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Posted by Ankit Kumar
Uttar Pradesh
15-02-2020 12:47 PM
Punjab
02-17-2020 03:18 PM
Ankit ji papiet ke paudhe ek acre men lagbhag 900 lag jate hai iske ped lene ke liye Sulender 8736801125 Jai Shree Bag & Nursery, se sampark kar sakte hai.dhanywad
Posted by gaurav rana
Haryana
15-02-2020 12:35 PM
Punjab
02-17-2020 01:53 PM
Gaurav ji NPK 170044 nam ki koi NPK nahi hoti hai.aap genhu ke uper NPK 130045 ki spray kar sakte hai. iski matra 1 kilo ko 150 litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by Rajkumar Chouhan
Madhya Pradesh
15-02-2020 11:56 AM
Punjab
02-16-2020 10:31 AM
राजकुमार जी यह क्रॉस नस्ल की बकरी है
Posted by Manpreet
Punjab
15-02-2020 11:50 AM
Punjab
02-17-2020 01:48 PM
ਲਵਪ੍ਰੀਤ ਜੀ ਇਹ landscaping ਦੇ ਅਧੀਨ ਆਉਂਦਾ ਹੈ ਜੋ ਕੇ agriculture ਦਾ ਹੀ ਹਿੱਸਾ ਹੈ Bonsai ਬਣਾਉਣਾ ਇਕ ਕਲਾ ਹੈ ਜਿਸਦੇ ਨਾਲ ਦਰਖ਼ਤ ਨੂੰ ਛੋਟੇ size ਵਿਚ ਤਿਆਰ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by raghuvir
Rajasthan
15-02-2020 11:46 AM
Punjab
02-17-2020 01:49 PM
कश्मीरी सिंदूरी बेर और कश्मीरी रेड एप्पल बेर एक ही है सभी प्रकार की मिट्टी एप्पल बेर की खेती के लिए उपयुक्त है इसकी खेती के तरीके सिंचित क्षेत्रों के लिए बेर के पौधे की तरह हैं 8 x 8 मीटर की दूरी का उपयोग करें और वर्षा वाले क्षेत्रों के लिए, रोपण के लिए 6 मीटर x 6 मीटर के अंतर का उपयोग करें 60 x 60 x 60 cm के गड्ढे खोदकर उन्ह.... (Read More)
कश्मीरी सिंदूरी बेर और कश्मीरी रेड एप्पल बेर एक ही है सभी प्रकार की मिट्टी एप्पल बेर की खेती के लिए उपयुक्त है इसकी खेती के तरीके सिंचित क्षेत्रों के लिए बेर के पौधे की तरह हैं 8 x 8 मीटर की दूरी का उपयोग करें और वर्षा वाले क्षेत्रों के लिए, रोपण के लिए 6 मीटर x 6 मीटर के अंतर का उपयोग करें 60 x 60 x 60 cm के गड्ढे खोदकर उन्हे 15 दिनों के लिए धूप में खुला रखा जाता है गड्ढे को मिट्टी और गोबर के मिश्रण से भरा जाता है फिर उसमें अंकुरित पौधे को रोपाई करें उचित कटाई और छंटाई आवश्यक है इसे नर्सरी चरण से शुरू करें नर्सरी में, सुनिश्चित करें कि एकल तने वाले पौधे ही हो निचली शाखाओं को प्रून करें और उन्हें जमीन पर फैलने से रोकें पिछले मौसम की बीमारी, पतली, सूखी और टूटी हुई शाखाओं को हटा दें प्रूनिंग तब किया जाता है जब पौधे सुप्त अवस्था में होते हैं यानि मई के दूसरे पखवाड़े से सेब बेर का आकार सेब जैसा होता है और इसका औसत वजन लगभग 150-200 ग्राम होता है, इस किस्म के बेर थाईलैंड से आते हैं, पेड़ को फलने की अवस्था तक पहुंचने में 6-7 महीने लगते हैं, 450- 500 पौधों की खेती एकड़ में की जाती है, प्रथम वर्ष में 23- 30 किलोग्राम प्रति पेड़ पैदावार देखी जाती है, इसकी मार्केटिंग हैदराबाद में सबसे अधिक है, इसकी कीमत 50-60 रुपये प्रति पौधा है, धन्यवाद
Posted by raghuvir
Rajasthan
15-02-2020 11:43 AM
Punjab
02-15-2020 01:54 PM
श्रीमान जी डॉ दलाल घोल की स्प्रे तैयार करने का तरीका— यूरिया 2.5 किलो, डीएपी 2.5 किलो, जिंक 0.5 किलो का घोल तैयार करके इसकी स्प्रे करें डीएपी को एक रात पहले भिगोकर रखें और यूरिया जिंक को अलग अलग घोल कर बाद में इन्हें 100—150 लीटर पानी में मिक्स करके प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें यह ग्रोथ का काम करती है और जो भी फसल म.... (Read More)
श्रीमान जी डॉ दलाल घोल की स्प्रे तैयार करने का तरीका— यूरिया 2.5 किलो, डीएपी 2.5 किलो, जिंक 0.5 किलो का घोल तैयार करके इसकी स्प्रे करें डीएपी को एक रात पहले भिगोकर रखें और यूरिया जिंक को अलग अलग घोल कर बाद में इन्हें 100—150 लीटर पानी में मिक्स करके प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें यह ग्रोथ का काम करती है और जो भी फसल में कमी होती है उसकी पूर्ति हो जाती है
Posted by Gurmeet Singh
Punjab
15-02-2020 11:43 AM
Punjab
02-19-2020 06:59 PM
Gurmeet Singh ji pipe line bare visthar vich jankari lai tusi Mr Mishra 9465884780, 9810363807 nal samparak kar sakde ho, Thankyou.
