
Posted by amardeep singh
Punjab
24-03-2020 01:17 PM
ਪਸ਼ੂ ਦਾ ਦੁੱਧ ਉਸਦੀ ਨਸਲ ਦੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦਾ ਹੈ, ਜੇਕਰ ਇਸਦੇ ਮਾਤਾ ਪਿਤਾ ਦੇ ਦੁੱਧ ਦਾ ਰਿਕਾਰਡ ਵਧਿਆ ਹੈ ਤਾਂ ਇਸਦਾ ਦੁੱਧ ਵੀ ਵਧਿਆ ਹੋਵੇਗਾ, ਕਿਉਕਿ ਵਧਿਆ ਨਸਲ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਪਸ਼ੂ ਦਾ ਦੁੱਧ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ ਇਸਦੀ ਖੁਰਾਕ ਦਾ ਧਿਆਨ ਰੱਖੋ, ਰੋਜਾਨਾ 35-40 ਕਿਲੋ ਹਰਾ ਚਾਰਾ ਦਿਓ, ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ ਇਹਨਾਂ ਦੇ ਨਾਲ ਨਾਲ Calpond ਪਾਊਡਰ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਅਤੇ Milkout ਪਾਊਡਰ 2-2 ਚਮਚ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ..
Posted by Dilshad ahmad
Uttar Pradesh
24-03-2020 01:03 PM
Dilshad ji, agar ap 2,4-D ki baat kar rahe hain to iska asar fasal par ab dikhayi de ga, ap fasal mein 4,5 din baad NPK 191919 @ 10 gram prati litre pani ke hisaab se spray karein, isse fasal. mein growth honi shuru ho jaye gi, dhanywad
Posted by karambir singh Josan
Punjab
24-03-2020 12:55 PM
ਕਰਮਬੀਰ ਜੀ ਤੁਸੀ ਇਸ ਨੂੰ ਇਕ ਕਨਾਲ ਵਿਚ ਵੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਪਰ ਇਸ ਨੂੰ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰਨ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾ ਇਸਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਜਰੂਰ ਲਓ ਜਿਸ ਵਿਚ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸ ਕੰਮ ਦੀ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਮਿਲ ਜਾਵੇਗੀ ਤੁਸੀ ਇਸਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਦੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਲੈਣ ਲਈ Sh. Brij Bhushan Goel ADF TarnTaran Addl. charge CEO, Amritsar 9417774011 ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਅਤੇ ਅੱਗੇ ਹੋਣ ਵਾਲੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਵਾਰੇ ਪਤਾ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ
Posted by hanuman gehlot
Rajasthan
24-03-2020 12:50 PM
Hanuman ji kripya btaye ke aap konsi fasl ke rate ki jankari lena chahte hai taki apko iske bare men poori jankari di ja sake,dhanywad
Posted by Harpreet singh
Punjab
24-03-2020 12:40 PM
ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ CRB(ascrobic acid) injection 20ml, vitum-H injection 5ml ਲਗਵਾਓ ਅਤੇ ਲਗਾਤਾਰ 3 ਦਿਨ ਲਗਵਾਓ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ Mammidium powder 50gm ਰੋਜਾਨਾ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ..

Posted by Dhillon Saab
Punjab
24-03-2020 12:37 PM
ਢਿੱਲੋਂ ਜੀ ਮੱਕੀ ਦੀ ਕਿਸਮ ਜਿਵੇ J1006 ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਸਦੀ ਕਟਾਈ 60 ਦਿਨ ਤਕ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ

Posted by Neeraj Kumar
Uttar Pradesh
24-03-2020 12:23 PM
इसे मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जाता है रेतली दोमट से दोमट मिट्टी में उगाने पर यह अच्छे परिणाम देती है Pusa Summer Prolific Round, Pusa Manjri (Sankar variety) और Punjab Round लौकी की खेती के लिए, ज़मीन को अच्छी तरह से तैयार करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक जोताई के बाद सुहागा फेरें इसकी बिजाई के लिए फरवरी से मार्च, जून से जुलाई और नवंबर से दिसंबर का à¤.... (Read More)
इसे मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जाता है रेतली दोमट से दोमट मिट्टी में उगाने पर यह अच्छे परिणाम देती है Pusa Summer Prolific Round, Pusa Manjri (Sankar variety) और Punjab Round लौकी की खेती के लिए, ज़मीन को अच्छी तरह से तैयार करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक जोताई के बाद सुहागा फेरें इसकी बिजाई के लिए फरवरी से मार्च, जून से जुलाई और नवंबर से दिसंबर का समय उपयुक्त होता हैकतारों में 2.0-2.5 - और पौधों में 45-60 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीज को 1-2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें एक एकड़ में बिजाई के लिए 2 किलो बीज पर्याप्त होते हैं मिट्टी से पैदा होने वाली फंगस से बचाने के लिए बाविस्टिन 0.2 प्रतिशत 3 ग्राम से प्रति किलो बीज का उपचार करें अच्छी तरह से गली हुई रूड़ी की खाद 20-25 टन प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन 28 किलो (यूरिया 60 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन 14 किलो (यूरिया 30 किलो) की पहली मात्रा को बिजाई के समय प्रति एकड़ में डालें और नाइट्रोजन 14 किलो (यूरिया 30 किलो) को पहली तुड़ाई के समय प्रति एकड़ में डालें इस फसल को तुरंत सिंचाई की आवश्यकता होती है बिजाई के तुरंत बाद सिंचाई करें गर्मियों में फसल को 6—7 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है और बारिश के मौसम में आवश्यकतानुसार पानी लगाएं इस फसल को कुल 9 सिंचाइयों की जरूरत होती है नदीनों की रोकथाम के लिए, पौधे की वृद्धि के शुरूआती समय में 2-3 गोडाई करें गोडाई खाद डालने के समय करें बरसात के मौसम में नदीनों की रोकथाम के लिए मिट्टी चढ़ाना भी प्रभावी तरीका है किस्म और मौसम के आधार पर, फसल 60-70 दिनों में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है मार्किट की आवश्यकतानुसार, मध्यम और नर्म फलों की तुड़ाई करें बीज उत्पादन के लिए ज्यादातर पके फलों को स्टोर किया जाता है तीखे चाकू की मदद से फलों को बेलों से काटें मांग ज्यादा होने पर फल की तुड़ाई प्रत्येक 3-4 दिन में करनी चाहिए
Posted by raghvendra singh
Madhya Pradesh
24-03-2020 12:12 PM
Raghvendra ji, kripya ap bataye ke ap moong ki fasal je bare mein kya jankari lena chahte hain, taki apko uske bare mein jankari di ja sake, dhanywad

