसके फल गहरे पीले रंग के होते हैं और गहरी लाल रंग की लालिमा देते हैं यह देरी से पकने वाली किस्म है और लगातार फल देती है Arunika: यह किस्म Amrapali और Vanraj किस्म से तैयार की गई है इस किस्म के फल आकर्षित हल्के लाल रंग के होते हैं पौधे अगस्त से सितंबर और फरवरी मार्च के महीने में बोये जाते हैं पौधे हमेशा शाम को ठंडे समय में बोयें फसल को तेज हवा से बचाएं कलमी किस्मों के लिए 10 मीटर x 10 मीटर फासले का प्रयोग करें और मध्यम घनता की रोपाई के लिए 5 x 5 मीटर फासले का प्रयोग करें रोपाई के लिए वर्गाकार प्रणाली का प्रयोग करें बिजाई से एक महीना पहले 1x1x1 मीटर के आकार के गड्ढे 10x10 मीटर के फासले पर खोदें गड्ढों को सूर्य की रोशनी में खुला छोड़ दें फिर इन्हें मिट्टी में 30-40 किलो रूड़ी की खाद और 1 किलो सिंगल सुपर फासफेट मिलाकर भर दें बिजाई वर्गाकार और 6 भुजाओं वाले तरीके से की जा सकती है 6 भुजाओं वाले तरीके से बिजाई करने से 15 प्रतिशत वृक्ष ज्यादा लगाए जा सकते हैं

Posted by Beant Bhullar
Punjab
30-01-2020 07:22 PM
ਤੁਸੀ ਇਸਦੀ ਪੀਕ ਦੀ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਸਫਾਈ ਕਰਵਾ ਕੇ ਉਸ ਨੂੰ Amoxi-cv 625mg 1-1 ਗੋਲੀ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ ਅਤੇ ਜੇਕਰ ਜਖਮ ਬਣਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਉਸ ਉਪਰ topicure ਸਪਰੇ ਕਰਨੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ

Posted by Amrinder Rangi
Punjab
30-01-2020 07:19 PM
Amrinder ji tuc makki de layi tuc J1006 kisam di bijai kar sakde ho.

