Posted by charnpal singh
Punjab
26-02-2020 09:55 AM
ਚਰਨਪਾਲ ਜੀ, ਕਪਾਹ ਵਿਚ ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਜਿਵੇ ਕੇ ਐਂਥਰਾਕਨੌਸ, ਮੁਰਝਾਉਣਾ, ਝੁਲਸ ਰੋਗ, ਪੱਤਿਆਂ ਤੇ ਧੱਬਾ ਰੋਗ, ਜੜ੍ਹ ਗਲਣ ਦਾ ਹਮਲਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Mukul Singh Ujjain
Bihar
26-02-2020 09:51 AM
Mukul ji, kripya ap bataye ke apke pas kitni jameen hai, taki apko uske hisaab se guuide kiya ja sake, dhanywad
Posted by Anwar Ansari
Jharkhand
26-02-2020 09:49 AM
अनवर जी, यह फंगस के हमले की वजह से हो रहा है, आप इसकी रोकथाम के लिए इसमे carbendazim @ 4 ग्राम यां mancozeb @ 4 ग्राम प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे कर सकते हो, धन्यवाद
Posted by Vedachary Singrauli
Madhya Pradesh
26-02-2020 09:42 AM
तुअर के लिए : यह हर प्रकार की जमीनों में बोयी जा सकती है पर उपजाऊ और बढ़िया जल निकास वाली दोमट जमीन सब से बढ़िया है खारी और पानी खड़ा रहने वाली ज़मीनें इसकी काश्त के लिए बढ़िया नही हैं यह फसल 6.5-7.5पी एच तक अच्छी उगती है ICPL 151 (Jagriti): यह 120-130 दिनों में कटने के लिए तैयार हो जाती है और इसकी औसतन पैदावार 4-5 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pu.... (Read More)
तुअर के लिए : यह हर प्रकार की जमीनों में बोयी जा सकती है पर उपजाऊ और बढ़िया जल निकास वाली दोमट जमीन सब से बढ़िया है खारी और पानी खड़ा रहने वाली ज़मीनें इसकी काश्त के लिए बढ़िया नही हैं यह फसल 6.5-7.5पी एच तक अच्छी उगती है ICPL 151 (Jagriti): यह 120-130 दिनों में कटने के लिए तैयार हो जाती है और इसकी औसतन पैदावार 4-5 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa Ageti: यह किस्म 150-160 दिनों में कटने के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 5 क्विंटल प्रति एकड़ है Pusa 84: यह मध्यम लंबी होती हैं यह किस्म 140-150 दिनों में कटने के लिए तैयार हो जाती है IPA 203 और IPH 09-5 (Hybrid) किस्में है गहरी जोताई के बाद 2-3 बार तवीयों से जोताई करें और खेत को सुहागे के साथ समतल करें यह फसल खड़े पानी को सह नहीं सकती, इसीलिए खेत में पानी खड़े रहने से रोकें फसली चक्र - अरहर का गेहूं, जौं, सेंजी या गन्ने के साथ फसली चक्र अपनाएं मई के दूसरे पखवाड़े में की गई बिजाई अधिक पैदावार देती है यदि यही फसल देरी से लगाई जाये तो पैदावार कम देती है बिजाई के लिए 50 से.मी. कतारों में और 25 से.मी. पौधों में फासला रखें बीज सीड ड्रिल से बीजे जाते हैं और इनकी गहराई 7-10 होती है बीज छींटे से भी बीजा जा सकता है पर बिजाई वाली मशीन से की गई बिजाई ज्यादा पैदावार देती है श्री मान चने की फसल के लिए ज्यादा समतल बैडों की जरूरत नहीं होती यदि इसे मिक्स फसल के तौर पर उगाया जाये तो खेत की अच्छी तरह से जोताई होनी चाहिए यदि इस फसल को खरीफ की फसल के तौर पर बीजना हो, तो खेत को मॉनसून आने पर गहरी जोताई करें, जो बारिश के पानी को संभालने में मदद करेगा बिजाई से पहले खेत की एक बार जोताई करें यदि मिट्टी में नमी की कमी नज़र आये तो बिजाई से एक सप्ताह पहले सुहागा फेरें बारानी क्षेत्रों के लिए, अक्तूबर का दूसरा या तीसरा सप्ताह चने की खेती के लिए उपयुक्त होता है सिंचित क्षेत्रों के लिए, बिजाई नवंबर के दूसरे सप्ताह में पूरी कर लें चने की पिछेती बिजाई दिसंबर के पहले सप्ताह तक पूरी कर लें बिजाई के लिए, कतार से कतार में 20-25 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 10 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीज को 6-8 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बीज को सीड ड्रिल या लोकल हल की सहायता से बोयें छोटे दानों के लिए 30-32 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें और मोटे दानों के लिए 36-40 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें
Posted by Vedachary Singrauli
Madhya Pradesh
26-02-2020 09:41 AM
मिर्च रेतली से भारी चिकनी हर तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है अच्छे विकास के लिए हल्की उपजाऊ और पानी के अच्छे निकास वाली ज़मीन जिसमे नमी सोखने की क्षमता हो, इसके लिए अनुकूल होती है हल्की ज़मीनें भारी ज़मीनों के मुकाबले अच्छी क्वालिटी की पैदावार देती हैं मिर्च के अच्छे विकास के लिए ज़मीन की pH 6-7 अनुकूल है निम्नलि.... (Read More)
