
Posted by sarpanch
Punjab
02-02-2020 10:21 PM
ਸਰਪੰਚ ਜੀ ਤੁਸੀ ਕਿਸਮ j1006 ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਸਦੀ ਬਿਜਾਈ 15 ਫਰਵਰੀ ਤੋਂ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਸਦਾ ਝਾੜ 165 ਕੁਇੰਟਲ ਨਿਕਲਦਾ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Gurnishan Singh Dhillon
Punjab
02-02-2020 09:55 PM
ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਮਿਨਰਲ ਮਿਕਸਚਰ ਸੂਣ ਤੋਂ 15 ਦਿਨ ਪਹਿਲਾ ਤਕ ਦੇਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਫਿਰ ਸੂਣ ਤੋਂ 5-7 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦੇਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਇਹ ਰੋਜਾਨਾ 50-100 ਗ੍ਰਾਮ ਪਸ਼ੂ ਦੇ ਦੁੱਧ ਅਤੇ ਉਸਦੀ ਗਰੋਥ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਦੇਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ
Posted by vikram Singh
Rajasthan
02-02-2020 09:47 PM
Shri maan g channa mein fall ke liye aap NPK 13:00:45@1kg per acre 150 litre paani mein spray kr skte ho....
Posted by Lukesh verma
Chattisgarh
02-02-2020 09:38 PM
श्री मान मिर्च में फूल और फल के लिए आप NPK 13:0:45@1kg प्रती एकड़ 150लीटर पानी में मिलाकर सप्रे कर सकते हो

Posted by chandeshwar paswan
Bihar
02-02-2020 09:37 PM
Shri maan g yeh batayein ki apki fassal mein kon si samasya hai toh aapko poori jankari di ja ske....
Posted by Jagandeep singh
Punjab
02-02-2020 09:36 PM
जगनदीप जी यह बहुत जरूरी होती है क्योंकि काट छाट के बिना पौधों से बीमारी या मरी हुई शाखाएं नहीं निकाली जा सकती है और इसका उपज पर बुरा असर होता है

Posted by Harmander Singh Brar
Punjab
02-02-2020 09:35 PM
ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ Dettol liquid 100ml ਰੋਜਾਨਾ ਇਕ ਇਕ ਦਿਨ ਦੇ ਫਰਕ ਨਾਲ 3 ਵਾਰ ਦਿਓ, ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ Mamidium ਪਾਊਡਰ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ 3 ਦਿਨ ਤਕ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ

Posted by vikram singh
Punjab
02-02-2020 09:28 PM
Vikram ji Calf nu janam ton 7 din bad pett de kiria lai Albomar liquid 10-10ml krke 3 din deo ate fir her 1-1 month badd salt change krke usde weight ate growth de hisab nal deworming kro ji..
Posted by विकास
Rajasthan
02-02-2020 09:03 PM
श्री मान ्याज़ एक प्रसिद्ध व्यापक सब्जी वाली प्रजाति है इसकी खेती अलग-अलग किस्म की मिट्टी जैसे की रेतली दोमट, चिकनी, गार और भारी मिट्टी में की जा सकती है यह गहरी दोमट और जलोढ़ मिट्टी, जिसका निकास प्रबंध बढ़िया, नमी को बरकरार रखने की समर्थता, जैविक तत्वों वाली मिट्टी में बढ़िया परिणाम देती है विरली और रेतली मिट्ट.... (Read More)
श्री मान ्याज़ एक प्रसिद्ध व्यापक सब्जी वाली प्रजाति है इसकी खेती अलग-अलग किस्म की मिट्टी जैसे की रेतली दोमट, चिकनी, गार और भारी मिट्टी में की जा सकती है यह गहरी दोमट और जलोढ़ मिट्टी, जिसका निकास प्रबंध बढ़िया, नमी को बरकरार रखने की समर्थता, जैविक तत्वों वाली मिट्टी में बढ़िया परिणाम देती है विरली और रेतली मिट्टी इसकी खेती के लिए बढ़िया नहीं मानी जाती है, क्योंकि मिट्टी के घटिया जमाव के कारण इसमें गांठों का उत्पादन सही नहीं होता है इसकी खेती के लिए मिट्टी का pH 6-7 होना चाहिए प्रसिद्ध किस्में:-alyanpur Red Round: यह उत्तर प्रदेश की प्रसद्धि किस्म है इसकी गांठे भूरे रंग की और गोलाकार आकार की होती हैं इसके पौधे 150-160 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं इसकी औसतन पैदावार 8-10 टन प्रति एकड़ होती है Bhima Shakti: यह खरीफ के साथ साथ रबी के मौसम में उगाने के लिए उपयुक्त है यह किस्म रोपाई के 130 दिन बाद कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावारा 170 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Arka Kalyan: इसकी गांठे गहरे गुलाबी रंग की होती हैं इसकी औसतन पैदावार 135 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa White Round: इसकी गांठे सफेद, गोल और समतल होती हैं इसकी औसतन पैदावार 120 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa white flat: इसकी गांठे सफेद, चपटी और मध्यम से बड़े आकार की होती हैं यह किस्म डीहाइड्रेशन के लिए उपयुक्त है मिट्टी को भुरभुरा बनाने के लिए तीन-चार बार गहराई से जोताई करें मिट्टी में जैविक तत्वों की मात्रा बढ़ाने के लिए रूड़ी की खाद डालें फिर खेत को छोटे-छोटे प्लाटों में बांट दे नर्सरी तैयार करने के उचित समय मध्य-अक्तूबर से मध्य-नवबंर होता है नए पौधे मध्य-दिसंबर से मध्य-जनवरी तक रोपाई के लिए तैयार हो जाते है रोपाई के लिए 10-15 सैं.मी. कद के पौधे चुनें खरीफ के मौसम में रोपाई के लिए मई से जून का महीना नर्सरी तैयार करने के लिए उपयुक्त होता है बिजाई के 6-8 सप्ताह बाद नए पौधे रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं जुलाई -अगस्त के महीने में रोपण कर दें रोपण के समय, पंक्तियों के बीच 15 सैं.मी. और पौधों के बीच 10 सैं.मी. का फासला रखें नर्सरी में बीज 1-2 सैं.मी. गहराई पर बोयें बिजाई के लिए रोपण विधि का प्रयोग करें एक एकड़ के लिए 2-3 किलो बीज का प्रयोग करें उखेड़ा रोग और कांव-गियारी से बचाव के लिए थीरम 2 ग्राम+बैनोमाइल 50 डब्लयू पी 1 ग्राम प्रति लीटर पानी से प्रति किलो बीजों का उपचार करें रासायनिक उपचार के बाद बायो एजेंट ट्राईकोडर्मा विराइड 2 ग्राम के साथ प्रति किलो बीजों का उपचार करने की सिफारिश की जाती है इस तरह करने से नए पौधे मिट्टी से पैदा होने वाली और अन्य बीमारीयों से बच जाते है बिजाई से 10 दिन पहले 20 टन रूड़ी की खाद डालें नाइट्रोजन 30 किलो(यूरिया 65 किलो), फासफोरस 16 किलो(सिंगल सुपर फासफेट 100 किलो) और पोटाश 16 किलो(मिउरेट ऑफ़ पोटाश 30 किलो) प्रति एकड़ डालें फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा रोपण के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटकर रोपाई के बाद टॉप ड्रेसिंग के तौर पर 30वें और 45वें दिन डालें मिट्टी की किसम और जलवायु के आधार पर सिंचाई की मात्रा और आवर्ती का फैसला करें आमतौर पर, इसे 5-8 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है पहली सिंचाई बिजाई के तुरंत बाद करें और दूसरी सिंचाई रोपाई के तीन दिन बाद करें बाकी की सिंचाई आवश्यकता और मिट्टी में नमी के आधार पर 7-10 दिनों के अंतराल पर करें पुटाई के 10-15 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें अत्याधिक सिंचाई ना करें शुरुआत में नए पौधे धीरे-धीरे बढ़ते है इसलिए नुकसान से बचाव के लिए गोड़ाई की जगह रासायनिक नदीन-नाशक का प्रयोग करें रोकथाम के लिए बिजाई से 72 घंटे में पेंडीमैथालीन(स्टंप) 1 लीटर को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में स्प्रे करें नदीनों के अंकुरण उपरांत बिजाई से 7 दिन बाद आक्सीफ्लोरफैन 425 मि.ली. को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में स्प्रे करें नदीनों की रोकथाम के लिए 2-3 गोड़ाईयों की सिफारिश की जाती है पहली गोड़ाई बिजाई से एक महीने बाद और दूसरी गोड़ाई, पहली से एक महीने बाद करें सही समय पर पुटाई करना बहुत जरूरी है पुटाई का समय किस्म,ऋतु,मंडी रेट आदि पर निर्भर करता है 50% पौधे की पत्तियां नीचे की तरफ गिरना दर्शाता है कि फसल पुटाई के लिए तैयार है फसल की पुटाई हाथों से प्याज़ को उखाड़ कर की जाती है पुटाई के बाद इनको 2-3 दिन के लिए अनावश्यक नमी निकालने के लिए खेत में छोड़ दे