Posted by atul kumar
Uttar Pradesh
24-03-2020 12:02 PM
पुदीना मैंथा के नाम से जानी जाने वाली एक क्रियाशील जड़ी बूटी है पुदीने को मिट्टी की कई किस्मों जैसे दरमियाने से गहरी उपजाऊ मिट्टी, जिसमें पानी को सोखने की क्षमता ज्यादा हो, में उगाया जाता है इसको जल-जमाव वाली मिट्टी में भी उगाया जा सकता है उच्च नमी वाली मिट्टी में यह अच्छे परिणाम देती है इस फसल के लिए मिट्टी .... (Read More)
पुदीना मैंथा के नाम से जानी जाने वाली एक क्रियाशील जड़ी बूटी है पुदीने को मिट्टी की कई किस्मों जैसे दरमियाने से गहरी उपजाऊ मिट्टी, जिसमें पानी को सोखने की क्षमता ज्यादा हो, में उगाया जाता है इसको जल-जमाव वाली मिट्टी में भी उगाया जा सकता है उच्च नमी वाली मिट्टी में यह अच्छे परिणाम देती है इस फसल के लिए मिट्टी का pH 6-7.5 होना चाहिए प्रसिद्ध किस्में:- MAS-1: यह छोटे कद की किस्म है जिसकी ऊंचाई 30-45 सैं.मी. होती है यह बीमारीयों की रोधक और जल्दी पकने वाली किस्म है इसमें मैन्थोल की मात्रा 70-80% होती है इसकी औसतन पैदावार 80 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 50-60 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है Hybrid-77: इसकी ऊंचाई 50-60 सैं.मी. होती है यह किस्म पत्तों के धब्बा रोग और कुंगी के रोधक होती है, और यह जल्दी पकने वाली किस्म है इसमें मैन्थोल की मात्रा 80-85% होती है इसकी औसतन पैदावार 80 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 50-60 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है यह रेतली दोमट मिट्टी में बढ़िया पैदावार देती है औरऐसी शुष्क मौसम में की आवश्यकता होती है Shivalik: यह चीन की खेती से चुनी गई किस्म है यह किस्म उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्रों और उत्तरांचल में अच्छी वृद्धि करती है इसमें मैन्थोल की मात्रा 65-70% होती है इसकी औसतन पैदावार 120 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 72 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है यह किस्म फंगस रोगों से जल्दी प्रभावित होती है EC-41911: यह किस्म रूसी जर्मप्लाज्म से ली गई है यह किस्म पानी की रोधक और आकार में सीधी होती है इसमें मैन्थोल की मात्रा 70%पायी जाती है इसकी औसतन पैदावार 120 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 72 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है इस किस्म से तैयार तेल का प्रयोग विभिन्न व्यंजनों में स्वाद के लिए किया जाता है Gomti: यह किस्म रंग में हल्के लाल रंग की होती है इसकी पैदावार बाकी किस्मों की पैदावार से कम होती है इसमें मैन्थोल की मात्रा 78-80% होती है Himalaya: इसके पत्तों का आकार बाकी किस्मों से बड़ा होता है यह किस्म कुंगी, झुलस, सफेद धब्बे और पत्तों पर धब्बे रोग की रोधक है इसमें मैन्थोल की मात्रा 78-80% होती है इसकी औसतन पैदावार 160 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 80-100 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है Kosi: यह किस्म 90 दिनों में पक जाती है यह किस्म कुंगी, झुलस, सफेद धब्बे और पत्तों के धब्बे रोग की प्रतिरोधक है इसमें मैन्थोल की मात्रा 75-80 प्रतिशत होती है और तेल की पैदावार 80-100 किलोग्राम प्रति एकड़ होती है Saksham: यह किस्म सी वी हिमालय की तरफ से टिशू कल्चर द्वारा तैयार की गई है इसमें मैन्थोल की मात्रा 80% होती है और तेल की पैदावार 90-100 किलोग्राम प्राप्त होती है पुदीने की बिजाई के लिए सुविधाजनक आकार के बैड तैयार करें खेत की तैयारी के समय खेत की अच्छी तरह जोताई करें जैविक खाद जैसे रूड़ी की खाद 100-120 क्विंटल प्रति एकड़ रूड़ी की खाद डालें रूड़ी की खाद के बाद हरी खाद डालें इसकी बिजाई के लिए दिसंबर-जनवरी का समय अनुकूल होता है पौधे के भागों की बिजाई 40 सैं.मी. के फासले पर और पंक्तियों के बीच का फासला 60 सैं.मी होना चाहिए बीज को 2-3 सैं.मी. की गहराई में बोयें पौधे के जड़ वाले भाग को मुख्य खेत में बोया जाता है खेत की तैयारी के समय रूड़ी की खाद 80-120 क्विंटल प्रति एकड़ में डालें और अच्छी तरह मिलायें नाइट्रोजन 58 किलो (यूरिया 130 किलो), फासफोरस 32-40 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 80-100 किलो), पोटाशियम 20 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 33 किलो) प्रति एकड़ में डालें गर्मियों में मॉनसून से पहले जलवायु और मिट्टी के आधार पर 6-9 सिंचाइयां जरूर की जानी चाहिए मॉनसून के बाद 3 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है पहली सिंचाई सितंबर महीने में, दूसरी अक्तूबर में और तीसरी नवंबर महीने में की जानी चाहिए सर्दियों में ज्यादा सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन यदि सर्दियों में बारिश ना पड़े तो एक सिंचाई जरूर देनी चाहिए पौधे 100-120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं जब निचले पत्ते पीले रंग के होने शुरू हो जायें, तब कटाई करें कटाई दराती से और बूटियों को मिट्टी की सतह के 2-3 सैं.मी. ऊपर से निकालें अगली कटाई पहली कटाई के बाद 80 दिनों के अंतराल पर करें ताजी पत्तियों को उत्पाद बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है,
Posted by Dilshad ahmad
Uttar Pradesh
24-03-2020 11:56 AM
Dilshad ji, kripya ap apna sawal visthar se puchien ke ap is tarbooj ki fasal ke bare mein kya jankari lena chahte hain, taki apko iske bare mein puri jankari di ja sake, dhanywad
Posted by ਸੁਖਚੈਨ ਸਿੰਘ
Punjab
24-03-2020 11:55 AM
ਸੁਖਚੈਨ ਜੀ, ਤੁਸੀਂ ਇਸ ਵਿਚ planofix @ 4 ml ਨੂੰ 15 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਫਲ ਡਿਗਣੇ ਬੰਦ ਹੋ ਜਾਂ ਗਏ, ਧੰਨਵਾਦ

