
Posted by RAMSWAROOP
Rajasthan
14-02-2020 11:32 AM
रामस्वरूप जी, किप्या आप बताये कि आपकी फसल में किस कीट का हमला हुआ है, ताकि आपको उसके हिसाब से इसके बारे में जानकारी दी जा सके, धन्यवाद

Posted by satwant singh
Punjab
14-02-2020 11:13 AM
shrimaan g knak vich magnease @1 kg per acre and zinc @120 gm per acre da spray kr skde ho g..

Posted by arun
Madhya Pradesh
14-02-2020 11:06 AM
shrimaan g onion mein fungicide M-45 @300 gm per acre ka spray kr skte ho g..

Posted by Diganta Dehingia
Assam
14-02-2020 11:06 AM
Yadi aap desi murgi ki batt kr rehe hai too woh kush sme egg dene ke badd fir kush smee ke frak se egg deti hai, iske ilawa aap murgio ko achi khurak den aur achi feed dalen jisse uski achi growth hoti rehegi aur egg production achi hoti hai.
Posted by Bhanwar Koli Sïyáñâ
Rajasthan
14-02-2020 11:05 AM
इसे मिट्टी की अलग अलग किस्मों में उगाया जा सकता है लीची की पैदावार के लिए गहरी, उपजाऊ, अच्छे निकास वाली और दरमियानी रचना वाली मिट्टी अनुकूल होती है मिट्टी की पी एच 7.5 से 8 के बीच में होनी चाहिए ज्यादा पी एच और नमक वाली मिट्टी लीची की फसल के लिए अच्छी नहीं होती Calcuttia: इस किस्म के फल बड़े और आकर्षिक होते हैं इसकी तुड़.... (Read More)
इसे मिट्टी की अलग अलग किस्मों में उगाया जा सकता है लीची की पैदावार के लिए गहरी, उपजाऊ, अच्छे निकास वाली और दरमियानी रचना वाली मिट्टी अनुकूल होती है मिट्टी की पी एच 7.5 से 8 के बीच में होनी चाहिए ज्यादा पी एच और नमक वाली मिट्टी लीची की फसल के लिए अच्छी नहीं होती Calcuttia: इस किस्म के फल बड़े और आकर्षिक होते हैं इसकी तुड़ाई जून के तीसरे सप्ताह के दौरान की जा सकती है इस किस्म पर फलों के घने गुच्छे लगते हैं इसकी गुणवत्ता भी अच्छी होती है इसके फल रसभरे और स्वादी होते हैं
Dehradun: यह जल्दी तैयार होने और लगातार फल देने वाली किस्म है इसके फल जून के दूसरे सप्ताह में तोड़े जा सकते हैं इसके फल आकर्षक रंग वाले होते हैं पर यह बड़ी जल्दी दरारें छोड़ जाते हैं इसके फल मीठे, नर्म, रसभरे और बहुत स्वादिष्ट होते हैं
Seedless Late: इसका फल गुद्दे से भरपूर होता है इनका रंग गहरा लाल और स्वाद मीठा और रस भरा होता है इसकी फसल जून के तीसरे सप्ताह में तैयार हो जाती है, खेत की दो बार तिरछी जोताई करें और फिर समतल करें खेत को इस तरह तैयार करें कि उसमें पानी ना खड़ा रहे इसकी बिजाई मॉनसून के तुरंत बाद अगस्त सितंबर के महीने में की जाती है कई बार पंजाब में इसकी बिजाई नवंबर महीने तक की जाती है इसकी बिजाई के लिए दो साल पुराने पौधे चुने जाते हैं बिजाई के लिए वर्गाकार ढंग के लिए पंक्ति से पंक्ति का फासला 8-10 मीटर और पौधे से पौधे का फासला 8-10 मीटर रखा जाता है
कुछ दिन पहले 1 मीटर x 1 मीटर x 1 मीटर के गड्ढे धूप में खोदें इसके बाद इन गड्ढों को 20-25 किलोग्राम गली सड़ी रूड़ी की खाद के साथ भर दें 300 ग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश और 2 किलोग्राम बॉन मील डालें इन गड्ढों को भरने के बाद ऊपर से पानी का छिड़काव कर दें पौधे गड्ढों के बीच में लगाएं इसकी बिजाई सीधे बीज लगा कर और पनीरी लगा कर की जाती है बड़े स्तर पर लीची उगाने के लिए एयर लेयरिंग तरीका अपनाया जाता है बीज बनाना एक आसान तरीका नहीं है इस क्रिया के लिए पौधा लंबा समय लेता है एयर लेयरिंग के लिए पौधे की टहनियां कीड़े और बीमारियां रहित होनी चाहिए जिनका व्यास 2-3 सैं.मी. और लंबाई 30-60 सैं.मी. हो चाकू की मदद से टहनियों के ऊपर 4 सैं.मी. चौड़ा गोल आकार का कट लगाएं उस कट के ऊपर दूसरी टहनी लगा कर लिफाफे से बांध दें चार सप्ताह के बाद जड़ें बांधनी शुरू हो जाती हैं जब जड़ें पूरी तरह बन जाएं तो उसे मुख्य पौधे से अलग कर दें इसके तुरंत बाद पौधे को मिट्टी में लगा दें और पानी देना शुरू कर दें एयर लेयरिंग मध्य जुलाई से सितंबर महीने में की जाती है शुरूआती समय में पौधे को अच्छा आकार देने के लिए कटाई करनी जरूरी होती है लीची के पौधों के लिए छंटाई की ज्यादा जरूरत नहीं होती फलों की कटाई के बाद नई टहनियां लाने के लिए हल्की छंटाई करें
यह धीमी गति से उगने वाली फसल है जो कि 7-10 साल का समय लेती है शुरूआती 3-4 साल तक अंतर फसलें उगाई जा सकती हैं जिससे आमदन बढ़ती है और मिट्टी की उपजाऊ शक्ति में भी वृद्धि होती है इसके इलावा नदीनों को भी कंटरोल किया जा सकता है तेजी से उगने वाले पौधे जैसे कि आड़ू, आलू बुखारा, किन्नू अंतर फसलों के रूप में उगाए जा सकते हैं इसके इलावा दालों और सब्जियों को भी अंतर फसलों के तौर पर उगाया जा सकता है जब मुख्य फसल का बाग पूरी तरह बड़े स्तर पर विकास कर ले तो अंतर फसलों को उखाड़ दें लीची का परागण कीड़ों, पतंगों और शहद की मक्खियों द्वारा किया जाता है 20-25 शहद की मक्खियों के डिब्बे परागण करने के लिए प्रति हैक्टेयर रखे जाते हैं नए पौधों को गर्म और ठंडी हवा से बचाने के लिए लीची के पौधों के आस-पास 4-5 साल के हवा रोधक वृक्ष लगाएं जंतर की फसल लगाने से फरवरी के महीने में इससे बीज भी प्राप्त किया जा सकता है लीची के पौधों को तेज हवाओं से बचाने के लिए आस-पास आम और जामुन जैसे लंबे वृ़क्ष लगाएं 1 से 3 साल की फसल के लिए 10-20 किलो गली सड़ी रूड़ी खाद के साथ यूरिया 150-500 ग्राम, सिंगल सुपर फासफेट 200-600 ग्राम और म्यूरेट ऑफ पोटाश 60-150 ग्राम प्रति वृक्ष लगाएं 4-6 साल की फसल के लिए गली सड़ी रूड़ी की खाद की मात्रा बढ़ा कर 25-40 किलोग्राम, यूरिया 500-1000 ग्राम, सिंगल सुपर फासफेट 750-1250 ग्राम और म्यूरेट ऑफ पोटाश 200-300 ग्राम प्रति वृक्ष लगाएं 7-10 साल की फसल के लिए गली सड़ी रूड़ी की खाद की मात्रा बढ़ा कर 40-50 किलोग्राम, यूरिया 1000-1500 ग्राम, सिंगल सुपर फासफेट 1000 ग्राम और म्यूरेट ऑफ पोटाश 300-500 ग्राम प्रति वृक्ष लगाएं जब फसल 10 साल की हो जाये तो गली सड़ी रूड़ी की खाद की मात्रा बढ़ाकर 60 किलोग्राम, यूरिया 1600 ग्राम, सिंगल सुपर फासफेट 2250 ग्राम और म्यूरेट ऑफ पोटाश 600 ग्राम प्रति वृक्ष लगाएं विकास के हर पड़ाव पर सिंचाई करें विकास के शुरूआती समय में पानी लगाना बहुत ज़रूरी होता है गर्मियों की ऋतु में नए पौधों को 1 सप्ताह में 2 बार और पुराने पौधों को सप्ताह में 1 बार पानी दें खादें डालने के बाद एक सिंचाई ज़रूर करें फसल को कोहरे से बचाने के लिए नवंबर के अंत और दिसंबर के पहले सप्ताह में पानी दें फल बनने के समय सिंचाई बहुत ज़रूरी होती है इस पड़ाव पर सप्ताह में 2 बार पानी दें इस तरह करने से फल में दरारें नहीं आती और फल का विकास अच्छा होता है फल का हरे रंग से गुलाबी रंग का होना और फल की सतह का समतल होना, फल पकने की निशानियां हैं फल को गुच्छों में तोड़ा जाता है फल तोड़ने के समय इसके साथ कुछ टहनियां और पत्ते भी तोड़ने चाहिए इसे ज्यादा लंबे समय तक स्टोर नहीं किया जा सकता घरेलू बाज़ार में बेचने के लिए इसकी तुड़ाई पूरी तरह से पकने के बाद करनी चाहिए जब कि दूर के क्षेत्रों में भेजने के लिए इसकी तुड़ाई फल के गुलाबी होने के समय करनी चाहिए तुड़ाई के बाद फलों को इनके रंग और आकार के अनुसार अलग अलग करना चहिए प्रभावित और दरार वाले फलों को अलग कर देना चाहिए लीची के हरे पत्तों को बिछाकर टोकरियों में इनकी पैकिंग करनी चाहिए लीची के फलों को 1.6-1.7 डिगरी सैल्सियस तापमान और 85-90 प्रतिशत नमी में स्टोर करना चाहिए फलों को इस तापमान पर 8-12 सप्ताह के लिए स्टोर किया जा सकता है