Posted by mahendra kumar saw
Jharkhand
02-02-2020 08:55 PM
बत्तख पालन करने से पहले उसके नस्लों(breeds) का selection कर लेना चाहिए Business के purpose से बत्तख पालन करने के लिए बत्तख की दो नस्ले प्रमुख हैं एक अधिक अंडा देने वाली और दूसरी अधिक मांस देने वाली, जो की इस प्रकार हैअंडा देने वाली नस्ले (लेयर / Egg) • इंडियन रनर– ये medium आकार के होते है और इनकी गर्दन (neck) पतली होती है ये 6 month में अंडा देने लग.... (Read More)
बत्तख पालन करने से पहले उसके नस्लों(breeds) का selection कर लेना चाहिए Business के purpose से बत्तख पालन करने के लिए बत्तख की दो नस्ले प्रमुख हैं एक अधिक अंडा देने वाली और दूसरी अधिक मांस देने वाली, जो की इस प्रकार हैअंडा देने वाली नस्ले (लेयर / Egg) • इंडियन रनर– ये medium आकार के होते है और इनकी गर्दन (neck) पतली होती है ये 6 month में अंडा देने लगते है ये white, black, light yellow, और brown color में पाए जाते है यह yearly 250 से 300 अंडा देती है • कैम्पबेल – इस नस्ल के बत्तखो का body चौड़ा होता है यह खाकी, सफेद व काले रंग में पाए जाते है यह yearly 300 से ज्यादा अंडा देती है मासं वाली जाति (ब्रोयलर) • सफ़ेद पेकिन – इनका body चौड़ा होता है, यह ज्यादा शोर करने वाले और जल्दी डर जाने वाले बत्तख होते है • एलिसबरी – इसमें हड्डी कम और मांस ज्यादा होती है • मस्कोवी (6 उपजाति) – इन्हें “म्यूल बत्तख” भी कहा जाता हैं • आरफीगंटन (5 उपजाति) • राउन बत्तख पालन में बत्तखो के लिए घर बनाना बहुत आसान होता है आप इन्हें छोटा, बड़ा, गीला, शुष्क या किसी भी अन्य स्थानों पर रख सकते हैं बत्तख पानी वाले और गीला जगहो पर रहना ज्यादा पसंद करते है आप एक बड़े फलों की टोकरी, लकड़ी या तेल के ड्रम का उपयोग करके अपने बतख के रहने के लिए एक उपयुक्त जगह बना सकते हैं बस इनके रहने के घरो में हमेशा एक प्रवेश और बाहर निकलने के लिए एक दरवाजा रहना चाहिए दरवाजे थोड़े उचे होने चाहिए आमतौर पर प्रत्येक बतख 2 से 3 square feet flooring space लेते है बत्तख को विशेष रूप से बिल्ली, लोमड़ी और कुत्ते जैसे जानवरों या शिकारियों से बचा कर रखने की अव्यश्कता होती है बत्तख का आहार मुर्गियों की तुलना में बतख रोजाना बहुत अधिक खाना खाते है यदि आप बत्तख से उचित अंडे और मांस की उत्पादन करना चाहते हैं तो आपको उन्हें अच्छी तरह से संतुलित भोजन खिलाना होगा वैसे तो बतख मुर्गियों की तरह सभी प्रकार के भोजन खाते है, लेकिन इसके अतिरिक आप बत्तख के आहार में कुछ और भी जोड़ सकते है कुछ बत्तख मुर्गियों की तुलना में अधिक अंडे देते हैं, तो आपको ऐसे बत्तखो को खिलाने में बहुत सावधान रहना होगा आपको इनके आहार में आवश्यक पोषक तत्व जोड़ने होंगे बत्तख को आहार उनके नस्ल और उनके विकास के अनुसार दिया जाता है यदि आप small scale पर batakh palan कर रहे है तो आप अपने बत्तख को खिलाने के लिए रसोई का कचरा, चोकर व घोंघे का इस्तेमाल कर सकते है चूँकि बत्तख पानी में रहता है इसलिए उन्हें सुखा आहार निगलने में काफी तकलीफ होती है सुखे हुए आहार को वे अपने चोंच में दबा कर वापस उसे पानी में हीं उगल देते है जिससे सारा आहार बरबाद हो जाता है बत्तख के अंडे के दाम / Price of Duck’s Eggs in India Local market में आपको 9 से 11 रूपए का एक बत्तख का अंडा मिलेगा और दर्जन (Dozens) के हिसाब से Rs 108 से ले कर 130 तक मिलेगा इसका मतलब है की, अगर उच्च नस्ल के बत्तखों के अंडे को बेचा जाये (एक average cost में) तो आपको केवल एक बत्तख से Rs 2,800 से Rs 3,000 आसानी से मिल जायेंगे

