
Posted by kishor tekam
Maharashtra
26-02-2020 03:14 PM
आप बच्चों को जन्म से 3 महीने के बाद PPR vaccination करवाएं और फिर 20 दिनों के बाद ET vaccination करवाएं और फिर 20 दिनों के बाद FMD vaccination करवाएं और फिर 20 दिनों के बाद HS vaccination करवाएं और इनमें से ET और HS vaccination एक साल में दो बार करवाएं इस हिसाब से आप वैक्सीनेशन करवा सकते है

Posted by Shashank Kumar
Bihar
26-02-2020 03:12 PM
आप स्ट्रॉबेरी की खेती मध्य प्रदेश में की जा सकती है कई किसान इसकी खेती करते है स्ट्रॉबेरी की खेती पॉलीहाउस के अंदर या खुले खेत में कर सकते हैं चीकनी, बालुई और अच्छे निकास वाली ज़मीन स्ट्रॉबेरी के लिए अच्छी होती है तेजाबी में पी एच 5.0 से 6.5 होनी चाहिए मिट्टी की नाज़ुकता तीस से चालीस सैं.मी. होनी चाहिए स्ट्रॉबेरी .... (Read More)
आप स्ट्रॉबेरी की खेती मध्य प्रदेश में की जा सकती है कई किसान इसकी खेती करते है स्ट्रॉबेरी की खेती पॉलीहाउस के अंदर या खुले खेत में कर सकते हैं चीकनी, बालुई और अच्छे निकास वाली ज़मीन स्ट्रॉबेरी के लिए अच्छी होती है तेजाबी में पी एच 5.0 से 6.5 होनी चाहिए मिट्टी की नाज़ुकता तीस से चालीस सैं.मी. होनी चाहिए स्ट्रॉबेरी की सही वृद्धि के लिए दिन में तापमान 20-25 डिगरी और रात के समय 7-12 डिगरी होना चाहिए इसलिए इसकी पनीरी लगाने का काम मध्य अक्तूबर से मध्य नवंबर तक कर देना चाहिए इन महीनों और इसके बाद पंजाब में लगभग यही तापमान होता है स्ट्रॉबेरी की खेती मलचिंग विधि द्वारा की जाती है सबसे पहले खेत को तैयार किया जाता है इसके बाद ही ट्रैक्टर की सहायता से मलचिंग मशीन को खेत में उतारा जाता है चार फुट क्यारी तैयार की जाती है इसमें ड्रिप लाइन फिट की जाती है इसके बाद मशीन की सहायता से क्यारियों पर प्लास्टिक शीट बिछाई जाती है मलचिंग के लिए हल्का और लचकीला पदार्थ लें ताकि स्ट्रॉबेरी के पौधे की रफ्तार पर असर ना पड़े जिसे बाद में दोनों ओर से मिट्टी में दबा दिया जाता है अब इस शीट में छेद करके उसमें स्ट्रॉबेरी की पनीरी लगायी जाती है पनीरी लगाने के समय जड़ को पूरी तरह मिट्टी में व्यवस्थित कर दें जड़ बाहर रहने से पौधे के सूखने का खतरा होता है पौधे को ज्यादा तापमान और ठंड से बचाने के लिए इसके ऊपर छांव करनी चाहिए जो आप लो टन्नल विधि से कर सके हैं मौसम का बहुत ख्याल रखना पड़ता है थोड़ी सी लापरवाही से सारी फसल खराब हो सकती है पहले साल अपने खेत में स्ट्रॉबेरी की खेती करने का कुल खर्चा ढाई से तीन लाख रूप्ये प्रति एकड़ के हिसाब से आ जाता है क्योंकि किसान को पहले साल ड्रिप सिस्टम और फव्वारों आदि पर खर्च करना पड़ता है पर अगले वर्षों में किसानों का यह खर्चा बच जाता है इसके लिए एक एकड़ में 40 बैड बनते हैं और एक बैड पर 1000 स्ट्रॉबेरी के पौधे लगते हैं इस तरह एक एकड़ में चालीस हजार पौधे लगाए जाते हैं एक पौधा 3 से 4 रूप्ये तक मिल जाता है और इसकी उपज 50 से 60 क्विंटल तक निकल आता है 25-30क्विंटल गोबर की खाद एक एकड़ में डालें यह खाद एक साल में डालनी होती है फिर 20 : 40 : 40 NPK KG / हेक्टेयर डालनी है अच्छी फसल के लिए यूरिया दो फीसदी जिंक सल्फेट, आधा प्रतिशत कैलशियम सल्फेट और बोरिक एसिड 0.2 फीसदी अच्छी फसल के लिए ठीक है सिंचाई जल्दी जल्दी पर हल्की करनी चाहिए ज्यादा पानी ठीक नहीं है पत्ते गीले ना करें तुपका सिंचाई से पानी कम लग सकता है यदि तुपका सिंचाई नहीं कर रहे तो क्यारियों में पानी खाली में ही लगाएं नदीन हाथ से हटाएं या कीड़े मकौड़े और अन्य बीमारियों की तरफ ध्यान रखना जरूरी है यदि कोई पौधा ज्यादा खराब है उसे हटा दें जब फल का रंग 70 प्रतिशत लाल हो जाये तो तोड़ लेना चाहिए यदि मार्किट दूरी पर है तो थोड़ा सख्त ही तोड़ना चाहिए तुड़ाई अलग अलग दिनों में करनी चाहिए स्ट्रॅाबेरी की पैकिंग प्लास्टिक की प्लेटों में करनी चाहिए इसे हवादार जगह पर रखना चाहिए जहां तापमान पांच डिगरी हो एक दिन के बाद स्ट्रॉबेरी की पैकिंग का तापमान ज़ीरो डिग्री होना चाहिए मार्किट में स्ट्रॉबेरी औसतन 200 रूपये प्रति तक बिकती है इस तरह पांच लाख प्रति एकड़ से इसकी आमदन शुरू होकर आगे अपनी मेहनत से किसान आमदन में भरपूर वृद्धि कर सकता है स्ट्रॉबेरी के पौधे सितंबर से अक्तूबर तक लगाए जाते हैं और 3 महीने के बाद यह फल देना शुरू कर देते हैं इसकी फसल अप्रैल तक चलती है इसकी मार्केटिंग में किसी भी तरह की मुश्किल नहीं है, यह ऐलनाबाद, सिरसा, हनुमानगढ़, गंगानगर के इलावा बठिंडा, मोगा, जलंधर. लुधियाना में इसकी मार्केटिंग कर सकते है, यदि ज़्यादा मात्रा में स्ट्रॉबेरी है तो दिल्ली इसकी मुख्य मार्किट है

