Posted by Gobinda chandra sahu
Odisha
07-02-2020 08:01 AM
Gobinda ji inko aap ek sath rakh skte hai isme koi smasia wali batt nahi hai.
Posted by सन्दीप पाण्डेय
Uttar Pradesh
07-02-2020 07:43 AM
संदीप जी एक अच्छी ग्रोथ वाली और अच्छी बीटल नसल की बकरी लगभग 20—25 हज़ार तक मिल सकती है

Posted by Raghbir
Punjab
07-02-2020 07:30 AM
tuci uss nu Milkout powder 2-2 chamch swere sham, FMC powder 50gm rojana ate Lactin bolus 1-1 goli swere sham deo, iss nal frak paa jawega.
Posted by om kumar
Punjab
07-02-2020 07:06 AM
यह कई तरह की मिट्टी में उगाई जाती है इसकी पैदावार के लिए नमकीन, क्षारीय और पानी खड़ा होने वाली मिट्टी से बचाव करें यह बढ़िया निकास वाली मिट्टी जिसमे बढ़िया जैविक तत्व मौजूद हों, में बढ़िया परिणाम देती है इसके बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 5.5-7 होना चाहिए Drudriha Tulsi: यह मुख्य रूप से बंगाल, नेपाल, चटगांव और महाराष्ट्र क्ष.... (Read More)
यह कई तरह की मिट्टी में उगाई जाती है इसकी पैदावार के लिए नमकीन, क्षारीय और पानी खड़ा होने वाली मिट्टी से बचाव करें यह बढ़िया निकास वाली मिट्टी जिसमे बढ़िया जैविक तत्व मौजूद हों, में बढ़िया परिणाम देती है इसके बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 5.5-7 होना चाहिए Drudriha Tulsi: यह मुख्य रूप से बंगाल, नेपाल, चटगांव और महाराष्ट्र क्षेत्रों में पाई जाती है यह गले को सूखेपन से राहत देता है यह हाथों, पैरों और गठिया की सूजन से आराम देता है Ram/Kali Tulsi (Ocimum canum): यह चीन, ब्राज़ील, पूर्व नेपाल और साथ ही बंगाल, बिहार, चटगांव और भारत के दक्षिणी क्षेत्रों में पाई जाती है इसका तना जामुनी और पत्ते हरे रंग के और बहुत ज्यादा सुगंधित होते है इसमें उचित मात्रा में औषधीय गुण जैसे ऐज़ाडिरैकटिन, ऐंटीफंगल , ऐंटीबैक्टीरियल, और पाचन तंत्र को ठीक रखती है यह गर्म क्षेत्रों में बढ़िया उगता है Babi Tulsi: यह पंजाब से त्रिवेंद्रम, बंगाल और बिहार में भी पाई जाती है इसका पौधा 1-2 फीट लम्बा होता है पत्ते 1-2 इंच लम्बे, अंडाकार और नुकीले होते है इसके पत्तों का स्वाद लौंग की तरह और सब्जियों में स्वाद के लिए प्रयोग किया जाता है तुलसी की खेती के लिए, अच्छी तरह से शुष्क मिट्टी की मांग की जाती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक हैरो के साथ खेत की जोताई करें, फिर रूड़ी की खाद मिट्टी में मिलाएं तुलसी की रोपाई सीड बैड पर करें फरवरी के तीसरे महीने में नर्सरी बैड तैयार करें पौधे के विकास के अनुसार, 4.5 x 1.0 x 0.2 मीटर के सीड बैड तैयार करें बीजों को 60x60 सैं.मी. के फैसले पर बोयें बीजों को 2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई के 6-7 हफ्ते बाद, फसल की रोपाई खेत में करें तुलसी की खेती के लिए 120 ग्राम बीजों का प्रयोग प्रति एकड़ में करें फसल को मिट्टी से पैदा होने वाली बीमारीयों से रोकथाम के लिए, बिजाई से पहले मैनकोजेब 5 ग्राम प्रति किलोग्राम से बीजों का उपचार करें फसल की बढ़िया पैदावार के लिए बिजाई से पहले 15 टन रूड़ी की खाद मिट्टी में डालें तुलसी के बीजों को तैयार बैडों के साथ उचित अंतराल पर बोयें मानसून आने के 8 हफ्ते पहले बीजों को बैड पर बोयें बीजों को 2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई के बाद, रूड़ी की खाद और मिट्टी की पतली परत बीजों पर बना दें इसकी सिंचाई फुवारा विधि द्वारा की जाती है रोपाई के 15-20 दिनों के बाद, नए पौधों को तंदरुस्त बनाने के लिए 2% यूरिया का घोल डालें 6 हफ्ते पुराने और 4-5 पत्तों के अंकुरण होने पर अप्रैल के महीने में नए पौधे तैयार होते है तैयार बैडों को रोपाई 24 घंटे पहले पानी लगाएं ताकि पौधों को आसानी से उखाड़ा जा सकें और रोपाई के समय जड़ें मुलायम और सूजी हुई हो खेत की तैयारी के समय, रूड़ी की खाद को मिट्टी में मिलाएं खाद के तौर पर नाइट्रोजन 48 किलो(यूरिया 104 किलो), फासफोरस 24 किलो(सिंगल सुपर फासफेट 150 किलो) और पोटाश 24 किलो(मिउरेट 40 किलो) प्रति एकड़ में डालें नए पौधे लगाने के समय नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफेट पेंटोऑक्साइड की पूरी मात्रा शुरुआती समय में डालें Mn 50 पी पी एम कंसंट्रेशन और Co@100 पी पी एम कंसंट्रेशन सूक्ष्म-तत्व डालें बाकी की बची हुई नाइट्रोजन को 2 हिस्सों में पहली और दूसरी कटाई के बाद डालें खेत को नदीनों से मुक्त करने के लिए कसी की मदद से गोड़ाई करें नदीनों की रोकथाम कम न होने पर यह फसल को नुकसान पहुंचाते है रोपण के एक महीने बाद पहली गोड़ाई और पहली गोड़ाई के चार हफ्ते बाद दूसरी गोड़ाई करें रोपण के दो महीने बाद कसी से अनुकूल गोड़ाई करें गर्मियों में, एक महीने में 3 सिंचाइयां करें और बरसात के मौसम में, सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती एक साल में 12-15 सिंचाइयां करनी चाहिए पहली सिंचाई रोपण के बाद करें और दूसरी सिंचाई नए पौधों के स्थिर होने पर करें 2 सिंचाइयां करनी आवश्यक है और बाकी की सिंचाई मौसम के आधार पर करें इसके मंडीकरण के लिए आप Aushadhiya kheti vikas sansthan 6268536795 से संपर्क कर सकते हैं धन्यवाद
Posted by Gobinda chandra sahu
Odisha
07-02-2020 06:44 AM
गोबिंदा जी आप मुर्गियों को फीड घर में भी तैयार करके दे सकते है, मुर्गियों की फीड के लिए फीड तैयार करने के लिए 25kg मक्की, 20kg गेहू, 5-6 kg सोयाबीन खल और 50gm मिनरल मिश्रण मिलाकर सुबह और शाम को फीड मुर्गियों को डालें, जितनी वो आसानी से खा जाए उस हिसाब से डालें.