Posted by DEEPAK chaudhary
Himachal Pradesh
15-02-2020 11:42 AM
Punjab
02-15-2020 01:56 PM
श्री मान खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते ह.... (Read More)
श्री मान खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुमब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तहय उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तहय में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तहय लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है
Posted by Anil Singh
Uttar Pradesh
15-02-2020 11:35 AM
Punjab
02-17-2020 01:41 PM
अनिल जी आप सब्जियां जैसे ग्वार, खीरा-ककड़ी, लोबिया, करेला, लौकी, तुरई, पेठा, खरबूजा, तरबूज, पालक, भिण्डी, अरबी ,चौलाई, मूली , फूलगोभी, बैंगन, प्याज, मूली, मिर्च की बिजाई कर सकते है धन्यवाद
Posted by PUSHPENDRA SINGH
Uttar Pradesh
15-02-2020 11:15 AM
Punjab
02-17-2020 01:39 PM
Pushpendra ji aap aleovera ki contract farming ke liye Mr Yadav:-6268536795 Aushadhiya kheti vikas sansthan se sampark kar sakte hai.dhanywad
Posted by Pradeep Yadav
Uttar Pradesh
15-02-2020 11:07 AM
Punjab
02-17-2020 01:35 PM
Pradeep ji yeh sucking pest ki roktham ke liye istemal kiya jata hai iski matra 400ml ko prati acre ke hisab se spray kiya jata hai.dhanywad
Posted by Abninder pal singh
Punjab
15-02-2020 11:01 AM
Punjab
02-17-2020 12:30 PM
abninder ji kirpa karke swal vistar nal pucho ke tuc ki jankari laina chahunde ho ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake.dhanwad
Posted by Rakesh
Punjab
15-02-2020 10:59 AM
Punjab
02-17-2020 12:25 PM
स्ट्रॉबेरी की खेती पॉलीहाउस के अंदर या खुले खेत में कर सकते हैं चीकनी, बालुई और अच्छे निकास वाली ज़मीन स्ट्रॉबेरी के लिए अच्छी होती है तेजाबी में पी एच 5.0 से 6.5 होनी चाहिए मिट्टी की नाज़ुकता तीस से चालीस सैं.मी. होनी चाहिए स्ट्रॉबेरी की सही वृद्धि के लिए दिन में तापमान 20-25 डिगरी और रात के समय 7-12 डिगरी होना चाहिए इस.... (Read More)
स्ट्रॉबेरी की खेती पॉलीहाउस के अंदर या खुले खेत में कर सकते हैं चीकनी, बालुई और अच्छे निकास वाली ज़मीन स्ट्रॉबेरी के लिए अच्छी होती है तेजाबी में पी एच 5.0 से 6.5 होनी चाहिए मिट्टी की नाज़ुकता तीस से चालीस सैं.मी. होनी चाहिए स्ट्रॉबेरी की सही वृद्धि के लिए दिन में तापमान 20-25 डिगरी और रात के समय 7-12 डिगरी होना चाहिए इसलिए इसकी पनीरी लगाने का काम मध्य अक्तूबर से मध्य नवंबर तक कर देना चाहिए इन महीनों और इसके बाद पंजाब में लगभग यही तापमान होता है स्ट्रॉबेरी की खेती मलचिंग विधि द्वारा की जाती है सबसे पहले खेत को तैयार किया जाता है इसके बाद ही ट्रैक्टर की सहायता से मलचिंग मशीन को खेत में उतारा जाता है चार फुट क्यारी तैयार की जाती है इसमें ड्रिप लाइन फिट की जाती है इसके बाद मशीन की सहायता से क्यारियों पर प्लास्टिक शीट बिछाई जाती है मलचिंग के लिए हल्का और लचकीला पदार्थ लें ताकि स्ट्रॉबेरी के पौधे की रफ्तार पर असर ना पड़े जिसे बाद में दोनों ओर से मिट्टी में दबा दिया जाता है अब इस शीट में छेद करके उसमें स्ट्रॉबेरी की पनीरी लगायी जाती है पनीरी लगाने के समय जड़ को पूरी तरह मिट्टी में व्यवस्थित कर दें जड़ बाहर रहने से पौधे के सूखने का खतरा होता है पौधे को ज्यादा तापमान और ठंड से बचाने के लिए इसके ऊपर छांव करनी चाहिए जो आप लो टन्नल विधि से कर सके हैं मौसम का बहुत ख्याल रखना पड़ता है थोड़ी सी लापरवाही से सारी फसल खराब हो सकती है पहले साल अपने खेत में स्ट्रॉबेरी की खेती करने का कुल खर्चा ढाई से तीन लाख रूप्ये प्रति एकड़ के हिसाब से आ जाता है क्योंकि किसान को पहले साल ड्रिप सिस्टम और फव्वारों आदि पर खर्च करना पड़ता है पर अगले वर्षों में किसानों का यह खर्चा बच जाता है इसके लिए एक एकड़ में 40 बैड बनते हैं और एक बैड पर 1000 स्ट्रॉबेरी के पौधे लगते हैं इस तरह एक एकड़ में चालीस हजार पौधे लगाए जाते हैं एक पौधा 3 से 4 रूप्ये तक मिल जाता है और इसकी उपज 50 से 60 क्विंटल तक निकल आता है 25-30क्विंटल गोबर की खाद एक एकड़ में डालें यह खाद एक साल में डालनी होती है फिर 20 : 40 : 40 NPK KG / हेक्टेयर डालनी है अच्छी फसल के लिए यूरिया दो फीसदी जिंक सल्फेट, आधा प्रतिशत कैलशियम सल्फेट और बोरिक एसिड 0.2 फीसदी अच्छी फसल के लिए ठीक है सिंचाई जल्दी जल्दी पर हल्की करनी चाहिए ज्यादा पानी ठीक नहीं है पत्ते गीले ना करें तुपका सिंचाई से पानी कम लग सकता है यदि तुपका सिंचाई नहीं कर रहे तो क्यारियों में पानी खाली में ही लगाएं नदीन हाथ से हटाएं या कीड़े मकौड़े और अन्य बीमारियों की तरफ ध्यान रखना जरूरी है यदि कोई पौधा ज्यादा खराब है उसे हटा दें जब फल का रंग 70 प्रतिशत लाल हो जाये तो तोड़ लेना चाहिए यदि मार्किट दूरी पर है तो थोड़ा सख्त ही तोड़ना चाहिए तुड़ाई अलग अलग दिनों में करनी चाहिए स्ट्रॅाबेरी की पैकिंग प्लास्टिक की प्लेटों में करनी चाहिए इसे हवादार जगह पर रखना चाहिए जहां तापमान पांच डिगरी हो एक दिन के बाद स्ट्रॉबेरी की पैकिंग का तापमान ज़ीरो डिग्री होना चाहिए मार्किट में स्ट्रॉबेरी औसतन 200 रूपये प्रति तक बिकती है इस तरह पांच लाख प्रति एकड़ से इसकी आमदन शुरू होकर आगे अपनी मेहनत से किसान आमदन में भरपूर वृद्धि कर सकता है स्ट्रॉबेरी के पौधे सितंबर से अक्तूबर तक लगाए जाते हैं और 3 महीने के बाद यह फल देना शुरू कर देते हैं इसकी फसल अप्रैल तक चलती है इसकी मार्केटिंग में किसी भी तरह की मुश्किल नहीं है, यह ऐलनाबाद, सिरसा, हनुमानगढ़, गंगानगर के इलावा बठिंडा, मोगा, जलंधर. लुधियाना में इसकी मार्केटिंग कर सकते है, यदि ज़्यादा मात्रा में स्ट्रॉबेरी है तो दिल्ली इसकी मुख्य मार्किट है
Posted by Lalit Saikia
Assam
15-02-2020 10:59 AM
Punjab
02-19-2020 07:01 PM
Lalit Saikia ji is ke bare me visthar me jankari ke lia aap Puneet singh thind 9991320236 se samparak kar sakte hai, Thankyou.