Posted by Gavi
Rajasthan
26-02-2020 03:04 PM
यह फंगस के हमले के कारण हो रहा है इसकी रोकथाम के लिए इसमें propiconazole @ 200 ml को 150 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे कर सकते है।

Posted by Sadashiv Ugale
Maharashtra
26-02-2020 03:01 PM
सबसे पहले यदि हम मछली पालन की बात करें तो इसके लिए ट्रेनिंग बहुत जरूरी है यह ट्रेनिंग FFDA(fish farmer development aggency) हर जिले में बनी है जहां हमारा खेतीबाड़ी विभाग है वहां इसके अफसर बैठते हैं वहां जाकर एप्लीकेशन भरवायें वहां आपको 5 दिन की ट्रेनिंग दी जायेगी ट्रेनिंग के लिए दसवीं पास होना ज़रूरी है इस ट्रेनिंग में आपको लोन और स.... (Read More)
सबसे पहले यदि हम मछली पालन की बात करें तो इसके लिए ट्रेनिंग बहुत जरूरी है यह ट्रेनिंग FFDA(fish farmer development aggency) हर जिले में बनी है जहां हमारा खेतीबाड़ी विभाग है वहां इसके अफसर बैठते हैं वहां जाकर एप्लीकेशन भरवायें वहां आपको 5 दिन की ट्रेनिंग दी जायेगी ट्रेनिंग के लिए दसवीं पास होना ज़रूरी है इस ट्रेनिंग में आपको लोन और सब्सिड़ी के बारे में सारी जानकारी प्राप्त हो जाएगी इसकी पुंग छोड़ने के लिए अप्रैल से अक्तूबर का समय बढ़िया होता है, बाकि यदि अपने शुरू करना है तो यूनिवर्सिटी की तरफ से एक एकड़ में शुरू कर सकते हैं. एक एकड़ में 5000 पूंग डाल सकते हैं यह 2 से 3 इंच का होता है यदि 5000 डालना है तो 3000 रोहू, 1000 कतला, 500 कॉमन कॉर्प और 500 मरीगल नस्ल डाली जाए यह पूंग आप मछली पालन विभाग से खरीद सकते हैं यह एक इंच का बच्चा 10 पैसा प्रति बच्चा मिलेगा यदि बढ़िया खुराक डाली जाए तो 8 महीनों में यह लगभग 800—900 ग्राम का हो जाता है बाकी मछली पालन के लिए नहरी पानी बढ़िया होता है और आप गांव का छप्पड़ ठेके से लेकर भी यह काम शुरू कर सकते हैं तालाब में मछली के बीज डालने से पहले इस बात की जांच कर लेनी चाहिए कि उस तालाब में काफी मात्रा में मछली की कुदरती खुराक उपलब्ध है.

Posted by bhikham sahu
Chattisgarh
26-02-2020 03:00 PM
श्रीमान जी, यह फंगस के हमले की वजह से हो रहा है, आप इसकी रोकथाम के लिए इसमें propiconazol @ 200ml को 150 लीटर पानी में मिला कर प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे कर सकते हैं, धन्यवाद

Posted by Makhan Singh
Punjab
26-02-2020 02:50 PM
मक्खन सिंह जी कृपया करके बताएं आपने इसमें किसी हर्बीसाइड की स्प्रे तो नहीं की, ताकि आपको इसके बारे में जानकारी दी जा सके धन्यवाद

Posted by suneel kumar
Madhya Pradesh
26-02-2020 02:48 PM
इसकी मार्किट आपको खुद बनानी पड़ेगी इसके लिए आप अपने नज़दीकी मार्किट में मीट की दुकानों से संपर्क कर सकते है और मार्किट रेट के हिसाब से उन्हें बेच सकते है

