
Posted by Anuja Ghätkär
Maharashtra
17-02-2020 02:51 PM
Anuja ji iske vare mai purri jankari lena aur iss kam ki training lene ke liye aap iss no. per mere sath achal singh 9711858258 sampark kr skte hai

Posted by अर्जुन सिंह
Uttar Pradesh
17-02-2020 02:44 PM
अर्जुन जी कृपया सवाल विस्तार से पूछे कि आप अजोला के बारे में क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके

Posted by amrit paul singh
Punjab
17-02-2020 02:43 PM
Amrit ji Resham Ayurvedic nursery da address hai :-Jande Sarai-Kartarpur Rd, Kartarpur Rural, Punjab 144622 phone number surinder Nagra
9814305864
Posted by ਨਵਪਰੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
17-02-2020 02:42 PM
ਨਵਪ੍ਰੀਤ ਜੀ ਹੁਣ ਤੁਸੀ ਪੋਟਾਸ਼ ਦੀ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਜਿਸਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ NPK 130045 @1 ਕਿਲੋ ਨੂੰ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by sumit kumar
Bihar
17-02-2020 02:11 PM
Sumit ji aap aam ke uper NPK 130045@10 gram ko prati litre pani ke hisab se spray karen,dhanywad

Posted by Pardeep Goyal
Haryana
17-02-2020 02:11 PM
Chandigarh ke paas rajpura se mil jayege ji waha par kaafi shop hai. aap yeh 9646640470 number par call karke kharid sakte hai ji.

Posted by Pardeep Goyal
Haryana
17-02-2020 02:09 PM
प्रदीप जी इसकी बिजाई 15 फरवरी तक की जाती है लेकिन आप इसकी एक हफ्ते तक बिजाई कर सकते हैं, आप इसके बीज लेने के लिए Mohammad Shrif 9417150864 Arman Seeds Farm के साथ संम्पर्क कर सकते हैं धन्यवाद

Posted by Akhilesh
Madhya Pradesh
17-02-2020 02:07 PM
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी ख.... (Read More)
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुमब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तहय उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तहय में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तहय लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है
Posted by Gurpreet singh
Punjab
17-02-2020 02:04 PM
ਗੁਰਪ੍ਰੀਤ ਜੀ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਵਿਸਤਾਰ ਨਾਲ ਦੱਸੋ ਕਿ ਤੁਸੀ ਫ਼ਸਲ ਦਾ ਸਿੰਚਾਈ ਪਰਬੰਧਨ ਕਿਵੇਂ ਕੀਤਾ ਹੈ ਤਾਂਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸ ਬਾਰੇ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Mangat
Punjab
17-02-2020 01:51 PM
Mangat ji jekar usda ek sing bilkul tutt gya hai tan tuci dujaa v cut krwa skde ho, uss bina singga ton rakh skde ho..

Posted by prabhjot singh
Punjab
17-02-2020 01:48 PM
Hanji tuci usdi varto kr skde ho suruat vich tuci thodi thodi deo jekar pashu uss nu vdia trike nal hajam krda hai ate vdia dudh dinda hai tan tuci isdi varto kr skde ho..

Posted by atul bhandekar
Maharashtra
17-02-2020 01:41 PM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद

Posted by sohan dass
Punjab
17-02-2020 01:33 PM
Sohan ji tuci nili ravi katti lain lyi Rashpal Singh 9464746578 Deol Dairy Farm nal sampark kr skde ho, ehna ton tuhanu majh ate katti mill jawegi.

Posted by digvijay Kushwaha
Uttar Pradesh
17-02-2020 01:28 PM
digvijay ji kripya aap btaye ke aapne pehle kis kis khaad ka istemal kiya hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake,dhanywad
Posted by Manish Kumar Dandotiya
Madhya Pradesh
17-02-2020 01:24 PM
मनीष जी कृपया आप अपना सवाल विस्तार से पूछे ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by Charanjeet Singh
Punjab
17-02-2020 01:13 PM
ਚਰਨਜੀਤ ਜੀ, ਤੁਸੀਂ ਸਬਜ਼ੀਆਂ ਜਿਵੇਂ ਕੇ ਖੀਰਾ, ਕਰੇਲਾ, ਲੋਕੀ, ਤੋਰੀ, ਪੇਠਾ, ਪਾਲਕ, ਬੈਂਗਣ, ਭਿੰਡੀ, ਅਰਬੀ, ਸ਼ਿਮਲਾ ਮਿਰਚ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਧੰਨਵਾਦ

Posted by भोला सिंह
Punjab
17-02-2020 01:04 PM
ਹਾਜੀ ਸਤਿ ਸ਼੍ਰੀ ਅਕਾਲ ਜੀ ਤੁਹਾਡੇ ਵੱਲੋਂ ਪੁੱਛੇ ਸਾਰੇ ਸਵਾਲਾਂ ਦਾ ਜਵਾਬ ਦਾ ਦਿੱਤਾ ਜਾ ਚੁੱਕਿਆ ਹੈ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਸਵਾਲਾਂ ਦੇ ਜਵਾਬ ਦੇਖਣ ਲਈ ਐਪ ਵਿੱਚ ਮੇਰੇ ਸਵਾਲ ਤੇ ਕਲਿੱਕ ਕਰਕੇ ਜਾਂ ਫਿਰ ਮੇਰੀ ਪ੍ਰੋਫਾਈਲ ਦੇ ਹੇਠਾ ਆਪਣੇ ਸਵਾਲ ਜਵਾਬ ਦੇਖ ਸਕਦੇ ਹੋ ਵੀ ਜੇਕਰ ਤੁਹਾਨੂੰ ਜਵਾਬ ਸਬੰਧੀ ਕਿਸੇ ਤਰਾਂ ਦੀ ਸਮੱਸਿਆ ਆ ਰਹੀ ਹੈ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਸਾਡੇ ਹੈਲਪਲਾਈਨ ਨੰਬਰ: 97799-77641 ਤੇ ਕਾਲ ਕਰ ਸਕਦੇ .... (Read More)
ਹਾਜੀ ਸਤਿ ਸ਼੍ਰੀ ਅਕਾਲ ਜੀ ਤੁਹਾਡੇ ਵੱਲੋਂ ਪੁੱਛੇ ਸਾਰੇ ਸਵਾਲਾਂ ਦਾ ਜਵਾਬ ਦਾ ਦਿੱਤਾ ਜਾ ਚੁੱਕਿਆ ਹੈ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਸਵਾਲਾਂ ਦੇ ਜਵਾਬ ਦੇਖਣ ਲਈ ਐਪ ਵਿੱਚ ਮੇਰੇ ਸਵਾਲ ਤੇ ਕਲਿੱਕ ਕਰਕੇ ਜਾਂ ਫਿਰ ਮੇਰੀ ਪ੍ਰੋਫਾਈਲ ਦੇ ਹੇਠਾ ਆਪਣੇ ਸਵਾਲ ਜਵਾਬ ਦੇਖ ਸਕਦੇ ਹੋ ਵੀ ਜੇਕਰ ਤੁਹਾਨੂੰ ਜਵਾਬ ਸਬੰਧੀ ਕਿਸੇ ਤਰਾਂ ਦੀ ਸਮੱਸਿਆ ਆ ਰਹੀ ਹੈ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਸਾਡੇ ਹੈਲਪਲਾਈਨ ਨੰਬਰ: 97799-77641 ਤੇ ਕਾਲ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋਂ
Posted by amit pandey
Uttar Pradesh
17-02-2020 01:03 PM
इसे आप Intalyte पाउडर 2—2 चम्मच सुबह शाम दें और Vitakind liv liquid 50ml रोजाना दें इससे फर्क पड़ जाएगा
Posted by Narinder Singh
Punjab
17-02-2020 12:48 PM
tuci uss nu CRB injection 20ml, Vitum-H injection 5ml nu lgatar 5 din lgwao ate mamidium powder 50gm rojana dena suru kro fir badd vich vitum-H liquid 10ml rojana deo..
Posted by jay singh
Rajasthan
17-02-2020 12:42 PM
जय जी कृपया आप पौधे की उम्र के बारे में बताये ताकि आपको इसके हिसाब से जानकारी दी जा सके धन्यवाद