Posted by R P Dixit
Uttar Pradesh
07-02-2020 06:26 AM
श्री मान चूहों से बचाव के लिए आप नीचे लिखे तरीके प्रयोग कर सकते हैं, पिंजरो का प्रयोग करना - चूहो को पडने के अलग अलग पिजंरो का प्रयोग किया जाता है इन पिजंरो का प्रयोग करने से पहले पिजंरे को अच्छी तरह धोकर प्रयोग करे ताकि किसी भी प्रकार की गंध ना आये साफ पिंजरो को खेत में चूहो के आने जाने वाले रास्ते और नुक्सान .... (Read More)
श्री मान चूहों से बचाव के लिए आप नीचे लिखे तरीके प्रयोग कर सकते हैं, पिंजरो का प्रयोग करना - चूहो को पडने के अलग अलग पिजंरो का प्रयोग किया जाता है इन पिजंरो का प्रयोग करने से पहले पिजंरे को अच्छी तरह धोकर प्रयोग करे ताकि किसी भी प्रकार की गंध ना आये साफ पिंजरो को खेत में चूहो के आने जाने वाले रास्ते और नुक्सान करने वाली जगह पर रखे बडी संखिया में चूहो को पकडने के लिए पिंजरे में 10-15 ग्राम अनाज को तेल लगाकर दो से तीन दिनो तक मुंह खोलकर रखे चुहो को मगर लगाने के बाद पिंजरे के अंदर कागज के टूकडो पर 10-15 ग्राम दाने और नालीदार दाखले पर चुटकी भर दाने रखकर मुंह को बंद कर दे ऐसा करके तीन दिन तक चूहे और पकडे हुए चूहो को पानी में डूबो कर मारे पिंजरो का दौबारा प्रयोग करने के लिए कम से कम 20 दिनो का फासला रखें कीडेमार जहरो के प्रयोग से रोकथाम - चूहो की कीडेमार और जहर के प्रयोग से रोकथाम करने के लिए जहरीला चोगा प्रयोग करने में ध्यान और सही तरीका प्रयोग करने की जरूरत है चुहो को इस जहरीले चोगे को खाना प्रयोग किये दानो का मियारपन , स्वाद, और तेल की गंध पर निर्भर करता है जहरीला चोगा बनाना जिंक फॉसफाइड का प्रयोग - एक किलो बाजरा गेहूं ज्वार का दलिया या इनका मिश्रण लेकर इसमे 20 ग्राम तेल हो सके तो मुंगफली का तेल और 25 ग्राम जिंकफॉसफाइड डाल कर अच्छी तरह मिलाये इस प्रकार तैया किये जहरीले चोगे को कागज की पुडीया बनाकर खेत में गेज वाली जगह पर रखे बरोमोडाइओलोन का प्रयोग - 20 ग्राम बरोमोडाइओलोन 0 005 फीसदी पाऊडर, 20 ग्राम बूरा खंड, और 20 ग्राम तेल को एक किलो किसी भी अनाज के दलिये में मिलाये और पूरे खेत में 40 जगह पर रख दें रैकुमिन का प्रयोग- 50 ग्राम रैकुमिन 0 0375 फीसदी पाऊडर , 20 ग्राम मुंगफली या सूरजमुखी का तेल और 20 ग्राम बूरा खंड को किसी भी अनाज के दलीये में मिलाये यह भी चूहो को मारने में बहुत फायदेमंद है

Posted by
--
07-02-2020 05:30 AM
Shrimaan ji, lithium da istemal fasal vich nahi kita janda hai, kirpa kar ke daso ke tuhadi fasal vich ki samasya a rahi ahi, taki tuhanu usde hisaab nal isda hal dasea ja sake, dhanwad

Posted by kundan pratap rao
Uttar Pradesh
07-02-2020 05:30 AM
Kundan ji kripya aap iss App mai apni tehsil, distt, select kren jisse apko apke nazdiki dealer ka no. dia ja ske aur apko sahi jankari mill skee. jyada jankari ke liye aap humare helpline no. 97799-77641 per sampark kr skte hai.

