
Posted by manpreet singh
Punjab
08-02-2020 07:27 AM
ਮੱਕਚਰੀ :- ਮਈ-ਜੂਨ ਮਹੀਨੇ ਵਿੱਚ ਨਰਸਰੀ ਤਿਆਰ ਕਰੋ ਅਤੇ ਜੂਨ-ਜੁਲਾਈ ਮਹੀਨੇ ਵਿੱਚ ਬੀਜਾਂ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰੋ ਅਗਸਤ ਮਹੀਨੇ ਵਿੱਚ ਬਿਜਾਈ ਨਾ ਕਰੋ, ਕਿਉਂਕਿ ਇਸ ਨਾਲ ਝਾੜ ਘੱਟ ਜਾਂਦਾ ਹੈ Sugargraze ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਵੀ ਫਰਵਰੀ ਤੋਂ ਅਪ੍ਰੈਲ ਮਹੀਨੇ ਵਿਚ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by peeyush kumar
Chattisgarh
08-02-2020 07:16 AM
Peeyush kumar ji aap apne jille ke Krishi Vigyan Kendra, Address: Sambalpur, Chhattisgarh 493773 se samparak kar sakte hai, Thankyou.

Posted by Dharmendra kumar
Uttar Pradesh
08-02-2020 07:11 AM
धर्मेंद्र जी, यह फंगस का हमले के कारण हो रहा है आप इसकी रोकथाम के लिए इसमें M 45 @ 4 ग्राम प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें और 4 से 5 दिन बाद आप इसमें तत्वों की कमी पूरी करने के लिए NPK 191919 @ 10 ग्राम प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें, धन्यवाद
Posted by harmeet singh
Punjab
08-02-2020 07:07 AM
Harmeet ji isnu nisare de same spray kar sakde ho isdi matra 1 kilo nu 150 litre pani de hisab nal spray karo.dhanwad
Posted by Ramchandra yadav
Jharkhand
08-02-2020 06:49 AM
Ramchandra ji ike liye aap dhan ki processing krke iske chawal bna kar 1 kilo 5 kilo aur 10 kilo ki packing bna kar bech sakte hai.isme aapko thodi si mehnat karni padegi lekin munafa dugna ho jayega.dhanywad

Posted by हरिनाथ बिन्द वीरपुर मिर्ज़ापुर उत्तर प्रदेश (भारत)
Uttar Pradesh
08-02-2020 06:22 AM
हरिनाथ जी आपके द्धारा पूछे गए सभी सवालों के जवाब दिए गए है और प्रशन पूछने के बाद आपको 24 घंटे के अंदर जवाब मिल जाता है यदि किसी कारण जवाब ना मिले तो आप हमारे हैल्पलाइन नंबर 97799—77641 पर संपर्क कर सकते है
Posted by Krishan Mohan Rai
Uttar Pradesh
08-02-2020 06:17 AM
कृष्ण जी आप सब्जियां जैसे ग्वार, खीरा-ककड़ी, लोबिया, करेला, लौकी, तुरई, पेठा, खरबूजा, तरबूज, पालक, भिण्डी, अरबी की बिजाई कर सकते है धन्यवाद

Posted by Gopal singh
Rajasthan
08-02-2020 06:09 AM
Gopal singh ji, kripya ap apna sawal visthar se puchien taki apko iske bare mein jankari di ja sake, dhanywad
Posted by ਸਰਬਜੋਤ ਸਿੰਘ ਚੀਮਾਂ
Punjab
08-02-2020 05:55 AM
ਸਰਬਜੋਤ ਜੀ ਇਹ ਦੋਨੋ ਕੀਟਨਾਸ਼ਕ ਹਨ ਜੋ ਫ਼ਸਲ ਵਿਚ ਕੀੜਿਆਂ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਦੇ ਲਈ ਵਰਤੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਇਹਨਾਂ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਅਲੱਗ ਅਲੱਗ ਫ਼ਸਲ ਵਿਚ ਅਲੱਗ ਅਲੱਗ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਦੱਸੋ ਕਿ ਇਸਨੂੰ ਕਿਹੜੀ ਫ਼ਸਲ ਵਿਚ ਵਰਤਿਆ ਹੈ ਤਾ ਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸ ਬਾਰੇ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by Subuddh kumar Subuddh kumar
Uttar Pradesh
08-02-2020 05:45 AM
Subaddh ji murrah bhains ka rate uski achi nasal aur dudh per nirbhar krta hai vaise dudh ke hisab se bhains 60000-90000 tak v mill skti hai, aap bhians lene ke liye Prateek Vaish 9936286478 Model Dairy Farm se sampark kr skte hai.