मिर्च रेतली से भारी चिकनी हर तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है अच्छे विकास के लिए हल्की उपजाऊ और पानी के अच्छे निकास वाली ज़मीन जिसमे नमी सोखने की क्षमता हो, इसके लिए अनुकूल होती है हल्की ज़मीनें भारी ज़मीनों के मुकाबले अच्छी क्वालिटी की पैदावार देती हैं मिर्च के अच्छे विकास के लिए ज़मीन की pH 6-7 अनुकूल है निम्नलिखित किस्में उत्तर प्रदेश में लगाने के लिए उपयुक्त हैं: Arka Meghana: यह हाइब्रिड किस्म अधिक पैदावार वाली और पत्तों के धब्बे रोग की प्रतिरोधक है इसके फलों की लंबाई 10.6 सैं.मी. और चौड़ाई 1.2 सैं.मी. होती है इसके फल शरू में गहरे हरे और पकने के बाद लाल हो जाते हैं इसकी औसतन पैदावार 135 क्विंटल (हरी मिर्चें) और 20 क्विंटल (सूखी मिर्चें) प्रति एकड़ है Arka Sweta: यह हाइब्रिड किस्म अधिक पैदावार वाली और ताज़ा मंडी में बेचनेयोग्य है यह सिंचित स्थितियों में खरीफ और रबी दोनों में उगाई जा सकती है इसके फल की लंबाई 11-12 सैं.मी. चौड़ाई 1.2-1.5 सैं.मी. होती है इसके फल नर्म और दरमियाने कड़वे होते हैं फल शुरू में हल्के हरे और पकने के बाद लाल हो जाते हैं यह विषाणुओं को सहनयोग्य किस्म है इसकी औसतन पैदावार 130 क्विंटल (हरी मिर्चें) और 20 क्विंटल (सूखी मिर्चें) प्रति एकड़ है Kashi Early: इस किस्म के पौधे का कद लंबा (100-110 सैं.मी.) होता है इसका तना हल्के हरे रंग का बिना टहनियों वाला होता है इसके फल कड़वे, लंबे (8-9x1.0-1.2 सैं.मी.), आकर्षिक, शरू में गहरे हरे जो पकने के बाद चमकीले लाल हो जाते हैं इस किस्म के हरी मिर्च की पहली तुड़ाई पनीरी लगाने के 45 दिन बाद की जा सकती है इसकी औसतन पैदावार 100 क्विंटल (पकी हुई लाल) होती है Kashi Surkh: इस किस्म के पौधे छोटे कद के होते हैं, जिनका तना टहनियों वाला होता है इसके फल हल्के हरे, सीधे, लंबे 11-12 सैं.मी. होते हैं यह हरी और लाल दोनों तरह की मिर्चें उगाने योग्य किस्म है इसकी पहली तुड़ाई पनीरी लगाने के 55 दिनों के बाद की जा सकती है इसमें हरी मिर्च की औसतन पैदावार 100 क्विंटल प्रति एकड़ है Kashi Anmol: इस किस्म के पौधे दरमियाने कद के (60-70 सैं.मी.) होते हैं, जिनका तना टहनियों वाला होता है और यह आकर्षिक, हरे, कड़वे फल पैदा करता है इसकी पहली तुड़ाई पनीरी लगाने के 55 दिनों के बाद की जा सकती है इसकी औसतन पैदावार 80 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pant C-1: यह किस्म अन्य किस्मों से आसानी से अलग है क्योंकि इसके फल की फलियां सीधी होती हैं इसके फल अत्याधिक तीखे, आकार में छोटे, आधार चौड़ा और सिरा पतला होता है यह किस्म चितकबरा और पत्ता मरोड़ रोग की कुछ हद तक प्रतिरोधक है इस किस्म की हरी फलियों की औसतन पैदावार 110 क्विंटल प्रति एकड़ होती है सूखी फलियों की पैदावार 20 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Kashmir Chilly : यह किस्म लंबी और गुद्दे वाली गहरे लाल रंग की होती है यह सर्दियों में खेती के लिए उपयुक्त है Hot Portugal: इसके फल गहरे हरे रंग के होते हैं लेकिन पकने पर लाल रंग के हो जाते हैं इसके फल 11-15 सैं.मी. लंबे होते हैं और औसतन पैदावार 40-50 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Soorajmukhi: इस किस्म का पौधा छोटा, फल गहरे रंग के, पकने पर लाल रंग के और स्वाद में अत्याधिक कड़वे होते हैं एक गुच्छे में 8-12 फल होते हैं इसकी औसतन पैदावार 31-40 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Sweet Banana: फल हल्के पीले रंग के होते हैं जो पकने पर लाल रंग के हो जाते हैं इसके फल 18-20 सैं.मी. लंबे होते हैं और स्वाद में अत्याधिक कड़वे होते हैं इसकी औसतन पैदावार 40 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Hungarian Wax: फल पकने पर लाल रंग के हो जाते हैं, 10-16 सैं.मी. लंबे और स्वाद में थोड़े कड़वे होते हैं इसकी औसतन पैदावार 31-33 क्विंटल प्रति एकड़ होती है खेत को तैयार करने के लिए 2-3 बार जोताई करें और प्रत्येक जोताई के बाद डलियों को तोड़ें बिजाई से 15-20 दिन पहले रूड़ी की खाद 150-200 क्विंटल प्रति एकड़ डालकर मिट्टी में अच्छी तरह मिला दें टमाटर और मिर्च की खेती एक ही या नज़दीक वाले खेत में ना करें, क्योंकि दोनों की बीमारियां एक जैसी होती हैं और इस कारण एंथ्राक्नोस और बैक्टीरिया वाली बीमारीयों के बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है मिर्च की खेती पूरे वर्ष की जाती है खरीफ की फसल के लिए मई-जून और गर्मियों की फसल के लिए फरवरी - मार्च का समय मिर्च की रोपाई के लिए उपयुक्त होता है खरीफ के मौसम में 60-75 सैं.मी. x 45 सैं.मी. और सिंचित क्षेत्रों में 60 x 60 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें नर्सरी में बीजों को 3-5 सैं.