Posted by Harpartap Singh
Punjab
15-02-2020 10:49 AM
Punjab
02-17-2020 12:23 PM
Harpartap ji tuc isdi spray hafte de anrtral te kar sakde ho jado fasl 30-40% nisar jandi hai.dhanwad
Posted by Gurjit saini
Punjab
15-02-2020 10:19 AM
Punjab
02-15-2020 10:38 AM
ਗੁਰਜੀਤ ਜੀ ਤੁਸੀ ਇਸਦੀ ਐੱਡ ਸਾਡੀ ਦੂਸਰੀ ਐਪ ਆਪਣੀ ਖੇਤੀ ਖਰੀਦੋ ਅਤੇ ਵੇਚੋ ਤੇ ਅੱਪਲੋਡ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਉਥੇ ਇਸ ਨੂੰ ਖਰੀਦਣ ਵਾਲੇ ਬਹੁਤ ਸਾਰੇ ਕਿਸਾਨ ਮਿਲ ਜਾਣਗੇ ਜੋ ਤੁਹਾਡੇ ਨਾਲ ਸਿੱਧਾ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਲੈਣਗੇ. ਇਸਦੇ ਵਾਰੇ ਜ਼ਿਆਦਾ ਜਾਣਕਾਰੀ ਲਈ ਤੁਸੀ ਸਾਡੇ ਹੈਲਪਲਾਈਨ ਨੰਬਰ 97799-77641 ਤੇ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ
Posted by Vijay Kumar Verma
Uttar Pradesh
15-02-2020 10:19 AM
Punjab
02-17-2020 12:17 PM
मोटे आलुओं की पैदावार के लिए 13:0:45 की 2 किलो और मैगनीश्यिम ई डी टी ए 100 ग्राम प्रति एकड़ की स्प्रे करें बीमारियों के हमले को रोकने के लिए फंगसनाशी प्रॉपीनेब 3 ग्राम प्रति लीटर पानी डालें आलुओं का आकार और गिणती बढ़ाने के लिए हयूमिक एसिड (12 प्रतिशत) 3 ग्राम + एम ए पी 12:61:0 की 8 ग्राम या डी ए पी 15 ग्राम प्रति लीटर की स्प्रे पौध.... (Read More)
मोटे आलुओं की पैदावार के लिए 13:0:45 की 2 किलो और मैगनीश्यिम ई डी टी ए 100 ग्राम प्रति एकड़ की स्प्रे करें बीमारियों के हमले को रोकने के लिए फंगसनाशी प्रॉपीनेब 3 ग्राम प्रति लीटर पानी डालें आलुओं का आकार और गिणती बढ़ाने के लिए हयूमिक एसिड (12 प्रतिशत) 3 ग्राम + एम ए पी 12:61:0 की 8 ग्राम या डी ए पी 15 ग्राम प्रति लीटर की स्प्रे पौधे की वृद्धि के समय करें
Posted by Rahul Dedha
Uttar Pradesh
15-02-2020 10:12 AM
Punjab
02-17-2020 09:32 PM
राहुल जी यदि पिशाब बंद हो जाए तब आप lasix tablet और ORS पाउडर को पानी में मिलाकर दें और यदि गोबर बंद हो जाए तब सरसों का तेल 200 मि.ली., हल्दी 30ग्राम, लस्सी 250 मि.ली. नमक 1 चम्मच को मिक्स करके दे सकते है इससे फर्क पड़ जाएगा
Posted by gurmukh
Punjab
15-02-2020 10:11 AM
Punjab
04-10-2020 08:41 PM
Gurmukh ji beej len lai tusi Sarwan Singh Maan 9340126148, 9478000850 Anmaanat Biotech nal samparak kar sakde ho, Thankyou.
Posted by बृज बिहारी सिंह चौधरी
Uttar Pradesh
15-02-2020 10:03 AM
Punjab
02-17-2020 12:16 PM
ब्रिज जी कृपया बताये कि आपने इसमें क्या क्या खाद डाली है ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके इसके इलावा आप इसके ऊपर mancozeb @400 ग्राम को प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by harman
Punjab
15-02-2020 09:41 AM
Punjab
02-15-2020 10:41 AM
Harman ji tuci jersey cow lain lai Sukhwinder Singh 9814057587, 9855621810 Cheena Dairy Farm nal sampark kr skde ho.
Posted by Shubham singh
Uttar Pradesh
15-02-2020 09:27 AM
Punjab
02-15-2020 02:00 PM
श्री मान फसल को जानवरों से बचाने के लिए आप खेत में फेंसिंग कर सकते है इसके इलावा आप prem raj saini 9719432296 जी से सम्पर्क कर सकते है इन्हो ने एक खाद त्यार की है जिसकी बदबू से जानवर खेत में नहीं आते
Posted by Abhishek Vishwakarma
Uttar Pradesh
15-02-2020 09:26 AM
Punjab
02-17-2020 12:10 PM
अभिषेक जी शीर्षकर्तन कटाई -छटाई को कहा जाता है जिसमे सुखी और फालतू टहनियों को काट दिया जाता है धन्यवाद
Posted by Abhishek Vishwakarma
Uttar Pradesh
15-02-2020 09:24 AM
Punjab
02-17-2020 12:07 PM
अभिषेक जी कृपया आप अपना सवाल विस्तार से पूछे ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by puneet yadav
Uttar Pradesh
15-02-2020 09:21 AM
Punjab
02-17-2020 06:44 PM
Puneet yadav जी,नेपियर hybrid बाज़रा की cutting लेने के लिए आप Bharat Bhushan 9412568747 से सम्पर्क करें, धन्यवाद.
Posted by Anil Singh
Uttar Pradesh
15-02-2020 09:20 AM
Punjab
02-17-2020 12:03 PM
अनिल जी आप सब्जियां जैसे ग्वार, खीरा-ककड़ी, लोबिया, करेला, लौकी, तुरई, पेठा, खरबूजा, तरबूज, पालक, भिण्डी, अरबी ,चौलाई, मूली फूलगोभी, बैंगन, प्याज, मूली, मिर्च की बिजाई कर सकते है धन्यवाद
Posted by Rajkumar Chouhan
Madhya Pradesh
15-02-2020 09:16 AM
Punjab
02-15-2020 10:42 AM
राजकुमार जी यह देसी क्रॉस नस्ल की बकरी है
Posted by sudhanshu verma
Uttar Pradesh
15-02-2020 09:14 AM
Punjab
02-17-2020 12:01 PM
वर्मा जी यह फंगस है इसकी रोकथाम के लिए आप carbendazim @400 ग्राम को प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by Pritam Pritam
Chattisgarh
15-02-2020 08:48 AM
Punjab
02-17-2020 11:59 AM
कृषि में हरी खाद उस सहायक फसल को कहते हैं जिसकी खेती मुख्यत: भूमि में पोषक तत्त्वों को बढ़ाने तथा उसमें जैविक पदाथों की पूर्ति करने के उद्देश्य से की जाती है प्राय: इस तरह की फसल को इसके हरी स्थिति में ही हल चलाकर मिट्टी में मिला दिया जाता है
Posted by mohit
Chandigarh
15-02-2020 08:46 AM
Punjab
02-15-2020 10:43 AM
मोहित जी कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by tejaram jat
Rajasthan
15-02-2020 08:45 AM
Punjab
02-17-2020 11:57 AM
बिजाई के बाद तुरंत सिंचाई करना आवश्यक है गर्मियों में, 4-5 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है और बारिश के मौसम में सिंचाई आवश्कयकता अनुसार करें
Posted by Amit Mishra
Madhya Pradesh
15-02-2020 08:39 AM

