Experts Q&A Search

Posted by sanjay chandel
Uttar Pradesh
27-02-2020 06:25 PM
Punjab
02-28-2020 06:24 PM
संजय जी आप उसे Calcimust injection 5ml लगवाएं और लगातार तीन दिन लगवाएं और फीड बढ़ा दें इसके इलावा यदि उसके पिशाब वाली जगह से सफेद पीक भी आती है तब आप उसे Exapar liquid 50ml रोजाना 5 दिन तक दें इससे फर्क पड़ जाएगा
Posted by Ram Murti Singh
Punjab
27-02-2020 06:16 PM
Punjab
02-27-2020 11:05 PM
shrimaan g tuc hare chare(fodder) lyi makki di J-1006 variety di beejayi kr skde ho g..
Posted by sunil kumar maurya
Uttar Pradesh
27-02-2020 06:16 PM
Punjab
02-28-2020 02:14 PM
सुनील जी आप इसके मात्रा 1 लीटर को 60 किलो रेट में मिला कर प्रति एकड़ के हिसाब से छींटा दे धन्यवाद
Posted by Ram Murti Singh
Punjab
27-02-2020 06:15 PM
Punjab
02-28-2020 02:16 PM
Ram ji tuc hun J1006 kisam di makki di bijai kar sakde ho isde layi tuc 30 kilo beej prati acre de hisab nal painda hai.dhanwad
Posted by Harsh Deep Singh
Punjab
27-02-2020 06:07 PM
Punjab
02-27-2020 08:43 PM
Shri maan g kripa tuc isdi photo bhejo tn ki tuhanu poori jankari di ja ske ....
Posted by gurdeep singh
Punjab
27-02-2020 06:07 PM
Punjab
02-28-2020 03:21 PM
ਗੁਰਦੀਪ ਜੀ ਤੁਸੀ ਬਾਜਰਾ ਨੇਪੀਅਰ ਹਾਈਬ੍ਰਿਡ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਸਿੰਚਾਈ ਵਾਲੇ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ, ਫਰਵਰੀ ਤੋਂ ਮਈ ਦੇ ਅਖੀਰ ਵਾਲੇ ਹਫਤੇ ਵਿੱਚ ਰੋਪਣ ਕਰੋ ਬਰਾਨੀ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ, ਜੂਨ ਤੋਂ ਅਗਸਤ ਵਿੱਚ ਬਿਜਾਈ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦਾ ਬੀਜ ਤੁਸੀ PAU ਲੁਧਿਆਣਾ ਤੋਂ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹੋ
Posted by Pradeep Singh dhindsa
Uttar Pradesh
27-02-2020 06:04 PM
Punjab
02-27-2020 08:43 PM
Shri maan g gehu mein Opera@300 ml per acre spray kr skte ho......
Posted by harpreet singh
Punjab
27-02-2020 05:56 PM
Punjab
02-28-2020 06:25 PM
ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਤੁਹਾਡੇ ਲਈ ਇਹ ਜਾਨਣਾ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਕਿ ਮੁਰਗੀ ਪਾਲਣ ਦਾ ਧੰਦਾ ਦੋ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਕਿ ਤੁਸੀ ਆਂਡਿਆਂ ਦਾ ਧੰਦਾ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਜਾਂ ਮੀਟ ਦਾ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਆਂਡਿਆਂ ਦਾ ਧੰਦਾ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਲੇਇਰ ਮੁਰਗੀਆਂ ਪਾਲਣੀਆਂ ਪੈਣਗੀਆਂ ਅਤੇ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਮੀਟ ਦਾ ਧੰਦਾ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਬਰਾਇਲਰ ਮੁਰਗੀਆਂ ਪਾਲਣੀਆਂ ਪੈਣਗੀਆਂ ਜੇਕ.... (Read More)
ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਤੁਹਾਡੇ ਲਈ ਇਹ ਜਾਨਣਾ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਕਿ ਮੁਰਗੀ ਪਾਲਣ ਦਾ ਧੰਦਾ ਦੋ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਕਿ ਤੁਸੀ ਆਂਡਿਆਂ ਦਾ ਧੰਦਾ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਜਾਂ ਮੀਟ ਦਾ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਆਂਡਿਆਂ ਦਾ ਧੰਦਾ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਲੇਇਰ ਮੁਰਗੀਆਂ ਪਾਲਣੀਆਂ ਪੈਣਗੀਆਂ ਅਤੇ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਮੀਟ ਦਾ ਧੰਦਾ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਬਰਾਇਲਰ ਮੁਰਗੀਆਂ ਪਾਲਣੀਆਂ ਪੈਣਗੀਆਂ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਬਰਾਇਲਰ ਮੁਰਗੀ ਫਾਰਮਿੰਗ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਅਤੇ ਘੱਟ ਤੋਂ ਘੱਟ 10 ਹਜਾਰ ਮੁਰਗੀਆਂ ਦਾ ਧੰਦਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ 4 ਤੋਂ 5 ਲੱਖ ਦਾ ਇੰਤਜਾਮ ਕਰਨਾ ਪਵੇਗਾ, ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਪੋਲਟਰੀ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈ ਕੇ ਨਾਬਾਰਡ ਤੋਂ ਲੋਨ ਲੈਂਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ 25 ਤੋਂ 35 % ਤੱਕ ਸਬਸਿਡੀ ਮਿਲ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਲੋਨ ਅਪਲਾਈ ਕਰਨ ਦੀ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਤੁਹਾਨੂੰ ਵਿੱਭਾਗ ਵੱਲੋਂ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਦਿਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈਣ ਲਈ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਨਜ਼ਦੀਕੀ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਕੇਦਰ ਤੋਂ ਜਾਂ ਗੁਰੂ ਅੰਗਦ ਦੇਵ ਵੈਟਨਰੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋਂ ਜਾਂ ਫਿਰ ਤੁਸੀ ਕਿਸੇ ਵੀ ਦਿਨ ਆਪਣੇ ਨਜ਼ਦੀਕੀ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਕੇਦਰ ਤੇ ਪਹੁੰਚ ਕੇ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈਣ ਲਈ ਫਾਰਮ ਭਰ ਆਊ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਜਦੋਂ ਵੀ ਪੋਲਟਰੀ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਆਵੇਗੀ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਕੇਦਰ ਵੱਲੋਂ ਕਾਲ ਕਰਕੇ ਦੱਸ ਦਿੱਤਾ ਜਾਦਾ ਹੈ ਬਹੁਤ ਵਧੀਆ ਕੰਮ ਹੈ ਜੀ ਪੋਲਟਰੀ ਦਾ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਬ੍ਰਾਇਲਰ ਰੱਖਦੇ ਹੋਂ ਤਾਂ 5 ਤੋਂ 6 ਹਫਤਿਆਂ ਦੇ ਅੰਦਰ ਅੰਦਰ ਮੰਡੀਕਰਣ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਤਕਰੀਬਨ ਪੰਜ ਮਹੀਨਿਆਂ ਵਿੱਚ ਅੰੰਡਿਆ ਦੀ ਉਪਜ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਸਾਰਾ ਸਾਲ ਦੀ ਆਮਦਨ ਵਾਲਾ ਕੰਮ ਹੈ ਜੀ ਜਿਆਦਾ ਮਿਹਨਤ ਵੀ ਨਹੀ ਲੱਗਦੀ ਇਹ ਨਾਜੁਕ ਕਿਸਮ ਦੇ ਜਾਨਵਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਕੁੱਝ ਕੁ ਖਤਰਨਾਕ ਬਿਮਾਰੀਆ ਵੀ ਹਨ ਜਿੰਨਾਂ ਤੋੰ ਬਚਣ ਲਈ ਖਾਸ ਧਿਆਨ ਰੱਖਣ ਦੀ ਜਰੂਰਤ ਹੂੰਦੀ ਹੈ.
Posted by ajay bishnoi
Rajasthan
27-02-2020 05:55 PM
Punjab
02-28-2020 02:13 PM
ajay ji you can spray carbendazim@400 gram per acre dissolved in 150 litre of water.thank you
Posted by Chandrashekhar Chaudhary
Bihar
27-02-2020 05:54 PM
Punjab
02-27-2020 08:44 PM
Shri maan g kripa aap iski photo bhejen toh aapko poori jankari di ja ske.....
Posted by santosh
Jharkhand
27-02-2020 05:54 PM
Punjab
02-28-2020 02:17 PM
Santosh ji kripya aap iski photo bheje taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake,dhanywad
Posted by Phoolchand Suthar
Rajasthan
27-02-2020 05:48 PM
Punjab
02-28-2020 02:02 PM
फूलचंद जी अगर पत्ते मुरझा रहे है तो यह तेले के हमले के कारण भी हो सकता है इसके लिए आप imidacloprid @1.5 ml को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें
Posted by Balraj Singh Shergill
Punjab
27-02-2020 05:46 PM
Punjab
02-28-2020 06:26 PM
Tuci powder de nal nal Pg care tablet ja fir Concimax tablet rojana 1 goli deni suru kro ate jddo heat vich tan tika bhrwa ke powder bnnd kr deo ate golia dinde rho, ehna nal gaban rehnn di ass vdhh jndi hai.
Posted by Gurvinder Singh
Haryana
27-02-2020 05:40 PM
Punjab
02-28-2020 12:24 PM
papite vich nadeena to roktham de layi tuc isde vich sabjiyan di bijai kar sakde ho short duration vali isto ilava isde nal mango ate litchi de paudhe la sakde ho.isto ilava tuc isde nal safed ate barseem di bijai kar sakde ho.dhanwad
Posted by moazzam
Uttar Pradesh
27-02-2020 05:38 PM
Punjab
02-27-2020 08:46 PM
Shri maan g yeh batayein ki aap kis fassal ke bare mein puch rhe ho tan ki apko poori jankari di ja ske....
Posted by Atonu Sinha
West Bengal
27-02-2020 05:34 PM
Punjab
02-28-2020 12:26 PM
Atonu ji MSP of maize is 1760 rupees per quintal.thank you
Posted by ikbal a.
Rajasthan
27-02-2020 05:32 PM
Punjab
02-28-2020 12:19 PM
यह बढ़िया ढंग के फल लेने के बढ़िया तरीका है इसकी कटाई के समय पौधे की पहले टहनी से फूल तोड़ दिए जाते हैं इस टहनी के फूल और फल लगभग नर ही होते है,फिर दूसरी शाखा जो पहली शाखा से बनी होती है उसके फूल भी तौड़ दिए जाते हैं इसके फल और फूल कुछ नर और मादा होते हैं इन्हें भी नहीं रखा जाता अब जो दूसरी शाखा से तीसरी शाखा निकली है .... (Read More)
यह बढ़िया ढंग के फल लेने के बढ़िया तरीका है इसकी कटाई के समय पौधे की पहले टहनी से फूल तोड़ दिए जाते हैं इस टहनी के फूल और फल लगभग नर ही होते है,फिर दूसरी शाखा जो पहली शाखा से बनी होती है उसके फूल भी तौड़ दिए जाते हैं इसके फल और फूल कुछ नर और मादा होते हैं इन्हें भी नहीं रखा जाता अब जो दूसरी शाखा से तीसरी शाखा निकली है उसके फूल रखे जाते हैं इसे तीसरी तोड़ाई कहते हैं इसके फूल और फल लगभग मादा ही होते हैं धन्यवाद
Posted by Vivek
Gujarat
27-02-2020 05:29 PM

Punjab
02-28-2020 12:15 PM
vivek ji kripya aap apna swal vistar se pooche taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake,dhanywad
Posted by mngnilal
Bihar
27-02-2020 05:22 PM
Punjab
02-28-2020 06:29 PM
Aap murrah bhians lene ke liye Ananya Breeding And Dairy Farm 9006505977, 6204697576 Ananya Breeding And Dairy Farm se sampark kr skte hai.