Posted by Sadashiv Ugale
Maharashtra
26-02-2020 02:43 PM
Sadashiv Ugale ji fish seed lene ke lia aap Moh. Anis 9451411371, 6394520950 se samparak kar sakte hai, Thankyou.
Posted by Prasenjit Das
West Bengal
26-02-2020 02:38 PM
Prasenjit Das ji ABS ka semen lene ke lia aap Genus Breeding India Private Limited (ABS India) Phone number: 090201 31111, 91-20-2729-3445 se samparak kar sakte hai, Thankyou.
Posted by S Chauhan Singh
Uttar Pradesh
26-02-2020 02:32 PM
अच्छे जल निकास वाली उपजाऊ दोमट मिट्टी में उगाने पर यह अच्छे परिणाम देती है मिट्टी की पी एच 6 से 7.5 सोयाबीन की अच्छी उपज के लिए अनूकूल होती है जल जमाव, खारी और क्षारीय मिट्टी सोयाबीन की खेती के लिए अनुकूल नहीं होती कम तापमान भी इस फसल को गंभीर रूप से प्रभावित करता है JS 93-05: यह किस्म तना गलन, फली और कली के झुलस रोग की .... (Read More)
अच्छे जल निकास वाली उपजाऊ दोमट मिट्टी में उगाने पर यह अच्छे परिणाम देती है मिट्टी की पी एच 6 से 7.5 सोयाबीन की अच्छी उपज के लिए अनूकूल होती है जल जमाव, खारी और क्षारीय मिट्टी सोयाबीन की खेती के लिए अनुकूल नहीं होती कम तापमान भी इस फसल को गंभीर रूप से प्रभावित करता है JS 93-05: यह किस्म तना गलन, फली और कली के झुलस रोग की प्रतिरोधक किस्म है इसके बीज हरे पीले रंग के होते हैं JS 95-60: यह किस्म 82-88 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह तना गलन और विभन्न प्रकार के कीटों की प्रतिरोधक किस्म है JS 335: यह जल्दी पकने वाली किस्म है जो कि बैक्टीरियल झुलस रोग के प्रतिरोधी और तने की मक्खी, कली के झुलस रोग के प्रतिरोधी किस्म है इसकी औसतन पैदावार 10-12 क्विंटल प्रति एकड़ होती है रबी की मौसम की कटाई के बाद या अप्रैल महीने में गहरी जोताई करें इसकी मदद से कीटों के अंडे नष्ट हो जाएंगे जोताई के बाद तीन-चार बार सुहागा फेरें और मिट्टी को समतल करें ताकि खेत में पानी ना खड़ा हो सके सोयाबीन के लिए जून के तीसरे सप्ताह से मध्य जुलाई का महीना खेती के लिए अनुकूल होता है बीजों को तभी बोयें, जब मिट्टी में आवश्यक मात्रा में नमी हो (2-3 दिनों में कम से कम 50-60 मि.मी. वर्षा हुई हो) बिजाई के लिए कतार से कतार का 10-12 इंच और पौधे से पौधे का फासला 4-7 सैं.मी. रखें नमी की उचित मात्रा में बीजों को 3-4 सैं.मी. की गहराई में बोयें ज्यादा गहराई में ना बोयें, क्योंकि यह अंकुरण को प्रभावित करता है बीजों को सीड ड्रिल की सहायता से बोयें एक एकड़ खेत में 25-30 किलोग्राम बीजों का प्रयोग करें बिजाई के समय गली हुई रूड़ी की खाद और गाय का गला हुआ गोबर 4 टन और नाइट्रोजन 10 किलो (यूरिया 25 किलो) और फासफोरस 24 किलो (एस एस पी 150 किलो), पोटाश 8 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 15 किलो) प्रति एकड़ में डालें इन तत्वों के साथ 8 किलो सलफर प्रति एकड़ में डालें अच्छी वृद्धि और अच्छी उपज के लिए यूरिया 3 किलो को 150 लीटर पानी में मिलाकर बिजाई के बाद 60 वें और 75 वें दिन स्प्रे करें खेत को नदीन मुक्त करने के लिए दो गोडाई की आवश्यकता होती है, पहली गोडाई बिजाई के 15-20 दिन बाद और दूसरी गोडाई बिजाई के 30-40 दिन बाद करें रासायनिक तरीके से नदीनों को रोकने के लिए बिजाई के बाद दो दिनो में पैंडीमैथालीन 900 मि.ली. को 100-200 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें या इमाजेथापर 150&170 मि.ली. को 150-200 लीटर पानी में मिलाकर बिजाई के 15 से 20 दिन बाद बूटीनाशक के तौर पर डालें बारानी फसल होने के कारण इसे सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती बारिश की स्थिति के आधार पर सिंचाई का उपयोग करें फली बनने के समय सिंचाई आवश्यक है इस समय पानी की कमी उपज को काफी प्रभावित करती है जब फलियां सूख जाएं और पत्तों का रंग बदल कर पीला हो जाए और पत्ते गिर जाएं, तब फसल कटाई के लिए तैयार होती है कटाई हाथों से या दराती से करें कटाई के बाद पौधों में से बीजों को निकाल लें
Posted by kuldeep singh
Punjab
26-02-2020 02:21 PM
ਕੁਲਦੀਪ ਜੀ ਜੇਕਰ ਉਹ ਗੱਭਣ ਨਹੀਂ ਹੈ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਉਸਦੀ ਬੱਚੇਦਾਨੀ ਵਿਚ Lixin-iu ਦਵਾਈ ਭਰਵਾਓ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ Utrevive liquid 100ml ਰੋਜਾਨਾ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਅਤੇ ਜੇਕਰ ਗੱਭਣ ਹੈ ਤਾਂ ਇਹ ਦੱਸੋ ਕਿੰਨੇ ਮਹੀਨੇ ਦੀ ਗੱਭਣ ਹੈ ਅਤੇ ਜੋ ਚਰਬੀ ਮਾਰਦੀ ਹੈ ਉਸਦੀ ਫੋਟੋ ਵੀ ਭੇਜੋ.

Posted by Asish kumar
Tripura
26-02-2020 02:10 PM
Asish kumar ji, mausam ke hisaab se abhi tripal dene ki avakshkata nahi hai,. dhanywad

Posted by ताहिर
Uttar Pradesh
26-02-2020 02:09 PM
ताहीर जी उसे आप नज़दीकी डॉक्टर से जांच करवायें जिससे उसकी जांच करके सही इलाज किया जा सके
Posted by Suraj Kunjir
Maharashtra
26-02-2020 02:01 PM
Suraj Kunjir ji flowers ke seed bechne ke lia aap Gulab singh 7409936011 se samparak kar sakte hai, Thankyou.

Posted by ਕੁਲਵਿੰਦਰ ਸਿੰਘ
Punjab
26-02-2020 01:43 PM
ਕੁਲਵਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਜੀ, ਗਵਾਰੇ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਮਈ ਤੋਂ ਅੱਧ ਅਗਸਤ ਤੱਕ ਬੀਜੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਇਆ ਫ਼ਸਲ 3 ਤੋਂ 3.5 ਮਹੀਨੇ ਵਿਚ ਪਾਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by Balvir Singh Mann
Punjab
26-02-2020 01:38 PM
श्रीमान जी actara का रेट मार्किट में अलग अलग कंपनी के हिसाब से अलग अलग होता है। actara का रेट 800-1500 rs प्रति किलो तक है।

Posted by gurpartap singh sidhu
Punjab
26-02-2020 01:26 PM
ਉਸ ਵਿਚ 250 ਗ੍ਰਾਮ ਗੁੜ, 250 ਗ੍ਰਾਮ ਗੁਲਕੰਦ, 100 ਗ੍ਰਾਮ ਸੌੰਫ, 100 ਗ੍ਰਾਮ ਸੁਕੇ ਆਵਲੇ ਤੇ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਅਜਵਾਇਨ ਉਬਾਲ ਕੇ ਠਾਰ ਕੇ 5 ਦਿਨ ਦੇਣੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ,ਇਸ ਨਾਲ ਬੱਚੇਦਾਨੀ ਦੀ ਸਫਾਈ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਦੁੱਧ ਵੱਧ ਜਾਂਦਾ ਹੈ.