Posted by Subuddh kumar Subuddh kumar
Uttar Pradesh
08-02-2020 05:42 AM
Subaddh ji murrah bhains ka rate uski achi nasal aur dudh per nirbhar krta hai vaise dudh ke hisab se bhains 60000-90000 tak v mill skti hai, aap bhians lene ke liye Prateek Vaish 9936286478 Model Dairy Farm se sampark kr skte hai.
Posted by आर्य सुरेन्द्र पँवार
Uttar Pradesh
08-02-2020 05:38 AM
आर्य सुरेन्द्र जी अगर आप फूलों की खेती पहली बार कर रहे है तो उसके लिए सबसे पहले आप गेंदे की खेती से शुरुआत करे और इसमें french marigold की बिजाई कर सकते है फूलों की खेती कि लिए मिटटी थोड़ी रेतली होनी चाहिए और आप सबसे पहले इसकी मार्किट ढूंढें जैसे आपके पास मंदिर या decoration वाली दुकाने के साथ संपर्क करें और इसकी बिजाई सर्दी म.... (Read More)
आर्य सुरेन्द्र जी अगर आप फूलों की खेती पहली बार कर रहे है तो उसके लिए सबसे पहले आप गेंदे की खेती से शुरुआत करे और इसमें french marigold की बिजाई कर सकते है फूलों की खेती कि लिए मिटटी थोड़ी रेतली होनी चाहिए और आप सबसे पहले इसकी मार्किट ढूंढें जैसे आपके पास मंदिर या decoration वाली दुकाने के साथ संपर्क करें और इसकी बिजाई सर्दी में करें जब तयोहार और शादियों का सीजन होता है ताकि आपकी पैदावार बिक सके एक एकड़ में लगभग 32000 -33000 रुपये तक का खर्चा आता है और आमदन Rs1,80,000 हो जाती है धन्यवाद
Posted by Sanjay Kumar Sarwan Kumar Agro Sales Nokha
Rajasthan
08-02-2020 01:40 AM
Shri maan g kripa aap apna swal visthar se puchein toh aapko poori jankari di ja ske ...
Posted by Sanjay Kumar Sarwan Kumar Agro Sales Nokha
Rajasthan
08-02-2020 01:36 AM
Shri maan g kripa aap apna swal visthar se puchein toh aapko poori jankari di ja ske....
Posted by Sanjay Kumar Sarwan Kumar Agro Sales Nokha
Rajasthan
08-02-2020 01:34 AM
sanjay kumar ji aap is trah ki ad Apni Kheti Buy/sell App par daal sakte hai.jo kisan aapke product kharidne men interested hoge vo aapse direct contact kar lenge.dhanywad
Posted by Sanjay Kumar Sarwan Kumar Agro Sales Nokha
Rajasthan
08-02-2020 01:33 AM
sanjay kumar ji aap is trah ki ad Apni Kheti Buy/sell App par daal sakte hai.jo kisan aapke product kharidne men interested hoge vo aapse direct contact kar lenge.dhanywad

Posted by Pradeep Mishra
Uttar Pradesh
08-02-2020 12:56 AM
Shri maan Botanical name of Sugarcane is Saccharum officinarum.

Posted by aditi bhavsar
Gujarat
08-02-2020 12:20 AM
Aditiji, kripya ap keet ki photo bhejein taki apko dekh kar iske niyantaran ke bare mein jankari di ja sake, dhanywad

Posted by VINOD VAISHYA
Madhya Pradesh
08-02-2020 12:16 AM
Vinod ji, kripya ap bataye ke apne ab tak isme konsi khaad ka istemal kiya hai or kitni matra mein kiya hai, taki apko iske bare mein puri jankari di ja sake, dhanywad

Posted by Harman Sidhu
Chattisgarh
07-02-2020 11:32 PM
tuci +2 medical ja non medical vich kro ji kyuki veterinary course krnn lai +2 non medical ya medical vich honi jruri hai fir he iss course nu kr skde ho, eh diploma tusi Guru Angad Dev Veterinary And Animal Sciences University Ludhiana to kar sakde ho. othe 2 year da diploma kar sakde ho ji.