Posted by digvijay Kushwaha
Uttar Pradesh
17-02-2020 12:34 PM
Digvijay ji kripya btaye ke aapne isme abhi tak kya kya khaad daali hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake,dhanywad
Posted by Yadveer
Haryana
17-02-2020 12:32 PM
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी ख.... (Read More)
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुमब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तहय उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तहय में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तहय लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है प्रति बैग लगभग 15 kg औसतन उत्पाद निकता है
Posted by Gursewak singh
Punjab
17-02-2020 12:28 PM
ਪਸ਼ੂਆਂ ਨੂੰ ਘਰ ਵਿਚ ਫੀਡ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਦੇਣੀ ਹੈ ਤਾਂ ਸੰਤੁਲਿਤ ਖੁਰਾਕ 100 ਕਿਲੋ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਲੋੜੀਂਦੀ ਸਮੱਗਰੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਜਿਵੇਂ 25 ਕਿਲੋ ਅਨਾਜ ( ਜਵਾਰ, ਬਾਜਰੀ (ਸਰਦੀਆਂ) , ਕਣਕ, ਜੌਂ ( ਗਰਮੀਆ) ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਕੋਈ ਇੱਕ ) , ਦਾਲ ਚੂਰੀ 20 ਕਿਲੋ( ਮੂੰਗੀ ਚੂਰੀ, ਮਾਂਹ ਚੂਰੀ, ਮੋਠ ਚੂਰੀ ( ਕੇਵਲ ਸਰਦੀਆਂ ਲਈ) , ਮਸੁਰ ਚੂਰੀ ,ਅਰਹਰ, (ਇਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਇੱਕ ) , DOC 25 ਕਿਲੋ ( ਚੌਲਾਂ ਦਾ ਚੂਰਾ ) , ਫਾਈਬਰ ਛਿਲਕਾ 15 ਕ.... (Read More)
ਪਸ਼ੂਆਂ ਨੂੰ ਘਰ ਵਿਚ ਫੀਡ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਦੇਣੀ ਹੈ ਤਾਂ ਸੰਤੁਲਿਤ ਖੁਰਾਕ 100 ਕਿਲੋ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਲੋੜੀਂਦੀ ਸਮੱਗਰੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਜਿਵੇਂ 25 ਕਿਲੋ ਅਨਾਜ ( ਜਵਾਰ, ਬਾਜਰੀ (ਸਰਦੀਆਂ) , ਕਣਕ, ਜੌਂ ( ਗਰਮੀਆ) ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਕੋਈ ਇੱਕ ) , ਦਾਲ ਚੂਰੀ 20 ਕਿਲੋ( ਮੂੰਗੀ ਚੂਰੀ, ਮਾਂਹ ਚੂਰੀ, ਮੋਠ ਚੂਰੀ ( ਕੇਵਲ ਸਰਦੀਆਂ ਲਈ) , ਮਸੁਰ ਚੂਰੀ ,ਅਰਹਰ, (ਇਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਇੱਕ ) , DOC 25 ਕਿਲੋ ( ਚੌਲਾਂ ਦਾ ਚੂਰਾ ) , ਫਾਈਬਰ ਛਿਲਕਾ 15 ਕਿਲੋ (ਕਣਕ, ਚੌਕਰ, ਚਨਾ ਛਿਲਕਾ, ਮਟਰ ਛਿਲਕਾ, ਇਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਇੱਕ) , ਖਲ਼ 15 ਕਿਲੋ(ਸਰੋਂ, ਬਿਨੌਲਾ ਜਾਂ ਸੋਇਆ (ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਕੋਈ ਇੱਕ) , ਮਿੱਠਾ ਸੋਡਾ 250 ਗ੍ਰਾਮ, 1 ਕਿਲੋ ਨਮਕ, ਗੁੜ 1 ਕਿਲੋ, 1 ਕਿੱਲੋ ਹਲਦੀ (ਸਰਦੀਆ ਵਿੱਚ ) ਇਹ ਨੂੰ ਰਲਾ ਲਵੋ ਇਹ ਫੀਡ ਪਸ਼ੂ ਲਈ ਬਹੁਤ ਲਾਹੇਵੰਦ ਹੁੰਦੀ ਹੈ.
