Experts Q&A Search

Posted by राम सिंह
Rajasthan
06-02-2020 05:43 AM
Punjab
02-06-2020 11:19 AM
राम जी अगर आप जैविक खेती करना चाहते है तो यह बहुत अच्छा विचार है अआप इसके लिए पहले अपने इलाके में जैविक खेती करने वाले किसानो के experience को जाने और फिर कम जगह में जैविक खेती शुरू करें धन्यवाद
Posted by Ramuniwad
Rajasthan
06-02-2020 05:43 AM
Punjab
02-06-2020 09:39 AM
रमुनिवड जी कृपया आप जीरे की फसल की फोटो भेजे ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by mahesh Singh pal
Uttarakhand
06-02-2020 04:54 AM
Punjab
02-06-2020 01:24 PM
Mahesh ji usko aap pett ke kirro ke liye Bandykind plus bolus den aur Ovumin gold powder 50-50gm subah sham aur vitum-H liquid 10ml rojana dena suru kren, isse frak padd jayega..
Posted by Parveen
Punjab
06-02-2020 03:50 AM
Punjab
02-06-2020 01:25 PM
Jekar ehh jale de nal nal hor v heat de lashan dekha rehi hai tan tuci iss nu AI krwa skde ho ate Pregstay gold powder 30gm rojana 20 din tak de skde ho..
Posted by akshay
Bihar
06-02-2020 02:51 AM
Punjab
02-06-2020 01:29 PM
Akshay ji aap dairy farming ki training lene ke liye apne nazdiki kvk se sampark kr skte hai waha sme sme per alag alag kam ke liye training di jatti hai aap waha jakar apna training wala farm bhar skte hai fir jabb v training hogi to woh apko phone krke bta denge, training lene ke liye aap Krishi Vigyan Kendra Rohtas, Bikramganj, (Bihar Agricultural University Sabour, Bhagalpur) Post Office - Bikramganj, Dist. - Rohtas - 802 212 (Bihar) India, Call us : +91 9931312288 se sampark kr skte hai.
Posted by Amar dhaliwal
Punjab
05-02-2020 11:34 PM
Punjab
02-06-2020 09:36 AM
amar ji tuc silage de layi makki di kisam J1006 di bijai kar sakde ho.dhanwad
Posted by Amar dhaliwal
Punjab
05-02-2020 11:32 PM
Punjab
02-06-2020 09:48 AM
amar ji jekar tuhanu isdi kami de lashan dikhai dinde han jekar lashan dikhai dinde han ta tcu spray kar sakde ho.dhanwad
Posted by वैशाली बेले
Maharashtra
05-02-2020 10:49 PM
Punjab
02-06-2020 09:51 AM
कच्चा रेशम बनाने के लिये रेशम के कीटों का पालन रेशम उत्पादन (Sericulture) या रेशमकीट पालन कहलाता है
Posted by raj
Punjab
05-02-2020 10:48 PM
Punjab
02-06-2020 11:22 AM
raj ji tuc fruits ate sabjiyan dono lga sakde ho. jive tuc khet de corners te fruit plants lga ke kheti kar sakde ho ate centre vich sabjiyan di kheti kar sakde ho.es trah dono hi tareekea nal income aa sakdi hai.jive sabjiyan nal har roj income ho jayegi ate isto bad fruit plants nu fal auna shuru ho jayega.dhanwad
Posted by वैशाली बेले
Maharashtra
05-02-2020 10:47 PM
Punjab
02-06-2020 11:04 AM
रेशम के उत्पादन के लिए कीड़े की परवरिश की जाती है कीड़े के लिए कई व्यापारिक प्रजातियां हैं बंबिक्स मोरी पालतू रेशम कीट के टोके व्यापक रूप से प्रयोग किए जाते हैं आज चीन और भारत दो मुख्य उत्पादक, संसार के वार्षिक उत्पादन का अधिक 60 प्रतिशत है रेशम के कीट को शहतूत के पत्ते खिलाये जाते हैं रेशम के कीड़ें अंडों म.... (Read More)
रेशम के उत्पादन के लिए कीड़े की परवरिश की जाती है कीड़े के लिए कई व्यापारिक प्रजातियां हैं बंबिक्स मोरी पालतू रेशम कीट के टोके व्यापक रूप से प्रयोग किए जाते हैं आज चीन और भारत दो मुख्य उत्पादक, संसार के वार्षिक उत्पादन का अधिक 60 प्रतिशत है रेशम के कीट को शहतूत के पत्ते खिलाये जाते हैं रेशम के कीड़ें अंडों में से 25 दिन में बाहर आ जाते हैं यह तापमान पर निर्भर करता है यह लगातार पत्ते खाते हैं और इन्हें दिन में दो बार पत्ते खिलाए जाते हैं इन्हें साफ वातावरण में रखा जाता है रेशम के कीड़े को 48 घंटे लग जाते हैं यह ज्यादातर कर्नाटक में की जाती है
Posted by jay singh
Rajasthan
05-02-2020 10:28 PM
Punjab
02-06-2020 11:49 AM
सिट्रस को हर तरह की मिट्टी में उगाया जा सकता है हल्की मिट्टी जो अच्छे निकास वाली हो, इसकी खेती के लिए अनुकूल होती है इसके लिए मिट्टी का pH 5.5-7.5 होना चाहिए इन्हें हल्की क्षारीय और तेज़ाबी मिट्टी में भी उगाया जा सकता है हल्की दोमट अच्छे जल निकास वाली मिट्टी सिट्रस की खेती के लिए बहुत अच्छी होती है प्रसिद्ध किस्मे.... (Read More)
सिट्रस को हर तरह की मिट्टी में उगाया जा सकता है हल्की मिट्टी जो अच्छे निकास वाली हो, इसकी खेती के लिए अनुकूल होती है इसके लिए मिट्टी का pH 5.5-7.5 होना चाहिए इन्हें हल्की क्षारीय और तेज़ाबी मिट्टी में भी उगाया जा सकता है हल्की दोमट अच्छे जल निकास वाली मिट्टी सिट्रस की खेती के लिए बहुत अच्छी होती है प्रसिद्ध किस्में: Kagzi: यह बड़े क्षेत्र में उगाई जाने वाली नींबू की सामान्य किस्म है इसके वृक्ष ज्यादा घनत्व वाले, छोटे पत्ते और फैलने वाले होते हैं फल छोटे गोल और पतली त्वचा वाले होते हैं इसका रस स्वाद में बहुत तेज़ाबी होता है खेत की तैयारी के लिए, खेत की अच्छी तरह से जोताई, क्रॉस जोताई और अच्छे से समतल करना चाहिए पहाड़ी क्षेत्रों में ढलानों की बजाय मेंड़ पर रोपण किया जाता है ऐसे क्षेत्रों में उच्च घनत्व रोपण भी संभव है रोपाई से पहले, जोताई करें और समतल करें पंजाब में बसंत के मौसम (फरवरी से मार्च) और मॉनसून के मौसम (15 अगस्त से अक्तूबर के अंत) में रोपाई की जाती है लोबिया, सब्जियों, फ्रैंच बीन्स के साथ अंतर फसली शुरूआती दो से तीन वर्ष में किया जा सकता है पौधों के बीच 4.5x4.5 फासला रखना चाहिए नए पौधों की रोपाई के लिए गड्ढों का आकार 60x60x60 सैं.मी. होना चाहिए गड्ढों में रोपाई के समय गली हुई रूड़ी की खाद 10 किलो और सिंगल सुपर फासफेट 500 ग्राम डालें नए पौधों की रोपाई के लिए गड्ढों का आकार 60x60x60 सैं.मी. होना चाहिए पौधों का प्रजनन कलम लगाकर या एयर लेयरिंग द्वारा किया जाता है 208 पौधे प्रति एकड़ का घनत्व बना कर रखना चाहिए पौधे के तने की अच्छी वृद्धि के लिए, ज़मीनी स्तर के नज़दीक से 50-60 सैं.