Posted by RAMANDEEP SINGH
Punjab
30-01-2020 07:06 PM
RAMANDEEP SINGH ji pishle sall 1401 da rate 2200 to 2800 de lagbhag reha, Thankyou.
Posted by happy
Punjab
30-01-2020 07:02 PM
happy ji kirpa karke daso ke tuc isdi bijai kalm nal kiti hai ja beej nal ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake.dhanwad
Posted by योगेन्द्र नायक
Uttar Pradesh
30-01-2020 07:02 PM
श्रीमान जी गेहूं में फंगीनाशी Saaf @500 gm प्रति एकड़ का छिड़काव कर सकते है और सल्फर 5 किलो प्रति एकड़ के हिसाब से प्रयोग कर सकते है
Posted by Gurdeep Grewal
Punjab
30-01-2020 06:52 PM
उसे Powder Mac-sure-L 1kg 100gm रोजाना दें साथ ही 250 ग्राम जौंखार, 250 ग्राम कलमीछोरा, 250 ग्राम मिठासोडा और 250 ग्राम फटकड़ी लें और खिल करें फिर सारा सामान रगड़कर पाउडर बनाएं और मिक्स करके 50 ग्राम रोजाना खाली पेट दें इससे जल्दी ठीक हो जाएगी फिर अगली बार हीट में आने पर दवाई भरवा कर फिर टीका भरवायें
Posted by Raman Sidhu
Haryana
30-01-2020 06:48 PM
इसे हर तरह की मिट्टी में उगाया जा सकता है पर यह अच्छे निकास वाली और रेतली सतह वाली ज़मीनों में ज्यादा पैदावार देती है कलराफी और सेम वाली ज़मीन मूंगी की पैदावार के लिए अनुकूल नहीं है प्रसिद्ध किस्में :-K 851: यह मध्यम ऊंचाई वाली किस्म है और खरीफ के साथ साथ गर्मियों में भी बोने के अनुकूल है यह सूखे की हालातों के प्रत.... (Read More)
इसे हर तरह की मिट्टी में उगाया जा सकता है पर यह अच्छे निकास वाली और रेतली सतह वाली ज़मीनों में ज्यादा पैदावार देती है कलराफी और सेम वाली ज़मीन मूंगी की पैदावार के लिए अनुकूल नहीं है प्रसिद्ध किस्में :-K 851: यह मध्यम ऊंचाई वाली किस्म है और खरीफ के साथ साथ गर्मियों में भी बोने के अनुकूल है यह सूखे की हालातों के प्रतिरोधी है यह किस्म 65-70 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 3-4 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Muskan: यह किस्म खरीफ के साथ साथ गर्मियों में भी बोने के अनुकूल है यह चितकबरा रोग और नाड़ी तोड़ के प्रतिरोधी किस्म है यह किस्म 75-80 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 5-7.5 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Asha: यह मध्यम ऊंचाई वाली किस्म है और खरीफ के साथ साथ गर्मियों में भी बोने के अनुकूल है यह किस्म 65-70 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 3-4 क्विंटल प्रति एकड़ होती है SML 668: यह किस्म सिंचित क्षेत्रों में बोने के लिए अनुकूल है यह 60 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 4-5 क्विंटल प्रति एकड़ होती है MUM 2: यह किस्म 60-70 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 4.8 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa 9531: यह किस्म गर्मियों में बोने के लिए अनुकूल है यह 60 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 4-4.8 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa Vishal: यह किस्म गर्मियों में बोने के लिए अनुकूल है यह 62 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 4-4.8 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Ganga 8: यह किस्म खरीफ में बोने के लिए अनुकूल है यह 60 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 4.4 क्विंटल प्रति एकड़ होती है MH 125: यह किस्म 64 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 4.8 क्विंटल प्रति एकड़ होती है MH 421: यह किस्म गर्मियों और खरीफ में बोने के लिए अनुकूल है यह 60 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 4.8 क्विंटल प्रति एकड़ होती है ज़मीन को भुरभुरा करने के लिए दो या तीन जोताई करनी ज़रूरी है प्रत्येक जोताई के बाद सुहागा फेर दें खरीफ की ऋतु के लिए बिजाई का अनुकूल समय जुलाई महीने का पहला पखवाड़ा है गर्मी की ऋतु की बिजाई के लिए सही समय मार्च से अप्रैल तक का है बिजाई के लिए बीजों को 4-6 सैं.मी. गहरा बोयें बिजाई के लिए बिजाई वाली मशीन, पोरा या केरा ढंग का प्रयोग किया जाता है खरीफ ऋतु के लिए 8-9 किलो बीज प्रति एकड़ और गर्मी ऋतु के लिए 12-15 किलो बीज प्रति एकड़ के हिसाब से बोयें

Posted by NUKESH VERMA
Chattisgarh
30-01-2020 06:48 PM
जैतून एक सदाबहार पौधा है, परन्तु इसके सफल फल उत्पादन के लिए इसे भी अन्य पतझड़ वाले पौधों की तरह 400 से 2000 शीत घण्टों की जरूरत होती है इसका पौधा कम से कम 12.2 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान सहन कर सकता है समुद्र तल से 650 मीटर से 2300 मीटर तक की ऊँचाई तक इसे उगाया जा सकता है
जैतून की खेती को 15 से 20 डिग्री सेंटीग्रेट औसत तापमान .... (Read More)
जैतून एक सदाबहार पौधा है, परन्तु इसके सफल फल उत्पादन के लिए इसे भी अन्य पतझड़ वाले पौधों की तरह 400 से 2000 शीत घण्टों की जरूरत होती है इसका पौधा कम से कम 12.2 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान सहन कर सकता है समुद्र तल से 650 मीटर से 2300 मीटर तक की ऊँचाई तक इसे उगाया जा सकता है
जैतून की खेती को 15 से 20 डिग्री सेंटीग्रेट औसत तापमान की आवश्यकता होती है, इससे नीचे तापमान गिरने पर पौधे को घाव हो सकते हैं इसे साल भर में औसतन 100 से 120 सैंटीमीटर वर्षा की जरूरत होती है जहां आवश्यकतानुसार औसतन वर्षा न हो वहां फल विकास के समय विशेषकर खाने के उपयोग में लाई जाने वाली किस्मों में सिंचाई अवश्य करें जैतून के लिए सर्दियों से पहले तथा बसन्त ऋतु से पहले पड़ने वाला पाला हानिकारक होता है जैतून की खेती के लिए मिट्टी में अच्छी जल निकासी होनी आवश्यक है इसके पौधे को अलग-अलग प्रकार की मिट्टी में उगाया जा सकता है मिट्टी की ऊपरी सतह सख्त न हो, गहरी और उपजाऊ मिट्टी में जैतून के पौधे पर अधिक वानस्पतिक वृद्धि होती है और मध्यम उपज, अधिक बोरोन और कैल्शियम वाली (क्षारीय) मिट्टी में भी यद्यपि यह पौधा उगाया जा सकता है परन्तु पौधे की बढ़ौतरी बहुत ही कम होती है जैतून के लिए मिट्टी का पी एच मान 6.5 से 8.0 तक होना वांछनीय है