मी. की गहराई में बोयें और फिर मिट्टी से ढक दें किस्मों के लिए 200 ग्राम बीज और हाइब्रिड के लिए 80-100 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बारानी क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 50 किलो (110 किलो यूरिया), फासफोरस 16 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 100 किलो) और पोटाश 20 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 35 किलो) प्रति एकड़ डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा, फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा पनीरी खेत में लगाने के समय डालें रोपाई के बाद बाकी बची नाइट्रोजन दो बराबर हिस्सों में 30वें और 50वें दिन डालें सिंचित क्षेत्रों के लिए, नाइट्रोजन 84 किलो (182 किलो यूरिया), फासफोरस 24 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 150 किलो) और पोटाश 24 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 40 किलो) प्रति एकड़ डालें रोपाई से पहले 24 किलो नाइट्रोजन (यूरिया 52 किलो), फासफोरस की पूरी मात्रा और पोटाश की आधी मात्रा प्रति एकड़ में डालें बाकी बची नाइट्रोजन को पांच भागों में बांटें और पोटाश को तीन बराबर भागों में बांटें नाइट्रोजन 12 किलो (यूरिया 26 किलो) को बिजाई के बाद 45वें, 60वें, 75वें, 95वें और 115वें दिन डालें और पोटाश 4 किलो को बिजाई के बाद 45वें, 60वें, और 75वें दिन डालें 45 दिनों तक गोडाई करें, कही की मदद से मिट्टी चढ़ाएं और खेत को नदीन मुक्त रखें यदि नदीनों की रोकथाम ना की जाये तो यह 70-90 % पैदावार कम कर देते हैं रोपाई से पहले मुख्य खेत में पैंडीमैथालीन 1 लीटर प्रति एकड़ में डालें यदि नदीनों की संख्या ज्यादा हो तो उनके अंकुरण के बाद सेन्कोर 800 मि.ली की स्प्रे प्रति एकड़ में करें नदीनों की रोकथाम के साथ मिट्टी में नमी को बनाए रखने के लिए मलचिंग एक प्रभावी तरीका है मिट्टी में नमी के आधार पर सर्दियों में 6-7 दिनों के अंतराल पर और गर्मियों में 4-5 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें फूल निकलने की अवस्था सिंचाई के लिए गंभीर होती है इस अवस्था पर पानी की कमी से फल गिरते हैं जिससे फलों के उत्पादन में कमी होती है विभिन्न खोजों में यह पाया गया है, कि प्रत्येक पखवाड़े में आधा इंच सिंचाई से जड़ों में नमी ज्यादा होती है जिससे वे अधिक उपज देती हैं मिर्चों की तुड़ाई हरा रंग आने पर करें या फिर पकने के लिए पौधे पर ही रहने दें मिर्चों का पकने के बाद वाला रंग किस्म पर निर्भर करता है अधिक तुड़ाइयां लेने के लिए यूरिया 10 ग्राम प्रति लीटर और घुलनशील K @ 10 ग्राम प्रति लीटर पानी (1 प्रतिशत प्रत्येक का घोल) की स्प्रे 15 दिनों के फासले पर कटाई के समय करें पैकिंग के लिए मिर्चें पक्की और लाल रंग की होने पर तोड़ें सुखाने के लिए प्रयोग की जाने वाली मिर्चों की पूरी तरह पकने के बाद ही तुड़ाई करें
Posted by Vedachary Singrauli
Madhya Pradesh
26-02-2020 09:39 AM
आलू की खेती के लिए तापमान 14-25* C होना चाहिए यह फसल बहुत तरह की मिट्टी जैसे कि रेतली, नमक वाली, दोमट और चिकनी मिट्टी में उगाई जा सकती है अच्छे जल निकास वाली, जैविक तत्व भरपूर, रेतली से दरमियानी ज़मीन में फसल अच्छी पैदावार देती है यह फसल नमक वाली तेजाबी ज़मीनों में भी उगाई जा सकती है पर बहुत ज्यादा जल जमाव और खारी या न.... (Read More)
आलू की खेती के लिए तापमान 14-25* C होना चाहिए यह फसल बहुत तरह की मिट्टी जैसे कि रेतली, नमक वाली, दोमट और चिकनी मिट्टी में उगाई जा सकती है अच्छे जल निकास वाली, जैविक तत्व भरपूर, रेतली से दरमियानी ज़मीन में फसल अच्छी पैदावार देती है यह फसल नमक वाली तेजाबी ज़मीनों में भी उगाई जा सकती है पर बहुत ज्यादा जल जमाव और खारी या नमक वाली ज़मीन इस फसल की खेती के लिए उचित नहीं होती इसकी किस्मे जैसे के Kufri Bahar, Kufri Badshah, Kufri Sutlaj, Kufri Anand, Kufri Pukhraj, Kufri Chipsona 2, Kufri Chipsona 1, Kufri Chandramukhi, Kufri Jyoti, Kufri Ashoka, Kufri Lalima की बुवाई कर सकते है खेत को एक बार 30 सैं.मी. गहरा जोतकर अच्छे ढंग से बैड बनाएं जोताई के बाद 2-3 बार तवियां फेरें और फिर 2-3 बार सुहागा फेरें बिजाई से पहले खेत में नमी की मात्रा बनाकर रखें बिजाई के लिए दो ढंग मुख्य तौर पर प्रयोग किए जाते हैं 1. मेंड़ और खालियों वाला ढंग 2. समतल बैडों वाला ढंग अगेती बिजाई के लिए, सितंबर के आखिरी सप्ताह से अक्तूबर का पहला सप्ताह खेती के लिए उपयुक्त होता है मुख्य फसल के लिए अक्तूबर का दूसरे से चौथा सप्ताह बिजाई के लिए उपयुक्त समय होता है गांठों के आकार के अनुसार रोपाई का फासला विभिन्न होता है बिजाई के लिए कतार से कतार में 60 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 20 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीज बोने के बाद बीजों को 8-10 सैं.