Posted by maggi
Uttar Pradesh
24-03-2020 11:53 AM
Maggi ji, ap haldi rog ki roktham ke liye fasal mein propiconazole @ 200 ml ko 150 litre pani mein mila kar prati acre ke hisaab se spray kar sakte hain, dhanywad
Posted by Dilshad ahmad
Uttar Pradesh
24-03-2020 11:49 AM
Dilshad ji, kripya ap bataye ke apke tarbuj mein kya dal diya geya hai, ho sake to ap us dawai ke label ki photo bhejein tajo apko dekh kar iske bare mein jankari di ja sake, dhanywad
Posted by सन्त कुमार मिश्रा
Uttar Pradesh
24-03-2020 11:48 AM
यदि आप मक्खी पालन का व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं तो अगस्त से जनवरी तक शुरू किया जा सकता है मक्खी फार्म के पास जी टी रोड, रेलवे लाइन्स तथा टेलीफोन या बिजली की तारों का जाल न हो फूलों से मक्खियों को नैक्टर (फूलों का रस ) तथा पोलन मिलता है, जो की मक्खियों की खुराक होते हैं अधिक शहद इकठा करने के लिए फूलों वाली मुख्य à¤.... (Read More)
यदि आप मक्खी पालन का व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं तो अगस्त से जनवरी तक शुरू किया जा सकता है मक्खी फार्म के पास जी टी रोड, रेलवे लाइन्स तथा टेलीफोन या बिजली की तारों का जाल न हो फूलों से मक्खियों को नैक्टर (फूलों का रस ) तथा पोलन मिलता है, जो की मक्खियों की खुराक होते हैं अधिक शहद इकठा करने के लिए फूलों वाली मुख्य फसलें सरसों, तोरियां, राया, गोभी,सरसों, सफेदा,बरसीम, सूरजमुखी, लीची, अरहर, टाहली, कपास आदि हैं जिन इलाकों में यह फूलके स्रोत के समय समय पर मिलते हैं उन इलाकों में इस व्यवसाय को बहुत कामयाबी के साथ अपनाया जाता है इसमें 100 मक्खी के बक्सों से आप औसतन 25000-30000 तक का मुनाफा ले सकते हैं शुरूआत में यदि आप 100 बक्सों से काम शुरू करते हैं तो औसतन 4-5 लाख तक खर्चा आता है आप अपने बजट के हिसाब से बक्सों की गिणती कम ज्यादा कर सकते हैं, बाकी यदि इसकी ट्रेनिंग लेकर शुरू करें तो बढ़िया रहेगा. इसकी ट्रेनिंग आप अपने नज़दीकी कृषि विज्ञान केन्द्र से संपर्क कर सकते है

Posted by maggi
Uttar Pradesh
24-03-2020 11:46 AM
Shri maan g gehu mein haldi rog ki roktham ke liye aap Opera@300 ml per acre 200 ltr pani mein mila kr spray kr skte ho...
Posted by raghbendra Singh
Madhya Pradesh
24-03-2020 11:35 AM
धनिया मुख्यत: रबी की फसल है भारत वर्ष के अधिकतर क्षेत्रों यह वर्षा पर आधारित फसल है इसिलए इसे शुद्ध या मिश्रित फसल के रूम में उगाया जाता है। उ.पर् . में इसे ठंडे मौसम में उगाया जाता है जबकि दक्षिणी राज्यों में इसकी खेती दोनों मौसमों में की जाती है यहाँ साल में एक बार मई से अगस्त और दूसरी बार अतबूर से जनवरी तक हà¥.... (Read More)
धनिया मुख्यत: रबी की फसल है भारत वर्ष के अधिकतर क्षेत्रों यह वर्षा पर आधारित फसल है इसिलए इसे शुद्ध या मिश्रित फसल के रूम में उगाया जाता है। उ.पर् . में इसे ठंडे मौसम में उगाया जाता है जबकि दक्षिणी राज्यों में इसकी खेती दोनों मौसमों में की जाती है यहाँ साल में एक बार मई से अगस्त और दूसरी बार अतबूर से जनवरी तक होती है दूसरी खेती का सर्वोत्तम समय अतबूर -नवबर का द्रितीय सताह है क्योंकि इस समय ठंड अधिक नहीं पड़ती किन्तु धनिया की बुवाई का उपयुक्त समय 15 अतबूर से 15 नवंबर तक है।कतार से कतार का फासला 30 सैं.मी. और पौधे से पौधे का फासला 15 सैं.मी. रखें।बीज की गहराई 3 सैं.मी. से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।इसकी बिजाई के लिए पोरा ढंग का प्रयोग किया जाता है।

Posted by Sanjeev karole
Madhya Pradesh
24-03-2020 11:34 AM
श्रीमान जी, आपके दवार पूछे गए सभी सवालों के जवाब दे दिए गए हैं, अगर आपको कोई समस्या है तो आप हमारे helpline नंबर 9779977641 पर सम्पर्क कर सकते हैं, धन्यवाद

Posted by Sanjeev karole
Madhya Pradesh
24-03-2020 11:25 AM
Sanjeev ji isko aap Artizone-S injection 20ml, Nawalzin injection 20ml, Nurokind injection 15ml ate Teramycin injection 20ml lgwayen isse frak padd jayega.
Posted by gurpreet singh
Punjab
24-03-2020 11:19 AM
श्री मान कृपया आप अपना सवाल विस्तार से पूछें तो आपको पूरी जानकारी दी जा सके।