Posted by Harsh Deep Singh
Punjab
14-02-2020 11:02 AM
hanji tuci uss nu dono ekathe v de skde ho, jiwe tuhada pashu asani nal khanda hai tuci uss hisab nal de skde ho.
Posted by Amarjit Singh
Punjab
14-02-2020 10:45 AM
Amarjit ji isde layi tuc Apni kheti Buy/Sell app check karo othe kisana valo ads upload kitiyan jandiyan han ate tuc ohna kisana nal direct sampark kar sakde ho.dhanwad

Posted by Jatinder Singh
Punjab
14-02-2020 10:45 AM
ਜਤਿੰਦਰ ਜੀ ਪੀਲੀ ਕੁੰਗੀ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ tilt @200 ml ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by Sanjay mukati
Madhya Pradesh
14-02-2020 10:40 AM
sanjay ji aap fungus ki roktham ke liye copper oxychloride @500 gram ko prati acre ke hisab se spray karen,dhanywad

Posted by Ashok Kumar Nagar
Rajasthan
14-02-2020 10:37 AM
अशोक जी कृपया सवाल विस्तार से पूछे ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by दरबार कुम्हारी
Madhya Pradesh
14-02-2020 10:29 AM
आप इसमेें मुर्गी पालन कर सकते है इसे शुरू करने से पहले आप इस काम की ट्रेनिंग जरूर लें जिससे आपको इस काम की पूरी जानकारी मिलेगी सबसे पहले आपके लिए यह जानना जरूरी है कि मुर्गी पालन दो तरह का होता है कि आप अंडों का व्यवसाय करना चाहते हैं या मीट का यदि आप अंडों का धंधा करना चाहते हैं तो आपको लेयर मुर्गियां पालनी प.... (Read More)
आप इसमेें मुर्गी पालन कर सकते है इसे शुरू करने से पहले आप इस काम की ट्रेनिंग जरूर लें जिससे आपको इस काम की पूरी जानकारी मिलेगी सबसे पहले आपके लिए यह जानना जरूरी है कि मुर्गी पालन दो तरह का होता है कि आप अंडों का व्यवसाय करना चाहते हैं या मीट का यदि आप अंडों का धंधा करना चाहते हैं तो आपको लेयर मुर्गियां पालनी पड़ेंगी और यदि आप मीट का धंधा करना चाहते हैं तो आपको ब्रॉयलर मुर्गियां पालनी पड़ेंगी यदि आप ब्रायलर मुर्गी पालन करना चाहते हैं तो कम से कम 10 हजार मुर्गियों का धंधा शुरू करना चाहते हैं तो आपको 4 से 5 लाख का इतज़ाम करना पड़ेगा, ये आप अपने बजट के हिसाब से कम पंक्षियों से भी शुरू कर सकते हैं बाकि आप इस काम को ट्रेनिंग लेकर शुरू करें जिसमें आपको इस काम के बारे में पूरी जानकारी दी जाएगी ट्रेनिंग लेने के लिए आप अपने नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें आप वहां जाकर अपना ट्रेनिंग का फार्म भर आएं जब भी ट्रेनिंग होगी तो वो आपको फोन करके उसके बारे में बता देंगे, उस ट्रेनिंग में आपको मुर्गी पालन में सही तरीके से काम करने के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त हो जाएग
Posted by kawaljeet singh
Punjab
14-02-2020 10:29 AM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਪਟਿਆਲਾ(ਰੌਣੀ) ਵਿੱਚ ਕਿਸਾਨ ਮੇਲਾ 17 ਮਾਰਚ ਨੂੰ ਲਗਣਾ ਹੈ ਜੀ

Posted by rajesh
Rajasthan
14-02-2020 10:28 AM
shrimaan g kirpa krke apna swaal visthaar se pucho ta jo aapko proper jaankari mil ske g..

Posted by bikramjit singh
Punjab
14-02-2020 10:21 AM
Bikarmjit ji tuci ek dum usdi feed change na kro kyuki pashu da sarir nawi feed lai tyar nhi hunda hai ate ek dum change krnn nal ehh smasia aa jandi hai, tuci uss nu Brotone liquid 50ml rojana ate RSYC bolus 1-1 goli swere sham deo, baki feed tuci suruat vich thodi thodi deo ate purani feed vich mix krke deo fir holi holi jiwe ohh vdia trike nal hajam krrn lgg jawe fir tuci holi holi purani bnnd krr skde ho ate nawi feed deni suru kr skde ho iss nal pashu feed vdia hajam krda hai ate dudh v vdia dinda hai.
Posted by Rahul Dedha
Uttar Pradesh
14-02-2020 10:15 AM
राहुल जी इसका कोई इलाज नहीं है इसके लिए आप उसे किसी अच्छी नस्ल के बुल से क्रॉस करवायें जिससे आने वाले बच्चे अच्छा दूध दे सके
Posted by jainrajsingh
Madhya Pradesh
14-02-2020 10:11 AM
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकत हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है एक बकरी के लिए लगभग 12—15 वर्ग फीट जगह छती हुई और 25—30 वर्ग फीट जगह खुली चाहिए .... (Read More)
बकरी पालन बहुत ही लाभकारी काम है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकत हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं ये हर प्रकार के मौसम में पाली जा सकती हैं बकरियां 12-14 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है एक बकरी के लिए लगभग 12—15 वर्ग फीट जगह छती हुई और 25—30 वर्ग फीट जगह खुली चाहिए बकरी का गर्भ समय 150 दिन का होता है और साल में 1-5 बच्चे देती है साल में दो बच्चे देना आम बात है बकरियां 8-10 वर्ष तक बच्चे देती हैं और अपन गिनती को तेजी से बढ़ा लेती हैं आप बारबरी, ब्लैक बंगाल, जैसी नसल पाल सकते हैं यदि आप बीटल नस्ल रखना चाहते है तो यह लगभग 20—25 हज़ार तक अच्छी ग्रोथ वाली बकरी मिल जाएगी फिर आप अपने बजट के हिसाब से इस काम को कर सकते है.
Posted by Lovepreet singh
Punjab
14-02-2020 10:02 AM
Lovepreet ji kirpa krke isdi photo puri bhejo jiss vich iss vare ptaa lgg skee ate ehh kithe smasia aa rehi hai uss vare v daso tan jo tuhanu iss vare sahi jankari diti ja skee tuci 3-4 photos upload kro..