मी. में शाखाओं को निकाल देना चाहिए पौधे का केंद्र खुला होना चाहिए विकास की शुरूआती अवस्था में आस-पास की टहनियों को निकाल देना चाहिए फसल के 1-3 वर्ष की हो जाने पर, अच्छी तरह से गला हुए गाय का गोबर 5-20 किलो और युरिया 100-300 ग्राम प्रति वृक्ष में डालें 4-6 वर्ष की फसल में, अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर 25-50 किलो और युरिया 100-300 ग्राम प्रति वृक्ष में डालें 7-9 वर्ष की फसल में यूरिया 60-800 ग्राम और गाय का गला हुआ गोबर 60-90 किलो प्रति वृक्ष में डालें जब फसल 10 वर्ष की या इससे ज्यादा की हो जाए तो गाय का गला हुआ गोबर 100 किलो या यूरिया 800-1600 ग्राम प्रति वृक्ष में डालें नदीनों को हाथ से गोडाई करके या रासायनों द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है ग्लाइफोसेट 1.6 लीटर को प्रति 150 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें ग्लाइफोसेट की स्प्रे सिर्फ नदीनों पर ही करें, मुख्य फसल पर ना करें नींबू की फसल को नियमित अंतराल पर सिंचाई की आवश्यकता होती है सर्दियों और गर्मियों में जीवन रक्षक सिंचाई जरूर करें फूल आने के समय, फल लगने के समय और पौधे के अच्छे विकास के लिए सिंचाई आवश्यक है ज्यादा सिंचाई से जड़ गलन और तना गलन की बीमारियों का खतरा होता है उच्च आवृत्ति की सिंचाई फायदेमंद होती है नमकीन पानी फसल के लिए हानिकारक होता है बसंत ऋतु में अकेली जड़ों को पानी देना पौधे को प्रभावित नहीं करता उचित आकार के होने के साथ आकर्षित रंग, शुगर की मात्रा 12:1 होने पर किन्नू के फल तुड़ाई के लिए तैयार हो जाते हैं किस्म के आधार पर फल मध्य जनवरी से मध्य फरवरी के महीने में तैयार हो जाते हैं कटाई उचित समय पर करें, ज्यादा जल्दी और ज्यादा देरी से कटाई करने पर घटिया गुणवत्ता के फल मिलते हैं उचित आकार और आकर्षक रंग लेने पर जब फल में टी एस एस 12:1 तेज़ाब की मात्रा 12:1 अनुपात हो जाने पर किन्नू तुड़ाई के लिए तैयार हो जाते है किस्म के अनुसार किन्नू आमतौर पर मध्य- जनवरी से मध्य फरवरी में पक जाते है सही समय पर तुड़ाई करना जावश्यक है, क्योंकि समय से पहले या देरी से तुड़ाई करने से फलों की गुणवत्ता पर बुरा प्रभाव पड़ता है इसे मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छी वृद्धि और अच्छी उपज के लिए, इसे गहरी दोमट और जलोढ़ मिट्टी की आवश्यकता होती है यह दोमट और हल्की क्षारीय मिट्टी को भी सहनेयोग्य है इसकी खेती हल्की मिट्टी में भी की जा सकती है अनार की खेती के लिए, मध्यम और काली मिट्टी भी उपयुक्त होती है प्रसिद्ध किस्में: kabul,kandhari,Muscet red मिट्टी के भुरभुरा होने तक ज़मीन की दो से तीन बार जोताई करें ज़मीन को समतल और एक समान करने के लिए तवियों से जोताई करें इसकी बिजाई मुख्यत दिसंबर से जनवरी महीने में की जाती है उचित फासला मिट्टी की किस्म और जलवायु पर निर्भर करता है अनार की रोपाई के लिए, यदि वर्गाकार प्रणाली अपनाई गई है तो 5 मी x 5 मी फासले का प्रयोग करें रोपाई से एक महीना पहले बिजाई के लिए 60x60x60 सैं.मी. आकार के गड्ढे खोदें गड्ढों को 15 दिनों तक धूप में खुला छोड़ें उसके बाद 20 किलो रूड़ी की खाद और 1 किलो सुपर फास्फेट को मिट्टी में मिलाकर गड्ढों को भरें गड्ढे भरने के बाद पानी डालें ताकि मिट्टी अच्छे से नीचे बैठ जाये बिजाई के लिए रोपण विधि का प्रयोग किया जाता है अनार का प्रजनन एयर लेयरिंग विधि द्वारा किया जाता है एयर लेयरिंग बारिश के मौसम के साथ साथ नवंबर-दिसंबर महीने में की जाती है एयर लेयरिंग विधि के लिए, एक से दो वर्ष के स्वस्थ, पकी हुई टहनियां जिनकी लंबाई 45-60 सैं.मी. और मोटाई पैंसिल जितनी हों, चुनें बिजाई से पहले, नए पौधों या कटिंग को IBA के घोल 1000 पी पी एम 1 ग्राम प्रति लीटर पानी में डुबोयें शुरूआती दो से तीन वर्षों में अंतरफसली संभव है अंतरफसली के तौर पर सब्जियों, फलीदार फसलें या हरी खाद वाली फसलें उगाई जा सकती हैं पहले वर्ष में गाय का गोबर 10 किलो प्रति पौधे में डालें कैल्शियम अमोनियम नाइट्रेट 500 ग्राम, एस एस पी 600 ग्राम और म्यूरेट ऑफ पोटाश 250 ग्राम प्रति पौधे में रोपाई के समय डालें गाय के गोबर, एस एस पी, म्यूरेट ऑफ पोटाश और नाइट्रोजन की आधी मात्रा दिसंबर से जनवरी महीने में डालें बाकी की नाइट्रोजन को दो भागों में बांटे पहले भाग को, फलों के पहली बार विकसित होने के समय और दूसरे भाग को, फलों के दूसरी बार विकसित होने के 4-5 सप्ताह पहले डालें रोपाई के तुरंत बाद सिंचाई करें उसके बाद, रोपाई के बाद 3 दिन से 10-15 दिनों के अंतराल पर पानी दें बारिश के मौसम में, निकास का प्रबंध करें क्योंकि यह फसल जल जमाव के हालातों में खड़ी नहीं रह सकती गर्मियों में 7-10 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें और सर्दियों में इसे बढ़ाकर 10-15 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें अनियमित सिंचाई से फूलों के गिरने में वृद्धि हो सकती है फलों के विकसित होने की अवस्था में पानी की कमी ना होने दें और पानी की कमी होने पर अत्याधिक पानी देने से फलों में दरारें पड़ जाती हैं और फल गिर जाता है इसलिए फूल निकलने से लेकर तुड़ाई की अवस्था तक नियमित और पर्याप्त सिंचाई दें तुपका सिंचाई से अनार अच्छे परिणाम देते हैं तुपका सिंचाई से ना केवल पानी की बचत होती है बल्कि पानी की कम मात्रा में अच्छी उपज भी मिलती है नदीनों की रोकथाम के लिए मलचिंग की जा सकती है नदीनों की रोकथाम के साथ साथ मिट्टी में नमी को संरक्षित करने में मदद करता है और और वाष्पीकरण हानि को भी कम करता है कटाई और छंटाई ताजी सेहतमंद टहनियों की वृद्धि करने में मदद करती है बीमारी से और घनी शाखाओं को निकाल दें यह पौधे के आकार को उचित बनाए रखता है फूल निकलने के बाद, फल 5-6 महीनों में पक जाते हैं जब फल हरे से हल्के पीले या लाल रंग का हो जाये, या फल पकना शुरू हो जाये तो यह तुड़ाई के लिए उपयुक्त समय होता है तुड़ाई करने में देरी ना करें क्योंकि इससे फलों में दरारें आ जाती हैं जिससे पैदावार कम हो जाती है तुड़ाई के बाद, फलों को एक सप्ताह के लिए छांव में स्टोर करके रखें यह फल के छिल्के को सख्त होने में मदद करेगा ताकि एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में नुकसान कम हो फलों को भार के अनुसान छांटे
Posted by Vikram Yadav
Haryana
05-02-2020 10:07 PM
Punjab
02-06-2020 12:02 PM
विक्रम जी दीमक के लिए आप इसके ऊपर chlorpyriphos @4ml को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by nav shah
Punjab
05-02-2020 09:52 PM
Punjab
02-06-2020 07:42 AM
Navpreet ji tuci pehla majh de thnna wala treatment kro fir uss ton badd dudh vdhuan lai dwaia di varto kr skde ho.
Posted by harmeet singh
Punjab
05-02-2020 09:51 PM
Punjab
02-06-2020 12:10 PM
harmeet ji tuc NPK 130045@1 kilo nu boron@100 gram nu prtai acre de hisab nal varto.dhanwad
Posted by Mohit Mukati
Madhya Pradesh
05-02-2020 09:38 PM
Punjab
02-06-2020 01:22 PM
Posted by Dipak Kumar Mahato
Jharkhand
05-02-2020 09:37 PM