Posted by Bikerjeet Singh
Punjab
07-02-2020 03:21 AM
ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਬਟੇਰ ਪਾਲਣ ਦਾ ਕੰੰਮ ਜਿੰਨੇ ਵੀ ਕਿਸਾਨ ਕਰਦੇ ਹਨ ਉਸ ਇਸ ਦਾ ਮੰਡੀਕਰਨ ਸਿਧੇ ਤੌਰ ਤੇ ਜਾ ਸ਼ੋਸ਼ਲ ਮੀਡੀਆ ਤੇ ਲਿਂਕ ਬਣਾ ਕੇ ਕਰਦੇ ਹਨ ਜੀ ਬਾਕੀ ਜੇਕਰ ਚੰਗੇ ਲਿੰਕ ਹਨ ਤਾਂ 35-40 ਦਿਨ ਦਾ ਬਟੇਰ 60-70 ਰੁਪਏ ਦਾ ਸੇਲ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤੇ ਜਿਆਦਾਤਾਰ ਲੋਕ ਮੀਟ ਲਈ ਹੀ ਲੈ ਕੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ , ਇਸਦਾ ਅੰਡਾ 4-5 ਰੁਪਏ ਤੱਕ ਦਾ ਵਿਕ ਜਾਂਦਾ ਹੈ , ਬਾਕੀ ਮੰਡੀਕਰਨ ਲਈ ਵੱਡੇ ਹੋਟਲਾ ਵਿੱਚ ਵੀ ਵੇਚ ਸਕਦੇ ਹੋ .... (Read More)
ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਬਟੇਰ ਪਾਲਣ ਦਾ ਕੰੰਮ ਜਿੰਨੇ ਵੀ ਕਿਸਾਨ ਕਰਦੇ ਹਨ ਉਸ ਇਸ ਦਾ ਮੰਡੀਕਰਨ ਸਿਧੇ ਤੌਰ ਤੇ ਜਾ ਸ਼ੋਸ਼ਲ ਮੀਡੀਆ ਤੇ ਲਿਂਕ ਬਣਾ ਕੇ ਕਰਦੇ ਹਨ ਜੀ ਬਾਕੀ ਜੇਕਰ ਚੰਗੇ ਲਿੰਕ ਹਨ ਤਾਂ 35-40 ਦਿਨ ਦਾ ਬਟੇਰ 60-70 ਰੁਪਏ ਦਾ ਸੇਲ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤੇ ਜਿਆਦਾਤਾਰ ਲੋਕ ਮੀਟ ਲਈ ਹੀ ਲੈ ਕੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ , ਇਸਦਾ ਅੰਡਾ 4-5 ਰੁਪਏ ਤੱਕ ਦਾ ਵਿਕ ਜਾਂਦਾ ਹੈ , ਬਾਕੀ ਮੰਡੀਕਰਨ ਲਈ ਵੱਡੇ ਹੋਟਲਾ ਵਿੱਚ ਵੀ ਵੇਚ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੀ, ਤੁਸੀ ਇਸ ਕੰਮ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿਗ ਅਤੇ ਬਟੇਰ ਲੈਣ ਲਈ Director Central Poultry Development Organization (Northern Region) Ministry of Agriculture & Farmers Welfare, Government of India Industrial Area, Phase-I, Chandigarh – 160 002 Tel.No: 0172-2655391 Tel.Fax: 0172-2655460 ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ
Posted by Munna Sahani
Bihar
07-02-2020 01:10 AM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद

Posted by Rashid ahmad
Uttar Pradesh
07-02-2020 12:50 AM
श्री मान प्याज़ एक प्रसिद्ध व्यापक सब्जी वाली प्रजाति है इसकी खेती अलग-अलग किस्म की मिट्टी जैसे की रेतली दोमट, चिकनी, गार और भारी मिट्टी में की जा सकती है यह गहरी दोमट और जलोढ़ मिट्टी, जिसका निकास प्रबंध बढ़िया, नमी को बरकरार रखने की समर्थता, जैविक तत्वों वाली मिट्टी में बढ़िया परिणाम देती है विरली और रेतली मिट्.... (Read More)
श्री मान प्याज़ एक प्रसिद्ध व्यापक सब्जी वाली प्रजाति है इसकी खेती अलग-अलग किस्म की मिट्टी जैसे की रेतली दोमट, चिकनी, गार और भारी मिट्टी में की जा सकती है यह गहरी दोमट और जलोढ़ मिट्टी, जिसका निकास प्रबंध बढ़िया, नमी को बरकरार रखने की समर्थता, जैविक तत्वों वाली मिट्टी में बढ़िया परिणाम देती है विरली और रेतली मिट्टी इसकी खेती के लिए बढ़िया नहीं मानी जाती है, क्योंकि मिट्टी के घटिया जमाव के कारण इसमें गांठों का उत्पादन सही नहीं होता है इसकी खेती के लिए मिट्टी का pH 6-7 होना चाहिए प्रसिद्ध किस्में:-alyanpur Red Round: यह उत्तर प्रदेश की प्रसद्धि किस्म है इसकी गांठे भूरे रंग की और गोलाकार आकार की होती हैं इसके पौधे 150-160 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं इसकी औसतन पैदावार 8-10 टन प्रति एकड़ होती है Bhima Shakti: यह खरीफ के साथ साथ रबी के मौसम में उगाने के लिए उपयुक्त है यह किस्म रोपाई के 130 दिन बाद कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावारा 170 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Arka Kalyan: इसकी गांठे गहरे गुलाबी रंग की होती हैं इसकी औसतन पैदावार 135 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa White Round: इसकी गांठे सफेद, गोल और समतल होती हैं इसकी औसतन पैदावार 120 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa white flat: इसकी गांठे सफेद, चपटी और मध्यम से बड़े आकार की होती हैं यह किस्म डीहाइड्रेशन के लिए उपयुक्त है मिट्टी को भुरभुरा बनाने के लिए तीन-चार बार गहराई से जोताई करें मिट्टी में जैविक तत्वों की मात्रा बढ़ाने के लिए रूड़ी की खाद डालें फिर खेत को छोटे-छोटे प्लाटों में बांट दे नर्सरी तैयार करने के उचित समय मध्य-अक्तूबर से मध्य-नवबंर होता है नए पौधे मध्य-दिसंबर से मध्य-जनवरी तक रोपाई के लिए तैयार हो जाते है रोपाई के लिए 10-15 सैं.मी. कद के पौधे चुनें खरीफ के मौसम में रोपाई के लिए मई से जून का महीना नर्सरी तैयार करने के लिए उपयुक्त होता है बिजाई के 6-8 सप्ताह बाद नए पौधे रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं जुलाई -अगस्त के महीने में रोपण कर दें रोपण के समय, पंक्तियों के बीच 15 सैं.मी. और पौधों के बीच 10 सैं.मी. का फासला रखें नर्सरी में बीज 1-2 सैं.मी. गहराई पर बोयें बिजाई के लिए रोपण विधि का प्रयोग करें एक एकड़ के लिए 2-3 किलो बीज का प्रयोग करें उखेड़ा रोग और कांव-गियारी से बचाव के लिए थीरम 2 ग्राम+बैनोमाइल 50 डब्लयू पी 1 ग्राम प्रति लीटर पानी से प्रति किलो बीजों का उपचार करें रासायनिक उपचार के बाद बायो एजेंट ट्राईकोडर्मा विराइड 2 ग्राम के साथ प्रति किलो बीजों का उपचार करने की सिफारिश की जाती है इस तरह करने से नए पौधे मिट्टी से पैदा होने वाली और अन्य बीमारीयों से बच जाते है बिजाई से 10 दिन पहले 20 टन रूड़ी की खाद डालें नाइट्रोजन 30 किलो(यूरिया 65 किलो), फासफोरस 16 किलो(सिंगल सुपर फासफेट 100 किलो) और पोटाश 16 किलो(मिउरेट ऑफ़ पोटाश 30 किलो) प्रति एकड़ डालें फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा रोपण के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटकर रोपाई के बाद टॉप ड्रेसिंग के तौर पर 30वें और 45वें दिन डालें मिट्टी की किसम और जलवायु के आधार पर सिंचाई की मात्रा और आवर्ती का फैसला करें आमतौर पर, इसे 5-8 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है पहली सिंचाई बिजाई के तुरंत बाद करें और दूसरी सिंचाई रोपाई के तीन दिन बाद करें बाकी की सिंचाई आवश्यकता और मिट्टी में नमी के आधार पर 7-10 दिनों के अंतराल पर करें पुटाई के 10-15 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें अत्याधिक सिंचाई ना करें शुरुआत में नए पौधे धीरे-धीरे बढ़ते है इसलिए नुकसान से बचाव के लिए गोड़ाई की जगह रासायनिक नदीन-नाशक का प्रयोग करें रोकथाम के लिए बिजाई से 72 घंटे में पेंडीमैथालीन(स्टंप) 1 लीटर को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में स्प्रे करें नदीनों के अंकुरण उपरांत बिजाई से 7 दिन बाद आक्सीफ्लोरफैन 425 मि.ली. को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में स्प्रे करें नदीनों की रोकथाम के लिए 2-3 गोड़ाईयों की सिफारिश की जाती है पहली गोड़ाई बिजाई से एक महीने बाद और दूसरी गोड़ाई, पहली से एक महीने बाद करें सही समय पर पुटाई करना बहुत जरूरी है पुटाई का समय किस्म,ऋतु,मंडी रेट आदि पर निर्भर करता है 50% पौधे की पत्तियां नीचे की तरफ गिरना दर्शाता है कि फसल पुटाई के लिए तैयार है फसल की पुटाई हाथों से प्याज़ को उखाड़ कर की जाती है पुटाई के बाद इनको 2-3 दिन के लिए अनावश्यक नमी निकालने के लिए खेत में छोड़ दे