Posted by Anuj CHOUDHARY
Uttar Pradesh
24-03-2020 11:03 AM
Anuj ji aap fasl beejne se pehle mitti ki andruni tatv ko jaanch karvani avyshyk hai taki khaado ki sahi matra men daali jaye. bijai se pehle 8 tonn prati acre roodi ki khaad milaye.khaad 5-10 kilo prati acre ka paryog karen.bijai ke smay 66 kilo urea ka paryog prati acre ke hisab se karen. urea ki doosri matra 66 kilo prati acre doosre pani ke bad daale aur urea ki teesri kist 66 kilo prati chauthe pani ke bad daale,dhanywad
Posted by surinder singh shinda
Punjab
24-03-2020 10:59 AM
Surinder ji, kirpa kar ke daso ke tusi isdey bare ki jankari pena chaundey ho, tajo tuhnu is bare visthar nal dasea ja sake, dhanwad
Posted by surinder singh shinda
Punjab
24-03-2020 10:57 AM
Surinder ji, ap apni fasal mein NPK 191919 @ 10 gram prati litre pani ke hisaab se spray kar sakte hain, dhanywad
Posted by Amrit singh
Punjab
24-03-2020 10:44 AM
ਅੰਮ੍ਰਿਤ ਜੀ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਦੱਸੋ ਕੇ ਇਹ ਬੂਟਿਆਂ ਦੀ ਉਮਰ ਕਿ ਹੈ ਤਾ ਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸ ਬਾਰੇ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ

Posted by ਹਰਿੰਦਰਜੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
24-03-2020 10:37 AM
ਅਦਰਕ ਦੀ ਖੇਤੀ ਕਿ ਸਿਫਾਰਿਸ਼ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਵਲੋਂ ਨਹੀਂ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਪਰ ਕਈ ਕਿਸਾਨ ਵੀਰ ਆਪਣੇ ਤਜੁਰਬੇ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਇਸਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰਦੇ ਹਨ, , ਇਸਦੇ ਬਾਰੇ ਜਾਣਕਾਰੀ ਲੈਣ ਲਈ ਤੁਸੀ Nishan Singh Kachoora 9927994011 Kachoora Farm ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by vikram singh
Jammu & Kashmir
24-03-2020 10:12 AM
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खà¥.... (Read More)
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुमब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तहय उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तहय में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तहय लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है
Posted by Abhay Pratap Singh
Uttar Pradesh
24-03-2020 10:00 AM
अभय जी आप कृपया खरबूजे की फोटो भेजे ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके के आप इसका इस्तेमाल कर सकते है
Posted by Sanjeev
Haryana
24-03-2020 09:55 AM
ਹਾਜੀ ਸਤਿ ਸ਼੍ਰੀ ਅਕਾਲ ਜੀ ਤੁਹਾਡੇ ਵੱਲੋਂ ਪੁੱਛੇ ਸਾਰੇ ਸਵਾਲਾਂ ਦਾ ਜਵਾਬ ਦਾ ਦਿੱਤਾ ਜਾ ਚੁੱਕਿਆ ਹੈ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਸਵਾਲਾਂ ਦੇ ਜਵਾਬ ਦੇਖਣ ਲਈ ਐਪ ਵਿੱਚ ਮੇਰੇ ਸਵਾਲ ਤੇ ਕਲਿੱਕ ਕਰਕੇ ਜਾਂ ਫਿਰ ਮੇਰੀ ਪ੍ਰੋਫਾਈਲ ਦੇ ਹੇਠਾ ਆਪਣੇ ਸਵਾਲ ਜਵਾਬ ਦੇਖ ਸਕਦੇ ਹੋ ਵੀ ਜੇਕਰ ਤੁਹਾਨੂੰ ਜਵਾਬ ਸਬੰਧੀ ਕਿਸੇ ਤਰਾਂ ਦੀ ਸਮੱਸਿਆ ਆ ਰਹੀ ਹੈ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਸਾਡੇ ਹੈਲਪਲਾਈਨ ਨੰਬਰ: 97799-77641 ਤੇ ਕਾਲ ਕਰ ਸਕਦੇ .... (Read More)
ਹਾਜੀ ਸਤਿ ਸ਼੍ਰੀ ਅਕਾਲ ਜੀ ਤੁਹਾਡੇ ਵੱਲੋਂ ਪੁੱਛੇ ਸਾਰੇ ਸਵਾਲਾਂ ਦਾ ਜਵਾਬ ਦਾ ਦਿੱਤਾ ਜਾ ਚੁੱਕਿਆ ਹੈ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਸਵਾਲਾਂ ਦੇ ਜਵਾਬ ਦੇਖਣ ਲਈ ਐਪ ਵਿੱਚ ਮੇਰੇ ਸਵਾਲ ਤੇ ਕਲਿੱਕ ਕਰਕੇ ਜਾਂ ਫਿਰ ਮੇਰੀ ਪ੍ਰੋਫਾਈਲ ਦੇ ਹੇਠਾ ਆਪਣੇ ਸਵਾਲ ਜਵਾਬ ਦੇਖ ਸਕਦੇ ਹੋ ਵੀ ਜੇਕਰ ਤੁਹਾਨੂੰ ਜਵਾਬ ਸਬੰਧੀ ਕਿਸੇ ਤਰਾਂ ਦੀ ਸਮੱਸਿਆ ਆ ਰਹੀ ਹੈ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਸਾਡੇ ਹੈਲਪਲਾਈਨ ਨੰਬਰ: 97799-77641 ਤੇ ਕਾਲ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋਂ

Posted by Banti Sagar
Uttar Pradesh
24-03-2020 09:47 AM
Banti ji aap chicks lene ke liye Sumit Kumar 8006000291, 7906547529 Sumit Kumar Poultry Farm se sampark kr skte hai.
Posted by Rajinder Singh
Punjab
24-03-2020 09:41 AM
Rajinder ji isde uper tuc carbendazim@400 gram nu prati acre de hisab nal spray karo,dhanwad
Posted by Gurbaj Singh
Punjab
24-03-2020 09:38 AM
Gurbaj ji tuci uss nu vitum-h rojana 10ml de skde ho per metabolite powder suun ton 1 mahina pehla rojana 1 pudi deni suru kr skde ho. baki usdi khurak ate feed da pura dian rakho ji.

