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Posted by Mangal Ahir
Rajasthan
10-02-2020 11:38 PM
Maharashtra
02-11-2020 08:49 AM
अफीम एक वार्षिक औषधीय बूटी है, जिसमें कई जरूरी एल्कलॉइड (वे तत्व जिनमें ड्रग्स की मात्रा होती है) जैसे मोर्फिन, कोडेन और थिबेन होते हैं अच्छी उपज और वृद्धि के लिए इसे उपजाऊ, अच्छे निकास वाली काली मिट्टी और हल्की दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है मिट्टी की पी एच 7 के लगभग होनी चाहिए प्रसिद्ध किस्में :- Chetak: यह अधिक .... (Read More)
अफीम एक वार्षिक औषधीय बूटी है, जिसमें कई जरूरी एल्कलॉइड (वे तत्व जिनमें ड्रग्स की मात्रा होती है) जैसे मोर्फिन, कोडेन और थिबेन होते हैं अच्छी उपज और वृद्धि के लिए इसे उपजाऊ, अच्छे निकास वाली काली मिट्टी और हल्की दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है मिट्टी की पी एच 7 के लगभग होनी चाहिए प्रसिद्ध किस्में :- Chetak: यह अधिक उपज वाली किस्म है इसके पौधे का औसतन कद 80-90 सैं.मी. होता है इसके फूल सफेद रंग के और फल बड़े और गोल आकार में होते हैं यह अधिक उपजाऊ मिट्टी में अच्छी पैदावार देती है इसमें मोर्फिन की मात्रा 12.5 प्रतिशत होती है यह मोर्फिन की औसतन पैदावार 2 किलोग्राम प्रति एकड़ देती है मिट्टी की किस्म के आधार पर मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की दो-तीन बार जोताई करें मिट्टी को अच्छे से समतल करें ताकि खेत में पानी ना खड़ा हो सके खेत की तैयारी के समय अच्छी तरह से गला हुआ, गाय का गोबर 4 टन प्रति एकड़ में डालें अफीम की बिजाई के लिए अक्तूबर के आखिरी सप्ताह से लेकर नवंबर के पहले सप्ताह तक का समय उपयुक्त होता है इसके बीज छोटे होते हैं इसलिए बीजों को बारीक रेत में अच्छे से मिलाया जाता है और फिर बिजाई के लिए प्रयोग किया जाता है 3 मीटर चौड़े और 5 मीटर लंबे बैड तैयार किए जाते हैं बैड पर 30 सैं.मी. के फासले पर कतार बनाई जाती है, फिर बीजों को कतारों में बोया जाता है पौधे से पौधे का फासला 30 सैं.मी. रखें बिजाई के लिए बुरकाव या कतार में बिजाई का ढंग प्रयोग किया जाता है बीज की मात्रा ज्यादा डालने से गोडाई करने में परेशानी आती है, जिससे फसल का विकास अच्छा नहीं होता, इसलिए बुरकाव विधि से ज्यादा कतारों में बिजाई करने को ज्यादा महत्तव दिया जाता है एक एकड़ खेत के लिए 2 किलो बीज की मात्रा बहुत होती है बिजाई से पहले मैनकोजेब 4 ग्राम से प्रति किलो बीजों का उपचार करें नाइट्रोजन 36 किलो (यूरिया 80 किलो), फासफोरस 16 किलो (एस एस पी 100 किलो), पोटाश 4 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 10 किलो) प्रति एकड़ में डालें फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा बिजाई के समय डालें नाइट्रोजन की बाकी बची मात्रा को दो भागों में बांटे, पहली मात्रा बिजाई के 40-50 दिन के बाद डालें और दूसरी मात्रा फूल बनने से पहले डालें अफीम की पूरी फसल को 8-10 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है बिजाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करें फिर मिट्टी की किस्म, सिंचित क्षेत्र के आधार पर 6-7 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें जलवायु हालातों और आवश्यकता के आधार पर सिंचाई के अंतराल को बढ़ाकर, सिंचित खेत में 10-12 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें चीरा लगाने से 8-10 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें नदीनों की तीव्रता के आधार पर दो से तीन गोडाई करें नदीनों की रासायनिक रोकथाम के लिए लसोप्रोटियूरॉन 500 ग्राम को 200 लीटर पानी में मिलाकर बिजाई के बाद तीसरे दिन डालें नदीननाशक क्रिया के 30 दिन बाद पहली गोडाई करें बिजाई के 95-115 दिनों बाद अफीम में फूल निकलते हैं फूल बनने के बाद, 15-20 दिनों में फल परिपक्व हो जाते हैं जब फल अपने रंग को हरे से हल्के हरे में बदल देता है और फल घना हो जाता है तब कट लगाने और दूध इक्ट्ठा करने के लिए सही अवस्था होती है दोपहर में कट लगाने के प्रक्रिया पूरी कर लें और दूध को अगले दिन की सवेर में इक्ट्ठा करें इस प्रक्रिया को हर तीन दिन बाद दोहरायें प्रत्येक फल में 3-56 बार कट लगाए जा सकते हैं आखिरी कट लगाने के बाद फसल को 20-25 दिनों के लिए फसल को सूखने के लिए छोड़ दें अच्छी तरह से सुखाने के बाद फल की तुड़ाई करें और फसल को दरांती के साथ काट दें सूखे फलों की तुड़ाई के बाद उन्हें खुली जगह में बिछा दें और उनमें से बीज निकाल लें धन्यवाद
Posted by sachin singh
Bihar
10-02-2020 11:37 PM
Haryana
02-11-2020 01:12 PM
sachin singh ji bilkul hum singi fish cemented tank me rakh sakte hai ji.