Posted by kuldeep singh
Punjab
02-02-2020 08:29 PM
Tuci uss nu Vitum-H injection 5ml ate CRB(ascrobic acid) injection 20ml nu 1-1 din de frak nal lgwao ate 5 injection lgwaa deo baki uss nu Mamidium powder 50gm rojana dena suru kro..

Posted by sukhwinder singh
Punjab
02-02-2020 08:26 PM
Sukhwinder ji cow nu 3kg dudh mgar 1kg de hisab nal feed de skde ho ate dujia pashua nu 1.1-5 kg rojana de skde ho ate ehh tuci chuai de time v de skde ho ja badd vich chare vich milla ke v de skde ho, jekar

Posted by anil jha
Bihar
02-02-2020 08:19 PM
anil ji aap iske liye New India Nursery 9006093969se sampark kar sakte hai.dhanywad

Posted by shivam maurya
Uttar Pradesh
02-02-2020 07:59 PM
श्री मान कृपया इसकी फोटो भेजें ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके

Posted by Tanu
Punjab
02-02-2020 07:59 PM
श्रीमान जी गेहूं की ग्रोथ के लिए एनपीके 191919 एक किलो को 150 लीटर पानी के साथ मिलाकर स्प्रे कर सकते है

Posted by Lucky Singh
Madhya Pradesh
02-02-2020 07:58 PM
Lucky Singh ji bakri khridne or in ke bare me visthar me jankari ke lia aap Kamlesh Kushwaha 9229881876 (Bhumika ANIMAL Breeder farm) se samparak kar sakte hai, Thankyou.
Posted by gagansandhu
Punjab
02-02-2020 07:53 PM
Gagan ji tuci uss nu pett de kiria lai Fasnil bolus deo ate Vitamor-H liquid 10-10ml swere sham dena suru kro ate Enerboost powder 50-50gm swere sham deo baki uss nu vdia matra vich feed ate chara deo, iss nal vdia growth ho jawegi.
Posted by Shanky ghanghas
Haryana
02-02-2020 07:44 PM
श्री मान मक्की की फसल लगाने के लिए उपजाऊ, अच्छे जल निकास वाली, मैरा और लाल मिट्टी जिसमें नाइट्रोजन की उचित मात्रा हो, जरूरी है मक्की रेतली से लेकर भारी हर तरह की ज़मीनों में उगाई जा सकती है समतल ज़मीने मक्की के लिए बहुत अनुकूल है पर कईं पहाड़ी इलाकों में भी यह फसल उगाई जाती है अधिक पैदावार लेने के लिए मिट्टी में ज.... (Read More)
श्री मान मक्की की फसल लगाने के लिए उपजाऊ, अच्छे जल निकास वाली, मैरा और लाल मिट्टी जिसमें नाइट्रोजन की उचित मात्रा हो, जरूरी है मक्की रेतली से लेकर भारी हर तरह की ज़मीनों में उगाई जा सकती है समतल ज़मीने मक्की के लिए बहुत अनुकूल है पर कईं पहाड़ी इलाकों में भी यह फसल उगाई जाती है अधिक पैदावार लेने के लिए मिट्टी में जैविक तत्वों की अधिक मात्रा, पी एच 5.5-7.5 और अधिक पानी रोककर रखने की क्षमता होनी चाहिए बहुत ज्यादा भारी ज़मीनें इस फसल के लिए अच्छी नहीं मानी जाती आप मक्का की किस्मे जैसे के Ganga II, Deccan - 103, Deccan - 105, Trisholta, High Starch, Mangiri की बिजाई करें, फसल के लिए प्रयोग किया जाने वाला खेत नदीनों और पिछली फसल से मुक्त होना चाहिए मिट्टी को नर्म करने के लिए 6 से 7 बार जोताई करें खेत में 4-6 टन प्रति एकड़ रूड़ी की खाद और 10 पैकेट एसपरजिलियम के डालें खेत में 45-50 सैं.मी. के फासले पर खाल और मेंड़ बनाएं रबी के मौसम में खेती के लिए बिजाई 15 अक्तूबर से 10 नवंबर तक पूरी कर लें मेंड़ों पर बिजाई करना ज्यादा लाभदायक रहता है क्योंकि इससे फसल को जल्दी अंकुरित होने में मदद मिलती है और फसल ठंड से भी बची रहती है रबी के मौसम में खेती के लिए 60x18 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीजों को 4-5 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई हाथों से गड्ढा खोदकर या आधुनिक तरीके से ट्रैक्टर और बिजाई वाली मशीन की मदद से मेंड़ बनाकर की जा सकती है सर्दियों की मक्की के लिए 8-9 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें फसल को मिट्टी की बीमारियों और कीड़ों से बचाने के लिए बीज का उपचार करें सफेद जंग से बीजों को बचाने के लिए कार्बेनडाज़िम या थीरम 2 ग्राम प्रति किलो बीज के साथ उपचार करें रासायनिक उपचार के बाद बीज को एज़ोसपीरीलम 600 ग्राम + धान के चूरे के साथ उपचार करें उपचार के बाद बीज को 15-20 मिनटों के लिए छांव में सुखाएं एज़ोसपीरिलम मिट्टी में नाइट्रोजन को बांधकर रखने में मदद करता है अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए नाइट्रोजन 50 किलो (यूरिया 110 किलो), फासफोरस 24 किलो (एस एस पी 150 किलो) और पोटाश 18 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 30 किलो) प्रति एकड़ में डालें खरीफ ऋतु की मक्की में नदीन बड़ी समस्या होते हैं, जो कि खुराकी तत्व लेने में फसल से मुकाबला करते हैं और 35 प्रतिशत तक पैदावार कम कर देते हैं इसलिए अधिक पैदावार लेने के लिए नदीनों का हल करना जरूरी है मक्की की कम से कम दो गोडाई करें पहली गोडाई बिजाई से 20-25 दिन बाद और दूसरी गोडाई 40-45 दिन बाद , पर ज्यादा होने की हालत में एटराज़िन 500 ग्राम प्रति 200 लीटर पानी से स्प्रे करें गोडाई करने के बाद मिट्टी के ऊपर खाद की पतली परत बिछा दें और जड़ों से मिट्टी लगाएं अंकुरन के तीसरे या चौथे सप्ताह बाद पानी लगाएं बाकी की सिंचाइयां 4-5 सप्ताह के फासले पर मध्य मार्च तक करें इसके इलावा और 1 या 2 सिंचाइयां वर्षा और मौसम की स्थिति के आधार पर करें जब पौधे घुटनों के कद के हो जायें तो फूल निकलने के समय और दाने बनने के समय सिंचाई महत्तवपूर्ण होती है यदि इस समय पानी की कमी हो तो पैदावार बहुत कम हो सकती है यदि पानी की कमी हो तो एक मेंड़ छोड़कर पानी दें इस से पानी भी बचता है

