Posted by ਮਨਦੀਪ ਸਿੰਘ
Punjab
02-02-2020 10:25 AM
mandeep ji tuc hun makki di bijai kar sakde ho jisde vich J1006 di bijai kar sakde ho.dhanwad
Posted by Khursheed Alam
Madhya Pradesh
02-02-2020 10:19 AM
आप BV 300 नस्ल सबसे बढ़िया रहेगी यह नस्ल 18 सप्ताह की उम्र में अंडे देना शुरू कर देती है और 19 सप्ताह से 80वें सप्ताह तक लगभग 370 अंडे देती है..

Posted by kamal.Sangwan
Haryana
02-02-2020 09:59 AM
सागवान :-बढ़िया विकास के लिए, बढ़िया निकास वाली, घनी और उपजाऊ मिट्टी की आवश्यकता होती है इसके लिए मिट्टी का pH 6.5 या इससे ज्यादा होना चाहिए मिट्टी की pH 6.5 से कम होने पर फसल के विकास पर असर पड़ता है Konni Teak, West African teak, Godhavari Teak, South and Central American Teak, Nilambur or Malabar Teak.मिट्टी के भुरभुरा बनाने के लिए खेत की 2-3 बार जोताई करें मिट्टी को समतल करें ताकि खे.... (Read More)
सागवान :-बढ़िया विकास के लिए, बढ़िया निकास वाली, घनी और उपजाऊ मिट्टी की आवश्यकता होती है इसके लिए मिट्टी का pH 6.5 या इससे ज्यादा होना चाहिए मिट्टी की pH 6.5 से कम होने पर फसल के विकास पर असर पड़ता है Konni Teak, West African teak, Godhavari Teak, South and Central American Teak, Nilambur or Malabar Teak.मिट्टी के भुरभुरा बनाने के लिए खेत की 2-3 बार जोताई करें मिट्टी को समतल करें ताकि खेत में पानी खड़ा ना हो सके नए पौधों की रोपाई के लिए 45x45x45 सैं.मी. के फासले पर गड्ढे खोदे प्रत्येक गड्ढे में गली हुई रूड़ी की खाद के साथ कीटनाशी डालें बीजों को नर्सरी बैड में बोया जाता है रोपाई के लिए 12-15 महीने के नए पौधों का प्रयोग करें टिशू प्रजनन ग्राफ्टिंग, जड़, तने काट कर और micro छोटे प्रजनन द्वारा किया जाता है रोपाई के लिए पूर्व अंकुरन पौधों का प्रयोग किया जाता है मॉनसून का मौसम सागवान की रोपाई के लिए सबसे अच्छा मौसम होता है रोपाई के लिए 2x2 या 2.5x2.5 या 3x3 मीटर के फासले रखा जाता है जब अंतर-फसली अपनाई हो, तो 4x4 मीटर या 5.x5 मीटर फासला रखें सागवान की रोपाई के लिए पूर्व अंकुरित पौधों का प्रयोग करें 45x45x45 सैं.मी. के गड्ढे बनाएं प्रत्येक गड्ढे में गली हुई रूड़ी की खाद और मिट्टी डालें बिजाई पंक्ति में, छींटे द्वारा या पनीरी लगाकर की जा सकती है एक एकड़ में रोपाई के लिए लगभग 1500-1800 clones का प्रयोग करें हर साल अगस्त और सितंबर महीने में 50 ग्राम प्रति पौधे में पहले तीन वर्ष डालें पहले तीन वर्षों में खेत को नदीन मुक्त करना आवश्यक है नियमित समय पर गोड़ाई करें पहले वर्ष में 3 और दूसरे वर्ष में 2 गोड़ाई करें रोपाई के तीसरे वर्ष में एक बार गोड़ाई करें मॉनसून के मौसम में सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती सिंचाई गर्म या गर्मियों के महीने में और आवश्यकता अनुसार करें आवश्यकता अनुसार सिंचाई करने के साथ काफी हद तक पैदावार में सुधार आता है अतिरिक्त सिंचाई से पानी के धब्बे और फंगस ज्यादा हो जाती है
Red sandalwood, white sandalwood चंदन की किस्में हैं. इसकी खेती के लिए जमीन को अप्रैल-मई महीने में तैयार किया जाता है इसकी बिजाई मई-अक्टूबर महीने में की जाती है पर इसको बीजने का सबसे सही समय जुलाई-अगस्त महीना है पौधे से पौधे की दूरी 3 मीटर होनी चाहिए..यूरिया@50ग्राम/पेड़/साल , एसएसपी@100 ग्राम/पेड़/साल और मयूरिएट आफ पोटाश@40 ग्राम/पेड़/सालको दो हिस्सों में डालना चाहिए पहली डोज़ मार्च-अप्रैल महीने में और दूसरी डोज़ सितम्बर-अक्टूबर में दी जानी चाहिए इसके बारे में और जानकारी लेने के लिए आप अरुण खुरमी 9878123123 जी से संपर्क कर सकते है

Posted by virendra singh
Madhya Pradesh
02-02-2020 09:53 AM
श्री मान चने में इली की रोकथाम के लिए आप coragen@40ml प्रती एकड़ सप्रे कर सकते हो

Posted by sangram pandey
Uttar Pradesh
02-02-2020 09:45 AM
pandey ji kripya btaye ke aap ise sinchai kitne din ke bad karte hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by omprakash
Rajasthan
02-02-2020 09:41 AM
श्री मान चने में फंगस का हमला है इसकी रोकथाम के लिए आप M-45@500 ग्राम प्रती एकड़ सप्रे कर सकते हो

Posted by parminder
Punjab
02-02-2020 09:40 AM
Shri maan g mashroom di training lyi tuc apne nede de Krishi Vigyan Kendra nall sampark kr skde ho....
Posted by Goutam Sisodiya
Madhya Pradesh
02-02-2020 09:38 AM
श्री मान कृपया इसकी फोटो भेजें ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके

Posted by Harsh Deep Singh
Punjab
02-02-2020 09:38 AM
harshdeep ji eh fruit setting vich madad kardi hai ate fasl vich nitrogen ate potash di kami nu poora kardi hai isdi matra 1 kilo nu 150 litre pani de hisab nal spray karo.dhanwad

Posted by parminder
Punjab
02-02-2020 09:38 AM
ਸ਼੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ, ਸਮੇ ਸਮੇ ਤੇ ਕਿਸਾਨਾਂ ਸੀ ਮੰਗ ਦੇ ਮੁਤਾਬਿਕ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਚਲਦਿਆਂ ਹੀ ਰਹਿੰਦੀਆਂ ਹਨ, ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈਣ ਲਾਇ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਜਿਲੇ ਦੇ Krishi Vigyan Kendra
Moga, Village Budh Singhwala, Charik Road, Moga-140001, Punjab – India ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਕੇ, ਆਪਣਾ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਦਾ ਫਾਰਮ ਭਰ ਦਿਓ, ਓਰ ਜਦੋ ਹੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਦੀ ਦਾਤੇ ਰਾਖੀ ਜਾਵੇ ਗਈ ਤੁਹਾਨੂੰ ਕਾਲ ਕਰ ਕੇ ਦਾਸ ਦਿੱਤੋ ਜਾਵੇ ਗਏ, ਧੰਨਵਾਦ

Posted by Udayraj bind
Uttar Pradesh
02-02-2020 09:32 AM
उदयराज जी कृपया आप इसकी साफ़ फोटो भेजे ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद

Posted by Bhullar Sahb
Punjab
02-02-2020 09:28 AM
tuci uss nu heat vich auun te tika bhrwa ke Gestaprogen powder 25 gm rojana 20 din tak dena suru kro, iss nal pashu de gaban rehn di ass vdhh jndi hai .
Posted by pabu koli
Rajasthan
02-02-2020 09:26 AM
Pusa Jwala: इस किस्म के पौधे छोटे कद के, झाड़ियों वाले और हल्के हरे रंग के होते हैं इसके फल 9-10 सैं.मी. लंबे, हल्के हरे और बहुत तीखी होती है यह किस्म थ्रिप और मकौड़ा जुंओं की प्रतिरोधक है इसकी औसतन पैदावार 85 क्विंटल (हरी मिर्चें) और 18 क्विंटल (सूखी मिर्चें) प्रति एकड़ होती है
Pant C-1: यह किस्म अन्य किस्मों से आसानी से अलग है क्.... (Read More)
Pusa Jwala: इस किस्म के पौधे छोटे कद के, झाड़ियों वाले और हल्के हरे रंग के होते हैं इसके फल 9-10 सैं.मी. लंबे, हल्के हरे और बहुत तीखी होती है यह किस्म थ्रिप और मकौड़ा जुंओं की प्रतिरोधक है इसकी औसतन पैदावार 85 क्विंटल (हरी मिर्चें) और 18 क्विंटल (सूखी मिर्चें) प्रति एकड़ होती है
Pant C-1: यह किस्म अन्य किस्मों से आसानी से अलग है क्योंकि इसके फल की फलियां सीधी होती हैं इसके फल अत्याधिक तीखे, आकार में छोटे, आधार चौड़ा और सिरा पतला होता है यह किस्म चितकबरा और पत्ता मरोड़ रोग की कुछ हद तक प्रतिरोधक है इस किस्म की हरी फलियों की औसतन पैदावार 110 क्विंटल प्रति एकड़ होती है सूखी फलियों की पैदावार 20 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Pusa Sadabahar: इसके पौधे सीधे, सदाबहार (2-3 वर्ष), 60-80 सैं.मी. कद के होते हैं इसके फल 6-8 सैं.मी. लंबे होते हैं फल गुच्छों में लगते हैं और प्रत्येक गुच्छे में 6-14 फल होते हैं पकने के समय फल गहरे लाल रंग के और कड़वे होते हैं यह किस्म CMV, TMV और पत्ता मरोड़ की रोधक है इसकी पहली तुड़ाई पनीरी लगाने के 75-80 दिन बाद की जा सकती है इसकी औसतन पैदावार 95 क्विंटल (हरी मिर्चें) और 20 क्विंटल (सूखी मिर्चें) प्रति एकड़ है
NP-46A: यह उच्च उपज वाली किस्म है इसके मध्यम आकार के फल होते हैं इसकी औसतन पैदावार 40 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
G 5 : मिर्च मोटी, चमकदार और गहरे लाल रंग की होती है इसकी औसतन पैदावार 20 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
G 3 : यह बारानी और सिंचित हालातों में उगाने के लिए उपयुक्त किस्म है इस किस्म की मिर्च अत्याधिक तीखी होती है इसकी औसतन पैदावार 16 क्विंटल प्रति एकड़ होती है

Posted by Bhullar Sahb
Punjab
02-02-2020 09:21 AM
ਤੁਸੀ ਉਸਦੀ ਬੱਚੇਦਾਨੀ ਵਿਚ Metricef-IU ਦਵਾਈ 2 ਦਿਨ ਭਰਵਾਓ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ Pregstay gold ਪਾਊਡਰ 30 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਅਤੇ ਜਦੋ ਅਗਲੀ ਵਾਰ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆਵੇ ਫਿਰ ਉਸਦੀ ਹੀਟ ਖਾਲੀ ਛੱਡ ਦਿਓ ਅਤੇ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆਉਣ ਤੋਂ 5 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ Gynarich 5ml ਇੰਜੇਕਸ਼ਨ ਲਗਾਓ ਅਤੇ 7ਵੇ ਦਿਨ Pragma 2ml ਇੰਜੇਕਸ਼ਨ ਲਗਾਓ ਅਤੇ ਫਿਰ 9ਵੇ ਦਿਨ Gynarich 2.5ml ਇੰਜੇਕਸ਼ਨ ਲਗਾਓ ਅਤੇ 10ਵੇ, 11ਵੇ ਦਿਨ ਉਸ ਨੂੰ ਟੀਕਾ ਭਰਵਾਂ ਦ.... (Read More)
ਤੁਸੀ ਉਸਦੀ ਬੱਚੇਦਾਨੀ ਵਿਚ Metricef-IU ਦਵਾਈ 2 ਦਿਨ ਭਰਵਾਓ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ Pregstay gold ਪਾਊਡਰ 30 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਅਤੇ ਜਦੋ ਅਗਲੀ ਵਾਰ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆਵੇ ਫਿਰ ਉਸਦੀ ਹੀਟ ਖਾਲੀ ਛੱਡ ਦਿਓ ਅਤੇ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆਉਣ ਤੋਂ 5 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ Gynarich 5ml ਇੰਜੇਕਸ਼ਨ ਲਗਾਓ ਅਤੇ 7ਵੇ ਦਿਨ Pragma 2ml ਇੰਜੇਕਸ਼ਨ ਲਗਾਓ ਅਤੇ ਫਿਰ 9ਵੇ ਦਿਨ Gynarich 2.5ml ਇੰਜੇਕਸ਼ਨ ਲਗਾਓ ਅਤੇ 10ਵੇ, 11ਵੇ ਦਿਨ ਉਸ ਨੂੰ ਟੀਕਾ ਭਰਵਾਂ ਦਿਓ ਅਤੇ pregstay gold powder 30gm ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ..
Posted by Shiva
Rajasthan
02-02-2020 09:13 AM
इसे मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए निम्नलिखित किस्में पपीते की खेती के लिए उपयुक्त हैं: Pusa Dwarf: इसके फल मध्यम आकार के और अंडाकार होते ह.... (Read More)
इसे मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए निम्नलिखित किस्में पपीते की खेती के लिए उपयुक्त हैं: Pusa Dwarf: इसके फल मध्यम आकार के और अंडाकार होते हैं यह सूखे को सहनेयोग्य किस्म है यह उच्च घनत्व में रोपाई के लिए लाभदायक है Pusa Giant: इस किस्म के पौधे तेज हवा को सहनेयोग्य है यह बड़े फलों का उत्पादन करती है यह पैकिंग के लिए उपयुक्त किस्म है CO 3: इसके फल बड़े आकार के और अंडाकार होते हैं इसे ज्यादा देर तक रखने की गुणवत्ता अच्छी होती है CO 1: यह छोटे कद की किस्म है जिसके फल मध्यम आकार के होते हैं फल गोलाकार, नर्म हरा-पीला छिल्का और संतरी पीले रंग का गुद्दा होता है फल रसदार होता है और इसे ज्यादा देर तक रखने की गुणवत्ता अच्छी होती है Coorg Honey Dew: इसे सीधे तौर पर खाने के लिए और प्रक्रिया के लिए प्रयोग किया जाता है इसके फल आयताकार और गुद्दा मोटा संतरी रंग का होता है CO 2: यह मध्यम आकार की अंडाकार, हरे पीले रंग की किस्म है इसका गुद्दा नर्म और लाल रंग का होता है इसमें रस की मात्रा काफी होती है और इसे ज्यादा देर तक रखने की गुणवत्ता अच्छी होती है Pusa Majesty: इसके फल मध्यम आकार के, गोल होते हैं इन्हें रखने की गुणवत्ता बहुत अच्छी होती है यह किस्म 146 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह किस्म जड़ गलन निमाटोड के प्रतिरोधक किस्म है Pusa Delicious: यह मध्यम लंबी किस्म है इसके फल मध्यम आकार के होते हैं, गुद्दा गहरे संतरी रंग का होता है इस किस्म को कतारों में लगाने के लिए प्रयोग किया जाता है CO 5: यह किस्म दो वर्षों में 75-80 फल प्रति वृक्ष देती है IIHR39 and IIHR54: यह किस्म IIHR, बैंगलोर द्वारा विकसित की गई है इसके फल मध्यम आकार के होते हैं इसमें टी एस एस की मात्रा उच्च होती है Taiwan 785: यह छोटे कद की किस्म है इसके फल आयताकारा और गुद्दा मोटा संतरी रंग का होता है फलों को रखने की गुणवत्ता अच्छी होती है फलों को कतारों में प्रयोग किया जाता है और प्रक्रिया के लिए प्रयोग किया जाता है Taiwan 786: इसके फलों को कतारों में और प्रक्रिया के लिए प्रयोग किया जाता है इसके फल स्वाद और कम बीज वाले होते हैं फलों को रखने की गुणवत्ता बहुत अच्छी होती है Washington: यह कतारों में प्रयोग किए जाने वाली किस्म है इसके फल गोल, मध्यम आकार के और कम बीज वाले होते हैं फल का छिल्का गहरे पीले रंग का होता है नर और मादा पौधे अलग होते हैं Solo: इसके फल छोट, गहरे गुलाबी रंग का गुद्दा होता है, जो कि स्वाद में मीठा होता है यह किस्म कतारों में प्रयोग की जाती है Ranchi: फल आयताकार होते हैं और गुद्दा गहरे पीले रंग का होता है Honey Dew: इस किस्म के फल बड़े आकार के और कम बीज वाले होते हैं फल स्वाद होते हैं और नर पौधे मादा पौधे से छोटे होते हैं इसका पौधा मध्यम कद का होता है पपीते की खेती के लिए नदीन रहित भूमि का प्रयोग करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें आखिरी जोताई के समय अच्छी तरह से गली हुई रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर मिट्टी में अच्छी तरह मिलाकर डालें सिफारिश किए गए फासलों पर 1 मीटर x 1 मीटर x 1 मीटर आकार के गड्ढे खोदें गड्ढों को मिट्टी और रूड़ी की खाद या गाय के गले हुए गोबर से भरें प्रयोग की गई किस्म के आधार पर प्रत्येक गड्ढे पर 2-4 नए पौधों की रोपाई करें रोपाई के बाद हल्की सिंचाई करें हवा से बचाव के लिए खूंटा लगाएं बीजों को 150 गेज़ की मोटाई वाले, 25 x 10 सैं.मी. के पॉलीथीन बैग में बोयें पानी के उचित निकास के लिए पॉलीथीन बैग के निचले हिस्से में 1 मि.मी. अर्द्धव्यास का छेद करें उसके बाद पॉलीथीन बैग में समान अनुपात में रूड़ी की खाद, मिट्टी और रेत डालें बिजाई से पहले बीजों का उपचार करें रोपाई के लिए 6-7 सप्ताह के पौधों का प्रयोग करें यूरिया 150 ग्राम, फासफोरस 80 ग्राम, पोटाश 100 ग्राम प्रति वृक्ष में प्रति वर्ष डालें खादों को 4 भागों में बांटकर रोपाई के बाद पहले, तीसरे, पांचवे और सातवें महीने में डालें बसंत के मौसम में फरवरी मार्च के महीने में बिजाई करें जबकि मॉनसून के मौसम में बिजाई के लिए जून जुलाई का महीना उपयुक्त होता है और पतझड़ के मौसम में बिजाई अक्तूबर से नवंबर महीने में की जाती है आमतौर पर 1.8 मीटर x 1.8 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है उच्च घनता की रोपाई के लिए 1.5 मीटर x 1.5 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है नर्सरी में बीज को 1 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बीजो की खेत में सीधे बिजाई या मुख्य खेत में नए पौधों की रोपाई की जाती है 100-120 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें मिट्टी की किस्म, जलवायु के हालातों आदि के आधार पर सिंचाई करें सर्दियों में 15 दिनों के अंतराल पर और गर्मियों में 7 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें तने को पानी के संपर्क में ना आने दें और खेत में पानी भी खड़ा ना होने दें पौधे की प्रौढ़ अवस्था के दौरान नदीनों की रोकथाम जरूरी होती है नदीनों की तीव्रता के आधार पर, नियमित और हल्की गोडाई करें फ्लूक्लोरालिन या बूटाक्लोर 800 मि.ली. प्रति एकड़ में डालें नदीनों की रोकथाम के लिए मलचिंग भी एक प्रभावी तरीका है पौधों की रोपाई के कुछ दिनों बाद प्लास्टिक शीट या धान की पराली या गन्ने के बचे कुचे को मलच के रूप में डालें मादा पौधे को निकालना: प्रत्येक 10 पौधों के लिए 1 नर पौधा, बनाए रखने के लिए फूल निकलने के बाद नर पौधों को निकाल दें मुख्यत: फल के पूरा आकार लेने और हरे से हल्का पीला रंग होने पर तुड़ाई की जाती है पहली तुड़ाई रोपाई के 14-15 महीनों के बाद की जा सकती है 4-5 तुड़ाइयां प्रति मौसम की जा सकती हैं
Posted by Karanveer
Punjab
02-02-2020 09:12 AM
ਇਸ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲਈ ਰਜਿਸ਼ਟ੍ਰੇਸ਼ਨ ਫੀਸ ਲੱਗਦੀ ਹੈ ਜੋ ਕਿ ਲੱਗਭੱਗ 50 ਰੁਪਏ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜੀ

Posted by mukna ram
Rajasthan
02-02-2020 09:12 AM
मुकना जी आप इसके ऊपर NPK 130045 @1 किलो को 150 लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद

Posted by mukna ram
Rajasthan
02-02-2020 09:10 AM
mukna ji aap iske uper NPK 130045@1 kilo ko 150 litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by ashish soni
Madhya Pradesh
02-02-2020 08:41 AM
बढ़िया वर्मी कंपोस्ट निम्नलिखित तरीके अनुसार बनायी जा सकती है इसलिए ऐसा स्थान लें जहां धूप ना आये और हवादार हो
इस स्थान पर ईंटों या पत्थर के टुकड़े और मिट्टी की 2—3 इंच मोटी परत बिछायें
मिट्टी पर थोड़ा सा पानी छिड़ककर गीला करें मिट्टी में 25 प्रतिशत से अधिक नमी नहीं होनी चाहिए
इसके ऊपर गंडोए (40 गंडोए प्रति .... (Read More)
बढ़िया वर्मी कंपोस्ट निम्नलिखित तरीके अनुसार बनायी जा सकती है इसलिए ऐसा स्थान लें जहां धूप ना आये और हवादार हो
इस स्थान पर ईंटों या पत्थर के टुकड़े और मिट्टी की 2—3 इंच मोटी परत बिछायें
मिट्टी पर थोड़ा सा पानी छिड़ककर गीला करें मिट्टी में 25 प्रतिशत से अधिक नमी नहीं होनी चाहिए
इसके ऊपर गंडोए (40 गंडोए प्रति वर्ग फीट जगह) में मिलायें
इसके बाद वेस्ट जैसे कि बची कुची सब्जियां, फल, कच्चा गोबर, गोबर की सलरी की 8—10 इंच मोटी परत डालें दूसरी परत के बाद इसके ऊपर सूखे पत्ते या पराली से ढक दें हर परत के बाद पानी छिड़कें ताकि नमी बनी रहे
वर्मीकंपोस्ट के बैड को 3—4 इंच मोटी गोबर की परत से ढक दें और इसके ऊपर बोरा या तिरपाल रखें ताकि नमी बनी रहे
रसोई, फसलों या डेयरी के बचे कुचे की परत को रैक से पलटते रहें और आवश्यकतानुसार थोड़ा थोड़ा करके और वेस्ट भी डाल सकते हैं इसके ऊपर कच्चा गोबर भी डाल सकते हैं पर ध्यान रखें कि यह परत पहले जितनी ही मोटी रहें
वर्मी कंपोस्ट की खाद मौसम के हिसाब से 45—60 दिनों में तैयार हो जाती है सबसे ऊपर वाली परत को हटाकर गंडोए छलनी से अलग कर लें और निचली छोड़ दें इसके ऊपर दोबारा रसोई या एग्रो वेस्ट की 6 इंच मोटी परत बिछाकर दोबारा खाद तैयार की जा सकती हैं 45 दिनों के बाद पानी छिड़कना बंद करने से भी गंडोए निचली परत में चले जाते हैं और छलनी से अलग करने में समय कम लगता है तैयार वर्मी कंपोस्ट काले भूरे रंग की गंध रहित और चाय पत्ती जैसी होती है इसे छांव में हवा में सुखकर आवश्यकतानुसार थैले या बोरियों में डालकर रखा जा सकता है एक टन वर्मी कंपोस्ट में 1.0—1.5 किलोग्राम नाइट्रोजन, 5—10 किलोग्राम पोटाश और 3.5—5.0 किलो फासफोरस होता है इसके अलावा इसमें कई तरह के एन्ज़ाइम और सूक्ष्म तत्व कॉपर, आयरन, जिंक, सल्फर, कैलशियम और मैगनीशियम आदि होते हैं