Posted by Irfan patel
Madhya Pradesh
10-02-2020 11:00 PM
Maharashtra
02-11-2020 08:50 AM
इरफ़ान जी, गर्मियों के मौसम में, बिजाई के लिए फरवरी से मार्च और खरीफ के मौसम के लिए, जून से जुलाई का महीना उपयुक्त होता है पहाड़ी क्षेत्रों में, मार्च से अप्रैल में बिजाई पूरी कर लें धन्यवाद
Posted by Kayum Khan
Rajasthan
10-02-2020 10:25 PM
Punjab
02-11-2020 03:33 PM
कयुम खांन जी आप कड़कनाथ नस्ल के मुर्गे, मुर्गी का जोड़ा लेने के लिए Man Singh 9649050050 Shree Karni group से संपर्क कर सकते है इनसे आपको जोड़ा भी मिल जाएगा और उनकी ग्रोथ के हिसाब से रेट का भी पता लग जाएगा
Posted by Ketan Verma
Punjab
10-02-2020 10:20 PM
Maharashtra
02-11-2020 08:55 AM
Posted by विकास
Rajasthan
10-02-2020 09:48 PM
Punjab
02-11-2020 10:13 AM
WH 896: इस किस्म की सिंचित क्षेत्रों में समय पर बोने के लिए सिफारिश की गई है PBW 373: यह अधिक उपज वाली किस्म है इसकी सिंचित क्षेत्रों में पिछेती बिजाई के लिए सिफारिश की गई है यह किस्म विभिन्न बीमारियों के प्रतिरोधक है PBW 343: यह किस्म सिंचित और पिछेती बिजाई के क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है यह किस्म 130-135 दिनों में कटाई क.... (Read More)
WH 896: इस किस्म की सिंचित क्षेत्रों में समय पर बोने के लिए सिफारिश की गई है PBW 373: यह अधिक उपज वाली किस्म है इसकी सिंचित क्षेत्रों में पिछेती बिजाई के लिए सिफारिश की गई है यह किस्म विभिन्न बीमारियों के प्रतिरोधक है PBW 343: यह किस्म सिंचित और पिछेती बिजाई के क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है यह किस्म 130-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह गर्दन तोड़, जल जमाव की स्थितियों के प्रतिरोधक किस्म है यह करनाल बंट के भी प्रतिरोधक और झुलस रोग को सहनेयोग्य किस्म है इसकी औसतन पैदावार 19 क्विंटल प्रति एकड़ होती है HD 2643: यह किस्म सिंचित और पिछेती बिजाई के क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है इस किस्म से अच्छी गुणवत्ता वाली रोटी बनती है यह पत्ता और धारीदार कुंगी के प्रतिरोधक और करनाल बंट को सहनेयोग्य किस्म है UP 2425: यह सिंचित स्थितियों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है PBW-443: यह किस्म सिंचित हालातों में समय पर बोने के लिए उपयुक्त किस्म है DBW-14: यह किस्म सिंचित हालातों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त है यह जल्दी पकने वाली किस्म है इसके दाने सख्त होते हैं NW-2036: यह सिंचित हालातों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है यह जल्दी पकने वाली किस्म है दूसरे शब्दों में, यह किस्म 108 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दाने छोटे, सुनहरी और अर्द्ध सख्त होते हैं MACS-6145: यह किस्म बारानी क्षेत्रों में समय पर बोने के लिए उपयुक्त है HD-2824: यह किस्म सिंचित क्षेत्रों में समय पर बिजाई के लिए उपयुक्त है PBW-502: यह किस्म पंजाब एग्रीकल्चर युनिवर्सिटी द्वारा विकसित की गई है यह किस्म सिंचित हालातों में समय पर बिजाई के लिए उपयुक्त है यह किस्म पत्ते और धारीदार कुंगी के प्रतिरोधक किस्म है
Posted by विकास
Rajasthan
10-02-2020 09:46 PM
Punjab
02-11-2020 10:13 AM
WH 896: इस किस्म की सिंचित क्षेत्रों में समय पर बोने के लिए सिफारिश की गई है PBW 373: यह अधिक उपज वाली किस्म है इसकी सिंचित क्षेत्रों में पिछेती बिजाई के लिए सिफारिश की गई है यह किस्म विभिन्न बीमारियों के प्रतिरोधक है PBW 343: यह किस्म सिंचित और पिछेती बिजाई के क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है यह किस्म 130-135 दिनों में कटाई क.... (Read More)
WH 896: इस किस्म की सिंचित क्षेत्रों में समय पर बोने के लिए सिफारिश की गई है PBW 373: यह अधिक उपज वाली किस्म है इसकी सिंचित क्षेत्रों में पिछेती बिजाई के लिए सिफारिश की गई है यह किस्म विभिन्न बीमारियों के प्रतिरोधक है PBW 343: यह किस्म सिंचित और पिछेती बिजाई के क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है यह किस्म 130-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह गर्दन तोड़, जल जमाव की स्थितियों के प्रतिरोधक किस्म है यह करनाल बंट के भी प्रतिरोधक और झुलस रोग को सहनेयोग्य किस्म है इसकी औसतन पैदावार 19 क्विंटल प्रति एकड़ होती है HD 2643: यह किस्म सिंचित और पिछेती बिजाई के क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है इस किस्म से अच्छी गुणवत्ता वाली रोटी बनती है यह पत्ता और धारीदार कुंगी के प्रतिरोधक और करनाल बंट को सहनेयोग्य किस्म है UP 2425: यह सिंचित स्थितियों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है PBW-443: यह किस्म सिंचित हालातों में समय पर बोने के लिए उपयुक्त किस्म है DBW-14: यह किस्म सिंचित हालातों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त है यह जल्दी पकने वाली किस्म है इसके दाने सख्त होते हैं NW-2036: यह सिंचित हालातों में पिछेती बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है यह जल्दी पकने वाली किस्म है दूसरे शब्दों में, यह किस्म 108 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके दाने छोटे, सुनहरी और अर्द्ध सख्त होते हैं MACS-6145: यह किस्म बारानी क्षेत्रों में समय पर बोने के लिए उपयुक्त है HD-2824: यह किस्म सिंचित क्षेत्रों में समय पर बिजाई के लिए उपयुक्त है PBW-502: यह किस्म पंजाब एग्रीकल्चर युनिवर्सिटी द्वारा विकसित की गई है यह किस्म सिंचित हालातों में समय पर बिजाई के लिए उपयुक्त है यह किस्म पत्ते और धारीदार कुंगी के प्रतिरोधक किस्म है
Posted by विष्णु कुमार पाटीदार
Madhya Pradesh
10-02-2020 09:37 PM
Maharashtra
02-11-2020 08:56 AM
विष्णु कुमार पाटीदार जी, यह फंगस के हमले की वजह से हो रहा है आप इसकी रोकथाम के लिए इसमे carbendazim @ 4 ग्राम यां mancozeb @ 4 ग्राम प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे कर सकते हैं, धन्यवाद
Posted by Praveen Kumar
Uttar Pradesh
10-02-2020 08:57 PM

Punjab
02-11-2020 03:35 PM
Praveen ji aap Gir cow lene ke liye Sanju Bhalla 9873163741 Gir Cow Farm se sampark kr skte hai inse apko gir cow mill jayegi.