Posted by रोशन नरगाये
Madhya Pradesh
14-02-2020 10:01 AM
रोशन जी इस काम में तभी फायदा है जब आप इस काम को पूरी ट्रेनिंग और सही जानकारी के साथ शुरू करते है क्योंकि किसी भी काम को सही तरीके से करने के लिए उसकी जानकारी होना बहुत जरूरी है इसके लिए ट्रेनिंग बहुत जरूरी है यह ट्रेनिंग FFDA(fish farmer development aggency) हर जिले में बनी है जहां हमारा खेतीबाड़ी विभाग है वहां इसके अफसर बैठते हैं व.... (Read More)
रोशन जी इस काम में तभी फायदा है जब आप इस काम को पूरी ट्रेनिंग और सही जानकारी के साथ शुरू करते है क्योंकि किसी भी काम को सही तरीके से करने के लिए उसकी जानकारी होना बहुत जरूरी है इसके लिए ट्रेनिंग बहुत जरूरी है यह ट्रेनिंग FFDA(fish farmer development aggency) हर जिले में बनी है जहां हमारा खेतीबाड़ी विभाग है वहां इसके अफसर बैठते हैं वहां जाकर एप्लीकेशन भरवायें वहां आपको 5 दिन की ट्रेनिंग दी जायेगी ट्रेनिंग के लिए दसवीं पास होना ज़रूरी है इस ट्रेनिंग में आपको लोन और सब्सिड़ी के बारे में सारी जानकारी प्राप्त हो जाएगी इसकी पुंग छोड़ने के लिए अप्रैल से अक्तूबर का समय बढ़िया होता है, बाकि यदि अपने शुरू करना है तो यूनिवर्सिटी की तरफ से एक एकड़ में शुरू कर सकते हैं. एक एकड़ में 5000 पूंग डाल सकते हैं यह 2 से 3 इंच का होता है यदि 5000 डालना है तो 3000 रोहू, 1000 कतला, 500 कॉमन कॉर्प और 500 मरीगल नस्ल डाली जाए यह पूंग आप मछली पालन विभाग से खरीद सकते हैं यह एक इंच का बच्चा 10 पैसा प्रति बच्चा मिलेगा यदि बढ़िया खुराक डाली जाए तो 8 महीनों में यह लगभग 800—900 ग्राम का हो जाता है बाकी मछली पालन के लिए नहरी पानी बढ़िया होता है और आप गांव का छप्पड़ ठेके से लेकर भी यह काम शुरू कर सकते हैं तालाब में मछली के बीज डालने से पहले इस बात की जांच कर लेनी चाहिए कि उस तालाब में काफी मात्रा में मछली की कुदरती खुराक उपलब्ध है.
Posted by Harpreet singh
Punjab
14-02-2020 09:37 AM
Harpreet singh ji Bakri da milk tus cow de milk rate de brabar sale kar sakde. social media, doctor to te apni nazdiki mandi vich sidhe tour te mandikaran karna pena hai ji. holi holi jado link bananan lag jaan ta sale hon lag janda hai ji.
Posted by Agam Thakur
Uttar Pradesh
14-02-2020 09:32 AM
पुदीना मैंथा के नाम से जानी जाने वाली एक क्रियाशील जड़ी बूटी है पुदीने को मिट्टी की कई किस्मों जैसे दरमियाने से गहरी उपजाऊ मिट्टी, जिसमें पानी को सोखने की क्षमता ज्यादा हो, में उगाया जाता है इसको जल-जमाव वाली मिट्टी में भी उगाया जा सकता है उच्च नमी वाली मिट्टी में यह अच्छे परिणाम देती है इस फसल के लिए मिट्टी .... (Read More)
पुदीना मैंथा के नाम से जानी जाने वाली एक क्रियाशील जड़ी बूटी है पुदीने को मिट्टी की कई किस्मों जैसे दरमियाने से गहरी उपजाऊ मिट्टी, जिसमें पानी को सोखने की क्षमता ज्यादा हो, में उगाया जाता है इसको जल-जमाव वाली मिट्टी में भी उगाया जा सकता है उच्च नमी वाली मिट्टी में यह अच्छे परिणाम देती है इस फसल के लिए मिट्टी का pH 6-7.5 होना चाहिए प्रसिद्ध किस्में:- MAS-1: यह छोटे कद की किस्म है जिसकी ऊंचाई 30-45 सैं.मी. होती है यह बीमारीयों की रोधक और जल्दी पकने वाली किस्म है इसमें मैन्थोल की मात्रा 70-80% होती है इसकी औसतन पैदावार 80 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 50-60 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है Hybrid-77: इसकी ऊंचाई 50-60 सैं.मी. होती है यह किस्म पत्तों के धब्बा रोग और कुंगी के रोधक होती है, और यह जल्दी पकने वाली किस्म है इसमें मैन्थोल की मात्रा 80-85% होती है इसकी औसतन पैदावार 80 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 50-60 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है यह रेतली दोमट मिट्टी में बढ़िया पैदावार देती है औरऐसी शुष्क मौसम में की आवश्यकता होती है Shivalik: यह चीन की खेती से चुनी गई किस्म है यह किस्म उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्रों और उत्तरांचल में अच्छी वृद्धि करती है इसमें मैन्थोल की मात्रा 65-70% होती है इसकी औसतन पैदावार 120 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 72 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है यह किस्म फंगस रोगों से जल्दी प्रभावित होती है EC-41911: यह किस्म रूसी जर्मप्लाज्म से ली गई है यह किस्म पानी की रोधक और आकार में सीधी होती है इसमें मैन्थोल की मात्रा 70%पायी जाती है इसकी औसतन पैदावार 120 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 72 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है इस किस्म से तैयार तेल का प्रयोग विभिन्न व्यंजनों में स्वाद के लिए किया जाता है Gomti: यह किस्म रंग में हल्के लाल रंग की होती है इसकी पैदावार बाकी किस्मों की पैदावार से कम होती है इसमें मैन्थोल की मात्रा 78-80% होती है Himalaya: इसके पत्तों का आकार बाकी किस्मों से बड़ा होता है यह किस्म कुंगी, झुलस, सफेद धब्बे और पत्तों पर धब्बे रोग की रोधक है इसमें मैन्थोल की मात्रा 78-80% होती है इसकी औसतन पैदावार 160 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 80-100 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है Kosi: यह किस्म 90 दिनों में पक जाती है यह किस्म कुंगी, झुलस, सफेद धब्बे और पत्तों के धब्बे रोग की प्रतिरोधक है इसमें मैन्थोल की मात्रा 75-80 प्रतिशत होती है और तेल की पैदावार 80-100 किलोग्राम प्रति एकड़ होती है Saksham: यह किस्म सी वी हिमालय की तरफ से टिशू कल्चर द्वारा तैयार की गई है इसमें मैन्थोल की मात्रा 80% होती है और तेल की पैदावार 90-100 किलोग्राम प्राप्त होती है पुदीने की बिजाई के लिए सुविधाजनक आकार के बैड तैयार करें खेत की तैयारी के समय खेत की अच्छी तरह जोताई करें जैविक खाद जैसे रूड़ी की खाद 100-120 क्विंटल प्रति एकड़ रूड़ी की खाद डालें रूड़ी की खाद के बाद हरी खाद डालें इसकी बिजाई के लिए दिसंबर-जनवरी का समय अनुकूल होता है पौधे के भागों की बिजाई 40 सैं.मी. के फासले पर और पंक्तियों के बीच का फासला 60 सैं.मी होना चाहिए बीज को 2-3 सैं.मी. की गहराई में बोयें पौधे के जड़ वाले भाग को मुख्य खेत में बोया जाता है खेत की तैयारी के समय रूड़ी की खाद 80-120 क्विंटल प्रति एकड़ में डालें और अच्छी तरह मिलायें नाइट्रोजन 58 किलो (यूरिया 130 किलो), फासफोरस 32-40 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 80-100 किलो), पोटाशियम 20 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 33 किलो) प्रति एकड़ में डालें गर्मियों में मॉनसून से पहले जलवायु और मिट्टी के आधार पर 6-9 सिंचाइयां जरूर की जानी चाहिए मॉनसून के बाद 3 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है पहली सिंचाई सितंबर महीने में, दूसरी अक्तूबर में और तीसरी नवंबर महीने में की जानी चाहिए सर्दियों में ज्यादा सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन यदि सर्दियों में बारिश ना पड़े तो एक सिंचाई जरूर देनी चाहिए पौधे 100-120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं जब निचले पत्ते पीले रंग के होने शुरू हो जायें, तब कटाई करें कटाई दराती से और बूटियों को मिट्टी की सतह के 2-3 सैं.मी. ऊपर से निकालें अगली कटाई पहली कटाई के बाद 80 दिनों के अंतराल पर करें ताजी पत्तियों को उत्पाद बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है, इसकी marketing के लिए आप Pawan Choudhary 9719976268 से संपर्क कर सकते है धन्यवाद
Posted by suraj Achyutrao gavhane
Maharashtra
14-02-2020 09:15 AM
Achyutrao gavhane ji, kripya ap bataye ke apki fasal mein kis keet ka hamla hua hai, taki apko uske hisaab se pesticide ke bare mein jankari di ja sake, dhanywad