Posted by Alok Kumar
Uttar Pradesh
07-02-2020 11:23 PM
अच्छे जल निकास वाली हल्की या भारी, रेतली और चिकनी मिट्टी ज़मीनें इसके लिए अच्छी मानी जाती हैं खेत में पानी खड़ा ना होने दें, क्योंकि यह फसल खड़े पानी को सहने योग्य नहीं है प्रसिद्ध किस्में:- Punjab Haldi 1: यह मध्यम कद की, हरे और लंबे पत्तों वाली और मोटी गांठों वाली किस्म है इसका गुद्दा गहरे पीले रंग का और छिल्का भूरे रंग क.... (Read More)
अच्छे जल निकास वाली हल्की या भारी, रेतली और चिकनी मिट्टी ज़मीनें इसके लिए अच्छी मानी जाती हैं खेत में पानी खड़ा ना होने दें, क्योंकि यह फसल खड़े पानी को सहने योग्य नहीं है प्रसिद्ध किस्में:- Punjab Haldi 1: यह मध्यम कद की, हरे और लंबे पत्तों वाली और मोटी गांठों वाली किस्म है इसका गुद्दा गहरे पीले रंग का और छिल्का भूरे रंग का होता है यह किस्म 215 दिनों में पकती है और औसतन पैदावार 108 क्विंटल प्रति एकड़ है Punjab Haldi 2: यह लंबे कद की हरे और चौड़े पत्तों वाली और मोटी गांठ वाली किस्म है इसका गुद्दा पीले रंग का और छिल्का भूरे रंग का होता है यह किस्म 240 दिनों में पकती है और औसतन पैदावार 122 क्विंटल प्रति एकड़ है खेत को 2-3 बार जोत कर और सुहागे से समतल करके तैयार करें हल्दी की बिजाई के लिए बैड 15 सैं.मी. ऊंचे, 1 मीटर चौड़े और आवश्यकनुसार लंबे होने चाहिए दो बैडों के बीच 50 सैं.मी. का फासला होना चाहिए अधिक पैदावार लेने के लिए बिजाई अप्रैल के अंत में करें इसे पनीरी के साथ भी उगाया जा सकता है इसके लिए जून के पहले पखवाड़े तक पनीरी खेत में लगा दें पनीरी के लिए 35-45 दिनों के पौधों को खेत में लगा दें राईज़ोमस को पंक्तियों में बीजें और पंक्ति से पंक्ति का फासला 30 सैं.मी. और पौधों में 20 सैं.मी. का फासला रखें बिजाई के बाद खेत में 2.5 टन प्रति एकड़ स्ट्रा मलच डालें बीज की गहराई 3 सैं.मी. से ज्यादा नहीं होनी चाहिए इसकी बिजाई सीधे खेत में लगाकर या पनीरी लगाकर की जाती है बिजाई के लिए साफ-सुथरे ताजे और बीमारी रहित राईज़ोमस का प्रयोग करें बीज की मात्रा 6-8 क्विंटल प्रति एकड़ बहुत होती है बिजाई से पहले क्विनलफोस 25 ई.सी. को 20 मि.ली. + कार्बेनडाज़िम 10 ग्राम प्रति लीटर पानी में डालकर बीज का उपचार करें बाद में गांठों को 20 मिनट के लिए इस घोल में भिगोदें ताकि इन्हें फफूंद से बचाया जा सके नाइट्रोजन 10 किलो (25 किलो यूरिया), फासफोरस 10 किलो (60 किलो एस एस पी) और पोटाश 10 किलो (16 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश) की मात्रा प्रति एकड़ में प्रयोग करें सारी पोटाश और आधी फासफोरस बिजाई के समय डालें नाइट्रोजन दो हिस्सों में डालें, आधी बिजाई से 75 दिन बाद और बाकी नाइट्रोजन और आधी फासफोरस बिजाई के 3 महीने बाद डालें बिजाई के 2-3 दिनों के बाद पैंडीमैथालीन 30 ई.सी. 800 मि.ली. या मैटरीब्यूज़िन 70 डब्लयू पी 400 ग्राम को 200 लीटर पानी में डालकर स्प्रे करें नदीन नाशक के प्रयोग के बाद खेत को हरे पत्तों या धान की तूड़ी से ढक दें जड़ों के विकास के लिए बिजाई से 50-60 दिनों के बाद और फिर 40 दिनों के बाद जड़ों को मिट्टी लगाएं यह कम वर्षा वाली फसल है, इसलिए वर्षा के अनुसार सिंचाई करें हल्की ज़मीन में फसल को कुल 35-40 सिंचाइयों की जरूरत पड़ती है बिजाई के बाद फसल को 40-60 क्विंटल प्रति एकड़ हरे पत्तों से ढक दें हर बार खाद डालने के बाद 30 क्विंटल प्रति एकड़ मलच डालें किस्म के अनुसार 6-9 महीनों में कटाई करें पत्ते सूखने और पीले होने पर कटाई का अनुकूल समय होता है गांठों को उखाड़ कर बाहर निकालें और साफ करें गांठों को 2-3 दिनों के लिए छांव में सुखाएं इससे छिल्का सख्त हो जाता है और आसानी से उबलता है साफ करने के बाद गांठों को पानी में सोडियम बाइकार्बोनेट डालकर 1 घंटे के लिए उबालें गांठों को उबालने के लिए कड़ाही जैसे बर्तनों का प्रयोग करें अच्छी किस्म की हल्दी लेने के लिए झाग बनने, भाफ निकलने और महक आने तक उबालें उबालने के बाद इसे 10-15 दिनों तक सुखाएं सुखाने के बाद जाली, बोरियों या मशीन से चमकायें और आकार, बनतर और रंग के अनुसार बांटे छाया में इसकी उपज कम निकलती है