Posted by Laxman kumar Kunjam
Chattisgarh
02-02-2020 07:10 PM
Laxman kumar Kunjam ji is ke bare me puran jankari ke lia aap Vivek Dhangrikar 9406802800 se samparak kar sakte hai, Thankyou.

Posted by Raghvendra Singh Chauhan
Madhya Pradesh
02-02-2020 07:07 PM
सभी प्रकार की मिट्टियों में सहजन (Moringa) की खेती की जा सकती है यहाँ तक कि बेकार, बंजर और कम उर्वरा भूमि में भी इसकी खेती की जा सकती है, परन्तु व्यवसायिक खेती के लिए साल में दो बार फलनेवाला सहजन के प्रभेदों के लिए 6-7.5 पी.एच. मान वाली बलुई दोमट मिट्टी बेहतर पाया गया है सहजन के पौध की रोपनी में गड्ढा बनाकर किया जाता है ख.... (Read More)
सभी प्रकार की मिट्टियों में सहजन (Moringa) की खेती की जा सकती है यहाँ तक कि बेकार, बंजर और कम उर्वरा भूमि में भी इसकी खेती की जा सकती है, परन्तु व्यवसायिक खेती के लिए साल में दो बार फलनेवाला सहजन के प्रभेदों के लिए 6-7.5 पी.एच. मान वाली बलुई दोमट मिट्टी बेहतर पाया गया है सहजन के पौध की रोपनी में गड्ढा बनाकर किया जाता है खेत को अच्छी तरह खरपतवार से साफ़-सफाई का 2.5 x 2.5 मीटर की दूरी पर 45 x 45 x 45 सेंमी. आकार का गड्ढा बनाते हैं गड्ढे के उपरी मिट्टी के साथ 10 किलोग्राम सड़ा हुआ गोबर का खाद मिलाकर गड्ढे को भर देते हैं इससे खेत पौध के रोपनी हेतु तैयार हो जाता है सहजन में बीज और शाखा के टुकड़ों दोनों से ही प्रबर्द्धन होता है अच्छी फलन और साल में दो बार फलन के लिए बीज से प्रबर्द्धन करना अच्छा है एक हेक्टेयर में खेती करने के लिए 500 ग्राम बीज पर्याप्त है बीज को सीधे तैयार गड्ढों में या फिर पॉलीथीन बैग में तैयार कर गड्ढों में लगाया जा सकता है पॉलीथीन बैग में पौध एक महीना में लगाने योग्य तैयार हो जाता है एक महीने के तैयार पौध को पहले से तैयार किए गये गड्ढों में माह जुलाई-सितम्बर तक रोपनी कर दें पौध जब लगभग 75 सेंमी. का हो जाये तो पौध के ऊपरी भाग की खोटनी कर दें, इससे बगल से शाखाओं को निकलने में आसानी होगी रोपनी के तीन महीने के बाद 100 ग्राम यूरिया + 100 ग्राम सुपर फास्फेट + 50 ग्राम पोटाश प्रति गड्ढा की दर से डालें तथा इसके तीन महीने बाद 100 ग्राम यूरिया प्रति गड्ढा का पुन: व्यवहार करें सहजन पर किए गए शोध से यह पाया गया कि मात्र 15 किलोग्राम गोबर की खाद प्रति गड्ढा तथा एजोसपिरिलम और पी.एस.बी. (5 किलोग्राम/हेक्टेयर) के प्रयोग से जैविक सहजन की खेती, उपज में बिना किसी ह्रास के किया जा सकता है अच्छे उत्पादन के लिए सिंचाई करना लाभदायक है गड्ढों में बीज से अगर प्रबर्द्धन किया गया है तो बीज के अंकुरण और अच्छी तरह से स्थापन तक नमी का बना रहना आवश्यक है फूल लगने के समय खेत ज्यादा सूखा या ज्यादा गीला रहने पर दोनों ही अवस्था में फूल के झड़ने की समस्या होती है, इस के बारे में और ज्यादा जानकारी के लिए आप J.B Lal 8290200303 से सम्पर्क कर सकते है धन्यवाद

Posted by jawahar lal
Punjab
02-02-2020 07:01 PM
jawahar lal ji kirpa karke daso ke tuc kehde kisan mele bare jankari laina chahunde ho ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake,dhanwad

Posted by Kayum Khan
Rajasthan
02-02-2020 06:49 PM
कयुम खाँन जी आप फल जैसे अनार , अमरुद,बेर , ड्रैगन फ्रूट ,खरबूजा और तरबूज की बिजाई कर सकते है धन्यवाद

Posted by Amaresh
Uttar Pradesh
02-02-2020 06:44 PM
अमरेश जी यह आपको कर्नाटका से मिलेगा Member Secretary & CEO,
Central Silk Board,CSB Complex,B.T.M. Layout, Madivala,Hosur Road,
Bangalore – 560 068, Karnataka State. 91 80 26282699, 26282100 धन्यवाद

Posted by Amaresh
Uttar Pradesh
02-02-2020 06:40 PM
Amaresh ji ABS da semen lene ke lai aap Genus Breeding India Private Limited (ABS India), Phone number: 090201 31111, 91-20-2729-3445 se samparak kar sakde ho, Thankyou.

Posted by Lakhveer Singh Sran
Punjab
02-02-2020 06:40 PM
lakhveer ji tuci meat lai Cobb, Ross, Hubbard ehna nasla nu rakh skde ho.