Posted by nav shah
Punjab
27-02-2020 05:16 PM
Punjab
02-28-2020 09:08 PM
Navpreet ji jo darahh hildi hai usda koi ilagg nhi hai baki tuci uss nu Calciumst gold liquid 50ml rojana de skde ho...
Posted by sadakat
Uttarakhand
27-02-2020 05:05 PM
Punjab
02-27-2020 11:07 PM
shrimaan g gehu mein fungus ka attack hai eski roktham ke liye fungicide tilt @200 ml per acre ka spray kr skte ho g..
Posted by गोपाल लाल धाकड़
Rajasthan
27-02-2020 04:58 PM
Punjab
02-28-2020 11:51 AM
गोपाल जी लहसुन की खेती उसकी किस्म पर निर्भर करती है लेकिन यह औसतन 120-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती हैं
Posted by गोपाल लाल धाकड़
Rajasthan
27-02-2020 04:55 PM

Punjab
02-28-2020 11:49 AM
गोपाल जी लहसुन की खेती उसकी किस्म पर निर्भर करती है लेकिन यह औसतन 120-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती हैं
Posted by gurinder
Punjab
27-02-2020 04:49 PM
Punjab
02-27-2020 04:52 PM
gurinder ji jado kanak 5-10% nisar jandi hai ta tuc NPK 130045@1 kilo ate boron@100 gram nu pratia cre de hisab nal spray karo.dhanwad
Posted by Pawan kumar
Uttar Pradesh
27-02-2020 04:47 PM
Punjab
02-27-2020 05:03 PM
पवन जी फरवरी और मार्च महीने में चारे के लिए मक्का की बिजाई की जाती है खरीफ के मौसम में सिंचित क्षेत्रों में बिजाई मानसून के शुरू होने से 10-15 दिन पहले करें इससे उपज में 10-15 प्रतिशत वृद्धि होगी, बारानी क्षेत्रों में बिजाई मानसून के शुरू होने पर करें, ताकि मिट्टी में उचित नमी विकसित हो सके, उचित अंकुरण के लिए मिट.... (Read More)
पवन जी फरवरी और मार्च महीने में चारे के लिए मक्का की बिजाई की जाती है खरीफ के मौसम में सिंचित क्षेत्रों में बिजाई मानसून के शुरू होने से 10-15 दिन पहले करें इससे उपज में 10-15 प्रतिशत वृद्धि होगी, बारानी क्षेत्रों में बिजाई मानसून के शुरू होने पर करें, ताकि मिट्टी में उचित नमी विकसित हो सके, उचित अंकुरण के लिए मिट्टी में नमी होना आवश्यक है
Posted by RAM NARESH
Bihar
27-02-2020 04:46 PM
Punjab
02-27-2020 04:51 PM
Naresh ji agar aap aam ki kheti ke bare men jankari lena chahte hai to iski bijai september aur march mahine men ki jati hai.paudhe hamesha sham ke samay men hi lgaye.paudho ko tej hwa ke parbhav se roke.dhanywad
Posted by harjeet
Uttar Pradesh
27-02-2020 04:37 PM
Punjab
02-27-2020 04:45 PM
Harjeet ji kripya btaye ke genhu ki fasl kitne din ki hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by Harsh Deep Singh
Punjab
27-02-2020 04:37 PM
Punjab
02-27-2020 04:47 PM
Harsh Deep ji tuc khet vich sulphur@3-5 kg prati acre de hisab nal pao. isde nal paani v sukan shuru kar dinda hai ate ik tra de fungicide da kam v karda hai.dhanwad
Posted by chandan
Punjab
27-02-2020 04:35 PM
Punjab
02-27-2020 05:44 PM
bhaa G isnu rajwa hara chaara te har din 2-3 kg feed pao sunh ton 1 mahina pehlan malap rehat karn di dawaee dyo
Posted by Sukhman Brar
Punjab
27-02-2020 04:35 PM
Punjab
02-27-2020 04:57 PM
ਬੱਕਰੀਆਂ ਦੀ ਮੰਡੀ ਬਠਿੰਡਾ ਨੇੜੇ ਤੁੰਗਵਾਲੀ ਵਿੱਚ ਲੱਗਦੀ ਹੈ ਇਹ ਹਰ ਮਹੀਨੇ ਦੀ 2-17 ਤਰੀਕ ਨੂੰ ਲੱਗਦੀ ਹੈ ਜੀ
Posted by Randhir k Payal
Haryana
27-02-2020 04:29 PM
Punjab
02-27-2020 04:44 PM
Randhir ji rkipya btaye ke aapne isme kya kya khaad daali hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by dileep
Uttar Pradesh
27-02-2020 04:29 PM
Punjab
02-27-2020 04:42 PM
परवल कद्दू कुल की एक पौष्टिक सब्जी है परवल की खेती के लिए गर्म एवं अधिक आर्द्रता वाली जलवायु उपयुक्त होती है ऐसे क्षेत्र जहां औसत वार्षिक वर्षा 100 से 120 सेंमी. हो तथा तापक्रम 5 डिग्री सेल्सियस से कम नहीं जाता हो, वह क्षेत्र परवल की खेती के लिए सर्वोत्तम होता है लेकिन जहां सिंचाई की सुविधा न हो, वहाँ भी परवल की खे.... (Read More)