Punjab
02-17-2020 11:49 AM
Amit ji kripya aap apna swal vistar se pooche taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake,dhanywad
Posted by Sukhwinder Rai
Punjab
15-02-2020 08:29 AM
Punjab
02-17-2020 10:43 AM
ਸੁਖਵਿੰਦਰ ਜੀ ਤੁਸੀ ਨਰਮੇ ਦੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਜਿਵੇ RCH134Bt: ਇਹ ਨਰਮੇ ਦੀ ਸਭ ਤੋਂ ਉੱਚ ਪੈਦਾਵਾਰ ਵਾਲੀ ਬੀ ਟੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ ਸੁੰਡੀ ਅਤੇ ਅਮਰੀਕਨ ਸੁੰਡੀ ਦੀ ਰੋਧਕ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 160-165 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਔਸਤਨ ਪੈਦਾਵਾਰ 11.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਰੇਸ਼ੇ ਦੀ ਗੁਣਵੱਤਾ ਬਹੁਤ ਵਧੀਆ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਦੀ ਪਿੰਜਾਈ ਤੋਂ ਬਾਅਦ 34.4% ਤੱਕ ਰੂੰ ਤਿਆਰ ਹ.... (Read More)
ਸੁਖਵਿੰਦਰ ਜੀ ਤੁਸੀ ਨਰਮੇ ਦੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਜਿਵੇ RCH134Bt: ਇਹ ਨਰਮੇ ਦੀ ਸਭ ਤੋਂ ਉੱਚ ਪੈਦਾਵਾਰ ਵਾਲੀ ਬੀ ਟੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ ਸੁੰਡੀ ਅਤੇ ਅਮਰੀਕਨ ਸੁੰਡੀ ਦੀ ਰੋਧਕ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 160-165 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਔਸਤਨ ਪੈਦਾਵਾਰ 11.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਰੇਸ਼ੇ ਦੀ ਗੁਣਵੱਤਾ ਬਹੁਤ ਵਧੀਆ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਦੀ ਪਿੰਜਾਈ ਤੋਂ ਬਾਅਦ 34.4% ਤੱਕ ਰੂੰ ਤਿਆਰ ਹੁੰਦੀ ਹੈ RCH 317Bt: ਇਹ ਨਰਮੇ ਦੀ ਉੱਚ ਪੈਦਾਵਾਰ ਵਾਲੀ ਬੀ ਟੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ ਧੱਬੇਦਾਰ ਸੁੰਡੀ ਅਤੇ ਅਮਰੀਕਨ ਸੁੰਡੀ ਦੀ ਰੋਧਕ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 160-165 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਕਿਸਮ ਦੇ ਟੀਂਡੇ ਦਾ ਭਾਰ 3.8 ਗ੍ਰਾਮ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ ਪੂਰੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਫੁੱਲ ਕੇ ਖਿੜ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਔਸਤਨ ਪੈਦਾਵਾਰ 10.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਪਿੰਜਾਈ ਤੋਂ ਬਾਅਦ 33.9% ਤੱਕ ਰੂੰ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ MRC 6301Bt: ਇਹ ਨਰਮੇ ਦੀ ਉੱਚ ਪੈਦਾਵਾਰ ਵਾਲੀ ਬੀ ਟੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ ਧੱਬੇਦਾਰ ਸੁੰਡੀ ਅਤੇ ਅਮਰੀਕਨ ਸੁੰਡੀ ਦੀ ਰੋਧਕ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 160-165 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਟੀਂਡੇ ਦਾ ਭਾਰ 4.3 ਗ੍ਰਾਮ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਔਸਤਨ ਪੈਦਾਵਾਰ 10 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਦੀ ਪਿੰਜਾਈ ਤੋਂ ਬਾਅਦ 34.7% ਤੱਕ ਰੂੰ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ MRC 6304BT: ਇਹ ਨਰਮੇ ਦੀ ਉੱਚ ਪੈਦਾਵਾਰ ਵਾਲੀ ਬੀ ਟੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ ਧੱਬੇਦਾਰ ਸੁੰਡੀ ਅਤੇ ਅਮਰੀਕਨ ਸੁੰਡੀ ਦੀ ਰੋਧਕ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 160-165 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਟੀਂਡੇ ਦਾ ਭਾਰ 3.9 ਗ੍ਰਾਮ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਔਸਤਨ ਪੈਦਾਵਾਰ 10.1 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਦੀ ਪਿੰਜਾਈ ਤੋਂ ਬਾਅਦ 35.2% ਤੱਕ ਰੂੰ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ Ankur 651: ਇਹ ਕਿਸਮ ਤੇਲੇ ਅਤੇ ਪੱਤਾ ਮਰੋੜ ਦੀ ਰੋਧਕ ਹੈ ਬੂਟੇ ਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 97 ਸੈਂ.ਮੀ. ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 170 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ ਨਰਮਾ-ਕਣਕ ਦੇ ਫਸਲੀ-ਚੱਕਰ ਦੇ ਅਨੁਕੂਲ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਔਸਤਨ ਪੈਦਾਵਾਰ 7 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਪਿੰਜਾਈ ਤੋਂ ਬਾਅਦ 32.5% ਤੱਕ ਰੂੰ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ Whitegold: ਇਹ ਹਾਈਬ੍ਰਿਡ ਕਿਸਮ ਹੈ, ਜੋ ਕਿ ਪੱਤਾ ਮਰੋੜ ਬਿਮਾਰੀ ਦੀ ਰੋਧਕ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਪੱਤੇ ਗੂੜੇ ਹਰੇ ਰੰਗ ਦੇ, ਚੌੜੇ ਅਤੇ ਉਂਗਲੀਆਂ ਦੇ ਆਕਾਰ ਦੇ ਬਣੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਬੂਟੇ ਦਾ ਔਸਤਨ ਕੱਦ 125 ਸੈਂ.ਮੀ. ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 180 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਔਸਤਨ ਪੈਦਾਵਾਰ 6.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਪਿੰਜਾਈ ਤੋਂ ਬਾਅਦ 30% ਤੱਕ ਰੂੰ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ LHH 144: ਇਹ ਹਾਈਬ੍ਰਿਡ ਕਿਸਮ ਹੈ, ਜੋ ਕਿ ਪੱਤਾ ਮਰੋੜ ਬਿਮਾਰੀ ਦੀ ਰੋਧਕ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਪੱਤੇ ਭਿੰਡੀ ਦੇ ਪੱਤਿਆਂ ਵਰਗੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸ ਦੇ ਟਿੰਡੇ ਦਾ ਔਸਤਨ ਭਾਰ 5.5 ਗ੍ਰਾਮ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 180 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ ਨਰਮਾ-ਕਣਕ ਦੇ ਫਸਲੀ-ਚੱਕਰ ਦੇ ਅਨੁਕੂਲ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਔਸਤਨ ਪੈਦਾਵਾਰ 7.6 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਅਤੇ ਪਿੰਜਾਈ ਤੋਂ ਬਾਅਦ 33% ਤੱਕ ਰੂੰ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ F1861: ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੱਤਾ ਮਰੋੜ ਬਿਮਾਰੀ ਨੂੰ ਸਹਾਰਨਯੋਗ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਪੌਦੇ ਦਾ ਕੱਦ ਲਗਭਗ 135 ਸੈਂ.ਮੀ. ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 180 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਔਸਤਨ ਪੈਦਾਵਾਰ 6.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਪਿੰਜਾਈ ਤੋਂ ਬਾਅਦ 33.5% ਤੱਕ ਰੂੰ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ F1378: ਇਹ ਕਿਸਮ ਕਾਫ਼ੀ ਜ਼ਿਆਦਾ ਪੈਦਾਵਾਰ ਵਾਲੀ ਮੰਨੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਪੌਦੇ ਦਾ ਕੱਦ ਲਗਭਗ 150 ਸੈਂ.ਮੀ. ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਟੀਂਡੇ ਖਿੜ੍ਹੇ ਹੋਏ ਵੱਡੇ ਅਤੇ ਗੋਲ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ ਕਿਸਮ 180 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਔਸਤਨ ਪੈਦਾਵਾਰ 10 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਪਿੰਜਾਈ ਤੋਂ ਬਾਅਦ 35.5% ਤੱਕ ਰੂੰ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ F846: ਇਹ ਕਿਸਮ ਦਰਮਿਆਨੀ ਸੰਘਣੀ ਅਤੇ ਵੱਧ ਪੈਦਾਵਾਰ ਵਾਲੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਪੌਦੇ ਦਾ ਕੱਦ ਲਗਭਗ 134 ਸੈਂ.ਮੀ. ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 180 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਔਸਤਨ ਪੈਦਾਵਾਰ 11 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਪਿੰਜਾਈ ਤੋਂ ਬਾਅਦ 35.3% ਤੱਕ ਰੂੰਈ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ LHH 1556: ਇਹ ਘੱਟ ਸਮੇਂ ਵਿਚ ਤਿਆਰ ਹੋਣ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਪੌਦੇ ਦਾ ਕੱਦ ਲਗਭਗ 140 ਸੈਂ.ਮੀ. ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਪੱਤੇ ਹਲਕੇ ਹਰੇ ਰੰਗ ਦੇ ਅਤੇ ਟੀਂਡੇ ਗੋਲ ਆਕਾਰ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ 165 ਦਿਨਾਂ ਵਿਚ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਔਸਤਨ ਪੈਦਾਵਾਰ 8.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ Moti: ਇਹ ਸੋਕੇ ਦੀ ਬਿਮਾਰੀ ਨੂੰ ਸਹਿਣਯੋਗ ਦੇਸੀ ਨਰਮੇ ਦੀ ਹਾਈਬ੍ਰਿਡ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਪੌਦੇ ਦਾ ਕੱਦ ਲਗਭਗ 164 ਸੈਂ.ਮੀ. ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਪੱਤੇ ਤੰਗ ਅਤੇ ਫੁੱਲ ਚਿੱਟੇ ਰੰਗ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸ ਦੇ ਟੀਂਡੇ ਵੱਡੇ ਆਕਾਰ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ 165 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਔਸਤਨ ਪੈਦਾਵਾਰ 8.45 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਪਿੰਜਾਈ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਇਸ ਤੋਂ 38.6% ਰੂੰ ਤਿਆਰ ਹੁੰਦੀ ਹੈ
Posted by armaan deep
Punjab
15-02-2020 08:28 AM
Punjab
02-17-2020 11:56 AM
Arman ji tuc NPK 191919@1 kilo nu 150 litre pani vich mila ke spray kar sakde ho.isde nal kanak da futara ho jayega.dhanwad
Posted by gautam aryan
Bihar
15-02-2020 08:25 AM
Punjab
02-17-2020 10:47 AM
गौतम जी कृपया आप इसकी फोटो भेजे ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by gurpreet
Punjab
15-02-2020 08:14 AM
Rajasthan
02-15-2020 10:44 AM
Gurpreet ji ehh Burri nasal di jhoti hai..
Posted by SATISH Kumar
Haryana
15-02-2020 07:59 AM
Punjab
02-17-2020 11:38 AM
उत्तरी राज्यों में, बसंत के समय टमाटर की पनीरी नवंबर के आखिर में बोयी जाती है और जनवरी के दूसरे पखवाड़े में खेत में लगाई जाती है पतझड़ के समय पनीरी की बिजाई जुलाई-अगस्त में की जाती है और अगस्त-सितंबर में यह खेत में लगा दी जाती है पहाड़ी इलाकों में इसकी बिजाई मार्च-अप्रैल में की जाती है और अप्रैल-मई में यह खेत .... (Read More)
उत्तरी राज्यों में, बसंत के समय टमाटर की पनीरी नवंबर के आखिर में बोयी जाती है और जनवरी के दूसरे पखवाड़े में खेत में लगाई जाती है पतझड़ के समय पनीरी की बिजाई जुलाई-अगस्त में की जाती है और अगस्त-सितंबर में यह खेत में लगा दी जाती है पहाड़ी इलाकों में इसकी बिजाई मार्च-अप्रैल में की जाती है और अप्रैल-मई में यह खेत में लगा दी जाती है Hisar Arun (Selection 7): यह जल्दी पकने वाली और रोपाई के बाद 70 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके फलों की संख्या ज्यादा और फल आकार में बड़े होते हैं इसकी औसतन पैदावार 100 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Hisar Lalit (NT 8): यह किस्म जड़ गलन के प्रतिरोधी है इसकी औसतन पैदावार 100-120 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Hissar Lalima (Selection 18): यह जल्दी पकने वाली किस्म है इसके फल बड़े लाल रंग के होते हैं रोपाई के बाद यह फसल 60-70 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 120 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Punjab Chhuhara: यह किस्म बीज रहित, नाशपाती के आकार की, लाल और मोटे छिल्के वाली होती है इसकी क्वालिटी कटाई के बाद 7 दिन तक मंडी में बेचनेयोग्य होती है इसलिए इसे लंबी दूरी वाली स्थानों पर लिजाकर नए उत्पाद तैयार करने के लिए प्रयोग किया जा सकता है HS 110: इसके फल आकार में बड़े होते हैं इसकी औसतन पैदावार 80-100 क्विंटल प्रति एकड़ होती है HS 101: यह उत्तरी भारत में सर्दियों के समय लगाई जाने वाली किस्म है इसके पौधे छोटे होते हैं इस किस्म के टमाटर गोल और दरमियाने आकार के और रसीले होते हैं यह गुच्छों के रूप में लगते हैं यह पत्ता मरोड़ बीमारी की रोधक किस्म है इसकी औसतन पैदावार 100-110 क्विंटल प्रति एकड़ होती है HS 102: यह किस्म जल्दी पक जाती है इस किस्म के टमाटर छोटे और दरमियाने आकार के गोल और रसीले होते हैं इसकी औसतन पैदावार 100-110 क्विंटल प्रति एकड़ होती है H 24: इसके फल मध्यम बड़े आकार के होते हैं यह पत्ता मरोड़ बीमारी के प्रतिरोधक होती है इसकी औसतन पैदावार 80-90 क्विंटल प्रति एकड़ होती है H 86: इसके फल मध्यम बड़े आकार के होते हैं यह पत्ता मरोड़ बीमारी के प्रतिरोधक होती है इसकी औसतन पैदावार 80-100 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Hisar Gaurav: इस हाइब्रिड किस्म की औसतन पैदावार 120-130 क्विंटल प्रति एकड़ होती है HTH-2-2: इस हाइब्रिड किस्म की औसतन पैदावार 120-146 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Posted by Harman Maan