Posted by Harjinder Singh
Punjab
10-02-2020 08:57 PM
Punjab
02-11-2020 05:03 PM
waste decomposer ਇਕ ਵਦੀਆ ਪ੍ਰੋਡਕਟ ਹੈ ਇਹ 20 ਰੁਪਏ ਦੀ ਸ਼ੀਸ਼ੀ ਆਉਂਦੀ ਹੈ ਜੋ ਕਿ ਕਿਸੇ ਵੀ ਪੈਸਟੀਸਾਈਡ ਵਾਲੀ ਦੁਕਾਨ ਤੋਂ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹੋ I ਇਹ ਇਕ ਆਰਗੈਨਿਕ ਪ੍ਰੋਡਕਟ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿਚ ਇਕ ਬੈਕਟੀਰੀਆ ਹੈ ਜੋ ਕੇ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਉਪਜਾਊ ਸ਼ਕਤੀ ਵਧਾਉਦਾ ਹੈ ਤੇ ਫਾਲਤੂ ਚੀਜ਼ਾਂ ਜਿਵੇਂ ਪੱਤਿਆਂ ਵਗੈਰਾ ਨੂੰ ਗਾਲਣ ਵਿੱਚ ਮਦਦ ਕਰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਨੂੰ ਤਿਆਰ ਕਰਨ ਲਈ 150-200 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ 2 ਕਿਲੋ ਗੁੜ ਅਤੇ ਇੱਕ ਸ਼ੀਸ਼ੀ Waste dec.... (Read More)
waste decomposer ਇਕ ਵਦੀਆ ਪ੍ਰੋਡਕਟ ਹੈ ਇਹ 20 ਰੁਪਏ ਦੀ ਸ਼ੀਸ਼ੀ ਆਉਂਦੀ ਹੈ ਜੋ ਕਿ ਕਿਸੇ ਵੀ ਪੈਸਟੀਸਾਈਡ ਵਾਲੀ ਦੁਕਾਨ ਤੋਂ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹੋ I ਇਹ ਇਕ ਆਰਗੈਨਿਕ ਪ੍ਰੋਡਕਟ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿਚ ਇਕ ਬੈਕਟੀਰੀਆ ਹੈ ਜੋ ਕੇ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਉਪਜਾਊ ਸ਼ਕਤੀ ਵਧਾਉਦਾ ਹੈ ਤੇ ਫਾਲਤੂ ਚੀਜ਼ਾਂ ਜਿਵੇਂ ਪੱਤਿਆਂ ਵਗੈਰਾ ਨੂੰ ਗਾਲਣ ਵਿੱਚ ਮਦਦ ਕਰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਨੂੰ ਤਿਆਰ ਕਰਨ ਲਈ 150-200 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ 2 ਕਿਲੋ ਗੁੜ ਅਤੇ ਇੱਕ ਸ਼ੀਸ਼ੀ Waste decomposer ਦੀ ਪਾਓ ਇੱਹ FUNGICIDE ਦਾ ਵੀ ਕੰਮ ਕਰਦਾ ਹੈ ਜਲਦੀ ਜਲਦੀ ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਨੂੰ ਨੇੜੇ ਨਹੀਂ ਆਉਣ ਦਿੰਦਾ ਇੱਹ ਲਗਭਗ 7 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਵਿਚ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ I ਇਹ ਇਕ ਏਕੜ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਹੁੰਦੀ ਹੈ Iਇਸਨੂੰ ਖਰੀਦਣ ਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ Manish Sethi 9468340000 ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by ISHVARCHAND YADAV
Uttar Pradesh
10-02-2020 08:52 PM
Maharashtra
02-11-2020 09:03 AM
ईश्वरचंद जी, बिजाई से 10 दिन पहले 20 टन रूड़ी की खाद डालें नाइट्रोजन 30 किलो(यूरिया 65 किलो), फासफोरस 16 किलो(सिंगल सुपर फासफेट 100 किलो) और पोटाश 16 किलो(मिउरेट ऑफ़ पोटाश 30 किलो) प्रति एकड़ डालें फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा रोपण के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटकर रोपाई क.... (Read More)
ईश्वरचंद जी, बिजाई से 10 दिन पहले 20 टन रूड़ी की खाद डालें नाइट्रोजन 30 किलो(यूरिया 65 किलो), फासफोरस 16 किलो(सिंगल सुपर फासफेट 100 किलो) और पोटाश 16 किलो(मिउरेट ऑफ़ पोटाश 30 किलो) प्रति एकड़ डालें फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा रोपण के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटकर रोपाई के बाद टॉप ड्रेसिंग के तौर पर 30वें और 45वें दिन डालें अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए सल्फर भी बहुत महत्तवपूर्ण है मिट्टी की जांच के आधार पर रोपाई के समय 6-12 किलो सल्फर प्रति एकड़ में डालें पानी में घुलनशील खादें: रोपण से 10-15 दिन बाद सूक्ष्म-तत्व 2.5-3 ग्राम प्रति लीटर पानी के साथ 19:19:19 की स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by ROHIT KUMAR SINGH
Uttar Pradesh
10-02-2020 08:50 PM
Punjab
02-11-2020 10:49 AM
rohit ji aap iska istemal kar sakte hai. iska result badia hai.dhanywad
Posted by Rameshwar Chauhan
Uttar Pradesh
10-02-2020 08:48 PM
Punjab
02-11-2020 10:55 AM
Rameshwar ji yeh kisam par nirbhar karta hai kripya btaye ke aapne konsi kisam ki bijai ki hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake,dhanywad
Posted by Mr.Avtar Singh
Punjab
10-02-2020 08:45 PM
Punjab
02-10-2020 09:10 PM
श्रीमान जी बरसीम में फफूंदनाशी एम45 400 ग्राम को प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे कर सकते है
Posted by Rahul
Bihar
10-02-2020 08:37 PM
Punjab
02-10-2020 09:22 PM
shrimaan g kirpa krke apna swaal visthaar se pucho ta jo aapko proper jaankari mil ske g..
Posted by लाखनसिहं गोयल
Madhya Pradesh
10-02-2020 08:36 PM
Punjab
02-11-2020 10:51 AM
बिजाई से 10 दिन पहले 20 टन रूड़ी की खाद डालें नाइट्रोजन 30 किलो(यूरिया 65 किलो), फासफोरस 16 किलो(सिंगल सुपर फासफेट 100 किलो) और पोटाश 16 किलो(मिउरेट ऑफ़ पोटाश 30 किलो) प्रति एकड़ डालें फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा रोपण के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटकर रोपाई के बाद टॉप ड्रे.... (Read More)
बिजाई से 10 दिन पहले 20 टन रूड़ी की खाद डालें नाइट्रोजन 30 किलो(यूरिया 65 किलो), फासफोरस 16 किलो(सिंगल सुपर फासफेट 100 किलो) और पोटाश 16 किलो(मिउरेट ऑफ़ पोटाश 30 किलो) प्रति एकड़ डालें फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा रोपण के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटकर रोपाई के बाद टॉप ड्रेसिंग के तौर पर 30वें और 45वें दिन डालें अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए सल्फर भी बहुत महत्तवपूर्ण है मिट्टी की जांच के आधार पर रोपाई के समय 6-12 किलो सल्फर प्रति एकड़ में डालें
Posted by लाखनसिहं गोयल
Madhya Pradesh
10-02-2020 08:33 PM
Punjab
02-11-2020 11:23 AM
बिजाई से 10 दिन पहले 20 टन रूड़ी की खाद डालें नाइट्रोजन 30 किलो(यूरिया 65 किलो), फासफोरस 16 किलो(सिंगल सुपर फासफेट 100 किलो) और पोटाश 16 किलो(मिउरेट ऑफ़ पोटाश 30 किलो) प्रति एकड़ डालें फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा रोपण के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटकर रोपाई के बाद टॉप ड्रे.... (Read More)
बिजाई से 10 दिन पहले 20 टन रूड़ी की खाद डालें नाइट्रोजन 30 किलो(यूरिया 65 किलो), फासफोरस 16 किलो(सिंगल सुपर फासफेट 100 किलो) और पोटाश 16 किलो(मिउरेट ऑफ़ पोटाश 30 किलो) प्रति एकड़ डालें फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा रोपण के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटकर रोपाई के बाद टॉप ड्रेसिंग के तौर पर 30वें और 45वें दिन डालें अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए सल्फर भी बहुत महत्तवपूर्ण है मिट्टी की जांच के आधार पर रोपाई के समय 6-12 किलो सल्फर प्रति एकड़ में डालें
Posted by Ravindra singhChouhan
Rajasthan
10-02-2020 08:30 PM
Punjab
02-11-2020 11:25 AM
रविंदर जी आप गर्मी में मक्का की बिजाई कर सकते है धन्यवाद
Posted by Raju Saxena
Uttar Pradesh
10-02-2020 08:23 PM

Punjab
02-11-2020 03:39 PM
Raju ji aap cement tank mai mashli palan kr skte hai, iska size app apni jgah ke hisab se tyar kr skte hai aur usme machli palan kr skte hai.