Posted by shoaib mohammad
Uttar Pradesh
07-02-2020 12:41 AM
Shoaib Mohammad ji, chane mein phool lanney ke liye isme ap NPK 130045 @ 10 gram prati liter pani ke hisaab se spray kar sakte hain, dhanywad

Posted by Ankit Sharnagat
Madhya Pradesh
06-02-2020 11:11 PM
अंकित जी इसकी वैक्सीनेशन बच्चे के जन्म से 8 महीने के बाद करवायी जाती है फिर हर 6 महीने के बाद इंजेक्शन लगा सकते है बाकि इसका इलाज पशु की इलाज के हिसाब से किया जाता है

Posted by pradeep singh
Uttar Pradesh
06-02-2020 11:09 PM
Pradeep singhji, kriya is bag ke front vale label ki photo bhjeien taki apko variety ka nam dekh kar iske bare mein janakri di ja sake, dhanywad
Posted by नितिन दुबे
Uttar Pradesh
06-02-2020 10:48 PM
श्रीमान जी, आप फरवरी महीने में सब्जियां जैसे कि राजमा, शिमला मिर्च, खीरा-ककड़ी, लोबिया, करेला, लौकी, तुरई, पेठा, खरबूजा, तरबूज, पालक, फूलगोभी, बैंगन, भिण्डी, अरबी, एस्पेरेगस, ग्वार की बिजाई कर सकते हैं, आप मार्च महीने में सब्जियां जैसे कि ग्वार, खीरा-ककड़ी, लोबिया, करेला, लौकी, तुरई, पेठा, खरबूजा, तरबूज, पालक, भिण्डी,.... (Read More)
श्रीमान जी, आप फरवरी महीने में सब्जियां जैसे कि राजमा, शिमला मिर्च, खीरा-ककड़ी, लोबिया, करेला, लौकी, तुरई, पेठा, खरबूजा, तरबूज, पालक, फूलगोभी, बैंगन, भिण्डी, अरबी, एस्पेरेगस, ग्वार की बिजाई कर सकते हैं, आप मार्च महीने में सब्जियां जैसे कि ग्वार, खीरा-ककड़ी, लोबिया, करेला, लौकी, तुरई, पेठा, खरबूजा, तरबूज, पालक, भिण्डी, अरबी की बिजाई कर सकते हैं, धन्यवाद
Posted by Sumit Singh
Uttar Pradesh
06-02-2020 10:47 PM
Sumit Singh ji adhik jankari ke lia aap Japinder Wadhawan 9478810324 se samparak kar sakte hai, Thankyou.

Posted by Nitin
Bihar
06-02-2020 10:31 PM
nitin ji please ask your question in detail about which disease of wheat you want to know so that we can provide you proper information.thank you
Posted by Taljinder singh
Punjab
06-02-2020 10:19 PM
Taljinder singh ji FFG chicks len lai tusi Balwinder Singh 9041009671 Papu Hachery Farmnal samparak kar sakde ho, Thankyou.

Posted by Jagtar Singh Shawatiya
Punjab
06-02-2020 10:11 PM
ਇਸ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਵਾਰੇ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਲਈ ਤੁਸੀ ਡਿਪਟੀ ਡਾਇਰੈਕਟਰ ਡੇਅਰੀ, ਕਮਰਾ ਨੰ. 302 -ਈ ਦੂਜੀ ਮੰਜਿਲ, ਮਿੰਨੀ ਸਕੱਤਰੇਤ ਨਵੀਂ ਬਿਲਡਿੰਗ, ਬਠਿੰਡਾ 0164-2240645 ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਇਹਨਾਂ ਤੋਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਦੀ ਤਾਰੀਖ ਅਤੇ ਜਿਥੇ ਹੋਵੇਗੀ ਉਸ ਵਾਰੇ ਸਹੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਮਿਲ ਜਾਵੇਗੀ

Posted by Tejwinder Punia
Punjab
06-02-2020 10:08 PM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਚਾਰੇ ਲਈ ਮੱਕੀ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਮਾਰਚ ਦੇ ਪਹਿਲੇ ਹਫਤੇ ਵਿਚ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੀ

Posted by gurpreet
Punjab
06-02-2020 09:56 PM
gurpreet ji tusi eh daane vich mix karke v de sakde ho ji.