Posted by dashrath singh aanjana
Madhya Pradesh
02-02-2020 08:31 AM
शुरुआत में नए पौधे धीरे-धीरे बढ़ते है इसलिए नुकसान से बचाव के लिए गोड़ाई की जगह रासायनिक नदीन-नाशक का प्रयोग करें रोकथाम के लिए बिजाई से 72 घंटे में पेंडीमैथालीन(स्टंप) 1 लीटर को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में स्प्रे करें नदीनों के अंकुरण उपरांत बिजाई से 7 दिन बाद आक्सीफ्लोरफैन 425 मि.ली. को 200 लीटर पानी में म.... (Read More)
शुरुआत में नए पौधे धीरे-धीरे बढ़ते है इसलिए नुकसान से बचाव के लिए गोड़ाई की जगह रासायनिक नदीन-नाशक का प्रयोग करें रोकथाम के लिए बिजाई से 72 घंटे में पेंडीमैथालीन(स्टंप) 1 लीटर को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में स्प्रे करें नदीनों के अंकुरण उपरांत बिजाई से 7 दिन बाद आक्सीफ्लोरफैन 425 मि.ली. को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में स्प्रे करें नदीनों की रोकथाम के लिए 2-3 गोड़ाईयों की सिफारिश की जाती है पहली गोड़ाई बिजाई से एक महीने बाद और दूसरी गोड़ाई, पहली से एक महीने बाद करें

Posted by gurpreet
Punjab
02-02-2020 08:30 AM
Gurpeet ji tuci uss nu heifer dry feed 1.5 kg tak rojana de skde ho ate uss nu ovumin gold powder 70 gram rojana ek time de skde ho.
Posted by gurdeep
Punjab
02-02-2020 08:21 AM
ਹਾਂਜੀ ਤੁਸੀ ਮੱਝਾਂ ਅਤੇ ਗਾਵਾਂ ਲਈ ਕਣਕ ਦਾ ਆਚਾਰ ਪਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ..
Posted by Jagroop singh
Punjab
02-02-2020 08:20 AM
ਜਗਰੂਪ ਜੀ ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ ਗੁਰੂ ਅੰਗਦ ਦੇਵ ਵੈਟਨਰੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਲੁਧਿਆਣਾ ਲੈ ਜਾਓ ਉਥੇ ਇਸਦੀ ਸਹੀ ਜਾਂਚ ਕਰਕੇ ਵਧਿਆ ਇਲਾਜ ਹੋ ਜਾਵੇਗਾ
Posted by Bikramjeet Singh
Punjab
02-02-2020 08:01 AM
ਹੰਜੀ ਤੁਸੀਂ ਖੀਰੇ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਹੁਣ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋਂ ਇਸਦੀ ਬਿਜਾਈ ਫਰਵਰੀ-ਮਾਰਚ ਦੇ ਮਹੀਨੇ ਵਿੱਚ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਇਸਦੀ ਬਿਜਾਈ ਜੂਨ-ਜੁਲਾਈ ਵਿੱਚ ਵੀ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ

Posted by Brij Bihari
Uttar Pradesh
02-02-2020 07:37 AM
ब्रिज जी कृपया बताएं कि आपको फसल की बिजाई किये हुए कितने दिन हो गए है ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by Gurdeep Kasana
Haryana
02-02-2020 07:30 AM
Aap uski bachedani mai Utrawin-oz dwai bhrwayen aur usko Keeper plus powder 30gm rojana aur Pg care tablet rojana 1 goli den aur 21 din tak dete rehen fir agli varr heat mai anne per AI krwa ker powder aur tablet dete rehen, isse woh gabhin ho jayegi..

Posted by vikram gahlley
Punjab
02-02-2020 07:16 AM
shrimaan g fodder makki di beejayi march de first week vich kr skde ho g..

