
Posted by Sadashiv Ugale
Maharashtra
29-02-2020 12:04 PM
Sadashiv Ugale ji fish seed lene ke lia aap Moh. Anis 9451411371, 6394520950 se samparak kar sakte hai, Thankyou.

Posted by Bhupinder Singh Brar
Uttar Pradesh
29-02-2020 12:04 PM
यह सख्त किस्म की फसल है और इसकी पैदावार के लिए हर तरह की मिट्टी अनुकूल होती है, जिसमें हल्की से लेकर भारी और कम निकास वाली मिट्टी भी शामिल है इसकी पैदावार 6.5 से 7.5 पी एच वाली मिट्टी में भी की जा सकती है अच्छी पैदावार के लिए इसे गहरे तल, अच्छे निकास वाली रेतली चिकनी मिट्टी से लेकर चिकनी मिट्टी में बीजना चाहिए खेत .... (Read More)
यह सख्त किस्म की फसल है और इसकी पैदावार के लिए हर तरह की मिट्टी अनुकूल होती है, जिसमें हल्की से लेकर भारी और कम निकास वाली मिट्टी भी शामिल है इसकी पैदावार 6.5 से 7.5 पी एच वाली मिट्टी में भी की जा सकती है अच्छी पैदावार के लिए इसे गहरे तल, अच्छे निकास वाली रेतली चिकनी मिट्टी से लेकर चिकनी मिट्टी में बीजना चाहिए खेत की दो बार तिरछी जोताई करें और फिर समतल करें खेत को इस तरह तैयार करें कि उसमें पानी ना खड़ा रहे फरवरी-मार्च या अगस्त-सितंबर का महीना अमरूद के पौधे लगाने के लिए सही माना जाता है इसके पौधे बीज लगाकर या एयर लेयरिंग विधि के द्वारा तैयार किए जाते हैं सरदार किस्म के के बीज सूखे को सहनेयोग्य होते हैं और इन्हें जड़ों के द्वारा पनीरी तैयार करने के लिए उपयोग किया जा सकता है इसके पूरी तरह पके हुए फलों में से बीज तैयार करके उन्हें बैड या नर्म क्यारियों में अगस्त से मार्च के महीने में बीजना चाहिए क्यारियों की लंबाई 2 मीटर और चौड़ाई 1 मीटर तक होनी चाहिए बिजाई से 6 महीने के बाद पनीरी खेत में लगाने के लिए तैयार हो जाती है नईं अंकुरित पनीरी की चौड़ाई 1 से 1.2 सैं.मी. और ऊंचाई 15 सैं.मी. तक हो जाने पर यह अंकुरन विधि के लिए प्रयोग करने के लिए तैयार हो जाती है मई से जून तक का समय कलम विधि के लिए अनुकूल होता है नए पौधे और ताजी कटी टहनियों या कलमें अंकुरन विधि के लिए प्रयोग की जा सकती हैं पौधों की मजबूती और सही वृद्धि के लिए कटाई और छंटाई की जरूरत होती है जितना मजबूत बूटे का तना होगा, उतनी ही पैदावार अधिक अच्छी गुणवत्ता भरपूर होगी बूटे की उपजाई क्षमता बनाए रखने के लिए फलों की पहली तुड़ाई के बाद बूटे की हल्की छंटाई करनी जरूरी है जब कि सूख चुकी और बीमारी आदि से प्रभावित टहनियों की कटाई लगातार करनी चाहिए बूटे की कटाई हमेशा नीचे से ऊपर की तरफ करनी चाहिए अमरूद के बूटे को फूल, टहनियां और तने की स्थिति के अनुसार पड़ते हैं इसलिए साल में एक बार पौधे की हल्की छंटाई करने के समय टहनियों के ऊपर वाले हिस्से को 10 सैं.मी. तक काट देना चाहिए इस तरह कटाई के बाद नईं टहनियां अकुंरन में सहायता मिलती है अमरूद के बाग में पहले 3 से 4 वर्ष के दौरान मूली, भिंडी, बैंगन और गाजर की फसल उगाई जा सकती है इसके इलावा फलीदार फसलें जैसे चने, फलियां आदि भी उगाई जा सकती हैं जब पौधे 1 से 3 वर्ष के हो जाएं तो इसमें 10 से 25 किलोग्राम देसी रूड़ी की खाद, 155 से 200 ग्राम यूरिया, 500 से 1600 ग्राम सिंगल सुपर फासफेट और 100 से 400 ग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश प्रति पौधे के हिसाब से डालनी चाहिए पौधे के 4 से 6 वर्ष का होने पर इसमें 25 से 40 किलोग्राम रूड़ी (देसी खाद), 300 से 600 ग्राम यूरिया, 1500 से 2000 ग्राम सिंगल सुपर फासफेट 600 से 1000 ग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश प्रति पौधे के हिसाब से डालनी चाहिए 7 से 10 वर्ष की आयु के बूटों में 40 से 50 किलोग्राम रूड़ी (देसी खाद), 750 से 1000 ग्राम यूरिया, 2000 से 2500 ग्राम सिंगल सुपर फासफेट और 1100 से 1500 ग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश प्रति पौधे के हिसाब से डालनी चाहिए 10 वर्ष से अधिक उम्र के पौधों के लिए 50 किलोग्राम रूड़ी (देसी खाद), 1000 ग्राम यूरिया, 2500 ग्राम सिंगल सुपर फासफेट और 1500 ग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश प्रति पौधे के हिसाब से डालनी चाहिए रूड़ी (देसी खाद) की पूरी और यूरिया, सिंगल सुपर फासफेट और म्यूरेट ऑफ पोटाश की आधी खुराक को मई से जून और दोबारा सितंबर से अक्तूबर महीने में डालनी चाहिए अमरूद के बूटे के सही विकास और अच्छी पैदावार के लिए नदीनों की रोकथाम जरूरी है नदीनों की वृद्धि की जांच के लिए मार्च, जुलाई और सितंबर महीने में ग्रामोक्सोन 6 मि.ली. को प्रति लीटर पानी में डालकर स्प्रे करें नदीनों के अंकुरन के बाद गलाईफोसेट 1.6 लीटर को 200 लीटर पानी में मिलाकर (नदीनों को फूल पड़ने और उनकी उंचाई 15 से 20 सैं.मी. तक हो जाने से पहले) प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें पहली सिंचाई पौधे लगाने के तुरंत बाद और दूसरी सिंचाई तीसरे दिन करें इसके बाद मौसम और मिट्टी की किस्म के हिसाब से सिंचाई की जरूरत पड़ती है अच्छे और तंदरूस्त बागों में सिंचाई की ज्यादा जरूरत नहीं होती नए लगाए पौधों को गर्मियों में सप्ताह बाद और सर्दियों के महीने में 2 से 3 बार सिंचाई की जरूरत होती है पौधे को फूल लगने के समय ज्यादा सिंचाई की जरूरत नहीं होती क्योंकि ज्यादा सिंचाई से फूल गिरने का खतरा बढ़ जाता है