Posted by shicdayal
Rajasthan
02-02-2020 06:39 PM
चीकू के पौधे के साथ आप टमाटर फूलगोभी ,मटर कद्दू की बिजाई की जा सकती है धन्यवाद
Posted by Manpreet Sekhon
Punjab
02-02-2020 06:32 PM
Manpreet ji ehh semen de hisab nal rate alag alag hunda hai kyuki semen de milk record ate nasal de hisab nal semen da rate jyada ghat hunda hai, isde lai tuci apne nazdiki sarkari hospital nal sampark kr skde ho ki ohna kol kis record wala semen hai ..
Posted by om Kumar
Rajasthan
02-02-2020 06:27 PM
Pusa Jwala: इस किस्म के पौधे छोटे कद के, झाड़ियों वाले और हल्के हरे रंग के होते हैं इसके फल 9-10 सैं.मी. लंबे, हल्के हरे और बहुत तीखी होती है यह किस्म थ्रिप और मकौड़ा जुंओं की प्रतिरोधक है इसकी औसतन पैदावार 85 क्विंटल (हरी मिर्चें) और 18 क्विंटल (सूखी मिर्चें) प्रति एकड़ होती है
Pant C-1: यह किस्म अन्य किस्मों से आसानी से अलग है क्.... (Read More)
Pusa Jwala: इस किस्म के पौधे छोटे कद के, झाड़ियों वाले और हल्के हरे रंग के होते हैं इसके फल 9-10 सैं.मी. लंबे, हल्के हरे और बहुत तीखी होती है यह किस्म थ्रिप और मकौड़ा जुंओं की प्रतिरोधक है इसकी औसतन पैदावार 85 क्विंटल (हरी मिर्चें) और 18 क्विंटल (सूखी मिर्चें) प्रति एकड़ होती है
Pant C-1: यह किस्म अन्य किस्मों से आसानी से अलग है क्योंकि इसके फल की फलियां सीधी होती हैं इसके फल अत्याधिक तीखे, आकार में छोटे, आधार चौड़ा और सिरा पतला होता है यह किस्म चितकबरा और पत्ता मरोड़ रोग की कुछ हद तक प्रतिरोधक है इस किस्म की हरी फलियों की औसतन पैदावार 110 क्विंटल प्रति एकड़ होती है सूखी फलियों की पैदावार 20 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Pusa Sadabahar: इसके पौधे सीधे, सदाबहार (2-3 वर्ष), 60-80 सैं.मी. कद के होते हैं इसके फल 6-8 सैं.मी. लंबे होते हैं फल गुच्छों में लगते हैं और प्रत्येक गुच्छे में 6-14 फल होते हैं पकने के समय फल गहरे लाल रंग के और कड़वे होते हैं यह किस्म CMV, TMV और पत्ता मरोड़ की रोधक है इसकी पहली तुड़ाई पनीरी लगाने के 75-80 दिन बाद की जा सकती है इसकी औसतन पैदावार 95 क्विंटल (हरी मिर्चें) और 20 क्विंटल (सूखी मिर्चें) प्रति एकड़ है
NP-46A: यह उच्च उपज वाली किस्म है इसके मध्यम आकार के फल होते हैं इसकी औसतन पैदावार 40 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
G 5 : मिर्च मोटी, चमकदार और गहरे लाल रंग की होती है इसकी औसतन पैदावार 20 क्विंटल प्रति एकड़ होती है

Posted by nav shah
Punjab
02-02-2020 06:27 PM
ਫੈਟ ਘਟਣ ਦੇ ਕਈ ਕਾਰਨ ਹੁੰਦੇ ਹੈ , ਜਿਵੇਂ ਸਹੀ ਖੁਰਾਕ ਨਾ ਮਿਲਣਾ , ਟਾਈਮ ਤੇ ਡੇਵਰਮਿੰਗ ਨਾ ਹੋਣਾ , ਰਹਿਣ ਸਹਿਣ ਵਿਚ ਦਿਕੱਤ ਹੋਣਾ , ਇਹਨਾਂ ਕਾਰਨਾਂ ਕਰਕੇ ਵੀ ਪਸ਼ੂ ਦਾ ਦੁੱਧ ਅਤੇ ਫੈਟ ਘਟ ਜਾਂਦੀ ਹੈ , ਫੈਟ ਵਧਾਾਉਣ ਲਈ ਅੱਧਾ ਕਿਲੋ ਦੇਸੀ ਕਪਾਹ ਦੇ ਵੜੇਵੇ ਚਾਰੋ ਜੀ ਅਤੇ ਬੀਟੀ ਕਾਟਨ ਦੀ ਵਰਤੋ ਬਿਲਕੁੱਲ ਨਾ ਕਰੋ ਅਤੇ ਦੁੱਧ ਵਧਾਉਣ ਤੁਸੀ ਦਾਣੇ ਨੂੰ ਗਿੱਲਾ ਕਰਕੇ ਉਸ ਵਿੱਚ 10 ਗ੍ਰਾਮ ਲਾਈਵਈਸਟ.... (Read More)
ਫੈਟ ਘਟਣ ਦੇ ਕਈ ਕਾਰਨ ਹੁੰਦੇ ਹੈ , ਜਿਵੇਂ ਸਹੀ ਖੁਰਾਕ ਨਾ ਮਿਲਣਾ , ਟਾਈਮ ਤੇ ਡੇਵਰਮਿੰਗ ਨਾ ਹੋਣਾ , ਰਹਿਣ ਸਹਿਣ ਵਿਚ ਦਿਕੱਤ ਹੋਣਾ , ਇਹਨਾਂ ਕਾਰਨਾਂ ਕਰਕੇ ਵੀ ਪਸ਼ੂ ਦਾ ਦੁੱਧ ਅਤੇ ਫੈਟ ਘਟ ਜਾਂਦੀ ਹੈ , ਫੈਟ ਵਧਾਾਉਣ ਲਈ ਅੱਧਾ ਕਿਲੋ ਦੇਸੀ ਕਪਾਹ ਦੇ ਵੜੇਵੇ ਚਾਰੋ ਜੀ ਅਤੇ ਬੀਟੀ ਕਾਟਨ ਦੀ ਵਰਤੋ ਬਿਲਕੁੱਲ ਨਾ ਕਰੋ ਅਤੇ ਦੁੱਧ ਵਧਾਉਣ ਤੁਸੀ ਦਾਣੇ ਨੂੰ ਗਿੱਲਾ ਕਰਕੇ ਉਸ ਵਿੱਚ 10 ਗ੍ਰਾਮ ਲਾਈਵਈਸਟ ਮਿਲਾ ਕੇ ਦੁੱਧ ਚੋਣ ਤੋਂ 10 ਮਿੰਟ ਪਹਿਲਾ ਘੋਲ ਕੇ ਪਾਓ ਇਹ ਲਾਈਵਈਸਟ ਤੁਹਾਨੂੰ ਪੰਸਾਰੀ ਦੀ ਦੁਕਾਨ ਤੋਂ ਮਿਲ ਜਾਵੇਗਾ ਇਹ ਜਿਆਦਾ ਟਾਈਮ ਨਹੀ ਪਿਆ ਰਹਿਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਇਸ ਨਾਲ ਦੁੱਧ ਵੱਧ ਜਾਵੇਗਾ ਜਾਂ ਤੁਸੀ ਕੱਦੂ ਜਾਂ ਲੋਕੀ ਖਵਾਓ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਇਹ ਵੀ ਦੁੱਧ ਵਧਾਉਣ ਲਈ ਠੀਕ ਹੈ ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ Fatplus ਜਾਂ Fatmax 50 ਗ੍ਰਾਮ ਪਾਊਡਰ ਵੀ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ , ਇਸ ਨਾਲ ਫੈਟ ਵਿੱਚ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ

Posted by nav shah
Punjab
02-02-2020 06:25 PM
ਤੁਸੀ ਇਸ ਨੂੰ Vitum-H injection 5ml ਲਗਵਾਓ ਇਹ ਤੁਸੀ 3-3 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਫਰਕ ਨਾਲ 5 ਇੰਜੇਕਸ਼ਨ ਲਗਵਾਓ, ਤੁਸੀ ਕਲਮੀਸ਼ੋਰਾ 500ਗ੍ਰਾਮ, ਜੋ ਖਾਰ 250ਗ੍ਰਾਮ, ਮਿਠਾਸੋਡਾ 250ਗ੍ਰਾਮ, ਨਸ਼ਾਦਰ 150ਗ੍ਰਾਮ, ਖੰਡ 2 ਕਿਲੋ ਅਤੇ ਮਿਠਾ ਤੇਲ 2 ਕਿਲੋ ਲਉ ਤੇ ਪਹਿਲਾਂ ਖੰਡ ਦੀ ਚਾਸਣੀ ਬਣਾਉਣ ਤੇ ਫਿਰ ਉਸ ਵਿਚ ਮਿੱਠਾ ਤੇਲ ਪਾਉ ਤੇ ਉਬਾਲੋ ਫਿਰ ਉਸ ਵਿਚ ਬਾਕੀ ਸਾਰਾ ਸਾਮਾਨ ਪਾਉ ਤੇ ਉਬਾਲ ਕੇ ਠਾਰ ਕੇ ਪੰਜ ਹਿੱਸੇ ਕਰ ਲਉ ਤੇ ਇਕ ਹਿੱਸਾ ਰੋ.... (Read More)
ਤੁਸੀ ਇਸ ਨੂੰ Vitum-H injection 5ml ਲਗਵਾਓ ਇਹ ਤੁਸੀ 3-3 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਫਰਕ ਨਾਲ 5 ਇੰਜੇਕਸ਼ਨ ਲਗਵਾਓ, ਤੁਸੀ ਕਲਮੀਸ਼ੋਰਾ 500ਗ੍ਰਾਮ, ਜੋ ਖਾਰ 250ਗ੍ਰਾਮ, ਮਿਠਾਸੋਡਾ 250ਗ੍ਰਾਮ, ਨਸ਼ਾਦਰ 150ਗ੍ਰਾਮ, ਖੰਡ 2 ਕਿਲੋ ਅਤੇ ਮਿਠਾ ਤੇਲ 2 ਕਿਲੋ ਲਉ ਤੇ ਪਹਿਲਾਂ ਖੰਡ ਦੀ ਚਾਸਣੀ ਬਣਾਉਣ ਤੇ ਫਿਰ ਉਸ ਵਿਚ ਮਿੱਠਾ ਤੇਲ ਪਾਉ ਤੇ ਉਬਾਲੋ ਫਿਰ ਉਸ ਵਿਚ ਬਾਕੀ ਸਾਰਾ ਸਾਮਾਨ ਪਾਉ ਤੇ ਉਬਾਲ ਕੇ ਠਾਰ ਕੇ ਪੰਜ ਹਿੱਸੇ ਕਰ ਲਉ ਤੇ ਇਕ ਹਿੱਸਾ ਰੋਜਾਨਾ ਰਾਤ ਵੇਲੇ ਦਿਉ ਤੇ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਤ੍ਰੇਲ ਵਿਚ ਨਾ ਬੰਨ੍ਹੋ ਤੇ ਨਾ ਹੀ 6 ਦਿਨ ਨਵਾਹੋ ਅਤੇ Milkout ਪਾਊਡਰ 15-15gm ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ..
Posted by azim khan
Uttar Pradesh
02-02-2020 06:24 PM
आपके सभी सवालो का जवाब दिया जा चुका है आप अपने सवालों के जवाब एप में मेरे सवाल का क्लिक करके देख सकते हैं या फिर मेरी प्रोफाईल के नीचे अपने सवालों के जवाब देख कते हैं यदि आपकी कोई ओर समस्या है तो आप हैल्प लाईन नंबर : 97799-77641 पर संपर्क कर सकते हैं
Posted by bikaram
Rajasthan
02-02-2020 06:24 PM
Bikram ji kripya aap apna swal vistar se pooche taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by Sharry Ahluwalia
Punjab
02-02-2020 06:07 PM
ਚਰੀ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਦੇ ਲਈ ਅਪ੍ਰੈਲ ਦਾ ਆਖ਼ਰੀ ਹਫ਼ਤਾ ਤੋਂ ਮਈ ਦਾ ਆਖ਼ਰੀ ਹਫ਼ਤਾ ਸਹੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by kapil
Haryana
02-02-2020 06:04 PM
श्रीमान जी कृपया सवाल विस्तार से पूछें ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके, धन्यवाद

Posted by kapil
Haryana
02-02-2020 06:02 PM
श्रीमान जी कृपया सवाल विस्तार से पूछें ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके, धन्यवाद

Posted by mashwood ahmad
Uttar Pradesh
02-02-2020 05:58 PM
Mashwood ji aap ise lgatar paani na lgaye aap iske 3-4 din ke antral tak pani lgaye aur iske ilava aap iske uper khatti lassi @3ml ko prati litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad

Posted by UMATIYA SAMIR
Gujarat
02-02-2020 05:57 PM
समीर जी यह क्रॉस नस्ल की गाय है और इसका दूध इसकी मां के दूध के रिकॉर्ड पर निर्भर करता है यदि इसकी मां का दूध अच्छा है तो इसका दूध भी अच्छा होगा वैसे अच्छी खुराक के साथ यह लगभग 10—12 लीटर तक दूध दे सकती है
Posted by anand singh
Uttar Pradesh
02-02-2020 05:45 PM
लेयर फार्मिंग के लिए 50 फीट लंबाई वाली जगह और 20 फीट चौड़ाई वाली जगह की जरूरत होती है यह आपका 1000 वर्ग फुट जगह बन जाती है यहां आप 1000 बच्चों को रख सकते हैं आपको 4000 बच्चे के लिए 100 फीट लंबाई और 40 फीट चौड़ाई की जगह की जरूरत होगी यदि आप 5000 रखना चाहते है तो इससे थोड़ी ज्यादा भाग रख सकते है..

