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Posted by Jasvir singh
Punjab
03-03-2020 08:04 AM
Punjab
03-03-2020 04:51 PM
ਇਹ ਫਸਲ ਹਰ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੀ ਰੇਤਲੀ ਅਤੇ ਭਾਰੀ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਉਗਦੀ ਹੈ ਜਲ ਨਿਕਾਸ ਵਾਲੀਆਂ ਮੈਰਾ ਜਮੀਨਾਂ ਵਿੱਚ ਇਸ ਦਾ ਝਾੜ ਬਹੁਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਫਸਲ ਜਿਆਦਾ ਖਾਰਾਪਣ ਨਹੀ ਸਹਾਰ ਸਕਦੀ ਲੱਗਪੱਗ 5.5 - 6 pH ਵਾਲੀਆਂ ਜਮੀਨਾਂ ਵਿੱਚ ਇਸ ਦਾ ਝਾੜ ਵਧੇਰੇ ਹੁੰਦਾ ਹੈ RBL 6: ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਬੀਜੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਬੀਜ ਹਲਕੇ ਹਰੇ ਰੰਗ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਫਲੀ ਵਿੱਚ 6-8 ਬੀਜ ਹੁੰਦੇ ਹਨ 2-3 ਵਾਰ ਵਾਹ ਕੇ ਖ.... (Read More)
ਇਹ ਫਸਲ ਹਰ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੀ ਰੇਤਲੀ ਅਤੇ ਭਾਰੀ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਉਗਦੀ ਹੈ ਜਲ ਨਿਕਾਸ ਵਾਲੀਆਂ ਮੈਰਾ ਜਮੀਨਾਂ ਵਿੱਚ ਇਸ ਦਾ ਝਾੜ ਬਹੁਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਫਸਲ ਜਿਆਦਾ ਖਾਰਾਪਣ ਨਹੀ ਸਹਾਰ ਸਕਦੀ ਲੱਗਪੱਗ 5.5 - 6 pH ਵਾਲੀਆਂ ਜਮੀਨਾਂ ਵਿੱਚ ਇਸ ਦਾ ਝਾੜ ਵਧੇਰੇ ਹੁੰਦਾ ਹੈ RBL 6: ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਬੀਜੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਬੀਜ ਹਲਕੇ ਹਰੇ ਰੰਗ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਫਲੀ ਵਿੱਚ 6-8 ਬੀਜ ਹੁੰਦੇ ਹਨ 2-3 ਵਾਰ ਵਾਹ ਕੇ ਖੇਤ ਤਿਆਰ ਕਰ ਲਉ ਖੇਤ ਨੂੰ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਵਾਹੋ ਤਾਂ ਕਿ ਪਾਣੀ ਨਾ ਖੜ ਸਕੇ ਕਿਉਂਕਿ ਇਹ ਫ਼ਸਲ ਪਾਣੀ ਨਹੀ ਸਹਾਰ ਸਕਦੀ ਫ਼ਸਲ ਬੀਜਣ ਤੋ ਪਹਿਲਾ 60-80 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ ਪਾਉ ਤਾਂ ਕਿ ਵਧੀਆਂ ਝਾੜ ਮਿਲ ਸਕੇ ਬਸੰਤ ਦੀ ਰੁੱਤ ਵਿੱਚ ਰਾਜਮਾਂਹ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਫਰਵਰੀ - ਮਾਰਚ ਅਤੇ ਸਾਉਣੀ ਦੀ ਰੁੱਤ ਵਿੱਚ ਇਸ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਮਈ -ਜੂਨ ਦੇ ਮਹੀਂਨੇ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਕੁੱਝ ਕਿਸਾਨ ਰਾਜਮਾਂਹ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਜਨਵਰੀ ਦੇ ਅਖੀਰਲੇ ਹਫਤੇ ਕਰਦੇ ਹਨ ਅਗੇਤੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਲਈ ਕਤਾਰ ਤੋਂ ਕਤਾਰ ਦਾ ਫਾਸਲਾ 45-60 ਸੈ:ਮੀ: ਅਤੇ ਪੌਦੇ ਤੋਂ ਪੌਦੇ ਦਾ ਫਾਸਲਾ 10-15 ਸੈ:ਮੀ: ਰੱਖੋ ਪੋਲ ਵਰਗੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਲਈ ਪਹਾੜੀ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਪੌਦੇ ਦਾ ਫਾਸਲਾ 3-4 ਮੀਟਰ ਪ੍ਰਤੀ ਪਹਾੜੀ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਬੀਜ ਨੂੰ 6-7 ਸੈ:ਮੀ:ਡੂੰਘਾ ਬੀਜੋ ਇਸਦੀ ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਟੋਆ ਪੁੱਟ ਕੇ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਸਮਤਲ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਬੀਜ ਕਤਾਰਾਂ ਵਿੱਚ ਬੀਜੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਪਹਾੜੀ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਇਸ ਦੀ ਖੇਤੀ ਬੈਡ ਬਣਾ ਕੇ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਅਗੇਤੀ ਕਿਸਮਾਂ ਲਈ 30-35 ਕਿਲੋਗ੍ਰਾਮ ਬੀਜ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਵਰਤੋ ਪੋਲ ਕਿਸਮਾਂ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਪਹਾੜੀ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ 1 ਮੀਟਰ ਦੇ ਫਾਸਲੇ 3-4 ਪੌਦੇ ਪ੍ਰਤੀ ਪਹਾੜੀ ਤੇ ਲਗਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਬੀਜ ਦੀ ਮਾਤਰਾ 10-12 ਕਿਲੋਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਵਰਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਨਾਇਟ੍ਰੋਜਨ 40 ਕਿਲੋ (87 ਕਿਲੋ ਯੂਰੀਆ), ਫਾਸਫੋਰਸ 25 ਕਿਲੋ (150 ਕਿਲੋ ਐੱਸ.ਐੱਸ.ਪੀ.) ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਵਿੱਚ ਵਰਤੋ ਖਾਦਾਂ ਪਾਉਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਜਾਂਚ ਕਰਵਾਉ ਫ਼ਸਲ ਦੇ ਸ਼ੁਰੂ ਵਿੱਚ ਨਦੀਨਾਂ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ ਨਦੀਨਾਂ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਬਿਜਾਈ ਤੋ 2-3 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਅੰਦਰ ਅੰਦਰ ਫਲੂਕਲੋਰਿਨ 800 ਮਿ:ਲੀ: ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਜਾਂ ਪੈਂਡੀਮੈਥਾਲਿਨ 1 ਲੀਟਰ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਵਰਤੋ ਖੇਤ ਨੂੰ ਰਾਉਣੀ ਕਰਨੀ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ ਇਸ ਤੋ ਇਲਾਵਾ ਫ਼ਸਲ ਨੂੰ 6-7 ਪਾਣੀ ਲਗਦੇ ਹਨ ਪਹਿਲਾ ਪਾਣੀ ਫ਼ਸਲ ਬੀਜਣ ਤੋਂ 25 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ ਲੱਗਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਅਗਲੇ ਤਿੰਨ ਪਾਣੀ 25 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ ਲਗਾਉ ਵਧੀਆ ਝਾੜ ਲਈ ਇਸ ਤੋਂ ਅਗਲਾ ਪਾਣੀ ਫੁੱਲ ਪੈਣ ਤੇ ਅਤੇ ਫਲੀਆ ਬਨਣ ਤੇ ਲਗਾਉਣੇ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹਨ ਜੇਕਰ ਇਹਨਾ ਪੜਾਅ ਤੇ ਪਾਣੀ ਨਾ ਲੱਗੇ ਤਾਂ ਫ਼ਸਲ ਦੇ ਝਾੜ ਤੇ ਬਹੁਤ ਅਸਰ ਪੈਦਾ ਹੈ ਜਦੋਂ ਇਸ ਦੀਆਂ ਫਲੀਆ ਪੂਰੀ ਤਰਾਂ ਪੱਕ ਜਾਣ ਅਤੇ ਰੰਗ ਪੀਲਾ ਹੋ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਇਸ ਦੀ ਕਟਾਈ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਪੱਤੇ ਪੀਲੇ ਪੈਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਡਿੱਗਣੇ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਕਿਸਮ ਦੇ ਆਧਾਰ ਤੇ ਇਸ ਦੀਆ ਫਲੀਆਂ 7-12 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਕਟਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀਆ ਹਨ ਇਹ ਫਸਲ 120-130 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਕਟਾਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਕਟਾਈ ਸਮੇਂ ਤੇ ਕਰੋ ਕੱਟੀ ਹੋਈ ਫਸਲ 3-4 ਦਿਨਾਂ ਲਈ ਧੁੱਪ ਵਿੱਚ ਰੱਖੋ ਚੰਗੀ ਤਰਾਂ ਸੁੱਕਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਬਲਦਾਂ ਜਾਂ ਸੋਟੀਆਂ ਦੀ ਮਦਦ ਨਾਲ ਛਟਾਈ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ
Posted by Abhishek Sharma
Uttar Pradesh
03-03-2020 08:04 AM
Maharashtra
03-03-2020 03:16 PM
श्रीमान जी, अच्छे जल निकास वाली दोमट मिट्टी गुलदाउदी की खेती के लिए अच्छी होती है इसकी खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6-7 अच्छी रहती है गुलदाउदी की खेती के लिए अच्छी तरह से तैयार ज़मीन की आवश्यकता होती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की हैरो से 2-3 बार जोताई करना आवश्यक होता है आखिरी जोताई के समय रूड़ी की खाद 8-10 टन प्र.... (Read More)
श्रीमान जी, अच्छे जल निकास वाली दोमट मिट्टी गुलदाउदी की खेती के लिए अच्छी होती है इसकी खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6-7 अच्छी रहती है गुलदाउदी की खेती के लिए अच्छी तरह से तैयार ज़मीन की आवश्यकता होती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की हैरो से 2-3 बार जोताई करना आवश्यक होता है आखिरी जोताई के समय रूड़ी की खाद 8-10 टन प्रति एकड़ में डालें गांठों की रोपाई फरवरी - मार्च के महीने में की जाती है और पौधे की अंतिम टहनियों की रोपाई जून-जुलाई के महीने में की जाती है कतार से कतार और पौधे से पौधे में 30 x 30 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीजों को पॉलीथीन के लिफाफों में 1-2 सैं.मी. की गहराई में बोयें बिजाई के लिए प्रजनन विधि प्रयोग किया जाता है गुलदाउदी का प्रजनन मुख्य रूप से जड़ों द्वारा या अंतिम तने की कटिंग द्वारा किया जाता है अंतिम तने की कटिंग विधि में, सेहतमंद पौधे के 4-5 सैं.मी. ऊपरी भाग की कटाई मध्य अप्रैल से जून के अंत तक की जाती है जड़ों की कटाई के बाद उन्हें सीरेसन 0.2 % या कप्तान 0.2 % से उपचार किया जाता है गांठों में तने को ज़मीन से थोड़ा ऊपर काटें, इससे एक नया भाग विकसित होगा जड़ के भाग को मुख्य पौधे से अलग कर लिया जाता है और उसके बाद तैयार बैडों में बोया जाता है रोपाई के लिए 45,000 पौधे प्रति एकड़ के घनत्व का प्रयोग करें पौधों को मिट्टी से पैदा हाने वाली उखेड़ा रोग से बचाव के लिए सीरेसन 0.2 % या कप्तान 0.2 % से काटे हुए भागों का उपचार करें आखिरी जोताई के समय यूरिया 160 किलो, सिंगल सुपर फासफेट 500 किलो और म्यूरेट ऑफ पोटाश 133 किलो प्रति एकड़ में डालें पौधे की अच्छी वृद्धि और खेत को नदीन मुक्त करने के लिए 2-3 हाथ से गोडाई की आवश्यकता होती है रोपाई के 4 सप्ताह बाद पहली गोडाई करें सिंचाई की आवृत्ति विकास स्तर, मौसम और मिट्टी के हालातों पर निर्भर करती है गुलदाउदी की फसल को उचित निकास वाली मिट्टी की आवश्यकता होती है सिंचाई पहले महीने में सप्ताह में दो बार करें और फिर सप्ताह के अंतराल पर लगातार सिंचाई दें