Posted by Gursewak singh
Punjab
17-02-2020 12:27 PM
ਪਸ਼ੂਆਂ ਨੂੰ ਘਰ ਵਿਚ ਫੀਡ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਦੇਣੀ ਹੈ ਤਾਂ ਸੰਤੁਲਿਤ ਖੁਰਾਕ 100 ਕਿਲੋ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਲੋੜੀਂਦੀ ਸਮੱਗਰੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਜਿਵੇਂ 25 ਕਿਲੋ ਅਨਾਜ ( ਜਵਾਰ, ਬਾਜਰੀ (ਸਰਦੀਆਂ) , ਕਣਕ, ਜੌਂ ( ਗਰਮੀਆ) ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਕੋਈ ਇੱਕ ) , ਦਾਲ ਚੂਰੀ 20 ਕਿਲੋ( ਮੂੰਗੀ ਚੂਰੀ, ਮਾਂਹ ਚੂਰੀ, ਮੋਠ ਚੂਰੀ ( ਕੇਵਲ ਸਰਦੀਆਂ ਲਈ) , ਮਸੁਰ ਚੂਰੀ ,ਅਰਹਰ, (ਇਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਇੱਕ ) , DOC 25 ਕਿਲੋ ( ਚੌਲਾਂ ਦਾ ਚੂਰਾ ) , ਫਾਈਬਰ ਛਿਲਕਾ 15 ਕ.... (Read More)
ਪਸ਼ੂਆਂ ਨੂੰ ਘਰ ਵਿਚ ਫੀਡ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਦੇਣੀ ਹੈ ਤਾਂ ਸੰਤੁਲਿਤ ਖੁਰਾਕ 100 ਕਿਲੋ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਲੋੜੀਂਦੀ ਸਮੱਗਰੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਜਿਵੇਂ 25 ਕਿਲੋ ਅਨਾਜ ( ਜਵਾਰ, ਬਾਜਰੀ (ਸਰਦੀਆਂ) , ਕਣਕ, ਜੌਂ ( ਗਰਮੀਆ) ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਕੋਈ ਇੱਕ ) , ਦਾਲ ਚੂਰੀ 20 ਕਿਲੋ( ਮੂੰਗੀ ਚੂਰੀ, ਮਾਂਹ ਚੂਰੀ, ਮੋਠ ਚੂਰੀ ( ਕੇਵਲ ਸਰਦੀਆਂ ਲਈ) , ਮਸੁਰ ਚੂਰੀ ,ਅਰਹਰ, (ਇਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਇੱਕ ) , DOC 25 ਕਿਲੋ ( ਚੌਲਾਂ ਦਾ ਚੂਰਾ ) , ਫਾਈਬਰ ਛਿਲਕਾ 15 ਕਿਲੋ (ਕਣਕ, ਚੌਕਰ, ਚਨਾ ਛਿਲਕਾ, ਮਟਰ ਛਿਲਕਾ, ਇਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਇੱਕ) , ਖਲ਼ 15 ਕਿਲੋ(ਸਰੋਂ, ਬਿਨੌਲਾ ਜਾਂ ਸੋਇਆ (ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਕੋਈ ਇੱਕ) , ਮਿੱਠਾ ਸੋਡਾ 250 ਗ੍ਰਾਮ, 1 ਕਿਲੋ ਨਮਕ, ਗੁੜ 1 ਕਿਲੋ, 1 ਕਿੱਲੋ ਹਲਦੀ (ਸਰਦੀਆ ਵਿੱਚ ) ਇਹ ਨੂੰ ਰਲਾ ਲਵੋ ਇਹ ਫੀਡ ਪਸ਼ੂ ਲਈ ਬਹੁਤ ਲਾਹੇਵੰਦ ਹੁੰਦੀ ਹੈ.
Posted by rajendra singh rajput
Madhya Pradesh
17-02-2020 12:26 PM
rajendra ji yeh kandh ka akar bdata hai aur iski dose 80-100ml ko 150 litre pani ke hisab se spray karen. yeh ek growth promoter hai.