Posted by ताराचन्द
Rajasthan
26-02-2020 01:14 PM
ताराचन्द जी,आखरी पानी जीरे में बिजाई से 85 दिन बाद देना चाहिए, एक बार फसल पक जाये तब सिंचाई ना करें बीज भरने की अवस्था में सिंचाई पत्तों के ऊपरी धब्बा रोग, चेपे और झुलस रोग के हमले को बढ़ाती है धन्यवाद
Posted by राजेंद्र सिंह जादौन
Madhya Pradesh
26-02-2020 01:05 PM
राजेंद्र सिंह जादौन जी, आप इसमें फल लाने के लिए आप इसमें NPK 130045 @ 10 ग्राम प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे कर सकते हैं, धन्यवाद
Posted by kamaljitdass
Punjab
26-02-2020 12:52 PM
ਮੋਤੀਆਂ ਦੀ ਖੇਤੀ ਇਕ ਲਾਭਦਾਇਕ ਕਿੱਤਾ ਹੈ ਮੋਤੀਆਂ ਦੀ ਖੇਤੀ ਉਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਹੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜਿਵੇ ਅਸਲ ਰੂਪ ਵਿਚ ਮੋਤੀ ਤਿਆਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸਦੀ ਖੇਤੀ ਤੁਸੀ ਕਿਸੇ ਤਲਾਬ ਵਿਚ ਜਾ ਫਿਰ 100 ਵਰਗ ਫੁੱਟ ਦਾ ਤਲਾਬ ਬਣਾ ਕੇ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਤਲਾਬ ਬਣਾਉਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਸਿਪੀ ਨੂੰ ਖਰੀਦਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜੋ ਦਿੱਲੀ ਤੋ ਮਿਲ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਕਵਾਲਿਟੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਇਕ ਸਿਪੀ ਕਰੀਬ 1.5 ਤੋਂ 5 ਰੁਪਏ ਦੇ ਵਿਚ ਮਿਲਦੀ ਹੈ .... (Read More)
ਮੋਤੀਆਂ ਦੀ ਖੇਤੀ ਇਕ ਲਾਭਦਾਇਕ ਕਿੱਤਾ ਹੈ ਮੋਤੀਆਂ ਦੀ ਖੇਤੀ ਉਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਹੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜਿਵੇ ਅਸਲ ਰੂਪ ਵਿਚ ਮੋਤੀ ਤਿਆਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸਦੀ ਖੇਤੀ ਤੁਸੀ ਕਿਸੇ ਤਲਾਬ ਵਿਚ ਜਾ ਫਿਰ 100 ਵਰਗ ਫੁੱਟ ਦਾ ਤਲਾਬ ਬਣਾ ਕੇ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਤਲਾਬ ਬਣਾਉਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਸਿਪੀ ਨੂੰ ਖਰੀਦਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜੋ ਦਿੱਲੀ ਤੋ ਮਿਲ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਕਵਾਲਿਟੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਇਕ ਸਿਪੀ ਕਰੀਬ 1.5 ਤੋਂ 5 ਰੁਪਏ ਦੇ ਵਿਚ ਮਿਲਦੀ ਹੈ ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਬੰਦ ਸੀਪੀਆਈ ਵਿਚ ਖਿੱਚ ਲਾ ਕੇ ਉਹਨਾਂ ਵਿੱਚ ਮੋਤੀਆਂ ਦਾ ਬੀਜ ਪਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਫਿਰ ਇਹਨਾਂ ਸਿਪੀਆ ਨੂੰ ਬੰਦ ਕਰ ਕੇ ਜਾਲੀ ਦੇ ਸਹਾਰੇ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਸੁੱਟ ਦਿੱਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਫਿਰ ਕੁੱਜ ਮਹੀਨਿਆਂ ਬਾਅਦ ਇਸ ਵਿਚੋਂ ਮੋਤੀ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਮੋਤੀ ਬਣਨ ਵਿਚ 18 ਮਹੀਨਿਆਂ ਦਾ ਸਮਾਂ ਲਗਦਾ ਹੈ ਡਿਜ਼ਾਈਨਰ ਮੋਤੀ ਤਿਆਰ ਕਰਨ ਲਈ ਉਹਨਾਂ ਲਈ ਖਾਸ ਤੌਰ ਤੇ ਸਾਂਚੇ ਬਣਾਏ ਹੁੰਦੇ ਹਨ, ਜਿਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਗਨਪਤੀ,ਬੁੱਧ,ਹੋਲੀ ਕਰਾਸ ਸਾਈਨ ਵਰਗੇ ਡਿਜ਼ਾਈਨਰ ਮੋਤੀ ਤਿਆਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਪਰ ਮੋਤੀਆ ਦੀ ਮਾਰਕੀਟਿੰਗ ਆਪਣੇ ਪੱਧਰ ਤੇ ਹੀ ਕਰਨੀ ਪੈਂਦੀ ਹੈ ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਮਨੀਸ਼ ਜੀ ਮੋਤੀਆ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਕਰਵਾਉਦੇ ਹਨ ਉਹਨਾਂ ਨਾਲ ਇਸ ਨੰਬਰ 9417652857 ਤੇ ਗੱਲ ਕਰੋ ਉਹ ਤੁਹਾਨੂੰ ਪੂਰਾ ਗਾਈਡ ਕਰ ਦੇਣਗੇ
Posted by arwinder
Punjab
26-02-2020 12:50 PM
Arwinder ji usko aap Nutrich tablet rojana 1 goli deni suru kren, isse woh apne sme per heat mai aa jayegi.
Posted by kamaljitdass
Punjab
26-02-2020 12:45 PM
ਮੋਤੀਆਂ ਦੀ ਖੇਤੀ ਇਕ ਲਾਭਦਾਇਕ ਕਿੱਤਾ ਹੈ ਮੋਤੀਆਂ ਦੀ ਖੇਤੀ ਉਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਹੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜਿਵੇ ਅਸਲ ਰੂਪ ਵਿਚ ਮੋਤੀ ਤਿਆਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸਦੀ ਖੇਤੀ ਤੁਸੀ ਕਿਸੇ ਤਲਾਬ ਵਿਚ ਜਾ ਫਿਰ 100 ਵਰਗ ਫੁੱਟ ਦਾ ਤਲਾਬ ਬਣਾ ਕੇ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਤਲਾਬ ਬਣਾਉਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਸਿਪੀ ਨੂੰ ਖਰੀਦਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜੋ ਦਿੱਲੀ ਤੋ ਮਿਲ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਕਵਾਲਿਟੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਇਕ ਸਿਪੀ ਕਰੀਬ 1.5 ਤੋਂ 5 ਰੁਪਏ ਦੇ ਵਿਚ ਮਿਲਦੀ ਹੈ .... (Read More)
ਮੋਤੀਆਂ ਦੀ ਖੇਤੀ ਇਕ ਲਾਭਦਾਇਕ ਕਿੱਤਾ ਹੈ ਮੋਤੀਆਂ ਦੀ ਖੇਤੀ ਉਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਹੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜਿਵੇ ਅਸਲ ਰੂਪ ਵਿਚ ਮੋਤੀ ਤਿਆਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸਦੀ ਖੇਤੀ ਤੁਸੀ ਕਿਸੇ ਤਲਾਬ ਵਿਚ ਜਾ ਫਿਰ 100 ਵਰਗ ਫੁੱਟ ਦਾ ਤਲਾਬ ਬਣਾ ਕੇ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਤਲਾਬ ਬਣਾਉਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਸਿਪੀ ਨੂੰ ਖਰੀਦਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜੋ ਦਿੱਲੀ ਤੋ ਮਿਲ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਕਵਾਲਿਟੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਇਕ ਸਿਪੀ ਕਰੀਬ 1.5 ਤੋਂ 5 ਰੁਪਏ ਦੇ ਵਿਚ ਮਿਲਦੀ ਹੈ ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਬੰਦ ਸੀਪੀਆਈ ਵਿਚ ਖਿੱਚ ਲਾ ਕੇ ਉਹਨਾਂ ਵਿੱਚ ਮੋਤੀਆਂ ਦਾ ਬੀਜ ਪਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਫਿਰ ਇਹਨਾਂ ਸਿਪੀਆ ਨੂੰ ਬੰਦ ਕਰ ਕੇ ਜਾਲੀ ਦੇ ਸਹਾਰੇ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਸੁੱਟ ਦਿੱਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਫਿਰ ਕੁੱਜ ਮਹੀਨਿਆਂ ਬਾਅਦ ਇਸ ਵਿਚੋਂ ਮੋਤੀ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਮੋਤੀ ਬਣਨ ਵਿਚ 18 ਮਹੀਨਿਆਂ ਦਾ ਸਮਾਂ ਲਗਦਾ ਹੈ ਡਿਜ਼ਾਈਨਰ ਮੋਤੀ ਤਿਆਰ ਕਰਨ ਲਈ ਉਹਨਾਂ ਲਈ ਖਾਸ ਤੌਰ ਤੇ ਸਾਂਚੇ ਬਣਾਏ ਹੁੰਦੇ ਹਨ, ਜਿਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਗਨਪਤੀ,ਬੁੱਧ,ਹੋਲੀ ਕਰਾਸ ਸਾਈਨ ਵਰਗੇ ਡਿਜ਼ਾਈਨਰ ਮੋਤੀ ਤਿਆਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਪਰ ਮੋਤੀਆ ਦੀ ਮਾਰਕੀਟਿੰਗ ਆਪਣੇ ਪੱਧਰ ਤੇ ਹੀ ਕਰਨੀ ਪੈਂਦੀ ਹੈ ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਮਨੀਸ਼ ਜੀ ਮੋਤੀਆ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਕਰਵਾਉਦੇ ਹਨ ਉਹਨਾਂ ਨਾਲ ਇਸ ਨੰਬਰ ਤੇ ਗੱਲ ਕਰੋ ਉਹ ਤੁਹਾਨੂੰ ਪੂਰਾ ਗਾਈਡ ਕਰ ਦੇਣਗੇ
Posted by dileep
Uttar Pradesh
26-02-2020 12:37 PM
श्रीमान जी, गुलाब की खेती के लिए जैविक तत्वों से भरपूर और अच्छे जल निकास वाली रेतली दोमट मिट्टी अनुकूल होती है बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 6 से 7.5 होना चाहिए यह जल जमाव को सहनयोग्य नहीं है, इसलिए उचित जल निकास का प्रबंध होना चाहिए और अनावश्यक पानी को निकाल देना चाहिए किस्मों के लिए आप देसी गुलाब और इंग्लिश ग.... (Read More)
श्रीमान जी, गुलाब की खेती के लिए जैविक तत्वों से भरपूर और अच्छे जल निकास वाली रेतली दोमट मिट्टी अनुकूल होती है बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 6 से 7.5 होना चाहिए यह जल जमाव को सहनयोग्य नहीं है, इसलिए उचित जल निकास का प्रबंध होना चाहिए और अनावश्यक पानी को निकाल देना चाहिए किस्मों के लिए आप देसी गुलाब और इंग्लिश गुलाब किस्मे लगा सकते हैं. मिट्टी को नरम करने के लिए जोताई और गोड़ाई करें बिजाई से 4-6 सप्ताह पहले खेती के लिए बैड तैयार करें बैड बनाने कि लिए 2 टन रूड़ी की खाद और 2 किलो सुपर फासफेट डालें बैडों को एक समान बनाने के लिए उनको समतल करें और बैडों के ऊपर बोयें होये गुलाब गड्डों में बोयें हुए गुलाबों से ज्यादा मुनाफे वाले होते है उत्तरी भारत में बिजाई का सही समय मध्य अक्तूबर है रोपाई के बाद पौधे को छांव में रखें और अगर बहुत ज्यादा धुप हो, तो पौधे पर पानी का छिड़काव करें दोपहर के अंत वाले समय बोया गया गुलाब बढ़िया उगता हैबैड पर 30 सैं.मी. व्यास और 30 सैं.मी. गहरे गड्ढे खोद कर 75 सैं.मी. के फासले पर पौधों की बिजाई करें दो पौधों के बीच में फासला गुलाब की किस्म पर निर्भर करता है बीजों को 2-3 सैं.मी. गहराई में बोयें इसकी बिजाई सीधी या पनीरी लगा कर की जाती है गुलाब की फसल का का प्रजनन काटी गई जड़ों और बडिंग द्वारा किया जाता है उत्तरी भारत में दिसंबर-फरवरी महीने का समय टी-बडिंग के लिए उचित होता है पौधे की कांट-छांट दूसरे और उसके बाद के वर्षों में की जाती है उत्तरी भारत में गुलाब की झाड़ियों की कांट-छांट अक्तूबर के दूसरे या तीसरे हफ्ते में की जाती है जो शाखाएं झाड़ियों को घना बनाएं, उन्हें निकाल दें लटके हुए गुलाबों को छंटाई की जरूरत नहीं होती छंटाई के बाद, अच्छे से गले हुए 7-8 किलो गाय के गोबर को प्रति पौधे को डालें और मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें ग्रीन हाउस में, गुलाबों को पंक्तियों में बोया जाता है और पौधों का घनत्व 7-14 पौधे प्रति वर्ग मीटर होनी चाहिए बैड की तैयारी के समय 2 टन रूड़ी की खाद और 2 किलो सुपर फास्फेट को मिट्टी में डालें तीन महीने के फासले पर 10 किलो रूड़ी की खाद और 8 किलो नाइट्रोजन, 8 किलो फासफोरस और 16 किलो पोटाश प्रति पौधे में डालें छंटाई के बाद ही सारी खादों को डालें ज्यादा पैदावार लेने के लिए छंटाई से एक महीने बाद, जी ए 3@ 200 पी पी एम(2 ग्राम प्रति लीटर) की स्प्रे करें पौधे की तनाव सहन शक्ति को बढ़ाने के लिए घुलनशील जड़ उत्तेजक(रैली गोल्ड/रिजोम) 100 ग्राम+ टिपोल 60 मि.ली. को 100 लीटर पानी में डालकर प्रति एकड़ में शाम के समय सिंचाई करें पौधों को खेत में लगाएं ताकि बढ़िया ढंग से विकास कर सके सिंचाई मिट्टी की किस्म और जलवायु के अनुसार करें आधुनिक सिंचाई तकनीक जैसे ड्रिप सिंचाई गुलाब की खेती के लिए लाभदायक होती है फव्वारा सिंचाई से परहेज करें क्योंकि इससे पत्तों को लगने वाली बीमारियां बढ़ती हैं धन्यवाद
Posted by dileep
Uttar Pradesh
26-02-2020 12:32 PM
श्री मान खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते ह.... (Read More)
श्री मान खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुमब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तहय उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तहय में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तहय लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है मशरूम की खेती की ट्रेनिंग के लिए आप अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केन्द्र से समपर्क करे
Posted by ਜੀ ਐਸ ਵਿਰਕ
Punjab
26-02-2020 12:27 PM
ਪੋਲੀਹਾਊਸ ਲਈ ਇੱਕ ਏਕੜ ਤੇ ਲੱਗਭੱਗ 40 ਲੱਖ ਰੁਪਏ ਖਰਚਾ ਆ ਸਕਦਾ ਹੈ ਜੀ ਬਾਕੀ ਇਸ ਦੀ ਸਬਸਿਡੀ ਲੈਣ ਦਾ ਸਹੀ ਤਰੀਕਾ ਸਮਝਣ ਦੀ ਜਰੂਰਤ ਹੈ ਇਸ ਲਈ ਡਿਟੇਲ ਨਾਲ ਜਾਣਕਾਰੀ ਲੈਣ ਲਈ ਇਹ ਵੀਡੀਓ ਦੇਖੋ ਜੀ ਇਸ ਵਿੱਚ ਵਿਸਥਾਰ ਨਾਲ ਦੱਸਿਆ ਗਿਆ ਹੈ ਜੇਕਰ ਫਿਰ ਵੀ ਕੁੱਝ ਪੁੱਛਣਾ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਸਵਾਲ ਪੁੱਛ ਸਕਦੇ ਹੋ https://www.youtube.com/watch v=TPuSMpWqzCc&t=21s ਧੰਨਵਾਦ