Posted by राजेश भिमावाद (पाटीदार)
Madhya Pradesh
02-02-2020 05:37 PM
Rajesh ji aap iske uper mancozeb@3 gram ko prati litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by Manpreet Sekhon
Punjab
02-02-2020 05:31 PM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਪਾਣੀ ਲਾਉਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਗੁੱਲੀ ਡੰਡੇ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਲੀਡਰ, ਟੌਪਿਕ, ਦੀ ਵਰਤੋ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਚੌੜੇ ਪੱਤਿਆਂ ਵਾਲੇ ਨਦੀਨ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ 2,4D 250 ml ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਟੌਪਿਕ 15 ਡਬਲਿਊ ਪੀ (ਕਲੋਡੀਨਾਫਾਪ) 160 ਗ੍ਰਾਮ ਬਿਜਾਈ ਦੇ 30 ਤੋਂ 35 ਦਿਨਾਂ ਅੰਦਰ 150 ਪਾਣੀ/ਏਕੜ •• ਐਕਸੀਅਲ 5 ਈ ਸੀ (ਪਿਨੌਕਸਾਡਿਨ) 400 ਮਿਲੀਲਿਟਰ 4) ਲੀਡਰ/ਮਾਰਕਸਲਫੋ 75 ਡਬਲਿਊ ਜੀ (ਸਲਫੋਸਲਫੂਰਾਨ) 13 ਗ੍ਰਾਮ •ਟੋਟ.... (Read More)
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਪਾਣੀ ਲਾਉਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਗੁੱਲੀ ਡੰਡੇ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਲੀਡਰ, ਟੌਪਿਕ, ਦੀ ਵਰਤੋ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਚੌੜੇ ਪੱਤਿਆਂ ਵਾਲੇ ਨਦੀਨ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ 2,4D 250 ml ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਟੌਪਿਕ 15 ਡਬਲਿਊ ਪੀ (ਕਲੋਡੀਨਾਫਾਪ) 160 ਗ੍ਰਾਮ ਬਿਜਾਈ ਦੇ 30 ਤੋਂ 35 ਦਿਨਾਂ ਅੰਦਰ 150 ਪਾਣੀ/ਏਕੜ •• ਐਕਸੀਅਲ 5 ਈ ਸੀ (ਪਿਨੌਕਸਾਡਿਨ) 400 ਮਿਲੀਲਿਟਰ 4) ਲੀਡਰ/ਮਾਰਕਸਲਫੋ 75 ਡਬਲਿਊ ਜੀ (ਸਲਫੋਸਲਫੂਰਾਨ) 13 ਗ੍ਰਾਮ •ਟੋਟਲ/ਮਾਰਕਪਾਵਰ 75 ਡਬਲਿਊ ਡੀ ਜੀ (ਸਲਫੋਸਲਫੂਰਾਨ+ਮੈਟਸਫੂਰਾਨ) 16 ਗ੍ਰਾਮ •ਐਟਲਾਂਟਿਸ 3.6 ਡਬਲਿਊ ਡੀ ਜੀ (ਮਿਜ਼ੋਸਲਫੂਰਾਨ+ਆਇਡੋਸਲਫੂਰਾਨ) 160 ਗ੍ਰਾਮ 6 ਸ਼ਗੁਨ 21-11 (ਮੈਟਰੀਬਿਊਜ਼ਿਨ+ਕਲੋਡੀਨਾਫਾਪ) 200 ਗ੍ਰਾਮ •ਏ ਸੀ ਐੱਮ-9 (ਕਲੋਡੀਨਾਫਾਪ+ਮੈਟਰੀਬਿਊਜ਼ਿਨ) 240 ਗ੍ਰਾਮ *ਨੋਟ* 1.ਸ਼ਗਨ 21-11 ਨੂੰ pbw 550 ਤੇ ਉਨਤ pbw550 ਵਿਚ ਨਾ ਛਿੜਕੋ 2. ਸਗਨ 21-11 ਦਾ ਹਲਕੀਆਂ ਜਮੀਨਾ ਵਿਚ ਛਿੜਕਾ ਨਾ ਕਰੋ 3.ਵਡਾਣਕ ਕਣਕ ਵਿਚ ਸ਼ਗਨ 21-11 ਨਾ ਵਰਤੋਂ 4.ਟੋਟਲ/ ਮਾਰਕਪਾਵਰ ਵਾਲੇ ਖੇਤਾਂ ਵਿੱਚ ਚਰ੍ਹੀ (ਜਵਾਰ) ਅਤੇ ਮੱਕੀ ਨਾ ਬੀਜੋ

Posted by sukhwinder singh
Punjab
02-02-2020 05:22 PM
श्रीमान जी गेहूं को एनपीके 13.00.45 एक किलो प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे कर सकते है

Posted by mr-singh saab
Punjab
02-02-2020 05:19 PM
Ehh HF cross nasal di vashi hai iss nu tuci pett de kiria lai Piperazine liquid deo ate Cargill di calf starter feed deni suru kro ate dudh vdia matra vich pilao. iss nal vdia growth ho jawegi ate her 1-1 mahine de frak nal pett de kiria lai dwai jrur deo..
Posted by Fefar
Gujarat
02-02-2020 05:17 PM
Fefar ji iske fruit ka weight 140-150 gram hota hai aur fruit ki length 19-20cm hoti hai. iske fruit ka colour gehra hra hota hai. aap ise online magnva sakte hai jiske liye aap sath men diye gaye link par click karen :-https://www.bighaat.com/products/noor-26-bitter-gourd variant=30713650759