Posted by amritpal singh
Punjab
06-02-2020 09:54 PM
ਅਮ੍ਰਿਤਪਾਲ ਜੀ ਤੁਸੀ ਸਬਜ਼ੀਆਂ ਜਿਵੇ ਰਾਜਮਾਹ , ਸ਼ਿਮਲਾ ਮਿਰਚ , ਖੀਰਾ , ਕਰੇਲਾ , ਕੱਦੂ , ਤੋਰੀ, ਪੇਠਾ , ਖਰਬੂਜਾ , ਤਰਬੂਜ , ਪਾਲਕ , ਫੂਲ ਗੋਭੀ , ਬੈਂਗਨ , ਭਿੰਡੀ , ਅਰਬੀ , ਗਵਾਰਾ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by Udayraj bind
Uttar Pradesh
06-02-2020 09:30 PM
Shri maan Mahua ki roktham ke liye aap Actara@40gm per acre spray kr skte ho...
Posted by bhanwar lal swami
Rajasthan
06-02-2020 09:26 PM
श्री मान कृपया इसकी फोटो भेजें ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके

Posted by Yuvraj
Punjab
06-02-2020 09:11 PM
ਮੋਤੀਆਂ ਦੀ ਖੇਤੀ ਇਕ ਲਾਭਦਾਇਕ ਕਿੱਤਾ ਹੈ ਮੋਤੀਆਂ ਦੀ ਖੇਤੀ ਉਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਹੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜਿਵੇ ਅਸਲ ਰੂਪ ਵਿਚ ਮੋਤੀ ਤਿਆਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸਦੀ ਖੇਤੀ ਤੁਸੀ ਕਿਸੇ ਤਲਾਬ ਵਿਚ ਜਾ ਫਿਰ 100 ਵਰਗ ਫੁੱਟ ਦਾ ਤਲਾਬ ਬਣਾ ਕੇ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਤਲਾਬ ਬਣਾਉਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਸਿਪੀ ਨੂੰ ਖਰੀਦਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜੋ ਦਿੱਲੀ ਤੋ ਮਿਲ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਕਵਾਲਿਟੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਇਕ ਸਿਪੀ ਕਰੀਬ 1.5 ਤੋਂ 5 ਰੁਪਏ ਦੇ ਵਿਚ ਮਿਲਦੀ ਹੈ .... (Read More)
ਮੋਤੀਆਂ ਦੀ ਖੇਤੀ ਇਕ ਲਾਭਦਾਇਕ ਕਿੱਤਾ ਹੈ ਮੋਤੀਆਂ ਦੀ ਖੇਤੀ ਉਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਹੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜਿਵੇ ਅਸਲ ਰੂਪ ਵਿਚ ਮੋਤੀ ਤਿਆਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸਦੀ ਖੇਤੀ ਤੁਸੀ ਕਿਸੇ ਤਲਾਬ ਵਿਚ ਜਾ ਫਿਰ 100 ਵਰਗ ਫੁੱਟ ਦਾ ਤਲਾਬ ਬਣਾ ਕੇ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਤਲਾਬ ਬਣਾਉਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਸਿਪੀ ਨੂੰ ਖਰੀਦਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜੋ ਦਿੱਲੀ ਤੋ ਮਿਲ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਕਵਾਲਿਟੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਇਕ ਸਿਪੀ ਕਰੀਬ 1.5 ਤੋਂ 5 ਰੁਪਏ ਦੇ ਵਿਚ ਮਿਲਦੀ ਹੈ ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਬੰਦ ਸੀਪੀਆਈ ਵਿਚ ਖਿੱਚ ਲਾ ਕੇ ਉਹਨਾਂ ਵਿੱਚ ਮੋਤੀਆਂ ਦਾ ਬੀਜ ਪਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਫਿਰ ਇਹਨਾਂ ਸਿਪੀਆ ਨੂੰ ਬੰਦ ਕਰ ਕੇ ਜਾਲੀ ਦੇ ਸਹਾਰੇ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਸੁੱਟ ਦਿੱਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਫਿਰ ਕੁੱਜ ਮਹੀਨਿਆਂ ਬਾਅਦ ਇਸ ਵਿਚੋਂ ਮੋਤੀ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਮੋਤੀ ਬਣਨ ਵਿਚ 18 ਮਹੀਨਿਆਂ ਦਾ ਸਮਾਂ ਲਗਦਾ ਹੈ ਡਿਜ਼ਾਈਨਰ ਮੋਤੀ ਤਿਆਰ ਕਰਨ ਲਈ ਉਹਨਾਂ ਲਈ ਖਾਸ ਤੌਰ ਤੇ ਸਾਂਚੇ ਬਣਾਏ ਹੁੰਦੇ ਹਨ, ਜਿਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਗਨਪਤੀ,ਬੁੱਧ,ਹੋਲੀ ਕਰਾਸ ਸਾਈਨ ਵਰਗੇ ਡਿਜ਼ਾਈਨਰ ਮੋਤੀ ਤਿਆਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਪਰ ਮੋਤੀਆ ਦੀ ਮਾਰਕੀਟਿੰਗ ਆਪਣੇ ਪੱਧਰ ਤੇ ਹੀ ਕਰਨੀ ਪੈਂਦੀ ਹੈ ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਮਨੀਸ਼ ਜੀ ਮੋਤੀਆ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਕਰਵਾਉਦੇ ਹਨ ਉਹਨਾਂ ਨਾਲ ਇਸ ਨੰਬਰ ਤੇ ਗੱਲ ਕਰੋ ਉਹ ਤੁਹਾਨੂੰ ਪੂਰਾ ਗਾਈਡ ਕਰ ਦੇਣਗੇ ਪੰਜਾਬ ਵਿਚ ਮੋਤੀਆਂ ਦੀ ਖੇਤੀ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈਣ ਲਈ ਤੁਸੀਂ Manish Vasudev 9417652857 ਜੀ ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੀ, ਧੰਨਵਾਦ

Posted by हरिओम तिवारी
Madhya Pradesh
06-02-2020 09:03 PM
हरिओम तिवारी जी आप पपीते में आप NPK 130045 @10 ग्राम को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद

Posted by sukhdeep Bal
Haryana
06-02-2020 09:01 PM
Shri maan g kanak vich tuc Opera@200 ml per acre spray kr skde ho....