Posted by neeraj kumar saroj
Uttar Pradesh
14-02-2020 08:52 AM
नीरज जी आप इसके ऊपर NPK 130045 @10 ग्राम को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by ਬਿੱਟਾ
Punjab
14-02-2020 08:49 AM
ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਕੰਟ੍ਰੈਕਟ ਬੇਸ ਤੇ ਮੁਰਗੀ ਪਾਲਣ ਜਿਆਦਾ ਨਹੀ ਹੋ ਰਿਹਾ ਤੇ ਨਾ ਹੀ ਜਿਆਦਾ ਕਾਮਯਾਬ ਹੈ, ਕਾਰਨ ਇਹ ਹੈ ਕਿ ਕਈ ਵਾਰ ਕੰਪਨੀਆਂ ਧੋਖਾ ਕਰ ਸਕਦੀਆ ਹਨ, ਕਿਉਕੀ ਮੱਧ ਪ੍ਰਦੇਸ਼ ਤੇ ਉੱਤਰ ਪ੍ਰਦੇਸ਼ ਦੀਆਂ ਕੰਪਨੀਆਂ ਪੰਜਾਬ ਤੋਂ ਬਿਨਾਂ ਹੋਰ ਰਾਜਾ ਵਿੱਚ ਜਿਆਦਾ ਕੰਮ ਕਰਦੀਆਂ ਹਨ , ਬਾਕੀ ਲੇਅਰ ਪੋਲਟਰੀ ਫਾਰਮਿੰਗ ਵਿੱਚ venkeys ਕੰਪਨੀ ਜਾ ਹੋਰ ਭਰੋਸੇਯੋਗ ਕੰਪਨੀਆਂ ਨਾਲ ਕੰਮ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ , ਜ.... (Read More)
ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਕੰਟ੍ਰੈਕਟ ਬੇਸ ਤੇ ਮੁਰਗੀ ਪਾਲਣ ਜਿਆਦਾ ਨਹੀ ਹੋ ਰਿਹਾ ਤੇ ਨਾ ਹੀ ਜਿਆਦਾ ਕਾਮਯਾਬ ਹੈ, ਕਾਰਨ ਇਹ ਹੈ ਕਿ ਕਈ ਵਾਰ ਕੰਪਨੀਆਂ ਧੋਖਾ ਕਰ ਸਕਦੀਆ ਹਨ, ਕਿਉਕੀ ਮੱਧ ਪ੍ਰਦੇਸ਼ ਤੇ ਉੱਤਰ ਪ੍ਰਦੇਸ਼ ਦੀਆਂ ਕੰਪਨੀਆਂ ਪੰਜਾਬ ਤੋਂ ਬਿਨਾਂ ਹੋਰ ਰਾਜਾ ਵਿੱਚ ਜਿਆਦਾ ਕੰਮ ਕਰਦੀਆਂ ਹਨ , ਬਾਕੀ ਲੇਅਰ ਪੋਲਟਰੀ ਫਾਰਮਿੰਗ ਵਿੱਚ venkeys ਕੰਪਨੀ ਜਾ ਹੋਰ ਭਰੋਸੇਯੋਗ ਕੰਪਨੀਆਂ ਨਾਲ ਕੰਮ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ , ਜਿਆਦਾਤਾਰ ਕੜਕਨਾਥ ਫਾਰਮਿੰਗ ਕਰਵਾਉਣ ਵਾਲੀਆਂ ਕੰਪਨੀਆ ਤੋ ਧੋਖਾ ਹੋਣ ਦੀ ਉਮੀਦ ਹੈ ਜੀ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਪੱਧਰ ਕਰੋ ਤਾਂ ਜਿਆਦਾ ਫਾਇਦੇਮੰਦ ਹੈ ਚਾਹੇ ਛੋਟੀ ਪੱਧਰ ਤੇ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਬਾਕੀ ਹੋਰ ਪਲਟਰੀ ਫਾਰਮਾ ਤੇ ਜਾਓ ਤੇ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਕੇਂਦਰ ਜਾਂ ਹੋਰ ਕਿੱਤੋ ਪੋਲਟਰੀ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਤਾਂ ਲੈ ਹੀ ਲਵੋ ਜੀ
Posted by samsher singh
Punjab
14-02-2020 08:45 AM
Samsher singh ji matar da rate 25 - 38/kg tak reha, Thankyou.
Posted by kuldeep yadav
Uttar Pradesh
14-02-2020 08:41 AM
कुलदीप जी, आपके दवारा भेजी गयी ऑडियो में कुछ साफ़ सुनाई नहीं दे रहा है, कृपया आप अपना सवाल दुबारा पूछें की आप मूली के बारे में क्या जानकारी लेना चाहते हैं, ताकि आपको उसके हिसाब से जानकारी दी जा सके, धन्यवाद