Posted by Amarbir singh
Punjab
03-03-2020 08:01 AM
Punjab
03-03-2020 03:59 PM
amarbir ji tuc isde uper imidacloprid@80ml nu prati acre de hisab nal spray karo.dhanwad
Posted by manesh
Uttar Pradesh
03-03-2020 07:59 AM
Maharashtra
03-03-2020 03:15 PM
गेंदे की खेती करना चाहते है से मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है पर यह अच्छे जल निकास वाली उपजाऊ मिट्टी में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है मिट्टी अच्छे निकास वाली होनी चाहिए क्योंकि यह फसल जल जमाव वाली मिट्टी में स्थिर नहीं रह सकती मिट्टी की pH 6.5 से 7.5 होनी चाहिए तेजाबी और खारी मिट्टी इसकी खेती के ल.... (Read More)
गेंदे की खेती करना चाहते है से मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है पर यह अच्छे जल निकास वाली उपजाऊ मिट्टी में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है मिट्टी अच्छे निकास वाली होनी चाहिए क्योंकि यह फसल जल जमाव वाली मिट्टी में स्थिर नहीं रह सकती मिट्टी की pH 6.5 से 7.5 होनी चाहिए तेजाबी और खारी मिट्टी इसकी खेती के लिए अनुकूल नहीं है फ्रैंच गेंदे की किस्म हल्की मिट्टी में अच्छी वृद्धि करती है जबकि अफ्रीकी गेंदे की किस्म उच्च जैविक खाद वाली मिट्टी में अच्छी वृद्धि करती है प्रसिद्ध किस्में :- African Marigold: इस किस्म की फसल 90 सैं.मी. तक लम्बी होती है इसके फूल बड़े आकार के और लैमन, पीले, सुनहरे, संतरी और गहरे पीले रंग के होते हैं यह लम्बे समय की किस्म है इसकी अन्य किस्में जैसे Giant Double African Orange, Crown of Gold, Giant Double African Yellow, Chrysanthemum Charm, Golden Age, Cracker Jack आदि हैं French Marigold: यह छोटे कद की जल्दी पकने वाली किस्में हैं इसके फूल छोटे आकार के और पीले, संतरी, सुनहरे पीले, लाल जंग और महोगनी रंग के होते हैं इसकी अन्य किस्में जैसे Rusty Red, Butter Scotch, Red Borcade, Star of India, Lemon drop आदि हैं Pusa Basanti Gainda: यह लम्बे समय की किस्म है इसका पौधा 58.80 सैं.मी. लम्बा और गहरे हरे रंग के पत्ते होते हैं इसके फूल सल्फर पीले, दोहरे और कारनेशन किस्म के होते हैं Pusa Narangi Gainda: फूल निकलने के लिए 125-136 दिनों की आवश्यकता होती है इसका पौधा लम्बा और कद में 73.30 सैं.मी. का होता है और पत्ते गहरे हरे रंग के होते हैं इसके फूल संतरी रंग के और कारनेशन किस्म के होते हैं फूल घने और दोहरी परत वाले होते हैं इसके ताजे फूलों की पैदावार 140 क्विंटल प्रति एकड़ होती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ाने के लिए आखिरी जोताई के समय 250 क्विंटल रूड़ी की खाद और अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर मिट्टी में मिलायें गेंदे की बिजाई एक वर्ष में कभी भी की जा सकती है बारिश के मौसम में इसकी बिजाई मध्य जून से मध्य जुलाई में करें सर्दियों में इसकी बिजाई मध्य सितंबर से मध्य अक्तूबर में पूरी कर लें नर्सरी बैड 3x1 मीटर आकार के तैयार करें गाय का गला हुआ गोबर मिलायें बैडों में नमी बनाए रखने के लिए पानी दें सूखे फूलों का चूरा करें और उनका कतार या बैड पर छिड़काव करें जब पौधों का कद 10-15 सैं.मी. हो जाये, तब वे रोपाई के लिए तैयार होते हैं फैंच किस्म को 35x35 सैं.मी. और अफ्रीकी किस्म को 45x45 सैं.मी. के फासले पर रोपाई करें नर्सरी बैड पर बीजों का छिड़काव करें बिजाई के लिए पनीरी ढंग का प्रयोग किया जाता है एक एकड़ खेत के लिए 600 से 800 ग्राम बीजों की आवश्यकता होती है जब फसल 30-45 दिन की हो जाए, तब पौधे के सिरे से उसे काट दें इससे पौधे को झाड़ीदार और घना होने में मदद मिलती है, इससे फूलों की गुणवत्ता और अच्छा आकार भी प्राप्त होता है बिजाई से पहले बीजों को एजोसपीरियम 200 ग्राम को 50 मि.ली. धान के चूरे में मिलाकर उपचार करें शुरूआती खुराक के तौर पर अच्छी वृद्धि के लिए नाइट्रोजन 32 किलो (यूरिया 70 किलो), फासफोरस 16 किलो (एस एस पी 100 किलो), पोटाश 32 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 53 किलो) प्रति एकड़ में डालें मिट्टी की किस्म के अनुसार खाद की खुराक बदल दें सही खुराक देने के लिए मिट्टी की जांच करवायें और उसके आधार पर खुराक दें नदीनों की संख्या के आधार पर गोडाई करें खेत में रोपाई के बाद तुरंत सिंचाई करें कली बनने से लेकर कटाई तक की अवस्था सिंचाई के लिए बहुत महत्तवपूर्ण होती है अप्रैल से जून के महीने में 4-5 दिनों के अंतराल पर लगातार सिंचाई करना आवश्यक होता है किस्म के आधार पर गेंदा 2 से 2.5 महीने में कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं फ्रैंच गेंदे की किस्म 1.5 महीने में कटाई के लिए तैयार हो जाती है जबकि अफ्रीकी गेंदे की किस्म दो महीने में तैयार हो जाती है जब गेंदे का पूरा आकार विकसित हो जाये तब उसे तोड़ लें कटाई सुबह के समय और शाम के समय करें फूलों की तुड़ाई से पहले खेत को सिंचित करना चाहिए इससे फूलों की गुणवत्ता लंबे समय तक बनी रहती है इसे आप अपनी नजदीकी फूल मंडी में बेच कर इसे अपनी आय का साधन बना सकते है
Posted by gurbej Singh
Punjab
03-03-2020 07:54 AM
Punjab
03-03-2020 05:15 PM
gurbhej ji eh fungus hai isde layi tuc carbendazim@4 gram nu prati litre pani de hisab nal spray karo.dhanwad
Posted by gurpreet
Punjab
03-03-2020 07:49 AM
Punjab
03-03-2020 06:24 PM
Gurpreet ji tuci uss nu powder ate golia 21 din tak hor dinde rho, jekar heat vich naa awwe fir tuci dubara swal push skde ho..
Posted by Jagmeet Dhillon
Haryana
03-03-2020 07:38 AM
Maharashtra
03-03-2020 01:57 PM
श्री मान खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते ह.... (Read More)
श्री मान खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुमब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तहय उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तहय में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तहय लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है
Posted by Jagmeet Dhillon
Haryana
03-03-2020 07:37 AM
Maharashtra
03-03-2020 01:37 PM
Jagmeet ji, ap isme planofix @ 4 ml ko 15 litre pani mein mila kar spray karein, isse yeh tutne band ho jaye ge, dhanywad
Posted by yogesh Kumar
Haryana
03-03-2020 07:24 AM
Punjab
03-03-2020 06:25 PM
छोटे बच्चों को 5 दिन के होने पर lasota vaccination करवायें ​फिर 12 दिन के होने पर Gamboro , 26 दिन के होने पर फिर gamboro और 28—29 दिन के होने पर फिर lasota से वैक्सीनेशन करवायें इस तरह आप शुरू से वैक्सीनेशन करवा सकते हैं..