Posted by Rajnesh
Haryana
17-02-2020 12:17 PM
Rajnesh ji isko aap pett ke kirro ke liye Bandykind plus bolus den aur Ovumin advance bolus rojana 1 goli den aur 21 din tak dete rehen, isse heat mai aa jayegi, yaddi tara saff krti hai tabhi aap isko gabhin krwayen..
Posted by Angrej Singh
Punjab
17-02-2020 12:11 PM
Angrej Singh ji is bare visthar vich jankari lai tusi mere nal Amrik Singh 9814221784 te samparak kar sakde ho, Thankyou.

Posted by Harmeet
Punjab
17-02-2020 12:03 PM
Harmeet ji tuci goat farming di training lain lai apne nazdiki kvk nal sampark kr skde ho uthe sme sme te kisana di mangg de anusar alag alag kmma lai training diti jandi hai tuci uthe ja ke apne training wala farm bhar aao fir jddo v training howegi ohh tuhanu phone krke dass denge, training lain lai tuci Krishi Vigyan Kendra (KVK) , Nagkalan-Jahangir, Amritsar, Dr. Bhupinder Singh Dhillon - 98555-56672, Dr. Parvinder Singh Tung - 81463-22553 nal sampark kr skde ho.
Posted by Ram Shukla
Uttar Pradesh
17-02-2020 11:58 AM
इसे मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए निम्नलिखित किस्में पपीते की खेती के लिए उपयुक्त हैं: Pusa Dwarf: इसके फल मध्यम आकार के और अंडाकार होते ह.... (Read More)
इसे मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए निम्नलिखित किस्में पपीते की खेती के लिए उपयुक्त हैं: Pusa Dwarf: इसके फल मध्यम आकार के और अंडाकार होते हैं यह सूखे को सहनेयोग्य किस्म है यह उच्च घनत्व में रोपाई के लिए लाभदायक है Pusa Giant: इस किस्म के पौधे तेज हवा को सहनेयोग्य है यह बड़े फलों का उत्पादन करती है यह पैकिंग के लिए उपयुक्त किस्म है CO 3: इसके फल बड़े आकार के और अंडाकार होते हैं इसे ज्यादा देर तक रखने की गुणवत्ता अच्छी होती है CO 1: यह छोटे कद की किस्म है जिसके फल मध्यम आकार के होते हैं फल गोलाकार, नर्म हरा-पीला छिल्का और संतरी पीले रंग का गुद्दा होता है फल रसदार होता है और इसे ज्यादा देर तक रखने की गुणवत्ता अच्छी होती है Coorg Honey Dew: इसे सीधे तौर पर खाने के लिए और प्रक्रिया के लिए प्रयोग किया जाता है इसके फल आयताकार और गुद्दा मोटा संतरी रंग का होता है CO 2: यह मध्यम आकार की अंडाकार, हरे पीले रंग की किस्म है इसका गुद्दा नर्म और लाल रंग का होता है इसमें रस की मात्रा काफी होती है और इसे ज्यादा देर तक रखने की गुणवत्ता अच्छी होती है Pusa Majesty: इसके फल मध्यम आकार के, गोल होते हैं इन्हें रखने की गुणवत्ता बहुत अच्छी होती है यह किस्म 146 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह किस्म जड़ गलन निमाटोड के प्रतिरोधक किस्म है Pusa Delicious: यह मध्यम लंबी किस्म है इसके फल मध्यम आकार के होते हैं, गुद्दा गहरे संतरी रंग का होता है इस किस्म को कतारों में लगाने के लिए प्रयोग किया जाता है CO 5: यह किस्म दो वर्षों में 75-80 फल प्रति वृक्ष देती है IIHR39 and IIHR54: यह किस्म IIHR, बैंगलोर द्वारा विकसित की गई है इसके फल मध्यम आकार के होते हैं इसमें टी एस एस की मात्रा उच्च होती है Taiwan 785: यह छोटे कद की किस्म है इसके फल आयताकारा और गुद्दा मोटा संतरी रंग का होता है फलों को रखने की गुणवत्ता अच्छी होती है फलों को कतारों में प्रयोग किया जाता है और प्रक्रिया के लिए प्रयोग किया जाता है Taiwan 786: इसके फलों को कतारों में और प्रक्रिया के लिए प्रयोग किया जाता है इसके फल स्वाद और कम बीज वाले होते हैं फलों को रखने की गुणवत्ता बहुत अच्छी होती है Washington: यह कतारों में प्रयोग किए