Posted by harish
Himachal Pradesh
07-02-2020 11:16 PM
Shri maan g kripa aap apna swal visthar se puchein toh aapko poori jankari di ja ske....

Posted by harish
Himachal Pradesh
07-02-2020 11:15 PM
harish ji kripya btaye ke aap sabe kise keh rahe hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake,dhanywad

Posted by harish
Himachal Pradesh
07-02-2020 11:11 PM
harish ji kripya btaye ke aap apple ke bare men kya jankari lena chahte hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake,dhanywad

Posted by ankit kashyap
Uttar Pradesh
07-02-2020 11:11 PM
सबसे पहले यदि हम मछली पालन की बात करें तो इसके लिए ट्रेनिंग बहुत जरूरी है यह ट्रेनिंग FFDA(fish farmer development aggency) हर जिले में बनी है जहां हमारा खेतीबाड़ी विभाग है वहां इसके अफसर बैठते हैं वहां जाकर एप्लीकेशन भरवायें वहां आपको 5 दिन की ट्रेनिंग दी जायेगी ट्रेनिंग के लिए दसवीं पास होना ज़रूरी है इस ट्रेनिंग में आपको लोन और स.... (Read More)
सबसे पहले यदि हम मछली पालन की बात करें तो इसके लिए ट्रेनिंग बहुत जरूरी है यह ट्रेनिंग FFDA(fish farmer development aggency) हर जिले में बनी है जहां हमारा खेतीबाड़ी विभाग है वहां इसके अफसर बैठते हैं वहां जाकर एप्लीकेशन भरवायें वहां आपको 5 दिन की ट्रेनिंग दी जायेगी ट्रेनिंग के लिए दसवीं पास होना ज़रूरी है इस ट्रेनिंग में आपको लोन और सब्सिड़ी के बारे में सारी जानकारी प्राप्त हो जाएगी इसकी पुंग छोड़ने के लिए अप्रैल से अक्तूबर का समय बढ़िया होता है, बाकि यदि अपने शुरू करना है तो यूनिवर्सिटी की तरफ से एक एकड़ में शुरू कर सकते हैं. एक एकड़ में 5000 पूंग डाल सकते हैं यह 2 से 3 इंच का होता है यदि 5000 डालना है तो 3000 रोहू, 1000 कतला, 500 कॉमन कॉर्प और 500 मरीगल नस्ल डाली जाए यह पूंग आप मछली पालन विभाग से खरीद सकते हैं यह एक इंच का बच्चा 10 पैसा प्रति बच्चा मिलेगा यदि बढ़िया खुराक डाली जाए तो 8 महीनों में यह लगभग 800—900 ग्राम का हो जाता है बाकी मछली पालन के लिए नहरी पानी बढ़िया होता है और आप गांव का छप्पड़ ठेके से लेकर भी यह काम शुरू कर सकते हैं तालाब में मछली के बीज डालने से पहले इस बात की जांच कर लेनी चाहिए कि उस तालाब में काफी मात्रा में मछली की कुदरती खुराक उपलब्ध है.
Posted by MD janesar Akhtar
Bihar
07-02-2020 10:49 PM
श्री मान ीते की खेती को मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए प्रसिद्ध किस्में :-Pusa Dwarf: इसके फल मध्यम आकार के और अंडाकार होते हैं यह सूखे को सह.... (Read More)
श्री मान ीते की खेती को मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए प्रसिद्ध किस्में :-Pusa Dwarf: इसके फल मध्यम आकार के और अंडाकार होते हैं यह सूखे को सहनेयोग्य किस्म है यह उच्च घनत्व में रोपाई के लिए लाभदायक है Pusa Giant: इस किस्म के पौधे तेज हवा को सहनेयोग्य है यह बड़े फलों का उत्पादन करती है यह पैकिंग के लिए उपयुक्त किस्म है CO 3: इसके फल बड़े आकार के और अंडाकार होते हैं इसे ज्यादा देर तक रखने की गुणवत्ता अच्छी होती है CO 1: यह छोटे कद की किस्म है जिसके फल मध्यम आकार के होते हैं फल गोलाकार, नर्म हरा-पीला छिल्का और संतरी पीले रंग का गुद्दा होता है फल रसदार होता है और इसे ज्यादा देर तक रखने की गुणवत्ता