Posted by ravi shukla
Madhya Pradesh
21-02-2020 12:50 AM
रवि जी आपको मशरुम की खेती के लिए जमीन की जरूरत नहीं है आप इसकी खेती एक कमरे में भी कर सकते है अगर आपके आप एक एकड़ जमीन है तो आप इसमें ड्रैगन फ्रूट की खेती कर सकते है
Posted by sumit kumar
Bihar
21-02-2020 12:47 AM
Sumit ji, ap papite ki kisme jaise ke Pusa Dwarf, Pusa Giant, CO 3, CO 1, Coorg Honey Dew, CO 2, Pusa Majesty, Pusa Delicious, CO 5, IIHR39 and IIHR54, Taiwan 785, Taiwan 786, Washington, Solo, Ranchi, Honey Dew ki bijai kar sakte hain, dhanywad

Posted by Shambhu Kumar
Bihar
21-02-2020 12:12 AM
Shri maan g gehu mein aap Opera@300 ml per acre spray kr skte ho.....

Posted by Raj
Rajasthan
21-02-2020 12:10 AM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद

Posted by sandeep singh
Punjab
20-02-2020 11:53 PM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਇਸ ਦੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਹਨ--PNB 83, PNB 233, CO 3, Pusa Giant Napier, Gajraj, NB-5, NB-6, NB 37 and NB-35..I ਇਸਦੀ ਬਿਜਾਈ ਗੰਨੇ ਵਾਂਗ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦੀ ਬਿਜਾਈ ਦਾ ਸਮਾਂ ਫ਼ਰਵਰੀ ਤੋਂ ਲੈ ਕੇ ਅਪ੍ਰੈਲ ਤੱਕ ਹੁੰਦਾ ਹੈ I ਇੱਕ ਏਕੜ ਵਿੱਚ 11000 ਕਲਮਾਂ ਲਗਦੀਆਂ ਹਨ I ਇਸਦਾ ਬੀਜ ਤੁਹਾਨੂੰਪੰਜਾਬ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਲੁਧਿਆਣਾ ਤੋਂ ਮਿਲ ਸਕਦਾ ਹੈ
Posted by चौधरी Ravi Verma
Uttar Pradesh
20-02-2020 11:41 PM
श्री मान बैंगन की फसल सख्त होने के कारण इसे अलग अलग तरह की मिट्टी में उगाया जा सकता है यह एक लंबे समय की फसल है, इसलिए अच्छे जल निकास वाली उपजाऊ रेतली दोमट मिट्टी उचित होती है और अच्छी पैदावार देती है अगेती फसल के लिए हल्की मिट्टी और अधिक पैदावार के लिए चिकनी और नमी या गारे वाली मिट्टी उचित होती है फसल की वृद्ध.... (Read More)
श्री मान बैंगन की फसल सख्त होने के कारण इसे अलग अलग तरह की मिट्टी में उगाया जा सकता है यह एक लंबे समय की फसल है, इसलिए अच्छे जल निकास वाली उपजाऊ रेतली दोमट मिट्टी उचित होती है और अच्छी पैदावार देती है अगेती फसल के लिए हल्की मिट्टी और अधिक पैदावार के लिए चिकनी और नमी या गारे वाली मिट्टी उचित होती है फसल की वृद्धि के लिए 5.5-6.6 पी एच होनी चाहिए मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की तीन से चार बार जोताई करें गाय का गला हुआ गोबर 42 क्विंटल प्रति एकड़ में डालें और मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें बैंगन के बीज 3 मीटर लंबे, 1 मीटर चौड़े और 15 सैं.मी. ऊंचे बैडों पर बोये जाते हैं पहले बैडों में बढ़िया रूड़ी की खाद डालें फिर बिजाई से दो दिन पहले कप्तान का घोल डालें ताकि जो नर्सरी बैडों में पौधों को नष्ट होने से बचाया जा सके उसके बाद बीजों को कतारों में 2.5 सैं.मी. के फासले पर और 1.5 सैं.मी. की गहराई पर बोयें हल्की सिंचाई करें पौधों के अंकुरन तक बैडों को काले रंग की पॉलीथीन शीट या पराली से ढक दें तंदरूस्त पौधे जिनके 3-4 पत्ते निकलें हों और कद 12-15 सैं.मी. (30-40 days crop) हो, खेत में पनीरी लगाने के लिए तैयार होते हैं बैंगन की खेती पूरे वर्ष की जाती है खरीफ मौसम के लिए, नर्सरी फरवरी - मार्च के महीने में तैयार करें और मार्च - अप्रैल के महीने में रोपाई करें सर्दियों के मौसम में, नर्सरी की तैयारी के लिए जून जुलाई का समय उपयुक्त होता है और रोपाई के लिए जुलाई अगस्त का महीना उपयुक्त होता है बसंत के मौसम में, सितंबर के महीने में नर्सरी तैयार करें और अक्तूबर - नवंबर के महीने में रोपाई पूरी कर लें लंबी किस्मों के लिए, कतार से कतार में 60-75 सैं.मी. जबकि गोल किस्मों के लिए कतारों में 80-90 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 60-70 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें नर्सरी में, बीज को 1.5 सैं.मी. गहराई में बोयें और मिट्टी से ढक दें खेत में पनीरी लगाकर इसकी बिजाई की जाती है एक एकड़ खेत में बिजाई के लिए 300-400 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें नाइट्रोजन 60 किलो (130 किलो यूरिया), फासफोरस 20 किलो (125 किलो सिंगल सुपर फासफेट) और पोटाश 20 किलो (35 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश) की मात्रा प्रति एकड़ में प्रयोग करें नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा आखिरी जोताई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन को रोपाई के बाद 30 वें और 45वें दिन डालें नदीनों को रोकने, अच्छे विकास और उचित हवा के लिए दो - चार गोडाई करें काले रंग की पॉलिथीन शीट से पौधों को ढक दें जिससे नदीनों का विकास कम हो जाता है और ज़मीन का तापमान भी बना रहता हैं नदीनों को रोकने के लिए पौधे लगाने से पहले मिट्टी में फलूकलोरालिन 600-800 मि.ली. प्रति एकड़ या ऑक्साडायाज़ोन 400 ग्राम प्रति एकड़ डालें अच्छे परिणाम के लिए पौधे लगाने से पहले एलाकलोर 2 लीटर प्रति एकड़ की मिट्टी के तल पर स्प्रे करें
Posted by चौधरी Ravi Verma
Uttar Pradesh
20-02-2020 11:38 PM
उत्तर में यह वर्षा और बसंत के मौसम में उगाई जाती है खरीफ के मौसम में, इसकी बिजाई जून-जुलाई के महीने और बसंत ऋतु में फरवरी-मार्च के महीने में की जाती है भिंडी की किस्मे जैसे V.R.O 6: यह चितकबरे रोग और पत्ता मरोड़ रोग के प्रतिरोधक है बसंत के मौसम में, इसकी औसतन उपज 54 क्विंटल और खरीफ के मौसम में, इसकी औसतन उपज 72 क्विंटल प.... (Read More)
उत्तर में यह वर्षा और बसंत के मौसम में उगाई जाती है खरीफ के मौसम में, इसकी बिजाई जून-जुलाई के महीने और बसंत ऋतु में फरवरी-मार्च के महीने में की जाती है भिंडी की किस्मे जैसे V.R.O 6: यह चितकबरे रोग और पत्ता मरोड़ रोग के प्रतिरोधक है बसंत के मौसम में, इसकी औसतन उपज 54 क्विंटल और खरीफ के मौसम में, इसकी औसतन उपज 72 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
V.R.O 5: यह छोटे कद की और अधिक उपज वाली किस्म है यह चितकबरे रोग और पत्ता मरोड़ रोग के प्रतिरोधक है खरीफ के मौसम में, इसकी औसतन उपज 60 क्विंटल और बसंत के मौसम में, इसकी औसतन उपज 48 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Parbhani Kranti : यह MKV, परभानी द्वारा जारी की गई है इसके फल मध्यम लंबे और नर्म होते हैं इन्हें ज्यादा देर तक रखने की गुणवत्ता अच्छी होती है यह किस्म पीले चितकबरे रोग को सहनेयोग्य है इसकी औसतन पैदावार 35-45 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
I.I.V.R 10 : यह किस्म पीले चितकबरे रोग की प्रतिरोधक किस्म है इसकी औसतन पैदावार 60 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Kashi Vibhuti: यह किस्म बिजाई के बाद 38-40 दिनों में पहली तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 68-72 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Kashi Bhairav: यह किस्म रोपाई के 43-45 दिनों के बाद पहली तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 76 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह पीले चितकबरे रोग की प्रतिरोधक किस्म है
Kashi Mahima: यह किस्म रोपाई के 45 दिनों के बाद पहली तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है यह खरीफ के साथ साथ गर्मियों में भी बोने के लिए उपयुक्त किस्म है इसकी औसतन पैदावार 80 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
Kashi Mohini: इस किस्म की औसतन पैदावार 56 क्विंटल प्रति एकड़ होती है यह पीले चितकबरे रोग की प्रतिरोधक किस्म है
Posted by Narinder Kumar
Punjab
20-02-2020 11:03 PM
Narinder ji kddi kddi ehh 4-5 kista den ton badd v aa jandi hai kddi jyada time v lgg janda hai, isde vare puri jankari tuhanu jithe tuci load apply kruge utho milll jawegi..