Posted by Rohit vishwakarma
Uttar Pradesh
03-03-2020 07:03 AM
Maharashtra
03-03-2020 12:53 PM
रोहित जी, झूम कृषि (slash and burn farming) एक आदिम प्रकार की खेती है जिसमें पहले वृक्षों तथा वनस्पतियों को काटकर उन्हें जला दिया जाता है इस तरह की खेती मे फसल पूर्णतः प्रकृति पर निर्भर होती है और उत्पादन बहुत कम हो पाता है कुछ वर्षों तक (प्रायः दो या तीन वर्ष तक) जब तक मिट्टी में उर्वरता विद्यमान रहती है इस भूमि पर खेती की .... (Read More)
रोहित जी, झूम कृषि (slash and burn farming) एक आदिम प्रकार की खेती है जिसमें पहले वृक्षों तथा वनस्पतियों को काटकर उन्हें जला दिया जाता है इस तरह की खेती मे फसल पूर्णतः प्रकृति पर निर्भर होती है और उत्पादन बहुत कम हो पाता है कुछ वर्षों तक (प्रायः दो या तीन वर्ष तक) जब तक मिट्टी में उर्वरता विद्यमान रहती है इस भूमि पर खेती की जाती है इसके पश्चात् इस भूमि को छोड़ दिया जाता है जिस पर पुनः पेड़-पौधें उग आते हैं धन्यवाद
Posted by ramg
Uttar Pradesh
03-03-2020 06:56 AM
Punjab
03-03-2020 12:45 PM
श्रीमान जी, कृपया आप कीट की फोटो भेजें ताकि आपको देख कर इसके बारे में जानकारी दी जा सके, धन्यवाद
Posted by Sukhjinder Singh
Punjab
03-03-2020 06:51 AM
Punjab
03-03-2020 11:03 AM
ਸੁਖਜਿੰਦਰ ਜੀ, ਮੱਕੀ j 1006 ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 165 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸਦਾ ਬੀਜ ਤੁਸੀਂ ਆਪਣੇ ਨਜਦੀਕੀ KVK ਤੋਂ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਹ 45 ਤੋਂ 50 ਦਿਨ ਦੇ ਅੰਦਰ ਪਹਿਲੀ ਕਟਾਈ ਦੇ ਦੇਂਦੀ ਹੈ ਬਿਜਾਈ ਮਾਰਚ ਦੇ ਪਹਿਲੇ ਹਫ਼ਤੇ ਤੋਂ ਲੈ ਕੇ ਅੱਧ ਸਤੰਬਰ ਤੱਕ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by jasvinder Garg
Punjab
03-03-2020 06:41 AM
Punjab
03-03-2020 05:45 PM
यदि आप पोल्ट्री फार्मिंग करना चाहते है तो आप इस काम को ट्रेनिंग लेकर शुरू करें जिससे आपको इस काम की पूरी जानकारी मिलेगी,इसके इलावा आप मुर्गी पालन करने वाले किसान के फार्म पर इस काम को देखे जिससे आपको इस काम का अंदाजा हो जाएगा बाकि शेड मुख्य सड़क से 100 मीटर की दूरी पर होना चाहिए और वहां ताजे और साफ पानी की सप्ल.... (Read More)
यदि आप पोल्ट्री फार्मिंग करना चाहते है तो आप इस काम को ट्रेनिंग लेकर शुरू करें जिससे आपको इस काम की पूरी जानकारी मिलेगी,इसके इलावा आप मुर्गी पालन करने वाले किसान के फार्म पर इस काम को देखे जिससे आपको इस काम का अंदाजा हो जाएगा बाकि शेड मुख्य सड़क से 100 मीटर की दूरी पर होना चाहिए और वहां ताजे और साफ पानी की सप्लाई 24 घंटे होनी चाहिए और अंडे देनी वाली मुर्गी को 0.14—0.19 वर्गमीटर जगह प्रति मुर्गी चाहिए पिंजरा सिस्टम में 0.8 से 1 वर्ग फीट और लकड़ी की पतली फट्टियों के फर्श के लिए 1 से 1.3 वर्ग फीट प्रति पंक्षी के हिसाब से जगह चाहिए
Posted by jasvinder Garg
Punjab
03-03-2020 06:33 AM
Punjab
03-03-2020 05:45 PM
यदि आप पोल्ट्री फार्मिंग करना चाहते है तो आप इस काम को ट्रेनिंग लेकर शुरू करें जिससे आपको इस काम की पूरी जानकारी मिलेगी,इसके इलावा आप मुर्गी पालन करने वाले किसान के फार्म पर इस काम को देखे जिससे आपको इस काम का अंदाजा हो जाएगा बाकि शेड मुख्य सड़क से 100 मीटर की दूरी पर होना चाहिए और वहां ताजे और साफ पानी की सप्ल.... (Read More)
यदि आप पोल्ट्री फार्मिंग करना चाहते है तो आप इस काम को ट्रेनिंग लेकर शुरू करें जिससे आपको इस काम की पूरी जानकारी मिलेगी,इसके इलावा आप मुर्गी पालन करने वाले किसान के फार्म पर इस काम को देखे जिससे आपको इस काम का अंदाजा हो जाएगा बाकि शेड मुख्य सड़क से 100 मीटर की दूरी पर होना चाहिए और वहां ताजे और साफ पानी की सप्लाई 24 घंटे होनी चाहिए और अंडे देनी वाली मुर्गी को 0.14—0.19 वर्गमीटर जगह प्रति मुर्गी चाहिए पिंजरा सिस्टम में 0.8 से 1 वर्ग फीट और लकड़ी की पतली फट्टियों के फर्श के लिए 1 से 1.3 वर्ग फीट प्रति पंक्षी के हिसाब से जगह चाहिए
Posted by Sandeep Patel
Uttar Pradesh
03-03-2020 06:25 AM
Maharashtra
03-03-2020 10:35 AM
संदीप जी, अगेती किस्मों के लिए, जून के दूसरे सप्ताह से जुलाई के पहले सप्ताह तक का समय उपयुक्त होता है धन्यवाद
Posted by Surya prakash,B
Andhra Pradesh
03-03-2020 05:39 AM

Punjab
03-03-2020 05:51 AM
Sir you can spray Vesticor@40 ml per acre in 120 ltr of water.....
Posted by Arvind Kumar Kushwaha
Uttar Pradesh
03-03-2020 05:30 AM
Punjab
03-03-2020 05:52 AM
Shri maan g peele patton ki roktham ke liye aap M-45@500 gm per acre spray kr skte ho....
Posted by ਪਿ੍ਤਪਾਲ ਸਿੰਘ
Punjab
03-03-2020 05:25 AM
Punjab
03-03-2020 05:38 PM
ਤੁਸੀ ਓਹਨਾ ਨੂੰ Dozliv liquid 50ml ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ ਅਤੇ Halotas 2-2 ਗੋਲੀਆਂ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ
Posted by Diganta Dehingia
Assam
03-03-2020 01:33 AM
Punjab
03-03-2020 05:37 PM
cow cross hone ke badd byane ke liye lagbhag 9 month 9 din leti hai, isme se kush din pehle ja badd mai v bacha de skti hai isme koi smasia wali batt nahi hai.
Posted by Jagseer
Punjab
03-03-2020 01:04 AM
Punjab
03-03-2020 05:35 PM
ਜੇਕਰ ਤੁਸੀਂ ਘਰ ਵਿੱਚ ਹੀ ਬੱਕਰੀਆਂ ਲਈ ਸੰਤੁਲਿਤ ਖੁਰਾਕ ਤਿਆਰ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਇਹ ਤਰੀਕਾ ਨੋਟ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਫੀਡ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਸਮੱਗਰੀ : • 1 ਕਿਲੋ ਮਿਨਰਲ ਮਿਕਸਚਰ, • 2 ਕਿਲੋ ਨਮਕ, • ਮਿੱਠਾ ਸੋਡਾ 1 ਕਿਲੋ, • ਮੱਕੀ 30 ਕਿਲੋ, • ਕਣਕ 25 ਕਿਲੋ • ਸੋਇਆ doc 10 ਕਿਲੋ • ਸਰੋਂ ਖਲ 10 ਕਿਲੋ • ਚੌਲਾਂ ਦੀ doc 21 ਕਿਲੋ ਇਹਨਾਂ ਸਭ ਚੀਜ਼ਾਂ ਨੂੰ ਮਿਕਸ ਕਰਕੇ ਫੀਡ ਤਿਆਰ ਕਰ ਲਓ ਇਹ ਫੀਡ ਤੁਸੀਂ ਬੱਕਰੀ ਦੇ ਵਜ਼.... (Read More)
ਜੇਕਰ ਤੁਸੀਂ ਘਰ ਵਿੱਚ ਹੀ ਬੱਕਰੀਆਂ ਲਈ ਸੰਤੁਲਿਤ ਖੁਰਾਕ ਤਿਆਰ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਇਹ ਤਰੀਕਾ ਨੋਟ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਫੀਡ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਸਮੱਗਰੀ : • 1 ਕਿਲੋ ਮਿਨਰਲ ਮਿਕਸਚਰ, • 2 ਕਿਲੋ ਨਮਕ, • ਮਿੱਠਾ ਸੋਡਾ 1 ਕਿਲੋ, • ਮੱਕੀ 30 ਕਿਲੋ, • ਕਣਕ 25 ਕਿਲੋ • ਸੋਇਆ doc 10 ਕਿਲੋ • ਸਰੋਂ ਖਲ 10 ਕਿਲੋ • ਚੌਲਾਂ ਦੀ doc 21 ਕਿਲੋ ਇਹਨਾਂ ਸਭ ਚੀਜ਼ਾਂ ਨੂੰ ਮਿਕਸ ਕਰਕੇ ਫੀਡ ਤਿਆਰ ਕਰ ਲਓ ਇਹ ਫੀਡ ਤੁਸੀਂ ਬੱਕਰੀ ਦੇ ਵਜ਼ਨ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਪਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਬੱਕਰੀ ਦੇ ਵਜ਼ਨ ਦੀ 5% ਫੀਡ ਪਾਉਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਜਾਂ ਫਿਰ ਸੱਜਰੀ ਸੂਈ ਬੱਕਰੀ ਨੂੰ 300-400 ਗ੍ਰਾਮ ਤੱਕ ਫੀਡ ਪਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੇਕਰ ਛੋਟੇ ਬੱਚੇ ਹਨ ਜਾਂ ਫਿਰ ਫੰਡਰ ਬੱਕਰੀ ਹੈ ਉਸ ਨੂੰ ਘੱਟ ਫੀਡ ਪਾਉਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ..