Posted by preeti
Uttar Pradesh
02-02-2020 07:12 AM
रेशम के उत्पादन के लिए कीड़े की परवरिश की जाती है कीड़े के लिए कई व्यापारिक प्रजातियां हैं बंबिक्स मोरी पालतू रेशम कीट के टोके व्यापक रूप से प्रयोग किए जाते हैं आज चीन और भारत दो मुख्य उत्पादक, संसार के वार्षिक उत्पादन का अधिक 60 प्रतिशत है रेशम के कीट को शहतूत के पत्ते खिलाये जाते हैं रेशम के कीड़ें अंडों म.... (Read More)
रेशम के उत्पादन के लिए कीड़े की परवरिश की जाती है कीड़े के लिए कई व्यापारिक प्रजातियां हैं बंबिक्स मोरी पालतू रेशम कीट के टोके व्यापक रूप से प्रयोग किए जाते हैं आज चीन और भारत दो मुख्य उत्पादक, संसार के वार्षिक उत्पादन का अधिक 60 प्रतिशत है रेशम के कीट को शहतूत के पत्ते खिलाये जाते हैं रेशम के कीड़ें अंडों में से 25 दिन में बाहर आ जाते हैं यह तापमान पर निर्भर करता है यह लगातार पत्ते खाते हैं और इन्हें दिन में दो बार पत्ते खिलाए जाते हैं इन्हें साफ वातावरण में रखा जाता है रेशम के कीड़े को 48 घंटे लग जाते हैं यह ज्यादातर कर्नाटक में की जाती है

Posted by Dhiraj
Punjab
02-02-2020 07:06 AM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੇਕਰ ਫਲ ਡਿਗ ਰਿਹਾ ਹੈ ਤਾਂ ਪੌਦਿਆਂ ਦੇ ਉੱਪਰ planofix 4 ਮਿਲੀਲੀਟਰ ਨੂੰ 15 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਪਾ ਕੇ ਪੌਦਿਆਂ ਦੇ ਉੱਪਰ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਇਹ ਸਪਰੇ ਫਲ ਝੜਨ ਤੋਂ ਰੋਕਦੀ ਹੈ I

Posted by shree nag
Odisha
02-02-2020 07:02 AM
Shri maan g yeh fungus ka attack hai iski roktham ke liye aap M-45@500 gm per acre spray kr skte ho....
Posted by ਅਮਰਿੰਦਰ ਸਿੰਘ
Punjab
02-02-2020 06:43 AM
tuci uss nu pett de kiria lai Flukarid-Ds bolus deo atee uss nu Agrimin powder 50gm rojana ate Sharkoferol liquid 50-50ml swere sham deo, iss nal frak paa jawega.
Posted by Onkar Singh Dhugga
Punjab
02-02-2020 06:43 AM
ਬਸੰਤ ਰੁੱਤ ਦੀ ਫਸਲ ਫਰਵਰੀ ਦੇ ਅੰਤ ਤੋਂ ਅੰਤ ਮਾਰਚ ਤੱਕ ਬੀਜੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਬੇਬੀ ਕੋਰਨ ਦਸੰਬਰ-ਜਨਵਰੀ ਨੂੰ ਛੱਡ ਕੇ ਬਾਕੀ ਸਾਰਾ ਸਾਲ ਬੀਜੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਹਾੜੀ ਅਤੇ ਸਾਉਣੀ ਦੀ ਰੁੱਤ ਸਵੀਟ ਕੌਰਨ ਲਈ ਸਭ ਤੋਂ ਵਧੀਆ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਵੱਧ ਝਾੜ ਲੈਣ ਲਈ ਸਰੋਤਾਂ ਦੀ ਸਹੀ ਵਰਤੋਂ ਅਤੇ ਪੌਦਿਆਂ ਵਿੱਚ ਸਹੀ ਫਾਸਲਾ ਹੋਣਾ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਸਾਉਣੀ ਦੀ ਮੱਕੀ ਲਈ:- 60x20 ਸੈਂ.ਮੀ. ਬੀਜਾਂ ਨੂੰ 3-4 ਸੈ.ਮੀ. ਡੂੰਘਾਈ ਵਿ.... (Read More)
ਬਸੰਤ ਰੁੱਤ ਦੀ ਫਸਲ ਫਰਵਰੀ ਦੇ ਅੰਤ ਤੋਂ ਅੰਤ ਮਾਰਚ ਤੱਕ ਬੀਜੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਬੇਬੀ ਕੋਰਨ ਦਸੰਬਰ-ਜਨਵਰੀ ਨੂੰ ਛੱਡ ਕੇ ਬਾਕੀ ਸਾਰਾ ਸਾਲ ਬੀਜੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਹਾੜੀ ਅਤੇ ਸਾਉਣੀ ਦੀ ਰੁੱਤ ਸਵੀਟ ਕੌਰਨ ਲਈ ਸਭ ਤੋਂ ਵਧੀਆ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਵੱਧ ਝਾੜ ਲੈਣ ਲਈ ਸਰੋਤਾਂ ਦੀ ਸਹੀ ਵਰਤੋਂ ਅਤੇ ਪੌਦਿਆਂ ਵਿੱਚ ਸਹੀ ਫਾਸਲਾ ਹੋਣਾ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਸਾਉਣੀ ਦੀ ਮੱਕੀ ਲਈ:- 60x20 ਸੈਂ.ਮੀ. ਬੀਜਾਂ ਨੂੰ 3-4 ਸੈ.ਮੀ. ਡੂੰਘਾਈ ਵਿੱਚ ਬੀਜੋ ਸਵੀਟ ਕੌਰਨ ਦੀ ਬਿਜਾਈ 2.5 ਸੈ.ਮੀ. ਡੂੰਘਾਈ ਵਿੱਚ ਕਰੋ ਬਿਜਾਈ ਹੱਥੀਂ ਟੋਆ ਪੁੱਟ ਕੇ ਜਾਂ ਆਧੁਨਿਕ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਟ੍ਰੈਕਟਰ ਅਤੇ ਸੀਡ ਡਰਿੱਲ ਦੀ ਮਦਦ ਨਾਲ ਵੱਟਾਂ ਬਣਾ ਕੇ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਖੇਤ ਦੀ ਤਿਆਰੀ ਸਮੇਂ, 20-25 ਟਨ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾਓ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ ਦੇ ਨਾਲ-ਨਾਲ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ 50 ਕਿਲੋ(ਯੂਰੀਆ 110 ਕਿਲੋ), ਫਾਸਫੋਰਸ 25 ਕਿਲੋ(ਸਿੰਗਲ ਸੁਪਰ ਫਾਸਫੇਟ 175 ਕਿਲੋ) ਅਤੇ ਪੋਟਾਸ਼ੀਅਮ 12 ਕਿਲੋ(ਮਿਊਰੇਟ ਆਫ ਪੋਟਾਸ਼ 20 ਕਿਲੋ) ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਪਾਓ
ਪੋਟਾਸ਼ੀਅਮ ਅਤੇ ਫਾਸਫੋਰਸ ਦੀ ਪੂਰੀ ਮਾਤਰਾ ਅਤੇ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ਦੀ 1/3 ਮਾਤਰਾ ਕਤਾਰਾਂ ਵਿੱਚ ਰੋਪਣ ਤੋਂ ਕੁੱਝ ਸਮਾਂ ਪਹਿਲਾਂ ਪਾਓ ਅਤੇ ਬਾਕੀ ਬਚੀ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ਦੋ ਬਰਾਬਰ ਹਿੱਸਿਆਂ ਵਿੱਚ ਪਾਓ, ਪਹਿਲਾ ਹਿੱਸਾ ਰੋਪਣ ਤੋਂ ਇੱਕ ਮਹੀਨੇ ਬਾਅਦ ਅਤੇ ਦੂਜਾ ਰੋਪਣ ਤੋਂ ਦੋ ਮਹੀਨੇ ਬਾਅਦ
Posted by ਨਵਪਰੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
02-02-2020 06:35 AM
ਨਵਪ੍ਰੀਤ ਜੀ ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ ਦੁੱਧ ਵਾਲੇ ਟੀਕੇ ਲਗਵਾਉਣ ਲਈ ਆਪਣੇ ਨਜ਼ਦੀਕੀ ਡਾਕਟਰ ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਉਹ ਪਸ਼ੂ ਦੀ ਜਾਂਚ ਕਰਕੇ ਉਸ ਨੂੰ ਇੰਜੇਕਸ਼ਨ ਲਗਾ ਦੇਣਗੇ ..