Posted by Bhupinder Singh Brar
Uttar Pradesh
29-02-2020 12:03 PM
यह सख्त किस्म की फसल है और इसकी पैदावार के लिए हर तरह की मिट्टी अनुकूल होती है, जिसमें हल्की से लेकर भारी और कम निकास वाली मिट्टी भी शामिल है इसकी पैदावार 6.5 से 7.5 पी एच वाली मिट्टी में भी की जा सकती है अच्छी पैदावार के लिए इसे गहरे तल, अच्छे निकास वाली रेतली चिकनी मिट्टी से लेकर चिकनी मिट्टी में बीजना चाहिए खेत .... (Read More)
यह सख्त किस्म की फसल है और इसकी पैदावार के लिए हर तरह की मिट्टी अनुकूल होती है, जिसमें हल्की से लेकर भारी और कम निकास वाली मिट्टी भी शामिल है इसकी पैदावार 6.5 से 7.5 पी एच वाली मिट्टी में भी की जा सकती है अच्छी पैदावार के लिए इसे गहरे तल, अच्छे निकास वाली रेतली चिकनी मिट्टी से लेकर चिकनी मिट्टी में बीजना चाहिए खेत की दो बार तिरछी जोताई करें और फिर समतल करें खेत को इस तरह तैयार करें कि उसमें पानी ना खड़ा रहे फरवरी-मार्च या अगस्त-सितंबर का महीना अमरूद के पौधे लगाने के लिए सही माना जाता है इसके पौधे बीज लगाकर या एयर लेयरिंग विधि के द्वारा तैयार किए जाते हैं सरदार किस्म के के बीज सूखे को सहनेयोग्य होते हैं और इन्हें जड़ों के द्वारा पनीरी तैयार करने के लिए उपयोग किया जा सकता है इसके पूरी तरह पके हुए फलों में से बीज तैयार करके उन्हें बैड या नर्म क्यारियों में अगस्त से मार्च के महीने में बीजना चाहिए क्यारियों की लंबाई 2 मीटर और चौड़ाई 1 मीटर तक होनी चाहिए बिजाई से 6 महीने के बाद पनीरी खेत में लगाने के लिए तैयार हो जाती है नईं अंकुरित पनीरी की चौड़ाई 1 से 1.2 सैं.मी. और ऊंचाई 15 सैं.मी. तक हो जाने पर यह अंकुरन विधि के लिए प्रयोग करने के लिए तैयार हो जाती है मई से जून तक का समय कलम विधि के लिए अनुकूल होता है नए पौधे और ताजी कटी टहनियों या कलमें अंकुरन विधि के लिए प्रयोग की जा सकती हैं पौधों की मजबूती और सही वृद्धि के लिए कटाई और छंटाई की जरूरत होती है जितना मजबूत बूटे का तना होगा, उतनी ही पैदावार अधिक अच्छी गुणवत्ता भरपूर होगी बूटे की उपजाई क्षमता बनाए रखने के लिए फलों की पहली तुड़ाई के बाद बूटे की हल्की छंटाई करनी जरूरी है जब कि सूख चुकी और बीमारी आदि से प्रभावित टहनियों की कटाई लगातार करनी चाहिए बूटे की कटाई हमेशा नीचे से ऊपर की तरफ करनी चाहिए अमरूद के बूटे को फूल, टहनियां और तने की स्थिति के अनुसार पड़ते हैं इसलिए साल में एक बार पौधे की हल्की छंटाई करने के समय टहनियों के ऊपर वाले हिस्से को 10 सैं.मी. तक काट देना चाहिए इस तरह कटाई के बाद नईं टहनियां अकुंरन में सहायता मिलती है अमरूद के बाग में पहले 3 से 4 वर्ष के दौरान मूली, भिंडी, बैंगन और गाजर की फसल उगाई जा सकती है इसके इलावा फलीदार फसलें जैसे चने, फलियां आदि भी उगाई जा सकती हैं जब पौधे 1 से 3 वर्ष के हो जाएं तो इसमें 10 से 25 किलोग्राम देसी रूड़ी की खाद, 155 से 200 ग्राम यूरिया, 500 से 1600 ग्राम सिंगल सुपर फासफेट और 100 से 400 ग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश प्रति पौधे के हिसाब से डालनी चाहिए पौधे के 4 से 6 वर्ष का होने पर इसमें 25 से 40 किलोग्राम रूड़ी (देसी खाद), 300 से 600 ग्राम यूरिया, 1500 से 2000 ग्राम सिंगल सुपर फासफेट 600 से 1000 ग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश प्रति पौधे के हिसाब से डालनी चाहिए 7 से 10 वर्ष की आयु के बूटों में 40 से 50 किलोग्राम रूड़ी (देसी खाद), 750 से 1000 ग्राम यूरिया, 2000 से 2500 ग्राम सिंगल सुपर फासफेट और 1100 से 1500 ग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश प्रति पौधे के हिसाब से डालनी चाहिए 10 वर्ष से अधिक उम्र के पौधों के लिए 50 किलोग्राम रूड़ी (देसी खाद), 1000 ग्राम यूरिया, 2500 ग्राम सिंगल सुपर फासफेट और 1500 ग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश प्रति पौधे के हिसाब से डालनी चाहिए रूड़ी (देसी खाद) की पूरी और यूरिया, सिंगल सुपर फासफेट और म्यूरेट ऑफ पोटाश की आधी खुराक को मई से जून और दोबारा सितंबर से अक्तूबर महीने में डालनी चाहिए अमरूद के बूटे के सही विकास और अच्छी पैदावार के लिए नदीनों की रोकथाम जरूरी है नदीनों की वृद्धि की जांच के लिए मार्च, जुलाई और सितंबर महीने में ग्रामोक्सोन 6 मि.ली. को प्रति लीटर पानी में डालकर स्प्रे करें नदीनों के अंकुरन के बाद गलाईफोसेट 1.6 लीटर को 200 लीटर पानी में मिलाकर (नदीनों को फूल पड़ने और उनकी उंचाई 15 से 20 सैं.मी. तक हो जाने से पहले) प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें पहली सिंचाई पौधे लगाने के तुरंत बाद और दूसरी सिंचाई तीसरे दिन करें इसके बाद मौसम और मिट्टी की किस्म के हिसाब से सिंचाई की जरूरत पड़ती है अच्छे और तंदरूस्त बागों में सिंचाई की ज्यादा जरूरत नहीं होती नए लगाए पौधों को गर्मियों में सप्ताह बाद और सर्दियों के महीने में 2 से 3 बार सिंचाई की जरूरत होती है पौधे को फूल लगने के समय ज्यादा सिंचाई की जरूरत नहीं होती क्योंकि ज्यादा सिंचाई से फूल गिरने का खतरा बढ़ जाता है