Posted by mr-singh saab
Punjab
02-02-2020 05:15 PM
ਪਸ਼ੂਆਂ ਨੂੰ ਘਰ ਵਿਚ ਫੀਡ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਦੇਣੀ ਹੈ ਤਾਂ ਸੰਤੁਲਿਤ ਖੁਰਾਕ 100 ਕਿਲੋ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਲੋੜੀਂਦੀ ਸਮੱਗਰੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਜਿਵੇਂ 25 ਕਿਲੋ ਅਨਾਜ ( ਜਵਾਰ, ਬਾਜਰੀ (ਸਰਦੀਆਂ) , ਕਣਕ, ਜੌਂ ( ਗਰਮੀਆ) ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਕੋਈ ਇੱਕ ) , ਦਾਲ ਚੂਰੀ 20 ਕਿਲੋ( ਮੂੰਗੀ ਚੂਰੀ, ਮਾਂਹ ਚੂਰੀ, ਮੋਠ ਚੂਰੀ ( ਕੇਵਲ ਸਰਦੀਆਂ ਲਈ) , ਮਸੁਰ ਚੂਰੀ ,ਅਰਹਰ, (ਇਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਇੱਕ ) , DOC 25 ਕਿਲੋ ( ਚੌਲਾਂ ਦਾ ਚੂਰਾ ) , ਫਾਈਬਰ ਛਿਲਕਾ 15 ਕ.... (Read More)
ਪਸ਼ੂਆਂ ਨੂੰ ਘਰ ਵਿਚ ਫੀਡ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਦੇਣੀ ਹੈ ਤਾਂ ਸੰਤੁਲਿਤ ਖੁਰਾਕ 100 ਕਿਲੋ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਲੋੜੀਂਦੀ ਸਮੱਗਰੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਜਿਵੇਂ 25 ਕਿਲੋ ਅਨਾਜ ( ਜਵਾਰ, ਬਾਜਰੀ (ਸਰਦੀਆਂ) , ਕਣਕ, ਜੌਂ ( ਗਰਮੀਆ) ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਕੋਈ ਇੱਕ ) , ਦਾਲ ਚੂਰੀ 20 ਕਿਲੋ( ਮੂੰਗੀ ਚੂਰੀ, ਮਾਂਹ ਚੂਰੀ, ਮੋਠ ਚੂਰੀ ( ਕੇਵਲ ਸਰਦੀਆਂ ਲਈ) , ਮਸੁਰ ਚੂਰੀ ,ਅਰਹਰ, (ਇਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਇੱਕ ) , DOC 25 ਕਿਲੋ ( ਚੌਲਾਂ ਦਾ ਚੂਰਾ ) , ਫਾਈਬਰ ਛਿਲਕਾ 15 ਕਿਲੋ (ਕਣਕ, ਚੌਕਰ, ਚਨਾ ਛਿਲਕਾ, ਮਟਰ ਛਿਲਕਾ, ਇਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਇੱਕ) , ਖਲ਼ 15 ਕਿਲੋ(ਸਰੋਂ, ਬਿਨੌਲਾ ਜਾਂ ਸੋਇਆ (ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਕੋਈ ਇੱਕ) , ਮਿੱਠਾ ਸੋਡਾ 250 ਗ੍ਰਾਮ, 1 ਕਿਲੋ ਨਮਕ, ਗੁੜ 1 ਕਿਲੋ, 1 ਕਿੱਲੋ ਹਲਦੀ (ਸਰਦੀਆ ਵਿੱਚ ) ਇਹ ਨੂੰ ਰਲਾ ਲਵੋ ਇਹ ਫੀਡ ਪਸ਼ੂ ਲਈ ਬਹੁਤ ਲਾਹੇਵੰਦ ਹੁੰਦੀ ਹੈ..
Posted by govind rupriya patidar
Madhya Pradesh
02-02-2020 05:15 PM
govind ji yeh fungus ke karn ho raha hai iske liye aap carbendazim@3 gram ko prati litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad

Posted by ਰਵਿੰਦਰ ਸਿੰਘ
Punjab
02-02-2020 05:03 PM
Ravinder ji jekar eh purane patte han ta eh magnese di ghaat hai jekar nave patte han ta eh sulphur di ghaat hai.dhanwad

Posted by शिवम
Madhya Pradesh
02-02-2020 04:57 PM
शिवम जी आप इसमें carbendazim @400 ग्राम को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by ਲਵਪ੍ਰੀਤ ਸਿੰਘ ਪੰਨੂ
Punjab
02-02-2020 04:33 PM
ਬੇਬੀ ਕੋਰਨ ਦਸੰਬਰ-ਜਨਵਰੀ ਨੂੰ ਛੱਡ ਕੇ ਬਾਕੀ ਸਾਰਾ ਸਾਲ ਬੀਜੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਇਸਦੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਜਿਵੇ parkash ਜਾ pusa early hybrid maize 5 ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਸਦੇ ਲਈ ਬੀਜ 8 -10 ਕਿਲੋ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Vicky Romana
Punjab
02-02-2020 04:29 PM
ਇਸਦੇ ਸੀਮਨ ਦਾ ਰੇਟ 75-300 ਰੁਪਏ ਤਕ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਦੁੱਧ ਦੇ ਰਿਕਾਰਡ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਬਾਕੀ ਇਸਦੀ ਸੀਮਨ ਸਟ੍ਰਾ ਤੇ nili, nili ravi, nr ਲਿਖਿਆ ਹੁੰਦਾ ਹੈ

Posted by राजेश भिमावाद (पाटीदार)
Madhya Pradesh
02-02-2020 04:29 PM
जामुनी धब्बे और तने का झुलस रोग: गंभीर हमले के दौरान यह बीमारी फसल की पैदावार को 70% तक नुकसान पहुंचाती है इससे पत्तों पर जामुनी रंग के धब्बे पड़ जाते है इसकी पीली धारियां भूरी हो जाती है और तीखी और लम्बी हो जाती है
इसकी रोकथाम के लिए प्रोपीनेब 70% डब्लयू पी 350 ग्राम को 150 लीटर में मिलाकर प्रति एकड़ में 10 दिन के फासल.... (Read More)
जामुनी धब्बे और तने का झुलस रोग: गंभीर हमले के दौरान यह बीमारी फसल की पैदावार को 70% तक नुकसान पहुंचाती है इससे पत्तों पर जामुनी रंग के धब्बे पड़ जाते है इसकी पीली धारियां भूरी हो जाती है और तीखी और लम्बी हो जाती है
इसकी रोकथाम के लिए प्रोपीनेब 70% डब्लयू पी 350 ग्राम को 150 लीटर में मिलाकर प्रति एकड़ में 10 दिन के फासले पर स्प्रे करें
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