परवल कद्दू कुल की एक पौष्टिक सब्जी है परवल की खेती के लिए गर्म एवं अधिक आर्द्रता वाली जलवायु उपयुक्त होती है ऐसे क्षेत्र जहां औसत वार्षिक वर्षा 100 से 120 सेंमी. हो तथा तापक्रम 5 डिग्री सेल्सियस से कम नहीं जाता हो, वह क्षेत्र परवल की खेती के लिए सर्वोत्तम होता है लेकिन जहां सिंचाई की सुविधा न हो, वहाँ भी परवल की खेती सफलतापूर्वक होती है बिहार की गंगा, सोन एवं गंडक दियारा क्षेत्रों में परवल की असिंचित फसल ही उगाई जाती है, फिर भी उपज अधिक प्राप्त होती है परवल भारी मिट्टी को छोड़कर सभी प्रकार की मिट्टियों में उगाया जा सकता है, परन्तु परवल की अच्छी पैदावार के लिए जल निकासयुक्त दोमट, बलुई दोमट मिट्टी जिसमें पर्याप्त मात्रा में जीवांश हो, अधिक उपयुक्त होती है यही कारण है कि परवल की खेती उत्तरप्रदेश, बिहार एवं पश्चिम बंगाल की नदियों के किनारों के दियारा क्षेत्रों में सफलतापूर्वक की जाती है परवल को हमेशा ऊँचे स्थान पर लगाना चाहिए, जहां पानी का जमाव नहीं होता हो उत्तरप्रदेश, बिहार तथा बंगाल में परवल की खेती पान के बरेजों में अंतरावर्ती फसल के रूप में करने की प्रथा अत्यंत पुरानी है, जहां के परवल के फल उच्च कोटि के गुणवत्ता वाले होते हैं मई-जून के महीनों में मिट्टी पलटने वाले हल से खेत को एकबार जुताई कर खुला छोड़ देना चाहिए ताकि हानिकारक कीड़े-मकोड़े मर जायें तथा खरपतवार सुख जायें लत्तर की रोपाई के लगभग एक महीना पहले मिट्टी में गोबर की सड़ी खाद अथवा कम्पोस्ट 200-250 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की दर से अच्छी तरह मिला देना चाहिए लत्तर रोपाई के समय खेत को 3-4 बार देशी हल से जुताई करके पाटा चलाकर मिट्टी को भुरभुरा तथा समतल बना लेना आवश्यक है डंडाली, राजेन्द्र परवल-1, राजेन्द्र परवल-2, स्वर्ण रेखा, स्वर्ण अलौकिक, निमियां, सफेदा, सोनपुरा, संतोखबा, तिरकोलबा, गुथलिया की बिजाई कर सकते है परवल उगाने की निम्नलिखित विधियां हैं:-1. बीज द्वारा 2. जड़ों की कलम द्वारा. लत्ताओं की लच्छी द्वारा रोपाई का समय भिन्न-भिन्न स्थानों पर अलग-अलग होता है मैदानी भागों में परवल की रोपनी का उचित समय मध्य जुलाई से अक्टूबर तक और दियारा क्षेत्रों में सितम्बर से अक्टूबर तक होता है परवल में अलग-अलग पौधों पर नर और मादा फूल उत्पन्न होते हैं नर पुष्पों से फल नहीं बनते हैं बल्कि वे मादा पुष्पों में परागण का कार्य करते हैं जिसमें मादा पुष्पों से फल बनना सम्भव होता है नर पुष्प बड़े और सफेद होते हैं, जबकि मादा पुष्प थोड़ा छोटा और सफेद होता है, उसके नीचे गर्भाश्य जुड़ा रहता है जो कुछ दिनों में परागण के बाद बढ़कर फल बन जाता है इसका विस्तार लताओं या बेलों द्वारा किया जाता है परवल लगाने के समय नर और मादा पौधों का अनुपात 1:19 होना अनिवार्य है उपरोक्त अनुपात नहीं रहने पर उत्पादन में काफी कमी हो जाती है खेत में कतार से कतार की दूरी 2.5 मीटर तथा पौधे से पौधे की दूरी 1.5 मीटर रखना चाहिए साथ ही थल्ले, भूमि की सतह से 6-8 सेंमी. ऊँचाई पर बनाने चाहिए एक वर्ष पुरानी लताओं से 120-150 सेंमी. लम्बे टुकड़े काटकर इस प्रकार मोड़ना चाहिए कि लच्छी की लम्बाई 30 सेंमी. हो जाये तथा 10 सेंमी. गहरे थालों में इस प्रकार लगाया जाय कि दोनों सिरे ऊपर खुले रहें रोपनी के बाद और फल लगने के समय तक 4-5 बार निकाई-गुड़ाई करनी चाहिए ताकि लताओं की शाकीय वृद्धि तेजी से हो लताओं के बढ़ जाने पर इसकी अनावश्यक वृद्धि को रोकने के लिए बार-बार लताओं को हाथ से उलटते-पलटते रहना चाहिए ऐसा करने से गांठों से जड़ें निकलकर जमीन में प्रवेश नहीं कर पाती है और फलन अधिक होता है मार्च माह के मध्य से पौधों पर फल लगना शुरू हो जाता है प्रारम्भ में फल लगने के 10-12 दिनों के बाद फल तोड़ने लायक हो जाते हैं इस प्रकार मार्च एवं अप्रैल माह में फलों की तोडनी प्रति सप्ताह एक बार तथा मई में प्रति सप्ताह दो बार अवश्य करनी चाहिए फलों की तोड़ाई मुलायम एवं हरी अवस्था में सूर्योदय से पहले करनी चाहिए इससे फल अधिक समय तक ताजे बने रहते हैं धन्यवाद
Posted by gurpreet Sandhu
Punjab
27-02-2020 04:21 PM
Punjab
02-27-2020 04:41 PM
sandhu ji kanak de daane mote karn de layi tuc NPK 130045@1 kilo ate Boron@100 gram nu prati acre de hisab nal spray karo.
Posted by Harmander Singh Brar
Punjab
27-02-2020 04:12 PM
Punjab
02-28-2020 06:32 PM
Harmander ji tuci uss nu nazdiki doctor ton check krwao ji uski janch krke he sahi ilagg ho skda hai..