Posted by surjaram
Rajasthan
29-02-2020 12:00 PM
सुजाराम जी आप इसके ऊपर NPK 191919 एक किलो को 150 लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें

Posted by ਹਰਦੀਪ ਸਿੰਘ
Punjab
29-02-2020 11:41 AM
ਹਰਦੀਪ ਜੀ ਪੀਲੀ ਕੁੰਗੀ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ propiconazole @200ml ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ
Posted by Bikramjit Singh
Punjab
29-02-2020 11:36 AM
Bikramjit ji eh yellow ear rot hai eh bijai de same nematode da hamla hon krke hundi hai isda hun ta koi ilaj nahi hai.isde layi bijai de same healthy beejan di bijai karo.dhanwad
Posted by gurjit singh
Punjab
29-02-2020 11:34 AM
PAU ludhiana university vich mela 20-21 march nu lag reha hai ji.

Posted by Gurmail Singh
Punjab
29-02-2020 11:34 AM
ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਤੁਹਾਡੇ ਲਈ ਇਹ ਜਾਨਣਾ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਕਿ ਮੁਰਗੀ ਪਾਲਣ ਦਾ ਧੰਦਾ ਦੋ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਕਿ ਤੁਸੀ ਆਂਡਿਆਂ ਦਾ ਧੰਦਾ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਜਾਂ ਮੀਟ ਦਾ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਆਂਡਿਆਂ ਦਾ ਧੰਦਾ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਲੇਇਰ ਮੁਰਗੀਆਂ ਪਾਲਣੀਆਂ ਪੈਣਗੀਆਂ ਅਤੇ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਮੀਟ ਦਾ ਧੰਦਾ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਬਰਾਇਲਰ ਮੁਰਗੀਆਂ ਪਾਲਣੀਆਂ ਪੈਣਗੀਆਂ ਜੇਕ.... (Read More)
ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਤੁਹਾਡੇ ਲਈ ਇਹ ਜਾਨਣਾ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਕਿ ਮੁਰਗੀ ਪਾਲਣ ਦਾ ਧੰਦਾ ਦੋ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਕਿ ਤੁਸੀ ਆਂਡਿਆਂ ਦਾ ਧੰਦਾ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਜਾਂ ਮੀਟ ਦਾ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਆਂਡਿਆਂ ਦਾ ਧੰਦਾ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਲੇਇਰ ਮੁਰਗੀਆਂ ਪਾਲਣੀਆਂ ਪੈਣਗੀਆਂ ਅਤੇ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਮੀਟ ਦਾ ਧੰਦਾ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਬਰਾਇਲਰ ਮੁਰਗੀਆਂ ਪਾਲਣੀਆਂ ਪੈਣਗੀਆਂ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਬਰਾਇਲਰ ਮੁਰਗੀ ਫਾਰਮਿੰਗ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਅਤੇ ਘੱਟ ਤੋਂ ਘੱਟ 10 ਹਜਾਰ ਮੁਰਗੀਆਂ ਦਾ ਧੰਦਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ 4 ਤੋਂ 5 ਲੱਖ ਦਾ ਇੰਤਜਾਮ ਕਰਨਾ ਪਵੇਗਾ, ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਪੋਲਟਰੀ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈ ਕੇ ਨਾਬਾਰਡ ਤੋਂ ਲੋਨ ਲੈਂਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ 25 ਤੋਂ 35 % ਤੱਕ ਸਬਸਿਡੀ ਮਿਲ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਲੋਨ ਅਪਲਾਈ ਕਰਨ ਦੀ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਤੁਹਾਨੂੰ ਵਿੱਭਾਗ ਵੱਲੋਂ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਦਿਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈਣ ਲਈ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਨਜ਼ਦੀਕੀ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਕੇਦਰ ਤੋਂ ਜਾਂ ਗੁਰੂ ਅੰਗਦ ਦੇਵ ਵੈਟਨਰੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋਂ ਜਾਂ ਫਿਰ ਤੁਸੀ ਕਿਸੇ ਵੀ ਦਿਨ ਆਪਣੇ ਨਜ਼ਦੀਕੀ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਕੇਦਰ ਤੇ ਪਹੁੰਚ ਕੇ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈਣ ਲਈ ਫਾਰਮ ਭਰ ਆਊ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਜਦੋਂ ਵੀ ਪੋਲਟਰੀ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਆਵੇਗੀ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਕੇਦਰ ਵੱਲੋਂ ਕਾਲ ਕਰਕੇ ਦੱਸ ਦਿੱਤਾ ਜਾਦਾ ਹੈ ਬਹੁਤ ਵਧੀਆ ਕੰਮ ਹੈ ਜੀ ਪੋਲਟਰੀ ਦਾ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਬ੍ਰਾਇਲਰ ਰੱਖਦੇ ਹੋਂ ਤਾਂ 5 ਤੋਂ 6 ਹਫਤਿਆਂ ਦੇ ਅੰਦਰ ਅੰਦਰ ਮੰਡੀਕਰਣ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਤਕਰੀਬਨ ਪੰਜ ਮਹੀਨਿਆਂ ਵਿੱਚ ਅੰੰਡਿਆ ਦੀ ਉਪਜ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਸਾਰਾ ਸਾਲ ਦੀ ਆਮਦਨ ਵਾਲਾ ਕੰਮ ਹੈ ਜੀ ਜਿਆਦਾ ਮਿਹਨਤ ਵੀ ਨਹੀ ਲੱਗਦੀ ਇਹ ਨਾਜੁਕ ਕਿਸਮ ਦੇ ਜਾਨਵਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਕੁੱਝ ਕੁ ਖਤਰਨਾਕ ਬਿਮਾਰੀਆ ਵੀ ਹਨ ਜਿੰਨਾਂ ਤੋੰ ਬਚਣ ਲਈ ਖਾਸ ਧਿਆਨ ਰੱਖਣ ਦੀ ਜਰੂਰਤ ਹੂੰਦੀ ਹੈ.
Posted by DEEPAK chaudhary
Himachal Pradesh
29-02-2020 11:33 AM
deepak ji iski jankari aap najdiki krishi vigyan kendra Address: Ambala-Paonta Sahib-Dehradun Rd, Dhaula Kuan, Himachal Pradesh 173001 se le sakte hai.dhanywad
Posted by amit pandey
Uttar Pradesh
29-02-2020 11:26 AM
अमित जी इसका सही पता तो खून के सैंपल की जांच करके लग सकता है इसमें ज्यादा पशु को बुखार रहता है इसका सही पता जांच करके ही लगाया जा सकता है
Posted by dileep
Uttar Pradesh
29-02-2020 10:56 AM
ओइस्टर खुम्ब या ढींगरी खुम्ब
यह सामान्य और खाने योग्य खुम्ब है इसका गुद्दा नर्म, मखमली बनावट और अच्छा स्वाद होता है यह प्रोटीन, फाइबर और विटामिन बी1 से बी 12 का उच्च स्त्रोत है इस किस्म की सभी प्रजातियां और किस्में खाने योग्य हैं सिर्फ P. olearius और P. nidiformis को छोड़कर, ये ज़हरीली होती हैं उड़ीसा, महाराष्ट्र, आंध्रा प्रद.... (Read More)
ओइस्टर खुम्ब या ढींगरी खुम्ब
यह सामान्य और खाने योग्य खुम्ब है इसका गुद्दा नर्म, मखमली बनावट और अच्छा स्वाद होता है यह प्रोटीन, फाइबर और विटामिन बी1 से बी 12 का उच्च स्त्रोत है इस किस्म की सभी प्रजातियां और किस्में खाने योग्य हैं सिर्फ P. olearius और P. nidiformis को छोड़कर, ये ज़हरीली होती हैं उड़ीसा, महाराष्ट्र, आंध्रा प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिमी बंगाल और उत्तर पूर्व के पहाड़ी क्षेत्र मुख्य राज्य हैं जो खुम्ब का उत्पादन करते हैं
इस खुम्ब को उगाने का उपयुक्त समय अक्तूबर से मार्च तक का है यह 20-30 डिगरी सेल्सियस तापमान के साथ 80-85 प्रतिशत आर्द्रता को सहने योग्य है