Posted by NUKESH VERMA
Chattisgarh
30-01-2020 06:47 PM
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी ख.... (Read More)
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुमब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तहय उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तहय में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तहय लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है

Posted by gurpreet
Punjab
30-01-2020 06:46 PM
Gurpreet ji tuci uss nu pett de kiria lai Bandykind plus bolus deo ate her 3 mahine badd salt change krke goli jrur deo ate uss nu Cargill di heifer dry feed deni suru kro ate Ovumin gold powder 50-50gm swere sham deo , iss nal vdia growth howegi ate sme te heat vich aa jawegi.

Posted by Rakesh
Punjab
30-01-2020 06:39 PM
मोतियों की खेती एक लाभदायिक काम हैं मोतियों की खेती उस प्रकार होती हैं जैसे असल रूप में मोती तैयार होते हैं इसकी खेती आप किसी तालाब में या फिर 100 वर्ग फूट तालाब बनाकर कर सकते हैं तालाब बनाने के बाद सिपी को खरीदा जाता है , जो दिल्ली से मिल जाती है, क्वालिटी के हिसाब से एक सिपी लगभग 1.5 से 5 रूप्ये में मिल जाती हैं सब.... (Read More)
मोतियों की खेती एक लाभदायिक काम हैं मोतियों की खेती उस प्रकार होती हैं जैसे असल रूप में मोती तैयार होते हैं इसकी खेती आप किसी तालाब में या फिर 100 वर्ग फूट तालाब बनाकर कर सकते हैं तालाब बनाने के बाद सिपी को खरीदा जाता है , जो दिल्ली से मिल जाती है, क्वालिटी के हिसाब से एक सिपी लगभग 1.5 से 5 रूप्ये में मिल जाती हैं सबसे पहले बंद सिपीयों में खिचाव लाकर उनमें मोतिया का बीज डाला जाता हैं फिर इन सिपीयों को बंद करके जाली के रास्ते पानी में फेक दिया जाता हैं फिर कुछ महीनों के बाद इसमें से मोती तैयार हो जाते हैं मोती बनने में 18 महीनों का समय लगता हैं डिजाईनर मोती तैयार करने के लिए उनके लिए खास तौर से आकार बनायें जाते हैं जिनमें से गनपति, बुद्ध, होली क्रास साईज के डिजाइनर मोती तैयार होते हैं, पर मोतियों की मार्केटिंग आपने स्तर पर ही करनी पड़ती है, पंजाब में मनीष जी मोतियों की ट्रेनिंग करवाते हैं उनके साथ इस नंबर 9417652857 पर संम्पर्क करें वह आपको पूरी जानकारी देंगे पंजाब में मोतियों की खेती की ट्रेनिंग लेने के लिए आप मनीष वासुदेव के साथ संम्पर्क 9417652857 कर सकते हैं धन्यवाद
Posted by Jaskaran Singh
Punjab
30-01-2020 06:38 PM
श्रीमान जी चारे के लिए मक्की की जे—1006 किस्म की बिजाई कर सकते है
Posted by Jaskaran Singh
Punjab
30-01-2020 06:37 PM
श्रीमान जी गेहूं में निसारे के समय एनपीके 005234 को 500 ग्राम प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे कर सकते है और फंगीनाशी टिल्ट 200 मि.ली. को प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे कर सकते है

Posted by chandu
Himachal Pradesh
30-01-2020 06:35 PM
Chandu ji Avishan sheep breed lene ke liye aap DR. P mina ji se 75971 04404 number par contact kare.