अच्छी होती है Coorg Honey Dew: इसे सीधे तौर पर खाने के लिए और प्रक्रिया के लिए प्रयोग किया जाता है इसके फल आयताकार और गुद्दा मोटा संतरी रंग का होता है Pusa Majesty: इसके फल मध्यम आकार के, गोल होते हैं इन्हें रखने की गुणवत्ता बहुत अच्छी होती है यह किस्म 146 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह किस्म जड़ गलन निमाटोड के प्रतिरोधक किस्म है Pusa Delicious: यह मध्यम लंबी किस्म है इसके फल मध्यम आकार के होते हैं, गुद्दा गहरे संतरी रंग का होता है इस किस्म को कतारों में लगाने के लिए प्रयोग किया जाता है पपीते की खेती के लिए नदीन रहित भूमि का प्रयोग करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें आखिरी जोताई के समय अच्छी तरह से गली हुई रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर मिट्टी में अच्छी तरह मिलाकर डालें सिफारिश किए गए फासलों पर 1 मीटर x 1 मीटर x 1 मीटर आकार के गड्ढे खोदें गड्ढों को मिट्टी और रूड़ी की खाद या गाय के गले हुए गोबर से भरें प्रयोग की गई किस्म के आधार पर प्रत्येक गड्ढे पर 2-4 नए पौधों की रोपाई करें रोपाई के बाद हल्की सिंचाई करें हवा से बचाव के लिए खूंटा लगाएं बीजों को 150 गेज़ की मोटाई वाले, 25 x 10 सैं.मी. के पॉलीथीन बैग में बोयें पानी के उचित निकास के लिए पॉलीथीन बैग के निचले हिस्से में 1 मि.मी. अर्द्धव्यास का छेद करें उसके बाद पॉलीथीन बैग में समान अनुपात में रूड़ी की खाद, मिट्टी और रेत डालें बिजाई से पहले बीजों का उपचार करें रोपाई के लिए 6-7 सप्ताह के पौधों का प्रयोग करें यूरिया 150 ग्राम, फासफोरस 80 ग्राम, पोटाश 100 ग्राम प्रति वृक्ष में प्रति वर्ष डालें खादों को 4 भागों में बांटकर रोपाई के बाद पहले, तीसरे, पांचवे और सातवें महीने में डालें बसंत के मौसम में फरवरी मार्च के महीने में बिजाई करें जबकि मॉनसून के मौसम में बिजाई के लिए जून जुलाई का महीना उपयुक्त होता है और पतझड़ के मौसम में बिजाई अक्तूबर से नवंबर महीने में की जाती है आमतौर पर 1.8 मीटर x 1.8 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है उच्च घनता की रोपाई के लिए 1.5 मीटर x 1.5 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है नर्सरी में बीज को 1 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बीजो की खेत में सीधे बिजाई या मुख्य खेत में नए पौधों की रोपाई की जाती है 100-120 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें मिट्टी की किस्म, जलवायु के हालातों आदि के आधार पर सिंचाई करें सर्दियों में 15 दिनों के अंतराल पर और गर्मियों में 7 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें तने को पानी के संपर्क में ना आने दें और खेत में पानी भी खड़ा ना होने दें पौधे की प्रौढ़ अवस्था के दौरान नदीनों की रोकथाम जरूरी होती है नदीनों की तीव्रता के आधार पर, नियमित और हल्की गोडाई करें फ्लूक्लोरालिन या बूटाक्लोर 800 मि.ली. प्रति एकड़ में डालें नदीनों की रोकथाम के लिए मलचिंग भी एक प्रभावी तरीका है पौधों की रोपाई के कुछ दिनों बाद प्लास्टिक शीट या धान की पराली या गन्ने के बचे कुचे को मलच के रूप में डालें मुख्यत: फल के पूरा आकार लेने और हरे से हल्का पीला रंग होने पर तुड़ाई की जाती है पहली तुड़ाई रोपाई के 14-15 महीनों के बाद की जा सकती है 4-5 तुड़ाइयां प्रति मौसम की जा सकती हैं धन्यवाद