Punjab
02-06-2020 01:25 PM
खरीफ के मौसम में रोपाई के लिए मई से जून का महीना नर्सरी तैयार करने के लिए उपयुक्त होता है बिजाई के 6-8 सप्ताह बाद नए पौधे रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं जुलाई -अगस्त के महीने में रोपण कर दें रोपण के समय, पंक्तियों के बीच 15 सैं.मी. और पौधों के बीच 10 सैं.मी. का फासला रखें नर्सरी में बीज 1-2 सैं.मी. गहराई पर बोयें बिजाई से .... (Read More)
खरीफ के मौसम में रोपाई के लिए मई से जून का महीना नर्सरी तैयार करने के लिए उपयुक्त होता है बिजाई के 6-8 सप्ताह बाद नए पौधे रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं जुलाई -अगस्त के महीने में रोपण कर दें रोपण के समय, पंक्तियों के बीच 15 सैं.मी. और पौधों के बीच 10 सैं.मी. का फासला रखें नर्सरी में बीज 1-2 सैं.मी. गहराई पर बोयें बिजाई से 10 दिन पहले 20 टन रूड़ी की खाद डालें नाइट्रोजन 30 किलो(यूरिया 65 किलो), फासफोरस 16 किलो(सिंगल सुपर फासफेट 100 किलो) और पोटाश 16 किलो(मिउरेट ऑफ़ पोटाश 30 किलो) प्रति एकड़ डालें फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा रोपण के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटकर रोपाई के बाद टॉप ड्रेसिंग के तौर पर 30वें और 45वें दिन डालें अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए सल्फर भी बहुत महत्तवपूर्ण है मिट्टी की जांच के आधार पर रोपाई के समय 6-12 किलो सल्फर प्रति एकड़ में डालें
Posted by Kitbokmiki Syntem
Meghalaya
05-02-2020 09:30 PM
Punjab
02-06-2020 03:01 PM
Posted by gυяωιи∂єя ѕιиgн
Punjab
05-02-2020 09:21 PM

Punjab
02-06-2020 01:34 PM
ਗੁਰਵਿੰਦਰ ਜੀ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਇਸਦੀ ਫੋਟੋ ਭੇਜੋ ਤਾ ਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸ ਬਾਰੇ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Aman Kang
Punjab
05-02-2020 09:21 PM
Punjab
02-06-2020 07:45 AM
ਉਸ ਨੂੰ Lactomood ਹੋਮਿਓਪੈਥਿਕ ਦਵਾਈ ਦੀਆ 10-10 ਬੂੰਦਾਂ ਦਿਨ ਵਿਚ 3 ਵਾਰ ਦਿਓ ਅਤੇ lactomax tablet 10-10 ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ ਅਤੇ Milkout ਪਾਊਡਰ 2-2 ਚਮਚ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ.
Posted by Vinod Moun
Haryana
05-02-2020 09:19 PM
Punjab
02-06-2020 03:02 PM
Washington: इस किस्म के फलों में कम बीज होते हैं, फल का आकार बड़ा, पीले रंग का गुद्दा, खाने में मीठा होता है नर पौधा मादा पौधे से छोटा होता है, और पौधा थोड़े छोटे आकार का होता है Coorg Honey: इस किस्म के फल में बहुत कम बीज होते हैं, फल का आकार बड़ा, यह Honey Dew किस्म से बहुत कम मीठा होता है और पौधे का कद बड़ा होता है नर और मादा फल एक ही वृक्.... (Read More)
Washington: इस किस्म के फलों में कम बीज होते हैं, फल का आकार बड़ा, पीले रंग का गुद्दा, खाने में मीठा होता है नर पौधा मादा पौधे से छोटा होता है, और पौधा थोड़े छोटे आकार का होता है Coorg Honey: इस किस्म के फल में बहुत कम बीज होते हैं, फल का आकार बड़ा, यह Honey Dew किस्म से बहुत कम मीठा होता है और पौधे का कद बड़ा होता है नर और मादा फल एक ही वृक्ष पर फल देते हैं CO.2: इसके फल बड़े आकार के और पौधा मध्यम कद का होता है CO.1, CO.3, Solo, Pusa Nanha, Ranchi Selection, Coorg Green Sunrise Solo, Taiwan and Coorg Green किस्में विभिन्न राज्यों में उगाने के लिए उपयुक्त हैं
Posted by satnam
Punjab
05-02-2020 09:16 PM