मी. तक मिट्टी की परत से ढक दें बिजाई के लिए ट्रैक्टर से चलने वाली सेमी ऑटोमेटिक या ऑटोमैटिक प्लांटर का प्रयोग करें रोपाई के लिए बड़ी आकार की गांठों का प्रयोग किया जाता है बिजाई के लिए 13-15 क्विंटल बीज प्रयोग किए जाते हैं बिजाई के लिए सेहतमंद आलू ही चुने बिजाई से पहले आलुओं को कोल्ड स्टोर से निकालकर 1-2 सप्ताह के लिए छांव वाले स्थान पर रखें ताकि वे अंकुरित हो जायें आलुओं के सही अंकुरन के लिए उन्हें जिबरैलिक एसिड 1 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी में मिलाकर एक घंटे के लिए उपचार करें फिर छांव में सुखाएं और 10 दिनों के लिए हवादार कमरे में रखें फिर काटकर आलुओं को मैनकोजेब 0.5 प्रतिशत घोल (5 ग्राम प्रति लीटर पानी) में 10 मिनट के लिए भिगो दें इससे आलुओं को शुरूआती समय में गलने से बचाया जा सकता है आलुओं को गलने और जड़ों में कालापन रोग से बचाने के लिए साबुत और काटे हुए आलुओं को 6 प्रतिशत मरकरी के घोल (टैफासन) 0.25 प्रतिशत (2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी) में डालें यदि संभव हो, तो आलू की रोपाई से पहले, हरी खाद वाली फसलें जैसे सनई, जंतर आदि फसलें उगायें और उन्हें मिट्टी में अच्छी तरह दबायें यदि हरी खाद उपलब्ध ना हो तो गली सड़ी रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर 60-80 क्विंटल प्रति एकड़ में खेत की तैयारी के समय रोपाई से दो सप्ताह पहले डालें बिजाई से पहले सिंचाई करें बिजाई के बाद 10-12 दिनों के अंदर अंदर पहली सिंचाई करें दूसरी सिंचाई पहली सिंचाई के 7 दिनों के बाद करें बाकी की सिंचाइयां जलवायु की परिस्थितियों और जरूरत के अनुसार करें गांठे बनने की अवस्था सिंचाई के लिए बहुत महत्तवपूर्ण होती है इस अवस्था में पानी की कमी ना होने दें ज्यादा सिंचाई ना करें इससे गलने की बीमारी का खतरा बढ़ता है पुटाई से 10-12 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें धन्यवाद
Posted by lokeshkumar Meena
Rajasthan
26-02-2020 09:37 AM
लोकेशकुमार जी, अगर आप टिंडे की बिजाई करना चाहते है तो आम जानकारी टिंडे को round melon, round gourd, Indian squash भी कहा जाता है यह उत्तरी भारत की सबसे महत्तवपूर्ण गर्मियों की सब्जी है टिंडे का मूल स्थान भारत है यह कुकरबिटेसी प्रजाति से संबंधित है इसके कच्चे फल सब्जी बनाने के लिए प्रयोग किए जाते हैं 100 ग्राम अन-पके फलों में 1.4% प्रोटी.... (Read More)
लोकेशकुमार जी, अगर आप टिंडे की बिजाई करना चाहते है तो आम जानकारी टिंडे को round melon, round gourd, Indian squash भी कहा जाता है यह उत्तरी भारत की सबसे महत्तवपूर्ण गर्मियों की सब्जी है टिंडे का मूल स्थान भारत है यह कुकरबिटेसी प्रजाति से संबंधित है इसके कच्चे फल सब्जी बनाने के लिए प्रयोग किए जाते हैं 100 ग्राम अन-पके फलों में 1.4% प्रोटीन, वसा 0.4%, कार्बोहाइड्रेट 3.4%, कैरोटीन 13 मि.ग्रा. और 18 मि.ग्रा. विटामिन होते हैं इसके फल की औषधीय विशेषताएं भी हैं, सूखी खांसी और रक्त संचार सुधारने के लिए इसका उपयोग किया जाता है मिट्टी बढ़िया विकास और पैदावार के लिए अच्छे निकास वाली, उच्च जैविक तत्वों वाली रेतली दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 6 से 7 होनी चाहिए पानी के ऊंचे स्तर वाली मिट्टी में यह बढ़िया पैदावार देती है ज़मीन की तैयारी मिट्टी के भुरभुरा होने तक ज़मीन की जोताई करें गाय का गला हुआ गोबर 8-10 टन प्रतिकिलो खेत की तैयारी के समय प्रति एकड़ में डालें खेती के लिए बैड तैयार करें बीजों को गड्ढों या खालियों में बोया जा सकता है बिजाई का समय उत्तर भारत में, इसकी खेती दो बार की जा सकती है इसे फरवरी-मार्च और जून-जुलाई में भी बोया जा सकता है फासला बीजों को बैड के दोनों तरफ बोयें और 45 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीज की गहराई बीजों को 2-3 सैं.मी. की गहराई में बोयें बिजाई का ढंग बीजों को सीधे या मेंड़ पर बोया जा सकता है बीज की मात्रा एक एकड़ बिजाई के लिए,1.5 किलो बीजों की मात्रा काफी होती है बीजों का उपचार बिजाई से पहले 12-24 घंटे के लिए बीजों को पानी में भिगो दें इससे उनकी अंकुरन प्रतिशतता में विकास होता है बीजों को मिट्टी से होने वाली फंगस से बचाने के लिए, कार्बेनडाज़िम 2 ग्राम या थीरम 2.5 ग्राम से प्रति किलो बीजों का उपचार करें रासायनिक उपचार के बाद, बीजों को ट्राइकोडरमा विराइड 4 ग्राम या स्यूडोमोनास फलूरोसैंस 10 ग्राम से प्रति किलो बीजों का उपचार करें धन्यवाद