Posted by sandeep singh
Punjab
20-02-2020 11:01 PM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਇਸ ਦੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਹਨ--PNB 83, PNB 233, CO 3, Pusa Giant Napier, Gajraj, NB-5, NB-6, NB 37 and NB-35..I ਇਸਦੀ ਬਿਜਾਈ ਗੰਨੇ ਵਾਂਗ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦੀ ਬਿਜਾਈ ਦਾ ਸਮਾਂ ਫ਼ਰਵਰੀ ਤੋਂ ਲੈ ਕੇ ਅਪ੍ਰੈਲ ਤੱਕ ਹੁੰਦਾ ਹੈ I ਇੱਕ ਏਕੜ ਵਿੱਚ 11000 ਕਲਮਾਂ ਲਗਦੀਆਂ ਹਨ I ਇਸਦਾ ਬੀਜ ਤੁਹਾਨੂੰਪੰਜਾਬ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਲੁਧਿਆਣਾ ਤੋਂ ਮਿਲ ਸਕਦਾ ਹੈ

Posted by Deshveer singh
Rajasthan
20-02-2020 10:55 PM
देशवीर जी आप सब्जियां जैसे ग्वार, खीरा-ककड़ी, लोबिया, करेला, लौकी, तुरई, पेठा, खरबूजा, तरबूज, पालक, भिण्डी, अरबी *अप्रैल* चौलाई, मूली *मई* फूलगोभी, बैंगन, प्याज, मूली, मिर्च की बिजाई कर सकते है कृपया बताये के आप इनमे से कोनसी फसल की खेती के बारे में जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको उसके बारे में जानकारी दी जा सके,धन्य.... (Read More)
देशवीर जी आप सब्जियां जैसे ग्वार, खीरा-ककड़ी, लोबिया, करेला, लौकी, तुरई, पेठा, खरबूजा, तरबूज, पालक, भिण्डी, अरबी *अप्रैल* चौलाई, मूली *मई* फूलगोभी, बैंगन, प्याज, मूली, मिर्च की बिजाई कर सकते है कृपया बताये के आप इनमे से कोनसी फसल की खेती के बारे में जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको उसके बारे में जानकारी दी जा सके,धन्यवाद