Posted by Lala Ram
Uttar Pradesh
29-02-2020 10:52 AM
राम जी आप इसकी पूरी फोटो भेजे ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके
Posted by akshay kumar
Uttar Pradesh
29-02-2020 10:37 AM
पौधे अगस्त से सितंबर और फरवरी मार्च के महीने में बोये जाते हैं पौधे हमेशा शाम को ठंडे समय में बोयें फसल को तेज हवा से बचाएं कलमी किस्मों के लिए 10 मीटर x 10 मीटर फासले का प्रयोग करें और मध्यम घनता की रोपाई के लिए 5 x 5 मीटर फासले का प्रयोग करें रोपाई के लिए वर्गाकार प्रणाली का प्रयोग करें बिजाई से एक महीना पहले 1x1x1 म.... (Read More)
पौधे अगस्त से सितंबर और फरवरी मार्च के महीने में बोये जाते हैं पौधे हमेशा शाम को ठंडे समय में बोयें फसल को तेज हवा से बचाएं कलमी किस्मों के लिए 10 मीटर x 10 मीटर फासले का प्रयोग करें और मध्यम घनता की रोपाई के लिए 5 x 5 मीटर फासले का प्रयोग करें रोपाई के लिए वर्गाकार प्रणाली का प्रयोग करें बिजाई से एक महीना पहले 1x1x1 मीटर के आकार के गड्ढे 10x10 मीटर के फासले पर खोदें गड्ढों को सूर्य की रोशनी में खुला छोड़ दें फिर इन्हें मिट्टी में 30-40 किलो रूड़ी की खाद और 1 किलो सिंगल सुपर फासफेट मिलाकर भर दें बिजाई वर्गाकार और 6 भुजाओं वाले तरीके से की जा सकती है 6 भुजाओं वाले तरीके से बिजाई करने से 15 प्रतिशत वृक्ष ज्यादा लगाए जा सकते हैं आप इसकी किस्मे जैसे Dusheri,Langra,Chausa,Ambika की बिजाई कर सकते है
Posted by Aman Sekhon
Punjab
29-02-2020 10:25 AM
Aman ji Ehh SAG walia da Hf nasal da semen hai isdi purri jankari tuhanu jiss ton semen bharwaya gya hai uss ton mill jawegi ohna kol ehna di purri detail hundi hai.