Posted by हरिओम तिवारी
Madhya Pradesh
06-02-2020 09:00 PM
हरिओम तिवारी जी आप पपीते में आप NPK 130045 @10 ग्राम को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद

Posted by rajaram Lothiya
Rajasthan
06-02-2020 08:50 PM
बिजाई के लिए अप्रैल से मध्य मई का समय उपयुक्त होता है अमेरिकन कपास के लिए कतार से कतार का फासला 60 सैं.मी. और पौधे से पौधे का फासला 45 सैं.मी. रखें देसी कपास की किस्म के लिए कतार से कतार का फासला 45 सैं.मी. और पौधे से पौधे का फासल 30 सैं.मी. रखें
बीजों के अंकुरन ना होने और नए पौधों के नष्ट होने के कारण कुछ फासले पड़ जाते .... (Read More)
बिजाई के लिए अप्रैल से मध्य मई का समय उपयुक्त होता है अमेरिकन कपास के लिए कतार से कतार का फासला 60 सैं.मी. और पौधे से पौधे का फासला 45 सैं.मी. रखें देसी कपास की किस्म के लिए कतार से कतार का फासला 45 सैं.मी. और पौधे से पौधे का फासल 30 सैं.मी. रखें
बीजों के अंकुरन ना होने और नए पौधों के नष्ट होने के कारण कुछ फासले पड़ जाते हैं इन्हें भरने के लिए 2-3 पानी में भिगोये हुए बीजों या अंकुरन के बाद एक सेहतमंद नए पौधे को बोयें बिजाई के दो सप्ताह बाद कमज़ोर, बीमार, प्रभावित नए पौधों को निकालकर सेहतमंद नए पौधे की रोपाई करें
बीजों को बोने के लिए 4-5 सैं.मी. की गहराई होनी चाहिए

Posted by gaurav rana
Haryana
06-02-2020 08:44 PM
Rana ji isko aap Pregstay gold powder 30gm rojana 20 din tak dena suru kren, isse pashu ke gabhin rehnde ki asss vddh jatti hai yaddi yeh gabhin hui too rukk jayegi yaddi naa hui too dubara heat mai v aa jayegi.

Posted by jeetendra Kumar
Uttar Pradesh
06-02-2020 08:38 PM
इसके लिए आप उसे नज़दीकी डॉक्टर से गाभिन की जांच करवा सकते है जिससे उसके गाभिन होने या ना होने का सही पता लग जाएगा

Posted by Beant Singh
Punjab
06-02-2020 08:32 PM
Beant Singh ji tohade swal di samaz nai lagi ji. tusi apna swal sahi tarke nal likhe ta jo sahi slah ditti jave ji.

Posted by ਸੈਣੀ
Punjab
06-02-2020 08:28 PM
ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ ਆਪਣੇ ਨਜ਼ਦੀਕ ਕਿਸੀ ਵਧਿਆ ਡਾਕਟਰ ਤੋਂ ਚੈੱਕ ਕਰਵਾਓ, ਕਿਉਕਿ ਉਸਦੀ ਜਾਂਚ ਕਰਕੇ ਵਧਿਆ ਇਲਾਜ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ
Posted by Aman Rathaur
Uttar Pradesh
06-02-2020 08:26 PM
यदि आप लेयर मुर्गी पालन करना चाहते है तो लेयर फार्मिंग के लिए आपको 50 फीट लंबाई वाली जगह और 20 फीट चौड़ाई वाली जगह की जरूरत होती है यह आपका 1000 वर्ग फुट जगह बन जाती है यहां आप 1000 बच्चों को रख सकते हैं इस प्रकार आप अपने बजट के हिसाब से बच्चों को रख सकते है और यदि आप लेयर का बच्चा अपने फार्म पर तैयार करते है तो आपको बच्च.... (Read More)
यदि आप लेयर मुर्गी पालन करना चाहते है तो लेयर फार्मिंग के लिए आपको 50 फीट लंबाई वाली जगह और 20 फीट चौड़ाई वाली जगह की जरूरत होती है यह आपका 1000 वर्ग फुट जगह बन जाती है यहां आप 1000 बच्चों को रख सकते हैं इस प्रकार आप अपने बजट के हिसाब से बच्चों को रख सकते है और यदि आप लेयर का बच्चा अपने फार्म पर तैयार करते है तो आपको बच्चा अंडे देने तक 160—170 रूप्ये प्रति बच्चे के हिसाब से खर्चा आएगा यदि आप तैयार बच्चा लेकर आते है तो वो आपको 205—210 रूप्ये प्रति बच्चे के हिसाब से पड़ेगा फिर आप उस हिसाब से इनको खरीद सकते है. इसका रेट मार्किट में चल रहे रेट के हिसाब से होता है पहले आप अपने बजट के हिसाब लेयर फार्मिंग करें फिर जैसे जैसे आपको काम की जानकारी होती रहेगी
Posted by Onkar Singh Dhugga
Punjab
06-02-2020 08:18 PM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਉਪਜਾਊ ਸ਼ਕਤੀ ਲਈ ਖਾਦ ਖੁਰਾਕ ਪਾਉਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਪਰਖ ਕਰਵਾਓ ਤਾਂ ਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਸਹੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਮਿਲ ਸਕੇ ਅਤੇ ਸਹੀ ਖਾਦ ਬਾਰੇ ਪਤਾ ਲਗ ਸਕੇ

Posted by Rk soni
Madhya Pradesh
06-02-2020 08:17 PM
Rk soni ji Kadaknath chicks lene ke lia aap Kamlesh Kushwaha 9229881876 (Bhumika ANIMAL Breeder farm) se samparak kar sakte hai, Thankyou.