Posted by dharmendra maran
Madhya Pradesh
27-02-2020 03:52 PM
Punjab
02-27-2020 04:02 PM
धर्मेंद्र जी आप इसके ऊपर mancozeb @400 ग्राम को प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें
Posted by Vishnu
Gujarat
27-02-2020 03:49 PM
Punjab
02-27-2020 03:59 PM
यह मिट्टी की कई किस्मों जैसे अच्छे जल निकास वाली लाल दोमट से चिकनी मिट्टी, काली मिट्टी से लैटेराइट मिट्टी में उगाई जाती है यह चट्टानी मिट्टी और हल्की मिट्टी में भी उगाई जा सकती है मिट्टी की गहराई 20-30 सैं.मी. से ज्यादा नहीं होनी चाहिए यह रेतली दोमट से दरमियानी काली मिट्टी जो अच्छे जल निकास वाली हो, में अच्छे पर.... (Read More)
यह मिट्टी की कई किस्मों जैसे अच्छे जल निकास वाली लाल दोमट से चिकनी मिट्टी, काली मिट्टी से लैटेराइट मिट्टी में उगाई जाती है यह चट्टानी मिट्टी और हल्की मिट्टी में भी उगाई जा सकती है मिट्टी की गहराई 20-30 सैं.मी. से ज्यादा नहीं होनी चाहिए यह रेतली दोमट से दरमियानी काली मिट्टी जो अच्छे जल निकास वाली हो, में अच्छे परिणाम देती है पौधे की वृद्धि के लिए मिट्टी pH 6-8 होना चाहिए शतावरी की खेती के लिए, अच्छे जल निकास वाली रेतली दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है मिट्टी को भुरभुरा बनाने के लिए, ज़मीन की अच्छे से जोताई करें, और 15 सैं.मी. की गहराई में गड्ढा खोदें रोपाई तैयार बैडों पर की जाती है पौधों की रोपाई जून-जुलाई के महीने में की जाती है इसके विकास के अनुसार 4.5x 1.2 मीटर फासले का प्रयोग करें और 20 सैं.मी. गहराई में गड्ढा खोदें फसल को मिट्टी से होने वाले कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए, बिजाई से पहले बीजों को गाय के मूत्र में 24 घंटे के लिए डाल कर उपचार करें उपचार के बाद बीज नर्सरी बैड में बोये जाते हैं अधिक पैदावार के लिए, 400-600 ग्राम बीजों का प्रति एकड़ में प्रयोग करें बिजाई से पहले मिट्टी का रासायनिक उपचार किया जाता है अप्रैल के महीने में बीज बोये जाते हैं शतावरी के बीजों को 30-40 सैं.मी. की चौड़ाई वाले और आवश्यक लंबाई वाले बैडों पर बोया जाता है बिजाई के बाद बैडों को नमी के लिए पतले कपड़े से ढक दिया जाता है 8-10 दिनों में पौधों का अंकुरण शुरू हो जाता है 45 सैं.मी. ऊंचाई के होने पर पौधे रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं पौधों की रोपाई 60 x 60 सैं.मी. की मेड़ों पर की जाती है खेत की तैयारी के समय, 80 क्विंटल प्रति एकड़ गली हुई रूड़ी की खाद को मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें नाइट्रोजन 24 किलो (यूरिया 52 किलो), फासफोरस 32 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 52 किलो), और पोटाश 40 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 66 किलो) प्रति एकड़ में डालें मिट्टी से पैदा होने वाली बीमारियों से पौधे को बचाने के लिए जैविक कीट नाशी जैसे धतूरा, चित्रकमूल और गाय के मूत्र का प्रयोग करें फसल के विकास के समय लगातार गोडाई की आवश्यकता होती है खेत को नदीन मुक्त बनाने के लिए 6-8 हाथ से गोडाई की आवश्यकता होती है पौधों को खेत में रोपण करने के बाद पहली सिंचाई तुरंत कर देनी चाहिए इस फसल को ज्यादा सिंचाई की जरूरत नहीं होती इसलिए शुरूआत में 4-6 दिनों के फासले पर सिंचाई कर दें और फिर कुछ समय के बाद सप्ताह के फासले पर सिंचाई करें पुटाई से पहले सिंचाई जरूर करनी चाहिए ताकि गड्ढों मे से जड़ों को आसानी से निकाला जा सके पुटाई के बाद जड़ों को उबाल के इनका छिलका उतारा जाता है छिल्का उतारने के बाद जड़ों को हवा में सुखाया जाता है सूखी जड़ों का भंडारण और ज्यादा दूरी वाले स्थानों पर ले जाने के लिए हवा रहित बैग में रखें पकी जड़ों का प्रयोग विभिन्न उत्पाद जैसे पाउडर, गुलाम और घृतम बनाने के लिए किया जाता है
Posted by dileep
Uttar Pradesh
27-02-2020 03:41 PM
Punjab
02-27-2020 03:44 PM
Dileep ji ek poly house bnane men lagbhag 40 lakh rupaye tak ka kharcha aata hai.dhanywad
Posted by ਅਜੇਵੀਰ ਸਿੰਘ ਢਿੱਲੋਂ
Punjab
27-02-2020 03:26 PM
Punjab
02-28-2020 11:46 AM
ਅਜੇਵੀਰ ਸਿੰਘ ਜੀ ਤੁਸੀ ਫੁੱਲਾਂ ਵਾਲੇ ਦਰੱਖਤ ਲੈਣ ਲਈ ਜੋਸ਼ਨ ਨਰਸਰੀ ਅੰਮ੍ਰਿਤਸਰ ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ 09814183992
Posted by Suresh Verma
Uttar Pradesh
27-02-2020 03:25 PM
Punjab