Posted by honey
Punjab
10-02-2020 08:20 PM
Punjab
02-11-2020 05:06 PM
honey ji eh tela hai isdi roktham de layi tuc imidacloprid@1.5ml nu prati litre pani de hisab nal spray karo.dhanwad
Posted by Er. Harjinder Singh
Punjab
10-02-2020 08:14 PM
Punjab
02-11-2020 11:34 AM
Harjinder ji fungus di roktham de layi carbendazim@400 gram nu prati acre de hisab nal spray karo.dhanwad
Posted by Mahipal singh Chouhan
Madhya Pradesh
10-02-2020 08:03 PM
Punjab
02-11-2020 11:35 AM
mahipal ji aap pyaj ke uper fungicide jaise carbendazim@400 gram ko prati acre ke hisab se spray karen,dhanywad
Posted by Gurpreet
Punjab
10-02-2020 07:55 PM
Punjab
02-11-2020 03:42 PM
ਜੇਕਰ ਮੱਝ ਨੂੰ ਮੋਕ ਲੱਗੀ ਹੈ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਮਹਿੰਦੀ, 50 ਗ੍ਰਾਮ ਹਲਦੀ ਤੇ 200 ਗ੍ਰਾਮ ਸਰੋਂ ਦਾ ਤੇਲ ਮਿਕਸ ਕਰਕੇ 3-4 ਦਿਨ ਲਗਾਤਾਰ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ, ਅਤੇ ਤੁਸੀ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਵੱਛੀ ਦੀ ਉਮਰ ਵਾਰੇ ਦੱਸੋ ਅਤੇ ਵਿਸਤਾਰ ਨਾਲ ਦੁਬਾਰਾ ਸਵਾਲ ਪੁੱਛੋਂ ਤਾਂ ਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਸਹੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ
Posted by UMATIYA SAMIR
Gujarat
10-02-2020 07:55 PM
Punjab
02-11-2020 03:44 PM
आप 250 ग्राम गुड़ गुलकंद, 100 ग्राम सोंफ, 100 ग्राम सूखे आंवले और 50 ग्राम अजवाइन उबाल कर ठंडा कर 5 दिन देनी शुरू करें, आप Lactomax tablet 10-10 गोलियां सुबह शाम रोज़ाना दें और कारगिल की Fresher फीड डाल सकते है
Posted by Lovepreet Dhaliwal
Punjab
10-02-2020 07:54 PM
Punjab
02-11-2020 11:37 AM
ਲਵਪ੍ਰੀਤ ਜੀ ਇਸਦੇ ਉਪਰ ਤੁਸੀ carbendazim @400 ਗ੍ਰਾਮ ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by gurpreet
Punjab
10-02-2020 07:47 PM
Punjab
02-11-2020 03:51 PM
Gurpreet ji tuci iss nu pett de kiria lai Bandykind plus bolus deo ate her 3 mahine badd salt change krke pett de kiria lai goli jrur deo, baki uss nu Ovumin advance bolus rojana 1 goli deni suru kro ate 21 din tak dinde rho, iss nal heat vich aa jawegi baki tuci iss nu nazdiki doctor se salah de anuar kise v vdia nasal da tika bhrwa skde ho..
Posted by sandeep rawat
Uttar Pradesh
10-02-2020 07:42 PM
Punjab
02-11-2020 03:51 PM
Hanji Sandeep ji yeh sirohi nasal ki goat hai..
Posted by Ravindra singhChouhan
Rajasthan
10-02-2020 07:40 PM
Punjab
02-11-2020 11:50 AM
फसलों के लिए मिट्टी का नमूना लेने के लिए ज़मीन की ऊपरी सहत से घास फूस एक आर करके खुरपे से 6 इंच गहरा गड्ढा खोदकर एक ओर एक ​इंच की मिट्टी की सतह ऊपर से नीचे तक एकसमान करें इस मिट्टी को साफ कपड़े या बर्तन में डालेंं इस तरह 7—8 अन्य स्थानों से मिट्टी लें इस मिट्टी को आपस में अच्छी तरह से मिलाकर उसमें से आधा किलो मिट.... (Read More)
फसलों के लिए मिट्टी का नमूना लेने के लिए ज़मीन की ऊपरी सहत से घास फूस एक आर करके खुरपे से 6 इंच गहरा गड्ढा खोदकर एक ओर एक ​इंच की मिट्टी की सतह ऊपर से नीचे तक एकसमान करें इस मिट्टी को साफ कपड़े या बर्तन में डालेंं इस तरह 7—8 अन्य स्थानों से मिट्टी लें इस मिट्टी को आपस में अच्छी तरह से मिलाकर उसमें से आधा किलो मिट्टी लें यदि मिट्टी गीली हो तो छांव में सुखाएं इस नमूने को कपड़े की थैली में डालकर किसान का नाम, पता और खेत नंबर ​लिखकर एक पर्ची उस पर रख दें इस तरीके से खेत में मिला हुआ नमूना लेना चाहिए यदि किसी खेत के कुछ हिस्से में ज़मीन की किस्म और उपजाऊ शक्ति अलग हो उस हिस्से की मिट्टी का अलग नमूना लें कल्लर वाली ज़मीन मेंसे मिट्टी का नमूना लेने के लिए ज़मीन में 3 फुट गहरा गड्ढा खोदकर सीधी ओर ऊपर से शुरू करके नीचे 6 इंच तक 1 फुट और 2 फुट की गहराई पर ​निशानलगाएं हर गहराई से खुरपे की मदद से तकरीबन 1 इंच मोटी सतह उतारकर आधा ग्राम मिट्टी लें इस तरह कुल 4 नमूने लें हर गहराई से नमूने लेकर विधि 1 तरह संभालें पर्ची पर नमूने की गहराई भी लिखें बाग लगाने के लिए मिट्टी की जांच के लिए नमूना लेने के लिए खेत में 6 फुट गहरा गड्ढा खोदकर सीधी ओर से ऊपर से नीचे की तरफ निशान लाकर निशान 6 इंच से 2 निशान 1 फुट पर लाकर हर फुट पर निशान लगाए खुरपे से 6 इंच के निशान तक 1 इंच मोटी तह एक समान लगाएं जिसका भार लगभग आधा किलोग्राम हो इस तरह 6 नमूने 1—1 फुट दूरी पर लें और अलग अलग थैलियों में डालें जिसकी गिनती 7 हो जायेगी थैली के किसान और खेतों की पूरी जानकारी लिखकर डाली जाये यदि किसी गहराई पर कोई रोड़ियों की तह हो उसका नमूना अलग लेकर अलग थैली में डालना चाहिए जिसमें एक पर्ची पर तह की गहराई लिखी जाये कल्लर वाली ज़मीन और बागों के लिए मिट्टी का नमूना बरमे की मदद से भी लिया जा सकता है और इसकी जांच आप मिट्टी जांच केंद्र से या के वी के से करवा सकते हैं :- National Highway 65, Cazri Colony, Pali, Rajasthan 306401. Phone: 02932 256 771
Posted by nav shah
Punjab
10-02-2020 07:39 PM
Punjab
02-10-2020 07:56 PM
pet de keria Di medisan bandykind plus ,cow Di dacedani Di saffi krwo te 3 din medicN barAo,50 GM repromin powder deo NL sahn toh cross krwi gaban nil Ayo gi
Posted by Rohit
Madhya Pradesh
10-02-2020 07:36 PM

Punjab
02-11-2020 12:06 PM
फसल को जानवरों से बचाने के लिए आप खेत में फेंसिंग कर सकते है इसके इलावा आप prem raj saini 9719432296 जी से सम्पर्क कर सकते है इन्होने एक खाद त्यार की है जिसकी बदबू से जानवर खेत में नहीं आते
Posted by Ravindra singhChouhan
Rajasthan
10-02-2020 07:35 PM
Maharashtra
02-11-2020 10:12 AM
रविंद्र जी, भिंडी काफी तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है भिंडी की फसल के लिए रेतली से चिकनी मिट्टी उचित होती है, जिसमें जैविक तत्व भरपूर मात्रा में हों और जिसकी निकास प्रणाली भी अच्छी ढंग की हो यदि निकास अच्छे ढंग का हो तो यह भारी ज़मीनों में भी अच्छी उगती है मिट्टी का पी एच 6.0 से 6.5 होना चाहिए खारी, नमक वाली या घट.... (Read More)