Posted by Kayum Khan
Rajasthan
06-02-2020 08:13 PM
असील देशी मुर्गी को कम से कम 8 -10 अंडों पर बैठाना चाहिए

Posted by ਮਨਜੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
06-02-2020 08:10 PM
ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ ਪਹਿਲੇ ਦਿਨ Zoctum injection 2.5gm, Isoflud injection 5ml, CRB injection 20ml, Megludyne injection 20ml, vitum-H 5ml injection ਲਗਵਾਓ ਫਿਰ ਅਗਲੇ 2 ਦਿਨ ਤੁਸੀ Intacef Tezo injection 4.5gm, Megludyne injection 20ml, CRB injection 20ml, Vitum-H injection 5ml ਲਗਵਾਓ, ਸਿਰਫ ਪਹਿਲੇ ਅਤੇ ਤੀਜੇ ਦਿਨ ਹੀ Isoflud ਇੰਜੇਕਸ਼ਨ ਲਗਵਾਓ ਜੀ ਇਹਨਾਂ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ..

Posted by Himanshu Pandey
Uttar Pradesh
06-02-2020 08:08 PM
लौकी :-इसकी बिजाई के लिए फरवरी से मार्च, जून से जुलाई और नवंबर से दिसंबर का समय उपयुक्त होता है कतारों में 2.0-2.5 - और पौधों में 45-60 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीज को 1-2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें अच्छी तरह से गली हुई रूड़ी की खाद 20-25 टन प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन 28 किलो (यूरिया 60 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन 14 कि.... (Read More)
लौकी :-इसकी बिजाई के लिए फरवरी से मार्च, जून से जुलाई और नवंबर से दिसंबर का समय उपयुक्त होता है कतारों में 2.0-2.5 - और पौधों में 45-60 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीज को 1-2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें अच्छी तरह से गली हुई रूड़ी की खाद 20-25 टन प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन 28 किलो (यूरिया 60 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन 14 किलो (यूरिया 30 किलो) की पहली मात्रा को बिजाई के समय प्रति एकड़ में डालें और नाइट्रोजन 14 किलो (यूरिया 30 किलो) को पहली तुड़ाई के समय प्रति एकड़ में डालें
काली तोरी :- वर्ष में दो बार इसके बीजों को बोया जाता है बिजाई के लिए उपयुक्त समय मध्यम फरवरी से मार्च का महीना है और दूसरी बार बिजाई के लिए मध्य मई से जुलाई का समय उपयुक्त है दो बीजों को प्रति क्यारी में बोया जाता है जो कि 3 मीटर चौड़ी होती है और बीजों में 75-90 सैं.मी. के फासले का प्रयोग करें बीजों को 2.5-3 सैं.मी. की गहराई में बोयें गड्ढे खोदकर इसकी बिजाई की जाती है खेत की तैयारी के समय नाइट्रोजन 40 किलो (यूरिया 90 किलो), फासफोरस 20 किलो (एस एस पी 125 किलो) और पोटाशियम 20 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 35 किलो) को शुरूआती खुराक के तौर पर डालें बिजाई के समय नाइट्रोजन के 1/3 हिस्से के साथ फासफोरस और पोटाश डालें बेलों के शुरूआती विकास के समय या बिजाई के 1 महीने बाद बाकी की मात्रा डालें
Posted by Sewak .lSingh
Punjab
06-02-2020 08:08 PM
ਉਸ ਨੂੰ ਤੁਸੀ Fendykind plus ਦਵਾਈ ਪੇਟ ਦੇ ਕੀੜਿਆਂ ਲਈ ਦਿਓ, ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ broton liqiud 50-50ml ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ ਅਤੇ Aptifast bolus 1-1 ਗੋਲੀ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ..
Posted by Mr.Avtar Singh
Punjab
06-02-2020 08:08 PM
ਤੁਸੀ ਓਹਨਾ ਨੂੰ ਪੇਟ ਦੇ ਕੀੜਿਆਂ ਲਈ Fasnil ਗੋਲੀ ਦਿਓ ਅਤੇ ਹਰ 3 ਮਹੀਨੇ ਬਾਦ ਸਾਲਟ ਬਦਲ ਕੇ ਦਵਾਈ ਜਰੂਰ ਦਿਓ ਬਾਕੀ ਓਹਨਾ ਨੂੰ ਵਧਿਆ ਮਾਤਰਾ ਵਿਚ ਹਰਾ ਚਾਰਾ ਦਿਓ ਅਤੇ ਵਧਿਆ ਫੀਡ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰੋ ਜਿਸ ਨੂੰ ਪਸ਼ੂ ਆਸਾਨੀ ਨਾਲ ਖਾਂਦੇ ਅਤੇ ਹਜ਼ਮ ਕਰ ਜਾਂਦੇ ਹੈ ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ ਓਹਨਾ ਨੂੰ Agrimin ਮਿਨਰਲ ਮਿਕਸਚਰ ਰੋਜਾਨਾ 50gm ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਅਤੇ Enerboost ਪਾਊਡਰ 50-50gm ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਪਸ਼ੂਆਂ ਦੀ ਵਧਿ.... (Read More)
ਤੁਸੀ ਓਹਨਾ ਨੂੰ ਪੇਟ ਦੇ ਕੀੜਿਆਂ ਲਈ Fasnil ਗੋਲੀ ਦਿਓ ਅਤੇ ਹਰ 3 ਮਹੀਨੇ ਬਾਦ ਸਾਲਟ ਬਦਲ ਕੇ ਦਵਾਈ ਜਰੂਰ ਦਿਓ ਬਾਕੀ ਓਹਨਾ ਨੂੰ ਵਧਿਆ ਮਾਤਰਾ ਵਿਚ ਹਰਾ ਚਾਰਾ ਦਿਓ ਅਤੇ ਵਧਿਆ ਫੀਡ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰੋ ਜਿਸ ਨੂੰ ਪਸ਼ੂ ਆਸਾਨੀ ਨਾਲ ਖਾਂਦੇ ਅਤੇ ਹਜ਼ਮ ਕਰ ਜਾਂਦੇ ਹੈ ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ ਓਹਨਾ ਨੂੰ Agrimin ਮਿਨਰਲ ਮਿਕਸਚਰ ਰੋਜਾਨਾ 50gm ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਅਤੇ Enerboost ਪਾਊਡਰ 50-50gm ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਪਸ਼ੂਆਂ ਦੀ ਵਧਿਆ ਗਰੋਥ ਹੋਵੇਗੀ ਅਤੇ ਕਮਜ਼ੋਰੀ ਦੂਰ ਹੋਵੇਗੀ..
Posted by pramod kumar
Uttar Pradesh
06-02-2020 08:05 PM
गर्मियों के मौसम में 10 मार्च से 10 अप्रैल तक बिजाई पूरी कर लें तराई क्षेत्रों के लिए मार्च में बिजाई पूरी कर लें