Posted by sukhjinder singh
Punjab
26-02-2020 09:30 AM
Sukhjinder ji, eh dono hi boht vadhiya han tusi dona vicho kis eda vi istemal kar sakde ho, mycorrhiza @ 4 kilo prati acre de hisaab nal pa sakde ho, dhanwad
Posted by Amandeep Sidhu
Punjab
26-02-2020 09:29 AM
Aman ji ehh Murrah nasal di katti hai iss nu tuci vdia growth lai Cargill di Heifer dry feed deni suru kro ate Cafplan powder 50-50gm rojana deo ate her 3 mahine badd pett de kiria lai goli jrur deo.

Posted by Rakesh kumar
Rajasthan
26-02-2020 09:24 AM
राकेश जी, आप इसमें NPK 130045 @ 10 ग्राम प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे कर सकते हैं, धन्यवाद

Posted by Amandeep Singh
Punjab
26-02-2020 09:22 AM
ਅਜੇ ਤੱਕ ਕੋਈ ਅੱਪਡੇਟ ਨਹੀ ਹੈ ਜੀ , ਥੋੜਾ ਇੰਤਜਾਰ ਕਰੋ ,ਸੈੰਟਰ ਸਰਕਾਰ ਦੀ ਇੱਕ ਸਕੀਮ ਸ਼ਾਇਦ ਆ ਜਾਵੇ
Posted by manish saroj
Uttar Pradesh
26-02-2020 09:01 AM
श्री मान बैंगन की फसल सख्त होने के कारण इसे अलग अलग तरह की मिट्टी में उगाया जा सकता है यह एक लंबे समय की फसल है, इसलिए अच्छे जल निकास वाली उपजाऊ रेतली दोमट मिट्टी उचित होती है और अच्छी पैदावार देती है अगेती फसल के लिए हल्की मिट्टी और अधिक पैदावार के लिए चिकनी और नमी या गारे वाली मिट्टी उचित होती है फसल की वृद्ध.... (Read More)
श्री मान बैंगन की फसल सख्त होने के कारण इसे अलग अलग तरह की मिट्टी में उगाया जा सकता है यह एक लंबे समय की फसल है, इसलिए अच्छे जल निकास वाली उपजाऊ रेतली दोमट मिट्टी उचित होती है और अच्छी पैदावार देती है अगेती फसल के लिए हल्की मिट्टी और अधिक पैदावार के लिए चिकनी और नमी या गारे वाली मिट्टी उचित होती है फसल की वृद्धि के लिए 5.5-6.6 पी एच होनी चाहिए मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की तीन से चार बार जोताई करें गाय का गला हुआ गोबर 42 क्विंटल प्रति एकड़ में डालें और मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें बैंगन के बीज 3 मीटर लंबे, 1 मीटर चौड़े और 15 सैं.मी. ऊंचे बैडों पर बोये जाते हैं पहले बैडों में बढ़िया रूड़ी की खाद डालें फिर बिजाई से दो दिन पहले कप्तान का घोल डालें ताकि जो नर्सरी बैडों में पौधों को नष्ट होने से बचाया जा सके उसके बाद बीजों को कतारों में 2.5 सैं.मी. के फासले पर और 1.5 सैं.मी. की गहराई पर बोयें हल्की सिंचाई करें पौधों के अंकुरन तक बैडों को काले रंग की पॉलीथीन शीट या पराली से ढक दें तंदरूस्त पौधे जिनके 3-4 पत्ते निकलें हों और कद 12-15 सैं.मी. (30-40 days crop) हो, खेत में पनीरी लगाने के लिए तैयार होते हैं बैंगन की खेती पूरे वर्ष की जाती है खरीफ मौसम के लिए, नर्सरी फरवरी - मार्च के महीने में तैयार करें और मार्च - अप्रैल के महीने में रोपाई करें सर्दियों के मौसम में, नर्सरी की तैयारी के लिए जून जुलाई का समय उपयुक्त होता है और रोपाई के लिए जुलाई अगस्त का महीना उपयुक्त होता है बसंत के मौसम में, सितंबर के महीने में नर्सरी तैयार करें और अक्तूबर - नवंबर के महीने में रोपाई पूरी कर लें लंबी किस्मों के लिए, कतार से कतार में 60-75 सैं.मी. जबकि गोल किस्मों के लिए कतारों में 80-90 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 60-70 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें नर्सरी में, बीज को 1.5 सैं.मी. गहराई में बोयें और मिट्टी से ढक दें खेत में पनीरी लगाकर इसकी बिजाई की जाती है एक एकड़ खेत में बिजाई के लिए 300-400 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें नाइट्रोजन 60 किलो (130 किलो यूरिया), फासफोरस 20 किलो (125 किलो सिंगल सुपर फासफेट) और पोटाश 20 किलो (35 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश) की मात्रा प्रति एकड़ में प्रयोग करें नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा आखिरी जोताई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन को रोपाई के बाद 30 वें और 45वें दिन डालें नदीनों को रोकने, अच्छे विकास और उचित हवा के लिए दो - चार गोडाई करें काले रंग की पॉलिथीन शीट से पौधों को ढक दें जिससे नदीनों का विकास कम हो जाता है और ज़मीन का तापमान भी बना रहता हैं नदीनों को रोकने के लिए पौधे लगाने से पहले मिट्टी में फलूकलोरालिन 600-800 मि.ली. प्रति एकड़ या ऑक्साडायाज़ोन 400 ग्राम प्रति एकड़ डालें अच्छे परिणाम के लिए पौधे लगाने से पहले एलाकलोर 2 लीटर प्रति एकड़ की मिट्टी के तल पर स्प्रे करें
Posted by Lovedeep Singh
Punjab
26-02-2020 08:46 AM
Lovedeep ji tuci iss nu nazdiki doctor ton check krwao ji kyuki isdi janch krke he sahi ilagg ho skda hai ate bimari da ptaa lgg skda hai.
Posted by Gurnishan Singh Dhillon
Punjab
26-02-2020 08:42 AM
ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ Amoxirum injection 4.5gm, CRB injection 20ml, Vitum-H injection 5ml, Isoflud injection 5ml ਲਗਾਤਾਰ 3 ਦਿਨ ਲਗਵਾਓ ਅਤੇ mamidium ਪਾਊਡਰ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ..
Posted by Gurdeepsingh Khanal
Punjab
26-02-2020 08:01 AM
ਗੁਰਦੀਪ ਜੀ ਤੁਸੀ ਕਣਕ ਦਾ ਆਟਾ ਬਣਾ ਕੇ ਉਸਦੀ packing ਕਰਕੇ ਵੇਚ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਸਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਢਾਬੇ ਬਾਰੇ ਸੋਚ ਰਹੇ ਹੋ ਤਾ ਇਹ ਵੀ ਬਹੁਤ ਵਧੀਆ ਵਿਚਾਰ ਹੈ ਪਰ ਇਸਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ ਢਾਬਾ ਅਜੇਹੀ ਜਗਾਹ ਤੇ ਬਣਾਓ ਜਿਥੇ ਤੁਹਾਨੂੰ ਫਾਇਦਾ ਹੋਏ
Posted by Bhupendra sahu
Chattisgarh
26-02-2020 07:46 AM
साहू जी आप सब्जियां जैसे चौलाई, मूली *मई* फूलगोभी, बैंगन, प्याज, मूली, मिर्च *जून* फूलगोभी, खीरा-ककड़ी, लोबिया, करेला, लौकी, तुरई, पेठा, बीन, भिण्डी, टमाटर, प्याज, चौलाई, शरीफा *जुलाई* खीरा-ककड़ी-लोबिया, करेला, लौकी, तुरई, पेठा, भिण्डी, टमाटर, चौलाई, मूली की बिजाई कर सकते है