रविंद्र जी, भिंडी काफी तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है भिंडी की फसल के लिए रेतली से चिकनी मिट्टी उचित होती है, जिसमें जैविक तत्व भरपूर मात्रा में हों और जिसकी निकास प्रणाली भी अच्छी ढंग की हो यदि निकास अच्छे ढंग का हो तो यह भारी ज़मीनों में भी अच्छी उगती है मिट्टी का पी एच 6.0 से 6.5 होना चाहिए खारी, नमक वाली या घटिया निकास वाली मिट्टी में इसकी खेती ना करें Pusa Sawani, Pusa A4, Perkins Long Green, Arka Anamika, Kashi Vibhuti, Varsha Uphar, Hisar Unnat, Hisar Naveen, HBH-142 किस्में आप बीज सकते हैं मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें जोताई के बाद मिट्टी को समतल करने के लिए सुहागा फेरें आखिरी जोताई के समय गाय का गला हुआ गोबर 40 क्विंटल प्रति एकड़ में डालें उत्तर में यह वर्षा और बसंत के मौसम में उगाई जाती है खरीफ के मौसम में, इसकी बिजाई जून-जुलाई के महीने और बसंत ऋतु में फरवरी-मार्च के महीने में की जाती है गर्मियों में समय पर बिजाई के लिए कतार से कतार में 45 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 30 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें गर्मियों में अगेती बिजाई के लिए 30 सैं.मी. x 20 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बारिश के मौसम में कतार से कतार में 60 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 20-30 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीज 2.5 सैं.मी. की गहराई में बोयें खरीफ के मौसम में 4-6 किलो बीज और गर्मियों के मौसम में 8-10 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग किए जाते हैं खेत की तैयारी के समय 8-10 टन गाय का गला हुआ गोबर डालें भिंडी की फसल के लिए नाइट्रोजन 40 किलो (90 किलो यूरिया) फासफोरस 16 किलो (एस एस पी 100 किलो) और पोटाश 20 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 35 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा, फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा खेत की तैयारी के समय डालें नाइट्रोजन की बाकी बची मात्रा बिजाई के बाद 30वें और 50 वें दिन टॉप ड्रेसिंग के तौर पर डालें बिजाई से पहले बसालीन 1 लीटर को प्रति एकड़ में डालें और बिजाई के तुरंत बाद लासो 1.6 मि.ली. को प्रति एकड़ में प्रयोग करें यदि मिट्टी में पर्याप्त मात्रा में नमी मौजूद ना हो तो गर्मियों में फसल के अच्छे अंकुरण के लिए बिजाई से पहले सिंचाई जरूर करनी चाहिए बीज अंकुरण के बाद अगली सिंचाई करें उसके बाद गर्मियों में 4-5 दिन के बाद खेतों को सिंचित करें और बारिश के मौसम में 10 से 12 बाद खेतों को सिंचित करें फसल बिजाई के 60-70 दिनों के बाद पककर तैयार हो जाती है छोटे और कच्चे फलों की तुड़ाई करें फलों की तुड़ाई सुबह और शाम के समय करनी चाहिए तुड़ाई में देरीसे भिंडियों में रेशा भर जाता है और इनका कच्चापन और स्वाद भी चला जाता है धन्यवाद
Posted by Ravindra singhChouhan
Rajasthan
10-02-2020 07:33 PM
Punjab
02-11-2020 12:01 PM
इसको मिट्टी की अलग-अलग किस्मे जैसे की रेतली दोमट से भारी मिट्टी में उगाया जा सकता हैं खीरे की फसल के लिए दोमट मिट्टी में, जिसमे जैविक तत्वों की उच्च मात्रा हो और पानी का अच्छा निकास हो, उचित पैदावार देती है खीरे की खेती के लिए मिट्टी का pH 6-7 होना चाहिए Arka shital : इसके फल हल्के हरे रंग के होते हैं इसकी औसतन पैदावार 80 क्.... (Read More)
इसको मिट्टी की अलग-अलग किस्मे जैसे की रेतली दोमट से भारी मिट्टी में उगाया जा सकता हैं खीरे की फसल के लिए दोमट मिट्टी में, जिसमे जैविक तत्वों की उच्च मात्रा हो और पानी का अच्छा निकास हो, उचित पैदावार देती है खीरे की खेती के लिए मिट्टी का pH 6-7 होना चाहिए Arka shital : इसके फल हल्के हरे रंग के होते हैं इसकी औसतन पैदावार 80 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Lucknow Early: इसके फल लंबे और चमकदार होते हैं यह किस्म लखनऊ और उसके नजदीक के क्षेत्रों में प्रसिद्ध है स्थानीय किस्में Nasdar, Sikkim Kakadi आदि Pant sankar khira 1: इसके फल लंबे और बेलनाकार होते हैं इसकी औसतन पैदावार 80 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pant Khira – 1: इसके फल लंबे और बेलनाकार और सफेद धारीदार होते हैं इसके फल 50-60 दिनों के बाद पहली तुड़ाई के लिए तैयार हो जाते हैं इसकी औसतन पैदावार 60 क्विंटल प्रति एकड़ होती है खीरे की खेती के लिए, अच्छी तरह से तैयार और नदीन रहित खेत की जरूरत होती है मिट्टी को अच्छी तरह से भुरभुरा बनाने के लिए, बिजाई से पहले 3-4 बार खेत की जोताई करें रूड़ी की खाद, जैसे गाये के गोबर को मिट्टी में मिलाये, ताकि खेत की उपजाऊ शक्ति बढ़ जाये 30 सैं.मी. चौड़े और आवश्यक लंबाई के बैड तैयार करें दो बैडों के बीच 1.5 से 2 मीटर का फासला रखें उत्तर प्रदेश में, खीरे की खेती के लिए फरवरी से मार्च का महीना उपयुक्त होता है पहाड़ी क्षेत्रों में, बिजाई मार्च से अप्रैल में की जाती है बिजाई के ढंग के आधार पर फासला भी विभिन्न होता है बिजाई के लिए कतार से कतार में 1.5 मीटर और पौधे से पौधे में 30-45 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीज को 2-3 सैं.मी. गहराई पर बोयें एक एकड़ खेत के लिए 0.8-1.2 किलोग्राम बीज की मात्रा काफी हैं खेत की तैयारी के समय, 8-10 टन गाय का गला हुआ गोबर नाइट्रोजन 32 किलो (यूरिया 70 किलो), फासफोरस 24 किलो (सिंगल फास्फेट 150 किलो) और पोटाशियम 24 किलो (म्यूरेट ऑफ़ पोटाश 40 किलो) शुरुआत में खाद के रूप में डालें बिजाई के 32-3सप्ताह पहले गाय का गोबर, पोटाश और फासफोरस की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा डालें नाइट्रोजन की मात्रा को दो भागों में बांटकर पहली बिजाई के 25-30 दिनों के बाद और दूसरी बिजाई के 45-50 दिनों के बाद डालें बारिश के मौसम में सिंचाई की जरूरत नहीं होती है और गर्मी के मौसम में इसको बार-बार सिंचाई की जरूरत होती है 4 से 7 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें तुड़ाई के दो दिन पहले सिंचाई करें, इससे फल ताजे, चमकदार और आकर्षित रहेंगे, धन्यवाद
Posted by Natt Jaspal
Punjab
10-02-2020 07:32 PM
Punjab
02-11-2020 12:16 PM
ਜਸਪਾਲ ਜੀ ਤੁਸੀ ਕਿਸਮਾਂ ਜਿਵੇ PMH10 ,PMH2 ,DKC9108 ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਸਦਾ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ 8 ਕਿਲੋ ਬੀਜ ਪੈਂਦਾ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by nav shah
Punjab
10-02-2020 07:24 PM
Punjab
02-11-2020 03:54 PM
ਤੁਸੀ 250 ਗ੍ਰਾਮ ਗੁੜ ਅਤੇ 1 ਕਿੱਲੋ ਦਲੀਆ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਰਿਨ ਕੇ ਫਿਰ ਉਸ ਵਿੱਚ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਸਰੋਂ ਦਾ ਤੇਲ ਮਿਕਸ ਕਰੋ, ਇਸ ਨੂੰ ਤੁਸੀ ਅੱਧਾ ਅੱਧਾ ਕਰਕੇ 5-7 ਦਿਨ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ ਅਤੇ leptaden tablet 10-10 ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ ਅਤੇ Glactogog ਪਾਊਡਰ 1-1 ਪਾਉਚ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ.