Posted by sami
Uttar Pradesh
24-03-2020 09:38 AM
समी जी कृपया करके बताएं कि आप इसे खाद के तौर पर क्या क्या डालते हैं ताकि आपको इसके बारे ने पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद

Posted by sami
Uttar Pradesh
24-03-2020 09:30 AM
यह फंगस का हमला है इसे कंट्रोल करने के लिए आप carbendazim @ 4 gram और mancozeb @ 4 gram प्रति लीटर पानी के हिसाब से प्रयोग करें।
Posted by Harsh Singh Chouhan
Chattisgarh
24-03-2020 09:27 AM
Harsh ji aap dhan ki kisme jaise Danteshwari,Purva,Samleshwari,Asha,Karma,poornima ki bijai kar sakte hai.dhanywad

Posted by shpinder
Punjab
24-03-2020 09:14 AM
Shpinder ji tuci uss nu Teramycin injection 20ml, CRB(Ascorbic acid) injection 20ml, Berenil injection 20ml lgwao ehh tuci 3 din lgwao, iss nal frak paa jawega..
Posted by davinder cheema
Haryana
24-03-2020 09:12 AM
श्री मान गेहूं में तेले की रोकथाम के लिए आप Actara@40gm प्रती एकड़ सप्रे कर सकते हो।

Posted by Lallan Singh
Uttar Pradesh
24-03-2020 09:02 AM
श्रीमान जी, गुलाब की खेती के लिए जैविक तत्वों से भरपूर और अच्छे जल निकास वाली रेतली दोमट मिट्टी अनुकूल होती है बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 6 से 7.5 होना चाहिए यह जल जमाव को सहनयोग्य नहीं है, इसलिए उचित जल निकास का प्रबंध होना चाहिए और अनावश्यक पानी को निकाल देना चाहिए किस्मों के लिए आप देसी गुलाब और इंग्लिश à¤.... (Read More)
श्रीमान जी, गुलाब की खेती के लिए जैविक तत्वों से भरपूर और अच्छे जल निकास वाली रेतली दोमट मिट्टी अनुकूल होती है बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 6 से 7.5 होना चाहिए यह जल जमाव को सहनयोग्य नहीं है, इसलिए उचित जल निकास का प्रबंध होना चाहिए और अनावश्यक पानी को निकाल देना चाहिए किस्मों के लिए आप देसी गुलाब और इंग्लिश गुलाब किस्मे लगा सकते हैं. मिट्टी को नरम करने के लिए जोताई और गोड़ाई करें बिजाई से 4-6 सप्ताह पहले खेती के लिए बैड तैयार करें बैड बनाने कि लिए 2 टन रूड़ी की खाद और 2 किलो सुपर फासफेट डालें बैडों को एक समान बनाने के लिए उनको समतल करें और बैडों के ऊपर बोयें होये गुलाब गड्डों में बोयें हुए गुलाबों से ज्यादा मुनाफे वाले होते है उत्तरी भारत में बिजाई का सही समय मध्य अक्तूबर है रोपाई के बाद पौधे को छांव में रखें और अगर बहुत ज्यादा धुप हो, तो पौधे पर पानी का छिड़काव करें दोपहर के अंत वाले समय बोया गया गुलाब बढ़िया उगता हैबैड पर 30 सैं.मी. व्यास और 30 सैं.मी. गहरे गड्ढे खोद कर 75 सैं.मी. के फासले पर पौधों की बिजाई करें दो पौधों के बीच में फासला गुलाब की किस्म पर निर्भर करता है बीजों को 2-3 सैं.मी. गहराई में बोयें इसकी बिजाई सीधी या पनीरी लगा कर की जाती है गुलाब की फसल का का प्रजनन काटी गई जड़ों और बडिंग द्वारा किया जाता है उत्तरी भारत में दिसंबर-फरवरी महीने का समय टी-बडिंग के लिए उचित होता है पौधे की कांट-छांट दूसरे और उसके बाद के वर्षों में की जाती है उत्तरी भारत में गुलाब की झाड़ियों की कांट-छांट अक्तूबर के दूसरे या तीसरे हफ्ते में की जाती है जो शाखाएं झाड़ियों को घना बनाएं, उन्हें निकाल दें लटके हुए गुलाबों को छंटाई की जरूरत नहीं होती छंटाई के बाद, अच्छे से गले हुए 7-8 किलो गाय के गोबर को प्रति पौधे को डालें और मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें ग्रीन हाउस में, गुलाबों को पंक्तियों में बोया जाता है और पौधों का घनत्व 7-14 पौधे प्रति वर्ग मीटर होनी चाहिए बैड की तैयारी के समय 2 टन रूड़ी की खाद और 2 किलो सुपर फास्फेट को मिट्टी में डालें तीन महीने के फासले पर 10 किलो रूड़ी की खाद और 8 किलो नाइट्रोजन, 8 किलो फासफोरस और 16 किलो पोटाश प्रति पौधे में डालें छंटाई के बाद ही सारी खादों को डालें ज्यादा पैदावार लेने के लिए छंटाई से एक महीने बाद, जी ए 3@ 200 पी पी एम(2 ग्राम प्रति लीटर) की स्प्रे करें पौधे की तनाव सहन शक्ति को बढ़ाने के लिए घुलनशील जड़ उत्तेजक(रैली गोल्ड/रिजोम) 100 ग्राम+ टिपोल 60 मि.ली. को 100 लीटर पानी में डालकर प्रति एकड़ में शाम के समय सिंचाई करें पौधों को खेत में लगाएं ताकि बढ़िया ढंग से विकास कर सके सिंचाई मिट्टी की किस्म और जलवायु के अनुसार करें आधुनिक सिंचाई तकनीक जैसे ड्रिप सिंचाई गुलाब की खेती के लिए लाभदायक होती है फव्वारा सिंचाई से परहेज करें क्योंकि इससे पत्तों को लगने वाली बीमारियां बढ़ती हैं धन्यवाद
Posted by Raju Singh
Rajasthan
24-03-2020 08:58 AM
श्री मान अनार के फूल गिरने की रोकथाम के लिए आप NPK 13:0:45@10 gm प्रती लीटर पानी में मिलाकर सप्रे कर सकते हो।