Punjab
15-02-2020 07:02 AM
Punjab
02-16-2020 11:21 AM
ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ ਪੇਟ ਦੇ ਕੀੜਿਆਂ ਲਈ piperazine ਦਵਾਈ ਦਿਓ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ ਕਾਰਗਿਲ ਦੀ Calf grower ਫੀਡ ਦੇਣੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਅਤੇ ਵਧਿਆ ਮਾਤਰਾ ਵਿਚ ਚਾਰਾ ਦਿਓ ਬਾਕੀ ਉਸ ਨੂੰ ਖੁਰਾਕ ਦੇ ਨਾਲ ਨਾਲ Cafplan ਪਾਊਡਰ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਇਸ ਨਾਲ ਵਧਿਆ ਗਰੋਥ ਹੋ ਜਾਵੇਗੀ
Posted by छत्रपति यादव
Chattisgarh
15-02-2020 06:40 AM
Punjab
02-17-2020 11:20 AM
छत्रपति जी कृपया बताये कि आपने इसमें क्या क्या खाद डाली है ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by छत्रपति यादव
Chattisgarh
15-02-2020 06:39 AM
Punjab
02-17-2020 11:21 AM
यादव जी कृपया बताये कि आपने इसमें क्या क्या खाद डाली है ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by ਸੁਖिਜੰਦਰ िਸੰਘ
Punjab
15-02-2020 05:25 AM
Rajasthan
02-16-2020 11:22 AM
ਪਸ਼ੂਆਂ ਨੂੰ ਘਰ ਵਿਚ ਫੀਡ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਦੇਣੀ ਹੈ ਤਾਂ ਸੰਤੁਲਿਤ ਖੁਰਾਕ 100 ਕਿਲੋ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਲੋੜੀਂਦੀ ਸਮੱਗਰੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਜਿਵੇਂ 25 ਕਿਲੋ ਅਨਾਜ ( ਜਵਾਰ, ਬਾਜਰੀ (ਸਰਦੀਆਂ) , ਕਣਕ, ਜੌਂ ( ਗਰਮੀਆ) ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਕੋਈ ਇੱਕ ) , ਦਾਲ ਚੂਰੀ 20 ਕਿਲੋ( ਮੂੰਗੀ ਚੂਰੀ, ਮਾਂਹ ਚੂਰੀ, ਮੋਠ ਚੂਰੀ ( ਕੇਵਲ ਸਰਦੀਆਂ ਲਈ) , ਮਸੁਰ ਚੂਰੀ ,ਅਰਹਰ, (ਇਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਇੱਕ ) , DOC 25 ਕਿਲੋ ( ਚੌਲਾਂ ਦਾ ਚੂਰਾ ) , ਫਾਈਬਰ ਛਿਲਕਾ 15 ਕ.... (Read More)
ਪਸ਼ੂਆਂ ਨੂੰ ਘਰ ਵਿਚ ਫੀਡ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਦੇਣੀ ਹੈ ਤਾਂ ਸੰਤੁਲਿਤ ਖੁਰਾਕ 100 ਕਿਲੋ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਲੋੜੀਂਦੀ ਸਮੱਗਰੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਜਿਵੇਂ 25 ਕਿਲੋ ਅਨਾਜ ( ਜਵਾਰ, ਬਾਜਰੀ (ਸਰਦੀਆਂ) , ਕਣਕ, ਜੌਂ ( ਗਰਮੀਆ) ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਕੋਈ ਇੱਕ ) , ਦਾਲ ਚੂਰੀ 20 ਕਿਲੋ( ਮੂੰਗੀ ਚੂਰੀ, ਮਾਂਹ ਚੂਰੀ, ਮੋਠ ਚੂਰੀ ( ਕੇਵਲ ਸਰਦੀਆਂ ਲਈ) , ਮਸੁਰ ਚੂਰੀ ,ਅਰਹਰ, (ਇਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਇੱਕ ) , DOC 25 ਕਿਲੋ ( ਚੌਲਾਂ ਦਾ ਚੂਰਾ ) , ਫਾਈਬਰ ਛਿਲਕਾ 15 ਕਿਲੋ (ਕਣਕ, ਚੌਕਰ, ਚਨਾ ਛਿਲਕਾ, ਮਟਰ ਛਿਲਕਾ, ਇਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਇੱਕ) , ਖਲ਼ 15 ਕਿਲੋ(ਸਰੋਂ, ਬਿਨੌਲਾ ਜਾਂ ਸੋਇਆ (ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਕੋਈ ਇੱਕ) , ਮਿੱਠਾ ਸੋਡਾ 250 ਗ੍ਰਾਮ, 1 ਕਿਲੋ ਨਮਕ, ਗੁੜ 1 ਕਿਲੋ, 1 ਕਿੱਲੋ ਹਲਦੀ (ਸਰਦੀਆ ਵਿੱਚ ) ਇਹ ਨੂੰ ਰਲਾ ਲਵੋ ਇਹ ਫੀਡ ਪਸ਼ੂ ਲਈ ਬਹੁਤ ਲਾਹੇਵੰਦ ਹੁੰਦੀ ਹੈ.
Posted by arshad ali
Jharkhand
15-02-2020 02:24 AM
Punjab
02-16-2020 11:23 AM
Ali ji aap goat farming ke liye achi nasal ki goat lene ke liye Ritesh Kumar 9334728654 New jyoti Foundation se sampark kr skte hai.
Posted by Govind Sane
Maharashtra
15-02-2020 12:56 AM
Punjab
02-16-2020 11:26 AM
यदि आप लेयर मुर्गी पालन करना चाहते है तो लेयर फार्मिंग के लिए आपको 50 फीट लंबाई वाली जगह और 20 फीट चौड़ाई वाली जगह की जरूरत होती है यह आपका 1000 वर्ग फुट जगह बन जाती है यहां आप 1000 बच्चों को रख सकते हैं इस प्रकार आप अपने बजट के हिसाब से बच्चों को रख सकते है और यदि आप लेयर का बच्चा अपने फार्म पर तैयार करते है तो आपको बच्च.... (Read More)
यदि आप लेयर मुर्गी पालन करना चाहते है तो लेयर फार्मिंग के लिए आपको 50 फीट लंबाई वाली जगह और 20 फीट चौड़ाई वाली जगह की जरूरत होती है यह आपका 1000 वर्ग फुट जगह बन जाती है यहां आप 1000 बच्चों को रख सकते हैं इस प्रकार आप अपने बजट के हिसाब से बच्चों को रख सकते है और यदि आप लेयर का बच्चा अपने फार्म पर तैयार करते है तो आपको बच्चा अंडे देने तक 160—170 रूप्ये प्रति बच्चे के हिसाब से खर्चा आएगा यदि आप तैयार बच्चा लेकर आते है तो वो आपको 205—210 रूप्ये प्रति बच्चे के हिसाब से पड़ेगा फिर आप उस हिसाब से इनको खरीद सकते है. इसका रेट मार्किट में चल रहे रेट के हिसाब से होता है पहले आप अपने बजट के हिसाब लेयर फार्मिंग करें फिर जैसे जैसे आपको काम की जानकारी होती रहेगी
Posted by Rohit
Uttar Pradesh
15-02-2020 12:47 AM
Punjab
02-17-2020 11:29 AM
Rohit ji you can sow guava, amla or kinnu and for further information you can contact to Dr. Arun Singh 9792032415.thank you
Posted by ਹਰਭਜਨ ਸਿੰਘ
Punjab
15-02-2020 12:07 AM
Punjab
02-16-2020 11:26 AM
ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਤੁਹਾਡੇ ਲਈ ਇਹ ਜਾਨਣਾ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਕਿ ਮੁਰਗੀ ਪਾਲਣ ਦਾ ਧੰਦਾ ਦੋ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਕਿ ਤੁਸੀ ਆਂਡਿਆਂ ਦਾ ਧੰਦਾ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਜਾਂ ਮੀਟ ਦਾ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਆਂਡਿਆਂ ਦਾ ਧੰਦਾ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਲੇਇਰ ਮੁਰਗੀਆਂ ਪਾਲਣੀਆਂ ਪੈਣਗੀਆਂ ਅਤੇ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਮੀਟ ਦਾ ਧੰਦਾ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਬਰਾਇਲਰ ਮੁਰਗੀਆਂ ਪਾਲਣੀਆਂ ਪੈਣਗੀਆਂ ਜੇਕ.... (Read More)
ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਤੁਹਾਡੇ ਲਈ ਇਹ ਜਾਨਣਾ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਕਿ ਮੁਰਗੀ ਪਾਲਣ ਦਾ ਧੰਦਾ ਦੋ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਕਿ ਤੁਸੀ ਆਂਡਿਆਂ ਦਾ ਧੰਦਾ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਜਾਂ ਮੀਟ ਦਾ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਆਂਡਿਆਂ ਦਾ ਧੰਦਾ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਲੇਇਰ ਮੁਰਗੀਆਂ ਪਾਲਣੀਆਂ ਪੈਣਗੀਆਂ ਅਤੇ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਮੀਟ ਦਾ ਧੰਦਾ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਬਰਾਇਲਰ ਮੁਰਗੀਆਂ ਪਾਲਣੀਆਂ ਪੈਣਗੀਆਂ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਬਰਾਇਲਰ ਮੁਰਗੀ ਫਾਰਮਿੰਗ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਅਤੇ ਘੱਟ ਤੋਂ ਘੱਟ 10 ਹਜਾਰ ਮੁਰਗੀਆਂ ਦਾ ਧੰਦਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ 4 ਤੋਂ 5 ਲੱਖ ਦਾ ਇੰਤਜਾਮ ਕਰਨਾ ਪਵੇਗਾ, ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਪੋਲਟਰੀ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈ ਕੇ ਨਾਬਾਰਡ ਤੋਂ ਲੋਨ ਲੈਂਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ 25 ਤੋਂ 35 % ਤੱਕ ਸਬਸਿਡੀ ਮਿਲ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਲੋਨ ਅਪਲਾਈ ਕਰਨ ਦੀ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਤੁਹਾਨੂੰ ਵਿੱਭਾਗ ਵੱਲੋਂ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਦਿਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈਣ ਲਈ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਨਜ਼ਦੀਕੀ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਕੇਦਰ ਤੋਂ ਜਾਂ ਗੁਰੂ ਅੰਗਦ ਦੇਵ ਵੈਟਨਰੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋਂ ਜਾਂ ਫਿਰ ਤੁਸੀ ਕਿਸੇ ਵੀ ਦਿਨ ਆਪਣੇ ਨਜ਼ਦੀਕੀ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਕੇਦਰ ਤੇ ਪਹੁੰਚ ਕੇ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈਣ ਲਈ ਫਾਰਮ ਭਰ ਆਊ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਜਦੋਂ ਵੀ ਪੋਲਟਰੀ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਆਵੇਗੀ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਕੇਦਰ ਵੱਲੋਂ ਕਾਲ ਕਰਕੇ ਦੱਸ ਦਿੱਤਾ ਜਾਦਾ ਹੈ ਬਹੁਤ ਵਧੀਆ ਕੰਮ ਹੈ ਜੀ ਪੋਲਟਰੀ ਦਾ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਬ੍ਰਾਇਲਰ ਰੱਖਦੇ ਹੋਂ ਤਾਂ 5 ਤੋਂ 6 ਹਫਤਿਆਂ ਦੇ ਅੰਦਰ ਅੰਦਰ ਮੰਡੀਕਰਣ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਤਕਰੀਬਨ ਪੰਜ ਮਹੀਨਿਆਂ ਵਿੱਚ ਅੰੰਡਿਆ ਦੀ ਉਪਜ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਸਾਰਾ ਸਾਲ ਦੀ ਆਮਦਨ ਵਾਲਾ ਕੰਮ ਹੈ ਜੀ ਜਿਆਦਾ ਮਿਹਨਤ ਵੀ ਨਹੀ ਲੱਗਦੀ ਇਹ ਨਾਜੁਕ ਕਿਸਮ ਦੇ ਜਾਨਵਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਕੁੱਝ ਕੁ ਖਤਰਨਾਕ ਬਿਮਾਰੀਆ ਵੀ ਹਨ ਜਿੰਨਾਂ ਤੋੰ ਬਚਣ ਲਈ ਖਾਸ ਧਿਆਨ ਰੱਖਣ ਦੀ ਜਰੂਰਤ ਹੂੰਦੀ ਹੈ.
Posted by अनिल घोरमाडे
Maharashtra
15-02-2020 12:07 AM
Punjab
02-17-2020 11:36 AM
अनिल जी आप इसकी जड़ें चेक करें अगर दीमक मौजूद है तो आप chlorpyriphos @4ml को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by Dibakar Panda
Odisha
14-02-2020 11:55 PM

Punjab
02-17-2020 12:06 PM
Posted by Vansh Yadav
Uttar Pradesh
14-02-2020 11:34 PM
Punjab
02-17-2020 10:12 AM
बढ़िया वर्मी कंपोस्ट निम्नलिखित तरीके अनुसार बनायी जा सकती है इसलिए ऐसा स्थान लें जहां धूप ना आये और हवादार हो इस स्थान पर ईंटों या पत्थर के टुकड़े और मिट्टी की 2—3 इंच मोटी परत बिछायें मिट्टी पर थोड़ा सा पानी छिड़ककर गीला करें मिट्टी में 25 प्रतिशत से अधिक नमी नहीं होनी चाहिए इसके ऊपर गंडोए (40 गंडोए प्रति वर्.... (Read More)
बढ़िया वर्मी कंपोस्ट निम्नलिखित तरीके अनुसार बनायी जा सकती है इसलिए ऐसा स्थान लें जहां धूप ना आये और हवादार हो इस स्थान पर ईंटों या पत्थर के टुकड़े और मिट्टी की 2—3 इंच मोटी परत बिछायें मिट्टी पर थोड़ा सा पानी छिड़ककर गीला करें मिट्टी में 25 प्रतिशत से अधिक नमी नहीं होनी चाहिए इसके ऊपर गंडोए (40 गंडोए प्रति वर्ग फीट जगह) में मिलायें इसके बाद वेस्ट जैसे कि बची कुची सब्जियां, फल, कच्चा गोबर, गोबर की सलरी की 8—10 इंच मोटी परत डालें दूसरी परत के बाद इसके ऊपर सूखे पत्ते या पराली से ढक दें हर परत के बाद पानी छिड़कें ताकि नमी बनी रहे वर्मीकंपोस्ट के बैड को 3—4 इंच मोटी गोबर की परत से ढक दें और इसके ऊपर बोरा या तिरपाल रखें ताकि नमी बनी रहे रसोई, फसलों या डेयरी के बचे कुचे की परत को रैक से पलटते रहें और आवश्यकतानुसार थोड़ा थोड़ा करके और वेस्ट भी डाल सकते हैं इसके ऊपर कच्चा गोबर भी डाल सकते हैं पर ध्यान रखें कि यह परत पहले जितनी ही मोटी रहें वर्मी कंपोस्ट की खाद मौसम के हिसाब से 45—60 दिनों में तैयार हो जाती है सबसे ऊपर वाली परत को हटाकर गंडोए छलनी से अलग कर लें और निचली छोड़ दें इसके ऊपर दोबारा रसोई या एग्रो वेस्ट की 6 इंच मोटी परत बिछाकर दोबारा खाद तैयार की जा सकती हैं 45 दिनों के बाद पानी छिड़कना बंद करने से भी गंडोए निचली परत में चले जाते हैं और छलनी से अलग करने में समय कम लगता है तैयार वर्मी कंपोस्ट काले भूरे रंग की गंध रहित और चाय पत्ती जैसी होती है इसे छांव में हवा में सुखकर आवश्यकतानुसार थैले या बोरियों में डालकर रखा जा सकता है एक टन वर्मी कंपोस्ट में 1.0—1.5 किलोग्राम नाइट्रोजन, 5—10 किलोग्राम पोटाश और 3.5—5.0 किलो फासफोरस होता है इसके अलावा इसमें कई तरह के एन्ज़ाइम और सूक्ष्म तत्व कॉपर, आयरन, जिंक, सल्फर, कैलशियम और मैगनीशियम आदि होते हैं