Posted by gurjant singh
Punjab
26-02-2020 12:24 PM
Gurjant singh ji semen len lai tusi Progressive dairy Farmers Association Phone: 094630 01481 na samparak kar sakde ho, Thnakyou.
Posted by arwinder
Punjab
26-02-2020 12:23 PM
iss nu Hitek injection 1ml/33kg bharr de hisab nal chamdi vich lgwao , bakki iss nu Cleaner pet-M shampuu nal nhaaoo, nhann ton 5 mint pehla shampu di changi trah jgahh krke lgga ke rakho fir nhaoo..
Posted by raja
Uttar Pradesh
26-02-2020 12:17 PM
राजा जी, मिर्च की खेती पूरे वर्ष की जाती है खरीफ की फसल के लिए मई-जून और गर्मियों की फसल के लिए फरवरी - मार्च का समय मिर्च की रोपाई के लिए उपयुक्त होता है खरीफ के मौसम में 60-75 सैं.मी. x 45 सैं.मी. और सिंचित क्षेत्रों में 60 x 60 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें नर्सरी में बीजों को 3-5 सैं.मी. की गहराई में बोयें और फिर मिट्टी से ढ.... (Read More)
राजा जी, मिर्च की खेती पूरे वर्ष की जाती है खरीफ की फसल के लिए मई-जून और गर्मियों की फसल के लिए फरवरी - मार्च का समय मिर्च की रोपाई के लिए उपयुक्त होता है खरीफ के मौसम में 60-75 सैं.मी. x 45 सैं.मी. और सिंचित क्षेत्रों में 60 x 60 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें नर्सरी में बीजों को 3-5 सैं.मी. की गहराई में बोयें और फिर मिट्टी से ढक दें इसकी मुख्य खेत में रोपाई की जाती है 1 मीटर चौड़े और आवश्यकतानुसार लंबे बैड बनाएं कीटाणु रहित कोकोपिट 300 किलो, 5 किलो नीम केक को मिलाए और 1-1किलो एज़ोसपीरिलियम और फासफोबैक्टीरिया भी डालें उपचार किए हुए बीज ट्रे में एक बीज प्रति सैल बोयें बीज को कोकोपिट से ढक दें और ट्रे एक- दूसरे के साथ रखें बीज अंकुरन तक इन्हें पॉलीथीन से ढक दें नर्सरी में बीज बीजने के बाद बैडों को 400 मैश नाइलोन जाल या पतले सफेद कपड़े से ढक दें यह नए पौधों को कीड़े-मकौड़े और बीमारियों के हमले से बचाता है 6 दिनों के बाद, ट्रे में लगे नए पौधों को एक एक करके जाल की छांव के नीचे बैडों में लगाएं बीज अंकुरन तक पानी देने वाले बर्तन की मदद से पानी दें बिजाई के 18 दिन बाद 19:19:19 की 0.5 % (5 ग्राम प्रति लीटर ) की स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by raja
Uttar Pradesh
26-02-2020 12:02 PM
राजा जी, मार्च महीने में ग्वार, खीरा-ककड़ी, लोबिया, करेला, लौकी, तुरई, पेठा, खरबूजा, तरबूज, पालक, भिण्डी, अरबी अप्रैल महीने में चौलाई, मूली की बिजाई कर सकते हैं, धन्यवाद
Posted by karanpal
Punjab
26-02-2020 11:52 AM
1844 ਮੱਕੀ ਪੱਕਣ ਦੇ ਲਈ 120 -122 ਦਿਨ ਦਾ ਸਮਾਂ ਲੈਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਆ ਜੇਕਰ ਚਾਰੇ ਦੇ ਲਈ ਬੀਜਣੀ ਹੈ ਤਾ ਤੁਸੀ 60-80 ਦਿਨਾਂ ਤਕ ਕਟਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ

Posted by Nikhil rajak
Madhya Pradesh
26-02-2020 11:46 AM
निखिल जी, खादों की सही आवश्यकता जानने के लिए प्रत्येक तीन वर्ष के बाद मिट्टी की जांच जरूरी है बिजाई से पहले आखिरी जोताई के समय अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर 8 टन या वर्मीकंपोस्ट + रालीगोल्ड 8-10 किलो या पी एस बी 5-10 किलो प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन 60-90 किलो (यूरिया 135-200 किलो) और फासफोरस 20 किलो (एस एस पी 125 किलो) प्रत.... (Read More)
निखिल जी, खादों की सही आवश्यकता जानने के लिए प्रत्येक तीन वर्ष के बाद मिट्टी की जांच जरूरी है बिजाई से पहले आखिरी जोताई के समय अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर 8 टन या वर्मीकंपोस्ट + रालीगोल्ड 8-10 किलो या पी एस बी 5-10 किलो प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन 60-90 किलो (यूरिया 135-200 किलो) और फासफोरस 20 किलो (एस एस पी 125 किलो) प्रति एकड़ में डालें फासफोरस की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की 1/3 मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दूसरी और चौथी सिंचाई के समय डालें सर्दियों के मौसम में तापमान कम होने के कारण फसल तत्व ज्यादा लेती है जिस कारण मौधा पीला पड़ जाता है इसकी रोकथाम के लिए N:P:K 19:19:19 की स्प्रे 100 ग्राम 150 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ के लिए प्रयोग करें जिन इलाकों में पानी की कमी है वहां यूरिया+पोटाश का प्रयोग 2.5 किलोग्राम को 100 लीटर पानी में मिलाकर करें Co 89029: इसकी औसतन पैदावार 280 क्विंटल प्रति एकड़ होती है धन्यवाद