Posted by hardev singh
Punjab
20-02-2020 10:27 PM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਆਪਣਾ ਸਵਾਲ ਵਿਸਥਾਰਪੂਰਵਕ ਪੁੱਛੋ ਤਾਂ ਕਿ ਇਸਦੀ ਸਹੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿੱਤੀ ਜਾਵੇ

Posted by satnam singh
Punjab
20-02-2020 09:46 PM
ਸਤਨਾਮ ਜੀ ਗੰਨੇ ਦਾ ਝਾੜ ਉਸਦੀ ਕਿਸਮ ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦਾ ਹੈ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਦੱਸੋ ਕੇ ਤੁਸੀ ਕਿਹੜੀ ਕਿਸਮ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕੀਤੀ ਹੈ ਤਾ ਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸ ਬਾਰੇ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by manvir singh
Punjab
20-02-2020 09:42 PM
ਮਨਵੀਰ ਜੀ ਤੁਸੀ ਸਬਜ਼ੀਆਂ ਜਿਵੇ ਫਰਵਰੀ :- ਰਾਜਮਾਹ , ਸ਼ਿਮਲਾ ਮਿਰਚ , ਖੀਰਾ , ਕਰੇਲਾ , ਕੱਦੂ , ਤੋਰੀ, ਪੇਠਾ , ਖਰਬੂਜਾ , ਤਰਬੂਜ , ਪਾਲਕ , ਫੂਲ ਗੋਭੀ , ਬੈਂਗਨ , ਭਿੰਡੀ , ਅਰਬੀ , ਗਵਾਰਾ ਮਾਰਚ:- ਗਵਾਰਾ , ਖੀਰਾ ,ਚੌਲੇ, ਕਰੇਲਾ , ਕੱਦੂ , ਤੋਰੀ , ਪੇਠਾ , ਖਰਬੂਜਾ , ਤਰਬੂਜ , ਪਾਲਕ , ਭਿੰਡੀ , ਅਰਬੀ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by Jaskaran singh
Punjab
20-02-2020 09:31 PM
jasakarn ji shimla mirch 50-55 din tak fal dena shuru kar dindi hai.baki iski kisam te nirbhar karda hai kirpa karke isdi kisam da nam daso ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake.dhanwad

Posted by puneet yadav
Uttar Pradesh
20-02-2020 09:24 PM
पुनीत यादव जी इसके बारे में विस्तार से जानकारी के लिए आप dhananjay kumar के साथ संम्पर्क 9416400207 कर सकते हैं धन्यवाद

Posted by Rambeer Panwar
Uttar Pradesh
20-02-2020 09:18 PM
Rambeer ji yeh fungus ke karn hota hai iske liye aap carbendazim@400 gram ko prati acre ke hisab se spray karen,dhanywad
Posted by Gurnishan Singh Dhillon
Punjab
20-02-2020 09:10 PM
ਉਸ ਨੂੰ Injection Zackshot 20ml, Amoxirum 4.5gm injection , Megludyne injection 20ml , Isoflud 5ml , CRB(ascorbic acid) injection 20ml , Vitum-H 5ml ਲਗਵਾਓ ਇਹ ਸਾਰੇ 3 ਦਿਨ ਲਗਾਤਾਰ ਲਗਵਾਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ..