Punjab
02-06-2020 03:04 PM
Satnam ji punjab vich solar pump bare visthar nal jankari lai tusi Amrik Singh 9814221784 nal samparak kar sakde ho, Thankyou.
Posted by Vinod Moun
Haryana
05-02-2020 09:10 PM

Punjab
02-06-2020 03:08 PM
बीज को जुलाई के दूसरे सप्ताह से सितंबर के तीसरे सप्ताह में बोया जाता है और सितंबर के पहले सप्ताह से मध्य अक्तूबर तक रोपाई की जाती है पौधे से पौधे में 1.5x1.5 मीटर फासले का प्रयोग करें बीज को 1 सैं.मी. की गहराई पर बोयें
Posted by Lakhveer Singh Sran
Punjab
05-02-2020 08:50 PM
Punjab
02-06-2020 07:48 AM
Layer poultry me agar aapne commercial level par kaam shuru karna hai to venkeys ki BV300 breed besh hai ji agar aapne chote level par kam karna hai to RIR breed thik rahegi ji.
Posted by ਪਰਮਿੰਦਰ ਸਿੰਘ
Punjab
05-02-2020 08:45 PM
Punjab
02-06-2020 07:50 AM
ਤੁਸੀ ਉਸਦੇ ਜਖਮ ਉਪਰ Coolmac ਟਿਊਬ ਲਗਾਓ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ Bovimin-Gl liquid 7ml ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ ਅਤੇ Vitum-H liquid 10ml ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ..
Posted by ਮਨਜੀਤ ਸਿੰਘ ਧਾਲੀਵਾਲ
Punjab
05-02-2020 08:43 PM
Punjab
02-06-2020 03:22 PM
manjeet ji tuc isde uper topik@160ml nu prati acre de hisab nal spray karo.dhanwad
Posted by Balvir Singh
Punjab
05-02-2020 08:43 PM
Punjab
02-06-2020 03:33 PM
balvir ji jado kora paina band ho jayega ta tuc cover chak deo.dhanwad
Posted by ਮਨਜੀਤ ਸਿੰਘ ਧਾਲੀਵਾਲ
Punjab
05-02-2020 08:34 PM
Punjab
02-06-2020 07:52 AM
ਤੁਸੀ ਇਸ ਨੂੰ Vitum-H injection 5ml ਲਗਵਾਓ ਇਹ ਤੁਸੀ 3-3 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਫਰਕ ਨਾਲ 5 ਇੰਜੇਕਸ਼ਨ ਲਗਵਾਓ, ਤੁਸੀ ਕਲਮੀਸ਼ੋਰਾ 500ਗ੍ਰਾਮ, ਜੋ ਖਾਰ 250ਗ੍ਰਾਮ, ਮਿਠਾਸੋਡਾ 250ਗ੍ਰਾਮ, ਨਸ਼ਾਦਰ 150ਗ੍ਰਾਮ, ਖੰਡ 2 ਕਿਲੋ ਅਤੇ ਮਿਠਾ ਤੇਲ 2 ਕਿਲੋ ਲਉ ਤੇ ਪਹਿਲਾਂ ਖੰਡ ਦੀ ਚਾਸਣੀ ਬਣਾਉਣ ਤੇ ਫਿਰ ਉਸ ਵਿਚ ਮਿੱਠਾ ਤੇਲ ਪਾਉ ਤੇ ਉਬਾਲੋ ਫਿਰ ਉਸ ਵਿਚ ਬਾਕੀ ਸਾਰਾ ਸਾਮਾਨ ਪਾਉ ਤੇ ਉਬਾਲ ਕੇ ਠਾਰ ਕੇ ਪੰਜ ਹਿੱਸੇ ਕਰ ਲਉ ਤੇ ਇਕ ਹਿੱਸਾ ਰੋ.... (Read More)
ਤੁਸੀ ਇਸ ਨੂੰ Vitum-H injection 5ml ਲਗਵਾਓ ਇਹ ਤੁਸੀ 3-3 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਫਰਕ ਨਾਲ 5 ਇੰਜੇਕਸ਼ਨ ਲਗਵਾਓ, ਤੁਸੀ ਕਲਮੀਸ਼ੋਰਾ 500ਗ੍ਰਾਮ, ਜੋ ਖਾਰ 250ਗ੍ਰਾਮ, ਮਿਠਾਸੋਡਾ 250ਗ੍ਰਾਮ, ਨਸ਼ਾਦਰ 150ਗ੍ਰਾਮ, ਖੰਡ 2 ਕਿਲੋ ਅਤੇ ਮਿਠਾ ਤੇਲ 2 ਕਿਲੋ ਲਉ ਤੇ ਪਹਿਲਾਂ ਖੰਡ ਦੀ ਚਾਸਣੀ ਬਣਾਉਣ ਤੇ ਫਿਰ ਉਸ ਵਿਚ ਮਿੱਠਾ ਤੇਲ ਪਾਉ ਤੇ ਉਬਾਲੋ ਫਿਰ ਉਸ ਵਿਚ ਬਾਕੀ ਸਾਰਾ ਸਾਮਾਨ ਪਾਉ ਤੇ ਉਬਾਲ ਕੇ ਠਾਰ ਕੇ ਪੰਜ ਹਿੱਸੇ ਕਰ ਲਉ ਤੇ ਇਕ ਹਿੱਸਾ ਰੋਜਾਨਾ ਰਾਤ ਵੇਲੇ ਦਿਉ ਤੇ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਤ੍ਰੇਲ ਵਿਚ ਨਾ ਬੰਨ੍ਹੋ ਤੇ ਨਾ ਹੀ 6 ਦਿਨ ਨਵਾਹੋ ਅਤੇ Milkout ਪਾਊਡਰ 15-15gm ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ..
Posted by sukhmander singh
Punjab
05-02-2020 08:20 PM
Punjab
02-06-2020 03:36 PM
ਸੁਖਮੰਦਰ ਜੀ ਤੁਸੀ ਕਾਂਗਿਆਰੀ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਦੇ ਲਈ tilt @200ml ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਤੇਲੇ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ imidaclopird @60 ml ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ 130045 ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਜਦੋ ਕਣਕ ਨਿਸਾਰੇ ਤੇ ਹੈ ਉਸ ਸਮੇ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by soory lal
Uttar Pradesh
05-02-2020 08:19 PM