Posted by Rajesh Kumar
Bihar
26-02-2020 07:42 AM
Rajesh Kumar ji, ap iski roktham ke liye isme copper oxychloride @ 500 gram ko 150 litre pani mein mia kar prati acre ke hisaab se spray kar sakte hain, dhanywad
Posted by lakhwinder gill
Punjab
26-02-2020 07:14 AM
ਉਸ ਨੂੰ Keeper plus ਪਾਊਡਰ 30 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ ਅਤੇ Pg care ਰੋਜਾਨਾ ਇਕ ਗੋਲੀ ਦਿਓ ਅਤੇ 21 ਦਿਨ ਤਕ ਦਿੰਦੇ ਰਹੋ ਫਿਰ ਅਗਲੀ ਵਾਰ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆਉਣ ਤੇ ਉਸ ਨੂੰ ਟੀਕਾ ਭਰਵਾਂ ਕੇ ਪਾਊਡਰ ਅਤੇ ਗੋਲੀਆਂ 21 ਦਿਨ ਹੋਰ ਦਿੰਦੇ ਰਹੋ, ਇਸ ਨਾਲ ਉਹ ਗੱਭਣ ਹੋ ਜਾਵੇਗੀ.
Posted by amit kumar
Uttar Pradesh
26-02-2020 07:08 AM
Amit ji, kripya ap tareek bataye ke apne kis din iski bijai ki hai, taki apko iske bare mein puri jankari di ja sake, dhanywad
Posted by amit kumar
Uttar Pradesh
26-02-2020 07:05 AM
अमित जी आप पौध की ग्रोथ के लिए NPK 191919 @10 ग्राम प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें
Posted by gurpreet singh
Punjab
26-02-2020 06:32 AM
ਗੁਰਪ੍ਰੀਤ ਜੀ ਤੁਸੀ ਅਚਾਰ ਦੇ ਲਈ ਕਿਸਮ j 1006 ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ
Posted by kulveer singh
Punjab
26-02-2020 06:30 AM
ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ Gynarich 5ml ਇੰਜੇਕਸ਼ਨ ਲਗਾਓ ਅਤੇ 7ਵੇ ਦਿਨ Pragma 2ml ਇੰਜੇਕਸ਼ਨ ਲਗਾਓ ਅਤੇ ਫਿਰ 9ਵੇ ਦਿਨ Gynarich 2.5ml ਇੰਜੇਕਸ਼ਨ ਲਗਾਓ ਅਤੇ 10ਵੇ, 11ਵੇ ਦਿਨ ਉਸ ਨੂੰ ਟੀਕਾ ਭਰਵਾਂ ਦਿਓ ਅਤੇ pregstay gold powder 30gm ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ..
Posted by kirshan.kumar
Rajasthan
26-02-2020 06:20 AM
Kirshan kumar ji vermicompost lene ke lia aap Lokesh Aggarwal 9057900798 Shri Organic Farming se samparak kar sakte hai, Thankyou.