Posted by sudhakar kumar suman
Bihar
10-02-2020 07:22 PM
Punjab
02-11-2020 05:05 PM
suman ji kripya aap iski company ka nam btaye taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by Rohit
Madhya Pradesh
10-02-2020 07:20 PM
Punjab
02-11-2020 12:13 PM
rohit ji aap iske uper NPK 130045@1 kilo ko 150 litre pani ke hisab se spray karen,.dhanywad
Posted by gaurav rana
Haryana
10-02-2020 07:18 PM

Punjab
02-11-2020 12:00 PM
गौरव जी गेंहू काट कर अगर गन्ने की बिजाई की जाती है तो वो बहुत लेट हो जाएगी बसंत ऋतु के मौसम के लिए रोपाई का समय 15 फरवरी से मार्च के अंत तक का समय अच्छा समय होता है COJ 64: यह अगेती पकने वाली किस्म है यह किस्म अच्छा अंकुरण देती है, अच्छी जोताई वाली ज़मीन में बोयी जाती है इससे अच्छी गुणवत्ता के गुड़ का उत्पादन होता है य.... (Read More)
गौरव जी गेंहू काट कर अगर गन्ने की बिजाई की जाती है तो वो बहुत लेट हो जाएगी बसंत ऋतु के मौसम के लिए रोपाई का समय 15 फरवरी से मार्च के अंत तक का समय अच्छा समय होता है COJ 64: यह अगेती पकने वाली किस्म है यह किस्म अच्छा अंकुरण देती है, अच्छी जोताई वाली ज़मीन में बोयी जाती है इससे अच्छी गुणवत्ता के गुड़ का उत्पादन होता है यह लाल जंग के प्रति उच्च संवेदनशील है इसकी औसतन पैदावार 300 क्विंटल प्रति एकड़ होती है COH 56: यह अगेती पकने वाली और उच्च पैदावार वाली किस्म है यह गर्दन तोड़ और लाल जंग के प्रतिरोधी है इसकी औसतन पैदावार 300 क्विंटल प्रति एकड़ होती है COH 92: यह अगेती पकने वाली किस्म है इसकी औसतन पैदावार 250 क्विंटल प्रति एकड़ होती है COH 99: यह मध्यम समय की किस्म है, जिसमें टी एस एस की मात्रा 17.5 प्रतिशत होती है यह किस्म सूखे के मौसम में भी खड़ी रह सकती है इस किस्म की सिफारिश पूरे हरियाणा में खेती करने के लिए की गई है इसकी औसतन पैदावार 280 क्विंटल प्रति एकड़ होती है CO 7717: यह मध्यम समय की किस्म है इसमें टी एस एस की मात्रा 17 प्रतिशत है यह किस्म गर्दन तोड़ के प्रतिरोधी है यह लाल जंग के प्रतिरोधी किस्म है इसमें रस की मात्रा अधिक होती है, इसकी यह विशेषता लंबे समय तक रहती है इसकी औसतन पैदावार 350 क्विंटल प्रति एकड़ होती है CoS 8436: यह मध्यम मौसम की किस्म है यह मोटी मजबूत हरे पीले रंग की छोटी लाल किस्म है यह किस्म गर्दन तोड़ के प्रतिरोधी है और यह लाल जंग को सहने योग्य है यह नियमित सिंचाई के साथ अच्छी उपजाऊ वाली भूमि में बहुत बढ़िया पैदावार देती है इसकी औसतन पैदावार 307 क्विंटल प्रति एकड़ होती है CoH 119 : यह मध्य मौसम की किस्म है इसके लंबे, मोटे हरे रंग के गन्ने होते हैं और विशिष्ट मौसम में होते हैं यह किस्म रतुआ रोग और चोटी बेधक को सहनेयोग्य है यह औसतन मोढ़ी की फसल है इसकी औसतन पैदावार 340 क्विंटल प्रति एकड़ होती है CoJ 238: यह मध्य मौसम की किस्म है इसके लंबे, मोटे हरे रंग के गन्ने होते हैं और विशिष्ट मौसम में होते हैं यह किस्म रतुआ रोग और चोटी बेधक को सहनेयोग्य है यह औसतन मोढ़ी की फसल है इसकी औसतन पैदावार 365 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Posted by Mangat
Punjab
10-02-2020 07:16 PM
Punjab
02-11-2020 03:57 PM
Tuci uss nu Milkout powder 2-2 chamach swere sham, Lactin tablet 1-1 goli swere sham deo ate calpond powder 50gm rojana dena suru kro, iss nal frak paa jawega..
Posted by sukhdeep singh
Punjab
10-02-2020 07:00 PM
Punjab
02-11-2020 08:40 PM
Sukhdeep ji tuci iss nu Amoxi-CV 625 mg tablet 1-1 goli swere sham deni suru kro, iss nal holi holi frak paa jawega.