Punjab
02-06-2020 03:49 PM
फरवरी महीने से जायद की फसलों की बुवाई का समय शुरू है इन फसलों की बुवाई मार्च तक चलती है इस समय बोने पर ये फसलें अच्छी पैदावार देती हैं इस मौसम में खीरा, ककड़ी, करेला, लौकी, तोरई, भिण्‍डी जैसी सब्ज़ियों की बुवाई करनी चाहिए 1. खीरा :- खीरे की खेती के लिए खेत में क्यारियां बनाएं इसकी बुवाई लाइन में ही करें लाइन से.... (Read More)
फरवरी महीने से जायद की फसलों की बुवाई का समय शुरू है इन फसलों की बुवाई मार्च तक चलती है इस समय बोने पर ये फसलें अच्छी पैदावार देती हैं इस मौसम में खीरा, ककड़ी, करेला, लौकी, तोरई, भिण्‍डी जैसी सब्ज़ियों की बुवाई करनी चाहिए 1. खीरा :- खीरे की खेती के लिए खेत में क्यारियां बनाएं इसकी बुवाई लाइन में ही करें लाइन से लाइन की दूरी 1.5 मीटर रखें और पौधे से पौधे की दूरी 1 मीटर बुवाई के बाद 20 से 25 दिन बाद निराई - गुड़ाई करना चाहिए खेत में सफाई रखें और तापमान बढ़ने पर हर सप्ताह हल्की सिंचाई करें खेत से खरपतवार हटाते रहें 2. ककड़ी :- ककड़ी की बुवाई के लिए एक उपयुक्त समय फरवरी से मार्च ही होता है लेकिन अगेती फसल लेने के लिए पॉलीथीन की थैलियों में बीज भरकर उसकी रोपाई जनवरी में भी की जा सकती है इसके लिए एक एकड़ भूमि में एक किलोग्राम बीज की ज़रूरत होती है इसे लगभग हर तरह की ज़मीन में उगाया जा सकता है भूमि की तैयारी के समय गोबर की खाद डालें व खेत की तीन से चार बार जुताई करके सुहागा लगाएं ककड़ी की बीजाई 2 मीटर चौड़ी क्यारियों में नाली के किनारों पर करनी चाहिए पौधे से पौधे का अंतर 60 सेंटीमीटर रखें एक जगह पर दो - तीन बीज बोएं बाद में एक स्थान पर एक ही पौधा रखें 3. करेला :- हल्की दोमट मिट्टी करेले की खेती के लिए अच्छी होती है करेले की बुवाई दो तरीके से की जाती है - बीज से और पौधे से करेले की खेती के लिए 2 से 3 बीज 2.5 से 5 मीटर की दूरी पर बोने चाहिए बीज को बोने से पहले 24 घंटे तक पानी में भिगो लेना चाहिए इससे अंकुरण जल्दी और अच्छा होता है नदियों के किनारे की ज़मीन करेले की खेती के लिए बढ़िया रहती है कुछ अम्लीय भूमि में इसकी खेती की जा सकती है पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करें इसके बाद दो - तीन बार हैरो या कल्टीवेटर चलाएं 4. लौकी :- लौकी की खेती कर तरह की मिट्टी में हो जाती है लेकिन दोमट मिट्टी इसके लिए सबसे अच्छी होती है लौकी की खेती के लिए एक हेक्टेयर में 4.5 किलोग्राम बीज की ज़रूरत होती है बीज को खेत में बोने से पहले 24 घंटे पानी में भिगोने के बाद टाट में बांध कर 24 घंटे रखें करेले की तरह लौकी में भी ऐसा करने से बीजों का अंकुरण जल्दी होता है लौकी के बीजों के लिए 2.5 से 3.5 मीटर की दूरी पर 50 सेंटीमीटर चौड़ी व 20 से 25 सेंटीमीटर गहरी नालियां बनानी चाहिए इन नालियों के दोनों किनारे पर गरमी में 60 से 75 सेंटीमीटर के फासले पर बीजों की बुवाई करनी चाहिए एक जगह पर 2 से 3 बीज 4 सेंटीमीटर की गहराई पर बोएं 5. भिंडी :- भिंडी की अगेती किस्म की बुवाई फरवरी से मार्च के बीच करते हैं इसकी खेती हर तरह की मिट्टी में हो जाती है भिंडी की खेती के लिए खेत को दो-तीन बार जुताई कर मिट्टी को भुरभुरा कर लेना चाहिए और फिर पाटा चलाकर समतल कर लेना चाहिए बुवाई कतारों में करनी चाहिए कतार से कतार दूरी 25-30 सेमी और कतार में पौधे की बीच की दूरी 15-20 सेमी रखनी चाहिए बोने के 15-20 दिन बाद पहली निराई-गुड़ाई करना जरुरी रहता है खरपतवार नियंत्रण के लिए रासायनिक का भी प्रयोग किया जा सकता है
Posted by amit Solanki badgaon
Madhya Pradesh
05-02-2020 08:16 PM

Punjab
02-06-2020 07:56 AM
Amit ji aap achi nasal ki padiya lene ke liye Kamlesh Kushwaha 9229881876 Bhumika ANIMAL Breeder farm se sampark kr skte hai.
Posted by Ombirsarpanch Birpal
Haryana
05-02-2020 08:16 PM