Posted by Jitu Yadav
Rajasthan
20-02-2020 09:02 PM
श्री मान तरबूज भारत में एक महत्वपूर्ण ककड़ी की सब्जी है यह एक उत्कृष्ट रेगिस्तान फल है और इसके रस में प्रोटीन, खनिज और कार्बोहाइड्रेट के साथ 92% पानी होता है तरबूज राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश की प्रमुख नदी-फसल है इसकी किस्मे जैसे के Arka Jyoti, Arka Manik, Durgapur Kesar, Durgapur Lal, Durgapur Meetha, Improved Shipper, Pusa Bedane, Special No 1, Char.... (Read More)
श्री मान तरबूज भारत में एक महत्वपूर्ण ककड़ी की सब्जी है यह एक उत्कृष्ट रेगिस्तान फल है और इसके रस में प्रोटीन, खनिज और कार्बोहाइड्रेट के साथ 92% पानी होता है तरबूज राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश की प्रमुख नदी-फसल है इसकी किस्मे जैसे के Arka Jyoti, Arka Manik, Durgapur Kesar, Durgapur Lal, Durgapur Meetha, Improved Shipper, Pusa Bedane, Special No 1, Charl Stan Gray की बिजाई कर सकते हो तरबूज गहरी उपजाऊ और अच्छी तरह से सूखा मिट्टी में अच्छी तरह से बढ़ता है यह सबसे अच्छा परिणाम देता है जब रेतीले या रेतीले दोमट मिट्टी पर उगाया जाता है खराब जल निकासी क्षमता वाली मिट्टी तरबूज की खेती के लिए अनुकूल नहीं है एक ही खेत पर एक ही फसल के लगातार उगने से फसल के घूमने का पालन करने से पोषक तत्वों की हानि, खराब उपज और अधिक रोग का हमला होता है मिट्टी का पीएच 6-7 के बीच होना चाहिए भूमि की जुताई करें और बारीक तिलक लगाएं तरबूज को सीधे नर्सरी में उगाया जा सकता है या फिर मुख्य खेत में प्रत्यारोपित किया जा सकता है तरबूज की खेती के लिए इष्टतम समय फरवरी के मध्य से मार्च के मध्य तक है बुवाई विधि के आधार पर रिक्ति भिन्न हो सकती है गड्ढे की विधि में पंक्ति से पंक्ति की दूरी 2-3.5 मी और दो पौधे के बीच 0.6-1.2 मी -4 सेमी की गहराई पर बीज बोएं बुवाई के विभिन्न तरीकों जैसे फुर्रो विधि, पिट विधि और पहाड़ी विधि का उपयोग जलवायु और मौसम के आधार पर किया जा सकता है फ़रो विधि: बुवाई फ़ुर्रों के दोनों ओर की जाती है एक बार में 3-4 बीज बोना (अंकुरण के बाद केवल स्वस्थ अंकुर रखना) और पौधे को पौधे से 60-90 सेमी की दूरी पर रखें पिट विधि: गड्ढे में 4 बोया हुआ बीज इसके लिए दो पंक्तियों के बीच 2-3.5 मीटर की दूरी पर और पौधे के बीच 0.6-1.2 मीटर की दूरी पर 60x60x60 सेमी के गड्ढे बनाएं अच्छी तरह से विघटित गोबर और मिट्टी के साथ गड्ढे भरें अंकुरण के बाद केवल एक अंकुर रखें पहाड़ी विधि: पिट विधि के समान इसमें 30x30x30 सेमी गड्ढों के गड्ढे को 1-1.5 मी की दूरी पर बनाया जाता है दो बीज प्रति पहाड़ी बोए जाते हैं एक एकड़ भूमि की बुवाई के लिए 1.5 से 2 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है बुवाई से पहले कार्बेन्डिज़िम @ 2 ग्राम / किलोग्राम बीज से बीज उपचारित करें रासायनिक उपचार के बाद ट्राइकोडर्मा विरिडी @ 4 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज के हिसाब से बीज डालें बीज को छाया में सुखाएं और फिर तुरंत बुवाई करें बुवाई से 20-25 दिन पहले, फार्म यार्ड खाद या अच्छी तरह से विघटित गोबर @ 6 टन प्रति एकड़ की दर से लगाएं और मिट्टी में अच्छी तरह मिलाएं तरबूज के लिए नाइट्रोजन @ 20 किग्रा, फास्फोरस @ 10 किग्रा और पोटाश @ 10 किग्रा यूरिया @ 45 किग्रा, सिंगल सुपर फास्फेट @ 65 किग्रा और म्यूरिएट ऑफ पोटाश @ 18 किग्रा प्रति एकड़ की आवश्यकता होती है बीज बोने के समय फास्फोरस, पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा लगाएँ नाइट्रोजन आधार की शेष खुराक लागू करें, 30-45 दिनों के बाद बेलों के पास बुवाई करें, इसे छूने से बचें और मिट्टी में अच्छी तरह मिलाएं वृद्धि के प्रारंभिक चरण के दौरान बिस्तर को खरपतवार मुक्त रखें उचित नियंत्रण उपायों की अनुपस्थिति में, खरपतवार 30% की उपज हानि का कारण बन सकता है बुवाई के 15-20 दिन बाद, आपस में जुड़े हुए ऑपरेशन करें मातम की गंभीरता और तीव्रता के आधार पर, दो से तीन निराई की आवश्यकता होती है बीजों के त्वरित अंकुरण के लिए बुवाई के तुरंत बाद सिंचाई करें शेष सिंचाई 5-7 दिनों के अंतराल पर करें परिपक्वता के समय जरूरत पड़ने पर ही सिंचाई करें सिंचाई के समय भी सिंचाई से बचें, बेलों या वानस्पतिक भागों को गीला नहीं करना चाहिए, विशेष रूप से फूलों और फलों के सेट के दौरान बेहतर स्वाद के लिए, बेहतर मिठास पाने के लिए; कटाई से ३-६ दिन पहले सिंचाई बंद कर दें या पानी देना कम कर दें

Posted by ਮਨਜੀਤ ਸਿੰਘ ਧਾਲੀਵਾਲ
Punjab
20-02-2020 08:54 PM
Manjeet ji tuci usdi varto kr skde ho per uss vich kise trah di koi milawat nhi honi chahidi hai, ehh 30-50ml tak de skde ho jekar pashu hajam naa kree tan dena bnnd kr deo.

Posted by ਮਨਜੀਤ ਸਿੰਘ ਧਾਲੀਵਾਲ
Punjab
20-02-2020 08:53 PM
manjeet ji iss nu tuci nazdiki doctor ton bhulla ke Duraprogen injection 750mg lgwa deo
Posted by Sunil
Rajasthan
20-02-2020 08:43 PM
sunil ji kripya aap iske label ki photo bheje ya iske poore nam ke bare men btaye taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake,dhanywad
Posted by Sunil
Rajasthan
20-02-2020 08:41 PM
C:N ratio carbon aur nitrogen ki ratio hoti hai jo mitti men maujood hoti hai aur iske hisab se konsi fasl lgayi ja sake aur konsi fasl se iska balance reh sakta hai.dhanywad
Posted by Sunil
Rajasthan
20-02-2020 08:38 PM
किसी विलयन के 10 लाख भाग में उपस्थित विलेय के भागों की संख्या को पार्ट्स प्रति मिलियन या पीपीएम कहते हैं अर्थात किसी विलेय पदार्थ के भार भागों की वह संख्या जो विलयन के 10 लाख भार भागों में उपस्थित हो, उसे पीपीएम या पार्ट्स प्रति मिलियन कहा जाता है यह तरल को मापने की एक unit है
Posted by Sunil
Rajasthan
20-02-2020 08:36 PM
sunil ji organic carbon mitti men maujood jaivik maada ko kaha jata hai.is se mitti ki gunvatta ko darshata hai. agar jaivik mada kam ho to mitti ki gunvata kam hoti hai.dhanywad

Posted by आशीष कुलमित्र
Chattisgarh
20-02-2020 08:33 PM
आशीष जी यह अच्छी नस्ल है पर यह थोड़े गर्म स्भाव के होते है और गुस्से में कभी कभी मालिक को भी काट लेते है