Posted by सुर्यकांत श्रीरंग कदम
Maharashtra
10-02-2020 06:51 PM
Punjab
05-29-2020 05:21 PM
सुर्यकांत इस के लिए आप APNIKHETI Buy/Sell App पर अपनी फ्री अड़ पोस्ट कर सकते है जिस किसी को भी काम की जरूरत होगी आप को सम्पर्क कर लेगा ,धन्यवाद
Posted by Harpal singh
Punjab
10-02-2020 06:44 PM
Punjab
02-11-2020 11:42 AM
ਇਹ ਪਾਣੀ ਦੀ ਸਤਹਿ ‘ਤੇ ਤੈਰਨ ਵਾਲਾ ਫਰਨ ਹੈ, ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਸ਼ਾਖਾਂ, ਤਣਾ ਅਤੇ ਜੜ੍ਹਾਂ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਇਹ ਪੌਦਾ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਹੇਠਾਂ ਵੱਲ ਨੂੰ ਲਟਕਦਾ ਹੈ ਇਹ ਹਰੇ ਚਾਰੇ ਦੀ ਇੱਕ ਕਿਸਮ ਹੈ, ਜੋ ਪਸ਼ੂਆਂ ਲਈ ਫੀਡ ਦੇ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਵਰਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਕਿਉਂਕਿ ਇਹ ਪਸ਼ੂਆਂ ਦੁਆਰਾ ਅਸਾਨੀ ਨਾਲ ਪਚਾ ਲਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਬਾਕੀ ਹਰੇ ਚਾਰੇ ਵਾਲੀਆਂ ਫਸਲਾਂ ਦੇ ਮੁਕਾਬਲੇ ਅਜ਼ੌਲਾ ਵਿੱਚ ਵਧੇਰੇ ਪੋਸ਼ਕ ਤੱਤ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇ.... (Read More)
ਇਹ ਪਾਣੀ ਦੀ ਸਤਹਿ ‘ਤੇ ਤੈਰਨ ਵਾਲਾ ਫਰਨ ਹੈ, ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਸ਼ਾਖਾਂ, ਤਣਾ ਅਤੇ ਜੜ੍ਹਾਂ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਇਹ ਪੌਦਾ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਹੇਠਾਂ ਵੱਲ ਨੂੰ ਲਟਕਦਾ ਹੈ ਇਹ ਹਰੇ ਚਾਰੇ ਦੀ ਇੱਕ ਕਿਸਮ ਹੈ, ਜੋ ਪਸ਼ੂਆਂ ਲਈ ਫੀਡ ਦੇ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਵਰਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਕਿਉਂਕਿ ਇਹ ਪਸ਼ੂਆਂ ਦੁਆਰਾ ਅਸਾਨੀ ਨਾਲ ਪਚਾ ਲਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਬਾਕੀ ਹਰੇ ਚਾਰੇ ਵਾਲੀਆਂ ਫਸਲਾਂ ਦੇ ਮੁਕਾਬਲੇ ਅਜ਼ੌਲਾ ਵਿੱਚ ਵਧੇਰੇ ਪੋਸ਼ਕ ਤੱਤ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਝੋਨੇ ਦੀ ਫਸਲ ਵਿੱਚ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਨੂੰ ਠੀਕ ਬਣਾਈ ਰੱਖਣ ਲਈ ਵੀ ਇਸਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਲਈ ਅਜ਼ੌਲਾ ਨੂੰ ਝੋਨੇ ਦੀ ਫਸਲ ਵਿੱਚ ਬਾਇਓ-ਖਾਦ ਜਾਂ ਹਰੀ ਖਾਦ ਦੇ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਵੀ ਵਰਤਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਇਹ ਪ੍ਰੋਟੀਨ, ਵਿਟਾਮਿਨ, ਅਮੀਨੋ ਐਸਿਡ ਅਤੇ ਖਣਿਜਾਂ(ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਕੈਲਸ਼ੀਅਮ, ਪੋਟਾਸ਼ੀਅਮ, ਫਾਸਫੋਰਸ ਅਤੇ ਮੈਗਨੀਸ਼ੀਅਮ) ਦਾ ਚੰਗਾ ਸ੍ਰੋਤ ਹੈ ਇਹ ਫੀਡ ਦੇ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਬੱਕਰੀਆਂ, ਸੂਰਾਂ, ਭੇਡਾਂ ਅਤੇ ਖਰਗੋਸ਼ਾਂ ਨੂੰ ਵੀ ਦਿੱਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਅਜ਼ੌਲਾ ਦੀ ਖੇਤੀ: • ਅਜ਼ੌਲਾ ਦੀ ਖੇਤੀ ਲਈ ਪਾਣੀ ਇਕੱਠਾ ਕਰਨ ਲਈ ਜਗ੍ਹਾ ਦੀ ਲੋੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ • ਪਾਣੀ ਇਕੱਠਾ ਕਰਨ ਲਈ 2 ਮੀਟਰ X 1 ਮੀਟਰ X 20 ਸੈ.ਮੀ. (ਲੰਬਾਈ X ਚੌੜਾਈ X ਉੱਚਾਈ) ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਟੋਏ ਪੁੱਟੋ • ਪਾਣੀ ਰਿਸਣ, ਮਿੱਟੀ ਦੇ ਤਾਪਮਾਨ ਅਤੇ ਆਲੇ-ਦੁਆਲੇ ਤੋਂ ਪੌਦਿਆਂ ਦੀਆਂ ਜੜ੍ਹਾਂ ਦੇ ਵਿਕਾਸ ਤੋਂ ਬਚਾਅ ਲਈ ਟੋਇਆਂ ਨੂੰ ਪਲਾਸਟਿਕ ਸ਼ੀਟ ਨਾਲ ਢੱਕ ਦਿਓ • ਪਲਾਸਟਿਕ ਸ਼ੀਟ ‘ਤੇ ਬਰਾਬਰ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ 10-15 ਕਿਲੋ ਛਾਣੀ ਹੋਈ ਮਿੱਟੀ (ਬਿਨਾਂ ਕਿਸੇ ਮਿਲਾਵਟ ਦੇ) ਪਾਓ • ਗਾਰਾ ਤਿਆਰ ਕਰਨ ਲਈ ਗੋਬਰ 5 ਕਿਲੋ, ਐਜ਼ੋਫੋਸ 40 ਗ੍ਰਾਮ ਅਤੇ ਐਜ਼ੋਫਰਟ ਜਾਂ ਐੱਸ.ਐੱਸ.ਪੀ. 20 ਗ੍ਰਾਮ ਨੂੰ 10 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾਓ ਇਸ ਨੂੰ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਮਿਲਾਉਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਇਸ ਨੂੰ ਛਾਣ ਲਓ ਅਤੇ ਫਿਰ 8 ਸੈ.ਮੀ. ਤੱਕ ਉੱਚਾ ਪੱਧਰ ਚੁੱਕਣ ਲਈ ਹੋਰ ਪਾਣੀ ਮਿਲਾਓ • ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਰੋਗ ਅਤੇ ਕੀਟਾਂ ਤੋਂ ਮੁਕਤ ਅਜ਼ੌਲਾ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰੋ • ਟੋਏ ਵਿੱਚ ਅਜ਼ੌਲਾ 7-10 ਦਿਨਾਂ ਅੰਦਰ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਲਗਭਗ 1-1.5 ਕਿਲੋ ਪੈਦਾਵਾਰ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ • ਅਜ਼ੌਲਾ ਦੀ ਤੇਜ਼ੀ ਨਾਲ ਪੈਦਾਵਾਰ ਲਈ 2 ਕਿਲੋ ਗੋਬਰ, 25 ਗ੍ਰਾਮ ਐਜ਼ੋਫੋਸ ਅਤੇ 20 ਗ੍ਰਾਮ ਐਜ਼ੋਫਰਟ ਨੂੰ 2 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਤਿਆਰ ਕੀਤਾ ਗਾਰਾ 7 ਦਿਨ ਦੇ ਅੰਤਰਾਲ ਪਾਉਂਦੇ ਰਹੋ
Posted by jaspreet singh
Punjab
10-02-2020 06:38 PM
Punjab
02-11-2020 11:52 AM
jaspreet ji tuc fasl beejan to pehlan 1 quintal gypsum di varto karo.Punjab no.13,Punjab Padmini,Punjab 7,Punjab 8,Punjab Suhavani vargiyan kisman di bijai kar sakde ho.dhanwad
Posted by prince
Uttar Pradesh
10-02-2020 06:32 PM
Punjab
02-11-2020 11:31 AM
Prince ji aap pumpkin ki kisme jaise CO1, ArkaSuryamukhi, PusaViswesh, TCR 011, Ambilli aur ArkaChandan ki bijai kar sakte hai.dhanywad
Posted by Gurdeep Grewal
Punjab
10-02-2020 06:31 PM

Punjab
02-11-2020 04:04 PM
tuci iss nu Keeper plus powder 30gm rojana deo ate Pg care tablet rojana 1 goli deo ate 21 din tak dinde rho fir agli varr heat vich auun te iss nu tika bhrwa ke ehh powder ate golia 20 din hor dinde rho, ehna nal infection khtam hunda hai ate pashu de gaban rehnn vich help mildi hai.