Posted by Surendra meena
Rajasthan
24-03-2020 08:47 AM
श्री मान अमरूद के पौधों के ऊपर आप NPK 13:0:45@10 gm प्रती लीटर पानी में मिलाकर सप्रे कर सकते हो।

Posted by Surendra meena
Rajasthan
24-03-2020 08:43 AM
श्री मान नींबू के पौधे के ऊपर NPK 130045@10gm प्रती लीटर पानी में मिलाकर सप्रे कर सकते हो।
Posted by VIRDAVINDER SINGH
Punjab
24-03-2020 08:35 AM
श्रीमान जी 2-3 दिन मौसम को देख लें फिर आप हल्का सा पानी लगा सकते हैं।
Posted by pritpal singh
Punjab
24-03-2020 08:24 AM
ਪ੍ਰਿਤਪਾਲ ਜੀ, ਤੁਸੀਂ ਇਸ ਵਿਚ vermicompost @ 4 ਤੋਂ 5 ਕਿਲੋ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਪਾਓ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Shyam Mohan Singh
Uttar Pradesh
24-03-2020 08:06 AM
मैदानी क्षेत्रों में, अगस्त से शुरूआती अक्तूबर का समय बिजाई के लिए उपयुक्त होता है। पहाड़ी क्षेत्रों में, मार्च-जुलाई में बिजाई पूरी कर लें।