Posted by Abhishek Vishwakarma
Uttar Pradesh
20-02-2020 08:26 PM
अभिषेक जी आम के पेड़ के लिए आप vermicompost @4 किलो को प्रति पौधा डाले इस से पौधे का विकास होना शुरू हो जायेगा धन्यवाद

Posted by jay kumar yadav
Madhya Pradesh
20-02-2020 08:20 PM
यादव जी यह क्रॉस नस्ल की बछड़ी है यह फोटो के हिसाब से गिर क्रॉस लग रही है

Posted by jagjeet singh
Punjab
20-02-2020 08:16 PM
ਤੁਸੀ ਇਸ ਨੂੰ ਪੇਟ ਦੇ ਕੀੜਿਆਂ ਲਈ Bandykind plus ਗੋਲੀ ਦਿਓ ਅਤੇ ਹਰ 3 ਮਹੀਨਿਆਂ ਬਾਅਦ ਪੇਟ ਦੇ ਕੀੜਿਆਂ ਲਈ ਗੋਲੀ ਜਰੂਰ ਦਿਓ ਅਤੇ Ovumin advance tablet ਰੋਜਾਨਾ 1 ਗੋਲੀ ਦਿਓ ਅਤੇ 21 ਦਿਨ ਤਕ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆ ਜਾਵੇਗੀ.

Posted by jagjeet singh
Punjab
20-02-2020 08:13 PM
Shri maan g barseem di growth lyi NPK 19:19:19@1kg 150ltr pani ch mila ke spray kr skde ho....

Posted by gaurav rana
Haryana
20-02-2020 08:12 PM
shrimaan g boron or npk ka spray krne ke 3-4 hours tkk mousam clear hona chaiye agar baad mein barish ho jaye to koi problem nhi hai g..

Posted by Ashish Rana
Punjab
20-02-2020 08:08 PM
ਤੁਸੀ ਇਸ ਨੂੰ ਪੇਟ ਦੇ ਕੀੜਿਆਂ ਲਈ Bandykind plus ਗੋਲੀ ਦਿਓ ਅਤੇ ਹਰ 3 ਮਹੀਨਿਆਂ ਬਾਅਦ ਪੇਟ ਦੇ ਕੀੜਿਆਂ ਲਈ ਗੋਲੀ ਜਰੂਰ ਦਿਓ ਅਤੇ Ovumin advance tablet ਰੋਜਾਨਾ 1 ਗੋਲੀ ਦਿਓ ਅਤੇ 21 ਦਿਨ ਤਕ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆ ਜਾਵੇਗੀ.

Posted by jasvinder singh
Punjab
20-02-2020 08:06 PM
Jasvinder singh ji Desi chicks len ali tusi Balwinder Singh 9041009671 Papu Hachery Farm nal samparak kar sakde ho, Thankyou.

Posted by rakesh
Rajasthan
20-02-2020 08:03 PM
Rakeshv ji sall 2019-2020 me Makka ka MSP 1760/- hai, Thankyou.

Posted by AJAY PRATAP SINGH
Uttar Pradesh
20-02-2020 07:34 PM
AJAY PRATAP SINGH ji gir cow lene ke lia aap Sanju Bhalla 9873163741 Gir Cow Farm se samparak kar sakte hai, Thankyou.

Posted by Krisnpal singh Krisnpal singh
Rajasthan
20-02-2020 07:32 PM
श्री मान मशरूम की ट्रेनिंग के लिए आप अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केन्द्र से समपर्क करे
Posted by Parveen
Punjab
20-02-2020 07:29 PM
Parveen ji majh nu bhran wala murrah nasal da semen hai ate cow da jersey nasal da semen hai, ehna da vdia record hai..

Posted by Ram chnadr
Rajasthan
20-02-2020 07:15 PM
श्री मान कृपया आप अपना सवाल विस्तार से पूछें तो आपको पूरी जानकारी दी जा सके

Posted by Ram chnadr
Rajasthan
20-02-2020 07:12 PM
Shri maan g kripa aap apna swal visthar se puchein toh aapko sahi jankari di ja ske....

Posted by Bhagwandas Saini
Madhya Pradesh
20-02-2020 07:07 PM
Saini ji abhi iske bare men koi jankari nahi mili hai ke koi new variety release ki gayi hai lekin pichle saal ek variety RBS18 release ki gayi thi jiska utpad 20-25 quintal pratia hectare ke hisab se niklta hai.dhanywad

Posted by Har Kamal Jeet singh
Punjab
20-02-2020 07:03 PM
Kamaljeet ji tuci jekar buffalo rakhnia hai tan murrah nasal dia rakh skde ho, ehna da dudh v vdia hunda hai ate dudh vich fatt v jyada hundi hai, ehh milk de hisab nal lagbhag 60000-90000 tak v mill skdia hai.