Posted by Vijay kumar
Uttar Pradesh
26-02-2020 11:46 AM
bhai sahib nazdik ke pashu palan adhikari or krishi vigyan kendar se sampark karein or training lein phir shuroo krain

Posted by ramgopal Dhiwar
Chattisgarh
26-02-2020 11:33 AM
Ramgopal ji, ap isme NPK 130045 @ 1 kilo ko 150 litre pani mein kar prati acre ke hisaab se spray kar sakte hain, dhanywad

Posted by nav shah
Punjab
26-02-2020 11:32 AM
ਤੁਸੀ ਉਸਦੀ ਬੱਚੇਦਾਨੀ ਵਿਚ Utrawin-oz ਦਵਾਈ 3 ਦਿਨ ਭਰਵਾਓ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ Keeper plus ਪਾਊਡਰ 30 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ ਅਤੇ Pg care ਰੋਜਾਨਾ ਇਕ ਗੋਲੀ ਦਿਓ ਅਤੇ 21 ਦਿਨ ਤਕ ਦਿੰਦੇ ਰਹੋ ਫਿਰ ਅਗਲੀ ਵਾਰ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆਉਣ ਤੇ ਉਸ ਨੂੰ ਟੀਕਾ ਭਰਵਾਂ ਕੇ ਪਾਊਡਰ ਅਤੇ ਗੋਲੀਆਂ 21 ਦਿਨ ਹੋਰ ਦਿੰਦੇ ਰਹੋ, ਇਸ ਨਾਲ ਉਹ ਗੱਭਣ ਹੋ ਜਾਵੇਗੀ.