Posted by R.Bala ji soni
Uttar Pradesh
14-02-2020 11:10 PM
Punjab
02-17-2020 10:16 AM
इसे मिट्टी की कई किस्मों जैसे रेतली दोमट से काली मिट्टी में उगाया जा सकता है यह उपजाऊ और जल निकास वाली मिट्टी में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है यह फसल हल्की क्षारीय मिट्टी को भी सहनेयोग्य है अम्लीय और जल जमाव वाली मिट्टी में इसकी खेती करने से परहेज़ करें मिट्टी की पी एच लगभग 6.5-8 होनी चाहिए Jwalamukhi - यह दरमियाने क.... (Read More)
इसे मिट्टी की कई किस्मों जैसे रेतली दोमट से काली मिट्टी में उगाया जा सकता है यह उपजाऊ और जल निकास वाली मिट्टी में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है यह फसल हल्की क्षारीय मिट्टी को भी सहनेयोग्य है अम्लीय और जल जमाव वाली मिट्टी में इसकी खेती करने से परहेज़ करें मिट्टी की पी एच लगभग 6.5-8 होनी चाहिए Jwalamukhi - यह दरमियाने कद की किस्म है पौधे का कद 170 सैं.मी. है फसल 120 दिनों में पक जाती है इसकी औसत पैदावार 7.3 क्विंटल प्रति एकड़ है तेल की मात्रा 42 प्रतिशत है GKSFH 2002 - यह दरमियाने कद की दोगली किस्म है फसल 115 दिनों में पक जाती है इसकी औसत पैदावार 7.5 क्विंटल प्रति एकड़ है तेल की मात्रा 42.5 प्रतिशत है PSH 569 - पौधे का कद 141 सै.मी. है फसल 98 दिनों में पक जाती है यह किस्म पिछेती बिजाई के लिए अनुकूल है इसकी औसत पैदावार 7.44 क्विंटल प्रति एकड़ है और 36.3 प्रतिशत तेल होता है सीड बैड तैयार करने के लिए दो से तीन बार जोताई करके सुहागा फेरें अच्छी उपज के लिए बिजाई अंत जनवरी तक पूरी कर लें बिजाई में देरी करने से, यदि बिजाई फरवरी के महीने में की गई हो तो रोपण विधि का प्रयोग करें, क्योंकि सीधी बिजाई करने से उपज में कमी आती है और देरी से बिजाई करने पर कीटों और बीमारियों का हमला बढ़ जाता है अधिक पैदावार लेने के लिए फसल को जनवरी के आखिर तक लगा दें यदि बिजाई फरवरी महीने में करनी हो तो पनीरी से करें क्योंकि इस समय सीधी बिजाई वाली फसल को कीड़े और बीमारियां ज्यादा लगती हैं दो पंक्तियों में 60 सै.मी. और दो पौधों के बीच में 30 सै.मी. की दूरी रखें बीजों को 4-5 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई गड्ढा खोदकर की जाती है इसके इलावा बीजों को बिजाई वाली मशीन से बैड बनाकर या मेड़ बनाकर की जाती है देर से बीजने वाली फसल के लिए पनीरी का प्रयोग करें और 1 एकड़ खेत के लिए 30 वर्ग मीटर क्षेत्र की पनीरी का प्रयोग किया जाता है 1.5 किलो एस एस पी डालें और बैडों को पलास्टिक की शीट हटा दें और 4 पत्तों वाले बूटों को खेत में लगाएं पनीरी को उखाड़ने से पहले सिंचाई करें बिजाई के लिए 2-3 किलोग्राम प्रति एकड़ बीज का प्रयोग करें हाइब्रिड के लिए 2-2.5 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बिजाई से पहले बीज को 24 घंटों के लिए पानी में डालें फिर छांव में सुखाएं और 2 ग्राम प्रति किलो थीरम से उपचार करें इससे बीज को मिट्टी के कीड़ों और बीमारियों से बचाया जा सकता है फसल को पीले धब्बों के रोगों से बचाने के लिए बीज को मैटालैक्सिल 6 ग्राम या इमीडाक्लोपरिड 5-6 मि.ली. प्रति किलो बीज से उपचार करें बिजाई से 2-3 सप्ताह पहले 4-5 टन रूड़ी की खाद डालें ज़मीन में 24 किलो नाइट्रोजन (50 किलो यूरिया) 12 किलो फासफोरस (75 किलो एस एस पी) की मात्रा प्रति एकड़ में प्रयोग करें सही मात्रा में खाद डालने के लिए मिट्टी की जांच करवाएं आधी नाइट्रोजन, पूरी फासफोरस और पोटाश बिजाई के समय और बाकी नाइट्रोजन बिजाई से 30 दिनों के बाद डालें सिंचित क्षेत्रों में बाकी नाइट्रोजन को दो भागों में बिजाई से 30 दिनों बाद डालें सूरजमुखी के पौधे को पहले 45 दिन नदीन मुक्त रखें और गंभीर अवस्थाओं में फसल पर सिंचाई करें बिजाई के 2-3 सप्ताह बाद पहली गोडाई और 6 सप्ताह बाद दूसरी गोडाई करें नदीनों को रोकने के लिए पैंडीमैथालीन 1 ली. को 150-200 ली. पानी में फसल के उगने से पहले बिजाई के 2-3 दिनों में स्प्रे करें फसल को गिरने से बचाने के लिए 60-70 सै.मी. लंबे बूटों की जड़ों को फूल निकलने से पहले मिट्टी लगाएं जब फसल 60-70 लंबी हो जाये तो फसल को तने टूटने वाली बीमारी से बचाने के लिए फूल बनने से पहले जड़ों में मिट्टी लगादें मिट्टी की किस्म और मौसम के अनुसार 9-10 सिंचाई करें पहली सिंचाई बिजाई से 3 महीने बाद करें फसल को 50 प्रतिशत फूल पड़ने पर, दानों के नर्म और सख्त समय पर सिंचाई अति जरूरी है इस समय पानी की कमी से पैदावार कम हो सकती है बहुत ज्यादा और लगातार सिंचाई करने से उखेड़ा और जड़ों का गलना जैसी बीमारियां लग सकती हैं भारी जमीनों में सिंचाई 20-25 दिन और हल्की ज़मीनों में 8-10 दिनों के फासले पर करें मधु मक्खी बीज बनने में मदद करती है यदि मधु मक्खियां कम हो तो सुबह 8-11 समय 7-10 दिनों के अंतर पर हाथों से पहचान करें इसलिए हाथों को मलमल के कपड़े से ढक लें पत्तों के सूखने और फूलों के पीले रंग के होने पर कटाई करें कटाई में देरी ना करें क्योंकि इससे पत्ते गिर जाते हैं और दीमक का खतरा बढ़ जाता है