Posted by Imran hussain
Assam
03-03-2020 12:34 AM

Maharashtra
03-03-2020 10:21 AM
Posted by ਸਰਬਜੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
02-03-2020 10:45 PM
Punjab
03-03-2020 10:14 AM
sarbjeet ji kirpa karke daso ke mitti vich gill kini k hai ta jo tuhanu osde hisab nal jankari diti ja sake.dhanwad
Posted by Gujral Singh
Punjab
02-03-2020 10:02 PM
Punjab
03-02-2020 10:38 PM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਹਲਦੀ ਦੀ ਸਫਲ ਕਾਸ਼ਤ ਲਈ ਕੁਝ ਜ਼ਰੂਰੀ ਨੁਕਤੇ ਪੰਜਾਬ ਦਾ ਖੇਤੀ ਅਰਥਚਾਰਾ ਮੁੱਖ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਝੋਨੇ ਅਤੇ ਕਣਕ ਦੀ ਫ਼ਸਲ ‘ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦਾ ਹੈ ਪ੍ਰੰਤੂ ਝੋਨੇ ਅਤੇ ਕਣਕ ਦੇ ਫ਼ਸਲੀ ਚੱਕਰ ਨੂੰ ਲਗਾਤਾਰ ਅਪਣਾਉਣ ਕਰਕੇ ਬਹੁਤ ਸਾਰੀਆਂ ਸਮੱਸਿਆਵਾਂ ਆ ਰਹੀਆਂ ਹਨ ਅਤੇ ਝੋਨੇ ਅਤੇ ਕਣਕ ਤੋਂ ਮੁਨਾਫ਼ਾ ਵੀ ਘਟ ਰਿਹਾ ਹੈ ਇਸ ਲਈ ਲੋੜ ਹੈ ਫ਼ਸਲੀ ਵਿਭਿੰਨਤਾ ਨੂੰ ਅਪਣਾੳਂੁਦੇ ਹੋਏ ਹੋਰ ਫ਼ਸਲਾਂ ਵੱਲ ਵੀ.... (Read More)
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਹਲਦੀ ਦੀ ਸਫਲ ਕਾਸ਼ਤ ਲਈ ਕੁਝ ਜ਼ਰੂਰੀ ਨੁਕਤੇ ਪੰਜਾਬ ਦਾ ਖੇਤੀ ਅਰਥਚਾਰਾ ਮੁੱਖ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਝੋਨੇ ਅਤੇ ਕਣਕ ਦੀ ਫ਼ਸਲ ‘ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦਾ ਹੈ ਪ੍ਰੰਤੂ ਝੋਨੇ ਅਤੇ ਕਣਕ ਦੇ ਫ਼ਸਲੀ ਚੱਕਰ ਨੂੰ ਲਗਾਤਾਰ ਅਪਣਾਉਣ ਕਰਕੇ ਬਹੁਤ ਸਾਰੀਆਂ ਸਮੱਸਿਆਵਾਂ ਆ ਰਹੀਆਂ ਹਨ ਅਤੇ ਝੋਨੇ ਅਤੇ ਕਣਕ ਤੋਂ ਮੁਨਾਫ਼ਾ ਵੀ ਘਟ ਰਿਹਾ ਹੈ ਇਸ ਲਈ ਲੋੜ ਹੈ ਫ਼ਸਲੀ ਵਿਭਿੰਨਤਾ ਨੂੰ ਅਪਣਾੳਂੁਦੇ ਹੋਏ ਹੋਰ ਫ਼ਸਲਾਂ ਵੱਲ ਵੀ ਧਿਆਨ ਦਿੱਤਾ ਜਾਵੇ ਹਲਦੀ ਫ਼ਸਲੀ ਵਿਭਿੰਨਤਾ ਵਿਚ ਚੰਗਾ ਯੋਗਦਾਨ ਪਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਹਲਦੀ ਦੀ ਖੇਤੀ ਨਾਲ ਨਾ ਕੇਵਲ ਸਾਡੀ ਆਪਣੀ ਲੋੜ ਪੂਰੀ ਹੋਵੇਗੀ ਸਗੋਂ ਸਾਡੇ ਪ੍ਰਾਂਤ ਅਤੇ ਦੇਸ਼ ਦੇ ਵਪਾਰ ਵਿਚ ਵੀ ਵਾਧਾ ਹੋਵੇਗਾ ਹਲਦੀ ਦੀ ਕਾਸ਼ਤ ਇਸ ਦੀਆਂ ਗੰਢੀਆਂ ਕਰਕੇ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੀਆਂ ਗੰਢੀਆਂ ਦਾ ਪੀਲਾ ਰੰਗ ਇਸ ਵਿਚਲੇ ਖਾਸ ਤੱਤ ਕਰਕਿਊਮਿਨ (1.8 ਤੋਂ 5.4 ਪ੍ਰਤੀਸ਼ਤ) ਕਰਕੇ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਹਲਦੀ ਦੀਆਂ ਗੰਢੀਆਂ ਵਿਚ ਖ਼ਾਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦਾ ਤੇਲ (2.5 ਤੋਂ 7.2 ਪ੍ਰਤੀਸ਼ਤ) ਵੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਨੂੰ ਟਰਮੇਰੋਲ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਹਲਦੀ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਮੁੱਖ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਰਸੋਈ ਵਿਚ ਮਸਾਲੇ ਦੇ ਤੌਰ ‘ਤੇ, ਭੋਜਨ ਪਦਾਰਥਾਂ ਨੂੰ ਸੁਗੰਧੀ ਅਤੇ ਰੰਗ ਦੇਣ ਵਾਸਤੇ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਇਸ ਦੇ ਖ਼ਾਸ ਗੁਣਾਂ ਕਰਕੇ ਇਸ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਦਵਾਈਆਂ ਅਤੇ ਹਾਰ-ਸ਼ਿੰਗਾਰ ਦੇ ਸਮਾਨ ਵਿਚ ਵੀ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ . ਇਸ ਦੇ ਸਹੀ ਵਾਧੇ ਵਿਕਾਸ ਲਈ ਇਸ ਨੂੰ ਗਰਮ ਅਤੇ ਸਿੱਲ੍ਹੇ ਵਾਤਾਵਰਨ ਦੀ ਜ਼ਰੂਰਤ ਪੈਂਦੀ ਹੈ ਪੰਜਾਬ ਵਿਚ ਇਸ ਦੀ ਕਾਸ਼ਤ ਸਾਰੇ ਸੇੇਂਜੂ ਇਲਾਕੇ ਵਿਚ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਜ਼ਿਆਦਾ ਜੈਵਿਕ ਮਾਦੇ ਵਾਲੀਆਂ ਦਰਮਿਆਨੀਆਂ ਤੋਂ ਭਾਰੀਆਂ ਜ਼ਮੀਨਾਂ ਇਸ ਦੀ ਕਾਸ਼ਤ ਲਈ ਜ਼ਿਆਦਾ ਢੁਕਵੀਆਂ ਹਨ ਹਲਦੀ ਦੀ ਫ਼ਸਲ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਪਛੇਤੀ ਕਣਕ ਜਾਂ ਪਿਆਜ਼ ਲਗਾਏ ਜਾ ਸਕਦੇ ਹਨ ਹੇਠ ਲਿਖੀਆਂ ਤਕਨੀਕੀ ਗੱਲਾਂ ਵੱਲ ਧਿਆਨ ਦੇ ਕੇ ਹਲਦੀ ਤੋਂ ਵਧੇਰੇ ਝਾੜ ਲਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਉੱਨਤ ਕਿਸਮਾਂ : ਫ਼ਸਲ ਦੇ ਵਧੇਰੇ ਝਾੜ ਲਈ ਕੇਵਲ ਸਿਫ਼ਾਰਸ਼ ਕੀਤੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਦੀ ਹੀ ਕਾਸ਼ਤ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਪੰਜਾਬ ਵਿਚ ਹਲਦੀ ਦੀ ਕਾਸ਼ਤ ਲਈ ਦੋ ਕਿਸਮਾਂ ਦੀ ਸਿਫ਼ਾਰਸ਼ ਕੀਤੀ ਗਈ ਹੈ ਜਿਨਾਂ ਦਾ ਵੇਰਵਾ ਹੇਠ ਲਿਖੇ ਅਨੁਸਾਰ ਹੈ : ਪੰਜਾਬ ਹਲਦੀ 1: ਹਲਦੀ ਦੀ ਇਸ ਕਿਸਮ ਦੇ ਬੂਟੇ ਦਰਮਿਆਨੀ ਉਚਾਈ ਦੇ ਅਤੇ ਸਿੱਧੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸ ਕਿਸਮ ਦੇ ਬੂਟਿਆਂ ਦੇ ਪੱਤੇ ਹਰੇ, ਦਰਮਿਆਨੇ ਚੌੜੇ ਅਤੇ ਥੋੜ੍ਹੇ ਲੰਬੇ ਆਕਾਰ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸ ਦੀਆਂ ਗੰਢੀਆਂ ਦੇ ਉੱਪਰਲੇ ਛਿਲਕੇ ਦਾ ਰੰਗ ਭੂਰਾ ਜਦੋਂਕਿ ਅੰਦਰਲੇ ਗੁੱਦੇ ਦਾ ਰੰਗ ਗੂੜ੍ਹਾ ਪੀਲਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੱਕਣ ਲਈ ਲੱਗਪਗ 215 ਦਿਨ ਲੈਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤ ਝਾੜ 108 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਪੰਜਾਬ ਹਲਦੀ 2: ਹਲਦੀ ਦੀ ਇਸ ਕਿਸਮ ਦੇ ਬੂਟੇ ਲੰਬੇ ਅਤੇ ਸਿੱਧੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸ ਕਿਸਮ ਦੇ ਬੂਟਿਆਂ ਦੇ ਪੱਤੇ ਹਲਕੇ ਹਰੇ ਅਤੇ ਜ਼ਿਆਦਾ ਚੌੜੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸ ਦੀਆਂ ਗੰਢੀਆਂ ਮੋਟੀਆਂ ਅਤੇ ਲੰਬੀਆਂ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਗੰਢੀਆਂ ਦੇ ਉੱਪਰਲੇ ਛਿਲਕੇ ਦਾ ਰੰਗ ਭੂਰਾ ਅਤੇ ਅੰਦਰਲੇ ਗੁੱਦੇ ਦਾ ਰੰਗ ਪੀਲਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੱਕਣ ਲਈ ਲੱਗਪਗ 240 ਦਿਨ ਲੈਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤ ਝਾੜ 122 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਖੇਤ ਦੀ ਤਿਆਰੀ: ਹਲਦੀ ਇਸ ਦੀਆਂ ਗੰਢੀਆਂ (ਜ਼ਮੀਨੀ ਤਣੇ) ਲਈ ਉਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਗੰਢੀਆਂ ਦੇ ਸਹੀ ਵਾਧੇ- ਵਿਕਾਸ ਲਈ ਜ਼ਮੀਨ ਦਾ ਨਰਮ ਹੋਣਾ ਬਹੁਤ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ ਇਸ ਲਈ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਖੇਤ ਨੂੰ ਦੋ-ਤਿੰਨ ਵਾਰ ਵਾਹ ਕੇ ਅਤੇ ਸੁਹਾਗਾ ਮਾਰ ਕੇ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਤਿਆਰ ਕਰ ਲੈਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਖੇਤ ਦੀ ਤਿਆਰੀ ਸਮੇਂ ਜੇਕਰ ਪਿਛਲੀ ਫ਼ਸਲ ਦੇ ਮੁੱਢ ਅਤੇ ਹੋਰ ਘਾਹ-ਫੂਸ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਖੇਤ ਦੀ ਤਿਆਰੀ ਸਮੇਂ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਕੱਢ ਦੇਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਬੀਜ ਦੀ ਮਾਤਰਾ: ਹਲਦੀ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਗੰਢੀਆਂ ਰਾਹੀ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਵਰਤੀਆਂ ਜਾਣ ਵਾਲੀਆਂ ਗੰਢੀਆਂ ਤਾਜ਼ੀਆਂ ਅਤੇ ਰੋਗ ਰਹਿਤ ਹੋਣੀਆਂ ਚਾਹੀਦੀਆਂ ਹਨ ਇਕ ਏਕੜ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਵਾਸਤੇ 6 ਤੋਂ 8 ਕੁਇੰਟਲ ਤਾਜ਼ੀਆਂ ਗੰਢੀਆਂ ਦੀ ਜ਼ਰੂਰਤ ਪੈਂਦੀ ਹੈ ਜੇਕਰ ਘਰੇਲੂ ਪੱਧਰ ‘ਤੇ ਛੋਟੇ ਪੈਮਾਨੇ ‘ਤੇ ਹਲਦੀ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰਨੀ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਇਕ ਮਰਲਾ (25 ਵਰਗ ਮੀਟਰ) ਰਕਬੇ ਲਈ 4-5 ਕਿਲੋਗ੍ਰਾਮ ਗੰਢੀਆਂ ਕਾਫ਼ੀ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਬਿਜਾਈ ਦਾ ਢੰਗ : ਹਲਦੀ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਤਾਜ਼ੀਆਂ ਅਤੇ ਨਿਰੋਗ ਗੰਢੀਆਂ ਦੀ ਚੋਣ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਹਲਦੀ ਦੀ ਬਿਜਾਈ 1 ਫੁੱਟ (30 ਸੈਂਟੀਮੀਟਰ) ਦੀ ਵਿੱਥ ‘ਤੇ ਲਾਈਨਾਂ ਵਿਚ ਗੰਢੀ ਤੋਂ ਗੰਢੀ ਦਾ ਫ਼ਾਸਲਾ 8 ਇੰਚ (20 ਸੈਂਟੀਮੀਟਰ) ਰੱਖ ਕੇ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਖੇਤ ਵਿਚ 25-36 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਝੋਨੇ ਦੀ ਪਰਾਲੀ ਪਾ ਦੇਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਪਰਾਲੀ ਪਾਉਣ ਨਾਲ ਗੰਢੀਆਂ ਜਲਦੀ ਹਰੀਆਂ ਹੋ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ ਗੰਢੀਆਂ ਦੇ ਹਰੇ ਹੋਣ ਤੱਕ ਖੇਤ ਨੂੰ ਗਿੱਲੀ ਵੱਤਰ ਵਿਚ ਰੱਖਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਬੀਜ ਦੀ ਕੀਮਤ 3000ਤੋਂ 3500 ਰੁਪਏ ਪ੍ਰਤੀ ਕੁਇੰਟਲ ਹੈ ਕੁੱਲ ਖਰਚਾ 35 ਤੋ 40 ਹਜਾਰਾਂ ਆਉਂਦਾ ਹੈ ਜਿਆਦਾ ਖਰਚਾ ਬੀਜ ਅਤੇ ਲੇਵਰ ਤੇ ਆਉਂਦਾ ਹੈ।
Posted by lovedeep
Haryana
02-03-2020 09:51 PM

Punjab
03-03-2020 01:38 PM
lovedeep ji aap ise november - december mahine men bijai kar sakte hai.dhanywad
Posted by MD janesar Akhtar
Bihar
02-03-2020 09:48 PM
Punjab
03-03-2020 02:23 PM
उसे आप Amoxirum injection 4.5gm, CRB(ascrobic acid) injection 20ml, Vitum-H injection 5ml, Isoflud injection 5ml लगातार 3 दिन लगवाएं इससे फर्क पड़ जाएगा और mamidium पाउडर 50 ग्राम रोजाना दे सकते है
Posted by lovedeep
Haryana
02-03-2020 09:38 PM

Punjab
03-03-2020 01:39 PM
lovedeep ji aap agli bar iski bijai november -december mahine men kar sakte hai.dhanywad
Posted by vikram singh
Punjab
02-03-2020 09:32 PM
Punjab
03-03-2020 02:25 PM
Vikram ji ehh dono Hf cross nasal dia hai ehh dono he vdia hai, ehna vicho jisdi maa da milk record jyada howega ehna da milk v uss hisab nal howega, baki tuhadi khurak, sahi dekhbhal ate purri trah tyar hoon ke vdia semen bhrwaun te nirbhar krda hai.