02-27-2020 03:28 PM
सुरेश जी आप झुलस रोग की रोकथाम के लिए आप carbendazim @400 ग्राम को प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें
Posted by akash singh
Punjab
27-02-2020 03:02 PM
Punjab
02-27-2020 03:31 PM
ਅਮਰੀਕ ਜੀ ਤੁਸੀ ਸਬਜ਼ੀਆਂ ਜਿਵੇ ਅਪ੍ਰੈਲ:- ਚਲਾਈ , ਮੂਲੀ ਮਈ:- ਫੁੱਲਗੋਭੀ , ਬੈਂਗਨ , ਪਿਆਜ , ਮੂਲੀ , ਮਿਰਚ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ
Posted by Ravindra Kumar
Uttar Pradesh
27-02-2020 02:48 PM
Punjab
02-27-2020 03:57 PM
अच्छे जल निकास वाली गहरी, दोमट मिट्टी जिसमें भूमिगत-जल का स्तर ज़मीन से 1.5-2 मी. के नीचे हो और अच्छी जल धारण क्षमता वाली ज़मीन गन्ने की खेती के लिए लाभदायक है यह फसल काफी अम्लीय और खारेपन को सहन कर सकती है इसलिए इसे मिट्टी जिसका pH 5 से 8.5 हो, में उगाई जा सकती है यदि मिट्टी का pH 5 से कम हो तो इसमें चूना (कली) डालें और यदि मिट.... (Read More)
अच्छे जल निकास वाली गहरी, दोमट मिट्टी जिसमें भूमिगत-जल का स्तर ज़मीन से 1.5-2 मी. के नीचे हो और अच्छी जल धारण क्षमता वाली ज़मीन गन्ने की खेती के लिए लाभदायक है यह फसल काफी अम्लीय और खारेपन को सहन कर सकती है इसलिए इसे मिट्टी जिसका pH 5 से 8.5 हो, में उगाई जा सकती है यदि मिट्टी का pH 5 से कम हो तो इसमें चूना (कली) डालें और यदि मिट्टी का pH 9.5 से ज्यादा हो तो इसमें जिप्सम डालें आप इसकी किस्मे जैसे Co 8014 (Mahalakshami) ,Vasant 1,Co 86032 ,Co 92005 की बिजाई कर सकते है पतझड़ के मौसम में 15 अक्तूबर से २० नवंबर तक बिजाई की जाती है, बसंत के मौसम में बिजाई 15 फरवरी तक और गर्मियों के मौसम में 15 जुलाई से 15 सितंबर तक बिजाई की जाती है बिजाई के लिए सुधरे ढंग जैसे कि (गहरी खालियां, मेंड़ बनाकर,पंक्तियों में जोड़े बनाकर और गड्ढा खोदकर बिजाई ) प्रयोग किये जाते हैं 1) खालियां और मेंड़ बनाकर सूखी बिजाई: ट्रैक्टर द्वारा मेंड़ बनाने वाली मशीन की मदद से मेंड़ और खालियां बनाएं और इन मेड़ और खालियों में बिजाई करें मेड़ और खालियों में 90 सैं.मी. का फासला होना चाहिए गन्ने की गुलियों को मिट्टी में दबाएं और उसके बाद हल्की सिंचाई करें 2) पंक्तियों के जोड़े बनाकर बिजाई: खालियां बनाने वाले यंत्र के प्रयोग से खेत में 150 सैं.मी. के फासले पर खालियां बनाएं और उनमें 30:30-90-30:30 सैं.मी. के फासले पर गन्ने की रोपाई करें इस तरीके से मेड़ वाली बिजाई से अधिक पैदावार मिलती है 3) गड्ढा खोदकर बिजाई: गड्ढे खोदने वाली मशीन से 60 सैं.मी. व्यास के 30 सैं.मी. गहरे गड्ढे खोदें जिनमें 60 सैं.मी. का फासला हो इससे गन्ना 2-3 बार उगाया जा सकता है और मेड़ वाली बिजाई से 25-50 % अधिक पैदावार आती है B) एक आंख वाले गन्नों की बिजाई: रोपाई के लिए सेहतमंद गुलियां चुनें और 75-90 सैं.मी. के अंतर पर खालियों में बिजाई करें गुलियां एक आंख वाली होनी चाहिए यदि गन्ने के ऊपरी भाग में छोटी डलियां चुनी गई हों तो बिजाई 6 -9 सैं.मी. के अंतर पर करें फसल के अच्छे उगने के लिए आंखों को ऊपर की ओर रखें और हल्की सिंचाई करें पतझड़ के मौसम में 14500-16500 तीन आंख वाले बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें और बसंत के मौसम में 16500-25000 तीन आंख वाले बीज और 21600-25000 दो आंख वाले बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें गन्ने में नदीनों के कारण 12-72 % पैदावार का नुकसान होता है शुरूआती 60-120 दिनों तक नदीनों की रोकथाम बहुत जरूरी है इसलिए रोपाई के बाद 3-4 महीने बाद फसल की नदीनों की रोकथाम करें नीचे लिखे तरीकों से नदीनों को रोका जा सकता है 1) हाथों से गोडाई करके: गन्ना एक व्यापक जगह लेने वाली फसल है इसलिए नदीनों को गोडाई करके रोका जा सकता है इसके इलावा प्रत्येक सिंचाई के बाद 3-4 गोडाई जरूरी है 2) काश्तकारी ढंग: इस प्रक्रिया में खेती के तरीके, अंतरफसली और मलचिंग तरीके शामिल हैं बहुफसली के कारण नदीनों का हमला ज्यादा होता है इसकी रोकथाम के लिए चारे वाली फसलें और हरी खाद वाली फसलों के आधार वाला फसली चक्र गन्ने में नदीनों की रोकथाम करता है गन्ना एक व्यापक जगह लेने वाली भी फसल है जिससे नदीनों के हमले का खतरा भी ज्यादा होता है यदि गन्ने को कम समय वाली फसलों के साथ अंतरफसली किया जाए तो इससे नदीनों को कम किया जा सकता है और ज्यादा लाभ भी मिल सकता है गन्ने के अंकुरन के बाद गन्ने की कतारों में 10-12 सैं.