Posted by sandeep kumar
Haryana
24-03-2020 07:51 AM
सिट्रस को हर तरह की मिट्टी में उगाया जा सकता है हल्की मिट्टी जो अच्छे निकास वाली हो, इसकी खेती के लिए अनुकूल होती है इसके लिए मिट्टी का pH 5.5-7.5 होना चाहिए इन्हें हल्की क्षारीय और तेज़ाबी मिट्टी में भी उगाया जा सकता है हल्की दोमट अच्छे जल निकास वाली मिट्टी सिट्रस की खेती के लिए बहुत अच्छी होती है प्रसिद्ध किस्मà¥.... (Read More)
सिट्रस को हर तरह की मिट्टी में उगाया जा सकता है हल्की मिट्टी जो अच्छे निकास वाली हो, इसकी खेती के लिए अनुकूल होती है इसके लिए मिट्टी का pH 5.5-7.5 होना चाहिए इन्हें हल्की क्षारीय और तेज़ाबी मिट्टी में भी उगाया जा सकता है हल्की दोमट अच्छे जल निकास वाली मिट्टी सिट्रस की खेती के लिए बहुत अच्छी होती है प्रसिद्ध किस्में: Kagzi: यह बड़े क्षेत्र में उगाई जाने वाली नींबू की सामान्य किस्म है इसके वृक्ष ज्यादा घनत्व वाले, छोटे पत्ते और फैलने वाले होते हैं फल छोटे गोल और पतली त्वचा वाले होते हैं इसका रस स्वाद में बहुत तेज़ाबी होता है खेत की तैयारी के लिए, खेत की अच्छी तरह से जोताई, क्रॉस जोताई और अच्छे से समतल करना चाहिए पहाड़ी क्षेत्रों में ढलानों की बजाय मेंड़ पर रोपण किया जाता है ऐसे क्षेत्रों में उच्च घनत्व रोपण भी संभव है रोपाई से पहले, जोताई करें और समतल करें पंजाब में बसंत के मौसम (फरवरी से मार्च) और मॉनसून के मौसम (15 अगस्त से अक्तूबर के अंत) में रोपाई की जाती है लोबिया, सब्जियों, फ्रैंच बीन्स के साथ अंतर फसली शुरूआती दो से तीन वर्ष में किया जा सकता है पौधों के बीच 4.5x4.5 फासला रखना चाहिए नए पौधों की रोपाई के लिए गड्ढों का आकार 60x60x60 सैं.मी. होना चाहिए गड्ढों में रोपाई के समय गली हुई रूड़ी की खाद 10 किलो और सिंगल सुपर फासफेट 500 ग्राम डालें नए पौधों की रोपाई के लिए गड्ढों का आकार 60x60x60 सैं.मी. होना चाहिए पौधों का प्रजनन कलम लगाकर या एयर लेयरिंग द्वारा किया जाता है 208 पौधे प्रति एकड़ का घनत्व बना कर रखना चाहिए पौधे के तने की अच्छी वृद्धि के लिए, ज़मीनी स्तर के नज़दीक से 50-60 सैं.मी. में शाखाओं को निकाल देना चाहिए पौधे का केंद्र खुला होना चाहिए विकास की शुरूआती अवस्था में आस-पास की टहनियों को निकाल देना चाहिए फसल के 1-3 वर्ष की हो जाने पर, अच्छी तरह से गला हुए गाय का गोबर 5-20 किलो और युरिया 100-300 ग्राम प्रति वृक्ष में डालें 4-6 वर्ष की फसल में, अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर 25-50 किलो और युरिया 100-300 ग्राम प्रति वृक्ष में डालें 7-9 वर्ष की फसल में यूरिया 60-800 ग्राम और गाय का गला हुआ गोबर 60-90 किलो प्रति वृक्ष में डालें जब फसल 10 वर्ष की या इससे ज्यादा की हो जाए तो गाय का गला हुआ गोबर 100 किलो या यूरिया 800-1600 ग्राम प्रति वृक्ष में डालें नदीनों को हाथ से गोडाई करके या रासायनों द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है ग्लाइफोसेट 1.6 लीटर को प्रति 150 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें ग्लाइफोसेट की स्प्रे सिर्फ नदीनों पर ही करें, मुख्य फसल पर ना करें नींबू की फसल को नियमित अंतराल पर सिंचाई की आवश्यकता होती है सर्दियों और गर्मियों में जीवन रक्षक सिंचाई जरूर करें फूल आने के समय, फल लगने के समय और पौधे के अच्छे विकास के लिए सिंचाई आवश्यक है ज्यादा सिंचाई से जड़ गलन और तना गलन की बीमारियों का खतरा होता है उच्च आवृत्ति की सिंचाई फायदेमंद होती है नमकीन पानी फसल के लिए हानिकारक होता है बसंत ऋतु में अकेली जड़ों को पानी देना पौधे को प्रभावित नहीं करता उचित आकार के होने के साथ आकर्षित रंग, शुगर की मात्रा 12:1 होने पर किन्नू के फल तुड़ाई के लिए तैयार हो जाते हैं किस्म के आधार पर फल मध्य जनवरी से मध्य फरवरी के महीने में तैयार हो जाते हैं कटाई उचित समय पर करें, ज्यादा जल्दी और ज्यादा देरी से कटाई करने पर घटिया गुणवत्ता के फल मिलते हैं उचित आकार और आकर्षक रंग लेने पर जब फल में टी एस एस 12:1 तेज़ाब की मात्रा 12:1 अनुपात हो जाने पर किन्नू तुड़ाई के लिए तैयार हो जाते है किस्म के अनुसार किन्नू आमतौर पर मध्य- जनवरी से मध्य फरवरी में पक जाते है सही समय पर तुड़ाई करना जावश्यक है, क्योंकि समय से पहले या देरी से तुड़ाई करने से फलों की गुणवत्ता पर बुरा प्रभाव पड़ता है इसे मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छी वृद्धि और अच्छी उपज के लिए, इसे गहरी दोमट और जलोढ़ मिट्टी की आवश्यकता होती है यह दोमट और हल्की क्षारीय मिट्टी को भी सहनेयोग्य है इसकी खेती हल्की मिट्टी में भी की जा सकती है अनार की खेती के लिए, मध्यम और काली मिट्टी भी उपयुक्त होती है प्रसिद्ध किस्में: kabul,kandhari,Muscet red मिट्टी के भुरभुरा होने तक ज़मीन की दो से तीन बार जोताई करें ज़मीन को समतल और एक समान करने के लिए तवियों से जोताई करें इसकी बिजाई मुख्यत दिसंबर से जनवरी महीने में की जाती है उचित फासला मिट्टी की किस्म और जलवायु पर निर्भर करता है अनार की रोपाई के लिए, यदि वर्गाकार प्रणाली अपनाई गई है तो 5 मी x 5 मी फासले का प्रयोग करें रोपाई से एक महीना पहले बिजाई के लिए 60x60x60 सैं.मी. आकार के गड्ढे खोदें गड्ढों को 15 दिनों तक धूप में खुला छोड़ें उसके बाद 20 किलो रूड़ी की खाद और 1 किलो सुपर फास्फेट को मिट्टी में मिलाकर गड्ढों को भरें गड्ढे भरने के बाद पानी डालें ताकि मिट्टी अच्छे से नीचे बैठ जाये बिजाई के लिए रोपण विधि का प्रयोग किया जाता है अनार का प्रजनन एयर लेयरिंग विधि द्वारा किया जाता है एयर लेयरिंग बारिश के मौसम के साथ साथ नवंबर-दिसंबर महीने में की जाती है एयर लेयरिंग विधि के लिए, एक से दो वर्ष के स्वस्थ, पकी हुई टहनियां जिनकी लंबाई 45-60 सैं.मी. और मोटाई पैंसिल जितनी हों, चुनें बिजाई से पहले, नए पौधों या कटिंग को IBA के घोल 1000 पी पी एम 1 ग्राम प्रति लीटर पानी में डुबोयें शुरूआती दो से तीन वर्षों में अंतरफसली संभव है अंतरफसली के तौर पर सब्जियों, फलीदार फसलें या हरी खाद वाली फसलें उगाई जा सकती हैं पहले वर्ष में गाय का गोबर 10 किलो प्रति पौधे में डालें कैल्शियम अमोनियम नाइट्रेट 500 ग्राम, एस एस पी 600 ग्राम और म्यूरेट ऑफ पोटाश 250 ग्राम प्रति पौधे में रोपाई के समय डालें गाय के गोबर, एस एस पी, म्यूरेट ऑफ पोटाश और नाइट्रोजन की आधी मात्रा दिसंबर से जनवरी महीने में डालें बाकी की नाइट्रोजन को दो भागों में बांटे पहले भाग को, फलों के पहली बार विकसित होने के समय और दूसरे भाग को, फलों के दूसरी बार विकसित होने के 4-5 सप्ताह पहले डालें रोपाई के तुरंत बाद सिंचाई करें उसके बाद, रोपाई के बाद 3 दिन से 10-15 दिनों के अंतराल पर पानी दें बारिश के मौसम में, निकास का प्रबंध करें क्योंकि यह फसल जल जमाव के हालातों में खड़ी नहीं रह सकती गर्मियों में 7-10 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें और सर्दियों में इसे बढ़ाकर 10-15 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें अनियमित सिंचाई से फूलों के गिरने में वृद्धि हो सकती है फलों के विकसित होने की अवस्था में पानी की कमी ना होने दें और पानी की कमी होने पर अत्याधिक पानी देने से फलों में दरारें पड़ जाती हैं और फल गिर जाता है इसलिए फूल निकलने से लेकर तुड़ाई की अवस्था तक नियमित और पर्याप्त सिंचाई दें तुपका सिंचाई से अनार अच्छे परिणाम देते हैं तुपका सिंचाई से ना केवल पानी की बचत होती है बल्कि पानी की कम मात्रा में अच्छी उपज भी मिलती है नदीनों की रोकथाम के लिए मलचिंग की जा सकती है नदीनों की रोकथाम के साथ साथ मिट्टी में नमी को संरक्षित करने में मदद करता है और और वाष्पीकरण हानि को भी कम करता है कटाई और छंटाई ताजी सेहतमंद टहनियों की वृद्धि करने में मदद करती है बीमारी से और घनी शाखाओं को निकाल दें यह पौधे के आकार को उचित बनाए रखता है फूल निकलने के बाद, फल 5-6 महीनों में पक जाते हैं जब फल हरे से हल्के पीले या लाल रंग का हो जाये, या फल पकना शुरू हो जाये तो यह तुड़ाई के लिए उपयुक्त समय होता है तुड़ाई करने में देरी ना करें क्योंकि इससे फलों में दरारें आ जाती हैं जिससे पैदावार कम हो जाती है तुड़ाई के बाद, फलों को एक सप्ताह के लिए छांव में स्टोर करके रखें यह फल के छिल्के को सख्त होने में मदद करेगा ताकि एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में नुकसान कम हो फलों को भार के अनुसान छांटे