Posted by vikram singh
Punjab
02-03-2020 09:30 PM
Punjab
03-03-2020 02:25 PM
Vikram ji ehh dono Hf cross nasal dia hai ehh dono he vdia hai, ehna vicho jisdi maa da milk record jyada howega ehna da milk v uss hisab nal howega, baki tuhadi khurak, sahi dekhbhal ate purri trah tyar hoon ke vdia semen bhrwaun te nirbhar krda hai.
Posted by sakir Khan
Haryana
02-03-2020 09:28 PM
Punjab
03-03-2020 02:27 PM
सकीर जी कृप्या आप यह बताएं कि आप कौनसा काम शुरू करना चाहते है और आपने कितनी पढ़ाई की हुई है और ज़मीन कितनी है ताकि आपको उस काम के बारे में पूरी जानकारी दी जा सके और उसमें मिलने वाली सुविधाओं के बारे में बताया जा सके
Posted by Sunil Baghel
Chattisgarh
02-03-2020 09:24 PM

Punjab
03-03-2020 03:04 PM
वैनिला की खेती विभिन्न प्रकार की मृदा जिसमें प्राकृतिक खाद का समावेश तथा जल निकासी जैसी अनुकूल परिस्थितियों में कर सकते हैं पौधे के लिए चिकनी मिट्टी तथा पानी का जमावड़ा उपयुक्त नहीं है यह आर्द्र उष्णकटिबंधीय जलवायु में जहाँ वार्षिक वर्षा 200-300 से.मी. तथा समुद्री तट से 1500 मी. उचाई उसकी खेती के लिए आदर्श माने .... (Read More)
वैनिला की खेती विभिन्न प्रकार की मृदा जिसमें प्राकृतिक खाद का समावेश तथा जल निकासी जैसी अनुकूल परिस्थितियों में कर सकते हैं पौधे के लिए चिकनी मिट्टी तथा पानी का जमावड़ा उपयुक्त नहीं है यह आर्द्र उष्णकटिबंधीय जलवायु में जहाँ वार्षिक वर्षा 200-300 से.मी. तथा समुद्री तट से 1500 मी. उचाई उसकी खेती के लिए आदर्श माने जाते हैं गरम आर्द्र जलवायु के साथ साथ 21-320 c तापमान इसकी पैदावार के लिए अति उत्तम है वर्ष के 9 महीने वर्षा तथा पुष्पण के लिए 3 महीने शुष्क वातावरण होना चाहिए भारत में केरल, करनाटक, तमिलनाडु, उत्तर पूर्वी क्षेत था अंडमान निलोबार द्वीपसमूह इसकी खेती के लिए उपयुक्त स्थान है वैनिला की खेती किसी नए स्थान पर करते है तब उस भूमि पर लगे पेड़ो और झाड़ियो को काट कर भूमि को अच्छी तरह साफ़ कर लेते है इसकी खेती खुले क्षेत्र में भी कर सकते है परन्तु इसके पौधे को पर्याप्त छाया प्रदान करना चाहिए भूमि को दो वार जोत कर तत्पश्चात समतल करके तैयार करते है हरी पत्तियों तथा वन मृदा को खेती की मृदा में समावेश करना अति लाभदायक होता है भूमि में एक हल्का ढाल वैनिला की खेती के लिए आदर्श माना जाता है वैनिला की खेती के लिय सामान्यत: तने की कटिंग को रोपण सामग्री के रूप में उपयोग करते है खेतों में सीधे रोपण के लिए 60-120 से.मी. लंबी रोपण सामग्री का चुनाव कर सकतें हैं 60 से.मी.से छोटी कटिंग खेतों में सीधे रोपण के लिए उपयुक्त नहीं है इस प्रकार के कटिंग को रोपण से पूर्व पौधशाला में जडवत तथा उत्पादित करते हैं तने की कटिंग को अच्छी तरह पानी से धोकर 1% बोर्डियों मिश्रण अथवा 0.2%कोपर ओक्सिक्लोराइड में डूबाते है जिससे रोगजनक कवकों की रोकथाम हो जाती है इन उपचारिक रोपण सामग्री को 2-3 दिन के लिए छायादार स्थान पर रखते हैं जिससे इसकी नमी में आंशिक कमी हो जाती है इस कारण पौधे में जडवत को बढ़ावा मिलता है अगर आवश्यकता हो तो कटिंग को 10 दिनों तक पौधशाला में रख सकते है वयस्क वडी कटिंग को रोपण करने से पौधे की अधिक वृद्धि होती है तथा पुष्पण जल्दी प्रारम्भ होता है टिशु कल्चर द्वारा उत्पन्न पौधे को भी रोपण के लिए उपयोग कर सकते है वैनिला को एकल अथवा नारियल तथा छाल के साथ अंत: फसल के रूप में उत्पादित कर सकते है यह सामान्यत: कम उचाई वाली शाखाओ, छाल पेड़ों जैसे गलाइरिसिडिया मैक्यूलेटा फयुसेरिया अल्बा,अरटोर्पस हैटरोफाइलस (कटहल) तथा इरीथ्रिना स्पी. ईत्यादी अथवा निर्जीव सहायकों पर इसकी बेल ऊपर चढ़ने में प्रशिक्षित होती है कुछ स्थानों पर छाली को भी इसके सहायक वृक्ष के रूप में उपयोग करते है इसके लिए सहायक वृक्षों को 1.2-1.5 मी के अन्तराल पर तथा 2.5-3.0 मी.का अन्तराल पंक्तियों में होना चाहिए सहायक वृक्षों को वैनिला की खेती से पहले उगाना चाहिए जिससे सहायक वृक्ष भलभांति जम जाए लगभग 1600-2000 वृक्ष प्रति हेक्टर लगा सकते है वनिला का पौधा जब 1.5-2.0 मी.ऊँचा या उसकी शाखाये चारो ओर से बढ़ने लगे तब उसे सहायक वृक्ष से बांध कर क्षैतिज के समान्तर दिशा में फैलाते है ताकि उसमे सरलता पूर्वक परागण तथा तुडाई हो सके अगर पौधे की वृद्धि ऊपर की तरफ हो रही है तब पुष्प ज्यादा लम्बे समय तक प्रकट नहीं होते है सहायक वृक्षों की समय समय पर काट छांट करते रहना चाहिए ताकि वैनिला की बेल को हलकी छाया मिल सके काटी गयी पत्तियों और शाखाओ को झपनी के उपयोग कर सकते हैं कटनी को यथा संभव सितम्बर – नवम्बर के बिच कम गहरे गढ़डो में रोपण करना चाहिए तत्पश्चात गड्ढों में मिट्टी खाद तथा सड़ी हुई घास भर देना चाहिए तने की कटिंग की दो गांठों को मृदा के उपरो सतह से जमीं के अन्दर रोपण करना चाहिए तथा 2 कटिंग प्रति सहायक रोपण कर सकते हैं रोपण के समय अत्यंत सावधानी बरतना चाहिए तथा यह सुनिश्चित कर ले की कटिंग का अधरिय निचला सिरा मृदा के उपरी सतह से ऊपर है नये रोपित पौधें को पर्याप्त छाया प्रदान करना अत्यंत आवश्यक है रोपण के पश्चात तुरन्त ज्यादा पत्तियों से झपनी कारन चाहिए रोपण के 4-8 सप्ताह बाद कटिंग में अंकुर फूटने लगते है सामान्यत:वैनिला के साथ अन्त: खेती नहीं करना चिहिए परन्तु कभी कभी कटी हुई घासपात इसके लिए लाभदायक होती है मृदा की उपरी सतह का अनुरक्षण करते समय यह सावधानी बरतनी चाहिए की पौधे की जड़ों को कोई बाधा या हानि होना चाहिए पौधे की वृद्धि तथा उपज बढ़ाने के लिए ग्रीष्मकाल में झापनी के साथ साथ निरंतर सिंचाई करना चाहिए मृदा के उपजाऊपन के आधार पर उर्वरकों की मात्रा निर्भर करती है सामान्य स्थिति में 40-60 ग्राम नाइट्रोजन, 20-30 ग्राम p2o5 तथा 60 - 100 ग्राम k2o प्रति बेल डालना चाहिए इसके अतिरिक्त जैविक खाद जैसे केचुआ खाद,राख, ओयल केक तथा मुर्गी की लीद आदि का भी उपयोग करना चाहिए मृदा की उपरी सतह पर जब उपयुक्त नमी हो तब जैविक खाद को मई –जून की अवधि में तथा एन पी के को पत्तियों की झपनी के साथ साथ 2-3 बार जून – सितम्बर की अवधि में डालना चाहिए अन्य बागों की तरह वैनिला की वृद्धि एवं उत्पादन को बढ़ाने के लिए एन पी के मिश्रण (7:17:17) का 1%घोल का छिड़काव महीने में एक बार करना चाहिए पौधे के निचले आधारीय भाग में सूक्ष्म पोषक तत्वों के मिश्रण को भी डालना अति आवश्यक है वैनिला में रोपण के तीन वर्ष पश्चात् आरम्भ होता है परन्तु यह रोपण की गई कटिंग के आकर पर भी निर्भर करता है रोपण के 7-8 वीं वर्ष के पुष्पों का सबसे अधिक उत्पादन होता है वैनिला का फुल दिसम्बर – फरवरी की अवधि में आते है तथा प्रत्येक फुल केवल एक दिन तक ही कायम रहता है पुष्प उत्पादन में वृद्धि करने के लिए पुष्पण अवधि से 6-8 महीने पहले बेल के 7.5 से 10.0 से.मी.