जाने वाली किस्म है इसके फल गोल, मध्यम आकार के और कम बीज वाले होते हैं फल का छिल्का गहरे पीले रंग का होता है नर और मादा पौधे अलग होते हैं Solo: इसके फल छोट, गहरे गुलाबी रंग का गुद्दा होता है, जो कि स्वाद में मीठा होता है यह किस्म कतारों में प्रयोग की जाती है Ranchi: फल आयताकार होते हैं और गुद्दा गहरे पीले रंग का होता है Honey Dew: इस किस्म के फल बड़े आकार के और कम बीज वाले होते हैं फल स्वाद होते हैं और नर पौधे मादा पौधे से छोटे होते हैं इसका पौधा मध्यम कद का होता है पपीते की खेती के लिए नदीन रहित भूमि का प्रयोग करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें आखिरी जोताई के समय अच्छी तरह से गली हुई रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर मिट्टी में अच्छी तरह मिलाकर डालें सिफारिश किए गए फासलों पर 1 मीटर x 1 मीटर x 1 मीटर आकार के गड्ढे खोदें गड्ढों को मिट्टी और रूड़ी की खाद या गाय के गले हुए गोबर से भरें प्रयोग की गई किस्म के आधार पर प्रत्येक गड्ढे पर 2-4 नए पौधों की रोपाई करें रोपाई के बाद हल्की सिंचाई करें हवा से बचाव के लिए खूंटा लगाएं बीजों को 150 गेज़ की मोटाई वाले, 25 x 10 सैं.मी. के पॉलीथीन बैग में बोयें पानी के उचित निकास के लिए पॉलीथीन बैग के निचले हिस्से में 1 मि.मी. अर्द्धव्यास का छेद करें उसके बाद पॉलीथीन बैग में समान अनुपात में रूड़ी की खाद, मिट्टी और रेत डालें बिजाई से पहले बीजों का उपचार करें रोपाई के लिए 6-7 सप्ताह के पौधों का प्रयोग करें यूरिया 150 ग्राम, फासफोरस 80 ग्राम, पोटाश 100 ग्राम प्रति वृक्ष में प्रति वर्ष डालें खादों को 4 भागों में बांटकर रोपाई के बाद पहले, तीसरे, पांचवे और सातवें महीने में डालें बसंत के मौसम में फरवरी मार्च के महीने में बिजाई करें जबकि मॉनसून के मौसम में बिजाई के लिए जून जुलाई का महीना उपयुक्त होता है और पतझड़ के मौसम में बिजाई अक्तूबर से नवंबर महीने में की जाती है आमतौर पर 1.8 मीटर x 1.8 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है उच्च घनता की रोपाई के लिए 1.5 मीटर x 1.5 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है नर्सरी में बीज को 1 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बीजो की खेत में सीधे बिजाई या मुख्य खेत में नए पौधों की रोपाई की जाती है 100-120 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें मिट्टी की किस्म, जलवायु के हालातों आदि के आधार पर सिंचाई करें सर्दियों में 15 दिनों के अंतराल पर और गर्मियों में 7 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें तने को पानी के संपर्क में ना आने दें और खेत में पानी भी खड़ा ना होने दें पौधे की प्रौढ़ अवस्था के दौरान नदीनों की रोकथाम जरूरी होती है नदीनों की तीव्रता के आधार पर, नियमित और हल्की गोडाई करें फ्लूक्लोरालिन या बूटाक्लोर 800 मि.ली. प्रति एकड़ में डालें नदीनों की रोकथाम के लिए मलचिंग भी एक प्रभावी तरीका है पौधों की रोपाई के कुछ दिनों बाद प्लास्टिक शीट या धान की पराली या गन्ने के बचे कुचे को मलच के रूप में डालें मादा पौधे को निकालना: प्रत्येक 10 पौधों के लिए 1 नर पौधा, बनाए रखने के लिए फूल निकलने के बाद नर पौधों को निकाल दें मुख्यत: फल के पूरा आकार लेने और हरे से हल्का पीला रंग होने पर तुड़ाई की जाती है पहली तुड़ाई रोपाई के 14-15 महीनों के बाद की जा सकती है 4-5 तुड़ाइयां प्रति मौसम की जा सकती हैं
Posted by Prashant thawani
Rajasthan
17-02-2020 11:51 AM
Prashant ji yeh kisam par nirbhar karta hai kirpya aap kisam ka nam btaye taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake,dhanywad