Posted by Mahipal singh Chouhan
Madhya Pradesh
07-02-2020 10:35 PM
श्री मान तिल की खेती के लिए अच्छे निकास वाली हल्की से दरमियानी मिट्टी जिसमें पानी को बांधने की अच्छी क्षमता हो, उपयुक्त होती है मिट्टी की पी एच 5 से 8 होनी चाहिए क्षारीय और तेजाबी मिट्टी में तिल की खेती ना करें प्रसिद्ध किस्में :- SVPR-1, TMV 4, TMV 5, TMV 3, CO-1, TMV 6, VRI (SV)-1, VRI (SV)-2 खेत की देसी हल की सहायता से एक बार जोताई करें उसके बाद 1-2 त.... (Read More)
श्री मान तिल की खेती के लिए अच्छे निकास वाली हल्की से दरमियानी मिट्टी जिसमें पानी को बांधने की अच्छी क्षमता हो, उपयुक्त होती है मिट्टी की पी एच 5 से 8 होनी चाहिए क्षारीय और तेजाबी मिट्टी में तिल की खेती ना करें प्रसिद्ध किस्में :- SVPR-1, TMV 4, TMV 5, TMV 3, CO-1, TMV 6, VRI (SV)-1, VRI (SV)-2 खेत की देसी हल की सहायता से एक बार जोताई करें उसके बाद 1-2 तिरछी जोताई करें मिट्टी को समतल करें ताकि खेत में पानी खड़ा ना हो सके तिल की खेती के लिए आखिरी जून से शुरूआती जुलाई का समय उपयुक्त होता है दो कतारों में 35 सैं.मी. और दो पौधों में 15 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें तिल के बीजों को गहराई में ना बोयें बीजों को 2-3 सैं.मी. की गहराई में बोयें तिल की बिजाई के लिए बुरकाव या कतारों में बीज बो कर, ढंग प्रयोग किए जाते हैं बुरकाव विधि में 2-2.5 किलो बीजों की प्रति एकड़ में और कतारों में बिजाई के लिए 1-1.2 किलो बीजों की प्रति एकड़ में आवश्यकता होती है खेत की तैयारी के समय अच्छी तरह से गला हुआ, गाय का गोबर 4-8 टन प्रति एकड़ में डालें तिल की पूरी फसल को भारी मिट्टी में नाइट्रोजन 8 किलो (यूरिया 20 किलो) और फासफोरस 8 किलो (एस एस पी 50 किलो) की आवश्यकता होती है हल्की मिट्टी के लिए नाइट्रोजन 16 किलो (यूरिया 40 किलो) और फासफोरस 10 किलो (एस एस पी 65 किलो) की आवश्यकता होती है खरीफ के मौसम में वृद्धि के लिए कम सिंचाई की आवश्यकता होती है बारिश की तीव्रता और नियमितता के आधार पर जीवन बचाव सिंचाई दें फूल निकलने और फल बनने के समय पानी की कमी ना होने दें खेत को नदीन मुक्त करने के लिए बिजाई के 20-25 दिन बाद पहली गोडाई करें दूसरी गोडाई बिजाई के 40-45 दिन बाद करें नदीनों की रासायनिक रोकथाम के लिए उनके अंकुरण से पहले फलूक्लोरालिन 800 मि.ली. या एलाक्लोर 600 मि.ली. प्रति एकड़ में डालें जब पत्ते और फल रंग बदल कर पीले रंग के हो जायें और पत्ते गिरना शुरू हो जायें, तब फसल कटाई के लिए तैयार हो जाती है कटाई करने में देरी ना करें, इससे फल नष्ट हो जाते हैं कटाई के बद फसल को बंडलों में इक्ट्ठा करें और अच्छे से सुखाने के लिए कई दिनों तक फर्श पर ढेर लगा दें लाठियां मारकर बीजों को फसल से अलग कर लें सफाई के बाद बीजों को तीन दिनों के लिए धूप में सुखाएं उसके बाद बोरियों में स्टोर करके रख दें धन्यवाद
Posted by ਹਰਪ੍ਰੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
07-02-2020 10:30 PM
harpreet ji tuc dona vicho kise di bijai kar sakde apni lod de mutabik.dhanwad
Posted by Gurpartap singh
Punjab
07-02-2020 09:54 PM
tuci iss nu vdia khurak deni suru kro ate khurak de nal nal iss nu Glactogog powder 1-1 pouch swere sham ate Lactomax tablet 10 golia rojana denia suru kro, iss nal frak paa jawega.