उपरी सिरे को काटना चाहिए ईसी प्रकार पुरानी शाखाओ (जिन पर गत वर्ष पुष्प भेदक का आक्रमण हुआ था ) को काट कर पुष्पों के उत्पादन में वृद्धि कर सकते है फुल एकसिलेरी रिसेमस में पैदा होता है तथा प्रत्येक इनफ्लोरिसेंस में 15-20 फुल होते है फल के निर्धारण के लिए कृतिम परागण (हस्त परागण ) कराते है क्योंकि फुल की अवधि केवल एक दिन की होती है अत: परागण भी उसी दिन करना चाहिए बाकी बची हुई फूलों की कलियों को काट देना चाहिए लगभग 10-12 इनफ्लोरिसेंस प्रति बेल परागन कर सकते है हस्त परागन विधि में , एक पिन या सुई अथवा लकड़ी का छोटा सा नुकीला टुकड़ा या दांत कुरदेनी (हस्त खुदनी) को पुष्प के परागण में उपयोग के लिए आदर्श है वैनिला फुल में अधिकतम उत्पन्न हुए पराग को पौलीनिया कहते है यह एन्थर कैप या हुड से ढका रहता है फुल के गर्भवाले हिस्सो को रोस्टीलम या लैविलम सुरक्षा प्रदान करता है परागण के लिए सुई की सहायता से स्टेमन केप को अलग करके पौलिनिया को प्रकट करते है तत्पश्चात लहराती हुई रोस्टीलम को धक्का देते है तथा पौलिनिया को स्टिग्मा के साथ संपर्क कराते है परागण का उपयुक्त समय सुबह 6 बजे से 1 बजे तक होता है एक कुशल कर्मी 1500 -2000 फुल/दिन परागण कर सकता है वैनिला की खेती विभिन्न प्रकार की मृदा जिसमें प्राकृतिक खाद का समावेश तथा जल निकासी जैसी अनुकूल परिस्थितियों में कर सकते हैं पौधे के लिए चिकनी मिट्टी तथा पानी का जमावड़ा उपयुक्त नहीं है यह आर्द्र उष्णकटिबंधीय जलवायु में जहाँ वार्षिक वर्षा 200-300 से.मी. तथा समुद्री तट से 1500 मी. उचाई उसकी खेती के लिए आदर्श माने जाते हैं गरम आर्द्र जलवायु के साथ साथ 21-320 c तापमान इसकी पैदावार के लिए अति उत्तम है वर्ष के 9 महीने वर्षा तथा पुष्पण के लिए 3 महीने शुष्क वातावरण होना चाहिए भारत में केरल, करनाटक, तमिलनाडु, उत्तर पूर्वी क्षेत था अंडमान निलोबार द्वीपसमूह इसकी खेती के लिए उपयुक्त स्थान है वैनिला की खेती किसी नए स्थान पर करते है तब उस भूमि पर लगे पेड़ो और झाड़ियो को काट कर भूमि को अच्छी तरह साफ़ कर लेते है इसकी खेती खुले क्षेत्र में भी कर सकते है परन्तु इसके पौधे को पर्याप्त छाया प्रदान करना चाहिए भूमि को दो वार जोत कर तत्पश्चात समतल करके तैयार करते है हरी पत्तियों तथा वन मृदा को खेती की मृदा में समावेश करना अति लाभदायक होता है भूमि में एक हल्का ढाल वैनिला की खेती के लिए आदर्श माना जाता है वैनिला की खेती के लिय सामान्यत: तने की कटिंग को रोपण सामग्री के रूप में उपयोग करते है खेतों में सीधे रोपण के लिए 60-120 से.मी. लंबी रोपण सामग्री का चुनाव कर सकतें हैं 60 से.मी.से छोटी कटिंग खेतों में सीधे रोपण के लिए उपयुक्त नहीं है इस प्रकार के कटिंग को रोपण से पूर्व पौधशाला में जडवत तथा उत्पादित करते हैं तने की कटिंग को अच्छी तरह पानी से धोकर 1% बोर्डियों मिश्रण अथवा 0.2%कोपर ओक्सिक्लोराइड में डूबाते है जिससे रोगजनक कवकों की रोकथाम हो जाती है इन उपचारिक रोपण सामग्री को 2-3 दिन के लिए छायादार स्थान पर रखते हैं जिससे इसकी नमी में आंशिक कमी हो जाती है इस कारण पौधे में जडवत को बढ़ावा मिलता है अगर आवश्यकता हो तो कटिंग को 10 दिनों तक पौधशाला में रख सकते है वयस्क वडी कटिंग को रोपण करने से पौधे की अधिक वृद्धि होती है तथा पुष्पण जल्दी प्रारम्भ होता है टिशु कल्चर द्वारा उत्पन्न पौधे को भी रोपण के लिए उपयोग कर सकते है वैनिला को एकल अथवा नारियल तथा छाल के साथ अंत: फसल के रूप में उत्पादित कर सकते है यह सामान्यत: कम उचाई वाली शाखाओ, छाल पेड़ों जैसे गलाइरिसिडिया मैक्यूलेटा फयुसेरिया अल्बा,अरटोर्पस हैटरोफाइलस (कटहल) तथा इरीथ्रिना स्पी. ईत्यादी अथवा निर्जीव सहायकों पर इसकी बेल ऊपर चढ़ने में प्रशिक्षित होती है कुछ स्थानों पर छाली को भी इसके सहायक वृक्ष के रूप में उपयोग करते है इसके लिए सहायक वृक्षों को 1.2-1.5 मी के अन्तराल पर तथा 2.5-3.0 मी.का अन्तराल पंक्तियों में होना चाहिए सहायक वृक्षों को वैनिला की खेती से पहले उगाना चाहिए जिससे सहायक वृक्ष भलभांति जम जाए लगभग 1600-2000 वृक्ष प्रति हेक्टर लगा सकते है वनिला का पौधा जब 1.5-2.0 मी.ऊँचा या उसकी शाखाये चारो ओर से बढ़ने लगे तब उसे सहायक वृक्ष से बांध कर क्षैतिज के समान्तर दिशा में फैलाते है ताकि उसमे सरलता पूर्वक परागण तथा तुडाई हो सके अगर पौधे की वृद्धि ऊपर की तरफ हो रही है तब पुष्प ज्यादा लम्बे समय तक प्रकट नहीं होते है सहायक वृक्षों की समय समय पर काट छांट करते रहना चाहिए ताकि वैनिला की बेल को हलकी छाया मिल सके काटी गयी पत्तियों और शाखाओ को झपनी के उपयोग कर सकते हैं कटनी को यथा संभव सितम्बर – नवम्बर के बिच कम गहरे गढ़डो में रोपण करना चाहिए तत्पश्चात गड्ढों में मिट्टी खाद तथा सड़ी हुई घास भर देना चाहिए तने की कटिंग की दो गांठों को मृदा के उपरो सतह से जमीं के अन्दर रोपण करना चाहिए तथा 2 कटिंग प्रति सहायक रोपण कर सकते हैं रोपण के समय अत्यंत सावधानी बरतना चाहिए तथा यह सुनिश्चित कर ले की कटिंग का अधरिय निचला सिरा मृदा के उपरी सतह से ऊपर है नये रोपित पौधें को पर्याप्त छाया प्रदान करना अत्यंत आवश्यक है रोपण के पश्चात तुरन्त ज्यादा पत्तियों से झपनी कारन चाहिए रोपण के 4-8 सप्ताह बाद कटिंग में अंकुर फूटने लगते है सामान्यत:वैनिला के साथ अन्त: खेती नहीं करना चिहिए परन्तु कभी कभी कटी हुई घासपात इसके लिए लाभदायक होती है मृदा की उपरी सतह का अनुरक्षण करते समय यह सावधानी बरतनी चाहिए की पौधे की जड़ों को कोई बाधा या हानि होना चाहिए पौधे की वृद्धि तथा उपज बढ़ाने के लिए ग्रीष्मकाल में झापनी के साथ साथ निरंतर सिंचाई करना चाहिए मृदा के उपजाऊपन के आधार पर उर्वरकों की मात्रा निर्भर करती है सामान्य स्थिति में 40-60 ग्राम नाइट्रोजन, 20-30 ग्राम p2o5 तथा 60 - 100 ग्राम k2o प्रति बेल डालना चाहिए इसके अतिरिक्त जैविक खाद जैसे केचुआ खाद,राख, ओयल केक तथा मुर्गी की लीद आदि का भी उपयोग करना चाहिए मृदा की उपरी सतह पर जब उपयुक्त नमी हो तब जैविक खाद को मई –जून की अवधि में तथा एन पी के को पत्तियों की झपनी के साथ साथ 2-3 बार जून – सितम्बर की अवधि में डालना चाहिए अन्य बागों की तरह वैनिला की वृद्धि एवं उत्पादन को बढ़ाने के लिए एन पी के मिश्रण (7:17:17) का 1%घोल का छिड़काव महीने में एक बार करना चाहिए पौधे के निचले आधारीय भाग में सूक्ष्म पोषक तत्वों के मिश्रण को भी डालना अति आवश्यक है वैनिला में रोपण के तीन वर्ष पश्चात् आरम्भ होता है परन्तु यह रोपण की गई कटिंग के आकर पर भी निर्भर करता है रोपण के 7-8 वीं वर्ष के पुष्पों का सबसे अधिक उत्पादन होता है वैनिला का फुल दिसम्बर – फरवरी की अवधि में आते है तथा प्रत्येक फुल केवल एक दिन तक ही कायम रहता है पुष्प उत्पादन में वृद्धि करने के लिए पुष्पण अवधि से 6-8 महीने पहले बेल के 7.5 से 10.0 से.मी.उपरी सिरे को काटना चाहिए ईसी प्रकार पुरानी शाखाओ (जिन पर गत वर्ष पुष्प भेदक का आक्रमण हुआ था ) को काट कर पुष्पों के उत्पादन में वृद्धि कर सकते है फुल एकसिलेरी रिसेमस में पैदा होता है तथा प्रत्येक इनफ्लोरिसेंस में 15-20 फुल होते है फल के निर्धारण के लिए कृतिम परागण (हस्त परागण ) कराते है क्योंकि फुल की अवधि केवल एक दिन की होती है अत: परागण भी उसी दिन करना चाहिए बाकी बची हुई फूलों की कलियों को काट देना चाहिए लगभग 10-12 इनफ्लोरिसेंस प्रति बेल परागन कर सकते है हस्त परागन विधि में , एक पिन या सुई अथवा लकड़ी का छोटा सा नुकीला टुकड़ा या दांत कुरदेनी (हस्त खुदनी) को पुष्प के परागण में उपयोग के लिए आदर्श है वैनिला फुल में अधिकतम उत्पन्न हुए पराग को पौलीनिया कहते है यह एन्थर कैप या हुड से ढका रहता है फुल के गर्भवाले हिस्सो को रोस्टीलम या लैविलम सुरक्षा प्रदान करता है परागण के लिए सुई की सहायता से स्टेमन केप को अलग करके पौलिनिया को प्रकट करते है तत्पश्चात लहराती हुई रोस्टीलम को धक्का देते है तथा पौलिनिया को स्टिग्मा के साथ संपर्क कराते है परागण का उपयुक्त समय सुबह 6 बजे से 1 बजे तक होता है एक कुशल कर्मी 1500 -2000 फुल/दिन परागण कर सकता है
Posted by S Chauhan Singh
Uttar Pradesh
02-03-2020 09:19 PM
Punjab
03-03-2020 03:04 PM
S Chauhan Singh ji soyabean seed lene ke lia aap Shine Brand Seeds 8770896002 se samparak kar sakte hai, Thankyou.