Punjab
02-06-2020 02:30 PM
Ombirsarpanch Birpal chicks lene ke lia aap Sumit Kumar 8006000291, 7906547529 Sumit Kumar Poultry Farm se samparak kar sakte hai, Thankyou.
Posted by Amit Kumar
Punjab
05-02-2020 07:40 PM
Punjab
02-29-2020 03:18 PM
The guinea fowl are very hardy, vigorous and largely disease-free birds. They are generally pretty quiet, but can be very noisy if disturbed. They are generally more active than the chickens and not tamed easily, and they seem to retain some of their wild behavior. Generally 2-3 square feet space will be good for each bird. It is important to provide the guineas plenty of room, if you confine your birds. The more room they have, the less likely they are to become stressed. Consider good flooring facilities, and the floor of the pen should be covered with an absorbent bedding material such as wood shavings or chopped hay or straw. If the litter is kept dry, it can stay in place for several months. Providing perches is very important, because guinea fowl prefer to roost. You must keep y.... (Read More)
The guinea fowl are very hardy, vigorous and largely disease-free birds. They are generally pretty quiet, but can be very noisy if disturbed. They are generally more active than the chickens and not tamed easily, and they seem to retain some of their wild behavior. Generally 2-3 square feet space will be good for each bird. It is important to provide the guineas plenty of room, if you confine your birds. The more room they have, the less likely they are to become stressed. Consider good flooring facilities, and the floor of the pen should be covered with an absorbent bedding material such as wood shavings or chopped hay or straw. If the litter is kept dry, it can stay in place for several months. Providing perches is very important, because guinea fowl prefer to roost. You must keep your guineas in covered pens, if you want to keep your birds from wandering in a specific area. The guineas are excellent flyers, and they are able to fly at a very early age. They are able to fly up to 400-500 feet at a time. They are also very good runners and they prefer to move on foot, including when escaping from predators.The guineas are available in a variety of ‘pure-bred’ colors. But many of the birds are cross-bred, resulting in multicolored feathers. Feather color of these birds is the only difference between the different varieties. The guineas are monogamous creatures, purchasing them in pairs is best. Identifying male and and female birds is very difficult, but not impossible. You can identify male and female if you look for these things. The males generally have larger wattles than the females. The females generally make a two-syllable sound, while the males make a single-syllable sound. The males have a narrower opening between their pelvic bones than the females. If you hold the guinea under one arm and use your free hand to feel the bones, you should notice a distance of about two fingers on males and three fingers on females. After purchasing the birds, it is best to keep them confined for a week or two to let them become accustomed to their new home. They could run away, if you let them out right away. It is good to confine them in a pen where they can see the area where they will be living. Let one bird out after the initial couple of weeks. As the guineas hate to be alone, so the single bird will not go far and will learn it’s way around the area. Let a second guinea out after a few days to round with the first. It is generally safe to let the rest out, if they stay near the pen. The guineas generally love to roam freely, and they forage for themselves and are able to meet most of their nutrition requirements on their own. They generally consume a variety of insects and arachnids, weed seeds, slugs, worms and caterpillars. They need to consume some greens for maintaining good digestion. So they eat grasses, weeds, dandelions and other vegetation. It is important to ensure the availability of grit, because they love to consume vegetation. They also benefit from having oyster shell available. They generally prefer wheat, sorghum or millet grain and they will ignore whole corn kernels. Restricting their feed will encourage them to spend more time eating insects if you are keeping them for pest control.If you want to keep your birds confined, and if they are not allowed to forage freely then you can feed them commercial poultry feed. Using unmedicated feeds is good for them. Compared to chickens, the guineas require a higher protein enriched feed. But they generally do quite well on regular poultry diet. The keets need extra protein, so keeping between 24 and 26 percent protein will be good. The protein level should be reduced to 18% to 20% for the fifth to eighth weeks. After eight weeks, the keets can be fed a 16% layer mash. You can mix a higher protein feed with a lying-hen mash to get the proper protein level, if you can’t find feeds in the proper protein levels. Pelleted feed is not recommended for the guineas, and they should be fed mash or crumbles. The guinea fowl are not too good for taking care of their delicate little keets. They will sometime abandon a nest even after the hen has gotten broody and spent several nights on the eggs. Move the eggs to an incubator right away, if you notice that a nest has been abandoned. You can use a store-bought incubator, following the instructions for incubating turkey or pheasant eggs if no specific instructions are provided for guinea eggs. The incubation period is between 26 and 28 days. You will need to care for the keets once they have hatched. They need to care until they have fully developed feathers and are strong enough to hold their own with the rest of the flock. Using a broody hen can be helpful for hatching the eggs and raising the keets.
Posted by Anil Kumar
Punjab
05-02-2020 07:39 PM
Punjab
02-06-2020 03:56 PM
Choudhary ji tuc isdi kheti kar sakde ho eh bhut vadia munafa dvaundi hai.dhanwad
Posted by Navin k
Jharkhand
05-02-2020 07:39 PM
Punjab
02-05-2020 08:39 PM
Sir spray NPK 13:00:45@1kg per acre in 150 ltr of water in tomato plants....
Posted by Manjinder Cheema
Punjab
05-02-2020 07:37 PM
Punjab
02-06-2020 08:23 AM
Cheema ji, tuci dudh wale injection lgwun lai apne nazdiki doctor nal sampark kr skde ho..
Posted by kaushal singh
Uttar Pradesh
05-02-2020 07:30 PM

Punjab
02-05-2020 08:43 PM
श्री मान खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते ह.... (Read More)
श्री मान खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुमब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तहय उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तहय में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तहय लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है
Posted by Anil Kumar
Punjab
05-02-2020 07:30 PM
Punjab
03-03-2020 03:46 PM
Choudhary ji pashu kisan credit card dono state vich bande han.dhanwad
Posted by Gobinda chandra sahu
Odisha
05-02-2020 07:27 PM