Posted by pradnyanand mishra
Karnataka
07-02-2020 09:41 PM
pradnyanand ji spray quinalphos@4ml per litre of water.thank you
Posted by shyam lal meena
Rajasthan
07-02-2020 09:24 PM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद

Posted by mahendra kumar saw
Jharkhand
07-02-2020 08:50 PM
महेंद्र जी आप अजोला को नीचे दिए गए तरीके से त्यार कर सकते है इसके लिए तापमान 20°C - 35°C होना चाहिए और पानी का pH 5 0 to 7 0 होता है • किसी छायादार स्थान पर 10 X 4 X 2 फीट आकार की क्यारी खोदें • क्यारी में 120 मि.मी. की पॉलीथीन शीट को बिछाकर ऊपर के किनारों पर मिट्टी का लेप कर व्यवस्थित कर दें • पॉलीथीन शीट को बिछाने की जगह पशुपालक पक.... (Read More)
महेंद्र जी आप अजोला को नीचे दिए गए तरीके से त्यार कर सकते है इसके लिए तापमान 20°C - 35°C होना चाहिए और पानी का pH 5 0 to 7 0 होता है • किसी छायादार स्थान पर 10 X 4 X 2 फीट आकार की क्यारी खोदें • क्यारी में 120 मि.मी. की पॉलीथीन शीट को बिछाकर ऊपर के किनारों पर मिट्टी का लेप कर व्यवस्थित कर दें • पॉलीथीन शीट को बिछाने की जगह पशुपालक पक्का निर्माण कर क्यारी भी तैयार कर सकते हैं• 15 किलोग्राम साफ उपजाऊ मिटटी की परत क्यारी में बिछा दें • 5-7 किलो गोबर की खाद 10-15 लीटर पानी में घोल बनाकर मिट्टी पर फैला दें • क्यारी में लगभग 10-15 सेमी गहराई तक पानी भरें • अब उपजाऊ मिट्टी व गोबर खाद को जल में अच्छी तरह मिश्रित कर देवें • इस मिश्रण पर दो किलो ताजा अजोला को फेला देवें • इसके पश्चात से 10 लीटर पानी को अच्छी तरह से अजोला पर छिड़कें जिससे अजोला अपनी सही स्थिति में आ जाए • क्यारी को अब नायलोन जाली (ग्रीन नेट) से ढक कर 15-20 दिन तक अजोला को वृद्वि करने दें
• 21वें दिन से औसतन 1.5-2.0 किलोग्राम अजोला प्रतिदिन प्राप्त की जा सकती है
• प्रतिदिन 1.5-2.0 किलोग्राम अजोला की उपज प्राप्त करने हेतु 20 ग्राम सुपरफॉस्फेट तथा 5 किलोग्राम गोबर की खाद का घोल बनाकर प्रति माह क्यारी में मिलाएं
Posted by Salendra Kumar
Bihar
07-02-2020 08:44 PM
salendra ji iska kharcha lagbhag 11000 rupaye prati 2 bigha ke hisab se aa jata hai.dhanywad

Posted by Raj Kumar
Punjab
07-02-2020 08:20 PM
raj ji isdi roktham de layi tuc Profenophos @ 1.5 ml/litre pani de hisab nal spray karo.dhanwad