Posted by Ashish Rana
Punjab
10-02-2020 06:27 PM
Punjab
05-06-2020 01:00 PM
Rana ji isde lai koi fix market nhi hai ehh tuhanu khud apni nazdiki market vich shop walia nal sampark krke sale krne penge..
Posted by BABU LAL SAU
Rajasthan
10-02-2020 06:25 PM
Punjab
02-11-2020 10:57 AM
ककड़ी, कुकुरबिटेशिअस परिवार से संबंधित है और इसका बानस्पतिक नाम ‘‘कुकुमिस मेलो’’ है इसे मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जा सकता है जैसे रेतली दोमट से भारी मिट्टी जो अच्छे निकास वाली हो इसकी खेती के लिए मिट्टी की पी एच 5.8-7.5 अच्छी होती है प्रसिद्ध किस्में :-Arka Sheetal,Lucknow Ageti ककड़ी की खेती के लिए, अच्छी तरह से तैयार ज़मीन क.... (Read More)
ककड़ी, कुकुरबिटेशिअस परिवार से संबंधित है और इसका बानस्पतिक नाम ‘‘कुकुमिस मेलो’’ है इसे मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जा सकता है जैसे रेतली दोमट से भारी मिट्टी जो अच्छे निकास वाली हो इसकी खेती के लिए मिट्टी की पी एच 5.8-7.5 अच्छी होती है प्रसिद्ध किस्में :-Arka Sheetal,Lucknow Ageti ककड़ी की खेती के लिए, अच्छी तरह से तैयार ज़मीन की आवश्यकता होती है मिट्टी को भुरभुरा करने के लिए, हैरो से 2-3 बार जोताई आवश्यक है बीजों की बिजाई के लिए फरवरी-मार्च का महीना अनुकूल होता है पौधों में 1.5 मीटर और कतारों में 60 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें पौधे के अच्छे आधार के लिए दो बीजों को एक जगह पर बोयें बीजों को 2.5 सेंटीमीटर की गहराई में बोयें बीजों को बैड या मेंड़ पर सीधे बोया जाता है एक एकड़ खेत में 1 किलो बीजों का प्रयोग करें खेत की तैयारी के समय, गाय का गला हुआ गोबर 80-90 क्विंटल प्रति एकड़ में डालें ककड़ी की पूरी फसल को नाइट्रोजन 33-40 किलो (यूरिया 74-90 किलो), फासफोरस 15 किलो (एस एस पी 90 किलो), पोटाश 15 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 25 किलो) प्रति एकड़ में डालें बिजाई के समय नाइट्रोजन की 1/3 मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा डालें बाकी बची नाइट्रोजन वृद्धि के शुरूआती समय में डालें बिजाई के बाद तुरंत सिंचाई आवश्यक है गर्मियों में 4-5 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है और बारिश के मौसम में सिंचाई मौसम पर आधारित होती है नदीनों की रोकथाम के लिए, बेलों के फैलने से पहले इनकी ऊपरी परत की दो हल्की गोडाई करें इसके फल 60-70 दिनों में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाते हैं फल के पूरी तरह विकसित होने और नर्म होने पर तुड़ाई की जाती है तुड़ाई मुख्य रूप से फूल निकलने के मौसम में 3-4 दिनों के अंतराल पर की जाती है धन्यवाद
Posted by BABU LAL SAU
Rajasthan
10-02-2020 06:24 PM
Punjab
02-11-2020 10:57 AM
ककड़ी, कुकुरबिटेशिअस परिवार से संबंधित है और इसका बानस्पतिक नाम ‘‘कुकुमिस मेलो’’ है इसे मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जा सकता है जैसे रेतली दोमट से भारी मिट्टी जो अच्छे निकास वाली हो इसकी खेती के लिए मिट्टी की पी एच 5.8-7.5 अच्छी होती है प्रसिद्ध किस्में :-Arka Sheetal,Lucknow Ageti ककड़ी की खेती के लिए, अच्छी तरह से तैयार ज़मीन क.... (Read More)
ककड़ी, कुकुरबिटेशिअस परिवार से संबंधित है और इसका बानस्पतिक नाम ‘‘कुकुमिस मेलो’’ है इसे मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जा सकता है जैसे रेतली दोमट से भारी मिट्टी जो अच्छे निकास वाली हो इसकी खेती के लिए मिट्टी की पी एच 5.8-7.5 अच्छी होती है प्रसिद्ध किस्में :-Arka Sheetal,Lucknow Ageti ककड़ी की खेती के लिए, अच्छी तरह से तैयार ज़मीन की आवश्यकता होती है मिट्टी को भुरभुरा करने के लिए, हैरो से 2-3 बार जोताई आवश्यक है बीजों की बिजाई के लिए फरवरी-मार्च का महीना अनुकूल होता है पौधों में 1.5 मीटर और कतारों में 60 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें पौधे के अच्छे आधार के लिए दो बीजों को एक जगह पर बोयें बीजों को 2.5 सेंटीमीटर की गहराई में बोयें बीजों को बैड या मेंड़ पर सीधे बोया जाता है एक एकड़ खेत में 1 किलो बीजों का प्रयोग करें खेत की तैयारी के समय, गाय का गला हुआ गोबर 80-90 क्विंटल प्रति एकड़ में डालें ककड़ी की पूरी फसल को नाइट्रोजन 33-40 किलो (यूरिया 74-90 किलो), फासफोरस 15 किलो (एस एस पी 90 किलो), पोटाश 15 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 25 किलो) प्रति एकड़ में डालें बिजाई के समय नाइट्रोजन की 1/3 मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा डालें बाकी बची नाइट्रोजन वृद्धि के शुरूआती समय में डालें बिजाई के बाद तुरंत सिंचाई आवश्यक है गर्मियों में 4-5 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है और बारिश के मौसम में सिंचाई मौसम पर आधारित होती है नदीनों की रोकथाम के लिए, बेलों के फैलने से पहले इनकी ऊपरी परत की दो हल्की गोडाई करें इसके फल 60-70 दिनों में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाते हैं फल के पूरी तरह विकसित होने और नर्म होने पर तुड़ाई की जाती है तुड़ाई मुख्य रूप से फूल निकलने के मौसम में 3-4 दिनों के अंतराल पर की जाती है धन्यवाद
Posted by Kuldeep Malik
Haryana
10-02-2020 06:19 PM
Maharashtra
02-11-2020 09:26 AM
Kuldeep Malik ji, gehun bahut se kaarno ki vajah se pila pad jata hai, kripya ap gehun ki photo bhejein taki apko dekh kar iska ucchit samadaan bataya ja sake, dhanywad