Punjab
02-06-2020 08:30 AM
आप बकरियों की अच्छी ग्रोथ के लिए मौसम के हिसाब से चारा दे सकते है जैसे कि अब बरसीम, मक्खन घास चल रहा है और अच्छी खुराक के साथ साथ आप groviplex liquid 15-20 ml रोजाना दे सकते है धन्यवाद
Posted by Jot Malhi
Punjab
05-02-2020 07:23 PM
Punjab
02-06-2020 03:54 PM
ਮੱਲ੍ਹੀ ਜੀ ਇਸਦੀ ਪਨੀਰੀ ਬੈਡ ਤੇ ਹੀ ਬੀਜੋ ਬਿਜਾਈ ਦੇ ਲਈ ਸਹੀ ਸਮਾਂ ਮੱਧ ਫਰਵਰੀ ਤੋਂ ਮਾਰਚ ਦਾ ਮਹੀਨਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਦੂਜੀ ਵਾਰ ਬਿਜਾਈ ਦੇ ਲਈ ਮੱਧ ਮਈ ਤੋਂ ਜੁਲਾਈ ਦਾ ਸਮਾਂ ਸਹੀ ਹੈ ਰੇਤੀ ਦੀ ਮਦਦ ਨਾਲ ਬੀਜਾਂ ਨੂੰ ਰਗੜਕੇ ਉਸ ਦਾ ਉੱਪਰਲਾ ਛਿਲਕਾ ਉਤਾਰ ਲਓ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਬੀਜਾਂ ਦੀ ਪੁੰਗਰਣ ਪ੍ਰਤੀਸ਼ਤਤਾ ਵਧਾਉਣ ਲਈ ਉਹਨਾਂ ਨੂੰ 24 ਘੰਟਿਆਂ ਲਈ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਭਿਉਂ ਦਿਓ ਬੀਜਾਂ ਨੂੰ ਬਣੇ .... (Read More)
ਮੱਲ੍ਹੀ ਜੀ ਇਸਦੀ ਪਨੀਰੀ ਬੈਡ ਤੇ ਹੀ ਬੀਜੋ ਬਿਜਾਈ ਦੇ ਲਈ ਸਹੀ ਸਮਾਂ ਮੱਧ ਫਰਵਰੀ ਤੋਂ ਮਾਰਚ ਦਾ ਮਹੀਨਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਦੂਜੀ ਵਾਰ ਬਿਜਾਈ ਦੇ ਲਈ ਮੱਧ ਮਈ ਤੋਂ ਜੁਲਾਈ ਦਾ ਸਮਾਂ ਸਹੀ ਹੈ ਰੇਤੀ ਦੀ ਮਦਦ ਨਾਲ ਬੀਜਾਂ ਨੂੰ ਰਗੜਕੇ ਉਸ ਦਾ ਉੱਪਰਲਾ ਛਿਲਕਾ ਉਤਾਰ ਲਓ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਬੀਜਾਂ ਦੀ ਪੁੰਗਰਣ ਪ੍ਰਤੀਸ਼ਤਤਾ ਵਧਾਉਣ ਲਈ ਉਹਨਾਂ ਨੂੰ 24 ਘੰਟਿਆਂ ਲਈ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਭਿਉਂ ਦਿਓ ਬੀਜਾਂ ਨੂੰ ਬਣੇ ਹੋਏ ਨਰਸਰੀ ਬੈਡਾਂ ਤੇ ਬੀਜਿਆਂ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਮਿੱਟੀ ਨੂੰ ਪੈਦਾ ਹੋਣ ਵਾਲੀਆਂ ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਤੋਂ ਬਚਾਉਣ ਲਈ ਬੈੱਡਾਂ ਨੂੰ ਜ਼ਮੀਨ ਨਾਲ ਨਾ ਲੱਗਣ ਦਿਓ ਪਨੀਰੀ ਮੁੱਖ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਪੌਦਿਆਂ ‘ਤੇ 4-5 ਪੱਤੇ ਆ ਜਾਣ ‘ਤੇ, ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 25-30 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ ਲਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਪੌਦਿਆਂ ਦੀ ਪਨੀਰੀ ਕਤਾਰਾਂ ਅਤੇ ਪੌਦਿਆਂ ਵਿੱਚ 2.5 x 1.2 ਮੀਟਰ ਦੇ ਫਾਸਲੇ ਤੇ ਲਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਪਨੀਰੀ ਲਾਉਣ ਤੋਂ 7-10 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ, ਫਾਸਫੋਰਸ ਅਤੇ ਪੋਟਾਸ਼ ਦੀ ਖੁਰਾਕ ਪਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਵੇਲਾਂ ਦੇ ਵਿਕਸਿਤ ਹੋਣ ਅਤੇ ਫੁੱਲ ਨਿੱਕਲਣ ਦੇ ਸਮੇਂ ਖਾਦ ਪਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ
Posted by rahul
Himachal Pradesh
05-02-2020 07:21 PM
Punjab
02-06-2020 03:58 PM
rahul ji aap iske uper carbendazim@3 gram ko prati litre pani ke hisab se spray karen,dhanywad
Posted by inderpal
Punjab
05-02-2020 07:19 PM
Punjab
02-05-2020 10:36 PM
Hanji tuci uss nu vetmate lgwa skde ho iss nu lgwa ke 3 din AI krwa skde ho ja fir pashu de bolln de hisab nal tika bhrwa skde ho, iss nu lgaun ton badd jekar pashu ek varr naa rehe tan dusri varr 7 din badd puuri heat vich aa janda hai.
Posted by gurpreet
Punjab
05-02-2020 06:56 PM
Punjab
02-06-2020 09:01 AM
Gurpreet ji tuci jo v swal pushna chahunde ho oh App vich push skde ho tuhanu App vich he sade mahira walo sahi jankari mill jawegi..
Posted by Kuldeep Singh
Punjab
05-02-2020 06:51 PM

Punjab
02-06-2020 09:05 AM
ਉਸ ਨੂੰ Lactomood ਹੋਮਿਓਪੈਥਿਕ ਦਵਾਈ ਦੀਆ 10-10 ਬੂੰਦਾਂ ਦਿਨ ਵਿਚ 3 ਵਾਰ ਦਿਓ ਅਤੇ lactomax tablet 10-10 ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ ਅਤੇ Milkout ਪਾਊਡਰ 2-2 ਚਮਚ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ.
Posted by Vivek Pandey
Uttar Pradesh
05-02-2020 06:48 PM

Punjab
02-06-2020 05:37 PM
रेतली दोमट मिट्टी सीताफल की खेती के लिए अच्छी मानी जाती है लेकिन चिकनी दोमट मिट्टी भी सीताफल की खेती के लिए उपयुक्त है हल्के निकास वाली मिट्टी, भारी चिकनी या पथरीली मिट्टी में इसकी खेती ना करें उस ज़मीन पर भी इसकी खेती करने से परहेज़ करें जहां पहले टमाटर, बैंगन, शिमला मिर्च और अदरक की फसल बोयी गई हो सीताफल की ख.... (Read More)
रेतली दोमट मिट्टी सीताफल की खेती के लिए अच्छी मानी जाती है लेकिन चिकनी दोमट मिट्टी भी सीताफल की खेती के लिए उपयुक्त है हल्के निकास वाली मिट्टी, भारी चिकनी या पथरीली मिट्टी में इसकी खेती ना करें उस ज़मीन पर भी इसकी खेती करने से परहेज़ करें जहां पहले टमाटर, बैंगन, शिमला मिर्च और अदरक की फसल बोयी गई हो सीताफल की खेती के लिए हमेशा वह मिट्टी उपयुक्त होती है जिसकी पी एच 7.5 से ज्यादा हो प्रसिद्ध किस्में:- Saraswati Seven बिजाई के लिए, 165 पौधे प्रति एकड़ में प्रयोग करें और उच्च घनता रोपाई के लिए 225 पौधे प्रति एकड़ में प्रयोग करें बिजाई से पहले, बीज का रेती के साथ ऊपरी छिल्का उतारें और उसके बाद इन बीजों को गर्म पानी में 24 घंटे के लिए भिगोकर रखें उसके बाद बीज को खेत में सीधा या तैयार बैडों पर बोयें मई के महीने में 60 सैं.मी.x60 सैं.मी.x60 सैं.मी. आकार के गड्ढे खोदें ऊपरी मिट्टी को गड्ढे के दायीं ओर और निचली मिट्टी को गड्ढे के बायीं ओर डालें गड्ढों को मिट्टी से पैदा होने वाले कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए धूप में 2 सप्ताह के लिए खुला छोड़ दें खोदने के बाद, गड्ढों को रूड़ी की खाद 20 किलो, एस एस पी 1 मिलो और 10 प्रतिशत फॉलीडोल धूड़ा 100 ग्राम प्रति गड्ढे में डालें पौधों को जुलाई के महीने में तैयार गड्ढों में लगाएं खेत की तैयारी के समय 30 किलो गली हुई रूड़ी की खाद डालें और मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें नाइट्रोजन 400 ग्राम, फासफोरस 250 ग्राम प्रति पौधे में डालें नाइट्रोजन को तीन भागों में पहला जनवरी के महीने में, दूसरा जुलाई के महीने में और तीसरा नवंबर महीने में डालें फासफोरस को दो भागों में पहला जनवरी में और फिर जुलाई के महीने में डालें जब पौधे कलियों या ग्राफ्टिंग विधि से उगाए जाते हैं तो तने को आकार दिया जाता है तने की अच्छी वृद्धि के लिए कम मात्रा में छंटाई की आवश्यकता होती है इसके फलस्वरूप लंबे समय तक अच्छी उपज प्राप्त होगी यह एक बारानी फसल है इसलिए इसे सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती लेकिन अगेती कटाई के लिए फूल निकलने के समय सिंचाई दें जैसे मई के महीने में मॉनसून के शुरू होने तक लगातार करें अच्छे फूल और फल निकलने के लिए फव्वारे से धुंध बनाकर सिंचाई करना अच्छा होता है इससे तापमान को कम करने और नमी में वृद्धि करने में भी मदद मिलेगी शुरूआती 5 वर्षों तक हाथों से गोडाई करें मिट्टी के तापमान को कम करने के साथ साथ नदीनों के नियंत्रण के लिए मलचिंग भी एक प्रभावी तरीका है राजस्थान में, सितंबर-नवंबर महीने में इसकी कटाई की जाती है वृक्ष तीसरे वर्ष में उपज देना शुरू करता है इसकी औसतन पैदावार 30 क्विंटल प्रति एकड़ होती है और उच्च घनता वाले क्षेत्रों में इसकी औसतन पैदावार 100 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Posted by Dashrath singh gohil
Madhya Pradesh
05-02-2020 06:48 PM