मी. मोटी तह बिछा दी जाती है यह सूर्य की रोशनी को सोखता है जिससे नदीन कम होते हैं यह मिट्टी में नमी को भी बचाता है 3) रासायनिक तरीके: नदीनों की रोकथाम के लिए, सिमाज़ीन या एट्राज़ीन 600-800 ग्राम या मैट्रीब्यूज़िन 800 ग्राम या ड्यूरॉन 1-1.2 किलोग्राम प्रति एकड़ में बिजाई के तुरंत बाद प्रयोग करना चाहिए इसके इलावा चौड़े पत्ते वाले नदीनों की रोकथाम के लिए 2, 4-डी@ 300-400 ग्राम का प्रयोग प्रति एकड़ के हिसाब से करें नाइट्रोजन 62 किलो, फासफोरस 32 किलो और पोटाश 42 किलो प्रति एकड़ में डालें बिजाई से पहले नाइट्रोजन की 1/3 मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा डालें बाकी बची नाइट्रोजन की दो मात्रा को टॉप ड्रेसिंग के तौर पर डालें नाइट्रोजन की पहली मात्रा को बीज वाली आंख के अंकुरण के समय और दूसरी मात्रा को बीज अंकुरण के 45 दिन बाद डालें 3 वर्षों के बाद गन्ने की गुलियों में 40-50 क्विंटल गाय का गोबर प्रति एकड़ में डालें पतझड़ के मौसम में 90-100 दिनों में नाइट्रोजन को टॉप ड्रेसिंग के तौर पर डालें और बसंत के मौसम में 150-160 दिन बाद डालनी चाहिए सिंचाई की संख्या मिट्टी की किस्म और पानी की उपलब्धता पर निर्भर करती है गर्मी के महीने में गर्म हवाओं और सूखे में वृद्धि होने के कारण फसल को पानी की जरूरत पड़ती है पहली सिंचाई फसल के 20-25 % अंकुरित होने पर करें मानसून में गन्ने को पानी और बारिश के आधार पर लगाएं कम वर्षा में सिंचाई 10 दिनों के अंतराल पर करें इसके बाद सिंचाई के अंतराल को बढ़ाकर 20-25 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें जमीन में नमी संभालने के लिए गन्ने की पंक्तियों में मलचिंग का प्रयोग करें अप्रैल जून के महीने में पानी की कमी ना होने दें इससे पैदावार कम होगी इसके इलावा बारिश के दिनों में पानी ना खड़ा होने दें जोताई का समय, वृद्धि का समय और अधिक विकास का समय सिंचाई के लिए बहुत नाज़ुक होता है मिट्टी को मेंड़ पर चढ़ाना: कसी की मदद से खालियों में और पौधे के किनारों पर मिट्टी चढ़ाई जाती है यह मिट्टी में अच्छी तरह से तैयार की गई खाद को अच्छी तरह से मिश्रित होने में मदद करती है पौधे को सहारा देने और उसे गिरने से बचाने में भी मदद करती है ज्यादा पैदावार और चीनी प्राप्त करने के लिए गन्ने की सही समय पर कटाई जरूरी है समय से पहले या बाद में कटाई करने से पैदावार पर प्रभाव पड़ता है किसान शूगर रीफरैक्टोमीटर का प्रयोग करके कटाई का समय पता लगा सकते हैं गन्ने की कटाई द्राती की सहायता से की जाती है गन्ना धरती से ऊपर थोड़ा हिस्सा छोड़कर काटा जाता है क्योंकि गन्ने में चीनी की मात्रा ज्यादा होती है कटाई के बाद गन्ना फैक्टरी में लेकर जाना जरूरी होता है धन्यवाद
Posted by Satwant Singh
Punjab
27-02-2020 02:36 PM
Punjab
02-28-2020 06:34 PM
ਤੁਸੀ ਮੱਝ ਨੂੰ 250 ਗ੍ਰਾਮ ਗੁੜ ਅਤੇ 1 ਕਿੱਲੋ ਦਲੀਆ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਰਿਨ ਕੇ ਫਿਰ ਉਸ ਵਿੱਚ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਸਰੋਂ ਦਾ ਤੇਲ ਮਿਕਸ ਕਰੋ, ਇਸ ਨੂੰ ਤੁਸੀ ਅੱਧਾ ਅੱਧਾ ਕਰਕੇ 5-7 ਦਿਨ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ ਅਤੇ leptaden tablet 10-10 ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ ਅਤੇ Glactogog ਪਾਊਡਰ 1-1 ਪਾਉਚ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ ਅਤੇ ਬੱਚੇ ਨੂੰ ਉਸ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਦੁੱਧ ਦਿਓ ਜਿਸ ਨੂੰ ਉਹ ਆਸਾਨੀ ਨਾਲ ਹਜ਼ਮ ਕਰ ਸਕੇ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ ਸਮੇ ਸਮੇ ਤੇ.... (Read More)
ਤੁਸੀ ਮੱਝ ਨੂੰ 250 ਗ੍ਰਾਮ ਗੁੜ ਅਤੇ 1 ਕਿੱਲੋ ਦਲੀਆ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਰਿਨ ਕੇ ਫਿਰ ਉਸ ਵਿੱਚ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਸਰੋਂ ਦਾ ਤੇਲ ਮਿਕਸ ਕਰੋ, ਇਸ ਨੂੰ ਤੁਸੀ ਅੱਧਾ ਅੱਧਾ ਕਰਕੇ 5-7 ਦਿਨ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ ਅਤੇ leptaden tablet 10-10 ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ ਅਤੇ Glactogog ਪਾਊਡਰ 1-1 ਪਾਉਚ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ ਅਤੇ ਬੱਚੇ ਨੂੰ ਉਸ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਦੁੱਧ ਦਿਓ ਜਿਸ ਨੂੰ ਉਹ ਆਸਾਨੀ ਨਾਲ ਹਜ਼ਮ ਕਰ ਸਕੇ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ ਸਮੇ ਸਮੇ ਤੇ ਪੇਟ ਦੇ ਕੀੜਿਆਂ ਲਈ ਦਵਾਈ ਜਰੂਰ ਦਿਓ.