Posted by ਮਨਜੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
06-02-2020 08:04 PM
ਹਾਜੀ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਜਿਆਦਾ ਰਿਕਾਰਡ ਵਾਲਾ ਟੀਕਾ ਜਿਵੇਂ HF ਨਸਲ ਦਾ ਟੀਕਾ ਭਰਾਉਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਜਿਆਦਾ ਦੁੱਧ ਲਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਜੀ
Posted by Mr.Avtar Singh
Punjab
06-02-2020 08:03 PM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਤੁਸੀਂ ਪੰਜਾਬ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਲੁਧਿਆਣਾ ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ
Posted by नेम सिंह
Uttar Pradesh
06-02-2020 08:00 PM
श्री मान कृपया आप अपना सवाल विस्तार से पूछें तो आपको पूरी जानकारी दी जा सके
Posted by pramod kumar
Uttar Pradesh
06-02-2020 08:00 PM
मक्की की फसल लगाने के लिए उपजाऊ, अच्छे जल निकास वाली, मैरा और लाल मिट्टी जिसमें नाइट्रोजन की उचित मात्रा हो, जरूरी है मक्की रेतली से लेकर भारी हर तरह की ज़मीनों में उगाई जा सकती है समतल ज़मीने मक्की के लिए बहुत अनुकूल है पर कईं पहाड़ी इलाकों में भी यह फसल उगाई जाती है अधिक पैदावार लेने के लिए मिट्टी में जैविक तत्.... (Read More)
मक्की की फसल लगाने के लिए उपजाऊ, अच्छे जल निकास वाली, मैरा और लाल मिट्टी जिसमें नाइट्रोजन की उचित मात्रा हो, जरूरी है मक्की रेतली से लेकर भारी हर तरह की ज़मीनों में उगाई जा सकती है समतल ज़मीने मक्की के लिए बहुत अनुकूल है पर कईं पहाड़ी इलाकों में भी यह फसल उगाई जाती है अधिक पैदावार लेने के लिए मिट्टी में जैविक तत्वों की अधिक मात्रा, पी एच 5.5-7.5 और अधिक पानी रोककर रखने की क्षमता होनी चाहिए बहुत ज्यादा भारी ज़मीनें इस फसल के लिए अच्छी नहीं मानी जाती आप मक्का की किस्मे जैसे के Ganga II, Deccan - 103, Deccan - 105, Trisholta, High Starch, Mangiri की बिजाई करें, फसल के लिए प्रयोग किया जाने वाला खेत नदीनों और पिछली फसल से मुक्त होना चाहिए मिट्टी को नर्म करने के लिए 6 से 7 बार जोताई करें खेत में 4-6 टन प्रति एकड़ रूड़ी की खाद और 10 पैकेट एसपरजिलियम के डालें खेत में 45-50 सैं.मी. के फासले पर खाल और मेंड़ बनाएं रबी के मौसम में खेती के लिए बिजाई 15 अक्तूबर से 10 नवंबर तक पूरी कर लें मेंड़ों पर बिजाई करना ज्यादा लाभदायक रहता है क्योंकि इससे फसल को जल्दी अंकुरित होने में मदद मिलती है और फसल ठंड से भी बची रहती है रबी के मौसम में खेती के लिए 60x18 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीजों को 4-5 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई हाथों से गड्ढा खोदकर या आधुनिक तरीके से ट्रैक्टर और बिजाई वाली मशीन की मदद से मेंड़ बनाकर की जा सकती है सर्दियों की मक्की के लिए 8-9 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें फसल को मिट्टी की बीमारियों और कीड़ों से बचाने के लिए बीज का उपचार करें सफेद जंग से बीजों को बचाने के लिए कार्बेनडाज़िम या थीरम 2 ग्राम प्रति किलो बीज के साथ उपचार करें रासायनिक उपचार के बाद बीज को एज़ोसपीरीलम 600 ग्राम + धान के चूरे के साथ उपचार करें उपचार के बाद बीज को 15-20 मिनटों के लिए छांव में सुखाएं एज़ोसपीरिलम मिट्टी में नाइट्रोजन को बांधकर रखने में मदद करता है अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए नाइट्रोजन 50 किलो (यूरिया 110 किलो), फासफोरस 24 किलो (एस एस पी 150 किलो) और पोटाश 18 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 30 किलो) प्रति एकड़ में डालें खरीफ ऋतु की मक्की में नदीन बड़ी समस्या होते हैं, जो कि खुराकी तत्व लेने में फसल से मुकाबला करते हैं और 35 प्रतिशत तक पैदावार कम कर देते हैं इसलिए अधिक पैदावार लेने के लिए नदीनों का हल करना जरूरी है मक्की की कम से कम दो गोडाई करें पहली गोडाई बिजाई से 20-25 दिन बाद और दूसरी गोडाई 40-45 दिन बाद , पर ज्यादा होने की हालत में एटराज़िन 500 ग्राम प्रति 200 लीटर पानी से स्प्रे करें गोडाई करने के बाद मिट्टी के ऊपर खाद की पतली परत बिछा दें और जड़ों से मिट्टी लगाएं अंकुरन के तीसरे या चौथे सप्ताह बाद पानी लगाएं बाकी की सिंचाइयां 4-5 सप्ताह के फासले पर मध्य मार्च तक करें इसके इलावा और 1 या 2 सिंचाइयां वर्षा और मौसम की स्थिति के आधार पर करें जब पौधे घुटनों के कद के हो जायें तो फूल निकलने के समय और दाने बनने के समय सिंचाई महत्तवपूर्ण होती है यदि इस समय पानी की कमी हो तो पैदावार बहुत कम हो सकती है यदि पानी की कमी हो तो एक मेंड़ छोड़कर पानी दें इस से पानी भी बचता है
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