Posted by Bahadur Singh Sarwara
Punjab
02-03-2020 09:17 PM
Punjab
03-03-2020 03:00 PM
Bahadur Singh ji please tell us in detail what is the age of plant so that we can provide you proper information.thank you
Posted by ਹਰਮਨਜੀਤ ਸਿੰਘ ਢਿੱਲੋਂ
Punjab
02-03-2020 09:17 PM
Punjab
03-03-2020 02:29 PM
ਤੁਸੀ ਗਰਮੀਆਂ ਵਿਚ 1 ਕੁਅੰਟਲ ਮੱਝਾਂ ਦੀ ਫੀਡ ਵਿਚ 30 ਕਿਲੋ ਜੋਂ, 30 ਕਿਲੋ ਕਣਕ, 10 ਕਿਲੋ ਚੋਕਰ, 15 ਕਿਲੋ ਵਡੇਮਿਆ ਦੀ ਖੱਲ, 15 ਕਿਲੋ ਸਰੋਂ ਦੀ ਖਲ ਮਿਕਸ ਕਰੋ ਅਤੇ ਗਾਵਾਂ ਲਈ 1 ਕੁਅੰਟਲ ਫੀਡ ਵਿਚ 35 ਕਿਲੋ ਜੋਂ, 35 ਕਿਲੋ ਕਣਕ , 10 ਕਿਲੋ ਚੋਕਰ, 10 ਕਿਲੋ ਵਡੇਮਿਆ ਦੀ ਖਲ ਅਤੇ 10 ਕਿਲੋ ਸਰੋਂ ਦੀ ਖੱਲ ਮਿਕਸ ਕਰਕੇ ਤਿਆਰ ਕਰੋ ਅਤੇ ਖਵਾਓ, ਉਸ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ ਪਸ਼ੂਆਂ ਲਈ ਵਧਿਆ ਫੀਡ ਤਿਆਰ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਬਾਕੀ ਤ.... (Read More)
ਤੁਸੀ ਗਰਮੀਆਂ ਵਿਚ 1 ਕੁਅੰਟਲ ਮੱਝਾਂ ਦੀ ਫੀਡ ਵਿਚ 30 ਕਿਲੋ ਜੋਂ, 30 ਕਿਲੋ ਕਣਕ, 10 ਕਿਲੋ ਚੋਕਰ, 15 ਕਿਲੋ ਵਡੇਮਿਆ ਦੀ ਖੱਲ, 15 ਕਿਲੋ ਸਰੋਂ ਦੀ ਖਲ ਮਿਕਸ ਕਰੋ ਅਤੇ ਗਾਵਾਂ ਲਈ 1 ਕੁਅੰਟਲ ਫੀਡ ਵਿਚ 35 ਕਿਲੋ ਜੋਂ, 35 ਕਿਲੋ ਕਣਕ , 10 ਕਿਲੋ ਚੋਕਰ, 10 ਕਿਲੋ ਵਡੇਮਿਆ ਦੀ ਖਲ ਅਤੇ 10 ਕਿਲੋ ਸਰੋਂ ਦੀ ਖੱਲ ਮਿਕਸ ਕਰਕੇ ਤਿਆਰ ਕਰੋ ਅਤੇ ਖਵਾਓ, ਉਸ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ ਪਸ਼ੂਆਂ ਲਈ ਵਧਿਆ ਫੀਡ ਤਿਆਰ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਮਿਨਰਲ ਮਿਕਸਚਰ ਰੋਜਾਨਾ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ..
Posted by harmanjot singh grew
Rajasthan
02-03-2020 09:08 PM

Punjab
03-03-2020 02:53 PM
अंजीर की खेती भिन्न-भिन्न प्रकार की जलवायु में की जा सकती है, लेकिन अंजीर का पौधा गर्म, सूखी और छाया रहित उपोष्ण व गर्म-शीतोष्ण परिस्थितियों में अच्छी तरह फलता-फूलता है फल के विकास तथा परिपक्वता के समय वायुमंडल का शुष्क रहना अत्यंत आवश्यक है पर्णपाती वृक्ष होने के कारण पाले का प्रभाव इस पर कम पड़ता है अंजी.... (Read More)
अंजीर की खेती भिन्न-भिन्न प्रकार की जलवायु में की जा सकती है, लेकिन अंजीर का पौधा गर्म, सूखी और छाया रहित उपोष्ण व गर्म-शीतोष्ण परिस्थितियों में अच्छी तरह फलता-फूलता है फल के विकास तथा परिपक्वता के समय वायुमंडल का शुष्क रहना अत्यंत आवश्यक है पर्णपाती वृक्ष होने के कारण पाले का प्रभाव इस पर कम पड़ता है अंजीर को सभी प्रकार की मिट्टी में उगाया जा सकता है, परंतु दोमट अथवा मटियार दोमट, जिसमें उत्तम जल निकास हो, इसके लिए सबसे श्रेष्ठ मिट्टी है अंजीर के पौधे मुख्यतः 1 से 2 सेंटीमीटर मोटी, 15 से 20 सेंटीमीटर लम्बी परिपक्व कलमों द्वारा तैयार किये जाते हैं मातृ पौधों से सर्दियों में कलमें लेकर इन्हें 1 से 2 माह तक कैल्सिंग हेतु मिट्टी में दबाया जाता है फरवरी से मार्च में जैसे ही तापमान बढ़ने लगता है, इल कलमों को निकाल कर 15 x 15 सेंटीमीटर की दूरी पर नर्सरी में रोपित किया जाता है अंजीर की नर्सरी की क्यारियों में प्रति वर्गमीटर 7 किलो गोबर की खाद तथा 25 से 30 ग्राम फॉस्फोरस और 20 से 25 ग्राम पोटाश खाद, क्यारी तैयारी के समय डालनी चाहिए नत्रजन खाद 10 से 15 ग्राम प्रतिवर्गमीटर कलमें रोपित करने के एक महीने बाद तथा इतनी ही मात्रा 2 महीने बाद डालनी चाहिए अंजीर की खेती कैसे करें, जानिए उपयुक्त जलवायु, भूमि, किस्में, देखभाल, पैदावार Last updated on जुलाई 29, 2019 By Bhupender 3 Comments अंजीर की खेती कैसे करें अंजीर उपोष्ण क्षेत्रों में पाया जाने वाला महत्त्वपूर्ण फल है कोहरे को सहन करने में इसकी विशेष क्षमता होती है अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार में इसके ताजे अर्द्ध-सूखे, सूखे फलों एवं विधायन द्वारा तैयार पदार्थों की बढ़ती मांग को देखते हुये इसके व्यवसायिक उत्पादन की अपार सम्भावनाएं हैं अंजीर एक लोकप्रिय फल है, जो ताजा और सूखा खाया जाता है भारत में इसकी खेती राजस्थान, हरियाणा, कर्नाटक, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गुजरात तथा उत्तर प्रदेश के कुछ भागों में की जाती है विश्व स्तर पर इसकी खेती दक्षिणी और पश्चिमी अमरीका और मेडिटेरेनियन और उत्तरी अफ्रीकी देशों में उगाया जाता है बागवान अंजीर की खेती वैज्ञानिक तकनीक से कर के इसकी फसल से अच्छा और गुणवत्ता युक्त उत्पादन प्राप्त कर सकते है इस लेख में अंजीर की बागवानी वैज्ञानिक तकनीक से कैसे करें की जानकारी का वर्णन किया गया है उपयुक्त जलवायु अंजीर की खेती भिन्न-भिन्न प्रकार की जलवायु में की जा सकती है, लेकिन अंजीर का पौधा गर्म, सूखी और छाया रहित उपोष्ण व गर्म-शीतोष्ण परिस्थितियों में अच्छी तरह फलता-फूलता है फल के विकास तथा परिपक्वता के समय वायुमंडल का शुष्क रहना अत्यंत आवश्यक है पर्णपाती वृक्ष होने के कारण पाले का प्रभाव इस पर कम पड़ता है यह भी पढ़ें- चीकू की खेती कैसे करें, जानिए उपयुक्त जलवायु, भूमि, किस्में, देखभाल, पैदावार भूमि का चयन अंजीर को सभी प्रकार की मिट्टी में उगाया जा सकता है, परंतु दोमट अथवा मटियार दोमट, जिसमें उत्तम जल निकास हो, इसके लिए सबसे श्रेष्ठ मिट्टी है उन्नत किस्में भारत के निचले क्षेत्रों में पाये जाने वाली अंजीर की जैव-विविधता का वर्गीकरण तीन प्रजातियों बी एफ- I, बी एफ- II तथा बी एफ- III में किया गया है इनमें बी एफ- III प्रजाति सर्वोत्तम पाई गई है और इसका नामकरण ‘बडका अंजीर’ किस्म के रूप में किया गया है इस किस्म के फलों का औसतन भार 36.8 ग्राम और कुल घुलनशील ठोस तत्त्वों की मात्रा 18.8 डिग्री ब्रिक्स होती है इसमें अन्य किस्मों की तुलना में पानी की मात्रा कम होती है, इसलिए यह किस्म सुखाने के लिये भी उपयुक्त है स्ट्रेन बी एफ- III (बढ़का) पौधा ओजस्वी, फल बड़े आकार के नीले- काले रंग के, गुदा पकने पर गुलाबी – लाल, आम स्ट्रेन के मुकाबले 4 से 6 प्रतिशत कम नमी तथा उत्तम निधानी आयु, भारी फसल उत्पादक किस्म, उत्तरी भारत के निचले पहाड़ी और घाटी क्षेत्रों के लिए उपयुक्त किस्म है यह भी पढ़ें- कटहल की खेती कैसे करें, जानिए उपयुक्त जलवायु, भूमि, किस्में, देखभाल, पैदावार पौधे तैयार करना अंजीर के पौधे मुख्यतः 1 से 2 सेंटीमीटर मोटी, 15 से 20 सेंटीमीटर लम्बी परिपक्व कलमों द्वारा तैयार किये जाते हैं मातृ पौधों से सर्दियों में कलमें लेकर इन्हें 1 से 2 माह तक कैल्सिंग हेतु मिट्टी में दबाया जाता है फरवरी से मार्च में जैसे ही तापमान बढ़ने लगता है, इल कलमों को निकाल कर 15 x 15 सेंटीमीटर की दूरी पर नर्सरी में रोपित किया जाता है अंजीर की नर्सरी की क्यारियों में प्रति वर्गमीटर 7 किलो गोबर की खाद तथा 25 से 30 ग्राम फॉस्फोरस और 20 से 25 ग्राम पोटाश खाद, क्यारी तैयारी के समय डालनी चाहिए नत्रजन खाद 10 से 15 ग्राम प्रतिवर्गमीटर कलमें रोपित करने के एक महीने बाद तथा इतनी ही मात्रा 2 महीने बाद डालनी चाहिए पौधा रोपण खेत की तैयारी करते समय खोदे गये गड्डों में संतुलित खाद और उर्वरक डाल कर पौधा रोपण करें पौधों की दुरी 8 x 8 मीटर उपयुक्त रहती है, और रोपण का समय दिसम्बर से जनवरी या जुलाई से अगस्त (जुलाई से अगस्त में पौधा गाची सहित होना चाहिए) अंजीर के छोटे पौधों 1 से 3 वर्ष में 7 से 10 किलो गोबर की खाद और 3 वर्ष की आयु से बड़े पौधों में 15 से 25 किलोग्राम गोबर की खाद प्रति पौधा, प्रतिवर्ष डालनी चाहिए उर्वरक का प्रयोग मिट्टी की आवश्यकता के अनुसार करें वैसे अंजीर की फसल बिना उर्वरक के प्रयोग के बाद भी अच्छी पैदावार देती है अंजीर के पौधों की सिधाई इस प्रकार होनी चाहिए कि हर दिशा में इसका फैलाव बराबर हो और पौधे के हर हिस्से तक सूर्य का प्रकाश पहुँच सके इसमें फल एक से दो साल पुरानी टहनियों पर निकलने वाली नई शाखाओं पर लगता है अतः शुरू के वर्षों में इस प्रकार की टहनियों को बढ़ावा देना चाहिए पुराने पेड़ों में भारी काट-छांट लाभप्रद होती है रोग ग्रस्त और सुखी शाखाओं की फल तुड़ाई के बाद काट-छांट करते रहना चाहिए उपोष्ण क्षेत्रों में बसन्त ऋतु में आने वाले फल मई से लेकर अगस्त तक पककर तैयार होते हैं जब फल पूर्ण रूप से परिपक्व हो जाये तब ही इनकी तुड़ाई करनी चाहिए तोड़ने के बाद एक पात्र में 400 से 500 ग्राम से ज्यादा फल नहीं रखने चाहिए यदि ज्यादा मात्रा में फलों का तुड़ान करना हो तो इन्हें पानी भरे बर्तन में एकत्रित करना चाहिए
Posted by sagar choudhary
Uttar Pradesh
02-03-2020 09:01 PM

Punjab
03-03-2020 02:36 PM
उसे आप Keeper पाउडर 30 ग्राम रोजाना 20 दिन तक और Concimax tablet रोजाना एक गोली दें और 14 दिन तक देते रहें यदि वो अगली बार पूरी हीट में आती है तब आप उसकी बच्चेदानी की सफाई करवाकर ये गोलियां और पाउडर देते रहें और उससे अगली बार हीट में आने पर टीका भरवाएं
Posted by satinder sigh
Haryana
02-03-2020 09:00 PM
Punjab
03-02-2020 10:41 PM
Shri maan g kripa aap apna swal visthar se puchein toh aapko poori jankari di jaye...