Posted by sunil kumar
Uttar Pradesh
14-02-2020 08:38 AM
यह फसल अच्छे जल निकास वाली चिकनी, रेतली और लाल हर तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है खेत में पानी ना खड़ा होने दें क्योंकि खड़े पानी में यह ज्यादा देर बच नहीं पाएगी फसल की वृद्धि के लिए 6-6.5 पी एच वाली मिट्टी अच्छी मानी जाती है उस खेत में अदरक की फसल ना उगाएं जहां पिछली बार अदरक की फसल उगाई गई हो हर साल एक ही ज़मीन पर अद.... (Read More)
यह फसल अच्छे जल निकास वाली चिकनी, रेतली और लाल हर तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है खेत में पानी ना खड़ा होने दें क्योंकि खड़े पानी में यह ज्यादा देर बच नहीं पाएगी फसल की वृद्धि के लिए 6-6.5 पी एच वाली मिट्टी अच्छी मानी जाती है उस खेत में अदरक की फसल ना उगाएं जहां पिछली बार अदरक की फसल उगाई गई हो हर साल एक ही ज़मीन पर अदरक की फसल ना लगाएं खेत को दो तीन बार जोतें और सुहागे से समतल करें अदरक की बिजाई के लिए 15 सैं.मी. ऊंचे और 1 मीटर चौड़े बैड बनाएं दो बैडों के बीच 50 सैं.मी. का फासला रखें बिजाई मई-जून के पहले सप्ताह में की जाती है पौधों में 15-20 सैं.मी. पंक्तियों की दूरी और एक पौधे से दूसरे पौधे की दूरी 30 सैं.मी. होनी चाहिए बीज की गहराई 3-4 सैं.मी. के करीब होनी चाहिए अदरक की बिजाई सीधे ढंग से और पनीरी लगाकर की जा सकती है बिजाई के लिए ताजे और बीमार रहित गांठों का प्रयोग करें बिजाई के लिए 480-720 किलो प्रति एकड़ बीज का प्रयोग करें बिजाई से पहले गांठों को मैनकोजेब 3 ग्राम प्रति लीटर पानी से उपचार करें गांठों को 30 मिनट के लिए घोल में भिगो दें इससे गांठों को फफूंदी से बचाया जा सकता है उपचार के बाद गांठों को 3-4 घंटें के लिए छांव में सुखाएं खेत की तैयारी के समय मिट्टी में 150 क्विंटल प्रति एकड़ रूड़ी की खाद डालें नाइट्रोजन 25 किलो (55 किलो यूरिया), फासफोरस 10 किलो (60 किलो सिंगल सुपर फासफेट) और पोटाश 10 किलो (16 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश) की मात्रा प्रति एकड़ में प्रयोग करें पोटाश और फासफोरस की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें नाइट्रोजन की मात्रा को दो बराबर भागों में बांटें पहला हिस्सा बिजाई के 75 दिन बाद और बाकी हिस्सा बिजाई के 3 महीने बाद डालें बिजाई के 3 दिन बाद एट्राज़िन 4-5 ग्राम प्रति लीटर पानी की नमी वाली मिट्टी पर स्प्रे करें उन नदीनों को खत्म करने के लिए जो पहली नदीन नाशक स्प्रे के बाद पैदा होते हैं, बिजाई के 12-15 दिनों के बाद गलाइफोसेट 4-5 ग्राम प्रति लीटर पानी की स्प्रे करें नदीन नाशक की स्प्रे करने के बाद खेत को हरी खाद से या धान की पराली से ढक दें इसका बीज लेने के लिए आप Nishan Singh Kachoora 9927994011 Kachoora Farm से संपर्क कर सकते है धन्यवाद
Posted by हरिराम मीना गम्भीरा
Rajasthan
14-02-2020 08:30 AM
हरिराम मीना गम्भीरा जी, कृपया आप फसल की फोटो भेजें ताकि आपको देख कर इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके, धन्यवाद
Posted by simar
Punjab
14-02-2020 08:09 AM
Simar ji eh kanak de uper fungus da hamla hon te karni chaidi hai jado tuhanu kanak de uper fungus da hamla dikhai dinda hai ta tuc fungicide di spray kar sakde ho isde layi kanak di umar kine din di hai mayne nahi rakhdi.dhanwad

Posted by Gurpreet singh (Gora)
Punjab
14-02-2020 08:04 AM
shrimaan g kirpa krke fasal di photo bhejo ta jo tuhanu poori jaankari mil ske g..
Posted by Suresh Rajput
Uttar Pradesh
14-02-2020 07:49 AM
सुरेश जी यह फंगस के कारण हो रहा है इसके लिए आप carbendazim @400 ग्राम को प्रति एकड़ के हिसाब से डाले धन्यवाद

Posted by Harman Maan
Punjab
14-02-2020 07:49 AM
ਹਰਮਨ ਜੀ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਤੁਸੀ ਕੱਟੇ ਦੀ ਉਮਰ ਵਾਰੇ ਦੱਸੋ ਤਾਂ ਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਸਹੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ ਤੁਸੀ ਦੁਬਾਰਾ ਆਪਣਾ ਸਵਾਲ ਵਿਸਤਾਰ ਨਾਲ ਪੁੱਛ ਸਕਦੇ ਹੋ ਧੰਨਵਾਦ.
Posted by Balvir Singh
Punjab
14-02-2020 07:09 AM
balvir ji mausam 16 tareek tak khusk hai usto bad tuc polythene nu hta sakde ho.dhanwad

Posted by भोला सिंह
Punjab
14-02-2020 06:57 AM
Bhola singh ji Pm kisan samman nidhi yojna ke bare me puri jankari ja shkait ke lia aap 011-23381092 (Direct HelpLine), Email (pmkisan-ict@gov.in) par samparak kar, Thankyou.