Posted by Manish Singh Patel
Uttar Pradesh
29-02-2020 10:17 AM
जियान आपको पंजाब से मिलेगा इसके इलावा आप इसे घर पर बनाने के लिए आपको 5 लीटर घोल तैयार करने के लिए निम्नलिखित आवश्यक चीज़ें जरूरी हैं-
200 ग्राम नीम के पत्तों का अर्क
200 ग्राम धतूरे के पत्तों का अर्क
200 ग्राम अक्क के पत्तों का अर्क
200 ग्राम करंज के पत्तों का अर्क
200 ग्राम तुम्मे का अर्क
50 ग्राम लहसुन का अर्क
50 ग्राम.... (Read More)
जियान आपको पंजाब से मिलेगा इसके इलावा आप इसे घर पर बनाने के लिए आपको 5 लीटर घोल तैयार करने के लिए निम्नलिखित आवश्यक चीज़ें जरूरी हैं-
200 ग्राम नीम के पत्तों का अर्क
200 ग्राम धतूरे के पत्तों का अर्क
200 ग्राम अक्क के पत्तों का अर्क
200 ग्राम करंज के पत्तों का अर्क
200 ग्राम तुम्मे का अर्क
50 ग्राम लहसुन का अर्क
50 ग्राम तंबाकू के पत्तों का अर्क
5 लीटर गऊ भैंस का मूत्र (यदि देसी गाय का हो, तो ज्यादा अच्छा है)
तैयार करने की विधि
इन सब चीजों को मिला कर 12-12 घंटे के अंतराल पर धीमी आंच पर उबालकर ठंडा कर लें 3 बार 12-12 घंटे के अंतराल पर गर्म करके और ठंडा करके यह प्रयोग करने के लिए तैयार हो जाता है इसकी विशेषता यह भी है कि इसे जितने समय तक रखना चाहें, रख सकते हैं यह खराब नहीं होता आप एक बार इसे प्रयोग करके देखें और अपना तजुर्बा भी शेयर करें
Posted by dileep
Uttar Pradesh
29-02-2020 10:11 AM
ओइस्टर खुम्ब या ढींगरी खुम्ब
यह सामान्य और खाने योग्य खुम्ब है इसका गुद्दा नर्म, मखमली बनावट और अच्छा स्वाद होता है यह प्रोटीन, फाइबर और विटामिन बी1 से बी 12 का उच्च स्त्रोत है इस किस्म की सभी प्रजातियां और किस्में खाने योग्य हैं सिर्फ P. olearius और P. nidiformis को छोड़कर, ये ज़हरीली होती हैं उड़ीसा, महाराष्ट्र, आंध्रा प्रद.... (Read More)
ओइस्टर खुम्ब या ढींगरी खुम्ब
यह सामान्य और खाने योग्य खुम्ब है इसका गुद्दा नर्म, मखमली बनावट और अच्छा स्वाद होता है यह प्रोटीन, फाइबर और विटामिन बी1 से बी 12 का उच्च स्त्रोत है इस किस्म की सभी प्रजातियां और किस्में खाने योग्य हैं सिर्फ P. olearius और P. nidiformis को छोड़कर, ये ज़हरीली होती हैं उड़ीसा, महाराष्ट्र, आंध्रा प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिमी बंगाल और उत्तर पूर्व के पहाड़ी क्षेत्र मुख्य राज्य हैं जो खुम्ब का उत्पादन करते हैं
इस खुम्ब को उगाने का उपयुक्त समय अक्तूबर से मार्च तक का है यह 20-30 डिगरी सेल्सियस तापमान के साथ 80-85 प्रतिशत आर्द्रता को सहने योग्य है

Posted by NAVRAJ RANDHAWA
Punjab
29-02-2020 09:58 AM
Navraj ji jekar boor pai reha hai ate upro meeh pai geya ta isde jhaad vich fark payega.isto ilava jekar kanak poori tra nahi digi ta isde jhaad koi khaas fark nahi payega.dhanwad

Posted by Davinder Khehra
Punjab
29-02-2020 09:54 AM
ਉਸ ਨੂੰ Injection Zackshot 20ml, Amoxirum 4.5gm injection , Megludyne injection 20ml , Isoflud 5ml , CRB(ascorbic acid) injection 20ml , Vitum-H 5ml ਲਗਵਾਓ ਇਹ ਸਾਰੇ 3 ਦਿਨ ਲਗਾਤਾਰ ਲਗਵਾਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ..
Posted by Phool Singh kashyap
Uttar Pradesh
29-02-2020 09:51 AM
कश्यप जी आप इसके ऊपर NPK @1 किलो को 150 लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें

Posted by gautam aryan
Bihar
29-02-2020 09:47 AM
आप Mifex 450ml बोलत में Avil injection 10ml, Tonophos injection 20ml मिलाकर (IV slow)लगायें इसके साथ X-nel injection 1gm, Trineurosol-h 5—5 मि.ली. इंजेक्शन पीछे की तरफ दोंनो पुड़ों पर लगाएं बाकि उसे Macbolit 400mg इंजेक्शन लगायें इनके साथ फर्क पड़ेगा बाकि आप उसे सहारा देकर कुछ समय खड़ी करना शुरू करें
Posted by jeet
Madhya Pradesh
29-02-2020 09:07 AM
jeet ji kripya aap headline ke label ki photo bheje doosra aap zerox ki spray kr sakte hai isme propiconazole nam ka salt hai jiski matra 200 ml ko prati acre ke hisab se spray karen.dhanywad

Posted by navvinder singh
Punjab
29-02-2020 09:04 AM
ਇਸ ਵਿੱਚ ਕੋਈ ਚੱਕਰ ਵਾਲੀ ਗੱਲ ਨਹੀਂ ਹੈ ਕਈ ਵਾਰ ਜਦੋਂ ਡਾਕਟਰ ਟੀਕਾ ਭਰਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਪਸ਼ੂ ਦੇ ਜ਼ਿਆਦਾ ਜੋਰ ਲਗਾੁੳਣ ਕਰਕੇ ਵੀ ਖੂਨ ਨਿਕਲ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਜਦੋਂ ਪਸ਼ੂ ਦਾ ਅੰਡਾ ਟੁੱਟਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਵੀ ਪਸ਼ੂ ਖੂਨ ਸੁੱਟਦਾ ਹੈ ਤੁਸੀਂ ਇਸ ਨੂੰ 200 ਗ੍ਰਾਮ ਸਰੋਂ ਦਾ ਤੇਲ ਅਤੇ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਹਲਦੀ ਮਿਲਾ ਕੇ ਤਿੰਨ-ਚਾਰ ਦਿਨਦਿਓ
Posted by rahul
Punjab
29-02-2020 09:04 AM
rahul ji tuc PAU fruit plant lain layi Amardeep 8146500544 te sampark kar sakde ho.
Posted by sachin
Uttar Pradesh
29-02-2020 08:54 AM
सचिन जी यह पीली कुंगी रोग है इसकी रोकथाम के लिए propiconazole @200ml को प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें

Posted by Gurbhej singh
Punjab
29-02-2020 08:40 AM
ਤੁਸੀ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ 250 ਗ੍ਰਾਮ ਗੁੜ ਅਤੇ 1 ਕਿੱਲੋ ਦਲੀਆ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਰਿਨ ਕੇ ਫਿਰ ਉਸ ਵਿੱਚ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਸਰੋਂ ਦਾ ਤੇਲ ਮਿਕਸ ਕਰੋ, ਇਸ ਨੂੰ ਤੁਸੀ ਅੱਧਾ ਅੱਧਾ ਕਰਕੇ 5-7 ਦਿਨ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ ਅਤੇ leptaden tablet 10-10 ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ ਅਤੇ Glactogog ਪਾਊਡਰ 1-1 ਪਾਉਚ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ.

Posted by sajan
Punjab
29-02-2020 08:40 AM
Sajan ji tuci koi v khal vart skde ho ehh tuhade pashu de khan ate hajam krn te nirbhar krda hai jiss khal nu khaa ke pashu vdia dudh dinda hai usdi varto kr skde ho, baki hara chara vdia matra vich deo ate sme sme te pett de kiria wali goli jrur deo ji.
Posted by डिलेश्वर चंद्राकर
Chattisgarh
29-02-2020 08:25 AM
डिलेश्वर जी यह फंगस है इसके लिए आप carbendazim @400 ग्राम को प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें
Posted by sachin
Uttar Pradesh
29-02-2020 08:21 AM
Sachin ji yeh peeli kungi rog hai iski roktham ke liye aap propiconazole@200ml ko prati acre ke hisab se spray karen. aur spray mausam ko dhyan men rakh kar karen.dhanywad

Posted by prabhjot singh
Punjab
29-02-2020 08:07 AM
Prabhjot ji fatt da sidha saband pashu di khurak nal hunda hai baki kai pashu palak suru wala dudh kddn ton badd akhir wala dudh la jande hai ehh pashu di achi nasal ate vdia khurak te he nirbhar krda hai tuci pashu nu sme sme te pett de kiria wali goli deo ate vdia khurak de nal nal 1 kg vdemia di khal ate Fatmax powder 50gm rojana dena suru kro, iss nal pashu di vdia fatt ho jandi hai.
Posted by mangal Chand Ranwa
Rajasthan
29-02-2020 08:06 AM
mangal ji agar aap nimbu ki kheti karna chahte hai to Kagzi (Acidlime),Chakradhar,PKM 1 ki bijai kar sakte hai. dossra aap lemon ki kheti karna chahte hai to aap Eureka,Lisbon lemon ki bijai kar sakte hai.iske paudhe lene ke liye aap Ravi Choudhary Phone: 9530002191 ji se sampark kar sakte hai.dhanywad

Posted by Himanshu Yadav
Uttar Pradesh
29-02-2020 07:58 AM
Himanshu please ask your question in detail so that we can provide you proper information.thank you
Posted by Talwinder singh
Punjab
29-02-2020 07:57 AM
Talwinder ji jekar halle kanak de daane banna shuru ho gaye ta isda jhaad ghat sakda hai isto ilava isde vich fungus da hamla hon de poore chance han jekar is tra da hamla hunda hai ta propiconazole@200ml nu prati acre de hisab nal spray karo.dhanwad
Posted by amol
Assam
29-02-2020 07:33 AM
आनद जी, आपके नींबू के पौधे में फंगस का हमला दिखाई दे रहा है, आप इसकी रोकथाम के लिए इसमें carbendazim @ 4 ग्राम यां mancozeb @ 4 ग्राम प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे कर सकते हैं, धन्यवाद

Posted by ਗੁਰਪ੍ਰੀਤ ਸਿੰਘ ਸੇਖੋ
Punjab
29-02-2020 07:27 AM
इसे आप हरा चारा 4 किलो दूध के मगर एक किलो के हिसाब से डालें और हर तीन महीने के बाद पेट के कीड़ों के लिए गोली दें और सुबह शाम इसकी तारे देखें और इसे आस करवा दें
Posted by लक्ष्मीनारायण
Madhya Pradesh
29-02-2020 06:15 AM
लक्ष्मीनारायण जी आप इसके ऊपर NPK 130045 @1 किलो को 150 लीटर पानी में मिला कर स्प्रे करें