Posted by manoj kumar
Uttar Pradesh
17-02-2020 11:47 AM
Manoj ji iski training aap apne nazdiki kvk se lee skte hai waha sme sme per kisano ko alag alag kam ke liye training di jatti hai aap waha jakar apna training wala farm bharr aaye fir jabb v training hogi too woh apko phone krke btaa denge aur aap chuje lene ke liye Sumit Kumar 8006000291,7906547529 Sumit Kumar Poultry Farm se sampark kr skte hai.
Posted by gurpreet singh
Punjab
17-02-2020 11:46 AM
gurpreet ji tuc hybrid kisman jive 2 lakh 12 ja 27p31, 25p35, 27p63,raja 44 and 45 di bijai kar sakde ho.dhanwad
Posted by ATMA singh
Punjab
17-02-2020 11:45 AM
Atma ji tuci dudh wale injection lgwaun lai apne nazdiki doctor nal sampark kr skde ho ate ohh tuhanu dudh di varto vare v sahi jankari de denge ate pashu di condition de hisab nal injections di varto howegi.

Posted by Rajat Choudhary
Uttar Pradesh
17-02-2020 11:32 AM
चौधरी जी आप अपनी गाय को नज़दीकी डॉक्टर से जांच करवायें क्योंकि उसे थनैला रोग में क्या समस्या आ रही है उसके हिसाब से सही इलाज हो उसके थनों से दूध नहीं आ रहा, कोई गांठ है, सोजिश है या कोई ओर समस्या है इसकी जांच करके ही पता लग सकता है

Posted by SHATENDRA SINGH
Uttar Pradesh
17-02-2020 11:29 AM
शतेंद्र जी धनिया की फसल में गाला की रोकथाम के लिए carbendazim @400 ग्राम को प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद

Posted by Hemant Kumar
Haryana
17-02-2020 11:25 AM
हेमंत जी आप फसल के ऊपर NPK 191919 @1 किलो को 150 लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद

Posted by md shahid iqbal
Bihar
17-02-2020 11:25 AM
iqbal ji unko aap cow ke dudh mai v pani mila patla krke pilla skte ha aur unko liv 52 liquid 2ml rojana dena suru kren.
Posted by Suraj Dubey
Uttar Pradesh
17-02-2020 11:25 AM
सूरज जी कृप्या आप यह बताएं कि गाय को थनैला रोग में क्या क्या समस्या आ रही है ताकि आपको उसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके
Posted by Sanjay Kumar
Uttar Pradesh
17-02-2020 11:00 AM
Sanjay ji aap suruat mai 4 female goat aur 1 male goat se suru kr skte hai, yeh aap apne bazat ke hisab se khrid skte hai, ek barki ko rehne ke liye cover ki hui jgah 12-15 sq. feet aur khuli jgah 25-30 sq.feet ki jrurat hoti hai, aap apni jgah ke hisab se inko rakh skte hai..

Posted by sahil
Madhya Pradesh
17-02-2020 10:42 AM
sahil ji kripya aap apna swal vistar se pooche ke aapne sarso ki konsi kisam ki bijai ki hai kyuki kisam ke nam ke bina aapko iski koi information nahi di ja sakti.dhanywad
Posted by Raju.
Bihar
17-02-2020 10:30 AM
राजू जी आप उसे नज़दीकी डॉक्टर से बुखार की जांच करवायें क्योंकि उसकी सही जांच करके अच्छा इलाज हो सकता है

Posted by Ashok Kumar Nagar
Rajasthan
17-02-2020 10:25 AM
अशोक जी आप इसे अभी 15 दिन के अंतराल पर सिंचाई करें धन्यवाद

Posted by Rajat Choudhary
Uttar Pradesh
17-02-2020 10:15 AM
Rajat ji aap yeh btayen ki usko thanela rog mai kya kya smasia aa rehi hai uske thanno se dudh kam atta hai ja sojish hai, blood aata hai, chiidia aati hai ja dudh bilkul v nahi atta, kripya aap vistar se apna pushen tan jo apko uske vare mai sahi jankari di ja skee.

Posted by Rajat Choudhary
Uttar Pradesh
17-02-2020 10:10 AM
यदि पशु की सही तरीके से देख भाल न की जाये तो इससे थनेला रोग या मस्टाइटस की बीमारी हो जाती है, सबसे पहले कुछ बातों का ध्यान रखें कि पशु का दूध निकालने के बाद तुरंत बैठने न दें, जब भी कभी मस्टाइटस कि बीमारी दिखाई दे तो मीठा सोडा तुरंत देना शुरू करें, ग्राम मीठा सोडा देने से शुरूआती अवस्था की मस्टाइटस पर कण्ट्रोल .... (Read More)
यदि पशु की सही तरीके से देख भाल न की जाये तो इससे थनेला रोग या मस्टाइटस की बीमारी हो जाती है, सबसे पहले कुछ बातों का ध्यान रखें कि पशु का दूध निकालने के बाद तुरंत बैठने न दें, जब भी कभी मस्टाइटस कि बीमारी दिखाई दे तो मीठा सोडा तुरंत देना शुरू करें, ग्राम मीठा सोडा देने से शुरूआती अवस्था की मस्टाइटस पर कण्ट्रोल किया जा सकता है, बाकि का बढ़े स्तर पर अज़माया हुआ तरीका, आप इसका प्रयोग सबसे पहले आप एलोवेरा की एक पत्ती लगभग 250 ग्राम जड़ से काट लें सफेद लाइन के नीचे से काट लें पर ध्यान रखें कि उसकी जैल नीचे ना गिरे इसलिए तुरंत उसे काटकर उलटा कर लें उसके बाद उसे काटकर छोटे छोटे टुकड़े करके मिक्सी में डाल लें उसमें 50 ग्राम घरेलु हल्दी डाल दें और साथ ही 15 ग्राम चूना उसमें डाल लें अब इसे मिक्सी में मिक्स कर लें मिक्स होने के बाद यह ईंट के रंग जैसा लाल हो जायेगा उसके बाद इसमें थोड़ा सा 2-3 चम्मच अलग बर्तन में निकाल लें और बाकी फ्रिज में रख लें जो अलग निकाला हुआ होगा 2-3 चम्मच उसमें थोड़ा सा पानी घोल लें फिर जिस पशु के लेवे पर लगाना है उसे अच्छी तरह धोकर साफ कर लें उसके बाद लेवे के चारों ओर मालिश करें जो रात को मालिश करनी है उसमें थोड़ा सा सरसों का तेल भी मिक्स कर सकते हैं जिससे सारी रात इसका असर रहेगा हर रोज़ नया इसी तरह ही तैयार करना है 5-6 दिन लगातार इस तरह से मालिश करने से थनैला रोग ठीक हो जाये तो यदि धार सख्त हे तो भी इससे ठीक हो जायेगी बाकी यदि तंदरूस्त पशु के भी सप्ताह में दो – तीन दिन इस तरह से मालिश करते रहेंगे तो थनों की समस्या आयेगी ही नहीं..