Posted by AJAY Shakya
Uttar Pradesh
30-01-2020 06:32 PM
श्रीमान जी गेहूं में मैगनीज एक किलो प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे कर सकते है

Posted by Rakesh
Punjab
30-01-2020 06:27 PM
मोतियों की खेती एक लाभदायिक काम हैं मोतियों की खेती उस प्रकार होती हैं जैसे असल रूप में मोती तैयार होते हैं इसकी खेती आप किसी तालाब में या फिर 100 वर्ग फूट तालाब बनाकर कर सकते हैं तालाब बनाने के बाद सिपी को खरीदा जाता है , जो दिल्ली से मिल जाती है, क्वालिटी के हिसाब से एक सिपी लगभग 1.5 से 5 रूप्ये में मिल जाती हैं सब.... (Read More)
मोतियों की खेती एक लाभदायिक काम हैं मोतियों की खेती उस प्रकार होती हैं जैसे असल रूप में मोती तैयार होते हैं इसकी खेती आप किसी तालाब में या फिर 100 वर्ग फूट तालाब बनाकर कर सकते हैं तालाब बनाने के बाद सिपी को खरीदा जाता है , जो दिल्ली से मिल जाती है, क्वालिटी के हिसाब से एक सिपी लगभग 1.5 से 5 रूप्ये में मिल जाती हैं सबसे पहले बंद सिपीयों में खिचाव लाकर उनमें मोतिया का बीज डाला जाता हैं फिर इन सिपीयों को बंद करके जाली के रास्ते पानी में फेक दिया जाता हैं फिर कुछ महीनों के बाद इसमें से मोती तैयार हो जाते हैं मोती बनने में 18 महीनों का समय लगता हैं डिजाईनर मोती तैयार करने के लिए उनके लिए खास तौर से आकार बनायें जाते हैं जिनमें से गनपति, बुद्ध, होली क्रास साईज के डिजाइनर मोती तैयार होते हैं, पर मोतियों की मार्केटिंग आपने स्तर पर ही करनी पड़ती है, पंजाब में मनीष जी मोतियों की ट्रेनिंग करवाते हैं उनके साथ इस नंबर 9417652857 पर संम्पर्क करें वह आपको पूरी जानकारी देंगे पंजाब में मोतियों की खेती की ट्रेनिंग लेने के लिए आप मनीष वासुदेव के साथ संम्पर्क 9417652857 कर सकते हैं धन्यवाद
Posted by एम. के. रज़ा
Chattisgarh
30-01-2020 06:17 PM
आप उसे तुरंत नज़दीकी डॉक्टर से जांच करवायें उसके बुखार और शरीर की सही जांच करके अच्छा इलाज हो सकता है
Posted by Shivaji Namdevrao Lanje
Maharashtra
30-01-2020 06:08 PM
Shivaji the major problem of punjab farmers is marketing. they dont get the proper price of the crop.
Posted by Nitish kumar nirala
Bihar
30-01-2020 06:05 PM
श्री मान कृपया इसकी फोटो भेजें ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by Neelam Kumar
Himachal Pradesh
30-01-2020 06:02 PM
Neelam ji aap inko backyard poultry farming mai rakh skte hai, aap inki khurak, feed ka sahi dian rakhen aur jgah v thodi khuli honi chahiye, baki inko backyard mai v asani se rakha ja skta hai..
Posted by Gurdeepsingh Khanal
Punjab
30-01-2020 06:00 PM
ਤੁਸੀਂ ਇਨ੍ਹਾਂ ਦੋਨਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਕੋਈ ਵੀ ਕੰਮ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਨ੍ਹਾਂ ਦੋਨਾਂ ਕੰਮਾਂ ਵਿੱਚ ਚੰਗਾ ਫਾਇਦਾ ਹੈ ਜੋ ਵੀ ਕੰਮ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰਨਾ ਹੈ, ਉਸਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈਣਾ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ, ਤਾਂ ਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਉਸ ਕੰਮ ਬਾਰੇ ਬੁਨਿਆਦੀ ਅਤੇ ਤਕਨੀਕੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਮਿਲ ਸਕੇ ਬੱਕਰੀ ਫਾਰਮ ਦਾ ਕੰਮ ਘੱਟ ਖਰਚੇ ਤੇ ਸ਼ੁਰੂ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਪਰ ਇਸਦਾ ਮੰਡੀਕਰਨ ਤੁਹਾਨੂੰ ਖੁਦ ਕਰਨਾ ਪਵੇਗਾ ਮੱਝਾਂ ਜਾਂ ਗ.... (Read More)
ਤੁਸੀਂ ਇਨ੍ਹਾਂ ਦੋਨਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਕੋਈ ਵੀ ਕੰਮ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਨ੍ਹਾਂ ਦੋਨਾਂ ਕੰਮਾਂ ਵਿੱਚ ਚੰਗਾ ਫਾਇਦਾ ਹੈ ਜੋ ਵੀ ਕੰਮ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰਨਾ ਹੈ, ਉਸਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈਣਾ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ, ਤਾਂ ਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਉਸ ਕੰਮ ਬਾਰੇ ਬੁਨਿਆਦੀ ਅਤੇ ਤਕਨੀਕੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਮਿਲ ਸਕੇ ਬੱਕਰੀ ਫਾਰਮ ਦਾ ਕੰਮ ਘੱਟ ਖਰਚੇ ਤੇ ਸ਼ੁਰੂ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਪਰ ਇਸਦਾ ਮੰਡੀਕਰਨ ਤੁਹਾਨੂੰ ਖੁਦ ਕਰਨਾ ਪਵੇਗਾ ਮੱਝਾਂ ਜਾਂ ਗਾਵਾਂ ਦਾ ਦੁੱਧ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਫੈਟ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਡੇਅਰੀ ਵਿੱਚ ਵੇਚ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜਾਂ ਆਪਣੇ ਨਜ਼ਦੀਕ ਘਰਾਂ ਵਿੱਚ ਵੀ ਵੇਚ ਸਕਦੇ ਹੋ ਸੋ ਇਨ੍ਹਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਤੁਸੀਂ ਆਪਣੀ ਦਿਲਚਸਪੀ ਅਤੇ ਭਵਿੱਖ ਦੀ ਯੋਜਨਾ ਅਨੁਸਾਰ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ
Posted by jaswindersidhu6047@gmail.com
Chandigarh
30-01-2020 05:46 PM
Jaswinder ji isda rate lagbhag rs. 200 tak hai..