Posted by Pargat Singh
Punjab
02-03-2020 09:00 PM
Punjab
03-02-2020 10:42 PM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਕਣਕ ਵਿੱਚ ਪੀਲੀ ਕੁੰਗੀ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਦੇ ਲਈ Opera@300 ਮਿਲੀ. ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਸਪਰੇਅ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ
Posted by bazad khan
Punjab
02-03-2020 08:44 PM
Punjab
03-03-2020 02:06 PM
ਤੁਸੀ ਮੱਛੀ ਪਾਲਣ ਦਾ ਕੰਮ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰਨਾ ਹੈ ਤਾ ਸਭ ਤੋਂ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਇਹ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਤੁਹਾਨੂੰ FFDA(fish farmer development aggency) ਜੋ ਕਿ ਲੱਗਭੱਗ ਹਰ ਜ਼ਿਲੇ ਵਿੱਚ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜਾਂ ਉੱਥੇ ਜਾ ਕੇ ਐਪਲੀਕੇਸ਼ਨ ਫਾਰਮ ਭਰੋ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਤੁਹਾਨੂੰ 5 ਦਿਨ ਦੀ ਮੁਫਤ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਦਿੱਤੀ ਜਾਵੇਗੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲਈ ਦਸਵੀ ਪਾਸ ਹੋਣਾ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਤੇ ਇਹ ਡਿਪਾਰਮੈ੍ਟ ਜਿੱਥੇ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਅਫਸਰ ਬੈਠਦਾ ਹੈ ਜਿਵ.... (Read More)
ਤੁਸੀ ਮੱਛੀ ਪਾਲਣ ਦਾ ਕੰਮ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰਨਾ ਹੈ ਤਾ ਸਭ ਤੋਂ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਇਹ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਤੁਹਾਨੂੰ FFDA(fish farmer development aggency) ਜੋ ਕਿ ਲੱਗਭੱਗ ਹਰ ਜ਼ਿਲੇ ਵਿੱਚ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜਾਂ ਉੱਥੇ ਜਾ ਕੇ ਐਪਲੀਕੇਸ਼ਨ ਫਾਰਮ ਭਰੋ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਤੁਹਾਨੂੰ 5 ਦਿਨ ਦੀ ਮੁਫਤ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਦਿੱਤੀ ਜਾਵੇਗੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲਈ ਦਸਵੀ ਪਾਸ ਹੋਣਾ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਤੇ ਇਹ ਡਿਪਾਰਮੈ੍ਟ ਜਿੱਥੇ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਅਫਸਰ ਬੈਠਦਾ ਹੈ ਜਿਵੇ ਕਚਿਹਰੀਆਂ , ਡੀ ਸੀ ਆਫਿਸ ਕਹਿੰ ਦਿੰਦੇ ਹਾਂ ਉਸ ਵਿੱਚ ਬਣਿਆ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਮੱਛੀ ਪਾਲਣ ਲਈ ਸੇਮ ਵਾਲੇ ਇਲਾਕੇ ਵਿੱਚ 90% ਸਬਸਿਡੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਤੇ ਬਾਕੀ ਇਲਾਕਿਆ ਵਿੱਚ 40 % ਸਬਸਿਡੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਜ਼ਿਲੇ ਦੇ FFDA ( fish farming development agency ) ਦਫਤਰ ਵਿੱਚ ਜਾਓ ਜੋ ਕਿ ਆਮ ਤੌਰ ਤੇ ਡੀਸੀ ਦਫਤਰ ਜਾਂ ਕਚਿਹਰੀਆਂ ਵਿੱਚ ਬਣਿਆ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਤੁਸੀ ਉੱਥੇ ਆਪਣੇ ਜਮੀਂਨ ਦੀ ਫਰਦ , 10th ਸਰਟੀਫਿਕੇਟ ਤੇ ਜਿੱਥੇ ਤਲਾਬ ਬਣਾਉਣਾ ਹੈ ਉੱਥੋ ਦੀਆਂ 2 ਫੋਟੋ ਲੈ ਕੇ ਜਾਓ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ FFDA ਦੇ ਅਫਸਰ ਤੁਹਾਨੂੂੰ ਫਾਈਲ ਤਿਆਰ ਕਰਵਾਉਣਗੇ ਤੇ ਤੁਹਾਡੀ ਜਮੀਨ ਦੇਖ ਕੇ ਤਲਾਬ ਬਣਾਉਣ ਦਾ ਤਰੀਕਾ ਦੱਸਣਗੇ ਤੇ ਫਿਰ ਤੁਹਾਨੂੰ 40% ਸਬਸਿਡੀ ਲਈ ਫਾਈ਼ਲ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਲੋਨ ਅਪਲਾਈ ਬਾਰੇ ਸਮਝਾ ਦੇਣਗੇ. ਇਸਦੀ ਪੁੰਗ ਛੱਡਣ ਲਈ ਅਪ੍ਰੈਲ ਤੋਂ ਅਕਤੂਬਰ ਦਾ ਤੱਕ ਸਮਾਂ ਵਧੀਆ ਹੁੰਦਾ ਹੈ
Posted by पवन प्रताप
Uttar Pradesh
02-03-2020 08:29 PM
Punjab
03-03-2020 03:09 PM
Pawan ji sarso ka bhav 3600 - 4200/q par chal raha hai, Thankyou.
Posted by Shivam Choudhary
Madhya Pradesh
02-03-2020 08:21 PM
Punjab
03-03-2020 02:44 PM
शिवम् जी आप इसके ऊपर NPK 130045 @1 किलो को 150 लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें
Posted by deep Suneja
Punjab
02-03-2020 08:20 PM
Punjab
03-03-2020 05:54 AM
Shri maan g kripa tuc apna swal visthar nall pucho tan ki tuhanu poori jankari diti ja ske....
Posted by dilpreet singh
Punjab
02-03-2020 07:57 PM
Punjab
03-03-2020 02:48 PM
dilpreet ji tuc kaddu diyan kisman jive PAU Magaz Kaddoo-1,PPH-1,PPH-2 di bijai kar sakde ho.dhanwad
Posted by Aman Thakur
Punjab
02-03-2020 07:54 PM
Punjab
03-03-2020 02:39 PM
Aman ji tuci uss nu Gestaprogen powder 25gm rojana 20 din tak deo, jekar ohh gaban hoi tan thehr jawegi ate jekar gaban naa hoi tan dubara heat vich aa jawegi.
Posted by ਸੁਖਮਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਚਹਿਲ
Punjab
02-03-2020 07:54 PM
Punjab
03-02-2020 10:44 PM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਗੇਂਦੇ ਦੇ ਬੂਟਿਆਂ ਦੀ ਗਰੋਥ ਲਈ ਤੁਸੀਂ NPK 19:19:19@1kg 150ltr ਪਾਣੀ ਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਸਪਰੇਅ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ
Posted by nirmala devi
Bihar
02-03-2020 07:45 PM
Punjab
03-03-2020 02:42 PM
Nirmala ji sundi ki roktham ke liye aap quinalphos@4ml ko prati litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad
Posted by manpreet singh
Punjab
02-03-2020 07:35 PM
Punjab
03-02-2020 10:09 PM
ਰੀਸਰਚ ਸੈਟਰ ਅਬੋਹਰ, ਪੰਜਾਬ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਲੁਧਿਆਣਾ ਦੇ ਨਰਸਰੀ ਫਲ ਵਿਭਾਗ ਤੋ
Posted by Prasenjit Das
West Bengal
02-03-2020 07:34 PM

Punjab
03-03-2020 04:15 PM
आप फीड लेने के लिए De Heus helpline no. 9872444999 से संपर्क कर सकते है
Posted by manpreet singh
Punjab
02-03-2020 07:30 PM
Punjab
03-02-2020 08:36 PM
श्रीमान जी आम का बूर झड़ने से Planofix दवा की स्प्रे कर सकते है इसकी मात्रा 1 मि.ली. प्रति 2.5 लीटर पानी के हिसाब से घोल कर स्प्रे कर सकते है