Posted by ramgopal Dhiwar
Chattisgarh
26-02-2020 11:32 AM
Ramgopalji, ap isme NPK 130045 @ 10 gram prati litre pani ke hisaab se spray kar sakte hain, isse isme phool nahi ghire ge, dhanwad

Posted by Vishal Rawat
Uttar Pradesh
26-02-2020 11:22 AM
विशाल जी, मिर्च की खेती पूरे वर्ष की जाती है खरीफ की फसल के लिए मई-जून और गर्मियों की फसल के लिए फरवरी - मार्च का समय मिर्च की रोपाई के लिए उपयुक्त होता है धन्यवाद
Posted by ਨਰਿੰਦਰ ਸਿੰਘ
Punjab
26-02-2020 11:01 AM
ਨਰਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਜੀ, ਵਧੀਆ ਝਾੜ ਲਈ 10-12 ਕਿਲੋ ਬੀਜਾਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਵਿੱਚ ਕਰੋ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Anil kumar singh
Uttar Pradesh
26-02-2020 10:48 AM
हाजी जो खेत में नार्मल ग्रास होती है वह भी खा लेती है जी

Posted by jaspreet
Punjab
26-02-2020 10:45 AM
Jaspreet ji, rose booms in the month of may june , thank you

Posted by Bhupinder Singh Brar
Uttar Pradesh
26-02-2020 10:37 AM
भुपिंदर जी कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके।

Posted by ritik kumar singh
Bihar
26-02-2020 10:35 AM
सबसे पहले यदि हम मछली पालन की बात करें तो इसके लिए ट्रेनिंग बहुत जरूरी है यह ट्रेनिंग FFDA(fish farmer development aggency) हर जिले में बनी है जहां हमारा खेतीबाड़ी विभाग है वहां इसके अफसर बैठते हैं वहां जाकर एप्लीकेशन भरवायें वहां आपको 5 दिन की ट्रेनिंग दी जायेगी ट्रेनिंग के लिए दसवीं पास होना ज़रूरी है इस ट्रेनिंग में आपको लोन और स.... (Read More)
सबसे पहले यदि हम मछली पालन की बात करें तो इसके लिए ट्रेनिंग बहुत जरूरी है यह ट्रेनिंग FFDA(fish farmer development aggency) हर जिले में बनी है जहां हमारा खेतीबाड़ी विभाग है वहां इसके अफसर बैठते हैं वहां जाकर एप्लीकेशन भरवायें वहां आपको 5 दिन की ट्रेनिंग दी जायेगी ट्रेनिंग के लिए दसवीं पास होना ज़रूरी है इस ट्रेनिंग में आपको लोन और सब्सिड़ी के बारे में सारी जानकारी प्राप्त हो जाएगी इसकी पुंग छोड़ने के लिए अप्रैल से अक्तूबर का समय बढ़िया होता है, बाकि यदि अपने शुरू करना है तो यूनिवर्सिटी की तरफ से एक एकड़ में शुरू कर सकते हैं. एक एकड़ में 5000 पूंग डाल सकते हैं यह 2 से 3 इंच का होता है यदि 5000 डालना है तो 3000 रोहू, 1000 कतला, 500 कॉमन कॉर्प और 500 मरीगल नस्ल डाली जाए यह पूंग आप मछली पालन विभाग से खरीद सकते हैं यह एक इंच का बच्चा 10 पैसा प्रति बच्चा मिलेगा यदि बढ़िया खुराक डाली जाए तो 8 महीनों में यह लगभग 800—900 ग्राम का हो जाता है बाकी मछली पालन के लिए नहरी पानी बढ़िया होता है और आप गांव का छप्पड़ ठेके से लेकर भी यह काम शुरू कर सकते हैं तालाब में मछली के बीज डालने से पहले इस बात की जांच कर लेनी चाहिए कि उस तालाब में काफी मात्रा में मछली की कुदरती खुराक उपलब्ध है.

Posted by ratanveer singh
Punjab
26-02-2020 10:34 AM
रतनवीर जी यह फसल में physiological डिसऑर्डर के कारण हो जाता है इसमें कोई स्प्रे करने की जरुरत नहीं है धन्यवाद

Posted by Rohit
Madhya Pradesh
26-02-2020 10:32 AM
Rohit ji, lehsun ka colour uski kism ke hisaab se hi hota hai,, ap apni fasal ko acchi banae ke liye or acchi paidawaar ke liye isme NPK @ 130045 @ 10 gram prati litre pani ke hisaab se spray kar sakte hain, dhanwad

Posted by Balvir Singh Mann
Punjab
26-02-2020 10:32 AM
बलवीर सिंह जी आप इनकी एक साथ स्प्रे ना करें क्योंकि यूनिवर्सिटी किसी भी चीज़ की एक साथ स्प्रे करने की सिफारिश नहीं करती है आप इनकी अलग अलग स्प्रे कर सकते है।

Posted by pavan
Uttar Pradesh
26-02-2020 10:28 AM
Pavan ji usko aap Vitum-H liquid 10-10ml subah sham dena suru kren aur Metabolite powder ka rojana 1 pouch dena suru kren, baki aap usko achi khurak aur feed dalen, isse achi growth hogi aur byane ke badd asani se jer padd jayegi.

Posted by Balvir Singh Mann
Punjab
26-02-2020 10:19 AM
बलवीर सिंह मान जी पत्ते खाने वाले कीट की रोकथाम के लिए इसमें quinalphos 400ml को 150 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे कर सकते हैं और केले की रोकथाम के लिए actara 80gm को 150 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे कर सकते हैं धन्यवाद

Posted by palwinder singh
Punjab
26-02-2020 10:04 AM
Palwinderji, tusi macchaar de hamle di roktham layi si vich imidacloprid @ 1.5 ml prati litre pani de hisaab nal spray kar sakde ho, jekar fal gal rahe han tan eh fungus di vaja nal hunda hai, tusi is di roktham layi si vich carbandazim @ 4 gram prati litre pani de hisaab nal spray kar sakde ho, ehna dona di spray vich 4-5 din da farak rakho, dhnawad
Posted by sukhpinder singh bhullar
Punjab
26-02-2020 09:57 AM
ਸੁਖਪਿੰਦਰ ਜੀ, ਜਦ ਕਣਕ ਨਿਸਾਰੇ ਤੇ ਹੈ, ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਆ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਉਸ ਸਾਮੀ ਇਸ ਵਿਚ NPK 130045 ਦੀ ਸਪਰੇ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਕਣਕ ਵਿਚ ਚੰਗੇ ਦਾਣੇ ਬੰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਝਾੜ ਵਿਚ ਵਾਧਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਕੋਈ ਨੁਕਸਾਨ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਇਸਦੀ ਮਾਤਰਾ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ 1 ਕਿਲੋ ਨੂੰ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਵਰਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਧੰਨਵਾਦ ਧੰਨਵਾਦ
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