Posted by gurmukh Singh
Punjab
02-02-2020 04:53 AM
ਪਸ਼ੂਆਂ ਨੂੰ ਘਰ ਵਿਚ ਫੀਡ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਦੇਣੀ ਹੈ ਤਾਂ ਸੰਤੁਲਿਤ ਖੁਰਾਕ 100 ਕਿਲੋ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਲੋੜੀਂਦੀ ਸਮੱਗਰੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਜਿਵੇਂ 25 ਕਿਲੋ ਅਨਾਜ ( ਜਵਾਰ, ਬਾਜਰੀ (ਸਰਦੀਆਂ) , ਕਣਕ, ਜੌਂ ( ਗਰਮੀਆ) ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਕੋਈ ਇੱਕ ) , ਦਾਲ ਚੂਰੀ 20 ਕਿਲੋ( ਮੂੰਗੀ ਚੂਰੀ, ਮਾਂਹ ਚੂਰੀ, ਮੋਠ ਚੂਰੀ ( ਕੇਵਲ ਸਰਦੀਆਂ ਲਈ) , ਮਸੁਰ ਚੂਰੀ ,ਅਰਹਰ, (ਇਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਇੱਕ ) , DOC 25 ਕਿਲੋ ( ਚੌਲਾਂ ਦਾ ਚੂਰਾ ) , ਫਾਈਬਰ ਛਿਲਕਾ 15 ਕ.... (Read More)
ਪਸ਼ੂਆਂ ਨੂੰ ਘਰ ਵਿਚ ਫੀਡ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਦੇਣੀ ਹੈ ਤਾਂ ਸੰਤੁਲਿਤ ਖੁਰਾਕ 100 ਕਿਲੋ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਲੋੜੀਂਦੀ ਸਮੱਗਰੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਜਿਵੇਂ 25 ਕਿਲੋ ਅਨਾਜ ( ਜਵਾਰ, ਬਾਜਰੀ (ਸਰਦੀਆਂ) , ਕਣਕ, ਜੌਂ ( ਗਰਮੀਆ) ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਕੋਈ ਇੱਕ ) , ਦਾਲ ਚੂਰੀ 20 ਕਿਲੋ( ਮੂੰਗੀ ਚੂਰੀ, ਮਾਂਹ ਚੂਰੀ, ਮੋਠ ਚੂਰੀ ( ਕੇਵਲ ਸਰਦੀਆਂ ਲਈ) , ਮਸੁਰ ਚੂਰੀ ,ਅਰਹਰ, (ਇਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਇੱਕ ) , DOC 25 ਕਿਲੋ ( ਚੌਲਾਂ ਦਾ ਚੂਰਾ ) , ਫਾਈਬਰ ਛਿਲਕਾ 15 ਕਿਲੋ (ਕਣਕ, ਚੌਕਰ, ਚਨਾ ਛਿਲਕਾ, ਮਟਰ ਛਿਲਕਾ, ਇਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਇੱਕ) , ਖਲ਼ 15 ਕਿਲੋ(ਸਰੋਂ, ਬਿਨੌਲਾ ਜਾਂ ਸੋਇਆ (ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਕੋਈ ਇੱਕ) , ਮਿੱਠਾ ਸੋਡਾ 250 ਗ੍ਰਾਮ, 1 ਕਿਲੋ ਨਮਕ, ਗੁੜ 1 ਕਿਲੋ, 1 ਕਿੱਲੋ ਹਲਦੀ (ਸਰਦੀਆ ਵਿੱਚ ) ਇਹ ਨੂੰ ਰਲਾ ਲਵੋ ਇਹ ਫੀਡ ਪਸ਼ੂ ਲਈ ਬਹੁਤ ਲਾਹੇਵੰਦ ਹੁੰਦੀ ਹੈ..