Posted by Avadhnath Singh
Uttar Pradesh
20-02-2020 06:47 PM
shrimaan g lahsun mein nadeen bahr nikal deo g kyuke nadeen hone se size nhi bnta g..
Posted by happy
Punjab
20-02-2020 06:37 PM
Happy g diggi hoyi knak vich jekar pani jyada khada ho jave tn dane khrab ho jnde han jiss nal yield da bhut loss hunda hai g..
Posted by Shahrukh khan
Uttar Pradesh
20-02-2020 06:36 PM
shrimaan g gibberelic acid growth promoter hai g jis ko fasal mein spray kr skte ho g..
Posted by Shahrukh khan
Uttar Pradesh
20-02-2020 06:34 PM
खान जी इसका रिजल्ट अच्छा है आप इसका इस्तेमाल कर सकते है यह फसल की ग्रोथ करने में मदद करता है धन्यवाद
Posted by robin singh
Rajasthan
20-02-2020 06:31 PM
Robin ji Amritsari goat ko beetal goat bolte hai, iske vare mai purri jankari lene ke liye apni kheti app mai pashu palan wale section mai jakar iss nasal ke vare mai padd skte hai..
Posted by Rajkumar Ode
Madhya Pradesh
20-02-2020 06:19 PM
यह बहुत किस्म की मिट्टी जैसे की रेतली से दोमट मिट्टी में उगाई जा सकती है, पर यह ज्यादा उपजाऊ और अच्छे निकास वाली मिट्टी में बढिया पैदावार देती है इसकी खेती हल्की रेतली और भारी चिकनी मिट्टी में ना करें, क्योंकि इसमें गांठों का विकास अच्छी तरह से नहीं होता हैं इसके लिए मिट्टी का pH 5.8-6.7 होना चाहिए Varsha: यह किस्म मह.... (Read More)
यह बहुत किस्म की मिट्टी जैसे की रेतली से दोमट मिट्टी में उगाई जा सकती है, पर यह ज्यादा उपजाऊ और अच्छे निकास वाली मिट्टी में बढिया पैदावार देती है इसकी खेती हल्की रेतली और भारी चिकनी मिट्टी में ना करें, क्योंकि इसमें गांठों का विकास अच्छी तरह से नहीं होता हैं इसके लिए मिट्टी का pH 5.8-6.7 होना चाहिए Varsha: यह किस्म महाराष्ट्र में उगाने की सिफारिश की जाती है यह बारिश की ऋतु में उगाने के लिए अनुकूल है इसकी औसतन पैदावार 62.5 किलो प्रति एकड़ होती हैं
Konkan Ashwini: यह किस्म महाराष्ट्र में उगाने के लिए तैयार की गई है यह कम समय वाली फसल है और ज्यादा पैदावार देती है
Sree Arun: यह जल्दी पकने वाली किस्म हैं जिसका छिलका गुलाबी और गुद्दा क्रीम रंग का होता है यह किस्म सैंट्रल ट्यूबर क्रॉप रिसर्च इंस्टीट्यूट(सी टी सी आर आई), श्रीकरियम द्वारा तैयार की गई है इसकी औसतन पैदावार 83-116 क्विंटल प्रति एकड़ होती हैं
Sree Kanaka: यह किस्म सैंट्रल ट्यूबर क्रॉप रीसर्च ਇੰਸਟੀਟਿਊਟ (सी टी सी आर), श्रीक्रियम द्वारा तैयार की गई है इसका छिलका क्रीम रंग का होता है और गुद्दा गहरे संतरी रंग का होता है इसकी औसतन पैदावार 41-62.5 किलो प्रति एकड़ होती है
Sree Varun: यह किस्म सैंट्रल ट्यूबर क्रॉप रीसर्च ਇੰਸਟੀਟਿਊਟ (सी टी सी आर), श्रीक्रियम द्वारा तैयार की गई है इसका छिलका क्रीम रंग का होता है यह जल्दी पकने वाली फसल है, जो 90-100 दिनों में तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 80-100 किलो प्रति एकड़ होती है शकरकंदी की खेती के लिए, खेत को अच्छी तरह से तैयार करें मिट्टी को अच्छी तरह से भुरभुरा बनाने के लिए, बिजाई से पहले खेत की 3-4 बार जोताई करें, फिर सुहागा फेरें खेत को नदीन मुक्त रखना चाहिए उचित पैदावार के लिए, गांठों को नर्सरी बैडों पर जनवरी से फरवरी के महीने में बोयें और अप्रैल से जुलाई के महीने में बेलों की बिजाई का उचित समय होता है पंक्तियों के बीच का फासला 60 सैं.मी. और पौधों के बीच का फासला 30 सैं.मी. का रखें गांठों की बिजाई 20-25 सैं.मी. गहराई पर बोयें एक एकड़ में बिजाई के लिए 25,000-30,000 कटी हुई बेलों या 280-320 किलो गांठों का प्रयोग करें गांठों को प्लास्टिक बैग में डाल कर ज्यादा मात्रा वाले सल्फयूरिक एसिड में 10-40 मिनट के लिए भिगोये सिंचित स्थितियों में शकरकंदी+धान का फसली चक्र अपनाया जाता है शकरकंदी की फसल दिसंबर-जनवरी महीने में धान की दूसरी कटाई के बाद बोयें