Posted by maan
Punjab
26-02-2020 06:15 AM
Maan ji, tusi vadhiya jhaad layi kanak vich NPK 130045 @ 1 kilo nal boron @ 100 gram nu 150 litre pani vich mila ke prati acre de hisaab nal spray kar sakde ho, dhanwad
Posted by Anil Wankhade
Maharashtra
25-02-2020 11:40 PM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप Amit Kumar Bamoriya Phone: 9770085381 जी से सम्पर्क कर सकते हैं, धन्यवाद

Posted by manvir singh
Punjab
25-02-2020 11:00 PM
Manvir singh ji solar pump lagwane ke lia or is ke bare me puri jankari ke lia aap Amrik Singh 9814221784 se samparak kar sakte hai, Thankyou.

Posted by nav shah
Punjab
25-02-2020 10:32 PM
Navpreet ji tuci ohna nu saro da tel de skde ho eh tuci 100ml rojana de skde ho, ehh tuci feed vich milla ke v de skde ho..

Posted by Amritpal singh
Punjab
25-02-2020 09:28 PM
ਅਮ੍ਰਿਤਪਾਲ ਜੀ ਤੁਸੀ ਫੀਡ ਕਿਸੀ ਵੀ ਕੰਪਨੀ ਦੀ ਵਰਤ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜਿਸ ਨੂੰ ਖਾ ਕੇ ਪਸ਼ੂ ਵਧਿਆ ਦੁੱਧ ਦਿੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਆਸਾਨੀ ਨਾਲ ਹਜ਼ਮ ਕਰ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤੁਸੀ ਕਾਰਗਿਲ, ਵੇਰਕਾ, ਟਿਵਾਣਾ, ਗੋਦਰੇਜ ਕਿਸੀ ਵੀ ਫੀਡ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਪਰ ਇੱਹ ਤੁਹਾਡੇ ਪਸ਼ੂ ਦੇ ਖਾਣ ਦੇ ਨਿਰਭਰ ਹੈ ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਤੁਸੀ ਖੁਦ ਘਰ ਵਿਚ ਵੀ ਫੀਡ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by Lucky Singh
Madhya Pradesh
25-02-2020 09:10 PM
फीड तैयार करने के लिए आप 1 किलो मिनरल मिक्सचर, 2 किलो नमक, मीठा सोडा 1 किलो, मक्की 30 किलो, गेहूं 25, सोया doc10 किलो, सरसों खल 10 किलो, धान की doc 21 किलो को मिलाकर फीड तैयार करवायें यह आप रोजाना 250-300 ग्राम तक खिलायें..

Posted by Himanshu singh
Uttar Pradesh
25-02-2020 09:07 PM
आप पेठे की किस्म PAG 3 की बिजाई कर सकते हैं उत्तरी भारत में इसकी खेती दो बार की जाती है इसकी बिजाई फरवरी-मार्च में भी की जाती हैं एक एकड़ में 2 किलो बीज का प्रयोग करें मिट्टी को अच्छी तरह से भुरभुरा करने के लिए 3-4 बार जोताई करें अंत में जोताई करने से पहले 20 किलो गली-सड़ी रूडी की खाद 40 किलो प्रति एकड़ के साथ मिला कर डालें 3 .... (Read More)
आप पेठे की किस्म PAG 3 की बिजाई कर सकते हैं उत्तरी भारत में इसकी खेती दो बार की जाती है इसकी बिजाई फरवरी-मार्च में भी की जाती हैं एक एकड़ में 2 किलो बीज का प्रयोग करें मिट्टी को अच्छी तरह से भुरभुरा करने के लिए 3-4 बार जोताई करें अंत में जोताई करने से पहले 20 किलो गली-सड़ी रूडी की खाद 40 किलो प्रति एकड़ के साथ मिला कर डालें 3 मीटर चौड़े बैडों पर, जिनमें 75-90 सैं.मी. का फासला हो, एक तरफ दो बीज बोयें बीजों को 1-2 सै.मी. गहराई पर बोयें बीजों को सीधा ही बैडों पर बोया जाता है संपूर्ण रूप से फसल को नाइट्रोजन 40 किलो (यूरिया 90 किलो), फासफोरस 20 किलो (सिंगल सुपर फास्फेट 125 किलो) और पोटाश 20 किलो (मिउरेट ऑफ़ पोटाश 35 किलो) प्रति एकड़ में जरूरत होती है नाइट्रोजन की आधी मात्रा, फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बैड बनाने के समय डालें बाकी की बची नाइट्रोजन फल निकलने के समय डालें नदीनों की तीव्रता के अनुसार, हाथों या कसी के साथ गोडाई करें मलचिंग के साथ भी नदीनों को रोका जा सकता है और पानी की बचत भी की जा सकती है जलवायु और मिट्टी की किस्म के अनुसार गर्मियों की ऋतु में 7-10 दिनों के फासले पर सिंचाई करें बारिश की ऋतु में बारिश के अनुसार सिंचाई करें किस्म के आधार पर फसल 90-100 दिनों में तैयार हो जाती है मांग के मुताबिक फलों की तुड़ाई पकने के समय या उससे पहले की जा सकती है पके हुए फलों को ज्यादातर बीजों के उत्पादन के लिए प्रयोग किया जाता है फलों को तेज़ चाकू के साथ बेल के पास से काटें
Posted by Ajay sourashtriya
Madhya Pradesh
25-02-2020 09:00 PM
अजय जी फीडबैक देने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद
Posted by RAHUL KUMAR
Bihar
25-02-2020 08:58 PM
राहुल जी इसकी 3 -4 कटाई हो जाती है 45 -50 दिन तक आपकी इसकी 2 कटाई कर सकते है

Posted by Lucky Singh
Madhya Pradesh
25-02-2020 08:52 PM
लकी जी नमस्कार कृपया आप अपना सवाल विस्तार से पूछे ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके
Posted by Jay Chand
Uttar Pradesh
25-02-2020 08:43 PM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद

Posted by ਹਰਮਨਜੀਤ ਸਿੰਘ ਢਿੱਲੋਂ
Punjab
25-02-2020 08:42 PM
ik katti nu tyar krn lyi kehri feed poni chaidi a g jis nal katti cheti teeka lwon te like ho jaye ?
ਬੱਚਿਆਂ ਦੀ ਵਧਿਆ ਗਰੋਥ ਲਈ ਤੁਸੀ ਓਹਨਾ ਨੂੰ ਇਕ ਮਹੀਨੇ ਤਕ ਮਾਂ ਦਾ ਰੱਜਵਾਂ ਦੁੱਧ ਪਿਲਾਓ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਆਸਾਨੀ ਨਾਲ ਹਜ਼ਮ ਕਰ ਸਕੇ, ਉਸ ਨੂੰ ਖੁਲਾ ਰੱਖੋ ਜਿਸ ਨਾਲ ਉਹ ਭੱਜ ਭੱਜ ਕੇ ਕਸਰਤ ਕਰਦੀ ਰਹੇ, ਇਕ ਮਹੀਨੇ ਦਾ ਹੋਣ ਤੋਂ ਬਾਦ ਤੁਸੀ ਕਾਰਗਿਲ ਦਾ Calf starter ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਇਸ ਨੂੰ ਦੁੱਧ ਵਿਚ ਮਿਕਸ ਕਰਕੇ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ, 3 ਮਹੀਨਿਆਂ ਦਾ ਹੋਣ ਤੋਂ ਬਾਦ Calf grower ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, 8 ਮਹੀਨਿਆਂ ਦੀ ਉਮਰ ਤ.... (Read More)
ਬੱਚਿਆਂ ਦੀ ਵਧਿਆ ਗਰੋਥ ਲਈ ਤੁਸੀ ਓਹਨਾ ਨੂੰ ਇਕ ਮਹੀਨੇ ਤਕ ਮਾਂ ਦਾ ਰੱਜਵਾਂ ਦੁੱਧ ਪਿਲਾਓ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਆਸਾਨੀ ਨਾਲ ਹਜ਼ਮ ਕਰ ਸਕੇ, ਉਸ ਨੂੰ ਖੁਲਾ ਰੱਖੋ ਜਿਸ ਨਾਲ ਉਹ ਭੱਜ ਭੱਜ ਕੇ ਕਸਰਤ ਕਰਦੀ ਰਹੇ, ਇਕ ਮਹੀਨੇ ਦਾ ਹੋਣ ਤੋਂ ਬਾਦ ਤੁਸੀ ਕਾਰਗਿਲ ਦਾ Calf starter ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਇਸ ਨੂੰ ਦੁੱਧ ਵਿਚ ਮਿਕਸ ਕਰਕੇ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ, 3 ਮਹੀਨਿਆਂ ਦਾ ਹੋਣ ਤੋਂ ਬਾਦ Calf grower ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, 8 ਮਹੀਨਿਆਂ ਦੀ ਉਮਰ ਤੋਂ ਬਾਦ Heifer dry ਫੀਡ ਦੇਣੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਇਹ ਸਾਰਾ ਕੁਜ ਉੱਨੀ ਮਾਤਰਾ ਵਿਚ ਦਿਓ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਉਹ ਆਸਾਨੀ ਨਾਲ ਹਜ਼ਮ ਕਰ ਸਕੇ ਇਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਨਾਲ ਨਾਲ ਤੁਸੀ ਗਰੋਥ ਦੇ ਲਈ Growth Mantra ਪਾਊਡਰ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਜਾਂ ਤੁਸੀ puberaid ਪਾਊਡਰ ਵੀ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਇਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ 2 ਮਹੀਨਿਆਂ ਦੀ ਉਮਰ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ, ਜੇਕਰ ਉਮਰ 2 ਮਹੀਨੇ ਤੋਂ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹੈ ਤਾਂ 20 ਗ੍ਰਾਮ ਪਾਊਡਰ ਦੇਣਾ ਹੈ, 4 ਮਹੀਨਿਆਂ ਤੋਂ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹੋਣ ਤੇ 25 ਗ੍ਰਾਮ ਦਿਓ, ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਉਮਰ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ 5-5 ਗ੍ਰਾਮ ਵਧਾ ਦਿਓ. ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ ਉਸਦੀ ਡੇਵਰਮਿੰਗ ਦਾ ਵੀ ਪੂਰਾ ਧਿਆਨ ਰੱਖੋ ਜੀ.
Posted by Jay Chand
Uttar Pradesh
25-02-2020 08:41 PM
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजि.... (Read More)
मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद
Posted by sunil
Uttar Pradesh
25-02-2020 08:40 PM
अदरक की खेती मई-जून के पहले सप्ताह में की जाती है अभी इसकी खेती का समय नहीं है

Posted by manoj kumar
Himachal Pradesh
25-02-2020 08:29 PM
Manoj kumar ji Mandi, HP me beetal goat lene ke lia aap Kamal 7347229772 Kamal goat Farm nal samparak kar sakde ho, Thankyou.
Posted by Lokesh Kumar
Jharkhand
25-02-2020 08:16 PM
लोकेश जी आप इसके पूरे बैग कटवा कर दीजिये जिसके बाद मशरुम गलना बंद कर देंगे धन्यवाद

Posted by Babasaheb Kale
Maharashtra
25-02-2020 08:05 PM
कृपया आप अपना सवाल विस्तार से पूछे ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके
Posted by manish saroj
Uttar Pradesh
25-02-2020 08:05 PM
Shri maan g kripa aap apna swal visthar se puchein toh aapko poori jankari di ja ske...

Posted by Babasaheb Kale
Maharashtra
25-02-2020 08:05 PM
श्रीमान जी कृपया आप अपना सवाल विस्तार से पूछें ताकि आपको पूरी जानकारी दी जा सके

Posted by Rajkishan vaishya
Madhya Pradesh
25-02-2020 07:58 PM
राजकिशन जी कृपया आप कीट की फोटो भेजे ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके

Posted by Mahipal singh Chouhan
Madhya Pradesh
25-02-2020 07:52 PM
Mahipal singh Chouhan ji Pure sahiwal cow lene ke lia aap Kamlesh Kushwaha 9229881876 Bhumika ANIMAL Breeder farm se samparak kar sakte hai, Thankyou.
Posted by omprakash patel
Chattisgarh
25-02-2020 07:52 PM
श्रीमान जी आप Imidacloprid@1.5ml प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे कर सकते हैं

Posted by Manoj Yadav
Chattisgarh
25-02-2020 07:44 PM
Manoj Yadav ji desi chicks lene ke lia aap Kamlesh Kushwaha 9229881876 Bhumika ANIMAL Breeder farm se samparak kar sakte hai, Thankyou.
Posted by Rohit vishwakarma
Uttar Pradesh
25-02-2020 07:44 PM
रोहित जी खेत की उवरता बढ़ाने के लिए आप गोबर की खाद का इस्तेमाल करें और इसके इलावा आप हरी खाद की बिजाई कर सकते है
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