Punjab
02-06-2020 04:02 PM
इसे मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छी उपज और अच्छी वृद्धि के लिए गहरी दोमट और जलोढ़ मिट्टी की आवश्यकता होती है यह दोमट और हल्की क्षारीय मिट्टी को भी सहनेयोग्य है इसे हल्की मिट्टी में भी उगाया जा सकता है अनार की खेती के लिए मध्यम और काली मिट्टी भी उपयुक्त रहती है Ganesh: इसके फल मध्यम आकार के होते हैं .... (Read More)
इसे मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छी उपज और अच्छी वृद्धि के लिए गहरी दोमट और जलोढ़ मिट्टी की आवश्यकता होती है यह दोमट और हल्की क्षारीय मिट्टी को भी सहनेयोग्य है इसे हल्की मिट्टी में भी उगाया जा सकता है अनार की खेती के लिए मध्यम और काली मिट्टी भी उपयुक्त रहती है Ganesh: इसके फल मध्यम आकार के होते हैं छिल्का पीले रंग के साथ गुलाबी लाल रंग का होता है इसके जूस में टी एस एस की मात्रा 13 से 16 प्रतिशत होती है इसके फलों की पैदावार 6-7 टन प्रति एकड़ में होती है Kandhari: इसके फल बड़े आकार के, पीले रंग का छिल्का और लाल रंग के धब्बे होते हैं इसके रस में टी एस एस की मात्रा 13-15 प्रतिशत होती है इसकी औसतन पैदावार 4-4.8 टन प्रति एकड़ होती है Jyothi: यह किस्म छोटे कद की और सदाबहार होती है इसके दानों के भार के आधार पर रस की औसतन मात्रा 75 प्रतिशत होती है इसके रस में टी एस एस की मात्रा 17 प्रतिशत होती है इसकी औसतन पैदावार 3.2 टन प्रति एकड़ होती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की 2-3 बार जोताई करें उसके बाद खेत को समतल करने के लिए सुहागा फेरें बसंत के मौसम में रोपाई के लिए फरवरी-मार्च का समय उपयुक्त होता है और उष्ण कटिबंधीय और उप उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में रोपाई के लिए जुलाई - अगस्त का समय उपयुक्त होता है मिट्टी की किस्म और जलवायु के आधार पर उपयुक्त फासला दें अनार की खेती के लिए वर्गाकार में 5मीटर x 5 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है बिजाई के लिए 60 x 60 x 60 मीटर आकार के खड्ढे खोदें पखवाड़े तक खड्ढों को धूप में खुला रखें उसके बाद 20 किलो रूड़ी की खाद और 1 किलो सुपर फास्फेट को मिट्टी में मिलाकर खड्ढों में भरें खड्ढों को भरने के बाद पानी डालें यह मिट्टी को व्यवस्थित करेगा मुख्य खेत में नए पौधों का रोपण किया जाता है अनार का प्रजणन एयर लेयरिंग विधि द्वारा किया जाता है एयर लेयरिंग बसंत के मौसम के साथ साथ नवंबर दिसंबर के महीने में किया जाता है एयर लेयरिंग के लिए 1 से 2 साल के पुराने, सेहतमंद और पैसिंल की मोटाई जितनी 45-60 सैं.मी. परिपक्व टहनियां लें बिजाई से पहले नए पौधों और कटिंग को IBA के घोल 1000 पी पी एम 1 ग्राम प्रति लीटर पानी में डुबोकर रखें नदीनों की रोकथाम के लिए मलचिंग की जा सकती है नदीनों की रोकथाम के साथ साथ मिट्टी में नमी रहने में मदद करता है और भाप बनकर उड़ने को भी कम करता है कटाई और छंटाई ताजी सेहतमंद टहनियों की वृद्धि करने में मदद करती है बीमारी से प्रभावित शाखाओं और शाखाओं के ज्यादा बने गुच्छों को भी निकाल दें यह पौधे के आकार को उचित बनाए रखता है इसे बिजाई के 4 साल तक फल आना शुरू होता है धन्यवाद
Posted by ramesher rav
Rajasthan
05-02-2020 06:41 PM

Punjab
02-06-2020 09:08 AM
Rameher ji usko aap Vitum-H liquid 10-10ml subah sham aur Uddertone homeopathic dwai ki 10-10 drops din mai 3 varr den , isse frak padd jayega, baki aap uski khurak ka pura dian rakhen..
Posted by rahul
Himachal Pradesh
05-02-2020 06:41 PM
Punjab
02-06-2020 03:58 PM
rahul ji aap iske uper carbendazim@3 gram ko prati litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by Pradeep Singh dhindsa
Uttar Pradesh
05-02-2020 06:34 PM

Punjab
02-06-2020 03:34 PM
pradeep ji aap propiconazole@200ml ko prati acre ke hisab se spray karen. aap ise kisi bhi company ka kharid sakte hai.dhanywad