Posted by shree nag
Odisha
30-01-2020 05:43 PM
Shri maan g isme app NPK 19:19:19@1kg per acre spray kr skte ho...
Posted by sohan lal
Uttar Pradesh
30-01-2020 05:42 PM
सोहन जी आप कलम लगाने के लिए आप साथ में दी गयी वीडियो का link देख सकते है https://www.youtube.com/watch v=opdqphAROR8

Posted by ਸੁਖਵਿੰਦਰ ਸਿੰਘ
Punjab
30-01-2020 05:36 PM
ਸੁਖਵਿੰਦਰ ਜੀ ਜਦੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸ ਬਿਮਾਰੀ ਦੇ ਲੱਛਣ ਦਿਖਾਈ ਦੇਣ ਲੱਗ ਜਾਣ ਤਾ ਤੁਸੀ ਇਸਦੀ ਸਪਰੇ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ
Posted by Pardeep singh
Haryana
30-01-2020 05:32 PM
चूहों की रोकथाम के लिए आप एक किलो अनाज का आटा या दाना लें उसमें 20 ग्राम बासमती तेल, 20 ग्राम चीनी, 25 ग्राम जिंक फॉसफेट मिलाएं इन चार चीज़ों को अच्छी तरह से मिलाकर तैयार करने के बाद यहां यहां चूहे है वहां रखें बासमती तेल खुशबूदार होना चाहिए ताकि चूहे इसकी खुशबू के तरफ आ सके
Posted by upendra kumar chaudhary
Jharkhand
30-01-2020 05:27 PM
श्री मान खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते ह.... (Read More)
श्री मान खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुमब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तहय उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तहय में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तहय लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है
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