Posted by Akbar Ali khan
Uttar Pradesh
02-02-2020 04:30 AM
खान जी आप ब्रायलर को फीड तैयार करने के लिए मक्की 40 किलो, सोयावीन का चूरा 25 किलो, चावल पोलिश 8 किलो, मुंगफली की खली 5 किलो, गेहूं 21 किलो, नमक 200 ग्राम, मिर्नल मिक्सर्च 50 ग्राम, B12 विटामिन 15 ग्राम, B-complex 20 ग्राम, A,B,D, K विटामिन 15 ग्राम को मिक्स करके तैयार कर सकते है

Posted by balram Thakur
Punjab
02-02-2020 03:47 AM
balram ji isde kayi kaarn ho sakde han kirpa karke kank di photo bhejo ate eh daso ke tuc isde vich kehdi kehdi khaad payi hai ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake,dhanwad

Posted by balram Thakur
Punjab
02-02-2020 03:40 AM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਆਪਣਾ ਸਵਾਲ ਵਿਸਥਾਰਪੂਰਵਕ ਪੁੱਛੋ ਤਾਂ ਕਿ ਇਸਦੀ ਸਹੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿੱਤੀ ਜਾਵੇ
Posted by Paritosh kumar sah
Bihar
02-02-2020 01:12 AM
Paritosh ji ICAR ka mela 1-3 march ko ho raha hai.dhanywad

Posted by Ajay badode
Madhya Pradesh
02-02-2020 01:04 AM
Ajay ji aap Apni kheti App ko share karen jis se aap 1 lakh tak ke inam kma sakte hai.dhanywad

Posted by Radheshyam
Madhya Pradesh
02-02-2020 12:08 AM
Radheshyam ji meri fasal mera boyra me register karne ke lia aap www.fasalhry.in par jae, is ke bare puri jankari ke lia aap niche dia gae link par jae https://www.youtube.com/watch v=-qLlAErb0bo&t=62s
Posted by Hemant Choudhary
Rajasthan
02-02-2020 12:07 AM
हेमंत जी किसानो के साथ जानकारी share करने के लिए धन्यवाद
Posted by Hemant Choudhary
Rajasthan
02-02-2020 12:04 AM
हेमंत जी किसानो के साथ जानकारी share करने के लिए धन्यवाद
Posted by ਹਰਪ੍ਰੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
01-02-2020 11:50 PM
hapreet ji tuc sabjiyan lga sakde ho ja 15 february to tuc makki di bijai kar sakde ho.dhanwad

Posted by bahar
Uttar Pradesh
01-02-2020 11:39 PM
श्रीमान जी, मिटटी की जाँच आप अपने नजदीकीKrishi Vigyan Kendra,
Rustam Nagar Sahaspur, Tehsil – Bilari, Distt.- Moradabad - (U.P.), INDIA, PIN - 202 411, Tel. No.: 05921 - 270044, Email : moradabadkvk@gmail.com से करवा सकते हैं, मिटटी का नमूना लें लेने के लिए एक एकड़ क्षेत्र में लगभग 8-10 स्थानों से ‘V’ आकार के 6 इंच गहरे गहरे गढ्ढे बनायें एक खेत के सभी स्थानों से प्राप्त मिट्टी को एक साथ मिलाकर ½ किलोग्राम का एक सन्य.... (Read More)
श्रीमान जी, मिटटी की जाँच आप अपने नजदीकीKrishi Vigyan Kendra,
Rustam Nagar Sahaspur, Tehsil – Bilari, Distt.- Moradabad - (U.P.), INDIA, PIN - 202 411, Tel. No.: 05921 - 270044, Email : moradabadkvk@gmail.com से करवा सकते हैं, मिटटी का नमूना लें लेने के लिए एक एकड़ क्षेत्र में लगभग 8-10 स्थानों से ‘V’ आकार के 6 इंच गहरे गहरे गढ्ढे बनायें एक खेत के सभी स्थानों से प्राप्त मिट्टी को एक साथ मिलाकर ½ किलोग्राम का एक सन्युक्त नमूना बनायें नमूने की मिट्टी से कंकड़, घास इत्यादि अलग करें सूखे हुए नमूने को कपड़े की थैली में भरकर कृषक का नाम, पता, खसरा संख्या, मोबाइल नम्बर, आधार संख्या, उगाई जाने वाली फसलों आदि का ब्यौरा दें नमूना प्रयोगशाला को प्रेषित करें अथवा’ ‘परख’ मृदा परीक्षण किट द्वारा स्वयं परीक्षण करें , धन्यवाद

Posted by bahar
Uttar Pradesh
01-02-2020 11:34 PM
श्री मान इसकी रोकथाम के लिए आप M-45@500 ग्राम प्रती एकड़ सप्रे कर सकते हो
Posted by Ranjit Singh
Punjab
01-02-2020 11:12 PM
ਤੁਸੀ Ovulenta kit ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਇਸ ਵਿਚ 2 ਨੀਲੀਆਂ ਅਤੇ 1 ਸਫੇਦ ਗੋਲੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਪਹਿਲਾ ਤੁਸੀ 2 ਨੀਲੀਆਂ ਗੋਲੀਆਂ ਕੁੱਟ ਕੇ ਪਾਊਡਰ ਬਣਾ ਕੇ ਰੋਟੀ ਵਿਚ ਦਿਓ ਫਿਰ 10 ਮਿੰਟ ਬਾਦ ਸਫੇਦ ਗੋਲੀ ਦਿਓ, ਇਸ ਤ੍ਰਾਹ ਤੁਸੀ 5 ਦਿਨ ਦਵਾਈ ਦਿਓ, ਜੇਕਰ ਉਹ ਦਵਾਈ ਦੇਣ ਨਾਲ ਪਤਲੀਆਂ ਤਾਰਾ ਕਰਦੀ ਹੈ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ ਟੀਕਾ ਭਰਵਾਂ ਦਿਓ ਜੀ
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