Posted by Ravi Patidar
Madhya Pradesh
27-02-2020 02:36 PM
Punjab
02-27-2020 03:32 PM
Ravi ji rate sarkar ki tarf se teh kiya jata hai abhi iske bare men kuch nahi kaha ja sakta.dhanywad
Posted by shyam patel
Rajasthan
27-02-2020 02:19 PM
Punjab
02-27-2020 03:33 PM
पटेल जी आप फूल बनने के समय NPK 130045 @10 ग्राम को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें
Posted by रमेश कुमार
Uttar Pradesh
27-02-2020 02:12 PM
Punjab
02-27-2020 03:39 PM
कुमार जी आप इसके ऊपर NPK 191919 एक किलो को 150 लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें
Posted by ਬੂਟਾ ਸਿੰਘ
Punjab
27-02-2020 02:08 PM
Punjab
02-27-2020 05:04 PM
ਵੱਛੀ ਦਾ ਵਜ਼ਨ 3 ਕੁਇੰਟਲ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਬਾਕੀ ਹੀਟ ਵਿਚ ਨਾ ਅਉਣ ਦੇ ਕਈ ਕਾਰਨ ਹੋ ਸਕਦੇ ਹਨ ਜਿਵੇਂ ਮਿਨਰਲ ਦੀ ਘਾਟ, ਡੀਵਾਰਮਿੰਗ ਦਾ ਪ੍ਰੋਪਰ ਨਾਂ ਕਰਵਾਉਣਾ ਜਾ ਫਿਰ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਪ੍ਰਾਪਰ ਖੁਰਾਕ ਨਾ ਮਿਲਣਾ ਤੁਸੀ ਵੱਛੀ ਨੂੰ ਹੀਟ ਚ ਲਿਆਉਣ ਲਈ ਮਿਨਰਲ ਮਿਕਚਰ ਪਾਓ ਲਗਾਤਾਰਾ ,ਵੱਛੀ ਦੀ ਪ੍ਰੋਪਰ ਡੀਵਾਰਮਿੰਗ ਕਰਵਾਓ,ਵੱਛੀ ਨੂੰ ਖੁਲਾ ਰੱਖੋ ਤਾਂ ਜੋ ਉਹ ਆਪਣੀ ਮਰਜੀ ਨਾਲ ਪਾਣੀ ਪੀ ਸਕੇ ਜੇਕਰ .... (Read More)
ਵੱਛੀ ਦਾ ਵਜ਼ਨ 3 ਕੁਇੰਟਲ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਬਾਕੀ ਹੀਟ ਵਿਚ ਨਾ ਅਉਣ ਦੇ ਕਈ ਕਾਰਨ ਹੋ ਸਕਦੇ ਹਨ ਜਿਵੇਂ ਮਿਨਰਲ ਦੀ ਘਾਟ, ਡੀਵਾਰਮਿੰਗ ਦਾ ਪ੍ਰੋਪਰ ਨਾਂ ਕਰਵਾਉਣਾ ਜਾ ਫਿਰ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਪ੍ਰਾਪਰ ਖੁਰਾਕ ਨਾ ਮਿਲਣਾ ਤੁਸੀ ਵੱਛੀ ਨੂੰ ਹੀਟ ਚ ਲਿਆਉਣ ਲਈ ਮਿਨਰਲ ਮਿਕਚਰ ਪਾਓ ਲਗਾਤਾਰਾ ,ਵੱਛੀ ਦੀ ਪ੍ਰੋਪਰ ਡੀਵਾਰਮਿੰਗ ਕਰਵਾਓ,ਵੱਛੀ ਨੂੰ ਖੁਲਾ ਰੱਖੋ ਤਾਂ ਜੋ ਉਹ ਆਪਣੀ ਮਰਜੀ ਨਾਲ ਪਾਣੀ ਪੀ ਸਕੇ ਜੇਕਰ ਮਿਨਰਲ ਮਿਕਸਰ ਹਰ ਰੋਜ਼ ਦੇਣ ਤੇ ਦਵਾਈਆਂ ਦੇਣ ਨਾਲ ਹੀਟ ਵਿੱਚ ਨਹੀ ਆਈ ਤਾਂ ਡਾਕਟਰ ਤੋਂਂ ਚੈਕ ਕਰਵਾ ਸਕਦੇ ਹੋਂ ਉਹ ਬਾਹ ਪਾਕੇ ਚੈਕ ਕਰ ਸਕਦਾ ਹੈ ਕਿ ਅੰਦਰ ਕੋਈ ਪ੍ਰੋਬਲਮ ਤਾਂ ਨਹੀ ਜਾਂ ਫਿਰ ਤੁਸੀ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਹੀਟ ਵਿੱਚ ਲਿਆਉਣ ਲਈ ਪੰਸਾਰੀ ਦੀ ਦੁਕਾਨ ਤੋਂ ਜੈਫਲ ਦੇ ਤਿੰਨ ਪੀਸ ਲੈ ਆਵੋ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਇਸ ਨੂੰ ਗਰਮ ਕਰਕੇ ਭੁੰਨ ਲਵੋ ਜਿਸ ਨਾਲ ਇਹ ਨਰਮ ਹੋ ਜਾਵੇਗਾ ਜੈਫਲ ਦਾ ਇੱਕ ਪੀਸ ਭੁੰਨ ਕੇ ਬਰੀਕ ਕਰ ਲਓ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਇਸਨੂੰ ਆਟੇ ਦੇ ਪੇੜੇ ਦੇ ਉੱਪਰ ਗੁੜ ਲਗਾ ਕੇ ਖਵਾ ਦਿਓ ਇਸ ਤਰਾਂ ਲਗਾਤਾਰ ਤਿੰਨ ਦਿਨ ਤੱਕ ਖਵਾਓ ਉਸ ਨਾਲ ਵੀ ਪਸ਼ੂ ਹੀਟ ਵਿੱਚ ਆ ਜਾਵੇਗਾ ਜਾਂ minotas tab ਦੀਆਂ 21 ਗੋਲੀਆਂ ਲਗਾਤਾਰ 21 ਦਿਨ ਖਵਾਓ ਇਸ ਨਾਲ ਵੀ ਹੀਟ ਵਿੱਚ ਆ ਜਾਵੇਗੀ