Posted by Yogesh Kumar
Haryana
17-02-2020 10:06 AM
भारत में कई प्रकार के sheep breeds पाए जाते है, जो व्यवसायिक तौर पर भारत में Sheep farming के लिए उचित है निचे दिए गए sheep breeds India में पाए जाते हैं : Bannur Bellary Cheviot Deccani Hassan Merino Ramboullet South डाउन Sheep farming में लागत बहुत ही कम है, अगर आपके पास कम पैसे है तो आप कम भेड़ो से अर्थात 2 female और 1 male के साथ भी इसकी farming की सुरुआत कर सकते है भारत में एक भेड़ की अच्छी नस्ल का मूल.... (Read More)
भारत में कई प्रकार के sheep breeds पाए जाते है, जो व्यवसायिक तौर पर भारत में Sheep farming के लिए उचित है निचे दिए गए sheep breeds India में पाए जाते हैं : Bannur Bellary Cheviot Deccani Hassan Merino Ramboullet South डाउन Sheep farming में लागत बहुत ही कम है, अगर आपके पास कम पैसे है तो आप कम भेड़ो से अर्थात 2 female और 1 male के साथ भी इसकी farming की सुरुआत कर सकते है भारत में एक भेड़ की अच्छी नस्ल का मूल्य Rs 4,000 से 5,000 होता है अगर आप Sheep Farming करने की सोच रखे है या करने जा रहे है, तो सबसे पहले farm का location तय करे और farm ऐसा जगह पर बनाए जहा हमेशा स्वच्छ पानी उपलब्ध हो और farm का चारागाह साफ और हरा भरा हो इन सभी बातो के साथ ये भी ध्यान दे की भेड के साल में एक बार खाल उतारी जाती है, इस खाल को बाजार तक ले जाने के लिए transport की सुविधा होनी चाहिए खाल के अलावा भेड से रोजाना दूध और meat का भी उत्पादन होता है, जिसे बाजार में बेचा जा सकता है
Posted by Rahul Dedha
Uttar Pradesh
17-02-2020 10:04 AM
आप उसे घर में फीड तैयार करके दे सकते है मक्की या गेहूं 40 किलो, सोयावीन खल 15 किलो, सरसों खल 7 किलो, चावल की पोलिश 10 किलो, चोकर 10 किलो, तेल रहित चावल पोलिश 7 किलो, सीरा 10 किलो, मिनरल मिक्सचर 1 किलो, मिठा सोडा 100 ग्राम इन सभी को मिक्स करके पिसाकर दे सकते है इनके साथ साथ आप Cafplan 20ग्राम रोजाना दे सकते है और उसे समय समय पर पेट के क.... (Read More)
आप उसे घर में फीड तैयार करके दे सकते है मक्की या गेहूं 40 किलो, सोयावीन खल 15 किलो, सरसों खल 7 किलो, चावल की पोलिश 10 किलो, चोकर 10 किलो, तेल रहित चावल पोलिश 7 किलो, सीरा 10 किलो, मिनरल मिक्सचर 1 किलो, मिठा सोडा 100 ग्राम इन सभी को मिक्स करके पिसाकर दे सकते है इनके साथ साथ आप Cafplan 20ग्राम रोजाना दे सकते है और उसे समय समय पर पेट के कीड़ों के लिए दवा जरूर देते रहें
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