Posted by sukhjinder singh
Punjab
14-02-2020 06:33 AM
ਸੁਖਜਿੰਦਰ ਜੀ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਵਿਸਤਾਰ ਨਾਲ ਦੱਸੋ ਕੇ ਤੁਸੀ 3 ਗੱਟੇ ਕਿਹੜੀ ਖਾਦ ਦੇ ਪਾਏ ਹਨ ਤਾ ਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਉਸਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by jatin
Haryana
14-02-2020 06:19 AM
जतिन जी गेंहू सर्दी की फसल है और गेंहू की फसल की ग्रोथ के लिए उसको जो तापमान चाहिए वो सर्दी में ही मिलता है जिस से फसल अच्छे से ग्रोथ करती है धन्यवाद
Posted by Dharmaram Gorchhiya
Rajasthan
14-02-2020 05:57 AM
श्री मान ैंगन की फसल सख्त होने के कारण इसे अलग अलग तरह की मिट्टी में उगाया जा सकता है यह एक लंबे समय की फसल है, इसलिए अच्छे जल निकास वाली उपजाऊ रेतली दोमट मिट्टी उचित होती है और अच्छी पैदावार देती है अगेती फसल के लिए हल्की मिट्टी और अधिक पैदावार के लिए चिकनी और नमी या गारे वाली मिट्टी उचित होती है फसल की वृद्धि.... (Read More)
श्री मान ैंगन की फसल सख्त होने के कारण इसे अलग अलग तरह की मिट्टी में उगाया जा सकता है यह एक लंबे समय की फसल है, इसलिए अच्छे जल निकास वाली उपजाऊ रेतली दोमट मिट्टी उचित होती है और अच्छी पैदावार देती है अगेती फसल के लिए हल्की मिट्टी और अधिक पैदावार के लिए चिकनी और नमी या गारे वाली मिट्टी उचित होती है फसल की वृद्धि के लिए 5.5-6.6 पी एच होनी चाहिए मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की तीन से चार बार जोताई करें गाय का गला हुआ गोबर 42 क्विंटल प्रति एकड़ में डालें और मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें बैंगन के बीज 3 मीटर लंबे, 1 मीटर चौड़े और 15 सैं.मी. ऊंचे बैडों पर बोये जाते हैं पहले बैडों में बढ़िया रूड़ी की खाद डालें फिर बिजाई से दो दिन पहले कप्तान का घोल डालें ताकि जो नर्सरी बैडों में पौधों को नष्ट होने से बचाया जा सके उसके बाद बीजों को कतारों में 2.5 सैं.मी. के फासले पर और 1.5 सैं.मी. की गहराई पर बोयें हल्की सिंचाई करें पौधों के अंकुरन तक बैडों को काले रंग की पॉलीथीन शीट या पराली से ढक दें तंदरूस्त पौधे जिनके 3-4 पत्ते निकलें हों और कद 12-15 सैं.मी. (30-40 days crop) हो, खेत में पनीरी लगाने के लिए तैयार होते हैं बैंगन की खेती पूरे वर्ष की जाती है खरीफ मौसम के लिए, नर्सरी फरवरी - मार्च के महीने में तैयार करें और मार्च - अप्रैल के महीने में रोपाई करें सर्दियों के मौसम में, नर्सरी की तैयारी के लिए जून जुलाई का समय उपयुक्त होता है और रोपाई के लिए जुलाई अगस्त का महीना उपयुक्त होता है बसंत के मौसम में, सितंबर के महीने में नर्सरी तैयार करें और अक्तूबर - नवंबर के महीने में रोपाई पूरी कर लें लंबी किस्मों के लिए, कतार से कतार में 60-75 सैं.मी. जबकि गोल किस्मों के लिए कतारों में 80-90 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 60-70 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें नर्सरी में, बीज को 1.5 सैं.मी. गहराई में बोयें और मिट्टी से ढक दें खेत में पनीरी लगाकर इसकी बिजाई की जाती है एक एकड़ खेत में बिजाई के लिए 300-400 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें नाइट्रोजन 60 किलो (130 किलो यूरिया), फासफोरस 20 किलो (125 किलो सिंगल सुपर फासफेट) और पोटाश 20 किलो (35 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश) की मात्रा प्रति एकड़ में प्रयोग करें नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा आखिरी जोताई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन को रोपाई के बाद 30 वें और 45वें दिन डालें नदीनों को रोकने, अच्छे विकास और उचित हवा के लिए दो - चार गोडाई करें काले रंग की पॉलिथीन शीट से पौधों को ढक दें जिससे नदीनों का विकास कम हो जाता है और ज़मीन का तापमान भी बना रहता हैं नदीनों को रोकने के लिए पौधे लगाने से पहले मिट्टी में फलूकलोरालिन 600-800 मि.ली. प्रति एकड़ या ऑक्साडायाज़ोन 400 ग्राम प्रति एकड़ डालें अच्छे परिणाम के लिए पौधे लगाने से पहले एलाकलोर 2 लीटर प्रति एकड़ की मिट्टी के तल पर स्प्रे करें
Posted by Dharmaram Gorchhiya
Rajasthan
14-02-2020 05:55 AM
इसे मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए निम्नलिखित किस्में पपीते की खेती के लिए उपयुक्त हैं: Pusa Dwarf: इसके फल मध्यम आकार के और अंडाकार होते ह.... (Read More)
इसे मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए निम्नलिखित किस्में पपीते की खेती के लिए उपयुक्त हैं: Pusa Dwarf: इसके फल मध्यम आकार के और अंडाकार होते हैं यह सूखे को सहनेयोग्य किस्म है यह उच्च घनत्व में रोपाई के लिए लाभदायक है Pusa Giant: इस किस्म के पौधे तेज हवा को सहनेयोग्य है यह बड़े फलों का उत्पादन करती है यह पैकिंग के लिए उपयुक्त किस्म है CO 3: इसके फल बड़े आकार के और अंडाकार होते हैं इसे ज्यादा देर तक रखने की गुणवत्ता अच्छी होती है CO 1: यह छोटे कद की किस्म है जिसके फल मध्यम आकार के होते हैं फल गोलाकार, नर्म हरा-पीला छिल्का और संतरी पीले रंग का गुद्दा होता है फल रसदार होता है और इसे ज्यादा देर तक रखने की गुणवत्ता अच्छी होती है Coorg Honey Dew: इसे सीधे तौर पर खाने के लिए और प्रक्रिया के लिए प्रयोग किया जाता है इसके फल आयताकार और गुद्दा मोटा संतरी रंग का होता है CO 2: यह मध्यम आकार की अंडाकार, हरे पीले रंग की किस्म है इसका गुद्दा नर्म और लाल रंग का होता है इसमें रस की मात्रा काफी होती है और इसे ज्यादा देर तक रखने की गुणवत्ता अच्छी होती है Pusa Majesty: इसके फल मध्यम आकार के, गोल होते हैं इन्हें रखने की गुणवत्ता बहुत अच्छी होती है यह किस्म 146 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह किस्म जड़ गलन निमाटोड के प्रतिरोधक किस्म है Pusa Delicious: यह मध्यम लंबी किस्म है इसके फल मध्यम आकार के होते हैं, गुद्दा गहरे संतरी रंग का होता है इस किस्म को कतारों में लगाने के लिए प्रयोग किया जाता है CO 5: यह किस्म दो वर्षों में 75-80 फल प्रति वृक्ष देती है IIHR39 and IIHR54: यह किस्म IIHR, बैंगलोर द्वारा विकसित की गई है इसके फल मध्यम आकार के होते हैं इसमें टी एस एस की मात्रा उच्च होती है Taiwan 785: यह छोटे कद की किस्म है इसके फल आयताकारा और गुद्दा मोटा संतरी रंग का होता है फलों को रखने की गुणवत्ता अच्छी होती है फलों को कतारों में प्रयोग किया जाता है और प्रक्रिया के लिए प्रयोग किया जाता है Taiwan 786: इसके फलों को कतारों में और प्रक्रिया के लिए प्रयोग किया जाता है इसके फल स्वाद और कम बीज वाले होते हैं फलों को रखने की गुणवत्ता बहुत अच्छी होती है Washington: यह कतारों में प्रयोग किए जाने वाली किस्म है इसके फल गोल, मध्यम आकार के और कम बीज वाले होते हैं फल का छिल्का गहरे पीले रंग का होता है नर और मादा पौधे अलग होते हैं Solo: इसके फल छोट, गहरे गुलाबी रंग का गुद्दा होता है, जो कि स्वाद में मीठा होता है यह किस्म कतारों में प्रयोग की जाती है Ranchi: फल आयताकार होते हैं और गुद्दा गहरे पीले रंग का होता है Honey Dew: इस किस्म के फल बड़े आकार के और कम बीज वाले होते हैं फल स्वाद होते हैं और नर पौधे मादा पौधे से छोटे होते हैं इसका पौधा मध्यम कद का होता है पपीते की खेती के लिए नदीन रहित भूमि का प्रयोग करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें आखिरी जोताई के समय अच्छी तरह से गली हुई रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर मिट्टी में अच्छी तरह मिलाकर डालें सिफारिश किए गए फासलों पर 1 मीटर x 1 मीटर x 1 मीटर आकार के गड्ढे खोदें गड्ढों को मिट्टी और रूड़ी की खाद या गाय के गले हुए गोबर से भरें प्रयोग की गई किस्म के आधार पर प्रत्येक गड्ढे पर 2-4 नए पौधों की रोपाई करें रोपाई के बाद हल्की सिंचाई करें हवा से बचाव के लिए खूंटा लगाएं बीजों को 150 गेज़ की मोटाई वाले, 25 x 10 सैं.मी. के पॉलीथीन बैग में बोयें पानी के उचित निकास के लिए पॉलीथीन बैग के निचले हिस्से में 1 मि.मी. अर्द्धव्यास का छेद करें उसके बाद पॉलीथीन बैग में समान अनुपात में रूड़ी की खाद, मिट्टी और रेत डालें बिजाई से पहले बीजों का उपचार करें रोपाई के लिए 6-7 सप्ताह के पौधों का प्रयोग करें यूरिया 150 ग्राम, फासफोरस 80 ग्राम, पोटाश 100 ग्राम प्रति वृक्ष में प्रति वर्ष डालें खादों को 4 भागों में बांटकर रोपाई के बाद पहले, तीसरे, पांचवे और सातवें महीने में डालें बसंत के मौसम में फरवरी मार्च के महीने में बिजाई करें जबकि मॉनसून के मौसम में बिजाई के लिए जून जुलाई का महीना उपयुक्त होता है और पतझड़ के मौसम में बिजाई अक्तूबर से नवंबर महीने में की जाती है आमतौर पर 1.8 मीटर x 1.8 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है उच्च घनता की रोपाई के लिए 1.5 मीटर x 1.5 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है नर्सरी में बीज को 1 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बीजो की खेत में सीधे बिजाई या मुख्य खेत में नए पौधों की रोपाई की जाती है 100-120 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें मिट्टी की किस्म, जलवायु के हालातों आदि के आधार पर सिंचाई करें सर्दियों में 15 दिनों के अंतराल पर और गर्मियों में 7 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें तने को पानी के संपर्क में ना आने दें और खेत में पानी भी खड़ा ना होने दें पौधे की प्रौढ़ अवस्था के दौरान नदीनों की रोकथाम जरूरी होती है नदीनों की तीव्रता के आधार पर, नियमित और हल्की गोडाई करें फ्लूक्लोरालिन या बूटाक्लोर 800 मि.ली. प्रति एकड़ में डालें नदीनों की रोकथाम के लिए मलचिंग भी एक प्रभावी तरीका है पौधों की रोपाई के कुछ दिनों बाद प्लास्टिक शीट या धान की पराली या गन्ने के बचे कुचे को मलच के रूप में डालें मादा पौधे को निकालना: प्रत्येक 10 पौधों के लिए 1 नर पौधा, बनाए रखने के लिए फूल निकलने के बाद नर पौधों को निकाल दें मुख्यत: फल के पूरा आकार लेने और हरे से हल्का पीला रंग होने पर तुड़ाई की जाती है पहली तुड़ाई रोपाई के 14-15 महीनों के बाद की जा सकती है 4-5 तुड़ाइयां प्रति मौसम की जा सकती हैं