Posted by Virendra Kumar
Uttar Pradesh
24-03-2020 07:50 AM
ग्वार को हर तरह की मिट्टी में उगाया जा सकता है अधिक पैदावार लेने के लिए इसकी बिजाई रेतली, चिकनी और सही निकास वाली जमीन में करनी लाभदायक होती है उपयुक्त पैदावार के लिए मिट्टी की पी एच 7 से 8 की आवश्यकता होती है ग्वार की पैदावार के लिए समतल ज़मीन की जरूरत होती है बिजाई से पहले मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की 2-3 बाà.... (Read More)
ग्वार को हर तरह की मिट्टी में उगाया जा सकता है अधिक पैदावार लेने के लिए इसकी बिजाई रेतली, चिकनी और सही निकास वाली जमीन में करनी लाभदायक होती है उपयुक्त पैदावार के लिए मिट्टी की पी एच 7 से 8 की आवश्यकता होती है ग्वार की पैदावार के लिए समतल ज़मीन की जरूरत होती है बिजाई से पहले मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की 2-3 बार हल से जोताई करें इसके बाद तवियों से जोतने के बाद सुहागे से अच्छी तरह समतल कर लेना चाहिए और ग्वार की खेती के लिए मेंड़ और खालियां बनाएं खारी और जल जमाव वाली मिट्टी में बिजाई ना करें राजस्थान में ग्वार की बिजाई के लिए जून के पहले सप्ताह से जुलाई के पहले पखवाड़े का समय उपयुक्त होता है पौधों में 45-60 सैं.मी. x 20-30 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीजों को खालियों पर 2-3 सैं.मी. की गहराई में बोयें कुछ क्षेत्रों में बिजाई छींटा देकर की जाती है और कुछ क्षेत्रों में ड्रिल विधि का प्रयोग किया जाता है एक एकड़ खेत में बिजाई के लिए 6-8 किलो बीज प्रति एकड़ प्रयोग करें जब इसे दानों और फलियों के उद्देश्य से उगाया जाये तो बीजों की मात्रा 8 किलो उपयुक्त होती है जबकि चारे के लिए अधिक बीज मात्रा की आवश्यकता होती है बिजाई से पहले, मिट्टी से पैदा होने वाले कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए बीजों का उपचार करना जरूरी होता है बीजों को गर्म पानी में 56 डिगरी सैल्सियस पर 10 मिनट के लिए भिगो दें और फिर सामान्य तापमान पर बीजों को सुखाएं फंगस से बीजों को बचाने के लिए थीरम 3 ग्राम से प्रति किलो बीज का उपचार करें फिर बीजों को छांव में सुखाएं रासायनिक उपचार के बाद जीवाणु टीके से उपचार करें उसके लिए 10 प्रतिशत चीनी या गुड़ को उबले हुए पानी में डालकर घोल तैयार करें इस घोल के ठंडा होने के बाद जीवाणु कल्चर के 2 पैकेट मिलाएं और पतला पेस्ट बनाएं और इससे बीजों का उपचार करें उसके बाद बीजों को छांव में सुखाएं और तुरंत बिजाई के लिए प्रयोग करें आखिरी जोताई के समय, मिट्टी में अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर 4-4.8 टन प्रति एकड़ में डाले बिजाई के समय, नाइट्रोजन 8 किलो (यूरिया 18 किलो) के साथ फासफोरस 24 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 150 किलो) और पोटाश 8 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 14 किलो) प्रति एकड़ में डालें अच्छी उपज के साथ अच्छी वृद्धि के लिए, बिजाई के 30 दिन बाद सोडियम मोलीबडेट 15 ग्राम को 10 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें फसल के शुरूआती विकास के दौरान गोडाई और निराई से खेत को नदीन मुक्त रखें इन प्रक्रिया से नदीनों के नियंत्रण के साथ साथ मिट्टी को हवादार बनाने में भी मदद मिलती है नदीनों के नियंत्रण के लिए रोपाई से पहले बसालिन 800 मि.ली. प्रति एकड़ में डालें बारानी फसल होने के कारण, इसे सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन यदि जरूरत पड़े तो बारिश की मात्रा के आधार पर सिंचाई दें गर्मियों के मौसम की फसल के लिए मिट्टी में नमी के आधार पर 10-15 दिनों के अंतराल पर पानी दें चारे के रूप में प्रयोग करने के लिए, बोयी गई फसल की कटाई फूल पड़ने के समय कर देनी चाहिए हरी खाद के रूप में काश्त की फसल को फलियां पड़ने के समय ही खेत में जोत दें प्रयोग की गई किस्म के आधार पर बिजाई के 60-90 दिनों के बाद हरी फलियों की कटाई शुरू की जाती है बाकी की कटाई 10-12 दिनों के अंतराल पर की जाती है दानों के लिए कटाई फलियों के पकने पर करें पक कर तैयार हुई फसल को द्राती की सहायता से काटकर कुछ दिनों के लिए धूप में सुखाने के लिए छोड़ देना चाहिए इसके बाद दानों को गुहाई या थ्रैशर की सहायता से अलग कर लेना चाहिए ग्वार के बीजों से गोंद भी प्राप्त होती है सब से पहले बीजों का छिल्का उतारा जाता है इसके बाद बीजों को पीसकर गोंद अलग कर ली जाती है खाद्य पदार्थ और उदयोगिक उद्देश्यों के लिए बीजों में गोंद को थरमो मकैनीकल विधि से अलग किया जाता है

Posted by Amandeep Singh
Punjab
24-03-2020 07:25 AM
Amandeep ji kirpa krke uss dwai di photo bhejo ate ehh v dso iss nu ki ki smasia aa rehi hai tan jo tuhanu sahi jankari diti ja skee.

Posted by Amandeep Singh
Punjab
24-03-2020 07:14 AM
amandeep ji kirpa karke swal vistar nalpucho ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake.dhanwad
Posted by Nitesh kumar
Madhya Pradesh
24-03-2020 07:11 AM
मैंने अपने खेत मे कटहल का पेड़ लगाया है और उसमें इस वर्ष पहली बार फल आये है पर वो फल काले पड़ रहे है ?
श्री मान फल पर फंगस का हमला है इसकी रोकथाम के लिए आप M-45@5 gmप्रती लीटर पानी में मिलाकर सप्रे कर सकते हो।
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