Posted by Gurvinder Singh
Haryana
29-02-2020 06:11 AM
Gurvinder ji tuc mooli ate chalayi di bijai kar sakde ho isto ilava tuc makki di bijai kar sakde ho.dhanwad
Posted by gurbej Singh
Punjab
29-02-2020 06:01 AM
Gurbej ji, eh macchar de hamle di vajah nal ho reha hai, tusi is di roktham layi is vich imidacloprid @ 1.5 ml prati litre pani de hisaab nal spray kar sakde ho, dhanwad
Posted by jajbir sibgh
Punjab
29-02-2020 05:57 AM
ਹਾਂਜੀ ਤੁਸੀ ਛੋਲਿਆਂ ਦੀ ਚੂਰੀ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ ਵਧਿਆ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਹਰਾ ਚਾਰਾ ਦਿਓ ਅਤੇ ਵਧਿਆ ਫੀਡ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰੋ ਬਾਕੀ ਇਸ ਨੂੰ ਵਡੇਮਿਆ ਦੀ ਖੱਲ 1 ਕਿਲੋ ਰੋਜਾਨਾ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ ਅਤੇ ਇਸ ਨੂੰ fatmax ਪਾਊਡਰ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ
Posted by Ravindra singhChouhan
Rajasthan
29-02-2020 02:43 AM
रविंदर जी, आप thai apple ber वैरायटी की बिजाई कर सकते हैं, धन्यवाद

Posted by Deepak
Madhya Pradesh
29-02-2020 02:07 AM
श्री मान इसे मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जाता है, लेकिन अंगूर की खेती के लिए उपजाऊ मिट्टी जिसकी पी एच 6.5-8.5 हो, और जल जमाव वाली मिट्टी उपयुक्त होती है किशमिश बनाने के लिए Thompson Seedless, Black Sahebi कच्चा खाने के लिए Thompson Seedless, Beauty Seedless, Black Sahebi, Anab-e-Shahi, जूस बनाने के लिए: Beauty Seedless, Black Prince वाइन बनाने के लिए Rangspray, Cholhu White, Cholhu Red अंगूर की खेती के लिए, अच्.... (Read More)
श्री मान इसे मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जाता है, लेकिन अंगूर की खेती के लिए उपजाऊ मिट्टी जिसकी पी एच 6.5-8.5 हो, और जल जमाव वाली मिट्टी उपयुक्त होती है किशमिश बनाने के लिए Thompson Seedless, Black Sahebi कच्चा खाने के लिए Thompson Seedless, Beauty Seedless, Black Sahebi, Anab-e-Shahi, जूस बनाने के लिए: Beauty Seedless, Black Prince वाइन बनाने के लिए Rangspray, Cholhu White, Cholhu Red अंगूर की खेती के लिए, अच्छी तरह से तैयार ज़मीन की आवश्यकता होती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक ट्रैक्टर से 3-4 गहरी जोताई करें और हैरो से 3 जोताई करें गड्ढे भरने के समय, गाय का गोबर @ 50 किलोग्राम, एसएसपी @ 2 किलोग्राम और क्लोरपायरीफोस का मिश्रण मिलाएं इसके अलावा हल्की सिंचाई आवश्यक है नए पौधे अंगूर की मदिरा, कैल्शियम अमोनियम नाइट्रेट (CAN) @ 250gm और MOP @ 250gm को अप्रैल महीने में और फिर जून महीने में लागू करें सूखे क्षेत्रों में CAN @ 1200gm, SSP @ 1500gm और MOP 500 ग्राम पूर्ण विकसित मदिरा के लिए डालें स्टॉम्प @ 800 मिली प्रति एकड़ का प्रयोग पूरी तरह से जोताई के बाद मार्च के पहले पखवाड़े में किया जाता है और फिर Gramoxone 24 WCS (paraquat) या Glycel 41 SL (glyphosate)@1.6 लीटर/एकड़ का छिड़काव किया जाता है उद्भव के बाद जब खरपतवार 15-20 सेंटीमीटर की ऊँचाई को प्राप्त करते हैं मध्य पहाड़ियों में, सिंचाई फरवरी महीने के पहले पखवाड़े और फिर मार्च के पहले सप्ताह में दी जाती है फिर अप्रैल के शुरू से जून के अंत तक फलों के विकास के लिए फिर से सिंचाई दी जाती है कम वर्षा के दौरान सिंचाई आवश्यक है जलवायु के आधार पर शुष्क क्षेत्रों में, सप्ताह में एक बार सिंचाई दी जाती है मुख्य रूप से फरवरी के शुरू से लेकर अंत-अप्रैल तक सिंचाई की जाती है 18o ब्रिक्स वाले पके गुच्छों की कटाई की जाती है यह बीज रहित किस्मों के लिए औसतन 8-12.5 टन/ एकड़ और बीज वाली किस्मों के लिए 15-20 टन/एकड़ की उपज देता है

Posted by Javeed Ahmed
Maharashtra
29-02-2020 12:57 AM
कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप किस नसल के बारे में जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको उसके बारे में सही जानकारी दी जा सके।

Posted by murlidhar sharma
Chattisgarh
28-02-2020 11:37 PM
श्रीमान जी रूडी खाद वो होता है जो जानवरों जैसे गाय और भैसों की गोबर को 4—5 महीने तक डीकंपोजिंग करके बाद में खेत में डाला जाता है

Posted by Harmeet
Punjab
28-02-2020 10:31 PM
Harmeet ji tuci sahiwal cow lain lai Sarb Cheema 7508023218 Sarb Cheema dairy Farm nal sampark kr skde ho ehna ton tuhanu vdia sahiwal cow mill jangia.
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