Posted by Shivraj Singh
Madhya Pradesh
14-02-2020 03:29 AM
वर्ष में दो बार इसके बीजों को बोया जाता है बिजाई के लिए उपयुक्त समय मध्यम फरवरी से मार्च का महीना है और दूसरी बार बिजाई के लिए मध्य मई से जुलाई का समय उपयुक्त है
Posted by Harsh Singh Chouhan
Chattisgarh
14-02-2020 12:21 AM
असली केसर सिर्फ जम्मू कश्मीर, ईरान और अफगानिस्तान में ही हो सकता है, यह कुसुम है, इसकी भी कई दवाई बनती है, यदि कोई और छक है तो जम्मू कश्मीर के इस किसान से बात करें, जिसके दादे, पड़दादे भी केसर की खेती करते थे और यह भी केसर की खेती करते है Javid Ahmed- 95964 93260 बाकि आप यह वीडियो देखें https://www.youtube.com/watchv=vl7c6L3ETnQ&t=8s बाकि यदि फिर भी यकीन नहीं .... (Read More)
असली केसर सिर्फ जम्मू कश्मीर, ईरान और अफगानिस्तान में ही हो सकता है, यह कुसुम है, इसकी भी कई दवाई बनती है, यदि कोई और छक है तो जम्मू कश्मीर के इस किसान से बात करें, जिसके दादे, पड़दादे भी केसर की खेती करते थे और यह भी केसर की खेती करते है Javid Ahmed- 95964 93260 बाकि आप यह वीडियो देखें https://www.youtube.com/watchv=vl7c6L3ETnQ&t=8s बाकि यदि फिर भी यकीन नहीं है तो तो आप अमृतपाल सिंह बराड़ प्रोफेसर, पीएयू लुधियाना इस वीडियो संबंधी विचार पड़ सकते हैं, यह फसल केसर की नहीं है, यह फसल कसुंबडे की है, इसे अंग्रेजी में Safflower कहते है, और विज्ञानं में इसे Carthamus tinctorius कहते है धन्यवाद

Posted by Dsvirk Shab
Punjab
13-02-2020 11:31 PM
ਖੁੰਬਾ ਦੀਆ ਕਿਸਮਾਂ ਕਈ ਤਰਾਂ ਦੀਆ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਜਿਵੇਂ ਬਟਨ ਖੁੰਬ, ਢੀਂਗਰੀ, ਸ਼ਟਾਕੀ ਖੁੰਬ, ਪਰਾਲੀ ਖੁੰਬ ਅਤੇ ਮਿਲਕੀ ਖੁੰਬ ਇਹਨਾਂ ਵਿਚੋਂ +ਅਲਗ ਹੈ ਜਿਵੇ *ਬਟਨ ਖੁੰਬ ਦਾ ਸਮਾਂ ਸਤੰਬਰ ਤੋਂ ਮਾਰਚ ਤਕ ਹੈ ਇਸ ਸਮੇ ਵਿੱਚ ਆਪਾ ਇਸ ਤੋਂ 2 ਫਸਲਾਂ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹਾਂ * *ਢੀਂਗਰੀ ਦਾ ਸਮਾਂ ਅਕਤੂਬਰ ਤੋਂ ਮਾਰਚ ਤਕ ਹੈ ਇਸ ਸਮੇ ਵਿੱਚ ਆਪਾ ਇਸ ਤੋਂ 3 ਫ਼ਸਲਾਂ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹਾਂ * * ਸ਼ਟਾਕੀ ਖੁੰਬ ਦਾ ਸਮਾਂ ਅਕਤੂ.... (Read More)
ਖੁੰਬਾ ਦੀਆ ਕਿਸਮਾਂ ਕਈ ਤਰਾਂ ਦੀਆ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਜਿਵੇਂ ਬਟਨ ਖੁੰਬ, ਢੀਂਗਰੀ, ਸ਼ਟਾਕੀ ਖੁੰਬ, ਪਰਾਲੀ ਖੁੰਬ ਅਤੇ ਮਿਲਕੀ ਖੁੰਬ ਇਹਨਾਂ ਵਿਚੋਂ +ਅਲਗ ਹੈ ਜਿਵੇ *ਬਟਨ ਖੁੰਬ ਦਾ ਸਮਾਂ ਸਤੰਬਰ ਤੋਂ ਮਾਰਚ ਤਕ ਹੈ ਇਸ ਸਮੇ ਵਿੱਚ ਆਪਾ ਇਸ ਤੋਂ 2 ਫਸਲਾਂ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹਾਂ * *ਢੀਂਗਰੀ ਦਾ ਸਮਾਂ ਅਕਤੂਬਰ ਤੋਂ ਮਾਰਚ ਤਕ ਹੈ ਇਸ ਸਮੇ ਵਿੱਚ ਆਪਾ ਇਸ ਤੋਂ 3 ਫ਼ਸਲਾਂ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹਾਂ * * ਸ਼ਟਾਕੀ ਖੁੰਬ ਦਾ ਸਮਾਂ ਅਕਤੂਬਰ ਤੋਂ ਅੱਧ ਫਰਵਰੀ ਤਕ ਹੈ ਆਪਾ ਇਸ ਤੋਂ ਇਕ ਫ਼ਸਲ ਹੀ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹਾਂ * *ਪਰਾਲੀ ਖੁੰਬ ਦਾ ਸਮਾਂ ਅਪ੍ਰੈਲ ਤੋਂ ਅਗਸਤ ਤਕ ਹੈ ਆਪਾ ਇਸ ਤੋਂ 4 ਫਸਲਾਂ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹਾਂ * ਮਿਲਕੀ ਖੁੰਬ ਦਾ ਸਮਾਂ ਅਪ੍ਰੈਲ ਤੋਂ ਸਤੰਬਰ ਤਕ ਹੈ ਤੁਸੀ ਹੁਣ ਅਪ੍ਰੈਲ ਵਿਚ ਪਰਾਲੀ ਜਾ ਮਿਲਕੀ ਖੁੰਬ ਲਗਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਪਰਾਲੀ ਖੁੰਬ ਦੇ ਲਈ ਤੁਹਾਨੂੰ ਪਰਾਲੀ,ਬੀਜ,ਬਾਂਸ, ਸੇਬਾ ਆਦਿ ਦੀ ਜ਼ਰੂਰਤ ਹੈ *ਪਰਾਲੀ ਦੇ ਪੂਲੇ*-- ਝੋਨੇ ਦੀ ਪਰਾਲੀ ਦੇ 1-1 ਕਿਲੋ ਦੇ ਪੂਲੇ ਦੋਨੋ ਸਿਰਿਆ ਤੋਂ ਸੇਬੇ ਨਾਲ ਬੰਨ ਕੇ ਤਿਆਰ ਕੀਤੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਪੂਲੇ ਦੇ ਸਿਰੇ ਕਟ ਕ ਇਕ ਬਰਾਬਰ ਕਰ ਲਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ *ਪੂਲਿਆ ਦੀ ਕਿਆਰੀ ਲਗਾਉਣਾ*---ਪਰਾਲੀ ਦੇ ਪੂਲਿਆ ਨੂੰ ਸਾਫ ਪਾਣੀ ਵਿਚ 16-20 ਘੰਟੇ ਲਈ ਡਬੋ ਦਇਓ ਗਿਲੇ ਪੂਲਿਆ ਨੂੰ ਢਲਾਨ ਤੇ ਰੱਖ ਕੇ ਵਾਧੂ ਪਾਣੀ ਨਿਕਲਣ ਦਇਓ ਕਮਰੇ ਚ ਇੱਟਾਂ ਤੇ ਬਾਂਸ ਦਾ ਇਕ ਢਕਵਾ ਪਲੇਟਫਾਰਮ ਬਣਾਓ ਇਸ ਪਲੇਟਫਾਰਮ ਤੇ 5 ਪੂਲਿਆ ਦੀ ਇਕ ਤਹਿ ਲਗਾਓ ਜਿਸ ਉਪਰ ਲਗਭਗ 75 ਗ੍ਰਾਮ ਬੀਜ ਪਾਓ ਇਸ ਤੋਂ ਉਪਰ ਵਾਲੀ ਤਹਿ ਉਲਟ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਤਰਾਂ 5-5 ਪੂਲਿਆ ਦੀਆ 4 ਤਹਿਆ ਵਿਚ 300 ਗ੍ਰਾਮ ਬੀਜ ਪਾ ਕ ਇਕ ਕਿਆਰੀ ਤਿਆਰ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਸਭ ਤੋਂ ਉਪਰ 2 ਪੂਲੇ ਖੋਲ ਕੇ ਰੱਖ ਦਿਤੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ *ਖੁੰਬਾ ਦਾ ਫੁੱਟਣਾ*---ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 7-9 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ ਖੁੰਬਾਂ ਫੁਟਣ ਲਗ ਪੈਂਦੀਆਂ ਹਨ *ਪਾਣੀ ਤੇ ਹਵਾ ਦਾ ਸੰਚਾਰ*-- ਬਿਜਾਈ ਦੇ 2 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਹਰ ਰੋਜ ਪਾਣੀ ਦਾ ਛਿੜਕਾਅ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਖੁੰਬਾਂ ਫੁਟਣ ਉਪਰੰਤ ਹਵਾ ਦਾ ਸੰਚਾਰ 6-8 ਘੰਟੇ ਪ੍ਰਤੀ ਦਿਨ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ * ਖੁੰਬਾਂ ਦੀ ਤੁੜਾਈ*-- ਖੁੰਬਾਂ ਫੁੱਟਣ ਉਪਰੰਤ 1-2 ਦਿਨਾਂ ਵਿਚ ਤੋੜਨ ਯੋਗ ਹੋ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ **ਮਿਲਕੀ ਖੁੰਬ** ਮਿਲਕੀ ਖੁੰਬ ਲਈ ਤੂੜੀ ,ਬੀਜ ,ਮੋਮੀ ਲਿਫਾਫੇ(12×16),ਸੇਬਾ,ਕੇਸਿੰਗ, ਮਿਟੀ ਆਦਿ ਚਾਹੀਦੇ ਹਨ *ਤੂੜੀ ਦੀ ਤਿਆਰੀ*--ਸੁਕੀ ਤੂੜੀ ਨੂੰ ਪੱਕੇ ਫ਼ਰਸ਼ ਤੇ ਵਿਛਾ ਕੇ 16-20 ਘੰਟੇ ਪਾਣੀ ਨਾਲ ਗਿਲਾ ਕਰੋ ਗਿਲੀ ਤੂੜੀ ਨੂੰ ਬੋਰੀ ਵਿਚ ਭਰ ਕੇ ਸੇਬੇ ਨਾਲ਼ ਬੰਨ ਦਇਓ ਇਸ ਬੋਰੀ ਨੂੰ ਉਬਲਦੇ ਪਾਣੀ ਵਿਚ 45-50 ਮਿੰਟ ਲਈ ਰੱਖੋ ਤੂੜੀ ਨੂੰ ਕੱਢ ਕੇ ਪੱਕੇ ਫ਼ਰਸ਼ ਤੇ ਵਿਛਾ ਕੇ ਠੰਡਾ ਕਰ ਲਓ ਇਹ ਤੂੜੀ ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੈ *ਬਿਜਾਈ*--- ਠੰਡੀ ਤੂੜੀ ਵਿਚ ਬੀਜ ਰਲਾ ਕੇ ਮੋਮੀ ਲਿਫਾਫੇ ਵਿਚ ਭਰ ਦਇਓ 1 ਮੋਮੀ ਲਿਫਾਫੇ ਵਿਚ ਲਗਭਗ 2 ਕਿਲੋ ਗਿਲੀ ਤੂੜੀ ਅਤੇ 70-80 ਗ੍ਰਾਮ ਬੀਜ ਪੈਂਦਾ ਹੈ ਲਿਫਾਫੇ ਦੇ ਮੂੰਹ ਨੂੰ ਸੇਬੇ ਨਾਲ ਬੰਨ ਕੇ ਕਮਰੇ ਵਿਚ ਰੱਖ ਦਇਓ *ਕੇਸਿੰਗ*--ਬਿਜਾਈ ਦੇ 2-3 ਹਫਤਿਆਂ ਬਾਅਦ ਲਿਫਾਫੇ ਖੋਲ ਕੇ ਕੇਸਿੰਗ ਦੀ 1-1.5 ਦੀ ਤਹਿ ਲਗਾ ਦਇਓ ਕੇਸਿੰਗ ਵਿਚ ਰੂੜੀ ਤੇ ਰੇਤਲੀ ਮਿਟੀ(4:1) ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜੋ ਕ 24 ਘੰਟਿਆ ਲਈ 4% ਫਾਰਮਲੇਨ ਦੇ ਘੋਲ਼ ਨਾਲ ਜੀਵਣੁ ਰਹਿਤ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ *ਖੁੰਬਾਂ ਦਾ ਫੁੱਟਣਾ*-- ਕੇਸਿੰਗ ਮਿਟੀ ਪਾਉਣ ਤੋਂ ਲਗਭਗ 2 ਹਫਤਿਆਂ ਵਿਚ ਖੁੰਬਾਂ ਦੇ ਛੋਟੇ-ਛੋਟੇ ਕਿਣਕੇ ਨਿਕਲਣੇ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਜੋ ਕ 4-5 ਦਿਨਾਂ ਵਿਚ ਤੋੜਨ ਯੋਗ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ *ਖੁੰਬਾਂ ਦੀ ਤੁੜਾਈ*-- ਲਗਭਗ 35 -40 ਦਿਨਾਂ ਤਕ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ

Posted by Dsvirk Shab
Punjab
13-02-2020 11:23 PM
Shab ji kirpa karke audio dubara bhejo tuhade valo bheji gayi audio ch saaf sunayi nahi de reha hai.dhanwad

Posted by neelam kumari
Uttar Pradesh
13-02-2020 11:06 PM
neelam ji aap iske uper uplon ke pani ki spry karen.iske liye aap 5-7 uploan ko 50 litre pani men dbo kar 5 din ke liye rakhe. 5din bad aap isme 90 litre pani mila kar prati acre ke hisab se spray karen,dhanywad

Posted by Manpreet
Punjab
13-02-2020 10:40 PM
The most effective way of reducing chances of infection is by planting hybrid species of maize. Hybrid species will greatly reduce chances of infection as they are bred to be resistant to the disease. Tilling fields at the end of the season is very helpful because it will break down the infected plant residue left from diseased plants, reducing chances of spores germinating next season. Crop rotation is also recommended to reduce chances of further infection when economically viable.to control this do spray of carbendazim@500 gram per acre.thank you

Posted by Ashish Dongre
Maharashtra
13-02-2020 10:35 PM
बकरी पालन में लोन लेने के लिए सबसे जरूरी है ट्रेनिंग सर्टीफिकेट अपने नज़दीक के कृषि विज्ञान केंद्र से ट्रेनिंग करने के बाद ट्रेनिंग के सर्टीफिकेट पर लोन एप्लाई होता है पर लोन मिलेगा या नहीं यह बैंक मेनेजर पर निर्भर करता है क्योंकि पहली बात यह है कि बैंक देखता है कि आपके अकाउंट में कितने पैसों का लेन देन हो .... (Read More)
बकरी पालन में लोन लेने के लिए सबसे जरूरी है ट्रेनिंग सर्टीफिकेट अपने नज़दीक के कृषि विज्ञान केंद्र से ट्रेनिंग करने के बाद ट्रेनिंग के सर्टीफिकेट पर लोन एप्लाई होता है पर लोन मिलेगा या नहीं यह बैंक मेनेजर पर निर्भर करता है क्योंकि पहली बात यह है कि बैंक देखता है कि आपके अकाउंट में कितने पैसों का लेन देन हो रहा है और आपके पास ज़मीन गारंटी के तौर पर देने के लिए है या नहीं और अन्य भी कई बातें चैक करके लोन के लिए सहमत होता है बाकी कोशिश करें कि लोन के बिना अपने स्तर पर ही काम शुरू करें क्योंकि लोन की किश्त हर महीने भरनी पड़ेगी पर बकरियों से कमाई हर महीने नहीं होने होगी बाकी यदि कोशिश करके देखनी है तो अपने ट्रेनिंग सर्टीफिकेट से आप अपने जिले के पशु पालन विभाग अफसर को मिलें और उस पर प्रवानगी लेकर फिर बैंक से बात करके देखें.

Posted by Vishal Kumar
Haryana
13-02-2020 10:33 PM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
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