Posted by dilbag Singh Cheema
Punjab
20-02-2020 06:11 PM
ਸ਼ੁਰੁਆਤੀ ਸਮੇਂ ਵਿੱਚ ਪੌਦੇ ਨੂੰ ਵਧੀਆ ਆਕਾਰ ਦੇਣ ਲਈ ਕਟਾਈ ਕਰਨੀ ਜਰੂਰੂੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਲੀਚੀ ਦੇ ਪੌਦਿਆਂ ਲਈ ਛੰਗਾਈ ਦੀ ਜਿਆਦਾ ਜਰੂਰਤ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀ ਫਲਾਂ ਦੀ ਕਟਾਈ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਨਵੀਆਂ ਟਹਿਣੀਆ ਲਿਆਉਣ ਲਈ ਹਲਕੀ ਛੰਗਾਈ ਕਰੋ ਇਹ ਹੌਲੀ ਗਤੀ ਨਾਲ ਉੱਗਣ ਵਾਲੀ ਫਸਲ ਹੈ ਜੋ ਕਿ 7-10 ਸਾਲ ਦਾ ਸਮਾਂ ਲੈਦੀਂ ਹੈ ਸ਼ੁਰੂਆਤੀ 3-4 ਸਾਲ ਤੱਕ ਅੰਤਰ ਫਸਲਾਂ ਉਗਾਈਆਂ ਜਾ ਸਕਦੀਆਂ ਹਨ ਜਿਸ ਨਾਲ ਕਿ ਆਮਦਨ ਵਧਦੀ.... (Read More)
ਸ਼ੁਰੁਆਤੀ ਸਮੇਂ ਵਿੱਚ ਪੌਦੇ ਨੂੰ ਵਧੀਆ ਆਕਾਰ ਦੇਣ ਲਈ ਕਟਾਈ ਕਰਨੀ ਜਰੂਰੂੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਲੀਚੀ ਦੇ ਪੌਦਿਆਂ ਲਈ ਛੰਗਾਈ ਦੀ ਜਿਆਦਾ ਜਰੂਰਤ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀ ਫਲਾਂ ਦੀ ਕਟਾਈ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਨਵੀਆਂ ਟਹਿਣੀਆ ਲਿਆਉਣ ਲਈ ਹਲਕੀ ਛੰਗਾਈ ਕਰੋ ਇਹ ਹੌਲੀ ਗਤੀ ਨਾਲ ਉੱਗਣ ਵਾਲੀ ਫਸਲ ਹੈ ਜੋ ਕਿ 7-10 ਸਾਲ ਦਾ ਸਮਾਂ ਲੈਦੀਂ ਹੈ ਸ਼ੁਰੂਆਤੀ 3-4 ਸਾਲ ਤੱਕ ਅੰਤਰ ਫਸਲਾਂ ਉਗਾਈਆਂ ਜਾ ਸਕਦੀਆਂ ਹਨ ਜਿਸ ਨਾਲ ਕਿ ਆਮਦਨ ਵਧਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਉਪਜਾਊ ਸ਼ਕਤੀ ਵਿੱਚ ਵੀ ਵਾਧਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਨਦੀਨਾਂ ਨੂੰ ਵੀ ਕੰਟਰੋਲ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਤੇਜ਼ੀ ਨਾਲ ਉੱਗਣ ਵਾਲੇ ਪੌਦੇ ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਆੜੂ, ਆਲੂ-ਬੁਖਾਰਾ, ਕਿਨੂੰ ਅੰਤਰ ਫਸਲਾਂ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਉਗਾਏ ਜਾ ਸਕਦੇ ਹਨ ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਦਾਲਾਂ ਅਤੇ ਸਬਜ਼ੀਆਂ ਨੂੰ ਵੀ ਅੰਤਰ ਫਸਲਾਂ ਦੇ ਤੌਰ ਤੇ ਉਗਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਜਦੋਂ ਮੁੱਖ ਫਸਲ ਦਾ ਬਾਗ ਪੂਰੀ ਤਰਾਂ ਵੱਡੇ ਪੱਧਰ ਤੇ ਵਿਕਾਸ ਕਰ ਲਵੇ ਤਾਂ ਅੰਤਰ ਫਸਲਾਂ ਨੂੰ ਪੁੱਟ ਦਿਉ
ਲੀਚੀ ਦਾ ਪਰਾਗਣ ਕੀੜਿਆਂ, ਪਤੰਗਿਆਂ ਅਤੇ ਸ਼ਹਿਤ ਦੀਆਂ ਮੱਖੀਆਂ ਦੁਆਰਾ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ 20-25 ਸ਼ਹਿਦ ਦੀਆਂ ਮੱਖੀਆਂ ਦੇ ਡੱਬੇ ਪਰਾਗਣ ਕਰਨ ਲਈ ਪ੍ਰਤੀ ਹੈਕਟੇਅਰ ਰੱਖੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਨਵੇਂ ਪੌਦਿਆਂ ਨੂੰ ਗਰਮ ਅਤੇ ਠੰਡੀ ਹਵਾਂ ਤੋਂ ਬਚਾਉਣ ਲਈ ਲੀਚੀ ਦੇ ਪੌਦਿਆਂ ਦੇ ਆਲੇ- ਦੁਆਲੇ 4-5 ਸਾਲ ਦੇ ਹਵਾ ਰੋਧਕ ਦਰੱਖਤ ਲਗਾਉ ਜੰਤਰ ਦੀ ਫਸਲ ਲਗਾਉਣ ਨਾਲ ਫਰਵਰੀ ਦੇ ਮਹੀਨੇ ਵਿੱਚ ਇਸ ਤੋਂ ਬੀਜ ਵੀ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਲੀਚੀ ਦੇ ਪੌਦਿਆਂ ਨੂੰ ਤੇਜ਼ ਹਵਾਵਾਂ ਤੋਂ ਬਚਾਉਣ ਲਈ ਆਲੇ ਦੁਆਲੇ ਅੰਬ ਅਤੇ ਜਾਮੁਣ ਵਰਗੇ ਲੰਬੇ ਦਰੱਖਤ ਲਗਾਉ 1 ਤੋਂ 3 ਸਾਲ ਪੁਰਾਣੀ ਫਸਲ ਲਈ 10-20 ਕਿਲੋ ਗਲੀ ਸੜੀ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ ਦੇ ਨਾਲ-ਨਾਲ ਯੂਰੀਆ 150-500 ਗ੍ਰਾਮ, ਸਿੰਗਲ ਸੁਪਰ ਫਾਸਫੇਟ 200-600 ਗ੍ਰਾਮ ਅਤੇ ਮਿਊਰੇਟ ਆਫ ਪੋਟਾਸ਼ 60-150 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਦਰੱਖਤ ਪਾਓ 4-6 ਸਾਲ ਪੁਰਾਣੀ ਫਸਲ ਲਈ ਗਲੀ ਸੜੀ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਵਧਾ ਕੇ 25-40 ਕਿਲੋਗ੍ਰਾਮ , ਯੂਰੀਆ 500-1000 ਗ੍ਰਾਮ, ਸਿੰਗਲ ਸੁਪਰ ਫਾਸਫੇਟ 750-1250 ਗ੍ਰਾਮ ਅਤੇ ਮਿਊਰੇਟ ਆਫ ਪੋਟਾਸ਼ 200-300 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਦਰੱਖਤ ਪਾਓ ਵਿਕਾਸ ਦੇ ਹਰ ਪੜਾਅ ਤੇ ਪਾਣੀ ਦੀ ਸਿੰਚਾਈ ਕਰੋਂ ਵਿਕਾਸ ਦੇ ਸ਼ੁਰੂਆਤੀ ਸਮੇਂ ਵਿੱਚ ਪਾਣੀ ਲਗਾਉਣਾ ਬਹੁਤ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਗਰਮੀਆਂ ਦੀ ਰੁੱਤ ਵਿੱਚ ਨਵੇਂ ਪੌਦਿਆਂ ਨੂੰ 1 ਹਫਤੇ ਵਿੱਚ 2 ਵਾਰ ਅਤੇ ਪੁਰਾਣੇ ਪੌਦਿਆਂ ਨੂੰ ਹਫਤੇ ਵਿੱਚ 1 ਵਾਰ ਪਾਣੀ ਦਿਓ ਖਾਦਾਂ ਪਾਉਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਇੱਕ ਸਿੰਚਾਈ ਜਰੂਰ ਕਰੋ ਫਸਲ ਨੂੰ ਕੋਰੇ ਤੋਂ ਬਚਾਉਣ ਲਈ ਨਵੰਬਰ ਦੇ ਅੰਤ ਅਤੇ ਦਸੰਬਰ ਦੇ ਪਹਿਲੇ ਹਫਤੇ ਪਾਣੀ ਦਿਉ ਫਲ ਬਣਨ ਦੇ ਸਮੇਂ ਸਿੰਚਾਈ ਬਹੁਤ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਪੜਾਅ ਤੇ ਹਫਤੇ ਵਿੱਚ 2 ਵਾਰ ਪਾਣੀ ਦਿਓ ਇਸ ਤਰਾਂ ਕਰਨ ਨਾਲ ਫਲ ਵਿੱਚ ਤਰੇੜਾ ਨਹੀਂ ਆਉਦੀਆਂ ਅਤੇ ਫਲ ਦਾ ਵਿਕਾਸ ਵਧੀਆ ਹੁੰਦਾ ਹੈ