Posted by Avanish Tiwari
Jharkhand
07-02-2020 08:13 PM
फसल के 1-3 वर्ष की हो जाने पर, अच्छी तरह से गला हुए गाय का गोबर 5-20 किलो और युरिया 100-300 ग्राम प्रति वृक्ष में डालें, गाय के गले हुए गोबर की पूरी मात्रा दिसंबर महीने के दौरान डालें जबकि यूरिया के दो हिस्से, पहला फरवरी महीने में और दूसरा अप्रैल-मई के महीने में डालें, यूरिया की पहली खुराक के समय सिंगल सुपर फासफेट खाद की .... (Read More)
फसल के 1-3 वर्ष की हो जाने पर, अच्छी तरह से गला हुए गाय का गोबर 5-20 किलो और युरिया 100-300 ग्राम प्रति वृक्ष में डालें, गाय के गले हुए गोबर की पूरी मात्रा दिसंबर महीने के दौरान डालें जबकि यूरिया के दो हिस्से, पहला फरवरी महीने में और दूसरा अप्रैल-मई के महीने में डालें, यूरिया की पहली खुराक के समय सिंगल सुपर फासफेट खाद की पूरी मात्रा डालें नदीनों को हाथ से गोडाई करके या रासायनों द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है ग्लाइफोसेट 1.6 लीटर को प्रति 150 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें ग्लाइफोसेट की स्प्रे सिर्फ नदीनों पर ही करें, मुख्य फसल पर ना करें नींबू की फसल को नियमित अंतराल पर सिंचाई की आवश्यकता होती है सर्दियों और गर्मियों में जीवन रक्षक सिंचाई जरूर करें फूल आने के समय, फल लगने के समय और पौधे के अच्छे विकास के लिए सिंचाई आवश्यक है ज्यादा सिंचाई से जड़ गलन और तना गलन की बीमारियों का खतरा होता है उच्च आवृत्ति की सिंचाई फायदेमंद होती है नमकीन पानी फसल के लिए हानिकारक होता है वसंत ऋतु में अकेला जड़ों को पानी देना पौधे को प्रभावित नहीं करता

Posted by deepak patidar
Madhya Pradesh
07-02-2020 07:52 PM
deepak ji aap kisme jaise PUSA 105(3.9-4.3 q/acre),ML 337(3.33-4.16q/acre),ML 131(4.16-5 q/acre) ki bijai kar sakte hai.dhanywad

Posted by maninder
Punjab
07-02-2020 07:45 PM
Shri maan g NPK 13:00:45@1kg, Boron@100 gm and Chelated zinc@120 gm per acre spray kr skde ho...

Posted by ਗੁਰਜੀਤ
Punjab
07-02-2020 07:35 PM
gurjeet ji red and white variety of dragon fruit is best for punjab climate.thank you
Posted by Jitendra Singh Rajput
Madhya Pradesh
07-02-2020 07:35 PM
jitendra ji kripya aap paudhe ki photo bheje aur btaye ke aapne paudha beej se lgaya hai ya kalm se taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad

Posted by sudhanshu verma
Uttar Pradesh
07-02-2020 07:08 PM
श्री मान मटर में NPK 13:00:45@1 किलो प्रती एकड़ सप्रे कर सकते हैं और पतियों को सूखने से बचाने के लिए M-45@500 ग्राम प्रती एकड़ सप्रे कर सकते हो, दोनों को अलग-अलग सप्रे करना है
Posted by ਯਸ਼ਕੀਰਤ ਬਰਾੜ
Rajasthan
07-02-2020 07:08 PM
Yashkirat ji aap uske blood ka sample lekar nazdiki pollyclinic mai Brucellosis bimari ki janch krwayen, jise uske bacha girane ka sahi karan ptaa lgg skee kyuki pashu Brucellosis bimari ke karan he bacha var var girata hai.

Posted by sudhanshu verma
Uttar Pradesh
07-02-2020 07:06 PM
श्री मान मटर में M-45@500 ग्राम प्रती एकड़ सप्रे कर सकते हो

Posted by binder singh
Punjab
07-02-2020 07:04 PM
Binder singh ji Contract Poultry ke lia aap Salil Sood 9781017711 se samparak kar sak sakte hai agar aap desi me ana chahte hai to aap Sumit Jandar 8275592788 se samparak kar sakte hai. Thankyou.

Posted by vivek rana
Himachal Pradesh
07-02-2020 06:58 PM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद

Posted by SUDHIR kumar
Bihar
07-02-2020 06:46 PM
Shri maan g kripa aap apna swal visthar se puchein toh aapko poori jankari di ja ske....

Posted by Nandu bhai
Jharkhand
07-02-2020 06:42 PM
श्री मान खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते ह.... (Read More)
श्री मान खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुमब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तहय उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तहय में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तहय लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है

Posted by Karan
Punjab
07-02-2020 06:38 PM
tuci uss nu Anabolite liquid 100-100ml swere sham, Glactogog powder 1-1 pouch swere sham ate Calpond powder 50gm rojana dena suru kro, baki uss nu vdia matra vich chara ate feed deo ate tuci uss nu kanak da dalia v tyar krke de skde ho.
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