Posted by Sameer Talpada
Gujarat
20-02-2020 06:09 PM
Sameer ji yeh dono kamo ke liye use kiye jatte hai aap chicks lene ke liye Sumit Kumar 8006000291 7906547529 Sumit Kumar Poultry Farm se sampark kr skte hai.

Posted by PUSHPENDRA SINGH
Uttar Pradesh
20-02-2020 06:08 PM
इसकी खेती के लिए 18-35° सै. मिट्टी का तापमान होना आवश्यक है इसके अच्छे विकास के लिए विभिन्न प्रकार की चिकनी से दोमट मिट्टी में इसकी खेती करें यह कुछ हद तक तेज़ाबी मिट्टी में उगाई जा सकती है यह रेतली दोमट मिट्टी और पानी के अच्छे निकास में बढ़िया परिणाम देती है शिमला मिर्च की खेती के लिए मिट्टी का pH 6-7 होना चाहिए शिम.... (Read More)
इसकी खेती के लिए 18-35° सै. मिट्टी का तापमान होना आवश्यक है इसके अच्छे विकास के लिए विभिन्न प्रकार की चिकनी से दोमट मिट्टी में इसकी खेती करें यह कुछ हद तक तेज़ाबी मिट्टी में उगाई जा सकती है यह रेतली दोमट मिट्टी और पानी के अच्छे निकास में बढ़िया परिणाम देती है शिमला मिर्च की खेती के लिए मिट्टी का pH 6-7 होना चाहिए शिमला मिर्च की खेती के लिए, ज़मीन को अच्छी तरह से तैयार करें ज़मीन को भुरभुरा बनाने के लिए, 5-6 बार सुहागे से जोताई करें खेत की तैयारी के समय खेत में रूड़ी की खाद डालें और मिट्टी में मिलाएं बीजों को मुख्य तौर पर अक्तूबर के अंत में बोयें और रोपण के लिए मध्य-फरवरी का समय उचित होता है जल्दी पैदावार के लिए, बीजों को मध्य-अक्तूबर में बोयें और रोपण के लिए नवंबर के अंत का समय उचित होता है बिजाई के लिए पंक्ति से पंक्ति में 50 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 40 सैं.मी. का फासला रखें बीज को 2-4 सैं.मी. गहरा बोयें एक एकड़ खेत के लिए 200-300 बीजों का प्रयोग करें मिट्टी से होने वाली बीमारीयों से बचाने के लिए बिजाई से पहले थीरम या कप्तान, सिरेसन आदि 2 ग्राम में प्रति किलो बीजों को भिगोएं शिमला मिर्च की खेती के लिए, सबसे पहले नर्सरी बैडों को तैयार करें नए पौधे लगाने के लिए 300 x 60 x 15 सैं.मी. आकार के सीड बैड तैयार करें बीजों को तैयार किये गए बैडों पर बोयें और बिजाई के बाद नर्सरी बैडों को मिट्टी की पतली परत से ढक दें बीजों के उचित अंकुरण के लिए बिजाई के बाद तैयार बैडों पर हल्की सिंचाई करें
जब पौधे के 4-5 पत्ते निकलने शुरू हो जाये तो आरोपण करें मुख्य खेत में आरोपण किया जाता है आरोपण आमतौर पर बरसात के मौसम में किया जाता है आरोपण के लिए मुख्यतः 50-60 दिनों की पौध का प्रयोग किया जाता है फसल की बढ़िया पैदावार के लिए, उचित समय के अंतराल पर गोड़ाई करें नए पौधों के रोपण के 2-3 हफ्ते बाद मेंड़ पर मिट्टी चढ़ाएं यह खेत को नदीन मुक्त करने में मदद करती है रोपण के 30 दिनों के बाद पहली गोड़ाई और 60 दिनों के बाद दूसरी गोड़ाई करें
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